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निजी विधेयक में 15 लाख तक स्वास्थ्य कवरेज का प्रस्ताव, कांग्रेस विधायक ने सरकार से फ्री इलाज की मांग की

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस विधायक और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने 'सार्वभौम निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा' को लेकर एक निजी सदस्य विधेयक (Private Member's Bill) पेश किया है। इस विधेयक के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि प्रदेश के हर नागरिक को, चाहे वह किसी भी वर्ग या आय समूह का हो, उसे हर साल 15 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवरेज मिलना चाहिए। विधेयक की मुख्य मांगें: इलाज का अधिकार सदन में चर्चा के दौरान डॉ. राजेंद्र सिंह ने तर्क दिया कि वर्तमान में आयुष्मान योजना का दायरा सीमित है और इसकी राशि (5 लाख) गंभीर बीमारियों के लिए नाकाफी है। उनके विधेयक में ये प्रस्ताव हैं:     यूनिवर्सल कवरेज: योजना का लाभ अमीर-गरीब, किसान, व्यापारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों सहित सभी को मिले। केवल उन लोगों को बाहर रखा जाए जिनके पास पहले से ही कोई बेहतर हेल्थ इंश्योरेंस है।     15 लाख का सामान्य बीमा: प्रत्येक परिवार को सालाना 15 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिले।     गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख: किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर सर्जरी के लिए कवरेज को बढ़ाकर 25 लाख रुपए किया जाए। "सबसे बड़ा सुख निरोगी काया, सरकार चाहे तो कर्ज लेकर दे सुविधा" डॉ. सिंह ने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि 'पहला सुख निरोगी काया' है। उन्होंने पंजाब सरकार का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 10 लाख तक का यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज लागू किया गया है। मध्यप्रदेश की बड़ी आबादी के हिसाब से इस पर सालाना 8 से 9 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा, "सरकार लाड़ली बहना योजना के लिए 23 हजार करोड़ खर्च कर रही है, हम उसका विरोध नहीं करते। लेकिन यदि जनता की जान बचाने और मुफ्त इलाज देने के लिए सरकार को कर्ज भी लेना पड़े, तो मैं उसका कभी विरोध नहीं करूंगा। यह जनता का विधेयक है, सरकार इसका पूरा श्रेय ले, लेकिन इसे लागू करे।" आईएएस-आईपीएस की तर्ज पर हो आम जनता का इलाज विधायक ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब आईएएस और आईपीएस अधिकारियों, उनकी पत्नियों और आश्रितों को सेवाकाल और रिटायरमेंट के बाद भी शत-प्रतिशत मुफ्त इलाज मिल सकता है, तो आम जनता के साथ भेदभाव क्यों? उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे की याद दिलाते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में समानता होनी चाहिए। क्या है निजी सदस्य विधेयक? विधानसभा में आमतौर पर सरकार (मंत्री) ही विधेयक लाते हैं, लेकिन कोई भी विधायक (निजी सदस्य) अपनी ओर से कानून बनाने का प्रस्ताव रख सकता है। डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में ऐसे अवसर बहुत कम आए हैं जब किसी सदस्य ने निजी विधेयक प्रस्तुत किया हो। उन्होंने इसे अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए सरकार से इस पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने किया हस्तक्षेप चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि लाड़ली बहनों को मिलने वाली राशि से भी परिवारों को स्वास्थ्य की दृष्टि से सहारा मिलता है। जिस पर डॉ. सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि 1500 रुपये की राशि बड़े ऑपरेशनों के सामने केवल आने-जाने के किराए जितनी ही है। विधायक डॉ. राजेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य सुविधाओं को 'राजनीति और वोट के फंडे' से ऊपर उठाकर एक अनिवार्य अधिकार बनाने की वकालत की है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस निजी विधेयक को स्वीकार कर मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्रांति की ओर कदम बढ़ाती है।

होली पर यात्रियों के लिए स्पेशल ट्रेन, आज से शुरू होगी बुकिंग

 इंदौर होली के त्योहार पर बढ़ती यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने इंदौर से खड़की (पुणे) के बीच स्पेशल ट्रेन का परिचालन शुरू करने का ऐलान किया है। गाड़ी नंबर 09324/09323 इंदौर-खड़की-इंदौर स्पेशल ट्रेन स्पेशल किराए पर चलेगी। मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के मुताबिक, यह ट्रेन होली के दौरान अतिरिक्त भीड़ संभालने के लिए विशेष रूप से संचालित की जा रही है। ट्रेन में एसी-2 टियर, एसी-3 टियर, स्लीपर क्लास और जनरल सेकेंड क्लास के कोच शामिल होंगे। दोनों दिशाओं में ट्रेन देवास, उज्जैन, नागदा, रतलाम, गोधरा, वडोदरा, सूरत, वलसाड, वापी, वसई रोड, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला स्टेशनों पर रुकेगी। ट्रेन नंबर 09324 की बुकिंग 27 फरवरी 2026 से सभी पीआरएस काउंटरों और आईआरसीटीसी वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। यह नई ट्रेन न केवल होली यात्रियों के लिए फायदेमंद साबित होगी, बल्कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी। ट्रेन का शेड्यूल • गाड़ी नंबर 09324 (इंदौर-खड़की स्पेशल): 4 मार्च से 25 मार्च 2026 तक हर बुधवार को इंदौर से दोपहर 11:15 बजे रवाना होगी। अगले दिन गुरुवार को सुबह 2:50 बजे खड़की पहुंचेगी। प्रमुख स्टॉप्स देवास (11:50/11:52), उज्जैन (12:40/12:45), नागदा (13:57/14:00), रतलाम (14:35/14:40)। • गाड़ी नंबर 09323 (खड़की-इंदौर स्पेशल): 5 मार्च से 26 मार्च 2026 तक हर गुरुवार को खड़की से सुबह 4:40 बजे रवाना होगी। उसी दिन रात 11:55 बजे इंदौर पहुंचेगी। प्रमुख स्टॉप्स रतलाम (20:30/20:35), नागदा (21:10/21:15), उज्जैन (22:05/22:07), देवास (23:00/23:02)।  

आदिवासियों की भूमि पर बड़ा फैसला, 9 IAS ने 1,500 एकड़ की बिक्री को हरी झंडी दी

भोपाल मप्र के 9 आईएएस अफसरों ने कलेक्टर और अपर कलेक्टर रहते हुए आदिवासियों की अरबों रुपए की करीब 1500 एकड़ जमीन गैर आदिवासियों को बेचे जाने की अनुमति दी थी। इंदौर जिले में लगभग 500 एकड़ आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई। बड़े मामलों में ये अनुमतियां इंदौर में कलेक्टर रहे 6 आईएएस ने दी। इनमें 28 केस में तो सीधे कलेक्टरों ने अनुमति दी, जबकि 72 में अपर कलेक्टर ने दीं। यह जानकारी गुरुवार को विधानसभा में कांग्रेस विधायक बाला बच्चन के सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने दी है। खास बात यह है कि खंडवा जिले में सबसे ज्यादा 288.631 हैक्टेयर जमीन गैर आदिवासियों को बेचे जाने की अनुमति 2009 से 2023 के बीच कलेक्टर रहते दी गई, उनके नाम नहीं दिए हैं। बड़वानी में 4, खरगौन में 11 और धार में 143 प्रकरणों में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई, लेकिन किन कलेक्टरों ने अनुमति दीं, यह नहीं बताया है। इन तत्कालीन कलेक्टर, अपर कलेक्टरों ने दी परमिशन… राकेश श्रीवास्तव(9.94 हैक्टे.), राघवेंद्र सिंह (2.25 हैक्टे.), पी नरहरि (6.20 हैक्टे.), इलैया राजा टी (1 हैक्टे.), निशांत वरवड़े (2.5 हैक्टे.), आनंद शर्मा (1.25 हैक्टे.), रवींद्र सिंह (1.92 हैक्टे.),आशुतोष अवस्थी (192 हैक्टे.) और जेपी आइरिन (4 हैक्टे.)।

महापौर का बड़ा फैसला: ललेडीपुरा माचल में स्लॉटर हाउस नहीं बनेगा

इंदौर  साल 2017 में इंदौर के ललेडीपुरा माचल में स्लॉटर हाउस बनाने को लेकर बार-बार विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट किया कि नगर निगम की किसी भी योजना में ललेडीपुरा और आसपास के गांवों में स्लॉटर हाउस बनाने का कोई विचार नहीं है। महापौर ने कहा कि हमारे पास स्थानीय गोपालकों और गांव वासियों से इस विषय पर जानकारी आई है और उन्होंने ये स्पष्ट किया है कि ललेडीपुरा माचल में स्लॉटर हाउस बनाने की नगर निगम की कोई मंशा नहीं है। महापौर ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले भी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए थे और अब फिर से सभी अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि इस क्षेत्र में स्लॉटर हाउस का निर्माण नहीं किया जाएगा। महापौर ने कहा साल 2017 में तत्कालीन समय में इस परियोजना को लेकर अनुमति और कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब वे इस निर्णय को निरस्त करने के निर्देश दे चुके हैं।

विभागों में पारदर्शिता बढ़ाने AI का प्रयोग, सिस्टम तोड़ने वालों पर गिरेगी गाज

भोपाल  जिले में विभिन्न मामलों को लेकर चल रहे कोर्ट प्रकरण का प्रबंधन अब लीगल कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम से होगा। प्रशासन एआइ आधारित इस सॉफ्टवेयर को अपने यहां लागू करने जा रहा है। जिले के जो भी विभाग अपने यहां के कोर्ट प्रकरणों को दबाकर या लटकाकर बैठे हैं, वे सब जाहिर होंगे। अब ऐसे प्रकरणों को निपटाना होगा। ऐसा नहीं करने वाले सामने आएंगे और उन पर कार्रवाई की रूपरेखा भी बनेगी। कलेक्ट्रेट से जुड़े हुए ही 150 के करीब कोर्ट केस अभी चल रहे हैं। जिले के सभी विभागों को मिलाने पर संख्या इससे चार गुना तक बनेगी। ऐसे समझें सिस्टम यह एक इंटीग्रेटेड केस मैनेजमेंट सिस्टम के रूप में काम करेगा, ताकि विभाग के सभी संबंधित अधिकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर जानकारी देख सकें। कानूनी मामलों की प्रगति और पेंडेंसी पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि कानूनी डेटा सुरक्षित रहे और केवल अधिकृत व्यक्तियों की ही उस तक पहुंच हो। ऐसे करेगा काम -केस ट्रैकिंग: यह विभिन्न न्यायालयों में चल रहे सरकारी मामलों की वर्तमान स्थिति को ट्रैक करेगा। – डाटा माइग्रेशन: पुराने कानूनी मामलों के डेटा को सिस्टम में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित करने का काम करेगा। दस्तावेजों का प्रबंधन: यह कानूनी दस्तावेजों, आदेशों और याचिकाओं को डिजिटल रूप में सहेज कर रखने में मदद करेगा। – अलर्ट और रिमाइंडर: आगामी पेशी और महत्वपूर्ण समय-सीमाओं के लिए रिमाइंडर देगा। ये होगा लाभ इसका सबसे बड़ा लाभ मेट्रो, नए आइएसबीटी समेत ब्रिज, सड़क और सार्वजनिक हित के संस्थानों को लेकर चल रहे जमीन संबंधी विवाद में होगा।  सिस्टम में प्रकरण से जुड़ा हर अपडेट और डिटेल सबमिट होगा, जिससे केस निपटाने में तेजी आएगी। प्रकरण पर निर्णय होने से जिले के ग्रामीण से लेकर शहरी प्रोजेक्ट और आमजन से जुड़े काम भी तेजी से हो पाएंगे। पेंशन प्रकरण से जुड़े केसों में भी न्याय होगा। नई तकनीक से जल्द निपटेंगे कोर्ट केस कोर्ट केस को शीघ्रता से निपटाने में नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे प्रकरण निपटान प्रक्रिया बेहतर व तेज होगी। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर 600 केस की पेंडेंसी सुनकर कलेक्टर नाराज भोपाल. जिला समिति की बैठक में  600 पेंडिंग प्रकरणों पर कलेक्टर नाराज हुए। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में पशुपालन, मत्स्य, स्व-सहायता समूह, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना सहित विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रकरण जो बैकों में भेजे गए हैं, उनके वितरण और लक्ष्य की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने कहा, केन्द्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं के प्रकरण कई बैकों में लक्ष्य के अनुरूप निराकरण नहीं किए गए हैं। यह खेदजनक है। जिन बैंकर्स के प्रकरण स्वीकृत हो गए, उनका वितरण एक सप्ताह देने का कहा। लंबित प्रकरणों का 15 दिन में निराकरण का लक्ष्य दिया।

ऑरेंज व ब्लू लाइन मेट्रो के लिए जमीन अधिग्रहण, सरकार ने 22 एकड़ की अधिसूचना दी

भोपाल   एमपी के भोपाल शहर में मेट्रो का काम तेजी से चल रहा है। यहां पर मेट्रो ट्रेन के लिए 22 एकड़ जमीन की मांग की गई है। प्रशासन ने इसके लिए काम शुरू कर दिया है। ये ऑरेंज के साथ ब्लू लाइन के लिए है। हाल में भदभदा से डिपो चौराहा, टीटी नगर, लिली टॉकीज जहांगीराबाद तक की जमीन के लिए कलेक्ट्रेट से अधिसूचना जारी हुई है। अब रायसेन रोड पर करोंद के साथ पुल बोगदा, जिंसी के साथ ऐशबाग और संबंधित क्षेत्रों में जरूरत की जगह निकालनी है। भोपाल रेलवे स्टेशन के साथ नादरा बस स्टैंड की ओर भी जगह मांगी है। इसमें रेलवे लाइन, स्टेशन के अलावा लाइन किनारे पार्किंग विकसित करने की जगह भी शामिल है। इंदौर में पार्किंग की प्रक्रिया, भोपाल में भी उम्मीद इंदौर मेट्रो स्टेशन के पास यात्री वाहनों के लिए पार्किंग विकसित की जाएगी। इसके लिए प्रक्रिया शुरू की है। यहां विभागीय मंत्री ने इसके लिए अफसरों को कहा है। भोपाल मेट्रो में भी अब तक कहीं पार्किंग विकसित नहीं हुई है। यहां भी स्टेशन के पास पार्किंग विकसित हो तो मेट्रो में यात्रा करने वालों की संख्या बढ़ सकती है। भोपाल मेट्रो की ओर से पार्किंग की जमीन के लिए जिला प्रशासन के पास पांच जगह के लिए प्रकरण दर्ज किए हुए हैं। मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम कई स्तरों पर चल रहा है। जरूरत के अनुसार जमीन ली जा रही। उपयोग किया जा रहा है। पार्किंग को लेकर भी काम किया जा रहा है। चैतन्य कृष्णा, एमडी, मेट्रो रेल रोकी गई थी आपूर्ति बीते कुछ दिनों पहले मेट्रो रैक की वडोदरा से आपूर्तिरोक दी गई थी। यहां से तीन-तीन कोच के 27 रैक मिलने तय हुए हैं। आठ रैक की आपूर्ति हो चुकी है। अभी कमर्शियल रन में महज दो रैक का ही उपयोग किया जा रहा है। छह रैक अभी डिपो में ही हैं। ऐसे में जब तक प्रोजेक्ट में 32 किमी की लाइन नहीं बन जाती, तब तक नए रैक की आपूर्ति रोक दी गई है। गौरतलब है कि मेट्रो ट्रेन की रैक को बनाने का काम वडोदरा के पास स्थापित प्लांट में हो रहा है।

विधानसभा में बड़ा ऐलान: 2 साल बाद मध्य प्रदेश में नहीं दिखेंगे आवारा पशु

 भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने भरोसा दिलाया कि दो साल बाद राज्य की सड़कों पर कोई आवारा मवेशी घूमता हुआ नहीं दिखेगा. सरकार का यह भरोसा तब आया जब कुछ कांग्रेसी MLA ने आवारा मवेशियों की वजह से होने वाले सड़क हादसों पर चिंता जताई. कांग्रेस MLA अजय सिंह और कैलाश कुशवाहा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया और कहा कि मध्य प्रदेश में आवारा मवेशियों की समस्या गंभीर हो गई है. उन्होंने कहा कि सरकार के  करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद राज्य में लगभग 10 लाख आवारा मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है, नेशनल हाईवे और दूसरी सड़कों पर ट्रैफिक में रुकावट आ रही है और हादसों की घटनाएं बढ़ रही हैं. सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही की वजह से इस समस्या को ठीक से हल नहीं किया जा रहा है, जिससे किसानों और दूसरे लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.  'जुर्माना और नई नीति से होगा समाधान' जवाब देते हुए राज्य के पशुपालन और डेयरी मंत्री लखन पटेल ने कहा कि आवारा पशुओं का मैनेजमेंट ग्रामीण इलाकों में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग और शहरी इलाकों में शहरी और आवास विकास विभाग की जिम्मेदारी है, और संबंधित विभाग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं. मंत्री ने कहा कि 2025 में राज्य में शहरी निकायों द्वारा लगभग 78 हजार 153 आवारा पशु पकड़े गए और इन पशुओं के मालिकों पर कुल 25 लाख 58 हजार 753 रुपये का जुर्माना लगाया गया. राज्य में कुल 3 हजार 40 गौशालाएं चल रही हैं, जिनमें मुख्यमंत्री गौ सेवा योजना के तहत 2 हजार 325 गैर-सरकारी संगठनों द्वारा 703 और शहरी निकायों द्वारा 12 शामिल हैं. पटेल ने कहा कि लगभग 4.80 लाख आवारा पशुओं को गौशालाओं में ले जाया गया है और उनका मैनेजमेंट एक लगातार चलने वाला प्रोसेस है. मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य सरकार ने 'मध्य प्रदेश में आत्मनिर्भर गाय आश्रय स्थलों की स्थापना राज्य नीति-2025' को मंजूरी दे दी है. इसका मकसद ऐसी आश्रय इकाइयों को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार के मौके पैदा करना है, साथ ही बेसहारा मवेशियों का बेहतर मैनेजमेंट करना है. उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत, कम से कम 5000 मवेशियों की क्षमता वाले आत्मनिर्भर गाय आश्रय (कामधेनु निवास) के लिए कम से कम 130 एकड़ रेवेन्यू जमीन दी गई है, जिसमें से 5 एकड़ जमीन का इस्तेमाल कमर्शियल गतिविधियों के लिए किया जा सकता है. मंत्री के अनुसार, गाय आश्रय स्थलों में मौजूद मवेशियों के रखरखाव के लिए अनुदान राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति जानवर प्रति दिन कर दी गई है. पटेल ने कहा, "अगले दो सालों में जब नई गाय आश्रय स्थल बन जाएंगी और व्यवस्था हो जाएगी, तो बेसहारा मवेशी सड़कों पर नहीं दिखेंगे. मेरा विश्वास कीजिए. दो साल बाद, सड़कों पर एक भी गाय नहीं दिखेगी."  विधानसभा स्पीकर की टिप्पणी मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि गौशालाओं को कमर्शियली आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है, साथ ही गौ रक्षा और सेवा के जरिए उन्हें बढ़ावा देने की भी जरूरत है. उन्होंने कहा कि देश की पहली गौ अभ्यारण्य पहले शाजापुर में बनाई गई थी, लेकिन इस एरिया में अभी और काम करने की ज़रूरत है. तोमर ने कहा कि इस समस्या के परमानेंट समाधान के लिए सरकार और सभी स्टेकहोल्डर्स को मिलकर गंभीर कोशिशें करनी होंगी.

यात्रियों के लिए खबर: होली त्यौहार पर भोपाल मंडल से चार जोड़ी स्पेशल ट्रेनें संचालन में

भोपाल  मध्यप्रदेश के रहवासियों के अच्छी खबर है। होली त्यौहार पर रेल में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भोपाल रेल मंडल से चार जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। रीवा, भोपाल और दानापुर के लिए स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। रीवा- रानी कमलापति रेलवे स्टेशन सुपरफास्ट स्पेशल चलेगी। गाड़ी संख्या (02192/02191) 28 फरवरी 2026 को एक-एक ट्रिप चलेगी। गाड़ी संख्या 02186/02185 नंबर की ट्रेन 2 और 3 मार्च 2026 को दो-दो ट्रिप संचालित होगी। भोपाल-रीवा स्पेशल (01704/01703) 5 मार्च 2026 को एक ट्रिप करेगी। रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल (01667/01668) 27 फरवरी व 2 मार्च को चलेगी। रानी कमलापति-दानापुर वापसी में 28 फरवरी और 3 मार्च को चलेगी। ये स्पेशल ट्रेनें चलेंगी     गाड़ी संख्या 02192/02191 रीवा-रानी कमलपति-रीवा सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन 1-1 फेरा लगाएगी। गाड़ी संख्या 02192 रीवा से रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन 28 फरवरी को रीवा से दोपहर 12.30 बजे प्रस्थान कर उसी रात में 9.15 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी।     इसी प्रकार गाड़ी संख्या 02191 रानी कमलापति से रीवा स्पेशल ट्रेन 28 फरवरी को रानी कमलापति स्टेशन से रात 10.15 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 7: 30 बजे रीवा स्टेशन पहुंचेगी।     गाड़ी संख्या 02186 रीवा से रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन 2 एवं 3 मार्च को रीवा से दोपहर 12.30 बजे प्रस्थान कर उसी रात में 9.15 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी।     इसी प्रकार गाड़ी संख्या 02185 रानी कमलापति से रीवा स्पेशल ट्रेन 2-3 मार्च को रानी कमलापति स्टेशन से रात 10.15 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 7.30 बजे रीवा स्टेशन पहुंचेगी।     गाड़ी संख्या 01704 भोपाल से रीवा स्पेशल ट्रेन 5 मार्च को भोपाल से सुबह 10.30 बजे प्रस्थान कर उसी दिन रात में 8.45 बजे रीवा स्टेशन पहुंचेगी।     इसी प्रकार गाड़ी 01703 रीवा से भोपाल स्पेशल ट्रेन 5 मार्च को रीवा स्टेशन से रात 10.20 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन सुबह 9.05 बजे भोपाल स्टेशन पहुंचेगी।     गाड़ी संख्या 01667 रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल ट्रेन 27 फरवरी एवं 2 मार्च को रानी कमलापति से दोपहर 2.25 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन दूसरे दिन सुबह 8.45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी।     इसी प्रकार गाड़ी संख्या 01668 दानापुर-रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन 28 फरवरी एवं 3 मार्च को दानापुर स्टेशन से सुबह 11.15 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 8.55 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी। यात्री इन ट्रेनों का आरक्षण किसी भी कंप्यूटरीकृत केंद्र या इंडियन रेलवे केटरिंग एंड ट्यूरिज्म कोर्पोरेशन (IRCTC) की वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं। ठहराव संबंधी अधिक जानकारी स्टेशन या रेल मदद 139 से प्राप्त की जा सकती है।  

Bandhavgarh Tiger Reserve में बाघों की रहस्यमयी मौतें, 50% मामलों में समान कारण, हाईकोर्ट में सुनवाई

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर की ओर से एक स्टेटस रिपोर्ट जमा की गई. इस रिपोर्ट ने राज्य के वन्यजीव संरक्षण के दावों की पोल खोल दी है. रिपोर्ट के अनुसार, 21 नवंबर 2025 से 2 फरवरी 2026 के बीच रिजर्व और उसके आसपास के इलाकों में कुल 8 बाघों की मृत्यु हुई. रिपोर्ट में कहा गया है कि बाघ अभ्यारण्य के भीतर चारों बाघों की मौत का कारण प्राकृतिक था, जबकि शेष चार बाघों की मौत सामान्य वन क्षेत्र में बिजली के झटके से हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सभी बाघों के शव पूरी तरह से सुरक्षित थे. इस रिपोर्ट में बाघों की मौतों को दो हिस्सों में बांटा गया है. इसमें बताया गया है कि टाइगर रिजर्व के अंदर 4 मौतें हुई हैं. यहां हुईं सभी मौतें 'प्राकृतिक' बताई गई हैं. इनमें से 2 बाघ आपसी लड़ाई में मारे गए, एक की बीमारी से मौत हुई और एक कुएं में डूब गया. जबकि 4 मौतें जनरल फॉरेस्ट एरिया में हुईं. रिजर्व के बाहर सामान्य वन क्षेत्र में हुई ये सभी चार मौतें करंट लगने के कारण हुईं. 'संदिग्ध हालात' पर सवाल वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की ओर से दायर याचिका में राज्य सरकार और वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. याचिका के अनुसार, 2025 में मध्य प्रदेश में 54 बाघों की मौत हुई, जो प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने के बाद से एक साल में सबसे बड़ा आंकड़ा है. आरोप है कि शिकारी बिजली के तारों का खुलेआम इस्तेमाल कर रहे हैं और विभाग का सर्विलांस सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है. याचिकाकर्ता का दावा है कि अधिकारी अक्सर संदिग्ध मौतों को Territorial fight बताकर पल्ला झाड़ लेते है.  बिजली विभाग को चेतावनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि वन विभाग ने बिजली विभाग को बार-बार पत्र लिखे हैं ताकि संवेदनशील इलाकों में बिजली की लाइनों को मजबूत किया जा सके और वाइल्डलाइफ स्टैंडर्ड का पालन हो, ताकि करंट लगने की घटनाओं को रोका जा सके. मध्य प्रदेश में बाघों की स्थिति  कुल बाघ (MP): 785 भारत में कुल बाघ: 3,167 2025 में मौतें: 54 (याचिका के अनुसार) जनवरी 2026 (प्रथम सप्ताह): 6 बाघों की मौत

भस्म आरती में भगवान को चढ़ेगा हर्बल गुलाल, महाकाल रंगोत्सव की धूम आज से

उज्जैन  धर्मनगरी उज्जैन में रंगोत्सव की शुरुआत इस बार भी परंपरा और आध्यात्म के संग होगी। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 02 मार्च को संध्या आरती के बाद प्राचीन परंपरा अनुसार होलिका दहन किया जाएगा। मान्यता है कि विश्व में सबसे पहले बाबा महाकाल के आंगन में ही होलिका प्रज्वलित होती है और यहीं से रंगों के पर्व का शुभारंभ माना जाता है । संध्या आरती के दौरान सबसे पहले भगवान महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा और परंपरानुसार शक्कर की माला पहनाई जाएगी। इसके बाद मंदिर प्रांगण में ओंकारेश्वर मंदिर के सामने विधिवत पूजन-अर्चन कर होलिका दहन होगा। 03 मार्च को धुलेंडी पर्व पर तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती में सबसे पहले मंदिर के पुजारी और पुरोहित बाबा महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित करेंगे। भक्ति का यह अद्भुत संगम श्रद्धालुओं के लिए अलौकिक अनुभव होगा। इसी क्रम में 04 मार्च 2026 से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से अश्विन पूर्णिमा तक आरतीयों के समय में परंपरानुसार परिवर्तन लागू होगा। नई समय-सारिणी के अनुसार, भस्म आरती प्रातः 4 से 6 बजे तक, दद्योदक आरती 7 से 7:45 बजे तक, भोग आरती 10 से 10:45 बजे तक, संध्या पूजन 5 से 5:45 बजे तक, संध्या आरती 7 से 7:45 बजे तक और शयन आरती रात्रि 10:30 से 11 बजे तक संपन्न होगी।