samacharsecretary.com

EPFO को लेकर बड़ा अपडेट: 51 लाख कर्मचारियों को मिल सकता है फायदा, जबलपुर में अंतिम तिथि घोषित

 जबलपुर कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज सीमा बढ़ाने की घोषणा की है। भविष्य निधि, पेंशन और बीमा का लाभ अब 15 हजार रुपये की जगह 25 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन पाने वाले अधिक कर्मचारियों को ईपीएफओ के दायरे में लाने की तैयारी है। इससे देशभर में 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा का लाभ मिलने का अनुमान है। नई व्यवस्था 17 सितंबर 2026 से प्रभावी यह जानकारी क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 कैलाश चंद्र जोशी ने पत्रकारवार्ता में दी। इस दौरान सहायक भविष्य निधि आयुक्त संदीप मिश्रा भी मौजूद रहे। जोशी ने बताया कि नई व्यवस्था 17 सितंबर 2026 से प्रभावी होने की जानकारी दी गई है। इसका मकसद अधिक से अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है। हाथ में आने वाले वेतन में कुछ कमी हो सकती है क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने बताया कि ईपीएफ में योगदान बढ़ने से कर्मचारियों के हाथ में आने वाले वेतन में कुछ कमी हो सकती है, लेकिन इसका फायदा लंबे समय में बचत, पेंशन और बीमा सुरक्षा के रूप में मिलेगा। छूटे कर्मचारियों को जोड़ने का अभियान कैलाश चंद्र जोशी ने बताया कि कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत ऐसे पात्र कर्मचारियों को ईपीएफओ से जोड़ा जा सकेगा, जो पहले किसी कारण से इससे बाहर रह गए हैं। उमंग ऐप के माध्यम से डिजिटल पंजीकरण और फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा भी उपलब्ध है। पुराने मामलों में नियोक्ताओं को राहत विश्वास-2026 योजना के तहत पात्र नियोक्ताओं को पुराने लंबित जुर्माने और हर्जाने के मामलों के निपटारे का अवसर मिलेगा। निर्धारित शर्तों के तहत जुर्माने में 45 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान है। योजना दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। पहली नौकरी पर 15 हजार तक प्रोत्साहन पत्रकारवार्ता में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना की भी जानकारी दी गई। इसके तहत पहली बार औपचारिक रोजगार पाने वाले पात्र युवाओं को 15 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा सकता है। वहीं नए कर्मचारियों को नौकरी देने वाले पात्र नियोक्ताओं को भी मासिक प्रोत्साहन देने का प्रवि‍धान है। सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना उद्देश्य कैलाश चंद्र जोशी ने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना, युवाओं को औपचारिक रोजगार से जोड़ना और नियोक्ताओं के लिए नियमों का पालन आसान बनाना है।

पत्नी की हत्या के बाद रातभर सोता रहा पति, सुबह खुद थाने पहुंचकर किया सरेंडर

खरगोन  शहर के शास्त्री नगर में चरित्र शंका को लेकर पति-पत्नी के बीच हुआ विवाद जानलेवा साबित हुआ। रात में हुए विवाद के दौरान तैश में आकर पत्नी की लकड़ी से इस हद तक पिटाई की कि उसने दम तोड़ दिया। इसके आरोपित पति सो गया। हत्या का खुलासा उस वक्त हुआ गुरुवार सुबह जब पति नींद से जागा। पत्नी के शरीर में कोई हलचल नहीं होने पर उसके होश उड़ गए और आनन-फानन में कोतवाली पहुंचा। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अभिरक्षा में लेकर पंचनामे की कार्रवाई के बाद पीएम के लिए जिला अस्पताल भेजा। आरोपित पति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। थाना प्रभारी बीएल मंडलोई ने बताया कि शाबासपुरा थाना भगवानपुरा हाल मुकाम शास्त्री नगर निवासी रुपसिंह ने सुबह सात बजे कोतवाली पहुंचकर सूचना दी कि उसने रात को अपनी पत्नी शारदा (35) की बुधवार रात लकड़ी से पिटाई की थी, अब वह होश में नहीं आ रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची। यहां महिला के शरीर पर चोट के निशान मिले। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पूछताछ में रुपसिंह ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी शारदा के बीच चरित्र शंका को लेकर आए दिन झगड़े होते रहते थे। यह भी पढ़ें- लिव-इन पार्टनर की कार में गला दबाकर हत्या, यमुना में फेंका शव; 40 किमी तक सर्च ऑपरेशन जारी बुधवार रात भी दोनों के बीच इसी बात पर तीखा विवाद हुआ। विवाद के दौरान रूपसिंह ने आवेश में आकर पास रखी जलाऊ लकड़ी उठाई और शारदा के सिर पर वार कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने से शारदा वहीं गिर पड़ी और उसकी मौत हो गई। पिटाई के बाद रुपसिंह सो गया। गुरुवार सुबह जब शारदा नहीं जागी, तो रूपसिंह को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह तत्काल कोतवाली थाने पहुंचा और पुलिस को सारी जानकारी दी।  

निकम के जीवन पर केन्द्रित फीचर फिल्म प्रहार के प्रमोशन से संबंधित

पद्मश्री निकम का राज्य सरकार की ओर से किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को सामाजिक संस्था 'सार्थक' द्वारा इंदौर में आयोजित एक समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित किया। यह समारोह देश के प्रसिद्ध विशेष लोक अभियोजक एवं वर्तमान में राज्यसभा सांसद पद्मश्री उज्ज्वल निकम के जीवनवृत पर केंद्रित फीचर फिल्म 'प्रहार' के प्रमोशन को लेकर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के लिए जीना ही वास्तविक जीना है। निकम ने अपनी प्रखर राष्ट्रवादी एवं अत्यंत तर्कपूर्ण दलीलों से मुम्बई आतंकवादी हमले के जीवित आरोपी को अंततः सज़ा दिलाकर एक नई मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि इस केस में जीत हासिल कर निकम ने न्याय के प्रति देशवासियों की आस्था और विश्वास को और भी मजबूती दी। संघर्षपूर्ण जीवन के बावजूद निकम ने न केवल अपने नाम 'उज्ज्वल' को 'सार्थक' किया, अपितु न्याय सेवकों की भावी पीढ़ी (पब्लिक प्रासिक्यूटर्स) के लिए भी एक मानक स्थापित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्मश्री उज्ज्वल निकम का व्यक्तिश: और पूरी सरकार की ओर से मध्यप्रदेश की धरती पर स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम को उज्ज्वल निकम एवं अन्य ने भी संबोधित किया। उल्लेखनीय है कि उज्ज्वल निकम ने सालों पहले देश की कमर्शियल कैपिटल मुम्बई पर हुए सुनियोजित आतंकी हमले में मुठभेड़ के बाद जीवित पकड़े गए आतंकवादी अज़मल कसाब के विरुद्ध पैरवी कर उसे सज़ा दिलाई थी। इनके जीवन पर केंद्रित फीचर फिल्म प्रहार में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता राजकुमार राव ने निकम का किरदार निभाया है। कार्यक्रम में पद्मश्री भालू मोंढे, जीतू जिराती, श्रीमती ज्योति उज्ज्वल निकम (ज्योतिजी मूलतः धार जिले से हैं), सार्थक संस्था के संस्थापक दीपक जैन (टीनू), राहुल सेठी एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।  

मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार, 7 जिलों में बनेंगे इंडस्ट्रियल हब; रोजगार पर जोर

जबलपुर, भोपाल और इंदौर को जोड़ते हुए 7 जिलों में विकसित किए जाएंगे विश्वस्तरीय इंडस्ट्रियल हब जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरीडोर के समेकित विकास के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी के गठन की स्वीकृति "हर अंचल में निवेश, हर जिले में रोजगार" के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा मध्यप्रदेश स्थानीय स्तर पर 6 लाख से अधिक रोजगार का होगा सृजन प्रदेश में संतुलित और तीव्र औद्योगिकीकरण के नए युग का सूत्रपात मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद का दूरगामी एवं ऐतिहासिक निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के "हर अंचल में निवेश और हर जिले में रोजगार" के संकल्प को साकार करते हुए मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के सर्वांगीण, समावेशी और संतुलित क्षेत्रीय विकास को अभूतपूर्व गति देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी निर्णय लिया है। प्रदेश के तीन सबसे बड़े आर्थिक, व्यापारिक और ज्ञान केंद्रों जबलपुर, भोपाल और इन्दौर जोड़ते हुए 'इंडस्ट्रियल कॉरीडोर' समेकित एवं योजनाबद्ध विकास को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस दूरगामी परियोजना के माध्यम से 7 प्रमुख जिलों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, सीहोर और देवास में विश्वस्तरीय आर्थिक और औद्योगिक संकुलों की स्थापना की जाएगी। इससे महाकौशल, मध्य क्षेत्र और मालवा अंचल के जन-जीवन में व्यापक आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। शासन का यह प्रयास राज्य के औद्योगिक विकास को बड़े महानगरों तक सीमित न रखकर प्रदेश के शहरी और ग्रामीण अंचलों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर-जीवन स्तर में आयेगा गुणात्मक सुधार राज्य शासन की इस विकास पहल का सर्वोच्च ध्येय स्थानीय नागरिकों और युवाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाना है। जबलपुर से इन्दौर तक नियोजित औद्योगिक हब में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मध्यप्रदेश के हुनरमंद युवाओं को रोजगार अथवा आजीविका की तलाश में अपने गृह नगर और राज्य से पलायन न करना पड़े। कॉरीडोर के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे युवा अपनी योग्यता के अनुरूप सम्मानजनक आजीविका प्राप्त कर सकेंगे और देश-दुनिया के बड़े निवेशक मध्यप्रदेश की धरती पर निवेश करने के लिए आकर्षित होंगे। किसानों की समृद्धि का आधार बनेगा नरसिंहपुर और रायसेन मे एग्री-प्रोसेसिंग क्लस्टर औद्योगिक कॉरीडोर में कृषक कल्याण को केंद्रीय प्राथमिकता दी गई है। नर्मदा घाटी की समृद्ध कृषि पट्टी से जुड़े नरसिंहपुर और रायसेन जिलों में आधुनिक फूड पार्क्स, उन्नत कृषि-प्रसंस्करण इकाइयां, वेयरहाउसिंग और कोल्ड चेन नेटवर्क स्थापित किए जाएंगे। इस पहल से स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित फसलों, दलहन, तिलहन, फल एवं सब्जियों का स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन सुनिश्चित होगा। किसानों को बिचौलियों से मुक्ति पाकर अपनी उपज का लाभकारी व बेहतर मूल्य सीधे प्राप्त होगा। साथ ही ग्रामीण युवाओं को अपने ही गांव व तहसील के निकट कृषि-आधारित उद्योगों में रोजगार प्राप्त होगा। जबलपुर में रक्षा व इंजीनियरिंग विनिर्माण को मिलेगी नई पहचान महाकौशल क्षेत्र में जबलपुर और उसके आसपास के भू-भाग को उन्नत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ठोस कार्य योजना बनाई गई है। इस क्षेत्र में भारी इंजीनियरिंग, आधुनिक विनिर्माण, रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र की सहायक इकाइयों तथा लॉजिस्टिक्स हब का विकास किया जाएगा। क्लस्टर के विकास से न केवल स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बड़े पैमाने पर काम मिलेगा बल्कि महाकौशल के तकनीकी व गैर-तकनीकी युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर हजारों नए रोजगार सृजित होंगे। भोपाल को आधुनिक ज्ञान और उच्च प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में किया जाएगा विकसित राजधानी भोपाल और उसके समीपवर्ती क्षेत्र को आधुनिक ज्ञान और उच्च प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहाँ सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी-सक्षम सेवाओं, नॉलेज सर्विसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग और अनुसंधान एवं विकास से जुड़े आधुनिक क्लस्टर्स स्थापित होंगे। इससे राजधानी के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थानों से निकलने वाले उच्च-शिक्षित युवाओं को अत्याधुनिक और उच्च-वेतन वाले रोजगार के अवसर अपने शहर में ही उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही इस क्षेत्र में उच्च स्तरीय नागरिक व सामाजिक अधोसंरचना का भी विस्तार किया जाएगा जिससे संपूर्ण क्षेत्र का जीवन स्तर बेहतर होगा। मालवा-निमाड़ के औद्योगिक क्षेत्र का होगा सुदृढ़ीकरण मध्य और पश्चिमी मध्यप्रदेश के आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले सीहोर एवं देवास क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, विनिर्माण उद्योग, वेयरहाउसिंग और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब स्थापित किए जाएंगे। देश की वाणिज्यिक राजधानी इन्दौर को एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, आधुनिक आईटी सेवाओं और वैश्विक सेवा उद्योग के केंद्र के रूप में और अधिक विस्तार दिया जाएगा। इस नए कॉरीडोर का सीधा जुड़ाव देवास और पीथमपुर के पहले से विकसित सुदृढ़ औद्योगिक इको सिस्टम से किया जाएगा, जिससे समूचे मालवा-निमाड़ अंचल में परिवहन, होटल, खुदरा व्यापार और सहायक सेवाओं में अभूतपूर्व आर्थिक वृद्धि होगी। औद्योगिक टाउनशिप का श्रमिक कल्याण के साथ होगा निर्माण राज्य सरकार द्वारा इस कॉरीडोर के सड़क के किनारे सुनियोजित औद्योगिक टाउनशिप निर्माण का प्रारूप तैयार किया गया है। इन हबों के भीतर केवल कारखाने ही नहीं होंगे बल्कि कार्यरत श्रमिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों के लिए सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर तैयार किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए टाउनशिप्स में अत्याधुनिक अस्पताल, उच्च गुणवत्ता वाले विद्यालय, डे-केयर केंद्र, आधुनिक कौशल विकास संस्थान, खेल परिसर और सघन हरित क्षेत्र अनिवार्य रूप से विकसित किए जाएंगे। इस तरह के प्रकल्प से श्रमिकों को कारखानों के समीप ही सुरक्षित, स्वस्थ और उच्च स्तरीय जीवन परिवेश प्राप्त होगा। उद्योगों के लिए 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल से सीधे उत्पादन की सुविधा होगी उपलब्ध निवेशकों और उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए इस कॉरीडोर में अत्याधुनिक 'प्लग-एंड-प्ले' अधोसंरचना उपलब्ध कराई जाएगी। उद्योगपतियों को समतल व विकसित भूमि, चौड़ी आंतरिक सड़कें, 24 घंटे निर्बाध गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति, प्रचुर औद्योगिक जल, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वैज्ञानिक सीवरेज प्रणाली और हाई-स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी पहले से पूरी तरह तैयार मिलेगी। निवेशक इन बुनियादी सुविधाओं के साथ अपनी मशीनरी स्थापित कर तत्काल उत्पादन प्रारंभ कर सकेंगे। इससे परियोजनाओं की स्थापना अवधि में भारी कमी आएगी और उत्पादन लागत घटेगी। स्थानीय स्तर पर 6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर का सृजन परियोजना के प्रथम चरण में 7 जिलों के रणनीतिक स्थानों पर लगभग 10 हजार एकड़ क्षेत्र में 3 से 5 प्राथमिक औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे। प्रारंभिक आंकलन और अध्ययन के अनुसार मार्च 2028 … Read more

इंदौर में जल संकट पर सख्ती: GPS से होगी टैंकरों की निगरानी, पीने के पानी से गाड़ी धोने पर जुर्माना

इंदौर  मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में जल संकट से निपटने के लिए गुरुवार को कई उपायों की घोषणा की गई। इनमें GPS आधारित निगरानी प्रणाली के जरिए टैंकरों से पानी की आपूर्ति करना और ट्यूबवेल की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत करना शामिल है। इंदौर जिले में 1 जून से 30 सितंबर के बीच 633.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य मानसून बारिश (868.1 मिमी) से 27 प्रतिशत कम है। 30 प्रतिशत हिस्से में अभी भी नर्मदा की पाइपलाइनें नहीं पहुंची इंदौर शहर अपनी पेयजल जरूरतों के लिए मुख्य रूप से नर्मदा नदी पर निर्भर है। नगर निगम की पाइपलाइनों के जरिए लगभग 80 किमी दूर खरगोन जिले के जलूद से नर्मदा का पानी इंदौर लाया जाता है। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि लगभग 35 लाख की आबादी वाले इस शहर के 30 प्रतिशत हिस्से में अभी भी नर्मदा की पाइपलाइनें नहीं पहुंची हैं।  

MP में MSP पर खरीदी की तैयारी तेज, ज्वार-बाजरा और धान के लिए 8,77,947 से ज्यादा किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन

समर्थन मूल्य पर ज्वार, बाजरा एवं धान उपार्जन के लिये 8 लाख 77 हजार 947 से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये कुल 8 लाख 76 हजार 7 किसानों ने पंजीयन कराया है। इसमें से धान के लिये 8 लाख 68 हजार 214, ज्वार के लिये 2 हजार 39 और बाजरे के लिये 7 हजार 694 किसानों ने पंजीयन कराया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये थे। जबलपुर संभाग में 4 लाख 7 हजार 926, नर्मदापुरम में 35 हजार 394, भोपाल में 27 हजार 920, रीवा में 2 लाख 53 हजार 979, शहडोल में 73 हजार 944, सागर संभाग में 66 हजार 142, ग्वालियर में 1599, चंबल में 821, उज्जैन में 779 और इंदौर संभाग में 46 किसानों ने पंजीयन कराया है। इस बार किसानों की एग्री स्टेक आईडी, जिसमें किसानों के सभी खसरे रहते है, के माध्यम से पंजीयन कराया गया था।

सोयाबीन किसानों को राहत, खरीफ 2026 में भावांतर योजना लागू करने की स्वीकृति

जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति : अन्नदाताओं के हक में बड़ा फैसला प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए 27,050 करोड़ रूपये की स्वीकृति जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत संचालित 94 सांदीपनि वि‌द्यालयों के वि‌द्यार्थियों के परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रूपये की स्वीकृति निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में महिला एवं बाल विकास के जिला कार्यालय स्थापना के लिए 24 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076 करोड़ 37 लाख रूपये की स्वीकृति विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के लिए 15,557.35 करोड़ रूपये की स्वीकृति शासकीय स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय, आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण और विस्तार के लिए 2,875.20 करोड़ रूपये की स्वीकृति आयुष विभाग की आयुष महाविद्यालय और चिकित्सालय से संबंधित अम्ब्रेला योजना के लिए 3,535 करोड़ रूपये की स्वीकृति राष्ट्रीय आयुष मिशन के निरंतर संचालन के लिए 1,697.62 करोड़ रूपये की स्वीकृति राज्य सूचना आयोग की स्थापना संबंधी योजनाओं के लिए 71 करोड़ 81 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिये गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरूवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। कैबिनेट ने राज्य में औद्योगिक निवेश और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने के लिए शत-प्रतिशत शासकीय स्वामित्व वाली 'जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी' के गठन के प्रस्ताव को स्वीकृत किया। अन्नदाताओं के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए 'पीएम-आशा' योजना अन्तर्गत भावांतर भुगतान योजना लागू करने की स्वीकृति दी गई।मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए लगभग 27,050 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मंत्रि-परिषद ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076.37 करोड़ रुपये तथा 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग की 15,557 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की योजनाओं की निरंतरता को मंजूर की गई। प्रदेश में आयुष चिकित्सा विस्तार व राष्ट्रीय आयुष मिशन के लिए 5,232 करोड़ रुपये एवं शासकीय विद्यालयों के अधोसंरचना निर्माण के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये की निरंतरता की स्वीकृति दी गई। इसके अतिरिक्त नवगठित जिलों-निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा व मैहर में महिला एवं बाल विकास कार्यालयों के लिए 24 नवीन पदों तथा जनजातीय सांदीपनि विद्यालयों के छात्र परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रुपये का प्रावधान किया गया। जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी प्रदेश के औद्योगिक विकास एवं निवेश को नई गति देने के लिए मंत्रि-परिषद ने जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ चयनित औद्योगिक एवं आर्थिक हबों के समेकित विकास के लिए पूर्णतः शासकीय स्वामित्व वाली विशेष कंपनी (एसपीवी) 'जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड' गठित करने की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति अनुसार कंपनी पर मध्यप्रदेश शासन का पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रण रहेगा। कंपनी के सुदृढ़ वित्तीय आधार के लिए राज्य शासन द्वारा 100 करोड़ रूपये की प्रारंभिक चुकता पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी के प्रभावी संचालन और नीतिगत निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय सामान्य निकाय गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा नामित एवं नियुक्त उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक सशक्त कार्यकारी निकाय के माध्यम से कंपनी के कार्यों का संचालन किया जाएगा। इकॉनॉमिक हब के तीव्र और सुव्यवस्थित विकास के उद्देश्य से विशेष कंपनी को भूमि की पहचान, भूमि प्रबंधन, भू-अर्जन, भूमि विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग, ले-आउट, भू-आवंटन, लीज/सब-लीज, मोनेटाइजेशन तथा बुनियादी व सामाजिक अधोसंरचना के विकास की शक्तियां प्रदान की जाएंगी। आवश्यकतानुसार राज्य शासन की भूमि सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से रियायती दर या निर्धारित शर्तों पर कंपनी को उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में वन भूमि की आवश्यकता होने पर संबंधित केंद्रीय एवं राज्य कानूनों, पूर्वानुमोदन, क्षतिपूर्ति वनीकरण तथा एनपीवी सहित सभी वैधानिक शर्तों की पूर्ति के बाद ही भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी को 'मध्यप्रदेश निवेश क्षेत्र विकास एवं प्रबंध अधिनियम, 2013' के अंतर्गत उपयुक्त इन्वेस्टमेंट रीजन एजेंसी के रूप में अधिकृत किया जाएगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के अंतर्गत विधि विभाग की सहमति से अधिसूचित इकॉनाँमिक हबो के लिए इसे नोडल एजेंसी के रूप में आवश्यक शक्तियां और दायित्व सौंपे जाएंगे। कंपनी के कार्य क्षेत्र के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण इसके दायरे में नहीं होगा। कंपनी का संपूर्ण ध्यान आर्थिक हबों के भीतर आंतरिक एवं साझा अधोसंरचना और आर्थिक गतिविधियों के संवर्धन पर ही केंद्रित रहेगा। विशेष कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्क, सेक्टोरल पार्क जैसे फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी/आईटी पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आदि साझा सुविधाएं आवासीय और सामाजिक बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पीपीपी, ईपीसी, कन्सेशन, लीज, संयुक्त उपक्रम तथा डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे विभिन्न वैधानिक मॉडलों का उपयोग किया जा सकेगा। इस निर्णय के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को परियोजना से जुड़े विभागों जैसे वित्त, राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, ऊर्जा, लोक निर्माण, वन तथा विधि विभाग से आवश्यक समन्वय कर अधिसूचनाएं, शासनादेश एवं अन्य वैधानिक दस्तावेज जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। सोयाबीन उपार्जन पर उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने किसानों को खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति दी है। यह योजना भारत सरकार के 'प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान' ( पीएम-आशा) के तहत संचालित 'प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम' (पीडीपीएस) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों को उनकी औसत गुणवत्ता वाली सोयाबीन उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित कराना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। योजना के अंतर्गत अधिसूचित मंडियों में उपज की विक्रय अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक … Read more

राहुल गांधी पर मंत्री विश्वास सारंग का तीखा बयान, देश को कमजोर करने का लगाया आरोप

भोपाल  मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे देश की अर्थव्यवस्था और व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास और कल्याण के कार्य हो रहे हैं तथा अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है। इसके बावजूद विपक्ष देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है। मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि उन्हें लगता है कि राहुल गांधी और विपक्ष के नेता देश की अर्थव्यवस्था तथा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर भारत को कमजोर करना चाहते हैं। मैं यह बात पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर नहीं बल्कि भारत के नागरिक के रूप में कह रहा हूं। राहुल गांधी कठपुतली बन गए हैं सारंग ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश में अराजकता फैलाने के लिए देश-विरोधी ताकतों के हाथों की कठपुतली बन गए हैं। देश के देशभक्त नागरिक भारत को विकास के रास्ते से भटकने नहीं देंगे और न ही किसी को देश में अव्यवस्था फैलाने की अनुमति देंगे। विपक्ष नाकामिया छिपाने एसआईआर को मुद्दा बना रहा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए सारंग ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र है। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को विरोध करने और अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। विपक्ष अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए एसआईआर को मुद्दा बना रहा है। राहुल गांधी को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी संस्थागत संरचना की पर्याप्त जानकारी नहीं है। संविधान और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज की समझ नहीं है चुनाव आयोग पर राहुल गांधी के आरोपों को लेकर सारंग ने कहा कि कांग्रेस नेता को संविधान और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज की समझ नहीं है। चुनाव आयोग का अपना अलग कर्मचारी कैडर नहीं होता। आयोग के फैसलों को लागू करने में राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया भी राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों के माध्यम से लागू की जाती है। इनमें लेखपाल, शिक्षक और उपखंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) जैसे अधिकारी शामिल हैं। …तो कांग्रेस कई राज्यों में कैसे जीतती? सारंग ने सवाल उठाया कि, यदि चुनाव आयोग चुनावों में हेरफेर करता, तो कांग्रेस विभिन्न राज्यों में चुनाव कैसे जीतती? उन्होंने प्रियंका गांधी के लोकसभा पहुंचने और हिमाचल प्रदेश, केरल तथा कर्नाटक में कांग्रेस की सरकारें बनने का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले विपक्ष को तथ्यों और ठोस आधार के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। चुनाव आयोग की आलोचना करने के बजाय कांग्रेस को अपनी चुनावी विफलताओं और राजनीतिक रणनीति पर आत्ममंथन करना चाहिए।

मध्य प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं के 4,878 पदों पर होगी भर्ती, आदिवासी जिलों पर विशेष फोकस

भोपाल मध्य प्रदेश के ग्रामीण, आदिवासी और शहरी इलाकों में जमीनी स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 4,878 आशा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के चयन को मंजूरी दे दी है। अगस्त 2022 के बाद यह पहला मौका है जब इतने बड़े पैमाने पर यह भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जिससे राज्य के दूर-दराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा काफी हद तक बढ़ेगा। 614 सुपरवाइजरों की भी भर्ती इस नए भर्ती अभियान के तहत कुल 4,264 पद आशा कार्यकर्ताओं के और 614 पद उनके पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) के लिए तय किए गए हैं। भौगोलिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इनका विभाजन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किया गया है, ताकि हर जरूरतमंद तक स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से पहुंच सकें। ग्रामीण और शहरी इलाकों में क्या होगा बंटवारा? आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चुनी जाने वाली कुल आशा कार्यकर्ताओं में से 3,062 कार्यकर्ताओं की तैनाती ग्रामीण इलाकों में की जाएगी, जहां आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई तरह की चुनौतियां बनी रहती हैं। वहीं, शहरी क्षेत्रों की बस्तियों और वार्डों के लिए 1,202 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, ताकि शहरी गरीबों को भी बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सके। आदिवासी जिलों पर रहेगा विशेष जोर दुरुस्त स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे ज्यादा जरूरत वाले प्रदेश के 20 आदिवासी-प्रधान जिलों के लिए कुल 1,251 पद आरक्षित किए गए हैं। इनमें 1,051 पद आशा कार्यकर्ताओं के और 200 पद पर्यवेक्षकों के शामिल हैं। इन आदिवासी जिलों के ग्रामीण अंचलों में 956 आशा कार्यकर्ता और शहरी हिस्सों में 95 कार्यकर्ता मोर्चा संभालेंगी, जिससे वहां मातृ मृत्यु दर और शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतों को कम करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग और जनता के बीच की मजबूत कड़ी विशेषज्ञ मानते हैं कि आशा कार्यकर्ता स्थानीय समुदाय और स्वास्थ्य विभाग के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम करती हैं। वे गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के दौरान मिलने वाली जरूरी जांच (एंटीनेटल केयर), संस्थागत प्रसव, बच्चों के टीकाकरण और पोषण तथा हेल्थकेयर के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाती हैं। इस नई भर्तियों से न केवल रिमोट इलाकों में हेल्थ सर्विस डिलीवरी मजबूत होगी, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की तमाम स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी समय पर आम जनता तक पहुंच सकेगी।

MP के ग्लोबल स्किल पार्क के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट, 97% तक दर्ज हुआ प्लेसमेंट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्लोबल स्किल पार्क के अंतर्राष्ट्रीय प्लेसमेंट प्राप्त प्रशिक्षणार्थियों को दी बधाई गल्फ क्षेत्र में कार्य करेंगे 27 प्रशिक्षणार्थी संस्थान में संचालित है 9 तकनीकी पाठ्यक्रम संस्थान में प्रशिक्षित युवाओं की गत वर्षों में दर्ज की गई 97 प्रतिशत प्लेसमेंट भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क भोपाल के 27 प्रशिक्षणार्थियों ने मंत्रालय में भेंट की। संस्था के इन प्रशिक्षणार्थियों ने गल्फ क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय प्लेसमेंट प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उनके सफल करियर तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मुलाकात के दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने अपने तकनीकी प्रशिक्षण, चयन प्रक्रिया और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार प्राप्त करने की यात्रा के अनुभव साझा किए। इस अवसर पर कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल उपस्थित थे। संस्थान उपलब्ध करा रहा है तकनीकी प्रशिक्षण और उद्योग केंद्रित कौशल विकास सुविधाएं उल्लेखनीय है कि प्रशिक्षणार्थियों में एडवांस्ड मैकेनिकल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड ऑटोमेटिव टेक्नोलॉजी तथा एडवांस्ड मेकाट्रॉनिक्स एंड इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स पाठ्यक्रमों के प्रशिक्षणार्थी शामिल हैं। इन प्रशिक्षणार्थियों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नियुक्ति, एसएसआर ग्लोबल स्किल्स पार्क में प्रदान किए जा रहे तकनीकी प्रशिक्षण और उद्योग केंद्रित कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संस्थान में पिछले वर्षों के दौरान लगभग 97 प्रतिशत प्लेसमेंट दर्ज की गई। यहां प्रतिवर्ष लगभग 2 हजार विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को विभिन्न तकनीकी एवं कौशल विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रदेश की 10 आईटीआई के लिए हब के रूप में कार्य कर रहा है ग्लोबल स्किल पार्क मंत्री टेटवाल ने इस अवसर पर बताया कि संस्थान में 9 उन्नत तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित हैं, जिनमें एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स (मोबाइल डिवाइसेस एंड IoT इंटीग्रेशन), एडवांस्ड एयर कंडीशनिंग एंड रेफ्रिजरेशन एडवांस्ड नेटवर्किंग एंड सिस्टम्स एडमिनिस्ट्रेशन, एडवांस्ड मैकेनिकल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मेकाट्रॉनिक्स एंड इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स, एडवांस्ड मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल सर्विसेज तथा एडवांस्ड प्रिसिजन इंजीनियरिंग (CNC एंड प्रिसिजन इंजीनियरिंग) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, संस्थान प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 और हब एंड स्पोक मॉडल के अंतर्गत भी प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह संस्थान प्रदेश की 10 आईटीआई के लिए हब के रूप में भी कार्य कर रहा है।