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बिहार में राजद को बड़ा झटका, ‘मुखिया दीदी’ BJP में शामिल

पटना. बिहार की राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को झटका देते हुए पार्टी की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और ‘मुखिया दीदी’ के नाम से चर्चित रितु जायसवाल ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल भी मौके पर मौजूद रहे। राजद से लंबे समय तक जुड़ी रहीं रितु जायसवाल पिछले कुछ महीनों से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रही थीं। 2025 के विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने खुलकर बगावत कर दी थी। टिकट कटने से नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन करीब 64 हजार वोट हासिल कर उन्होंने अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का संकेत दिया था। भाजपा में शामिल होने से पहले 24 मई को उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले के संकेत दे दिए थे। पोस्ट में उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बताते हुए जनहित में काम जारी रखने की बात कही थी। पंचायत राजनीति से प्रदेश स्तर तक बनाया प्रभाव सीतामढ़ी जिले के सिंहवाहिनी पंचायत से राजनीति की शुरुआत करने वाली रितु जायसवाल ने बहुत कम समय में बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 2016 में वह मुखिया चुनी गईं और पंचायत स्तर पर किए गए कार्यों की वजह से तेजी से चर्चाओं में आईं। उन्हें 2017 में एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट द्वारा ‘आदर्श युवा सरपंच सम्मान’ दिया गया। इसके बाद 2018 में उपराष्ट्रपति के हाथों ‘चैंपियंस ऑफ चेंज’ पुरस्कार भी मिला। वर्ष 2019 में उनकी पंचायत को दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण सम्मान से नवाजा गया। राजद में तेजी से बढ़ा कद राष्ट्रीय जनता दल ने 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्हें परिहार सीट से उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता और फिर महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। 2024 के लोकसभा चुनाव में राजद ने उन्हें शिवहर सीट से मैदान में उतारा। उन्होंने करीब 4.74 लाख वोट हासिल किए, लेकिन लगभग 29 हजार मतों से हार गईं। इसके बावजूद उनकी राजनीतिक सक्रियता और जनाधार चर्चा में रहा। हालांकि 2025 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद राजद ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। भाजपा के लिए क्यों अहम हैं रितु जायसवाल राजनीतिक जानकारों की मानें तो महिला वोट बैंक, पंचायत स्तर की मजबूत पकड़ और मिथिलांचल क्षेत्र में सक्रियता को देखते हुए भाजपा के लिए रितु जायसवाल का शामिल होना अहम माना जा रहा है।  अब तक का राजनीतिक सफर 2016 : सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया बनीं 2017 : आदर्श युवा सरपंच सम्मान प्राप्त 2018 : चैंपियंस ऑफ चेंज पुरस्कार मिला 2019 : पंचायत को राष्ट्रीय स्तर का सम्मान 2020 : राजद में शामिल होकर विधानसभा चुनाव लड़ा 2021 : राजद की प्रदेश प्रवक्ता और महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनीं 2024 : शिवहर लोकसभा चुनाव लड़ा 2025 : निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा और अब भाजपा में शामिल हुईं

बिहार MLC चुनाव का ऐलान, 10 सीटों पर 18 जून को वोटिंग; नीतीश सीट भी शामिल

पटना. बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम भारत निर्वाचन आयोग ने जारी कर दिया है।  इसके अलावा एक सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। राज्‍यसभा सदस्‍य बनने के बाद पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने विधान परिषद से इस्‍तीफा दे दिया था। इसके अनुसार 29 जून 2026 को 9 एमएलसी का कार्यकाल समाप्‍त हो रहा है। चुनाव की अधिसूचना 1 जून को जारी होगी।  18 जून को मतदान और मतगणना  नामांकन दाखिल करने की अंत‍िम तिथ‍ि 8 जून तय की गई है। 9 जून को नामांकन प्रपत्रों की स्‍क्रूटनी की जाएगी। 11 जून तक उम्‍मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद 18 जून को सुबह 9 से 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा। मतदान के बाद उसी दिन मतगणना की जाएगी। 20 जून तक पूरी प्रक्र‍िया समाप्‍त कर ली जाएगी। एक सीट के उपचुनाव का कार्यक्रम भी 9 सीटों के चुनाव के अनुसार ही होना तय किया गया है। इस सीट पर निर्वाचित होने वाले सदस्‍य का कार्यकाल 6 मार्च 2030 तक रहेगा।  इन नेताओं का कार्यकाल हो रहा समाप्‍त  28 जून 2026 को जिन नेताओं का कार्यकाल समाप्‍त हो रहा है, उनमें डॉ. कुमुद वर्मा, प्रो. गुलाम गौस, मो. फारूक, भीष्‍म साहनी, श्रीभगवान सिंह कुशवाहा, संजय मयूख, समीर कुमार सिंह, सम्राट चौधरी और सुनील कुमार सिंह शामिल हैं। सीएम सम्राट चौधरी और मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने विधानसभा चुनाव में जीत के बाद 16 नवंबर 2025 को विधान परिषद सदस्‍य पद से इस्‍तीफा दे दिया था। चुनाव एवं उपचुनाव कार्यक्रम की घाेषणा होने के साथ ही राज्‍य की सियासत में सरगर्मी बढ़ जाएगी। हालांकि पहले से ही रणनीत‍ि तेज हो चुकी है।

रांची स्मार्ट सिटी घोटाला या लापरवाही? फ्लैट, अस्पताल और मॉल अब तक कागजों में

 रांची  रांची की स्मार्ट सिटी परियोजना आज अपने सबसे बड़े सवालों के घेरे में है। करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद न तो आम लोगों को फ्लैट मिले, न मेडिकल कॉलेज बना, न अस्पताल और न ही माल जैसे बड़े प्रोजेक्ट जमीन पर उतर सके। हालत यह है कि 656 एकड़ में फैली स्मार्ट सिटी में 70 करोड़ रुपये की लागत से मंत्रियों के आलीशान बंगले तो बन गए, लेकिन आम आदमी के हिस्से अब तक एक भी फ्लैट नहीं आया। स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन अब तक जमीन बेचकर 550 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुका है, लेकिन तकनीकी उलझन, म्यूटेशन विवाद और विभागीय समन्वय की कमी ने पूरे प्रोजेक्ट की रफ्तार रोक दी है। 60 प्लाटों में महज 13 ही बिक सके हैं और पिछले दो वर्षों से प्लाट ऑक्शन भी बंद पड़ा है। एक साल बाद भी शुरू नहीं हुआ म्यूटेशन स्मार्ट सिटी की सबसे बड़ी बाधा जमीन का म्यूटेशन बना हुआ है। बीते साल 17 जून को मुख्य सचिव अलका तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में म्यूटेशन प्रक्रिया जल्द शुरू करने का निर्णय लिया गया था। बैठक की प्रोसिडिंग नामकुम अंचल कार्यालय को भेजी गई, लेकिन करीब एक साल होने के हैं उसके बाद भी प्रक्रिया जमीन पर शुरू नहीं हो सकी। म्यूटेशन नहीं, इसलिए नक्शा भी पास नहीं स्मार्ट सिटी कारपोरेशन ने जिन कंपनियों और निवेशकों को जमीन आवंटित की, उनकी जमीन का म्यूटेशन नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से भवन निर्माण के नक्शे भी अटक गए हैं। दो अपार्टमेंट, एक माल, मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भवन के नक्शे स्वीकृति के लिए भेजे गए थे, लेकिन टाउन प्लानिंग विभाग ने म्यूटेशन नहीं होने का हवाला देते हुए नक्शा पास करने की आगे की प्रक्रिया रोक दी है। नतीजा यह हुआ कि हजारों करोड़ के निवेश वाली परियोजनाएं कागजों में कैद होकर रह गईं। 65 साल पुरानी गलती अब बनी सबसे बड़ा संकट दरअसल, समस्या की जड़ 65 साल पुरानी है। संयुक्त बिहार के समय एचईसी के लिए जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन उस समय म्यूटेशन नहीं कराया गया। वर्ष 2016 में झारखंड सरकार ने एचईसी से यह जमीन खरीदी, तब भी म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसके बावजूद स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन ने निवेशकों को प्लाट आवंटित कर दिए। अब निवेशकों की जमीन का भी म्यूटेशन नहीं हो पा रहा है और पूरा प्रोजेक्ट कानूनी व तकनीकी पेंच में फंस गया है। निवेशकों का भरोसा भी डगमगाया तकनीकी बाधाओं और विभागीय ढिलाई से परेशान निवेशकों का भरोसा अब टूटने लगा है। चैलस रियल एस्टेट ने अपने 100 करोड़ रुपये वापस लेने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने पांच प्रतिशत राशि काटकर शेष 95 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश दिया। माना जा रहा है कि दूसरे निवेशक भी अब पीछे हट सकते हैं। आम जनता सबसे ज्यादा प्रभावित स्मार्ट सिटी योजना के तहत आम लोगों के लिए करीब 5000 फ्लैट, बेहतर अस्पताल, स्कूल, तकनीकी कॉलेज, माल और रोजगार के नए अवसर विकसित होने थे, लेकिन परियोजनाएं अटकने से सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ रहा है। करोड़ों खर्च कर तैयार किया गया इंफ्रास्ट्रक्चर भी खाली पड़ा है और स्मार्ट सिटी का सपना धीरे-धीरे अव्यवस्था की भेंट चढ़ता दिख रहा है। इन कंपनियों को मिला है प्लॉट     चैलस रियलटर्स     मालती रेसिडेंसी इंफ्रा प्रोजेक्ट     अनंता रियलिटी     मणिकरण एक्सेल     जेएस क्लस्सी     बिग रियलटर्स     इक्फाई यूनिवर्सिटी     राइट पाथ फाउंडेशन     प्रमुख प्रस्तावित परियोजनाएं     5000 आवासीय फ्लैट     मेडिकल कॉलेज व अस्पताल     टेक्निकल कॉलेज     शापिंग माल     फाइव स्टार होटल     स्कूल और कमर्शियल काम्प्लेक्स  

पटना चिड़ियाघर में बड़ा बदलाव: गैंडों की अदला-बदली से बढ़ेगी प्रजातियों की विविधता

पटना बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटना जू में नए जानवरों का आगमना होने जा रहा है। दिल्ली और रोहतक चिड़ियाघर के बाद अब पटना में सिंगापुर से एक जानवर आने वाला है। उसका बेसब्री से इंताजर हो रहा है। पटना जू में दो सिंग वाला सफेद गैंडों का एक जोड़ा देखने को मिलेगा। जानकारी के मुताबिक इसके बदले में पटना जू से एक सिंग वाला एक जोड़ा गैंडा सिंगापुर जाएगा। पटना आएगा गैंडा इसके लिए दोनों देशों के अधिकारी के अलावा पटना जू और वन पर्यावरण के अधिकारियों में वार्तालाप जारी है। पटना जू प्रबंधन के मुताबिक ये एक्सजेंज प्रोग्रामा के तहत जानवरों की अदला- बदली की जा रही है। ये दो सिंग वाला गैंडा पानी के जहाज से आएगा। उसके बाद समुद्र मार्ग से कोलकाता बंदरगाह पहुंचेगा। जहां से गैंडा को ट्रक पर लेकर टीम पटना पहुंचेगी। ऐसी योजना तैयार की जा रही है। सिंगापुर से आएगा गैंडा हवाई मार्ग की जगह समुद्री मार्ग और सड़क मार्ग को तरजीह दी जा रही है। ध्यान रहे कि पटना जू में गैंडों की संख्या एशिया में पहले स्थान प र है। वहीं दुनिया में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। पटना जू में दस गैंडें हैं। इनमें छह मादा और चार नर गैंडा शामिल है। सभी गैंडें व्यस्क हैं और सबसे छोटे की उम्र पांच वर्ष की है। पटना जू ने दी जानकारी जानकारी के मुताबिक इस मामले में पहले स्थान पर अमेरिका के कैलिफोर्निया का सेंट डिएगो जू सफारी है। इन गैंडों के पटना जू आ जाने से गैंडों की प्रजाति की विविधता बढ़ जाएगा। जानकारी के मुताबिक अब दर्शन एक सिंग वाला गैंडा देखने के साथ दो सिंग वाला गैंडा भी देख पाएंगे।  

शिक्षा से लेकर गृह विभाग तक बदलाव, कई जिलों के DDC बदले गए

 रांची  झारखंड सरकार ने प्रशासनिक महकमे में एक और बड़ा फेरबदल किया है. इस बार झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) के 66 अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला और पदस्थापन किया गया है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने 23 मई 2026 को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. इस फेरबदल में कई जिलों के उप विकास आयुक्त (DDC) बदले गए हैं और कई प्रतीक्षारत व तैनात अधिकारियों को विभिन्न विभागों में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) व अन्य महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी गई है. शिक्षा, स्वास्थ्य और लोक सेवा से जुड़े विभागों में बदलाव इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में श्रीमती स्मिता टोप्पो को संयुक्त सचिव और श्री अनवर हुसैन को निदेशक (प्रशासन) बनाया गया है. वहीं, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग में श्री योगेंद्र प्रसाद और अनुज कुमार प्रसाद को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी मिली है, जबकि शशि प्रकाश सिंह को भी इसी विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात करते हुए उन्हें सीईओ आरोग्य सोसाइटी व एड्स कंट्रोल सोसाइटी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. इसके अलावा, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की उप सचिव रहीं सरोजनी तिर्की को अब आईटीडीए (ITDA) लातेहार का परियोजना निदेशक नियुक्त किया गया है. जिलों में नए उप विकास आयुक्तों (DDC) की तैनाती राज्य सरकार ने कई जिलों में नए उप विकास आयुक्त (DDC)-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO) की नियुक्ति की है. इसके तहत जामताड़ा जिला परिषद में असीम किसपोट्टा, पलामू में मो. सादात अनवर, पाकुड़ में श्री अरविंद कुमार लाल, लोहरदगा में राज महेश्वरम्, गढ़वा में प्रेमलता मुर्मू और खूंटी जिला परिषद में प्रवीण कुमार प्रकाश को नया डीडीसी बनाया गया है. कल्याण, श्रम, और सामाजिक सुरक्षा विभाग अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में मेनका और सुनील दत्त खाखा को संयुक्त सचिव बनाया गया है, जबकि मुमताज अली अहमद को अल्पसंख्यक आयोग के सचिव की जिम्मेदारी दी गई है. श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग में हरिवंश पंडित और मोनी कुमारी तथा प्रीती किस्कू को संयुक्त सचिव के पद पर पदस्थापित किया गया है. वहीं, सुमन पाठक को महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है. गृह, राजस्व, वित्त और योजना विभाग गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में बड़े पैमाने पर अफसरों की तैनाती हुई है, जिसमें संजय पांडेय, रौशन कुमार साह, ज्ञानेंद्र और विभूति मंडल को संयुक्त सचिव बनाया गया है. राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग में प्रणव कुमार पाल संयुक्त सचिव होंगे, जबकि श्री धीरेंद्र कुमार सिंह और विद्या भूषण कुमार को क्रमशः राजस्व परिषद रांची में सचिव और संयुक्त सचिव बनाया गया है. वित्त विभाग में मधुमिता कुमारी और ज्योति कुमारी झा को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि राजेश्वर नाथ आलोक और संजीव कुमार (अतिरिक्त प्रभार- निदेशक, अर्थ एवं सांख्यिकी) को योजना एवं विकास विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है. जल संसाधन, नगर विकास और अन्य महत्वपूर्ण पदस्थापन जल संसाधन विभाग में बिनय मनीष आर. लकड़ा और अजय सिंह बड़ाईक को संयुक्त सचिव बनाया गया है. नगर विकास एवं आवास विभाग में बिजय कुमार, संतोष सिंह और रंजीत लोहरा को संयुक्त सचिव के पद पर तैनात किया गया है. इसके अलावा, दिनेश कुमार रंजन को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) में संयुक्त सचिव, विशालदीप खलखो को सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग में संयुक्त सचिव (साथ ही जैप-आईटी के ओएसडी का अतिरिक्त प्रभार) और मो. जियाउल अंसारी को खान एवं भूतत्व विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया है. कृषि, पर्यटन, खेलकूद और अन्य निगमों में कमान कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग में मनोज कुमार को संयुक्त सचिव बनाया गया है, जबकि अजय कुमार साव को कृषि विभाग में संयुक्त सचिव के साथ-साथ झारखंड राज्य कृषि विपणन परिषद के प्रबंध निदेशक (MD) का अतिरिक्त प्रभार मिला है. पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग में रामा रविदास और सत्यवीर रजक को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसी तरह, रंजीता टोप्पो को खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग में संयुक्त सचिव बनाते हुए झारखंड राज्य खाद्य निगम के एमडी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वहीं, संतोष कुमार गर्ग को राज्यपाल सचिवालय में संयुक्त सचिव, प्रेम कुमार तिवारी को माडा (MADA) धनबाद का एमडी, और शैलेंद्र कुमार रजक को वित्त विभाग के अंकेक्षण निदेशालय का निदेशक (साथ ही पेंशन एवं लेखा निदेशालय का अतिरिक्त प्रभार) नियुक्त किया गया है. जनजातीय विकास में नई नियुक्तियां विभिन्न जिलों में समेकित जनजाति विकास अभिकरण (ITDA) के परियोजना निदेशकों की भी तैनाती की गई है. इसके तहत सरायकेला-खरसावां में उषा मुंडू, दुमका में मनीषा तिर्की, और गुमला में लीली एनोला लकड़ा को परियोजना निदेशक बनाया गया है. इसके साथ ही, विजय सिंह बिरुवा को झारखंड ट्राइबल डेवलपमेंट सोसाइटी (JTDS) रांची का परियोजना निदेशक नियुक्त किया गया है. उसी तरह मीना को लोकायुक्त कार्यालय में संयुक्त सचिव और सौरव कुमार सिन्हा को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

ईंधन महंगा होने से बढ़ी आम लोगों की चिंता, रांची में पेट्रोल 102 रुपये के पार

रांची पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। तेल कंपनियों ने एक बार फिर ईंधन के दाम बढ़ा दिए हैं। रांची स्थित नंदी फ्यूल्स पेट्रोल पंप पर शनिवार सुबह छह बजे से पेट्रोल 102.63 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.66 रुपये प्रति लीटर की दर से मिलने लगा। इससे पहले 19 मई को पेट्रोल 101.75 रुपये और डीजल 96.70 रुपये प्रति लीटर था। यानी चार दिनों में पेट्रोल में 88 पैसे और डीजल में 96 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। उस समय पेट्रोल 97.86 रुपये से बढ़कर 100.86 रुपये और डीजल 92.62 रुपये से बढ़कर 95.76 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था। इसके बाद 19 मई और अब 23 मई को लगातार तीसरी बार दाम बढ़ाए गए हैं। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ईंधन महंगा हो रहा है। देश की सरकारी तेल कंपनियां धीरे-धीरे कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। शहर के पेट्रोल पंप समय से पहले हुए बंद, कीमत का मिला लाभ लगातार बढ़ रही कीमतों का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। लेकिन वहीं शहर में शुक्रवार की रात कीमत बढ़ने के कारण पेट्रोल पंप समय पर पहले बंद हो गए। पेट्रोल पंप संचालकों ने पुराने स्टाक को शनिवार को भी सेल किया। इससे पे्ट्रोल पंप संचालकों को सीधा मुनाफा हुआ है। वहीं खासकर रोजाना बाइक और कार से आने-जाने वाले लोगों, आटो चालकों और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आने वाले दिनों में जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

पटना: चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य भुगतान में दिखाई तेजी, लगभग पूरा हुआ भुगतान

पटना  गन्ना उद्योग विभाग की पहल पर चीनी मिलों ने किसानों से क्रय किए गए गन्ना मूल्य का 99.14 प्रतिशत राशि भुगतान कर दिया है। शेष बकाया राशि भुगतान करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में संचालित दस चीनी मिलों द्वारा पेराई सत्र 2025-26 में किसानों से नौ अप्रैल 26 तक कुल 572.66 लाख क्विंटल गन्ना का क्रय किया गया था। इसके एवज में गन्ना किसानों को 213783.58 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। बताया जा रहा है कि गन्ना उद्योग विभाग ने गन्ना क्रय शुरू होने के साथ ही सभी चीनी मिल संचालकों को गन्ना मूल्य का भुगतान करने का निर्देश दिया था। ताकि किसानों को समय से गन्ना का पैसा मिल सके। इसके साथ ही विभाग द्वारा लगातार गन्ना किसानों को होने वाले भुगतान की निगरानी की जा रही थी। विभाग के अनुसार किसानों के कुल देय राशि 213783.58 करोड़ रुपये के विरुद्ध अब तक 211481.43 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है, जो देय राशि का 99.14 प्रतिशत है। विभाग के अनुसार गन्ना किसानों को देय राशि का भुगतान करने की लगातार मानीटरिंग की जा रही थी। चीनी मिल संचालकों ने भी तत्परता के साथ किसानों को देय राशि का भुगतान करने में रुचि ली, सुफल से अब तक 99.14 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया गया है। शेष बकाया राशि का भुगातन करने की कार्रवाई जारी है।

हथौड़े-छेनी से तराशी गई ‘मशरूम रॉक’ बनी गया जिले की नई पहचान

गयाजी  बिहार के गया जिले में दो मजदूरों द्वारा तराशी गई मशरूम के आकार की एक शिलाशि मूर्ति इस क्षेत्र से गुजरने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। यह संरचना जेठियां-राजगीर मार्ग पर अराई गांव के पास स्थित है, जो गया जिला मुख्यालय से लगभग 60-65 किलोमीटर दूर है। चट्टान के विशिष्ट आकार के कारण स्थानीय लोग इसे मशरूम पहाड़ कहते हैं। मशरूम रॉक का जलवा इस मूर्ति का निर्माण कछारा गांव के निवासी शौकी राजवंशी और विनोद मांझी ने किया था, जो पहले स्थानीय ठेकेदारों के अधीन पहाड़ी क्षेत्र में पत्थर तराशने का काम करते थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, दोनों व्यक्तियों ने हथौड़ा, छेनी और लोहे की छड़ों जैसे पारंपरिक औजारों का उपयोग करके एक विशाल चट्टान को आकार देने में कई वर्ष बिताए। यह कार्य आधुनिक मशीनों के उपयोग के बिना किया गया था। जिस चट्टान को मूल रूप से उन्हें पत्थर तोड़ने के काम के लिए सौंपा गया था, उसे उसके आकार और मजबूती के कारण काटना मुश्किल माना जाता था। गांव को मिली पहचान स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मूर्ति ने कछारा गांव को पहचान दिलाई है, जो पहले इस क्षेत्र के बाहर काफी हद तक अज्ञात था। इस मार्ग से गुजरने वाले यात्री अक्सर इस संरचना को देखने के लिए रुकते हैं, और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल धीरे-धीरे एक छोटे पर्यटक आकर्षण के रूप में उभरा है। पत्थर तराशने की विरासत इस कहानी की तुलना दशरथ मांझी की विरासत से भी की गई है, जिन्हें लोकप्रिय रूप से "पहाड़ का आदमी" के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक हाथ के औजारों का उपयोग करके गया जिले की एक पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाया था। हालांकि मशरूम के आकार की यह मूर्ति अलग-अलग परिस्थितियों में बनाई गई थी, लेकिन स्थानीय निवासी इसे इस क्षेत्र की दृढ़ता और हस्तशिल्प का एक और उदाहरण मानते हैं।

बिहार: उद्यमी योजना से युवाओं और महिलाओं को बड़ा अवसर, गांवों में खुलेंगे नए उद्योग

चरपोखरी (आरा)  बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत भोजपुर जिले में स्वरोजगार और स्थानीय रोजगार को नई रफ्तार मिलने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जारी औपबंधिक चयन सूची में जिले के 224 लाभार्थियों का चयन विभिन्न श्रेणियों के तहत उद्योग स्थापित करने के लिए किया गया है। सरकार की ओर से वित्तीय सहायता और तकनीकी प्रशिक्षण मिलने के बाद चयनित लाभार्थी जिले के अलग-अलग प्रखंडों और कस्बों में अपने उद्योग शुरू करेंगे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि युवाओं का महानगरों की ओर पलायन भी कम होने की उम्मीद है। युवाओं और महिलाओं को सबसे ज्यादा मौका इस बार सरकार ने सामाजिक संतुलन के साथ युवाओं और महिलाओं को सबसे अधिक प्राथमिकता दी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 53 युवाओं का चयन किया गया है। जबकि मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना में 52 महिलाओं को मौका मिला है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ईबीसी उद्यमी योजना के तहत 52, अनुसूचित जाति-जनजाति श्रेणी में 50, अल्पसंख्यक उद्यमी योजना में 14 और दिव्यांग उद्यमी योजना में तीन लोगों का चयन हुआ है। डिजिटल और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर बना पहली पसंद नई पीढ़ी का झुकाव डिजिटल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की ओर अधिक देखने को मिल रहा है। चयनित परियोजनाओं में सबसे ज्यादा 35 साइबर कैफे सह आईटी बिजनेस यूनिट शामिल हैं। इसके अलावा 26 आटा-सत्तू-मसाला पिसाई इकाइयां, 16 तेल मिल, छह मिनी राइस मिल और 12 रेडीमेड गारमेंट्स प्लांट स्थापित किए जाएंगे। वहीं 16 होटल, रेस्तरां और ढाबे, 15 पेपर प्लेट यूनिट, सात आधुनिक ऑटोमोबाइल गैराज, सात फर्नीचर प्लांट, पांच मेडिकल डायग्नोस्टिक सेंटर और चार फ्लेक्स प्रिंटिंग इकाइयों को भी मंजूरी दी गई है। आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों में कूलर-पंखा असेंबलिंग के चार प्लांट, तीन एलईडी बल्ब उद्योग और तीन आधुनिक कृषि ड्रोन सेवा केंद्र भी शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा 65 अन्य लघु और कुटीर उद्योगों को भी स्वीकृति मिली है। गांवों तक पहुंचेगी ड्रोन तकनीक इस बार आधुनिक कृषि ड्रोन सेवा केंद्रों को मंजूरी मिलना सबसे खास माना जा रहा है। चयनित उद्यमियों को ड्रोन खरीदने, पायलट प्रशिक्षण और सर्विस सेंटर संचालन के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को गांव स्तर पर ही नैनो यूरिया और कीटनाशकों के छिड़काव के साथ फसल निगरानी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। 10 लाख तक की सहायता, आधी राशि अनुदान अधिकारियों के अनुसार दस्तावेज सत्यापन के बाद लाभार्थियों को पहली किस्त जारी की जाएगी। योजना के तहत अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। इसमें 50 प्रतिशत यानी अधिकतम पांच लाख रुपये अनुदान के रूप में माफ किए जाते हैं। शेष राशि आसान शर्तों पर ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। पलायन रोकने में मिलेगी मदद आरा, तरारी, जगदीशपुर, पीरो, बिहिया, शाहपुर, संदेश और चरपोखरी जैसे इलाकों में ये इकाइयां शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। इससे दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे शहरों की ओर होने वाले पलायन पर रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है। हर साल बढ़ रहा योजना का दायरा मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की शुरुआत वर्ष 2018-19 में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए की गई थी। बाद में इसे अति पिछड़ा वर्ग और फिर 2021-22 से सभी वर्गों के युवाओं और महिलाओं के लिए खोल दिया गया। इसके बाद जिले में स्वरोजगार का दायरा लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2021-22 में 174, 2022-23 में 172, 2023-24 में 194, 2024-25 में 208 और अब 2025-26 में 224 लाभार्थियों का चयन किया गया है।

संगीत शिक्षिका को राहत, झारखंड HC ने सेवा बहाली का दिया आदेश

रांची झारखंड हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक ही संस्थान से हासिल समान डिग्री धारकों के बीच केवल अंकों के बदलाव के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शिक्षा विभाग के उस नियम को मनमाना और अमान्य करार दिया, जिसके तहत 2007 से पहले 300 अंकों की संगीत प्रभाकर डिग्री लेने वालों को बहाली के अयोग्य मान लिया गया था. अदालत ने याचिकाकर्ता सुचरिता महतो को आठ सप्ताह के भीतर सभी परिणामी लाभों के साथ सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है. संगीत शिक्षिका की सेवा समाप्त करने पर कोर्ट सख्त बोकारो निवासी सुचरिता महतो ने प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से वर्ष 1985 और 1989 में संगीत प्रभाकर की डिग्री हासिल की थी. वर्ष 2011 के विज्ञापन के आधार पर उन्हें गिरिडीह में संगीत शिक्षिका के पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन 31 जुलाई 2020 को जिला शिक्षा पदाधिकारी ने उनकी सेवा यह कहते हुए समाप्त कर दी कि उनकी डिग्री को सरकार से मान्यता प्राप्त नहीं है. 300 और 500 अंकों की डिग्री को लेकर उठा विवाद शिक्षा विभाग ने 14 सितंबर 2022 को एक संकल्प जारी किया. इसमें प्रयाग संगीत समिति की 500 अंकों वाली संगीत प्रभाकर डिग्री को स्नातक के समकक्ष मान्यता दी गयी, लेकिन याचिकाकर्ता को इसलिए बाहर रखा गया क्योंकि उनके पास 2007 से पहले की 300 अंकों वाली डिग्री थी.