samacharsecretary.com

सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा कैबिनेट विस्तार, 32 नए मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। पटना के गांधी मैदान में पहला कैबिनेट विस्तार किया गया, जिसमें 32 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का भी नाम शामिल है। आज से करीब 22 से दिन पहले जब सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया तब भी निशांत डिप्टी सीएम बनने की चर्चा हुई थी। जेडीयू के बड़े नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने पहले बिहार घूमने की बात कहकर डिप्टी सीएम बनने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भी जेडीयू के नेता निशांत को मनाने में जुटे रहे और अब वो सम्राट कैबिनेट में बतौर मंत्री शामिल हो गए हैं। सीएम ने निशांत कुमार को बिहार का स्वास्थ्य मंत्री बनाया है, जिस पद पर लंबे समय तक रहे मंगल पांडेय इस बार सरकार से ड्रॉप हो गए हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट के विस्तार के वक्त जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने निशांत कुमार को समझाया और बिहार सरकार में शामिल होने के लिए तैयार किया। अब निशांत को बिहार का स्वास्थ्य मंत्री बना दिया गया है। पहले यह विभाग भाजपा के पास रहा करता था, जिसे जदयू को दे दिया गया है। पहली बार मंत्री बने निशातं को स्वास्थ्य जैसे बड़े मंत्रालय की कमान सौंपी गई है। आपको बता दें कि जब निशांत कुमार मंत्री पद के लिए तैयार नहीं दिख रहे थे तब उनके साथ नजर आ रहे युवा विधायकों की कोर टीम में से किसी एक को मंत्री बनाने की चर्चा थी। जेडीयू के उन युवा विधायकों में रुहैल रंजन, अतिरेक कुमार, चेतन आनंद, कोमल सिंह, ऋतुराज कुमार, नचिकेता मंडल वगैरह का नाम शामिल था। भाजपा ने इन्हें बनाया मंत्री भाजपा कोटे से विजय कुमार सिन्हा, रामकृपाल यादव, केदार गुप्ता, नीतीश मिश्रा, मिथिलेश तिवारी, रमा निषाद,दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह,प्रमोद चंद्रवंशी, लखविंदर पासवान, संजय टाइगर, इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र, नंद किशोर राम, रामचंद्र प्रसाद और अरुण शंकर प्रसाद को मंत्री बनाया गया है। जेडीयू कोटे से कौन-कौन जेडीयू कोटे से निशांत कुमार, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, रत्नेश सदा, मदन सहनी, लेसी सिंह, श्वेता गुप्ता, बुलो मंडल, दामोदर रावत, भगवान सिंह कुशवाहा, सुनील कुमार, शीला मंडल और जमा खान को मंत्री बनाया गया है। विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव पहले से मंत्री हैं। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) से संजय सिंह व संजय पासवान, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हम से संतोष सुमन और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो से दीपक प्रकाश मंत्री बने हैं।

सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का मिशन, यूपी में शुरू होगा बड़ा वृक्षारोपण अभियान

 लखनऊ प्रदेश में इस बार पौधारोपण सिर्फ हरियाली बढ़ाने का अभियान नहीं होगा, बल्कि सामाजिक समरसता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन का व्यापक मिशन भी बनेगा। “नवीन विशिष्ट वनों की स्थापना” थीम के तहत सरकार ने अलग-अलग उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के वनों के विकास की योजना तैयार की है। महाअभियान कई अभिनव माडलों के जरिए प्रदेश के पर्यावरणीय परिदृश्य को नई दिशा देने का प्रयास करेगा। पिछले वर्षों की भांति इस मानसून सीजन में भी एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने की तैयारी है। अभियान के तहत महर्षि चरक ''औषधि वन'', ''समरस वन'', ''समृद्धि वन'', ''कृषि वन'', ''ऊर्जा वन'', ''कपि '''' और पौराणिक वनों के पुनर्स्थापन जैसी योजनाएं तैयार की हैं। इसके साथ ही विशेष तिथियों में पौधारोपण कार्यक्रमों की शृंखला भी तय की गई है, जिससे आमजन की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। ‘विविधता में एकता’ की थीम पर आधारित समरस वन में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी पौधारोपण में होगी। ब्लाक स्तर तक पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित कर सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया जाएगा। समृद्धि वन में किसानों की आय बढ़ाने वाले पौधे लगाए जाएंगे। कृषि भूमि पर विकसित किए जाने वाले समृद्धि वन से किसानों को कार्बन क्रेडिट और अतिरिक्त आय का लाभ मिलेगा। बंदरों के लिए आबादी के बाहर फलदार पौधे लगाकर ''कपि वन'' विकसित किए जाएंगे। इसके जरिए शहरों में इनके प्रवेश को रोका जाएगा। ऊर्जा वन में ऐसी प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे जिनसे ग्रामीणों को ईंधन के लिए लकड़ी मिल सके। महर्षि चरक औषधीय वन प्रत्येक जिले में औषधीय पौधों के संरक्षण और प्रचार के लिए न्यूनतम एक हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। अभियान का एक प्रमुख हिस्सा ‘मिशन छाया’ भी है, जिसके तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे लगाए जाएंगे। एक अध्ययन में पाया गया कि पेड़ों की छाया में तापमान में लगभग आठ डिग्री सेल्सियस तक कमी दर्ज की गई। इस मॉडल को प्रदेशभर में लागू करने की तैयारी है। प्रदेश के 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे सहित अन्य मार्गों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। मथुरा में 36 पौराणिक वनों के पुनर्जीवन के लिए 487 हेक्टेयर क्षेत्र में इको-रेस्टोरेशन कार्य किया जा रहा है। इन वनों में इस बार पारंपरिक और धार्मिक महत्व वाले पौधों का रोपण किया जाएगा। विशेष अवसरों पर भी होगा पौधारोपण 15 अगस्त: वंदे मातरम् वाटिका-‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर प्रत्येक जिले में कम से कम एक वाटिका विकसित की जाएगी, जिसमें 150 पौधे लगाए जाएंगे। इसमें ट्रस्ट, सामाजिक संगठनों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। 28 अगस्त: भाई-बहन पौधारोपण-रक्षाबंधन के दिन इसमें भाई-बहन मिलकर पौधे लगाएंगे। 5 सितंबर: ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान-शिक्षक दिवस के दिन प्रदेश में एक पौधा गुरु के नाम पर लगाया जाएगा।  

एससी-एसटी छात्रों के लिए बड़ी राहत, 9.78 लाख से ज्यादा को मिला योजना का लाभ

पटना अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 10वीं पास करने वाले छात्र-छात्राओं एवं 12वीं की परीक्षा उतीर्ण करने वाले मेधावी छात्राओं को मुख्यमंत्री मेधावृति योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके तहत पिछले 5 वर्षों में 9 लाख 78 हजार 306 छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है। इस योजना के माध्यम से छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। दसवीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर 10 हजार और द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर 8 हजार रुपये तक एकमुश्त सहायता राशि प्रदान की जाती है। इस क्रम में बारहवीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर 15 हजार और द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर 10 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता राशि प्रदान की जाती है। ऐसे स्टूडेंट्स उठा सकते हैं लाभ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में 1 लाख 63 हजार 826 एससी-एसटी छात्र-छात्राओं ने इसका लाभ उठाया है। वहीं वर्ष 2024 में 1 लाख 87 हजार 298, 2023 में 1 लाख 64 हजार 790, 2022 में 1 लाख 58 हजार 760, 2021 में 1 लाख 40 हजार 267 और 2020 में 1 लाख 63 हजार 365 छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है। इस दौरान विभाग ने 941.31 करोड़ रुपये की राशि वितरित की है। इस उपलब्धि से न केवल छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों से आने वाले एससी-एसटी युवाओं में उच्च शिक्षा की ओर रुझान भी बढ़ा है। विशेष रूप से राज्य में इस योजना ने एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को मजबूत प्रोत्साहन दिया है। इसके माध्यम से छात्र-छात्राएं अब बिना आर्थिक चिंता के शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहे है। ऐसे करें योजना में आवेदन इस वर्ष में उतीर्ण छात्र-छात्राएं जल्द ही योजना का लाभ लेने के लिए आधिकारिक वेबसाइट मेधासॉफ्ट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवश्यक दस्तावेजों में 10वीं और 12वीं की अंक-पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण शामिल है।

मौसम का बदला मिजाज बना खतरा, वज्रपात और तेज हवाओं की चेतावनी

पटना  बिहार में अप्रैल-मई महीने में आंधी, बारिश और ठनका का कहर देखा जा रहा है। वज्रपात की चपेट में आने और आंधी में पेड़ गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई। बारिश के कारण गर्मी की तपिश से राहत मिली है। पर मौसम का मिजाज लोगों को डरा रहा है। आज राज्य के 15 जिलों में ठनका और आंधी के साथ वर्षा का ऑरेंज अलर्ट मौम विभाग की ओर से जारी किया गया है। छह जिलों में लोगों को यथा संभव घरों में रहने की सलाह दी गई है। पूरे प्रदेश के किसानों को मौसम पर नजर रखते हुए खेती-बारी का कार्य करने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग की ओर से बताया गया है कि राज्य के पूर्णिया, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर किशनगंज, अररिया, कटिहार, मधेपुरा, सुपौल, सहरसा, मधुबनी, और समस्तीपुर समेत कई जिलों में तेज आंधी और बारिश और ठनका गिरने की संभावना बनी हुई है। इन जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही कई इलाकों में वज्रपात की भी चेतावनी दी गई है आज और कल गर्मी संग उमस तो 10 को बारिश बीएयू, सबौर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. बीरेंद्र कुमार ने बताया कि शुक्रवार एवं शनिवार को जहां आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और धूप-छांव के बीच लोगों को गर्मी व उमस का एहसास होगा। वहीं 10 एवं 11 मई को धूल भरी आंधी के बीच जिले में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने का अनुमान है। दिन में गर्मी-उमस ने किया परेशान भागलपुर में गुरुवार को आई आंधी-बारिश से जहां मौसम सुहाना हो गया था। 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली तो बिजली की गड़गड़ाहट के बीच हल्की बारिश हुई। इस बारिश को भारतीय मौसम विभाग के पैमाने पर 8.5 मिमी मापा गया। वहीं दिन में धूप-छांव से उपजे गर्मी व उमस से लोग परेशान रहे। बारिश के कारण जहां न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। वहीं पूर्वाह्न 11:30 बजे तक चमकी धूप व इसके बाद छाए बादल के कारण गर्मी का तेवर चढ़ गया और दिन का पारा ढाई डिग्री सेल्सियस तक उछल गया। गुरुवार को अधिकतम तापमान 32.2 व न्यूनतम 19.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य तापमान से क्रमश: पांच व 4.3 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा।

तिरहुत प्रमंडल के स्कूलों में मनमानी पर सख्ती, शिक्षा विभाग ने मांगा जवाब

 मुजफ्फरपुर तिरहुत प्रमंडल के तीन सौ से अधिक निजी स्कूलों पर शिक्षा विभाग की कार्रवाई की तलवार लटक गई है। फीस वृद्धि, किताब और पोशाक के नाम पर मनमानी वसूली की शिकायतों के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी सक्रिय हो गए हैं और चिह्नित स्कूलों के प्रबंधन व प्राचार्यों से जवाब-तलब की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बताया गया कि प्रमंडल के विभिन्न जिलों में संचालित निजी विद्यालयों की शुल्क संरचना और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। 300 स्कूल चिह्नित विभाग ने ऐसे करीब 300 स्कूलों को चिह्नित किया है, जहां नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली हैं। संबंधित स्कूलों से जवाब मांगा जा रहा है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त ने बिहार निजी विद्यालय शुल्क (विनियमन अधिनियम) 2019 का हवाला देते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। अधिनियम के अनुसार निजी विद्यालय हर वर्ष अधिकतम सात प्रतिशत तक ही फीस वृद्धि कर सकते हैं। बावजूद इसके कई स्कूलों द्वारा बिना उचित आधार के शुल्क बढ़ाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश आयुक्त ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में निजी विद्यालयों की नियमित निगरानी और निरीक्षण करें साथ ही फीस, पुस्तक और पोशाक से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा कर निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट उपलब्ध कराएं, ताकि अनियमितता पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। शिक्षा विभाग की इस सख्ती से निजी स्कूल संचालकों में बेचैनी बढ़ गई है। अभिभावकों को उम्मीद है कि विभाग की कार्रवाई से मनमानी फीस वसूली पर रोक लगेगी और उन्हें राहत मिलेगी।

बिहार में बड़ा ट्रैफिक संकट, टूटे विक्रमशिला सेतु पर बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की तैनाती

  भागलपुर बिहार की सिल्क सिटी भागलपुर की लाइफ लाइन कहलाने वाली विक्रमशिला सेतु पर आवागमन ठप हो जाने से कई जिलों में परेशानी बड़ गई है। इस सेतु को फिर से दुरुस्त करने और इस पर आवागमन चालू करने को लेकर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। कहा जा रहा है कि पुल से यातायात सुचारु होने में तीन माह का वक्त लगेगा। आम जनों की पेशानी को देखते हुए बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन को तैनात किया गया। बीआरओ उत्तर बिहार को भागलपुर समेत अन्य कई जिलों से जोड़ने वाले इस पुल से आंशिक आवागमन की व्यवस्था बहाल करने के लिए काम शुरू हो ह गया है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की मदद से बेली ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। लोगों को हो रही असुविधा को देखते हुए तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों ने विक्रमशिला सेतु की मरम्मत के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की सहायता से शीघ्र ही एक बेली ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। इसको लेकर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आंशिक रूप से यातायात को तुरंत बहाल करना, ताकि जनता को हो रही असुविधा कम हो सके। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु भागलपुर एवं आसपास के जिलों के लोगों के लिए लाइफलाइन है। इसलिए बेली ब्रिज का निर्माण कर आंशिक रूप से यातायात शुरू किया जाएगा। क्या है बेली ब्रिज? बेली ब्रिज एक इमरजेंसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के समय किया गया था। बेली ब्रिज एक प्रकार का पोर्टेबल, प्री कास्टेड स्टील ट्रस ब्रिज है। इसे युद्ध या आपदा के समय तेजी से और आसानी से ट्रस को एक दूसरे को जोड़कर बनाया जाता है। यह मॉड्यूलर डिज़ाइन पर आधारित है। सका आविष्कार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1940-41 में ब्रिटिश इंजीनियर डोनाल्ड कोलमैन बेली ने किया था। इसमें भारी उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती और यह अस्थायी या स्थायी दोनों तरह से काम आ सकता है। सेना और सीमा सड़क संगठन इसका उपयोग दूरदराज के क्षेत्रों या बाढ़, भूस्खलन अन्य आपदा की स्थिति में संपर्क बहाल करने के लिए करते हैं। यह ट्रस नामक त्रिकोणीय स्टील स्ट्रक्चर से बनता है, जिन्हें पिन और बेल्ट की सहायता से आसानी से जोड़ा जा सकता है। रविवार आधी रात को टूटा था पुल यह घटना रविवार रात लगभग 12.30 बजे की है। पहले सेतु पर 133 नंबर पोल के पास कुछ हिस्सा धंस गया। उसी वक्त आवागमन रोक दिया गया। लेकिन कुछ ही देर बाद वह हिस्सा टूट गया। एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने रात 1.15 बजे इसकी सूचना दी और लोगों से विक्रमशिला सेतु की ओर न जाने की अपील की है। पुलिस की सतर्कता से जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ। घटना के समय सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली में थे। हालांकि उन्होंने पटना पहुंचते ही उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर जल्द से जल्द आवागमन सुचारु कराने के आदेश अधिकारियों को दिया। इस मामले में लापरवाही के आरोप कार्यपालक अभियंता को सस्पेंड कर दिया गया।

देवघर एयरपोर्ट से गुवाहाटी, हैदराबाद और सूरत के लिए नई उड़ानें जल्द

 देवघर  गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने गुरुवार को देवघर में कहा कि अक्टूबर-नवंबर में देवघर में बिहार-झारखंड का पहला वीजा फेसिलटी सेंटर शुरू होगा। अभी तक लोग वीजा बनवाने दिल्ली या कोलकाता जाते थे। अब यह सुविधा देवघर में मिलेगी। जानकारी हो कि मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में भी यह सुविधा नहीं है। अभी छोटे देश जाने के लिए वीजा बनना शुरू होगा। पर्यटन या पढ़ाई के लिए सिंगापुर, दुबई, थाइलैंड, मलेशिया, बैंकॉक जाने वालों को देवघर वीजा केंद्र से वह सुविधा मिलने लगेगी। देवघर एक बड़ा केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि दो न्यूक्लियर प्लांट भी इस क्षेत्र को मिल रहा है। एक देवघर के पुनासी डैम और दूसरा बिहार के बांका में होगा। देवघर से हैदराबाद, गुवाहाटी, सूरत की चलेगी फ्लाइट सांसद ने बताया किया कि देवघर एयरपोर्ट का विस्तार होगा। जिसके लिए 450 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुका है। शीघ्र ही निविदा होगी। जल्द ही देवघर एयरपोर्ट से नई उड़ान शुरू होगी। देवघर से गुवाहाटी, हैदराबाद और सूरत की विमान सेवा शुरू होगी। वहीं, मुंबई और कोलकाता के लिए अब प्रतिदिन फ्लाइट हो जाएगी। जानकारी हो कि अभी दिल्ली, बेंगलुर की प्रतिदिन यात्री विमान है। मुंबई के लिए सप्ताह में तीन दिन है। जो प्रतिदिन हो जाएगी। गोड्डा से गुजरात और कोटा की सीधी ट्रेन देवघर और गोड्डा से लगातार नई ट्रेन नए गंतव्य के लिए चल रही है। एक नहीं कई ट्रेनें हो गई हैं। इस बीच सांसद ने एलान किया कि जल्द ही गोड्डा से गुजरात और कोटा की सीधी ट्रेन चलेगी। दिसंबर 2027 तक गोड्डा-महगामा रेल लाइन का काम पूरा हो जाएगा और महगामा तक ट्रेन चलने लगेगी। वहीं, 28 जून 2028 तक देवघर से पीरपैंती रेल लाइन पूरी हो जाएगी। उसके बाद सीधी ट्रेन चलेगी। गोड्डा-पाकुड़ के बीच भी रेल लाइन बिछेगी। यह पीपीपी मोड पर होगा। साहिबगंज-पाकुड़ को मिलेगी वंदे भारत डॉ. निशिकांत ने कहा कि भागलपुर से कोलकाता के बीच एक वंदे भारत जल्द शुरू होगी। इससे साहिबगंज और पाकुड़ के लोगों को फायदा होगा। साहिबगंज और पाकुड़ में इसका ठहराव होगा। वंदे भारत सुबह भागलपुर से चलेगी और शाम में कोलकाता से भागलपुर के लिए वापस होगी। यह वाया साहिबगंज और पाकुड़ होगी। बता दें कि पाकुड़ सबसे अधिक राजस्व देने वाला इलाका है।  

2819 अभ्यर्थियों को राहत नहीं, 8 और 9 मई को होगी पेपर-2 की परीक्षा

 रांची झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद में महत्वपूर्ण सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रार्थी और अन्य सभी 2819 अभ्यर्थी अगर चाहें तो 8 और 9 मई को होने वाली पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने फिलहाल पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद से संबंधित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान प्रार्थियों ने पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने का आग्रह किया था। लेकिन अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत नहीं दी। अदालत ने कहा कि परीक्षार्थी चाहें तो उक्त परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में अब प्रार्थियों सहित सभी 2819 अभ्यर्थी आठ और नौ मई को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होना होगा। सुनवाई के दौरान सरकार और जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि परीक्षा में 24 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए, यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित थी। 2819 अभ्यर्थी के आइपी एड्रेस में हैकिंग पाई गई थी, जिसके कारण जेएसएससी ने इनकी पुनर्परीक्षा आठ व नौ मई को लिए जाने का निर्देश दिया। इन सभी अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया गया। अदालत ने प्रार्थियों के पुनर्परीक्षा पर रोक से संबंधित मांग को अस्वीकार करते हुए प्रार्थियों को निर्देश दिया कि वह चाहें तो पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार और जेएसएससी को इस वर्ष जून माह तक परिणाम जारी करने का निर्देश भी दिया है। इस संबंध में अर्चना कुमारी और अन्य की ओर से मामले में याचिका दायर की है। जिसमें जेएसएससी को माडल आंसर दिखाने का आदेश देने का मूल आग्रह किया है ताकि वह माडल आंसर के विरुद्ध आपत्ति दे सकें। लेकिन संशोधन याचिका के माध्यम से प्रार्थियों ने जेएसएससी द्वारा जारी 23 अप्रैल 2026 को जारी नोटिस को चुनौती दी है। नोटिस के जरिए जेएसएससी ने 2819 अभ्यर्थियों, जिनमें 20 प्रार्थी भी शामिल हैं, को आठ मई 2026 को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया है। उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया था कि बिना परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों की पहचान किए और बिना दोषी अभ्यर्थियों को चिह्नित किए सभी 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना अवैध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। प्रार्थी किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों में शामिल नहीं रहे हैं, लेकिन उन्हें भी दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। आयोग को पहले कथित अनियमितताओं में शामिल परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों और संबंधित अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, न कि सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से परेशान करना चाहिए

निशांत को मिला स्वास्थ्य मंत्रालय, विजय सिन्हा के विभाग में बदलाव

पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कैबिनेट विस्तार के बाद बिहार सरकार के सभी मंत्रियों के बीच मंत्रालयों और विभागों का बंटवारा कर दिया है। सीएम सम्राट चौधरी ने गृह विभाग अपने पास रखा है। पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को पहली बार मंत्री बनने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय मिला है। पिछली सरकार में डिप्टी सीएम रहे विजय कुमार सिन्हा का विभाग बदल दिया गया है। अब विजय सिन्हा कृषि मंत्रालय के मंत्री बनाए गए हैं। पिछली कैबिनेट में उनके पास राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी थी। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल अब राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री होंगे। वह पहले भी यह विभाग संभाल चुके हैं। दोनों डिप्टी सीएम के पास कौन–से विभाग सम्राट सरकार में जदयू कोटे से पहले डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी के पास जल संसाधन और संसदीय कार्य विभाग की जिम्मेदारी रहेगी। दूसरे डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव भी वित्त एवं वाणिज्य कर विभाग के मंत्री बने रहेंगे, हालांकि उनसे ऊर्जा विभाग ले लिया गया है। पहली बार मंत्री बने बुलो मंडल को नया ऊर्जा मंत्री बनाया गया है। मिथिलेश तिवारी बिहार के नए शिक्षा मंत्री जदयू कोटे के मंत्री सुनील कुमार का विभाग बदल दिया गया है। शिक्षा विभाग भाजपा के पास चला गया है। मिथिलेश तिवारी बिहार के नए शिक्षा मंत्री बनाए गए हैं। इसके बदले स्वास्थ्य विभाग जदयू को मिला है, जिसकी कमान निशांत को सौंपी गई है। नाम पार्टी विभाग सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री भाजपा मुख्यमंत्री सचिवालय गृह विभाग निगरानी सभी अनावंटित विभाग विजय चौधरी, डिप्टी सीएम जदयू जल संसाधन संसदीय कार्य बिजेंद्र यादव, डिप्टी सीएम जदयू वित्त एवं वाणिज्य कर विजय सिन्हा, मंत्री भाजपा कृषि विभाग रामकृपाल यादव, मंत्री भाजपा   नीतीश मिश्रा, मंत्री भाजपा नगर विकास एवं आवास विभाग केदार गुप्ता, मंत्री भाजपा   दिलीप जायसवाल, मंत्री भाजपा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग मिथिलेश तिवारी, मंत्री भाजपा शिक्षा विभाग रमा निषाद, मंत्री भाजपा   प्रमोद चंद्रवंशी, मंत्री भाजपा   लखेंद्र पासवान, मंत्री भाजपा   संजय सिंह टाइगर, मंत्री भाजपा उच्च शिक्षा विभाग कुमार शैलेंद्र, मंत्री भाजपा पथ निर्माण विभाग नंदकिशोर राम, मंत्री भाजपा   रामचंद्र प्रसाद, मंत्री भाजपा   अरुण शंकर प्रसाद, मंत्री भाजपा श्रम संसाधन श्रेयसी सिंह, मंत्री भाजपा   श्रवण कुमार, मंत्री जदयू   निशांत कुमार, मंत्री जदयू स्वास्थ्य विभाग अशोक चौधरी, मंत्री जदयू   लेशी सिंह, मंत्री जदयू   मदन सहनी, मंत्री जदयू   सुनील कुमार, मंत्री जदयू   जमा खान, मंत्री जदयू   शीला मंडल, मंत्री जदयू   रत्नेश सदा, मंत्री जदयू   भगवान कुशवाहा, मंत्री जदयू   दामोदर रावत, मंत्री जदयू   शैलेश– बुलो मंडल, मंत्री जदयू ऊर्जा विभाग श्वेता गुप्ता, मंत्री जदयू   संजय पासवान, मंत्री लोजपा–आर   संजय सिंह, मंत्री लोजपा–आर   संतोष सुमन, मंत्री हम   दीपक प्रकाश, मंत्री रालोमो    

जिस मंत्री के जवाब से नाराज थीं मैथिली ठाकुर, सम्राट कैबिनेट से पत्ता साफ

पटना  बिहार में सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार के मंत्रिमंडल का गुरुवार को विस्तार हो गया है. नीतीश कुमार के बेटे सहित 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली है. बीजेपी कोटे से 15 मंत्री बनाए गए हैं तो जेडीयू से 13 मंत्री बने हैं. इसके अलावा चिराग पासवान की पार्टी से दो, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से एक-एक मंत्री बने हैं।  सम्राट सरकार में ज्यादातर नीतीश कैबिनेट में रहने वाले मंत्रियों को ही जगह मिली है. ऐसे में बीजेपी के एक ऐसे दिग्गज मंत्री का पत्ता सम्राट कैबिनेट से कट गया है, उनका नाम मंगल पांडेय है. बीजेपी ने तीन पुराने मंत्रियों को सम्राट सरकार में जगह नहीं दी है।  मंगल पांडेय सीवान से विधायक हैं और बीजेपी के दिग्गज नेता हैं. नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं. इसी साल फरवरी में बजट सत्र के दौरान मशहूर लोक गायिका और बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने अपने विधानसभा क्षेत्र के अस्पताल की बदहाली का मुद्दा उठाया था. इस पर स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा दिए जवाब से संतुष्ट नहीं थी और उसी मंत्री मंगल पांडेय का पत्ता कट गया है।  मंगल पांडेय का मंत्री पद से पत्ता कटा बिहार बीजेपी के दिग्गज नेता मंगल पांडेय को सम्राट चौधरी के अगुवाई वाली सरकार में जगह नहीं मिल सकी. बीजेपी ने उन्हें इस बार मंत्री नहीं बनाया है जबकि इससे पहले वाली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री जैसा विभाग संभाल रहे थे. मंगल पांडेय 2017 से लेकर 2022 तक स्वास्थ्य मंत्री रहे. तब मंगल पांडेय को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया था।   मंगल पांडेय 2024 से लेकर 2025 तक दूसरी बार मंत्री बने. इस बार स्वास्थ्य मंत्री और कृषि मंत्री की जिम्मेदारी संभाली. साल 2025 में जब एनडीए की सरकार बनी तो फिर से मंत्री बने और उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा मिला, लेकिन सम्राट चौधरी के अगुवाई वाले मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी।  स्वास्थ्य मंत्री से मैथिली ठाकुर ने किया सवाल 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर मशहूर लोक गायिका मैथिली ठाकुर बीजेपी से विधायक चुनी गई. मैथिली ठाकुर ने बजट सत्र के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र में अस्पताल की इमारत की हालत का मुद्दा उठाया था और कहा था कि यह इतनी जर्जर है कि एक बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है.उन्होंने कहा था कि छत से प्लास्टर लगातार गिर रहा है, दीवारों में गहरी दरारें हैं और बरसात के मौसम में वार्डों में पानी रिसता है, जो लोगों की जिंदगी लिए सीधा खतरा है।  मैथिली ठाकुर ने सवाल उठाया था कि बिहार सरकार द्वारा हर साल स्वास्थ्य बजट बढ़ाने के बाद अस्पतालों की इमारतें इतनी खराब हालत में क्यों हैं? उन्होंने कहा Le कि डॉक्टरों और दवाओं की कमी एक समस्या है,लेकिन इससे भी बड़ा खतरा जर्जर इमारतें हैं, जो कभी भी गिर सकती हैं. क्या सरकार नए भवनों के निर्माण से पहले किसी बड़ी दुर्घटना के होने का इंतजार कर रही है।  मंगल पांडेय के जवाब से संतुष्ट नहीं मैथिली बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर के सवालों का जवाब देते हुए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा था कि राज्य सरकार अस्पतालों की इमारतों को लेकर गंभीर है. कई अस्पतालों के लिए नई बिल्डिंग को मंजूरी दे दी गई है और कुछ जगह पर काम जारी है. हालांकि, मंत्री के जवाब से मैथिली ठाकुर संतुष्ट नहीं हुईं।  उन्होंने सदन में ही तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उनके इलाके का अस्पताल कई सालों से लिस्ट में है, लेकिन आज तक न मरम्मत का काम शुरू हुआ है और न ही नई इमारत बनी है. उन्होंने कहा था कि कागजों पर जो 'सब ठीक' बताया जा रहा है, धरातल पर सच्चाई उसके ठीक उलट है।  मैथिली ठाकुर ने कहा था कि हर साल सिर्फ योजना बनाने और मंजूरी देने की बात होती है, लेकिन जमीनी हकीकत वही रहती है. उन्होंने यह भी कहा कि मरीज और उनके परिवार डर के साये में इलाज कराने के लिए मजबूर हैं. मैथिली ठाकुर के बार-बार पूछे गए सवालों के बाद सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया था. तीन महीने के बाद ही बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ और सम्राट चौधरी के अगुवाई में कैबिनेट गठन किया तो मंगल पांडेय को जगह नहीं मिली।  बिहार में तीन पुराने मंत्रियों का पत्ता कटा नीतीश कुमार के अगुवाई वाली सरकार में जितने भी मंत्री थे, उनमें से तीन मंत्री को छोड़कर बाकी मंत्रियों को सम्राट कैबिनेट में जगह मिल गई है. सम्राट कैबिनेट में मंगल पांडे को जगह नहीं मिली. इसके अलावा नारायण प्रसाद और सुरेंद्र मेहता को भी जगह नहीं मिली. नीतीश सरकार में नारायण प्रसाद आपदा प्रबंधन मंत्री थे और इससे पहले पर्यटन मंत्री रह चुके हैं. सुरेंद्र मेहता पूर्व की नीतीश सरकार में पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री थे, लेकिन इस बार उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिली है।