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JPSC सिविल जज PT का संशोधित रिजल्ट जारी, 47 और अभ्यर्थी हुए सफल

रांची  झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा सिविल जज (जूनियर डिविजन) के 138 पदों पर नियुक्ति के लिए 10 मार्च 2024 को ली गई प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) का संशोधित रिजल्ट जारी कर दिया है. संशोधित रिजल्ट में कुल 1844 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं. जबकि पहली बार दो जुलाई 2024 को जारी रिजल्ट में 1797 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए थे. संशोधित रिजल्ट में 47 अभ्यर्थी बढ़ गए हैं.   सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संशोधित आंसर-की जारी आयोग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित न्यायादेश के आलोक में संशोधित आंसर-की जारी किया गया. संशोधित आंसर-की में कुल 100 प्रश्न में पांच प्रश्न के पूर्व के उत्तर में सुधार किया गया. दो प्रश्न ड्रॉप कर दिए गए. वहीं तीन सवाल के दिए गए सभी विकल्प गलत पाए जाने की स्थिति में सभी अभ्यर्थियों को एक-एक अंक दिए गए. आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक यह परीक्षा न्यायालय में सुलोचना कुमारी बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य, रामेश्ववर सिंह बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य तथा समरूप वादों के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगा. मुख्य परीक्षा की तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी. कुल 138 में 60 पद अनारक्षित हैं आयोग द्वारा यह नियुक्ति परीक्षा वर्ष 2023 से चल रही है. सिविल जज जूनियर डिविजन के कुल 138 पदों में अनारक्षित के 60 पद, एसटी के 28 पद, एससी के 12 पद, बीसी वन के 10 पद, बीसी टू के 15 पद और इडब्ल्यूएस के 13 पद शामिल हैं. मुख्य परीक्षा चार पेपर की होगी आयोग द्वारा पीटी के बाद अब मुख्य परीक्षा ली जाएगी. मुख्य परीक्षा कुल चार पेपर की होगी. हर पेपर 100 अंक का होगा. वाइवा-वॉयस टेस्ट 100 अंकों का होगा. आयोग द्वारा फाइनल मेरिट लिस्ट मुख्य परीक्षा और वाइवा-वॉयस टेस्ट में मिले अंकों के आधार पर तैयार होगा. रिजल्ट में झारखंड सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा.

नीट 2026 परीक्षा: 21 जून को अभ्यर्थियों को मुफ्त बस यात्रा, CM ने दिए निर्देश

पटना नीट परीक्षा देने वाले दिन बिहार के छात्र-छात्राओं का बस भाड़ा नहीं लगेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीट परीक्षार्थियों के लिए सभी सरकारी बसों में मुफ्त सफर का ऐलान किया है। 21 जून को होने वाले नीट एग्जाम में शामिल होने वाले अभ्यर्थी बिना टिकट के ही बस का सफर कर सकेंगे। सीएम ने इस संबंध में सभी जिलों को निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने शुक्रवार को नीट परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा भी की। सीएम सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को नीट परीक्षा के मद्देनजर कई अहम निर्देश दिए। सभी जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। बता दें कि 21 जून को बिहार समेत देश भर में नीट परीक्षा का आयोजन होगा। पेपर एक ही पारी में एक ही दिन होगा। पूर्व में हुए पेपर लीक और धांधली से बचने के लिए इस बार प्रशासन ने सख्त तैयारियां की हैं। बिहार में 331 सेंटर पर होगा नीट एग्जाम राज्य के 35 जिलों में नीट परीक्षा के 331 सेंटर बनाए गए हैं। परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन सक्रिय है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नीट परीक्षा के आयोजन में किसी तरह की लापरवाही ना बरतें। सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। समय से तैयारियां पूरी कर ली जाएं। परीक्षा केंद्रों पर सुविधाएं जरूर रखें सम्राट चौधरी ने कहा कि नीट एग्जाम सेंटर पर परीक्षार्थियों के लिए पेयजल, शौचालय, बिजली आपूर्ति, मेडिकल सहायता और अन्य सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाए। नीट परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को यातायात की समुचित व्यवस्था मिले। सूचना तंत्र को प्रभावी बनाया जाए। ताकि उन्हें सहूलियत हो और परेशानी का सामना ना करना पड़े। देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश के लिए नीट परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इस परीक्षा के मार्क्स के आधार पर ही मेडिकल कॉलेजों में यूजी कोर्स के लिए एडमिशन होते हैं। पिछले महीने 3 मई को नीट यूजी एग्जाम आयोजित किया गया था। मगर पेपर लीक होने और गड़बड़ी मिलने के बाद उसे रद्द कर दिया गया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने फिर से परीक्षा का आयोजन करने का ऐलान करते हुए तारीख 21 जून तय की। परीक्षा का समय दोपहर 2 से शाम 5.15 बजे के बीच रखा गया है। हालांकि, परीक्षार्थियों को समय से पहले ही एग्जाम सेंटर पहुंचना होगा। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए राज्य सरकार कुछ अतिरिक्त बसों का संचालन भी कर सकती है। एग्जाम देने वाले छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त सफर का ऐलान करने के बाद बिहार की सरकारी बसों में 21 जून को भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है। इससे अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने हुई नीट परीक्षा के पेपर लीक के तार बिहार से भी जुड़े थे। इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी सीबीआई कर रही है। सीबीआई ने पेपर लीक के मुख्य सरगना रॉकी उर्फ राकेश रंजन को दबोचा। उसके तार इस रैकेट के पुराने मास्टरमाइंड संजीव मुखिया से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा झारखंड, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से भी कई लोगों को पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि 3 मई को हुई नीट परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी। परीक्षा से पहले ही कई परीक्षार्थियों के पास पेपर पहुंच गए थे। इसका सौदा लाखों रुपये में किया गया था।

संस्कृत शिक्षा व्यवस्था में सुधार की तैयारी, संचालन के लिए जल्द आएगी SOP

पटना. प्रदेश के संस्कृत स्कूलों के संचालन को ले शिक्षा विभाग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहा है। संस्कृत विद्यालय अब एसओपी के माध्यम से ही संचालित होंगे। इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने संस्कृत शिक्षा बोर्ड के दफ्तर को इंटर मीडिएट कांउसिल भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। संस्कृत स्कूलों को ले बन रहे एसओपी के बारे में मिली जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था की जा रही कि सब कुछ डिजिटल मोड में उपलब्ध हो। अभी संस्कृत स्कूलों के बारे में एक जगह सभी जानकारी नहीं है। आसानी से मिलेगी जानकारी कुछ सूचनाएं संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पास है और कुछ सचिवालय में। एसओपी के तहत अब संस्कृत स्कूलों को कितना अनुदान मिला और विद्यालय का संचालन कहां हो रहा यह जानकारी सहजता से मिल सकेगी। अभी यह मालूम करने में परेशानी है कि संस्कृत स्कूल बीच में ही कहां-कहां बंद हो गए। जो राजकीय संस्कृत संचालित हो रहे थे उनमें बहुतों के बंद होने की सूचना विभाग को मिलती रहती है पर विभाग के पास इसका विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं रहता। जो एसओपी बनाया जा रहा उसके हिस्से में यह जानकारी भी रहेगी कि कितने संस्कृत विद्यालय सही तरीके से संचालित हो रहे। एसओपी के माध्यम से यह गाइडलाइन उपलब्ध कराया जाएगा कि कब किस विद्यालय को अनुदान मिलना है। संस्कृत स्कूलों के शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया भी इसके माध्यम से नियमित की जाएगी। जिस संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों की संख्या छात्रों के लिहाज से काफी कम है वहां आने वाले समय में नियुक्ति की प्रक्रिया भी आरंभ होगी। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जुलाई तक एसओपी के आने की उम्मीद है।  

अब बिना ट्रांजिट पास नहीं आएगी बालू-गिट्टी, नियम तोड़ने पर लगेगा जुर्माना

भागलपुर. बिहार सरकार ने दूसरे राज्यों से आने वाले बालू, गिट्टी, पत्थर, मोरंग एवं अन्य लघु खनिजों के परिवहन पर निगरानी कड़ी करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य की सीमा में प्रवेश करने वाले सभी लघु खनिज लदे वाहनों के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) अनिवार्य कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत 10 जून से ट्रांजिट पास जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 20 जून से इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। जिला खनिज पदाधिकारी बलवंत कुमार के अनुसार अब झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों से बिहार आने वाले खनिज वाहनों को आनलाइन पंजीकरण कराकर ट्रांजिट पास प्राप्त करना होगा। जिला खनन विकास पदाधिकारी ने बताया कि अवैध खनन, फर्जी चालान और अनियमित खनिज परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत वाहन मालिक, ट्रांसपोर्टर और खनिज कारोबारी आईएसटीपी बिहार पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे। पंजीकरण के बाद प्राप्त लागिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से ट्रांजिट पास के लिए आवेदन किया जाएगा। विभाग ने समय रहते सभी संबंधित लोगों से प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। विभाग द्वारा ट्रांजिट पास शुल्क भी निर्धारित कर दिया गया है। यदि खनिज की मात्रा वजन के आधार पर दर्ज है तो 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन शुल्क देना होगा। वहीं आयतन के आधार पर दर्ज खनिज के लिए 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क लिया जाएगा। भुगतान केवल आनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। नए नियम के अनुसार खनिज स्रोत स्थल से परिवहन चालान जारी होने के छह घंटे के भीतर वाहन पर लदे खनिज के अनुरूप ट्रांजिट पास लेना अनिवार्य होगा। इसकी वैधता परिवहन चालान की अवधि के बराबर होगी। परिवहन के दौरान वाहन चालक के पास संबंधित राज्य का वैध चालान और आईएसटीपी दोनों दस्तावेज होना आवश्यक होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान दोनों में से कोई भी दस्तावेज नहीं मिलने पर बिहार खनिज (समाहरण, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली-2019 तथा संशोधित नियमावली-2026 के तहत जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह जुर्माना दस लाख तक हो सकती है। खान एवं भूतत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिहार में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण कार्यों के कारण खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। बड़ी मात्रा में बालू, गिट्टी और पत्थर दूसरे राज्यों से मंगाए जा रहे हैं। अब तक इनके परिवहन की कोई प्रभावी निगरानी व्यवस्था नहीं थी, जिससे वास्तविक आंकड़े जुटाने में कठिनाई होती थी। नई आनलाइन प्रणाली लागू होने के बाद राज्य में आने वाले प्रत्येक खनिज वाहन का डिजिटल रिकार्ड तैयार होगा। इससे एक ही चालान पर बार-बार ढुलाई, अवैध परिवहन और राजस्व चोरी जैसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी। सरकार को आयातित खनिजों का सटीक डाटा उपलब्ध होगा, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि राजस्व संग्रह में भी वृद्धि होगी। बिहार सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था खनन क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

हाईकोर्ट आदेश के बाद भी पेंशन विवाद जारी, बुजुर्ग कर्मचारियों की बढ़ी मुश्किलें

 रांची  रांची नगर निगम के करीब 450 सेवानिवृत्त कर्मियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। एक ओर नगर निगम प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिल रही बढ़ी हुई पेंशन को बंद कर राज्यकर्मियों की तर्ज पर पेंशन भुगतान व्यवस्था समाप्त करने की तैयारी में है। वहीं दूसरी ओर अप्रैल और मई महीने की पेंशन भी अब तक नहीं मिली है। ऐसे में बुजुर्ग पेंशनधारियों के सामने परिवार चलाने, दवाइयां खरीदने और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने का संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, वर्ष 2017 में झारखंड हाईकोर्ट में मामला जीतने के बाद निगम के सेवानिवृत्त कर्मियों को राज्यकर्मियों की तरह अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन मिलनी शुरू हुई थी। बाद में हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर 2024 को भी स्पष्ट किया कि निगम कर्मियों को सेवानिवृत्ति की तिथि से ही पेंशन का लाभ दिया जाए, न कि किसी कृत्रिम समय या तिथि से। साथ ही कोर्ट ने निगम को शेष पेंशनरी लाभ का भुगतान तीन माह के भीतर करने का निर्देश दिया था हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप रांची नगर निगम पेंशनर्स समाज के अध्यक्ष अवध बिहारी तिवारी ने निगम प्रशासन के प्रस्तावित फैसले का विरोध करते हुए इसे हाईकोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट रूप से अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन देने और बकाया राशि भुगतान का निर्देश दिया है, लेकिन निगम प्रशासन अब नियमों की अलग व्याख्या कर पेंशन कम करने की कोशिश कर रहा है। इस संबंध में अवमानना याचिका भी दायर की गई है। अवध तिवारी ने बताया कि अभी हमें छठे वेतन मान के अनुसार पेंशन मिलता है, अगर निगम बिहार के तर्ज में हमें पुराना पेंशन देना शुरू करता है तो हमें प्रत्येक माह वर्तमान में मिलने वाले पेंशन से पांच से सात हजार रुपये कम मिलेंगे। 32 अधिकारियों का वेतन, पेंशनरों पर बोझ निगम में हाल के वर्षों में झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग से करीब 32 अधिकारियों की नियुक्ति हुई है, जिनके वेतन भुगतान का अतिरिक्त बोझ निगम पर पड़ा है। आर्थिक दबाव के बीच निगम प्रशासन पेंशन मद में कटौती की तैयारी कर रहा है। हालांकि पेंशनधारियों का कहना है कि वित्तीय संकट का बोझ बुजुर्ग कर्मचारियों पर डालना अन्यायपूर्ण है। दवा और घर खर्च चलाना मुश्किल पेंशनधारियों का कहना है कि अप्रैल और मई महीने की पेंशन नहीं मिलने से हालात बेहद खराब हो गए हैं। अधिकांश पेंशनर 70 से 85 वर्ष की आयु के हैं और नियमित रूप से दवाइयों पर निर्भर हैं। कई परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार पेंशन ही है। ऐसे में दो माह से भुगतान नहीं होने के कारण दवा खरीदना, बिजली-पानी का बिल चुकाना और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

प्यार और विदेश के झांसे में फंसाने की साजिश, 36 घंटे में पुलिस ने किया बड़ा रेस्क्यू

पूर्वी चंपारण पूर्वी चंपारण पुलिस ने प्रेमजाल और मानव तस्करी से जुड़े एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए महज 36 घंटे के भीतर चार नाबालिग लड़कियों को सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में एक मौलवी को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर लड़कियों को प्यार, सुनहरे भविष्य और विदेश घुमाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाने का आरोप है। चार नाबालिग लड़कियों के लापता होने से मचा हड़कंप सिकरहना अनुमंडल के शिकरगंज थाना क्षेत्र से चार नाबालिग लड़कियों के अचानक लापता होने के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच टीम का गठन किया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। मदरसे की छात्रा के जरिए संपर्क में आया आरोपी पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी असफाक मदरसे में पढ़ने वाली एक छात्रा के संपर्क में आया था। उसने पहले छात्रा का विश्वास जीता और फिर मोबाइल फोन के जरिए लगातार बातचीत कर उसे अपने प्रभाव में ले लिया। इसके बाद उसने छात्रा की सहेलियों को भी अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया। जांच में सामने आया है कि आरोपी लड़कियों को बेहतर जिंदगी, शादी और विदेश यात्रा के सपने दिखाकर बहला-फुसला रहा था। छात्रा के बयान से मानव तस्करी की आशंका हुई मजबूत मामले में बड़ा खुलासा तब हुआ जब बरामद की गई एक छात्रा ने पुलिस को बताया कि उसने आरोपी को फोन पर किसी व्यक्ति से यह कहते हुए सुना था कि लड़कियों को कहीं ले जाकर बेच दिया जाएगा। इस जानकारी के बाद पुलिस को मानव तस्करी की आशंका और अधिक प्रबल लगी तथा जांच का दायरा बढ़ा दिया गया। शिकायत के बाद मदरसे से हटाया गया था आरोपी जानकारी के अनुसार आरोपी की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद परिजनों ने मदरसा प्रबंधन से शिकायत की थी। शिकायत के बाद उसे मदरसे से हटा दिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद आरोपी मोबाइल फोन के जरिए लड़कियों के संपर्क में बना रहा और उन्हें अपने साथ ले जाने में सफल हो गया। एसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर सिकरहना एसडीपीओ अभिषेक कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी अनुसंधान, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और लगातार छापेमारी के आधार पर पुलिस ने ढाका थाना क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर चारों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। मोबाइल फोन जब्त, गिरोह से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है। अब जांच की जा रही है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित मानव तस्करी गिरोह तो सक्रिय नहीं था। पुलिस मोबाइल फोन के डेटा, कॉल डिटेल और आरोपी के संपर्कों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि चारों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है और आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। समय रहते पुलिस की कार्रवाई ने चार मासूम लड़कियों को संभावित मानव तस्करी के चंगुल में फंसने से बचा लिया। पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।  

अवैध खनिज ढुलाई पर रोक की तैयारी, बिहार में ट्रांजिट पास सिस्टम लागू

छपरा  बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य में अन्य राज्यों से लघु खनिज लेकर प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। विभाग के अनुसार 10 जून से बाहरी राज्यों से बालू, पत्थर तथा अन्य लघु खनिज लेकर बिहार आने वाले सभी वाहनों के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) लेना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य खनिज परिवहन को पारदर्शी बनाना, अवैध ढुलाई पर रोक लगाना तथा राज्य के राजस्व में वृद्धि सुनिश्चित करना है। विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार यदि परिवहन चालान में खनिज की मात्रा वजन के रूप में दर्ज है तो ट्रांजिट पास के लिए 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन तथा मात्रा आयतन के रूप में अंकित होने पर 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से एक ही चालान का बार-बार उपयोग कर खनिज ढुलाई की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही बिहार में आयातित खनिजों का सटीक आंकड़ा भी उपलब्ध हो सकेगा। पोर्टल पर कराना होगा रजिस्ट्रेशन खनिज विकास पदाधिकारी सर्वेश कुमार संभव ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित वाहन मालिकों को आईएसटीपी पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद प्राप्त लॉगिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से वाहन मालिक पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे। अन्य राज्यों से खनिज स्रोत पर परिवहन चालान जारी होने के छह घंटे के भीतर वाहन पर लदे खनिज की मात्रा के अनुसार ऑनलाइन ट्रांजिट पास प्राप्त करना आवश्यक होगा। ट्रांजिट पास का भुगतान भी पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से ही किया जाएगा। विभाग ने यह भी बताया है कि आईएसटीपी की वैधता मूल खनिज परिवहन चालान की वैधता के अनुरूप होगी। परिवहन के दौरान वाहन चालक के पास ट्रांजिट पास के साथ-साथ संबंधित राज्य द्वारा निर्गत वैध खनिज परिवहन चालान भी होना जरूरी है। जांच के दौरान दोनों में से कोई एक दस्तावेज नहीं मिलने पर बिहार खनिज (समानुदान, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली, 2019, यथा संशोधित 2026 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अवैध खनिज परिवहन में जब्त किए गए वाहनों को निर्धारित जुर्माना जमा करने के बाद ही छोड़ा जाएगा। सारण के खनिज विकास पदाधिकारी ने सभी वाहन मालिकों और परिवहनकर्ताओं से नए नियमों का पूर्ण अनुपालन करने की अपील की है।  

बिजली से वंचित टोलों पर प्रशासन का फोकस, DC ने दिए सख्त निर्देश

लोहरदगा झारखंड के लोहरदगा जिले में अब बिजली से वंचित टोलों और गांवों तक भी बिजली सुविधा पहुंचाने की दिशा में प्रशासन ने पहल तेज कर दी है. जिले के उपायुक्त संदीप कुमार मीणा की अध्यक्षता में जिला विद्युत समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न बिजली योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना तथा संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत चल रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन टोलों और गांवों में अब तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए. उपायुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों तक पहुंच पथ उपलब्ध है, वहां जुलाई माह तक हर हाल में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि ग्रामीणों को बिजली की सुविधा मिल सके. सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लिए अपनाए जाएंगे तकनीकी विकल्प बैठक के दौरान उपायुक्त संदीप कुमार मीणा ने कहा कि जिन दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क या पहुंच पथ उपलब्ध नहीं है, वहां विशेष प्रकार के पोल और अन्य तकनीकी उपायों का इस्तेमाल किया जाए. इसके लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक अनुमति प्राप्त कर जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा कि तकनीकी चुनौतियों के कारण किसी भी गांव या टोले को बिजली सुविधा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा. नए चिन्हित गांवों का होगा भौतिक सत्यापन उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को निर्देश दिया कि हाल में चिह्नित किए गए गांवों और टोलों का भौतिक सत्यापन किया जाए. सत्यापन के बाद वहां बिजली आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. उन्होंने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके. कोई भी परिवार बिजली से वंचित नहीं रहेगा उपायुक्त संदीप कुमार मीणा ने स्पष्ट कहा कि जिले का कोई भी परिवार बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए. इसके लिए सभी संबंधित पदाधिकारी और अभियंता जिम्मेदारी के साथ कार्य करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर योजनाओं को धरातल पर उतारना सुनिश्चित करें. बैठक में विद्युत विभाग के अधिकारियों और संबंधित पदाधिकारियों ने भी विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्यों को पूरा करने का भरोसा दिलाया.

SAIL-BHEL पर संकट: कमजोर प्रदर्शन के बाद महारत्न दर्जे पर सवाल

बोकारो  भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों Steel Authority of India Limited (SAIL) और Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) का महारत्न दर्जा खतरे में पड़ सकता है। बीते तीन वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय और लोक उद्यम विभाग (डीपीई) ने दोनों कंपनियों को चेतावनी नोटिस जारी कर वित्तीय स्थिति में सुधार लाने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, नोटिस की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। इस दौरान कंपनियों के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जाएगी। एक वर्ष बाद पुनः समीक्षा की जाएगी और यदि निर्धारित वित्तीय मानकों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो दोनों कंपनियों का महारत्न दर्जा वापस लेकर उन्हें नवरत्न श्रेणी में रखा जा सकता है। 5 हजार करोड़ रुपये का चाहिए वार्षिक लाभ सरकार के नियमों के मुताबिक किसी कंपनी को महारत्न का दर्जा बनाए रखने के लिए लगातार तीन वर्षों में औसतन कम से कम 5,000 करोड़ रुपये का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित करना आवश्यक है। बताया जा रहा है कि सेल इस अनिवार्य मानक को पूरा नहीं कर सकी है, जिसके कारण उसे चेतावनी नोटिस जारी किया गया है। वहीं, भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन संचालित भेल को भी अपेक्षित वित्तीय प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण लोक उद्यम विभाग की ओर से चेतावनी दी गई है। विभाग ने कंपनी प्रबंधन को लाभप्रदता और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है। सेल को 2010 और भेल को 2013 में मिला था दर्जा गौरतलब है कि सेल को मई 2010 में तथा भेल को फरवरी 2013 में नवरत्न से पदोन्नत कर महारत्न का दर्जा प्रदान किया गया था। महारत्न का दर्जा मिलने से कंपनियों को निवेश और व्यावसायिक निर्णयों में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होती है। ऐसे में यह दर्जा बनाए रखना दोनों सार्वजनिक उपक्रमों के लिए प्रतिष्ठा और कारोबारी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

राजगीर क्रिकेट स्टेडियम की डेडलाइन तय, खेल ढांचे को मिलेगा बड़ा विस्तार

पटना बिहार में खेलों के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खेल विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए ओलंपिक स्तर की सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खेल अवसंरचना, खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों को खेल परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया गया। राजगीर क्रिकेट स्टेडियम के लिए तय हुई डेडलाइन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजगीर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 31 दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। इसके साथ ही पटना के डुमरी खेल परिसर में विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम विकसित करने की योजना को भी तेजी से आगे बढ़ाने को कहा। गांवों तक पहुंचेगी खेल सुविधाएं बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य की 8053 ग्राम पंचायतों में से 4700 पंचायतों में 5266 खेल मैदानों का निर्माण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष खेल मैदानों के निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए पंचायत स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। मुख्यमंत्री ने VB-G RAM G (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, ग्रामीण) के माध्यम से पंचायतों में खेल मैदानों के निर्माण पर भी जोर दिया। खिलाड़ियों को मिलेगा हर संभव सहयोग मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत प्रोत्साहित कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, खेल उपकरण, कोचिंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए खेल प्रशिक्षण केंद्रों को और मजबूत किया जाए तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास पर जोर बैठक में मुख्यमंत्री ने पटना स्थित मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजना को गति दी जाए। इसके अलावा स्टेडियम तक बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया, ताकि बड़े खेल आयोजनों के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन में किसी तरह की समस्या न हो। पंचायतों में खेल संस्कृति विकसित करने की तैयारी मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर पर नियमित खेल उत्सव और प्रतियोगिताएं आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत खेल क्लबों के माध्यम से पूर्व खिलाड़ियों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों को जोड़कर खेल संस्कृति को मजबूत किया जाए। साथ ही जिला और प्रखंड स्तर पर खेल भवन-सह-व्यायामशालाओं तथा आउटडोर स्टेडियमों के निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, खेल विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।