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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति गठित

भोपाल  राज्य शासन द्वारा सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय एम.ओ.एस.पी.आई एवं राज्य सरकार के मध्य सांख्यिकीय गतिविधियों के प्रभावी समन्वय एवं केंद्रीय क्षेत्रीय अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के सम्बन्ध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है। समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, वित्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उप महानिदेशक, भारत सरकार, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, (क्षेत्र संकार्य प्रभाग) तथा सम्बंधित केंद्रीय मंत्रालयों/राज्य के विभागों/केंद्रीय या राज्य पीएसयू के प्रतिनिधि (एजेंडा अनुसार) सदस्य होंगे। आयुक्त, आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, म.प्र को सदस्य-सचिव नामित किया गया है। राज्य स्तरीय समन्वय समिति कार्यक्षेत्र राज्य स्तरीय समन्वय समिति का कार्यक्षेत्र एम.ओ.एस.पी.आई और उसके क्षेत्रीय कार्यालयों तथा राज्य के सांख्यिकी विभाग के बीच नियमित संवाद को सुगम बनाना जिससे प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षणों जैसे एन.एस.एस, ए.एस.एल, आर्थिक जनगणना एएसयूएसई, पीएलएफएस, एचसीईएस अलावा अन्य सांख्यिकी गतिविधियों का योजनाबद्ध क्रियान्वयन किया जा सके। आगामी अखिल भारतीय सर्वेक्षणों, सेंपल फ्रेम्, सैंपल मिलान तथा इनमें राज्य की भागीदारी से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाना, एम.ओ.एस.पी.आई द्वारा जारी मानकों जैसे राष्ट्रीय मेटाडाटा संरचना (एन.एम.डी.एस) 2.0, सांख्यिकी गुणवत्ता मूल्यांकन ढांचा (एस.क्यू.ए.एफ) आदि के राज्य सांख्यिकी प्रणाली में अपनाना तथा समीक्षा एवं निगरानी करना तथा एम.ओ.एस.पी.आई तथा राज्य सरकार के सांख्यिकी विभाग के बीच समन्वय के लिए मंच के रूप में कार्य करने जैसे कार्य किए जाएंगे। सांख्यिकी की गुणवत्ता, समयबद्धता एवं तुलनीयता अंतर्गत राज्य एवं जिला स्तर के सांख्यिकीय उत्पादों जैसे जीएसओपी/जीडीडीपी, औद्योगिक उत्पादन सूबकांक, मूल्य सूचकांक आदि की राष्ट्रीय मानकों, समयबद्धता एवं नीति प्रासंगिकता के अनुरूप समीक्षा की जायेगी। साथ ही राज्य स्तर पर सांख्यिकीय कार्यों में अंतराल ओवरलेप या दोहराव की पहचान कर सुधारात्मक उपाय सुझाना तथा आधुनिक एवं आईटी-सक्षम सांख्यिकीय विधियों को अपनाने को प्रोत्साहित करना एवं उनकी निगरानी जैसे कार्यों का संपादन करेगी। डेटा प्रसार, उपयोगकर्ता सहभागिता एवं नीति प्रासंगिकता अंतर्गत राज्य सांख्यिकीय उत्पादों का समय पर प्रसार सुनिश्चित करना तथा एम.ओ.एस.पी.आई के राष्ट्रीय डेटा प्रसार मानकों अग्रिम रिलीज कैलेंडर एवं मेटाडाटा सहित अनुरूप सुगम बनाना, उपयोगकर्ता आवश्यकताओं, राज्य प्राथमिकताओं एवं उभरते क्षेत्रों पर एम.ओ.एस.पी.आई को फीडबेक प्रदान करना तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, कार्यक्रमों की निगरानी एवं मूल्यांकन में सांख्यिकी के उपयोग को बढ़ावा देने जैसे कार्यों का संपादन करेगी। क्षमता निर्माण एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण अंतर्गत एम.ओ.एस.पी.आई के अंतर्गत नेशनल स्टैटिस्टिकल सिस्टम ट्रेनिंग के सहयोग से राज्य एवं जिला सांख्यिकी संवर्ग की क्षमता का विकास, संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए सुझाव जैसे सांख्यिकीय संवर्ग की स्थापना, डीईएस का उन्नयन, सर्वेक्षण एवं आईटी संसाधनों में सुधार तथा राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं एवं नवाचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने जैसे कार्यों का संपादन करेगी। संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना एमपीएलएडीएस के अंतर्गत भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की निगरानी तथा लंबित मुद्दों का समाधान कार्यों का संपादन भी करेगी।  केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाऐं अंतर्गत 150 करोड़ रूपये से अधिक लागत वाली प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी एवं अंतर विभागीय समन्वय से जुड़े मुद्दों का समाधान तथा राज्य स्तरीय समन्वय समिति द्वारा सांख्यिकी की गुणवत्ता क्षमता निर्माण एवं अन्य गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा एवं समन्वय के लिए वर्ष में कम से कम दो बार बैठक का आयोजन किया जाएगा।  

नर्सिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों का इंतजार खत्म, हाईकोर्ट के आदेश से परीक्षा का रास्ता साफ

 जबलपुर  हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में सीबीआई जांच में उपयुक्त (सूटेबल) पाए गए नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए लंबित परीक्षाओं और परीक्षा परिणामों का रास्ता साफ कर दिया है। मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और विशाल बघेल उपस्थित रहे, जबकि राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा। हाई कोर्ट ने लाॅ-स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल को शैक्षणिक सत्र 2022-23 के जीएनएम प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित करने व सत्र 2021-22 के करीब 9,000 विद्यार्थियों के लिए जीएनएम तृतीय वर्ष की परीक्षा आयोजित करने की अनुमति प्रदान की। सुनवाई के दौरान काउंसिल ने लंबित परीक्षाएं व परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी, जबकि याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच में अनुपयुक्त पाए गए कॉलेजों के छात्रों को राहत दिए जाने का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने केवल उन संस्थानों को राहत दी जो जांच में मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच के दायरे में आए 695 कॉलेजों में से 156 सूटेबल कॉलेजों व कमियां दूर कर उपयुक्त घोषित किए गए 89 कॉलेजों के लिए ही परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शेष संस्थानों से संबंधित परीक्षाओं पर फिलहाल रोक जारी रहेगी।  

5 लाख से कम पासपोर्ट सत्यापन श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त कर रचा कीर्तिमान

भोपाल  नागरिक सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के निरंतर प्रयासों को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए पासपोर्ट आवेदनों के पुलिस सत्यापन के प्रदर्शन के आधार पर मध्यप्रदेश पुलिस को 5 लाख से कम पासपोर्ट आवेदन श्रेणी में देश में प्रथम स्थान प्रदान किया गया है। विदेश मामलों के माननीय मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा 19 जून 2026 (शुक्रवार) को "सीबी मुथम्मा हॉल", 'सी' विंग, जवाहरलाल नेहरू भवन, विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली" में मध्यप्रदेश पुलिस को वर्ष 2025-26 के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए “Institutional Performance Award for State Police” से सम्मानित किया गया।उपरोक्त कार्यकम में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व उप पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था श्री तरूण नायक एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक विशेष शाखा सुरक्षाश्रीमती रश्मि मिश्रा ने किया। इस उपलब्धि के लिए पुलिस महानिदेशकश्री कैलाश मकवाणा ने प्रदेश के सभी जिलों, विशेष शाखा, पासपोर्ट सत्यापन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी मध्यप्रदेश पुलिस के सामूहिक प्रयासों, समर्पण और सेवा भावना का परिणाम है। उन्होंने भविष्य में भी नागरिकों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ प्रदान करने के लिए इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 3लाख 35हजार 647 पासपोर्ट सत्यापनसमयबद्ध एवं गुणवत्ता पूर्ण तरीके से संपादित किए गए। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश को इस श्रेणी में प्रथम पुरस्कार (Citation) प्रदान किया गया है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष भी पहली बार यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किया था और अब लगातार दूसरे वर्ष यह उपलब्धि अर्जित कर प्रदेश पुलिस ने अपनी कार्यकुशलता, जवाबदेही और नागरिक सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः सिद्ध किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों, समयबद्ध सत्यापन प्रक्रिया तथा तकनीक आधारित कार्यप्रणाली का परिणाम है।  

मध्यप्रदेश में पेड़ों की कटाई पर सख्ती, हर प्रोजेक्ट में 80% पेड़ों का ट्रांसलोकेशन जरूरी; नई नीति लागू

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष 'ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026' का ड्राफ्ट पेश किया। इस नीति का मुख्य उद्देश्य विकास परियोजनाओं (जैसे रोड, मेट्रो, फ्लाईओवर) के नाम पर होने वाली अंधाधुंध पेड़ों की कटाई को रोकना और वयस्क पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित दूसरी जगह शिफ्ट करने को प्राथमिकता देना है। '20-फॉर-1' का कड़ा और नया नियम इस प्रस्तावित नीति की सबसे बड़ी खासियत इसका '20-फॉर-1' वृक्षारोपण फॉर्मूला है। अगर किसी बेहद अपरिहार्य स्थिति में एक पेड़ को काटना पड़ता है, तो संबंधित निर्माण एजेंसी को उसके बदले 20 नए पौधे लगाने होंगे। नियमों के मुताबिक, इनमें से 10 पौधे सीधे तौर पर कटे हुए पेड़ के मुआवजे के रूप में होंगे, जबकि शेष 10 पौधे इसलिए लगाए जाएंगे ताकि ट्रांसप्लांटेशन के दौरान जिन वयस्क पेड़ों की जान नहीं बच पाती, उनके नुकसान की भरपाई की जा सके। ग्वालियर के थाटीपुर मामले से लिया सबक दरअसल, यह पूरी कवायद ग्वालियर के थटीपुर पुनर्विकास योजना के दौरान सामने आई लापरवाही के बाद शुरू हुई है। वहां बड़ी संख्या में शिफ्ट किए गए पेड़ देखरेख के अभाव में मर गए थे, जिस पर हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए सरकार से एक व्यापक नीति मांगी थी। अब नए नियमों के तहत प्रोजेक्ट डिजाइन में बदलाव करके पहले पेड़ बचाने की कोशिश करनी होगी। पेड़ काटना केवल अंतिम विकल्प होगा। ऑनलाइन डैशबोर्ड से जनता करेगी निगरानी भ्रष्टाचार और कागजी दावों को रोकने के लिए सरकार ने इस बार तकनीक का सहारा लिया है। नीति के अनुसार, सभी ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों और नए रोपे गए पौधों की अनिवार्य रूप से जियो-टैगिंग की जाएगी। इसके लिए एक सार्वजनिक ऑनलाइन डैशबोर्ड बनाया जाएगा। इस डैशबोर्ड पर पेड़ों की सटीक लोकेशन, उनकी तस्वीरें और रखरखाव का पूरा रिकॉर्ड रीयल-टाइम में अपडेट होगा, जिससे आम नागरिक भी इसकी सीधे निगरानी कर सकेंगे।  

60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं, कई जिलों में बारिश और आंधी की चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्ती के बीच मौसम के मिजाज ने एक बार फिर करवट ले ली है। शुक्रवार को प्रदेशभर में सूरज के तीखे तेवरों और भारी उमस ने लोगों को बेहाल किया। कई दिनों बाद राज्य के अधिकतम तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक का उछाल दर्ज किया गया। छतरपुर का खजुराहो 42.4 डिग्री के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा, वहीं छिंदवाड़ा में पारा सामान्य से 5.3 डिग्री ऊपर चढ़कर 38.2 डिग्री तक पहुंच गया। बीते 24 घंटों के दौरान राजगढ़, दमोह, रीवा और सतना को छोड़कर प्रदेश के बाकी हिस्से सूखे रहे। हालांकि देर शाम को प्रदेश के विभिन्न जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और कहीं–कहीं बारिश के साथ बौछारें पड़ीं 23 को छत्तीसगढ़ पहुंचेगा मानसून मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि प्रदेशवासियों को झमाझम वर्षा के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। मानसून के 23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंचने का अनुमान है, जिसके तीन से चार दिन बाद यानी 26-27 जून के आसपास ही इसके मध्य प्रदेश में प्रवेश करने की संभावना है। तब तक प्रदेश में गर्मी और उमस का मिलाजुला असर बना रहेगा। शनिवार के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी भले ही मानसून दूर हो, लेकिन प्री–मानसून सिस्टम के कारण मौसम विज्ञान केंद्र ने शनिवार के लिए अलर्ट जारी किया है। सीहोर और आगर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत करीब 36 जिलों में येलो अलर्ट रहेगा, जहां 40 से 50 किमी की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलेंगी और छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं। प्रमुख शहरों का तापमान (डिग्री सेल्सियस में) शहर अधिकतम तापमान (°C) न्यूनतम तापमान (°C) ग्वालियर 40.7 30.1 जबलपुर 38.8 28.5 भोपाल 37.3 24.4 इंदौर 35.1 24.5  

नगरीय निकाय कर्मियों की सेवाकाल में असमय मृत्यु पर आश्रितों को मिलेगा 1.25 लाख रुपये तक का अनुग्रह अनुदान

भोपाल  "मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रगतिशील सोच और लोककल्याणकारी निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता से आज प्रदेश के नगरीय निकाय कर्मचारियों और उनके परिवारों को एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा कवच मिला है।'' नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए बताया कि नगरीय निकायों के सेवकों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। मंत्री  विजयवर्गीय ने बताया कि मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम, 2017 के दायरे में आने वाले नगर पालिक निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर परिषद के कर्मचारियों की सेवा में रहते हुए मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कर्मचारी के बैण्ड वेतन तथा ग्रेड पे के सम्मिलित योग के छह गुना के बराबर की धनराशि अनुग्रह अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा 1,25,000 रुपये (एक लाख पच्चीस हजार रुपये) होगी। यह कल्याणकारी निर्णय 1 अप्रैल, 2025 और उसके उपरांत घटित होने वाले सभी प्रकरणों पर प्रभावशील होगा। यह निर्णय नगरीय प्रशासन के मैदानी कार्यकर्ता

रतलाम फायरिंग कांड: वारदात को अंजाम देकर फरार हुए बदमाश, पुलिस जांच में जुटी

रतलाम  दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र के सैफी नगर में शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे सराफा व्यापारी कमल सोनी के मकान पर अज्ञात बदमाशों ने फायरिंग कर दी। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन गोली घर की कांच की खिड़की तोड़ते हुए अंदर दीवार से टकराकर दरवाजे के पास पड़े पैरदान पर जा गिरी। वारदात के बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। फुटेज में दो बाइक पर सवार चार बदमाश मुंह पर कपड़ा बांधे हुए दिखाई दे रहे हैं। आगे चल रही बाइक के पीछे बैठे सफेद टी-शर्ट पहने आरोपित ने पिस्टल निकालकर चलती बाइक से मकान की ओर निशाना साधते हुए फायर किया।

प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों के खातों में अंतरित होंगे 1640 करोड़ रुपये

भोपाल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी शनिवार 20 जून को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के अंतर्गत देशभर के किसानों को 23वीं किश्त अंतरित करेंगे। इसमें मध्यप्रदेश के 81 लाख से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में लगभग 1,640 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना वर्ष 2019 से संचालित है। इसके अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। योजना की 22 किस्तों के माध्यम से अब तक मध्यप्रदेश के किसान परिवारों को लगभग 33 हजार 800 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। प्रदेश में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के माध्यम से भी किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। इस तरह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के माध्यम से प्रदेश के पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष कुल 12 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। दोनों योजनाओं में अब तक किसानों को 56 हजार 240 करोड़ रुपये का वितरण किया जा चुका है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में किया सड़क निर्माण कार्य का किया भूमि-पूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इंदौर में आयोजित लोकार्पण व भूमि-पूजन कार्यक्रम में कहा है कि राज्य सरकार ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास का संकल्प लिया है और उसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।  उन्होंने कहा कि  नगर निगम इंदौर ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा स्वच्छता अभियान में इंदौर ने देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में देश ने विकास के अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि के प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश दोनों विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आज देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई मजबूती मिली है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में विकास के विभिन्न मानकों पर निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, रोजगार और जनकल्याण के क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को विकास का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजनांतर्गत जोन 8 में सड़क का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर के जोन क्रमांक 8 के वार्ड क्रमांक 37 में तुलसी नगर पुलिया से निपानिया तक प्रस्तावित सड़क विकास कार्य और प्राइमरी तथा आंतरिक सीवर लाइन निर्माण कार्य का आज रिमोट से भूमि-पूजन कर शुभारंभ किया। इसमें सड़क निर्माण कार्य की लागत 13.26 करोड़ और प्राइमरी तथा आंतरिक सीवर लाइन निर्माण कार्य की लागत 2.64 करोड़ रुपए है। यह सड़क लगभग 1.30 किलोमीटर लंबी एवं इन्दौर विकास योजना-2021 के अनुसार 30 मीटर चौड़ाई में निर्मित होगी। परियोजना अंतर्गत सीमेंट कंक्रीट सड़क निर्माण, सीवर चैम्बरों का सुदृढ़ीकरण, फुटपाथ निर्माण तथा विद्युत लाइन शिफ्टिंग सहित विभिन्न अधोसंरचनात्मक कार्य किए जाएंगे। सड़क के निर्माण से तुलसी नगर, निपानिया, अंकुर आंगन, राजाराम ऐवेन्यु तथा महालक्ष्मी नगर सहित आसपास के क्षेत्रों के रहवासियों को आवागमन में सुविधा होगी। साथ ही क्षेत्र में यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी और नागरिकों को बेहतर एवं नई कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकेगी। भूमि-पूजन समारोह की शुरुआत वंदे मातरम् के गायन से हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं समस्त जन द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की गई। महापौर इंदौर  पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प-गुच्छ और तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया। विकास कार्यों की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भूमि-पूजन समारोह में कनाड़िया रोड से खजराना रोड तक लगभग 1400 मीटर लिंक रोड  बनाने की घोषणा की। उन्होंने पूर्वी रिंग रोड से रोबोट चौराहे तक 6 लेन फ्लाई-ओवर बनाने की घोषणा की। इसकी अनुमानित लागत लगभग 50 करोड़ रुपए होगी। उन्होंने कहा कि अवैध कालोनियों को वैध करने के लिए भी ठोस कार्य करने के प्रयास करेंगे। हितलाभ का किया गया वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना अंतर्गत 2 हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया गया जिसमें  राहुल मरमट और  जगदीश उपाध्याय को 50-50 हजार के प्रतीकात्मक चेक मंच से प्रदान किये गये। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजवर्गीय, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट,  क्षेत्रीय सांसद  शंकर लालवानी,  क्षेत्रीय विधायक  महेन्द्र हार्डिया,  मधु वर्मा,  रमेश मेंदोला,  सुमित मिश्रा तथा संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त  संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर  शिवम वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अमला उपस्थित रहे।

40 से अधिक राष्ट्रीय उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों, अनुसंधान एवं शिक्षण संस्थानों ने साझा किए सुझाव

भोपाल  रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उप महानिदेशक (स्वदेशीकरण)  सुशील कुमार सतपुते ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थान और शिक्षण संस्थाएं एक साझा मंच पर आकर नवाचार आधारित रक्षा विनिर्माण को आगे बढ़ाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्यों में मजबूत औद्योगिक एवं नवाचार आधारित इको सिस्टम विकसित करना समय की आवश्यकता है और केंद्र व राज्यों के समन्वित प्रयासों से ही देश रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा। रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 20-21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन "आत्मनिर्भरता इन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग : प्रमोटिंग स्टेट-लेवल इकोसिस्टम्स" की तैयारियों के तहत मध्यप्रदेश शासन द्वारा एमपीआईडीसी मुख्यालय, भोपाल में तीसरे चरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय फ्लैगशिप परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण, एमएसएमई, स्टार्टअप, नवाचार तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। कार्यशाला में देशभर के 40 से अधिक प्रमुख उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और नीति विशेषज्ञों ने प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से भागीदारी कर अपने सुझाव साझा किए। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय पहल में 'इंडिजेनाइजेशन, एमएसएमई, स्टार्टअप एवं इनोवेशन इकोसिस्टम' विषय पर सह-नेतृत्व (को-लीड) राज्य की भूमिका निभा रहा है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव  राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य की उद्योग अनुकूल नीतियां, विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना, उपलब्ध संसाधन तथा कुशल मानव संसाधन इसे देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला राज्य की भावी रणनीति तय करने के साथ उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रस्तावित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की रूपरेखा, राज्यों की भूमिका तथा मध्यप्रदेश की सह-नेतृत्व जिम्मेदारी पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस दौरान बताया गया कि रक्षा उत्पादन विभाग ने राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के लिए सात प्रमुख रणनीतिक विषय निर्धारित किए हैं, जिन पर राज्यों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। एमपीआईडीसी द्वारा डिफेंस एवं एयरोस्पेस रणनीति वर्ष 2026-30 प्रस्तुत की गई। इसमें राज्य की वर्तमान औद्योगिक स्थिति, छह रणनीतिक स्तंभों तथा 24 प्रमुख पहलों के माध्यम से रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में निवेश, नवाचार और विनिर्माण को बढ़ावा देने की कार्ययोजना साझा की गई। प्रस्तुतीकरण में जबलपुर की सैन्य वाहन निर्माण क्षमता, इटारसी के आयुध उत्पादन, ग्वालियर के बायो-केमिकल अनुसंधान तथा कटनी की धातुकर्म विशेषज्ञता को मध्यप्रदेश की प्रमुख औद्योगिक शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया। कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण चरण हितधारकों के साथ सातों रणनीतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा रहा। उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, रक्षा प्रतिष्ठानों, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। विशेष रूप से स्वदेशीकरण, एमएसएमई, स्टार्टअप और नवाचार आधारित इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर उपयोगी सुझाव सामने आए। कार्यशाला में बीईएमएल, आईआरईएल, आयुध निर्माणी इटारसी, सेंट्रल प्रूफ एस्टैब्लिशमेंट इटारसी, एमपीएमएसएमई, ग्लोबल स्किल पार्क, आईआईएसईआर भोपाल तथा एमपीएसईडीसी सहित अनेक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं डीआरडीओ, आईआईटी दिल्ली, बीएचयू, धारवाड़, इंदौर, जम्मू, कानपुर, भिलाई, गांधीनगर एवं मद्रास, आईआईएससी बेंगलुरु, नासकॉम, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM), ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया, भारत डायनामिक्स लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑर्डनेंस लिमिटेड, गोल्डन पर्ल डिफेंस सिस्टम्स प्रा. लि. तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। इन संस्थानों की भागीदारी से कार्यशाला को राष्ट्रीय दृष्टिकोण और तकनीकी विशेषज्ञता मिली। एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक ने कार्यशाला के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर 30 जून 2026 तक राज्य की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रक्षा उत्पादन विभाग को भेजी जाएगी। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में मध्यप्रदेश की रणनीति और सुझावों का आधार बनेगी।