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राजनीतिक तनाव ने लिया उग्र रूप, भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पथराव

इंदौर दिल्ली में एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन के विरोध में शनिवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन घेरने की घोषणा की थी। लेकिन वहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी विरोध स्वरूप एकत्र होकर उनका सामना किया। दोनों तरफ से पत्थर, पानी की बोतलें और टमाटर एक-दूसरे पर फेंके गए। पुलिस ने आमने-सामने हुए दोनों दलों के प्रदर्शनकारियों को हटाकर स्थिति को नियंत्रित किया। इस पथराव में छह लोगों सहित एक मीडियाकर्मी और एक पुलिस अधिकारी को चोटें आई हैं। एक महिला नेत्री बिंदू चौहान को पथराव में गंभीर चोट आई है। उन्हे निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।   एआई समिट में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद देशभर में भाजपा ने कांग्रेस कार्यालय घेरने की योजना बनाई थी। इसके अलावा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा में दिए गए बयान के विरोध में कांग्रेस के प्रदर्शन प्रदेशभर में जारी थे। इसी कारण कांग्रेस कार्यकर्ता दोपहर एक बजे से गांधी भवन पर भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध में जुट गए थे। पुलिस ने संभावित टकराव को देखते हुए मार्ग के दोनों तरफ बैरिकेड लगा दिए थे। लेकिन जैसे ही भाजपा कार्यकर्ता प्रदर्शन करने गांधी भवन की ओर बढ़े, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। वे विजयवर्गीय के खिलाफ नारे लगा रहे थे। तभी अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। दोनों तरफ से पत्थर, टमाटर और पानी की बोतलें फेंकी गईं। बैरिकेड की वजह से दोनों कार्यकर्ताओं के बीच अधिक निकटता नहीं थी। पथराव के कारण छह से अधिक लोग घायल हुए है। इस घटना के बाद अफरा तफरी मच गई और व्यापारियों ने भी दुकानें धड़ाधड़ बंद कर दी। पुलिस ने स्थिति संभाली और दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को पीछे धकेला। दंगा नियंत्रक वाहन वज्र भी तैनात था और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का उपयोग किया गया, लेकिन पानी का प्रेशर कम होने के कारण यह प्रभावी नहीं हुआ। इस घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ता पढ़रीनाथ थाने का घेराव करने पहुंचे और कांग्रेसजनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराने की मांग की।

सिहोरा में हुए बवाल के बाद जबलपुर पुलिस अलर्ट, 49 गिरफ्तार; ड्रोन से चल रही निगरानी

जबलपुर  सिहोरा में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद 49 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, ड्रोन से निगरानी की जा रही है और पुलिस ने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। यह घटना गुरुवार रात आजाद चौक में हुई थी, जिसके बाद इलाके में तनाव बना रहा और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई। घटना में शामिल अन्य आरोपियों को चिह्नित कर उनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। शुक्रवार को घटना क्षेत्र में तनाव बना रहा। हिंदूवादी संगठनों ने थाना घेरा घटना के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने सिहोरा थाना घेरा। हनुमान चालीसा का पाठ कर विरोध जताया। पुलिस के सख्ते पहरे के बीच मस्जिद में जुमे की नमाज हुई। इसके बाद पुराने बस स्टैंड के पास दोनों समुदाय के एकत्रित लोगों की भीड़ में टकराव की स्थिति निर्मित हुई। भीड़ ने एक फल के ठेले को पलटा दिया। तभी मौके पर तैनात पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर दोनों पक्षों को तितर-बितर किया। घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस की गश्त और बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। घटना स्थल वाले संवेदनशील क्षेत्र में अब सन्नाटा है। व्यापारियों ने खुद बंद रखी दुकानें सुरक्षा की दृष्टि से शुक्रवार को व्यापारियों ने स्वयं प्रतिष्ठान बंद रखे। पुलिस और प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया है। शेष शहर में लोगों का जनजीवन सामान्य रहा। सांप्रदायिक तनाव को फैलने से रोकने के लिए शहर से अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर भेजा गया। उपद्रव वाली जगह पर दोनों समुदायों के धर्मस्थल के कारण यह अतिसंवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। पुलिस ने रात में ही उपद्रव वाले इलाके की बैरीकेडिंग कर दी। वहां, अनावश्यक आवाजाही रोक दी गई। हमने दोनों पक्षों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली है और अब तक 49 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने या माहौल बिगाड़ने वालों पर एनएसए जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सीसीटीवी से चिह्नित किए चेहरे रात में ही सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और घटना के वीडियो को देखकर आरोपियों को चिह्नित किया। नाबालिगों और वृद्धों को चेतावनी देकर छोड़ा। हिरासत में लिए गए अन्य आरोपितों को बस से शहर के पुलिस थाने में ले जाया गया। उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है। कैसे बिगड़ी सिहोरा की फिजा 1. सिहोरा के आजाद चौक में गुरुवार रात दुर्गा मंदिर में आरती और मस्जिद में तरावीह की नमाज के दौरान लाउडस्पीकर को लेकर विवाद शुरू हुआ। 2. विवाद इतना बढ़ा कि भीड़ ने पथराव कर दिया और वाहनों में तोड़फोड़ की, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए 12 थानों की पुलिस बुलानी पड़ी। 3. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के आधार पर 49 उपद्रवियों को चिह्नित कर गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें बस से थाने ले जाया गया। 4. शुक्रवार को तनावपूर्ण शांति रही, व्यापारियों ने स्वेच्छा से बाजार बंद रखा और पुलिस ने ड्रोन कैमरों से छतों की तलाशी ली। 5. अफवाह रोकने के लिए सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखी जा रही है और संवेदनशील इलाकों में पुलिस ने पैदल फ्लैग मार्च निकाला।

इंदौर में पानी की गंभीर कमी, 60 क्षेत्रों में पानी बंद; 35 मौतों के बाद हालात चिंताजनक

 इंदौर इंदौर शहर के भागीरथपुरा में हुई 35 मौतों का मामला अभी थमा भी नहीं था कि अब शहर में जल संकट की स्थिति ने लाखों शहरवासियों को परेशान कर दिया है। शुक्रवार के बाद आज यानी शनिवार को भी जल संकट बरकरार रहेगा। नर्मदा परियोजना के तीसरे चरण के तहत जलूद में 1200 एमएम की मुख्य पाइपलाइन बदलने, सोलर प्लांट के कार्यों और राजीव गांधी चौराहे पर 1100 एमएम लाइन के लीकेज सुधारने के चलते 20 फरवरी की सुबह से बंद किए गए पंपों को आज भी शहर के बड़े इलाके के लिए नहीं खोला जाएगा। इससे करीब करीब लाखों लोग प्रभावित होंगे। नर्मदा तीसरे चरण के पंप बंद रहने से शनिवार, 21 फरवरी को सुबह 60 टंकियों से होने वाली जलापूर्ति ठप रहेगी। इस कारण संबंधित क्षेत्रों के निवासियों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा। -प्रमुख योजनाएं: स्कीम 54, स्कीम 59, स्कीम 71, स्कीम 74, स्कीम 78 (स्लाइस 1 व 2), स्कीम 94, स्कीम 113, स्कीम 114 (पार्ट 1 व 2) और स्कीम 136। -मध्य एवं उत्तर इंदौर: एमआईजी, तुकोगंज, यशवंत क्लब, एमवायएच, पीडब्ल्यूडी, सीपी शेखर नगर, पागनिसपागा, गाड़ी अड्डा, स्नेह नगर, खातीवाला और काटन अड्डा। -पूर्वी इंदौर और विजयनगर: खजराना, महालक्ष्मी नगर, सुखलिया, वीणा नगर, लवकुश विहार, बर्फानी धाम, बजरंग नगर, नंदा नगर (नई, पुरानी और रोड नं. 13) और जनता क्वार्टर। -दक्षिण एवं पश्चिमी इंदौर: बिलावली, भवरकुआ, रेती मंडी, सूर्यदेव नगर, हवा बंगला, विदुर नगर, ग्रेटर वैशाली, प्रगति नगर, चंदन नगर, अंबिकापुरी, नगीन नगर और मित्रबंधु नगर। -अन्य प्रभावित बस्तियां: मूसाखेड़ी, टूटी प्रेस, शिव नगर, महावीर नगर, कुलकर्णी का भट्टा, अंबेडकर नगर, साईं कृपा, लोहा मंडी, राजीव आवास विहार, भागीरथपुरा, ईंट भट्टा, उर्दू स्कूल और मां विहार।

AI टेक्नोलॉजी से मरीजों का नेविगेशन आसान, भोपाल एम्स बना देश का पहला स्मार्ट अस्पताल

भोपाल AIIMS भोपाल देश का पहला ऐसा अस्पताल बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मरीजों और उनके परिजनों को खुद सही रास्ता बताएगा। रोजाना यहां 10 हजार से अधिक लोग इलाज, जांच और परामर्श के लिए आते हैं। बड़े और एक जैसे दिखने वाले भवनों के कारण लोगों को अक्सर सही विभाग ढूंढने में दिक्कत होती है। अब इस समस्या का समाधान AI आधारित नेविगेशन सिस्टम से किया जाएगा। QR कोड स्कैन करते ही मिलेगा रास्ता एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन के अनुसार, परिसर में लगाए गए QR कोड को स्कैन करते ही मरीज को यह जानकारी मिल जाएगी कि कार्डियोलॉजी, अमृत फार्मेसी, न्यूरोसर्जरी, पैथोलॉजी, एमआरआई या डॉक्टर का कक्ष किस दिशा में है। यह सुविधा गूगल मैप की तरह काम करेगी और चरणबद्ध दिशा-निर्देश देगी। एक जैसी बिल्डिंग, इसलिए AI का सहारा एम्स का कैंपस काफी विस्तृत है और भवनों की आंतरिक बनावट लगभग एक जैसी है। अलग-अलग ब्लॉक होने के बावजूद रास्ते मिलते-जुलते हैं। ऐसे में पहली बार आने वाले मरीजों को ओपीडी, वार्ड, पैथोलॉजी या एमआरआई ढूंढने में काफी समय लग जाता है। बार-बार स्टाफ से पूछने की स्थिति बनती है, जिससे समय के साथ तनाव भी बढ़ता है। इसी परेशानी को खत्म करने के लिए AI तकनीक को अपनाया जा रहा है। बिल्डिंग की डिजाइन ऐसी कि एआई का सहारा लेना पड़ा भोपाल एम्स का परिसर काफी बड़ा है। अस्पताल भवनों की अंदरूनी बनावट एक जैसी है। अलग-अलग ब्लॉक हैं, लेकिन सब एक जैसे नजर आते हैं, रास्ते भी एक जैसे हैं। ऐसे में बार-बार आने पर भी मरीजों और उनके परिजन को सही विभाग तक पहुंचने में परेशानी होती है। वहीं, पहली बार आने वाले मरीजों का पैथोलॉजी, एमआरआई, ओपीडी या वार्ड ढूंढ़ने में ही काफी समय लग जाता है। बार-बार स्टाफ या सुरक्षाकर्मियों से रास्ता पूछना पड़ता है। इससे न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि मरीज और परिजन तनाव भी महसूस करते हैं। इसलिए अब इस समस्या को दूर करने के लिए एआई का सहारा लिया जा रहा है। एआई आधारित नेविगेशन सिस्टम बना रहे इसी समस्या को दूर करने के लिए एम्स भोपाल ने आईआईटी इंदौर की दृष्टि टीम के साथ मिलकर स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली विकसित करने की पहल की है। भोपाल के एक स्टार्टअप की मदद से एआई आधारित नेविगेशन सिस्टम तैयार किया जा रहा है। यह सिस्टम गूगल मैप की तरह काम करेगा। एम्स के मोबाइल एप या परिसर में लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद व्यक्ति जिस स्थान पर जाना चाहता है, उसे सर्च करेगा। इसके बाद एआई उसे चरणबद्ध तरीके से सही रास्ता दिखाएगा। क्यूआर कोड और मोबाइल ऐप से मिलेगा रास्ता इस प्रणाली के दो स्वरूप होंगे। पहला वेब आधारित होगा। एम्स के मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। जैसे ही कोई व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन करेगा, उसके मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा। दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। यूजर ऐप डाउनलोड कर सीधे नेविगेशन का लाभ ले सकेंगे। भवनों के बीच पहुंचने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग होगा। भवनों के अंदर, जहां जीपीएस की सटीकता कम हो जाती है, वहां हर 15 मीटर पर रिले सिस्टम लगाए जाएंगे। ये उपकरण मोबाइल को सटीक दिशा-निर्देशन देंगे, जिससे व्यक्ति बिना भटके सही जगह पहुंच सकेगा। एक माह का पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक माह के पायलट की तरह लागू किया जाएगा। इस दौरान यह देखा जाएगा कि सिस्टम कितना प्रभावी है और लोगों को कितना फायदा हो रहा है। यदि रिजल्ट संतोषजनक रहे तो इसे पूरे परिसर में लागू किया जाएगा। इससे मरीजों का समय बचेगा, भीड़ का दबाव कम होगा और स्टाफ पर रास्ता बताने का अतिरिक्त बोझ भी घटेगा। IIT इंदौर के सहयोग से विकसित होगा सिस्टम इस परियोजना को विकसित करने के लिए एम्स भोपाल ने Indian Institute of Technology Indore की दृष्टि टीम और भोपाल के एक स्टार्टअप के साथ साझेदारी की है। AI आधारित यह स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली मोबाइल ऐप और वेब दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। दो तरीकों से काम करेगा नेविगेशन वेब आधारित सिस्टम: मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थानों पर QR कोड लगाए जाएंगे। स्कैन करते ही मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा। मोबाइल ऐप से मिलेगा सटीक दिशा-निर्देशन दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। भवनों के बीच जाने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं भवनों के अंदर, जहां जीपीएस कमजोर होता है, वहां लगभग हर 15 मीटर पर रिले उपकरण लगाए जाएंगे। इससे दिशा-निर्देशन और अधिक सटीक होगा। पहले पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू एम्स प्रवक्ता डॉ. केतन मेहरा ने कहा कि आइआइटी इंदौर के साथ मिलकर सिस्टम को विकसित कर रहा है। इसे अप्रेल के अंत में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। सबसे अहम बात, बड़े अस्पताल को लेकर जो झिझक होती है, वह कम होगी। मोबाइल ऐप आधारित सिस्टम: यूजर ऐप डाउनलोड कर सीधे नेविगेशन सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। भवनों के बीच दिशा बताने के लिए GPS तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं, भवनों के अंदर जहां GPS की सटीकता कम होती है, वहां हर 15 मीटर पर रिले सिस्टम लगाए जाएंगे, जो सटीक दिशा-निर्देशन सुनिश्चित करेंगे। AIIMS भोपाल में बेड क्षमता-     जनरल वार्ड एवं एचडीयू – 816 बेड     आईसीयू वार्ड – 128 बेड     प्राइवेट वार्ड – 34 बेड     इमरजेंसी वार्ड – 56 बेड     डे-केयर वार्ड – 268 बेड डे-केयर सर्विस वार्ड – 87 बेड यह पहल न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों के तनाव को भी कम करेगी, जिससे अस्पताल सेवाएं और अधिक सुगम बन सकेंगी।  

कोर्ट ने बढ़ाई अमिताभ बच्चन की मुश्किलें, नागदा विवाद पर CIS में केस और थाने से मांगी रिपोर्ट

नागदा  सोनी चैनल पर 23 दिसंबर 2025 को प्रसारित ‘कौन बनेगा करोड़पति’ कार्यक्रम में नागदा को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है। शो के होस्ट और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन द्वारा नागदा को पानी की समस्या से जूझ रहा छोटा सा गांव बताए जाने पर स्थानीय स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। इस मामले में नागदा के ज्यूडिशयल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है। न्यायालय ने परिवाद स्वीकार करते हुए प्रकरण सीआईएस (Case Information System) में दर्ज करने और संबंधित थाने को प्रतिवेदन (रिपोर्ट) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल किसी भी सिविल या क्रिमिनल केस को अदालत में दाखिल करने पर CIS में रजिस्टर किया जाता है। इसके बाद पिटीशन को कोर्ट द्वारा एक्स्पेट करना माना जाता है। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को निर्धारित की गई है। सोनी पिक्चर्स नेटवर्क के सीईओ भी बनाए गए पक्षकार स्थानीय निवासी और अधिवक्ता लक्ष्मण सुंदरा ने अमिताभ बच्चन के साथ-साथ सोनी पिक्चर्स नेटवर्क के सीईओ गौरव बैनर्जी के खिलाफ भी अपराध पंजीबद्ध करने की मांग को लेकर न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया है। अब न्यायालय में अगली सुनवाई के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। शहर की छवि धूमिल करने का आरोप प्रकरण की पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजेश मंडवारिया (आलोट) और दीपमाला अवाना (नागदा) ने कहा कि इतने बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम में नागदा शहर के बारे में भ्रामक जानकारी दी गई, जिससे शहर की छवि प्रभावित हुई है। अधिवक्ता जैना श्रीमाल के अनुसार कार्यक्रम में नागदा को छोटा गांव और पानी संकटग्रस्त बताया गया, जबकि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है। नागदा की पहचान परिवाद में उल्लेख किया गया है कि नागदा मालवा क्षेत्र का प्रमुख रेलवे जंक्शन है, जिसकी आबादी डेढ़ लाख से अधिक है। यह एक औद्योगिक नगर के रूप में विकसित है। साथ ही आवेदन में यह भी कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तीन बार नागदा को जिला बनाने की घोषणा कर चुके हैं। .

मौसम चेतावनी: मध्य प्रदेश में 4 दिन तक आंधी और बारिश, भोपाल‑जबलपुर में सुबह होगी बरसात

भोपाल   मध्यप्रदेश में मौसम इस समय 'दोहरी रंगत' दिखा रहा है। एक तरफ जहां गुलाबी ठंड की विदाई का समय है, वहीं दूसरी ओर आसमान से बरसती आफत ने प्रदेशवासियों को चिंता में डाल दिया है। नए वेदर सिस्टम के सक्रिय होने से शनिवार, 21 फरवरी 2026 को प्रदेश के 28 जिलों में बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। गुरुवार और शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ने उज्जैन और भोपाल संभाग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जिससे रबी की फसलों को बड़ा नुकसान होने का खतरा पैदा हो गया है। प्रदेश के आधे हिस्से में पानी-पानी मौसम विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान भोपाल और उज्जैन समेत प्रदेश के 17 जिलों में बारिश दर्ज की गई। उज्जैन में सर्वाधिक 1 इंच के आसपास बारिश हुई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। ठंड के आखिरी दौर में हर हफ्ते बदलता यह मौसम का मिजाज विशेषज्ञों को भी हैरान कर रहा है। शुक्रवार को बारिश का दौर जारी रहा और शनिवार को भी इसके थमने के आसार नहीं हैं। 17 जिलों में जमकर बारिश बता दें कि उज्जैन सहित शाजापुर, देवास, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, झाबुआ, इंदौर, भोपाल, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, सागर, छतरपुर, पन्ना और सतना जिलों में अलग-अलग स्थानों पर बारिश हुई है। प्रदेश में कहीं से ओले की सूचना सामने नहीं आई है। वहीं बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, कई जिलों में ठंड बढ़ गई है। बारिश-आंधी और बिजली का अलर्ट मप्र मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के बड़े हिस्से में तेज हवाओं के साथ बारिश का 'यलो अलर्ट' जारी किया है। जिन शहरों में सावधानी बरतने को कहा गया है, उनमें राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर और नर्मदापुरम संभाग के जिले शामिल हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश के साथ-साथ कई इलाकों में 'गाज' (आकाशीय बिजली) गिरने की भी संभावना है, इसलिए लोग पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में जाने से बचें। फसलों को नुकसान की आशंका तेज हवाओं का असर खासतौर पर रतलाम, शाजापुर और उज्जैन में ज्यादा देखा गया। यहां गेहूं की खड़ी फसलें झुक गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसलें लंबे समय तक जमीन पर पड़ी रहीं तो दानों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। पिछले तीन दिनों में करीब 25 जिलों में आंधी के कारण फसल नुकसान की संभावना जताई जा रही है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रभावित इलाकों में सर्वे शुरू करा दिया है। राजस्व विभाग की टीमें खेतों में पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन कर रही हैं। अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम 22 फरवरी को बारिश की कोई चेतावनी नहीं है, हालांकि आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। 23 फरवरी को दक्षिणी हिस्सों में सक्रिय सिस्टम के प्रभाव से बारिश होने की संभावना जताई गई है। 24 फरवरी को दक्षिण-पूर्वी जिलों में मौसम का असर अधिक देखने को मिल सकता है। इंदौर में तापमान में खासी गिरावट इंदौर में शुक्रवार को मौसम अचानक बदल गया। दिन का अधिकतम तापमान चार डिग्री गिरकर 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रात के तापमान में भी एक डिग्री की कमी आई और पारा 15 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। देर रात शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई। शनिवार सुबह हल्की ठंड महसूस की गई, हालांकि दिन में धूप निकलने से मौसम सुहावना बना रहा। फरवरी में लगातार बदल रहा मौसम इस महीने की शुरुआत से ही मौसम अस्थिर बना हुआ है। फरवरी के पहले पखवाड़े में दो बार आंधी, बारिश और ओले गिर चुके हैं, जिससे फसलों को नुकसान हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार बारिश का सिलसिला शुरू हुआ, जिसका असर 19 और 20 फरवरी को भी रहा। अब 23 और 24 फरवरी को फिर से बारिश की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह फरवरी में चौथी बार मौसम परिवर्तन होगा। कल से वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर 22 फरवरी को एक पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय होगा। इसका प्रभाव अगले दिन से मध्य प्रदेश में दिखाई दे सकता है। 23 फरवरी को नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में वर्षा की संभावना है। 24 फरवरी को सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बारिश हो सकती है। तापमान का हाल बारिश के बावजूद रात के तापमान में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है, लेकिन हवाओं ने सिहरन बढ़ा दी है। कल्याणपुर 10.4°C के साथ सबसे ठंडा इलाका रहा, वहीं शहडोल और उमरिया में पारा 10 से 12°C के बीच बना हुआ है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। कई जिलों से खबरें आ रही हैं कि खेतों में खड़ी गेंहू और चने की फसलें तेज हवा के कारण जमीन पर बिछ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव और नमी के कारण दानों की गुणवत्ता खराब हो सकती है और पैदावार में गिरावट आने की पूरी आशंका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल बड़े स्तर पर ओलावृष्टि की सूचना कहीं से नहीं मिली है।

भिंड सड़क हादसा: बस-वन टक्कर, 5 मृतक और 7 घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

भिंड  मध्य प्रदेश के भिंड में शुक्रवार देर रात बस और वैन आमने-सामने भिड़ गए। हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन पूरी तरह से टूट गई। उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए। हादसा गोहद चौराहा थाना अंतर्गत छींमका गांव के पास नेशनल हाईवे-719 पर रात 2.30 बजे हुआ। गोहद चौराहा थाना प्रभारी मनीष धाकड़ के अनुसार, ईको और वैन ग्वालियर से सवारियों को लेकर भिंड की ओर आ रहा था, जबकि बस भिंड से ग्वालियर की ओर जा रही थी। चार लोगों की मौत हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।वहीं घायलों को एंबुलेंस से ग्वालियर रेफर किया गया। फिलहाल, घायलों का ग्वालियर में इलाज जारी है।टीआई ने बताया कि अभी दो मृतकों की पहचान हुई है।इनके नाम अतुल शिवहरे निवासी फूप और जगदीश भदौरिया निवासी स्योड़ा गांव अकोड़ा है। बाकी के शिनाख्ती के प्रयास किए जा रहे हैं।पुलिस परिजनों का पता लगाने के लिए दस्तावेजों और वाहन नंबर के आधार पर जांच कर रही है।जिस जगह हादसा हुआ, वहां अंधा मोड़ है।हो सकता है दोनों वाहन तेज रफ्तार में हों।हादसे की जांच जारी है।दोनों वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया है।इस दर्दनाक घटना में केतु पुत्र संतोष, संतोष पुत्र कल्याण, प्रदीप पुत्र राम प्रकाश, मेंवाराम पुत्र बाबूराम, राम लखन पुत्र भागीरथ, मीरा पुत्र सुरेश, सुखबीर सिंह पुत्र श्री गंभीर रूप से घायल हो गए है.. वही पांच मार्को के शव पोस्टमार्टम भिजवा दिए है। घायलों को रेफर किया भिंड के एसपी असित यादव ने बताया कि घायलों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से गंभीर मामलों को ग्वालियर रेफर किया गया। हालांकि, तमाम विरोध औ प्रदर्शन के बावजूद हाईवे पर दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी है। यातायात सुरक्षा पर गंभीर सवाल है कि बीते सालों में तमाम कोशिशों के बाद भी यहां कोई सुधार नहीं हो पाया है। जांच में पता चला कि बस की स्पीड ज्यादा थी और संभवतः चालक की लापरवाही से यह हादसा हुआ। परिवारों का विलाप दिल दहला देने वाला है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए गोहद अस्पताल भेजा।यह घटना न केवल एक हादसा है, बल्कि सड़क सुरक्षा के अभाव को उजागर करती है, जहां तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग आम समस्या है।

मतदाता सूची अपडेट: भोपाल में 3.80 लाख नाम हटाए गए, 120+ उम्र के 125 वोटर्स अब नहीं होंगे शामिल

भोपाल  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नाम जोड़ने, हटाने के लिए बुलाए गए दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज शनिवार को मध्य प्रदेश में मतदाताओं की स्थिति साफ हो जाएगी। जिलों में निर्वाचन अधिकारी मतदाता सूची का प्रकाशन कर बताएंगे कि किस विधानसभा सीट में कितने मतदाताओं के नाम काटे और जोड़े गए हैं। इसके बाद अब चुनाव आयोग की एसआईआर की कार्यवाही भी कम्प्लीट हो जाएगी। अब ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से नाम जोड़ने और हटवाने की प्रक्रिया चलती रहेगी। एसआईआर की कार्यवाही पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत उनके मंत्रियों के क्षेत्र से 8 लाख 20 हजार 255 नाम काटे गए थे। इसके बाद नए नाम जोड़ने को लेकर तय समय-सीमा में सिर्फ 1 लाख 69 हजार 753 आवेदन जमा किए गए। सबसे अधिक नाम मंत्री कृष्णा गौर और विश्वास सारंग के विधानसभा क्षेत्र से कटे थे उसी तरह नए नाम जोड़ने के लिए सबसे अधिक आवेदन जमा हुए थे। पूरे प्रदेश की बात करें तो 42 लाख 74 हजार से अधिक नाम काटने की कार्यवाही एसआईआर में की गई और इसके विपरीत नए नाम जोड़ने के लिए सिर्फ 9 लाख 89 हजार 991 लोगों ने आवेदन जमा किए गए थे। नए नाम जोड़ने के लिए जिन विधानसभा क्षेत्रों में दस हजार से अधिक आवेदन जमा किए गए थे, उसमें मंत्री कृष्णा गौर की गोविंदपुरा विधानसभा सीट सबसे आगे है। यहां 17888 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। इसके बाद मंत्री विश्वास सारंग की सीट नरेला में 15115 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए थे। भोपाल जिले की हुजूर विधानसभा सीट जिसके विधायक रामेश्वर शर्मा हैं, वहां से 13024 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए। इंदौर जिले में इंदौर 2 विधानसभा सीट से 10446 और इंदौर 5 विधानसभा क्षेत्र से 11040 नाम जोड़ने के लिए आवेदन जमा कराए गए। राऊ सीट के लिए 12700, नागदा खाचरौद सीट के लिए 11047 आवेदन जमा कराए गए। भोपाल में 120+ उम्र के 125 वोटर्स स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में भोपाल की वोटर संख्या को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। पहले सर्वे और फिर दावे-आपत्तियों की सुनवाई के बाद वोटर लिस्ट से 3.80 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होगी। बता दें, 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर यानी, बीएलओ अपने-अपने बूथ पर बैठें। इस दौरान उन्होंने नए फॉर्म 6, 7 और 8 प्राप्त किए। एसआईआर में जिन मतदाताओं को 'नो मैपिंग' में रखा गया कि उन्हें नोटिस जारी किए गए और 50 दिन के अंदर उनका रिकॉर्ड देखा। 14 फरवरी तक ये काम पूरा हो गया। अब फाइनल मतदाता सूची शनिवार को जारी होगी। पहले इतनी थी मतदाता संख्या एसआईआर से पहले 27 अक्टूबर 2025 की स्थिति में भोपाल की मतदाता संख्या 21 लाख 25 हजार 908 थी, जो अब 17 लाख 45 हजार 453 हो गई है। इस तरह वोटर लिस्ट से 3 लाख 80 हजार 455 मतदाता कम हो जाएंगे। उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे जानकारी के अनुसार, शनिवार को फाइनल वोटर लिस्ट में उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे। इनमें शतक यानी, 100 या इससे अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या भी सामने आएगी। इस उम्र की कैटेगिरी में करीब 125 मतदाता हैं। सबसे कम आवेदन वाले विधानसभा में राजनगर और बीना का नाम छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए सबसे कम 1138 आवेदन आए थे। राजनगर कांग्रेस के पूर्व एमएलए विक्रम सिंह नातीराजा का क्षेत्र है। इसके साथ ही बीजेपी में शामिल होने को लेकर विवादों में चल रही कांग्रेस की एमएलए निर्मला सप्रे भी उन विधायकों में शामिल हैं जिनके यहां नए नाम जोड़ने के लिए कम आवेदन जमा हुए थे। बीना विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर के बाद नाम जोड़ने के लिए 1288 आवेदन जमा हुए। इन विधानसभा सीट में भी दो हजार से कम आवेदन आए चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक टिमरनी विधानसभा सीट से 1463 आवेदन मिले थे। भगवानपुरा सीट से 1556 और रतलाम ग्रामीण के लिए 1629 आवेदन जमा कराए गए तो जावद सीट के लिए 1649 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से 1742 आवेदन आए। पूर्व मंत्री बिसाहू लाल सिंह की सीट अनूपपुर से 1750 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए मिले थे। वहीं शमशाबाद विधानसभा सीट के लिए 1781 आवेदन जमा किए गए। भीकनगांव के लिए 1794, बदनावर सीट से 1799, बड़वाह सीट के लिए 1838 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के विधानसभा क्षेत्र से 1934 आवेदन जमा हुए थे। मंत्री कृष्णा और सारंग के क्षेत्र में सबसे अधिक नाम कटे एसआईआर में सबसे अधिक नाम गोविन्दपुरा से विधायक और मोहन सरकार में मंत्री कृष्णा गौर के क्षेत्र से काटे गए थे। भोपाल जिले की इस विधानसभा सीट से 97052 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। दूसरे स्थान पर इंदौर-5 से बीजेपी विधायक महेंद्र हार्डिया का विधानसभा क्षेत्र है। मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग और कैलाश विजयवर्गीय के क्षेत्र से 81235 और 75014 वोटर्स के नाम काटे गए। एसआईआर में सबसे कम 6034 नाम नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से कटे। एसआईआर ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद जो रिपोर्ट सामने आई थी उसके अनुसार मोहन सरकार के पांच मंत्रियों के क्षेत्र में 50 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। इसमें भोपाल के दो विधानसभा क्षेत्र गोविन्दपुरा और नरेला, इंदौर के इंदौर-1, ग्वालियर जिले की ग्वालियर विधानसभा, ग्वालियर दक्षिण विधानसभा, इंदौर जिले की इंदौर -1 विधानसभा शामिल है। मुख्यमंत्री के यहां 37728, विस अध्यक्ष के यहां 13920 नाम कटे थे एसआईआर के ड्राफ्ट प्रकाशन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विधानसभा सीट उज्जैन दक्षिण से 37728 वोटर्स के नाम काटे गए हैं। मुरैना जिले के दिमनी विधानसभा सीट से विधायक और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र के 13920 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं। कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विधानसभा क्षेत्र गंधवानी से 14712 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। अटेर विधानसभा कांग्रेस … Read more

मध्य प्रदेश को मिलेगी नई रेललाइन, 108 गांव होंगे प्रभावित; सरकार ने तय की 2030 की डेडलाइन

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर से बुदनी के बीच बन रही नई ब्रॉडगेज रेल लाइन रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। पहले से ही करीब पांच साल देरी का सामना कर रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति जमीन अधिग्रहण की सुस्त प्रक्रिया के कारण थमी हुई है। कई गांवों में मुआवजा और सीमांकन संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाने से निर्माण कार्य तय गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा। हालात ऐसे हैं कि अब इस रेल लाइन को पूरा करने का लक्ष्य बढ़ाकर साल 2030 तक कर दिया गया है। जिससे क्षेत्रवासियों को सीधी रेल कनेक्टिविटी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। परियोजना में खर्च हो चुके हैं 2 हजार करोड़ यह 205 किमी का सेक्शन 342 किमी लंबी इंदौर-जबलपुर नई विद्युत रेल लाइन परियोजना का अहम हिस्सा है, जिसे 2016-17 में मंजूरी मिली और 2018 में काम शुरू हुआ। शुरुआती लक्ष्य 2024-25 था, लेकिन फंड की कमी, जमीन अधिग्रहण और न्यायिक अड़चनों के कारण अब नई समयसीमा 2029-30 तय की गई है। करीब 7,400 करोड़ रुपए की इस परियोजना पर अब तक लगभग 2,000 करोड़ खर्च हो चुके हैं और प्रगति 30% दर्ज की गई है। निर्माण कार्य रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा तीन पैकेज में किया जा रहा है-मांगलिया गांव से खेरी, खेरी से पीपलिया नानकर और पीपलिया नानकर से बुदनी का काम चल रहा है। 75 किमी कम होगा सफर नई लाइन बनने के बाद इंदौर से जबलपुर की दूरी करीब 75 किमी कम हो जाएगी। अभी यात्रियों को भोपाल होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। नई कनेक्टिविटी से समय की बचत होगी और ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 130 किमी प्रति घंटा तक हो सकेगी। इससे मालवा और महाकौशल क्षेत्र के यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा, साथ ही माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।   परियोजना में 80 सुरंगें परियोजना में 80 बड़े पुल और दो सुरंगें (1.24 किमी और 8.64 किमी) प्रस्तावित हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस रूट पर कोई लेवल क्रॉसिंग नहीं होगी, अंडरपास और ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। सुरंगों का डिजाइन वन्यजीव क्षेत्र को सुरक्षित रखते हुए तैयार किया गया है। योजना के अनुसार 2027-28 में बुदनी से सलकनपुर, 2028-29 में मांगलिया गांव से खेरी और 2029-30 तक पूरा ट्रैक तैयार करने का लक्ष्य है। 108 गांवों की जमीन अधिग्रहित कुल 205 किमी में से 186 किमी राजस्व और सरकारी भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। शेष वन क्षेत्र की अनुमति मार्च 2025 में मिल गई। 108 गांवों में अधिग्रहण कर लगभग 721 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है।

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की तैयारी तेज, 1.81 लाख किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक एक लाख 81 हजार 793 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। पंजीयन की कार्यवाही 7 मार्च तक जारी रहेगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन जरूर करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। मंत्री राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 27 हजार 175, उज्जैन में 73 हजार 398, ग्वालियर में 3358, चम्बल में 1449, जबलपुर में 12 हजार 342, नर्मदापुरम में 11 हजार 698, भोपाल में 41 हजार 268, रीवा में 3242, शहडोल में 726 और सागर संभाग में 7137 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। किसानों को करें एसएमएस खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं।