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सम्राट चौधरी ने AI समिट से दिया सियासी संदेश, गंगा एक्सप्रेसवे पर 19 हजार करोड़ खर्च होंगे

पटना. मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को राजधानी पटना में आयोजित एआई समिट में बिहार के विकास, तकनीक, कानून-व्यवस्था और शिक्षा को लेकर बड़ा विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि आने वाला दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है और बिहार की अर्थव्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिसिंग तथा उद्योग विकास में इसकी बड़ी भूमिका होने वाली है। ऊर्जा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में हजारों सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और एआई तकनीक की मदद से अपराधियों तक बेहद तेजी से पहुंचा जा सकता है। हरे गमछे पर सीएम का तंज  उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि सिस्टम को किसी हरे गमछे वाले व्यक्ति को खोजने का निर्देश दिया जाए तो एआई तुरंत उसे ट्रैक कर सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा किसी विशेष व्यक्ति की ओर नहीं था। मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश देते हुए कहा कि बिहार में अपराधियों की कोई जाति या धर्म नहीं होता। पुलिस को पूरी छूट दी गई है। और यदि कोई अपराधी पुलिस या प्रशासन को चुनौती देता है तो 48 घंटे के भीतर जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'रूल ऑफ लॉ' स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। AI से प्रशासन और टेंडर सिस्टम में बचत सम्राट चौधरी ने कहा कि एआई का इस्तेमाल केवल पुलिसिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभिन्न विभागों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि टेंडरों की दोबारा जांच में एआई के इस्तेमाल से सरकार के काफी पैसे बचे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि “सहयोग पोर्टल” पर ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए। जहां बिहार या देश-दुनिया में रहने वाले लोग मगध और बिहार की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सुझाव दे सकें। बिहार लौटें या बाहर रहकर करें योगदान मुख्यमंत्री ने युवाओं और प्रवासी बिहारियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि जो लोग बाहर या विदेश में बेहतर काम कर रहे हैं, वे वहीं रहकर भी अपनी जन्मभूमि का कर्ज चुका सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मजदूरी के लिए पलायन करने वालों की चिंता करेगी, लेकिन जो लोग सफलता हासिल कर चुके हैं, वे बिहार के विकास में योगदान दें। गंगा एक्सप्रेसवे, IT हब और 20 हजार मेगावाट बिजली का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सिर्फ उद्योग लगाना ही उद्देश्य नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि राज्य का राजस्व 60 हजार करोड़ रुपये है, जिसे बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपये तक ले जाने की तैयारी है। उन्होंने घोषणा की कि पटना का मरीन ड्राइव अभी 21 किलोमीटर लंबा है, लेकिन अब करीब 125 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। यह लगभग 19 हजार करोड़ रुपये की परियोजना होगी और पीपीपी मॉडल पर अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में आईटी हब, डेटा सेंटर और पावर सेक्टर में बड़े निवेश आ रहे हैं। राज्य अभी 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है और अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 20 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य तय किया गया है। मॉडल स्कूल, कोचिंग और नई यूनिवर्सिटी का ऐलान मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलावों का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी 534 ब्लॉकों में मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे। पटना में 10 मॉडल स्कूल, जबकि गया, बिहारशरीफ, पूर्णिया, दरभंगा और भागलपुर जैसे नगर निगम क्षेत्रों में पांच-पांच मॉडल स्कूल बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार प्रतिभाशाली बच्चों के लिए कोचिंग व्यवस्था भी विकसित करेगी और 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे। आने वाले समय में बिहार में फिजिक्स, मैथेमेटिक्स और आर्किटेक्चर जैसी विशेष यूनिवर्सिटी स्थापित करने की भी योजना है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के युवाओं के पास नई तकनीक और नई सोच है, इसलिए अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी प्रशासन और राजनीति को भी आधुनिक सोच सिखाए। उन्होंने कहा कि “एआई के माध्यम से बिहार को बदलने का रास्ता तैयार करना है।”

साहिबगंज-पाकुड़ बॉर्डर पर रोजमर्रा की तरह चल रही आवाजाही, प्रशासन ने बताया शांत माहौल

साहिबगंज  पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचलों के बीच झारखंड-बंगाल सीमा पर सुरक्षा और आम जनजीवन को लेकर चल रही तरह-तरह की चर्चाओं के बीच जमीनी हकीकत पूरी तरह सामान्य है. प्रभात खबर की टीम ने साहिबगंज और पाकुड़ जिले से सटे बरहरवा, राजमहल और पाकुड़ के सीमावर्ती इलाकों में ‘ग्राउंड जीरो’ पर जाकर वास्तविक हालातों की पड़ताल की, जिसमें बॉर्डर पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और रोजमर्रा की तरह पाई गई. नाव, ट्रेन और बसों से सामान्य आवाजाही ग्राउंड जीरो पड़ताल के दौरान पाया गया कि झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच आम लोगों और वाहनों का आवागमन सामान्य दिनों की तरह ही जारी है. बरहरवा रेल रूट, राजमहल गंगा घाट और पाकुड़ से जुड़े विभिन्न सड़क मार्गों पर यात्रियों को किसी भी तरह की अतिरिक्त रोक-टोक या विशेष सघन जांच अभियान जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ रहा है. सीमावर्ती हाट-बाजारों में भी व्यापारिक गतिविधियां नियमित रूप से चल रही हैं और नदी मार्ग से नावों के जरिए लोग सामान्य रूप से आ-जा रहे हैं. हालांकि स्थानीय पुलिस की सामान्य गश्त जरूर देखने को मिली, लेकिन बॉर्डर को लेकर किसी विशेष पाबंदी जैसी कोई तस्वीर नहीं है. बंगाल से दुकानदारों के पलायन की चर्चा महज अफवाह ज्ञात हो कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के हावड़ा सहित अन्य शहरी इलाकों में सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाने की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई थी. इसके बाद से यह चर्चा तेज थी कि वहां से उजाड़े गए बड़ी संख्या में फुटपाथी दुकानदार और अन्य लोग झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में प्रवेश कर रहे हैं. लेकिन प्रभात खबर की इस ग्राउंड रिपोर्टिंग में इन दावों की किसी भी स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है. साहिबगंज और पाकुड़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसी कोई असामान्य या बड़े पैमाने पर आवाजाही नहीं देखी गई है और न ही स्थानीय प्रशासन या क्षेत्रीय सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है, जिससे साफ है कि यह चर्चा महज एक अटकलें और अफवाह है. भारत-बांग्लादेश से सटे मालदा बॉर्डर पर बीएसएफ का कड़ा पहरा झारखंड-बंगाल बॉर्डर पर जहां सामान्य स्थिति है, वहीं दूसरी ओर भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सुरक्षा बेहद सख्त दिखी. सीमा सुरक्षा बल (BSF) की गतिविधियां पहले की तुलना में काफी सक्रिय हो चुकी हैं. महदीपुर, कालियाचक और वैष्णवनगर जैसे बेहद संवेदनशील और नदी-खेतों से जुड़े ओपन बॉर्डर वाले इलाकों में बीएसएफ द्वारा गश्त और चौकसी काफी बढ़ा दी गई है. खासकर रात के वक्त फ्लडलाइट और आधुनिक सर्विलांस उपकरणों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है. प्रशासन की अफवाहों से बचने की अपील मालदा के गुलाबगंज जीरो पॉइंट पर भी फिलहाल सुरक्षात्मक सतर्कता के बीच गतिविधियां सामान्य हैं, जहां भारतीय परिवार अपने वैध पहचान पत्र दिखाकर रोजाना की तरह आ-जा रहे हैं. इस पूरी स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों के जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से चलने वाली किसी भी अपुष्ट खबर और अफवाह पर ध्यान न दें. झारखंड-बंगाल अंतरराज्यीय सीमा पर पूरी तरह शांति और सामान्य माहौल है, जबकि देश की सुरक्षा के मद्देनजर भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ पूरी तरह अलर्ट मोड में काम कर रही है.

धनबाद में तंबाकू के खिलाफ बड़ा अभियान, स्कूलों में चलेंगी जागरूकता गतिविधियां

 धनबाद  31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस है। ग्लोबल एडल्ट टबैको सर्वे-टू 2016-17 के अनुसार राज्य में 38.9 प्रतिशत वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। ग्लोबल यूथ टबैको सर्वे-फोर 2019 के अनुसार झारखंड में 13-15 आयु वर्ग के 5.1 प्रतिशत विद्यार्थी वर्तमान में किसी न किसी तंबाकू उत्पाद का उपयोग करते हैं। इनमें तीन प्रतिशत पान उत्पाद तथा 2.7 प्रतिशत धूम्ररहित तंबाकू उत्पाद का उपयोग करते हैं। इसी सर्वेक्षण में 6.7 प्रतिशत विद्यार्थियों ने घर, 17.6 प्रतिशत ने बंद सार्वजनिक स्थल तथा 19.7 प्रतिशत ने खुले सार्वजनिक स्थानों में परोक्ष धूम्रपान करते पाए गए। ग्लोबल यूथ टबैको सर्वे-फोर के विद्यालय-आधारित अवलोकन में झारखंड के 76.7 प्रतिशत विद्यालयों में परिसर, प्रवेश द्वार, 100 गज की परिधि में तंबाकू उपयोग के संकेत मिले। निकोटीन बच्चों एवं किशोरों में लत, सीखने की क्षमता, ध्यान, व्यवहार तथा मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसलिए विद्यालयों के अंदर और आसपास तंबाकू नियंत्रण, जागरूकता तथा प्रवर्तन को प्राथमिकता से लागू किया जाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सभी डीईओ-डीएसई को 11 जून से 18 जून तक अपने जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी एवं आवासीय विद्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता के लिए विभिन्न गतिविधियां कराने का निर्देश दिया है। प्रखंड व जिला स्तर पर होंगे कार्यक्रम जिला एवं प्रखंड स्तर पर बैठक, विद्यालयों में तंबाकू निषेध शपथ, प्रभात फेरी रैली, निबंध, वाद-विवाद, क्विज, चित्रकला, पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, समूह चर्चा का आयोजन शामिल है। सभी जिलों में शैक्षणिक संस्थानों के 100 मीटर की परिधि में विशेष प्रवर्तन अभियान चलेगा। प्रवर्तन के दौरान दुकानों की सूची, चेतावनी, चालान, हटाए गए विक्रय केंद्र, जब्ती एवं अन्य कार्रवाई का रिकार्ड रखा जाएगा। जिला स्तर पर डीईओ-डीएसई, जिला तंबाकू, नियंत्रण समन्वय समिति, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, नगर निकाय तथा अन्य संबंधित पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठक भी होगी।

सम्राट चौधरी की घोषणा, NEET एग्जाम देने वालों के लिए फ्री बस सुविधा

पटना. NEET पेपर लीक मामले के बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने की संभावनाओं के बीच बिहार सरकार ने परीक्षार्थियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि NEET परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की सरकारी बसों में यात्रा पूरी तरह नि:शुल्क होगी।  मठ-मंदिरों की ओर से हो पेयजल की व्‍यवस्‍था इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, राज्य के मठ-मंदिरों तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से भी एक खास अपील की है। कहा है कि वे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य प्रमुख स्थानों पर परीक्षार्थियों एवं उनके अभिभावकों के लिए पेयजल, सत्तू और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था में सहयोग करें। उन्होंने सभी अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए शुभकामनाएं भी दीं। नीट मामले में सियासत जारी इधर, NEET पेपर लीक मामले को लेकर सियासत लगातार गरमाई हुई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। वहीं, एक दिन पहले बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा था कि NEET मामले की जांच जारी है। और केंद्र सरकार दोबारा परीक्षा कराने की तैयारी कर रही है। राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें बयान देने की आदत है और उनकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।

NEET 2026: छात्रों के लिए फ्री बस सेवा और जलपान की व्यवस्था करेगी बिहार सरकार

पटना नीट परीक्षार्थियों को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खास गिफ्ट दिया है। परीक्षा केंद्र तक जाने के लिए सरकारी बसों में छात्र,छात्राओं को किराया नहीं लगेगा। इसके अलावे परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए जलपान की व्यवस्था के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी दी है। उन्होंने बच्चों को उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी है। 21 जून को देश भर में नीट की परीक्षा फिर से होने वाली है। इससे पहले 3 मई 2026 को हुई परीक्षा पेपर लीक एवं अन्य गड़बड़ियों के कारण रद्द कर दिया गया था। शनिवार को सीएम ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके बताया कि NEET परीक्षा में सम्मिलित होने वाले सभी परीक्षार्थियों की सुविधा हेतु बिहार राज्य की सभी सरकारी बसों में आवागमन निःशुल्क रहेगा। साथ ही, जिला प्रशासन, राज्य के सभी मठ-मंदिरों एवं गैर-सरकारी संगठनों से आग्रह है कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा अन्य प्रमुख स्थानों पर परीक्षार्थियों एवं उनके अभिभावकों हेतु पेयजल, सत्तू आदि की व्यवस्था में सहयोग करें। परीक्षार्थियों की परेशान को कम करने के लिए बिहार सरकार की ओर से यह कदम उठाया गया है। सरकार के इस कदम से नीट के छात्र, छत्राओं को काफी राहत मिलेगी। देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली नीट परीक्षा 21 जून को होने वाली है। एनटीए द्वारा 14 जून को एडमिट कार्ड जारी कर दिया जाएगा। परीक्षा में शामिल होने के लिए फिर से रजिस्ट्रेशन या फीस देने की जरूरत नहीं है। परीक्षार्थी एनटीए नीट के आधिकारिक वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा से संबंधित विस्तृत जानकारी साइट पर मिलेगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर नीट परीक्षा की नयी तारीख की जानकारी दी। उन्होंने इस बार कदाचार मुक्त फुल प्रूफ व्यवस्था का आश्वसन दिया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की जांच सीबीआई से कराई जा रही है। सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों से अफवाहों से सतर्क रहने की सलाह दी। माना जा रहा है अगले साल से नीट परीक्षा कंप्यूटर के माध्यम से ऑन लाइन कराई जाएगी। NEET Exam 2026 के पेपर लीक के आरोप में अबतक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पेपर लीक के तार बिहार के नालंदा एवं अन्य जिलों से जुड़ गए हैं। सीबीआई बारीकि से मामले की छानबीन कर रही है। 2024 में भी नीट पेपर लीक हुआ था।

प्रेमी से शादी की जिद में मोबाइल टावर पर चढ़ी नाबालिग, जहानाबाद में हाई वोल्टेज ड्रामा

 जहानाबाद बिहार के जहानाबाद में एक बार फिर मोहब्बत का मोबाइल टावर वाला हाई वोल्टेज ड्रामा देखा गया। करपी थाना क्षेत्र के पूरान गांव में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब प्रेमी से शादी कराने की मांग को लेकर एक नाबालिग लड़की जिओ कंपनी के मोबाइल टावर पर चढ़ गई। करीब 120 फीट ऊंचे टावर पर लड़की के चढ़ने की सूचना मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई और मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। उसे नीचे उतारने में पुलिस के पसीने छूट गए। जानकारी के अनुसार शुक्रवार की दोपहर करीब 12 बजे तपती धूप की परवाह किए बगैर एक नाबालिग लड़की पूरान गांव स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ गई। राहगीरों की नजर जब लड़की पर पड़ी तो इसकी सूचना तत्काल करपी थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही थाना अध्यक्ष संजीव कुमार सिन्हा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लड़की को सुरक्षित नीचे उतारने का प्रयास शुरू किया। यह खबर जंगल की आग की तरह इलाके में फैल गई और लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। करीब तीन घंटे तक यह ड्रामा चलता रहा। पुलिस एवं स्थानीय लोगों के समझाने-बुझाने के बाद लड़की टावर से नीचे उतरने को तैयार हुई। पुलिस ने राहत की सांस लेते हुए लड़की को सुरक्षित नीचे उतारा और पूछताछ के लिए थाना ले गई। पूछताछ में लड़की ने बताया कि उसका करपी जगदेव चौक के समीप मोबाइल फोन मरम्मत का काम करने वाले दीपक नामक युवक से लगभग एक वर्ष से प्रेम प्रसंग चल रहा है। मोबाइल फोन पर दोनों के बीच संपर्क हुआ था। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और प्रेम संबंध स्थापित हो गया। लड़की युवक से शादी कराने की मांग कर रही थी। घटना के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है तथा लड़की एवं उसके परिजनों से पूछताछ की जा रही है। थाना अध्यक्ष ने बताया कि मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पुलिस उस लड़के को भी तलब करेगी जिससे अफेयर का दावा लड़की करती रही। नाबालिग होने के कारण उसकी शादी में अड़चन है। बेटी की करतूत से उसके परिजन काफी नाराज हैं। प्यार और शादी के लिए टावर पर चढ़ने की घटना पहली बार नहीं हुई है। बिहार में एक ट्रेंड चल पड़ा है कि अपनी कोई बात मनवाने के लिए टावर पर चढ़ जाएं। कई बार कुछ सनकी किस्म के लोग बिजली के टावर पोल पर भी चढ़ जाते हैं जिन्हें बचाने के लिए इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो जाती है।

बिहार में शराबबंदी पर सख्ती, जहरीली शराब मामले में बड़ी कार्रवाई

चंपारण बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में अप्रैल में जहरीली शराब से दस लोगों की मौत मामले में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने 14 मद्यनिषेध पुलिस पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। विभाग ने शुक्रवार को इसका आदेश जारी कर दिया। सीएम सम्राट चौधरी का कहना है कि राज्य में नीतीश कुमार द्वारा लागू मद्य निषेध कानून लागू रहेगा। जो भी लोग, जनता या अधिकारी शराबबंदी कानून का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सरकार करेगी। निलंबित होने वाले मद्यनिषेध पदाधिकारियों में मोतिहारी सदर के उत्पाद निरीक्षक मनीष सर्राफ, चलिष्णु दल के मद्यनिषेध निरीक्षक मो. सेराज, सिकरहना सह सदर के मद्यनिषेध निरीक्षक धर्मेन्द्र कुमार के साथ मद्यनिषेध अवर निरीक्षक उदय कुमार, मुकेश कुमार, नागेश कुमार और धर्मेंद्र झा शामिल हैं। इसके अलावा सहायक अवर निरीक्षक (मद्यनिषेध) अजय कुमार, धर्मेंद्र कुमार सिंह, रोशनी कुमारी, बसंत कुमार महतो, कबिन्द्र कुमार, रंजीत कुमार और शशि ऋषि शामिल हैं। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय ग्रुप सेंटर मद्यनिषेध भागलपुर निर्धारित किया गया है। तुरकौलिया जहरीली शराब कांड में दो एएसआई निलंबित पूर्वी चंपारण जिले के रघुनाथपुर और तुरकौलिया थाना क्षेत्र में पिछले माह जहरीली शराब से हुई 10 मौत के मामले में दो एएसआई को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच के बाद मद्यनिषेध उपायुक्त, दरभंगा की अनुशंसा पर यह कार्रवाई की गई है। जांच में घटनास्थल से जब्त अवैध स्प्रिट में मेथेनॉल की भारी मात्रा पाई गई, जो मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक होता है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए विभाग ने मोतिहारी के मद्यनिषेध थाने में पदस्थापित एएसआई रंजीत कुमार व रौशनी कुमारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मद्यनिषेध ग्रुप सेंटर, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया गया है। बीते अप्रैल में रधुनाथपुर और तुरकौलिया थाना क्षेत्र के परसौना, गदरिया व बालगंगा गांव में जहरीली शराब पीने से एक के बाद एक कुल 10 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, दर्जनों लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए थे, जिनका इलाज अलग-अलग जगहों पर कराया गया। मद्य निषेध विभाग ने इस घटना के बाद मोतिहारी के मद्यनिषेध थाने में पदस्थापित एएसआई रौशनी कुमारी व रंजीत कुमार से स्पष्टीकरण मांगा था। साथ ही मद्यनिषेध उपायुक्त, दरभंगा को मामले की जांच सौंपी थी। दरभंगा उपायुक्त ने घटनास्थल की जांच करते हुए अवैध स्प्रिट के नमूने जब्त किये थे। जांच में मद्यनिषेध थाने की लापरवाही साबित जांच में पता चला कि पिछले कई माह से मोतिहारी मद्यनिषेध थाना शराब और स्प्रिट के धंधे की जांच ही नहीं कर रहा था। इस मामले में थाने को न कोई गुप्त सूचना मिल पायी और न ही उसने कोई एहतियाती या निरोधात्मक कदम उठाये। इतना ही नहीं घटनास्थल से जब्त स्प्रिट में मेथेनॉल की अधिक मिलावट पाई गई, जो मानव जीवन के लिए खतरनाक है। इस मामले में दोनों एएसआई के स्प्ष्टीकरण को विभाग ने अमान्य करार दिया है। अंतत: मद्यनिषेध विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार ने शुक्रवार को दोनों एएसआई को निलंबित कर दिया।

प्रचंड धूप और लू से तप रहा उत्तर प्रदेश, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

लखनऊ यूपी में प्रचंड धूप, गर्म हवाओं ने शुक्रवार को भी 25 शहरों को झुलसाया। बांदा 46.4 और प्रयागराज 46.2 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहे। मौसम विभाग ने चार जिलों के लिए रेड, 18 के लिए ऑरेन्ज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और लू चलने की चेतावनी जारी की है। क्या है वजह मध्य भारत में प्रति चक्रवात, शुष्क पछुआ से समूचा प्रदेश तप रहा है। कहां असर चार जिलों के लिए लू का रेड, 18 में ऑरेन्ज अलर्ट। तापमान अधिकतम 42.4 डिग्री, न्यूनतम सामान्य से 3.3 डिग्री 28.8 डिग्री यहां रेड अलर्ट बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी और प्रयागराज। आगे क्या: दो दिन बाद पछुआ और बढ़ाएगी तपिश मौसम विभाग के अनुसार हवा के ऊपरी क्षोभमंडल में पुरवा ने जोर पकड़ लिया है। इससे हवा में नमी बढ़ गई, जिसके कारण ज्यादातर शहरों के अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री तक की कमी आई है। मौसम मुख्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि यह राहत 48 घंटे की है, इसके बाद फिर गर्म पछुआ जोर पकड़ेगी और तपिश चढ़ेगी। आसमान से बरसती आग को कम नहीं कर सका एक डिग्री गिरा पारा भीषण गर्मी के बीच शुक्रवार को पश्चिम यूपी में दिन के तापमान में 1.3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट भी राहत नहीं दे सकी। दिनभर चिलचिलाती धूप और लू के बीच वेस्ट यूपी में प्रचंड गर्मी का प्रकोप जारी रहा। अब तक दिन में जारी भीषण गर्मी का असर अब रात को भी होने लगा है। मेरठ में शुक्रवार को न्यूनतम मापमान 29.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ जो इस सीजन का सर्वाधिक है। गुरुवार की रात मेरठ में सीजन की सबसे गर्म रही। आने वाले 24-48 घंटे में दिन-रात के तामपान में और बढ़ोतरी के आसार हैं। रात में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। मेरठ में अभी नियंत्रण में वेट 24 मई को राहत की आस निजी एजेंसी स्काईमेट वेदर के अनुसार 24 मई के आसपास दिल्ली और वेस्ट यूपी के कुछ हिस्सों में आंधी एवं हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। इससे तापमान में कुछ समय के लिए गिरावट हो सकती है, लेकिन भीषण गर्मी से राहत की उम्मीद कम है। वेट बल्ब तापमान सामान्य भीषण गर्मी के बीच मेरठ में राहत की बात सिर्फ इतनी है कि यहां अभी वेट बल्ब तापमान सामान्य सीमा में है। वेट बल्ब तापमान हवा के तापमान और उसकी आर्द्रता यानी नमी का संयुक्त माप है जो बताता है कि पसीना आने पर शरीर स्वयं को कितना ठंडा रख सकता है। थर्मामीटर पर गीला कपड़ा लपेटकर मापा जाता है। जब गर्म हवा में नमी अधिक होती है तो पसीना वाष्पीकृत नहीं हो पाता और शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम काम करना बंद कर देता है। ऐसे में हमें सामान्य से कहीं अधिक भीषण गर्मी का अहसास होता है। वैज्ञानिक स्थिति में 35 डिग्री सेल्सियस का वेट बल्ब तापमान मानव शरीर के लिए अधिकतम सीमा है। वेट बल्ब तापमान ऊपर चला जाता है तो पसीना वाष्पीकृत होना पूरी तरह बंद हो जाता है और मौत तक हो सकती है। शुक्रवार को मेरठ में वेट बल्ब तापमान 27.01 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ जो अभी सहनीय श्रेणी में है। 25-30 डिग्री का वेट बल्ब तापमान असहज की स्थिति पैदा करता है 30-31 डिग्री सेल्सियस उच्च जोखिम स्तर लाता है। 31-35 डिग्री सेल्सियस अत्यधिक जोखिम श्रेणी है।

रांची: 30 जून से शुरू होगा विशेष मतदाता पुनरीक्षण, CEO ने दूर की भ्रांतियां

रांची झारखंड में 30 जून से शुरू होनेवाले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) के तहत सूची से नाम कटने को लेकर डरने की कोई बात नहीं है। बीएलओ से लेकर SIR में लगे ऊपर तक कोई पदाधिकारी किसी मतदाता का गलत ढंग से मतदाता सूची से नाम हटा नहीं सकता। SIR को लेकर लागू सिस्टम इतना भरोसेमंद है कि किसी भी स्तर पर गलत ढंग से नाम कटने या जुड़ने की कोई संभावना नहीं है। साथ ही इस प्रक्रिया के दौरान लोगों को नोटिस का जवाब देने, यहां तक कि अपील करने का भी पूरा मौका मिलेगा। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने गुरुवार को धुर्वा स्थित निर्वाचन सदन में आयोजित मीडिया उन्मुखीकरण कार्यक्रम में SIR को लेकर उत्पन्न होनेवाली हर भ्रांति को दूर किया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, SIR में सबसे महत्वपूर्ण राज्य में इससे पूर्व वर्ष 2003 में हुए SIR के बाद तैयार मतदाता सूची है। जिन मतदाताओं के नाम इस सूची में है, उन्हें सत्यापन के दौरान कोई दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं है। घर-घर जाएंगे बीएलओ उन्हें सिर्फ गणना प्रपत्र (इन्यूमरेशन फार्म) भरना होगा, जो बीएलओ के माध्यम से घर तक पहुंचेगा। वर्तमान मतदाताओं में 73 प्रतिशत की इस सूची से मैपिंग हो चुकी है। वैसे मतदाता जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें गणना प्रपत्र भरने के साथ-साथ घोषणापत्र और निर्धारित 11 दस्तावेज की सूची में कोई एक दस्तावेज देना होगा। 18 वर्ष पूरे कर चुके नए मतदाताओं को फार्म-6 के साथ घोषणापत्र भी जमा करना होगा। वहीं, दूसरे राज्यों से आनेवाले मतदाताओं को फार्म-8 के साथ घोषणापत्र देना होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदाताओं, एसआइर में लगे कर्मियों, सभी मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए से SIR में सक्रिय सहयोग की अपील की ताकि मतदाता सूची अधिक स्वच्छ समावेशी एवं त्रुटिरहित बन सके। इस अवसर पर अपर मुख्यवनिर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, प्रशिक्षण के नोडल पदाधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनीलकुमार उपस्थित रहे। गणना प्रपत्र लेने न्यूनतम 3 बार आपके घर जाएंगे बीएलओ 30 जून से बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस क्रम में वे सभी को गणना प्रपत्र देंगे, जिन्हें भरकर उन्हें देना है। यह पहले से आंशिक रूप से भरा रहेगा। अगर किसी घर में ताला बंद है तो इस प्रपत्र को बीएलओ अंदर डाल देंगे। गणना प्रपत्र भराने तथा घोषणा पत्र व दस्तावेज लेने बीएलओ न्यूनतम तीन बार आपके घर जाएंगे। गणना प्रपत्र जमा करनेवाले मतदाताओं की सूची प्रारुप मतदाता सूची में वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग या बिना मैपिंग के रूप में अलग-अलग शामिल किए जाएंगे। यदि किसी मतदाता का गणना प्रपत्र नहीं मिलता है या उसका नाम अब्सेंट, शिफ्टेड, डेड, डुप्लीकेट (एएसडीडी) सूची में शामिल है तो उसका नाम प्रारुप मतदाता सूची में सम्मिलित नहीं किया जाएगा। गण्ना प्रपत्र भरने में बीएलओ सहयोग करेंगे। एसआइआइ में क्या खास? एक-एक घर में गणना प्रपत्र बीएलओ के माध्यम से पहुंचेगा। उसमें बीएलओ का नाम तथा मोबाइल नंबर भी होगा। इसे कम से कम भरकर तथा हस्ताक्षर कर बीएलओ को जरूर जमा करें। मतदाता सूची से किसी का नाम सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना नहीं हटाया जाएगा। अपील दो स्तर पर की जाएगी। पहली अपील जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त तथा दूसरी अपील मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पास होगी। आधार कार्ड के आधार पर मतदाता होने का दावा नहीं किया जा सकता। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने आधार एक्ट तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि आधार सिर्फ किसी व्यक्ति की पहचान है न कि नागरिक होने का। समय पर पूरा होगा SIR , नहीं मांगेंगे अवधि विस्तार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि राज्य में SIR समय पर पूरा होगा। इसके लिए चुनाव आयोग से अवधि विस्तार नहीं मांगा जाएगा। किसी भी विसंगति को सिस्टम तुरंत पकड़ेगा वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग सही ढंग से हुई है या नहीं, किसी मतदाता का नाम गलत ढंग से सूची से कट गया या जुड़ गया हो तो उसे सिस्टम तुरंत पकड़ लेगा। इसमें कुल 15 प्रकार की होनेवाली विसंगतियां चिह्नित की गई हैं, जिन्हें सिस्टम बता देगा ताकि उसे दूर किया जा सके। गलत करने पर दंड का भी प्रविधान SIR के क्रम में बीएलओ से लेकर ऊपर तक के कोई पदाधिकारी गलत करता है, तो उसके विरुद्ध दंड का भी प्रविधान है। इसके तहत जुर्माना सहित न्यूनतम तीन माह की जेल हो सकता है, जिसे दो वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। इन 11 दस्तावेज में से कोई एक देना होगा अनिवार्य  केंद्र, राज्य सरकार या पीएसयू द्वारा नियमित कर्मचारी या पेंशनर को जारी प्रमाणपत्र एक जुलाई 1987 से पहले सरकार, स्थानीय प्राधिकार, बैंक, डाकघर, एलआइसी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र  पासपोर्ट मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र वन अधिकार प्रमाणपत्र  ओबीसी, एससी, एसटी या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी कोई भी जाति प्रमाणपत्र  राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां भी मौजूद है) राज्य/स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर सरकार द्वारा कोई भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र कब क्या होगा? 23 मई : सभी मतदान केंद्रों पर उन मतदाताओं की सूची का प्रकाशन जिनकी मैपिंग 2003 की मतदाता सूची से नहीं हुई है। 20 जून से 29 जून : SIR में संलग्न कर्मियों का प्रशिक्षण 30 जून से 29 जुलाई : बीएलओ द्वारा घर-घर दौरा 29 जुलाई तक : मतदान केंद्रों का युक्तिकरण 05 अगस्त : प्रारुप मतदाता सूची का प्रकाशन 05 अगस्त से 04 सितंबर : दावा एवं आपत्ति 05 अगस्त से 03 अक्टूबर : दावों और आपत्तियों की 07 अक्टूबर : मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन। बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा आयोग चुनाव आयोग SIR में संलग्न बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। एक सवाल के जवाब में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि बीएलओ के कार्य में बाधा डालनेवाले के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।  

झारखंड: शिक्षकों के हित में हाईकोर्ट का अहम फैसला, सरकार को समयसीमा में निर्णय का निर्देश

रांची झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश में राज्य के प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षकों को एमएसीपी योजना का लाभ दिए जाने के मामले में सरकार को 16 सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है। एकल पीठ ने जामताड़ा जिले के 84 शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश पारित किया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स और शिवम पाठक ने अदालत को बताया कि राज्य के अन्य स्कूलों (जैसे अल्पसंख्यक स्कूल, आवासीय विद्यालय) तथा बिहार राज्य के शिक्षकों को एमएसीपी का लाभ पहले से दिया जा रहा है, जबकि प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को यह सुविधा नहीं मिल पाई है। याचिका में राज्य सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे इन शिक्षकों को भी एमएसीपी का लाभ दें। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि सरकार ने सात अगस्त 2024 को झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ को पत्र लिखकर एमएसीपी की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि चूंकि अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को यह लाभ मिल रहा है और सरकार ने इस विषय पर विचार-विमर्श शुरू भी कर दिया है, इसलिए यह आवश्यक है कि प्राथमिक शिक्षकों के संबंध में भी जल्द से जल्द फैसला लिया जाए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरकार इस मामले में अंतिम निर्णय लें। पूरी प्रक्रिया इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 16 सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। अदालत ने याचिका निष्पादित कर दी। 16,290 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन देने का आदेश हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने पूर्वी सिंहभूम जिले के 80 प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें 16,290 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन देने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता मैट्रिक और इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक हैं, जिन्होंने वर्ष 2006 से पहले सेवा में आए थे। उनकी मांग थी कि छठें वेतन आयोग की संस्तुतियों के तहत जारी वित्त विभाग के प्रस्ताव के अनुसार उनका प्रारंभिक वेतन एक जनवरी 2006 से 16,290 रुपये निर्धारित किया जाए। शिक्षकों ने शिक्षा विभाग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि यह वेतनमान केवल झारखंड सचिवालय के सहायकों पर लागू होता है। अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि यह मामला पूर्व में एक मामले में कोर्ट के निर्णय (27 नवंबर 2025) से पूरी तरह आच्छादित है। अदालत ने शिक्षकों के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए विभाग के 10 जून 2024 के सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि वह इन याचिकाकर्ताओं को वही, लाभ प्रदान करे जो पिछले मामले के याचिकाकर्ताओं को दिए गए थे। सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पिछले संबंधित मामले के निर्णय के खिलाफ सरकार ने खंडपीठ में अपील दायर कर दी है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील के आदेश से शिक्षकों न्यूनतम वेतनमान प्रभावित होगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह ने पक्ष रखा।