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प्रदूषण रोकने के लिए पटना प्रशासन सख्त, बड़े संस्थानों पर नई जिम्मेदारी

 पटना बिहार की राजधानी पटना में बढ़ते वायु प्रदूषण और गंदगी को कंट्रोल करने के लिए प्रशासन ने अब बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। अगर आप भी अब तक घर या मोहल्ले का कचरा सड़क किनारे, किसी खाली प्लॉट में खुले में फेंक देते थे या फिर उसे एक जगह इकट्ठा कर आग लगा देते थे, तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है। पटना में अब खुले में कचरा फेंकने और उसे जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इन नियमों की अनदेखी करने वालों पर न केवल भारी जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ सीधे FIR भी दर्ज किया जाएगा। बड़े संस्थानों, मॉल और अपार्टमेंट्स पर कसेगा शिकंजा प्रदूषण नियंत्रण पर्षद का यह नया आदेश विशेष रूप से बड़े कचरा उत्पादकों को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। नए नियमों के तहत शहर के बड़े शॉपिंग मॉल, व्यावसायिक संस्थान, और बड़े आवासीय अपार्टमेंट्स अब अपना कचरा यूं ही खुले में या केवल नगर निगम के भरोसे नहीं छोड़ सकेंगे। इन सभी बड़े संस्थानों को अनिवार्य रूप से अपने स्तर पर ही कचरे का वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोज करना होगा। कचरे को अलग-अलग कर उसे डिस्पोज करने की पूरी जिम्मेदारी अब खुद संस्थानों की होगी, जिससे शहर की सड़कों पर कचरे का अंबार न लगे। ईपीआर प्रमाण पत्र लेना जरूरी इस नई और सख्त व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए पर्षद ने सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को भी अनिवार्य कर दिया है। अब कचरा प्रबंधन के तहत सभी बड़े संस्थानों, मॉल्स और अपार्टमेंट्स को संबंधित स्थानीय निकाय (जैसे- पटना नगर निगम) से ईपीआर (Extended Producer Responsibility) प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। जिन संस्थानों के पास कचरा निस्तारण का उचित प्रबंध और यह ईपीआर सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त पटना की दिशा में बड़ा कदम बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अधिकारियों ने इसे 'स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त पटना' बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम बताया है। अक्सर देखा जाता है कि ठंड के मौसम में लोग जगह-जगह कचरा जलाते हैं, जिससे निकलने वाला जहरीला धुआं शहर के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को खतरनाक स्तर पर पहुंचा देता है। इस नई सख्ती से शहर की आबोहवा में सुधार होने की पूरी उम्मीद है।

अंगिका और अन्य स्थानीय भाषाओं को परीक्षा में जगह देने पर मंथन शुरू

 महगामा  झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में अंगिका सहित क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल करने की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। महागामा विधायक और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पहल पर राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। 13 अप्रैल को मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर अंगिका, संथाली, मगही, मैथिली, भोजपुरी, कुड़माली और खोरठा जैसी स्थानीय भाषाओं को परीक्षा में विकल्प के रूप में शामिल करने की मांग की थी। मंत्री ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन में बताया कि संथालपरगना समेत राज्य के कई क्षेत्रों में अंगिका और अन्य क्षेत्रीय भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं। परीक्षा व्यवस्था में इन भाषाओं का अभाव स्थानीय युवाओं को अवसरों से वंचित कर रहा है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में अंगिका को शामिल नहीं किए जाने पर छात्रों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी बढ़ी थी। इसके बाद, राज्य सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने 5 मई 2026 को अधिसूचना जारी कर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। यह समिति राज्य के विभिन्न जिलों में भाषाई स्थिति, जनभावनाओं और व्यावहारिक पक्षों का अध्ययन कर सरकार को अनुशंसा सौंपेगी। समिति में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर को समन्वयक बनाया गया है, जबकि श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पेयजल मंत्री योगेन्द्र प्रसाद और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सदस्य हैं। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं का शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में समावेश झारखंड की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। अंगिका साहित्य कला मंच और अन्य सामाजिक संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है। अब छात्रों और भाषा प्रेमियों की नजर समिति की रिपोर्ट और सरकार के अगले निर्णय पर है।  

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए नियम में बदलाव की तैयारी

रांची  राज्य में सेवा देने वाले दूसरे राज्यों के चिकित्सकों को झारखंड में निबंधन से छूट मिलेगी। इसके लिए झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल रूल के संबंधित प्रविधानों में संशोधन किया जाएगा। झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए यह छूट प्रदान करने पर विचार किया जा रहा है स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव सह नोडल पदाधिकारी छवि रंजन की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में आयोजित बैठक में यह निर्णय लेते हुए झारखंड में निबंधन से छूट की अनुशंसा राज्य सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया। बैठक में झारखंड मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. साहिर पाल, रजिस्ट्रार सह सचिव डॉ. विमलेश कुमार सिंह तथा आईएमए, झारखंड के प्रतिनिधि डॉ. शंभू प्रसाद उपस्थित थे। बैठक में झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल रूल, 2023 के नियम 55 की विस्तार से समीक्षा की गई। वर्तमान नियम के अनुसार, झारखंड में चिकित्सा सेवा देने वाले सभी चिकित्सकों के लिए राज्य में निबंधन अनिवार्य है। इसके तहत दूसरे राज्यों से आनेवाले चिकित्सकों को भी झारखंड में निबंधन अनिवार्य है। भले ही वे पहले से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग या किसी अन्य राज्य मेडिकल काउंसिल में निबंधित हों। झारखंड में बिना निबंधन वे राज्य में प्रैक्टिस नहीं कर सकते। बैठक में इस नियम से उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा हुई। सदस्यों ने कहा कि बाहर से आनेवाले विशेषज्ञ चिकित्सकों को अतिरिक्त औपचारिकताओं के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिससे राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता भी प्रभावित होती है। विमर्श के बाद नियम में आवश्यक संशोधन को लेकर राज्य सरकार को अनुशंसा भेजे जाने पर सहमति बनी।  

आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, 2.50 लाख के 6 मोबाइल बरामद

मुजफ्फरपुर रेल पुलिस की आरपीएफ टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरपुर जंक्शन से यात्रियों के मोबाइल चोरी करने वाले एक बड़े गैंग का पर्दाफाश किया है। रेल पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन यात्री सुरक्षा’ अभियान के दौरान दो शातिरों को गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए आरोपियों में एक अररिया और दूसरा पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। आरपीएफ टीम ने इनके पास से करीब 2.50 लाख रुपये कीमत के 6 महंगे मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इस दौरान मुख्य आरोपी रिंकू कुमार को गिरफ्तार किया गया, जिसके खिलाफ कई जिलों में आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर हुई संयुक्त कार्रवाई दरअसल, यह कार्रवाई आरपीएफ और सीआईबी की संयुक्त टीम ने मुजफ्फरपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या-1 पर की। टीम ने एक शातिर अपराधी और उसके साथ एक किशोर को पकड़ा। तलाशी के दौरान उनके पास से कुल 6 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनमें 5 महंगे टचस्क्रीन मोबाइल और 1 कीपैड फोन शामिल है। बरामद मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 2.50 लाख रुपये आंकी गई है। भीड़ का फायदा उठाकर उड़ाते थे मोबाइल पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे जंक्शन पर भीड़ का फायदा उठाकर यात्रियों के मोबाइल चोरी करते थे। पुलिस को आशंका है कि यह गैंग लंबे समय से रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में सक्रिय था और यात्रियों को निशाना बना रहा था। कई जिलों में दर्ज हैं मुख्य आरोपी पर मामले पूरे मामले को लेकर आरपीएफ मुजफ्फरपुर के इंचार्ज मनीष कुमार ने बताया कि रेल पुलिस की टीम ने यात्रियों के मोबाइल चोरी करने वाले गैंग के दो सदस्यों को पकड़ा है। जांच और पूछताछ में सामने आया है कि गिरफ्तार अररिया निवासी रिंकू कुमार एक शातिर पेशेवर अपराधी है। उसके खिलाफ बेगूसराय, कटिहार और पटना जीआरपी में चोरी के अलावा एनडीपीएस एक्ट के तहत कई गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी रेल पुलिस की टीम अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा और बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर झांसा, युवक से करीब 2 लाख की साइबर ठगी

 रांची  शहर में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। एक मामले में लिंक ओपन करते ही युवक के दो बैंक खातों से 1.93 लाख रुपये की निकासी कर ली गई, जबकि दूसरे मामले में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करीब दो लाख रुपये की ठगी कर ली गई। दोनों मामलों में साइबर अपराध थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पहला मामला ओरमांझी निवासी बबन वर्मा से जुड़ा है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल नंबर पर आरटीओ के नाम से एक लिंक आया था। गलती से लिंक ओपन करते ही उनके एक्सिस बैंक और पंजाब नेशनल बैंक खाते से कुल 1 लाख 93 हजार रुपये की अवैध निकासी कर ली गई। वहीं दूसरा मामला गुमला निवासी चंदन कुमार से संबंधित है, जो वर्तमान में सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर कार्यालय, धुर्वा में कार्यरत हैं। चंदन कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्हें टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेडिंग का ऑफर दिया गया था। इसके बाद उन्हें एक व्हाट्सएप नंबर से जोड़कर मोटे मुनाफे का लालच दिया गया। पीड़ित के अनुसार उन्होंने पहले 50 हजार रुपये भेजे। बाद में अधिक मुनाफा दिखाकर अलग-अलग चरणों में 70 हजार और फिर 80 हजार रुपये जमा कराए गए। आरोपितों ने ट्रेडिंग फीस और प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर रुपये लिए, लेकिन रकम वापस नहीं की। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।

बिहार पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने का मंत्री का संकल्प

पटना बिहार सरकार के नवनियुक्त पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने शुक्रवार को मुख्य सचिवालय स्थित कार्यालय कक्ष में पर्यटन विभाग का कार्यभार ग्रहण किया। पदभार संभालने के बाद उन्होंने बिहार को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल करने की प्रतिबद्धता जताई। इस दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यभार ग्रहण समारोह में पर्यटन विभाग के सचिव (अतिरिक्त प्रभार) अभय कुमार सिंह, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर, पर्यटन निदेशक उदयन मिश्रा, संयुक्त सचिव इंदु कुमारी, संयुक्त निदेशक राजेश रौशन समेत विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे। बिहार की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर लाने की बात पदभार ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि यह उनके जीवन का बेहद महत्वपूर्ण और भावुक क्षण है। उन्होंने कहा कि पर्यटन मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालना केवल एक पद नहीं, बल्कि बिहार की सेवा का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि बिहार भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का केंद्र रहा है। भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति, गुरु गोविंद सिंह का जन्म, भगवान महावीर की तपोभूमि और माता जानकी की पावन स्मृतियां बिहार को विशेष पहचान देती हैं। बिहार की मिट्टी में इतिहास, संस्कृति और अध्यात्म की ऐसी शक्ति है, जो दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती है। पर्यटन स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण पर जोर पर्यटन मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में राज्य के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों का व्यापक विकास कराया जाएगा। प्रमुख पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण के साथ वहां आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सड़क, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगा प्रचार-प्रसार उन्होंने कहा कि बिहार के पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक देशी और विदेशी पर्यटक बिहार आएं। सरकार का उद्देश्य है कि बिहार की पहचान केवल इतिहास तक सीमित न रहे, बल्कि आधुनिक पर्यटन के क्षेत्र में भी राज्य नई मिसाल कायम करे। पर्यटन से रोजगार और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, व्यापार और आर्थिक विकास का मजबूत आधार भी है। पर्यटन को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। साथ ही स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों, संस्कृतिकर्मियों और छोटे व्यापारियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। अधिकारियों से टीम भावना के साथ काम करने की अपील मंत्री ने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से टीम भावना के साथ कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी को पूरी प्रतिबद्धता के साथ बिहार के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए काम करना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पर्यटन विभाग जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करेगा और हर निर्णय में जनता का हित सर्वोपरि रखा जाएगा।

तीन साल बाद रांची में जल शुल्क विवादों पर सुनवाई की प्रक्रिया फिर शुरू

रांची  तीन साल के लंबे इंतजार के बाद रांची नगर निगम अब सप्लाई पानी बिल से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करने जा रहा है। नगर निगम की जलापूर्ति शाखा ने वार्ड संख्या 1 से 53 तक के उन उपभोक्ताओं के लिए आम सूचना जारी की है, जिनके पास निगम से स्वीकृत जल संयोजन है। निगम ने कहा है कि जल शुल्क से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उपभोक्ता अगले सात दिनों के भीतर आवेदन जमा कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार, उपभोक्ताओं को जलापूर्ति शाखा में जल शुल्क विपत्र, जल संयोजन स्वीकृति पत्र एवं अन्य संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन देना होगा। निगम प्रशासन का कहना है कि प्राप्त आवेदनों पर यथाशीघ्र कार्रवाई करते हुए समस्याओं का समाधान किया जाएगा। वेबर्स कमेटी नहीं बनने से तीन साल तक अटकी रही सुनवाई दरअसल, रांची नगर निगम चुनाव नहीं होने के कारण पिछले तीन वर्षों से वेबर्स कमेटी का गठन नहीं हो पा रहा था। इस कमेटी में नगर आयुक्त, मेयर, पार्षद और जलापूर्ति शाखा के इंजीनियर सदस्य होते हैं। मेयर और पार्षद नहीं रहने से कमेटी के गठन के लिए आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो पा रहा था। इसी वजह से पानी बिल, नए जल कनेक्शन और अन्य शिकायतों से जुड़े सैकड़ों मामलों की सुनवाई लंबित पड़ी रही। लोगों द्वारा आवेदन देने के बावजूद मामलों का निपटारा नहीं हो सका। बिना कनेक्शन के भेजा जा रहा था पानी बिल नगर निगम में सबसे अधिक शिकायतें उन उपभोक्ताओं की हैं, जिनका कहना है कि उनके घरों में पानी का कनेक्शन ही नहीं है, इसके बावजूद हर महीने पानी का बिल भेजा जा रहा है। वहीं कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उनके यहां वर्षों पुराना कनेक्शन तो है, लेकिन आज तक सप्लाई पानी नहीं पहुंचा। इसके बावजूद नियमित रूप से जलशुल्क वसूला जा रहा है। अब घर-घर जाकर होगी जांच जलापूर्ति शाखा में आने वाली शिकायतों की जांच के लिए नगर निगम की इंजीनियरों की टीम संबंधित उपभोक्ताओं के घर-घर जाएगी। जांच के दौरान संबंधित वार्ड के पार्षद भी मौजूद रहेंगे। शिकायतों की जांच रिपोर्ट तैयार कर वेबर्स कमेटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद कमेटी मामले की सुनवाई कर अंतिम निर्णय लेगी।  

SBI हड़ताल: 16 मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी 25-26 मई को विरोध में

 रांची  स्टेट बैंक आफ इंडिया के ग्राहक अलर्ट हो जायें। क्योंकि पूरे देश के बैंक कर्मचारी 25 और 26 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। जिसके कारण केवल दो दिन नहीं बल्कि पांच दिन तक बैंक के कामकाज प्रभावित होंगे। 23 मई को चौथा शनिवार है, 24 को रविवार। 25 और 26 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल और 27 मई बुधवार को बकरीद की छुट्टी है। आल इंडिया स्टेट बैंक आफ इंडिया फेडरेशन ने बैंक प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों के हितों की अनदेखी और 16 लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया है। फेडरेशन के महासचिव एल चंद्रशेखर ने कहा कि प्रबंधन के साथ बार-बार चर्चा के बाद भी कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान नहीं हुआ, जिसके कारण हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को होने वाली असुविधा के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं, लेकिन हम यह कदम कर्मचारियों के न्यायपूर्ण अधिकार के लिए अनिवार्य है। यह वीडियो भी देखें कर्मचारियों के हड़ताल की मुख्य मांगे     एनपीएस में सुधार-नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत फंड मैनेजर बदलने का विकल्प देना     भर्ती पर रोक-पिछले तीन दशकों से मैसेंजर और कुछ वर्षों से सशस्त्र गार्ड की भर्ती न होने का विरोध     नई बहाली-कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नई बहाली सुनिश्चित हो     वेतन समानता- 12वें द्विपक्षीय समझौते के बाद वेतन विसंगति और स्पेशल पे मुद्दा     आउटसोर्सिंग का विरोध- स्थायी नौकरियों के आउटसोर्सिंग का विरोध     सुरक्षा और कामकाजी स्थितियां-बैंक में सुरक्षा की कमी और कर्मचारी विरोधी नीतियों का विरोध     एचआरएमएस की खामियों को दुरूस्त करने की मांग     क्रास सेलिंग के नाम पर मिस सेलिंग बंद करने की मांग क्यों प्रभावित रहेगा 5 दिन काम?     23 मई: चौथा शनिवार (बैंक अवकाश)    24 मई: रविवार (साप्ताहिक अवकाश) 25 मई: राष्ट्रव्यापी हड़ताल 26 मई: राष्ट्रव्यापी हड़ताल 27 मई: बकरीद (सार्वजनिक अवकाश)  

हाई कोर्ट आदेश से क्रशर उद्योग पर गहरा असर, हजारों रोजगार खतरे में

रांची राज्य के लगभग 70 प्रतिशत खनन-क्रशर उद्योगों पर बंदी की तलवार लटक रही है। यह हाई कोर्ट के ताजे आदेश से स्थिति पैदा हुई है। हाल में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि 2015 में गठित एनओसी विशेषज्ञ कमेटी को विशेषज्ञ कमेटी नहीं माना जा सकता है, क्योंकि इस कमेटी में विषय के जानकार नहीं थे। अतः 2015 की गजट को मान्यता नहीं दी जा सकती है। इसलिए पहले से जारी वनभूमि से माइंस की दूरी 400 मीटर और पत्थर के क्रशर यूनिट की दूरी 500 मीटर ही मान्य होगी। चेंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा कहते हैं कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिला जाएगा और समाधान के लिए कहा जाएगा। यह हजारों लोगों की रोजी-रोटी का सवाल है। राज्य सरकार ने 2015 में जारी किया था गजट राज्य सरकार ने 2015 में गजट प्रकाशित किया था और उसमें बताया गया था आरक्षित वन क्षेत्र, संरक्षित वन क्षेत्र, रिहायशी क्षेत्र, नदी/अन्य जल स्रोत, शिक्षा संस्थान से 200-250 मीटर की दूरी पर खनन कर सकते हैं। जबकि 2015 से पहले यह दूरी चार सौ-पांच सौ मीटर का था। अब हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद खनन-क्रशर उद्योग संकट में पड़ गया है क्योंकि जिन लोगों ने 2015 के बाद वैध ढंग से खनन-क्रशर उद्योग के लिए लाइसेंस लिया और काम कर रहे हैं, उनके सामने भीषण संकट पैदा हो गया है। उनके साथ हजारों श्रमिक भी इससे प्रभावित होंगे। इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इस आदेश से राज्य के करीब 70 प्रतिशत उद्योग बंद हो जाएंगे और हजारों श्रमिक बेरोजगार हो जाएंगे। व्यवसायियों का कहना है कि इससे सरकार को भी राजस्व की हानि होगी। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने तय की है 200 मीटर दूरी केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने 2025 में नोटिफिकेशन जारी किया था और क्रशर-पत्थर को ओरेंज श्रेणी में रखा और उसने मानक तय किया था कि वन-नदी सीमा से दो सौ मीटर की दूरी होनी चाहिए। इसे लघु खनिज की श्रेणी में रखते हुए उसने मानक तय किए थे। जबकि झारखंड में कम से कम ढाई सौ मीटर का मानक रखा गया है। यह थी एनओसी विशेषज्ञ कमेटी एनओसी विशेषज्ञ कमेटी को विशेषज्ञ कमेटी को उच्च न्यायालय ने विशेषज्ञ कमेटी नहीं माना। दो दिसंबर 2015 की बैठक में पांच सौ मीटर को संशोधित कर स्टोन क्रशर के लिए वन-वनभूमि की न्यूनतम दूरी 250 मीटर तय किया गया। उस कमेटी में संजय कुमार सुमन, सदस्य सचिव, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, बीबी सिंह, अपर निदेशक, खान एवं भूतत्व विभाग, झारखंड सरकार, बीएम लाल दास, उप निदेशक उद्योग विभाग, झारखंड सरकार, फिलीप मैथ्यू जेएसआईए, सुधीर कुमार, पर्यावरण अभियंता, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद। यह हमारे लिए चिंता का विषय है। चार हजार से ऊपर क्रशर-खनन उद्योग झारखंड में होंगे। अच्छा-खासा सरकार को राजस्व जाता है। न्यायालय के आदेश से इस पर संकट आ गया है। अब हम लोग मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखेंगे और कहा जाएगा कि इस पर विचार हो। इसमें हम लोगों की कोई गलती नहीं है। -सीपी सिन्हा, अध्यक्ष, झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ     हमने तो नियम के अनुसार ही लाइसेंस प्राप्त किया और अब इसे निरस्त किया जा रहा है। इससे हमारा खनन-क्रशर उद्योग प्रभावित होगा। इसमें हमारी ओर से कोई गलती तो नहीं है। हमने तो कानूनी ढंग से ही काम किया। जिनका उद्योग 2015 के बाद से चल रहा है, उनके सामने तो बड़ी समस्या पैदा हो गई। हजारों लोग अचानक बेरोजगार होकर कहां जाएंगे। इसमें सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।     -पंकज सिंह, सचिव, झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ  

तस्करों के हमलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए क्यूआरटी तैनाती

धनबाद बीसीसीएल के ब्लॉक-दो क्षेत्र में कोयला चोरों के बढ़ते दुस्साहस और हिंसक घटनाओं ने प्रबंधन की नींद उड़ा दी है. लगातार मिल रही धमकियों और असुरक्षा के माहौल के बीच, मुख्यालय ने अब मोर्चा संभाल लिया है. ​पिछले कुछ समय से ब्लॉक-दो क्षेत्र में कोयला तस्करों का वर्चस्व इस कदर बढ़ गया था कि ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मारपीट और गाली-गलौज आम बात हो गई थी. स्थिति इतनी भयावह हो गई कि अधिकारियों ने खुद को असुरक्षित पाते हुए सामूहिक रूप से सीएमडी को पत्र लिखकर अपना तबादला करने की गुहार लगाई थी. अधिकारियों का कहना था कि जान जोखिम में डालकर काम करना मुमकिन नहीं है.  हरकत में आया मुख्यालय बीसीसीएल मुख्यालय रेस हो गया. प्रबंधन की साख और अधिकारियों के मनोबल को गिरते देख जीएम (सिक्योरिटी) हफीजुद्दीन कुरैशी खुद जमीनी हकीकत जानने ब्लॉक-दो के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे. सुरक्षा बैठक में कई फैसले ​जीएम सिक्योरिटी ने क्षेत्रीय महाप्रबंधक  कुमार रंजीव और अन्य उच्च अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समन्वय बैठक की. इस बैठक के कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. जीएम ने ​सुरक्षा का भरोसा दिया. जीएम सिक्योरिटी ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की सुरक्षा करना प्रबंधन की पहली प्राथमिकता है. सभी संवेदनशील और डेंजर पॉइंट्स पर सीआइएसएफ की क्यूआरटी को तैनात करने का निर्णय लिया गया. सुरक्षा बलों की गश्त और निगरानी को और सख्त करने के निर्देश दिए गए. बीसीसीएल प्रबंधन के इस कड़े रुख और सुरक्षा के नए वादों के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि ब्लॉक-दो क्षेत्र में खनन कार्य सामान्य हो सकेगा. ​ प्रबंधन का कड़ा रुख अधिकारियों से अपील की गई कि वे बिना किसी डर के काम करें. किसी भी असामाजिक तत्व के दबाव में आने या तबादले की सोचने की जरूरत नहीं है. जीएम सिक्योरिटी हफीजुद्दीन कुरैशी ने आश्वस्त किया कि कोयला चोरी रोकने और अधिकारियों को सुरक्षा देने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘तबादला समाधान नहीं है,’ बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को इतना दुरुस्त किया जाएगा कि अपराधी खुद पीछे हट जाएं.