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यात्रियों को बड़ा तोहफा, जनजाति दिवस पर रेलवे ने शुरू की 3 विशेष ट्रेनें

चक्रधरपुर/रांची. जनजाति दिवस के मौके पर दक्षिण पूर्व रेलवे ने चक्रधरपुर रेलमंडल के टाटानगर से आनंद विहार, रांची से दिल्ली और हावड़ा से नई दिल्ली के बीच 22 और 23 मई को तीन स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा कर दी है। इन स्पेशल ट्रेनाें के चलने से झारखंड, बंगाल के लोगों को फायदा होगा। जनजाति दिवस के अवसर पर यात्रियों की होने वाली अतिरिक्त भीड़ कम होगी और यात्रियों को कंफर्म सीट मिलेगी। टाटानगर-आनंद विहार स्पेशल 23 मई को चलेगी ट्रेन नंबर 08183 टाटानगर-आनंद विहार स्पेशल 23 मई की रात 12:30 बजे टाटानगर से प्रस्थान करेगी और अगले दिन अहले सुबह 03:30 बजे आनंद विहार स्टेशन पहुंचेगी। वापसी की दिशा में, ट्रेन नंबर 08184 आनंद विहार-टाटानगर स्पेशल 25 मई की रात 01:45 बजे आनंद विहार स्टेशन से रवाना होगी और दूसरे दिन रात 12:15 बजे टाटानगर पहुंचेगी। इस ट्रेन का ठहराव दक्षिण पूर्व रेलवे के क्षेत्राधिकार में आने वाले मुरी और बोकारो स्टील सिटी स्टेशनों पर होगा। रांची-दिल्ली स्पेशल 23 मई को चलेगी ट्रेन नंबर 08639 रांची-दिल्ली स्पेशल 23 मई की सुबह 03:30 बजे रांची से खुलेगी और दूसरे दिन अहले सुबह 03:30 बजे दिल्ली पहुंचेगी। वहीं, वापसी के दौरान, ट्रेन नंबर 08640 दिल्ली-रांची स्पेशल 25 मई की रात 01:25 बजे दिल्ली से चलेगी और उसी दिन रात 11:15 बजे रांची पहुंचेगी। इस ट्रेन का ठहराव दक्षिण पूर्व रेलवे के क्षेत्राधिकार में आने वाले लोहरदगा स्टेशन पर होगा। हावड़ा-नई दिल्ली स्पेशल 23 मई को चलेगी ट्रेन नंबर 08057 हावड़ा-नई दिल्ली स्पेशल 22 मई की शाम 05:15 बजे हावड़ा से प्रस्थान करेगी और तीसरे दिन रात 12:10 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। वापसी में, ट्रेन नंबर 08058 नई दिल्ली-हावड़ा स्पेशल 25 मई की अहले सुबह 02:15 बजे नई दिल्ली से रवाना होगी और दूसरे दिन सुबह 04:15 बजे हावड़ा स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन का ठहराव दक्षिण पूर्व रेलवे के क्षेत्राधिकार में आने वाले खड़गपुर, बांकुड़ा, आद्रा, भोजुडीह और महुदा स्टेशनों पर होगा।

रेल कनेक्टिविटी को बढ़ावा, बगहा-पाटलिपुत्र इंटरसिटी में जोड़े गए चार अतिरिक्त कोच

पश्चिम चंपारण पश्चिम चम्पारणवासियों के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब क्षेत्र को दो नई ट्रेनों की सौगात मिली। नरकटियागंज जंक्शन से दरभंगा जंक्शन तथा सिकटा से मुजफ्फरपुर जंक्शन के लिए नई ट्रेनों का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, सांसद सुनील कुमार एवं सिकटा विधायक समृद्ध वर्मा ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर ट्रेनों को रवाना किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि, रेल अधिकारी एवं रेल यात्री मौजूद रहे। नई ट्रेन सेवा शुरू होने से क्षेत्र के लोगों में खुशी और उत्साह का माहौल देखा गया। सिकटा क्षेत्र को मिली बेहतर कनेक्टिविटी सिकटा विधायक समृद्ध वर्मा ने कहा कि सिकटा विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से बेहतर रेल कनेक्टिविटी से वंचित था। आज का दिन क्षेत्रवासियों के लिए बेहद खुशी और गौरव का दिन है। अगर यह ट्रेन सेवा पटना तक विस्तारित हो जाती, तो क्षेत्र के लोगों को और अधिक सुविधा मिलती, क्योंकि सिकटा विधानसभा क्षेत्र से पटना के लिए अब तक कोई सीधी ट्रेन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने इस सौगात के लिए प्रधानमंत्री एवं रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया बगहा-पाटलिपुत्र इंटरसिटी में बढ़े चार कोच केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि नरकटियागंज से दरभंगा और सिकटा से मुजफ्फरपुर के लिए शुरू की गई ट्रेनें चम्पारणवासियों के लिए बड़ी सौगात हैं। उन्होंने बताया कि यात्रियों की सुविधा को देखते हुए बगहा से पाटलिपुत्र जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस में चार अतिरिक्त कोच भी जोड़े गए हैं। नरकटियागंज में बनेगा वाशिंग पिट केंद्रीय राज्य मंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि नरकटियागंज में बहुत जल्द वाशिंग पिट का निर्माण कार्य शुरू होगा। रेलवे ने इसे वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वाशिंग पिट तैयार होने के बाद नरकटियागंज से दूर-दराज के शहरों के लिए नई ट्रेनों के संचालन का रास्ता खुल जाएगा। शाम की ट्रेन सेवा शुरू कराने का आश्वासन नरकटियागंज से मुजफ्फरपुर के लिए शाम के समय कोई पैसेंजर ट्रेन नहीं होने के कारण यात्रियों को हो रही परेशानी के सवाल पर मंत्री ने कहा कि रेलवे इस दिशा में भी प्रयास करेगा, ताकि शाम के समय भी पटना एवं मुजफ्फरपुर के लिए ट्रेन सेवा शुरू की जा सके। नई ट्रेन सेवाओं के शुभारंभ से चम्पारण क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।  

बिचौलियों की भूमिका खत्म, बिहार में 17.37 करोड़ लाभार्थियों को मिला डीबीटी का लाभ

 पटना  हर नई व्यवस्था को लेकर हीला-हुज्जत का एक दौर-सा चलता है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के साथ भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही थी। चूंकि सरकार का स्पष्ट निर्देश था, लिहाजा कोताहियों के लिए गुंजाइश ही नहीं बची। अब नकदी अंतरण की इस व्यवस्था का प्रत्यक्ष लाभ दिखने लगा है। इसने बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त-सी कर दी है। परिणामस्वरूप अब जन-कल्याणकारी योजनाओं की पूरी रकम लाभुकों को मिल रही। पूर्वी चंपारण के बाद समस्तीपुर और मधुबनी मेंं सर्वाधिक राशि का वितरण रुपये में 85 पैसे इधर-उधर बंट जाने की नौबत ही नहीं रही। पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में डीबीटी के जरिये बिहार के लिए केंद्र से 49622.73 करोड़ रुपये जारी हुए और सारी रकम लाभुकों के खाते में सीधे पहुंची। बिहार में डीबीटी लाभार्थियों की कुल संख्या 17.37 करोड़ है, जिनमें सर्वाधिक 87 लाख पूर्वी चंपारण जिला से हैं। डीबीटी मोदी सरकार की बेहतरीन उपलब्धियों मेंं से एक है। सत्ता के शुरुआती वर्षों में ही उन्होंने इस परिकल्पना को साकार किया था। 49622.73 करोड़ रुपये मिले बिहार को पिछले वित्तीय वर्ष में हालांकि, बिहार में उससे लगभग सात-आठ वर्ष पहले से कुछ योजनाओं में डीबीटी जैसी व्यवस्था थी। इंदिरा आवास, साइकिल और पोशाक योजना आदि की राशि सीधे लाभुकों के खाते मेंं भेजी जा रही थी। उसका क्रांतिकारी परिणाम सामने आया। बाद में यह व्यवस्था सर्वव्यापी हो गई और अब अनुदान या आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए इसे ही सर्वोत्तम उपाय माना जा रहा है। दरअसल, इसके कारण बिचौलियों के समाप्त होने से पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर रोक लगी है। मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है, लिहाजा धन का रिसाव बंद हुआ है। पूरे देश में बंटे 6.17 लाख करोड़ पहले योजनाओं की राशि नकद या चेक से बंटती थी, जिसमें धांधली की गुंजाइश रहती थी। अब डिजिटल माध्यम से पूरा पैसा तय समय पर सीधे लाभार्थी तक पहुंचता है। सरकारी योजनाओं का सटीक लाभ उठाने के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बैंक खाता आधार से लिंक हो। 328 योजनाओं में डीबीटी : अभी कुल 328 योजनाओं में केंद्र द्वारा डीबीटी की व्यवस्था है। इनके अंतर्गत 2025-26 में पूरे देश में 6.17 लाख करोड़ रुपये डीबीटी के जरिये लाभुकों के बैंक खाते में सीधे गए। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को बिहार से अधिक राशि मिली। इसका एक कारण लाभार्थियों की संख्या रही। दूसरा कारण, योजनाओं के लिए देय राशि में अंतर रहा। बिहार में सर्वाधिक राशि क्रमश: पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर और मधुबनी के लाभुकों को मिली है। देश में प्रमुख राज्यवार डीबीटी स्थिति राज्य     लाभार्थी (करोड़ में)     डीबीटी निधि (करोड़ रुपये में) बिहार        17.37                       49,622.73 मध्य प्रदेश     14.33              53,480.83 महाराष्ट्र         18.14              63,731.69 उत्तर प्रदेश     32.78             88,353.49 बिहार के प्रमुख जिलों का ब्योरा जिला       लाभार्थी (लाख में)     डीबीटी निधि (करोड़ रुपये में) पूर्वी चंपारण     87                             2,672.50 पटना            84                           1,985.86 मुजफ्फरपुर     81                          1,972.82 मधुबनी            78                           2,016.01 समस्तीपुर     75                          2,017.57 गया          68                         1,890.14 पश्चिम चंपारण 67                        1,893.59 दरभंगा            67                        1,546.75 वैशाली          60                        1,762.82 सारण         62                        1,789.18

रांची में ईंधन की भारी किल्लत: लंबी कतारें, सीमित पेट्रोल-डीजल और बढ़ी कालाबाजारी

 रांची शहर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत अब गंभीर रूप लेती जा रही है। रविवार को शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिली, जबकि करीब 60 प्रतिशत पेट्रोल पंप बंद रहे। हालात ऐसे हो गए कि कई पंपों पर उपभोक्ताओं को केवल 200 रुपये तक का पेट्रोल और अधिकतम 2000 रुपये तक का डीजल ही दिया गया। इससे आम लोगों के साथ-साथ व्यावसायिक वाहनों के चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पेट्रोल पंप बंद होने के कारण शहर में बढ़ते पेट्रोल-डीज की कीमतों को लोगों में असर नहीं पड़ रहा है। लोग बढ़े हुए कीमत पर चर्चा तक नहीं कर रहे है पेट्रोल पंप संचालकों की बड़ी भूमिका वहीं ब्लैक में पेट्रोल चौक-चौराहों पर लगभग 115 से 120 रुपये लीटर बिक रहा है, जबकि रांची में पेट्रोल की कीमत 100.86 रुपये है। वहीं डीजल की कालाबाजारी औद्योगिक क्षेत्रों में जारी है, शहर में पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी भूमिका पेट्रोल पंप संचालकों की है। शहर के पेट्रोल पंप संचालक ही दलालों को डब्बा व गैलन में पेट्रोल-डीजल भर-भर कर दे रहे है। चौक-चौराहों पर खुलेआम ब्लैक में बिक रहा पेट्रोल शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर बोतलों और गैलनों में पेट्रोल-डीजल खुलेआम ब्लैक में बिकता नजर आया। कई जगहों पर सामान्य कीमत से अधिक दर पर ईंधन बेचा जा रहा है। ईंधन संकट का फायदा उठाकर कई लोग पेट्रोल और डीजल को पहले से जमा कर अब अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। सामान्य दिनों में जहां पेट्रोल निर्धारित दर पर मिलता है, वहीं संकट के बीच बोतल में भरकर 20 से 40 रुपये प्रति लीटर तक अतिरिक्त वसूली की जा रही है। मजबूरी में लोग अधिक कीमत देकर भी पेट्रोल खरीदने को विवश हैं। इधर पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने बताया कि पेट्रोल डिपो से नहीं मिलने के कारण शहर में तेजी से अधिकांश पेट्रोल पंप ड्राई हो रहे है। दोपहर बाद सूने पड़ गए कई पेट्रोल पंप सुबह के समय शहर के कई पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ रही, लेकिन दोपहर बाद अधिकांश पंपों में या तो स्टॉक खत्म हो गया या फिर भीड़ कम हो गई। शाम होते-होते कई पंप निर्धारित समय से पहले ही बंद कर दिए गए। इससे देर शाम यात्रा करने वाले लोगों को और अधिक परेशानी उठानी पड़ी। स्थानीय दुकानदारों और वाहन चालकों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते कालाबाजारी पर रोक नहीं लगाता है तो स्थिति और बिगड़ सकती है। लोगों ने जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग से मांग की है कि पेट्रोल-डीजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ ब्लैक मार्केटिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।  

पढ़ाई का दबाव बना परेशानी, RIMS के छात्र डिप्रेशन से जूझने को मजबूर

रांची. राज्य के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षित कुजूर की आत्महत्या की घटना ने मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। रिम्स प्रबंधन ने माना है कि मेडिकल छात्रों के बीच तनाव और अवसाद की समस्या लगातार बढ़ रही है। रिम्स के डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) डा. शिव प्रिय ने बताया कि एमबीबीएस से लेकर पीजी स्तर तक लगभग हर बैच में कुछ छात्र मानसिक तनाव और डिप्रेशन से गुजर रहे हैं। कई विद्यार्थियों का इलाज रिनपास और सीआइपी जैसे संस्थानों में चल रहा है। ऐसे छात्रों की निगरानी भी की जाती है, लेकिन चुनौती उन मामलों में आती है जहां छात्र अपनी परेशानी साझा नहीं कर पाते। मालूम हो कि पिछले कुछ वर्षों में रिम्स में मेडिकल छात्रों से जुड़ी कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। अक्टूबर 2024 में प्रेम संबंध से जुड़े तनाव में पीजी के छात्र और छात्रा ने हास्टल की छत से कूदकर जान दे दी थी। नवंबर 2023 में भी एक मेडिकल छात्र का जला हुआ शव बरामद हुआ था। पहले भी कई छात्र हास्टल में ही आत्महत्या कर चुके हैं। अभी एक दिन पहले एम छात्र ने हास्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि मेडिकल शिक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संस्थागत स्तर पर और गंभीर प्रयासों की जरूरत है। पढ़ाई के साथ हर समय बेहतर करने का दबाव डॉ. शिव प्रिय के अनुसार मेडिकल शिक्षा का वातावरण अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक होता है। लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव छात्रों को मानसिक रूप से प्रभावित करता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल कठिन पढ़ाई ही आत्महत्या या डिप्रेशन का कारण नहीं है। व्यक्तिगत जीवन, भावनात्मक रिश्ते, अकेलापन और पारिवारिक दूरी जैसी बातें भी छात्रों को भीतर से तोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्रों की उम्र ऐसी होती है जहां भावनात्मक सहारे की जरूरत अधिक होती है। कई बार छात्र अपनी भावनाएं साझा नहीं कर पाते और धीरे-धीरे अवसाद की स्थिति में पहुंच जाते हैं। एनएमसी की गाइडलाइन के तहत होती है निगरानी रिम्स प्रशासन के मुताबिक नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की गाइडलाइन के अनुसार हर मेडिकल छात्र के साथ एक फैकल्टी मेंटर जोड़ा जाता है, ताकि छात्रों की मानसिक और शैक्षणिक स्थिति पर नजर रखी जा सके। एमबीबीएस में नामांकन के समय छात्रों की काउंसलिंग भी कराई जाती है। हालांकि रिम्स प्रबंधन मानता है कि केवल औपचारिक काउंसलिंग पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से अब संस्थान में नियमित योग और मेडिटेशन क्लास शुरू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि छात्रों के तनाव को कम किया जा सके। साथ ही समय-समय पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन उनमें छात्रों की भागीदारी बहुत कम रहती है। रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने कहा कि बच्चों में बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए अभिभावकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों से नियमित बातचीत करनी चाहिए और उनके व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी छात्र के व्यवहार में असामान्यता दिखे तो परिवार को तुरंत पहल करनी चाहिए। जरूरत पड़े तो छात्र को घर ले जाएं या कालेज प्रशासन को जानकारी दें, ताकि समय रहते मदद पहुंचाई जा सके। मौन सबसे बड़ा खतरा : मनोचिकित्सक रिनपास के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा बताते हैं कि मेडिकल छात्रों में अवसाद की सबसे बड़ी वजह अपनी समस्या को भीतर दबाए रखना है। प्रतिस्पर्धा, भविष्य का दबाव और लगातार प्रदर्शन की चिंता छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर बना रही है। ऐसे में संस्थानों में नियमित मनोवैज्ञानिक सहायता, खुला संवाद और संवेदनशील माहौल तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है। अक्षित कुजूर का हुआ पोस्टमार्टम एमबीबीएस के छात्र अक्षित कुजूर के शव का रविवार को पोस्टमार्टम किया गया। इस बीच छात्र के पिता कोडरमा से रिम्स पहुंचे और उनकी सहमति के बाद पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की गई। इस बीच उनके पिता की आंखें नम थी और एक ही बात बाेल रहे थे कि उनका सबकुछ चला गया। इस बीच अक्षित कुजूर के मित्रों ने पिता को संभाला। प्रबंधन ने बताया कि अभी पुलिस को सिर्फ सूचना दी गई है, उनके पिता से अनुमति अगर मिलती है तो इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। फिलहाल पुलिस छानबीन में जुटी है और जिस प्रेमिका की बात सामने आ रही है उसकी जांच की जा रही है।

सुनील यादव का अलग अंदाज, घोड़े पर सवार होकर पहुंचे दफ्तर, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

 साहिबगंज पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब छोटे शहरों और कस्बों तक दिखाई देने लगा है. झारखंड के साहिबगंज में सोमवार को एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली, जब जिला परिषद उपाध्यक्ष सुनील यादव घोड़े पर सवार होकर सदर प्रखंड सह अंचल कार्यालय पहुंचे. उनके इस अलग अंदाज को देखकर कार्यालय परिसर में मौजूद लोग हैरान रह गए. देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जुट गई और हर कोई इस अनोखी पहल की चर्चा करने लगा. लग्जरी गाड़ियों के शौकीन हैं सुनील यादव जिला परिषद उपाध्यक्ष सुनील यादव जिले में अपने अलग और आकर्षक अंदाज के लिए पहले से चर्चित रहे हैं. आमतौर पर वे लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ नजर आते हैं. बताया जाता है कि उनके पास कई महंगी गाड़ियां हैं और वे अक्सर थार वाहन से चलते हैं. लेकिन सोमवार को उन्होंने पूरी तरह अलग संदेश देने की कोशिश की. चारपहिया या दोपहिया वाहन के बजाय वे घोड़े पर सवार होकर ब्लॉक कार्यालय पहुंचे. लोगों के लिए यह दृश्य बिल्कुल नया था, इसलिए आसपास के लोग मोबाइल निकालकर वीडियो और तस्वीरें बनाने लगे. पीएम मोदी की अपील से हुए प्रेरित सुनील यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत और ऊर्जा संरक्षण को लेकर दिए गए संदेश से प्रेरित होकर उन्होंने यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि देशहित में ईंधन की बचत करना आज समय की जरूरत बन गई है. लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल खपत न केवल आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है. देशहित की शुरुआत खुद से करनी होगी: सुनील यादव ब्लॉक परिसर में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए सुनील यादव ने कहा कि अगर समाज में बदलाव लाना है तो उसकी शुरुआत खुद से करनी होगी. उन्होंने कहा कि उनका घोड़े पर सवार होकर कार्यालय पहुंचना केवल दिखावा नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी पहल मिलकर बड़े बदलाव का रास्ता तैयार करती हैं. यदि लोग अनावश्यक वाहन उपयोग कम करें और वैकल्पिक उपाय अपनाएं, तो इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी. सोशल मीडिया पर भी छाया मामला सुनील यादव ने अपनी इस पहल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किए. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि “जब देशहित की बात हो, तो पहल खुद से शुरू करनी चाहिए.” उनकी पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. कई लोगों ने इसे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में सकारात्मक कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे अलग अंदाज में प्रचार पाने की कोशिश भी कहा. इलाके में चर्चा का विषय बनी पहल साहिबगंज में इस पहल की चर्चा सिर्फ प्रशासनिक हलकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम लोगों के बीच भी यह बड़ा विषय बन गया. जिले के कई लोग इसे एक प्रतीकात्मक संदेश मान रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा यदि इस तरह के संदेश दिए जाएं तो आम लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी. खासकर ऐसे समय में, जब ऊर्जा संकट और पर्यावरण संरक्षण वैश्विक मुद्दे बन चुके हैं. पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश सुनील यादव ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए अब हर व्यक्ति को जिम्मेदारी समझनी होगी. उन्होंने लोगों से अपील की कि जहां संभव हो, वहां सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग करें. उन्होंने कहा कि यदि आज से ही ईंधन बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की आदत विकसित की जाए, तो आने वाली पीढ़ियों को बेहतर और सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है. झारखंड और बिहार में भी हो रही चर्चा जिला परिषद उपाध्यक्ष की यह पहल अब साहिबगंज से निकलकर झारखंड और बिहार के कई हिस्सों में चर्चा का विषय बन चुकी है. लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि इस कदम ने ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

झारखंड में बड़ी कार्रवाई, 220 लंबित वारंटों का हुआ निष्पादन

 रांची रांची पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत बीते दो दिनों में जिलेभर में व्यापक अभियान चलाकर 100 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 220 से ज्यादा लंबित वारंटों का निष्पादन किया गया। इसे रांची पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक माना जा रहा है। यह अभियान एसएसपी राकेश रंजन निर्देश पर पुलिस अधीक्षक नगर, यातायात और ग्रामीण के नेतृत्व में चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य अपराध नियंत्रण, लंबित वारंटों के निष्पादन और संगठित अपराध पर प्रभावी कार्रवाई करना था। इसके लिए विशेष रणनीति तैयार की गई थी। देर रात तक चले इस अभियान में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों ने लगातार छापेमारी की। इस दौरान फरार अपराधियों, वारंटियों और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। कई ऐसे आरोपित भी पुलिस के हत्थे चढ़े, जो लंबे समय से फरार चल रहे थे और लगातार पुलिस को चकमा दे रहे थे। अपराधियों के संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश ऑपरेशन प्रहार में जिले के सभी पुलिस अधीक्षक, उपाधीक्षक, थाना प्रभारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारी और जवान शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभियान के दौरान कई संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी गई तथा अपराधियों के संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई। रांची पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अपराध और संगठित गिरोहों के खिलाफ आगे भी इसी तरह का अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि जिले में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे और आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम हो सके।

मझिआंव मोड़ पर गंदगी फैलाने वालों पर सख्ती, एसडीएम ने शुरू की कार्रवाई

गढ़वा झारखंड में गढ़वा शहर के व्यस्त मझिआंव मोड़ क्षेत्र में सड़क किनारे खुले में मुर्गा काटने और गंदगी फैलाने वाले कारोबारियों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा हंटर चलाया है. सार्वजनिक स्थलों पर मांस, खून, हड्डी और पंख बिखेरकर स्वच्छता को प्रभावित करने संबंधी लगातार मिल रही जनशिकायतों के बाद, सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने सख्त रुख अख्तियार किया है. अवैध मांस दुकानों पर प्रशासन का एक्शन एसडीएम ने मझिआंव मोड़ पर अवैध रूप से दुकान चलाने वाले पांच दुकान मालिकों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 152 के तहत ‘पब्लिक न्यूसेंस’ (जनता को परेशानी पहुंचाना) की कार्रवाई शुरू कर दी है. इसके साथ ही इस मामले में ढिलाई बरतने को लेकर गढ़वा नगर परिषद से भी शो-कॉज की गई है. एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि इन अवैध मांस कारोबारियों को पूर्व में भी कई बार हिदायत और चेतावनी दी जा चुकी थी. इसके अलावा, नगर परिषद को भी लिखित रूप से आदेश दिया गया था कि वे नियमित निगरानी रखें और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सुनिश्चित कराएं. इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और आम जनता की परेशानियां बढ़ती गईं, जिसके बाद प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा. पांच दुकानदारों को नोटिस, अन्य इलाकों में भी होगी कार्रवाई बताया गया कि पहले चरण में मझिआंव मोड़ के पास नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले जिन पांच दुकानदारों/मालिकों को नोटिस जारी कर पक्षकार बनाया गया है, उसमें अजय सिंह (पिता- सूर्यदेव सिंह),अनुरुल हक (पिता- ताजुद्दीन खां),फैजान खान (पिता- लुहू तारीक),इब्राहिम खान (पिता- उस्मान खान),कमलेश अग्रवाल का नाम शामिल हैं . एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि पशु-पक्षियों का वध करना और उनके अपशिष्ट को ऐसे ही फेंक देना आम लोगों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ खिलवाड़ है. वहां से गुजरने वाले राहगीरों को भयंकर बदबू और असहजता का सामना करना पड़ता है, जो सीधे तौर पर ‘पब्लिक न्यूसेंस’ का गंभीर मामला है. ऐसी ही सख्त कार्रवाई अनुमंडल के अन्य इलाकों में भी चलाई जाएगी. गंदगी और बदबू पर एसडीएम सख्त एसडीएम ने कहा कि शहर में स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल देना प्रशासन की प्राथमिकता है. अब न केवल मुर्गा, मछली और मांस के व्यवसायियों को निर्धारित मानकों और स्वच्छता नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, बल्कि नगर निकाय (नगर परिषद) जैसी संस्थाओं को भी अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी, वरना उनपर भी गाज गिरेगी.

फर्जी जॉइनिंग लेटर और ट्रेनिंग का खेल! BCCL भर्ती घोटाले में बड़ा खुलासा

डकरा  कोल इंडिया की सबसे पुरानी सब्सिडियरी बीसीसीएल धनबाद में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. डकरा, खलारी, पिपरवार, टंडवा, भुरकुंडा, हजारीबाग और बड़कागांव समेत कई इलाकों में सक्रिय एक संगठित गिरोह पर करीब 200 लोगों से लगभग 20 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप लगा है. मामले में खलारी थाना में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुटी है, जबकि आरोपियों ने अपने मोबाइल बंद कर लिए हैं. कांग्रेस नेत्री से 24 लाख की ठगी डकरा निवासी कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी ने 12 मई को खलारी थाना में लिखित शिकायत देकर बताया कि उनके बेटे मनीष कुमार, कुणाल कुमार और भतीजा कौशल प्रसाद को बीसीसीएल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 24 लाख रुपये ठग लिए गए. इंदिरा देवी के अनुसार, चूरी उत्तरी के पूर्व मुखिया संजय आइंद की पत्नी मीनाक्षी आइंद ने उन्हें बताया था कि उसकी दोनों बेटियां साक्षी और श्रेया बीसीसीएल में नौकरी कर रही हैं. यह नौकरी केडी खलारी निवासी और अशोका, पिपरवार में कार्यरत सीसीएल कर्मचारी अजय कुमार सिन्हा और दरहाटांड़ राय निवासी पवन कुमार ने लगवाई है. फर्जी ज्वाइनिंग लेटर और मेडिकल जांच का खेल इंदिरा देवी ने बताया कि पवन कुमार ने खुद को बीसीसीएल में सेटिंग से नौकरी पाने वाला बताते हुए अपना कथित ज्वाइनिंग लेटर भी दिखाया. राजनीतिक परिवार से संबंध होने के कारण उन्होंने उस पर भरोसा कर लिया. पहले चेक के माध्यम से भुगतान करने की कोशिश हुई, लेकिन तकनीकी कारणों से पैसा नहीं निकल सका. इसके बाद पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी स्थित रॉयल पार्क अपार्टमेंट निवासी सागर चक्रवर्ती के शानवी इंटरप्राइजेज बैंक खाते में 24 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. पैसा ट्रांसफर होने के बाद एक बॉन्ड पेपर तैयार किया गया, जिस पर संबंधित लोगों के हस्ताक्षर भी कराए गए. इसके बाद युवकों को धनबाद बुलाकर होटल में ठहराया गया और पीएमसीएच में रवि राय और मुकेश महतो द्वारा मेडिकल जांच कराई गई. उस समय वहां कई दूसरे युवकों की भी जांच चल रही थी. बायोमीट्रिक और ट्रेनिंग के नाम पर ठगी थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, दूसरी बार धनबाद बुलाकर लोदना एरिया के रेलवे साइडिंग में अनुप सरकार, विशाल सिंह और रवि राय द्वारा बायोमीट्रिक हस्ताक्षर और बीटीसी ट्रेनिंग की प्रक्रिया पूरी कराई गई. इसके बाद युवकों को एक सूची दिखाई गई, जिसमें लगभग 200 अभ्यर्थियों के नाम अलग-अलग एरिया में पोस्टिंग के साथ दर्ज थे. इसमें इंदिरा देवी के तीनों बच्चों के नाम भी शामिल थे. हालांकि, इसके बाद किसी को ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला और आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया. नेटवर्क मार्केटिंग की तरह चलाया गया गिरोह जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पूरी ठगी को नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल की तरह संचालित किया. इसके अलग-अलग चैनल बनाए गए थे. बताया जा रहा है कि एक चैनल सागर चक्रवर्ती और दूसरा मुस्तकीम अंसारी चला रहा था. सागर चक्रवर्ती के शानवी इंटरप्राइजेज बैंक खाते और मुस्तकीम के धनबाद स्थित एक टायर दुकान के खाते में पैसे जमा कराए गए. गिरोह में शामिल लोगों को पहले खुद नौकरी का लालच दिया गया. बाद में उनसे कहा गया कि वे नए कैंडिडेट जोड़ें, ताकि उनका काम बिना पैसे दिए हो जाए. इसी लालच में कई लोग खुद भी एजेंट बन गए. वे अपने रिश्तेदारों और परिचितों को फंसाने लगे. करोड़ों रुपये का हुआ लेनदेन सूत्रों के मुताबिक, पिपरवार के एक व्यक्ति ने विभिन्न लोगों से पैसे जुटाकर करीब पांच करोड़ रुपये गिरोह तक पहुंचाए. वहीं डकरा के एक सीसीएल कर्मचारी ने अपने रिश्तेदारों से 75 लाख रुपये इकट्ठा कर दिए. अब पैसे गंवाने वाले कई लोग मानसिक तनाव में हैं और सामाजिक बदनामी के डर से खुलकर सामने भी नहीं आ रहे हैं. धनबाद के सिजुआ से जुड़ रहे तार पीड़ितों के अनुसार, मुस्तकीम अंसारी धनबाद के सिजुआ का रहने वाला है. वह खुद को कांग्रेस और ट्रेड यूनियन नेता बताता था. वहीं, सागर चक्रवर्ती अपने आपको टीएमसी नेता बताकर लोगों पर प्रभाव जमाता था. मामले में संतोष सिंह, छोटेलाल राम, मुकेश महतो, विशाल कुमार, राजेश करमाली और करमा नामक लोगों की भी चर्चा हो रही है. पुलिस बोली- संपर्क से बाहर हैं आरोपी मामले की जांच कर रहे खलारी थाना के एसआई शंकर राम ने बताया कि पुलिस शुरुआती स्तर पर जांच कर रही है. कुछ लोगों को नोटिस भेजा गया है, लेकिन फिलहाल किसी आरोपी से संपर्क नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि इंदिरा देवी द्वारा भुगतान किए गए पैसों का सत्यापन कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

अमेरिका में होने वाले UN युवा सम्मेलन में संजय की भागीदारी, भारत का बढ़ाएंगे मान

दुमका. झारखंड की उपराजधानी दुमका के काठीकुंड प्रखंड अंतर्गत बड़तल्ली गांव के संजय पाल समय पर वीजा नहीं बन पाने के कारण अमेरिका नहीं जा सकेंगे, लेकिन अब वह वर्चुअल माध्यम से लॉस एंजिल्स में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के 13वें अंतरराष्ट्रीय युवा सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। संजय पाल का चयन नेतृत्व क्षमता व तार्किक-व्याख्यात्मक कौशल के कठोर मूल्यांकन के आधार पर इस वैश्विक मंच के लिए हुआ है। सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के करीब 20 हजार प्रतिभागी शामिल होंगे। संजय वर्चुअल रूप से जुड़कर भारत की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखेंगे। उनका कहना है कि यदि भारत की युवा आबादी को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में मजबूत आधार मिले तो देश विश्व पटल पर महाशक्ति बन सकता है। उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाकर समाज की सेवा करना है। संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की प्रेरक कहानी: संजय पाल का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता कार्तिक पाल मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता रेणुका पाल ने सीमित शिक्षा के बावजूद बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। आर्थिक तंगी के दौर में संजय की मां ने रात में मूढ़ी (लाई) भूनकर परिवार का सहारा बनने का प्रयास किया, लेकिन लगातार धुएं में काम करने से उनका स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। इसके बाद संजय ने स्वयं पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने साप्ताहिक बाजारों में कपड़े की दुकानों पर काम किया और ग्रामीण क्षेत्रों में पावरोटी बेचकर पढ़ाई का खर्च निकाला, लेकिन पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। राज्य टॉपर से लेकर राष्ट्रीय मंच तक: संकटों के बीच संजय ने 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की और आगे चलकर उच्च माध्यमिक परीक्षा में प्रखंड टाप करने के साथ अर्थशास्त्र में पूरे झारखंड में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर राज्य टॉपर बने। इसके बाद उन्होंने सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान, विकसित भारत युवा संवाद 2026 और बजट क्वेस्ट 2026 जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। उनके प्रदर्शन के लिए रांची स्थित रिम्स ऑडिटोरियम में माय भारत झारखंड की निदेशक ललिता कुमारी द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया। शिक्षकों और मार्गदर्शन के सहारे संजय ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी प्रतिभा को साबित किया, और आज वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने को तैयार हैं।