samacharsecretary.com

सिंधिया परिवार के बंटवारा विवाद में नया मोड़, मसौदे पर धोखाधड़ी से हस्ताक्षर लेने के आरोपों पर सुनवाई

ग्वालियर   सिंधिया राज परिवार की संपत्ति को लेकर चल रहे समझौता विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. समझौता प्रतिवेदन पर कोर्ट में धोखाधड़ी के आधार पर आपत्ति लगाने वाली ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मराजे राणा की बेटी प्रतिमा देवी को लेकर कोर्ट ने अहम आदेश दिया है. कोर्ट ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के खिलाफ अदालत में धोखाधड़ी के सबूत पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।  पद्मराजे राणा की बेटी ने लगाई बंटवारा विवाद में आपत्ति केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच सिंधिया राज परिवार के 40 हज़ार करोड़ रु के संपत्ति बंटवारा को लेकर चला आ रहा विवाद भले ही आपसी समझौते तक पहुंच गया हो लेकिन कोर्ट में नए दावेदार की आपत्ति के बाद मामला और उलझ गया था. ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्माराजे की बेटी प्रतिमा देवी ने संपत्ति में अपनी मां के अधिकार को लेकर हिस्सेदारी का दावा किया है. साथ ही सहमति से समझौते के मसौदे के लिए हस्ताक्षर धोखाधड़ी से लिए जाने का आरोप लगाया था।  पिछली सुनवाई में हुई थी प्रतिमा देवी के आरोपों पर बहस प्रतिमा देवी के आवेदन पर ग्वालियर कोर्ट ने मामले में उन्हें पक्ष रखने का मौका दिया था, जिसके तहत पिछली 7 अक्टूबर को उनके आवेदन पर बहस हुई थी. इसमें प्रतिमा देवी की और से दावा किया गया था कि, समझौते के लिए पूर्व में सहमति पत्र पर उनकी मां के हस्ताक्षर धोखे से लिए गए थे. जबकि इसके जवाब में उनकी तीनों मौसियों उषा राजे, वसुंधरा राजे और यधोधरा राजे सिंधिया की और से कोर्ट को कहा गया कि आरोप निराधार हैं. साथ ही यह भी बताया था की, हस्ताक्षर सहमति से हुए थे, इसके बाद फैमिली का रॉयल डिनर भी हुआ था और सबने फोटोग्राफ्स भी लिए थे. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपन फैसल सुरक्षित रख लिया था।  कोर्ट का आदेश- साक्ष्य से साबित करें धोखाधड़ी  जब इस केस पर दोबारा सुनवाई हुई तो अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आत्मा राम टोंक ने अपना फैसला सुनाते हुए प्रतिमा देवी को अगली हियरिंग में गवाही देने और धोखाधड़ी के सबूत पेश करने को कहा है. उन्हें साबित करना होगा कि, हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराए गए थे. इसके अलावा अगली सुनवाई पर ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं की और से बंटवारा आपसी राजीनामा होने का पक्ष रखा जाएगा. इस केस से जुड़े वकील एड शर्मा ने बताया कि अब अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। 

शिक्षकों की मनमानी पर सख्ती, छिंदवाड़ा में कार्यस्थल पर रहना अनिवार्य; BEO-BRC को नोटिस

छिंदवाड़ा  विकासखंड शिक्षा अधिकारी हो या फिर विकासखंड शिक्षा कोऑर्डिनेटर या फिर कोई भी शिक्षक जिसकी जहां पर ड्यूटी है उसे वहीं पर रहना होगा. ऐसा नहीं हुआ तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी. कलेक्टर ने आदेश जारी करते हुए चेतावनी दी है कि, शिक्षा में अगर सुधार नहीं हुआ तो लापरवाह की खैर नहीं।  जहां पर ड्यूटी वहीं पर रहना होगा वरना होगी कार्रवाई कलेक्टर हरेन्द्र नारायन ने बुधवार को शिक्षा विभाग की बैठक लेकर कहा कि, ''सरकारी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के उद्देश्य से ही बीईओ, बीआरसी, बीएसी, जनशिक्षक जैसे पद बनाए गए हैं. स्कूलों का नियमित निरीक्षण और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित कराना इनकी जिम्मेदारी है, इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े सभी फील्ड अधिकारी अनिवार्य रूप से अपने मुख्यालय पर निवास करें और अधिकारी की अनुमति उपरांत ही मुख्यालय से बाहर जाएं।  उन्होंने लगातार लापरवाही बरतने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद भी सुधार न दिखने पर कड़ी नाराजगी जताई एवं बीईओ और बीआरसी परासिया के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक को दिये. कलेक्टर ने बैठक में बीईओ, बीआरसी सहित संबंधित सभी फील्ड अधिकारियों के मुख्यालय में निवास की स्थिति की फिर समीक्षा की और इस आशय का प्रमाण पत्र प्राप्त किया. प्रमाण पत्र संतोषप्रद नहीं पाए जाने पर उन्होंने स्पष्ट प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।  गंभीरता से कराएं अपार आईडी एन्ट्री का काम बैठक में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों की अपार आईडी निर्माण में डाटा में गलती मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और पोर्टल से ऑरिजनल डेटा देने के निर्देश दिए. कलेक्टर ने कहा कि, ''विद्यार्थियों की अपार आईडी क्रिएशन का काम बहुत जरूरी है, सभी बीईओ, बीआरसी इस काम की गंभीरता को समझें.'' उन्होंने सभी विकासखण्डों को सौ फीसदी अपार आई डी क्रिएशन का काम जल्द से जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए।  स्कॉलरशिप एवं आवास सहायता राशि टाइम पर करें कलेक्टर ने जनजातीय कार्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातीय वर्ग के सभी पात्र विद्यार्थियों का एमपी टास पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं। इन सभी पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और आवास सहायता योजना का समय पर फायदा दिलाएं। 

ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे राज्यपाल मंगुभाई पटेल, CPU का लोकार्पण

 ग्वालियर ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह गुरुवार (15 अक्टूबर) को होगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल के मुख्य आतिथ्य में दोपहर 3:30 बजे विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।  कार्यक्रम में प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंषाना और भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।​ समारोह से पहले होगा लोकार्पण दीक्षांत समारोह से 15 मिनट पहले, दोपहर 3:15 बजे राज्यपाल मंगुभाई पटेल कृषि महाविद्यालय स्थित सीएआईआई (CAII) में नवीन सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) का लोकार्पण करेंगे। 345 स्नातक और 294 स्नातकोत्तर विद्यार्थी समारोह में कुल 666 विद्यार्थियों को उपाधियां दी जाएंगी। इनमें 345 स्नातक (UG), 294 स्नातकोत्तर (PG) विद्यार्थी और 27 पीएचडी शोधार्थी शामिल हैं। चार विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल दिए जाएंगे। इनमें स्नातक के दो विद्यार्थी और स्नातकोत्तर व पीएचडी के एक-एक विद्यार्थी शामिल हैं। इसके अलावा, तीन विद्यार्थियों को ‘सिरताज बहादुर सिन्हा स्मृति नगद पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। एक साल में डिग्री पूरी करने वाले होंगे सम्मानित कुलगुरु प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया कि समारोह में 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच डिग्री पूरी करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को उपाधियां दी जाएंगी। इस मौके पर विद्यार्थियों के साथ उनके परिजन भी सभागार में मौजूद रहेंगे।  

मातृ मृत्यु दर रोकने पर जोर, सुमन रोडमैप-2030 को लेकर हुई कार्यशाला

सुरक्षित मातृत्व सेवाओं से मातृ मृत्यु दर शून्य करने पर हुआ मंथन सुमन रोडमैप-2030 पर हुई कार्यशाला भोपाल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश द्वारा यूएनएफपीए मध्यप्रदेश के सहयोग से सुमन रोडमैप 2030 – देखभाल की निरंतरता में तेजी विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान एवं प्रबंधन, प्रसव कक्षों में गुणवत्ता सुधार, प्रसूति संबंधी जटिलताओं के प्रभावी प्रबंधन तथा मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। कार्यशाला का उद्देश्य सुमन के तहत निर्धारित लक्ष्यों को जिला स्तर पर प्रभावी कार्ययोजनाओं में परिवर्तित कर प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराना तथा रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को शून्य करना है। एनएचएम मध्यप्रदेश एवं यूएनएफपीए ने इस दिशा में जिलों को तकनीकी एवं कार्यक्रम संबंधी सहयोग प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यशाला को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अपर आयुक्त डॉ. पवन कुमार ने वर्चुअल संबोधित किया। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस, मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना एवं मातृ स्वास्थ्य की वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. अर्चना मिश्रा ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की रणनीति पर विचार साझा किए। कार्यशाला में प्रदेश के सभी 52 जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी तथा कार्यक्रम प्रबंधक शामिल हुए।  

इंदौर में 28 अक्टूबर को होगा राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव, ₹2,753 करोड़ की परियोजनाओं पर रहेगा फोकस

अर्बन कॉन्क्लेव 2026 इंदौर में 28 अक्टूबर को आयोजित होगा राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव अर्बन चैलेंज फंड की 2,753.10 करोड़ रूपये की परियोजनाओं को मिलेगा नया आयाम बैंक अनुबंध और लेटर ऑफ अवार्ड होंगे जारी इंदौर  मध्यप्रदेश में समृद्ध एवं आधुनिक नगरीय अधोसंरचना के सर्वांगीण विकास, निवेश प्रोत्साहन तथा प्रदेश के शहरों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित बनाने के ध्येय से आगामी 28 अक्टूबर, 2026 को इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय 'अर्बन कॉन्क्लेव' का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में 'अर्बन चैलेंज फंड' के अंतर्गत स्वीकृत प्रमुख नगरीय विकास परियोजनाओं की भौतिक प्रगति, सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन एवं समयबद्ध क्रियान्वयन से जुड़े दूरगामी रणनीतिक पहलुओं पर गहन विचार-मंथन किया जाएगा। यह कॉन्क्लेव प्रदेश के शहरी परिदृश्य को नई ऊँचाइयों पर ले जाने तथा नगरीय विकास की भावी दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। अर्बन कॉन्क्लेव में ‘अर्बन चैलेंज फंड' के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के लिए वित्तीय संस्थानों एवं बैंकों के साथ अनुबंध किये जाएँगे तथा संबंधित एजेंसियों को 'लेटर ऑफ अवार्ड' प्रदान किए जाएँगे । अर्बन चैलेंज फंड के तहत प्रदेश के विभिन्न नगरों में संचालित एवं प्रस्तावित विकास कार्यों की कुल स्वीकृत लागत 2,753.10 करोड़ रूपये है। इस वित्तीय नियोजन के माध्यम से इंदौर, उज्जैन और रीवा की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को गति दी जा रही है। इसके अंतर्गत इंदौर शहर की जलप्रदाय व्यवस्था के वितरण तंत्र के सुदृढ़ीकरण तथा सीवरेज नेटवर्क एवं उपचार संयंत्रों के व्यापक उन्नयन कार्य शामिल हैं। इसी श्रृंखला में धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में 'एकीकृत मंदिर क्षेत्र विकास' की महत्वाकांक्षी परियोजना तथा रीवा नगर की सर्वसमावेशी जलप्रदाय योजना के कार्यों को धरातल पर उतारा जा रहा है। कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के नगरीय निकायों में आधारभूत सुविधाओं के अभूतपूर्व विस्तार, आधुनिक शहरी अधोसंरचना के निर्माण तथा वित्तीय संसाधनों के सर्वाधिक प्रभावी एवं पारदर्शी उपयोग की संभावनाओं को नए आयाम दिए जा रहे हैं। अर्बन चैलेंज फंड से संचालित ये परियोजनाएं न केवल शहरों में जन-सुविधाओं का विस्तार कर 'ईज़ ऑफ लिविंग' के उच्च मानक स्थापित करेंगी, बल्कि नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाते हुए क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी संबल प्रदान करेंगी। राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव शहरी विकास के क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रमुख निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, नवोन्मेषी स्टार्टअप्स तथा ऊर्जावान युवाओं को मध्यप्रदेश में सृजित हो रही अपार विकास संभावनाओं से सीधे जुड़ने का एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। कॉन्क्लेव में सहभागिता के इच्छुक निवेशक, स्टार्टअप्स एवं युवा आधिकारिक वेब पोर्टल ugconclave.mp.gov.in पर जाकर अपना ऑनलाइन पंजीयन (Registration) करा सकते हैं। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी पहल से मध्यप्रदेश के शहरों में सतत्, समावेशी एवं आधुनिक विकास का नया अध्याय प्रारंभ होगा। 

मध्यप्रदेश की जेलों में राशन खरीदी पर सख्ती, रेट में अंतर और गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई व्यवस्था

भोपाल   मध्य प्रदेश जेल विभाग में वर्षों से खाद्यान्न सप्लाई का टेंडर कॉर्टेल चलाने वालों पर विभाग लगाम लगाने जा रहा है। सालाना 2400 करोड़ के कॉर्टेल को खत्म करने नई टेंडर पॉलिसी बनाई है। सभी जेलों को केंद्र के खरीद पोर्टल (जेम) से खरीदी करना अनिवार्य किया है। अभी सभी जेलों में अपने स्तर पर टेंडर किए जाते हैं। शिकायतें आ रही थी कि कुछ अफसर मिलीभगत कर एक ही फर्म या संबंधित फर्मों को ठेका दे रहे हैं। इस नीति से इस पर अंकुश लगेगा। यह नए वित्तीय वर्ष में लागू होगा। फल-सब्जियां खरीद सकेंगे प्रदेश की जेलों में एक माह में करीब 200 करोड़ की खाद्यान्न सामग्री लगती है। नई नीति के अनुसार उप जेलें टेंडर अपने स्तर पर नहीं कर सकेंगी। उन्हें जिला या सेंट्रल जेल से सप्लाई की जाएगी। वे सिर्फ रोजमर्रा की सामग्री जैसे फल, दूध, सब्जियों की खरीदी अपने स्तर पर कर सकेंगे। इसलिए बदली नीति ओवर बिलिंगः जेल मुख्यालय ने पांच साल के सभी जेलों के सलाना टेंडर की जांच की तो कई खाद्य सामग्री में ओवर बिलिंग के मामले सामने आए। रेट असमानताः खाद्यान्न सामग्री के रेट में भी बड़ी असमानताएं मिलीं। चावल, दाल और गेहूं में 50 प्रतिशत तक का अंतर मिला। गुणवत्ताः गुणवत्ता की शिकायतें भी लगातार आ रही थीं। शिकायतों के बाद बदली गई नीति अच्छा खाना देना हमारी प्राथमिकता है। लंबे समय से खाद्यान्न सामग्री की ओवर बिलिंग और गुणवत्ता की शिकायतें आ रही थीं। इसे देखते हुए नई नीति बनाई है।-वरुण कपूर, डीजी, जेल एमपी में जेल की रसोई पर AI की नजर मध्य प्रदेश की जेलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कैदियों की शिकायतें अब सीधे एआई तक पहुंचेंगी। विभाग ने जेल किचन में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया है। किचन में लगाए गए कैमरों के जरिए यह सिस्टम रोजाना तैयार भोजन की तस्वीर और स्थिति का विश्लेषण करेगा। इसमें दाल, सब्जी और रोटी की गुणवत्ता से जुड़े अलग-अलग मानकों की जांच की जाएगी। किसी जेल में लगातार गड़बड़ी मिलने पर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

मध्यप्रदेश की जेलों में AI से होगी खाने की निगरानी, खराब भोजन मिलने पर कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी रिपोर्ट

इंदौर  मध्य प्रदेश की जेलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कैदियों की शिकायतें अब सीधे एआई तक पहुंचेंगी। विभाग ने जेल किचन में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया है। किचन में लगाए गए कैमरों के जरिए यह सिस्टम रोजाना तैयार भोजन की तस्वीर और स्थिति का विश्लेषण करेगा। इसमें दाल, सब्जी और रोटी की गुणवत्ता से जुड़े अलग-अलग मानकों की जांच की जाएगी। किसी जेल में लगातार गड़बड़ी मिलने पर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। इंदौर जेल डीजी द्वारा इसकी पुष्टि की गई है। नई व्यवस्था में जेल के अंदर खाना बनाने वाले कैदी भोजन तैयार होने के बाद उसे निर्धारित तरीके से कैमरे के सामने रखेंगे। कैमरे से मिली तस्वीरों को एआइ आधारित सॉफ्टवेयर जांचेगा। सिस्टम भोजन के रंग, स्थिति और दिखाई देने वाले अन्य मानकों का विश्लेषण करेगा। मसलन रोटी जली तो नहीं है, दाल ठीक तरह से बनी है या नहीं, सब्जी में पानी अधिक तो नहीं है जैसे ङ्क्षबदुओं पर जांच की जाएगी। हर दिन बनेगी रिपोर्ट भोजन की जांच केवल शिकायत आने के बाद नहीं होगी, बल्कि रोजाना की जाएगी। सॉफ्टवेयर से तैयार रिपोर्ट जेल मुख्यालय के कंट्रोल रूम में भेजी जाएगी। वहां तैनात अधिकारी अलग- अलग जेलों से आने वाली रिपोर्ट की निगरानी करेंगे। इससे किसी एक दिन की शिकायत के बजाय लगातार खराब हो रही भोजन व्यवस्था की पहचान करना आसान होगा। एक-दो बार गलती माफ, लगातार गड़बड़ी तो कार्रवाई इस संबंध में इंदौर जेल डीजी वरुण कपूर ने बताया कि कंट्रोल रूम में अधिकारी भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी रिपोर्ट की लगातार निगरानी करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी जेल में महीने में एक-दो बार गुणवत्ता से जुड़ी कमी सामने आती है तो उसे सामान्य गलती मानकर देखा जा सकता है, लेकिन किसी जेल में लगातार खराब गुणवत्ता की रिपोर्ट आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य जेलों में भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना है।

ग्वालियर में राज्यपाल का दौरा कल, छात्रों को देंगे उपाधियां; किसानों को भी मिलेगी सौगात

ग्वालियर  मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल मंगुभाई पटेल गुरुवार 15 अक्टूबर को एक दिवसीय दौरे पर ग्वालियर आ रहे हैं. वे ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे. कार्यक्रम में राज्यपाल के साथ ही कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना भी शिरकत करेंगे।  600 से ज्यादा छात्रों को मिलेंगी उपाधियां ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए 15 अक्टूबर महत्वपूर्ण दिन होने वाला है, क्योंकि इसी दिन 600 से ज़्यादा छात्रों को दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्रदान की जाएंगी. वैसे तो विश्वविद्यालय का यह 12वां कन्वोकेशन है लेकिन यूनिवर्सिटी के अपने इतिहास में ये पहली बार होगा जब दीक्षांत समारोह समय पर आयोजित हो रहा है और पिछले सत्र में उत्तीर्ण हुए छात्रों को समय पर कॉन्वोकेशन आयोजित कर डिग्री और उपाधियां प्रदान की जाएंगी।  सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का लोकार्पण करेंगे राज्यपाल कार्यक्रम की जानकारी देने के लिए आयोजित कृषि विश्वविद्यालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुलगुरु प्रो अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया, '' दीक्षांत समारोह में कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों को राज्यपाल मंगूभाई पटेल द्वारा उपाधियां प्रदान की जाएंगी. लेकिन इससे पहले वे ग्वालियर कृषि महाविद्यालय के सीएआईई में हाल ही में स्थापित की गई नई सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का लोकार्पण भी करेंगे. इसके बाद ही दीक्षांत समारोह कार्यक्रम की शुरुआत होगी।  666 छात्रों को प्रदान की जाएंगी उपाधियां कुलगुरु अरविंद शुक्ला ने बताया, '' इस कन्वोकेशन में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में स्नातक के 345, स्नातकोत्तर के 294 और पीएचडी के 27 विद्यार्थी कुल 666 छात्र शामिल हैं. ये उपाधियां 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच उपाधि पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रदान की जाएंगी. इस कार्यक्रम में 4 छात्र-छात्राओं को मेडल भी प्रदान किए जाएंगे. इनमें 2 स्नातक के, 1 स्नातकोत्तर और पीएचडी का 1 विद्यार्थी शामिल है. इसके अलावा 3 छात्र, छात्राओं को सिरताज बहादुर सिन्हा स्मृति नगद पुरस्कार दिया जाएगा।  स्टार्टअप्स के जरिए कमाई का साधन बनेगी 'सीपीयू' आपको बता दें कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एग्रीकल्चर कॉलेज में स्थापित की गई सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट में पांच तरह के उत्पाद तैयार किए जाएंगे. ये इकाइयां उन छात्रों और किसानों के लिए लगाई गई है, जो किसी बेहतर स्टार्टअप और एफपीओ बनाकर उसे रोजगार का जरिया बनाने की चाह रखते हैं. इसका संचालन नाबार्ड के साथ किया जा रहा है. इनमें मध्य प्रदेश में पहली बार मसाला मेकिंग यूनिट जिसमे नाइट्रोजन का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे मशीन गर्म नहीं होगी और मसाले अपने असल एरोमा के साथ तैयार होंगे और उनका जायका कम नहीं होगा. इसके अलावा टोमेटो प्यूरी या कैचअप यूनिट, पोहा मेकिंग यूनिट, नमकीन मेकिंग यूनिट और कोल्ड प्रेस ऑइल यूनिट भी हैं. इसके साथ ही एक एनिमल फीड लाइन भी शुरू होने जा रही है।  भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री भी होंगे शामिल राज्यपाल मंगू भाई पटेल का यह दौरा टाइट शेड्यूल में रहेगा. दीक्षांत समारोह दोपहर तीन बजे से विश्वविद्यालय के दत्तोपंत थेगड़ी सभागार में शुरू होगा. राज्यपाल और कृषि मंत्री के अलावा भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। 

भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर 25 अक्टूबर तक मौका, भूमि उपयोग और ग्रीन बेल्ट को लेकर उठे सवाल

भोपाल  भावी विकास की रूपरेखा तय करने वाले ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान 2047 को लेकर शहर में गहमागहमी बढ़ गई है। इस ड्राफ्ट में जमीन के इस्तेमाल (लैंड-यूज) के वर्गीकरण, सड़कों के अलाइनमेंट और मौजूदा रिहायशी इलाकों के भविष्य को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। आम नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रस्तावित ज़ोनिंग और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में बदलाव की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। 25 अक्टूबर तक आए 800 से अधिक सुझाव और आपत्तियां टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग के पास आगामी 25 अक्टूबर की अंतिम तिथि से पहले लगभग 800 सुझाव और आपत्तियां पहुंच चुकी हैं। विभाग अब इन सभी सबमिशन की बारीकी से जांच करेगा और इसके बाद ही मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा। नागरिकों और विभिन्न संगठनों द्वारा उठाए गए इन मुद्दों ने प्रशासन की प्लानिंग पर नए सिरे से विचार करने का दबाव बना दिया है। मुख्य मांगें और आपत्तियां क्या हैं? प्राप्त जानकारियों के अनुसार, सबसे प्रमुख मांग 'बीआईजेड-2' (BIZ-2) लैंड-यूज कैटेगरी को हटाने की है, ताकि वहां रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधियां आसानी से संचालित हो सकें। इसके अलावा, ग्रीन बेल्ट और कृषि भूमि को आवासीय उपयोग के लिए फिर से वर्गीकृत करने, 18 मीटर चौड़ी प्रस्तावित सड़कों के अलाइनमेंट बदलने और कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को इको-संवेदनशील जोन से बाहर करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। स्थानीय स्तर पर विरोध और पर्यावरण की चिंताएं शहर के पॉश इलाकों जैसे बावडिया कलां और बाघमुग़लिया के निवासियों ने प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास के साथ कनेक्टिविटी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, पर्यावरण के मोर्चे पर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। लाहरपुर में 643 एकड़ कृषि भूमि को, जो कथित तौर पर पिछले 30 वर्षों से खेती के अधीन है, निर्धारित सबमर्जेंस (डूब) क्षेत्र से बाहर करने की मांग की गई है। इसके अलावा, उन इलाकों में प्रस्तावित सड़कों को लेकर भी गहरी चिंता जताई गई है जो बाघों की आवाजाही (टाइगर मूवमेंट) के लिए जाने जाते हैं। सेफ सिटी के यह है आठ पैरामीटर     प्रमुख स्थानों पर एआइ आधारित सीसीटीवी, ड्रोन, अलार्म, कंट्रोल सेंटर और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट के लिए विशेष मोबाइल ऐप।     सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए निजी भवन और कालोनियों के गेट लगे कैमरों को पुलिस व प्रशासन के सेंट्रल सर्वर से जोड़ना।     संवेदनशील इलाकों में अत्याधुनिक हथियारों और बेहतर सुविधाओं से लैस पुलिस बल की तैनाती।     पार्कों व भवनों में ऊंची दीवारों की जगह पारदर्शी फेंसिंग, चौतरफा स्ट्रीट लाइट्स और सक्रिय सामाजिक निगरानी।     नियंत्रित गति, सही ज्यामिति, डिवाइडर, सिग्नल और पैदल यात्रियों के लिए मानक जेब्रा क्रासिंग व फुटपाथ।     बसों व मेट्रो में आधुनिक सुरक्षा उपकरण, चालक-परिचालकों का प्रशिक्षण और बेहतर लास्ट माइल कनेक्टिविटी।     कॉम्प्रेहेंसिव फायर मैनेजमेंट प्लान के तहत हर 50 हजार की आबादी पर एक नए फायर स्टेशन का निर्माण।     आपातकाल के लिए स्कूल, कॉलेज व सामुदायिक भवनों को भूकंपरोधी व बाढ़ से सुरक्षित राहत केंद्रों के रूप में तैयार करना।

मध्यप्रदेश में चौथी रेल लाइन की तैयारी तेज, कटनी-पेंड्रा रोड रूट पर जल्द शुरू होगा भूमि अधिग्रहण

  कटनी कटनी से पेंड्रा रोड के बीच चौथी रेल लाइन बिछाने की तैयारी अब जमीन अधिग्रहण की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्र सरकार से परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद रेलवे ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। अब सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि रेल लाइन के लिए किन गांवों की कितनी निजी जमीन की जरूरत पड़ेगी। सर्वे शुरू होने के साथ ही संभावित प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों की नजर इस बात पर रहेगी कि उनकी जमीन परियोजना के दायरे में आती है या नहीं और अधिग्रहण होने पर उन्हें कितना मुआवजा मिलेगा। इन जिलों से होकर गुजरेगी रेललाइन, 201 किलोमीटर है कुल लंबाई जानकारी के अनुसार कटनी-पेंड्रा रोड रेलखंड पर चौथी लाइन बिछाने की परियोजना की लंबाई 201.37 किलोमीटर है। इसके लिए मध्य प्रदेश के कटनी सहित उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिलों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। हाल ही में जारी अधिसूचना के तहत संबंधित अधिकारियों को जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे परियोजना के लिए जमीन चिह्नित करने की कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी। जिले में जमीन अधिग्रहण के लिए एसडीएम को नियुक्त किया गया है। चौथी लाइन से यह होगा फायदा कटनी-पेंड्रा रोड रेलखंड पर चौथी लाइन बनने का फायदा सिर्फ मालगाडियों को नहीं, यात्रियों को भी मिलेगा। इस रूट पर कोयला मालगाडियों का दबाव लगातार बढने की संभावना है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। इससे ट्रेनों को एक दूसरे के लिए रास्ता देने में होने वाली देरी और अनावश्यक ठहराव कम हो सकते हैं। कटनी से बिलासपुर, अनूपपुर, शहडोल और छत्तीसगढ़ की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए इसका सीधा फायदा बेहतर परिचालन के रूप में मिल सकता है। ट्रैक क्षमता बढने से समयपालन में सुधार, अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चलाने और मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। यानी चौथी लाइन बढ़ते माल यातायात के साथ यात्री सुविधाओं के विस्तार का रास्ता भी खोलेगी। 2975 करोड़ की है परियोजना केंद्र सरकार ने 9 सितंबर 2026 को कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन सहित तीन रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। तीनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपए है। कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन पर करीब 2,975 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। चौथी लाइन बनने के बाद इस मार्ग पर ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा मालगाडियों को होगा, क्योंकि कोयले की बढ़ती खेप को अधिक क्षमता के साथ निकाला जा सकेगा। जमीनों का सर्वे इस परियोजना का अहम चरण होगा। इसी से पता चलेगा कि किन गांवों में रेल लाइन के लिए जमीन की जरूरत है और किन किसानों के खेत या जमीन का कुछ हिस्सा प्रभावित हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि कई परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन भी होती है। ऐसे में यदि किसी किसान की खेती की जमीन अधिग्रहण के दायरे में आती है, तो उसके सामने खेती के रकबे में कमी और भविष्य की आय को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मुआवजे का होगा।