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2598 शिविरों में 1 लाख 25 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की शिकायतों का मौके पर निराकरण

भोपाल  बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं को उनके घर के नजदीक ही निराकरण करने के उद्देश्य से मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा संचालित “संपर्क अभियान 2026” को सफलता मिली है। 14 मई से शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत भोपाल और ग्वालियर रीजन के 16 जिलों में व्यापक स्तर पर 2598 विशेष शिविर आयोजित किए गए। इनमें 1 लाख 25 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की शिकायतों का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया गया। भोपाल रीजन भोपाल रीजन के अंतर्गत 191 शिविर शहर वृत्त भोपाल में आयोजित किए गए। इसमें 13046 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण किया गया। साथ ही बैतुल वृत्त में 230 शिविरों में 13403 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, सीहोर वृत्त में 168 शिविरों में 3908 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, राजगढ़ वृत्त में 189 शिविरों में 2542 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, नर्मदापुरम वृत्त में 175 शिविरों में 16884 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, रायसेन वृत्त में 133 शिविरों में 9907 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, भोपाल (ग्रामीण) वृत्त में 132 शिविरों में 4486 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, विदिशा वृत्त में 102 शिविरों में 6764 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण एवं हरदा वृत्त में 69 शिविरों में 11309 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण किया गया है। ग्वालियर रीजन ग्वालियर रीजन के अंतर्गत मुरैना वृत्त में 201 शिविरों में 6736 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, शहर वृत्त ग्वालियर में 154 शिविरों में 3626 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, भिंड वृत्त में 148 शिविरों में 3334 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, गुना वृत्त में 133 शिविरों में 5428 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, ग्वालियर (ग्रामीण) वृत्त में 131 शिविरों में 2530 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, श्योपुर वृत्त में 98 शिविरों में 3569 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, दतिया वृत्त में 91 शिविरों में 5431 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, शिवपुरी वृत्त में 176 शिविरों में 4582 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण एवं अशोकनगर वृत्त में 77 शिविरों में 7616 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण किया गया। शिकायतों और सेवाओं पर हुआ त्वरित काम इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की शिकायतों का ऑन-द-स्पॉट समाधान करना था। शिविरों में मुख्य रूप से उपभोक्ताओं को त्रुटिपूर्ण बिल, मीटर रीडिंग और अन्य बिलिंग संबंधी शिकायतों का तत्काल निराकरण किया गया। साथ ही मात्र 5 रुपये में नवीन ग्रामीण घरेलू एवं कृषि पम्‍प कनेक्शन प्रदान किये गए। वहीं भार वृद्धि, नाम परिवर्तन, श्रेणी परिवर्तन, स्‍थाई कनेक्‍शन विच्‍छेदन, अस्थायी कनेक्शन, ई-केवायसी और अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC), बंद/खराब मीटर बदलना, स्‍मार्ट मीटर संबंधी शिकायतें, सर्विस केबल सुधार, वोल्टेज की समस्या और ट्रांसफार्मर से जुड़ी शिकायतों, बिजली बिलों का आंशिक एवं पूर्ण भुगतान, अग्रिम भुगतान पर छूट, बकाया राशि भुगतान तथा अन्य जनहितैषी योजनाओं की जानकारी और लाभ प्रदान किया गया । नवीन विद्युत कनेक्शन मिलने से मिली राहत (डोलरिया, नर्मदापुरम) संपर्क अभियान के अंतर्गत नर्मदापुरम वृत्त के डोलरिया वितरण केंद्र के ग्राम बाईखेड़ी में आयोजित शिविर में भारती चौरे ने नवीन घरेलू विद्युत कनेक्शन हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन पर विभागीय अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर उन्हें तत्काल नवीन विद्युत कनेक्शन प्रदान किया गया। स्वयं का विद्युत कनेक्शन मिलने पर उन्होंने राहत व्यक्त करते हुए कंपनी की त्वरित एवं जनहितकारी सेवा की सराहना की। एलटी केबल की समस्या का हुआ त्वरित समाधान (खुजनेर, राजगढ़) संपर्क अभियान के अंतर्गत राजगढ़ संभाग के खुजनेर वितरण केंद्र के कुलवाड़ मोहल्ला में आयोजित शिविर के दौरान उपभोक्ता किशनलाल पिता भेरूलाल ने जली हुई एलटी केबल की समस्या से संबंधित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर जली हुई एलटी केबल को तत्काल बदल दिया। समस्या का शीघ्र समाधान होने पर उपभोक्ता ने संतोष व्यक्त करते हुए विभाग की त्वरित एवं सरल सेवा की सराहना की।  

मध्य प्रदेश का बैतूल बनेगा Green Model, 100 करोड़ की योजना सफल रही तो पूरे देश में होगी लागू

बैतूल बैतूल में विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर 100 करोड़ रुपए का ‘लैंडस्केप प्रोजेक्ट’ तैयार हो रहा है। इस परियोजना में पहली बार जंगल, वन्यजीव, जल, जैव विविधता और वन अधिकार पाने वाले हजारों परिवारों को एक ही विकास मॉडल में शामिल किया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसे देशभर के लिए मॉडल बनाया जा सकता है। अभी तक जंगलों का प्रबंधन अलग-अलग वन मंडलों के हिसाब से होता है, लेकिन इस परियोजना में पूरे सतपुड़ा से मेलघाट तक फैले जंगल, वन्यजीवों के कॉरिडोर, नदियां, गांव, खेती और वनाधिकार वाले क्षेत्रों को एक इकाई मानकर योजना बनाई जाएगी। यानी जंगल और गांव को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाएगा। एक ओर जंगलों के संरक्षण की जरूरत है, तो दूसरी ओर वन अधिकार अधिनियम के तहत हजारों परिवारों को जंगलों के आसपास रहने और आजीविका का अधिकार मिला है। अब पहली बार इस चुनौती का समाधान तलाशने की कोशिश बैतूल से शुरू हो रही है। पूरी परियोजना का राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व बैतूल के पूर्व मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) एवं वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ) में सीनियर एडवाइजर राकेश भूषण सिन्हा कर रहे हैं। आखिर 'लैंडस्केप प्रोजेक्ट' है क्या? अब तक वन विभाग अलग-अलग वन मंडलों के हिसाब से वर्किंग प्लान तैयार करता रहा है। एक वन मंडल की योजना दूसरे से अलग होती है, लेकिन जंगल किसी प्रशासनिक सीमा को नहीं मानते। वन्यजीव, नदियां, पहाड़ और जैव विविधता पूरे क्षेत्र में फैली होती है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लेकर मेलघाट टाइगर रिजर्व तक के पूरे वन क्षेत्र को एक लैंडस्केप यानी एक साझा पारिस्थितिकी तंत्र मानकर योजना बनाई जाएगी। इसमें जंगल, वन्यजीवों के कॉरिडोर, जल स्रोत, ग्रामीण आबादी, खेती, वनाधिकार वाले गांव और प्राकृतिक संसाधनों को एक साथ जोड़कर विकास और संरक्षण की रणनीति तैयार होगी। सबसे बड़ी चुनौती… जंगल भी बचें और वनवासी भी आगे बढ़ें राकेश भूषण सिन्हा बताते हैं कि वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद जंगलों के आसपास रहने वाले हजारों परिवारों को वन भूमि पर अधिकार मिले हैं। इसका उद्देश्य उन्हें सम्मानपूर्वक आजीविका उपलब्ध कराना था। अब चुनौती यह है कि इन परिवारों की आय बढ़े, लेकिन जंगलों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। दो राज्यों का साझा मॉडल सतपुड़ा और मेलघाट भले ही दो राज्यों में स्थित हों, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से दोनों एक ही लैंडस्केप का हिस्सा हैं। बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव प्रशासनिक सीमाओं को नहीं पहचानते। ऐसे में यह परियोजना मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच समन्वित कार्यप्रणाली विकसित करेगी। अभी तक दोनों राज्यों की योजनाएं अलग-अलग बनती रही हैं, जबकि नई व्यवस्था में साझा रणनीति के साथ काम होगा।   दक्षिण वन मंडल के डीएफओ अरिहंत ने बताया कि यह परियोजना संयुक्त राष्ट्र (United Nations) और फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) के संयुक्त प्रयासों से तैयार की जा रही है। इसका क्रियान्वयन मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम, बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों के साथ महाराष्ट्र के मेलघाट तक फैले वन्यजीव कॉरिडोर क्षेत्र में प्रस्तावित है।

POCSO Case: जबलपुर हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट का फैसला पलटा, उम्र पर सवाल उठाते हुए 20 साल की सजा रद्द

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पॉक्सो कानून और पीड़िता की उम्र निर्धारण को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि अभियोजन पक्ष पीड़िता की जन्मतिथि को संतोषजनक और पुख्ता ढंग से साबित नहीं कर पाता है, तो केवल 'पॉजिटिव डीएनए रिपोर्ट' के आधार पर आरोपी को दोषी मानकर सजा नहीं दी जा सकती। कोर्ट का सवाल, 9 साल में कैसे पास कर ली 10वीं कक्षा? हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्कूल रिकॉर्ड और मार्कशीट में दर्ज पीड़िता की उम्र पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने तार्किक विसंगति को रेखांकित करते हुए कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता ने जुलाई 2014 में एलकेजी में दाखिला लिया था। ऐसे में कोई भी बच्ची महज 9 साल के भीतर (2023 के आसपास) कक्षा 10वीं कैसे उत्तीर्ण कर सकती है? युगलपीठ ने इस विसंगति के चलते 10वीं की मार्कशीट में दर्ज जन्मतिथि जो 27 फरवरी 2007 थी को सही मानने से इनकार कर दिया। क्या है पूरा मामला? दरअसल, सिंगरौली के रहने वाले मुन्ना राम को जिला अदालत ने पीड़िता को नाबालिग मानते हुए पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत अधिकतम 20 साल की जेल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।     जन्मतिथि साबित न हो तो केवल डीएनए रिपोर्ट से दोषी नहीं ठहराया जा सकता।     जबलपुर हाईकोर्ट ने POCSO मामले में 20 साल की सजा रद्द की।     दसवीं की मार्कशीट में दर्ज जन्मतिथि पर कोर्ट ने जताया संदेह।     मेडिकल रिपोर्ट में जबरन संबंध के स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले।     अभियोजन उम्र साबित नहीं कर पाया, आरोपी को दोषमुक्त किया। पीड़िता के परिजन के बयानों में विरोधाभास अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पीड़िता के माता-पिता के बयानों में उनकी शादी के साल और पीड़िता के जन्म को लेकर गहरा विरोधाभास था। पिता के अनुसार उनकी शादी 19 साल पहले हुई थी और उसके 1 साल बाद पीड़िता का जन्म हुआ, जबकि मां के अनुसार शादी 20 साल पहले हुई थी और जन्म 2 साल बाद हुआ था। आपसी सहमति से संबंध और मेडिकल रिपोर्ट बनी आधार हाईकोर्ट ने अपने आदेश में नोट किया कि पीड़िता ने खुद अपने बयानों में स्वीकार किया था कि वह अपनी मर्जी से अपीलकर्ता के साथ बनारस गई थी, जहां दोनों ने शादी की और पति-पत्नी की तरह रहने लगे। इसके अलावा, मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर कोई बाहरी या अंदरूनी चोट के निशान नहीं मिले। प्राइवेसी के उल्लंघन को लेकर भी डॉक्टरों की कोई निश्चित राय नहीं थी। हाईकोर्ट का अंतिम आदेश युगलपीठ ने कहा कि, चूंकि अभियोजन पक्ष पीड़िता की जन्मतिथि को संदेह से परे साबित नहीं कर सका, इसलिए पीड़िता को घटना के समय बालिग माना जाएगा। चूंकि संबंध आपसी सहमति से बने थे, इसलिए केवल डीएनए रिपोर्ट पॉजिटिव आने से आरोपी अपराधी सिद्ध नहीं होता। हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय के आदेश को पूरी तरह निरस्त करते हुए अपीलकर्ता मुन्ना राम को तत्काल दोषमुक्त करने के आदेश जारी किए हैं।  

मध्य प्रदेश में मानसून का कहर, शुक्रवार-शनिवार को भारी बारिश का रेड अलर्ट; जानें प्रभावित जिले

भोपाल  कुछ दिनों की देरी से आने के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुरुवार को मध्य प्रदेश में और भी आगे बढ़ गया और इसके असर से प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हो रही है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिन राज्य के अन्य हिस्सों में भी मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल हैं। ऐसे में IMD ने प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में जबरदस्त बारिश होने की संभावना जताई है। विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के छह जिलों शाजापुर, राजगढ़, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए इन जिलों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी । इस दौरान इन जिलों में 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा भी चलने की संभावना है। इन जिलों में भारी वर्षा की संभावना इसके अलावा विभाग ने रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, खरगोन, बड़वानी, धार, रतलाम, देवास, मंदसौर, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर और मंडला जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए इन जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चलने के साथ ही गरज-चमक के साथ भारी वर्षा होने की संभावना जताई है। जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में झंझावत और बिजली गिरने के साथ ही 40 से 50 की स्पीड से हवा चलने का अनुमान लगाया है। 3 जुलाई (शुक्रवार) के लिए मौसम विभाग ने प्रदेश के हरदा और खंडवा जिलों के लिए भारी से भी भारी बारिश (204.5 MM से ज्यादा) का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, बुरहानपुर और बैतूल जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान इन पांचों जिलों में बहुत भारी बारिश (115.6 MM से 204.4 MM) होने की संभावना जताई है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए यहां बिजली गिरने का अनुमान लगाया है। इसके साथ ही विभाग ने पूरे प्रदेश में 40 से 50 की स्पीड से हवा चलने का अनुमान लगाया है। 4 जुलाई (शनिवार) के लिए मौसम विभाग ने तीन जिलों धार, बड़वानी और खरगोन के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए यहां भारी से बहुत भारी वर्षा (204.5 MM से ज्यादा) का अनुमान लगाया है, वहीं झाबुआ, अलीराजपुर और बुरहानपुर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए भारी बारिश (115.6 MM से 204.4 MM) की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के लिए विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है और इस दौरान रतलाम, उज्जैन, इंदौर, देवास, खंडवा, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। साथ ही पूरे प्रदेश में 40 से 50 की गति से तेज हवा चलने का अनुमान लगाया है। बीते दिन केवलारी में हुई 166 मिमी बारिश बीते दिन के मौसम की बात करें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 37.6 डिग्री सेल्सियस रतलाम में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.2 डिग्री सेल्सियस पचमढ़ी में रिकॉर्ड किया गया। इस दौरान सबसे ज्यादा बारिश सिवनी जिले के केवलारी 166 मिली मीटर और चांद 140 मिमी दर्ज की गई। वहीं मुलताई में 112.0, सिंगरौली में 104.0, जैसीनगर में 102.1, उज्जैन में 101.0, बिछुआ में 100.0, नैनपुर में 96.6, पीथमपुर में 87.0, बेनीबारी में 83.6, पांढुर्णा में 78.3, सांवेर में 72.5, चौराई में 68.0, मंडला में 65.8, बदनावर में 65.1, कसरावद में 65 मिली मीटर वर्षा दर्ज की गई। मौसम की विशेष परिस्थितियां दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2 जुलाई को गुजरात के कुछ और भागों, उत्तर प्रदेश के शेष भागों, संपूर्ण दिल्ली तथा मध्य प्रदेश, हरियाणा एवं पंजाब के अधिकांश भागों तथा राजस्थान के कुछ भागों में आगे बढ़ गया है। फिलहाल मॉनसून की उत्तरी सीमा पोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, नीमच, टोंक, भिवानी और भटिंडा से होकर गुजर रही है।

प्रदेश के चयन ट्रायल्स में उमड़ा खिलाड़ियों का उत्साह, हजारों प्रतिभाओं ने दिखाई अपनी खेल क्षमता

भोपाल खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं की पहचान एवं उन्हें राज्य खेल अकादमियों में प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "टैलेंट सर्च 2026-27" का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में चयन ट्रायल्स आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में खिलाड़ी उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस महाअभियान के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राज्य खेल अकादमियों में प्रशिक्षण प्राप्त करने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। विभिन्न खेलों के ट्रायल्स में दिखा खिलाड़ियों का उत्साह अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में शूटिंग, पुरुष एवं महिला हॉकी, स्लालम, बैडमिंटन, घुड़सवारी, तीरंदाजी, जूडो, रोइंग, कुश्ती एवं फेंसिंग सहित अनेक खेलों के चयन ट्रायल्स सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। प्रत्येक चयन स्थल पर बड़ी संख्या में बालक एवं बालिका खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी तकनीकी दक्षता, फिटनेस एवं खेल कौशल का प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों के साथ अभिभावकों एवं प्रशिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन प्रदान किया। विशेषज्ञों की निगरानी में हुई चयन प्रक्रिया चयन प्रक्रिया विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप अनुभवी प्रशिक्षकों एवं विशेषज्ञ चयनकर्ताओं की निगरानी में संपन्न की जा रही है। खिलाड़ियों का परीक्षण शारीरिक दक्षता, तकनीकी कौशल तथा खेल विशेष की आवश्यकताओं के आधार पर किया जा रहा है, जिससे योग्य प्रतिभाओं का चयन कर उन्हें राज्य खेल अकादमियों में प्रशिक्षण का अवसर उपलब्ध कराया जा सके। आगामी दिनों में इन खेलों के होंगे चयन ट्रायल्स टैलेंट सर्च अभियान के अंतर्गत आगामी दिनों में भी प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर एथलेटिक्स, ट्रायथलॉन, बॉक्सिंग, क्याकिंग एवं केनोइंग, बैडमिंटन, पुरुष एवं महिला हॉकी, तीरंदाजी एवं ताइक्वांडो सहित विभिन्न खेलों के चयन ट्रायल्स निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही विभिन्न जिलों एवं संभागीय केंद्रों पर खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रहा है प्रतिभा चयन अभियान भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, सतना, रीवा, गुना, शिवपुरी, दतिया, सागर, नर्मदापुरम, बैतूल, कटनी, मंदसौर, उज्जैन, सिवनी, बड़वानी, मंडला, झाबुआ, अलीराजपुर, धार सहित प्रदेश के अनेक जिलों में चयन ट्रायल्स का आयोजन किया जा रहा है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को भी राज्य स्तरीय खेल अकादमियों तक पहुंचने का समान अवसर प्राप्त हो रहा है। खिलाड़ियों से अधिकाधिक भागीदारी की अपील खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने प्रदेश के खिलाड़ियों, अभिभावकों, विद्यालयों एवं खेल संस्थाओं से अपील की है कि जिन खेलों के चयन ट्रायल्स आगामी दिनों में आयोजित होने हैं, उनमें अधिक से अधिक खिलाड़ी निर्धारित तिथि एवं पात्रता के अनुसार भाग लें। टैलेंट सर्च 2026-27 केवल चयन प्रक्रिया नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।  

देवास के डायल-112 हीरोज घर की राह भटके 03 वर्षीय मासूम को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल  देवास जिले के थाना औद्योगिक क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर से निकलकर रास्ता भटक गए 03 वर्षीय बालक को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई सहायता से मासूम सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सका। 01 जुलाई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना औद्योगिक क्षेत्र अंतर्गत अमृत स्वीट्स के पास एक 03 वर्षीय बालक मिला है, जो घर का रास्ता भटक गया है तथा अपने परिजनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा है। सूचना प्राप्त होते ही थाना औद्योगिक क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षकश्री सचिन चौहान एवं पायलट श्री देवेंद्र भारती ने मौके पर पहुंचकर बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके उपरांत डायल-112 टीम ने बालक को एफआरव्ही वाहन में साथ लेकर आसपास के क्षेत्रों में उसके परिजनों की तलाश एवं पूछताछ की, किन्तु कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसके बाद बालक को सुरक्षित थाने लाया गया। कुछ समय पश्चात बालक के माता-पिता उसकी तलाश करते हुए थाना पहुँचे। आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बालक को सुरक्षित उनके सुपुर्द किया गया। अपने बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 सेवा एवं पुलिस जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।  

प्रदेश के सभी जिलों में जन सम्मेलन-सह-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित, हजारों नागरिकों ने की सहभागिता

भोपाल  ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका सृजन एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM-G] का आज प्रदेशभर में उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में जिला प्रशासन द्वारा जन सम्मेलन-सह-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित किए गए। केन्द्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति के ओबुलवारिपल्ले मंडल स्थित मुक्कावरिपल्ली ग्राम में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM-G] का राष्‍ट्रीय स्‍तर परभव्‍य शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि विकसित भारत – जी राम जी के तहत सबसे अधिक पिछड़ी पंचायतों में भी रोजगार और बुनियादी ढाँचे के लिये अधिक निधि, अधिक सहायता और अधिक अवसर मिलेंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने संस्कारधानी जबलपुर में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) का राज्य स्‍तर पर जन सम्मेलन-सह-लॉन्च किया। कार्यकम के दौरान उन्‍होंने योजना के विभिन्न आयामों और जन-कल्याणकारी नीतियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्‍होंने कहा की तकनीक और पारदर्शिता का यह अद्भुत समागम सुशासन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ हम सभी को राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में पूरी निष्ठा के साथ जुटने की प्रेरणा देता है, केंद्र व राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित कर विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर कार्यरत है। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्रीमति सुमित्रा बाल्मीकि सहित स्थानीय प्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में प्रभारी मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता करते हुए मिशन के उद्देश्यों एवं प्रावधानों की जानकारी दी। राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी कराया गया, जिससे उपस्थित नागरिकों ने मिशन के उद्देश्य एवं प्रमुख प्रावधानों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रमों में पंचायत पदाधिकारी, स्व-सहायता समूहों की सदस्याएँ, श्रमिक, हितग्राही, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर विभिन्न जिलों में नवीन विकास कार्यों का शुभारंभ, IEC प्रदर्शनी, पोस्टर एवं बैनर प्रदर्शन, सफलता की कहानियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। कार्यक्रमों में उपस्थित नागरिकों को मिशन के प्रमुख प्रावधानों, विशेष रूप से 125 दिवस रोजगार गारंटी, डिजिटल कार्यप्रणाली, पारदर्शी भुगतान व्यवस्था, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी तथा विकेन्द्रीकृत ग्राम स्तरीय योजना निर्माण के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रदेश में आयोजित इन कार्यक्रमों ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में जनसहभागिता आधारित विकास मॉडल को नई दिशा प्रदान की है। राज्य शासन का उद्देश्य है कि मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार, बेहतर आजीविका के अवसर तथा टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का लाभ सुनिश्चित किया जाए।  

श्री महाकालेश्वर मंदिर में उज्जैन स्मार्ट सिटी के “त्रिनेत्र” प्रोजेक्ट को मिला स्वर्ण (गोल्ड) पुरस्कार

भोपाल  राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में उज्जैन ने डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर गौरवपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 2 दिवसीय 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में  महाकालेश्वर मंदिर में लागू किए गए एआई-आधारित एकीकृत निगरानी तंत्र "त्रिनेत्र" (TRINETRA) को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के अंतर्गत प्रतिष्ठित स्वर्ण (गोल्ड) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त किया। कलेक्टर  रौशन कुमार ने उज्जैन जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए पुरस्कार प्राप्त किया। उन्होंने इस उपलब्धि को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन तथा सभी के सामूहिक प्रयास तथा निरंतर परिश्रम का परिणाम बताया। सम्मेलन के पहले दिन देश के विभिन्न राज्यों के जिला प्रशासनिक अधिकारियों एवं राज्यों ने अपने-अपने ई-गवर्नेंस नवाचारों का प्रदर्शन किया। कलेक्टर एवं अध्यक्ष उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड  रौशन कुमार सिंह द्वारा "त्रिनेत्र" परियोजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन किया गया, जिसे उपस्थित विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों द्वारा अत्यधिक सराहा गया। सम्मेलन के दूसरे दिन गुरुवार को आयोजित समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में तथा राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान  महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक  प्रथम कौशिक,  पलाश शर्मा,  सचिन जैन एवं आईटी टीम उपस्थित रही। उज्जैन का त्रिनेत्र मॉडल निगरानी व्यवस्था का आधार बनेगा डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, भारत सरकार और उज्जैन के "त्रिनेत्र" प्रोजेक्ट को अखिल भारतीय स्तर पर लागू करने के लिये शीघ्र ही एक एमओयू होगा। उज्जैन में विकसित इस स्वदेशी एआई मॉडल की सफलता एवं देशव्यापी अनुकरणीयता पर केंद्र सरकार की मुहर है — अब उज्जैन का "त्रिनेत्र" मॉडल देश के अन्य शहरों की सुरक्षा एवं स्मार्ट निगरानी व्यवस्था का आधार बनेगा। यह न केवल उज्जैन, अपितु संपूर्ण मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।  

महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में परांपरागत विषय से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा विभाग उपलब्ध करवा रहा रोजगारोंमुखी शिक्षा

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग में वर्तमान में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। ऐसे में बी.ए., बी.कॉम. और बी.एससी. में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) रोजगारोन्मुखी उच्च शिक्षा का आकर्षक विकल्प बनकर सामने आया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप संचालित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सामान्य स्नातक शिक्षा के साथ उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है। तीसरे वर्ष में विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाई करने के बजाय उद्योगों में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलता है, जहां वे वास्तविक कार्यस्थल पर प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इससे पढ़ाई पूरी होने तक वे उद्योगों की कार्यप्रणाली से परिचित हो जाते हैं और रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए तैयार होते हैं। 2024 बैच की सफलता बनी नई प्रेरणा AEDP की सफलता अब पहले ही बैच में दिखाई देने लगी है। वर्ष 2024 में इस कार्यक्रम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी अब दो वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद विभिन्न उद्योगों में अप्रेंटिसशिप के लिए चयनित किए जा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह कार्यक्रम केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों से जोड़कर उनके करियर की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। इसी का उदाहरण इंदौर में आयोजित चयन प्रक्रिया में देखने को मिला। इसमें शामिल 37 विद्यार्थियों में से 20 विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा अप्रेंटिसशिप के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। यह परिणाम इस कार्यक्रम की प्रभावशीलता और उद्योगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। पढ़ाई के साथ उद्योगों का अनुभव AEDP पारंपरिक स्नातक पाठ्यक्रमों से अलग है। पहले दो वर्षों में विद्यार्थियों को बी.ए., बी.कॉम. अथवा बी.एससी. की नियमित पढ़ाई के साथ-साथ संबंधित उद्योगों से जुड़े विषयों, तकनीकों और व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। यानी प्रथम वर्ष से ही विद्यार्थियों का फोकस केवल डिग्री प्राप्त करने पर नहीं, बल्कि रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने पर भी रहता है। तीसरे वर्ष में विद्यार्थियों को उनके विषय से संबंधित उद्योगों में अप्रेंटिसशिप के लिए भेजा जाता है। वहां वे अनुभवी विशेषज्ञों के साथ काम करते हुए वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव प्राप्त करते हैं। अप्रेंटिसशिप के दौरान उन्हें नियमानुसार स्टाइपेंड भी मिलता है तथा उद्योग में उनके कार्य एवं प्रदर्शन के आधार पर अंतिम वर्ष का मूल्यांकन किया जाता है। इससे विद्यार्थियों को अलग से पारंपरिक पढ़ाई के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से सीखने का अवसर मिलता है और स्नातक डिग्री के साथ उद्योगों का अनुभव भी प्राप्त होता है। भर्ती अभियान में मिला उद्योगों का भरोसा इंदौर में आयोजित भर्ती अभियान में लॉजिस्टिक्स एवं रिटेल क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों—कैरीफास्ट लॉजिस्टिक्स, आपार लॉजिस्टिक्स, मोज़ेक ग्रुप और लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स—ने सहभागिता की। इसमें पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, इंदौर तथा विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के बी.कॉम. लॉजिस्टिक्स पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों ने साक्षात्कार दिए। कंपनियों ने एमआईएस ऑपरेटर, वेयरहाउस सुपरवाइजर, लॉजिस्टिक्स कोऑर्डिनेटर, बैक-एंड ऑपरेशंस एग्जीक्यूटिव और सप्लाई चेन सपोर्ट एसोसिएट जैसे पदों के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित की। चयनित विद्यार्थियों को 10 हजार से 17 हजार रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड के साथ उद्योगों में कार्य करने और सीखने का अवसर मिलेगा। भर्ती परिणामों में कैरीफास्ट लॉजिस्टिक्स ने सर्वाधिक 11 विद्यार्थियों को शॉर्टलिस्ट किया, जबकि मोज़ेक ग्रुप ने 7 और लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स ने 4 विद्यार्थियों का चयन किया। इनमें से कुछ विद्यार्थियों को इंदौर तथा भोपाल स्थित इकाइयों में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलेगा। साक्षात्कार के दौरान विद्यार्थियों ने तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास, समस्या समाधान क्षमता और व्यावसायिक समझ का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उद्योग प्रतिनिधियों ने लॉजिस्टिक्स संचालन, इन्वेंट्री प्रबंधन, डेटा विश्लेषण, कार्यस्थल संचार, माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल, गूगल शीट्स, ईआरपी प्लेटफॉर्म तथा अन्य डिजिटल टूल्स पर विद्यार्थियों की दक्षता की सराहना की। बढ़ रहा है विद्यार्थियों का रुझान मध्यप्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के 963 विद्यार्थी वर्ष 2026 में अप्रेंटिसशिप के लिए पात्र हैं। वहीं, 2025-26 सत्र में AEDP के अंतर्गत 4,513 विद्यार्थियों ने विभिन्न सहभागी संस्थानों में प्रवेश लिया है, जो इस कार्यक्रम के प्रति विद्यार्थियों के बढ़ते विश्वास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा की बढ़ती मांग को दर्शाता है। पहले ही बैच की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम विद्यार्थियों को केवल स्नातक डिग्री ही नहीं, बल्कि उद्योगों का व्यावहारिक अनुभव, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। यही कारण है कि वर्तमान प्रवेश सत्र में यह कार्यक्रम युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।  

प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागानों और जनजातीय संस्कृति की अनूठी पहचान है बैतूल का कुकरू खामला

भोपाल  प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध, बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू एक अनछुआ रमणीय पर्यटन स्थल है। समुद्र तल से लगभग 3,668 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह पर्वतीय क्षेत्र वर्षा ऋतु में बादलों, कोहरे, घने वनों और हरियाली से आच्छादित रहता है। अदना नदी का प्रवाह, मिश्रित वन और तेलिया सागौन के विशाल वृक्ष इस क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं में शामिल हैं। वर्षभर सुहावने मौसम वाला कुकरू प्रकृति प्रेमियों, ट्रैकिंग और बाइकिंग के शौकीनों के लिए उपयुक्त पर्यटन स्थल है। यहाँ स्थित सनराइज प्वाइंट और सनसेट प्वाइंट प्रमुख आकर्षण हैं। कुकरू अपनी कॉफी के साथ कोदो-कुटकी, आँवला, शहद, हर्रा, बहेड़ा, सफेद मूसली और भिलवा जैसे वन उत्पादों के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय मोटे अनाज से बने पारंपरिक व्यंजन और वन उपज एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प यहाँ की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का हिस्सा हैं। कॉफी बागानों से मिली विशिष्ट पहचान कुकरू-खामला क्षेत्र ऐतिहासिक कॉफी बागानों के लिए भी जाना जाता है। यहाँ वर्ष 1944 में कॉफी की खेती प्रारंभ हुई थी, जिसने इस क्षेत्र को विशेष पहचान दिलाई। देश में गिने चुने प्रांतों में ही उच्च किस्म की कॉफी की खेती होती है। कुकरू में लगभग 110 एकड़ क्षेत्र में उच्चतम किस्म की अरेबिका कॉफी का उद्यान है, जिसमें से 10 एकड़ में कॉफी की खेती की जाती है। मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड तथा वन विभाग द्वारा इन बागानों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य किया जा रहा है। ईको टूरिज्म और पर्यटन अधोसंरचना का होगा विस्तार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कुकरू के भ्रमण के दौरान इसे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को जोड़ते हुए एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत ईको टूरिज्म का विस्तार, सनराइज एवं सनसेट प्वाइंट का उन्नयन, आधुनिक सुविधाओं से युक्त ईको रिसॉर्ट का विकास, पर्यटन अधोसंरचना का विस्तार तथा ट्रैकिंग, नेचर ट्रेल्स और अन्य साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। जनजातीय समुदायों को मिलेगा रोजगार और स्वरोजगार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से होमस्टे योजना प्रारंभ करने की घोषणा की है। इन होमस्टे का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यप्रणाली के अनुरूप किया जाएगा तथा ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा मध्यप्रदेश टूरिज्म द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही पर्यटकों को जनजातीय संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली को निकट से जानने का अवसर मिलेगा। कुकरू तक पहुँचना आसान भोपाल से कुकरू की दूरी लगभग 270 किलोमीटर और बैतूल से लगभग 90 किलोमीटर है। रेल मार्ग से भोपाल और बैतूल के बीच नियमित ट्रेन सेवाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें भोपाल–नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस सहित अन्य प्रमुख ट्रेन शामिल हैं। बैतूल से कुकरू तक टैक्सी और अन्य स्थानीय वाहनों से आसानी से पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग से भोपाल से बैतूल और वहाँ से शाहपुर होते हुए कुकरू पहुँचा जा सकता है। अंतिम चरण का पर्वतीय मार्ग प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है। प्रकृति, संस्कृति और ईको टूरिज्म का संगम कुकरू प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागानों, जनजातीय संस्कृति और ईको टूरिज्म का समन्वित अनुभव प्रदान करता है। यहाँ ईको टूरिज्म सेंटर के अंतर्गत पर्यटकों के लिए रेस्ट हाउस की सुविधा उपलब्ध है तथा मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड (MPEDB) द्वारा प्रशिक्षित स्टाफ आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराता है। मानसून के दौरान कुकरू की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण इसे मध्यप्रदेश के प्रमुख प्रकृति पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान प्रदान करते हैं।