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खनन माफिया ने किया बर्बरतापूर्ण प्रयास, पटवारी को ट्रैक्टर से रौंदने की कोशिश, खंडवा में केस दर्ज

खंडवा  अवैध उत्खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। खंडवा तहसील के जावर सर्किल अंतर्गत ग्राम भकराडा में मुरम के अवैध उत्खनन की सूचना मिलने पर राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने और पटवारी पर जानलेवा हमला करने की कोशिश का मामला भी सामने आया है। मौके से आरोपी फरार जानकारी के अनुसार हल्का पटवारी मयंक फुलेरिया जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि शासकीय भूमि पर अवैध रूप से मुरम का उत्खनन किया जा रहा था। मौके पर एक जेसीबी मशीन और चार ट्रैक्टर मौजूद थे, जिनके जरिए मुरम को पास के मुर्गी केंद्र तक ले जाया जा रहा था। पटवारी को देखकर मौके पर मौजूद लोग भागने लगे। इस दौरान ट्रैक्टर चालक कुंदन पिता गजेंद्र राजपूत ने पटवारी पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया। हालांकि पटवारी ने सतर्कता दिखाते हुए किसी तरह अपनी जान बचाई। जेसीबी जब्त, अन्य वाहन मौके से भागे घटना के बाद सभी ट्रैक्टर चालक अपने वाहन लेकर फरार हो गए, लेकिन जेसीबी मशीन गड्ढे में फंसने के कारण मौके से नहीं निकल सकी। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जेसीबी को जब्त कर थाना जावर की अभिरक्षा में सौंप दिया है। प्रारंभिक जांच में जेसीबी चालक की पहचान सावन भिलाला निवासी बांगरदा और एक अन्य ट्रैक्टर चालक की पहचान मुकेश सोलंकी निवासी बिजोरा भील के रूप में हुई है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221, 132, 110, 303(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 21 और 4 के अंतर्गत भी कार्रवाई की गई है।  महेश सोलंकी, तहसीलदार, खंडवा खंडवा डीआईजी मनोज कुमार राय ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्य में बाधा डालना और जान से मारने की कोशिश जैसे गंभीर अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि अवैध उत्खनन में लिप्त माफियाओं के हौसले पस्त किए जा सकें।

ड्यूटी पर गए पटवारी पर हमला, ट्रैक्टर चढ़ाकर मारने का प्रयास; किसी तरह बचाई जान

 खंडवा  जिले में अवैध रूप से उत्खनन करने वालों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। ग्राम जावर के भकराड़ा में अवैध उत्खनन रोकने गए पटवारी को जान से मारने का प्रयास किया गया। किसी तरह पटवारी ने भागकर अपनी जान बचाई। अवैध उत्खनन करने वालों पर विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आरोपितों की तलाश की जा रही है। पटवारी पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास ग्राम भकराड़ा में शासकीय भूमि पर अवैध रूप से बुलडोजर से खुदाई कर ट्रैक्टर-ट्रालियों से मुरम निकाली जाने की सूचना पर यहां कार्रवाई के लिए हल्का पटवारी मयंक फुलेरिया जांच के लिए पहुंचे। जांच में पता चला कि अवैध उत्खनन कर पास ही स्थित मुर्गी पालन केंद्र पर मुरम ले जाई जा रही है। जब ट्रैक्टर-ट्रालियां रोकने का प्रयास किया गया, तो चालक कुंदन पुत्र गजेंद्र राजपूत निवासी भकराड़ा ने पटवारी फुलेरिया पर ट्रैक्टर चढ़ाने के लिए आगे बढ़ा दी। मौके से बुलडोजर जब्त, आरोपित फरार पटवारी ने किसी तरह स्वयं को बचाया। मौके पर एक बुलडोजर और चार ट्रैक्टर-ट्रालियां थीं। ट्रैक्टर चालक वाहन सहित यहां से भाग निकले, जबकि मुरम का उत्खनन कर रहा बुलडोजर गड्ढे में फंसने के कारण निकल नहीं सका। बुलडोजर का चालक सावन पुत्र राजू भिलाला निवासी बांगरदा और एक अन्य ट्रैक्टर का चालक मुकेश सोलंकी निवासी बिजोरा भील थे। खंडवा तहसीलदार महेश सोलंकी ने बताया कि मौके से बुलडोजर मशीन को जब्त कर थाना जावर की अभिरक्षा में सौंप दिया गया है। विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज आरोपितों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 132, 110, 303 (2) व 3 (5) के तहत तथा खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 21 एवं 4 के तहत थाना जावर में एफआइआर दर्ज की गई है। पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है।

निगम मंडलों में नियुक्त अशासकीय पदाधिकारियों का होगा उन्मुखीकरण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गर्व का विषय है कि ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों का सम्मेलन 9 से 13 जून तक इंदौर में होने जा रहा है। विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के इस समूह को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है। सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार और भू-राजनीतिक संवाद को बढ़ाना ब्रिक्स आंदोलन का उद्देश्य है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, युगांडा, मिस्र, सऊदी अरब, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड ,संयुक्त अरब अमीरात, कोलंबिया, इंडोनेशिया आदि 21 देश के मंत्री सम्मेलन में शामिल होंगे। सम्मेलन में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्धारक आदि भी सहभागिता करेंगे। यह 5 दिवसीय सम्मेलन पूर्ण गरिमा और गौरव के साथ हो, यह राज्य सरकार का दायित्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी, मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में दी। नगरीय निकायों को पीपीपी मोड पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए किया जाएगा प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि खरगोन के जलूद में मेगा सोलर पॉवर प्लांट का लोकार्पण किया गया है। पीपीपी मोड पर 271 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित 60 मेगावाट क्षमता का यह पावर प्लांट नगर निगम इंदौर द्वारा ग्रीन बॉन्ड स्कीम के अंतर्गत लगाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जन भागीदारी से संचालित इस योजना में एक-एक लाख रुपए तक के 10 बॉन्ड तक लेने की अनुमति थी। इस पर वार्षिक 8.27 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाएगा। परियोजना की लागत 8 साल में प्राप्त हो जाएगी, यह परियोजना 20 साल तक कार्यरत रहेगी। इससे लगभग 35 से 60 करोड़ रुपए तक की बचत नगर निगम इंदौर को होगी। इस परियोजना से जन भागीदारी के माध्यम से आय प्राप्त करने के अवसर भी जन सामान्य को प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को अपने-अपने प्रभार के जिलों में नगरीय निकायों तथा अन्य संस्थाओं के माध्यम से सौर ऊर्जा आधारित इस प्रकार की परियोजनाओं की स्थापना और संचालन को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। जिला विकास समितियों की बैठक का आयोजन 12 मई से पहले करें सुनिश्चित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का ढाई वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हो रहा है। दिनांक 8 से 10 मई के बीच विभागवार मंत्रीगण और विभागीय अधिकारियों के साथ चर्चा का कार्यक्रम निर्धारित किया जा रहा है। इसमें मंत्री गण अपने विभाग और अपने प्रभार के जिले की उपलब्धियां, नवाचार, आगे की कार्य योजना और चुनौतियों के बारे में जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जिला विकास समितियों की बैठक 12 मई के पहले प्रभार के जिले में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य शासन द्वारा प्रदेश के विभिन्न निगम/मंडलों में अशासकीय नियुक्तियां एवं नामांकन किए गए हैं। अपने-अपने विभाग में मंत्रीगण इन सभी का मार्गदर्शन एवं उन्मुखीकरण करें। राज्य स्तर पर भी इन सभी का एक दिवसीय उन्मुखीकरण आयोजित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भोपाल में 30 अप्रैल को किसानों के सशक्तिकरण और उनकी आय वृद्धि के उद्देश्य से कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला के सभी 55 जिले, विकासखंड, क्लस्टर लेवल और ग्राम पंचायतों से कृषि से जुड़े 16 विभागों के 1627 चुनिंदा अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूँ उपार्जन के संबंध में बताया कि 19 लाख किसानों का पंजीयन किया जा चुका है। उपार्जन की अद्यतन स्थिति 41 लाख मीट्रिक टन है, जिसके लिए 6520 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया है। अब तक 14.70 लाख स्लाट बुकिंग कृषकों द्वारा की गई है। विक्रेता कृषकों की संख्या 7 लाख 77 हजार है। प्रधानमंत्री  मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी में किया विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री  मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी में वैदिक घड़ी का अवलोकन किया। उन्होंने घड़ी के डिजिटल फलक पर प्रदर्शित हो रहे भारतीय पंचांग, मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की गणना की सराहना करते हुए इसे आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का अद्भुत संगम बताया। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा वर्ष 2024 में कालगणना केन्द्र महाकाल की नगरी उज्जैन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापना की गई थी। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को वैदिक काल गणना के समस्त तत्वों का समावेश कर बनाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1842 की क्रांति के महानायक राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि राज्य स्तरीय कार्यक्रम 28 अप्रैल को भोपाल में मनाया गया। शौर्य दिवस कार्यक्रम में राजा हिरदेशाह लोधी के वंशज  कौशलेन्द्र सिंह, गोंड़ राजा नरवर शाह के वंशज  राजकुमार शाह शामिल हुए। श्रमिकों का स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी श्रम स्टार रेटिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में श्रम स्टार रेटिंग की अनूठी पहल शुरू की गई है। इसमें औद्योगिक संस्थाओं द्वारा श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने का कार्य किया जा रहा है। श्रेष्ठ कार्य के लिए प्रतिष्ठानों को श्रम स्टार रेटिंग के माध्यम से आंकलन कर प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे कानूनों का बेहतर पालन करने वाले औद्योगिक संस्थानों क विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। प्रदेश में 554 कारखानों ने स्वेच्छा से श्रम स्टार रेटिंग की व्यवस्थ को अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे संस्थानों से उत्पाद क्रय करने और सेवाएं लेने में प्राथमिकता भी दी जाए जो श्रमिक भाइयों के अधिकारों और उनके कल्याण के लिए तत्पर रहते हैं। भारतीय राजनीति के इतिहास में दर्ज होंगे हाल ही के विधानसभा चुनाव नतीजे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न राज्यों में चुनाव के नतीजो के संबंध में कहा कि पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव के नतीजे भारतीय राजनीति के इतिहास मे दर्ज हो गये। इसका श्रेय पूरी तरह से प्रधानमंत्री  मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह को जाता है। बंगाल में ऐतिहासिक जीत प्राप्त हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बंगाल चैतन्य महाप्रभु, स्वामी विवेकानन्द, गुरूदेव रविन्द्र नाथ टैगोर, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महापुरूषों की कर्मस्थली रहा है। यह ऐतिहासिक जीत बंगाल के कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। 

BJP के एमपी के बड़े नेता हार गए दक्षिण भारत में, केरल और तमिलनाडू में मिली हार

भोपाल  5 राज्यों के चुनाव परिणाम यूं मध्यप्रदेश की राजनीति को प्रभावित नहीं करते. लेकिन दक्षिण के दो राज्यों तमिलनाडु और केरल में मध्य प्रदेश से सीधा जुड़ाव रखने वाले बीजेपी नेताओं की हार का असर यहां तक आया है. मध्य प्रदेश में लंबे समय से बीजेपी दक्षिण के अपने नेताओं को राज्यसभा भेजती रही है।  एल मुरुगन केन्द्र सरकार में मंत्री हैं, वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं. इनके अलावा जार्ज कुरियन ने भी विधानसभा चुनाव लड़ा. मुरुगन और कुरियन की हार की वजह से इन चुनावों का असर मध्य प्रदेश तक भी आया है. इन नेताओं के चुनाव हारने से मध्य प्रदेश बीजेपी के कुछ नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।  असली झटका लगा मुरुगन की हार से बीजेपी ने तमिलनाडु में केन्द्र सरकार में मंत्री रहे एल मुरुगन को भी चुनाव मैदान में उतारा. मुरुगन मध्य प्रदेश के कोटे से राज्यसभा में हैं. अप्रैल 2030 में उनका कार्यकाल खत्म होगा. इनके अलावा केरल से जार्ज कुरियन का कार्यकाल अप्रैल 2026 तक ही था. इन दोनों नेताओं के चुनाव जीतने की आस मध्यप्रदेश में भी बीजेपी नेताओं को थी. जार्ज कुरियन का कार्यकाल तो खैर पूरा ही हो रहा है. लेकिन मुरुगन अगर ये विधानसभा चुनाव जीत जाते तो उनकी राज्यसभा सीट खाली हो जानी थी. राज्यसभा सीट पर नजर जमाए मध्यप्रदेश के नेताओं को मौका मिल सकता था।  बीजेपी के दिग्गज दक्षिण में ऐसे हारे मध्य प्रदेश के रास्ते राज्यसभा में गए ये दोनों नेता तमिलनाडु और केरल से विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरे. केन्द्रीय राज्य मंत्री जार्ज कुरियन केरल की कांरिजापल्ली सीट से बीजेपी के उम्मीदवार थे. चुनाव नतीजों में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार ने करीब 29 हजार वोटों से शिकस्त दी. तमिलनाडु की अविनाशी सीट से बीजेपी ने अपने वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन को मैदान में उतारा था. वे भी अपनी सीट नहीं बचा सके. वह टीवीके की आंधी में अपनी सीट नहीं बचा सके. इस सीट पर टीवीके के कमाली एस ने 84 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की. मुरुगन दूसरे नंबर पर रहे. उन्हें 68 हजार से ज्यादा वोट मिले।  सभाओं में उमड़ी थी भी़ड़, मोहन यादव ने भी किया था प्रचार एल मुरुगन ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी थी. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उनके लिए चुनाव प्रचार में गए थे. रैलियां की थी. तमिलनाडु में चुनाव प्रभार संभाल रहे अरविंद मेनन ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा "दक्षिण में अभी हमें और मेहनत करनी है. यहां भी हमने पूरी रणनीति के साथ काम किया. हमें जो उम्मीद थी नतीजे वैसे नहीं आए हैं. लेकिन बीजेपी का कार्यकर्ता हर एक हार से सबक लेकर आगे बढ़ता है और फिर मैदान में जुटता है. हम भी जुटेंगे और लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।  कौन हैं एल मुरुगन? एल. मुरुगन मौजूदा समय में तमिलनाडू की राजनीति में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं। वो तमिलनाडू में बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में मोदी सरकार में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री हैं। वो राज्यसभा में मध्य प्रदेश के कोटे से सांसद हैं। 2024 में उन्हें दूसरी बार राज्यसभा के लिए मध्य प्रदेश से चुना गया था। वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी उनका नाता है। वो मद्रास हाईकोर्ट में वकालत करते थे। 15 साल तक वकालत के बाद वो राजनीति में आए हैं। कौन हैं जॉर्ज कुरियन वहीं, जॉर्ज कुरियन की बात करें तो वो भी मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। वर्तमान में वो मोदी सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण और मत्स्य पालन राज्य मंत्री हैं। वह केरल में बीजेपी का पुराना चेहरा माने जाते हैं। 1980 से वो भाजपा से जुड़े हैं और अबतक कई पदों पर रह चुके हैं और विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनकी केरल में ईसाई समुदाय में पैठ मानी जाती है। वह केरल में भी भाजपा में विभिन्न पदों पर रहे हैं। मजबूत उम्मीदवारों के तौर पर उतारे गए थे दोनों दिग्गज आपको बता दें कि, जॉर्ज कुरियन और एल. मुरुगन दोनों ही मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। कुरियन का कार्यकाल 19 जून 2026 में खत्म हो रहा है, जबकि मुरुगन का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक जारी रहेगा। इन दोनों नेताओं को भाजपा ने अलग-अलग राज्यों में मजबूत उम्मीदवार के तौर पर उतारा गया था, लेकिन चुनावी नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। राज्यसभा चुनावों और पार्टी की रणनीति पर असर के आसार राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इनकी हार का असर आने वाले राज्यसभा चुनावों और पार्टी की रणनीति पर भी पड़ने की संभावना है। खास बात ये है कि, मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें जून 2026 में खाली होने वाली हैं, जिनमें दो भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह और भाजपा की ओर से सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल भी उसी समय पूरा होने जा रहा है।

आवास को लेकर बढ़ी खींचतान: झुग्गियों पर सरकारी कर्मचारियों ने भी ठोका हक

भोपाल. भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित तुलसी मानस भवन, हिंदी भवन और गांधी भवन के बीच की जमीन पर बनी 27 झुग्गियों को हाल ही में प्रशासन ने हटाकर जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद यहां रह रहे परिवारों को मालीखेड़ी स्थित प्रधानमंत्री आवासों में पुनर्वासित किया गया है। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया सर्वे और दस्तावेजों के आधार पर की गई, लेकिन अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। झुग्गियों के हटने के बाद कुछ ऐसे लोग भी सामने आए हैं, जो दावा कर रहे हैं कि वहां उनकी झुग्गी थी। इनमें एक शासकीय कर्मचारी और एक सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं, जिससे पूरे मामले की जांच और जटिल हो गई है। दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई के दौरान सामान के गायब होने और नुकसान के आरोप लगाए हैं। प्रशासन इन आरोपों से इनकार कर रहा है और कह रहा है कि पूरी प्रक्रिया रहवासियों की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। अब प्रशासन द्वारा प्राप्त दावों और शिकायतों की जांच की जा रही है, जिसके बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सर्वे के आधार पर किया गया पुनर्वास प्रशासन के अनुसार कार्रवाई से पहले आदिवासी बस्ती का विस्तृत सर्वे किया गया था। इस दौरान 27 परिवारों के नाम और दस्तावेज एकत्र कर सूची तैयार की गई, जिसके आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास आवंटित किए गए। अधिकारियों का कहना है कि केवल पात्र परिवारों को ही पुनर्वास का लाभ दिया है। फर्जी दावों से बढ़ी उलझन झुग्गियां हटने के बाद दो नए दावेदार सामने आए हैं। इनमें से एक सेवानिवृत्त मंत्रालय कर्मचारी महेश सोंधिया और दूसरे वन विभाग में पदस्थ मनीष जायसवाल हैं। दोनों ने अलग-अलग झुग्गियों पर अपना दावा किया है, जबकि सर्वे में इन स्थानों पर अन्य लोगों के नाम दर्ज थे। एसडीएम ने दोनों से निवास के प्रमाण मांगे हैं। प्रभावित परिवारों के गंभीर आरोप करीब 20 प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान उनका कीमती सामान गायब हो गया या नष्ट हो गया। कुछ लोगों का कहना है कि उनके घरों की अलमारियां, जेवर, नकदी और जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। कार्रवाई के बाद वे अपने पुराने स्थान पर जाकर सामान ढूंढना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से प्रवेश रोक दिया है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा के लिए पक्की दीवार और बैरिकेडिंग कर दी है। पालीटेक्निक चौराहे से सीएम हाउस जाने वाले मार्ग पर 20 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, ताकि कोई अवांछित गतिविधि न हो सके। प्रशासन का पक्ष एसडीएम दीपक पांडे ने स्पष्ट किया है कि झुग्गियों को हटाने से पहले सभी रहवासियों की मौजूदगी में उनका सामान सुरक्षित रूप से शिफ्ट कराया गया था। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का सामान मलबे में नहीं दबा और पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की गई। 10 से अधिक आवेदन पहुंचे सूत्रों के अनुसार, अब तक 10 से अधिक आवेदन एसडीएम कार्यालय में प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें लोग झुग्गी पर अपना दावा कर रहे हैं। प्रशासन इन सभी मामलों की जांच कर रहा है और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

अजब-गजब मामला खरगोन से: महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया

खरगोन  अक्सर फिल्मों और कहानियों में एक साथ कई खुशियां दरवाजे पर दस्तक देती हैं, ठीक वैसा ही कुछ यहां देखने को मिला, जब एक साधारण परिवार की जिंदगी एक ही रात में बदल गई. रात का सन्नाटा था, अस्पताल के बाहर परिजन बेचैनी से इंतजार कर रहे थे. हर बीतता पल चिंता बढ़ा रहा था, लेकिन अंदर डॉक्टरों की टीम एक मुश्किल जंग लड़ रही थी. फिर अचानक खुशखबरी आई एक नहीं, दो नहीं, बल्कि चार बच्चों की किलकारी एक साथ गूंजी है।  मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म देकर सबको चौंका दिया. खास बात यह है कि इन चारों नवजातों में दो बेटे और दो बेटियां शामिल हैं।  बच्चों की हो रही विशेष निगरानी जानकारी के मुताबिक, बड़वाह तहसील के मेहपुरा गांव की रहने वाली पूजा को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रात डॉक्टरों की टीम की निगरानी में डिलीवरी कराई गई, जिसमें महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया. डॉक्टरों के अनुसार, यह डिलीवरी काफी जटिल थी, लेकिन मेडिकल टीम की सतर्कता से सभी बच्चों का सुरक्षित जन्म हो सका. चारों नवजातों का वजन करीब 700 ग्राम से 1 किलोग्राम के बीच बताया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है. डॉक्टरों का कहना है कि इतनी कम वजन में जन्म लेना जोखिम भरा होता है, इसलिए बच्चों को लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।  फिलहाल मां और चारों बच्चे अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. इस अनोखी घटना की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है, लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं.

आशिमा मॉल से बावड़ियाकलां रेलवे ओवरब्रिज के लिए भू-अर्जन का कार्य एक माह में पूर्ण कर निर्माण करें शुरू

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति समीक्षा की। उन्होंने आशिमा मॉल से बावड़ियाकलां चौराहे तक बनने वाले रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। राज्यमंत्री गौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यह ओवरब्रिज क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और नागरिकों को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आम जनता की सुविधा से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को एक माह में जमीन अधिग्रहण और भू-अर्जन की कार्यवाही पूर्ण कर निर्माण कार्य प्रारंभ करने तथा कार्य की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री गौर ने पिपलानी से खजूरी कलां तक बनने वाली सड़क के निर्माण कार्य की समीक्षा करते हुए ट्रांसफॉर्मर और स्ट्रीट लाइट्स की पर्याप्त व्यवस्था जल्द से जल्द सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शीघ्र अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर निर्माण कार्य शुरू किया जाए। बैठक में अधिकारियों ने अवगत कराया कि उक्त स्थान पर नाली निर्माण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं। राज्यमंत्री गौर ने ग्लोबल स्किल पार्क के पास पुलिया एवं मार्ग निर्माण के संबंध में अधिकारियों को 15 मई तक अतिक्रमण हटाकर अलाइनमेंट और अन्य आवश्यक कार्यों को पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया। इसके साथ ही उन्होंने सोनागिरी सतनामी नगर से अयोध्या बायपास मार्ग और पुलिस थाना बागसेवनिया से एचडीएफसी बैंक तक मार्ग निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि सभी विकास कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण किए जाएं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर जनता को उनका वास्तविक लाभ पहुंचाना है। राज्यमंत्री गौर ने अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड विजिट कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने और समस्याओं के त्वरित समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।  

DAVV का मेडिकल कॉलेज झाबुआ में: कुलगुरु ने दी जानकारी, इंजीनियरिंग कॉलेज में शुरुआत की तैयारी

झाबुआ  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) झाबुआ में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए आवश्यक भूमि आवंटित हो चुकी है, और अब प्रारंभिक कक्षाओं के संचालन हेतु एक अस्थायी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई के नेतृत्व में यह महत्वाकांक्षी परियोजना 350 से 400 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत के साथ साकार होगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन को आशा है कि इस माह के अंत तक इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय आ सकता है। दरअसल विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इस निर्णय के तहत, मध्यप्रदेश शासन ने उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 70 एकड़ भूमि आवंटित कर दी है। यह आवंटन विश्वविद्यालय को अपने स्वयं के चिकित्सा शिक्षा संस्थान की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। झाबुआ जिला अस्पताल को भी विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार किया जा रहा परियोजना के एक अहम पहलू के रूप में, झाबुआ जिला अस्पताल को भी विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन इस संबंध में निर्णय ले रहा है कि जिला अस्पताल को विश्वविद्यालय को सौंप दिया जाए, ताकि यह नए मेडिकल कॉलेज के लिए एक शैक्षणिक अस्पताल के रूप में कार्य कर सके। वर्तमान में, झाबुआ जिला अस्पताल में लगभग 250 बिस्तर उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय मेडिकल काउंसिल (NMC) के मानदंडों के अनुसार, 100 सीटों वाले मेडिकल कॉलेज के लिए 300 बिस्तरों वाले अस्पताल की आवश्यकता होती है। विश्वविद्यालय का मानना है कि जिला अस्पताल के अधिग्रहण से यह आवश्यकता पूरी हो जाएगी, जिससे छात्रों को पर्याप्त नैदानिक अनुभव मिल सकेगा। यूनिवर्सिटी का खुद का मेडिकल कॉलेज होगा कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद में मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला लिया गया था। इसमें तय किया गया था कि झाबुआ में मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा। इसके लिए मध्यप्रदेश शासन ने हायर एजुकेशन विभाग के माध्यम से यूनिवर्सिटी को जमीन भी आवंटित कर दी है। झाबुआ डिस्टिक हॉस्पिटल है, उस हॉस्पिटल को, मध्यप्रदेश शासन ये निर्णय ले रहा है कि वह यूनिवर्सिटी को सौंप दिया जाएगा। जिससे हमारा जो शैक्षणिक अस्पताल है उसके रूप में वह जिला हॉस्पिटल काम कर सकेगा। इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की मांगी अनुमति कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि यह भी कोशिश की जा रही है कि वहां पर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का इंजीनियरिंग कॉलेज है। यदि शासन उचित समझता है तो, यूनिवर्सिटी ने मांग की है कि जब तक नए परिसर में हमारा मेडिकल कॉलेज स्थापित नहीं हो जाता तब तक इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति दे दी जाए। इसके लिए नेशनल मेडिकल कांउसिल में यूनिवर्सिटी ने आवेदन भी कर दिया है। उम्मीद है इस महीने तक निर्णय आ सकता है उन्होंने बताया कि 100 सीट के लिए 300 बैड का हॉस्पिटल होना जरूरी है। वहां हमें बताया है कि वहां 250 बैड का हॉस्पिटल है। कुल मिलाकर हमें 300 बैड का हॉस्पिटल मिल जाएगा। कुलगुरु ने कहा कि अस्पताल तो हमें मिल रहा है, इसलिए उसकी लागत नहीं है, लेकिन कॉलेज बनाने के लिए कम से कम 350 से 400 करोड़ रुपए की लागत इनिशयली आएगी। उम्मीद है कि इस महीने तक इसका कुछ निर्णय हो सकता है। आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया गया कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एक अभिनव प्रस्ताव भी रखा है। जब तक झाबुआ में मेडिकल कॉलेज का नया परिसर तैयार नहीं हो जाता, तब तक राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति मांगी गई है। विश्वविद्यालय ने नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) में इस अस्थायी व्यवस्था के लिए आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया है। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि कॉलेज की स्थापना प्रक्रिया में कोई देरी न हो और शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो सके। 350 से 400 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक होगा इस परियोजना की कुल लागत का अनुमान लगाया गया है। कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के अधिग्रहण से उसकी लागत अलग होगी, क्योंकि यह शासन द्वारा सौंपा जा रहा है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के भवन और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए प्रारंभिक तौर पर 350 से 400 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक होगा। यह राशि कॉलेज के आधुनिक कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और प्रशासनिक खंड के निर्माण पर खर्च की जाएगी।  

प्रदेश के 10 लाख दिव्यांगजनों के लिए नई नीति: मोहन यादव सरकार का ऐतिहासिक कदम, एक प्लेटफार्म पर काम

भोपाल मोहन यादव सरकार प्रदेश के दस लाख दिव्यांगजनों के लिए पहली बार नीति बनाएगी। इस नीति के लागू होने के बाद सारे विभाग दिव्यांगजनों को लेकर एक प्लेटफार्म पर काम कर सकेंगे। यहां अलग-अलग विभागों के द्वारा अलग-अलग स्कीम के जरिए दिव्यांगजन को लाभ दिया जाता है।  आयुक्त दिव्यांगजन डॉ अजय खेमरिया ने इस नीति को बनाए जाने को लेकर  चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार दिव्यांगजनों के लिए कोई नीति बनाने का काम राज्य सरकार करने जा रही है। अभी अलग-अलग विभाग अलग-अलग स्कीम चलाते हैं। अभी कोई नीति नहीं होने से दिव्यांगजन के लिए समान काम नहीं हो पाता है। अभी दिव्यांगजनों के समग्र विकास के लिए जो काम हो रहे हैं, उसमें एकरूपता की कमी है, इसलिए दिव्यांगजन के लिए नीति बनाने की जरूरत है।खेमरिया ने कहा कि जिस तरह से एमपी के बच्चों के लिए बाल नीति है, महिला नीति है, उसी तरह की दिव्यांगजन नीति भी होना चाहिए। एक्सपर्ट्स, दिव्यांगजनों से करेंगे बात डॉ खेमरिया ने बताया कि नीति तैयार करने के लिए स्टेक होल्डर्स, एक्सपर्ट, हितग्राही से बात करेंगे। साथ ही विदेशों में जाकर वहां की स्थिति देखकर आने वाले, विश्वविद्यालयों में शोध करने वालों से बातचीत कर नीति बनाएंगे। एमपी के बाहर के विषय विशेषज्ञों से भी बात की जाएगी। ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों के साथ आदिवासी बेल्ट के लोगों से भी बात करेंगे। अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी जैसे इलाकों में सरकार की योजनाओं की डिलीवरी में किस तरह की दिक्कत होती है, इसकी भी जानकारी ली जाएगी। वहां के दिव्यांग जन से बात की जाएगी। अलग-अलग विभाग के अलग-अलग नार्म्स दिव्यांगजन आयुक्त खेमरिया ने कहा कि अभी दिव्यांगों के लिए सामाजिक न्याय, एमएसएमई, एनआरएलएम, महिला बाल विकास विभाग समेत अन्य विभागों के अलग-अलग काम हैं। अगले छह माह में इसका ड्राफ्ट बना लिया जाएगा और कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर 2026 में ही इसे लागू कराया जाएगा। फरवरी में सीएम को लिखा था पत्र डॉ खेमरिया ने कहा कि नीति बनाने को लेकर फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से पत्र लिखा था जिसके लिए मुख्यमंत्री ने अब अधिकृत कर दिया है। इसके अलावा सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को भी पत्र लिखा गया था। इसलिए अब दिव्यांग जन बनाने के लिए सुझाव लेने और प्रस्ताव मंगाने का काम किया जाएगा। इसके लिए ऐसे लोगों से भी संपर्क किया जाएगा जो दिव्यांगजन के लिए काम करते हैं। जो दिव्यांग हैं, उनसे भी सुझाव लिए जाएंगे ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए नीति में वास्तविक प्रयास किए जा सकें। इसके पहले कोई नीति नहीं है। अलग-अलग विभागों ने अपने हिसाब से दिव्यांगजन के लिए अलग रोस्टर, प्रावधान तय कर रखें हैं लेकिन विभागों की दिव्यांगजन को लेकर कोई नीति नहीं है। अब मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद इसके लिए नई नीति बनाकर उसे सभी विभागों में लागू कराया जाएगा। नीति के लिए इनसे भी चर्चा करने के निर्देश डॉ अजय खेमरिया को 13 अप्रैल 2026 को सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से एमपी में दिव्यांगजन अधिनियम 2016 राज्य निधि, निराश्रित निधि, के साथ योजनाओं, पुनर्वास और कल्याण से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल करते हुए दिव्यांगजन नीति का प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। शासन की ओर से कहा गया है कि विभिन्न विभागों, शासकीय और अर्द्धशासकीय संस्थाओं, एक्सपर्ट्स, संबंधित सिविल सोसायटी के सदस्यों, प्रख्यात खिलाड़ियों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं से चर्चा कर नीति के मसौदे के निर्माण और उसे अंतिम रूप देने का काम किया जाए। तेलंगाना, त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की नीति का करेंगे अध्ययन     इस नई नीति को अंतिम रूप देने से पहले तेलंगाना और त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा।     अभी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय विभाग अपनी-अपनी योजनाओं में दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।     प्रदेश में 2011 की जनगणना और यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) के आधार पर करीब 10 लाख दिव्यांगजन दर्ज हैं।     आगामी जनगणना में दिव्यांगों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है, क्योंकि पहले जहां सात श्रेणियों के आधार पर आंकड़े जुटाए गए थे, वहीं अब 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया जाएगा।     नीति में यह भी प्रस्ताव रहेगा कि 18 वर्ष से अधिक आयु के मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संभाग स्तर पर 100 बिस्तरों वाले विशेष आश्रय गृह स्थापित किए जाएं।  

सरकारी जमीन को लेकर श्योपुर में हिंसा: दो गुटों में भिड़ंत, कुल्हाड़ी से वार में 24 जख्मी

श्योपुर/वीरपुर. सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात वीरपुर थाना क्षेत्र के नेहलापुरा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। रावत और जाटव समाज के लोगों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। घटना के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला किया। इतना ही नहीं, पथराव भी हुआ जिससे हालात और बिगड़ गए। इस हिंसा में कुल 24 लोग घायल हो गए, जिनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है। लंबे समय से चल रहा था विवाद जानकारी के अनुसार, नेहलापुरा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद ने सोमवार रात उग्र रूप ले लिया और दोनों गुट आमने-सामने आ गए। प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन संबंधित अधिकारी समय रहते कार्रवाई नहीं करते। हल्का पटवारी से लेकर तहसील स्तर तक ढिलाई के कारण इलाके में सरकारी जमीनों पर कब्जे बढ़ते जा रहे हैं। वीरपुर क्षेत्र में कई कीमती जमीनें दबंगों के कब्जे में होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। पुलिस जांच में जुटी मामले में वीरपुर पुलिस कार्रवाई कर रही है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इस संबंध में महाराज सिंह बघेल ने बताया कि जमीनी विवाद को लेकर दो गुटों में संघर्ष हुआ है। इसमें कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।