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ग्रामीण सड़क निर्माण में बिहार अव्वल, राष्ट्रीय स्तर पर मिला सर्वोच्च सम्मान

पटना ग्रामीण बसावटों को पक्की सड़क से जोड़ने में बिहार को देश में अव्वल स्थान मिला है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 10 मई को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भेरूंदा में आयोजित राष्ट्रीय समारोह का आयोजन किया गया। इसमें बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग को इसके लिए राष्ट्रीय स्तर का सर्वोच्च सम्मान मिला है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सर्वाधिक गांव और टोलों को पक्की सड़कों से जोड़ने के मामले में बिहार ने यह कीर्तिमान स्थापित किया है। बिहार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अब तक 31,287 ग्रामीण बसावटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़कर देश भर में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। इस राष्ट्रीय रैंकिंग में मध्य प्रदेश 17,493 बसावटों के साथ दूसरे तथा ओडिशा 16,990 बसावटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा है। इसके साथ बिहार ने केवल ग्रामीण सड़कों के निर्माण में ही नहीं, बल्कि उनके गुणवत्तापूर्ण अनुरक्षण में भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों के अनुरक्षण एवं रखरखाव की श्रेणी में भी बिहार ने बड़े राज्यों के बीच पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। रखरखाव के मामले में बिहार दूसरे नंबर पर बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग ने 553 करोड़ रुपये खर्च कर ग्रामीण सड़कों का रखरखाव सुनिश्चित किया है। इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश 654 करोड़ रुपये के व्यय के साथ प्रथम, बिहार दूसरे तथा पश्चिम बंगाल 497.62 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर रहा है। विभागीय पदाधिकारी बताते हैं कि ग्रामीण कार्य विभाग के सतत प्रयास से राज्य के हर गांव तक सुरक्षित, सुगम और बारहमासी सड़क संपर्कता सुनिश्चित हो रही है।  

रैयती जमीन निबंधन प्रक्रिया होगी पारदर्शी, सीओ देंगे 10 दिनों में पूरी रिपोर्ट

पटना रैयती जमीन के निबंधन से पहले खरीदारों को उस जमीन के बारे में पूरी जानकारी जल्द मिलने लगेगी। बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के दो महकमों राजस्व एवं भूमि सुधार और मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इसकी तैयारी कर ली है। सभी सीओ को भी प्रशिक्षित किया जा चुका है। जमीन निबंधन के लिए मोबाइल यूनिट भी तैयार की गई है। इसी माह बिहार में इसकी शुरुआत होने की संभावना है। जमीन रजिस्ट्री कराते समय आवेदकों को निबंधन पोर्टल पर 13 तरह की जानकारी देनी होगी। सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत दस्तावेज निबंधन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। 16 फरवरी को ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने संयुक्त रूप से सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि पूर्ण जानकारी के अभाव में जमीन रजिस्ट्री होने से अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो रहे हैं। इसके बाद निर्णय लिया गया कि पक्षकार चाहें तो उनको संबंधित भूमि के बारे में आधिकारिक जानकारी दी जाएगी। जिस जमीन की रजिस्ट्री होनी है, आवेदकों को उसके लिए पोर्टल पर निबंधन कार्यालय का नाम, अंचल, मौजा, थाना संख्या, खाता संख्या, खेसरा, भूमि का रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी, जमाबंदी धारक का नाम, क्रेता, विक्रेता का नाम आदि बताना होगा। अंचलाधिकारी जांच-पड़ताल कर 10 दिनों में आवेदक को पूरी जानकारी एसएमएस से मुहैया कराएंगे। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव ने कहा कि जमीन निबंधन के पहले खरीदारों को इससे संबंधित पूरी जानकारी जल्द ही मिलने लगेगी। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। मोबाइल यूनिट भी तैयार कर ली गई है। सहयोग पोर्टल का आज शुभारंभ करेंगे मुख्यमंत्री इधर बिहार में आम लोगों की शिकायतों के तुरंत निष्पादन से संबंधित सहयोग पोर्टल का सीएम सम्राट चौधरी सोमवार को शुभारंभ करेंगे। पोर्टल बिहार सरकार का रीयल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम है। यह जनता की शिकायतों के समय पर, पारदर्शी और जवाबदेहीपूर्ण निवारण को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। यह नागरिकों को एक एकीकृत ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से शिकायतें दर्ज करने, स्थिति की जानकारी प्राप्त करने, रिमाइंडर भेजने और प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाएगा। यह प्रणाली बिहार सरकार के सभी विभागों में कुशल सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। आम लोगों से सुविधापूर्वक शिकायतें प्राप्त करने के लिए पंचायत में 19 मई से शिविर भी लगने हैं। 19 मई से प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय मंगलवार को पंचायत स्तर पर "सहयोग शिविर" आयोजित किया जाएगा।

प्री-मानसून बारिश से बिहार में रिकॉर्ड 193% अधिक वर्षा, कई जिलों में तेज हवाएं

 पटना पुरवा के प्रभाव के बीच पूरे बिहार में नमी का प्रसार लगातार जारी है। इस कारण उत्तर बिहार के 19 जिलों में आंधी-पानी का अलर्ट जारी किया गया है। इन स्थानों पर 50-60 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने के आसार हैं। वहीं, पटना में बादल छाये रहेंगे। मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार अगले पांच-छह दिनों तक हवा के रुख में बदलाव के कुछ खास आसार नहीं हैं। पटना सहित दक्षिण बिहार में आंशिक बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। रविवार को पटना सहित 11 जिलों के तापमान में वृद्धि दर्ज की गई। मौसम विभाग की ओर से रविवार को जारी बारिश आंकड़ों के अनुसार पूर्णिया के जलालगढ़ में सर्वाधिक वर्षा 35 मिमी दर्ज की गई। राज्य भर में प्री-मानसून के दौरान प्रदेश में अब तक सामान्य से 193 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। सामान्य वर्षा का मानक 37.8 मिलीमीटर जबकि सूबे में इस दौरान 111 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई है। पटना का अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस एवं 38.4 डिग्री सेल्सियस के साथ भभुआ में सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया। कहां कितनी बारिश लखीसराय के चानन में 32.2 मिमी, भभुआ के मोहनियां में 25.6 मिमी, नालंदा के सरमेरा में 25.2 मिमी, जमुई के लक्ष्मीपुर में 22.6 मिमी, मुंगेर के संग्रामपुर में 22.4 मिमी, नालंदा के बिंद में 20, गयाजी में 18.8, कटिहार के मनिहारी में 18.2, नालंदा के सिलाव में 17.4, दरभंगा के जाले में 17.2, सीतामढ़ी के डुमरा में 16.8, भभुआ के अधवारा में 14.8, नवादा के रजौली में 14.8, औरंगाबाद में 14.6 मिमी, शेखपुरा में 14.2 मिमी, बेगूसराय के मटियानी में 12.6 मिमी, नालंदा के अस्थावां में 12.4 मिमी एवं पूर्णिया के श्रीनगर में 12.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। गयाजी जिले में कैसा मौसम मौसम विशेषज्ञ एस के पटेल ने बताया कि 10 मई को हिमालय के क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ बना है। इसका असर 12 मई से हो सकता है। गयाजी जिले में अगले दो दिनों में पुरवैया चलेगी। अभी नमी वाला हवा चल रही है। इसलिए लू से राहत रहेगी। उन्होंने बताया कि अभी सुबह से धूप निकलने और दोपहर बाद ही मौसम बिगड़ने का अनुमान है। दोपहर बाद तेज हवा व गरज के साथ बारिश के आसार बने हैं।

अब जमीन खरीदना होगा आसान और सुरक्षित: बिहार में रजिस्ट्री से पहले जांच होगी जरूरी

पटना बिहार में जमीन की रजिस्ट्री से पहले खरीदारों को उस भूमि की पूरी जानकारी मिलेगी। राजस्व एवं निबंधन विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। रैयती जमीन के निबंधन से पहले पूरी जानकारी जल्द दी जाएगी। यह व्यवस्था इसी महीने शुरू होने जा रही है। राज्य के सभी अंचलाधिकारियों को भी इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जमीन निबंधन के लिए मोबाइल यूनिट भी तैयार कर लिया गया है। संभावना है कि इस सप्ताह के अंत तक या इस माह के अंत तक इसकी शुरूआत राज्य भर में हो जाएगी। जमीन रजिस्ट्री कराते समय आवेदकों को निबंधन पोर्टल पर 13 तरह की जानकारी देनी होगी। सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत दस्तावेज निबंधन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था की जा रही है। जमीन के सौदे के समय देनी हैं ये जानकारियां रिपोर्ट्स के अनुसार, नई व्यवस्था के अनुसार जमीन का सौदा होने के बाद उसका निबंधन से पहले रैयती भूमि से जुड़ी 13 तरह की जानकारी सरकार को देनी होगी। निबंधन के लिए आवेदन के साथ खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी और विक्रेता की जानकारी आदि पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। सीओ करेंगे जांच इस आवेदन के बाद अंचल अधिकारी जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों और विक्रेता के दावों की जांच करेंगे। इसके बाद उसकी रिपोर्ट साझा की जाएगी। इसके लिए सरकार ने समयसीमा भी तय की है। बताया जा रहा है कि सीओ को 10 दिनों के भीतर यह रिपोर्ट देनी होगी। नई व्यवस्था का क्या फायदा? जमीन निबंधन से जुड़ी इस नई व्यवस्था से भूमि की खरीद-बिक्री में और पारदर्शिता आएगी। इससे जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे। खरीदार को रैयती जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले ही उससे जुड़ी सभी जानकारी मिल जाएगी। अगर उस जमीन पर पहले से कोई लोन है या विवाद है तो पता चल जाएगा। क्या है जमीन निबंधन जब आप कोई जमीन खरीदते हैं तो उसकी सेल डीड को सरकार के पास पंजीकृत करवाना होता है। जमीन की कीमत के अनुसार उसका रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी की राशि जमा करानी होती है। बिहार सरकार ने जमीन निबंधन की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। इस ई निबंधन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। रजिस्ट्री होने के बाद जमीन का दावा कानूनी तौर पर नए मालिक का माना जाता है और यह रिकॉर्ड भू‑सर्वेक्षण और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है।

रोजगार को मिलेगा बढ़ावा, बिहार में परिवहन क्षेत्र के तहत बनेंगे इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन

 शेखपुर राज्य के नए परिवहन मंत्री दामोदर राऊत ने कहा है विभाग को रोजगार का बड़ा साधन बनाया जाएगा। इसके लिए दीर्घकालीन रूपरेखा बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होने राज्य में सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को भविष्य का विकल्प बताते हुए कहा सभी प्रमुख मार्गों पर सरकार चार्जिंग स्टेशन बनाया जाएगा। चार दिन पूर्व परिवहन मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने घर जमुई के गिद्दौर जा रहे दामोदर राऊत रविवार को शेखपुरा में पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कही। तिरमुहानी दुर्गा मंदिर में मंत्री ने मत्था भी टेका। शेखपुरा के सर्किट हाउस सहित कई स्थानों पर जदयू तथा एनडीए के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। इसमें शेखपुरा के विधायक तथा जदयू के जिलाध्यक्ष रणधीर कुमार सोनी, पूर्व अध्यक्ष भुवनेश्वर प्रसाद, डॉ. महेश, भगवान कुशवाहा, विजय कुमार सिंह, जयदेव कुमार, रेणु सिंह सहित कई महिला नेत्री भी शामिल हुईं। मुख्य सड़कों पर खोले जाएंगे चार्जिंग स्टेशन परिवहन मंत्री ने बताया राज्य में सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किया जाएगा। सुविधा के लिए राज्य के मुख्य मार्गों पर चार्जिंग स्टेशन खोले जाएंगे। ये चार्जिंग स्टेशन पीपीपी मोड पर खोले जाएंगे, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा। परिवहन विभाग को रोजगार सृजन का बड़ा साधन बनाने के लिए राज्य में मुख्यमंत्री परिवहन योजना का विस्तार किया जाएगा, जिससे गांव के युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। परिवहन विभाग में सड़क सुरक्षा पर सबसे अधिक बल दिया जा रहा है, ताकि हादसे कम से कम हों।  

फार्मर रजिस्ट्री अभियान मिशन मोड में, सरकारी योजनाओं से जुड़ेंगे किसान

 मधुबनी  Agri Stack Project: जिले में किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अभियान को एक बार फिर मिशन मोड में चलाया जाएगा। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर निर्देश दिया कि 12 मई से 30 जून 2026 तक अधिक से अधिक किसानों का फार्मर आईडी बनाया जाए। सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फार्मर आईडी नहीं बनने पर किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है। यह अभियान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एग्री स्टैक परियोजना के तहत चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसानों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है। अधिकारियों को सख्त निर्देश जिलाधिकारी ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं, बीडीओ, अंचल अधिकारियों और प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को अभियान में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र किसान सरकारी योजनाओं से वंचित न रह जाए लापरवाही पर होगी कार्रवाई जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता राजस्व मुकेश रंजन को निर्देश दिया कि फार्मर रजिस्ट्री में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है और तकनीकी समस्याओं के समाधान की व्यवस्था भी की गई है। 1.74 लाख किसानों की बनी आईडी कृषि एवं राजस्व विभाग के संयुक्त प्रयास से जिले में अब तक 1,74,853 किसानों का फार्मर आईडी तैयार किया जा चुका है। फार्मर आईडी के लिए पहले कृषि विभाग की ओर से ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जमाबंदी प्रविष्टि का सत्यापन किया जाता है। किसान खुद करा सकते रजिस्ट्री जिलाधिकारी ने बताया कि किसान कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से स्वयं भी फार्मर रजिस्ट्री करा सकते हैं। पीएम किसान योजना से लाभान्वित और जमाबंदीधारी किसान शिविर में पहुंचकर आसानी से अपना फार्मर आईडी बनवा सकते हैं। जिन किसानों के नाम से जमाबंदी उपलब्ध नहीं है, उन्हें पहले आवश्यक परिमार्जन कराने की सलाह दी गई है। क्या हैं इसके फायदे फार्मर रजिस्ट्री किसानों की एक डिजिटल पहचान है, जिसमें आधार नंबर, बैंक खाता और भूमि रिकॉर्ड को जोड़ा जाता है। इसके जरिए किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे खाते में मिलेगा। साथ ही फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, खाद-बीज वितरण और राहत राशि वितरण में पारदर्शिता आएगी। सरकार का मानना है कि यह पहल कृषि क्षेत्र में डिजिटल सुधार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।  

पटना में नया संपर्क मार्ग तैयार, मंदिरी नाले पर बनी 1289 मीटर सड़क का उद्घाटन आज

 पटना  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एवं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सोमवार को 115 करोड़ की लागत से मंदिरी नाले पर बनी सड़क का उद्घाटन करेंगे। इससे पहले रविवार की शाम पटना पहुंचने पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का एयरपोर्ट पर कार्यकर्ता स्वागत करेंगे। बांकीपुर विधायक रहते विधानसभा क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में नवीन ने मंदिरी नाले पर सड़क निर्माण की पहल की थी। उन्होंने कहा कि सड़क संपर्कता की बात करें तो नाले के ऊपर पथ निर्माण से नेहरू पथ से जेपी गंगा पथ, अशोक राजपथ, डबल डेकर, पीएमसीएच तक जाने के लिए स्थानीय नागरिकों को एक नई कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। इस पथ के निर्माण से प्रमुख रूप से वार्ड संख्या 25, 26, 27 समेत उतरी बिहार जाने वाले लाखों की आबादी को सुगम सड़क संपर्कता मिलेगी। साथ ही पटना के नेहरू पथ पर लगने वाले जाम एवं ट्रैफिक दबाव में भी कमी आएगी। वर्ष 2004 में उनके पिता एवं वरिष्ठ भाजपा नेता नवीन किशोर सिन्हा ने मंदिरी नाले की इस महत्वाकांक्षी योजना को तैयार करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा, आज जब यह परियोजना पूर्ण होकर जनता को समर्पित हो रही है, तो मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि मुझे अपने पिताजी का सपना साकार करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। बतौर बांकीपुर विधायक मुझे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में इस योजना का शिलान्यास करने का अवसर मिला था। और आज उद्घाटन समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत गर्व और संतोष का विषय है। स्थानीय नागरिकों को सीधा लाभ बांकीपुर क्षेत्र के विकास एवं जनता की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा लगातार कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता की सुविधा एवं बेहतर आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता रही है। मंदिरी नाले का निर्माण भी इसी संकल्प का परिणाम है, जिससे हजारों स्थानीय नागरिकों को सीधा लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी और आने वाले समय में भी सड़क, नाला, पेयजल एवं अन्य जनहित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। उल्लेखनीय हो कि पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा मंदिरी नाले का जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है। इस पथ की कुल लम्बाई 1289 मीटर है। पथ की प्रशासनिक स्वीकृति की राशि ₹115.08 करोड़ मात्र है। कार्य प्रारंभ की तिथि सितम्बर 2023 एवं कार्य समाप्ति की तिथि 25 मार्च 2026 है। पथ की चौड़ाई 5.5m x 2 Lane है एवं इसके अतिरिक्त सर्विस रोड 3.5 मीटर एवं ड्रेन की चौड़ाई 01 मीटर रख गया है। वहीं, मंदिरी नाला में मिलने वाले नालों में एसपी वर्मा रोड, मीठापुर, गर्दनीबाग, बाबूबजार, धोबीघाट, इकोपार्क 1, इकोपार्क 2, इकोपार्क 3, छज्जुबाग, एमएलए फ्लैट एवं सिचाई भवन शामिल है । इसके साथ ही पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा मंदिरी नाले पर 1289 मीटर लम्बी सड़क बनाई गई है। नाले के जीर्णोद्धार के साथ ही इसे ढक कर उसके उपर सड़क का निर्माण किया गया है। इस योजना के तहत नेहरू पथ (बेली रोड) पर आयकर चौराहा से दानापुर-बांकीपुर पथ के बांस घाट तक 1289 मीटर संपर्क पथ का निर्माण किया गया है।

झारखंड महागठबंधन में दरार: कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान से झामुमो भी चिंतित

 रांची  झारखंड की सत्ताधारी महागठबंधन सरकार में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब सहयोगी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए भी चिंता का सबब बनती जा रही है। लगातार बढ़ रही गुटबाजी और नेताओं के बीच खुलकर सामने आ रहे मतभेदों ने गठबंधन की सियासत को असहज मोड़ पर ला खड़ा किया है। हाल के दिनों में मंत्री राधाकृष्ण किशोर के तेवरों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने एक साथ कई मुद्दों पर नाराजगी जाहिर कर यह संकेत दे दिया है कि कांग्रेस के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। संगठन में फैसलों की शैली, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और राजनीतिक समन्वय को लेकर कई वरिष्ठ नेता नाराज बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव को लेकर अंदरखाने लामबंदी तेज हो गई है। कांग्रेस के कुछ नेता मानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में संगठन को संभालने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत महसूस की जा रही है। झामुमो लगातार रख रहा नजर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि मंत्रियों के विभागों के पुन: बंटवारे और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर भी असहमति पैदा हो सकती है। कई नेताओं को यह शिकायत है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल नहीं बन पा रहा है। इसी कारण समय-समय पर सार्वजनिक बयानबाजी सामने आ रही है, जिससे गठबंधन की छवि प्रभावित हो रही है। झामुमो भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि कांग्रेस की अंदरूनी कलह का सीधा असर सरकार की स्थिरता और समन्वय पर पड़ सकता है। भाषा विवाद पर भी धर्मसंकट इधर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने हाल में भाषा विवाद के मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष से जवाब मांगकर राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। वे इस निमित्त गठित मंत्रियों के समूह में शामिल हैं। इसका हवाला देते हुए उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से पार्टी का आधिकारिक पक्ष बताने को कहा है। जिस तरह सार्वजनिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उससे यह स्पष्ट संकेत गया कि पार्टी के भीतर संवाद और भरोसे का संकट गहराता जा रहा है। कांग्रेस जल्द ही अंदरूनी मतभेदों को नियंत्रित नहीं करती है तो इसका असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधन की मजबूती पर पड़ सकता है। झामुमो की चिंता इस बात को लेकर भी बढ़ रही है कि विपक्ष लगातार महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है। भाजपा कांग्रेस की अंदरूनी कलह को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में गठबंधन के सहयोगी दल चाहते हैं कि कांग्रेस अपने संगठनात्मक विवादों को जल्द सुलझाए ताकि सरकार विकास और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रह सके।  

तलाक मामलों में सख्ती: व्यभिचार के आरोप के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी, पटना HC का आदेश

पटना  वैवाहिक विवादों और तलाक के मामलों पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने एक दूरगामी फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति नानी तगिया और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने साफ किया कि किसी भी जीवनसाथी पर अवैध संबंधों का आरोप लगाकर विवाह विच्छेद (तलाक) की डिक्री तब तक प्राप्त नहीं की जा सकती, जब तक कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य मौजूद न हों। कोर्ट ने कहा कि व्यभिचार (Adultery) जैसे गंभीर आरोपों के लिए घटना का समय, स्थान और संबंधित व्यक्ति के विवरण जैसे स्पष्ट तथ्यों का उल्लेख याचिका में होना अनिवार्य है। ये फैसला उन मामलों में नजीर बनेगा जहां केवल संदेह के आधार पर रिश्तों को खत्म करने की कोशिश की जाती है। सिवान परिवार न्यायालय का फैसला बरकरार हाईकोर्ट ने श्याम बिहारी मिश्रा द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सिवान परिवार न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। परिवार न्यायालय ने पहले ही पत्नी संजू देवी से तलाक की उनकी अर्जी को नामंजूर कर दिया था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के तर्क को सही माना कि बिना सबूत के ऐसे आरोपों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। ठोस साक्ष्य और तथ्यों की अनिवार्यता जरूरी अदालत ने अपने आदेश में जोर देकर कहा कि अगर पति अपनी पत्नी पर किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाता है, तो उसे उस व्यक्ति का नाम, घटना का समय और स्थान स्पष्ट करना होगा। कोर्ट ने पाया कि वर्तमान केस में पति ने जिस व्यक्ति के साथ पत्नी को सिनेमा हॉल से निकलते देखने का दावा किया था, न तो उसका विवरण दिया और न ही उसे मामले में पक्षकार बनाया। पटना हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां मतलब, पटना हाईकोर्ट ने तलाक के एक केस में कहा कि केवल संदेह के आधार पर तलाक नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाकर तलाक नहीं लिया जा सकता। व्यभिचार जैसे आरोपों के लिए ठोस साक्ष्य और स्पष्ट तथ्यों का उल्लेख होना जरूरी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कई अहम कानूनी बिंदुओं को रेखांकित किया।     केवल संदेह के आधार पर तलाक की डिक्री जारी नहीं की जा सकती।     याचिका में आरोपों से संबंधित जरूरी विवरण (नाम, समय, स्थान) का अभाव था।     जिस तीसरे व्यक्ति पर आरोप लगाया गया, उसे कानूनी प्रक्रिया में शामिल (पक्षकार) नहीं किया गया।     गवाही के दौरान आए अधूरे तथ्यों के आधार पर अदालत राहत प्रदान नहीं कर सकती। अवैध संबंधों के आरोपों पर कानूनी रुख हाईकोर्ट ने साफ किया कि वैवाहिक जीवन में 'व्यभिचार' एक गंभीर आरोप है और इसे साबित करने की जिम्मेदारी आरोप लगाने वाले पक्ष पर होती है। बिना किसी ठोस विवरण के केवल यह कहना कि पत्नी बिन बताए घर से चली जाती है या किसी के साथ देखी गई है, तलाक का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने अंततः पति की दलीलों को अपर्याप्त पाते हुए उसकी याचिका को निष्प्रभावी कर दिया। पटना हाईकोर्ट में तलाक जुड़ा मामला क्या था? पति ने बिहार के सिवान परिवार न्यायालय के फैसले को हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी थी। परिवार न्यायालय ने पत्नी से तलाक अर्जी को खारिज कर दिया था। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी संजू देवी का किसी अन्य व्यक्ति से अवैध संबंध हैं और वह बिन बताए घर से चली जाती हैं। पत्नी को एक युवक के साथ सिनेमा हॉल से साथ निकलते हुए देखा गया।  

विश्वविद्यालयों में बड़ा बदलाव: अब राज्य सरकार तय करेगी ट्रांसफर और पोस्टिंग की नीति

 रांची  राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कालेजों के अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों को दूसरे विश्वविद्यालयों या कालेजों में भी स्थानांतरित कर सकेगा। उसे इनकी प्रतिनियुक्ति का भी अधिकार होगा। हाल ही में अधिसूचित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 में यह प्रविधान किया गया है। इस प्रविधान को लागू करने को लेकर विभाग परिनियम गठित करेगा। इस अधिनियम के अनुसार, किसी भी शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मियों का सबसे पहले पदस्थापन ग्रामीण या सुदूर क्षेत्र स्थित कालेजों में किया जाएगा। साथ ही उनके स्थानांतरण में यह देखा जाएगा कि उक्त क्षेत्रों के कालेजों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक या कर्मी उपलब्ध हैं या नहीं। साथ ही वैसे शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मी जो परिवीक्षाधीन (सामान्यत: नियुक्ति के दो वर्ष तक) हैं, उनका अंतरविश्वविद्यालय स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति नहीं की जाएगी। शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मियों को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग या इसके किसी संलग्न कार्यालयों में भी प्रतिनियुक्त किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को किसी भी सार्वजनिक विश्वविद्यालय/संगठन/भारत सरकार या राज्य सरकार के स्वायत्त निकाय में प्रतिनियुक्ति के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमोदन से परिनियमों द्वारा निर्धारित तरीके से अनुमति दी जा सकेगी। बताते चलें कि विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कालेजों में शिक्षकों एवं कर्मियों के पद सृजन तथा सेवाशर्त निर्धारित करने का अधिकार भी राज्य सरकार के पास है। सिर्फ संबद्ध कालेजों में पदों का सृजन का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं होगा। हालांकि इन कालेजों में भी पदों का सृजन राज्य सरकार द्वारा लागू परिनियम के तहत किया जाएगा। अनुबंध पर भी होगी नियुक्ति किसी विवि या अंगीभूत कालेज में त्यागपत्र, अवकाश या रिक्ति रहने की स्थिति में आवश्यकता पड़ने पर शिक्षक के रूप में प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस की नियुक्ति अनुबंध पर की जाएगी। यह नियुक्ति विश्वविद्यालय के सक्षम प्राधिकारी द्वारा विभाग द्वारा गठित परिनियमों के आलोक में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार या राज्य सरकार के आदेश पर की जाएगी। लेकिन यह नियुक्ति शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों के विरुद्ध ही होगी। विश्वविद्यालय का कोई भी संविदा कर्मचारी या प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस किसी भी मामले में सेवा के नियमितीकरण का दावा नहीं करेगा।