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नवजातों की सुरक्षा पर फोकस: झारखंड में 60 से ज्यादा NBSU खुलेंगे, स्वास्थ्य विभाग का बड़ा कदम

मेदिनी नगर/पलामू. झारखंड में शिशु मृत्यु दर अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर 1000 जीवित जन्म पर करीब 25 नवजातों की मौत हो रही है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। इसी चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर के 60 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करने का फैसला किया है। इस संबंध में सभी जिलों के सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय से पहले जन्म, कम वजन और जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में परेशानी जैसे कारणों से अधिकांश नवजातों की मौत जीवन के पहले सप्ताह में ही हो जाती है। ऐसे में यदि जन्म के तुरंत बाद ही विशेष निगरानी और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो बड़ी संख्या में बच्चों की जान बचाई जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एनबीएसयू को अस्पतालों के मैटरनिटी वार्ड या लेबर रूम के पास स्थापित किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में नवजात को बिना समय गंवाए तत्काल उपचार मिल सके। इससे गंभीर स्थिति वाले बच्चों के इलाज में देरी नहीं होगी और रेफरल पर निर्भरता भी कम होगी। एमएमसीएच में रोज पहुंचते हैं 10 गंभीर नवजात मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) में प्रतिदिन औसतन 10 गंभीर नवजात उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां स्थित एसएनसीयू में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, लेकिन कई बार मरीजों के देर से पहुंचने के कारण डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद नवजातों को बचाना मुश्किल हो जाता है। यहां आने वाले अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर होकर आते हैं। आधुनिक उपकरणों से लैस होंगी इकाईयां प्रस्तावित एनबीएसयू को रेडिएंट वार्मर, सक्शन मशीन, फोटोथेरेपी यूनिट और स्पॉट लाइट जैसे आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। इसके साथ ही संक्रमण नियंत्रण के मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। बायो-मेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान की विशेष व्यवस्था भी होगी, जिससे संक्रमण का खतरा कम किया जा सके। पलामू जिले में फिलहाल हुसैनाबाद और छत्तरपुर अनुमंडलीय अस्पतालों में एनबीएसयू संचालित है, लेकिन जिले के 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इन केंद्रों में एनबीएसयू कब और कहां स्थापित होंगे, इसकी स्पष्ट घोषणा अभी तक नहीं हुई है। गंभीर नवजातों को समय पर इलाज मिल सकेगा राज्य सरकार ने 60 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करने की घोषणा की है, लेकिन किन केंद्रों में यह सुविधा शुरू होगी, इसका स्पष्ट विवरण अभी नहीं दिया गया है। हालांकि, इस पहल से गंभीर नवजातों को समय पर इलाज मिल सकेगा और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। – डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, पलामू

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी: बिहार के स्टेशनों पर फ्री पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू

जमुई. गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दानापुर मंडल ने यात्रियों की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंडल प्रशासन ने प्रमुख स्टेशनों पर शीतल पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है। जनसंपर्क पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि मंडल के वाणिज्य विभाग द्वारा पटना जंक्शन, राजेंद्रनगर टर्मिनल, दानापुर, पाटलिपुत्र जंक्शन और आरा सहित अन्य प्रमुख स्टेशनों पर सामान्य कोच यात्रियों के लिए पहले से मौजूद नलों के अलावा मुफ्त शीतल जल की व्यवस्था की जाएगी। जरूरत के अनुसार ठंडे शरबत और अन्य पेय पदार्थ भी नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे, जिसमें एनजीओ, रेलवे कर्मियों और स्वयं सहायता समूहों का सहयोग लिया जाएगा। स्टाल और मशीनों का नियमित निरीक्षण यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर वेंडिंग मशीन और खानपान स्टालों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा। सभी स्टाल संचालकों को अधिकृत बोतलबंद पानी का पर्याप्त भंडारण रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, अन्य ब्रांडों को भी गर्मी के मौसम की मांग के अनुसार स्टॉक बनाए रखने की सलाह दी गई है। नई व्यवस्थाएं और सुझाव मंडल प्रशासन ने प्रमुख स्टेशनों पर भुगतान के आधार पर जनता मील और पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। नए वाटर कूलर लगाने का प्रस्ताव स्वीकृति के अंतिम चरण में है। आरआरसीटीसी द्वारा रेल नीर सेवा पूरी तरह से तैयार रखी गई है। यात्रियों से गर्मी में पर्याप्त पानी, ओआरएस और छाछ का सेवन करने, धूप से बचने के लिए छाता या टोपी का उपयोग करने की अपील की गई है। डिजिटल सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा लंबी कतारों से बचने के लिए रेल आनलाइन ऐप के माध्यम से डिजिटल टिकट बुकिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दोपहर की भीषण गर्मी से राहत के लिए प्रमुख स्टेशनों पर वातानुकूलित प्रतीक्षालय उपलब्ध हैं। पटना जंक्शन, दानापुर, बक्सर, बख्तियारपुर, मोकामा, किऊल, झाझा सहित कई स्टेशनों पर रेलवे स्वास्थ्य इकाइयां सक्रिय हैं। प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट की व्यवस्था की गई है। आपात स्थिति में यात्री रेलमदद (139) या स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों से सहायता ले सकते हैं। श्रमिकों और ट्रेनिंग वाटरिंग पॉइंट माल गोदामों में कार्यरत श्रमिकों को भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। वर्तमान में पटना, पाटलिपुत्र, दानापुर और राजगीर स्टेशनों पर ट्रेन वाटरिंग प्वाइंट कार्यरत हैं, जबकि किऊल, आरा, बक्सर और बख्तियारपुर में इन्हें जल्द ही शुरू किया जाएगा।

आतंकियों के लिए बनेगी ‘काला पानी’ जैसी जेल! सम्राट चौधरी ने लोकेशन का किया खुलासा

पटना बिहार सरकार 'काला पानी' जैसी नई हाई सिक्योरिटी जेल बनाने जा रही है। इसमें आतंकियों और दुर्दांत अपराधियों को कैद रखा जाएगा। इस जेल की जगह फाइनल कर दी गई है। राज्य के डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने ऐलान किया कि इसका निर्माण कैमूर जिले में स्थित अधौरा पहाड़ पर किया जाएगा। इस जेल में बंद खूंखार अपराधी बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को समृद्धि यात्रा के तहत कैमूर जिले के दौरे पर पहुंचे। इस दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। यहां आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सम्राट ने कहा कि कैमूर को जंगल और पहाड़ वाला इलाका माना जाता है। पिछले साल जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रगति यात्रा पर आए थे, तब उन्होंने उस पहाड़ पर डिग्री कॉलेज खोलने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि अब नीतीश सरकार ने तय किया है कि कैमूर के अधौरा पहाड़ पर हाई सिक्योरिटी जेल बनाई जाएगी। सबसे खूंखार आतंकवादी होंगे, उन्हें यहां बंद किया जाएगा। पहाड़ी पर इस तरह की जेल बनाने की घोषणा सम्राट ने ही पिछले दिनों बिहार विधानमंडल के बजट सत्र में की थी। हालांकि, उस समय यह नहीं बताया गया था कि यह जेल कहां बनाई जाएगी। अब इसकी जगह फाइनल कर दी गई है। कैसी होगी हाई सिक्योरिटी जेल सम्राट चौधरी ने पिछले महीने सदन में कहा था कि नई हाई सिक्योरिटी जेल में खूंखार अपराधियों को रखा जाएगा। इसे ऐसी पहाड़ी पर बनाया जाएगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं आएगा और इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं होगी। इस जेल तक आने-जाने का बस एक ही रास्ता होगा, उस पर भी कड़ा पहरा होगा। गृह मंत्री ने बताया था कि इस जेल में बाहर से किसी भी व्यक्ति को अंदर आने की अनुमति नहीं होगी। इसमें कैद अपराधी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए रहेंगे। यहां से ना तो कोई शख्स बाहर जा पाएगा और ना ही अंदर आ पाएगा। जेल के अंदर से आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले गैंगस्टर और माफिया को भी यहां रखा जाएगा। काला पानी जैसी होगी नई जेल? अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में स्थित सेलुलर जेल को काला पानी जेल कहा जाता है। अंग्रेजों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को इसमें कैद रखा जाता था और उन्हें बहुत कठोर यातनाएं दी जाती थीं। यहां कैद लोग बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग हो जाते थे। उन्हें काल कोठरियों में बंद रखा जाता था। कोल्हू से तेल निकालने जैसे कठिन काम कराए जाते थे। इसी वजह से इसे काला पानी की सजा कहा जाता था।  

रिश्वतखोरी पर कड़ा वार, सरायकेला में 5 लाख लेते सरकारी कर्मचारी समेत दलाल पकड़े गए

रांची झारखंड के सरायकेला जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरायकेला स्थित एलआरडीसी कार्यालय से सरकारी कर्मी प्रीतम आचार्य और ब्रोकर को पांच लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जमीन मुआवजा से जुड़े एक मामले के निपटारे और पक्ष में रिपोर्ट देने के एवज में दोनों ने वादी से 40 लाख रिश्वत की मांग की थी। वादी सोमवार को पहली किस्त लेकर एलआरडीसी कार्यालय के पास पहुंचा था। जैसे ही उसने प्रीतम आचार्य और ब्रोकर को पैसे दिए। वहां पहले से मौजूद एसीबी की टीम ने दोनों को दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों से पूछताछ की जा रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। एसीबी की इस कार्रवाई से सरकारी दफ्तरों में हड़कंप मच गया है।  

काम पर लौटने की डेडलाइन तय, 25 मार्च के बाद हड़तालियों पर वेतन कटौती का फैसला

पटना बिहार में हड़ताल कर रहे अंचलाधिकारी (सीओ) और अन्य राजस्व अधिकारियों के खिलाफ राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने अधिकारियों के सामूहिक अवकाश को अवैध घोषित कर दिया है। साथ ही हड़ताल करने वालों को 25 मार्च तक काम पर वापस लौटने को कहा गया है। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि निश्चित समयावधि के अंदर अगर हड़ताल खत्म नहीं होती, तो राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज की ओर से जारी विभागीय पत्र के आधार पर उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा 25 मार्च तक कार्य पर नहीं लौटने वाले पदाधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। डिप्टी सीएम सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि बिहार राजस्व सेवा के कुछ पदाधिकारियों की ओर से 9 मार्च 2026 से घोषित सामूहिक अवकाश ना केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे आम जनता के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा और उनके नेतृत्व में आयोजित होने वाले भूमि सुधार जनकल्याण संवाद जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के मद्देनज़र राजस्व पदाधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे समय में कार्य से अनुपस्थित रहना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। सिन्हा ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पदाधिकारियों को 25 मार्च 2026 की साम 5:00 बजे तक हर हाल में अपने पद पर योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि निर्धारित समयसीमा के बाद अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ सेवा टूट, वेतन कटौती और अन्य कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो पदाधिकारी निर्धारित अवधि के भीतर कार्य पर लौट आते हैं, उनके मामले में अवकाश अवधि के समायोजन पर नियमों के अनुसार सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। विजय सिन्हा ने सभी अधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि वे हड़ताल समाप्त कर जल्द अपने दायित्वों का निर्वहन करें, जिससे आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना ना करना पड़े। बता दें कि बिहार के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में सीओ और अन्य राजस्व अधिकारी बीते 9 मार्च से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इससे जिलों में निबंधन समेत जमीनों से जुड़े अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकार की ओर से लगातार उन्हें काम पर लौटने को कहा जा रहा है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा पहले भी हड़तालियों को अल्टीमेटम दे चुके हैं।  

जदयू की कमान फिर संभालेंगे नीतीश कुमार, चौथी बार निर्विरोध चुने जाने की तैयारी

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर से जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। आज शाम बाद प्रदेश कार्यालय में इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। मुमकिन है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आज समृद्धि यात्रा से लौटने के बाद प्रदेश कार्यालय में आएं ताकि कार्यकर्ता और नेता उनको चौथी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने बधाई दे सकें। इस वजह से बनेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वर्तमान में भी जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। अब एक बार फिर चौथी बार भी वह निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। 22 मार्च को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन किया गया था और आज 24 मार्च तक नामांकन वापस लिए जाने का दिन था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावे किसी अन्य ने इस पद के लिए अपना नामांकन पर्चा नहीं भरा, इस वजह से यह साफ़ हो चुका है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। अगर इनके अलावे कोई अन्य नामांकन दाखिल करता तो 27 मार्च चुनाव होता, लेकिन ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी। अब राज्यसभा सदस्य रहते हुए वह पार्टी की बागडोर अपने ही हाथ में रखेंगे। इस बात की आधिकारिक घोषणा कुछ ही देर में कर दी जाएगी। निर्वाचन अधिकारीजारी करेंगे निर्वाचन प्रमाण पत्र जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि आज. मंगलवार 24 मार्च, 2026 को सुबह 11 बजे थी। नामांकन वापस लेने का समय समाप्त होने के बाद, निर्वाचन अधिकारी के पास केवल नीतीश कुमार का नामांकन ही शेष है, इसलिए निर्वाचन अधिकारी और राज्यसभा के पूर्व सांसद अनिल प्रसाद हेगडे आज दोपहर 2:30 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्वाचित होने का निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी करेंगे। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्य सभा में संसदीय दल के नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे। संजय झा ने भी जमा कराया था अपना नामांकन बताया जाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रस्तावकों में से एक संजय झा ने भी पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में अपना नामांकन जमा कराया था। बिहार के मुख्यमंत्री नामांकन दाखिल करने के लिए दिल्ली नहीं आए थे। इस पद के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 22 मार्च थी, जबकि उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच 23 मार्च को की गई थी। राजीव रंजन सिंह के दिसंबर 2023 में पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जेडीयू की कमान संभाली। क्या कहा था संजय झा और विजय चौधरी ने? इधर, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी ने कई बार कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा जाने की इच्छा हुई। इसलिए वह जा रहे हैं। यह नीतीश कुमार के खुद का फैसला है। हालांकि इस दौरान उनका मार्गदर्शन हमें मिलता रहेगा और पार्टी भी उनकी छाया में ही काम करेगी। मुख्यमंत्री ने पार्टी को क्या कहा? दरअसल, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव दिसंबर 2025 में ही होना था। लेकिन, विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव नहीं हो पाया। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महीने में राज्यसभा जाने की घोषणा कर दी। ऐसे में कयास लगने लगे कि सीएम नीतीश कुमार अब बिहार और पार्टी की बागडोर संभालना नहीं चाहते हैं। हालांकि, सीएम नीतीश कुमार ने अपने कार्यकर्ताओं से स्पष्ट कहा था कि आपलोग चिंता नहीं करें। मैं अब भी सक्रिय हूं और दिल्ली जाने के बाद भी आप सभी का मार्गदर्शन करता रहूंगा।

बिहार में सत्ता का फॉर्मूला तय? चिराग पासवान बोले- सीएम-Dy CM नामों पर बनी मोटी सहमति

पटना लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दावा किया है कि बिहार में एनडीए की नई सरकार और नीतीश कुमार के बाद बनने वाले मुख्यमंत्री को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के 5 घटक दलों के बीच मोटा-मोटी सहमति बन चुकी है। सोमवार की सुबह दिल्ली से पटना पहुंचे चिराग ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा कि बिहार में नई सरकार को लेकर एनडीए गठबंधन के भीतर सब कुछ लगभग तय हो चुका है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर जल्द ही तस्वीर साफ हो जाएगी। याद दिला दें कि सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा के सांसद चुन लिए गए हैं और 10 अप्रैल या उसके बाद वो दिल्ली में नई पारी शुरू करेंगे। नीतीश के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के किसी नेता के मुख्यमंत्री बनने के प्रबल आसार हैं। चिराग पासवान ने सम्राट चौधरी के नाम को लेकर सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन सकारात्मक तौर पर कहा कि गृहमंत्री के तौर पर उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बड़ी जिम्मेदारी निभाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में और किस भूमिका में उनका मॉडल प्रदेश में दिखेगा, यह समय ही बताएगा। पासवान ने हालांकि यह जरूर कहा कि सरकार जिसके भी नेतृत्व में बनेगी, उसमें नीतीश का अनुभव और मार्गदर्शन जरूर रहेगा। चिराग ने कहा कि नई सरकार के गठन को लेकर गठबंधन के भीतर तमाम विषयों पर बातचीत चल रही है। गठबंधन से कौन मुख्यमंत्री बनेगा, कौन डिप्टी सीएम होगा, इसको लेकर चर्चा ही नहीं, बल्कि मोटा-मोटी सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द इसकी औपचारिक घोषणा कर दी जायेगी। मौजूदा सीएम नीतीश कुमार इस समय राज्य की यात्रा कर रहे हैं, जिनके साथ मंच पर सम्राट चौधरी की केमिस्ट्री ने राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म कर रखा है। नीतीश कई जिलों में समृद्धि यात्रा के मंच पर सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर उनसे जनता को प्रणाम करवा रहे हैं। इसे नीतीश की तरफ से सम्राट के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है, जिनकी नए सीएम के चयन में भूमिका से कोई इनकार नहीं कर रहा है। बिहार में बीजेपी के 89 विधायक और जेडीयू के 85 विधायक हैं। यह संख्या बताता है कि सीएम भले भाजपा का हो, उसका चुनाव भी भाजपा अपने तरीके से करे, लेकिन नीतीश की रायशुमारी उसमें महत्वपूर्ण होगी। नीतीश को 30 मार्च से पहले बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। राज्यसभा का चुनाव जीतने के बाद उनके पास एमएलसी का पद छोड़ने के लिए 14 दिन का समय था, जिसमें एक सप्ताह बीत चुका है। चर्चा है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के पद से अप्रैल के दूसरे हफ्ते तक इस्तीफा देंगे, जब नई सरकार का गठन होगा। भाजपा और जदयू के नेताओं ने पहले कहा था कि नई सरकार के गठन की बातचीत 26 मार्च के बाद शुरू होगी, जिस दिन यात्रा के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक नीतीश की सभा पटना में होगी।  

राबड़ी देवी को राहत की उम्मीद? लैंड फॉर जॉब मामले में Delhi High Court का CBI को नोटिस

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक नोटिस जारी किया। यह नोटिस बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा दायर एक याचिका पर जारी किया गया है। इस याचिका में उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कथित तौर पर 'रेलवे में जमीन के बदले नौकरी' भ्रष्टाचार मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा जिन दस्तावेजों पर भरोसा नहीं किया गया था, उन्हें उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया था। मामले की संक्षिप्त सुनवाई के बाद जस्टिस मनोज जैन की एकल-न्यायाधीश पीठ ने सीबीआई से जवाब मांगा और मामले को 1 अप्रैल को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अपनी याचिका में राबड़ी देवी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने उन दस्तावेजों तक पहुंच देने से इनकार कर दिया था जिन पर भरोसा नहीं किया गया था और दिल्ली हाई कोर्ट से उचित राहत मांगी है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों द्वारा सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में उन दस्तावेजों की आपूर्ति की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिन्हें अभी तक जारी नहीं किया गया था। राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी, साथ ही अन्य आरोपियों द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 91 के तहत दायर अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने यह माना कि उन दस्तावेजों की मांग अस्थिर थी और आपराधिक मुकदमे की योजना के विपरीत थी। ट्रायल कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जिन दस्तावेजों पर भरोसा नहीं किया गया है, उनकी मांग अधिकार के तौर पर नहीं की जा सकती और उन्हें केवल मुकदमे के उचित चरण पर ही मांगा जा सकता है, आमतौर पर तब, जब बचाव पक्ष के सबूत पेश किए जा रहे हों। कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि हालांकि आरोपियों को उन दस्तावेजों की सूची पाने का अधिकार है जिन पर भरोसा नहीं किया गया है, लेकिन वे अभियोजन पक्ष के सबूतों की शुरुआत में ही उन सभी दस्तावेज़ों की मांग तब तक नहीं कर सकते, जब तक कि वे उनकी आवश्यकता और प्रासंगिकता को साबित न कर दें। सभी 1,675 ऐसे दस्तावेजों की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि इस तरह के अनुरोध से मुकदमा बाधित होगा और वैधानिक योजना उलट जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह प्रार्थना शुरू में ही मुकदमे को एक उलझन भरे जाल में फंसाने के इरादे से की गई प्रतीत होती है और चेतावनी दी कि ऐसे अनुरोधों को स्वीकार करने से 'कभी न खत्म होने वाली जिरह' शुरू हो सकती है। यह मामला उन आरोपों से संबंधित है कि 2004 और 2009 के बीच रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रेलवे में नियुक्तियां की, जिसके बदले में उनके परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं को जमीन के टुकड़े हस्तांतरित किए गए। सीबीआई के अनुसार, उम्मीदवारों या उनके रिश्तेदारों ने कथित तौर पर बाजार दर से कम कीमतों पर जमीन हस्तांतरित की, जो विभिन्न रेलवे जोन में नौकरियों के बदले में दी गई थी। हालांकि, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने इन आरोपों से इनकार किया है और खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने कहा है कि वे इस मामले को इसके गुण-दोष के आधार पर लड़ेंगे। इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में सीबीआई को एक नोटिस जारी किया। यह नोटिस लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर एक याचिका पर दिया गया था, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें इस मामले में आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था। जनवरी में ट्रायल कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए थे। कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे एक आपराधिक गिरोह के हिस्से के तौर पर काम कर रहे थे और कथित तौर पर सरकारी नौकरी को अचल संपत्तियां हासिल करने का एक जरिया बना रहे थे।

बड़ा खुलासा: टीएसपीसी के 8 नक्सली दबोचे, पर्दे के पीछे से चला रहा था जोनल कमांडर

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग जिले में प्रतिबंधित तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) से जुड़े आठ नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से हथियार व गोला-बारूद जब्त किए गए हैं। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि एक सूचना के आधार पर, सुरक्षा बलों ने शनिवार को उरिमारी चौकी क्षेत्र में नक्सलियों को पकड़ा। सदर अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (SDPO) अमित आनंद ने कहा, ''हमने टीएसपीसी के आठ नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से दो इंसास राइफल, एक देसी पिस्तौल, 130 कारतूस, चार पहिया वाहन और सात मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।'' आनंद ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये नक्सली 12 फरवरी को रामगढ़ जिले के पतरातू में जबरन वसूली के प्रयास के दौरान हुई गोलीबारी की घटना में संलिप्त थे। एसडीपीओ के अनुसार, पूछताछ में नक्सलियों ने बताया कि वे टीएसपीसी के स्वयंभू जोनल कमांडर भीखन गजु और स्वयंभू सब-जोनल कमांडर दिनेश उर्फ ​​रवि राम के निर्देशों पर काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उरिमारी चौकी में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई और सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।  

कठिन राह, अटूट विश्वास: 282 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं चिलाय माता के पावन दर्शन

कोटपूतली-बहरोड़ कोटपूतली-बहरोड़ जिले के सरूंड गांव में स्थित चिलाय माता मंदिर स्थानीय श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर लगभग 650 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है, जहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 282 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मुख्य प्रवेश के बाद सात द्वारों को पार कर भक्त माता के दर्शन करते हैं।  पांडवों से जुड़ी मान्यता स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान की थी। यहां विराजमान चिलाय माता को ग्रामीण क्षेत्रों में रोगों और संकटों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।   इतिहास और मान्यताओं का उल्लेख मंदिर के महंत नंदकिशोर शर्मा के अनुसार, मुगल काल में सम्राट अकबर ने इस प्रतिमा की शक्ति की परीक्षा लेने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके। बाद में यहां एक गुंबद का निर्माण करवाया गया।   परिसर में अन्य देवस्थल और परंपराएं मंदिर परिसर में एक पीपल का पेड़ स्थित है, जिस पर श्रद्धालु कलावा बांधकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसके अलावा चौंसठ योगिनियां, भैरू बाबा और शनिदेव के मंदिर भी यहां स्थापित हैं, जिन्हें मुख्य मंदिर की रक्षा करने वाला माना जाता है। यहां माता को मदिरा का भोग लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। नवरात्र और मेलों का विशेष महत्व नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अष्टमी और नवमी के दिन विशेष मेला आयोजित होता है, जिसमें दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि सरूंड माता करीब 100 गांवों की रक्षा करती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, माता की कृपा से गांव में बीमारियों का प्रभाव नहीं पड़ता। कोरोना काल के दौरान जनहानि नहीं होने को भी इसी आस्था से जोड़ा जाता है। दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सीढ़ियों पर फाइबर शेड और रेलिंग लगाई गई है। पहाड़ी तक सामग्री पहुंचाने के लिए रोप-वे ट्रॉली की व्यवस्था भी की गई है। सरूंड माता को कई समाजों द्वारा कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। जयपुर, दिल्ली, सीकर, अलवर, नारनौल, पाटन और कोलकाता सहित विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर में मुंडन, जात, जलवा और भंडारे जैसे धार्मिक आयोजन भी आयोजित किए जाते हैं।