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विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्यक्रम

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने “VVIP/VIP Security & Protection Course” का आज विशेष शाखा प्रशिक्षण संस्थान, श्यामला हिल्स भोपाल में शुभारंभ किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 12 मई से 15 मई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित मानक प्रक्रियाओं, समन्वय तंत्र, आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित कार्यवाही तथा आधुनिक सुरक्षा उपायों के संबंध में सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। उद्घाटन सत्र में महत्वपूर्ण विषयों पर पुलिस मुख्यालय, इंटेलिजेंस विंग, मुख्यमंत्री सुरक्षा शाखा, बी.डी.डी.एस. टीम, डॉग स्क्वॉड तथा अन्य विशेषज्ञ इकाइयों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा सहभागिता करते हुए विषय विशेषज्ञ के रूप में मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, समन्वित, प्रभावी एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस)  ए. साई मनोहर, पुलिस महानिरीक्षक (इंटेलिजेंस) डॉ. आशीष, उप पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था एवं सुरक्षा)  तरुण नायक, उप पुलिस महानिरीक्षक (इंटेलिजेंस)  डी. कल्याण चक्रवर्ती, सहायक पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) मती आभा तिर्की सहित विशेष शाखा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग, CM डॉ. यादव के नेतृत्व में नई पहचान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने वन और वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने वन्य जीवों के संरक्षण को केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं माना। सरकार ने इसे विकास, पर्यटन, स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक सहभागिता से जोड़कर व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरगामी सोच से मध्यप्रदेश आज ‘टाइगर स्टेट’ के साथ ही देश के सबसे व्यापक और वैज्ञानिक वन्य जीव संरक्षण मॉडल के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विजन है कि प्रदेश के वन और नदियां केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। मध्यप्रदेश के वन देश की कई प्रमुख नदियों का मायका हैं। इस तरह ये वन कई राज्यों की जल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसी सोच के साथ राज्य सरकार जलवायु अनुकूल, विज्ञान आधारित और समुदाय केंद्रित वन प्रबंधन मॉडल को आगे बढ़ा रही है। कूनो बना वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन का ग्लोबल प्रयोगशाला श्योपुर का कूनो नेशनल पार्क आज विश्व स्तर पर वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुए ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोत्सवाना से लाई गई मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाया। वर्तमान में कूनो में चीतों की संख्या 57 तक पहुंच चुकी है। एक शताब्दी पूर्व लुप्त हो चुके चीतों की देश में सफल पुनर्स्थापना ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वैज्ञानिक प्रबंधन और राजनीतिक प्रतिबद्धता के बल पर विलुप्त प्रजातियों का पुनर्वास संभव है। मध्यप्रदेश में चीतों साथ ही लुप्त हो चुकी ‘जंगली भैंसा’ प्रजाति को भी कान्हा की घास-भूमि में आबाद किया जा रहा है। राज्य सरकार अब कूनो को ‘ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही गांधी सागर अभयारण्य को चीतों का दूसरा और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौंरादेही को तीसरा बड़ा चीता लैंडस्केप बनाया जा रहा है। नौंरादेही में चीतों के पुनर्वास के लिये सॉफ्ट रिलीज बोमा के निर्माण से परियोजना के अगले चरण का शुभारंभ हो चुका है। विलुप्त प्रजातियों की पुनर्स्थापना का अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में चीतों के साथ ही कई दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए जंगली भैंसों का पुनर्वास इस दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यह प्रयास केवल एक प्रजाति को पुनर्स्थापित करने तक सीमित नहीं, बल्कि विलुप्त हो रही जैव-विविधता और पारिस्थितकी तंत्र को पुनर्जीवित करने का अभियान है। चंबल, कूनो और नर्मदा क्षेत्र में घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी पहले से ही दुनिया में घड़ियालों की सबसे बड़ी शरणस्थली मानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं को छोड़ना तथा ओंकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा नदी में मगरमच्छों का संवर्धन शुरू करना प्रदेश की जलीय जैव विविधता संरक्षण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्मदिन पर वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौंरादेही में संरक्षित प्रजाति के कछुओं को जल में विमुक्त कर प्रकृति और जैव विविधता के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया। उनका मानना है कि वन्य और जलीय जीव पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध संरक्षण में प्रदेश कर रहा देश का नेतृत्व मध्यप्रदेश गिद्ध संरक्षण में देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। कभी विलुप्ति के कगार पर पहुंचे गिद्धों की संख्या राज्य में अब 14 हजार से अधिक हो चुकी है, जो देश में सर्वाधिक है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और वन विहार नेशनल पार्क के सहयोग से भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वन विहार में उपचार के बाद 23 फरवरी 2026 को मुक्त किया गया एक गिद्ध पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान तक की लंबी यात्रा पूरी कर चुका है, जिसे संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है। नए टाइगर रिजर्व और अभयारण्य से बढ़ा संरक्षण क्षेत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के विस्तार और जैव- विविधता संपन्न क्षेत्रों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दिसंबर-2024 में रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के दर्जे के साथ वन एवं वन्य जीव संरक्षण को नया आयाम मिला। यह निर्णय वर्ष 2008 में अनुमति मिलने के बावजूद अब तक लंबित रहा था, इसलिए इसे ऐतिहासिक माना गया। इस टाइगर रिजर्व का नाम विश्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद् पं. विष्णुदेव धर वाकणकर के नाम पर रखा गया। शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व को मार्च-2025 में प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार भी बनाई गई है। सागर जिले के 258.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अप्रैल 2025 में ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर वन्यजीव अभयारण्य’ घोषित किया गया। साथ ही ओंकारेश्वर और जहानगढ़ को नए वन्य जीव अभयारण्य के रूप में विकसित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। ताप्ती क्षेत्र को अगस्त 2025 में मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया, यहाँ टाइगर, तेंदुआ, बायसन और जंगली कुत्तों जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। हाथी संरक्षण के लिये उठाये गये महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार ने हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक योजना को मंजूरी दी है। राज्य स्तरीय ‘हाथी टास्क फोर्स’ का गठन, ‘हाथी मित्र’ योजना, रेडियो टैगिंग और सोलर फेंसिंग जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मानव-हाथी संघर्ष में जनहानि होने पर मुआवजा राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। साथ ही कर्नाटक, केरल और असम जैसे राज्यों की श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को अपनाकर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। टाइगर कॉरिडोर और वाइल्ड लाइफ फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर वन्य जीव संरक्षण में अब केवल रिजर्व बनाना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि उनके बीच सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। मध्यप्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाली 5,500 करोड़ … Read more

1.25 करोड़ बहनों को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की मिलेगी 36वीं किश्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 13 मई को नरसिंहपुर जिले के मुंगवानी में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी करेंगे। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया सकारात्मक परिवर्तन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे बहनों में वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है।  

कूनो में 4 चीता शावकों की मृत्यु, माँ सुरक्षित और स्वस्थ प्रारंभिक जांच में जंगली जानवर के हमले की आशंका

भोपाल  श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता केजीपी-12 के 4 शावक मंगलवार सुबह एक मांद के पास मृत पाये गये हैं। मॉनिटरिंग टीम को श्योपुर टेरिटोरियल डिवीजन क्षेत्र में स्थित मांद के पास एक माह आयु के चारों मृत शावक क्षत-विक्षत अवस्था में मिले। शावकों का जन्म 11 अप्रैल 2026 को खुले जंगल में हुआ था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है शावकों को किसी हिंसक जानवर ने मारा है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि शावकों की मां पूरी तरह सुरक्षित, स्वस्थ और सामान्य स्थिति में है। कूनो में मौजूद अन्य सभी चीते भी स्वस्थ हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। वन विभाग के अनुसार शावकों को अंतिम बार 11 मई की शाम जीवित देखा गया था। प्रारंभिक तौर पर यह मामला किसी अन्य वन्य जीव द्वारा शिकार किए जाने का प्रतीत हो रहा है। हालांकि मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।  

योग से निरोगी समाज बनाने की पहल, प्रदेशव्यापी प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता अभियान शुरू

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में, राज्य सरकार योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। “घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” अभियान का उद्देश्य, योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना तथा स्वस्थ एवं निरोग समाज का निर्माण करना है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के सफल आयोजन एवं व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयुष विभाग द्वारा “घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” अभियान के अंतर्गत आयोजित प्रदेशव्यापी योग प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का वर्चुअली शुभारंभ कर कही। यह अभियान 12 मई से 21 जून 2026 तक प्रदेशभर में संचालित होगा। आयुष मंत्री  परमार ने कहा कि योग, भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार है और वर्तमान समय में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का सबसे प्रभावी माध्यम भी है। मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार योग एवं आयुष को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए सतत रूप से कार्य कर रही है। मंत्री  परमार ने कहा कि अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए “योग-सखी” एवं “योग-दूत” तैयार किए जा रहे हैं, जो घर-घर जाकर नागरिकों को योग के प्रति प्रेरित करेंगे। साथ ही विद्यालयों एवं महाविद्यालयों तक भी इस अभियान का विस्तार किया जा रहा है, जिससे युवाओं में योग एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित की जा सके।  परमार ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 को व्यापक जनभागीदारी एवं उत्साह के साथ मनाने की तैयारियों को नई गति मिलेगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। संदेश में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग आज वैश्विक जनआंदोलन बन चुका है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन एवं आंतरिक चेतना को जागृत करने का प्रभावी माध्यम है। डॉ यादव ने कहा कि योग एवं आयुर्वेद भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं, जो आज संपूर्ण विश्व को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखा रही हैं। डॉ यादव ने प्रदेश में आयुष सेवाओं के विस्तार, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के सुदृढ़ीकरण तथा योग एवं वेलनेस गतिविधियों को जनसामान्य तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना करते हुए अभियान को जनभागीदारी से सफल बनाने का आह्वान किया। प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन ने बताया कि यह अभियान 21 जून तक निरंतर चलेगा, जिसके अंतर्गत प्रदेश के 800 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में योग शिक्षक नागरिकों के छोटे-छोटे समूहों को नियमित योगाभ्यास कराएंगे।  शोभित जैन ने बताया कि अभियान के अंतर्गत राज्यभर के लगभग 2000 आयुष संस्थानों आयुष महाविद्यालयों, चिकित्सालयों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रतिदिन लाइव योग प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे। पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक महाविद्यालय, भोपाल के मास्टर ट्रेनर स्टूडियो से प्रतिदिन 45 मिनट के ऑनलाइन योग सत्र आयोजित होंगे, जिनसे प्रदेशभर के हजारों नागरिक यूट्यूब में प्रसारित वीडियो से प्रशिक्षण ले सकेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाइव प्रसारण प्रदेश के लगभग 2000 आयुष संस्थानों में किया जाएगा, जिससे लगभग 15 हजार से अधिक प्रशिक्षार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित होगी।  जैन ने कहा कि अभियान को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रशिक्षण, यूट्यूब लिंक एवं अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए आमजन को साझा किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक अपने घर से ही योग प्रशिक्षण प्राप्त कर सके। उन्होंने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक योग की पहुंच सुनिश्चित करना तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों, योग विशेषज्ञों एवं आयुष संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। 

देश के गेहूं निर्यात में म.प्र. का योगदान 40 प्रतिशत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी नीतियों और योजनाओं के परिणामस्वरूप इस साल गेहूँ उत्पादन 365.11 लाख मीट्र‍िक टन तक पहुंच गया है। उत्पादकता बढ़कर 3780 किलो प्रति हैक्टेयर हो गई है। मध्यप्रदेश “गेंहूं प्रदेश” बन गया है। देश के कुल गेहूँ उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान 18 प्रतिशत है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मध्यप्रदेश के गेंहूं की मांग लगातार बनी हुई है। प्राकृतिक मिठास के कारण शरबती और डयूरम गेहूँ की मांग जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई, साउथ अफ्रीका जैसे देशों में बनी हुई है। भारत से विदेशों को निर्यात किये जाने वाले गेहूँ में मध्यप्रदेश का योगदान 35 से 40 प्रतिशत होता है। प्रदेश के गेहूँ को ओमान, यमन, यूएई, साउथ कोरिया, कतर, बांग्लादेश, सउदी अरब, मलेशिया, साउथ अफ्रीका और इंडोनेशिया में पसंद किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का गेहूँ ब्रेड, बिस्किट और पास्ता के लिये सर्वाधिक उपयुक्त है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गेहूँ उत्पादक किसानों के हित में नई योजनाएं बनाने और समय पर मदद करने की रणनीति के फलस्वरूप मध्यप्रदेश ने परंपरागत गेहूँ उत्पादक राज्यों की बराबरी कर ली है। वर्ष 2004–05 में सिर्फ 42 लाख हैक्टेयर में गेहूँ होता था, जो आज बढकर 96.58 लाख हैक्टेयर हो गया है। क्या है मध्यप्रदेश के गेंहूं में भारत सरकार के गेहूँ अनुसंधान निदेशालय ने अपने अनुसंधान में दो हजार सेम्पल का परीक्षण करने के बाद उच्च स्तर की गुणवत्ता का दाना पाया। प्रदेश के सामान्य से सामान्य किस्म के गेहूँ में भी औसत रूप से 12.6 प्रतिशत प्रोटीन, 43.6 पीपीएम (पार्टस पर मिलियन) आयरन तथा 38.2 पीपीएम जिंक पाया गया है। कठिया प्रजाति के गेहूँ में भरपूर प्रोटीन, आयरन, मैग्नीज और जिंक है। इन्हीं विशेषताओं से मध्यप्रदेश के गेहूँ को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। प्रदेश में गेंहूं की उगाई जाने वाली किस्मों की अपनी विशेषताएं हैं, जैसे जे.डब्ल्यू.एस.17, जे.डब्ल्यू. 3020 और जे.डब्ल्यू. 321 नामक गेहूँ की किस्में – एक सिंचाई में 35 क्विंटल तक उत्पादन देती हैं। जे.डब्ल्यू. 1142, जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1203 किस्मों से अधिक तापमान में भी बेहतर उत्पादन मिलता है। जे.डब्ल्यू. 1202 और जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1106 किस्में प्रोटीन से भरपूर हैं। एमपीआर 1215 और जे.डब्ल्यू. 3211 किस्में निर्यात के लिये बेहतर है। गेहूँ की 51 किस्मों का विकास पौष्टिक आहार बनाने के लिये गेहूँ वर्ष 2026 में की जो 5 किस्में उपयोग में आ रही हैं उनमें से 4 मध्यप्रदेश में विकसित की गई हैं। इनमें एम.पी.ओ. 1215, एम.पी. 3211, एम.पी. 1202 एवं एम.पी. 4010 शामिल हैं। मध्यप्रदेश में अब तक गेहूँ की 51 किस्मों का विकास हुआ है। इनमें से 12 किस्मों का विकास सिर्फ एक दशक की अल्प अवधि में हुआ है। 100 लाख मीट्र‍िक टन उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से गेहूँ खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्र‍िक टन से बढ़कर 100 लाख मीट्र‍िक टन हो गया है। प्रदेश में गेहूँ का उपार्जन जारी है। किसानों के लिए उपार्जन केन्द्रों में पूरे इंतजाम किए गये हैं। गेहूँ उपार्जन 23 मई तक चलेगा। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश देश का सबसे बडा प्रामाणिक बीज उत्पादक राज्य भी है। सहकारी क्षेत्र में बीज उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है। बीज उत्पादन कंपनियों से तीन लाख से ज्यादा किसान जुडे हैं। ये कंपनियां अब भंडारण विपणन और खादय प्रसंस्‍करण से भी जुड़ रही हैं। फार्मर प्रोडयूसर कंपनियों को और ज्यादा मजबूत बनाया जा रहा है। इन सभी गतिविधियों से मध्यप्रदेश न केवल गेहूँ बल्कि अन्य फसलों के उत्पादन में राष्ट्र में अग्रणी बना हुआ है।  

फेडरेशन ने उद्योगपतियों के हित में किया निरंतर सहयोग : मंत्री काश्यप

भोपाल  फेडेरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मध्यप्रदेश के विकास को नई गति देने वाला प्रमुख स्तंभ है। प्रदेश के स्थानीय और युवा उद्योगपतियों को नई दिशा दी है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल निजी होटल में फेडेरेशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के आयोजन और उद्योगों को दिए जा रहे नीतिगत प्रोत्साहन से प्रदेश के छोटे उद्यमियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में एक नया आत्मविश्वास जागा है, जिससे अब गांव का व्यक्ति भी उद्योग लगाने का साहस जुटा रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  चेतन्य काश्यप भी समारोह में शामिल हुए और उन्होंने भी संबोधित किया। मंत्री  पटेल ने कहा कि मजदूर और उद्योगपति के बीच का संबंध हितों के टकराव की जगह आपसी समन्वय का होना चाहिए और इसे वास्तविकता में बदलना सरकार की प्राथमिकता है। इसी दिशा में मंत्री  पटेल ने फेडरेशन के प्रतिनिधियों को श्रम संबंधी विभागीय समितियों में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने '' जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो श्रम और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप को कम करने का कार्य कर रही हैं। मंत्री  पटेल ने उद्योगों की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्किल मैपिंग पर विशेष बल दिया और उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे अपने आवश्यक 'स्किल लेवल' की पहचान कर विभाग को सूचित करें। सरकार इन जरूरतों के आधार पर स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर कुशल कार्यबल उपलब्ध कराएगी, जिससे उद्योगों को श्रमिकों की कमी का सामना न करना पड़े और स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो। मंत्री  पटेल ने कहा कि प्रदेश कृषि उत्पादन के उच्चतम स्तर को प्राप्त कर रहा है इसलिए अब हम सभी को 'प्रोसेसिंग' (प्रसंस्करण) क्षेत्र पर केंद्रित करना होगा। राज्य की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए उपयुक्त है। इसके साथ ही, उन्होंने श्रम विभाग में जारी सुधारों की चर्चा करते हुए बताया कि अनावश्यक कानूनों को समाप्त किया जा रहा है और शेष प्रमुख कानूनों में एकरूपता लाने का प्रयास किया जा रहा है। निरीक्षण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड और डिजिटल सिस्टम लागू किए गए हैं जिससे प्रक्रियाएं सिस्टम आधारित और पारदर्शी बनी रहें। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  चेतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में वर्ष 2025 को 'उद्योग वर्ष' के रूप में मनाया गया है जिसका मुख्य केंद्र स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को नए अवसर प्रदान करना था। मंत्री  काश्यप ने कहा कि फेडरेशन ने उद्योगपतियों के हित में शासन के कार्यों में निरंतर सहयोग किया है। साथ ही उन्होंने उद्यमियों से गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखने का आग्रह किया, जिससे वैश्विक बाजार में प्रदेश की साख और मजबूत हो सके। मंत्री  काश्यप ने औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के बारे बताते हुए कहा कि विभाग ने पिछले डेढ़ वर्षों में 1200 से अधिक प्लॉट पूरी पारदर्शिता के साथ ऑनलाइन आवंटित किए हैं और आगामी दो वर्षों में 3 हजार नए प्लॉट उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश ने निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए एक अनूठी पहल की है, जिसके तहत लैंड-लॉक्ड राज्य होने की चुनौतियों को देखते हुए निर्यातकों को 50 प्रतिशत परिवहन सब्सिडी प्रदान की जा रही है। सब्सिडी वितरण की इस पूरी प्रक्रिया को 'डेट ऑफ प्रोडक्शन' के आधार पर पारदर्शी और ऑनलाइन बनाया गया है, जिससे उद्यमियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।मंत्री  काश्यप ने कहा कि व्यापारियों के कल्याण के लिए एक 'व्यापार बोर्ड' का गठन किया गया है, जिसमें फेडरेशन के प्रतिनिधि को स्थायी सदस्य के रूप में स्थान दिया गया है। मंत्री द्वय ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष  हिमांशु खरे एवं संयुक्त अध्यक्ष  वीरेंद्र कुमार पोरवाल और  अखिलेश राठी को अंगवस्त्रम् भेंट कर नवनिर्वाचन का प्रमाण पत्र प्रदान किया और शुभकामनाएं दी। साथ ही निवृतमान अध्यक्ष  दीपक शर्मा को अध्यक्षीय कार्यकाल के लिए शाल, फल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। फेडेरेशन की ओर से अध्यक्ष  खड़े ने मंत्रीद्वय को स्मृति चिन्ह भेंट किया।  पूर्व अध्यक्ष डॉ. आर.एस. गोस्वामी ने स्वागत उद्बोधन में फेडरेशन द्वारा प्रदेश में उद्योगों के विकास और विस्तार के प्रयासों के लिए सरकार की सराहना की। समारोह के दौरान अध्यक्ष  दीपक शर्मा के कार्यकाल और उपलब्धियों पर आधारित वीडियो का प्रसारण किया गया। इस अवसर पर फेडरेशन के सदस्य और आमजन उपस्थित रहें।  

सरकारी भवनों में सोलर क्रांति की तैयारी: मंत्री शुक्ला बोले- RESCO मॉडल पर बढ़े जागरूकता अभियान

सौर ऊर्जा अपनाएं, भविष्य बचाएं शासकीय भवनों में रेस्को मॉडल से सोलर पैनल लगाने के लिए जागरूकता जरूरी : मंत्री शुक्ला जिला पंचायत भोपाल में शासकीय संस्थाओं और रेस्को विकासक इकाइयों के मध्य हुए विद्युत क्रय अनुबंध भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निरंतर ईंधन (फ्यूल) और ऊर्जा बचाने का आहवान किया गया है। हमें दृढ़ संकल्प के साथ इस दिशा में काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप शासन और प्रशासन को एक साथ मिलकर ग्रीन एनर्जी की ओर शिफ्ट होना होगा। मंत्री शुक्ला मंगलवार को जिला पंचायत कार्यालय के सभाकक्ष में प्रदेश के विभिन्न विभागों के शासकीय भवनों में सोलर रूफ़टॉप संयंत्र स्थापना के लिये शासकीय संस्थाओं व रेस्को विकासक इकाइयों के मध्य विद्युत क्रय अनुबंध निष्पादन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मंत्री शुक्ला ने लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि हमारी 50 प्रतिशत ऊर्जा खपत नवकरणीय ऊर्जा से होनी चाहिए और मध्यप्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आमजनों में जागरूकता लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आने वाले समय में हर घर की छत पर सोलर पैनल नजर आने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिये कि कि रेस्को पद्धति के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों में समय पर भुगतान एवं उचित मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाएं। रेस्को एक महत्वपूर्ण बचत योजना अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने कहा कि रेस्को योजना शून्य निवेश, पहले दिन से बचत और नेट जीरो की ओर बढ़ने का एक सशक्त माध्यम है। यह शासन के लिए एक महत्वपूर्ण बचत योजना है। उन्होंने कहा कि यह एक साझेदारी का प्रोजेक्ट है, इसलिए सभी संबंधित विभागों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए। आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे ही कार्यक्रम प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित किए जाएंगे। समय पर भुगतान पर मिलेगी छूट प्रबंध संचालक अमनबीर सिंह बैंस ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि रेस्को पद्धति से 3.78 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली जनरेट होगी। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को तत्परता से बेहतर प्रबंध कर कार्य करने के निर्देश दिए। एमडी बैंस ने बताया कि बिजली बिलों का भुगतान 3 से 10 तारीख के बीच करने पर भुगतान राशि में 1 प्रतिशत की छूट का प्रावधान है, जबकि देरी से भुगतान करने पर 1.5 प्रतिशत की पेनल्टी लगाई जाएगी। शासकीय कार्यालय बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण में बनेंगे सहभागी योजना के सफल एवं दक्षतापूर्ण क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश निश्चित रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा। शासकीय कार्यालय इस मॉडल को अपनाकर न केवल आर्थिक बचत करेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अपना अहम योगदान देंगे। बैठक में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती इला तिवारी एवं जिला अधिकारी उपस्थित थे।  

प्रधानमंत्री के आहवान पर लग्जरी कार छोड़ इलेक्ट्रिक स्कूटी से मंत्रालय पहुंचे ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा डीजल , पेट्रोल की बचत करने के लिए वाहनों के कम से कम उपयोग के देशव्यापी आव्हान का असर अब मध्यप्रदेश में भी दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री के आहवान के बाद ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मंगलवार को इस पर अमल शुरू कर दिया है। ऊर्जा मंत्री  तोमर भोपाल में इलेक्ट्रिक दुपहिया वाहन से न केवल सड़कों पर घूमते नजर आए, बल्कि भोपाल स्थित अपने शासकीय बंगले सी-18 शिवाजी नगर से मंत्रालय भी इसी वाहन से पहुंचे। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि वह प्रधानमंत्री की अपील का स्वागत करते हैं और उनकी अपील का अनुसरण करते हुए इसका पालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह सभी से अपील करेंगे कि वह भी पेट्रोल डीजल का कम से कम इस्तेमाल करें और अत्याधिक आवश्यकता होने पर ही डीजल-पेट्रोल वाहनों का उपयोग करें। मंत्री  तोमर ने कहा कि इससे विदेशों पर हमारी निर्भरता कम होगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि अपनी विधानसभा में भ्रमण के दौरान भी वह इलैक्ट्रिक दोपहिया वाहन का ही इस्तेमाल करेंगे।  

आसमान से बरस रही आग: मध्यप्रदेश में दिन ही नहीं, रातें भी हुईं तपती; मौसम विभाग की चेतावनी

भोपाल मध्य प्रदेश में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम का असर खत्म होते ही प्रदेश में चिलचिलाती गर्मी की शुरुआत हो गई है. हालात यह हैं कि सोमवार को रतलाम में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जबकि मालवा-निमाड़ के कई जिले भी भीषण गर्मी और लू की गिरफ्त में आ चुके हैं. मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में हीट वेव का अलर्ट जारी किया है. वहीं दिन के साथ अब रातें भी गर्म होने लगी हैं, जिससे लोगों को चौबीस घंटे गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। रतलाम बना प्रदेश का सबसे गर्म शहर मध्य प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रतलाम में दर्ज किया गया, जहां पारा 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. यह सामान्य से करीब 5.7 डिग्री अधिक है. वहीं धार में भी तापमान 44.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया. जबकि इंदौर में 43.2 डिग्री, उज्जैन में 43.0 डिग्री, खरगोन में 42.6 डिग्री और खंडवा में 42.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राजस्थान की ओर से आने वाली गर्म हवाओं ने मालवा और निमाड़ क्षेत्र में तापमान तेजी से बढ़ा दिया है. यही कारण है कि दोपहर के समय सड़कें सूनी दिखाई दे रही हैं और लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। भोपाल में भी बढ़ी तपिश, रात की ठंडक गायब राजधानी भोपाल भी तेज गर्मी की चपेट में है. सोमवार को यहां अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री तक पहुंच गया. वहीं रात में भी गर्म हवाओं का असर महसूस किया जा रहा है. मौसम विभाग के अनुसार इस बार मई में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने से गर्मी का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है. पिछले कुछ वर्षों में मई में प्री-मानसून बारिश से राहत मिल जाती थी, लेकिन इस बार मौसम शुष्क बना हुआ है. ऐसे में राजधानी समेत कई शहरों में पुराने रिकार्ड टूटने की आशंका बढ़ गई है। पूर्वी जिलों में भी चढ़ रहा पारा मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार गर्मी अब सिर्फ पश्चिमी मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रही. पूर्वी और मध्य जिलों में भी तापमान तेजी से बढ़ रहा है. सागर में 41.4 डिग्री, नरसिंहपुर में 41.0 डिग्री, जबलपुर में 40.8 डिग्री और दमोह में 40.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. वहीं ग्वालियर में फिलहाल तापमान 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, लेकिन आने वाले दिनों में वहां भी लू चलने की संभावना जताई गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 72 घंटे प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी दौरान गर्मी अपने चरम पर पहुंच सकती है। 15 मई तक हीट वेव का अलर्ट मौसम केंद्र भोपाल ने 12 मई से कई जिलों में हीट वेव का येलो अलर्ट जारी किया है. रतलाम, धार, झाबुआ, उज्जैन, आगर-मालवा, राजगढ़ और शाजापुर समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में लू का असर सबसे अधिक रहने की संभावना है. मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मई तक दक्षिण-पश्चिम और मध्य मध्य प्रदेश में गर्म हवाओं का दौर जारी रहेगा. जिससे तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है। मध्य प्रदेश में इसलिए बढ़ रही गर्मी मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत की ओर खिसक चुका है. वहीं दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर एक ऊपरी वायु चक्रवातीय परिसंचरण बना हुआ है. इसके कारण राजस्थान और पश्चिमी इलाकों से गर्म और शुष्क हवाएं मध्य प्रदेश की ओर आ रही हैं. यही वजह है कि प्रदेश में लगातार तापमान बढ़ रहा है और लू की स्थिति बन रही है। इधर भीषण गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचने को कहा गया है. लगातार पानी, नींबू पानी और ओआरएस पीते रहने की सलाह दी गई है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो. मौसम विभाग ने स्पष्ट कहा है कि अगले कुछ दिन प्रदेशवासियों को तेज गर्मी और लू के लिए तैयार रहना होगा।