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जल गंगा संवर्धन अभियान: पुष्पराजगढ़ में नहरों को मजबूती देने का प्रयास

सफलता की कहानी जल गंगा संवर्धन अभियान-पुष्पराजगढ़ में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से हो रहा है नहर सुदृढ़ीकरण अंतिम छोर तक पानी पहुंचने से बदलेगी तस्वीर भोपाल  अनूपपुर जिले का आदिवासी बहुल विकासखंड पुष्पराजगढ़ अब कृषि विकास की नई दिशा की ओर अग्रसर है। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत झिलमिल जलाशय की नहरों के निर्माण, सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार कार्य से यहाँ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा। वर्षों से इस क्षेत्र के किसान वर्षा आधारित खेती या सीमित जल स्त्रोतों पर निर्भर थे। नहर प्रणाली की जर्जर स्थिति के कारण जल अंतिम छोर तक नहीं पहुँच पाता था, जिससे सिंचाई में बाधा आती थी। अब जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत झिलमिल जलाशय के मुख्य नहर तथा माइनर नहर के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से प्रगति पर है। करीब 19 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से यह कार्य पूर्ण होने पर 5.04 एमसीएम क्षमता वाले जलाशय का जल अंतिम छोर के खेतों तक पहुँच सकेगा। इससे सिंचाई व्यवस्था में स्थायी सुधार होगा। लगभग 905 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। करीब 11 किलोमीटर लंबा नहर तंत्र विकसित किया जा रहा है। इस योजना से सीधे तौर पर बीजापुरी, पीपाटोला, कछरा टोला और झिलमिल गाँवों के लगभग एक हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे। उनकी आय में वृद्धि और आजीविका में स्थिरता आयेगी। अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली परियोजना की नियमित निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि कार्य गुणवत्ता के साथ समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। स्थानीय किसानों में इस परियोजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। किसान जगत सिंह, ठाकुर सिंह और कमलेश्वर सिंह सहित कई कृषकों का कहना है कि नहरों के सुधार से अब अंतिम खेत तक पानी पहुँचने की समस्या समाप्त हो जाएगी, जिससे वे दोनों मौसमों में बेहतर खेती कर सकेंगे। पुष्पराजगढ़ में झिलमिल जलाशय से प्रवाहित यह जल न केवल खेतों को सिंचित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के तहत यह पहल भविष्य में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है। 

₹1500 सीधे खातों में! लाड़ली बहनों के लिए बड़ी राहत, जानें तारीख और प्रक्रिया

भोपाल  मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के लिए एक बार फिर राहत और उम्मीद की खबर है। राज्य की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होने की ओर है। मई महीने की यह किस्त खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि इस बार लाभार्थियों के खातों में बढ़ी हुई राशि 1500 रुपये भेजे जाने की तैयारी है। दरअसल, प्रदेश सरकार आमतौर पर हर महीने की 10 तारीख तक यह राशि ट्रांसफर करती रही है, लेकिन इस बार 10 मई को रविवार होने के कारण भुगतान में हल्का बदलाव संभव है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार 11 से 15 मई के बीच कभी भी यह किस्त जारी की जा सकती है, हालांकि अंतिम तारीख का आधिकारिक ऐलान अभी बाकी है। पिछले महीने अप्रैल में भी राशि 12 तारीख को जारी की गई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि भुगतान तिथि परिस्थितियों के अनुसार रखी जा रही है। इस योजना की शुरुआत 5 मार्च 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी, आज प्रदेश की सामाजिक सुरक्षा की मजबूत कड़ी बन चुकी है। करीब 1 करोड़ 29 लाख से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं, जो इसे देश की सबसे व्यापक महिला कल्याण योजनाओं में शामिल करता है। सरकार का उद्देश्य न सिर्फ आर्थिक सहायता देना है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना भी है। योजना के तहत विवाहित महिलाओं के साथ-साथ विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को भी शामिल किया गया है। 21 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएं, जिनका बैंक खाता आधार से लिंक है और DBT सक्रिय है, वे इस योजना के दायरे में आती हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पारदर्शिता के साथ पहुंचे। भुगतान की स्थिति जानने के लिए सरकार ने ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध कराई है, जिससे महिलाएं घर बैठे ही अपनी किस्त का स्टेटस चेक कर सकती हैं। आवेदन क्रमांक या समग्र आईडी और ओटीपी के माध्यम से यह जानकारी कुछ ही मिनटों में प्राप्त की जा सकती है। कुल मिलाकर, लाड़ली बहना योजना अब केवल एक आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है। मई की 36वीं किस्त के साथ एक बार फिर सरकार की इस प्रतिबद्धता पर मुहर लगने जा रही है।

10 मई को दमोह में पीएम मोदी, स्वावलंबी गोशाला की आधारशिला रखेंगे

दमोह मध्य प्रदेश के दमोह जिले के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं। इस बार वे किसी चुनावी रैली या सभा के लिए नहीं आ रहे हैं पीएम मोदी इस बार एक बेहद खास काम के लिए दमोह आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 10 मई 2026 को पीएम मोदी पथरिया विधानसभा क्षेत्र में आएंगे। दमोह जिले के पथरिया में एक विशाल स्वावलंबी गोशाला बनने जा रही है। यह गोशाला कोई आम गोशाला नहीं होगी, बल्कि इसे आधुनिक और आत्मनिर्भर मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इसी गोशाला का भूमि पूजन करेंगे और इसकी नींव रखेंगे। 517 एकड़ जमीन पर तैयार होगी इस पूरी योजना के लिए कुल 517 एकड़ जमीन इसके लिए चुनी गई है। ये जमीन विकासखंड पथरिया के तीन गांवों रानगिर, कल्याणपुरा और बिजोरी में है।इतनी बड़ी जमीन पर गोशाला बनने से न केवल गायों को बेहतर ठिकाना मिलेगा, बल्कि इलाके के विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।हाल ही में आईएएस प्रताप नारायण यादव और पुलिस अधीक्षक (SP) श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने खुद मौके पर जाकर जमीन का मुआयना किया।  मुंबई की कंपनी को मिला है जिम्मा मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड ने इस गोशाला के निर्माण के लिए मुंबई की एक प्रतिष्ठित कंपनी को आदेश जारी कर दिए हैं।पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉ. बृजेंद्र असाटी ने बताया कि कंपनी को सख्त निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 10 मई से पहले जमीन की फेंसिंग का काम पूरा हो जाने की बात कही है। इसके अलावा कम से कम 200 गायों के रहने के लिए अस्थायी शेड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा और तैयारियों का जायजा दमोह के एसपी ने साफ किया है कि भूमि पूजन का कार्यक्रम प्रधानमंत्री के हाथों होना है। इसलिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। जिले के बड़े अधिकारी लगातार पथरिया का दौरा कर रहे हैं ताकि व्यवस्थाओं में कोई कमी न रह जाए। अंतिम चरण में चल रही तैयारियां स्वीकृत भूमि पर गोशाला के निर्माण और संचालन के लिए मेसर्स श्रीराम मानेक एग्रो प्रोडक्टस प्राइवेट लिमिटेड मुंबई को मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड भोपाल द्वारा आदेशित किया गया है। दिए गए निर्देश इस संबंध में उपसंचालक पशुपालन डॉ. बृजेंद्र असाटी ने बताया कि मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड द्वारा गोशाला के संचालन के लिए नियुक्त कंपनी को समय सीमा में भूमि की फेंसिंग और अस्थायी 200 गौवन्श की गोशाला का निर्माण 10 मई 2026 के पहले किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया जायजा एसपी ने कहा कि, इस गोशाला का भूमि पूजन वैसे तो प्रधानमंत्री के सानिध्य में होना प्रस्तावित है, जिसकी तैयारियां प्रक्रिया के अंतिम चरण में चल रही हैं। इसी के चलते कलेक्टर के साथ – साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और समय पर निर्धारित काम निपटाने के साथ साथ तैयारियों को लेकर जरूरी दिशा – निर्देश दिए। पीएम मोदी के पिछले दौरे प्रधानमंत्री मोदी का मध्य प्रदेश से पुराना लगाव रहा है। इससे पहले वे 17 सितंबर 2025 को अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर प्रदेश आए थे। उस दौरान उन्होंने कई बड़े काम किए थे।     धार दौरा: बदनावर के भैसोला गांव में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास किया था।     महिला सशक्तिकरण: 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' अभियान की शुरुआत की थी। साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत महिलाओं को पैसे ट्रांसफर किए थे।     भोपाल दौरा (31 मई 2025): रानी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर भोपाल आए थे। इंदौर मेट्रो के एक खास कॉरिडोर का उद्घाटन किया था।

मंत्री सिलावट ने दिए निर्देश, केरवा डैम वेस्टवियर जल्द होगा दुरुस्त

भोपाल जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने निर्देश दिए हैं कि केरवा डैम के क्षतिग्रस्त वेस्टवियर का कार्य आगामी दो माह में पूर्ण किया जाए। कार्य पूर्ण गुणवत्ता पूर्वक हो एवं संबंधित अधिकारी निरंतर कार्य का निरीक्षण कर वरिष्ठ अधिकारियों को प्रगति की जानकारी दें। कुछ माह पूर्व बांध के वेस्टवियर का स्लैब अत्यधिक पुराना होने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसका वर्तमान में पुनः निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जल संसाधन मंत्री  सिलावट ने मंगलवार को केरवा बांध के क्षतिग्रस्त वे वियर के पुनर्निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और कार्य के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अधीक्षण यंत्री  बी.एल. निमामा, कार्यपालन यंत्री  नितिन कुहिकर, अनुविभागीय अधिकारी  प्रदीप चतुर्वेदी तथा निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित थे। केरवा बांध की कुल लंबाई 396. 50 मीटर एवं उंचाई 22.6 मीटर है। बांध की कुल जीवित जल भराव क्षमता 22.6 मिलियन घन मीटर है, जिससे भोपाल जिले के लगभग 35 ग्रामों की 3 हजार 960 हेक्टेयर भूमि में रबी सिंचाई किया जाना रूपांकित है। इसके अतिरिक्त जलाशय से पेयजल के लिए जल भी प्रदाय किया जाता है। स्थल निरीक्षण के दौरान मैदानी अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि टूटे हुए हिस्से को डिस्मेंटल कर नवीन निर्माण के लिए फाउंडेशन लेवल तक खुदाई का कार्य किया जा चुका है।  

विद्यार्थियों का समग्र हित ही हमारी प्राथमिकता है: तकनीकी शिक्षा मंत्री परमार

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में इंदौर के प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षा संस्थान,  गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (SGSITS) एसजीएसआईटीएस, इंदौर की "शासी निकाय (Board Of Governance) की 129वीं" बैठक हुई। मंत्री  परमार ने प्रस्तावित कार्यसूची के विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा कर, शासन के नियमों का पालन करते हुए क्रियान्वयन के दिशा-निर्देश दिए। तकनीकी शिक्षा मंत्री  परमार ने कहा कि संस्थान, अपने उत्तरोत्तर उत्थान एवं समग्र विकास के लिए, आदर्श व्यवस्था बनाए जिससे अन्य संस्थान भी अभिप्रेरित हों। मंत्री  परमार ने कहा कि हमारी प्राथमिकता, विद्यार्थियों का समग्र हित है।  परमार ने कहा कि संस्थान में शिक्षकों के रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया शासन के नियमों के अनुरूप रोस्टर का पालन करते हुए सुनिश्चित की जाए और यह प्रक्रिया पूर्णरूपेण पारदर्शी हो। बैठक में संस्थान के शासी निकाय की 128वीं बैठक का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। शासी निकाय द्वारा संस्थान में "अटल वित्तीय सहायता योजना" प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया, इसमें 2025 एवं उसके उपरांत प्रवेश पाने वाले सभी विद्यार्थियों (डिप्लोमा द्वारा द्वितीय वर्ष में प्रविष्ट व्यक्ति सहित) प्रत्येक वर्ष 1.00 करोड़ की आनुपातिक आर्थिक सहायता विद्यार्थियो को प्रदान की जाएगी। संस्थान द्वारा शुरू किए जा रहे नवीन बी टेक (सिविल इंजीनियरिंग) हिन्दी माध्यम प्रोग्राम में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को फाइनल ईयर में पहुंचने पर 2 लाख रुपए की वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया गया। संस्थान में दो नवीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, "इंटीग्रेटेड हेल्थ केयर" एवं "स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजीस" की स्थापना का अनुमोदन भी किया गया। बैठक में संस्थान में शिक्षकों के रिक्त पद पूर्ति, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति, एआईसीटीई गाइडलाइन में अपेक्षित छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार सेल्फ फाइनेंस मोड में शिक्षकों के पद सृजन एवं गैर शिक्षकीय अधिकारी-कर्मचारी पद पूर्ति सहित संस्थान के शैक्षणिक एवं अकादमिक उन्नयन और विद्यार्थियों के समग्र हितों से जुड़े विविध विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल के कार्यवाहक कुलगुरु डॉ एस सी चौबे, 'प्रतिनिधि प्रमुख सचिव' तकनीकी शिक्षा डॉ संतोष गांधी, 'प्रतिनिधि आयुक्त तकनीकी शिक्षा' डॉ मोहन सेन, उद्योग प्रतिनिधि इंजी मनीष गुप्ता, पद्म डॉ. डी.बी. फाटक (आईआईटी बॉम्बे),  गोविंदराम सेकसरिया चेरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य  हर्ष सेकसरिया, वित्त सचिव के प्रतिनिधि एवं एसजीएसआईटीएस इंदौर के निदेशक प्रो. नीतेश पुरोहित सहित तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण और संस्थान की शासी निकाय के विभिन्न सदस्यगण उपस्थित थे।

19 मई 2026 तक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कर्मचारियों (नियमित/संविदा) के सेवा संबंधी मामलों में विस्तार करते हुए कार्मिकों के स्वयं के व्यय पर स्थानान्तरण की सुविधा को और अधिक सरल बनाते हुए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई है। कंपनी ने अपने कार्यक्षेत्र के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं लाइन स्टॉफ को स्वयं अथवा परिवार में किसी सदस्य की गंभीर बीमारी, पति/पत्नी के शासकीय सेवा में अन्यत्र स्थान पर कार्यरत होने पर/शासकीय अनुदान प्राप्त संस्था में कार्यरत होने पर, आपसी स्थानान्तरण तथा अन्य कारणों से उनके स्वयं के व्यय पर स्थानान्तरण के लिये ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान की है। उप महाप्रबंधक स्‍तर तक के अधिकारी/कर्मचारी स्थानांतरण के लिये ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे एवं ऐसे अधिकारी कर्मचारी जिनकी एक ही स्थान पर पदस्थापना की अवधि 01 वर्ष से कम है उनके आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। स्थानान्तरण के लिये ऑनलाइन आवेदन करने की लिंक कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in पर इंटरनल यूज एप्लीकेशन के अन्तर्गत ‘’Employee Transfer Module’’ के नाम से उपलब्ध है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक (मा.सं. एवं प्रशा.)  राकेश शर्मा ने कहा है कि इस नई व्यवस्था से कंपनी कार्मिकों को अन्य दफ्तरों में जाए बिना स्थानान्तरण के आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ऑनलाइन प्रक्रिया में आवेदन में दिये गये विकल्प स्थानों पर कार्मिक स्वयं के व्यय पर अपना स्थानान्तरण करा सकेंगे। कंपनी ने कहा है कि कार्मिक 05 मई 2026 से 19 मई 2026 तक अपने स्थानान्तरण के लिये आवेदन कर सकते हैं। कोई भी कार्मिक एक ही बार ऑनलाइन स्थानांतरण आवेदन प्रस्तुत (सबमिट) कर सकेगा एवं स्थानांतरण के लिये केवल ऑनलाईन आवेदन ही स्वीकार किये जायेंगे, किसी भी स्थिति में ऑफलाईन आवेदन स्वीकार नहीं किये जायेंगे।  

8.12 लाख किसानों से 44.16 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 8 लाख 12 हजार किसानों से 44 लाख 16 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जाता है। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि अभी तक 14 लाख 78 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 7383.01 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

मुख्यमंत्री ने मांगा तबादला नीति का हिसाब, मंत्री बोले- सिस्टम ही उल्टा चल रहा है

भोपाल प्रदेश में अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले पर लगा प्रतिबंध जल्द ही हटने वाला है। मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों से पूछा कि तबादला नीति का क्या हुआ? इसे जल्द लाएं। मुख्यमंत्री के इतना कहते ही खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत बोले कि यह तो उलटी गंगा बह रही है। दरअसल, तबादले पर रोक हटाने की मांग मंत्रीगण करते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने यह बात रखी तो मंत्रियों को संतोष हुआ कि मुख्यमंत्री ने उनके मन की बात उनके बोले बिना ही सुन ली। फिलहाल तय किया गया है कि अगली कैबिनेट की बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तबादला नीति 2026 का प्रारूप प्रस्तुत किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, अनौपचारिक चर्चा में मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रशासनिक आधार पर तो तबादले होते ही हैं, स्वैच्छिक तबादलों पर भी ध्यान दिया जाए।  

फ्लाई ऐश के कुशल प्रबंधन एवं प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) द्वारा  सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया में फ्लाई ऐश के कुशल प्रबंधन एवं परिवहन के लिए एक आधुनिक रेलवे प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया गया है। यह पहल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी पीएम गतिशक्ति परियोजना के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य देश में लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को सुदृढ़ करना और परिवहन को अधिक प्रभावी बनाना है। इस नवीन रेलवे प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब ताप विद्युत गृह से उत्पन्न फ्लाई ऐश का परिवहन अत्याधुनिक मशीनों एवं विशेष कंटेनरों के जरिए होगा। इसके लिए विशेष मशीनों का उपयोग किया जाएगा, जिससे लोडिंग व अनलोडिंग की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज व पर्यावरण के अनुकूल होगी। यह प्रणाली फ्लाई ऐश परिवहन के क्षेत्र में आधुनिकता और दक्षता का नया मानक स्थापित करेगी। प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति पूर्व में फ्लाई ऐश का परिवहन मुख्यतः सड़क मार्ग से बल्करों के माध्यम से तथा रेलवे के जरिए टारपोलिन से ढंके रैक के जरिए किया जाता था। इस पारंपरिक व्यवस्था में प्रदूषण की संभावना अधिक रहती थी तथा संचालन में भी कई व्यावहारिक चुनौतियाँ सामने आती थीं। नवीन रेलवे प्लेटफॉर्म के निर्माण से इन समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित हुआ है। अब फ्लाई ऐश का परिवहन अत्यल्प प्रदूषण के साथ सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा। सुगम समाधान है आधुनिक प्लेटफॉर्म यह आधुनिक रेलवे प्लेटफॉर्म 630 मीटर लंबा है और इसका निर्माण लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया गया है। प्लेटफॉर्म की विशेषता यह है कि इस पर संपूर्ण रेल रैक को एक साथ खड़ा किया जा सकता है, जिससे खास कंटेनरों एवं वैगनों में फ्लाई ऐश तथा अन्य सामग्री की लोडिंग-अनलोडिंग अत्यंत सुगमता से की जा सकती है। यह व्यवस्था न केवल संचालन को सरल बनाएगी, बल्कि लंबी दूरी तक फ्लाई ऐश के परिवहन को अधिक किफायती और प्रभावी भी बनाएगी। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृह लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए फ्लाई ऐश के अधिकतम उपयोग और प्रबंधन के लिए नवाचारपूर्ण पहल कर रहे हैं। पीएम गतिशक्ति परियोजना का स्मार्ट उपयोग करते हुए कंपनी ने लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, अवसंरचना सुदृढ़ीकरण एवं समन्वित क्रियान्वयन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को डब्ल्यूओडब्ल्यू लाईव अवार्डस की टीम भोपाल आकर विक्रमोत्सव 2026 को इस वर्ष मिले गोल्ड और सिल्वर अवार्ड प्रदान करेंगी। नई दिल्ली में 1 और 2 मई 2026 को आयोजित शोज ऑफ इंडिया कॉन्क्लेव 2026 में विक्रमोत्सव 2026 को कल्चरल लाइव इवेंट ऑफ द ईयर में गोल्ड अवॉर्ड तथा लाइव इवेंट में सर्वश्रेष्ठ शासकीय सहभागिता की श्रेणी में सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ। यह पुरस्कार डब्ल्यूओडब्लयू लाईव अवॉर्ड्स के अंतर्गत प्रदान किए गए, जो देश में कॉन्सर्ट, फेस्टिवल, टूर और लाइव इवेंट्स के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले रचनाकारों और दूरदर्शियों को सम्मानित करते हैं। इस वर्ष 300 से अधिक प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई, जो इस क्षेत्र के बढ़ते विस्तार, विविधता और संभावनाओं को दर्शाती हैं। विशेषज्ञ जूरी पैनल द्वारा इन प्रविष्टियों का मूल्यांकन किया गया। मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक  राम तिवारी ने बताया कि विक्रमोत्सव : 2026 को मिले गोल्ड एवं सिल्वर अवॉर्ड मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। यह सम्मान न केवल मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह मध्यप्रदेश की पारंपरिक एवं आधुनिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विरासत से विकास के मंत्र अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश निरंतर कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश सरकार निरंतर ऐसे आयोजनों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सशक्त और समृद्ध बनाने का कार्य कर रही है। विक्रमोत्सव हमारी परंपराओं, मूल्यों और नवाचार का जीवंत उत्सव बन गया है। यह उपलब्धि हमें और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगी तथा भविष्य में मध्यप्रदेश को सांस्कृतिक क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। विगत वर्षों में मिल चुके है तीन सम्मान विक्रमोत्सव दुनिया का सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला सांस्कृतिक आयोजन है। इसमें सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ बिजनेस इवेंट भी शामिल है। इसके पहले विक्रमोत्सव : 2025 को ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड द्वारा लांगस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर से सम्मानित किया गया था। "वाउ" अवार्ड एशिया-2025 द्वारा एशिया के शासकीय समारोह की विशेष श्रेणी में गोल्ड अवॉर्ड मिल चुका है। वर्ष-2024 में विक्रमोत्सव को एशिया का "बिगेस्ट रिलीजियस" अवार्ड मिला था। विक्रमोत्सव से 17.72 करोड़ से अधिक लोग जुड़े विक्रमोत्सव : 2026 के दौरान आयोजन के प्रसारण ने डिजिटल आउटरीच और कम्युनिटी एंगेजमेंट के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार 7 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच आयोजन से संबंधित गतिविधियों ने कुल 17.72 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच बनाई। आधिकारिक सोशल मीडिया और लाइव स्ट्रीम्स से जहाँ 47.85 लाख लोगों तक पहुँच बनी, वहीं आमजन द्वारा तैयार कंटेंट और विभिन्न हैशटैग्स के जरिए 17.24 करोड़ से अधिक की डिजिटल रीच दर्ज की गई। 139 दिवसीय आयोजन विक्रमोत्सव : 2026 का आरंभ कर सृष्टि निर्माण दिवस वर्ष प्रतिपदा से होते हुए पंच महाभूतों में अतिविशिष्ट जल तत्व के संरक्षण, संवर्धन के लिए विशिष्ट रूप से नियोजित जल गंगा संवर्धन अभियान का आयोजन होगा। दिनांक 12 फरवरी से 30 जून, 2026 की तिथियों में होने वाला यह 139 दिवसीय आयोजन भारत और देश तथा दुनिया में आयोजित होने वाला सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का एक अनूठा उत्सव बना। इसका प्रथम चरण महाशिवरात्रि के अवसर पर सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम द्वारा शिवोऽहम महादेव की आराधना से सम्पन्न हुआ। द्वितीय चरण 19 मार्च से 30 जून 2026 तक जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सम्पन्न होगा। इसमें 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियों में 4 हजार से अधिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी गयी। विक्रमोत्सव : 2026 के तहत 3 से 5 अप्रैल को उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए वाराणसी में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन किया गया था।