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होली से पहले इंदौर में स्वास्थ्य जांच, दूध, मावा और नमकीन के सैंपल लिए गए

इंदौर  सुरक्षा अधिकारियों की टीमों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर कुल 38 खाद्य नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमों ने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित डेयरी, नमकीन और मिठाई प्रतिष्ठानों पर औचक निरीक्षण किया और मौके से खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए। सभी नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर वर्मा ने निर्देश दिए हैं कि होली तक यह विशेष अभियान लगातार जारी रखा जाए। अधिक से अधिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर नमूने लिए जाएं, ताकि मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके। किस संस्थान पर क्या कार्रवाई की गई     नंदलालपुरा स्थित शिवशक्ति दूध दही भंडार से दूध और दही के 2 नमूने लिए गए। जवाहर मार्ग, नंदलालपुरा सब्जी मंडी के जैन नमकीन भंडार से लौंग सेव का 1 नमूना लिया गया। सपना स्वीट्स (इमली बाजार) से मिठाई के 2 तथा अजय स्वीट्स (सादर बाजार) से दूध कतली और मिल्क केक के 2 नमूने जांच के लिए भेजे गए।     इमली बाजार स्थित किशनलाल मायाराम पुरोहित प्रतिष्ठान से मिल्क केक, मावा, मावा पेड़ा, बेसन चक्की और पनीर सहित 5 नमूने लिए गए। यहां साफ-सफाई संतोषजनक नहीं मिलने पर सुधार सूचना पत्र जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। पिपलियाहाना के फार्मर्स मिल्क कार्ट से पनीर, दही और मावा के 3 नमूने लिए गए।     विधाता स्वीट्स एंड डेयरी (इमली बाजार) से मावा, मिल्क केक, मावा कतली और मावा टिकिया के 4 नमूने, अग्रवाल स्वीट्स प्रोडक्ट प्रा. लि. (स्कीम नंबर 140) से पेड़ा, बेसन लड्डू और काजू कतली के 3 नमूने लिए गए।     ममता डेरी फार्म (148 सादर बाजार) से दही, पनीर और घी के 3 नमूने, आनंद श्री नमकीन एंड स्वीट्स (मरीमाता चौराहा) से मिल्क केक और मलाई टिकिया के 2 नमूने लिए गए। ओम नमकीन (दिलपसंद ग्रीन, स्कीम नंबर 140) से ड्राई फ्रूट चक्की, रतलामी सेव और खट्टा-मीठा नमकीन के 3 नमूने एकत्र किए गए।     गुरु कृपा मिल्क एंड फूड (ब्रह्मबाग कॉलोनी, मरीमाता चौराहा) से घी, पनीर और दही के 3 नमूने लिए गए। राजेश दूध दही भंडार से दूध और दही के 2 तथा जैन मिठाई भंडार (ग्रेटर बृजेश्वरी, पिपलियाहाना) से मिल्क केक, बेसन चक्की और काजू कतली के 3 नमूने जांच हेतु भेजे गए। प्रशासन की सबसे बड़ी कार्रवाई इमली बाजार और नंदलालपुरा क्षेत्र में देखी गई। किशनलाल मायाराम पुरोहित के यहाँ जांच दल को न केवल मावा और पनीर के संदिग्ध नमूने मिले, बल्कि वहां फैली गंदगी देख अधिकारी भड़क गए, जिसके बाद संचालक को तत्काल सुधार का नोटिस थमाया गया। इमली बाजार की ही विधाता स्वीट्स और सपना स्वीट्स से भी मावे की कतली और मिठाइयों के सैंपल लिए गए। वहीं, नंदलालपुरा की शिवशक्ति डेयरी और जैन नमकीन भंडार पर भी जांच टीम ने औचक निरीक्षण कर शुद्धता की पड़ताल की। :: शहर के पॉश इलाकों में भी प्रशासन की धमक; जेएमबी और अग्रवाल स्वीट्स रडार पर :: मिलावट के विरुद्ध यह अभियान केवल पुराने शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पॉश कॉलोनियों में भी प्रशासन की धमक सुनाई दी। टीम ने अग्रवाल स्वीट्स प्रोडक्ट (स्कीम 140), जेएमबी (ग्रेटर बृजेश्वरी) और ओम नमकीन जैसे बड़े आउटलेट्स पर भी दस्तक दी। यहाँ से काजू कतली, बेसन चक्की और रतलामी सेव जैसे उत्पादों के नमूने लिए गए। सदर बाजार की अजय स्वीट्स और ममता डेयरी से घी व मावे के सैंपल लिए गए, जबकि मरीमाता चौराहे पर आनंद श्री और गुरु कृपा मिल्क पार्लर पर भी प्रशासनिक कड़ाई देखने को मिली। इन सभी नमूनों को पूरी पारदर्शिता के साथ सील कर विस्तृत जांच की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। :: रिपोर्ट आते ही होगी सख्त जेल; मिलावटखोरों को कलेक्टर की सीधी चेतावनी :: कलेक्टर शिवम वर्मा ने साफ कर दिया है कि नागरिकों की सेहत के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं होगा। लिए गए सभी 38 नमूनों को विशेष माध्यम से राज्य खाद्य प्रयोगशाला, भोपाल भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि रिपोर्ट में मिसब्रांडेड या अनसेफ सामग्री पाई जाती है, तो संबंधित संचालकों पर भारी जुर्माने के साथ-साथ सीधे वैधानिक कार्रवाई यानी एफआईआर भी की जाएगी। प्रशासन ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे खरीदारी करते समय पैकेट पर निर्माण तिथि, एफएसएसएआई नंबर और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें ताकि त्योहारों का आनंद सुरक्षित बना रहे। कलेक्टर ने बैठक लेकर दिए निर्देश कलेक्टर शिवम वर्मा ने बुधवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की बैठक लेकर स्पष्ट किया कि अमानक खाद्य सामग्री बेचने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। विभिन्न विभागों के संयुक्त दल गठित कर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच की जाएगी। आगामी त्योहारों को देखते हुए विशेष अभियान चलाया जाएगा। एफएसएसएआई के रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम (RBIS) के तहत हाई-रिस्क प्रतिष्ठानों का प्राथमिकता से निरीक्षण किया जा रहा है। अब तक दर्ज मामलों के अलावा आगे भी दोषियों के खिलाफ तत्काल प्रकरण दर्ज किए जाएंगे। बैठक में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता या मिलावट संबंधी शिकायतों के लिए उपभोक्ता 0731-181 तथा 0755-2840621 पर कॉल कर जानकारी दे सकते हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनियमितता की सूचना तत्काल दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।

इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड रोड का प्लान बदला, अब एलिवेटेड नहीं, जमीन पर ही निर्माण होगा

इंदौर  इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को लेकर किसान विरोध कर रहे थे। किसानों के विरोध को देखते हुए सरकार झुक गई है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि मेट्रो पॉलिटन सिटी इंदौर-उज्जैन भविष्य की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होगा। इस नाते इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन प्रोजेक्ट भी किसानों के हित में उनके सुझाव के अनुरूप एलिवेटेड नहीं जमीनी स्तर पर बनाया जाएगा। किसानों को मिलेगा उचित मुआवजा सीएम मोहन यादव ने कहा कि जिन किसानों की भूमि प्रभावित होगी, उन्हें उचित मुआवजा देने के लिये शासन-प्रशासन प्रतिबद्ध है। उन्होंने   इंदौर और उज्जैन जिलों के विभिन्न गांवों से आए किसान प्रतिनिधियों से चर्चा की है। सरकार के फैसले का किसानों ने आभार जताया है। फोर लेन का हो रहा है निर्माण मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से 2935.15 करोड़ रुपये की परियोजना के अंतर्गत क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 2 जिलों के 28 ग्रामों को नया स्वरूप और जनसुविधा देने के लिये फोर लेन मार्ग निर्मित किया जा रहा है। उन्नत संरचना के अंतर्गत इंदौर-उज्जैन के मध्य 2 स्थानों वेस्टर्न रिंग रोड और उज्जैन बदनावर मार्ग क्रॉसिंग पर वृहद जंक्शन का प्रावधान है। परिवहन तेज और सुरक्षित रहे इसके लिये प्रत्येक टोल प्लाजा पर आवश्यक प्रबंध भी होंगे। सिंहस्थ को देखते हुए निर्माण मोहन यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन के इस पुराने मार्ग से जानापाव आने-जाने के लिये भी परिवहन होता रहा है। पूर्व के वर्षों में मार्ग के संकुचित होते जाने से जो दुर्घटनाएं होती रही हैं, वह सिलसिला अब थम जायेगा। किसानों से विचार विमर्श के पश्चात इस ग्रीन फील्ड फोर लेन मार्ग परियोजना के कार्यों को गति दी जा रही है। गत 20 फरवरी को अनुबंध निष्पादन के पश्चात अन्य कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी सिंहस्थ को देखते हुए यह परियोजना बड़ी जनसंख्या को लाभान्वित करेगी। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सशक्त करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि इसे लेकर आसपास के किसानों ने विरोध शुरू कर दिया था। बड़े पैमाने पर किसान अनिश्चितकालीन धरना पर बैठने वाले थे। इसके बाद किसानों को भोपाल बुलाया गया और उनसे बातचीत के बाद सीएम मोहन यादव ने समस्या का हल निकाला है।

जीएडी के अधिकारियों ने चेक किए उपस्थिति रजिस्टर, CM के आदेश पर भोपाल के सरकारी भवनों में हाजिरी की कड़ी निगरानी

भोपाल मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यालयों में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने वल्लभ भवन सहित प्रमुख मंत्रालयीन परिसरों में छापामार कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। आदेश के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति, कार्यालय में आने-जाने का समय तथा अनधिकृत अनुपस्थिति की विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य शासकीय कार्यप्रणाली में अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करना है। सुबह 10 से शाम 6 बजे तक होगी विशेष निगरानी निर्देशों के अनुसार आज सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक वल्लभ भवन, विंध्याचल और सतपुड़ा—तीनों कार्यालय परिसरों में विशेष मॉनिटरिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव भले ही भोपाल से बाहर दौरे पर रहेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निर्धारित समयावधि में उपस्थिति से जुड़ी हर जानकारी संकलित की जाए। कर्मचारियों की हाजिरी, देरी से आने या समय से पहले जाने जैसी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग की टीमें तैनात सामान्य प्रशासन विभाग ने इस अभियान के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी हैं, जिन्हें तीनों भवनों में तैनात किया गया है। ये टीमें मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगी और अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेंगी। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस संबंध में पूर्व सूचना दे दी गई है, ताकि निरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संपन्न हो सके। अनुशासन और जवाबदेही पर सरकार का फोकस सरकार का मानना है कि समयपालन और नियमित उपस्थिति से प्रशासनिक कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संदेश दिया गया है कि लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले समय में भी ऐसे औचक निरीक्षण जारी रह सकते हैं, जिससे शासकीय तंत्र में कार्यसंस्कृति को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। सीएम और मुख्य सचिव दौरे पर, फिर भी सख्ती बताया गया है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन वर्तमान में भोपाल से बाहर दौरे पर हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को सभी संबंधित दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय और अनाधिकृत अनुपस्थिति की जानकारी एकत्र करने के आदेश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की टीमें तीनों भवनों में तैनात होकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। समय पालन पर मुख्यमंत्री का सख्त संदेश मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि जनकल्याणकारी योजनाओं और आम जनता से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सभी अधिकारी और कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने संदेश दिया है कि यदि समय पालन में कोताही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। पारदर्शी प्रशासन पर जोर राज्य सरकार का कहना है कि जनता की सुविधा और पारदर्शी प्रशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों को पूर्ण जिम्मेदारी और समयबद्धता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा। टार्गेट क्या है? इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल हाजिरी लगाना नहीं, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों के आने-जाने का सटीक समय नोट करना और अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वालों की जानकारी संकलित करना है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए खास टीमों का गठन किया है, जो पूरे दिन इन दफ्तरों में उपस्थिति और काम की निगरानी करेंगी। पहले भी सीएम ने दी है वार्निंग यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समय की पाबंदी को लेकर हिदायत दी है। इससे पहले भी वे सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि राज्य में हफ्ते में पांच दिन ही दफ्तर खुलने के बावजूद, कई अधिकारी निर्धारित समय पर दफ्तर नहीं पहुंचते हैं। सीएम का मानना है कि अधिकारियों की देरी से आने की आदत प्रशासनिक काम में बड़ी परेशानी पैदा करते हैं और आम जनता के काम रोकते हैं।

25 हजार लाड़ली बहनों की किस्त रुकी, 6 लाख महिलाएं 27 महीनों में योजना से बाहर, कारण जानिए

भोपाल   मध्य प्रदेश की चर्चित लाड़ली बहना योजना में लाभार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। सितंबर 2023 में प्रदेश में 1.31 करोड़ से ज्यादा महिलाएं इस योजना से जुड़ी थीं, जो जनवरी 2026 तक घटकर करीब 1.24 करोड़ रह गई हैं। यानी बीते 27 महीनों में 6.28 लाख से अधिक महिलाएं योजना से बाहर हो चुकी हैं। सरकार के मुताबिक योजना से बाहर हुई अधिकतर महिलाएं 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी हैं, जिसके बाद उन्हें इस योजना का लाभ मिलना बंद हो जाता है। इसी बीच एक और बड़ी वजह सामने आई है। प्रदेश में 25 हजार से ज्यादा लाड़ली बहनों का भुगतान इसलिए रोक दिया गया है क्योंकि उनकी समग्र आईडी डिलीट हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही समग्र आईडी रिकवर होगी, इन महिलाओं की रुकी हुई किस्त फिर से जारी कर दी जाएगी। विधानसभा में इस मुद्दे पर सियासी बहस भी देखने को मिली। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने देवास और शाजापुर जिलों में जून से अगस्त 2024 के बीच लाभार्थियों की संख्या बढ़ने का दावा करते हुए सवाल उठाया कि जब नए रजिस्ट्रेशन बंद थे, तो आंकड़ों में बढ़ोतरी कैसे हुई? इस पर मंत्री ने लिखित जवाब देने से इनकार कर दिया।  27 महीने कम गईं 6 लाख से अधिक महिलाएं जब लाड़ली बहना योजना की शुरूआत हुई तो 1.31 करोड़ से अधिक महिलाएं रजिस्टर्ड थीं। जिनकी संख्या पिछले 27 महीने में घटकर केवल 1.25 से अधिक रह गई हैं। यानी करीब 6 लाख से अधिक महिलाएं योजना से बाहर हो गईं। सरकार के द्वारा जानकारी दी गई कि इसमें अधिकतम वह महिलाएं हैं। जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक है। 25 हजार से अधिक महिलाएं का भुगतान बंद प्रदेश में 25 हजार से अधिक लाड़ली बहनों का भुगतान इसलिए रोक दिया है क्योंकि इनकी समग्र आईडी डिलीट हो गई है। जैसे ही दोबारा समग्र आईडी रिकवर हो जाएंगी। भुगतान शुरू कर दिया जाएगा। कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने देवास और शाजापुर जिलों में जून से अगस्त 2024 के बीच लाभार्थियों की संख्या बढ़ने का दावा करते हुए सवाल पेश किया कि जब नए रजिस्ट्रेशन नहीं हुए तो संख्या में बढ़ोत्तरी कैसे हो गई। इसका मंत्री ने लिखित में देने से मना कर दिया। क्या तकनीकी गड़बड़ी और उम्र सीमा की वजह से हजारों जरूरतमंद महिलाएं योजना से बाहर हो रही हैं? और क्या सरकार इस डेटा गड़बड़ी पर ठोस कदम उठाएगी?

बिना वीजा आधार कार्ड निष्क्रिय, 10 साल तक मान्यता केवल OCI और नेपाल-भूटान नागरिकों के लिए

इंदौर  देश में वीजा लेकर रहने वाले विदेशी नागरिकों के आधार कार्ड की वैधता को लेकर केंद्र ने नई व्यवस्था लागू की है। अब विदेशी नागरिकों को जारी आधार उनकी कानूनी स्थिति और वीजा अवधि से सीधे जुड़ा रहेगा। वीजा समाप्त होते ही आधार स्वत: निष्क्रिय हो जाएगा। सरकार का कहना है कि यह निर्णय पारदर्शिता बढ़ाने, दुरुपयोग रोकने और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। नए नियम के अनुसार लॉन्ग टर्म वीजा, टूरिस्ट, बिजनेस या स्टूडेंट वीजा पर भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों का आधार केवल उनकी वीजा अवधि तक ही मान्य रहेगा। वीजा समाप्त होते ही कार्ड निष्क्रिय कर दिया जाएगा और उससे जुड़ी सेवाओं का उपयोग संभव नहीं होगा। यह व्यवस्था सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और पहचान सत्यापन से जुड़े उपयोग को नियंत्रित करेगी। नेपाल और भूटान वासियों को राहत भारत के साथ विशेष संबंध रखने वाले नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए भी आधार की वैधता 10 वर्ष तय की गई है। इन देशों के नागरिकों को भारत में कई सुविधाएं मिलती हैं, इसी को ध्यान में रखते हुए यह प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें वीजा समाप्त होने के बाद भी कुछ विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार बनवाकर देश में रह रहे थे। फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने की पहल सरकार का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें वीजा समाप्त होने के बाद भी कुछ विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार बनवाकर देश में रह रहे थे। नई व्यवस्था के तहत आधार की वैधता संबंधित व्यक्ति की कानूनी स्थिति से जुड़ी रहेगी। इससे सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और अन्य सुविधाओं में किसी प्रकार के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब विदेशी नागरिकों के आधार कार्ड की निगरानी प्रणाली और अधिक सख्त होगी, जिससे वीजा समाप्त होते ही संबंधित आधार स्वत: निष्क्रिय हो जाएगा। वीजा खत्म होते ही आधार होगा निष्क्रिय नई व्यवस्था के तहत आधार की वैधता संबंधित व्यक्ति की कानूनी स्थिति से जुड़ी रहेगी। इससे सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और अन्य सुविधाओं में किसी प्रकार के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब विदेशी नागरिकों के आधार कार्ड की निगरानी प्रणाली और अधिक सख्त होगी, जिससे वीजा समाप्त होते ही संबंधित आधार स्वत: निष्क्रिय हो जाएगा। हालांकि ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारकों के लिए अलग प्रावधान रखा गया है। भारतीय मूल से जुड़े इन व्यक्तियों को जारी आधार कार्ड 10 वर्षों तक वैध रहेगा। निर्धारित अवधि के बाद उन्हें नवीनीकरण या अपडेट की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसी प्रकार नेपाल और भूटान के नागरिकों को भी विशेष संबंधों के मद्देनजर 10 वर्ष की वैधता प्रदान की गई है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्षों में ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें वीजा समाप्त होने के बावजूद कुछ विदेशी नागरिक आधार का उपयोग करते रहे। फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहचान सत्यापन और सेवाओं का लाभ लेने की शिकायतें भी मिली थीं। नई व्यवस्था इन खामियों को दूर करने के लिए तैयार की गई है। संबंधित एजेंसियां अब वीजा डेटा और पहचान रिकॉर्ड को एकीकृत प्रणाली से जोड़ेंगी।

PWD ऑफिस में सख्ती, SDO की संपत्ति कुर्क, कर्मचारियों के एरियर न देने पर प्रशासन ने लिया कड़ा एक्शन

गुना  गुना के लोक निर्माण विभाग (PWD) कार्यालय में  वह नजारा देखने को मिला जो सरकारी सिस्टम की लापरवाही पर एक करारा तमाचा है। 30 साल लंबी कानूनी जंग के बाद, जब विभाग ने अपने ही एक रिटायर्ड कर्मचारी का हक देने में आनाकानी की, तो कोर्ट का डंडा ऐसा चला कि दफ्तर की रौनक ही गायब हो गई। आलम यह था कि जिस दफ्तर में बैठकर अधिकारी फाइलों पर कुंडलियां मारकर बैठे थे, वहां से न्यायालय की टीम साहब की कार, कंप्यूटर, कुर्सियां और यहां तक कि छत पर टंगे पंखे भी उतारकर ले गई। रिटायर्ड एलडीसी कौशल किशोर राठौर की इस जीत ने यह साफ कर दिया कि न्याय की चक्की भले ही धीरे चलती है, लेकिन जब चलती है तो बड़े-बड़े विभागों की अकड़ पीसकर रख देती है। 1995 से शुरु हुआ था न्याय के लिए कौशल किशोर राठौर संघर्ष इस पूरी कहानी की शुरुआत साल 1995 में हुई थी, जब कौशल किशोर राठौर ने अपने पद के अनुरूप वेतन न मिलने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। लोअर कोर्ट से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक, राठौर ने हर मोर्चे पर जीत हासिल की। हालांकि विभाग ने 2013 तक के एरियर का भुगतान तो कर दिया, लेकिन 2014 से उनके रिटायरमेंट (30 दिसंबर 2025) तक का लगभग 40 लाख का भुगतान लटकाए रखा। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी विभाग की नींद नहीं खुली, तो राठौर ने 2018 में कोर्ट में 'इजरा' (वसूली याचिका) और फिर हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी। आखिरकार हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद जिला न्यायालय ने 36.68 लाख रुपये की वसूली के लिए कुर्की का वारंट जारी कर दिया। दफ्तर की मेजें, कुर्सियां, कंप्यूटर सब कुर्क दोपहर जब जिला नाजिर राकेश शर्मा के नेतृत्व में कोर्ट की टीम PWD कार्यालय पहुंची, तो वहां हड़कंप मच गया। कर्मचारी और अधिकारी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही टीम ने चल संपत्ति को जब्त करना शुरू कर दिया। दफ्तर की मेजें, कुर्सियां और कंप्यूटर एक-एक कर बाहर निकाले जाने लगे। सबसे ज्यादा चर्चा SDO की गाड़ी की रही, जिसे टीम ने मौके पर ही कुर्क कर लिया। कार्रवाई पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, यदि जब्त किए गए सामान से वसूली की पूरी राशि (36.68 लाख रुपये) नहीं निकलती है, तो विभाग की जमीन और पूरी बिल्डिंग को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 30 साल के संघर्ष के बाद मिली यह जीत आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

इंदौर-उज्जैन फोर लेन रोड निर्माण पर सीएम का बयान, कहा– किसान हितों से नहीं होगा समझौता

इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन रोड निर्माण में किसान हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री डॉ. यादव अब एलिवेटेड नहीं जमीनी स्तर पर बनेगा रोड किसानों के सुझावों को ध्यान में रखकर होगा निर्माण मुख्यमंत्री डॉ. यादव का किसानों ने माना आभार इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मेट्रो पॉलिटन सिटी इंदौर-उज्जैन भविष्य की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होगा। इस नाते इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन प्रोजेक्ट भी किसानों के हित में उनके सुझाव के अनुरूप एलिवेटेड नहीं जमीनी स्तर पर बनाया जायेगा। जिन किसानों की भूमि प्रभावित होगी, उन्हें उचित मुआवजा देने के लिये शासन-प्रशासन प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार शाम उनके भेंट करने आये इंदौर और उज्जैन जिलों के विभिन्न ग्रामों के किसान प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इंदौर और उज्जैन के किसान प्रतिनिधियों ने इंदौर उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर लेन मार्ग का निर्माण कार्य किसानों के हित में करने के निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से 2935.15 करोड़ रूपये की परियोजना के अंतर्गत क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 2 जिलों के 28 ग्रामों को नया स्वरूप और जनसुविधा देने के लिये फोर लेन मार्ग निर्मित किया जायेगा। उन्नत संरचना के अंतर्गत इंदौर-उज्जैन के मध्य 2 स्थानों वेस्टर्न रिंग रोड और उज्जैन बदनावर मार्ग क्रॉसिंग पर वृहद जंक्शन का प्रावधान है। परिवहन तेज और सुरक्षित रहे इसके लिये प्रत्येक टोल प्लाजा पर आवश्यक प्रबंध भी होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन के इस पुराने मार्ग से जानापाव आने-जाने के लिये भी परिवहन होता रहा है। पूर्व के वर्षों में मार्ग के संकुचित होते जाने से जो दुर्घटनाएं होती रही हैं, वह सिलसिला अब थम जायेगा। किसानों से विचार विमर्श के पश्चात इस ग्रीन फील्ड फोर लेन मार्ग परियोजना के कार्यों को गति दी जा रही है। गत 20 फरवरी को अनुबंध निष्पादन के पश्चात अन्य कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी सिंहस्थ को देखते हुए यह परियोजना बड़ी जनसंख्या को लाभान्वित करेगी। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सशक्त करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।  

मध्य प्रदेश में 25 लाख होम लोन पर सब्सिडी मिलेगी, जानिए क्या होगी शर्त

 सतना  मध्य प्रदेश के सतना में बैंकों की परामर्श दात्री एवं समीक्षा समिति की बैठक में लीड बैंक मैनेजर गौतम शर्मा ने बताया कि ऐसे लोग जिनकी वार्षिक आय 9 लाख रुपए से कम है और 25 लाख या उससे कम का होम लोन लिया है उन्हें सालाना 1.80 लाख रुपए का ब्याज अनुदान मिलेगा। इस ब्याज अनुदान योजना का लाभ सितंबर 2024 के बाद होम लोन लेने वालों को मिलेगा। 48 लोगों को मिला लाभ बैठक की अध्यक्षता कर रहे कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने जिले में योजना के पात्रों की संख्या पूछी, जिस पर बताया गया कि इस दायरे में सतना जिले के लगभग 500 ऋणधारक है। इसमें से 48 लोगों को योजना के तहत लाभ दिया जा रहा है। इन्हें ब्याज पर 1.80 लाख रुपए की छूट योजना के तहत मिलने लगी है। कलेक्टर ने सभी पात्र लोगों को योजना के लाभ से जोड़ने के निर्देश दिए। इस दौरान जिपं सीईओ शैलेन्द्र सिंह, आरबीआई भोपाल के जिला अग्रणी अधिकारी विनय मोरे सहित सभी बैंकों के बैंक मैनेजर और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। महिला हितग्राही होने पर मिल रहा फायदा हालांकि समीक्षा के दौरान एक बैंक प्रबंधक ने बताया कि व्याज अनुदान योजना में हितग्राही को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई थी। लेकिन जब इस योजना की फीडिंग की जाती है तो हितग्राही महिला नहीं होती है तो केस आगे नहीं बढ़ता है। लिहाजा योजना के लाभ महिला हितग्राही या फिर महिला सहखातेदार होने पर ही मिल पा रहा है। कलेक्टर ने इस मामले में शासन स्तर से मार्गदर्शन लेने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान कहा कि पशुपालकों के लिए शुरू कामधेनु योजना के प्रकरण विभाग ने प्रस्तुत कर दिए हैं लेकिन ऋण वितरण की स्थिति न के बराबर है। एलडीएम ने कहा कि जल्द ही इंक्वायरी प्रोसेस पूरी की जाकर ऋण वितरण प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। पीएम विश्वकर्मा योजना, पीएमएफएमई योजना की धीमी प्रगति पर असंतोष जताया। इन बैंकों का कम मिला क्रेडिट-डिपॉजिट बैठक में जमा ऋण अनुपात (सीडी रेसियो) की समीक्षा की गई। नियमानुसार यह 60 फीसदी होना चाहिए, लेकिन कई बैंकों का काफी कम मिला। इसे सुधारने के निर्देश दिए गए। जिन बैंकों का जमा ऋण अनुपात कम रहा उनमें कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया शामिल रहे।

‘रामायण सर्किट’ के तहत जबलपुर-गोंदिया रेल प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, नक्सल मुक्त क्षेत्र को 5,236 करोड़ की सौगात

जबलपुर मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पीएम मोदी सरकार ने गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है। इसमें प्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को सीधा लाभ मिलेगा। नक्सल प्रभावित बालाघाट के रेल परियोजना से जुड़ने से विकास के नए द्वार खुलेंगे। सीएम मोहन यादव ने केंद्र सरकार व मोदी कैबिनेट द्वारा  गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन परियोजना को स्वीकृति देने की जानकारी साझा करते हुए खुशी जताई है। उन्होंने एक्स पर जानकारी देते हुए पीएम और रेल मंत्री का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण परियोजना को आधिकारिक स्वीकृति दे दी गई है। उन्होंने इस निर्णय को प्रदेश के लिए 'बड़ी सौगात' बताया है। सेवातीर्थ में पहली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक बता दें कि सेवातीर्थ में केन्द्र सरकार की पहली केबिनेट बैठक में आयोजित हुई। इसमें गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है। इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा। केंद्र ने इस रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है। जाहिर है इस परियोजना के पूरे होने के बाद एमपी के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। नक्सल मुक्त बालाघाट को मिलेगी नई गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि नक्सल समस्या से मुक्त हो चुके बालाघाट जिले के लिए यह परियोजना जीवनदायिनी साबित होगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यहां न केवल व्यापार और व्यवसाय बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज, मेजर और माईनर ब्रिज बनेंगे करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रुपए से 5 साल में पूरा होगा। जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा। वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रुपए की लागत से अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे। साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे। परियोजना में एमपी को क्या-क्या मिलेगा, एक नजर     रामायण सर्किट में नार्थ से साउथ तक का कॉरीडोर बनेगा है     परियोजना की कुल लागत 5,236 करोड़ रुपए     रेल दोहरीकरण में लगभग 231 किलोमीटर लम्बाई पर काम होगा     परियोजनाओं को 5 वर्ष में कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया     एमपी के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को मिलेगा लाभ     450 करोड़ रुपए की लागत से अंडरपास और फेसिंग में खर्च

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट पर नया बदलाव, लाखों वाहन मालिकों को मिलेगा फायदा

भोपाल  वाहन मालिकों के लिए राहत भरी खबर है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के बाद यदि आपका वाहन किसी मध्य प्रदेशसे दूसरे राज्य में ट्रांसफर होता है, तो अब उसे ट्रेस करना आसान होगा। परिवहन विभाग ने अपने ऑनलाइन पोर्टल को अपडेट किया है। इससे इंटर स्टेट व्हीकल ट्रांसफर की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम हो गई है। HSRP का यूनिक लेजर कोड राष्ट्रीय स्तर पर रहेगा लिंक HSRP में लागू यूनिक लेजर कोड और डिजिटल डेटाबेस अब राष्ट्रीय स्तर पर लिंक रहेगा। इससे वाहन की मूल जानकारी का वितरण जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर, मालिक का विवरण, दूसरे राज्यों में भी सत्यापित किया जा सकेगा। इससे चोरी, फर्जी नंबर प्लेट और डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन जैसी समस्याओं पर भी लगाम कसेगी। 1500 से ज्यादा शिकायतों की सुनवाई, 1388 का निराकरण परिवहन विभाग में सीएम हेल्पलाइन सहित ड्राइविंग लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाण पत्र, गाड़ी ट्रांसफर, हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट जैसी 1500 से ज्यादा शिकायतों पर मंगलवार को प्रदेश स्तरीय सुनवाई हुई। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन सहित अन्य क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में 1388 मामले मौके पर ही निराकृत किए गए। टोकन देकर बारी-बारी से सुनवाई परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के निर्देश पर जनसुनवाई में विभाग से जुड़े लंबित कार्यों की सूची बनाकर आवेदकों को बुलाया गया। सभी को टोकन नंबर देकर बारी-बारी से इनके प्रकरण की सुनवाई की गई। वाहन मालिकों को बड़ी राहत परिवहन विभाग का मानना है कि पोर्टल अपडेट होने से वाहन ट्रांसफर होने की प्रक्रिया तेज होगी। बिचौलियों की भूमिका घटेगी। वहीं वाहन मालिकों को अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।