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अमरनाथ यात्रा 2026 रजिस्ट्रेशन के लिए सरल तरीका, 5 आसान स्टेप्स से करें रजिस्ट्रेशन

भोपाल  इस बार अमरनाथ यात्रा की शुरुआत तीन जुलाई से होगी। हिमालय की गुफा में विराजमान बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए भक्तों के अपार उत्साह है। इसके कारण 20 जुलाई तक की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फुल हो चुके हैं। कोई ओंकारेश्वर तो कोई खंडवा पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराने का प्रयास किया। इस बार तो हालात ये बने की ग्रुप के सभी सदस्यों को दर्शन के लिए एक समान तारीख तक नहीं मिल रही है। रजिस्ट्रेशन कराने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही है। लोग कैसे भी करके रजिस्ट्रेशन कराना चाह रहे है। 26 जुलाई तक फुल रजिस्ट्रेशन अमरनाथ यात्री मनोज शंखपाल व जयंत मुंशी ने बताया कि इस बार भक्तों में उत्साह ज्यादा है। बुरहानपुर से 3 हजार से अधिक भक्त इस बार यात्रा पर जा रहे हैं, जबकि यह आंकड़ा प्रति वर्ष 1500 के करीब रहता है। इस बार रजिस्ट्रेंशन संˆख्या अधिक हो गई। ऑनलाइन में बालटाल से 20 जुलाई और पहलगाम से 26 जुलाई तक फुल चल रहा है। हमने ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए 200 से अधिक भक्तों की डाक जšम्मू श्रीनगर श्राइन बोर्ड ऑफिस भेजी है। कई भक्त भी मनचाही तिथि के लिए जšम्मू या श्रीनगर पहुंचकर तत्काल पंजीयन का विकल्प चुन रहे हैं। पहलगाम और बालटाल के मार्ग से होने वाली इस यात्रा के लिए आएफआइडी कार्ड अनिवार्य है। कैसे कराएं अमरनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन तरीका: आप ऑनलाइन (वेबसाइट/ऐप) और ऑफलाइन (बैंक शाखाएं) दोनों तरीके से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। फीस: लगभग 150 से 220 प्रति व्यक्ति। जरूरी डॉक्यूमेंट्स : आधार कार्ड, वैध मेडिकल सर्टिफिकेट (CHC – अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र), और फोटो। ऐज लिमिट: 13 साल से कम और 70 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति, और 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को अनुमति नहीं है। यात्रा मार्ग: बालटाल (Baltal) और पहलगाम (Pahalgam)। ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन -SASB की वेबसाइट jksasb.nic.in पर जाएं। -'Online Services' > 'Register' पर क्लिक करें। -फॉर्म भरें, रूट और तारीख चुनें। -फोटो और मेडिकल सर्टिफिकेट अपलोड करें। -फीस का भुगतान करें और परमिट डाउनलोड करें। केदारनाथ यात्रा भी शुरू 12 ज्योतिर्लिंग में से एक केदारनाथ धाम व देश के चारधाम में शामिल बद्रीनाथ धाम के लिए भी उत्साह है। यहां पर गंगोत्री, यमुनोत्री के दर्शन का भी महत्व है। अक्षय तृतीय से यात्रा की शुरुआत हो गई। आंकड़े एक नजर में -15 अप्रेल से शुरू हुए रजिस्ट्रेशन -28 अगस्त को राखी पर होगा समापन -03 हजार के करीब संभावित यात्री जाएंगे अमरनाथ यात्रा पर

भोपाल मेट्रो के लिए 80 एकड़ जमीन की आवश्यकता, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को किया गया तेज

भोपाल   भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 80 एकड़ जमीन तुरंत चाहिए। इसके लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा तत्काल आदेश जारी करते हुए एक्सचेंज स्टेशन के लिए आरा मशीरों को शिफ्ट करने को कहा है। साथ ही भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रकरणों को तेजी से निराकृत करने के भी निर्देश दिए। धारा 19 के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने एमआइडीसी, वन एवं राजस्व विभाग केअधिकारियों को भी निर्देशित किया कि मेट्रो निर्माण से प्रभावित आरा मशीनो के स्थानांतरण की कार्रवाई जल्द पूरी करें। सभी एसडीएम को मिशन मोड में काम करने का कहा गया। उन्होंने चिन्हित भूमि का सीमांकन कर कंपनी को सौंपने के भी निर्देश दिए। जहां कहीं मेट्रो में भूमि संबंधी विवाद उत्पन्न हो, वहां प्रकरण को कलेक्टर के संज्ञान में लाकर उसका त्वरित समाधान कराने का कहा है। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर भूमि संबंधी कोई विवाद नहीं है, वहां मेट्रो कंपनी काम शुरू करे। ऑरेंज लाइन का चल रहा काम गौरतलब है कि भोपाल मेट्रो परियोजना के अंतर्गत ऑरेंज लाइन (प्रायोरिटी कॉरिडोर) सुभाष नगर से केन्द्रीय विद्यालय बोर्ड ऑफिस चौराहा होते हुए एम्स तक विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त ब्लू लाइन रूट भदभदा डिपो चौराहा, जवाहर चौक, रोशनपुरा, कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, लाल परेड मैदान, पुल बोगदा, प्रभात चौराहा, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, जेके रोड, इंद्रपुरी, पिपलानी और रत्नागिरी तिराहा तक प्रस्तावित है। बैठक में अपर कलेक्टर सुमित पांडे, मेट्रो मंडल प्रबंधक, नगर निगम के अपर आयुक्त सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं एसडीएम उपस्थित थे। 3.36 किमी की अंडरग्राउंड लाइन वहीं दूसरी ओर मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत 3.36 किमी लंबाई की अंडरग्राउंड लाइन बनाना तय है। ऐशबाग से डीआइजी बंगला, सिंधी कॉलोनी तक भोपाल स्टेशन व नादरा बस स्टैंड होते हुए काम होगा। इसे पूरा करने शुरुआत में तीन से चार माह का लक्ष्य तय किया था। इसके लिए तीन मशीनों से काम शुरू करना था, लेकिन अभी एक मशीन ही उतारी गई। दो अन्य उतारनी बाकी है। इस कॉरिडोर में दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जिनकी लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। टीबीएम से बनी सुरंग 3.39 किमी तक जाएगी। इसके बाद बड़ा बाग के पास नादरा स्टेशन के आगे 143 मीटर स्लोप के जरिए मेट्रो फिर जमीन के ऊपर आ जाएगी। तेज होगा काम प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर्स के अनुसार, जून से मानसूनी हलचल शुरू होने के बाद गहराई में काम करना कठिन होगा। इस दौरान अन्य काम पूरे किए जाएंगे। टनल का काम फिर अक्टूबर से ही शुरू होगा। यानी तीन माह में पूरा होने वाला काम 8 से 9 माह में पूरा होगा।

किराए के मकान में रहने के लिए बतानी होगी वजह, 2027 की जनगणना में गड़बड़ी करने वालों के लिए नया प्रावधान

भोपाल  भोपाल में जनगणना 2027 के तहत अभी पंद्रह दिन स्वगणना की प्रक्रिया की जा रही है। एक मई से हर घर पहुंचकर मकान सूचीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण किराएदारों की डिटेल जुटाना है। किराए के मकान में रहने की वजह भी पूछी जाएगी। किराएदार किस तरह के घर में रह रहे हैं, फार्म में इसकी जानकारी देनी होगी। किराए के मकान के नाम पर गड़बड़ी करनेवालों के लिए जनगणना 2027 में यह बड़ा प्रावधान किया गया है। स्वगणना के साथ ही एक मई से शुरू होने वाली प्रगणकों द्वारा गणना में कोई गलत जानकारी दी तो जुर्माने के साथ सजा भी हो सकती है। प्रशासन के सामने किराएदारों की वास्तविक डिटेल निकालना बड़ी चुनौती है। इसलिए प्रगणकों को किराएदारी वाले मकान को लेकर विशेष सतर्कता के साथ काम करने के लिए कहा गया है। इस बीच स्व गणना की गति बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है। प्रशासन की ओर से इसके लिए लोगों को जागरूक करने का कहा गया है। उन किराएदारों की अलग से लिस्टिंग होगी, जिनके पास खुद का मकान : मकान सूचीकरण के तहत उन किराएदारों की अलग से लिस्टिंग होगी, जिनके पास शहर में या अन्य कहीं खुद का मकान है और वे यहां किराए से रह रहे हैं। इसकी वजह भी पूछी जाएगी। आगामी समय में इस तरह की स्थितियों को लेकर सरकार कोई योजना बना सकती है। खुद का मकान होने के बाद भी लोग किराए से रह रहे हैं तो कारण पता लगाए जाएंगे। प्रशासन को आशंका, परिवार का घर, किराएदार न दर्ज करवा दें: प्रशासन को ये आशंका है कि एक ही घर में कई परिवार रह रहे हों, वहां कुछ खुद को किराएदार के तौर पर दर्ज न करवा दें। सरकार की आवासीय योजनाओं का लाभ लेने की मंशा इसमें शामिल हो सकता है। ऐसे में अतिरिक्त पूछताछ करने के लिए कहा जा रहा है। प्रशासन की ओर से स्व गणना की गति बढ़ाने के लिए भी लोगों को जागरूक करने का कहा प्रशासन की ओर से स्व गणना की गति बढ़ाने के लिए भी लोगों को जागरूक करने का कहा जा रहा है। अभी स्वगणना में भोपाल प्रदेशभर में तीसरे नंबर पर है। अब भी प्रगणकों के साथ सुपरवाइजर्स को लगातार अपडेट देकर जनगणना के तौर तरीकों के बारे में बताया जा रहा उप जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता बताते हैंं कि जनगणना 2027 को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। अब भी प्रगणकों के साथ सुपरवाइजर्स को लगातार अपडेट देकर जनगणना के तौर तरीकों के बारे में बताया जा रहा है।

एमपी में दुकानों का डिजिटल वेरिफिकेशन, हॉकर्स कॉर्नर की जियो टैगिंग से खाद्य लाइसेंस मिलेगा

भोपाल  एमपी में अब दुकानों का डिजिटल वेरिफिकेशन होगा। सड़क किनारे से लेकर हॉकर्स कॉर्नर व बड़े भवनों में खानपान की दुकानों की जियो टैगिंग होगी। उसके बाद ही खाद्य लाइसेंस मिल पाएगा। खाद्य एवं सुरक्षा ने नए नियम लागू किए हैं जिसकी भोपाल जिले में शुरुआत हो रही है। इसमें मौके पर मौजूद दुकान का ही लाइसेंस मिल पाएगा। दुकानदार को भी लाइसेंस के लिए कार्यालयों में भटकना नहीं होगा। प्रशासन को पता होगा कि जिले में किस लोकेशन पर किस तरह की दुकान है, जिससे दुकानों की निगरानी मजबूत होगी। एक क्लिक में फूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड के पोर्टल से डिटेल मिल जाएगी। ऐसे समझें स्थिति: खाद्य प्रतिष्ठान के डिजिटल सत्यापन और जियो- टैगिंग का सीधा मतलब तकनीक के जरिए आपकी दुकान या फैक्ट्री की लोकेशन और अस्तित्व को सुनिश्चित करना है। जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी आपके प्रतिष्ठान का निरीक्षण करेंगे, तो वे ऐप से दुकान की फोटो खींचेंगे। उसके साथ जगह की सटीक लोकेशन अपने आप सिस्टम में सेव हो जाएगी। ऐसे मिलेगा लाभ पहले कई बार लोग कागजों पर दुकान दिखाकर लाइसेंस ले लेते थे, जबकि मौके पर कोई दुकान होती ही नहीं थी। जियो- टैगिंग से यह सुनिश्चित होगा कि लाइसेंस उसी पते के लिए दिया गया है, जहां वास्तव में काम हो रहा है। इससे यह साबित होगा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी वास्तव में आपकी दुकान पर जांच के लिए पहुंचा था, क्योंकि ऐप तभी काम करेगा, जब अधिकारी उस लोकेशन के आसपास होगा। सरकार के पास एक डिजिटल मैप तैयार होगा कि शहर के किस इलाके में कितने रेस्टोरेंट, डेयरी या राशन की दुकानें हैं। आपको भौतिक रूप से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होती, सब कुछ स्कैन करके अपलोड होता है। आधार कार्ड के जरिए व्यापारी का डिजिटल सत्यापन किया जाता है। खाद्य सुरक्षा को डिजिटली व हाईटेक तौर तरीकों से बेहतर करने की कोशिश भोपाल के खाद्य सुरक्षा विभाग के जिला अधिकारी पंकज श्रीवास्तव बताते हैं कि खाद्य सुरक्षा को डिजिटली व हाईटेक तौर तरीकों से बेहतर करने की कोशिश है। इसके लिए लगातार काम किया जा रहा है। ऐप भी तभी काम करेगा जब विभागीय अधिकारी दुकान के आसपास होगा खाद्य सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस कदम से दुकानों के नाम पर होता फर्जीवाड़ा रुक जाएगा। बिना दुकान के भी लाइसेंस ले लेेने पर अंकुश लगेगा, जियो- टैगिंग से हर हाल में केवल वास्तविक दुकानदारों को ही लाइसेंस मिल सकेगा। पहले पते में दिए मौके पर कई बार कोई दुकान ही नहीं होती थी। अब दुकान के पते पर उपस्थित होने पर ही लाइसेंस सुनिश्चित होगा। ऐप भी तभी काम करेगा जब विभागीय अधिकारी दुकान के आसपास होगा।

ग्वालियर में प्रमुख नदियों पर पुलों का जाल बिछेगा, 5 जिलों के प्रस्तावों को मंजूरी मिली

ग्वालियर  मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियों पर पुलों का जाल बिछाया जाएगा। इनपर 18 से ज्यादा जलमग्नीय पुलों का प्लान तैयार किया गया है। इससे बारिश में टापू बनने वाले गांवों को राहत मिलेगी। लोक निर्माण विभाग (सेतु संभाग) ने ग्वालियर चंबल संभाग की प्रमुख नदियों- सांख, क्वारी, सिंध और पार्वती पर जलमग्नीय (सबमर्सिबल) पुलों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने की योजना बनाई है। यह कदम न केवल बारिश में कट जाने वाले गांवों को मुख्य सडकों से जोड़ेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगा। ग्वालियर जिले के तीन प्रमुख पुलों के साथ संभाग के भिण्ड, मुरैना, श्योपुर और शिवपुरी जिलों के प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं, जिनमें से कई को हरी झंडी मिल गई है। ग्वालियर- चंबल संभाग के ग्रामीण अंचलों में मानसून के दौरान मौत के सफर की तस्वीरें अब जल्द ही इतिहास बनने वाली हैं। योजना के तहत ग्वालियर में तीन पुलों पर काम शुरू हो गया है बोरिंग पूरी हो गई है। जिले में आवागमन को सुगम बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर काम की स्पीड तेज हो गई है। मोतीझील- तिघरा कैनाल रोड से मेहंदपुर मार्ग के बीच सांख नदी पर 950 लाख रुपए की लागत से बनने वाला पुल सबसे अहम है। वर्तमान स्थिति: सांख नदी के साथ मोहना-उम्मेदगढ़ और घाटीगांव- जखोदा मार्ग पर प्रस्तावित पुलों के लिए बोङ्क्षरग का काम पूरा हो चुका है। जीएडी तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को भेज दी गई है। जल्द ही इनका टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण शुरू होगा। मुरैना और भिण्ड: कवारी नदी पर सबसे बड़ा दांव… मुरैना जिले में क्वारी नदी पर सबसे महंगे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। यहां 2235 लाख की लागत से कटेलापुरा- दोहाटी मार्ग और 2583 लाख की लागत से इटौरा सुजरमा मार्ग पर पुल बनने हैं। भिण्ड के कचोगरा में भी 1915 लाख का पुल प्रशासकीय स्वीकृति के अंतिम चरण में है। ये पुल मुरैना और भिण्ड के दूरस्थ अंचलों को जिला मुख्यालयों से सालभर जोड़कर रखेंगे। शिवपुरी और श्योपुर: सिंध- पार्वती पर उम्मीदों का सेतु… संभाग में सबसे अधिक पुलों की सूची शिवपुरी जिले से है। यहां सिंध नदी पर मगरौनी-नरवर के बीच 3591 लाख और मिहाबरा-दोनी के बीच 2177 लाख के पुल बजट में शामिल हैं। वहीं, श्योपुर में पार्वती नदी पर 6400 लाख का विशाल पुल प्रस्तावित है, जिसका डिजाइन फाइनल हो चुका है। सेतु संभाग (लोक निर्माण विभाग) के कार्यपालन यंत्री जोगेंदर सिंह यादव के अनुसार ग्वालियर के तीन पुलों सहित संभाग भर के पुलों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। कुछ प्रोजेक्ट टेंडर प्रक्रिया में हैं, जबकि कुछ का तकनीकी मूल्यांकन जारी है। एक से दो महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य है। क्या होते हैं जलमग्नीय पुल ये पुल सामान्य ऊंचे पुलों की तुलना में कम लागत वाले होते हैं। मानसून में अत्यधिक बाढ़ आने पर ये पानी में डूब जाते हैं, लेकिन इनका स्ट्रक्चर इस तरह डिजाइन होता है कि पानी उतरते ही ये पुन: यातायात के लिए सुरक्षित हो जाते हैं। संभाग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ये सबसे प्रभावी विकल्प माने जा रहे हैं। हर साल की नाव वाली कहानी पर लगेगा विराम : हर साल बारिश में ग्वालियर-चंबल की नदियां उफान पर होती हैं, जिससे दर्जनों गांव संपर्क विहीन हो जाते हैं। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव या ट्रैक्टर से नदी पार करते हैं। समय पर इलाज न मिलने से कई बार हादसे भी होते हैं। सेतु संभाग की इस योजना से नई उम्मीद जगी है।

मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र 27 अप्रैल को, नारीशक्ति वंदन बिल पर गरमाएगी बहस

भोपाल मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को होगा। मंगलवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस दिन नारीशक्ति वंदन विधेयक पर चर्चा होगी।मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र 27 अप्रैल को बुलाया गया है। राज्यपाल ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस विशेष सत्र को आमंत्रित किया है। नारीशक्ति वंदन अधिनयम पर यह एक दिवसीय सत्र बुलाया गया है। इसमें सभी सदस्यों को उपस्थित होने के लिए आमंत्रित किया गया है। सभी विधायक इस दिन राजधानी भोपाल में जुटेंगे। विधानसभा सचिवालय की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। इससे पहले सीएम मोहन यादव ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस कर विशेष सत्र बुलाए जाने की जानकारी दी थी। मोहन यादव ने कहा था कि महिलाओं से जुड़े इस अहम विषय पर विधानसभा में विस्तार से चर्चा की जाएगी। इससे पहले रविवार को सीएम मोहन यादव ने बीजेपी कार्यालय में मीडिया से कहा था कि लोकतंत्र एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है और संसद में जो घटनाक्रम हुआ, वह बेहद निंदनीय और कष्टकारी है। गौरतलब है कि महिला आरक्षण बिल को लेकर आए इस विधेयक को संविधान का 131वां संशोधन बिल था, जिसे मोदी सरकार पास नहीं करा पाई। दो पालियों में होगी बहस विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सदन की कार्यवाही दो पालियों में होगी। पहली पाली सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और दूसरी दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक चलेगी। सदस्यों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे संसदीय मर्यादा बनाए रखें और विचाराधीन मामलों पर टिप्पणी करने से बचें। सीएम मोहन का प्रियंका गांधी पर सीधा वार सत्र से पहले भाजपा ने भोपाल में जन आक्रोश रैली के जरिए अपनी ताकत दिखाई। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका था, तब कांग्रेस ने इसका मजाक उड़ाया था। उन्होंने प्रियंका गांधी के 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' नारे पर तंज कसते हुए पूछा कि आज जब महिलाओं के हक की बात हो रही है, तो वह चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? जन आक्रोश रैली मे साधा था निशाना इससे पहले सोमवार को भोपाल में भाजपा की ओर से नारी शक्ति वंदन बिल के समर्थन में आक्रोश रैली निकाली गई थी। इस रैली के जरिए पार्टी ने महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में अपनी बात रखी थी। जन आक्रोश रैली में सीएम मोहन यादव ने कहा था कि महिला आरक्षण बिल न पास होने पर कांग्रेस ने उसका मजाक उड़ाया। सीएम ने कांग्रेस पर भी हमला बोला। प्रियंका गांधी वॉड्रा के बयान पर कहा कि उन्हें शर्म आनी चाहिए। प्रियंका बड़ी-बड़ी बातें करती थीं, कहती थीं मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं। अब उनकी ये बड़ी-बड़ी बातें कहा गईं। जब बहनों के अधिकारों का उन्होंने गला घोट दिया गया। कांग्रेस भी हुई हमलावर इधर नारीशक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक गिरने के बाद भाजपा एक तरफ कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए उसे महिला विरोधी बता रही है। वहीं कांग्रेस भी हमलावर हो गई है। एमपी कांग्रेस ने मंगलवार को दोपहर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम की आड़ में परिसीमन के लिए संशोधन बिल लाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा और दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष पुष्पासिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हमारी मांग है कि भाजपा अभी इस महिला आरक्षण को लागू करे। 543 सीटों पर ही अभी महिला आरक्षण बिल को लागू किया जाए और जब यह जनगणना पूरी हो जाए तब परिसीमन किया जाए। कांग्रेस का पलटवार दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे बीजेपी का चुनावी हथकंडा करार दिया है। महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा और पुष्पा सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि बीजेपी नारी शक्ति वंदन अधिनियम की आड़ में जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस की मांग है कि परिसीमन और जनगणना का इंतजार किए बिना सभी 543 लोकसभा सीटों पर तत्काल महिला आरक्षण लागू किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आह्वान: जल संरक्षण में सभी को जोड़ें, हर किसी की हो सहभागिता

जल संरक्षण में सभी की सहभागिता हो, सबको जोड़ें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पानी बचाने में मध्यप्रदेश है देश में तीसरे स्थान पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से की चर्चा सरकार की उपलब्धियों की दी जानकारी भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जल बचाने में समाज की भागीदारी जरूरी है, इसीलिये प्रदेश में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' चलाया जा रहा है। इस अभियान से सब जुड़े, सभी अपना सहयोग दें, हम सबको मिल-जुलकर यह करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पानी बचाना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। हम सालों से इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के जरिए जल संरक्षण को जल आंदोलन का रुप दिया जा रहा है। यह अभियान की सफलता ही है कि हमारा मध्यप्रदेश जल संचयन के मामले में नेशनल रैंकिंग में तीसरे स्थान पर आया है। प्रदेश में जल संरक्षण के लिए लगभग 6 हजार 278 करोड़ का वित्तीय लक्ष्य तय किया गया है। विभिन्न श्रेणियों के कुल 2.44 लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य चिन्हित कर करीब 6 हजार 236 करोड़ रुपये की लागत से जल विकास-निकास एवं विस्तार कार्य कराये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से अनौपचारिक चर्चा में यह जानकारी देकर सभी को अपने प्रभार के जिलों में इस अभियान की नियमित समीक्षा करने तथा जल संचायन के लिए आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह में राज्य सरकार को मिली विशेष उपलब्धियों की जानकारी भी दी। स्कूल शिक्षा में 15 अप्रैल को आया पिछले 16 साल का सर्वश्रेष्ठ परिणाम – बेटियां रहीं अव्वल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 15 अप्रैल को मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा ली गई कक्षा 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम घोषित हुआ। हमेशा की तरह इस बार भी होनहार बेटियां अव्वल रहीं। हमारी बेटियों को बेटों से 10 प्रतिशत अधिक सफलता मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि इस बार के परिणाम पिछले 16 सालों के बोर्ड परीक्षा परिणामों में सर्वश्रेष्ठ रहे। यह हमारी सरकार द्वारा शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए किए जा रहे नवाचारों और सांदीपनि विद्यालयों की सफलता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में असफल विद्यार्थियों को 'रुक जाना नहीं परीक्षा योजना' के तहत 'द्वितीय परीक्षा अवसर' भी दिया जा रहा है। द्वितीय अवसर की परीक्षाएं 7 से 25 मई तक आयोजित होंगी। एक साल में दो परीक्षाएं आयोजित कर मध्यप्रदेश सरकार ने बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों को बहुत बड़ी राहत दी है। अमरकंटक को "नो मूवमेंट-नो कंस्ट्रक्शन जोन" बनाने की आवश्यकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि नर्मदा माता के उद्गम स्थल अमरकंटक को धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 13 अप्रैल को अमरकंटक में ही नर्मदा समग्र मिशन की बैठक हुई। उन्होंने कहा कि यह मनोरम स्थल प्रकृति की गोद में आध्यात्मिक शांति पाने का उत्तम केंद्र है। हम इस स्थल के विकास के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं। अमरकंटक को 'नो मूवमेंट एवं नो कंस्ट्रक्शन जोन' निर्धारित करने की आवश्यकता है, जिससे यहां सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि हम अमरकंटक का इकोलॉजिकल बैलेंस मेंटेन रखने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि मोक्षदायिनी (पापनाशिनी) नर्मदा माता की शुचिता और पवित्रता अक्षय बनी रहे। संकल्प से समाधान अभियान – 99.90 प्रतिशत आवेदनों का हुआ निराकरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में इसी साल 12 जनवरी से 31 मार्च तक संकल्प से समाधान अभियान चलाया गया। अभियान में सरकार को 45.69 लाख से अधिक आवेदन मिले। इनमें से 47.68 लाख प्रकरणों का समाधान करते हुए 99.90 प्रतिशत आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभियान नागरिकों की समस्याओं के समाधान और उनकी जरूरतों की पूर्ति की दिशा में बेहद अच्छा प्रयास साबित हुआ। इसने प्रदेश में पारदर्शी, जवाबदेह एवं जनोन्मुखी प्रशासन को और मजबूत किया है। 21 प्रतिशत से अधिक आबादी के समग्र विकास की पूरी चिंता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 16 अप्रैल को राज्यस्तरीय जनजातीय उपयोजना कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला प्रदेश की 21 प्रतिशत से अधिक आबादी (जनजातीय वर्ग) के समग्र विकास और कल्याण की नई रुपरेखा बनाने का महत्वपूर्ण प्लेटफार्म साबित हुई। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूरी चिंता के साथ जनजातीय वर्ग के हितों की सुरक्षा के लिए समुचित वित्त व्यवस्थापन एवं प्रबंधन किए हैं। ओरछा-चंदेरी के लिए शुरू हुई पीएमहेली पर्यटन सेवा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 19 अप्रैल को भोपाल-ओरछा और चंदेरी सेक्टर के लिए पीएमहेली पर्यटन सेवा का शुभारंभ किया गया। हमारे एविएशन सेक्टर से महाराष्ट्र सहित कई राज्य प्रेरणा ले रहे हैं। इससे न केवल पर्यटन का विकास होगा बल्कि आर्थिक एवं रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। हेलीकॉप्टर का किराया, टैक्सी का शुल्क 1150 रुपए और दर्शन एवं प्रसाद के लिए 350 रुपए का भुगतान करना होगा। यात्रा के लिए 6 सीटों वाले आधुनिक हेलीकॉप्टर का उपयोग किया ज रहा है। दिव्य स्वरूप में विकसित होगी भगवान परशुराम की जन्मस्थली- जानापाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में परशुराम जयंती धूमधाम से मनाई गई। भगवान परशुराम का जीवन आस्था, श्रद्धा और धर्म की स्थापना के लिये समर्पण का अनुपम उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि भगवान परशुराम की जन्म-स्थली जानापाव में 17.41 करोड़ रुपए की लागत से परशुराम-श्रीकृष्ण लोक विकसित किया जायेगा, जो भगवान परशुराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाला एक प्रमुख आध्यात्मिक सांस्कृतिक और पर्यटन का केन्द्र बनेगा। जानापाव में प्रस्तावित लोक में पौराणिक महत्व को दर्शाने वाला एक भव्य संग्रहालय बनाया जाएगा, जिसमें शस्त्र दीर्घा, उत्पत्ति दीर्घा स्वरूप दीर्घा, संतुलन दीर्घा और ध्यान दीर्घा के माध्यम से भगवान परशुराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विविध आयामों को प्रस्तुत किया जाएगा। जनगणना शुरु : 30 अप्रैल तक चलेगा स्व-गणना कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रिगण को बताया कि जनगणना देश के विकास की नींव है। जनगणना केवल आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य की दिशा देने का महत्वपूर्ण कदम है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि जनगणना में वह सही, सटीक और पूर्ण जानकारी दे। … Read more

बागेश्वर बाबा का लेंसकार्ट पर पलटवार: नक्कटा, लाहौर में खोल अपनी कंपनी, सुधर जाओ बेटा

छतरपुर  प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमंत कथा के दौरान लेंसकार्ट कंपनी को चेतावनी दी। कथा 21 से 23 अप्रैल तक चल रही है।पहले दिन न्होंने कंपनी के कथित 'ड्रेस कोड' पर यह बयान दिया। विवाद कंपनी द्वारा तिलक, सिंदूर और मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीकों पर पाबंदी के दावे से जुड़ा है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि "एक कंपनी है उसका नाम लेंसकार्ट है, उसने बोला है अपनी कंपनी के वर्करों को कि हमारे यहां कोई तिलक लगा के नहीं आ सकता, मंगलसूत्र पहन के नहीं आ सकता, सिंदूर लगा के नहीं आ सकता…। धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा- ठटरी के बरे! नक्कटा! तू अपनी कंपनी लाहौर में खोल ले, भारत में काहे को मर रहा है? आगि के लगे! तेरो कक्का को भारत है का? हां! हमारे तो बाप का भारत है। हां! जिनको तिलक से, चंदन से, वंदन से, राम से, श्याम से, हनुमान से, बाबा बागेश्वर से दिक्कत हो, वो पतली गली लाहौर खिसक लें। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- इसीलिए हम एक बात हिन्दुओं से कहे, कथा शुरू करने के पहले। आज उन्होंने तुम्हारे मंगलसूत्र पर उंगली उठाई, तिलक पर उंगली उठाई, कल तुम्हारी बिरादरी पर उंगली उठाएंगे, तुम्हारे सनातन पर उंगली उठाएंगे, तुम्हारे बच्चों पर उंगली उठाएंगे। यदि हम एकजुट नहीं होंगे, तो वो कल हमारी गीता-रामायण पर भी उंगलियां उठाएंगे। इसलिए हम सबको संगम से एक बात सीखनी है। जैसे संगम में तीन नदियां मिलकर महासंगम बनता है, ऐसे ही हम सब जातियों को छोड़कर हिन्दू होकर एकता का परिचय दें।" तिलक-कलावा पर रोक, हिजाब-पगड़ी को अनुमति मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ। इसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इसी कथित भेदभाव को लेकर विवाद बढ़ा। एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने X (ट्विटर) पर स्क्रीनशॉट साझा कर कंपनी से सवाल किया कि जब हिजाब की अनुमति है, तो बिंदी और कलावा पर रोक क्यों। इसके बाद यह मुद्दा वायरल हुआ और कंपनी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। लेंसकार्ट शोरूम में कर्मचारियों को तिलक लगाया और मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधा। कंपनी की सफाई- सभी धर्मों का सम्मान करते हैं विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के CEO पीयूष बंसल ने कहा कि लेंसकार्ट सभी धर्मों का सम्मान करता है। कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी आजादी है। हालांकि, विरोध कर रहे संगठन इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं। आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।

केंद्र सरकार से मिलेगा 10 करोड़ रुपये, महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थलों को बनाएंगे भयमुक्त और सुविधायुक्त

सार्वजनिक स्थलों को बनायेंगे महिलाओं के लिये भयमुक्त और सुविधायुक्त,केंद्र सरकार से मिलेंगे 10 करोड़ रुपये देश की 10 चयनित 10 "सेफ सिटीज" में धार शामिल भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 के लिए देश भर के 10 प्रमुख शहरों को 'सेफ सिटीज' परियोजना के अंतर्गत चयनित किया गया है, जिसमें मध्यप्रदेश से ऐतिहासिक नगरी धार को शामिल किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्त पोषित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए धार जिले को 10 करोड़ रुपये की राशि आवंटित किए जाने का प्रावधान किया गया है। देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए वर्ष 2013 में 'निर्भया फंड' की स्थापना की गई थी, जिसके बाद वर्ष 2015 में 'स्मार्ट सिटी मिशन' के माध्यम से शहरी विकास और सुरक्षा के मानकों को नया आयाम दिया गया। धार जिले में यह परियोजना न्यूनतम 05 वर्षों के लिए क्रियान्वित की जाएगी। इस योजना का मुख्य केंद्र बिंदु सार्वजनिक स्थानों को महिलाओं के लिए पूरी तरह भयमुक्त और सुविधायुक्त बनाना है। परियोजना के अंतर्गत धार शहर में समुचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी और संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएगें। स्वास्थ्य सेवाओं को महिला अनुकूल बनाने के लिए जिला अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में महिलाओं एवं उनके परिजनों के लिए विशेष वेटिंग एरिया का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों पर 'पिंक टॉयलेट' का निर्माण और पर्यटन स्थलों पर महिला अनुकूल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इस परियोजना का अभिन्न हिस्सा है। भौतिक संसाधनों के साथ-साथ यह योजना महिलाओं के मानसिक और सामाजिक सशक्तिकरण पर भी बल देती है। इसके तहत जिले में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों का संचालन किया जाएगा, जिससे महिला सुरक्षा के प्रति समाज में संवेदनशीलता बढ़े। धार के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को देखते हुए, यहाँ आने वाली महिला पर्यटकों के लिए विशेष सुविधाओं का विकास जिले की वैश्विक छवि को और अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा इस परियोजना के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इससे आगामी वर्षों में धार जिला महिला सुरक्षा के मामले में एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर सके।  

इंदौर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन का नया कदम, ई रिक्शा पर लगाए जाएंगे रंग-बिरंगे स्टीकर और रूट तय होंगे

इंदौर  देश के विभिन्न शहरों में बेतरतीब तरीके से दौड़ रहे ई-रिक्शा को इंदौर में पहली बार सेक्टर आधारित सिस्टम से चलाया जाएगा. इस सिस्टम के तहत सभी रिक्शा के लिए कलर कोड, रूट नंबर और रूट सिस्टम लागू किया गया है. यह सिस्टम क्या है और इसे कैसे व्यस्ततम सड़कों पर सैकड़ों की तादात में होने वाले रिक्शों से मुक्ति मिलेगी. आखिर कैसे शहर के सभी रूटों पर अलग-अलग रंग के हिसाब से ई रिक्शा शिफ्ट हो जाएंगे. एक दूसरे के इलाके और रूट पर अतिक्रमण करने से क्या सजा मिलेगी, और कैसे इन रिक्शों की निगरानी होगी।  ट्रैफिक की समस्या बढ़ा रहे ई रिक्शा दरअसल, महंगे होते पेट्रोल-डीजल और ई व्हीकल के युग में फिलहाल ई रिक्शा ही अब महानगरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सबसे सस्ती सवारी है. यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और लखनऊ समेत दक्षिण भारत के तमाम शहरों में मुख्य सड़कों पर सबसे बड़ी संख्या में ई-रिक्शा ही नजर आते हैं. हालांकि ई रिक्शा की बढ़ती संख्या ने अब सड़कों पर ट्रैफिक की समस्या को और विकराल बना दिया है, जो बीते कुछ सालों में कई दुर्घटनाओं की वजह बने हैं।  राजवाड़ा में प्रतिबंधित ई रिक्शा मूवमेंट मध्य प्रदेश में सर्वाधिक जनसंख्या वाले इंदौर शहर में पहले से ही बिगड़े हुए ट्रैफिक और सीमित सकरी सड़कों के बीच 10 से 15000 ई रिक्शा यहां के ट्रैफिक के लिए चुनौती बने हुए हैं. इनके लिए न तो कोई निश्चित रूट तय है, न कोई रिक्शा स्टॉप या फिर सवारी बिठाने का कोई नियम कायदा. नतीजतन शहर के मुख्य व्यापारिक केंद्र राजवाड़ा, जवाहर मार्ग और आसपास के अन्य इलाकों में आए दिन रिक्शों की इतनी मारामारी होती थी कि अन्य वाहनों का इलाके की सड़कों से गुजरना मुश्किल था. यही वजह रही कि इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने सबसे पहले ई-रिक्शा के मूवमेंट को शहर के राजवाड़ा और आसपास के इलाकों में प्रतिबंधित किया।  4 जोन में चलेंगे ई रिक्शा, सभी का रूट तय इसके बाद इन्हें शहर के निश्चित रूट पर बराबर-बराबर संख्या में चलाने का फैसला किया गया. जिससे कि शहर की सड़कों से ई-रिक्शा का ट्रैफिक समानांतर रूप से अन्य रूट पर डाइवर्ट हो सके. इतना ही नहीं रिक्शा चालकों को भी अपने तय रूट पर प्रतिदिन की कमाई के हिसाब से सवारी भी मिल सके. इस योजना को अमल में लाने के लिये रिक्शा चालक संघ और ट्रैफिक पुलिस की कई दौर की चर्चा का परिणाम यह निकला कि शहर में सभी ई रिक्शा अपने-अपने इलाके के तय किये गए 4 जोन में चलेंगे. पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशा के अनुसार इन चार जोन में शहर के अलग-अलग चार हिस्से शामिल रहेंगे।  हर रिक्शा पर अलग चार रंग के स्टीकर ट्रैफिक डीसीपी राजेश त्रिपाठी बताते हैं कि "शहर में ई रिक्शा चलाने के लिए 4 जोन को अलग-अलग कलर में बांटा गया है. जिसमें जोन क्रमांक एक में चलने वाले रिक्शा पर नीला स्टीकर, 2 पर पीला स्टीकर, 3 पर लाल स्टीकर और जोन क्रमांक 4 पर सफेद कलर का स्टीकर उपयोग में लाया जाएगा. यह स्टीकर शहर के ट्रैफिक थानों में किए जा रहे ऑटो रिक्शा के पंजीयन के दौरान रिक्शा पर ट्रैफिक पुलिस की ओर से लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा इन्हें रूट भी दिया जा रहा है।  पहले दौर में 6000 रिक्शा का पंजीयन इंदौर शहर में करीब 15000 ई रिक्शा मौजूद हैं. इनमें से 4000 से 5000 ई रिक्शा ऐसे हैं, जो आरटीओ अथवा पुलिस के पास पंजीकृत न होने के कारण अवैध रूप से निजी तौर पर चल रहे हैं. ऐसे रिक्शा चालकों के खिलाफ अब चालानी कार्रवाई होगी. इसके अलावा फिलहाल 6000 रिक्शा ऐसे हैं. जिन पर 4 रंगों के स्टिकर लगाकर उन्हें उनके रूट पर चलने के निर्देश दिए गए हैं।  अपराध से मिलेगी मुक्ति इस सिस्टम के जरिए न केवल पुलिस के पास ई रिक्शा की तमाम जानकारी, उसके मालिक अथवा ड्राइवर की जानकारी होगी, बल्कि यह जानकारी एक ऐप के माध्यम से ट्रैफिक पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज रहेगी. यदि किसी रिक्शा में यात्रा के दौरान कोई घटना होती है, तो यात्री को उस रिक्शा का नंबर या कलर कोड को ट्रैफिक पुलिस की हेल्पलाइन पर बताना होगा. जिससे पुलिस संबंधित ई-रिक्शा के चालक अथवा मलिक की पहचान कर उस पर तत्काल कार्रवाई कर सकेगी, ऐसी स्थिति में यात्रियों को भी सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।  हाईकोर्ट के निर्देशों का भी पालन इंदौर ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक हाईकोर्ट ने ट्रैफिक की व्यवस्था सुधारने के जो निर्देश दिए हैं, उसके मुताबिक पहले चरण में भारी वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है. जिसमें यात्री बसें भी हैं. जिन्हें बाहर से ही बस स्टैंड पर लाकर डायवर्ट किया गया है. इसी तरह अब ई रिक्शा को भी शहर के खाली रूटों पर डायवर्ट किया जा रहा है. इंदौर ई रिक्शा ऑटो चालक संघ के संस्थापक राजेश बड़कर बताते हैं कि "सभी ई रिक्शा चालकों को वर्दी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा रिक्शा चालक अपने जोन में ही चलेंगे. अन्य जोन में जाने पर उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई होगी. इसके अलावा बिना रजिस्ट्रेशन के अथवा लाइसेंस आदि नहीं पाए जाने पर भी पुलिस द्वारा जब्ती और अन्य कठोर कार्रवाई होगी. वहीं जोन क्रॉस करने पर भी रिक्शा चालक जिम्मेदार होंगे।