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नीतीश सरकार युवाओं तक नौकरी की पहुँच बनाने लॉन्च करेगी नया पोर्टल

पटना. बिहार सरकार ने अगले पांच वर्षों में राज्य के एक करोड़ युवाओं को रोजगार और नौकरी देने का लक्ष्य रखा है। इस काम को तय सीमा में पूरा करने के उद्देश्य से युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन भी किया है। आने वाले दिनों में इस नवगठित विभाग की जवाबदेही और बढ़ेगी। इस विभाग को अब ई-पोर्टल का संचालन, विभिन्न जिलों में रोजगार मेला आयोजित करना और नौकरी से जुड़ी युवाओं की समस्याओं के समाधान का निराकरण भी करना होगा। हाल ही में सरकार ने इस नए विभाग को ठीक से चलाने के लिए 147 नए पद स्वीकृत किए हैं। इन पदों के जरिए विभाग के सभी काम तेजी से पूरे किए जाएंगे। विभाग रोजगार से जुड़े नियम बनाएगा, योजनाओं को लागू करेगा और युवाओं की मदद के लिए नई सुविधाएं शुरू करेगा। मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को स्वीकृत भी कर दिया है। जानकारी के अनुसार, नवगठित विभाग का सबसे अहम कार्य एक ई-पोर्टल का प्रबंधन होगा। इस पोर्टल पर युवा अपनी पढ़ाई और योग्यता के अनुसार नौकरी की जानकारी देख सकेंगे और ऑनलाइन आवेदन भी कर सकेंगे। इस सुविधा के प्रारंभ होने से युवाओं को विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। विभाग राज्य के अलग-अलग जिलों में रोजगार मेलों आयोजित करेगा। मेलों में निजी और सरकारी कंपनियां सीधे युवाओं से मिलेंगी और मौके पर ही नौकरी के अवसर उपलब्ध कराएंगी। नया विभाग निजी कंपनियों, उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों से भी लगातार संपर्क में रहेगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा किए जा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से बिहार के युवाओं को नौकरी मिलने में आसानी होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना से अब सीधे खाते में मिलेगी राशि

सुपौल. महिला एवं बाल विकास निगम, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार द्वारा यूटीआई नेचुरल फंड के माध्यम से संचालित मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना के तहत वर्ष 2008 से 2012 के बीच यूटीआई बॉन्ड प्राप्त करने वाली कन्या लाभुकों के लिए अब परिवर्तन राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी लाभार्थी कन्याओं को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त होगी। राशि प्राप्त करने से पूर्व संबंधित यूटीआई बॉन्ड धारक लाभुकों को अपने-अपने आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क करना अनिवार्य होगा। योजना से जुड़ी जिन कन्याओं की आयु 18 वर्ष पूर्ण हो चुकी है, उन्हें आंगनबाड़ी सेविका से संपर्क कर केंद्र पर उपलब्ध सर्वेक्षण फॉर्म भरना होगा। फॉर्म के साथ लाभार्थी को आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र एवं यूटीआई बॉन्ड की मूल प्रति संलग्न करनी होगी। इसके अलावा, 18 वर्ष पूर्ण होने पर रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड के अंतिम चार अंक, पैन कार्ड (यदि उपलब्ध हो) तथा पूरा भरा हुआ केवाईसी फॉर्म भी जमा करना आवश्यक है। साथ ही लाभार्थी का बैंक बचत खाता एवं यूपीआई से संबंधित प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। औपचारिकताएं पूर्ण होने के उपरांत राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 से 2012 के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बालिकाओं का मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना के तहत यूटीआई बैंक के माध्यम से फॉर्म भरा गया था, जिसके बाद यूटीआई बॉन्ड लाभार्थियों को भेजे गए थे। इन बांड का वितरण आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से किया गया था। अब वर्ष 2026 में इन बॉन्डों की परिपक्वता पर राशि मिलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आईसीडीएस के तहत जिले भर में इस योजना को लेकर अभियान तेज कर दिया गया है, ताकि कोई भी पात्र लाभुक वंचित न रह जाए। योजना का लाभ 18 वर्ष पूर्ण कर चुकी अविवाहित कन्याओं के साथ-साथ विवाहित लाभार्थियों को भी दिया जा रहा है। जो कन्याएं विवाह के बाद दूसरे स्थान पर चली गई हैं, उनके लिए भी आंगनबाड़ी केंद्र पर विशेष सर्वेक्षण फॉर्म भरे जा रहे हैं।विवाहित लाभार्थियों के लिए फॉर्म में विवाह की तिथि, वर्तमान निवास, वैवाहिक स्थिति एवं जीवन स्थिति (जीवित/अन्य विवरण) से संबंधित कॉलम भरे जा रहे हैं, ताकि सत्यापन के बाद उन्हें भी योजना का लाभ मिल सके। समाज कल्याण विभाग ने लाभार्थियों से अपील की है कि वे समय रहते अपने आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज जमा करें, ताकि मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली राशि समय पर उनके खाते में स्थानांतरित की जा सके।

हजारीबाग में बम विस्फोट में लापरवाही या साजिश की जांच में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां

हजारीबाग. हजारीबाग के खिरगांव हबीबी नगर में हुए बम धमाके के बाद यह इलाका एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया तंत्र के रडार पर आ गया है। विस्फोट में तीन लोगों की मौत के बाद केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि खुफिया एजेंसियों के बीच भी गंभीर मंथन शुरू हो गया है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां सबूत जुटाने में लगी हैं। फोरेंसिक जांच, डॉग स्क्वॉड और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह विस्फोट स्थानीय लापरवाही का नतीजा था या किसी बड़ी साजिश की कड़ी है। क्योंकि आप पहले विस्फोट की बड़ी घटना हो चुकी है इसलिए लोग इसे पुरानी घटना से जोड़कर भी देख रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। खिरगांव के हबीबीनगर की घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दी है कि शहर के भीतर मौजूद संवेदनशील इलाकों को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अब देखना यह है कि जांच के बाद क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाता है या नहीं। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वर्षों से निगरानी में रहे क्षेत्र में इस तरह का विस्फोट कैसे हुआ। खिरगांव इलाका पहले भी सुरक्षा कारणों से चर्चा में रहा है। बीते वर्षों में यहां कुछ मामलों में संदिग्ध गतिविधियों और गैरकानूनी तत्वों को पनाह देने के आरोप सामने आ चुके हैं, जिनकी जांच विभिन्न एजेंसियों ने की थी। अप्रैल 2016 में इसी क्षेत्र में बम बनाते समय हुए धमाके में छह लोगों की मौत ने पूरे राज्य को हिला दिया था। उस घटना के बाद इलाके पर विशेष निगरानी बढ़ाई गई थी। इसके बावजूद ताजा धमाके ने खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई इलाका लंबे समय से संवेदनशील माना जाता रहा है, तो वहां इस तरह की घटना का दोहराव गंभीर चूक की ओर इशारा करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं का सही विश्लेषण और समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक घटना के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन बार-बार ऐसे मामलों का सामने आना यह संकेत देता है कि संवेदनशील इलाकों में सतत और निष्पक्ष निगरानी की जरूरत है। राजनीतिक या अन्य किसी भी दबाव से मुक्त होकर यदि गहन तलाशी और जांच की जाए, तो कई अहम सुराग सामने आ सकते हैं। विस्फोट के बाद खुफिया तंत्र हुआ सक्रिय धमाके के बाद स्थानीय पुलिस के साथ-साथ खुफिया इकाइयां भी सक्रिय हो गई हैं। यह जांच की जा रही है कि विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री स्थानीय स्तर पर छिपाई गई थी या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल किसी भी अंतरराष्ट्रीय या बाहरी संपर्क की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच एजेंसियां संभावित पहलुओं को खंगाल रही हैं।

सीएम हेमंत सोरेन को समन की अवहेलना केस में झारखंड HC से राहत नहीं

रांची. झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उनकी ओर से एमपी-एमएलए कोर्ट के संज्ञान को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने कहा कि इस स्टेज पर अदालत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। इसलिए उनकी याचिका खारिज की जाती है। बता दें कि ईडी ने समन की अवहेलना मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ न्यायालय में शिकायतवाद दर्ज कराया है। जिसकी सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया है। जिसको हेमंत सोरेन की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। ईडी की ओर से अधिवक्ता जोहेब हुसैन, एके दास और सौरभ कुमार ने पक्ष रखा।

नितिन नवीन भाजपा आलाकमान का ‘संदेश’ लेकर दो दिन के दौरे पर आए पटना

पटना. पटना एयरपोर्ट पर गुरुवार को जो दृश्य दिखा, वह सिर्फ एक नेता का स्वागत नहीं था, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर बदले सियासी मिजाज और संगठनात्मक अनुशासन का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था। बिहार मूल के युवा नेता और भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पटना आगमन पर जिस तरह दिग्गज नेताओं की कतार लगी, उसने साफ कर दिया कि अब संदेश ऊपर से आया है और उसका पालन जमीन पर दिख रहा है। दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे नितिन नवीन का एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, नीतीश कैबिनेट में भाजपा कोटे के कई मंत्री, वरिष्ठ पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। यह नजारा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि कुछ समय पहले तक ऐसा दृश्य देखने को नहीं मिलता था। दरअसल, नितिन नवीन के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद जब वे पहले पटना आए थे, तब कई बड़े भाजपा नेता एयरपोर्ट पर नजर नहीं आए थे। इस पर पार्टी आलाकमान ने नाराजगी जताते हुए साफ निर्देश दिया था कि नितिन नवीन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में हैं और उनके हर दौरे पर वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति अनिवार्य होगी। गुरुवार को पटना एयरपोर्ट पर दिखी एकजुटता को उसी निर्देश का सीधा असर माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने इस मौके पर कहा कि भाजपा में युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है और इसे लेकर कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने कहा कि संगठन में अनुशासन और नेतृत्व के प्रति सम्मान ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। उनके बयान को संगठनात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। नितिन नवीन का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं है। मकर संक्रांति के अवसर पर वे शुक्रवार को पटना में पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन करेंगे। खास बात यह है कि हर साल वे इस भोज का आयोजन करते रहे हैं, लेकिन कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला मकर संक्रांति कार्यक्रम है, जिसे सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि अध्यक्ष चुने जाने से महज पांच दिन पहले नितिन नवीन अचानक पटना पहुंचे थे, जिसने पहले ही राजनीतिक हलकों में अटकलों को हवा दे दी थी। अब उनके स्वागत और आगामी भोज को संगठन में उनकी मजबूत होती स्थिति और आलाकमान के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, नितिन नवीन का पटना आगमन भाजपा के भीतर नेतृत्व, अनुशासन और संदेश की राजनीति का स्पष्ट संकेत बनकर उभरा है- जहां अब स्वागत भी निर्देश के साथ होता है और संदेश भी पूरे दमखम के साथ जाता है।

झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष बने आदित्य साहू

रांची. भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में संगठनात्मक नेतृत्व की कमान आदित्य साहू को सौंपकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी अब राज्य में अपेक्षाकृत युवा, ऊर्जावान और जमीनी नेतृत्व के सहारे अपनी राजनीतिक धार को तेज करना चाहती है। निचले स्तर से संगठन में काम करते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद तक पहुंचे साहू का सफर भाजपा की कैडर आधारित राजनीति का उदाहरण है। उनका चयन केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि झारखंड में भाजपा की भविष्य की रणनीति का संकेत भी है। वहीं, इस चयन से ओबीसी समाज को भी साधने का प्रयास किया गया है। झारखंड भाजपा का नेतृत्व लंबे समय तक अपेक्षाकृत वरिष्ठ और अनुभव आधारित चेहरों के हाथ में रहा है। ऐसे नेतृत्व ने संगठन को स्थिरता तो दी, लेकिन बदले हुए सामाजिक–राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप आक्रामक विस्तार की कमी भी महसूस की गई। इसके विपरीत आदित्य साहू का राजनीतिक विकास छात्र राजनीति, मंडल और जिला स्तर के संगठनात्मक कार्यों से होकर हुआ है। यह अनुभव उन्हें कार्यकर्ताओं की वास्तविक चुनौतियों और अपेक्षाओं को समझने में मदद करता है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो साहू का नेतृत्व माडल अधिक सहभागी और संवाद आधारित प्रतीत होता है। कैडर आधारित ताकत पर फोकस आदित्य साहू बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि भाजपा की असली ताकत उसका समर्पित कैडर है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में भाजपा की सफलता का प्रमुख कारण मजबूत बूथ संरचना और प्रशिक्षित कार्यकर्ता माने जाते हैं। झारखंड में भाजपा संगठनात्मक रूप से मौजूद तो है, लेकिन कई क्षेत्रों में बूथ स्तर की सक्रियता कमजोर रही है। साहू की रणनीति अन्य राज्यों के सफल मॉडल से सीख लेते हुए झारखंड में कैडर को पुनः सक्रिय करने की है। साहू के नेतृत्व की सबसे अहम विशेषता युवा नेतृत्व को आगे लाने की मंशा है। पार्टी के भीतर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि झारखंड जैसे युवा आबादी वाले राज्य में संगठन का चेहरा अपेक्षाकृत उम्रदराज दिखता है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भाजपा ने हाल के वर्षों में कई राज्यों में युवा प्रदेश अध्यक्षों और युवा मोर्चा से निकले नेताओं को आगे बढ़ाया है। आदित्य साहू भी इसी प्रयोग को झारखंड में लागू करना चाहते हैं, ताकि पार्टी नए कलेवर के साथ अधिकाधिक प्रभावी बन सके। सामाजिक समीकरणों की समझ झारखंड की राजनीति आदिवासी, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और शहरी–ग्रामीण विभाजन के जटिल सामाजिक ताने-बाने पर आधारित है। भाजपा पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वह आदिवासी और स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त संवेदनशीलता के साथ नहीं उठाती। साहू के सामने चुनौती है कि संगठन को सामाजिक रूप से अधिक समावेशी बनाया जाए। अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड में क्षेत्रीय अस्मिता का सवाल अधिक प्रभावशाली है। यदि साहू इस पहलू को संगठनात्मक रणनीति में सही ढंग से शामिल कर पाते हैं तो भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ सकती है। तुलनात्मक विश्लेषण करें तो जिन राज्यों में भाजपा ने संगठन को सरकार से ऊपर रखा, वहां पार्टी का आधार मजबूत हुआ। झारखंड में फिलहाल भाजपा सत्ता में नहीं है, इसलिए संगठन की भूमिका और भी अहम हो जाती है। साहू के सामने अवसर है कि वह विपक्ष में रहते हुए जन आंदोलनों, मुद्दा आधारित राजनीति और निरंतर जनसंपर्क के जरिए संगठन को सक्रिय रखें। चुनौतियां और संभावनाएं आदित्य साहू की राह आसान नहीं है। गुटबाजी, संसाधनों की कमी और सत्तारूढ़ गठबंधन की मजबूत पकड़ जैसी चुनौतियां उनके सामने हैं। लेकिन युवा टीम, स्पष्ट संगठनात्मक दृष्टि और कैडर आधारित कामकाज के जरिए वे इन चुनौतियों को अवसर में बदल सकते हैं। यदि वे अन्य राज्यों के सफल संगठनात्मक प्रयोगों को झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने में सफल होते हैं तो भाजपा फिर से राज्य में एक मजबूत और भरोसेमंद राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर सकती है। आदित्य साहू के नेतृत्व की प्रमुख विशेषताएं     निचले स्तर से प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर, संगठन की जमीनी समझ     छात्र राजनीति और मंडल–जिला संगठन का व्यावहारिक अनुभव     कैडर आधारित राजनीति पर स्पष्ट फोकस     वरिष्ठता नहीं, सक्रियता और प्रदर्शन को प्राथमिकता पूर्व नेतृत्व बनाम नया नेतृत्व     पूर्व नेतृत्व में अनुभव आधारित, अपेक्षाकृत स्थिर संगठन     सीमित युवा भागीदारी     बूथ स्तर पर असमान सक्रियता आदित्य साहू का मॉडल     युवा और ऊर्जावान नेतृत्व     बूथ, मंडल और मीडिया प्रबंधन पर समान जोर     लगातार संवाद और फीडबैक आधारित संगठन संगठनात्मक रणनीति के प्रमुख बिंदु     बूथ स्तर पर कार्यकर्ता नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की योजना     मंडल और जिला इकाइयों में युवाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी     प्रशिक्षण शिविरों और संगठनात्मक कार्यशालाओं पर जोर अन्य राज्यों से सीख     गुजरात, यूपी, एमपी में मजबूत कैडर माडल की सफलता     बंगाल में विपक्ष में रहते हुए संगठन विस्तार का उदाहरण     छत्तीसगढ़ में बूथ मैनेजमेंट और माइक्रो प्लानिंग का प्रभाव झारखंड की विशेष चुनौतियां     आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भरोसे की कमी     क्षेत्रीय अस्मिता और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी का आरोप     सत्ता से बाहर होने के कारण सीमित संसाधन     संगठन के भीतर गुटीय संतुलन आदित्य साहू के सामने अवसर     युवा आबादी से सीधा जुड़ाव     संगठन को आंदोलनकारी स्वरूप देने की संभावना     सरकार बनाम संगठन की बहस में संगठन को केंद्र में लाने का मौका     भाजपा को मजबूत वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने का अवसर

चिराग के दही-चूड़ा भोज में चेतन के पास पहुंचे CM नीतीश

पटना. मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सियासी ताकत दिखाने का मंच बन गया। गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक के बाद एक कई दही-चूड़ा आयोजनों में शिरकत कर राजनीतिक संदेश दिए। कभी चिराग पासवान के ऑफिस पहुंचे, तो कभी बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद के घर जाकर उपस्थिति दर्ज कराई। चिराग पासवान के भोज में पहुंचे CM, किया अभिवादन केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी खास मानी जा रही है। यहां सीएम ने हाथ हिलाकर मौजूद लोगों और मीडिया का अभिवादन किया। इस मुलाकात को NDA के भीतर बढ़ती सहजता और तालमेल के रूप में देखा जा रहा है। भोज में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। चेतन आनंद के घर पहुंचे नीतीश, पांच मिनट की मुलाकात भी मायनेदार इसके बाद मुख्यमंत्री जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पहुंचे, जहां वे करीब पांच मिनट रुके। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और PHED मंत्री संजय कुमार भी मौजूद थे। चेतन आनंद ने कहा कि व्यस्त शेड्यूल के बावजूद सीएम ने समय निकाला और आशीर्वाद दिया। उन्होंने बताया कि NDA के साथ-साथ विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया था। मंत्रिमंडल विस्तार पर चेतन आनंद की सधी हुई प्रतिक्रिया विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर चेतन आनंद ने सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे किसी तरह की अनर्गल इच्छा नहीं रखते और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय होगा। राजनीतिक गलियारों में इसे संतुलन साधने वाला बयान माना जा रहा है। आनंद मोहन की रिहाई से मजबूत हुई नजदीकी गौरतलब है कि चेतन आनंद के पिता आनंद मोहन की रिहाई में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अहम भूमिका रही थी। इसके बाद फ्लोर टेस्ट के दौरान चेतन आनंद ने RJD को झटका देते हुए नीतीश कुमार का साथ दिया था। तभी से आनंद मोहन परिवार और मुख्यमंत्री के रिश्ते और मजबूत माने जा रहे हैं। तेजप्रताप से रत्नेश सदा तक, 14 जनवरी का सियासी कैलेंडर 14 जनवरी को तेजप्रताप यादव के आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज में लालू यादव, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, प्रभुनाथ यादव और चेतन आनंद की मौजूदगी ने अलग सियासी संकेत दिए। लालू यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे तेजप्रताप से नाराज नहीं हैं। वहीं पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के आवास पर भी दही-चूड़ा भोज हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री, राज्यपाल और NDA के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। दही-चूड़ा के बहाने दिखी गठबंधन की तस्वीर कुल मिलाकर, इस मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज सिर्फ खान-पान का आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए गठबंधन की मजबूती, रिश्तों की गर्माहट और भविष्य की राजनीति के संकेत भी साफ तौर पर नजर आए। बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा एक बार फिर सियासी भाषा बोलता दिखा।

बिहार विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति खतरे में, सभी 6 विधायक JDU में शामिल होने की संभावना

पटना  बिहार की राजनीति में एक बार फिर दलबदल के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के सभी छह विधायक पाला बदलकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक रंजन, आबिदुर रहमान, मोहम्मद कामरुल होदा और मनोज बिस्वान जदयू नेतृत्व के संपर्क में हैं। हाल ही में पटना स्थित सदाकत आश्रम में आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज से सभी छह विधायकों ने दूरी बनाए रखी। 8 जनवरी को प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम द्वारा बुलाई गई 'मनरेगा बचाओ' अभियान की बैठक में भी विधायक शामिल नहीं हुए। जदयू के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि कांग्रेस विधायक अपनी पार्टी की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हैं और उनके जदयू में शामिल होना बस कुछ ही दिनों की बात है। विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि जदयू को 85 सीटें मिली थीं। यदि कांग्रेस के 6 विधायक जदयू में आते हैं, तो जदयू की संख्या 91 हो जाएगी, जिससे वह भाजपा को पछाड़कर सदन में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। दूसरी ओर, भाजपा भी पीछे नहीं है। वह उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 'राष्ट्रीय लोक मोर्चा' (RLM) के असंतुष्ट विधायकों पर नजर गड़ाए हुए है ताकि अपना शीर्ष स्थान बरकरार रख सके। कुशवाहा की पार्टी में फूट के आसार एनडीए के घटक दल RLM के 4 में से 3 विधायक रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक को कैबिनेट मंत्री बनाने से पार्टी के विधायक नाराज हैं। हाल ही में इन विधायकों ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की, जिससे पार्टी टूटने की अटकलें तेज हो गई हैं। RCP की घर वापसी की चर्चा जदयू के पूर्व कद्दावर नेता आरसीपी सिंह नीतीश कुमार से अलग होकर प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' में शामिल हो गए थे। उनके भी दोबारा जदयू में आने की अटकलें हैं। हाल ही में एक 'कुर्मी सम्मेलन' में नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की मौजूदगी को राजनीतिक गलियारों में बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक मेलजोल: जदयू के दही-चूड़ा भोज में पहुंचे नीतीश कुमार, भाजपा दफ्तर में भी दिखी हलचल

पटना बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज को लेकर सियासत जमकर हो रही है। इस बीच, बुधवार को जहां एक ओर जदयू के भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए, वहीं भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी किसान मोर्चा द्वारा आयोजित चूड़ा-दही भोज में बिहार सरकार के कई मंत्री और कार्यकर्ता पहुंचे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मकर संक्रांति के अवसर पर पटना में पूर्व मंत्री एवं जदयू विधायक रत्नेश सादा के आवास पर जदयू द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। रत्नेश सादा ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, विधायक श्याम रजक, विधायक शीला कुमारी, विधायक संतोष कुमार निराला, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमार वर्मा सहित बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारीगण, कार्यकर्तागण एवं गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। इधर, भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी 'कार्यकर्ता मिलन सह दही-चूड़ा भोज' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, मंत्री मंगल पांडेय सहित बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता उपस्थित हैं। बता दें कि बिहार में कुछ लोग बुधवार को मकर संक्रांति मना रहे हैं जबकि कुछ लोग कल यानी गुरुवार को मनाएंगे। सियासी गलियारे में हालांकि चूड़ा-दही पार्टी पर सबकी नजरें हैं। इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर चर्चा के केंद्र में राजद के अध्यक्ष लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के चूड़ा-दही भोज पर सबकी नजरें हैं। उन्होंने बुधवार को अपने आवास पर चूड़ा-दही महाभोज का आयोजन किया है। खास बात यह है कि उन्होंने इस भोज में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी नेताओं को आमंत्रित किया है।

बड़े भाई के दही-चूड़ा भोज से नदारद रहे तेजस्वी, तेज प्रताप का आया हल्का-फुल्का बयान

पटना बिहार के पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया, जिसमें कई नेताओं ने शिरकत की। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी अपने बेटे के आवास पहुंचे और उन्हें आशीर्वाद दिया। हालांकि, तेज प्रताप के छोटे भाई एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। पिता के भोज में आने पर तेज प्रताप खुश नजर आए, तो भाई के नहीं आने पर उन्होंने चुटकी ले ली।   पटना में अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान बुधवार को तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनके दही-चूड़ा भोज में पिता (लालू) और राज्यपाल आए। दोनों ने आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बड़े-बुजुर्ग से आशीर्वाद लेते हुए कुछ नया काम करना है। इसके बाद पूरे बिहार में यात्रा निकालेंगे। खबर लिखे जाने तक तेजस्वी यादव अपने बड़े भाई के घर भोज में नहीं पहुंचे। जब तेज प्रताप से इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा- तेजस्वी को न्योता भेज दिया, छोटे भाई हैं, थोड़ा लेट से सोकर उठते हैं। घर जाकर तेजस्वी को न्योता दिया था न्योता एक दिन पहले तेज प्रताप अपनी मां राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर गए थे और मां-पिता के साथ ही अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया था। दरअसल, अनुष्का यादव से रिलेशन की बात सामने आने के बाद पिछले साल तेज प्रताप यादव को लालू ने आरजेडी और अपने परिवार से बेदखल कर दिया था। इसके बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई और अकेले बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा। हालांकि, वह खुद महुआ सीट से चुनाव हार गए और उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। अब तेज प्रताप अपनी बिहार समेत अन्य राज्यों में अपनी राजनीतिक जड़ें मजबूत करने में जुटे हैं। इसी क्रम में दही-चूड़ा भोज में उन्होंने एनडीए, महागठबंधन समेत सभी दलों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया।