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225 करोड़ की बड़ी मंजूरी: MP जिले में बनेंगी 254 नई सड़कें

विदिशा विदिशा जिले में गांव के टोला मजरा की 254 सड़कों की तस्वीर बदलेगी। जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में अनुमोदन मिलने के साथ ही बजट की स्वीकृति भी मिल गई है। मुख्यमंत्री मजरा-टोला योजना के तहत 218.89 किमी लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इस पर 109.44 करोड़ रुपए का बजट खर्च होगा। जिला पंचायत अध्यक्ष गीता रघुवंशी के अनुसार सिरोंज में सबसे अधिक 64 बसाहटों के लिए 46.87 किमी लंबी सड़कों को मंजूरी दी गई है। इन सड़कों का निर्माण 23.43 करोड़ रुपए से होगा। इन क्षेत्रों में भी बनाई जाएंगी नई सड़कें इसी प्रकार लटेरी क्षेत्र में 55 बसाहटों के लिए 33.72 किमी लंबी सड़क बनाई जाएगी। नटेरन में 32 और ग्यारसपुर में 30 बसाहटों को मुख्य मार्गों से जोड़ा जाएगा। गंजबासौदा में 27 और कुरवाई की 25 बसाहटों के लिए सड़क निर्माण के प्रस्ताव पास किए गए है। विदिशा जिला मुख्यालय से जुड़े 21 बसाहटों में 34.91 किमी लंबी सडकों का जाल बिछेगा। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि कैलाश रघुवंशी के अनुसार सड़कों के निर्माण को लेकर जल्द ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शमशाबाद विधानसभा में 116 करोड़ से बनेंगी 9 सड़कें शमशाबाद विधानसभा क्षेत्र में 116 करोड़ की लागत से 9 सड़कों का निर्माण हो सकेगा। बजट में इन सडकों के लिए राशि घोषित कर दी गई है। विधायक सूर्य प्रकाश मीणा के अनुसार इन सभी सड़कों की लंबाई 77 किलोमीटर है। स्वीकृत सडकों के संबंध में बताया कि करारिया शमशाबाद मार्ग की लंबाई 34 किमी है। इस मार्ग की सड़क 75 करोड़ रुपए से तैयार होगी। इसी प्रकार खामखेड़ा कस्बा से बालाबरखेड़ा तक 10 किमी लंबी सड़क 15.22 करोड़ से बनेगी। ग्राम कागपुर से गढ़ला सुरई मूढरा से होते हुए ग्राम परस परसौरा तक 7 किमी लंबी सडक 5.40 करोड़ रुपए से तैयार की जाएगी। शमशाबाद रोड से कोटरा नामाखेड़ी कोठीचार कलां, सूखा सेमरा मार्ग सांकलखेड़ा, पुरेनिया से गंगरवाड़ा और सेमरा पहुंच मार्ग में 5.60 किमी लंबी सडक 4.50 करोड़ रुपए से बनेगी। सूखा नीमखेड़ा, परासी गूजर मार्ग की 5.50 किमी लंबी सडक 4.40 करोड़ रुपए से बनेगी। कोटी चार पहुंच मार्ग में 2.20 किमी लंबी सडक 1.76 करोड़ रुपए से बनेगी। खामखेड़ा, वामनखेड़ा, वांसखेड़ा मार्ग में 2 किमी लंबी सड़क के लिए 1.60 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। खामखेड़ा लोधाखेड़ी से गंगरवाड़ा मार्ग में 3 किमी लंबी सडक के लिए 2.40 करोड़ रुपए और पौआनाला से चटुआ मार्ग में 7 किमी लंबी सड़क के लिए 5.60 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। विधायक के अनुसार इन सडकों के निर्माण को लेकर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

बोर्ड परीक्षाओं की कॉपी जांच लेट, 90 लाख उत्तरपुस्तिकाएं अटकीं – सामने आया कारण

भोपाल बोर्ड परीक्षा में शामिल स्टूडेंट के लिए रिजल्ट का इंतजार लंबा होगा। कॉपियों की जांच करने शिक्षकों की कमी हो रही है। शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगाई जा रही है। ऐसे में कॉपियों को जांचने अब शिक्षक नहीं मिल रहे हैं। प्रदेश में 16 लाख स्टूडेंट बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। इनकी 90 लाख कॉपियां हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल से कक्षा बारहवीं की परीक्षा 10 फरवरी से शुरू हुई। 7 मार्च को परीक्षा खत्म होगी। इसी तरह दसवीं की परीक्षा 13 फरवरी से शुरू हुई। ये 6 मार्च तक जारी रहेगी। कॉपियों की जांच और रिजल्ट तैयार करने में डेढ़ से दो माह का समय लगता है। इसी के बीच ट्रेनिंग सहित शिक्षकों को दूसरे काम रहेंगे। ऐसे में प्राइवेट स्कूलों की मदद लेने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। जनगणना में शिक्षक ज्यादा जानकारी के अनुसार, जनगणना में सबसे ज्यादा शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इनकी संख्या 25 से 30 हजार बताई जा रही है। इनमें से अधिकांश वैसे शिक्षक हैं, जिन्हें बोर्ड की कॉपियां जांचने की जिम्मेदारी दी जानी है। एक समय में दो काम होने के कारण यह परेशानी होगी।   देरी का गणित एक नजर में कुल परीक्षार्थी: 16 लाख (10वीं और 12वीं मिलाकर) कॉपियां: 90 लाख , रिजल्ट तैयार करने में दो माह का अनुमानित समय देरी हुई तो कॉलेज एडमिशन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर असर।

स्पीड बनी जानलेवा! 7 साल में 1397 लोगों की मौत, फिर भी नहीं थम रही रफ्तार

भिंड नेशनल हाईवे 719 और 552 पर तेज गति सडक़ हादसों की वजह बन रही है। अकेले शहर के बायपास रोड पर ही एक माह में पांच लोग मौत के गाल में समा गए हैं। इन सभी हादसों के पीछे वाहनों की अनियंत्रित गति और चालकों की लापरवाही सामने आई है। हाइवे पर भले ही वाहनों की गति निर्धारित हो लेकिन चालक बेलगाम वाहनों को दौड़ा रहे हैं। इसके बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। यातायात विभाग के पास इकलौता स्पीडोमीटर है उसका भी उपयोग नहीं किया जा रहा है। बता दें भिण्ड-ग्वालियर नेशनल हाईवे पर कार की अधिकतम स्पीड 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित है। एमपीआरडीसी ने इसको लेकर बोर्ड भी लगाए है, लेकिन हाईवे पर कार 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भी अधिक दौड़ती हैं। ट्रक, डंपर और हैवी वाहनों की स्पीड 60 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है वह भी इससे अधिक दौड़ते हैं जो कि हादसे का कारण बनते हैं। इसी तरह भिण्ड-भांडेर रोड पर बड़े वाहनों की स्पीड 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित है, मगर वाहन 70 से 80 किमी प्रति घंटा तक फर्राटे भरते हैं। कार की स्पीड 80 किमी है, वह भी नियंत्रित गति से अधिक तेज दौड़ती हैं। इस तरह चेक करते हैं स्पीड जिस वाहन की स्पीड चेक करनी होती है, उसके लिए पांच सौ मीटर की रैंज में टारगेट निर्धारित करके गाड़ी को लॉक किया जाता है। वाहन की पूरी जानकारी मशीन में लगे कैमरा में फीड हो जाती है। उसकी स्पीड और फोटो स्पीडो मीटर में पहुंच जाती है। निर्धारित गति से अधिक स्पीड में वाहन चलाने पर तीन हजार रुपए का जुर्माना का प्रावधान है।   एक साल में 347 चालान पिछले एक साल में यातायात पुलिस ने दोनों हाईवे पर 347 वाहनों पर चालानी कार्रवाई की है। यातायात पुलिस की मानें तो स्पीडोमीटर में वाहन का टारगेट तय करने में समस्या आती है। जिले में स्पीडोमीटर लावन मोड़, डिड़ी, दीनपुरा, लहार रोड पर मानपुरा के पास लगाया जाता है। वहीं सबसे बड़ी समस्या यह है कि बायपास रोड पर स्पीडोमीटर काम नहीं करता है। क्योंकि वाहनों की स्पीड के लिए 500 मीटर का सीधा मार्ग होना चाहिए। बायपास पर ट्रैफिक अधिक होने के कारण स्पीड चेक करने के लिए जब वाहन का टारगेट फिक्स किया जाता है तो पीछे से दूसरा वाहन क्रॉस करने पर संबंधित वाहन की स्पीड कैमरे में लॉक नहीं हो पाती है। साल हादसे मृतक घायल     2019 699 172 724     2020 656 160 700     2021 645 209 669     2022 714 198 803     2023 639 197 784     2024 687 219 754     2025 671 242 721

शिक्षा में बड़ा बदलाव: 10वीं के बाद डिप्लोमा को 12वीं के समकक्ष मान्यता

भोपाल स्टूडेंट्स को बड़ी राहत मिल गई है। अब 10वीं के बाद किए डिप्लोमा कोर्स को अब 12वीं कक्षा के समकक्ष मान्यता दर्जा मिलेगा। इससे छात्रों को इंजीनियरिंग, एमबीए कॉलेजों में आसानी से प्रवेश मिल सकेगा। यह निर्णय राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) की गुरुवार को हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया। साथ ही जबलपुर के प्रतिष्ठित संस्थान टीआइटी जबलपुर और ज्ञानगंगा जबलपुर को ऑटोनोमस (स्वायत्त) का दर्जा प्रदान किया गया। बैठक में शोध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय हुए। उठाया गया महत्वपूर्ण कदम कुल 23 पीएचडी स्कॉलर्स की डिग्री पर अंतिम मुहर लगाई गई। वहीं 20 शोधार्थियों को यूजीसी पीएचडी फेलोशिप प्रदान करने पर सहमति बनी। इसके अलावा इंजीनियरिंग, एमबीएम सहित अन्य संबद्ध कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता की समीक्षा की गई, जिन्हें निरंतरता देते हुए मान्यता बहाल रखने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह फैसले तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।   छात्रों को यह होगा फायदा     उच्च शिक्षा में प्रवेश आसान: डिप्लोमा धारक अब 12वीं के समकक्ष पात्र माने जाएंगे।     प्रतियोगी परीक्षाओं में अवसर: कई सरकारी एवं निजी नौकरियों के लिए पात्रता आसान होगी।     बेहतर पाठ्यक्रम: ऑटोनोमस कॉलेज उद्योग आधारित सिलेबस लागू कर सकेंगे।     शोध को बढ़ावा: पीएचडी डिग्री और फेलोशिप से रिसर्च संस्कृति मजबूत होगी।     मान्यता की निरंतरता: संबद्ध कॉलेजों की स्थिरता से छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

Census 2027: डिजिटल होगी जनगणना, 800 लोगों की जिम्मेदारी एक कर्मचारी पर

भोपाल Census 2027: जिला जनगणना समन्वय समिति की दो दिवसीय ट्रेनिंग और बैठक गुरुवार को खत्म हो गई। बैठक में जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल मोड में करने से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई। स्पष्ट किया गया कि एक कर्मचारी 800 नागरिकों की डिटेल मोबाइल ऐप से जमा कराएगा। लोग खुद भी अपने परिवार की डिटेल भर सकेंगे। 16 अप्रेल से इसके लिए मोबाइल ऐप समेत विभिन्न माध्यमों से डिटेल जमा करने का अवसर मिलेगा। एक मई से हाउसहोल्ड सर्वे शुरू होगा। जनगणना का काम फरवरी 2027 में होगा। बैठक में अपर कलेक्टर प्रकाश नायक, पीसी शाक्य, जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुह्रश्वता, एसडीएम, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर सहित समिति के सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जनगणना कार्य निदेशालय संयुक्त निदेशक नामित यादव, सहायक निदेशक ऐन्सी रेजी ने प्रशिक्षण दिया। 10 लाख घरों की होगी मैपिंग 01 मई से शुरू हो रही जनगणना के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार नागरिक डिजिटल तरीके से अपनी जानकारी सरकार तक पहुंचा सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी देने नागरिकों को इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।   यहां नागरिकों से 33 तरह के प्रश्नों का जवाब मांगा जाएगा। यही जवाब मांगने 'डोर टू डोर' सर्वे भी होगा। जनगणना के लिए 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। अभियान के तहत 10 लाख घरों की मैपिंग करने का टारगेट तय किया गया है। घरों की जियो टैगिंग से मैपिंग करने के बाद कर्मियों को रवाना किया जाएगा।  

Census 2027 बड़ा बदलाव: हर घर को मिलेगा अलग ID, सरकार बनाएगी नया डेटा सिस्टम

खंडवा देश में हर 10 साल में होने वाली जनगणना इस बार 2027 में होगी। जनगणना से पहले मई 2026 से घरों की गिनती का काम शुरू होगा। हर घर को अलग पहचान एक यूनिक नंबर के रूप में मिलेगी। जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर चार्ज अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुआ। प्रशिक्षण में कलेक्टर व प्रमुख जनगणना अधिकारी ऋषव गुप्ता ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक 10 वर्ष में होने वाली जनगणना के कार्य के लिए पूरी गंभीरता से ट्रेनिंग लें। मकानों के नंबरिंग की प्रक्रिया समझाई कलेक्टर ने बताया कि बताया कि जनगणना के लिए 15 से 30 अप्रैल 2026 तक नागरिकों को उनकी जानकारी जनगणना पोर्टल में स्वयं ही भरने की सुविधा दी जाएगी। जनगणना-2027 के तहत मई-2026 माह में सर्वे कर घरों की लिस्टिंग का कार्य शुरू हो जाएगा। प्रशिक्षण में मकानों के सूचीकरण तथा नंबरिंग की प्रक्रिया अधिकारियों को समझाई गई। अधिकारियों को बताया गया कि कोई भी मकान सूचीकरण से छूटना नहीं चाहिए। प्रत्येक मकान को देना होगा नंबर प्रत्येक मकान को एक अलग नंबर देना होगा। प्रशिक्षण में बताया गया कि फरवरी 2027 में घर-घर जाकर जनगणना की जानकारी एकत्र की जाएगी। प्रशिक्षणमें अधिकारियों को भारत की जनगणना के संबंध में संक्षिप्त परिचय एवं नीति निर्माण सहित जनगणना-2027 के मुख्य बिंदुओं एवं प्रक्रियाओं के बारे में अवगत कराया गया। 700 से 800 की जनसंख्या पर एक ब्लॉक कलेक्टर ने बताया कि जनगणना के लिए 700 से 800 की जनसंख्या पर एक ब्लॉक बनाया जाएगा। एक ब्लॉक पर एक एन्युमेटर की नियुक्ति की जाएगी। छह एन्युमेटर पर एक सुपरवाइजर रहेगा, जो संबंधित चार्ज अधिकारी को रिपोर्ट करेगा। प्रशिक्षण के दौरान जनगणना 2027 के लिए डेटा कलेक्शन और जांच की प्रक्रिया के संबंध में भी बताया गया। प्रशिक्षण भोपाल से आए संभाग प्रभारी अभिमन्यु अरोरा और जिले के जनगणना प्रभारी जेएल साकेत द्वारा दिया गया। ट्रेनिंग में जिले के सभी एसडीएम, आयुक्त नगर निगम, तहसीलदार तथा सीएमओ उपस्थित रहे।  

सड़क दुर्घटनाओं में पीएम राहत योजना से मिलेगी डेढ़ लाख तक की मुफ्त चिकित्सा सुविधा, जबलपुर के 92 अस्पताल होंगे शामिल

जबलपुर  सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को अब सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत और मुफ्त इलाज मिलेगा. एक्सीडेंट के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचने पर शुरुआती डेढ़ लाख का खर्चा सरकार वहन करेगी. यह खर्च प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत दिया जाएगा. इलाज सरकार के द्वारा सूचीबद्ध अस्पतालों में ही होगा. जबलपुर में 92 अस्पतालों को इम्पैनल किया गया |  मरीज की जान बचाना पहली प्राथमिकता एक्सीडेंट होने के बाद शुरुआती समय किसी भी मरीज को बचाने में सबसे महत्वपूर्ण होता है. यदि एक्सीडेंट के तुरंत बाद इलाज शुरू हो जाए तो मरीज को बचाया जा सकता है. लेकिन ऐसा नहीं हो पता क्योंकि निजी अस्पताल इस बात से डरते हैं कि यदि उन्होंने इलाज शुरू कर दिया तो इसका बिल कौन देगा. कई बार मरीज की कोई जानकारी नहीं होती तो वहीं दूसरी समस्या पुलिस की ओर से होती है कि जब तक पुलिस जांच ना कर ले तब तक इलाज शुरू नहीं हो पाता. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा |  एक्सीडेंट में घायल व्यक्तियों के लिए पीएम राहत योजना जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि "इन्हीं समस्याओं को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएम राहत योजना शुरू की गई है. इसके तहत एक्सीडेंट के तुरंत बाद जब एंबुलेंस से कोई मरीज किसी अस्पताल पहुंचेगा तो इसी शुरुआती गोल्डन ऑवर में अस्पताल को मरीज को इलाज देना होगा. एक्सीडेंट के मामले में शुरुआती डेढ़ लाख का खर्चा सरकार उठाएगी. इलाज कैशलेस होगा |  जबलपुर के 92 अस्पताल शामिल इस योजना में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को भी शामिल किया गया है. जबलपुर में ऐसे 92 अस्पतालों को इम्पैनल किया गया है, जहां एक्सीडेंट के तुरंत बाद घायल का इलाज शुरू हो जाएगा. इसमें किसी को भी इस बात की चिंता नहीं करनी होगी कि इसका पैसा कौन देगा. कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि "भले ही घायल आयुष्मान कार्ड धारी है या नहीं है, इसका भी इस योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यह पैसा पीएम राहत के माध्यम से भुगतान करवाया जाएगा |  पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि "यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी ताकि पुलिस को भी इस मामले की जानकारी हो और यदि पुलिस को कोई कार्रवाई करनी है तो वह भी साथ में होती रहे लेकिन किसी भी स्थिति में घायल का इलाज नहीं रुकेगा |  कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि "रोड एक्सीडेंट के मामले में वाहनों का इंश्योरेंस होता है और शासन जो पैसा खर्च करेगा वह पैसा इंश्योरेंस के माध्यम से वसूला जाएगा. वहीं कुछ ऐसे वाहन जिनका बीमा नहीं होता है और यदि वे एक्सीडेंट करते हैं तो इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी लेकिन इसकी वसूली का काम शासन का होगा |  घायलों के लिए अच्छा कदम जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि "यह बहुत ही अच्छा कदम है आम आदमी को यदि इसकी जानकारी होगी तो बहुत सारे घायलों को बचाया जा सकता है. क्योंकि एक्सीडेंट के मामले में अक्सर लोग मरीजों की मदद करने में डरते हैं कई बार पुलिस परेशान करती है तो कई बार लोगों के पास मदद करने लायक पैसा नहीं होता यदि यह दोनों ही सहूलियत हो जाए तो सड़क पर मरने वालों की संख्या घट सकती है |     

किसानों के लिए खुशखबरी! 2585 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदेगी सरकार, ये काम करना होगा अनिवार्य

भोपाल मध्यप्रदेश में इस बार समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी 2585 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार तैयारियों में जुटी है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को पंजीयन कराना जरूरी है। पंजीयन का काम 7 मार्च तक जारी रहेगा। प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया ​कि समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए अब तक एक लाख 81 हजार 793 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन जरूर करा लें। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 27175, उज्जैन में 73398, ग्वालियर में 3358, चंबल में 1449, जबलपुर में 12342, नर्मदापुरम में 11698, भोपाल में 41268, रीवा में 3242, शहडोल में 726 और सागर संभाग में 7137 किसानों ने पंजीयन कराया है। उन्होंने बताया कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपए प्रति क्विंटल एमपी में गेहूं खरीदी के लिए इस बार कुल 3186 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। यह पिछले साल से 160 रूपए अधिक है।   पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों पर पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। तहसील कार्यालयों के सुविधा केंद्रों और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंदों पर भी निशुल्क पंजीयन किए जा रहे हैं। इधर एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केंद्रों और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफों पर पंजीयन का शुल्क देना होगा।

बिजली व्यवस्था होगी मजबूत: फूलबाग सब-स्टेशन में जुड़े दो फीडर, डेढ़ लाख लोगों को फायदा

ग्वालियर गर्मी के मौसम में बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए बिजली कंपनी ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। शहर में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए फूलबाग स्थित 132 केवी सब-स्टेशन से दो नए फीडर जोडऩे की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन फीडरों के जुडऩे के बाद कुल छह फीडर इस सब-स्टेशन से संचालित होंगे, जिससे करीब डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, अभी तक 132 केवी फूलबाग सब-स्टेशन से 33 केवी के सेवा नगर, रोशनी घर, तानसेन नगर इंडस्ट्रियल एरिया और फूलबाग जोन के फीडरों को जोडक़र चार्ज किया जा चुका है। अब स्टेडियम और सिटी सेंटर फीडर को भी इससे जोडऩे की तैयारी अंतिम चरण में है। जैसे ही यह कार्य पूरा होगा, संबंधित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति अधिक स्थिर और सुचारू हो जाएगी। एचटी के उपमहाप्रबंधक राज मालवीय ने बताया, विगत वर्षों में गर्मियों के दौरान इन फीडरों का संचालन 220 केवी महलगांव सब-स्टेशन से किया जाता था। मोनो पोल-1, मोनो पोल-2 और स्टेडियम फीडर के माध्यम से सप्लाई दी जाती थी। अधिक लोड के कारण जम्पर और इंसुलेटर के फटने जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आती थीं, जिससे बार-बार फॉल्ट होते थे और उपभोक्ताओं को बिजली गुल की परेशानी झेलनी पड़ती थी। वैकल्पिक लाइन से तुरंत सप्लाई शुरू की जा सकेगी अब फूलबाग सब-स्टेशन से सप्लाई शुरू होने पर इन फीडरों का लोड संतुलित हो जाएगा। इससे ओवरलोड की समस्या कम होगी और फॉल्ट की घटनाओं में भी गिरावट आएगी। साथ ही चेंजओवर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी कारणवश एक फीडर बंद हो जाता है तो वैकल्पिक लाइन से तुरंत सप्लाई शुरू की जा सकेगी। इससे उपभोक्ताओं को लंबे समय तक अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा और बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी। रेलवे ने डेडीकेटेड फीडर की योजना टाली उपमहाप्रबंधक मालवीय ने बताया, पहले रेलवे ने फूलबाग सब-स्टेशन से 2500 केवी का डेडीकेटेड फीडर लेने की मांग की थी और इस संबंध में प्रारंभिक प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। हालांकि अब रेलवे ने इस प्रस्ताव को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है और डेडीकेटेड फीडर नहीं लेने का निर्णय लिया है।   बार-बार बिजली गुल की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी गर्मी से पहले विद्युत आपूर्ति को मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। फूलबाग सब-स्टेशन से छह फीडरों को जोडऩे का काम पूरा होते ही शहर के प्रमुख क्षेत्रों में ओवरलोड और बार-बार बिजली गुल होने की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

प्रॉपर्टी खरीदारों को झटका: भोपाल की 551 शहरी लोकेशन पर जमीन के दाम बढ़ेंगे

भोपाल भोपाल में जमीन और मकान खरीदना अब महंगा होने वाला है। जिला मूल्यांकन समिति ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए कलेक्टर गाइडलाइन का नया प्रस्ताव तैयार कर लिया है। शनिवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में शहर की कई प्राइम लोकेशन पर दरों में भारी बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है। कलेक्टर गाइडलाइन का नया प्रस्ताव तैयार भोपाल कलेक्ट्रेट में शनिवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में जिला मूल्यांकन समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित कलेक्टर गाइडलाइन का खाका पेश किया गया। पंजीयन अधिकारियों ने जिले भर की प्रॉपर्टी दरों की समीक्षा के बाद अपना प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा।   551 लोकेशन पर 11 प्रतिशत तक बढ़ेंगे दाम प्रस्ताव के अनुसार, जिले में प्रॉपर्टी की दरों में औसत वृद्धि करीब डेढ़ प्रतिशत प्रस्तावित की गई है। हालांकि, भोपाल के शहरी क्षेत्रों की स्थिति इससे अलग है। अधिकारियों ने बताया कि शहर की 551 चुनिंदा लोकेशन ऐसी हैं, जहां विकास और मांग को देखते हुए प्रॉपर्टी की दरों में 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है। इन क्षेत्रों में हाल के दिनों में संपत्तियों की रजिस्ट्री और बाजार मूल्यों में बड़ा उछाल देखा गया है।   राजस्व और विकास को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय बैठक में कलेक्टर ने पंजीयन अधिकारियों के प्रस्ताव पर चर्चा की और क्षेत्रवार दरों की समीक्षा की। इस वृद्धि के पीछे का मुख्य उद्देश्य बाजार दरों और सरकारी गाइडलाइन के बीच के अंतर को कम करना है। प्रस्तावित गाइडलाइन पर अब आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिससे शासन के राजस्व में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है।