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शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू हुए जल संचय के कार्य

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल संरक्षण और जल स्त्रोतों को नया जीवन देने के लिए प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा जल स्रोतों को संरक्षित करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। विभिन्न विभागों के समन्वय से गांव-गांव में तालाब, कुएं, चेकडेम और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कार्य आरंभ हो गये है। शासन के 18 विभाग की अभियान में सहभागिता हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अभियान’ को नोडल तथा नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के सह-नोडल विभाग बनाया गया है। "जल गंगा संवर्धन अभियान" के अंतर्गत समाज की भागीदारी और विभिन्न सहभागी विभागों के माध्यम से नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। भूजल संवर्धन, जल संग्रहण संरचनाओं की साफ-सफाई व मरम्‍मत तथा नवीनीकरण, जल संग्रहण संरचनाओं के अतिक्रमण हटाने के कार्य अभियान में किये जायेंगे। स्कूलों में पेयजल गुणवत्‍ता परीक्षण, आंगनवाड़ि‍यों तथा औद्योगिक इकाईयों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य भी किये जायेंगे। जल स्‍त्रोतों में प्रदूषण के स्‍तर को कम करने, जल स्‍त्रोतों तथा जल वितरण प्रणालियों की साफ सफाई की जायेगी। राजस्‍व रिकार्ड में जल संग्रहण संरचनाओं व नहरों को अंकित करने और मानसून सत्र में किये जाने वाले पौधारोपण के लिए आवश्‍यक तैयारियों के कार्य किये जाएंगे। अठारह विभागों की है सहभागिता जल गंगा संवर्धन अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं आवास, वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, राजस्व, संस्कृति, जन अभियान परिषद और जनसंपर्क विभाग शामिल हैं। नगरीय विकास विभाग द्वारा निकायों में अमृत 2.0 अंतर्गत जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार, नदियों में मिलने नालों के शोधन की कार्य योजना बनाई गई है। तालाब, नदी, बावड़ी के संवर्धन एवं अतिक्रमण मुक्‍त करने का लक्ष्य रखा गया है। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित कराने के साथ हरित क्षेत्र विकसित किये जायेंगे। जल संरक्षण में युवाओं की भागीदारी के लिए अमृत मित्र बनाकर 'माय भारत' पोर्टल पर पंजीकरण किये जायेंगे। नगरीय निकायों के प्रमुख स्‍थलों पर गर्मियों में पेय जल सुविधा के लिए जनसहयोग से सार्वजनिक प्‍याऊ की व्‍यवस्‍था करना जैसे कार्य भी कि‍ए जाएंगे। अभियान में वन विभाग द्वारा जलग्रहण क्षेत्र उपचार योजना के तहत लगभग सवा लाख हेक्टेयर में भूजल संवर्धन के कार्य, कृषि विभाग द्वारा बलराम तालाब और लाइन फ़ार्म पोंड का निर्माण और पर्यावरण विभाग द्वारा विशेष तौर पर बेतवा, क्षिप्रा, कान्ह और गंभीर नदियों के उद्गम से अंतिम सीमा तक सर्वेक्षण कर दूषित जल के मिलने के स्थानों का चिन्हांकन किया जाएगा। स्कूल शिक्षा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के साथ सभी स्कूलों में पेयजल स्रोतों के जल की गुणवत्ता का परीक्षण करेगा। उच्च शिक्षा विभाग अपनी गतिविधियों के माध्यम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरूकता आधारित गतिविधियां आयोजित करेगा। जल संसाधन विभाग एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा लघु सिंचाई योजनाओं के तालाबों की मरम्मत के साथ नहरों की सफ़ाई और स्टॉप डैम तथा बैराज की मरम्मत तथा नहर प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाएगा। उद्यानिकी विभाग सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र का विस्तार कार्य करेगा एवं विकासखंडों में पानी चौपाल का आयोजन कर लगभग 55 हज़ार हेक्टेयर में पौधरोपण का कार्य करेगा। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत राजस्व विभाग, पूर्व में बनाई गई ऐसी जल संरचनाएं जो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, उन्हें राजस्व अभिलेख में दर्ज करने का कार्य करेगा। राजस्व विभाग द्वारा समस्त विभागों द्वारा पूर्व में बनाए गए तालाबों, चेकडेम और स्टॉपडेम एवं अन्य जल संरचनाओं के साथ ही जल संसाधन विभाग की नहरों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा।  

जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री को 300 धनुष तोपों का ऑर्डर, ऑपरेशन सिंदूर में थी इनकी अहम भूमिका

 जबलपुर  गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) जबलपुर नए वित्त वर्ष 2026-27 के पहले आठ माह में सेना के लिए तीन सौ धनुष तोप का रक्षा उत्पादन लक्ष्य लेकर इस बार कार्य की शुरुआत करने जा रही है। महत्वपूर्ण है कि एक दशक से अधिक समय से धनुष पर कार्य कर रही निर्माणी की बनी तोप ने ऑपरेशन सिंदूर में एकदम सटीक प्रदर्शन किया था। जिसके बाद रक्षा उत्पादन लक्ष्य दोगुना हो गया है। पिछले साल निर्माणी को 150 तोप का वर्कआर्डर हासिल हुआ था। इस बार रिकार्ड उत्पादन की ओर बढ़ रही निर्माणी के पास एलएफजी भी है, जो 24 इस सत्र में तैयार होगी। जीसीएफ देश की एकमात्र निर्माणी है जहां धनुष तोप का उत्पादन होता है। श्रमिक सूत्रों के अनुसार जीसीएफ को भारतीय सेना से 300 'धनुष' हावित्जर तोपों का एक बड़ा आर्डर मिलने जा रहा है। बोफोर्स की तुलना में बेहतर यह 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत निर्मित स्वदेशी तोपें हैं, जो 155 मिमी, 45-कैलिबर क्षमता की हैं और 38-42 किमी तक सटीक मारक क्षमता रखती हैं, जो बोफोर्स की तुलना में बेहतर है। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी कलपुर्जे के साथ इसे निर्मित किया जाएगा। यह तोपें ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में बेहद कारगर हैं और 155 मिमी के सभी गोला-बारूद दाग सकती हैं। इन तोपों ने पोखरण और अन्य फायरिंग रेंज में कड़े परीक्षण सफलतापूर्वक पास किए हैं। एलएफजी भी जीसीएफ बनाएगी पिछले साल की तरह इस साल भी जीसीएफ सेना के लिए लाइट फील्ड गन का उत्पादन जारी रखेगी। पिछले वित्त वर्ष में निर्माणी को 18 एलएफजी उत्पादन का लक्ष्य हासिल हुआ था। जो कि इस बार संभावना है कि 24 गन का उत्पादन संभव होगा। क्योंकि सेना ने एक दशक बाद इस हल्की तोप में रुचि दिखाई है। 17-19 किमी की रेंज वाली ये तोपें 2014-15 के बाद निर्माणी में निर्मित होना शुरू हुई थीं।  

टीचर्स को नहीं मिलेगी राहत: MP में समर वेकेशन में भी ड्यूटी, मई-जून में होंगी बोर्ड परीक्षाएं

भोपाल प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को इस साल मई माह में मिलने वाला ग्रीष्मावकाश नहीं मिल पाएगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) भोपाल ने इस दौरान 10वीं व 12वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षा प्रस्तावित की हैं। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी इसी दौरान निर्धारित किए हैं। ऐसे में शिक्षक इस बार मई-जून में पूरी तरह से व्यस्त रहने वाले हैं। परीक्षाओं का विस्तृत शेड्यूल और अवकाश में कटौती शिक्षक संगठनों ने इस स्थिति पर आपत्ति जताई है। दरअसल, माशिमं द्वारा 10वीं और 12वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षा सात मई से आयोजित की जानी हैं। जारी समय-सारिणी के अनुसार 12वीं की परीक्षा सात मई को बायोटेक्नोलॉजी विषय से शुरू होकर 25 मई तक चलेंगी, वहीं 10वीं की परीक्षा सात मई से 19 मई तक चलेंगी। इसके अलावा 5वीं और 8वीं कक्षा की पुनः परीक्षाएं मई माह में और 9वीं-11वीं की द्वितीय वार्षिक परीक्षाएं तीन जून से 13 जून तक प्रस्तावित हैं। बता दें कि पूर्व वर्षों में शिक्षकों को एक मई से नौ जून तक करीब एक माह नौ दिन का ग्रीष्मावकाश मिलता था, लेकिन इस साल पूरे एक माह का ग्रीष्मावकाश घोषित किया गया है। अब परीक्षा और प्रशिक्षण के चलते यह अवकाश लगभग समाप्त हो गया है। प्रशिक्षण व मूल्यांकन कार्यों की दोहरी जिम्मेदारी प्रशिक्षण व मूल्यांकन में लगना होगा परीक्षाओं के बीच विभाग ने मई माह में शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी निर्धारित किए हैं। ऐसे में शिक्षकों को अवकाश के दौरान भी स्कूल संबंधी कार्यों में व्यस्त रहना पड़ेगा। इसके अलावा सभी परीक्षाओं का मूल्यांकन कार्य में भी शिक्षकों को लगाया जाएगा। शिक्षक संगठन की नाराजगी और आंदोलन की चेतावनी शिक्षक संगठन ने लिखा पत्र शिक्षक संगठनों का कहना है कि अवकाश अवधि में ही सभी परीक्षाएं और कार्यक्रम रखे जा रहे हैं, जिससे शिक्षकों को मानसिक और शारीरिक विश्राम का अवसर नहीं मिल पा रहा। उन्होंने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। मप्र शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष डा. क्षत्रवीर सिंह राठौर ने इस संबंध में शासन-प्रशासन को पत्र लिखकर सभी परीक्षाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम जून में कराने की मांग की है।  

सुशासन एवं विकास को नई गति देगा स्टेट एआई मिशन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सुशासन एवं विकास को नई गति देने और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से शीघ्र ही मध्यप्रदेश स्टेट एआई मिशन प्रारंभ किया जाएगा। यह मिशन सेवाओं के संचालन और आर्थिक अवसरों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। स्टेट एआई मिशन राज्य के एआई विजन एंड एक्शन फ्रेमवर्क पर आधारित होगा, जिसके माध्यम से व्यवस्था को प्रेडिक्टिव, प्रोएक्टिव एवं डेटा-ड्रिवन बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एआई तकनीकों का उपयोग मानवीय निगरानी (ह्यूमन-इन-द-लूप) के साथ किया जाएगा, जिससे सुरक्षा, पारदर्शिता एवं नागरिकों का विश्वास सुनिश्चित किया जा सकेगा। एआई मिशन के क्रियान्वयन से नागरिकों, विशेषकर किसानों, ग्रामीण समुदायों, युवाओं एवं वंचित वर्गों को तेज, स्मार्ट और व्यक्तिगत सेवाएँ उपलब्ध होंगी। राज्य सरकार एआई तकनीक को सुलभ एवं किफायती बनाकर समाज के सभी वर्गों तक इसके लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रेडिक्टिव गवर्नेंस को मिलेगा बढ़ावा स्टेट एआई मिशन में कृषि, स्वास्थ्य, पोषण एवं आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संभावित जोखिमों की पूर्व पहचान संभव हो सकेगी। सभी एआई प्रणालियों में पारदर्शिता, ऑडिटेबिलिटी और प्राइवेसी संरक्षण सुनिश्चित करते हुए रिस्पॉन्सिबल एआई के सिद्धांतों को अपनाया जाएगा। साथ ही प्रशासनिक कार्यों को अधिक दक्ष बनाने के लिए अधिकारियों को ड्राफ्टिंग, विश्लेषण, डिसीजन सपोर्ट एवं डेटा मैनेजमेंट से संबंधित एआई टूल्स उपलब्ध कराए जाएंगे। एआई का उपयोग केवल पायलट परियोजनाओं तक सीमित न रहकर राज्य की प्रमुख योजनाओं में व्यापक रूप से लागू किया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से होगा मिशन का क्रियान्वयन स्टेट एआई मिशन को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। वर्ष 2026-27 में वर्तमान एआई पहलों का समेकन एवं आधारभूत तैयारी सुदृढ़ की जाएगी। वर्ष 2027-28 में सफल यूज़ केसेस को विभिन्न विभागों में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा और वर्ष-2028 से एआई को शासन की स्थायी संस्थागत क्षमता के रूप में विकसित किया जाएगा। एआई तकनीक से नागरिक सेवाओं की पहुँच हुई सुदृढ़ एमपी ई-सेवा एवं संपदा 2.0 जैसे प्लेटफॉर्म से एआई आधारित पात्रता पहचान, फेस रिकग्निशन एवं रियल-टाइम ट्रैकिंग से नागरिक सेवाएँ अधिक सुलभ, पारदर्शी एवं उत्तरदायी बन रही हैं। एआई आधारित गिरदावरी प्रणाली से भूमि एवं फसल संबंधी सेवाओं में सटीकता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित हुई है। कृषि क्षेत्र में एआई आधारित गिरदावरी, सिप्री परियोजना, जिला स्तरीय जीआईएस प्लेटफॉर्म तथा सारा एवं उन्नति एग्रीजीआईएस से करोड़ों भू-खंडों पर फसल मैपिंग एवं उपज आकलन किया जा रहा है, जिससे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पारदर्शिता एवं बेहतर निर्णय-निर्माण को बल मिला है। एआई से सामाजिक सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा एआई आधारित पहलों के तहत सुमन सखी कार्यक्रम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी की जा रही है।वहीं एमपी कौशल रथ एवं ज्ञानकोष के जरिए युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार अवसरों से जोड़ा जा रहा है। समग्र प्लेटफॉर्म आधारित एआई पहचान प्रणाली से पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं लक्षित तरीके से पहुँचाया जा रहा है। एआई क्षेत्र में कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा राज्य में स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थानों एवं इंडस्ट्री के साथ साझेदारी विकसित कर मजबूत एआई इको सिस्टम तैयार किया जाएगा। युवाओं एवं शासकीय अधिकारियों के लिए एआई स्किलिंग कार्यक्रम संचालित कर भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप मानव संसाधन तैयार किए जाएंगे। सुशासन का नया मॉडल बनेगा मध्यप्रदेश ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सिद्धांत पर आधारित एआई दृष्टिकोण नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता को नई ऊँचाई प्रदान करेगा। राज्य सरकार का लक्ष्य एआई को प्रयोगशाला से निकालकर ‘पब्लिक गुड’ के रूप में अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है, जिससे समावेशी एवं उत्तरदायी विकास सुनिश्चित किया जा सके।  

मध्यप्रदेश में बेहिचक कीजिए फुल इन्वेस्टमेंट, सरकार देगी फुल सपोर्ट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान जुड़वा भाइयों की तरह हैं। दोनों राज्य मिलकर विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत तैयार कर रहे हैं। हम सिर्फ विरासतों और विविधताओं के ही नहीं, आर्थिक दृष्टि से भी एक-दूसरे के स्वाभाविक साझेदार हैं। राजस्थान का विकसित टेक्सटाइल, जेम्स-एंड-ज्वेलरी और मध्यप्रदेश की ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन क्षमता, टेक्सटाइल पार्क एवं मज‍बूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम मिलकर एक सशक्त वैल्यू चैन तैयार कर सकते हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। ये परियोजना दोनों राज्यों की तस्वीर और तकदीर बदलेगी। लगभग 1 लाख करोड़ रूपए की इस परियोजना में दोनों राज्यों को मात्र 5-5 प्रतिशत राशि देनी होगी। इसकी 90 प्रतिशत लागत भारत सरकार देगी। उन्होंने कहा है कि दोनों राज्यों के बीच रोटी-बेटी का संबंध रहा है और अब पानी का संबंध भी बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को जयपुर में आयोजित 'इन्टरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' में राजस्थान के निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर सेशन का शुभारंभ किया। उन्होंने राज्य के सभी निवासियों को हाल ही में मनाए गए राजस्थान राज्य के स्थापना दिवस (19 मार्च) और अखंड सौभाग्य के लोक-पर्व गणगौर पूजन की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। राज्यों के बीच प्राकृतिक संसाधनों के बंटवारे मधुरता से पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के व्यापारियों ने देश-दुनिया में व्यापार-व्यवसाय में अपना नाम कमाया है। धन कमाने के लिए मन और बुद्धि चाहिए। राजस्थान के व्यापारियों ने अपनी क्षमता, युक्ति-बुद्धि और योग्यता से अपना लौहा मनवाया है। हम यहां दोनों राज्यों के बीच व्यापार संबंध प्रगाढ़ करने के लिए आए हैं। वर्तमान हालातों में कई तरह की चुनौतियां हैं, साथ ही हमारे पास आगे बढ़ने के स्वर्णिम अवसर भी हैं। कुछ साल पहले तक हमारे निवेशक खाड़ी देशों में निवेश के लिए जा रहे थे, लेकिन अब वहां स्थिति तेजी से बदल गई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र में नियमों-कानूनों का सरलीकरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए 26 प्रकार की नई नीतियां लागू की हैं। अब स्पेस और एआई सेक्टर के लिए भी हम पॉलिसी लाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, देश के सरप्लस बिजली स्टेट्स में से एक है। अब हम देश के 'ग्रीन, क्लीन एंड सोलर एनर्जी कैपिटल' के रूप में उभर रहे हैं। इलेक्ट्रिसिटी सरप्लस राज्य बनने के बाद अब मध्यप्रदेश की बिजली से दिल्ली में मेट्रो ट्रेन संचालित हो रही है। प्रदेश में लगभग 2 रुपए 90 पैसे प्रति यूनिट दर पर घरेलू बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। औद्योगिक विकास के साथ माइनिंग सेक्टर में भी तेज गति से कार्य हो रहे हैं। मेडिकल टूरिज्म के लिए राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है। पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल खोलने के लिए 1 रुपए में लीज पर जमीन दी जा रही है। मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। राज्य में 5 हजार से 50 हजार क्षमता की बड़ी गौशालाएं खोलने के लिए जमीन दी जा रही है। प्रति गौमाता अनुदान भी 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए कर दिया गया है। पशुओं की नस्ल सुधार और चिकित्सा के लिए उचित प्रबंध किए गए हैं। राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों को नि:शुल्क दूध के पैकेट बांटने के लिए योजना की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय था, जब लोग कहते थे कि मध्यप्रदेश में उद्योग टिक ही नहीं सकते, किंतु आज मध्यप्रदेश भारत के सबसे तेजी से विकसित होते राज्यों में से एक है। मध्यप्रदेश की औद्योगिक विकास दर निरंतर बढ़ रही है। हमारी जीडीपी नई ऊँचाइयों को छू रही है। प्रदेश में निवेश की एक नई क्रांति आ रही है। उद्योगों की स्थापना एवं निवेश प्रोत्साहन के लिए हमने 6,104 करोड़ रूपये और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 1 लाख करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। मध्यप्रदेश का 'सिंगल विंडो सिस्टम-इन्वेस्ट एमपी 3.0 पोर्टल' देश के श्रेष्ठ डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म में गिना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी 2025 अंतर्गत टेक्सटाइल एवं परिधान क्षेत्र को शामिल कर निवेशकों को आकर्षक इंसेंटिव प्रदान किए जा रहे हैं। अनेक प्रमुख कंपनियाँ मध्यप्रदेश में आ चुकी हैं और निवेश कर रही हैं। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में भारत का पहला 'मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन फॉर पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट' विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि होटल, हॉस्पिटल जैसे सेक्टर्स में बड़े निवेश पर कैपिटल सब्सिडी दी जा रही है। प्रदेश के रीवा में टाइगर सफारी और एयरपोर्ट की सौगात भी मिल चुकी है। राज्य की एविएशन पॉलिसी के अंतर्गत हवाई सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को प्रति फ्लाइट 15 लाख वीजीएफ दिया जा रहा है। राज्य के अंदर और राज्य के बाहर भी हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पीएम हेली सर्विस शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि म.प्र. ने बिजली के समुचित बंटवारे के लिए उत्तरप्रदेश के साथ एक मॉडल तैयार किया है। मुरैना में प्लांट स्थापित कर 6-6 महीने बिजली उपयोग करने के लिए सहमति बनी है। पीकेसी परियोजना में दोनों राज्यों ने एक-दूसरे की बेहतरी के लिए निर्णय लिया है। सूखे क्षेत्र को पानी मिल जाए, तो लोगों की जिंदगी बदल जाती है। इसीलिए यही समय है, मध्यप्रदेश और राजस्थान देश के साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की उद्यमशीलता और मध्यप्रदेश की संसाधन क्षमता मिलकर सेंट्रल इं‍डिया को इंडस्ट्रियल पॉवर सेंटर बना सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि आप देश के दिल, असीम संभावनाओं और विकास अवसरों के केंद्र से जुड़िए, बेहिचक मध्यप्रदेश में निवेश कीजिए। मध्यप्रदेश में बेहतर नीतियां, बेहतर अवसर, बेहतर इन्सेंटिव, बेहतर इकोसिस्टम, बेहतर मार्केट लिंकेज और बेहतर ग्रोथ रेट के साथ आपको हर कदम पर सरकार का फुल सपोर्ट मिलेगा। राजस्थान और मध्यप्रदेश परिवार जैसे : मंत्री  चौधरी राजस्थान सरकार में … Read more

सिविल सेवा नियम 1966 में हुआ बड़ा संशोधन, अधिकारी और कर्मचारी वीडियो कांफ्रेंसिंग से भी कर सकेंगे जांच

भोपाल  मध्य प्रदेश में लंबित विभागीय जांचों को तेजी से निपटाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 में संशोधन कर जांच प्रक्रिया को डिजिटल और सरल बनाया गया है। अब आरोपित अधिकारी-कर्मचारियों को हर बार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की बाध्यता नहीं रहेगी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई संभव होगी और नोटिस ई-मेल के जरिए भेजे जाने पर भी मान्य होंगे। इस बदलाव से लंबे समय से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है। वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी सुनवाई नए संशोधन के तहत जांच अधिकारी अब आरोपित कर्मचारियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति दे सकेंगे। इससे बार-बार कार्यालय में पेश होने की जरूरत खत्म होगी और प्रक्रिया तेज होगी। ई-मेल से भेजे नोटिस भी होंगे मान्य अब नोटिस या सूचना अधिकृत ई-मेल पर भेजी जाएगी, जिसे विधिवत सूचना माना जाएगा। इससे नोटिस नहीं मिलने के बहाने से जांच टालने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। लंबित मामलों से निपटने की पहल अब तक नियमों की जटिलता के कारण कई कर्मचारी जांच लंबित रखते थे और सेवानिवृत्ति तक मामला खिंच जाता था। इसके चलते पेंशन जैसे मामलों में भी देरी होती थी। पोर्टल आधारित निगरानी व्यवस्था जांच से जुड़ी पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और हर स्तर पर निगरानी आसान होगी। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद फैसला मोहन यादव ने लंबित जांचों पर नाराजगी जताई थी, जिसके बाद यह संशोधन लागू किया गया। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में तेजी आने की उम्मीद है।  

आंबेडकर जयंती पर भाजपा का घर-घर संपर्क अभियान, 13 से 19 अप्रैल तक विकास कार्यों का हिसाब देंगी

भोपाल संविधान निर्माता बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर 13 से 19 अप्रैल तक भाजपा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन, संगोष्ठी, स्वच्छता अभियान सहित विभिन्न कार्यक्रमों का प्रदेश भर में आयोजन किया जाएगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के पदाधिकारी से कहा कि वे प्रदेश भर में भ्रमण कर बूथ स्तर पर मोर्चा संगठन को बुलंदियों तक पहुंचाने का कार्य करें। गांव-गांव, घर-घर संपर्क अभियान चलाकर बताएं कि भाजपा संगठन और सरकार आपके लिए क्या कार्य कर रही है। आज से ही मोर्चा प्रदेश पदाधिकारी बाबा साहब आंबेडकर की जयंती कार्यक्रमों की तैयारियों में जुट जाएं। भारत को विश्व गुरु बनाने और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित व आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथ मजबूत करने के लिए कार्य करें। यह बात खंडेलवाल ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से प्रदेश कार्यालय भोपाल में अनुसूचित जाति मोर्चा की परिचयात्मक बैठक को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन को और मजबूत करने में मोर्चा पदाधिकारी सक्रिय भूमिका निभाएं। बैठक को क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, मोर्चा प्रभारी मनोरंजन मिश्रा व मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह परमार ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बरूआ भी उपस्थित रहे। इससे पहले जामवाल की उपस्थिति में ही खंडेलवाल ने संभाग प्रभारियों, मोर्चा प्रभारी, प्रकोष्ठ प्रभारी एवं मोर्चा के प्रदेश अध्यक्षों की वर्चुअल बैठक कर संगठनात्मक विषयों पर विस्तृत चर्चा की। हर बूथ जीतने का लक्ष्य लेकर पार्टी संगठन के कार्यों को जन-जन तक पहुंचाएं : जामवाल क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने कहा कि अनुसूचित जाति मोर्चा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता हर बूथ को जीतने का लक्ष्य लेकर पार्टी संगठन के कार्यों को जन-जन तक पहुंचाएं। भाजपा संगठन और सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों को जनता तक पहुंचाएं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार अनुसूचित जाति मोर्चा के कल्याण व सर्वांगीण विकास के लिए कई योजनाएं चला रही है।  

भोपाल मंडल का बड़ा कदम: रेलवे स्टेशनों पर शुद्ध पानी और स्वच्छता अभियान की शुरुआत

भोपाल वेस्ट सेंट्रल रेलवे के भोपाल रेल मंडल ने जल गुणवत्ता सुधारने के लिए अहम कदम उठाया है। रेलवे परिसर और कालोनियों में स्थित पानी की टंकियों की अब मशीनों से नियमित सफाई कराई जाएगी। इस कार्य पर अगले दो वर्षों में करीब 34.60 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। आधुनिक मशीनों से होगी टंकियों की सफाई इस योजना के तहत फिल्टर प्लांट, विभिन्न रेलवे स्टेशनों, ईस्ट और वेस्ट कालोनी, भोपाल व निशातपुरा कालोनी में बने ओवरहेड टैंक और भूमिगत जल टंकियों की सफाई आधुनिक मशीनों से की जाएगी। मशीनों की मदद से टंकियों में जमी गाद, कचरा और अन्य अशुद्धियों को हटाया जाएगा, जिससे पानी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी। दूषित पानी और बीमारियों से मिलेगी राहत रेलवे अधिकारियों के अनुसार नियमित सफाई से पानी के दूषित होने की संभावना कम होगी और कर्मचारियों व रहवासियों को स्वच्छ पानी मिल सकेगा। हबीबगंज स्टेशन क्षेत्र में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी, जहां सभी जल भंडारण टंकियों की सफाई सुनिश्चित की जाएगी। जल आपूर्ति व्यवस्था होगी और मजबूत रेलवे का मानना है कि इस पहल से जल जनित बीमारियों के खतरे में कमी आएगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग से कम समय में अधिक प्रभावी और सुरक्षित तरीके से सफाई संभव होगी, जिससे जल आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत बनेगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला से की भेंट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जयपुर प्रवास के दौरान शनिवार को लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला से सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंग वस्त्रम् से  बिरला का स्वागत किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष श्री बिरला ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग निवेश संवर्धन कार्यक्रम में जयपुर पधारने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने पत्रिका समूह के स्वर्गीय कर्पूर चंद कुलिश  के जन्म शताब्दी समापन समारोह में हिस्सा लेने के लिए मध्यप्रदेश से मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के जयपुर आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका भी स्वागत किया।

वाहन खरीदने वालों को झटका: MP में ई-बाइक और कार की कीमतें बढ़ेंगी, 27 मार्च तक ही राहत

भोपाल मध्य प्रदेश में पांच साल के लिए लागू की गई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति-2025 के तहत वित्तीय प्रोत्साहन में कमर्शियल ईवी को टैक्स में वर्ष 2027 तक छूट रहेगी, लेकिन ई-बाइक और ई-कारों पर मिलने वाली छूट 27 मार्च को खत्म हो जाएगी। 27 मार्च, 2025 को लागू ईवी पालिसी में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों पर वाहन कर व पंजीयन शुल्क में एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत छूट दी गई थी। लागत बढ़ने से लोग पेट्रोल-डीजल वाहनों की ओर लौट सकते हैं। रेट्रोफिटिंग और कमर्शियल वाहनों के लिए प्रावधान इसके साथ ही ईवी नीति में रेट्रोफिटिंग यानी 15 साल पुराने पेट्रोल-डीजल वाहन को ईवी में बदलवाने पर एक साल तक दी गई छूट भी खत्म हो जाएगी। जबकि किट नहीं मिल पाने के कारण रेट्रोफिटिंग का काम ठीक से शुरू भी नहीं हो पाया है। रेट्रोफिटिंग पर दो पहिया को पांच हजार प्रति वाहन, तीन पहिया को 10 हजार और कार को 25 हजार प्रोत्साहन राशि देने का प्रविधान किया गया था। हालांकि, कमर्शियल वाहनों जैसे ई-बस, ट्रक, ट्रैक्टर और एंबुलेंस को दो वर्ष यानी 27 मार्च, 2027 तक के लिए वाहन कर व पंजीयन शुल्क में दी गई छूट लागू रहेगी। पंजीयन लक्ष्य और पांच मॉडल ईवी शहर इधर, पांच साल में दोपहिया वाहनों में 40 प्रतिशत और चार पहिया वाहनों के 15 प्रतिशत ईवी के पंजीयन का लक्ष्य रखा गया था। 27 मार्च को टैक्स में छूट खत्म होने से लक्ष्य प्रभावित हो सकता है। नीति लागू होने से पांच साल की अवधि में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को मॉडल ईवी शहर घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति अवधि के अंत तक 80 प्रतिशत सरकारी वाहनों को ईवी करने का लक्ष्य भी रखा गया है। चार्जिंग स्टेशनों को वित्तीय सहायता देगी सरकार ईवी नीति के तहत सार्वजनिक स्थलों पर चार्जिंग स्टेशनों के लिए वित्तीय सहायता का भी प्रविधान है। राजमार्गों, प्रमुख सड़कों पर प्रत्येक 25 किमी पर एक चार्जिंग स्टेशन, राजमार्गों पर प्रत्येक 100 किमी पर लंबी दूरी/हैवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक वाहन के लिए फास्ट चार्जिंग स्टेशन (दोनों तरफ) लगाए जाएंगे। नीति अवधि के अंत तक सभी पेट्रोल पंपों पर कम से कम एक इलेक्ट्रिक चार्जिंग प्वाइंट लगाने का लक्ष्य है। विभिन्न श्रेणियों के लिए निर्धारित लक्ष्य     दो पहिया ईवी- 40%     दोपहिया वाहन ईवी (वाणिज्यिक बेड़ा)- 100%     तीन पहिया ईवी (यात्री और माल ढुलाई)- 80%     चार पहिया ईवी- 15%     ई-बसें- 40%