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MP Green Mission: चोरल वन में विलुप्त होती प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे, बढ़ेगी जैव विविधता

 इंदौर  मानसून सक्रिय होते ही जंगलों को हरा-भरा बनाने करने की कवायद तेज हो गई है। इंदौर वनमंडल के जंगलों में पौधे रोपे जा रहे है। सामान्य पौधों के साथ उन दुर्लभ और विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक इन पौधों के संरक्षण से जंगलों की जैव विविधता मजबूत होगी और प्राकृतिक संतुलन भी बेहतर रहेगा। जून अंतिम सप्ताह से जंगलों में सागौन, नीम, आवला सहित अंजन, कल्लू, बीजा, दहीमन, तिनसा और बेहड़ा जैसी दुर्लभ प्रजातियों के पौधे रोपे जा रहे है। इंदौर वनमंडल की चारों रेंज में करीब 10 से 15 हजार सलाई की कलमें भी रोप रहे है। प्रत्येक रेंज में तीन से चार हजार कलमें लगाई जा रही है। चोरल क्षेत्र में एक बार फिर सागौन के पौधों रोपने पर जोर दिया जा रहा है। लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा सागौन का होगा। वनमंडलाधिकारी लाल सुधाकर सिंह का कहना है कि जिन विलुप्त प्रजातियों के पौधे नर्सरियों में तैयार हुए है। उन्हें जंगलों में विशेष तौर पर लगाया जा रहा है। इसके अलावा सलाई गोंद को बढ़ावा देने के लिए कलमें लगा रहे है। करीब तीन लाख लगाएंगे पौधे इंदौर वनमंडल में इस वर्ष इंदौर, चोरल, महू और मानपुर क्षेत्र के जंगलों में लगभग 2 लाख 81 हजार पौधे लगाने का टारगेट रखा है। जुलाई और अगस्त के बीच बीस पौधारोपण स्थल चुने गए है। यहां सिर्फ पौधे लगाने पर ही नहीं। बल्कि उनकी सुरक्षा और बेहतर विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पानी रोकने के लिए बनाए चेकडैम पौधों को पर्याप्त पानी मिल सके, इसके लिए जंगलों में छोटे-छोटे तालाब, चेकडैम, कंटूर ट्रेंच और अन्य जल संरचनाएं तैयार की गई हैं। पहले से बने तालाबों का गहरीकरण भी कराया गया है। ताकि अधिक से अधिक वर्षा जल संग्रहित हो सके। इससे गर्मियों में वन्य जीवों और पौधों के लिए पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। वन विभाग पिछले वर्ष लगाए गए पौधों की भी लगातार निगरानी कर रहा है। समीक्षा में सामने आया कि करीब 20 से 22 प्रतिशत पौधे विभिन्न कारणों से सूख गए हैं। ऐसे लगभग 84 हजार पौधों की पहचान कर ली गई है। अब उनकी जगह नए पौधे लगाने का काम चल रहा है।

भोपाल में बनेगा गैस त्रासदी मेमोरियल, भुज के स्मृतिवन से प्रेरित परियोजना पर सरकार की तैयारी

भोपाल  भोपाल में 1984 में हुए भीषण गैस कांड की याद में अब एक भव्य और विश्वस्तरीय स्मारक बनाने की योजना तैयार की जा रही है. यह स्मारक गुजरात के भुज स्थित प्रसिद्ध ‘स्मृतिवन’ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यूनियन कार्बाइड की केमिकल कचरा-मुक्त भूमि पर यह स्मारक बनाया जाए।  इस परियोजना के लिए एनवायरमेंटल प्लानिंग एंड कॉर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन (Environmental Planning and Coordination Organisation) को जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें भुज के भूकंप स्मारक और म्यूजियम का अध्ययन करने तथा उसके आधार पर एक डिटेल्ड एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है।  हजारों लोगों की याद में बने स्मारक मुख्यमंत्री मोहन यादव फरवरी 2026 में कच्छ दौरे के दौरान भुज के स्मृतिवन से काफी प्रभावित हुए थे. 2001 के विनाशकारी भूकंप में जान गंवाने वाले हजारों लोगों की याद में बने इस स्मारक ने उन्हें प्रेरित किया. यह स्मारक तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का परिणाम है, जिन्होंने इसे 2011 में चीन के सिचुआन भूकंप स्मारक को देखकर तैयार करने की योजना बनाई थी।  भुज का ‘स्मृतिवन’ 470 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे देश का सबसे बड़ा स्मारक माना जाता है. यह 2001 के भूकंप में जान गंवाने वाले 13,000 से अधिक लोगों की स्मृति में बनाया गया है. यहां 7 थीम आधारित गैलरियां बनाई गई हैं, जहां आधुनिक तकनीक जैसे सिम्युलेटर, थ्री-डी और प्रोजेक्टर के जरिए भूकंप का वास्तविक अनुभव कराया जाता है।  सीएम ने दिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने निर्देश दिए कि एप्को की एक विशेष टीम गुजरात के भुज में बने आधुनिक भूकंप स्मारक व संग्रहालय का मौका-मुआयना करे। वहां की व्यवस्थाओं और डिजाइन का विस्तृत निरीक्षण करने के बाद भोपाल में भी वैसा ही भव्य स्मारक तैयार करने के लिए एक विधिवत प्रस्ताव और ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जाए। भुज का 'स्मृतिवन' मॉडल क्यों है खास? भोपाल में जिस भुज मॉडल को आधार बनाकर स्मारक की रूपरेखा तैयार की जा रही है, वह बेहद अनूठा है। 2001 के गुजरात भूकंप पीड़ितों की याद में बना भुज का 'स्मृतिवन' अपनी आधुनिक गैलरी, मियावाकी वन और आपदा प्रबंधन के जीवंत अनुभवों (सिम्युलेटर तकनीक) के कारण दुनिया भर में मशहूर है। अब इसी तर्ज पर भोपाल गैस त्रासदी के इतिहास और पीड़ितों की याद को सहेजने के लिए यूनियन कार्बाइड परिसर को नया रूप दिया जाएगा। कच्‍छ दौरे के समय सीएम हुए थे प्रभावित दरअसल, फरवरी 2026 में अपने कच्छ दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भुज के 'स्मृतिवन' को देखकर बेहद प्रभावित हुए थे। वर्ष 2001 के विनाशकारी भूकंप पीड़ितों की याद में 470 एकड़ में फैला भुज का यह अनूठा स्मारक तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का परिणाम था। पीएम मोदी ने साल 2011 में चीन के सिचुआन प्रांत के भूकंप स्मारक को देखने के बाद इस भव्य स्मृतिवन का खाका तैयार किया था। क्यों अनूठा व विश्वस्तरीय है भुज का 'स्मृतिवन'? देश का सबसे बड़ा स्मारक: यह स्मारक 2001 के गुजरात भूकंप में जान गंवाने वाले 13,000 से अधिक लोगों की याद में भुज की भुजिया पहाड़ी पर पूरे 470 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है। भूकंप का वास्तविक अहसास: स्मृतिवन में 7 थीम-आधारित गैलरी बनाई गई हैं। यहाँ विशेष सिम्युलेटर की मदद से आने वाले आगंतुकों को भूकंप का वास्तविक (लाइव) अनुभव कराया जाता है। कच्छ की संस्कृति और इतिहास: थ्री-डी प्रोजेक्टर व आधुनिक गैजेट्स के जरिए कच्छ की अनूठी संस्कृति, भूकंप का इतिहास और इस भीषण आपदा के बाद हुए अद्भुत पुनर्निर्माण की पूरी कहानी को जीवंत रूप में दिखाया गया है। पर्यावरण और जल संरक्षण: पूरे परिसर में 50 चेकडैम बनाए गए हैं। इसके साथ ही, दिवंगत आत्माओं की याद में 50,000 से अधिक पौधे लगाकर एक भव्य 'मियावाकी वन' विकसित किया गया है। पुनर्निर्माण की कहानी को दिखाया इस स्मारक में कच्छ की संस्कृति, इतिहास और भूकंप के बाद हुए पुनर्निर्माण की कहानी को भी दिखाया गया है. इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. यहां 50 चेकडेम बनाए गए हैं और 50,000 से अधिक पौधों के साथ मियावाकी वन विकसित किया गया है।  इसी मॉडल को आधार बनाकर भोपाल में बनने वाला नया स्मारक गैस कांड का दर्द, इतिहास और सबक को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम करेगा। 

मंत्री विश्वास सारंग ने पर्वतारोही ज्योति रात्रे को दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं

भोपाल सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग से शनिवार को भोपाल में मध्यप्रदेश की पर्वतारोही ज्योति रात्रे ने सौजन्य भेंट की। मंत्री सारंग ने उन्हें हाल ही में मैक्सिको स्थित पिको डी ओरिजाबा की 5,636 मीटर (18,491 फीट) ऊँची चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर देश का गौरव बढ़ाने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं। मंत्री सारंग ने कहा कि ज्योति रात्रे का साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन, अथक परिश्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे भविष्य में भी सफलता के नए शिखर छूते हुए देश और मध्यप्रदेश का नाम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर गौरवान्वित करती रहेंगी। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों एवं साहसिक खेलों से जुड़े प्रतिभाशाली युवाओं की उपलब्धियां मध्यप्रदेश को नई पहचान दिला रही हैं। राज्य सरकार खेल और साहसिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मैक्सिको के पिको डी ओरिजाबा शिखर पर तिरंगा फहराने के साथ ही ज्योति रात्रे तीन महाद्वीपों के सबसे ऊँचे ज्वालामुखियों पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाली देश की सबसे वरिष्ठ महिला पर्वतारोही बन गई हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।  

भोपाल के डायल-112 हीरोज बिछड़ी 06 वर्षीय मासूम को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल भोपाल जिले के थाना कटारा हिल्स क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं तत्पर कार्रवाई से पिता से बिछड़ गई 06 वर्षीय मासूम बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई इस मानवीय पहल से बालिका को सुरक्षा एवं परिवार का सान्निध्य पुनः प्राप्त हो सका। 04 जुलाई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कटारा हिल्स क्षेत्र अंतर्गत स्प्रिंग वैली के पास एक 06 वर्षीय बालिका अकेली मिली है, जो अपने पिता से बिछड़ गई है एवं पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  नवीन यादव एवं पायलट  तीर्थ कुमार ने मौके पर पहुँचकर बालिका को सुरक्षित संरक्षण में लिया। पूछताछ करने पर बालिका ने अपने परिजनों की जानकारी एवं घर का पता बताया। डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बालिका द्वारा बताए गए पते के आधार पर उसे डायल 112 वाहन से सुरक्षित उसके घर ले जाकर पहचान एवं आवश्यक सत्यापन उपरांत उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 06 वर्षीय मोहिनी, निवासी अयोध्या नगर, अपने पिता के साथ कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में आई थी, जहाँ भीड़ के दौरान वह अपने पिता से बिछड़ गई थी। डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही से एक मासूम बालिका को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुँचाया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।  

साइबर सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता और पुलिस फिटनेस को मिला एक साथ बढ़ावा

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संचालित "SAFE CLICK 2.0" साइबर जागरूकता अभियान के अंतर्गत जीआरपी भोपाल द्वारा आज शनिवार को 5 किलोमीटर साइबर जागरूकता मैराथन का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य आमजन को बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को प्रोत्साहित करना तथा पुलिस बल में फिटनेस को बढ़ावा देना था। मैराथन का शुभारंभ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल  राजाबाबू सिंह ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस अवसर पर उप पुलिस महानिरीक्षक, रेलवे,  पंकज वास्तव, पुलिस अधीक्षक, रेलवे, भोपाल,  अंकित जायसवाल सहित रेल पुलिस कार्यालय एवं आरआरपी लाइन भोपाल के लगभग 150 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। मैराथन के दौरान पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के संबंध में व्यापक रूप से जागरूक किया। उपस्थित लोगों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, फिशिंग लिंक, सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले अपराध, डिजिटल अरेस्ट तथा ऑनलाइन निवेश के नाम पर की जाने वाली धोखाधड़ी से बचने के व्यावहारिक उपाय बताए गए। साथ ही साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देने तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी प्रदान की गई। इस अवसर पर अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपने बैंक खाते, एटीएम, ओटीपी, पासवर्ड अथवा अन्य व्यक्तिगत एवं वित्तीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें तथा सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग पूरी सतर्कता एवं सावधानी के साथ करें। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम के दौरान जीआरपी के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने साइबर सुरक्षा के प्रति सदैव जागरूक रहने तथा समाज को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। इसके साथ ही पुलिस बल में फिटनेस को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में यह निर्णय भी लिया गया कि मध्यप्रदेश जीआरपी के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी प्रत्येक शनिवार कम से कम 5 किलोमीटर दौड़ अथवा पैदल चाल पूर्ण करेंगे, जिससे स्वस्थ एवं सक्षम पुलिस बल के निर्माण के साथ बेहतर पुलिसिंग को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस का "SAFE CLICK 2.0" अभियान प्रदेशभर में लगातार विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क एवं सुरक्षित डिजिटल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। जीआरपी भोपाल द्वारा आयोजित यह मैराथन इसी अभियान की एक प्रभावी पहल रही, जिसमें जन-जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता एवं पुलिस फिटनेस का सफल समन्वय देखने को मिला।  

भोपाल और झाबुआ में सैकड़ों खिलाड़ियों ने दिखाया हुनर, विशेषज्ञों ने परखी क्षमता

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा संचालित "टैलेंट सर्च 2026-27" अभियान प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए सुनहरा अवसर बनकर उभर रहा है। राज्य खेल अकादमियों के लिए योग्य खिलाड़ियों के चयन के लिये आयोजित ट्रायल्स में लगातार बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की खेल प्रतिभाएं राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शनिवार को राजधानी भोपाल स्थित टी.टी. नगर स्टेडियम तथा झाबुआ में आयोजित चयन ट्रायल्स में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी खेल क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग अकादमी में उमड़ा खिलाड़ियों का उत्साह टी.टी. नगर स्टेडियम स्थित मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग अकादमी में आयोजित चयन ट्रायल्स में कुल 148 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें 84 बालक एवं 64 बालिकाएं शामिल रहीं। चयन प्रक्रिया अनुभवी प्रशिक्षकों की देखरेख में निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप संपन्न हुई। ट्रायल्स का संचालन मुख्य प्रशिक्षक रोशन लाल के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान सहायक प्रशिक्षक नेहा कश्यप, सोनम नायक एवं भरत पंसोरिया ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन का सूक्ष्म मूल्यांकन किया। बैडमिंटन ट्रायल्स में 70 खिलाड़ियों ने दिखाई प्रतिभा टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल में आयोजित बैडमिंटन चयन ट्रायल्स में 70 खिलाड़ियों ने भाग लेकर अपनी तकनीकी दक्षता और खेल कौशल का प्रदर्शन किया। चयन प्रक्रिया का नेतृत्व ग्वालियर बैडमिंटन अकादमी के मुख्य प्रशिक्षक अगुस द्वी सन्तोसा ने किया, जो वर्ष 2021 एवं 2023 में भारतीय स्टार शटलर P. V. Sindhu के पूर्व कोच रह चुके हैं। उनके साथ इंडोनेशिया के डबल्स विशेषज्ञ प्रशिक्षक सोफियान तथा सहायक प्रशिक्षक विनीत सरोदे ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया। झाबुआ में तीरंदाजी ट्रायल्स का सफल आयोजन झाबुआ में आयोजित तीरंदाजी चयन ट्रायल्स में 22 खिलाड़ियों ने सहभागिता कर अपनी एकाग्रता, तकनीकी कौशल एवं लक्ष्यभेदन क्षमता का प्रदर्शन किया। दूरस्थ अंचलों से खिलाड़ियों की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि प्रदेश के जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भी खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। पारदर्शी प्रक्रिया से होगा प्रतिभाओं का चयन विभाग द्वारा चयन प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही है। खिलाड़ियों का मूल्यांकन शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता, फिटनेस एवं खेल विशेष की आवश्यकताओं के आधार पर किया जा रहा है, जिससे सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं का चयन कर उन्हें राज्य खेल अकादमियों में आधुनिक सुविधाओं के साथ उच्चस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके। प्रदेशभर में जारी रहेगा प्रतिभा खोज अभियान "टैलेंट सर्च 2026-27" के अंतर्गत आगामी दिनों में विभिन्न खेलों के चयन ट्रायल्स प्रदेश के अलग-अलग जिलों में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने पात्र खिलाड़ियों से अधिक से अधिक संख्या में ट्रायल्स में भाग लेने का आह्वान किया है, ताकि मध्यप्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया जा सके। आगामी चरण में भी जारी रहेंगे चयन ट्रायल्स टैलेंट सर्च अभियान के आगामी चरणों में एथलेटिक्स, ट्रायथलॉन, क्याकिंग एवं केनोइंग, पुरुष हॉकी, महिला हॉकी, तीरंदाजी, ताइक्वांडो सहित विभिन्न खेलों के चयन ट्रायल्स निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। इससे प्रदेश के अधिकाधिक खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सुजलॉन ग्रुप के सीईओ कपूर ने की भेंट

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सुजलॉन ग्रुप के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर  अजय कपूर ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में सौजन्य भेंट की। सुजलॉन ग्रुप द्वारा नवकरणीय ऊर्जा विशेष रूप से सोलर एनर्जी तथा विंड एनर्जी के क्षेत्र में परियोजनाऐं संचालित की जा रही हैं। सुजलॉन ग्रुप उज्जैन जिले की तराना तहसील में 200 मेगावाट की विंड एनर्जी परियोजना का क्रियान्वयन कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सीईओ सुजलॉन ग्रुप  कपूर ने प्रदेश में विंड एनर्जी परियोजना के विस्तार तथा हाइब्रिड क्षमता में वृद्धि संबंधी चर्चा की।

मंत्री पंवार ने किया सुठालिया वृहद सिंचाई परियोजना स्थल का निरीक्षण

भोपाल मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सुठालिया वृहद सिंचाई परियोजना के निर्माण कार्यों का स्थल पर पहुंचकर विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माणाधीन मुख्य बांध सहित परियोजना के विभिन्न कार्यों का अवलोकन कर प्रगति की समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों से निर्माण की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना के प्रत्येक कार्य को निर्धारित तकनीकी मानकों, उच्च गुणवत्ता एवं पूर्ण पारदर्शिता के साथ समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। राज्यमंत्री  पंवार ने कहा कि निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न हो। राजगढ़ जिले की सुठालिया तहसील की बैराड ग्राम के नजदीक पार्वती नदी पर निर्मित हो रही यह परियोजना प्रदेश की प्रमुख वृहद सिंचाई योजनाओं में शामिल है। वर्ष 2018 में इस परियोजना को ₹1,375.24 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। परियोजना अंतर्गत लगभग 25.50 मीटर ऊंचा, लगभग 4 किलोमीटर लंबा तथा 20 रेडियल गेटयुक्त कंपोजिट बांध निर्मित किया जा रहा है। बांध की सकल जल भंडारण क्षमता 201.35 मिलियन घनमीटर (MCM) तथा लाइव स्टोरेज क्षमता 183.70 MCM होगी। इसके साथ दो अत्याधुनिक पंप हाउसों का निर्माण कर प्रेशराइज्ड पाइपलाइन आधारित आधुनिक सिंचाई प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे लगभग 49,800 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इस परियोजना से 174 ग्रामों को प्रत्यक्ष सिंचाई लाभ मिलेगा, जिनमें सुठालिया तहसील के 73, ब्यावरा तहसील के 71 तथा नरसिंहगढ़ तहसील के 30 ग्राम शामिल हैं। ग्राम मऊ एवं कानरखेड़ी स्थित पंप हाउसों से क्रमशः 21,077 हेक्टेयर एवं 28,723 हेक्टेयर क्षेत्र में पाइपलाइन आधारित सिंचाई व्यवस्था विकसित की जा रही है। परियोजना की वर्तमान प्रगति की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि मुख्य बांध का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में राजगढ़ जिले के 34, गुना जिले के 8, भोपाल जिले के 18 तथा सीहोर जिले के 3 ग्रामों में लगभग 90 प्रतिशत भू-अर्जन कार्य पूर्ण किया जा चुका है। परियोजना से प्रभावित लगभग 1,675 परिवारों के पुनर्वास हेतु ग्राम मऊ एवं बड़ाबड़ला में सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त पुनर्वास कॉलोनियों का निर्माण भी किया जा चुका है। परियोजना के शेष निर्माण कार्य वर्ष 2027 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्यमंत्री  पंवार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार एवं किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सुठालिया वृहद सिंचाई परियोजना केवल एक बांध निर्माण नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास की आधारशिला है। इसके पूर्ण होने से हजारों किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, भू-जल स्तर में सुधार आएगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि परियोजना के सभी कार्य उच्च गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण हों।  

भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मध्यप्रदेश में हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य की सराहना की

भोपाल  भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ज्ञानेश कुमार ने इंदौर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से सीधा संवाद करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) एवं मतदाता सूची के परिशोधन का कार्य अत्यंत पारदर्शी, सुलभ और व्यवस्थित तरीके से संपन्न किया है। उन्होंने कहा कि जिस दक्षता और पारदर्शिता के साथ यह कार्य मध्यप्रदेश में हुआ है, वैसा उदाहरण देश के अन्य राज्यों में दुर्लभ है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया विश्व की सबसे पारदर्शी और विश्वसनीय प्रक्रियाओं में से एक है। मतदाता सूची निर्माण से लेकर मतदान और मतगणना तक प्रत्येक चरण में राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने कहा कि इसी पारदर्शिता और दक्षता के कारण भारत आज विश्व के 35 प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के संगठन इंटरनेशनल आइडिया (International IDEA) की 2026 की अध्यक्षता कर रहा है। इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश  संजीव कुमार झा, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी  राम प्रताप सिंह जादौन, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी  शिवम वर्मा भी विशेष रूप से मौजूद थे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि निर्वाचन आयोग का विशेष ध्यान वृद्धजन, दिव्यांगजन, प्रवासी श्रमिक, अशिक्षित नागरिकों तथा वंचित समुदायों तक मतदाता सेवाएँ पहुँचाने पर केंद्रित रहा है, जिससे कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे, साथ ही यह सुनिश्चित ‍किया जा रहा है कि किसी भी अपात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो। इसके लिये ‍विशेष गहन पुनरीक्षण का सफलतापूर्वक अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा सरल भाषा में दिशा-निर्देश, सोशल मीडिया जागरूकता अभियान, समाचार पत्र, एफएम रेडियो, व्हाट्सएप, पंचायत स्तरीय बैठकों एवं मोहल्ला सूचना अभियानों के माध्यम से व्यापक जनजागरण किया गया।  कुमार ने बीएलओ की भूमिका को लोकतंत्र की रीढ़ बताते हुए कहा कि बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क स्थापित करते हैं, नए मतदाताओं का पंजीयन करते हैं तथा मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट तथा अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से सुदूर आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाले बीएलओ की सराहना की। मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि भारत में चुनाव संचालन विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया है। देश में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं। देश में चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में 1 करोड़ 80 लाख चुनावकर्मी शामिल होते हैं। यह संख्या दुनिया की कई बड़ी सरकारी और निजी संस्थाओं से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि इतने विशाल स्तर पर भी भारत की चुनाव प्रणाली पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करती है। चुनाव आयोग के डिजिटल नवाचारों का उल्लेख करते हुए ‘ईसीआई नेट’ (ECI Net) ऐप को पारदर्शिता और सुगमता की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐप बीएलओ और मतदाताओं के बीच सीधे संपर्क का माध्यम बना है और देश के दूरस्थ क्षेत्रों में भी इसका सफल उपयोग हो रहा है। मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता समझाते हुए बताया कि मतदान शुरू होने से पहले मॉक पोल, मतदान के दौरान पोलिंग एजेंट की उपस्थिति, फॉर्म 17-सी के माध्यम से रिकॉर्ड सत्यापन और मतगणना के दौरान एजेंटों की मौजूदगी भारत की चुनाव प्रणाली को अत्यंत विश्वसनीय बनाती है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल आकार में ही नहीं, बल्कि सहभागिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता में भी सबसे सशक्त है। उन्होंने विभिन्न देशों के मतदान प्रतिशतों की तुलना करते हुए कहा कि भारत में स्वैच्छिक मतदान होने के बावजूद मतदान प्रतिशत कई अनिवार्य मतदान वाले देशों से अधिक रहता है, जो लोकतंत्र में जनता के विश्वास का प्रमाण है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से मतदाता सूची को शुद्ध करना संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुरूप निर्वाचन आयोग का संवैधानिक दायित्व है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत अनुपस्थित, मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अपात्र मतदाताओं को चिन्हित कर सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाया गया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हुए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने एसआईआर अभियान को उत्कृष्टता के साथ पूरा कर देश के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने सभी बीएलओ को लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी बताते हुए उनके समर्पण, परिश्रम और संवैधानिक जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए बधाई दी तथा कहा कि सशक्त मतदाता ही सशक्त लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने बीएलओ से संवाद करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए प्रेरणा है और इसकी मजबूती में बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) की उपलब्धियों, नवाचारों एवं सफलताओं पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ज्ञानेश कुमार से सीधा संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। बीएलओ ने विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार जमीनी स्तर पर मतदाता सूची के परिशोधन एवं अद्यतन कार्य को सफलतापूर्वक संपादित किया गया। संवाद के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ने बीएलओ के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश  संजीव कुमार झा ने कहा कि मध्यप्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्य पूरी टीम की सामूहिक मेहनत और समर्पण का परिणाम है तथा इस उपलब्धि के लिए उन्होंने सभी अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को बधाई दी। भारत इस वर्ष International IDEA की अध्यक्षता कर रहा है और भारत निर्वाचन आयोग की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को वैश्विक स्तर पर साझा किया जाएगा। यह देश के लिए गर्व का विषय है।  झा ने कहा कि मध्यप्रदेश भौगोलिक और सामाजिक विविधताओं से भरा राज्य है, जिसके कारण मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में कई चुनौतियाँ सामने आईं। वर्ष 2003 के पुराने डेटा को वर्तमान सॉफ्टवेयर सिस्टम के अनुरूप परिवर्तित करना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए विभाग ने पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने … Read more

वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं नियमों के प्रभावी पालन पर दिया गया विशेष बल

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा वित्तीय प्रशासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं दक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भोपाल में प्रदेश की विभिन्न पुलिस इकाइयों से आए उप पुलिस अधीक्षक एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के लिए दो दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया। सेमीनार का उद्देश्य अधिकारियों को वित्तीय नियमों, लेखा प्रक्रियाओं, कल्याणकारी योजनाओं एवं आधुनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों की अद्यतन जानकारी प्रदान कर उनके प्रशासनिक एवं वित्तीय दायित्वों के प्रभावी एवं दक्ष निर्वहन के लिए सक्षम बनाना था। सेमीनार का समापन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कल्याण)  सोलोमन यश कुमार मिंज की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व किसी भी शासकीय संस्था की कार्यकुशलता के आधार स्तंभ हैं। उन्होंने अधिकारियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव का अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी उपयोग करते हुए वित्तीय प्रक्रियाओं को अधिक सुचारु, नियमसम्मत एवं पारदर्शी बनाने का आह्वान किया। सेमीनार के उद्घाटन सत्र में उप पुलिस महानिरीक्षक (लेखा एवं कल्याण), पुलिस मुख्यालय, भोपाल  अवधेश गोस्वामी ने प्रतिभागियों को वित्तीय प्रबंधन में अद्यतन नियमों की जानकारी रखने तथा आहरण एवं संवितरण अधिकारियों की भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाने की आवश्यकता पर बल दिया। दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के कार्य एवं उत्तरदायित्व, मध्यप्रदेश भण्डार क्रय एवं उपार्जन नियम-2015 (यथासंशोधित-2022), वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, पुलिस विभाग की कल्याणकारी गतिविधियां, आईएफएमआईएस (IFMIS) प्रणाली, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, पेंशन नियम, दंडों का प्रभावी क्रियान्वयन, देय स्वत्व, टी.ए./डी.ए., अवकाश नियम, जीपीएफ संबंधी कार्यवाहियों में बरती जाने वाली सावधानियां तथा मध्यप्रदेश वित्तीय शक्ति अधिकार पुस्तिका-2025 एवं बजट प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पुलिस मुख्यालय, वित्त विभाग तथा आयुक्त कोष एवं लेखा कार्यालय के विशेषज्ञ अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी प्रदान की तथा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। समापन समारोह में पुलिस अकादमी के उप निदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल, सहायक पुलिस महानिरीक्षक कल्‍याण मती इरमीन शाह, सहायक निदेशक (प्रशिक्षण) मती रश्मि पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक, पीटीएस मती यास्मीन जहरा सहित अकादमी का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। मध्यप्रदेश पुलिस का यह प्रयास वित्तीय प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ अधिकारियों की क्षमता संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे पुलिस इकाइयों में वित्तीय प्रबंधन और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।