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मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज दतिया को देंगे 532 करोड़ रूपये के विकास की सौगातें

सिंध नदी पर नव निर्मित सेतु का करेंगे लोकार्पण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज दतिया जिले की तहसील सेवढ़ा में आयोजित कार्यक्रम में 532 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे। इसमें मुख्य रूप से सिंध नदी पर नव निर्मित सेतु का लोकार्पण शामिल हैं। साथ ही सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बसई सहित अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सनकुआ धाम के समीप स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में पूजन-अर्चन भी करेंगे। कृषि उपज मंडी प्रांगण सेवढ़ा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 299.32 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए 53 विकास कार्यों का लोकार्पण और 233.24 करोड़ रुपये की लागत के 21 कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास करेंगे। साथ ही विभिन्न शासकीय योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित करेंगे।  

आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : कलेक्टर

भोपाल  शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करना एवं आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बड़वानी जिले की सेंधवा जनपद की 34 ग्राम पंचायतों में छठवाँ क्लस्टर अनुश्रवण शिविर का आयोजन किया गया। इससे पूर्व जिले में सफलतापूर्वक 5 शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इसी कड़ी में यह आयोजन ग्रामीणों के लिए समाधान का केन्द्र साबित हुआ, जिसमें अपने ही ग्राम में उनकी समस्याओं का निराकरण हुआ। योजनाओं का हुआ प्रभावी क्रियान्वयन संकल्प से संकल्प अभियान के द्वितीय चरण के तहत जनपद पंचायत सेंधवा के 3 क्लस्टर सेंधवा, धनोरा, चाचरिया की 34 पंचायतों में शिविर आयोजित किए गए। इस अभियान के तहत इक्कीस विभागों की 106 योजनाओं एवं सेवाओं से संबंधित शिकायतों एवं समस्याओं को पंजीकृत कर निराकृत किया गया। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पात्र हितग्राही किसी भी लाभ से वंचित न रहें। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाया जाए। राजस्व एवं दस्तावेज़ वितरण शिवन्या में आयोजित शिविर के दौरान नोडल अधिकारियों द्वारा राजस्व संबंधी मामलों का मौके पर निराकरण किया गया। यहाँ गीला पिता धर्मसिंह, जैतराम पिता गमर, आबदा पिता घट्टा, सलीम पिता नासरिया एवं दरबार पिता हेमता को उनके भू-अभिलेखों की खसरा प्रतिलिपि प्रदाय की गई। स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा (ग्राम पंचायत कामोद व शिवन्या)- आयुष्मान भारत योजना के तहत ग्राम पंचायत कामोद में साधुराम आर्य, प्रताप आर्य, दयाराम अवास्या एवं अमन बढोले को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए, जिससे अब उन्हें निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल सकेगी। संबल योजना शिवन्या में श्रीमती यशोदा पति अन्तिराम को संबल कार्ड तैयार कर मौके पर ही सौंपा गया। दिव्यांग सहायता – एक विशेष प्रकरण में विकलांग पेंशन के लिए आवश्यक यूडीआईडी कार्ड उपलब्ध न होने पर, विभाग द्वारा त्वरित समन्वय कर सामाजिक न्याय विभाग से आईडी जेनरेट करवाई गई। कृषि एवं ऋण सुविधा (ग्राम पंचायत बाबदड़) – किसानों की आर्थिक उन्नति हेतु ग्राम पंचायत बाबदड़ में चम्पालाल पिता सोमला को केसीसी कार्ड (सहकारिता विभाग) वितरित किया गया। अब उन्हें समिति के माध्यम से आसानी से खाद, बीज और नकद ऋण की सुविधा प्राप्त होगी। विद्यादान अभियान के तहत विद्यालयों का निरीक्षण प्रशासनिक अधिकारियों ने न केवल समस्याओं का समाधान किया, बल्कि विद्या दान अभियान के तहत शिक्षा की गुणवत्ता को भी परखा। नोडल अधिकारियों ने ग्राम कोटकिराड़ी, कुमठाना एवं बाबदड़ के शासकीय विद्यालयों का निरीक्षण किया और वहां छात्र-छात्राओं को अध्यापन कराकर उनका उत्साहवर्धन किया। द्वितीय चरण में किए गए कार्यों का मूल्यांकन क्लस्टर अनुश्रवण शिविर के द्वितीय चरण में शासकीय हाई स्कूल बाबदड़ में कलेक्टर एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रथम चरण में किए गए कार्यों का मूल्यांकन किया गया। 34 पंचायतों में आयोजित शिविर में कुल 1465 आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें से 1254 आवेदनों का निराकरण किया गया।  

पहली बार ऑनलाइन ऐप से होगी गिद्ध गणना

भोपाल  प्रदेश व्यापी गिद्ध गणना 2025-26 में शीतकालीन गणना 20 फरवरी से 22 फरवरी 2026 तक सूर्योदय से सुबह 9.00 बजे तक प्रदेश के सभी 16 वृत्त एवं 09 टाईगर रिजर्व में गिद्ध गणना का कार्य वन विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों, डब्लू डब्लू.एफ., डब्लू.आई.आई. के प्रतिभागियों के अतिरिक्त स्वंय सेवक एवं फोटोग्राफरों के द्वारा मिलकर किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना की शुरूआत वर्ष-2016 से की गई थी जिसमें 7,028 गिद्धों का आंकलन किया गया था। गिद्ध गणना वर्ष-2025 में शीतकालीन गणना में 12710 एवं ग्रीष्मकालीन गणना वर्ष-2025 में 9509 गिद्धों का आंकड़ा प्राप्त हुआ था। मध्यप्रदेश में कुल 07 प्रजातियों के गिद्ध पाये जाते हैं, जिसमें से 04 प्रजातियों स्थानीय हैं एवं 03 प्रजातियाँ प्रवासी हैं, जो ठंड के समाप्त होते ही वापस चली जाती हैं। प्रथम चरण की गणना तब की जाती है जब उपरोक्त सभी प्रजातियों के गिद्ध घोंसले बनाकर अपने अंडे दे चुके होते हैं या देने की तैयारी में होते हैं। इसी प्रकार से फरवरी माह आने तक इन घोंसलों में अंडों से नवजात गिद्ध निकल चुके होते हैं तथा वे उड़ने की तैयारी करते होते हैं। इसलिये गणना करने के लिये शीत ऋतु का अंतिम समय उचित होता है जिससे स्थानीय तथा प्रवासी गिद्धों की गणना हो जाए। इस बार गिद्धों की गणना के लिये प्रथम बार ऑनलाइन ऐप तयार किया गया है, जिसके माध्यम से गिद्धों की गणना की जा रही है। "ऐप" के माध्यम से गणना किये जाने पर आंकड़ों के संकलन एवं रिपोर्ट तैयार करने में आसानी होगी। गत वर्षों में गणना ऑफलाइन की जाती रही है। ऐप के माध्यम से गणना किये जाने के लिये मास्टर ट्रेनर्स, अशासकीय संस्थाओं एवं अधिकारियों/कर्मचारियों को ऑनलाईन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। गिद्धों की गणना के लिये गणनाकर्मी एवं स्वयंसेवक आदि सूर्योदय के तत्काल बाद प्रथम चरण में चयनित गिद्धों के घोंसलों के समीप पहुंच जाएंगे और घोंसलों के आसपास बैठे गिद्धों एवं उनके नवजातों की गणना ऐप के माध्यम से करेंगे। गणना के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि केवल आवास/विश्राम स्थलों पर बैठे हुए गिद्धों को ही गणना में लिया जाए। उड़ते हुए गिद्धों को गणना में नहीं लिया जाता है। इस वर्ष वन विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ पूरे प्रदेश के विभिन्न स्थानों में पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, छात्र, फोटोग्राफर एवं स्थानीय नागरिक इस गणना में भाग ले रहे हैं। गणना उपरांत डाटा संकलन का कार्य वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में किया जावेगा।  

लड़कियों को धीरेंद्र शास्त्री की नसीहत: दुर्गा बनो, काली बनो, बयान पर छिड़ी बहस

ग्वालियर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने एकबार फिर लड़कियों से अपील की कि वे दुर्गा बने, काली बने मगर कभी बुर्के वाली न बने। मध्यप्रदेश स्थित ग्वालियर के डबरा में आयोजित नवग्रह शक्ति पीठ के प्रतिष्ठा महोत्सव में उन्होंने ये बयान दिया। महोत्व के दूसरे दिन कथा के दौरान शास्त्री ने यंग्यात्मक लहजे में समझाते हुए कहा 'मेरी सहेली बेकार थी, मेरा दोस्त बेकार था। अरे नकटी, दुर्गा, काली, त्रिपुर सुंदरी बेटियों, तुम दुर्गा बनो, तुम काली बनो, पर कभी बुर्के वाली न बनो।' शास्त्री ने संगत के प्रभाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवा अक्सर अपनी संगत को अपनी स्थिति का कारण बताते हैं। हालांकि उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राम के राज्य में मंथरा नहीं सुधरी और रावण के राज्य में विभीषण कभी नहीं बिगड़ा। यह दर्शाता है कि संगत तभी असर डालती है जब स्वयं कोई कमी हो। शास्त्री ने कहा कि केवल सत्संग सुनने से जीवन नहीं सुधरता बल्कि उसे जीवन में उतारने से सुधार आता है। उन्होंने समझाया कि हनुमान जी को मानने से नहीं बल्कि उनकी बातों को मानने से कृपा प्राप्त होती है। एक जलते दीपक के पास बुझा दीपक रखने से वह भी प्रज्ज्वलित हो जाता है, उसी प्रकार सत्संग एक जलता हुआ दीपक है, और जब कोई व्यक्ति सत्संग में आता है, तो वह भी प्रकाशित हो जाता है। मन के एंटीवायरस को मिटाने के लिए सत्संग आवश्यक है। बताया कैसे मिलती है सफलता धीरेंद्र शास्त्री ने अच्छे आचरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि आचरण अच्छा होगा तो परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं को 'इंस्टा रील' के चक्कर में अपना जीवन बर्बाद न करने की सलाह दी। शास्त्री के अनुसार सफलता 'रील लाइक' करने से नहीं, बल्कि 'रियल लाइफ' में पढ़ाई करने से मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि 18 से 25 वर्ष की आयु का युवा यदि इस दौरान नहीं बिगड़ता, तो वह कभी नहीं बिगड़ेगा,लेकिन जो इस आयु में बिगड़ गया, वह फिर कभी नहीं सुधरेगा। कथा सुनने आए डिप्टी सीएम और पूर्व गृहमंत्री आयोजित कार्यक्रम में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने भी कथा सुनने आए थे। नवग्रह शक्तिपीठ में दर्शन के बाद अभिनेता आशुतोष राणा आध्यात्मिक अनुभव से अभिभूत नजर आए। उन्होंने मंदिर की अनूठी वास्तुकला, वैज्ञानिक आधार और आध्यात्मिक महत्व की जमकर सराहना करते हुए इसे मध्य भारत की एक अद्वितीय धरोहर बताया। राणा ने कहा कि यह मंदिर अपनी तरह का पहला स्थान है, जहां नवग्रहों की इतनी भव्य स्थापना की गई है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि मंदिर की संरचना ऐसी बनाई गई है कि एक शिखर की छाया दूसरे पर नहीं पड़ती, जो वास्तु की दृष्टि से अत्यंत विशेष है।

बायोएग्री को मध्यप्रदेश की जैव-अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनाने पर होगा मंथन

भोपाल अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल में “मध्यप्रदेश की जैव-अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में बायोएग्री” विषय पर हितधारक परामर्श मंथन बैठक आयोजित हुई। मंथन का उद्देश्य राज्य में जीवन-विज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना तथा बायोएग्री इको सिस्टम के विकास के लिये एक कार्यान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने मे सहायता प्रदान करना है। बैठक में कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ), उद्योगों, स्टार्टअप्स, शोध एवं शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों तथा विभिन्न शासकीय विभागों के 47 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक में वेस्ट-टू-वेल्थ, प्रिसिजन एग्रीकल्चर एवं बायो-इनपुट्स, लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं न्यूट्रास्यूटिकल्स, कृषि जैव-प्रौद्योगिकी सहित अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया। संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित ने कहा कि “बायो इकोनामी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश का योगदान देश के अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश की तुलना में अत्यधिक कम है, जबकि अवसरों की बात करें तो वह मध्यप्रदेश में सर्वाधिक उपलब्ध है। मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। बायोइकानामी के अन्य घटकों के साथ ही बायो एग्री कार्य, बायो एनर्जी, इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉआदि क्षेत्रों में काम करने की मध्यप्रदेश में अत्यधिक संभावनाएं हैं। प्रदेश में प्रमुख फसलों के साथ अनुमानित 30-35 मिलीयन टन सोयाबीन स्ट्रा, गेहूं स्ट्रा, धान और मक्के का वेस्ट प्रतिवर्ष उत्पादित होता है। इसका बहुत बड़ा भाग अभी ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होता। प्रदेश में पशुओं की बड़ी संख्या होने के कारण बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस की अपार संभावना है। 30 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र होने के कारण तेंदूपत्ता वन औषधीय पौधे और अन्य बायो बेस्ड मटेरियल आधारित उद्योग लगाने की अत्यधिक संभावना है।“ भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईसर), भोपाल के निदेशक प्रो. गोबर्धन दास ने बायोएग्री क्षेत्र में संबंधित अपार संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत की ज्ञान परंपरा अभूतपूर्व रही है। इसे जैव-अर्थव्यवस्था में लागू करके प्रदेश का विकास किया जा सकता है। सुशासन संस्थान के मानव संसाधन एवं प्रौद्योगिकी केंद्र के प्रमुख डॉ. मनोज कुमार जैन ने बताया कि इस परामर्श बैठक से बायोएग्री आधारित मूल्य श्रृंखलाओं की पहचान, नीतिगत सुझाव, कौशल विकास एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन के लिये ठोस कार्ययोजना तैयार होने की अपेक्षा है, जो मध्यप्रदेश को जैव-अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी। बाइएकोनोमी सेल के नोडल अधिकारी डॉ. सुनील कुमार सूर्यवंशी ने कार्यक्रम का संचालन किया और आभार व्यक्त किया। 

विरोध प्रदर्शन में बड़ा हादसा: विजयवर्गीय के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी आग की चपेट में

मैहर  मध्यप्रदेश के मैहर जिले में कांग्रेस द्वारा विरोध प्रदर्शन के दौरान लापरवाही की एक खतरनाक तस्वीर सामने आई है। यहां शुक्रवार सुबह कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का पुतला फूंका जा रहा था, इसी दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। पुतला दहन को रोकने और उसे छीनने की कोशिश कर रहे ट्रैफिक टीआई विक्रम सिंह पाठक अचानक भड़की आग की चपेट में आ गए। हादसे का सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि जब अन्य पुलिसकर्मी आग की लपटों से घिरे टीआई को बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे, तब वहां मौजूद कांग्रेसी कार्यकर्ता बेपरवाह होकर पार्टी जिंदाबाद के नारे लगाते रहे। इस घटना में टीआई कमर व पीठ के पास से गंभीर रूप से झुलस गए, जिसके बाद उन्हें मैहर के सिविल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। पुतला छीनते वक्त आग में झुलसा पुलिस अफसर प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक दिन पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता उमंग सिंघार को 'औकात' में रहने जैसी बात कही थी। इसी के विरोध में मैहर में कांग्रेस जिलाध्यक्ष धर्मेश घई के नेतृत्व में शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन का आयोजन किया गया था। जब कांग्रेसी कार्यकर्ता मंत्री विजयवर्गीय के पुतले पर ज्वलनशील पदार्थ पेट्रोल आदि डालकर आग लगा रहे थे, तभी ट्रैफिक टीआई विक्रम पाठक ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। हालांकि ज्वलनशील पदार्थ के कारण आग अचानक तेजी से भड़क उठी और टीआई पाठक सीधे उसकी चपेट में आ गए। टीआई का अस्पताल में चल रहा इलाज आग की लपटों ने पलक झपकते ही टीआई विक्रम सिंह पाठक की वर्दी को अपनी गिरफ्त में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में टीआई की कमर, पीठ, जांघ और हाथ का कुछ हिस्सा बुरी तरह से झुलस गया है। उन्हें तुरंत मैहर सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम आईसीयू में उनका सघन उपचार कर रही है। हालत की गंभीरता को देखते हुए उन्हें जल्द ही जिला अस्पताल या जबलपुर रेफर किया जा सकता है। घटना की सूचना मिलते ही मैहर कलेक्टर रानी बाटड़ और पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह ने तुरंत अस्पताल पहुंचकर घायल टीआई का हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। जांच के बाद दोषियों पर दर्ज होगी FIR इस घटना ने पूरे पुलिस महकमे और प्रशासनिक अमले में भारी रोष पैदा कर दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर रानी बाटड़ ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी विक्रम पाठक पुतला दहन के दौरान आग में झुलस गए हैं। प्रशासन इस पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है। जो भी लोग इस लापरवाही के दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक चौराहों पर ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग गलत उधर, पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि इस घटना से पुलिस परिवार आहत है। प्रदर्शनकारियों को यह समझना चाहिए कि सार्वजनिक चौराहों पर पेट्रोल जैसे ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग किसी की भी जान ले सकता है। हमने मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है। घटनास्थल के वीडियो फुटेज और चश्मदीद गवाहों के आधार पर मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी।

बीबीएसए विधेयक, उच्च शिक्षा नियामक संरचना को आधुनिक एवं एकीकृत बनाने का समग्र प्रयास

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025" द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों को संचालित करने के लिए विभिन्न प्रकार की जटिल अनुमतियों को समाप्त करते हुए एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसके द्वारा शैक्षणिक संस्थानों को ज्ञान के केन्द्र के रूप में स्थापित करने का अवसर मिलेगा तथा विभिन्न विसंगतियां भी समाप्त हो सकेंगी। "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025"; भारत की उच्च शिक्षा नियामक संरचना को आधुनिक एवं एकीकृत बनाने का समग्र प्रयास है। मंत्री  परमार ने कहा कि यह विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया है। इस विधेयक के लिए देश भर के लोगों से सुझाव भी मांगे जा रहे हैं। मध्यप्रदेश से भी सुझाव जाने चाहिए, इसके लिए आवश्यक है कि सही परिप्रेक्ष्य में और सही तथ्यों के साथ, प्रदेश की बात संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) तक पहुँचे। मंत्री  परमार ने कहा कि यह विधेयक, शिक्षा की गुणवत्ता एवं प्रशासनिक समन्वय को सुदृढ़ करेगा। मंत्री  परमार शुक्रवार को भोपाल स्थित मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के सभागार में, "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025" विषय पर आयोजित एक दिवसीय संविमर्श "आनन्दशाला" का शुभारम्भ कर, विधेयक की प्रासंगिकता के आलोक में अपने विचार साझा कर रहे थे। मंत्री  परमार ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों से भारतीयता के भाव का उद्घोष होना चाहिए। पराधीनता के पदचिन्हों को अंतिम विदाई देते हुए, हर क्षेत्र-हर विषय में भारतीय दृष्टि से समृद्ध विचार मंथन की आवश्यकता है। इसके लिए करोड़ों लोगों के सुझाव से सृजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। मंत्री  परमार ने कहा कि यह विधेयक, भारत के उच्च शिक्षा शासन प्रबंधन में महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार के लिए एकीकृत संस्थागत ढांचे की स्थापना के लिए भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित है। भारतीय शिक्षण मंडल एवं मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह आनंदशाला, विकसित भारत@2047 की संकल्पना सिद्धि के निमित्त, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में शैक्षणिक सरोकार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस संविमर्श से प्राप्त होने वाला निष्कर्ष, भारत सरकार के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक सिद्ध होगा। इस अवसर पर बीज वक्ता के रूप में  विश्वजीत पेंडसे, मप्र भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. मिलिंद दांडेकर, कुलसचिव डॉ. सुशील मंडेरिया एवं प्रो. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, विविध शिक्षाविद् एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित थे।  

भारतीय दृष्टि से समृद्ध अर्थव्यवस्था ही बनाएगी, विश्वमंच पर सिरमौर

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि अर्थव्यवस्था संघर्ष नहीं समन्वय का विषय है।भारत के दर्शन में "समन्वय" का समग्र दृष्टिकोण रहा है। भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान का स्वर्णिम अतीत रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था को विश्वमंच पर अग्रणी भूमिका में स्थापित करने के लिए, भारतीय दृष्टिकोण से समृद्ध अर्थव्यवस्था पर समग्र विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है। उच्च शिक्षा मंत्री  परमार शुक्रवार को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल एवं प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय हमीदिया महाविद्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "मप्र आर्थिक परिषद के 35वें राष्ट्रीय अधिवेशन एवं राष्ट्रीय सेमिनार" का शुभारम्भ कर, भारतीय दृष्टि से समृद्ध अर्थव्यवस्था के आलोक में अपने विचार साझा कर रहे थे। मंत्री  परमार ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम्, भारत का दृष्टिकोण है। हमारी मान्यता है कि विश्व एक बाजार नहीं बल्कि एक परिवार है। समृद्ध अर्थ-तंत्र के परिप्रेक्ष्य में समन्वित भाव के साथ पर विस्तृत मंथन करने की आवश्यकता है। शुभ-लाभ, हमारा सांस्कृतिक एवं आर्थिक चिंतन है, जो अच्छी पद्धति से धन कमाने का व्यापक संदेश देता है। मंत्री  परमार ने ग्रामीण भारत की रसोई और राशन प्रबंधन का उदाहरण साझा करते हुए, ग्रामीणों के आर्थिक प्रबंधन पर प्रकाश डाला। मंत्री  परमार ने कहा कि भारत हमेशा से कौशल प्रधान देश रहा है। भारतीय कौशल को वर्तमान आवश्यकता अनुरूप आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए, विश्वमंच पर आगे लाने की आवश्यकता है। मंत्री  परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत खाद्यान्न, ऊर्जा सहित हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर, अन्य देशों की पूर्ति करने में सामर्थ्यवान देश बनेगा। इसके लिए हम सभी को अपने परिश्रम और पुरुषार्थ की सहभागिता करनी होगी और विकसित भारत@2047 की संकल्पना की सिद्धि के लिए, अपने पूर्वजों के ज्ञान, संस्कृति एवं दर्शन को संजोकर आगे बढ़ना होगा। हर क्षेत्र-हर विषय में विद्यमान परंपरागत ज्ञान पर युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में शोध कर, दस्तावेजीकरण करना होगा। इस दो दिवसीय अधिवेशन में, भारत में कौशल विकास एवं मप्र में जनजातीय विकास और भारतीय ज्ञान परम्परा, इन दो महत्वपूर्ण विषयों पर अर्थशास्त्र के शिक्षक, विषयविद और शोधार्थी अपने विचार एवं शोध साझा करेंगे। इस अवसर पर मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स चेन्नई के निदेशक एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु प्रो. एन बी भानुमूर्ति, मप्र आर्थिक परिषद की अध्यक्ष प्रो. नीति जैन, परिषद के सचिव प्रो. सखाराम मुजाल्दे, आयोजक सचिव प्रो. शरद तिवारी, प्रो. अनिल शिवानी एवं जर्नल की मुख्य संपादक प्रो. रेखा आचार्य सहित अर्थशास्त्र के विभिन्न प्राध्यापकगण, विविध शिक्षाविद् एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित रहे।  

रानी अवंती बाई सागर प्रोजेक्ट ने रचा रिकॉर्ड, तय समय से 39 दिन पहले पूरा किया बिजली उत्पादन टारगेट

भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) के रानी अवंती बाई सागर जल विद्युत गृह बरगी ने शुक्रवार को सुबह 7.45 बजे वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्ष‍िक लक्ष्य 508.08 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन को 39 दिनों पूर्व हासिल करने में सफलता पाई है। नब्बे मेगावाट स्थापित क्षमता के बरगी जल विद्युत गृह का इस दौरान प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ) 93 फीसदी रहा। जल विद्युत गृह का फोर्सड् आउटेज मात्र 0.81 फीसदी व प्लान्ड (नियोजित) आउटेज 4.47 फीसदी रहा। बरगी जल विद्युत गृह ने यह सफलता तकनीकी दक्षता, कुशल संचालन व सुदृढ़ अनुरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए हासिल की। 38 वर्ष पुराने जल विद्युत गृह ने 12 हजार घंटे से अधिक किया विद्युत उत्पादन 38 वर्ष पुराने बरगी जल विद्युत गृह की दोनों उत्पादन यूनिट ने सामूहिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 12130 घंटे संचालन दर्ज कर निर्धारित उत्पादन लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस दौरान बरगी जल विद्युत गृह की प्रथम यूनिट ने 254.89 मिलियन यूनिट व द्वितीय यूनिट ने 253.19 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया। पिछले वित्तीय वर्ष में भी बरगी ने हासिल किया था लक्ष्य-रानी अवंती बाई सागर जल विद्युत गृह बरगी की 45 मेगावाट की प्रथम यूनिट 3 जून 1988 और 45 मेगावाट की द्वितीय यूनिट 29 नवम्बर 1988 को क्रि‍याशील हुई थी। बरगी जल विद्युत गृह ने इससे पूर्व पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी विद्युत नियामक आयोग के निर्धारित वार्ष‍िक लक्ष्य 508 मिलियन यूनिट की तुलना में 509 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया था। लक्ष्य को समयपूर्व प्राप्त करना हमारी कार्यसंस्कृति का परिचायक प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने रानी अवंती बाई सागर जल विद्युत गृह द्वारा 39 दिन पूर्व ही वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्ष‍िक लक्ष्य को हासिल करने की सफलता पर अभियंताओं व कार्मिकों बधाई देते हुए कहा कि वर्तमान में हम अपने अभियंताओं और कार्मिकों की प्रतिबद्धता, दक्षता और टीम भावना के बल पर सकारात्मक विकास पथ पर अग्रसर हैं। प्रत्येक लक्ष्य को समयपूर्व प्राप्त करना हमारी कार्यसंस्कृति का परिचायक बनता जा रहा है और हम सभी गर्व के साथ इन उपलब्धियों को साकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता सुविचारित निर्णय प्रक्रिया, समयबद्ध तकनीकी हस्तक्षेप, प्रभावी अनुरक्षण रणनीति और अभियंताओं व ठेका श्रमिकों के समन्वित प्रयासों से संभव हो पायी है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहुंचे NeevCloud स्टॉल पर, AI समिट में स्टार्टअप्स को मिला बड़ा प्रोत्साहन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 नई दिल्ली में नीवक्लाउड के प्रदर्शनी स्टॉल का अवलोकन किया। साथ ही नीवक्लाउड के फाउंडर एवं सीईओ  नरेन सेन से कंपनी की गतिविधियों एवं भावी योजनाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को  सेन ने बताया कि इंदौर आधारित नीवक्लाउड की स्थापना भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से की गई है। कंपनी स्वदेशी एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है, जिससे देश का डेटा देश में ही सुरक्षित रह सके। नीवक्लाउड और रैकबैंक के साथ वर्तमान में 150 से अधिक कुशल प्रोफेशनल्स कार्यरत हैं, जो इंजीनियरिंग, एआई, क्लाउड, डेटा सेंटर ऑपरेशंस और रिसर्च के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं।  सेन ने बताया कि कंपनी स्वदेशी एआई चिप के विकास की दिशा में भी कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य विदेशी निर्भरता कम करना, संवेदनशील डेटा को देश में सुरक्षित रखना और रणनीतिक तकनीक पर भारत का नियंत्रण सुनिश्चित करना है। अब तक 700 करोड़ रुपये का निवेश सुरक्षित किया जा चुका है और आगामी पाँच वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर्स और सेमीकंडक्टर तकनीक के विकास के लिए प्रस्तावित है। रैकबैंक के माध्यम से ऊर्जा-कुशल और हाई-डेंसिटी एआई डेटा सेंटर्स स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे रोजगार सृजन और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में एआई, क्लाउड और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस प्रकार के नवाचार देश को डिजिटल क्षेत्र में सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।