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मध्यप्रदेश के चार जिलों ने धन-धान्य योजना में बनाई पहचान, 12 अक्टूबर को होंगे सम्मानित

डिंडौरी  प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश के डिंडौरी, सीधी, उमरिया और टीकमगढ़ जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए डिजिटल निगरानी मंच पर तय किए गए प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर मासिक प्रगति के आधार पर बेस्ट परफार्मिंग जिलों का चयन किया गया है। योजना के एक वर्ष पूर्ण होने पर सोमवार को नई दिल्ली स्थित एनएएससी कांप्लेक्स में सुबह 11:30 बजे से राष्ट्रीय सम्मान समारोह आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को सम्मानित किया जाना है। कार्यक्रम में टाप जिलों की रैंकिंग जारी की जाएगी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत 11 अक्टूबर 2025 को देश के 100 पिछड़े और आकांक्षी जिलों में की गई थी। योजना का उद्देश्य 11 मंत्रालयों की 36 मौजूद योजनाओं को एक साथ जोड़कर किसानों को लाभ पहुंचाना था। साथ ही कृषि उत्पादकता को बढ़ाना, फसल सघनता में वृद्धि करना और कृषि ऋण वितरण को सरल बनाकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य था। चारों जिलों ने तीनों प्रमुख मानकों पर बेहतर कार्य किया है। दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित सहयोगी मंत्रालयों के केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे। आठ जिलों के दल को किया आमंत्रित सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए मध्य प्रदेश के आठ जिलों अनूपपुर, डिंडौरी, आलीराजपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी, निवाड़ी और टीकमगढ़ से चार-चार सदस्यों के दल को आमंत्रित किया गया है। यह दल दिल्ली में अपने जिले में किए गए नवाचारों और कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों का प्रस्तुतीकरण भी देगा। कृषि विज्ञानियों का मानना है कि इस सम्मान से मोटे अनाज के उत्पादन, जैविक खेती, नई तकनीक अपनाने और उन्नत खेती करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।  

बागेश्वर धाम से बड़ी खबर: 11 अक्टूबर से शुरू होगी धीरेंद्र शास्त्री की सनातन हिंदू एकता यात्रा 3.0

 छतरपुर  छतरपुर जिले के गढ़ा में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर एवं कथावाचक पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा 3.0 का मार्ग तय हो गया है। करीब 500 किलोमीटर लंबी यह यात्रा आज 11 अक्टूबर से बागेश्वर धाम से शुरू होगी और पांच दिन बाद 15 अक्टूबर को वापस छतरपुर पहुंचेगी। यात्रा का रूट गढ़ा से शुरू होकर अजयगढ़, पन्ना, अमानगंज, पवई, सागर, दमोह, हटा और टीकमगढ़ होते हुए छतरपुर तक रहेगा। यात्रा के दौरान करीब हर 20 किलोमीटर पर पड़ाव निर्धारित किए जाएंगे। रात्रि विश्राम वाले स्थानों पर धार्मिक आयोजन होंगे। इनमें हनुमान चालीसा, हवन और लोगों को हिंदू राष्ट्र की शपथ दिलाने का कार्यक्रम शामिल रहेगा। यात्रा की शुरुआत हनुमान चालीसा पाठ और राष्ट्रगान के साथ होगी। यात्रा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के लिए विशेष रूप से तैयार वैनिटी वैन और बालाजी महाराज का रथ शामिल रहेगा। आयोजकों के मुताबिक, यात्रा में करीब 5 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है। कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय, चित्रलेखा और गुरु मीमा जी ने वीडियो जारी कर यात्रा में शामिल होने की बात कही है। यात्रा से पहले दैनिक भास्कर ने बागेश्वर धाम पहुंचकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से तैयारियों, रथयात्रा के उद्देश्य और बुंदेलखंड के पांच जिलों को चुनने के कारणों पर बातचीत की। संत-महंत और सुंदरकांड मंडल भी होंगे शामिल पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यात्रा के रूट और तैयारियों की जानकारी साझा करते हुए देशभर के सनातनियों से इसमें शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यात्रा जिन क्षेत्रों से गुजरेगी, वहां आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर आयोजनों में सहभागिता करें। यात्रा में श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए बसों की व्यवस्था भी रहेगी। संत-महंत, बागेश्वर शिष्य और विभिन्न सुंदरकांड मंडलों के सदस्य भी यात्रा में शामिल होंगे। यात्रा के दौरान आयोजित सभाओं में राष्ट्रगान, हनुमान चालीसा और सात वचनों की शपथ दिलाई जाएगी। पीले चावल देकर घर-घर पहुंचाया जाएगा न्योता यात्रा को लेकर बागेश्वर धाम के शिष्य, भक्त और सुंदरकांड मंडल के सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों से संपर्क करेंगे। इसके लिए पीले चावल देकर सनातनियों को यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा। पं. धीरेंद्र शास्त्री ने बुंदेली भाषा में हाथ जोड़कर लोगों से यात्रा में शामिल होने और इसे सफल बनाने में सहभागिता की अपील की है। उनका कहना है कि यात्रा का उद्देश्य धर्म, संस्कृति और हिंदू एकता का संदेश लोगों तक पहुंचाना है। दो यात्राएं निकाल चुके हैं धीरेंद्र शास्त्री यह पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तीसरी बड़ी यात्रा होगी। इससे पहले नवंबर 2024 में बागेश्वर धाम से ओरछा तक करीब 160 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली गई थी। यात्रा के दौरान 'जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई' का संदेश दिया गया था। इसके बाद नवंबर 2025 में दिल्ली से मथुरा-वृंदावन तक करीब 170 किलोमीटर की यात्रा 2.0 निकाली गई। इसमें यमुना शुद्धि, ब्रजधाम की रक्षा, सामाजिक समरसता, हिंदू राष्ट्र, लव जिहाद और गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने जैसे मुद्दे उठाए गए थे। अब तीसरे चरण में 500 किलोमीटर लंबी रथ यात्रा के जरिए बुंदेलखंड के कई जिलों में हिंदू एकता और सनातन संस्कृति का संदेश पहुंचाने की तैयारी है। पंडित धीरेन्द्र शास्त्री: यात्रा के दौरान हर 20 किलोमीटर पर छोटा आयोजन होगा। इसमें लोगों को 7 संकल्प दिलाए जाएंगे। इनमें सनातन एकता के लिए जोर दिया जाएगा। ये सात संकल्प दिलाएंगे     भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना     जातिवाद और छुआछूत का खात्मा करना     गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना     अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद पर रोक लगाना     हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों की मुक्ति और संरक्षण     आने वाली पीढ़ी को सनातन धर्म के संस्कारों से जोड़ना     प्रत्येक हिंदू को एकजुट करना (हिंदू एकता) एक महीने से चल रही तैयारियां सनातन हिन्दू एकता रथ यात्रा को लेकर बागेश्वर धाम में एक महीने से तैयारियां चल रही हैं। बागेश्वर धाम समिति के सदस्य, मंडल यात्रा के रूट, किस पड़ाव पर कहां रुकेगी, क्या व्यवस्था होगी, सभी की निगरानी में लगे हैं। खुद पंडित धीरेन्द्र शास्त्री 5 जिलों के प्रत्येक मंडलों और प्रभारियों से मुलाकात करके मीटिंग कर रहे हैं। इसके अलावा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पांचों जिलों समेत विभिन्न क्षेत्रों में बागेश्वर सरकार और सनातन से जुड़े प्रचार-प्रसार करने वाले सोशल मीडिया वॉरियर्स से संवाद भी कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ने सभी से रथ यात्रा का आमंत्रण जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी लोग स्वयं यात्रा में शामिल हों, यात्रा से संबंधित ब्लॉक न्यूज, वीडियो व सोशल मीडिया कंटेंट तैयार कर लोगों तक जानकारी पहुंचाएं। यात्रा के पहले धाम परिसर और नेशनल हाईवे पर बैनर-पोस्टर लगाए जा रहे हैं। हाइड्रोलिक लिफ्ट वाली वैनिटी वैन बनेगी रथ पंडित धीरेंद्र शास्त्री वैनिटी वैन पर सवार होंगे, जिसमें समर्थकों की भीड़ को देखते हुए रथ को विशेष सुरक्षा मानकों पर तैयार किया गया है। इसमें हाइड्रोलिक लिफ्ट लगी है, जिससे धीरेंद्र शास्त्री रथ के ऊपर आकर संबोधित कर सकेंगे। वैन पर भगवान हनुमान जी, गदा और सनातन धर्म के प्रतीकों की नक्काशी की जा रही है। साथ ही वैन के दोनों तरफ सीसीटीवी भी लगाए जा गए हैं। ड्राेन से निगरानी होगी, बम डिस्पोजल दस्ता भी चलेगा छतरपुर एसपी रजत सकलेचा ने बताया कि यात्रा में भीड़ को देखते हुए सागर जोन से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस मुख्यालय से भी बल लिया जाएगा। ड्रोन, सीसीटीवी व्हीकल, रेडियो कम्युनिकेशन, सादा कपड़ों में सिविल पुलिस और बम डिस्पोजल दस्ता भी तैनात रहेगा। पंडित धीरेंद्र शास्त्री की श्रेणी के अनुसार मल्टी-लेयर सुरक्षा, कारकेड और ट्रैफिक डायवर्जन का प्लान आयोजकों के साथ फाइनल किया जा रहा है। इसमें शामिल होने वाले अन्य साधु-संतों को भी उनकी श्रेणी के हिसाब से सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। हर पड़ाव पर हनुमान चालीसा और राष्ट्रगान यात्रा प्रभारी धीरज गौर ने बताया कि यात्रा में पहले दिन कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय शामिल होंगे। उनकी उपस्थिति में धर्म ध्वजा लेकर यात्रा की शुरुआत होगी। साथ ही प्रत्येक पड़ाव पर यात्रा शुरू होने के पहले हनुमान चालीसा पाठ और राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रध्वज भी फहराया जाएगा। यात्रा में करीब पांच हजार लोग साथ चलेंगे। … Read more

मैहर में शुरू होगी महाभोग प्रसाद की बिक्री, 250 ग्राम देसी घी के लड्डू का पैकेट ₹150 में

मैहर देश के प्रमुख और प्रसिद्ध शक्तिपीठों व तीर्थस्थलों की तर्ज पर अब मैहर स्थित मां शारदा देवी धाम में भी श्रद्धालुओं को विशेष 'महाभोग प्रसाद' उपलब्ध कराया जाएगा। मां शारदा मंदिर प्रबंध समिति ने इस बार शारदीय नवरात्र मेले में पहली बार शुद्ध देसी घी से बन लडडू मिलेंगे।  250 ग्राम का पैकेट, 150 रुपए दर निर्धारित मंदिर समिति की प्रशासक एवं मैहर एसडीएम दिव्या पटेल ने बताया कि देश के कई विख्यात मंदिरों में वहां का एक विशेष प्रसाद श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध रहता है। इसी तर्ज पर काम करते हुए मां शारदा मंदिर में भी महाभोग लड्डू प्रसाद की व्यवस्था लागू की गई है।श्रद्धालुओं को 250 ग्राम का डिब्बा 150 रुपए में उपलब्ध कराया जाएगा। यह लड्डू पूरी तरह शुद्ध देसी घी और बेसन से तैयार किए जा रहे हैं। रोपवे, सीढ़ी मार्ग से मेला क्षेत्र तक लगेंगे अधिकृत काउंटर प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को बिचौलियों और मिलावटी प्रसादों से बचाकर सीधे मंदिर समिति के अधिकृत काउंटरों से शुद्ध प्रसाद उपलब्ध कराना है। इसके लिए पूरे मेला परिक्षेत्र में अधिकृत काउंटर लगाए जाएंगे।अधिकृत काउंटर रोपवे, सीढ़ी मार्ग से मेला क्षेत्र तक लगेंगे।इन सभी स्थानों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मिनरल वाटर/पीने के पानी की बोतलें भी उचित दर पर उपलब्ध रहेंगी। सफल रहा प्रयोग तो साल भर के लिए निकलेगी विस्तृत निविदा एसडीएम दिव्या पटेल के अनुसार, यह व्यवस्था फिलहाल नवरात्रि के 10 दिनों के लिए लागू की गई है। इस दौरान श्रद्धालुओं के फीडबैक और व्यवस्था की सफलता की समीक्षा की जाएगी। प्रयोग सफल रहने पर इसे पूरे वर्ष नियमित रूप से जारी रखने के लिए विस्तृत निविदा (टेंडर) जारी की जाएगी, जिससे मां शारदा धाम आने वाले हर भक्त को साल भर शुद्ध महाभोग प्रसाद मिल सके।

CM मोहन यादव 11 अक्टूबर को जारी करेंगे ₹502 करोड़ की RTE फीस प्रतिपूर्ति राशि, हजारों स्कूलों को फायदा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 11 अक्टूबर को करेंगे 502 करोड़ रुपये की आरटीई फीस प्रतिपूर्ति राशि अंतरित प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों को राशि होगी अंतरित 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा नि:शुल्क शिक्षा का लाभ नरसिंहपुर में सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का होगा लोकार्पण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 अक्टूबर को नरसिंहपुर जिले में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति राशि का सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरण करेंगे। इसके अंतर्गत प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों के खातों में 502 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इससे 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा नरसिंहपुर जिले में 45 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण भी करेंगे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, स्थानीय जन प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ ही बडी संख्या विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के सांदीपनी विद्यालय बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश सरकार द्वारा गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में अशासकीय स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पात्र विद्यार्थियों की नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा सके। अब तक 3,600 करोड़ रुपये की राशि हो चुकी है जारी शिक्षा के अधिकार से प्रदेश का कोई भी बच्चा वंचित न रहे, इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) अंतर्गत निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाया जा रहा है। इन विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा सीधे संबंधित निजी स्कूलों को दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2011 से अब तक 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में 3,600 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है, जिससे जरूरतमंद बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग आसान हुआ है। विद्यार्थियों को मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा सांदीपनि विद्यालय योजना अंतर्गत प्रथम चरण में नरसिंहपुर जिले में शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का सर्वसुविधायुक्त नवीन भवन का निर्माण कराया गया है। केजी-1 से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक, शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए एक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए सुसज्जित डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल एवं ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की बाह्य शारीरिक गतिविधियों एवं खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए खेल मैदान, सुगम एवं सुरक्षित आवागमन के लिए परिवहन सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक शैक्षणिक वातावरण के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इसी विद्यालय की मेधावी छात्रा कु. माही साहू ने कक्षा-12वीं की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का मान बढ़ाया है।  

मध्यप्रदेश में ग्रामीणों को बड़ी राहत, 82 लोगों को मिला अपनी जमीन का मालिकाना अधिकार

भोपाल  प्रदेश में ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का वैधानिक अधिकार उपलब्ध कराने की दिशा में स्वामित्व योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को प्रदेश के 17 जिलों के 82 हितग्राहियों को संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज प्रदान किए गए। डिजिटल तकनीक के माध्यम से पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाकर ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा लाभार्थी स्वामित्व योजना के तहत छिंदवाड़ा जिले में 34, हरदा में 10 और सिंगरौली में छह हितग्राहियों के संपत्ति दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण किया गया है। डिंडौरी, मंडला और रायसेन में पांच-पांच, जबकि अनूपपुर, उमरिया और नरसिंहपुर में तीन-तीन हितग्राहियों के दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण हुआ है। इसी प्रकार अशोकनगर, आलीराजपुर, कटनी, ग्वालियर, बालाघाट, श्योपुर, सागर और सीधी में एक-एक हितग्राही के दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण किया गया है। ड्रोन तकनीक से सर्वे स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी भूमि पर स्थित मकानों एवं भूखंडों का ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण कर संपत्ति संबंधी अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से पात्र हितग्राहियों को संपत्ति के स्वामित्व के वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। इन दस्तावेजों से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर अधिकार का प्रमाण मिलने के साथ बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ लेने में भी मदद मिलती है। संपत्ति के अधिकार के साथ ऋण लेने में भी मिलेगी मदद स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में स्थित मकानों और भूखंडों का ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण कर संपत्ति संबंधी अभिलेख तैयार किए जाते हैं। इसके आधार पर पात्र हितग्राहियों को स्वामित्व के वैधानिक दस्तावेज दिए जाते हैं। इन दस्तावेजों से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर अधिकार का प्रमाण मिलता है। साथ ही, बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने में भी मदद मिल सकती है।  सारा ऐप से पंजीयन, संपदा 2.0 से सत्यापन डिजिटल प्रक्रिया का प्रदर्शन छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड की ग्राम पंचायत जमुनिया कला में आयोजित जनविश्वास शिविर में किया गया। यहां पटवारी सुनील गागड़े ने ‘सारा ऐप’ के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया समझाई। इसके बाद ‘संपदा 2.0’ के जरिए ऑनलाइन सत्यापन किया गया। योजना के तहत संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप देने के साथ पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया को सुगम व पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को संपत्ति के अधिकार से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।  छिंदवाड़ा में पटवारी ने प्रदर्शित की डिजिटल पंजीयन प्रक्रिया छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड की ग्राम पंचायत जमुनिया कला में आयोजित जनविश्वास शिविर में पटवारी सुनील गागड़े ने ‘सारा एप’ के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। इसके बाद ‘संपदा 2.0’ के माध्यम से ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई। स्वामित्व योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप देने और शासकीय सेवाओं को अधिक सुगम एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है।  

MP Metro Offer: आज से भोपाल-इंदौर मेट्रो में डिस्काउंट, सिर्फ 2 लोग भी ले सकेंगे ग्रुप टिकट

भोपाल/इंदौर भोपाल और इंदौर मेट्रो में सफर करने वालों को आज 11 अक्टूबर से टिकट पर अतिरिक्त छूट मिलेगी। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने त्योहारों के दौरान यात्रियों को राहत देने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक विशेष छूट देने का फैसला किया है। इसके तहत सिंगल जर्नी टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट मिलेगी। वहीं, रिटर्न टिकट पर कुल 30 प्रतिशत और ग्रुप टिकट पर 35 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। ग्रुप टिकट लेने की शर्त हुई आसान नई व्यवस्था में ग्रुप टिकट लेने की शर्त भी आसान की गई है। पहले इसके लिए कम से कम आठ यात्रियों का होना जरूरी था, लेकिन अब दो लोग भी ग्रुप टिकट ले सकेंगे। इससे परिवार और दोस्तों के साथ मेट्रो में सफर करने वालों को फायदा मिल सकता है। हालांकि, 20 रुपये के सिंगल जर्नी टिकट पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट लागू नहीं होगी। ई-वॉलेट रिचार्ज पर भी मिलेगा बोनस मेट्रो के मोबाइल ऐप पर ई-वॉलेट रिचार्ज कराने वालों को पहले से बोनस राशि मिल रही है। 200 से 499 रुपये के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, 500 से 999 रुपये पर 10 प्रतिशत, 1,000 से 1,499 रुपये पर 12 प्रतिशत और 1,500 से 2,000 रुपये तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस दिया जाता है। नई टिकट छूट के साथ ई-वॉलेट बोनस का लाभ लेने पर यात्रियों को कुल बचत में और फायदा हो सकता है। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, दोनों सुविधाओं को मिलाकर अधिकतम लाभ करीब 44 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वास्तविक बचत टिकट के प्रकार और रिचार्ज राशि पर निर्भर करेगी। मोबाइल ऐप से टिकट बुकिंग और कैशलेस भुगतान की सुविधा भोपाल और इंदौर मेट्रो में यात्री एमपी मेट्रो मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल टिकट ले सकते हैं। भुगतान के लिए यूपीआई, क्यूआर कोड और ई-वॉलेट की सुविधा उपलब्ध है। डिजिटल टिकटिंग से यात्रियों को टिकट खरीदने के लिए काउंटर पर निर्भर रहने की जरूरत कम होती है और नकद भुगतान भी नहीं करना पड़ता। नई छूट 11 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। ऐसे में नियमित यात्रा करने वाले यात्रियों के साथ त्योहारों के दौरान परिवार या दोस्तों के साथ मेट्रो में सफर करने वालों को भी फायदा मिल सकता है। रिटर्न टिकट पर 30%, ग्रुप टिकट पर कुल 35% छूट     सिंगल जर्नी टिकट (SJT): टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट।     टर्न जर्नी टिकट (RJT): पहले मिलने वाली 5 प्रतिशत छूट के स्थान पर अब कुल 30 प्रतिशत छूट।     ग्रुप टिकट (GT): पहले मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट के स्थान पर अब कुल 35 प्रतिशत छूट। ग्रुप टिकट के लिए अब 2 यात्री ही जरूरी ग्रुप टिकट की सुविधा को भी यात्रियों के लिए आसान बनाया गया है। पहले ग्रुप टिकट लेने के लिए कम से कम 8 यात्रियों का होना आवश्यक था, जिसे अब घटाकर केवल 2 यात्री कर दिया गया है। इससे परिवार और दोस्तों के साथ यात्रा करने वाले यात्री भी ग्रुप टिकट का लाभ ले सकेंगे। ₹20 के सिंगल जर्नी टिकट पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट लागू नहीं होगी। नई छूट से यात्रियों को होगा दोहरा फायदा MPMRCL मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-वॉलेट रिचार्ज करने पर यात्रियों को पहले से ही रिचार्ज राशि के अनुसार 8 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक बोनस राशि का लाभ दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ₹200 से ₹499 तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, ₹500 से ₹999 तक पर 10 प्रतिशत, ₹1,000 से ₹1,499 तक पर 12 प्रतिशत तथा ₹1,500 से ₹2,000 तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस राशि मिलती है। अब इस मौजूदा ई-वॉलेट बोनस सुविधा के साथ नई प्रमोशनल टिकट छूट का लाभ मिलने से यात्रियों को टिकट पर अधिकतम लगभग 44 प्रतिशत का लाभ प्राप्त हो सकता है। डिजिटल टिकटिंग और कैशलेस भुगतान से स्मार्ट यात्रा भोपाल एवं इंदौर मेट्रो में यात्रियों की सुविधा के लिए ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन (AFC) प्रणाली पहले से संचालित है। यात्री MPMRCL मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल टिकट प्राप्त कर सहज, सुरक्षित और कैशलेस यात्रा कर सकते हैं। टिकट का भुगतान UPI, QR कोड, ई-वॉलेट और MP Metro मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जा सकता है। इतना किराया 1 से 2 स्टेशन के लिए ₹20, 3 से 5 स्टेशन तक ₹30, और 6 से 8 स्टेशन तक ₹40 किराया लिया जा रहा है। अधिकतम किराया (पूरे रूट पर) 80 रुपए तक है।  

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में लघु फिल्म ‘ए डे इन द लैंड ऑफ टाइगर्स’ की गई रिलीज

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्य प्राणी सप्ताह के समापन अवसर पर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, मोहली में वन और वन्य प्राणी संरक्षण के लिये वन कर्मियों के समर्पण को प्रदर्शित करती लघु फिल्म ‘ए डे इन द लैंड ऑफ टाइगर्स’ को रिलीज किया। बांधवगढ़ के घने वन, बाघों की स्वच्छंद गतिविधियां और अनूठा प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन प्रकृति की इस संपदा को सुरक्षित रखने के लिए जो वनकर्मी कठिन परिस्थितियों में दिन-रात काम करते हैं, उनकी कहानियां अक्सर अनकही रह जाती हैं। इन्हीं पहलुओं को लघु फिल्म ‘ए डे इन द लैंड ऑफ टाइगर्स’ में दर्शाया गया है। समारोह में फिल्म का एक अंश भी प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास वन्य जीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वन और वन्य जीव केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत हैं। इनके संरक्षण के लिए समाज की भागीदारी और जागरूकता आवश्यक है। नियमित गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा, वन्य जीवों के स्वास्थ्य की देखभाल और मानव-वन्य जीव संघर्ष की आशंकाओं पर नजर रखना भी इसकी अहम जिम्मेदारियां हैं। फिल्म वनों के इसी पक्ष से दर्शकों को परिचित कराएगी, जिसे सामान्य पर्यटक अक्सर नहीं देख पाते। लगभग 13 मिनट 13 सेकंड की यह फिल्म बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक सौंदर्य, गौरवशाली इतिहास, समृद्ध जैव विविधता और बाघों के जीवन के साथ वन्य जीव संरक्षण में जुटे वन अमले की भूमिका को दर्शाती है। बांधवगढ़ जैसे बाघ बहुल क्षेत्र में संरक्षण केवल वन्य जीवों की निगरानी तक सीमित नहीं है। संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास ‘ए डे इन द लैंड ऑफ टाइगर्स’ का निर्माण ‘उड़न गिलहरी’ कंपनी ने किया है। फिल्म निर्माण में  ओजैर और  अमन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। फिल्म से बांधवगढ़ की खूबसूरती के साथ उन वनकर्मियों और मैदानी कार्यकर्ताओं के समर्पण को भी पहचान मिलेगी, जो कठिन परिस्थितियों में इस प्राकृतिक धरोहर की रक्षा कर रहे हैं। 228 अधिकारी-कर्मचारी संभाल रहे वन सुरक्षा की जिम्मेदारी उमरिया जिला स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए 228 अधिकारी-कर्मचारी दिन-रात तैनात हैं। इनमें क्षेत्र संचालक, उप संचालक, 5 सहायक वन संरक्षक, एक वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी, 10 वन क्षेत्रपाल, 11 उप वन क्षेत्रपाल, 31 वनपाल और 155 वनरक्षक सहित हाथी, महावत दल एवं वाहन चालक शामिल हैं। इनके साथ 101 स्थाईकर्मी, 37 टीपीएफ जवान और 583 ईडीसी श्रमिक भी वन सुरक्षा एवं संरक्षण कार्यों में योगदान दे रहे हैं। दुर्गम वन क्षेत्रों में गश्त, वन्यजीवों की निगरानी और आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई कर यह अमला बांधवगढ़ की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में जुटा है। संरक्षण व्यवस्था के सुचारु संचालन में क्षेत्र संचालक कार्यालय की टीम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यहां 32 कर्मचारी प्रशासनिक, वित्तीय, अभिलेखीय और तकनीकी कार्यों के माध्यम से मैदानी अमले को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराते हैं।  

मानव–वन्य प्राणी संघर्ष और फसल क्षति कम करने के लिए कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण हुआ प्रारंभ

भोपाल  शाजापुर–शुजालपुर क्षेत्र में कृष्ण-मृगों (ब्लैकबक) को पकड़ने और स्थानांतरित करने के अभियान का दूसरे चरण का शनिवार को प्रारंभ किया गया। अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी में 97 कृष्णमृगों को सफलतापूर्वक पकड़ा गया। इन्हें अनुकूल वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान रवाना किया गया। इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में लंबे समय से फसलों को नुकसान पहुंचा रहे वन्य प्राणियों के कारण किसानों और ग्रामीणों को होने वाली परेशानियों को कम करना है। कृष्ण-मृगों को उनके अनुकूल वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने से मानव–वन्य प्राणी संघर्ष और फसल क्षति कम करने के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। दूसरे चरण में कुल 2 हजार कृष्ण-मृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल वन्य प्राणियों के संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों और वन अमले की संयुक्त भागीदारी अभियान में दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ संस्था ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशंस’ का तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है। मालवा अंचल के साथ प्रदेश के अन्य जिलों से आए वन्यप्राणी चिकित्सक, वन अधिकारी और प्रशिक्षित मैदानी कर्मचारी भी इसमें भागीदारी कर रहे हैं। कृष्ण-मृगों को पकड़ने, उनकी देखभाल करने और सुरक्षित परिवहन के दौरान निर्धारित स्थानांतरण प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है, ताकि वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पहले चरण में 913 वन्यप्राणियों का हुआ था स्थानांतरण कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का पहला चरण पिछले वर्ष संचालित किया गया था। इस दौरान 846 कृष्ण-मृग और 67 नीलगाय सहित कुल 913 वन्य प्राणियों को पकड़ा गया था। पहले चरण से प्राप्त अनुभवों के आधार पर दूसरे चरण को बेहतर समन्वय के साथ संचालित किया जा रहा है। किसानों की फसलों की सुरक्षा के लिए जनसहयोग की अपील अभियान में जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। वन विभाग ने वन्य प्राणी संरक्षण और किसानों की फसलों की सुरक्षा के इस प्रयास को सफल बनाने के लिए आमजन से निरंतर सहयोग की अपील की है

मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026: डेलिगेट्स ने अनुभव की प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और रोमांचक पर्यटन गतिविधियां

भोपाल  मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में देश-विदेश से आए डेलिगेट्स को मध्यप्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, जैव विविधता और रोमांचक पर्यटन संभावनाओं से रूबरू कराने के लिए विभिन्न विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिनिधियों को प्रदेश के पर्यटन स्थलों को करीब से जानने, स्थानीय परिवेश का अनुभव करने और मध्यप्रदेश को एक विविधतापूर्ण पर्यटन गंतव्य के रूप में समझने का अवसर मिला। हेरिटेज वॉक, शिकारा बोट राइड, बर्ड वॉक, योग और हेलीकॉप्टर जॉय राइड जैसी गतिविधियों ने प्रतिनिधियों के अनुभव को यादगार बनाया। ट्रैवल मार्ट के अंतर्गत कुल 149 विशिष्ट प्रतिनिधियों ने विभिन्न गतिविधियों के लिए सहभागिता दर्ज की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रतिनिधियों द्वारा कुल 338 गतिविधि चयन किए गए। इनमें शिकारा बोट राइड सर्वाधिक लोकप्रिय रही, जिसके लिए 120 चयन दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त हेरिटेज वॉक के लिए 95, बर्ड वॉक के लिए 70, योग के लिए 38 और हेलीकॉप्टर जॉय राइड के लिए 15 चयन दर्ज किए गए। ऐतिहासिक विरासत से प्रकृति के करीब पहुंचने तक का अनुभव भोपाल के कमला पार्क में आयोजित हेरिटेज वॉक के माध्यम से प्रतिनिधियों को शहर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिला। वहीं, एमपीटी बोट क्लब में आयोजित शिकारा बोट राइड ने जल पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य का आकर्षक अनुभव प्रदान किया। वन विहार क्षेत्र में आयोजित बर्ड वॉक के दौरान प्रतिनिधियों को पक्षियों और प्राकृतिक परिवेश के बीच समय बिताने का अवसर मिला। प्रतिनिधियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विभिन्न होटलों में योग गतिविधियां आयोजित की गईं। इसके साथ ही भेल ग्राउंड से आयोजित हेलीकॉप्टर जॉय राइड ने प्रतिभागियों के लिए रोमांच और उत्साह से भरपूर अनुभव प्रस्तुत किया। इन गतिविधियों ने मध्यप्रदेश में विरासत पर्यटन, जल पर्यटन, प्रकृति पर्यटन, वेलनेस टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की विविध संभावनाओं को प्रभावी ढंग से सामने रखा। प्रतिनिधियों ने साझा किए अपने अनुभव क्रिस्टीना ग्रुपे (Christina Grupe) ने हेरिटेज वॉक के अनुभव को सराहते हुए कहा, “मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा। हेरिटेज वॉक के माध्यम से किसी स्थान के इतिहास और उसकी जीवंत परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है। इस तरह की गतिविधियां पर्यटकों को किसी गंतव्य से भावनात्मक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।” निशिथ नोटानी (Nishith Notani) ने शिकारा बोट राइड के अनुभव पर कहा, “मध्यप्रदेश में जल पर्यटन की संभावनाएं बेहद आकर्षक हैं। शिकारा बोट राइड के दौरान प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण का आनंद लेना शानदार अनुभव रहा। ऐसी गतिविधियां पर्यटकों को यात्रा के दौरान सुकून के पल देने के साथ ही प्रदेश के पर्यटन अनुभव को और अधिक यादगार बनाती हैं।” डॉ. बितान कुमार दत्ता (Dr. Bitan Kumar Dutta) ने बर्ड वॉक के संबंध में कहा, “प्रकृति और जैव विविधता को करीब से देखने का अवसर किसी भी पर्यटन अनुभव को विशेष बना देता है। बर्ड वॉक के दौरान प्राकृतिक परिवेश के साथ जुड़ने का अनुभव मिला। मध्यप्रदेश में प्रकृति पर्यटन और वन्यजीव आधारित पर्यटन को आगे बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं।” बलराज कपूर (Balraj Kapoor) ने हेलीकॉप्टर जॉय राइड के अनुभव को रोमांचक बताते हुए कहा, “हेलीकॉप्टर जॉय राइड ने मध्यप्रदेश के पर्यटन अनुभव में रोमांच का एक नया आयाम जोड़ा। किसी गंतव्य को एक अलग दृष्टिकोण से देखने का अवसर यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। इस तरह की गतिविधियां प्रदेश में एडवेंचर टूरिज्म को नई पहचान देने में सहायक होंगी।”  आर्थर हेकर (Arthur Hecker) ने योग गतिविधि पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, “यात्रा के दौरान योग जैसी गतिविधियां शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने का अवसर देती हैं। मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट में पर्यटन के साथ वेलनेस को महत्व देना एक सकारात्मक पहल है। इससे यह संदेश मिलता है कि मध्यप्रदेश पर्यटकों को केवल दर्शनीय स्थल ही नहीं, बल्कि सुकून और आत्मिक शांति के अनुभव भी प्रदान कर सकता है।” सु चिरा फेट्रोम (Ms. Chira Phetrom) ने विभिन्न गतिविधियों के समग्र अनुभव पर कहा, “मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को शामिल करना बेहद सराहनीय है। यहां इतिहास, प्रकृति, रोमांच और वेलनेस को एक साथ अनुभव करने का अवसर मिलता है। इस तरह के आयोजन प्रदेश की विविध पर्यटन संभावनाओं को समझने और उन्हें व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” पर्यटन के विविध आयामों को एक मंच पर प्रस्तुत करने की पहल मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में आयोजित गतिविधियों ने यह प्रदर्शित किया कि प्रदेश में पर्यटन केवल ऐतिहासिक स्मारकों और प्रमुख दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां प्रकृति के सान्निध्य, जल पर्यटन, पक्षी अवलोकन, योग और रोमांचक अनुभवों की भी व्यापक संभावनाएं हैं। प्रतिनिधियों की सहभागिता और गतिविधियों के प्रति उनकी रुचि ने अनुभव आधारित पर्यटन की बढ़ती अहमियत को रेखांकित किया। इन गतिविधियों के माध्यम से मध्यप्रदेश की विविध पर्यटन विशेषताओं को प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला। ट्रैवल मार्ट ने प्रदेश को एक ऐसे पर्यटन गंतव्य के रूप में अनुभव करने का मंच प्रदान किया, जहां इतिहास, संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांच और वेलनेस का अनूठा संगम देखने को मिलता है।  

लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बदली अंशिता की जिंदगी, संघर्षों को मात देकर कॉलेज तक पहुंची बेटी

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार की लाड़ली लक्ष्मी योजना बेटियों की शिक्षा, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की राह मजबूत कर रही है। सागर जिले के सेक्टर पटोवा, परियोजना बंडा के आंगनवाड़ी केंद्र धबोली की बालिका अंशिता लोधी की कहानी इसका प्रेरणादायक उदाहरण है। बचपन में मां को खोने और पिता का साथ छूटने के बाद अंशिता का जीवन अनेक कठिनाइयों से घिर गया था। आर्थिक तंगी के बीच उसकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर परिवार भी चिंतित था, लाड़ली लक्ष्मी योजना से मिले आर्थिक संबल ने अंशिता के सपनों को नई उड़ान दी। आज अंशिता कॉलेज में अध्ययन कर रही है और अपने बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है। कठिन परिस्थितियों में बीता बचपन, शिक्षा के सामने थीं चुनौतियां वर्ष 2006 में एक बेहद गरीब परिवार में जन्मी अंशिता ने बचपन से ही विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। अभी वह छोटी ही थी, तभी उसकी मां का निधन हो गया। कुछ समय बाद पिता ने भी उसका साथ छोड़ दिया। ऐसी स्थिति में अंशिता के नाना-नानी और मामा ने उसकी देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण परिवार के सामने उसकी पढ़ाई जारी रखने और भविष्य सुरक्षित करने की चुनौती थी। परिवार चाहता था कि अंशिता पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बने, लेकिन आर्थिक कठिनाइयां उसके सपनों के रास्ते में बाधा बन रही थीं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की पहल से मिली नई राह इसी दौरान क्षेत्र में लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत सर्वे का कार्य चल रहा था। सर्वे के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गीता विश्वकर्मा को अंशिता और उसके परिवार की परिस्थितियों की जानकारी मिली। उन्होंने परिवार को बालिका के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा के महत्व और शासन की योजनाओं के बारे में समझाया। गीता विश्वकर्मा ने आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाने में सहयोग किया और अंशिता का आवेदन लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत करवाया। हर शैक्षणिक पड़ाव पर मिला आर्थिक संबल लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से अंशिता को स्कूली शिक्षा के विभिन्न चरणों में छात्रवृत्ति के रूप में आर्थिक सहायता मिली। कक्षा छठवीं में 6 हजार रुपये, कक्षा नौवीं में 4 हजार रुपये तथा कक्षा 11वीं और 12वीं में 6-6 हजार रुपये की छात्रवृत्ति ने उसकी पढ़ाई में सहयोग दिया। इस सहायता से परिवार को आर्थिक संबल मिला और अंशिता की शिक्षा निरंतर जारी रखने में मदद मिली। योजना से मिली सहायता ने परिवार के मन में यह विश्वास मजबूत किया कि बेटी की शिक्षा आर्थिक बोझ नहीं, बल्कि उसके भविष्य में किया जाने वाला महत्वपूर्ण निवेश है। अंशिता ने भी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई के प्रति अपना संकल्प बनाए रखा और एक-एक पड़ाव पार करते हुए आगे बढ़ती रही। किशोरावस्था में फिर आई चुनौती, लेकिन नहीं टूटा हौसला बारहवीं कक्षा पूरी करने के बाद अंशिता की आगे की पढ़ाई को लेकर परिवार के सामने एक बार फिर चिंता खड़ी हुई। सीमित संसाधनों के कारण मामा उसकी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित थे। ऐसे समय में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गीता विश्वकर्मा ने परिवार से संपर्क किया और उन्हें समझाया कि बेटी की शिक्षा रोकना उसके भविष्य के अवसरों को सीमित करना होगा। उन्होंने परिवार को आगे की पढ़ाई के महत्व से अवगत कराया और अंशिता को उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित किया। इस समझाइश का सकारात्मक असर हुआ। परिवार ने अंशिता की पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया और उसे कॉलेज में प्रवेश दिलाया। आज अंशिता कॉलेज में अध्ययनरत है और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ रही है।