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होली पर मध्य प्रदेश में दो दिन का अवकाश: तीन मार्च के साथ चार मार्च भी रहेगा सार्वजनिक अवकाश

भोपाल  मध्य प्रदेश में होली पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। प्रदेश के हजारों स्थानों पर सोमवार को होलिका दहन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस बार होली का मुख्य दिन कुछ अलग रहेगा, क्योंकि तीन मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान सूतक काल लागू रहता है और इस अवधि में उत्सव नहीं मनाया जाता है, इसलिए इस साल होली का रंगोत्सव दहन के दूसरे दिन के बजाए चार मार्च बुधवार को तीसरे दिन मनाया जाएगा।  राज्य सरकार ने पहले ही तीन मार्च को होली के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था, लेकिन अब रविवार को जारी नए आदेश के अनुसार, अब तीन और चार मार्च 2026 दोनों दिन सार्वजनिक और सामान्य अवकाश रहेगा। यह आदेश ‘निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881’ के तहत लिया गया है। धार्मिक और खगोलीय कारणों से होली उत्सव का दिन बदलना आवश्यक था, ताकि जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस बार होली उत्सव की शुरुआत दो मार्च की रात से होगी, जब पूरे राज्य में होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद रंग उत्सव चार मार्च को मनाया जाएगा। कन्फ्यूजन खत्म, अब मनाएं जश्न दरअसल, इस बार होली की तारीख को लेकर लोगों में काफी उलझन थी। कोई 3 मार्च को होली मनाने की तैयारी में था, तो कोई 4 मार्च को। दफ्तर जाने वालों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर छुट्टी कब मिलेगी? शासन ने अब इस भ्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया है। मध्य प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब होली के मौके पर लगातार दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। कर्मचारी संगठनों की जिद के आगे झुकी सरकार बता दें कि सरकार ने पहले सिर्फ 3 मार्च यानी कि मंगलवार की छुट्टी घोषित की थी। लेकिन कर्मचारी संगठनों का तर्क था कि चूंकि होली दो दिन मनाई जा रही है, इसलिए 4 मार्च को भी दफ्तर बंद रहने चाहिए। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास भेजा, जिस पर रविवार को मुहर लग गई। बैंक और दफ्तर सब रहेंगे बंद जारी अधिसूचना के मुताबिक, 4 मार्च को 'निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' के तहत छुट्टी घोषित की गई है। इसका मतलब यह है कि उस दिन सरकारी दफ्तरों के साथ-साथ सभी बैंक भी बंद रहेंगे। यह आदेश पूरे प्रदेश में समान रूप से लागू होगा। प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी जिलों में होली समारोह को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। बता दें, होली का पर्व धार्मिक रीति-रिवाज और खगोलीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए मनाया जाता है। जनता को रंगों और खुशियों के साथ-साथ सावधानी और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है। यह बदलाव इस पर्व को सुरक्षित और आनंददायक बनाने के लिए किया गया है। 

भगोरिया मेले में रील क्रेज़, 5 दिन में 3000 फॉलोअर्स बढ़े, ₹500 में मिल रही इंस्टेंट एडिटिंग सर्विस

झाबुआ  मांदल की थाप, उड़ता हुआ गुलाल और पारंपरिक वेशभूषा… भगोरिया का मेला हमेशा से अपनी इसी रौनक के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन इस बार मेले की तस्वीर थोड़ी बदली-बदली नजर आई। अब यहां युवा सिर्फ नाचने-गाने नहीं, बल्कि कंटेंट बनाने भी आ रहे हैं। ढोल बजते ही मोबाइल के कैमरे ऑन हो जाते हैं और देखते ही देखते अलीराजपुर और झाबुआ का यह पारंपरिक त्योहार इंस्टाग्राम की फीड पर छा जाता है। 5 दिन में 3 हजार फॉलोअर्स भगोरिया से जुड़े वीडियो पोस्ट करने वाले दीपक बताते हैं कि महज पांच दिनों में उनके पेज पर 3,000 नए फॉलोअर्स जुड़ गए। आलम यह है कि दिल्ली और मुंबई में रहने वाले लोग मैसेज करके पूछ रहे हैं कि अगला मेला कब और कहां लगेगा? पलायन की वजह से जो युवा बाहर चले गए थे, उनके लिए अब भगोरिया सिर्फ घर वापसी का जरिया नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर अपनी जड़ों को दिखाने का एक बड़ा मंच बन गया है। गहनों के साथ चश्मा और ब्रांडेड जूते मेले में आई कॉलेज स्टूडेंट रेखा लोहारिया कहती हैं, 'यह हमारा सबसे बड़ा त्योहार है। इसे सिर्फ यहां के लोग ही क्यों देखें? मेरे सूरत और अहमदाबाद के दोस्त हर साल मेरे वीडियो का इंतजार करते हैं।' दिलचस्प बात यह है कि इस बार फैशन में भी बदलाव दिखा। पारंपरिक चांदी के गहनों और कढ़ाई वाले ब्लाउज के साथ युवा धूप का चश्मा और ब्रांडेड जूते पहनकर कैमरे के सामने पोज देते नजर आए। ₹200 से ₹500 में 'इंस्टेंट रील' का धंधा इस ट्रेंड का फायदा स्थानीय फोटोग्राफर्स भी उठा रहे हैं। वे ₹200 से ₹500 के बीच मौके पर ही प्रोफेशनल रील्स बनाकर, एडिटिंग और म्यूजिक के साथ दे रहे हैं। हालांकि, बुजुर्ग इस बदलाव से थोड़े असहज हैं। झाबुआ के नत्थू सिंह कहते हैं, 'पहले लोग त्योहार में शामिल होने आते थे, अब सिर्फ रिकॉर्ड करने आते हैं।' बुजुर्गों की चिंता पर युवाओं का तर्क बुजुर्गों की चिंता पर युवाओं का अपना तर्क है। गुजरात की टेक्सटाइल यूनिट में काम करने वाले राकेश कहते हैं, 'हम अपनी पहचान दुनिया को दिखा रहे हैं। अगर हम इसे पोस्ट नहीं करेंगे, तो कोई और हमारी कहानी अपने तरीके से बताएगा।' भगोरिया अब सिर्फ एक मेला नहीं रह गया है, बल्कि एक डिजिटल ग्लोबल स्टेज बन चुका है।

बड़वानी के पानसेमल और वरला में 2 हजार 67 करोड़ रूपये लागत की माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति

कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़वानी के पानसेमल और वरला में 2 हजार 67 करोड़ रूपये लागत की माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति 86 जनजातीय ग्राम होंगे लाभान्वित मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक हुई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बड़वानी के नांगलवाड़ी में सोमवार को हुई नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक और नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में 1 हजार 207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत की पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 860 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत की वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता है, जिसे ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जा रही हैं। इन माइक्रो उद्वहन परियोजनाओं से बड़वानी जिले के लाभान्वित होने वाले पानसेमल तहसील के 53 ग्राम और वरला तहसील के 33 ग्राम ऊंचाई में स्थित होने, अल्पवर्षा क्षेत्र होने और भूजल स्तर अत्यंत कम होने से सिंचाई सुविधा से वंचित रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 11 जनवरी 2025 की घोषणा के अनुपालन में पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 14 नवंबर 2025 की घोषणा के अनुपालन में वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना की नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक में प्रशासकीय स्वीकृति की अनुशंसा की गई, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई है। पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में उपलब्ध होगी सिंचाई सुविधा पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से बड़वानी जिले की तहसील पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में लगभग 1,207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत से ग्राम सोंदुल से नर्मदा नदी से 7.20 क्यूमेक (74.65 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा, जिससे 53 जनजातीय ग्राम लाभान्वित होंगे। परियोजना अंतर्गत भूमिगत प्रेशराइज्ड पाइप्ड नहर प्रणाली से पाइपलाइन बिछाकर सिंचाई व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे कृषक सीधे स्प्रिंकलर और ड्रिप इरीगेशन पद्धति से खेतों में सिंचाई कर सकेंगे। परियोजना में कोई डूब क्षेत्र नहीं है। भूमिगत पाइपलाइन, राइजिंग मेन और ग्रैविटी मेन के लिए 48.79 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई भूअर्जन, पंप हाउस और ट्रांसमिशन लाइन निर्माण के लिए 4 हेक्टेयर स्थाई भूअर्जन तथा 18 हेक्टेयर वन भूमि का अर्जन किया जाएगा। परियोजना के तहत 3 पंप हाउस से कुल 339.67 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए 5 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जाएगा। परियोजना में कुल 34.60 मेगावाट विद्युत की आवश्यकता होगी जिस पर वार्षिक विद्युत व्यय 34 हजार 249 रुपए प्रति हेक्टेयर रहेगा। वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र होगा सिंचित वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना अंतर्गत बड़वानी जिले की तहसील अंजड़ के ग्राम मोहिपुरा से नर्मदा नदी से 4.96 क्यूमेक (51.42 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा जिससे तहसील वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना की कुल लागत 860 करोड़ 53 लाख रुपए प्राक्कलित की गई है, जिसमें 4 पंप हाउस के माध्यम से 390 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है। परियोजना में 30.5 मेगावाट विद्युत आवश्यकता होगी जिस पर 33 हजार 316 रुपए वार्षिक विद्युत व्यय प्रति हेक्टेयर रहेगा। परियोजना के लिए 30 हेक्टेयर वन भूमि, 204.13 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई तथा 7.5 हेक्टेयर निजी भूमि का स्थाई भूअर्जन किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव तथा उपाध्यक्ष, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि पानसेमल और वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं से लाभान्वित होने वाले ग्राम जनजातीय बहुल होने के साथ वन से घिरे हुए हैं। इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद बड़वानी जिले में कुल 70 प्रतिशत क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, जो वर्तमान में 60 प्रतिशत है। उन्होंने परियोजनाओं के विभिन्न घटकों का तकनीकी विवरण प्रस्तुत किया। बैठक में 10 नवंबर 2025 को आयोजित नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 268वीं बैठक तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल की 85वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि भी की गई।  

सीएम मोहन यादव का बड़ा कदम: होली और रमजान पर एमपी में हाई अलर्ट, सख्त सुरक्षा निर्देश

भोपाल  होली और रमजान समेत आगामी त्योहारों को लेकर मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद राजधानी भोपाल समेत प्रदेश भर में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार हाई अलर्ट मोड में है। सीएम मोहन यादव ने प्रदेशभर के अधिकारियों को सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। VC में दिए स्पष्ट और सख्त निर्देश, एमपी को बताया शांति का टापू वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई इस समीक्षा बैठक में प्रदेश भर के जिलों के एसपी ऑनलाइन शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी अफसरों को कहा कि मध्य प्रदेश शांति का टापू है, इसकी ये छवि बनाए रखना है। वहीं उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि शांति और सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। त्योहार खुशियों के हों, तनाव के नहीं- सीएम सीएम ने समीक्षा बैठक आयोजित कर वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि संवेदनशील इलाकों की पहचान कर उन क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया जाए। इसके साथ ही सोशल मीडिया मॉनिटरिंग तेज करने और अफवाहों पर तत्काल एक्शन करने और निपटने को कहा है। मोहन यादव ने बैठक में कहा कि त्योहारों का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, समाज को तोड़ना नहीं। प्रशासन प्राथमिकता तय करे कि आम नागरिक सुरक्षित और बेफिक्र होकर त्योहार मनाए। यहां जानें प्रशासन के खास इंतजाम संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च- जिन क्षेत्रों को संवेदनशील माना गया है, जहां पहले तनाव की घटनाएं सामने आई हैं, वहां पुलिस और प्रशासन संयुक्त रूप से फ्लैग मार्च करेगा। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी- भीड़भाड़ वाले बाजार, धार्मिक स्थल और जुलूस मार्गों पर ड्रोन कैमरों के साथ ही अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाएं गए हैं। शांति समितियों की बैठक– स्थानीय स्तर पर धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सामंजस्य की अपील की जा रही है। अफवाहों पर तुरंत कार्रवाई के आदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम आगि पर भ्रामक जानकारी पोस्ट करने पर, अफवाह फैलाने वालों पर साइबर सेल की नजर रहेगी। प्रशासन का फोकस- प्री एम्प्टिव एक्शन जानकारी के मुताबिक इस बार रणनीति केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एहतियात बरतना है। जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी छोटी घटना को हल्के में न लें। रात के समय गश्त बढ़ाई जाए। जुलूस मार्गों पर जुलूस पूर्व जांच की जाए। राजनीतिक और सामाजिक संदेश सीएम मोहन यादव ने यह भी संकेत दिए हैं कि त्योहारों को लेकर किसी तरह की राजनीति या उकसावों की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो, ताकि आमजन में भरोसा कायम रहे। बता दें कि रमजान के बीच होली पर्व आने से प्रशासन के लिए सौहार्द्र और शांति बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। क्योंकि एक तरफ रंग-गुलाल और जुलूसों का माहौल होता है, तो दूसरी तरफ रोजा और इबादत की पाबंदियों का समय। ऐसे में समय, मार्ग और कार्यक्रमों में समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाता है। जन-जन से अपील अफवाहों पर ध्यान न दें संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी का ध्यान रखते हुए कोई भी पोस्ट शेयर करें सांप्रदायिक सौहार्द्र और शांति बनाए रखें

एमपी में मौसम ने पकड़ी रफ्तार, 35 डिग्री तक पहुंचा पारा, अप्रैल-मई में हालत और बिगड़ने का अनुमान

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च ने आते ही तेवर दिखा दिए हैं। महीने के पहले ही दिन प्रदेश के कई शहरों में तापमान 30 डिग्री के पार पहुंच गया, जबकि निमाड़ क्षेत्र के खरगोन में पारा 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में भी तेज धूप ने लोगों को गर्मी का अहसास करा दिया। मौसम विभाग का अनुमान है कि अप्रैल और मई सबसे ज्यादा तपिश भरे रहेंगे। ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पारा 45 डिग्री के पार जा सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी भीषण गर्मी की चपेट में रहेंगे।  अगले 4 दिन और चढ़ेगा पारा मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले चार दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। यानी मार्च की शुरुआत ही तपिश भरी रहने वाली है। दिन के साथ रात का तापमान भी धीरे-धीरे ऊपर जाएगा। रविवार को पचमढ़ी को छोड़ प्रदेश के लगभग सभी शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री या उससे ज्यादा दर्ज किया गया। धार, गुना, खंडवा, श्योपुर, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, सतना और सिवनी जैसे जिलों में पारा 33 डिग्री से ऊपर पहुंच गया। रातें भी हो रहीं गर्म फरवरी के आखिर और मार्च की शुरुआत में रात का तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है। जबलपुर में न्यूनतम तापमान 19.3 डिग्री और सतना में 18.2 डिग्री दर्ज किया गया। धार, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, सागर, टीकमगढ़ और उमरिया समेत कई शहरों में रात का पारा 17 डिग्री से अधिक रहा। रंगपंचमी पर बदल सकता है मौसम गर्मी के बीच राहत की भी उम्मीद है। 4 मार्च से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में सक्रिय हो रहे नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर दो दिन बाद मध्य प्रदेश में देखने को मिल सकता है। इसके चलते रंगपंचमी के आसपास कुछ जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। यदि सिस्टम सक्रिय रहता है तो तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव भी हो सकता है। 40 डिग्री तक पहुंच सकता है पारा पिछले वर्षों के ट्रेंड पर नजर डालें तो मार्च में दिन गर्म, रातें अपेक्षाकृत ठंडी और बीच-बीच में बारिश का दौर देखने को मिलता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही संकेत मिल रहे हैं। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन का तापमान 40 डिग्री तक पहुंच सकता है, जबकि रातें 10 से 17 डिग्री के बीच रह सकती हैं। ग्वालियर में तापमान में उतार-चढ़ाव सबसे ज्यादा देखने को मिलता है।  

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: गोवंश प्रतिषेध प्रकरण में अपीलीय आदेश खारिज, याचिकाकर्ता को मिली राहत

जबलपुर  जबलपुर ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनवाई पूरी कर सुनाई गई सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए अपीलीय न्यायालय ने एक अन्य व्यक्ति के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत कार्रवाई के आदेश जारी किए थे। इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ए.के. सिंह की एकलपीठ ने अपीलीय कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। छिंदवाड़ा निवासी मोहम्मद नासिर कुरैशी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने कोमल सोलंकी को मध्य प्रदेश गोवंश प्रतिषेध अधिनियम, 2004 की धारा 9 तथा मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 सहपठित धारा 192 के तहत 9 अप्रैल 2019 को दोषी ठहराया था। उक्त निर्णय के खिलाफ कोमल सोलंकी ने अपील प्रस्तुत की थी।अपील की सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशंस जज ने वाहन मालिक एवं याचिकाकर्ता के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि धारा 319 के अंतर्गत किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई तभी संभव है, जब ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों में उसकी स्पष्ट भूमिका सामने आए। पुलिस द्वारा कोमल सोलंकी के विरुद्ध प्रस्तुत चार्जशीट में याचिकाकर्ता की किसी भी प्रकार की भूमिका का उल्लेख नहीं था। ट्रायल के दौरान पेश तीन गवाहों ने भी याचिकाकर्ता के संबंध में कोई आरोप नहीं लगाया। एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अपीलीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश विधि-सम्मत नहीं है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसा सिद्धांत आपराधिक न्यायशास्त्र में मान्य नहीं है, अतः इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता। परिणामस्वरूप, अपीलीय कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ए. उस्मानी ने पैरवी की।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में गिद्धों की संख्या 951, सात प्रजातियों की पहचान, सर्वे में मिले अहम आंकड़े

जबलपुर  मध्य प्रदेश वन विभाग के निर्देशानुसार वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 20 से 22 फरवरी 2026 तक गिद्धों की त्रिदिवसीय गणना सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों की वास्तविक संख्या, उनकी प्रजातियों और आवास की स्थिति का आकलन करना था। वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 20 फरवरी को 951, 21 फरवरी को 741 तथा 22 फरवरी को 844 गिद्ध दर्ज किए गए। तीन दिनों के दौरान अलग-अलग स्थलों पर की गई इस गणना में गिद्धों की उल्लेखनीय उपस्थिति सामने आई, जो क्षेत्र में अनुकूल पर्यावरण और संरक्षण प्रयासों की सकारात्मक स्थिति को दर्शाती है। वर्ष 2026 के सर्वेक्षण में कुल सात प्रजातियों की पहचान की गई। इनमें सबसे अधिक संख्या भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर) की पाई गई, जबकि व्हाइट रंप्ड गिद्ध भी बड़ी संख्या में दर्ज किए गए। इजिप्शियन गिद्ध की संख्या मध्यम स्तर पर रही, वहीं रेड-हेडेड वल्चर अपेक्षाकृत कम संख्या में मिले। इसके अलावा यूरेशियन ग्रिफॉन, हिमालयन ग्रिफॉन और सिनेरियस गिद्ध जैसी प्रवासी प्रजातियों की उपस्थिति भी दर्ज की गई। इन दुर्लभ एवं प्रवासी प्रजातियों की मौजूदगी टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गिद्धों की नियमित मॉनिटरिंग और संरक्षण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उनकी संख्या में स्थिरता और वृद्धि की उम्मीद है। भविष्य में भी इस तरह की वैज्ञानिक गणना जारी रखी जाएगी, ताकि गिद्धों के संरक्षण के लिए ठोस रणनीति बनाई जा सके।

मध्य प्रदेश में 600 किसान आंदोलन, मोहन सरकार के दो साल में हर महीने 25 प्रदर्शन, सागर में सबसे ज्यादा

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार इस साल यानी 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के तौर पर मना रही है। सरकार का फोकस खेती की लागत घटाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने पर है। दूसरी तरफ, प्रदेश में हर महीने औसतन 25 किसान आंदोलन हो रहे हैं। विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने पूछा कि 1 जनवरी 2024 से लेकर फरवरी 2026 तक भोपाल सहित मध्य प्रदेश में कितने आंदोलन हुए? इन आंदोलनों में पुलिस से झड़प में कितने किसानों की मौतें हुईं? कितने किसान घायल हुए? इन आंदोलनों के दौरान कितने किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए गए? इनमें से कितने मामलों में खात्मा लगाया गया?इसके जवाब में गृह विभाग की ओर से बताया गया कि जनवरी 2024 से फरवरी 2026 तक प्रदेशभर में करीब 609 किसान आंदोलन हुए हैं। खरगोन जिले में किसानों के 61 आंदोलन मोहन सरकार के कार्यकाल में सागर जिले में सबसे ज्यादा किसानों के 76 आंदोलन और प्रदर्शन हुए हैं। दूसरे नंबर पर खरगोन जिले में 61 आंदोलन हुए। ग्वालियर जिले में 44, नरसिंहपुर, खंडवा और रीवा में 38-38 आंदोलन हुए। जबलपुर से सटे कटनी जिले में दो साल में 35 किसान आंदोलन हुए हैं। आंदोलन करने में RSS का सहयोगी संगठन सबसे आगे प्रदेश में दो साल में सबसे ज्यादा किसान आंदोलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ ने किए। इसके बाद भारतीय किसान यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा सहित तमाम किसान संगठनों ने आंदोलन धरना, प्रदर्शन किए। इन्हीं दो साल में मध्य प्रदेश कांग्रेस और किसान कांग्रेस ने करीब 37 आंदोलन किए हैं। 3 महीने में दो बार किसानों के सामने झुकी सरकार हाल ही में मोहन सरकार किसानों के सामने दो बार झुक चुकी है। पहली बार उज्जैन सिंहस्थ के लिए जमीन अधिग्रहण मामले में सरकार ने लैंड पूलिंग एक्ट वापस लिया था। इसके बाद उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर रोड की ऊंचाई कम करने का फैसला लेना पड़ा। दोनों ही मामले में किसानों के विरोध और दबाव के बाद सरकार को कदम वापस लेने पड़े। इन जिलों में इन वजहों से हुए आंदोलन भाजपा से जुड़े किसान संगठनों द्वारा सीहोर, हरदा, विदिशा, देवास और राजगढ़ जिलों में गेहूं-धान की खरीदी में देरी, समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद, भुगतान लंबित रहने, बारदाना और तौल व्यवस्था की समस्याओं को लेकर आंदोलन किए गए। कई जगह किसानों ने 2700 से 3100 रुपए समर्थन मूल्य पर खरीद की मांग उठाई। नर्मदापुरम और बैतूल जिलों में अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से फसल नुकसान के बाद बीमा राशि और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों में प्याज, लहसुन और सोयाबीन के दाम गिरने के साथ मंडी व्यवस्था की समस्याओं को लेकर आंदोलन किए गए। वहीं, छतरपुर, टीकमगढ़ और बुंदेलखंड क्षेत्र के जिलों में सिंचाई, नहरों में पानी और बिजली आपूर्ति की समस्याओं को लेकर किसान सड़कों पर उतरे। जबकि शाजापुर और आगर-मालवा जिलों में खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था और तौल में गड़बड़ी के विरोध में आंदोलन हुए। कांग्रेस के इन मुद्दों पर किसान आंदोलन कांग्रेस और उसके संगठनों द्वारा मंदसौर, शाजापुर और उज्जैन जिलों में किसानों का कर्ज माफ करने और फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किए गए। सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में सोयाबीन-गेहूं के दाम और खरीदी की समस्याओं को लेकर आंदोलन हुए। छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में आदिवासी किसानों की जमीन, मुआवजा और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन हुए। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सिंचाई के पानी, बिजली बिल और खाद-बीज संकट को लेकर किसान आंदोलनों का आयोजन किया गया। वहीं, भोपाल और सीहोर जिलों में ओलावृष्टि और बारिश से नुकसान के बाद राहत और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए।

‘डायरेक्ट ड्राइव’ ऑटो सिग्नल सिस्टम से ट्रेनें दौड़ेंगी तेज, 33.86 किमी. पर बढ़ेगी गति

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल ने रेलवे सिग्नलिंग में बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। कुरवाई केथोरा-मंडी बामोरा-कालहार खंड के कुल 33.86 किमी. डबल लाइन पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली को कमीशन किया है। इस सेक्शन में ट्रेन के प्रवेश करते ही सुरक्षित सिग्नल रिसीव और फॉरवर्ड होंगे। इसी के साथ जैसे-जैसे ट्रेन आगे जाएगी, वैसे सिग्नल क्लीयर होते जाएंगे। कुल मिलाकर एआइ सिस्टम जैसी इस तकनीक में मानवीय त्रुटि की आशंका काफी कम होगी। खास बात यह है कि यहां पहली बार डायरेक्ट ड्राइव मॉड्यूल आधारित तकनीक उपयोग की है। इस प्रणाली में ब्लॉक सेक्शन के ऑटो सिग्नलों को सीधे वे साइडकैबिनेट के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। इससे पहले की पारंपरिक व्यवस्था पर निर्भरता कम होगी। इससे सिस्टम तेज, भरोसेमंद और रखरखाव में आसान बनेगा। दो नए ऑटो हट बनेंगे भोपाल मंडल के कुरवाई- कैथोरा मंडी बामोरा के बीच इस सिस्टम के लगने के बाद नए ऑटो हट बनाए जाएंगे। ऑटो हट में मॉनीटरिंग सिस्टम होगा, जो पूरा डेटा ट्रांसमिशन स्पीड और साइबर अटैक से सुरक्षा दिलाएगा। भोपाल-बीना-इटारसी बनेगा फ्रेट कॉरिडोर भोपाल रेल मंडल के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल इटारसी-भोपाल-बीना सेक्शन पर चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। 237 किमी लंबी इस परियोजना पर 4,329 करोड़ खर्च होंगे, जिससे यात्री और मालगाडिय़ों के संचालन में सुधार होगा। यह नया रेल कॉरिडोर इटारसी से शुरू होकर भोपाल होते हुए बीना तक जाएगा। यह मार्ग नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, भोपाल, विदिशा और सागर जिलों से होकर गुजरेगा। वर्तमान में यह सेक्शन अत्यधिक व्यस्त है, जहां यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी मात्रा में मालगाडिय़ों का संचालन होता है। चौथी लाइन बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और ट्रेनें 220 किमी. की स्पीड से दौड़ सकेंगी। भोपाल मंडल में डायरेक्ट ड्राइव सिस्टम को लागू किया है। बाकी सेक्शनों में भी इस तकनीक को इंस्टाल किया जाएगा। सौरभ कटारिया, सीनियर डीसीएम

एमपी के 100 से अधिक लोग दुबई में फंसे, फ्लाइट कैंसिल, ड्रोन हमलों के कारण अलार्म बज रहे हैं

 इंदौर  ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद दुबई में हालात चिंताजनक हैं। इसके चलते दुबई एयरपोर्ट बंद कर दिया गया है। अन्य विमानों के साथ ही शारजाह-इंदौर फ्लाइट भी रद हो गई है। इससे मध्य प्रदेश के 100 से अधिक लोग दुबई में फंस गए हैं। इनमें कई कारोबारी और नौकरीपेशा लोग हैं। इंदौर-1 के पूर्व विधायक संजय शुक्ला भी फंसे हैं। उन्होंने दुबई से इंटरनेट मीडिया पर वीडियो जारी करके भारत सरकार से मदद की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध किया है कि दुबई में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकाला जाए। शुक्ला के अनुसार, हालात तनावपूर्ण हैं और लगातार अलार्म बज रहे हैं। दुबई में फंसे व्यापारी प्रवीण कक्कड ने बताया कि इंदौर के सभी लोग हालांकि सकुशल हैं। जिस होटल में ठहरे थे, वहां से कुछ ही दूरी पर ड्रोन हमला होने के बाद सभी लोग निजी घर में शिफ्ट हो गए हैं। खरगोन और बुरहानपुर जिले के भी कई लोगों के दुबई में फंसे होने की जानकारी मिली है, जो वहां नौकरी के सिलसिले में गए हुए थे। उनके परिजन चिंतित हैं। दो पूर्व विधायकों सहित इंदौर के एक बड़े कारोबारी और उनके साथी दुबई की जिस होटल में ठहरे थे, उसके पास की ही पार्क जुमेरा होटल में मिसाइल गिरी और धमाका हुआ। घटना के बाद इंदौर के सभी लोगों ने उस इलाके को छोड़कर दूसरी होटल में शरण ली। कारोबारी पिंटू छाबड़ा ने बताया कि उनके परिजन और सभी साथी सुरक्षित हैं। इंदौर से गया एक अन्य परिवार अबूधाबी में फंसा है। हालांकि वहां हालात सामान्य हैं, लेकिन फ्लाइटों के बंद होने के कारण वापसी मुश्किल हो रही है। इधर, इंदौरियों के दुबई सहित यूएई के विभिन्न शहरों में फंसने की खबर के बाद मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने ताजा हालातों की जानकारी लेते हुए दिल्ली में विभिन्न मंत्रालयों से संपर्क कर दुबई में फंसे इंदौर के लोगों की वापसी के उपायों के बारे में चर्चा की। उन्होंने दुबई में फंसे पूर्व विधायकों सहित कारोबारी पिंटू छाबड़ा से चर्चा कर कहा कि वे ओमान से लौटने का प्रयास करें, फिलहाल भारत-ओमान के बीच हवाई संपर्क जारी है। मंत्री ने यूएई में फंसे लोगों को भारतीय दूतावास से संपर्क रखने और उनकी हिदायतें मानने की भी सलाह दी। वीडियो भेजकर दी जानकारी उन्होंने वीडियो में पीछे के हालात दिखाते हुए बताया कि यहां पर सब सामान्य है. मैं सभी से कहना चाहूंगा कि पैनिक न हों क्योंकि मीडिया पर कई तरह की खबरें चल रही हैं, लेकिन उन पर बिना पुष्टि के भरोसा न करें. यहां सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं. कुछ कोशिशें जरूर हुई थीं, लेकिन उन्हें डिफेंस द्वारा इंटरसेप्ट कर लिया गया है. आम जनता को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है. मेरे पीछे मेट्रो स्टेशन और भी दिखाई दे रहा है. मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और प्राइवेट ट्रांसपोर्ट सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा है. लोगों से परेशान ना होने की अपील इसके साथ प्रशांत ने कहा कि मेरा सभी से निवेदन है कि फेक न्यूज न फैलाएं और घबराएं नहीं, यहां स्थिति सामान्य है. दुबई सुरक्षित है और उम्मीद है कि जो बातें हैं, वे भी जल्द ठीक हो जाएंगी हमें भगवान पर भरोसा रखना चाहिए. अगर आपके कोई रिश्तेदार या दोस्त यहां हैं, तो उनके लिए बिल्कुल चिंता न करें. अगर आपको पहले से न बताया जाए, तो शायद आपको पता भी न चले कि यहां कुछ हुआ है. मैं यह वीडियो अपने घर से बना रहा हूं ताकि आपको बड़ा व्यू दिखा सकूं. आप पीछे पूरा ओपन स्काई देख सकते हैं. यह जुमेरा एरिया है, और सामने दिखाई दे रही है. ट्रैफिक दोनों तरफ सामान्य रूप से चल रहा है. आज संडे भी है, इसलिए लोग काम पर कम जा रहे हैं, फिर भी सब कुछ सामान्य है. इसलिए आप सभी से अनुरोध है कि बेवजह चिंता न करें यहां सब कुछ सामान्य और सुरक्षित है. होटल बुकिंग के बढ़े रेट जबलपुर निवासी शैलेश जैन ने बताया कि हम चार दोस्त 21 फरवरी को अबू धाबी घूमने आए थे. हमारी वापसी 28 फरवरी को निर्धारित थी. 28 फरवरी को दोपहर करीब 3 बजे हमें अचानक जानकारी मिली कि हमारी फ्लाइट कैंसिल हो गई है. उस समय तक हम सुबह 9 बजे होटल से चेक-आउट कर चुके थे. जब हम दोबारा होटल पहुंचे और रुकने की व्यवस्था करनी चाही, तो पता चला कि होटलों के किराए लगभग तीन गुना बढ़ चुके हैं. ऐसी स्थिति में हमें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. फिलहाल हम यहां अनिश्चित समय के लिए फंसे हुए हैं. यह स्पष्ट नहीं है कि एयरपोर्ट कब खुलेगा और उड़ानें कब शुरू होंगी. इस वजह से हम सभी मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं. वापसी की तैयारी के कारण हमारे पास सीमित धनराशि ही बची थी, जो अब लगभग समाप्त होने की स्थिति में है. हम भारत सरकार से विनम्र प्रार्थना करते हैं कि इस परिस्थिति में फंसे भारतीय पर्यटकों की मदद के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. विदेश में अचानक ऐसी स्थिति बन जाने पर कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इसलिए सरकार से अनुरोध है कि हमारी समस्या पर ध्यान देकर हमें सुरक्षित और शीघ्र स्वदेश लौटने में सहायता प्रदान करें. सरकार से मदद की अपील फंसे हुए यात्रियों ने भारत सरकार से जल्द सुरक्षित वापसी की व्यवस्था करने की मांग की है. उनका कहना है कि अनिश्चित माहौल, उड़ानों की अस्थिरता और बढ़ते खर्च के कारण वे मानसिक रूप से परेशान हैं. परिवारों को अपने बच्चों और बुजुर्गों की भी चिंता सता रही है. पर्यटकों ने दूतावास और संबंधित अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की है और विशेष राहत उड़ानों की उम्मीद जता रहे हैं. गौरतलब है कि दुबई संयुक्त अरब अमीरात का प्रमुख शहर है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक और प्रवासी रहते हैं. वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारत सरकार और संबंधित एजेंसियों की भूमिका अहम मानी जा रही है. फिलहाल फंसे हुए पर्यटक त्वरित राहत और सुरक्षित स्वदेश वापसी की आस लगाए हुए हैं, जबकि परिजन भारत में चिंता के बीच सकारात्मक … Read more