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धार भोजशाला परिसर में दरगाह निर्माण पर बहस, मंदिर के हिस्सों के उपयोग की चर्चा तेज

धार  भोजशाला को लेकर एएसआई ने कोर्ट में दो हजार पेज की रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों, सिक्कों और अन्य अवशेषों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार परमारकालीन भवन की नींव के पत्थरों पर बाद में निर्माण किया गया। सर्वे में पाए गए स्तंभों और उनकी वास्तुकला के आधार पर कहा गया है कि ये स्तंभ मूल रूप से मंदिर का हिस्सा थे, जिन्हें बाद में मस्जिद निर्माण के दौरान फिर से उपयोग में लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार चारों दिशाओं में खड़े 106 तथा आड़े 82, इस प्रकार कुल 188 स्तंभ मिले हैं। इन सभी की वास्तुकला से यह संकेत मिलता है कि वे मूल रूप से मंदिरों का हिस्सा थे। स्तंभों पर उकेरी गई देवताओं और मनुष्यों की आकृतियों को औजारों से खंडित किया गया है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल का कहना है कि रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य हैं जो दर्शाते हैं कि मंदिर के हिस्सों का उपयोग दरगाह निर्माण में किया गया।  भोजशाला की दीवारों पर देवताओं की आकृतियां भी मिली हैं। सर्वे में पूर्व में परिसर से निकालकर मांडू के संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई मूर्तियों को भी शामिल किया गया है। इन्हें संरक्षण की दृष्टि से वहां रखा गया था। खुदाई में प्राप्त कलाकृतियां संगमरमर, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से निर्मित हैं।   इन कलाकृतियों में गणेश, नृसिंह, भैरव, अन्य देवी-देवताओं तथा पशु आकृतियों के चिह्न पाए गए हैं। सर्वे में दो ऐसे स्तंभ भी मिले हैं जिन पर ‘ऊँ सरस्वतै नमः’ अंकित है। रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 148 पर उल्लेख है कि भोजशाला में मौजूद स्तंभों की वास्तुकला यह दर्शाती है कि वे पहले मंदिर का हिस्सा थे और मस्जिद निर्माण के दौरान उन्हें बेसाल्ट के ऊंचे चबूतरों पर फिर से स्थापित किया गया। इस हिस्से में एक स्तंभ पर देवी-देवता की छवि भी है।   सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी भाग में स्तंभों की कतार में लगे एक बड़े शिलालेख में प्राकृत भाषा में दो कविताएं अंकित हैं, जिनमें प्रत्येक में 109 छंद हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पश्चिम दिशा में स्थित मेहराब की दीवारें बेसाल्ट से बने चबूतरे से सटी हुई हैं, जिसके नीचे नक्काशी मौजूद है। चबूतरे और मेहराब की दीवारों की निर्माण शैली अलग-अलग बताई गई है। यह पहली बार नहीं है जब भोजशाला का सर्वे हुआ है। अंग्रेज शासन काल में भी इसका सर्वे किया गया था। इसके अतिरिक्त वर्ष 1987 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए उत्खनन में भोजशाला से हिंदू धर्म से संबंधित 32 मूर्तियां प्राप्त हुई थीं। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि कमाल मौलाना दरगाह के निर्माण में पहले से मौजूद मंदिर के हिस्सों का उपयोग किया गया था। 

अतिथि शिक्षकों पर सरकार का यू-टर्न, खत्म हुआ सेवा समाप्ति का फैसला

भोपाल प्रदेश के करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। सात दिन तक लगातार अनुपस्थित रहने पर उनकी सेवाएं एजुकेशन पोर्टल 3.0 से हटाने संबंधी आदेश को स्कूल शिक्षा विभाग ने निरस्त कर दिया है। अतिथि शिक्षकों के विरोध के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने 20 फरवरी को जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। डीपीआई संचालक ने जारी किए नए निर्देश डीपीआई के संचालक केके द्विवेदी द्वारा गुरुवार को जारी निर्देश में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, हायर सेकेंडरी एवं हाई स्कूलों के संकुल प्राचार्यों और शाला प्रभारियों को स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। साथ ही बताया गया है कि एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर आवश्यक तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध कराने के बाद इस संबंध में अलग से नए निर्देश जारी किए जाएंगे। अव्यवहारिक आदेश का हुआ था विरोध बता दें कि 20 फरवरी को जारी आदेश में यह निर्देशित किया गया था कि यदि कोई अतिथि शिक्षक सात दिन तक लगातार अनुपस्थित रहता है तो उसकी सेवाएं पोर्टल से हटा दी जाएंगी। इस निर्णय का प्रदेशभर के अतिथि शिक्षकों ने विरोध किया था और इसे अव्यवहारिक बताया था। मंत्री का बयान और समिति की प्रतिक्रिया स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बीते बुधवार को विधानसभा में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि अतिथि शिक्षकों के अवकाश के लिए निर्धारित नियम और शर्तें तय हैं। यदि कोई शिक्षक तय अवधि से अधिक समय तक अनुपस्थित रहता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस आदेश के बाद फिलहाल अतिथि शिक्षकों पर लटकी कार्रवाई की तलवार हट गई है।  

महिलाओं की सुरक्षा से सशक्त होंगे एमपी के पर्यटन स्थल, भोपाल में तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू

भोपाल  अपर मुख्य सचिव गृह और संस्कृति  शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि जिलों में लगातार पुलिस की सक्रिय भागीदारी और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा रहा है। जब महिलाएं सुरक्षित होती हैं, तब सब सुरक्षित होते हैं। महिला पर्यटक सहित हर महिला और बच्चे का विश्वास, जमीनी स्तर तक सुरक्षित रहना चाहिए। अपर मुख्य सचिव  शुक्ला एमपीटी होटल पलाश में मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड (एमपीटीबी), पुलिस विभाग और यूएन वूमेन के समन्वय से आयोजित “पर्यटन स्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा पुलिस की भूमिका और रणनीति” विषय पर तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। अपर मुख्य सचिव  शुक्ला ने कहा कि पर्यटन विभाग, पुलिस विभाग के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर पर्यटन स्थल पर सुरक्षा तंत्र प्रभावी रूप से कार्य करे। “निर्भया फ्रेमवर्क” जैसी पहल और कैमरा निगरानी प्रणाली में 19 करोड़ रुपये के निवेश से मध्यप्रदेश को महिला सुरक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा सुशासन की प्राथमिकता है। यह पर्यटन विकास और जनता के विश्वास से सीधे संबद्ध है। सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैया राजा टी. ने कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला प्रमुख क्षेत्र है, इसलिए पर्यटकों की सुरक्षा सबसे आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लोगों में पर्यटन की इच्छा बढ़ रही है। सुरक्षा की भावना, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा, पर्यटन ग्रोथ का निर्णायक कारक है। पुलिस विभाग और यूएन वूमेन सामंजस्य से सकारात्मक वातावरण निर्मित होगा। सचिव डॉ. इलैया ने बताया कि पर्यटन बोर्ड महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दे रहा है। महिलाओं को ड्राइवर, गाइड और होम-स्टे संचालक के रूप में आगे लाया जा रहा है, क्योंकि सशक्त महिलाएं सुरक्षित पर्यटन स्थलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके साथ ही समुदाय स्तर पर महिलाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, ताकि उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़े और जमीनी स्तर पर सहभागिता मजबूत हो। उल्लेखनीय है कि “सेफ टूरिस्ट डेस्टिनेशन फॉर वीमेन” परियोजना के तहत तीन दिवसीय कार्यशाला 28 फरवरी तक आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना और पूरे प्रदेश में महिला यात्रियों के लिए सुरक्षित व संवेदनशील वातावरण सुनिश्चित करना है। कार्यशाला में विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) पीएचक्यू भोपाल  अनिल कुमार, पुलिस उप महानिरीक्षक (महिला सुरक्षा शाखा)  संतोष गौर, पुलिस उप महानिरीक्षक (महिला सुरक्षा शाखा) मती किरणलता केरकेट्टा, पुलिस अधीक्षक (महिला सुरक्षा) सु बीना सिंह और सु स्वाति मुराव सहित गृह विभाग, पुलिस विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला के पहले दिन पर्यटन विभाग ने समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल के तहत महिलाओं की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए की जा रही पहलों की जानकारी दी। पुलिस विभाग के द्वारा कानूनी प्रावधानों, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली, हेल्पलाइन तंत्र और जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग की कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। साथ ही धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, पुरातात्विक स्थल, वन क्षेत्र, बड़े आयोजन, एडवेंचर पर्यटन, आतिथ्य संस्थान और साइबर से जुड़ी चुनौतियों जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। शुक्रवार और शनिवार के सत्रों में केस स्टडी, व्यवहारिक अभ्यास और रणनीति आधारित चर्चा होगी, जिनके माध्यम से राज्य के पर्यटन तंत्र में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए ठोस और लागू करने योग्य उपाय तैयार किए जाएंगे।  

प्रतिनिधि मंडल ने औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर का किया दौरा

भोपाल जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जायका) के अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतिनिधि मंडल ने इंदौर में मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की जायका-2 वित्‍त पोषित परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। जायका जापान का द्वि-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, जिसमें इवैल्यूएटर हिसाए ताकाहाशी एवं जायका के भारतीय प्रतिनिधि  कुनाल गुप्ता शामिल है। उन्होंने निर्माण कार्यों, उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन की बारीकी से जांच-पड़ताल की। इस दौरान प्रतिनिधि मंडल ने पीथमपुर स्थित 400 केवी सब स्टेशन में जायका द्वारा वित्तपोषित 315 एमवीए क्षमता के ट्रांसफॉर्मर की स्थापना एवं उसकी उपयोगिता संबंधित जानकारी भी प्राप्‍त की। प्रदेश के पहले 132 केवी जी.आई.एस.(गैस इंसुलेटेड स्‍विचगेयर) सब स्‍टेशन महालक्ष्‍मी के लिए लाइन इन-लाइन आउट की गई 132 के.वी. मांगलिया–साउथजोन इंदौर ट्रांसमिशन लाईन का निरीक्षण कर सूक्ष्‍म मूल्‍यांकन किया। औद्योगिक इकाइयों का किया दौरा, लिया फीडबैक निरीक्षण के दौरान एमपी ट्रांसको के अधिकारियों ने प्रतिनिधि मंडल को बताया कि इस ट्रांसफॉर्मर के स्थापित होने से क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता और स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे औद्योगिक इकाइयों को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल रही है। इवैल्यूएटर हिसाए ताकाहाशी, एमपी ट्रांसको अधिकारियों द्वारा दी गई इस जानकारी से संतुष्‍ट नही हुई और उन्‍होंने औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर का निरीक्षण कर स्‍वयं वास्‍तविक स्थिति का आंकलन करने का निर्णय लिया। जायका प्रतिनिधि मंडल ने औद्योगिक इकाइयों के संचालकों के साथ बैठक भी की। विद्युत आपूर्ति हुई स्थिर और गुणवत्तापूर्ण एसआरएफ लिमिटेड, जो पैकेजिंग उद्योग से जुड़ी प्रमुख कंपनी है और जिसके पीथमपुर-धार क्षेत्र में चार संयंत्र संचालित हैं, ने जायका प्रतिनिधि मंडल के साथ अपने अनुभव साझा किए। कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों के लिए स्‍थापित पॉवर ट्रांसफॉर्मर के उर्जीकृत होने के बाद अब विद्युत आपूर्ति पूरी तरह स्थिर और गुणवत्तापूर्ण हो गई है। एसआरएफ इंडस्ट्रीज के लीगल हेड  मिश्रा ने बताया कि बेहतर विद्युत उपलब्धता के कारण वे 132 के.वी. स्तर पर अपना लोड बढ़ाकर लगभग 15 एमवीए करने की तैयारी में हैं, जो दो नई उत्पादन इकाइयाँ के लिए उपयोगी होगी। एम पी ट्रांसको की सराहना जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जायका) की अंतर्राष्‍ट्रीय टीम ने एमपी ट्रांसको की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश द्वारा जायका वित्त पोषित परियोजनाओं के माध्यम से बेहतर लोड प्रबंधन सुनिश्चित कर कृषि एवं घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों को अधिकतम लाभ पहुँचाने की दिशा में प्रभावी और दूरदर्शी प्रयास किए गए हैं। जायका टीम ने इंदौर में परियोजना के सकारात्मक प्रभावों की सराहना करते हुए इसे औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। 

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जीवन संस्कृति, सनातन परंपरा एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जीवन भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वामी जी के जन्म स्थल सिवनी में उनके दिव्य स्तंभ की स्थापना सौभाग्य का विषय है तथा यह भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को जबलपुर एयरपोर्ट से सिवनी जिला मुख्यालय स्थित शंकराचार्य चौक के लोकार्पण कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल होकर संबोधित करते हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम सभी का दायित्व है कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के विचारों एवं संस्कारों को न केवल आत्मसात करें, बल्कि उन्हें समाज में व्यापक रूप से प्रचारित कर आगे बढ़ाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार सनातन मूल्यों से प्रेरणा लेकर सुशासन की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़े सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। दिव्य स्तंभ के लोकार्पण अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने आदि शंकराचार्य के जीवन एवं सनातन धर्म में उनके योगदान पर प्रकाश डाला तथा ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के आध्यात्मिक योगदान एवं राष्ट्रधर्म के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को स्मरण किया।  

परामर्शदात्री समिति की बैठक में विधायकों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

भोपाल  लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी की परामर्शदात्री समिति की बैठक में विभाग के अंतर्गत संचालित योजनाओं, विशेष रूप से जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मिशन की प्रगति, गुणवत्ता नियंत्रण, संचालन-संधारण व्यवस्था तथा ग्रीष्मकालीन तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने समिति के सदस्यों को विभागीय प्रगति की जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रदेश में जल जीवन मिशन का क्रियान्वयन परिणामोन्मुख और पारदर्शी ढंग से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कुल 111.34 लाख ग्रामीण परिवारों में से 82.19 लाख परिवारों, अर्थात 73.84 प्रतिशत घरों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इन परिवारों को प्रतिदिन निर्धारित मात्रा में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में व्यापक सुधार हो रहा है। प्रदेश के 24,893 ग्रामों को शत-प्रतिशत नल कनेक्शन प्रदान कर “हर घर जल” ग्राम घोषित किया गया है। इनमें से 17,146 ग्रामों को ग्राम सभाओं द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है, जो सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त उदाहरण है। समिति के सदस्यों को अवगत कराया गया कि बुरहानपुर जिला को भारत सरकार द्वारा देश का पहला प्रमाणित “हर घर जल” जिला घोषित किया गया। इसके बाद निवाड़ी जिला भी “हर घर जल प्रमाणित” जिला बन चुका है। समिति ने इन उपलब्धियों की सराहना करते हुए अन्य जिलों में भी निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप तीव्र गति से कार्य पूर्ण कर प्रमाणन सुनिश्चित करने की अपेक्षा व्यक्त की। बैठक में एकल एवं समूह ग्राम नल जल योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए समिति ने निर्देश दिए कि सभी योजनाओं को मिशन मोड में संचालित करते हुए समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। साथ ही, कार्यों की गुणवत्ता पर सतत निगरानी, फील्ड स्तर पर निरीक्षण तथा तकनीकी मानकों के पालन को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। समिति को यह भी अवगत कराया गया कि राज्य मंत्रिमंडल द्वारा संचालन एवं संधारण नीति का अनुमोदन किया जा चुका है। इस नीति के अंतर्गत एकल नल जल योजनाओं का संचालन, संधारण एवं प्रबंधन पंचायतों के माध्यम से किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और प्रभावशीलता सुनिश्चित होगी। विधायकों ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव समिति सदस्यों ने विभागीय प्रयासों की सराहना करते हुए कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सदस्यों ने सुझाव दिया कि प्रत्येक तीन माह में अलग-अलग संभागों में बैठक आयोजित की जाए, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर योजनाओं की प्रगति की प्रत्यक्ष समीक्षा की जा सके। ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखते हुए हैंडपंपों के रखरखाव एवं संधारण संबंधी निविदाएँ समय पर आमंत्रित करने पर बल दिया गया, जिससे संभावित जल संकट की स्थिति से पूर्व तैयारी सुनिश्चित हो सके। साथ ही, नल जल योजनाओं के अंतर्गत किए गए कार्यों के बाद रोड रेस्टोरेशन के लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने की आवश्यकता रेखांकित की गई। समिति ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर निरंतर निगरानी बनाए रखने तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में समिति की सदस्य विधायक  नीना विक्रम वर्मा, विधायक  ओमप्रकाश धुर्वे, विधायक  दिनेश भूरिया, विधायक  राजेश कुमार वर्मा उपस्थित रहे। जल निगम के एम डी  केवीएस चौधरी तथा ई.एन.सी.  संजय अंधमान भी बैठक में मौजूद रहे । 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासा, पति की हत्या में पत्नी गिरफ्तार

मंदसौर  सुरजनी के हिस्ट्रीशीटर भय्यू लाला की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस का दावा है कि भय्यू लाला की गोली मारकर हत्या करने वाली उसकी पत्नी रुखसाना ही है। पुलिस की गिरफ्त में दो आरोपित हैं जिन्होंने साक्ष्य मिटाने में रुखसाना की मदद की बात स्वीकारी है। हत्या में उपयोग की गई पिस्टल भी जब्त कर ली गई है। रुखसाना अभी भी फरार है। एसआईटी ने किया हत्याकांड का राजफाश एसआईटी टीम द्वारा भय्यू लाला उर्फ वाहिद खान की हत्या का राजफाश कर दिया गया है। मंदसौर जिले के सीतामऊ थाना क्षेत्र के गांव सुरजनी के भय्यू लाला की हत्या की गुत्थी पुलिस ने नौवें दिन सुलझा दी। हत्या उसकी ही पत्नी रुखसाना ने ही की थी जो अभी फरार है। साजिश के तहत सुनाई गई थी दम घुटने की कहानी एसपी विनोद कुमार मीना ने बताया कि 18 फरवरी को याकूब पुत्र बाबर खान निवासी सुरजनी ने सूचना दी थी कि पुलिस के डर से 42 वर्षीय वाहिद उर्फ भय्यू लाला पुत्र बाबर खान पलंग पेटी में छुपा था, दम घुटने से उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा भय्यू लाला के शव का पोस्टमार्टम जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों के पैनल से कराया गया। पोस्टमार्टम में यह खुलासा हुआ कि भय्यू लाला की मौत गोली लगने से हुई थी। मामले की जांच गरोठ एएसपी के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने की। टीम द्वारा घटनास्थल पर मिले साक्ष्य के आधार पर मौके पर उपस्थित संदेहियों से पूछताछ की गई। साक्ष्य छुपाने वाले दो आरोपित गिरफ्तार संदेहियों ने अपना जुर्म स्वीकार करने के बाद बताया कि भय्यू लाला की हत्या उसकी पत्नी रुखसाना ने की है। रुखसाना का सहयोग करते हुए सलमान खान पुत्र जमाल खान पठान निवासी सुवासरा हाल मुकाम सुरजनी व बबलू खान पिता अब्दुल गनी पठान निवासी सुरजनी ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर साक्ष्य छुपाए हैं। पुलिस ने सलमान व बबलू की निशानदेही पर हत्या में उपयोग की गई पिस्टल जब्त कर ली है। अभी सलमान खान एवं बबलू खान को गिरफ्तार किया है। इनको न्यायालय में पेश किया जा रहा है। मामले में फरार रुखसाना की तलाश की जा रही है।

मस्जिद में हिंदू निशान क्यों? कमाल मौला केस में मुस्लिम पक्ष की दलील जानिए

धार मध्य प्रदेश के धार में विवादित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट के खुलासे के बाद जहां हिंदू पक्ष उत्साहित है तो वहीं मुस्लिम पक्ष इसको खारिज करते हुए 1903 के सर्वेक्षण की याद दिला रहा है। वहीं, कमाल मौला मस्जिद में हिंदुओं से जुड़े प्रतीक चिह्नों की मौजूदगी की बात कबूल करते हुए दलील दी जा रही है कि निर्माण में किसी मंदिर नहीं, बल्कि राजा भोज के महल के अवशेषों का इस्तेमाल किया गया था। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के चेयरमैन और धार के मुस्लिम सदर (प्रमुख) अब्दुल समद इस केस में याचिकाकर्ता भी हैं। बातचीत में वह इंदौर हाई कोर्ट में पेश किए गए एएसआई रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहते हैं, 'यह रिपोर्ट गलत दिशा में है। 1903 में एएसआई की रिपोर्ट में इस इमारत को कमाल मौला मस्जिद घोषित किया गया था और इसे संरक्षित किया गया। हम अदालत में नई रिपोर्ट को चुनौती देंगे।' समद ने आरोप लगाया कि परिसर में अधिकांश संरचनाओं को 'छिपे हुए मकसद' से लाया गया था। वह कहते हैं, 'यह पूर्व नियोजित था। हम 2003 से इस पर आपत्ति जाहिर कर रहे हैं। सर्वे का आदेश 2024 में दिया गया था।' वह जोर देकर कहते हैं कि ब्रिटिश काल में हुए सर्वे में इस स्थान को मस्जिद बताया गया था। समद ने कहा, 'यह मस्जिद था, यह मस्जिद है। यहां नमाज पढ़ना जारी रहेगा।' कमाल मौला मस्जिद का निर्माण और हिंदू प्रतीक चिह्न समद कहते हैं कि मस्जिद का निर्माण निजामुद्दीन औलिया के करीब कमाल मौला ने कराया था, जो 1925 में धार के आसपास इस्लाम के प्रचार के लिए आए थे। उन्होंने इस क्षेत्र में कई मदरसों और मस्जिदों का निर्माण कराया। मालवा के शासक महमूद खिलजी ने इनके लिए जमीन उपलब्ध कराई थी। अब्दुल समद ने कहा, 'तब भारी निर्माण सामग्रियों को लाना मुश्किल था इसलिए निर्माणकर्ताओं ने राजा भोज के महल के अवशेषों का इस्तेमाल कर लिया। राजा भोज के महल को गुजरात के चालुक्य-सोलंकी वंश ने नष्ट किया था। वे कुछ ढांचे गुजरात ले गए जबकि बाकी वहां पड़े रहे। चूंकि राजा भोज हिंदू राजा थे, परिसर में पाए जाने वाले ढांचे हिंदुओं के प्रतीक वाले होंगे।' उन्होंने कहा कि इन दलीलों को वह आगे कोर्ट में भी पेश करेंगे। मंदिर मस्जिद विवाद और 2000 पन्नों की रिपोर्ट पक्षकारों के मुताबिक एएसआई की 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि विवादित स्थल पर धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना पहले से मौजूद थी और वहां वर्तमान में मौजूद संरचना प्राचीन मंदिरों के हिस्सों से बनाई गई थी। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष संभवतः 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है और इस निकाय ने उच्च न्यायालय के आदेश पर दो साल पहले विवादित परिसर का सर्वेक्षण करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट को लेकर अदालत के ताजा आदेश के बाद इस विवादित स्थल का मसला फिर सुर्खियों में आ गया है। नई रिपोर्ट में क्या कहा गया पक्षकारों के मुताबिक 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया,'प्राप्त स्थापत्य अवशेषों, मूर्तिकला के टुकड़ों, साहित्यिक ग्रंथों वाले शिलालेखों की बड़ी शिलाओं, स्तंभों पर नागकर्णिका शिलालेख आदि से संकेत मिलता है कि इस स्थल पर साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों से संबंधित एक विशाल संरचना विद्यमान थी। वैज्ञानिक जांच के दौरान प्राप्त पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर पहले से मौजूद इस संरचना को परमार काल का माना जा सकता है।' रिपोर्ट में कहा गया कि सर्वेक्षण के दौरान कुल 94 मूर्तियां, मूर्तिकला के टुकड़े और मूर्तिकला से सजे स्थापत्य तत्व पाए गए जो बेसाल्ट, संगमरमर, मृदु पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से बने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर और कमाल मौला के मकबरे में अरबी और फारसी के 56 शिलालेख भी मिले जिनमें मकबरे में रखीं शिलाएं और स्याही से लिखे 43 शिलालेख शामिल हैं। क्या कहना है हिंदू पक्ष का याचिकाकर्ताओं में शामिल 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के पक्षकार आशीष गोयल ने पीटीआई से कहा,'उच्च न्यायालय में विचाराधीन हमारी याचिका की मुख्य गुहार है कि विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप तय किया जाए। एएसआई की रिपोर्ट से हमारी इस बात को बल मिलता है कि भोजशाला एक परमारकालीन स्मारक है और इसे नुकसान पहुंचाकर एक नया ढांचा खड़ा किया गया था।' उन्होंने दावा किया कि एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख दर्शाते हैं कि विवादित परिसर पर एक प्राचीन मंदिर था।

मध्यप्रदेश में अब ऑनलाइन बनेंगे शस्त्र लाइसेंस, ऑफलाइन सिस्टम खत्म

भोपाल मध्य प्रदेश में अब शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए ऑफलाइन आवेदन नहीं लिए जाएंगे। ये केवल ऑनलाइन ही स्वीकार होंगे। सरकार आगामी एक मार्च से शस्त्र लाइसेंस संबंधी नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसमें किसी व्यक्ति को नया शस्त्र, बंदूक अथवा अन्य हथियार लेना है तो भारत सरकार द्वारा बनाए पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। बिना ऑनलाइन आवेदन के फार्म स्वीकार नहीं होंगे। अनियमितताओं और गड़बड़ियों पर लगेगी रोक दरअसल, प्रदेश में जिलों से कारतूस में हेरफेर और लाइसेंस प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें आती रही हैं। नई व्यवस्था लागू होने से इस तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। आवेदक का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकेगा, जिससे अयोग्य या नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान आसान होगी। न तो व्यक्तिगत सिफारिशों का असर रहेगा और न ही रिकॉर्ड में हेरफेर की गुंजाइश बचेगी। डिजिटल प्रक्रिया से बढ़ेगी पारदर्शिता नई प्रणाली से पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत होगा। ऑनलाइन आवेदन पूर्ण करने के बाद आवेदक को एक यूनिक फाइल नंबर प्राप्त होगा। इसी फाइल नंबर के साथ आवेदन का प्रिंटआउट निकालकर निर्धारित प्रक्रिया अनुसार मैन्युअल जमा किया जा सकेगा। ऑफलाइन आवेदन पूरी तरह से बंद यदि किसी आवेदक द्वारा पहले ऑनलाइन आवेदन नहीं किया गया है, तो उसका ऑफलाइन फार्म किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। एक मार्च तथा उसके बाद प्राप्त होने वाले सभी आवेदन केवल ऑनलाइन पद्धति से ही मान्य होंगे। इस प्रणाली से नए लाइसेंस आवेदनों की ट्रैकिंग कर लाइसेंस नवीनीकरण और स्पोर्ट्स कोटे के तहत जारी लाइसेंसों की स्थिति की भी निगरानी की जा सकेगी।  

210 बल्कर ट्रक से 7793 मीट्रिक टन ड्राई ऐश का हुआ सफल निष्पादन

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के खंडवा जिले में स्थापित  सिंगाजी ताप विद्युत गृह ने कुल 210 बल्कर ट्रक ड्राई निजी कंपनियों को भेजकर ड्राई ऐश निष्पादन का नया रिकार्ड कायम किया। विद्युत गृह की 600 मेगावाट क्षमता की दो एवं 660 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयों से उत्पन्न ड्राई ऐश को प्रभावी प्रबंधन करते हुए कुल 210 बल्कर ट्रक के माध्यम से 7793 मीट्रिक टन ड्राई ऐश निष्पादित की गई। यह मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की फ्लाई ऐश के सदुपयोग,रि-साईकिल व निबटारा करने की प्रतिबद्धता का परिचायक है।पर्यावरण संबंधी बढ़ती चिंता और समस्या की बढ़ती गंभीरता के कारण फ्लाई ड्राई ऐश का प्रबंधन करना अनिवार्य हो गया है। पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा ड्राई ऐश का निष्पादन पॉवर प्लांट के फेज-1 से 143 बल्कर ट्रक द्वारा 5229 मीट्रिक टन ड्राई ऐश निष्पादित की गई जो कि पिछले वर्ष में निष्पादित 131 बल्कर ट्रक की तुलना में अधिक है। इसी प्रकार फेज-2 से 67 बल्कर ट्रक द्वारा 2563 मीट्रिक टन ड्राई ऐश सफलतापूर्वक निष्पादित की गई। क्या होता है ड्राई ऐश और क्या है उपयोग ड्राई ऐश ताप विद्युत गृहों में कोयले के दहन से उत्पन्न उप-उत्पाद है, जिसका उपयोग निर्माण एवं औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता है। यह पोर्टलैंड सीमेंट के आंशिक विकल्प के रूप में कंक्रीट निर्माण में प्रयुक्त होती है, जिससे मजबूती, टिकाऊपन, जल अवशोषण में कमी एवं कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त इसका उपयोग ईंट, टाइल, सड़क, तथा औद्योगिक पेंट एवं कोटिंग्स बनाने में भी किया जाता है। विशेष रूप से क्लास-एफ फ्लाई ऐश का उपयोग एंटी-कोरोज़िव एवं वाटरप्रूफ कोटिंग्स में किया जाता है, जिससे लागत में कमी के साथ गुणवत्ता में वृद्धि सुनिश्चित होती है। कंपनी की फ्लाई ऐश उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता पहले से अधिक सशक्त हुई है और यह पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हाल ही में स्थापित सीमेंट क्लिंकर संयंत्र इस दिशा में कंपनी की पर्यावरण हितैषी सोच एवं सतत विकास के संकल्प का प्रमाण है। यह उपलब्धि कंपनी के प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण एवं संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए बनाई गई नीतियों तथा उनके सुचारु एवं सफल निष्पादन का उत्कृष्ट उदाहरण है।