samacharsecretary.com

टीकमगढ़ में भयानक हादसा : सेप्टिक टैंक में चप्पलें तैर रही थीं, अंदर पाए गए दो भाईयों के शव

टीकमगढ़   टीकमगढ़ जिले से एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां स्थित एक निर्माणाधीन मकान के खुले सेप्टिक टैंक में गरकर डूबने से दो सगे भाईयों की मौत हो गई। ये सनसनीखेज मामला शहर की शिवनगर कॉलोनी का है, किराये के मकान में रहने वाले सचिन यादव के दो बच्चों, जिनमें 7 वर्षीय नरेंद्र और 5 वर्षीय आशीष की शाम 4 बजे घर से अपनी मां से खेलने का बोलकर घर से निकले और खेलते-खेलते कॉलोनी में मुकुंद यादव के निर्माणाधीन मकान में चले गए, जहां वे खुले सेप्टिक टैंक में गिर गए। देर शाम तक जब बच्चे घर नहीं लौटे तो चिंतित माँ ने पहले बच्चों को कॉलोनी में रहवासियों के घरों में तलाशा, जब बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो कॉलोनी के लोगों ने मिलकर कॉलोनी में लगे सभी सीसीटीवी खंगालने शुरू किए तो एक सीसीटीवी फुटेज में बच्चे निर्माणाधीन मकान के अंदर जाते दिखे। इसके तुरंत बाद पड़ोसी जैसे ही उस मकान में घुसे तो उन्हें सेप्टिक टैंक में दोनों बच्चों के शव पानी में पड़े मिले, जिसके बाद इलाके के लोगों ने घटना की जानकारी कोतवाली पुलिस को दी। पोस्टमार्टम के बाद सौंपे जाएंगे शव मौके पर पहुंची पुलिस ने तत्काल बच्चों को टैंक से निकलवाया और अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण उपरात दोनों भाइयों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम कक्ष में रखवा दिया गया। आज शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव परिजन को सौंपा जाएंगे। घटना के बाद से इलाके में शोक का माहौल है।

एनजीटी सख्त: भोपाल के वेटलैंड पर अवैध कब्जे पर कार्रवाई न होने पर प्रशासन को चेतावनी

 भोपाल  कलियासोत जलाशय क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा कार्रवाई नहीं की गई, जो चिंताजनक है। एनजीटी के समक्ष यह मामला कलियासोत जलाशय, केरवा जलाशय और आसपास के ग्रीन बेल्ट, बाटनिकल गार्डन व रीजनल गार्डन की जमीन पर हुए अतिक्रमण से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने माना कि इन अवैध गतिविधियों से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं जैसे जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास भी खतरे में है। 97 अतिक्रमण चिह्नित किए बीते कुछ वर्षों में इन जीवों का रिहायशी इलाकों में दिखना मानव जीवन के लिए भी जोखिम बनता जा रहा है। एनजीटी ने अपने आदेश में खुलासा किया कि कलियासोत जलाशय क्षेत्र में कुल 97 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश सरकारी भूमि पर हैं। इसके अलावा लगभग 150 हेक्टेयर भूमि, जो बाटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित है, उसकी न तो समुचित सीमांकन हुआ और न ही सुरक्षा। वहीं, बिना उपचारित सीवेज जलाशयों प्रवाह अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। कई एसटीपी वर्षों से अधूरे या ट्रायल रन की स्थिति में हैं। दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश ट्रिब्यूनल ने कलेक्टर भोपाल और नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत निगरानी में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आदेश दिया गया है कि दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश की जाए। एनजीटी ने यह भी कहा कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। समय सीमा बीतने के बाद भी शुरू नहीं हुए एसपीटी एनजीटी ने यह भी चिंता जताई कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी पूरी तरह चालू नहीं हो पाए हैं, जिसके कारण बिना उपचारित गंदा पानी जलाशयों में छोड़ा जा रहा है । अधिकरण ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक भूमि की रक्षा करना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है और अधिकारियों की निष्क्रियता किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को याचिकाकर्ता डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर खान की ओर से प्रस्तुत तर्कों पर सुनवाई के बाद एनजीटी ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिए कि यह आदेश मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव तक पहुंचाया जाए, ताकि तत्काल और ठोस कार्रवाई हो सके। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि वह स्वामित्व विवाद तय नहीं करेगा, बल्कि उसका उद्देश्य केवल जलाशयों से अतिक्रमण हटाकर भोज वेटलैंड की रक्षा करना है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को होगी।

बालाघाट हॉस्टल मामला: नाबालिग छात्रा ने जन्म दिया, लापरवाही बरतने वाली अधीक्षिका सस्पेंड, आरोपी पकड़ा गया

बालाघाट  जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही आठवीं कक्षा की साढ़े 13 वर्षीय नाबालिग के मां बनने की खबर ने छात्रावास में बच्चियों के स्वास्थ्य परीक्षण की पोल खोलकर रख दी है। अस्पताल चौकी से जानकारी मिलने के बाद महिला थाना ने मामले में कार्यवाही करते हुए अग्रिम कार्यवाही के लिए गढ़ी थाना को जानकारी भिजवा दी है। नाबालिग आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया जानकारी के अनुसार, नाबालिग को मां बनाने वाले नाबालिग आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जिसे शनिवार को किशोर न्यायालय में पेश किया जाएगा। वहीं इस मामले में सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग शकुंतला डामोर ने बैहर विकासखंड अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास परसामऊ की छात्रावास अधीक्षिका प्राथमिक शिक्षक चैनबती सैयाम को अपने कार्यों में लापरवाही बरतने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दरअसल, गढ़ी थाना क्षेत्र के परसामऊ आवासीय छात्रावास में रहकर नाबालिग पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान उसके गर्भवती होने और एक बच्ची को जन्म देने का मामला सामने आया है। जिला शिक्षा केंद्र के अधीन संचालित यह आवासीय छात्रावास जिला शिक्षा केंद्र के अधीन संचालित होता है। जिला शिक्षा केंद्र के डीपीसी जीपी बर्मन ने इस मामले में हॉस्टल वार्डन और एएनएम की लापरवाही स्वीकार करते हुए बताया कि आठवीं कक्षा में पढ़ रही पीड़ित छात्रा की तबीयत ठीक नहीं रहती थी तथा वह ज्यादातर समय अपने घर पर ही रहती थी। पुलिस में दिए बयान के अनुसार पीड़ित छात्रा के उसी गांव के किसी व्यक्ति से शारीरिक संबंध थे। महिला थाना प्रभारी किरण वरकड़े ने बताया कि अस्पताल चौकी से जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर प्रारंभिक कार्यवाही की गई और आगे की कार्यवाही गढ़ी थाना पुलिस द्वारा की जाएगी। उन्होंने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और शनिवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। अधिकारियों का क्या कहना है इधर मामले के सामने आने के बाद सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग शकुंतला डामोर ने बताया कि कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास परसामऊ की कक्षा आठवीं की बच्ची के गर्भवती होने और बच्ची को जन्म देने के मामले में प्रथम दृष्टया पाया गया कि छात्रावास अधीक्षिका द्वारा पीड़ित छात्रा के स्वास्थ्य में परिवर्तन होने पर कोई संवेदना नहीं दिखाई गई और न ही छात्रा का पृथक से स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। अधीक्षिका द्वारा छात्रा के बार-बार छात्रावास से अनुपस्थित रहने तथा उसके स्वास्थ्य को लेकर पालकों से संपर्क भी नहीं किया गया। अपने पदीय कर्तव्यों के प्रति बरती गई इस लापरवाही के चलते अधीक्षिका चैनबती सैयाम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

रीवा अपडेट: सीएम मोहन यादव आज करेंगे भैरवनाथ मंदिर का उद्घाटन

 रीवा  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31 जनवरी को एक दिवसीय प्रवास पर रीवा आएंगे। इस दौरान वे गूढ़ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में भैरवनाथ मंदिर का लोकार्पण करेंगे। दोपहर 1 बजे मुख्यमंत्री गुड़ के समीप ग्राम खामडीह स्थित भैरवनाथ मंदिर(Bhairavnath Temple) परिसर में आयोजित समारोह में शामिल होंगे। सहमडीह में भैरव बाबा की विशाल एवं प्राचीन प्रतिमा स्थापित है, जो दुर्लभ सयन मुद्रा में है। स्थापत्य कला की दृष्टि से यह प्रतिमा लगभग 10वीं शताब्दी के कल्पुरि काल की मानी जाती है। वर्षों तक यह प्रतिमा खुले आसमान के नीचे स्थित थी। शासन की एलएडी योजना के अंतर्गत प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार एवं अन्य निर्माण कार्य कराए गए हैं। भैरव बाबा की विशाल प्रतिमा के चारों ओर दो मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसकी कुल लागत 1.80 करोड़ रुपए हैं। 17 करोड़ 13 लाख रुपए की लागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव(CM Mohan Yadav) मंदिर पहुंचकर भगवान भैरवनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे तथा ध्वज चढ़ाएंगे। इसके बाद वे जनसभा को संबोधित करेंगे। समारोह में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, सांसद जनार्दन मिश्र, विधायक नागेंद्र सिंह, दिव्यराज सिंह, सिद्धार्थ तिवारी, नरेंद्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, भाजपा जिला अध्यशा वीरेंद्र गुप्ता सहित अन्य उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर रुपए मुख्यमंत्री 17 करोड़ 13 लाख रुपए की लागत से पूर्ण हुए चार निर्माण कार्यों का लोकार्पण करेंगे तथा शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी करेंगे। देश की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में एक है भैरवनाथ ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध रहा है। विध्य क्षेत्र प्राधीन मंदिरों और किंग और बुंदेलखंड के विभिन्न अवलों में चैव कालीन, राजपूत कालीन तथा कल्चुरि चालीन स्थापत्य के उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिलते हैं। प्राचीन मूर्तिकला का एक अद्‌भुत और दुर्लभ उदाहरण गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के समीप ग्राम आमडीह में स्थित भैरवनाथ बाबा की विशाल प्रतिमा है। यह प्रतिमा भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की देश की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है। अद्‌भुत शयन मुद्रा में निर्मित निर्मित यह यह प्रतिमा अपनी भव्यता और सौंदर्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। प्रतिमा की लंबाई 8.5 मीटर तथा चौड़ाई 3.7 मीटर है। वर्षों तक यह प्रतिमा विश्य की प्रमुख कैमौर पता माला की गोद में खुले आसमान के नीधे स्थित रही। एलएडी योजना के अंतर्गत हुआ निर्माण शासन की एलएडी योजना के अंतर्गत अब इसके चारों ओर दो मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर परिसर में सामुदायिक भवन, आठ दुकानें एवं अन्य सहायक निर्माण कार्य भी कराए गए हैं। माना जाता है कि भैरवनाथ की यह विशाल प्रतिमा 10वीं से 11वीं शताब्दी के मध्य कल्पुरि काल में निर्मित कराई गई थी। शयन मुद्रा में यह प्रतिमा एक ही विशाल पत्थर से बनाई गई है। मूर्ति शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण काले रंग के बलुआ पत्थर से निर्मित यह मूर्ति शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। भैरवनाथ के चेहरे पर रौद्र भाव के साथ असीम शांति का भाव स्पष्ट रूप से झलकता है। चतुर्भुज रूप में अंकित इस प्रतिमा के दाहिने ऊपरी हाथ में सृष्टि के पालन और संहार का प्रतीक त्रिशूल है, जबकि नियाले दाहिने हाथ में ध्यान और भक्ति का प्रतीक रुचाउदक्ष माला सुशोभित है। ऊपरी बाएं हाथ में तीन शीषों वाला सर्प लिपटा हुआ है, जो जितावित कर प्रतीक माना जाता है। बाएं निचले हाथ में बीज और फल दर्साए गए हैं. जो जो उर्वरता और सूजन शक्ति के प्रतीक हैं।

पानी की जांच का बड़ा कदम: इंदौर के सभी वार्डों में वाटर टेस्टिंग लैब, नगर निगम ने टेंडर जारी किया

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से 31 लोगों की मौत के बाद नगर निगम ने पानी सप्लाई सिस्टम को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. इस घटना से यह साफ हो गया कि सिर्फ सेंट्रल लेवल पर पानी की टेस्टिंग काफी नहीं है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने शहर के सभी 85 वार्डों में पानी टेस्टिंग लैब बनाने का फैसला किया है. इससे हर वार्ड में पानी की क्वालिटी की रेगुलर मॉनिटरिंग हो सकेगी और दूषित पानी की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी. 85 वार्डों में बनेंगी वाटर टेस्टिंग लैब निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा है कि भागीरथपुरा इलाके में अभी पानी की सप्लाई पूरी तरह से बहाल नहीं की जाएगी. वहां पाइपलाइनों में सीवेज मिलने और लीकेज की जांच के लिए गहन टेस्टिंग की जा रही है. जब तक हर घर में पहुंचने वाला पानी 100% सुरक्षित नहीं पाया जाता, तब तक निवासियों को निगम के पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना होगा. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि टैंकरों की कोई कमी न हो. शहर के सभी 85 वार्डों में पानी टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएंगी. नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, अब तक पानी की जांच सीमित स्तर पर होती थी, लेकिन भागीरथपुरा की घटना के बाद यह साफ हो गया कि वार्ड स्तर पर निगरानी जरूरी है। इसी के तहत निगम ने निजी एजेंसी के माध्यम से वाटर टेस्टिंग और वाटर ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। भागीरथपुरा में अभी नहीं शुरू होगा पूर्ण जलप्रदाय निगम ने साफ कर दिया है कि भागीरथपुरा इलाके में अभी कुछ दिनों तक नल से पानी की नियमित सप्लाई शुरू नहीं की जाएगी। जब तक पाइपलाइनों की पूरी जांच, लीकेज और सीवेज मिक्सिंग की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता, तब तक क्षेत्र के रहवासियों को टैंकरों के माध्यम से ही पानी उपलब्ध कराया जाएगा। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि टैंकरों की संख्या कम न हो और पानी की सप्लाई में किसी तरह की कटौती न की जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि लोगों को सुरक्षित पानी मिलना प्राथमिकता है, भले ही इसके लिए अस्थायी व्यवस्था कुछ और समय तक चलानी पड़े। मौतों के बाद लोगों में भय का माहौल भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों के बाद इलाके में भय का माहौल अब भी बना हुआ है। लोग टैंकर से मिलने वाले पानी को भी उबालकर पीने को मजबूर हैं। जिन इलाकों में सीमित जलप्रदाय शुरू किया गया था, वहां भी रहवासी नल का पानी पीने से कतरा रहे हैं। कई परिवारों ने आरओ सिस्टम लगवा लिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक पानी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से नहीं दी जाती और निगम खुद पानी को सुरक्षित घोषित नहीं करता, तब तक वे नल का पानी इस्तेमाल नहीं करेंगे। निगम ने जारी किए टेंडर नगर निगम अधिकारियों के अनुसार पहले पानी की टेस्टिंग सीमित पैमाने पर की जाती थी, लेकिन भागीरथपुरा की घटना से यह साफ़ हो गया कि वार्ड लेवल पर मॉनिटरिंग ज़रूरी है. इसलिए कॉर्पोरेशन ने एक प्राइवेट एजेंसी के ज़रिए पानी की टेस्टिंग और वॉटर ऑडिट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए टेंडर जारी किया जा चुका है. दूषित पानी से खौफ में लोग इस बीच चंदन नगर और ग्रीन पार्क जैसी शहर की दूसरी कॉलोनियों में भी दूषित पानी की खबरों से निवासियों में डर का माहौल बन गया है. लोग अब नगर निगम के पानी की सप्लाई पर भरोसा करने के बजाय पीने से पहले नल के पानी को उबाल रहे हैं या अपने घरों में महंगे RO सिस्टम लगवा रहे हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम ने प्रभावित इलाकों का दौरा करने और पानी के सैंपल इकट्ठा करने के लिए खास टीमें भेजी हैं. इस कदम का मकसद न सिर्फ तुरंत राहत देना है, बल्कि यह इंदौर के पानी वितरण सिस्टम को स्थायी रूप से सुरक्षित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है.  वार्ड स्तर पर होगी तुरंत जांच, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई निगम अधिकारियों का कहना है कि 85 वार्डों में वाटर टेस्टिंग लैब शुरू होने के बाद किसी भी क्षेत्र से गंदे पानी की शिकायत आने पर तुरंत सैंपल लेकर जांच की जा सकेगी। इससे दूषित पानी की समस्या को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकेगा और भागीरथपुरा जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी। गंदे पानी की शिकायतों पर निगम की टीमें मैदान में भागीरथपुरा में 31 मौतों के बाद शहरभर में गंदे पानी को लेकर डर का माहौल है। चंदननगर, ग्रीन पार्क सहित कई कॉलोनियों के रहवासी निगम कार्यालय पहुंचे और गंदे पानी की परेशानी बताई। निगम ने इन शिकायतों के निराकरण के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन इलाकों से शिकायतें मिल रही हैं, वहां खुद मौके पर पहुंचकर जांच की जाए और लापरवाही किसी भी हाल में न हो। कुएं-बावड़ियों में भी गंदगी, पंचम की फैल में दो कुएं बंद शहर के कई इलाकों में वर्षों पुराने कुएं-बावड़ियां भी अब सुरक्षित नहीं रह गई हैं। पंचम की फैल क्षेत्र में तीन पुराने कुओं में से दो कुओं का पानी पूरी तरह खराब हो गया है। रहवासियों के अनुसार, इन कुओं में गंदा पानी आने के साथ लाल कीड़े निकलने लगे, जिसके बाद लोगों ने इनसे पानी लेना बंद कर दिया। शिकायतों के बाद एमआईसी मेंबर नंदकिशोर पहाड़िया ने मामला निगमायुक्त तक पहुंचाया। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त क्षितिज सिंघल खुद मौके पर पहुंचे और रहवासियों से बातचीत की। लोगों ने आशंका जताई कि नालों या जल लाइनों का गंदा पानी कुओं में मिक्स हो रहा है। आयुक्त ने अधिकारियों को पूरे मामले की जांच कर कुओं के संरक्षण और सफाई की कार्रवाई तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

MBBS छात्रों पर कार्रवाई: जबलपुर मेडिकल कॉलेज ने 8 छात्रों को सस्पेंड किया, साथ में जुर्माना भी लगाया

जबलपुर. एमपी के जबलपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के विरुद्ध प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई की है. हॉस्टल शिफ्टिंग के दौरान जूनियर छात्रों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त करने के आरोप में एमबीबीएस 2023 बैच के आठ छात्रों को तत्काल प्रभाव से छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है. कॉलेज के अधिष्ठाता (डीन) डॉ. नवनीत सक्सेना ने एंटी रैगिंग समिति की सिफारिश पर यह आदेश जारी किया. जांच में दोषी पाए जाने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाते हुए आठ छात्रों को चिह्नित किया है. निलंबित होने वाले छात्रों में नवदीप चौधरी, प्रकाश बावरिया, विक्रम सिंह मीणा, धर्मेन्द्र कुशवाहा, केशव गौतम, सुदीप जायसवाल, नवनीत कुशवाहा और रवि मीणा शामिल हैं. इन छात्रों को न केवल छह महीने के लिए कक्षाओं से निष्कासित किया गया है, बल्कि उन्हें हॉस्टल खाली करने के निर्देश भी दिए गए हैं. इसके साथ ही, प्रत्येक छात्र पर 10-10 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है. एंटी रैगिंग कमेटी ने की जांच शिकायत मिलने के बाद कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी ने मामले की जांच की। जांच में एमबीबीएस थर्ड ईयर के 8 छात्रों को दोषी पाया गया। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सभी आरोपित छात्रों को 6 माह के लिए कक्षाओं से निलंबित कर दिया। साथ ही उन्हें हॉस्टल से भी निष्कासित कर दिया गया है। एनएमसी के नियमों के तहत कार्रवाई कॉलेज प्रशासन ने बताया कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC), नई दिल्ली द्वारा 18 नवंबर 2021 को जारी गजट नोटिफिकेशन के नियमों के तहत की गई है। डीन बोले- रैगिंग बर्दाश्त नहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बताया कि एक जूनियर छात्र के साथ रैगिंग की शिकायत मिली थी। एंटी रैगिंग कमेटी की जांच में आठ सीनियर छात्र दोषी पाए गए, जिसके बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज या हॉस्टल परिसर में रैगिंग जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हॉस्टल शिफ्टिंग के दौरान प्रताडऩा का खुलासा रैगिंग का यह गंभीर मामला तब सामने आया, जब एमबीबीएस 2024 बैच के छात्र कुणाल सूर्यवंशी ने एंटी रैगिंग समिति के समक्ष अपनी आपबीती सुनाई. जांच में पता चला कि हॉस्टल क्रमांक चार से सीनियर हॉस्टल्स (एक, दो और तीन) में शिफ्ट होते समय जूनियर छात्रों को निशाना बनाया जा रहा था. एंटी रैगिंग स्क्वाड के औचक निरीक्षण और अन्य छात्रों के बयानों से इस शिकायत की पुष्टि हुई. डीन डॉ. सक्सेना ने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं है. डॉ. नटवरलाल अग्रवाल और डॉ. रुचिर खरे की जांच समिति ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से यह कड़ा फैसला लिया है.

घना कोहरा और बूंदाबांदी के साथ बारिश का अलर्ट, गुना और शाजापुर समेत कई जिलों में सतर्कता जरूरी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण-पूर्वी हवाओं के सक्रिय होने से कई जिलों में घना कोहरा, ठंडी हवाएं और हल्की बारिश देखी जा रही हैं। शनिवार सुबह ग्वालियर, रीवा और दतिया में सबसे अधिक कोहरा रहा। रीवा में विजिबिलिटी 50-200 मीटर तक रह गई। सतना, भोपाल, उज्जैन, श्योपुर, शाजापुर, सीहोर, रायसेन, देवास, रतलाम, राजगढ़, नर्मदापुरम, धार, गुना, दमोह, जबलपुर, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर और बालाघाट में मध्यम कोहरा बना रहा। इधर रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई है। वहीं दिन में सर्दी का असर बढ़ा है। बड़े शहरों में तापमान 10 डिग्री से ज्यादा रहा। छतरपुर का खजुराहो सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 6 डिग्री दर्ज किया गया। पचमढ़ी-दतिया में 7.8 डिग्री, उमरिया में 7.9 डिग्री, रायसेन में 8.2 डिग्री, सतना में 8.6 डिग्री, मंडला में 8.9 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, नौगांव में 9.6 डिग्री, मलाजखंड में 9.7 डिग्री और सीधी में तापमान 9.8 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों के दौरान गुना, शाजापुर समेत 8 जिलों में आंधी, बारिश और गरज चमक होने का अलर्ट जारी किया है। शाजापुर में तो हल्की बारिश का दौर शुरू भी हो गया है। इंदौर में भी बूंदाबांदी हुई। मौसम विभाग के अनुसार, नर्मदापुरम, पचमढ़ी, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर में बिजली चमकने के साथ तेज हवा चलने और दोपहर में गुना, राजगढ़, सागर, रायसेन के सांची में हल्की बारिश होने की संभावना है। अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम     1 फरवरी- ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में गरज-चमक और बारिश का अलर्ट है।     2 फरवरी- नीमच, मंदसौर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश हो सकती है।     3 फरवरी- ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में बारिश का अलर्ट है। गरज-चमक और आंधी का दौर भी बना रहेगा। किसानों के लिए सलाह     खेतों में पानी का निकास सुनिश्चित करें ताकि अल्पकालिक वर्षा से नुकसान न हो।     गेहूं, चना और सरसों की फसल पर तेज हवा और नमी से होने वाले रोगों की निगरानी करें।     बागवानी फसलों में फल झड़ने से बचाने के लिए पौधों को सहारा दें और अनावश्यक गतिविधियों से बचें।     मौसम साफ होने तक सिंचाई स्थगित करें और कटाई हुई फसल को खुले में न छोड़ें। सिस्टम और पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव उत्तर भारत में भारी बर्फबारी और बारिश के कारण जेट स्ट्रीम हवाओं की गति बढ़ी। इसका असर मध्य प्रदेश के दिन के तापमान में गिरावट और ठंडी हवाओं के रूप में देखा गया। मौसम विभाग का कहना है कि, जब यह सिस्टम लौटेगा तो ठंड का एक और दौर प्रदेश में आएगा।

देश में इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे की तैयारी, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को मिलेगा बड़ा फायदा

सागर देश में बिछाए जा रहे नेशनल हाइवे और एक्सप्रेस वे के जाल बाद अब सरकार ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे बनाने पर फोकस करेगी. सरकार आगामी बजट में नीतिगत बदलाव करते हुए ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे को प्राथमिकता देने जा रही है. चर्चा है कि आगामी बजट में इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे के लिए 5000 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया जा रहा है. इसके तहत दिल्ली जयपुर और दिल्ली मुंबई एक्स्प्रेस के विशेष सेक्शन का चयन करके पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे विकसित करने के लिए प्रोत्साहन देने की तैयारी है. केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी पिछले दिनों इस बात के संकेत दे चुके हैं. इस प्रोजेक्ट के तहत स्वीडन और जर्मनी की तर्ज पर ओव्हरहैड केबल तकनीक और भारी वाहनों के लिए ओव्हरहैड इलेक्ट्रिक लाइन डाली जाएगी. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे को बढ़ावा देने के पीछे प्रदूषण कम करना और पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भरता कम करना है. क्या होता है इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे में ऐसे नेशनल हाइवे तैयार किए जाएंगे. जहां विशेष रूप से ई व्हीकल को चार्ज किया जा सकेगा. यहां पर केबल तकनीक के जरिए ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन बिछाकर भारी वाहनों की चार्जिंग सड़क पर हो सकेगी. इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे, जहां छोटे ई व्हीकल चार्ज हो सकेंगे और बैटरी एक्सचेंज कर सकेंगे. ये हाइवे विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विकसित किए जाने की तैयारी है. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे से देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण सुधार और ईधन की खपत कम होगी. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे से प्रदूषण की समस्या कम होगी. देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होगा और विदेश से कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के उद्योग को पंख लगेंगे. सरकार देश के बडे़ शहरों के बीच के सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस प्रोजेक्ट पर फोकस कर रही है. स्वीडन और जर्मनी की तर्ज पर विकसित होंगे इलेक्ट्रिक हाइवे इसके लिए सरकार ने स्वीडन और जर्मनी में विकसित की गई इलेक्ट्रिक हाइवे तकनीक को आधार बनाए गया है. इस तकनीक के तहत हाइवे पर ओव्हरहैड इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने का काम किया जाएगा. हर 40-50 किमी पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. बड़े और भारी वाहन सड़क पर ही ओव्हरहैड केबल के जरिए चार्ज हो सकेंगे. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे पर ग्रीन एनर्जी से चलने वाले चार्जिंग स्टेशन विकसित होंगे. 2030 तक पायलट प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य है इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस वे और दिल्ली जयपुर नेशनल हाइवे पर चुनिंदा सेक्शन में ये विकसित किए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य नेशनल हाइवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग के ढांचे को मजबूत करना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भारत का ऐसा इलेक्ट्रिक हाइवे होगा, जो दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक हाईवे बन सकता है.

भोपाल से बड़ी संख्या में बेटियां शामिल, 23 फरवरी को अग्निवीर परेड में दमखम दिखाएंगी

ग्वालियर  सेना की वर्दी का जुनून….सिर्फ बेटों ही नहीं बल्कि बेटियों में भी है। मप्र और छत्तीसगढ़ की बेटियां देशसेवा की राह चुन रही हैं। इसके लिए दिन-रात मैदान में पसीना बहा रही हैं। 23 फरवरी को मप्र और छत्तीसगढ़ राज्य की बेटियां कटनी के पुलिस परेड ग्राउंड पर दम दिखाएंगी। इसमें मप्र के भोपाल से सबसे ज्यादा बेटियां भर्ती में शामिल होंगी। मप्र से 206 और छत्तीसगढ़ से 69 बेटियां अग्निवीर बनने के लिए 23 फरवरी को मैदान में दौड़ेंगी। शारीरिक परीक्षा में शामिल होने के लिए इन्हें सुबह छह बजे रिपोर्ट करनी होगी। इसके बाद 1600 मीटर की दौड़ होगी। पहली बार इतनी अधिक संख्या में बेटियां सेना में जाने के लिए शारीरिक परीक्षा देंगी। सेना के अधिकारी बताते हैं- अब मप्र और छत्तीसगढ़ में बेटियों में सेना में जाने के प्रति रुझान बढ़ रहा है। लगातार अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ रही है। कहां से कितनी अभ्यर्थी होंगी शामिल मप्र: भोपाल- 86 ग्वालियर- 40 जबलपुर- 44 महू- 46 छत्तीसगढ़ रायपुर- 69 7.30 मिनट से 8 मिनट में पूरी करनी होगी 1600 मीटर दौड़     सेना के अधिकारियों ने बताया कि पुरुष अभ्यर्थियों की तरह अग्निवीर के लिए शारीरिक परीक्षा महिला अभ्यर्थियों की भी होगी।  1600 मीटर दौड़ भी पूरी करनी होगी। महिला अभ्यर्थियों को 1600 मीटर दौड़ पूरी करने के लिए अधिक समय दिया जाएगा। महिला अभ्यर्थियों को 7.30 मिनट से लेकर 8 मिनट के बीच में दौड़ पूरी करनी होगी।     7.30 मिनट में दौड़ पूरी करने वाली महिला अभ्यर्थियों को ग्रुप-1 और 7.31 मिनट से 8 मिनट के बीच 1600 मीटर दौड़ पूरी करने वाली महिला अभ्यर्थियों को ग्रुप-2 में रखा जाएगा।     ऊंची-लंबी कूद नहीं होगी: पुरुष अभ्यर्थियों को दौड़ के बाद 10 फीट लंबी कूद और 3 फीट ऊंची कूद चरण भी पार करना होता है, लेकिन महिला अभ्यर्थियों को ऊंची-लंबी कूद नहीं करनी होगी।     चयनित महिला अभ्यर्थियों का होगा मेडिकल, फिर बनेगी मेरिट लिस्ट: शारीरिक परीक्षा में चयनित महिला अभ्यर्थियों का मेडिकल परीक्षण होगा। इसके बाद मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी।     सुबह 6 बजे रिपोर्टिंग, फिर होगी शारीरिक परीक्षा: सभी महिला अभ्यर्थियों को इ-मेल के जरिये प्रवेश पत्र जारी कर दिए गए हैं। सुबह छह बजे इन्हें शारीरिक परीक्षा स्थल पर रिपोर्टिंग करनी होगी। इसके बाद शारीरिक परीक्षा होगी। महिला अभ्यर्थियों को दिए प्रवेश पत्र मप्र और छत्तीसगढ़ की महिला अभ्यर्थियों की शारीरिक परीक्षा 23 फरवरी को होगी। कटनी में शारीरिक परीक्षा आयोजित होगी। मप्र में सबसे ज्यादा महिला अभ्यर्थी भोपाल से शामिल हो रही हैं, ग्वालियर एआरओ से भी 40 महिला अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगी। सभी को प्रवेश पत्र जारी कर दिए गए हैं।  कर्नल पंकज कुमार, निदेशक, सेना भर्ती कार्यालय  

मध्य प्रदेश के 7 जिलों में ड्रोन स्कूल, पुलिसकर्मियों को मिलेगा मास्टर ट्रेनर बनने का मौका

भोपाल  सिंहस्थ-2028 को दृष्टिगत रखते हुए मप्र पुलिस अभी से युद्ध स्तरीय तैयारियों में जुट गई है। इस बार पुलिस का पूरा फोकस कानून-व्यवस्था में ज्यादा से ज्यादा तकनीकी नवाचारों की मदद लेना है। लिहाजा इसी क्रम में सिंहस्थ मेला परिसर की निगरानी के लिए देश के सबसे तीन हाईटेक फिक्स्ड विंग ड्रोन को मप्र पुलिस ने खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। इस ड्रोन की क्षमता ऐसी है कि यह लगातार 6 घंटे तक 100 किमी तक लगातार उड़ान भर सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि पुलिस ड्रोन के जरिए कई जिलों को कवर कर आसमानी निगाह से भीड़ की निगरानी कर सकती है। ड्रोन से हो सकेगी लाइव मॉनिटरिंग एसएसपी रेडियो रियाज इकबाल ने बताया, नए ड्रोन विंग सेटअप तैयार कर रहे हैं। इंदौर में ड्रोन स्कूल बनाया जा रहा है। जहां से मास्टर ट्रेनर तैयार करेंगे। तीन हाईटेक ड्रोन भी वहीं रखे जाएंगे। इनकी खूबी यह है कि यह लंबे समय, लंबी दूरी के साथ दिन और रात दोनों समय उड़ानभर सकेंगे। जिसकी लाइव मॉनिटरिंग की जा सकेगी। यह हमारे लिए कई क्षेत्रों में उपयोगी होगा। स्मार्ट पुलिसिंग में मिलेगी मदद -अपराध और संदिग्ध गतिविधियों पर रियल टाइम निगरानी। -सिंहस्थ मेला मैदान में भीड़ नियंत्रण और वीआइपी मूवमेंट में मदद होगी। -आपदा, दंगे और नšसल प्रभावित क्षेत्रों में ड्रोन की मदद से तेज कार्रवाई। -ड्रोन के दुरुपयोग से निपटने के लिए एंटीड्रोन तकनीक भी होगी। ऐसे काम करेगा फिक्स्ड विंग ड्रोन -फिक्स्ड विंग ड्रोन में विमान की तरह बड़े-बड़े पंखे होते हैं। ये मल्टीरोटर ड्रोन की तुलना में ज्यादा दूरी तय करता है। -लंबे समय तक हवा में रह सकते हैं और कम बैटरी खपत में बड़े इलाके की निगरानी कर सकते है। -यही वजह है कि इन्हें खासकर बॉर्डर पेट्रोलिंग, बड़े सर्च ऑपरेशन और लंबी दूरी की निगरानी में उपयोग करते हैं। ऐसे तैयार होंगे ड्रोन ऑपरेशन के मास्टर ट्रेनर ड्रोन विंग को मजबूत करने के लिए इंदौर स्थित पुलिस रेडियो ट्रेनिंग स्कूल (पीआरटीएस) में ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल की शुरुआत की जा रही है। इसे प्रदेश का नोडल ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। यहां से प्रदेशभर के लिए ड्रोन पायलट और पे-लोड ऑपरेटर (को-पायलट) तैयार किए जाएंगे। शुरुआती चरण में तकनीकी रूप से दक्ष 50 पुलिसकर्मियों को ड्रोन उड़ाने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी। जिन्हें सिर्फ ड्रोन ऑपरेशन ही नहीं, बल्कि ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की भी जानकारी दी जाएगी। इस ट्रेनिंग के पूरी होने के बाद यही 50 पुलिसकर्मी मास्टर ट्रेनर के रूप में जिलों में पदस्थ किए जाएंगे। प्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन समेत कुल 7 ड्रोन सेंटर स्थापित किए जाने हैं, जहां से पुलिस ड्रोन संचालन किया जाएगा।