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टी.आई.ई समिट से मध्यप्रदेश और राजस्थान के युवाओं को मिलेंगे बेहतर रोजगार अवसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

टी.आई.ई समिट से मध्यप्रदेश और राजस्थान के युवाओं को मिलेंगे रोजगार के बेहतर अवसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जयपुर विमानतल पर मीडिया से की चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आईटी सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश भी सभी सेक्टर में विकास कार्यों को गति देते हुए भारत सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश और राजस्थान भाई-भाई हैं। दोनों राज्य अपनी साझा विरासत का संरक्षण करते हुए साझा विकास के लिए निरंतर प्रगतिशील हैं। तकनीक के इस समय में आईटी का विशेष महत्व है। इसके दृष्टिगत दोनों राज्यों में युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, इस उद्देश्य से स्टार्ट-अप, इनोवेटर्स और उद्योगपतियों से संवाद के लिए जयपुर में टी.आई.ई. ग्लोबल समिट आयोजित की जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार ने पड़ौसी राज्य राजस्थान के साथ वर्षों पुराने विवाद को खत्म कर पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को जयपुर विमानतल पर मीडिया से चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। स्टार्टअप्स, इनोवेटर्स एवं उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद समिट में मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश के प्राथमिकता प्राप्त प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों की विस्तृत जानकारी वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े हितधारकों के साथ साझा करेंगे। वे इनोवेशन एक्सपो का भ्रमण करने के साथ-साथ मध्यप्रदेश पवेलियन का दौरा करेंगे और वहां मौजूद स्टार्टअप्स, इनोवेटर्स एवं उद्योग प्रतिनिधियों से सीधा संवाद भी करेंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सीईओ, निवेशकों और वैश्विक उद्योग प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें कर मध्यप्रदेश में रणनीतिक निवेश के अवसरों और दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि टीआईई ग्लोबल समिट-2026 में मध्यप्रदेश का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सिल्वर स्टेट पार्टनर के रूप में सक्रिय भागीदारी कर रहा है। यह सहभागिता 27 नवंबर 2025 को आयोजित एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 के दौरान द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (टीआईई) राजस्थान के साथ हुए समझौते के अनुरूप है। समिट के माध्यम से मध्यप्रदेश अपनी नवस्थापित और प्रगतिशील नीतिगत व्यवस्था का प्रभावी प्रदर्शन करेगा, जो राज्य को अगली सेपीढ़ी की तकनीक, डिजिटल इनोवेशन और उच्च-मूल्य वाले रोजगार सृजन के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में केंद्रित है। साथ ही यह पहल भारत के टियर-2 शहरों में प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।  

HC ने जारी किए नए दिशा-निर्देश, अधिकारियों को सुनवाई के दौरान खड़ा रहना नहीं होगा जरूरी, अपमानजनक टिप्पणियों पर रोक

भोपाल  दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान सरकारी अधिकारियों के साथ सम्मानजनक और पेशेवर व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकारी पदाधिकारियों की स्वीय उपसंजाति नियम-2025 के तहत न्यायालय में उपस्थित अधिकारियों को पूरी सुनवाई के दौरान खड़े रहने की बाध्यता नहीं होगी। न्यायालय के समक्ष उत्तर देते समय अथवा बयान दर्ज कराते समय ही उन्हें खड़े रहना पड़ेगा। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि न्यायालयों को कार्रवाई के दौरान किसी अधिकारी के शारीरिक स्वरूप, शैक्षिक पृष्ठभूमि, सामाजिक स्थिति या परिधान को लेकर अपमानजनक या अनुचित टिप्पणी करने से बचना चाहिए। अनावश्यक रूप से न्यायालय में तलब न किया जाए कोर्ट में सम्मान और व्यावसायिकता का वातावरण बनाए रखना अनिवार्य बताया गया है। न्यायालयों में अधिकारियों के सम्मानजनक व्यवहार के तय नए मानकों में कहा गया है कि अधिकारियों को अनावश्यक रूप से न्यायालय में तलब न किया जाए। दरअसल, शासन से जुड़े मामलों में कई बार विभाग के प्रमुख सचिव व राज्य के मुख्य सचिव तक को तलब कर लिया जाता है। नए नियमों के तहत अब आवश्यक होगा तभी उन्हें तलब किया जाएगा। नए नियम में क्या कहा गया है? नए नियम में कहा गया है कि यदि विवाद से जुड़े मुद्दों का समाधान शपथ पत्रों और दस्तावेजों के आधार पर संभव है, तो व्यक्तिगत उपस्थिति को नियमित या सामान्य प्रक्रिया के रूप में नहीं अपनाया जाना चाहिए। किसी अधिकारी को केवल उन्हीं मामलों में तलब किया जाना चाहिए, जहां न्यायालय को प्रथम दृष्टया यह प्रतीत हो कि आवश्यक जानकारी नहीं दी जा रही है, तथ्य छुपाएं जा रहे हैं या गलत तरीके से प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इसके लिए सुनवाई से कम से कम एक दिन पहले न्यायालय की रजिस्ट्री या संबंधित जिला न्यायालय द्वारा अधिकारी को ईमेल, एसएमएस या व्हाट्सएप के जरिए लिंक भेजा जाना अनिवार्य होगा। यदि भौतिक उपस्थिति आवश्यक हो, तो इसके कारण आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाएंगे और अधिकारी को पर्याप्त पूर्व सूचना दी जाएगी। न्यायिक कार्यवाहियों को तीन श्रेणियों में किया वर्गीकृत हाई कोर्ट ने लंबित मामलों के निपटारे की प्रकृति के आधार पर न्यायिक कार्यवाहियों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी साक्ष्य-आधारित मामलों की है, जिनमें दस्तावेज या मौखिक साक्ष्य की आवश्यकता होती है और ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी की भौतिक उपस्थिति आवश्यक हो सकती है। दूसरी श्रेणी संक्षिप्त कार्यवाहियों की है, जो मुख्य रूप से शपथ पत्रों और अभिलेखों पर आधारित होती हैं। तीसरी श्रेणी गैर-प्रतिकूल कार्यवाहियों की है, जिनमें नीति या तकनीकी विषयों को समझने के लिए अधिकारियों की उपस्थिति जरूरी हो सकती है। अवमानना मामलों में संयम बरतने के निर्देश अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ करते समय न्यायालय को संयम और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आमतौर पर पहले नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए। नीतिगत और जटिल मामलों में न्यायालय को आदेशों के अनुपालन के लिए युक्तियुक्त समय सीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि सरकार को किसी आदेश के पालन के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता हो, तो वह समय सीमा में संशोधन के लिए न्यायालय से अनुरोध कर सकती है, जिस पर विचार किया जा सकता है। 

इंदौर में डायरिया की हालत गंभीर, 516 बोरिंग का पानी रोकने के बाद 398 मरीज, 9 हजार से अधिक की स्क्रीनिंग

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 17 लोगों की जान चली गई। अभी भी यहां लोगों में नर्मदा और टैंकर के पानी को लेकर लोगों में डर का माहौल है। जिससे इलाके में आरओ की डिमांड बढ़ गई है।भागीरथपुरा में अब बोरिंग का पानी भी दूषित मिला है। मामला सामने आने के बाद शहर में बोरिंग के पानी के सैंपल लिए गए थे। जिनमें से 35 सैंपल फेल हो गए हैं। इनका पानी पीने योग्य नहीं है। ऐसे में इलाके के 516 बोरिंग के पानी के यूज पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें 400 निजी और 116 सरकारी हैं। इसके अलावा 112 पानी की टंकियों, नलों का पानी और बोरिंग के भी रविवार को सैंपल लिए गए। जिनकी जांच निजी लैब में कराई जाएगी। निगम की खुद की एक लैब है, लेकिन वहां भी कम कर्मचारी हैं। 9 हजार से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग, 20 नए केस  डायरिया संक्रमण के ग्राउंड जीरो माने जा रहे भगीरथपुरा इलाके में स्वास्थ्य टीमों ने रविवार को 2,354 घरों के 9,416 लोगों की जांच की. इस दौरान 20 नए डायरिया मरीज सामने आए. 429 पुराने मरीजों का फॉलोअप भी किया गया. इसी इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है. जांच में जुटी ICMR से जुड़ी टीम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इंफेक्शंस (NIRBI) की एक टीम इंदौर पहुंच चुकी है. यह संस्थान ICMR से संबद्ध है. उन्होंने कहा कि NIRBI के विशेषज्ञ स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी सहयोग दे रहे हैं, ताकि संक्रमण को पूरी तरह रोका जा सके और इसके कारणों की गहराई से जांच हो सके.  डॉ. हासानी ने बताया कि भागीरथपुरा इलाके के प्रत्येक घर में ओआरएस के 10 पैकेट और 30 जिंक गोलियां वितरित की गईं. पानी को शुद्ध करने के लिए क्लीन वेट की बोतल की किट प्रत्येक घरों में दी गई है. उपयोग के बारे में भी विस्तार से बताया जा रहा है. इलाके में 17 टीमें लगाई हैं. यहां 5 एंबुलेंस लगाई गई हैं. 24 घंटे डॉक्टर्स की ड्यूटी है.  मौतों के आंकड़ों पर विवाद प्रशासन ने अब तक 6 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. हालांकि, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने मृतकों की संख्या 10 बताई है. स्थानीय लोगों का दावा है कि 6 महीने के बच्चे समेत 16 लोगों की मौत हुई है. 'घंटा' बयान पर सियासी बवाल मौतों को लेकर आक्रोश के बीच कांग्रेस ने पूरे मध्य प्रदेश में घंटी बजाकर प्रदर्शन किया. यह विरोध मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के उस बयान को लेकर था, जिसमें उन्होंने 31 दिसंबर की रात मीडिया के सवाल पर कैमरे के सामने 'घंटा' शब्द का इस्तेमाल किया था. कांग्रेस ने इसे असंवेदनशील और अमानवीय बताते हुए विजयवर्गीय के इस्तीफे और न्यायिक जांच की मांग की. विजयवर्गीय के पास शहरी विकास और आवास विभाग का प्रभार है और भगीरथपुरा इलाका उनकी इंदौर-1 विधानसभा सीट में आता है. 11 जनवरी से आंदोलन की चेतावनी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो 11 जनवरी से बड़ा आंदोलन किया जाएगा. पटवारी ने इंदौर मेयर पुष्यमित्र भार्गव और संबंधित नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की मांग की. उन्होंने कहा, 16 लोगों की मौत हुई है. ये मौतें बीजेपी को मिले जनादेश की हत्या हैं. दूषित पानी से हुई मौतों की न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए. पटवारी ने दावा किया कि भगीरथपुरा के लोग पिछले 8 महीनों से नलों में गंदा पानी आने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टैंकरों से सप्लाई किया जा रहा पानी भी दूषित है. देवास में SDM सस्पेंड इस पूरे विवाद के बीच पड़ोसी जिले देवास में एक SDM को सस्पेंड कर दिया गया है. आरोप है कि SDM ने अपने आधिकारिक आदेश में मंत्री के विवादित बयान और कांग्रेस के आरोपों का उल्लेख कर दिया. उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने SDM को गंभीर लापरवाही, उदासीनता और अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया. अधिकारियों के मुताबिक, SDM ने कांग्रेस के ज्ञापन के एक हिस्से को जैसा का तैसा सरकारी आदेश में कॉपी कर दिया था.   ‘सिस्टम की देन है यह आपदा’ प्रसिद्ध जल संरक्षण विशेषज्ञ और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने इन मौतों को सिस्टम से पैदा हुई आपदा करार दिया. उन्होंने कहा कि यह हैरान करने वाला है कि भारत के सबसे साफ शहर में ऐसा संकट पैदा हुआ. अगर क्लीन सिटी में यह हाल है, तो बाकी शहरों में पीने के पानी की हालत कितनी खराब होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सीवर लाइन से निकला गंदा पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल गया, जिससे उल्टी-दस्त के गंभीर मामले सामने आए. उन्होंने कहा, पैसा बचाने के चक्कर में ठेकेदार ड्रेनेज लाइन के पास ही पानी की पाइपलाइन डाल देते हैं. भ्रष्टाचार ने पूरे सिस्टम को बर्बाद कर दिया है. नर्मदा पर निर्भर इंदौर इंदौर की पानी की जरूरतें पूरी तरह नर्मदा नदी पर निर्भर हैं. नगर निगम की पाइपलाइनों के जरिए खरगोन जिले के जलूद से 80 किलोमीटर दूर से नर्मदा का पानी इंदौर लाया जाता है और एक दिन छोड़कर एक दिन घरों में सप्लाई किया जाता है. नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना में सिर्फ बिजली बिल पर हर महीने करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होते हैं. 'हम पानी नहीं, घी पीते हैं' इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 27 जून 2024 को एक सेमिनार में कहा था, मेयर बनने के बाद से मैं मजाक करता हूं कि इंदौर एशिया के सबसे अमीर शहरों में से एक है, क्योंकि हम 21 रुपये प्रति लीटर का पानी पीते हैं और उसे बेकार भी बहा देते हैं. हम पानी नहीं, घी पीते हैं. अब यह बयान इंदौर के जल संकट के बीच चर्चा में है. मामला सामने आने के बाद से डर का माहौल 29 दिसंबर को मामला सामने आने के बाद से इलाके में डर का माहौल है। कई लोग जहां नर्मदा का पानी भरने से बच रहे … Read more

‘पैसे बचाने के चक्कर में ड्रेनेज के पास बिछाई गई वॉटर लाइन’, इंदौर त्रासदी पर ‘वॉटरमैन ऑफ इंडिया’ ने उठाए सवाल

इंदौर जाने-माने जल संरक्षणवादी राजेंद्र सिंह ने दूषित पीने के पानी से हुई मौतों को सिस्टम की बनाई हुई आपदा बताया, और आरोप लगाया कि इस त्रासदी के लिए गहरे तक फैला भ्रष्टाचार जिम्मेदार है. मैगसेसे अवॉर्ड विजेता ने चिंता जताई कि इंदौर जैसे शहर में ऐसा संकट कैसे हो सकता है, जिसे लगातार भारत का सबसे साफ शहर माना जाता है. 'वॉटरमैन ऑफ इंडिया' कहे जाने वाले राजेंद्र सिंह ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, "अगर देश के सबसे साफ शहर में ऐसी त्रासदी हो सकती है, तो इससे पता चलता है कि दूसरे शहरों में पीने के पानी की सप्लाई सिस्टम की हालत कितनी गंभीर होगी." सरकारी अधिकारियों ने माना कि टॉयलेट से सीवेज का पानी ओवरफ्लो होकर पानी की मेन पाइपलाइन में मिल गया, जिससे उल्टी और दस्त के गंभीर मामले सामने आए. राजेंद्र सिंह ने दावा किया, "इंदौर में दूषित पीने के पानी का संकट सिस्टम की बनाई हुई आपदा है. पैसे बचाने के लिए ठेकेदार पीने के पानी की पाइपलाइन को ड्रेनेज लाइन के बहुत पास बिछाते हैं." उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार ने पूरे सिस्टम को बर्बाद कर दिया है. उन्होंने कहा कि इंदौर की घटना इसी भ्रष्ट सिस्टम का सीधा नतीजा है. सिंह ने कहा, "इंदौर में हर साल गिरता भूजल स्तर सबसे ज्यादा चिंता की बात है. मैं 1992 में पहली बार इंदौर गया था. तब भी मैंने पूछा था कि यह शहर नर्मदा नदी के पानी पर कब तक निर्भर रहेगा?" इंदौर का भूजल स्तर साल-दर-साल खतरनाक ढंग से गिर रहा है, जिसे उन्होंने सबसे बड़ी चुनौती बताया. ताजा अपडेट के मुताबिक, इंदौर में दूषित पीने के पानी से फैले डायरिया के प्रकोप के बीच फिलहाल 142 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 11 ICU में हैं. वहीं, संक्रमण के केंद्र भागीरथपुरा इलाके में 9 हजार से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग के दौरान 20 नए मरीज पाए गए. भागीरथपुरा में चल रहे सर्वे के दौरान स्वास्थ्य टीमों ने 2354 घरों के 9416 लोगों की जांच की, जहां दूषित पानी से आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार छह लोगों की मौत हो गई है और 20 नए मामले सामने आए हैं. प्रकोप के बाद अब तक 398 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था. इनमें से 256 मरीज ठीक होने के बाद डिस्चार्ज हो चुके हैं. फिलहाल 142 मरीज अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं, जिनमें से 11 ICU में भर्ती हैं.  नर्मदा लाइन के ऊपर बिछा दी ड्रेनेज, अब उजागर निगम की लापरवाही  भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई गंभीर घटना के बाद अब नगर निगम हरकत में आया है। पिछले दो दिनों से निगम की टीमें गलियों में नर्मदा जल लाइन के लीकेज की जांच कर रही हैं। इसी दौरान निगम की लापरवाही और तथाकथित इंजीनियरिंग व्यवस्था की चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। जांच में पाया गया कि क्षेत्र की अधिकांश गलियों में नर्मदा जल सप्लाई लाइन के ठीक ऊपर ड्रेनेज लाइन बिछाई गई है। यही नहीं, ड्रेनेज के चैंबर भी जल लाइन के ऊपर ही बनाए गए हैं, जिससे सीवरेज और पेयजल के मिलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया। नवंबर 2024 से जुड़ी है विवाद की जड़ इस पूरे मामले की जड़ नवंबर 2024 में डाली गई ड्रेनेज योजना से जुड़ी है। उस समय रहवासियों ने स्पष्ट रूप से मांग की थी कि ड्रेनेज लाइन घरों के पीछे मौजूद बैकलेन से बिछाई जाए, जहां पर्याप्त जगह उपलब्ध है। लेकिन क्षेत्र के भाजपा पार्षद कमल वाघेला ने इस प्रस्ताव का विरोध कर दिया। पार्षद व रहवासी आमने-सामने आ गए और विवाद इतना बढ़ा कि पार्षद धरने पर बैठ गए। अंततः निगम ने विवाद से बचने के लिए ड्रेनेज लाइन का काम ही रोक दिया, जिसका खामियाजा अब पूरे इलाके को भुगतना पड़ रहा है। छह महीने से शिकायतें, लेकिन सुनवाई नहीं क्षेत्र के रहवासी पार्षद के रवैये को लेकर बेहद नाराज हैं। उनका आरोप है कि बीते छह महीनों से वे गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। भागीरथपुरा टंकी पर निगमकर्मी की जगह पार्षद के कार्यकर्ता बैठते थे, जो शिकायत तो दर्ज करते थे, लेकिन जोनल कार्यालय के कर्मचारी शिकायत मिलने से ही इन्कार कर रहे हैं। रहवासी पुरुषोत्तम यादव का कहना है कि वे कई बार समस्या लेकर पार्षद के घर गए, लेकिन कभी गंभीरता से नहीं सुना गया। अब दूषित पानी से सैकड़ों लोगों के बीमार होने की घटना के बाद निगम और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।  

भोपाल में मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान की शुरुआत, 1.16 लाख वोटरों की जांच आज से शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक लाख से ज्यादा ऐसे मतदाता हैं, जो निर्वाचन आयोग के डिजिटल नक्शे पर लापता हैं। अगर आप भी उनमें से एक हैं तो सोमवार से आपकी नागरिकता और मतदान के अधिकार की सुनवाई शुरू हो रही है। दरअसल, भोपाल की मतदाता सूची का शुद्धिकरण अभियान चल रहा है। इस प्रक्रिया में 1,16,925 मतदाता ऐसे पाए गए हैं, जिनका पता डिजिटल मैप से मेल नहीं खा रहा है। आसान भाषा में कहें तो सरकारी रिकॉर्ड में आप हैं, पर आपका घर कहां है, इसकी सटीक मैपिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे नो मैपिंग वाले मतदाताओं की सुनवाई सोमवार से शुरू हो रही है। सोमवार सुबह से भोपाल के सभी 85 वार्ड कार्यालयों, तहसील और नजूल दफ्तरों में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी इन नो-मैपिंग मतदाताओं की दलीलें सुनेंगे। जिला निर्वाचन कार्यालय अब तक 50 हजार से ज्यादा लोगों को उनके घर पर नोटिस थमा चुका है। वहीं आपके इलाके के बीएलओ घर-घर जाकर नोटिस बांट रहे हैं ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। 4.38 लाख नाम कटे, अब आपकी बारी यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। प्रशासन अब तक सूची से 4.38 लाख फर्जी या अपात्र नाम काट चुका है। ऐसे में अगर आपके पास नोटिस आया है और आप सुनवाई में नहीं पहुंचते, तो मुमकिन है कि अगली बार आप पोलिंग बूथ पर अपना नाम न ढूंढ़ पाएं। बीएलओ पर काम का बोझ बढ़ा है। सर्वर की अपनी सीमाएं हैं, लेकिन एक जागरूक नागरिक के नाते यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने वार्ड कार्यालय पहुंचें। याद रखिए, आपकी एक छोटी-सी लापरवाही आपको लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव यानी मतदान से बाहर कर सकती है। एक तरफ नाम काटे जा रहे हैं तो दूसरी तरफ नए जोड़े जा रहे हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय का अनुमान है कि दो लाख नए मतदाता इस बार जुड़ेंगे। फार्म-6 का वितरण जारी है। सुनवाई में जाते समय साथ रखें ये दस्तावेज अगर आपको नोटिस मिला है, तो वार्ड दफ्तर खाली हाथ न जाएं। आपको भारत की नागरिकता प्रमाणित करने के लिए ये दस्तावेज दिखाने होंगे।     आधार कार्ड या पासपोर्ट।     निवास प्रमाण पत्र (बिजली बिल/राशन कार्ड)।     आयु का प्रमाण।     जारी किया गया नोटिस। वोटर आईडी अपडेट नहीं कराने से नौ-मैपिंग की समस्या     लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का पारदर्शी होना अनिवार्य है। कई बार लोग घर बदल लेते हैं पर वोटर आईडी अपडेट नहीं कराते, जिससे नो-मैपिंग की समस्या आती है। यह सुनवाई आपकी पहचान को डिजिटल रूप से सुरक्षित करने का एक मौका है। – भुवन गुप्ता, उप निर्वाचन अधिकारी  

शीतलहर और घने कोहरे ने मचाई हलचल, पचमढ़ी में बर्फ, नौगांव में पारा 1 डिग्री, 19 जिलों में स्कूल बंद

भोपाल  मध्यप्रदेश इस समय भीषण शीतलहर और घने कोहरे की चपेट में है। अरब सागर से आई नमी और उत्तर भारत की सर्द हवाओं ने पूरे प्रदेश को 'कोल्ड डे' जैसी स्थिति में डाल दिया है। आलम यह है कि सुबह में भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत 33 जिलों में दृश्यता (Visibility) बेहद कम बनी हुई है। राजगढ़ 5 डिग्री तापमान के साथ प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा। ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए 13 जिलों के स्कूलों में अवकाश और समय परिवर्तन के आदेश जारी कर दिए हैं। मौसम विभाग ने अगले 2 दिनों तक ग्वालियर-चंबल संभाग में भारी कोहरे का अलर्ट जारी किया है।  पिछले 3 दिन से पूरा मध्य प्रदेश कोहरे की आगोश में है। भोपाल में सुबह 6 से 7 बजे के बीच इतना घना कोहरा था कि 20 मीटर बाद कुछ दिखाई नहीं दिया। सुबह 11 बजे तक कोहरा छाया रहा। पचमढ़ी में गाड़ियों की सीट पर बर्फ की परत जमी मिली। छतरपुर का नौगांव सबसे ठंडा रहा।  खजुराहो, गुना, नर्मदापुरम, रायसेन, दमोह, सागर, जबलपुर, नौगांव, दतिया, धार, ग्वालियर, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, उज्जैन, रीवा, सतना, श्योपुर, बालाघाट, उमरिया, सीधी, मंडला, छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में कोहरे का असर देखा गया। कोहरे की वजह से बड़वानी जिले में सोमवार सुबह सांची दूध का टैंकर पलट गया। हादसे में हेल्पर कन्हैयालाल मुजाल्दे (35) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ड्राइवर अमजद अहमद शेख (35) गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं, दिल्ली से आने वाली ट्रेनों की टाइमिंग पर असर पड़ा है। मालवा, सचखंड, शताब्दी समेत कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से लेट चल रही हैं। मालवा एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 3 घंटे से ज्यादा देरी से चल रही है। सर्द हवाओं की वजह से सर्दी भी तेज हो गई है। ज्यादातर जिलों में पारा 10 डिग्री से नीचे आ गया है। दतिया में 4.4 डिग्री, राजगढ़-खजुराहो में 5.4 डिग्री, मलाजखंड में 5.5 डिग्री, उमरिया में 5.7 डिग्री, मंडला-पचमढ़ी में 5.8 डिग्री दर्ज किया गया। बड़े शहरों में भोपाल में 6.8 डिग्री, इंदौर में 8.6 डिग्री, ग्वालियर में 6.4 डिग्री, उज्जैन में 9.5 डिग्री और जबलपुर में 9 डिग्री रहा। इन 19 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित     इंदौर: कक्षा 1 से 8 तक, तीन दिन की छुट्‌टी।     उज्जैन: नर्सरी से 5वीं तक, एक दिन छुट्‌टी।     मंदसौर: नर्सरी से 8वीं तक, दो दिन की छुट्‌टी।     शाजापुर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को अवकाश।     विदिशा: नर्सरी से 5वीं तक, 5–6 जनवरी को अवकाश।     ग्वालियर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्‌टी, 7 से स्कूल।     अशोकनगर: 5 जनवरी को स्कूल व आंगनबाड़ी बंद।     रायसेन: नर्सरी से 5वीं तक, 7 जनवरी तक छुट्‌टी।     आगर मालवा: कक्षा 1 से 8 तक, दो दिन अवकाश (आंगनबाड़ी भी बंद)।     भिंड: नर्सरी से कक्षा 8 तक, दो दिन अवकाश।     टीकमगढ़: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्‌टी।     हरदा: नर्सरी से 8वीं तक, सोमवार को अवकाश।     नीमच: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्‌टी।     रतलाम: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी तक दो दिन का अवकाश।     राजगढ़: कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में 2 दिन का अवकाश।     मंडला: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को दो दिन का अवकाश, आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद।     जबलपुर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को दो दिन का अवकाश, आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद; परीक्षाएं यथावत।     दमोह: प्री प्राइमरी से 8वीं तक एक दिन का अवकाश। आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद।     डिंडौरी: नर्सरी से 5वीं, 5–6 जनवरी तक दो दिन का अवकाश। भोपाल और धार में बदली स्कूल टाइमिंग     भोपाल: नर्सरी से 8वीं तक के स्कूल सुबह 9.30 बजे के बाद खुलेंगे।     धार: नर्सरी से 8वीं तक की कक्षाएं 9.30 बजे के बाद संचालित होंगी, 9वीं से 12वीं तक समय यथावत रहेगा।

इंदौर में दूषित पानी का कहर, 17वीं मौत—भागीरथपुरा में 9416 की जांच, 20 नए मरीज मिले, हाईकोर्ट में पेश होगी रिपोर्ट

 इंदौर  इंदौर में दूषित पानी से हड़कंप मचा हुआ है. भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 17वीं मौत हो गई है. रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा (69) ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है. उन्हें एक जनवरी को उल्टी-दस्त के चलते एक प्राइवेट अस्पताल में एडमिट कराया गया था. दो जनवरी को आईसीयू में एडमिट किया गया. दो दिन बाद वेंटिलेटर पर रखा गया और रविवार दोपहर एक बजे उनकी मौत हो गई. इंदौर के दूषित पानी से बच्चों पर भी खतरा बना हुआ है. चाचा नेहरू अस्पताल में बीमार बच्चों का इलाज किया जा रहा है. करीब 12 बच्चों का इलाज चल रहा है. रविवार को AIIMS और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की टीम बच्चों का हाल जानने के लिए अस्पताल पहुंची थी. टीम ने बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाई. टीम बच्चों में बीमारी के लक्षणों की भी जांच करेगी. AIIMS के डॉक्टरों ने बच्चों की ब्लड कल्चर रिपोर्ट और स्टूल जांच की रिपोर्ट के साथ उन्हें दी जाने वाली मेडिसिन की रिपोर्ट भी ली. रविवार को स्वास्थ्य ठीक होने के बाद तीन बच्चों को डिस्चार्ज किया गया था. वहीं, बॉम्बे हॉस्पिटल में 11 मरीज आईसीयू में भर्ती थे, जिनमें से 4 मरीजों को वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। रविवार रात तक की स्थिति में 7 मरीजों का आईसीयू में इलाज चल रहा है। अब तक कुल 398 मरीज अस्पतालों में भर्ती किए गए, जिनमें से 256 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में 142 मरीजों का इलाज जारी है। इधर, प्रभावित क्षेत्र में 4 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग ने 2354 घरों का सर्वे किया। 9416 लोगों की जांच की गई, जिनमें 20 नए मरीज मिले हैं। जबकि 429 पुराने मरीजों का फॉलोअप लिया गया। सीएमएचओ डॉ. माधव हसनी ने बताया कि क्षेत्र में 5 एम्बुलेंस भी तैनात की गई हैं। प्रभावित क्षेत्र के प्रत्येक घर में 10 ओआरएस पैकेट और 30 जिंक की गोलियां बांटी गई हैं। पानी को शुद्ध करने के लिए क्लीन वाटर बॉटल की किट भी बांटी गई है। 17 टीमें लगातार लोगों को जागरूक कर रही हैं। इन टीमों में जन अभियान परिषद के सदस्य, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम, सुपरवाइजर और एनजीओ के सदस्य शामिल हैं। भागीरथपुरा के परिवारों पर संकट दूषित पानी कांड के बाद भागीरथपुरा के कइयों परिवारों पर संकट भी देखने को मिल रहा है. 28 साल के अमित मेर इंदौर के पोलो ग्राउंड स्थित इंडस्ट्रियल इलाके की एक ऑटोमोबाइल फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं. वह 28 दिसंबर से काम पर नहीं गए हैं क्योंकि उनकी 50 वर्षीय मां रामकली की दूषित पानी पीने से मौत हो गई. अमित ने कहा कि वह करीब 400 रुपये रोज कमाते थे. मां की मौत के बाद वह काम पर जाने की हालत में नहीं हैं. उन्हें घर पर रुकना पड़ रहा है. कमाई का कोई जरिया नहीं है. पीड़ित परिवारों पर दोहरी मार भागीरथपुरा में ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर, स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे स्तर पर काम करने वाले लोग रहते हैं. रोजाना की मेहनत और उससे मिले थोड़े से पैसों से ही उनका गुजारा होता है. परिवार में किसी न किसी व्यक्ति की बीमारी के चलते उनपर दोहरी मार पड़ रही है. अस्पताल का खर्च और काम पर न जाने की वजह से आय न होना, दोनों ही उनकी मुसीबतें बढ़ा रहा है. मरीज की सेहत के साथ खिलवाड़ बीना सावरिया इंदौर के भागीरथपुरा में रहती हैं. उन्होंने बताया कि अभी भी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. उनके पति प्रकाश प्रजापति की तबीयत खराब थी. भागीरथपुरा में ही आरोग्य केंद्र पर दिखाया था. वहां पर डॉक्टरों ने पर्चे पर पांच दवाइयां लिखीं और चार दवाई देकर उन्हें भेज दिया. उन्हें बताया भी नहीं कि एक दवाई नहीं है. वह घर आ गए और पिछले तीन दिनों से उनके पति दवाई खा रहे थे. जब आराम नहीं हुआ, तो मेडिकल दुकान पर गए, जहां मेडिकल संचालक ने कहा कि इसमें जो सबसे महत्वपूर्ण दवाई थी, वह तो आप नहीं खा रहे हैं. उसके बाद उन्होंने मेडिकल से दवाई ली तब जाकर तबीयत ठीक हुई. कर्ज लेकर लगवाएंगे RO उन्होंने कहा कि बड़ी हैरानी की बात है कि जब दवाई उपलब्ध नहीं थी, तो फिर क्यों मरीज को नहीं बताया गया. इससे बड़ा खिलवाड़ और क्या हो सकता है. उन्होंने कहा कि RO का पानी खरीदकर पी रहे हैं. परिवार की चिंता है. घर में छोटे बच्चे हैं. अब कर्ज लेकर घर पर RO लगवाएंगे. कर्ज लेना मजबूरी है क्योंकि जल ही जीवन है. निगम के टैंकर और नर्मदा के पानी पर भरोसा नहीं है. यहां का पानी जहर बन चुका है. कोलकाता से आए वैज्ञानिक लेंगे सैंपल इधर, इंदौर के स्मार्ट सिटी कार्यालय में रविवार को कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें कलेक्टर ने भागीरथपुरा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में कोलकाता, दिल्ली और भोपाल से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें कार्य कर रही हैं। कोलकाता से आए वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष और वैज्ञानिक डॉ. गौतम चौधरी सैंपल लेकर वैज्ञानिक तरीके से जांच करेंगे। इसके लिए टीम भागीरथपुरा क्षेत्र से पानी के रैंडम सैंपल एकत्रित करेगी। पाइपलाइन की मरम्मत का काम तेजी से जारी भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है। बोरिंग में भी लीकेज की जांच की जा रही है। रहवासी ललित ने बताया कि फिलहाल पीने के पानी की आपूर्ति टैंकरों के माध्यम से की जा रही है। साफ पानी की मांग को देखते हुए अब गलियों में बिसलरी से भरी गाड़ियां भी घूमने लगी हैं। महापौर बोले- पूरा प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्र में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा- फिलहाल सभी की प्राथमिकता एक ही है कि पूरी ताकत के साथ मिलकर लोगों की सेवा की जाए। पूरा प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्र में मौजूद है और जैसे ही किसी मरीज की सूचना मिलती है, उसे तुरंत इलाज दिलाने और अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था की जा रही है। महापौर ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जल लाइनों का सर्वे कराने और जहां से भी शिकायतें मिलें, उन्हें 48 घंटे के भीतर दुरुस्त करने के निर्देश दिए … Read more

SDM पर गिरी गाज, सरकारी आदेश में ‘घंटा’ शब्द लिखने पर सस्पेंड किया गया

 देवास  मध्य प्रदेश कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के चर्चित 'घंटा' वाले बयान का उल्लेख सरकारी आदेश में लिखना देवास के एसडीएम आनंद मालवीय को भारी पड़ गया. लेटर वायरल होते ही उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया. इस कार्रवाई का आदेश उज्जैन संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने जारी किया वहीं, एसडीएम कार्यालय में सहायक ग्रेड-3 अमित चौहान को भी देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने निलंबित कर दिया है. प्रशासनिक फेरबदल करते हुए अभिषेक शर्मा को देवास का नया एसडीएम नियुक्त किया गया है. दरअसल, इंदौर में दूषित पेयजल से फैली बीमारी और उससे हुई मौतों को लेकर प्रदेश की राजनीति पहले से ही गर्म थी. इसी बीच कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा पत्रकारों के सवाल पर ‘घंटा’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने से विवाद और गहरा गया. कांग्रेस ने इस बयान को असंवेदनशील बताते हुए प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए. इसी राजनीतिक माहौल के बीच देवास में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम आनंद मालवीय द्वारा एक सरकारी आदेश जारी किया गया. आदेश का उद्देश्य कांग्रेस के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था सुनिश्चित करना था, लेकिन आदेश की भाषा और उसमें शामिल सामग्री ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया. सरकारी आदेश में क्या था आपत्तिजनक वायरल हुए आदेश में प्रशासनिक निर्देशों के साथ-साथ कांग्रेस के ज्ञापन में लगाए गए सरकार विरोधी आरोपों, मृतकों की संख्या और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की घंटा टिप्पणी का सीधा उल्लेख किया गया था. सामान्य तौर पर ऐसे आदेशों में केवल कानून-व्यवस्था, पुलिस बल की तैनाती और प्रशासनिक दिशा-निर्देश होते हैं, लेकिन इस आदेश में राजनीतिक भाषा और आरोप शामिल थे. सूत्रों के मुताबिक, आदेश का एक हिस्सा कांग्रेस के ज्ञापन से लगभग शब्दशः लिया गया था. यही बात शासन स्तर पर सबसे अधिक आपत्तिजनक मानी गई.  जैसे ही यह आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, विपक्ष ने इसे प्रशासन के राजनीतिकरण का उदाहरण बताया, वहीं सत्तारूढ़ खेमे में भी असहजता साफ नजर आई. कुछ ही देर में यह मामला भोपाल तक पहुंच गया और उच्च स्तर पर रिपोर्ट तलब की गई. प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि एक जिम्मेदार अधिकारी से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई. देखते ही देखते उज्जैन संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए एसडीएम आनंद मालवीय को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया. सहायक ग्रेड-3 पर भी गिरी गाज मामले की आंतरिक जांच में यह बात भी सामने आई कि आदेश के ड्राफ्ट और टाइपिंग से जुड़े कार्यों में एसडीएम कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 अमित चौहान की भूमिका रही. इसके बाद देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने सहायक ग्रेड-3 अमित चौहान को भी निलंबित कर दिया. प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस कार्रवाई के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकारी दस्तावेजों में किसी भी तरह की लापरवाही या राजनीतिक सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. नया एसडीएम नियुक्त, स्थिति सामान्य करने की कोशिश निलंबन के तुरंत बाद शासन ने अभिषेक शर्मा को देवास का नया एसडीएम नियुक्त कर दिया. नए एसडीएम ने कार्यभार संभालते ही अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया कि सभी आदेश और निर्देश पूरी तरह प्रशासनिक भाषा और नियमों के अनुरूप जारी किए जाएंगे. वहीं एसडीएम के सस्पेंड किए जाने के बाद लोगों का कहना है कि घंटा कहने वाले कैलाश विजयवर्गीय पर तो कोई एक्शन नहीं हुआ. लेकिन उनके बयान को सरकारी आदेश में लिखने पर कार्रवाई हो गई. ये कैसा न्याय है?   

ठंड में राहत की पहल: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यादगार-ए-शाहजहांनी पार्क के रैन बसेरे का लिया जायजा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया यादगार-ए-शाहजहांनी पार्क स्थित रैन बसेरे का निरीक्षण जरूरतमंदों और महिलाओं को पिलाई गर्मागर्म चाय, ठंड से बचने के लिए दिये कंबल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार की रात भोपाल के तलैया स्थित यादगार-ए-शाहजहांनी पार्क रैन बसेरे का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने रैन बसेरे में गरीबों, जरूरतमंद, बेसहारा और यहां रात्रि विश्राम करने आए राहगीरों से आत्मीय चर्चा की। मुख्यमंत्री ने सबके हालचाल और दु:ख-दर्द जाने एवं सभी को अपने हाथों से गर्मागर्म चाय पिलाकर सर्दी से बचाव के लिए गर्म कंबल भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैन बसेरा जाते समय सबसे पहले पुलिस मुख्यालय के सामने लाल परेड ग्राउंड के गेट नम्बर 4 शौर्य द्वार में उपस्थित महिलाओं और बुर्जुगों से बात की, उनकी कुशलक्षेम जानी और सभी को कंबल वितरित किए। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव तलैया स्थित काली मंदिर पहुंचे और वहां बड़ी संख्या में उपस्थित सभी गरीबों और जरूरतमंदों को भी कंबल वितरित किए। मुख्यमंत्री द्वारा पूछने पर एक जरूरतमंद ने बताया कि वह सब्जी बेचने भोपाल आए थे, सर्दी भी तेज है और रात भी हो गई है, तो अब वे इसी मंदिर परिसर में रात बिताएंगे। कुछ ने बताया कि वे किसी जरूरी काम से आए थे, सिर्फ रात बिताने के लिए उन्होंने काली मंदिर परिसर में शरण ली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव यादगार-ए-शाहजहांनी पार्क स्थित रैन बसेरा पहुंचे। उन्होंने रैन बसेरे में मौजूद सभी विश्रामकर्ताओं से आत्मीय चर्चा की। मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा यहां कोई परेशानी तो नहीं है।विश्रामकर्ताओं ने कहा कि उन्हें यहां कोई भी परेशानी नहीं है। खाने और सोने की पूरी व्यवस्था है, ठंड से बचने के लिए यहां हीटर भी है। मुख्यमंत्री ने सभी से उनके यहां आकर रूकने की वजह पूछी। बताया गया कि ज्यादातर राहगीर आगे के सफर के लिए यहां रात बिताने रूके हैं। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव रैन बसेरे में विश्राम के लिए आए सुबोध जोसेफ के पास पहुंचे। उससे बात की, तो सुबोध ने बताया कि उसकी कमर में भारी दर्द है। इलाज की जरूरत है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर और निगमायुक्त भोपाल को सुबोध का समुचित इलाज कराने और उसकी हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने रैन बसेरे में उपस्थित सभी राहगीरों को अपने हाथों से गर्मागर्म चाय पिलाई और सभी को कंबल भी प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने शहर के सभी रैन बसेरों और आश्रय गृहों में बेहतर से बेहतर व्यवस्थाएं करने के निर्देश कलेक्टर और निगमायुक्त को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्रामकर्ताओं से कहा कि सरकार गरीबों, जरूरतमंदों और महिलाओं के कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। किसी भी गरीब को सरकार की योजनाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। तेज सर्दी के इस मौसम में कंबल वितरण से जरूरतमंदों को बड़ी राहत मिली। मुख्यमंत्री ने स्वयं राहगीरों से संवाद किया और उनकी समस्याओं की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के वंचित वर्गों के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है। सरकार किसी भी व्यक्ति को बेसहारा नहीं रहने देगी। गरीब कल्याण मिशन के तहत समाज के कमजोर तबकों को समर्थ बनाने के लिए हम हर कदम उठा रहे हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य समाज के हर व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है। ठंड के मौसम में किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े, यही हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सभी जरुरतमंदों को कंबल एवं गर्म कपड़े देकर सर्दी से जितना अधिक हो सके, बचने की अपील की। गरीबों, जरूरतमंदों, बेसहारा और राहगीरों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस आत्मीयता और संवेदनशीलता की सराहना करते हुए उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त कर आशीष भी दिया। इस दौरान भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय, जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति, कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, नगर निगम कमिश्नर श्रीमती संस्कृति जैन, क्षेत्रीय पार्षद सहित जनप्रतिनिधि एवं जिलाधिकारी भी उपस्थित थे।  

तीन राज्यों की दूरी होगी आधी, 11 घंटे का रास्ता 6 घंटे में तय कराएगा एक्सप्रेस-वे

भोपाल मध्यप्रदेश में महत्वाकांक्षी अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना पर एक बार फिर चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसके संबंध में शनिवार को अधिकारियों को अहम दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अटल प्रोग्रेस-वे से चंबल क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। तीन राज्यों को जोड़ने वाला यह प्रोजेक्ट अभी एलाइनमेंट के पेंच में फंसा है। करीब ढाई साल से प्रगति ठप है जिससे किसानों और संबंधित जिलों के लोगों की बेचैनी बढ़ने लगी है। अटल प्रोग्रेस-वे राजस्थान में कोटा जिले के सीमाल्या गांव के पास मुंबई-बड़ोदरा एनएच- 27 से शुरू होकर मप्र के तीन जिलों को कवर करते हुए उत्तरप्रदेश के इटावा जिले में निनावा तक बनना प्रस्तावित है। इसके निर्माण से एमपी के भिंड, एमपी के इटावा और राजस्थान के कोटा के बीच सफर करनेवालों को सीधा, सुगम और शॉर्टकट रास्ता मिल जाएगा। यात्रा के समय में करीब 5 घंटे बचेंगे। कुल 404 किमी लंबा अटल प्रोग्रेस-वे भारतमाला परियोजना में शामिल है। मप्र में 313.81 किमी, राजस्थान में 72 किमी एवं यूपी में 22.96 किमी का निर्माण होना है। अटल प्रोग्रेस वे की प्रारंभिक लागत करीब 6 हजार करोड़ रुपए की थी जोकि अब 23 हजार 645 करोड़ रुपए तक जा पहुंची है। खेतों से होकर प्रोगेस वे निर्माण पर वन विभाग की 454.51 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। अटल प्रोग्रेस-वे में भिंड जिले की 29 ग्राम पंचायतों, दो जनपदों के 41 गांव प्रभावित हो रहे हैं। एक्सप्रेस वे श्योपुर के 57 गांवों से होकर जाएगा। जिले की सीमा में करीब 95 किलोमीटर की लंबाई प्रस्तावित है। अटल प्रोग्रेस वे के लिए श्योपुर जिले में कुल 598.321 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण होनी थी। इसमें 90.878 हेक्टेयर सरकारी और 507.443 हेक्टेयर निजी जमीन है। एक्सप्रेस-वे निर्माण से श्योपुर जिले को बेहतर कनेक्टिविटी की उमीद है। यह न केवल मुरैना-भिंड से सीधे जोड़ेगा, बल्कि कोटा राजस्थान की ओर श्योपुर जिले को दिल्ली-मुंबई सुपर एक्सप्रेस-वे तक का भी सफर आसान करेगा।   11 घंटे की यात्रा महज 6 घंटे में पूरी होगी अटल एक्सप्रेस वे से यूपी के इटावा से एमपी के भिण्ड, मुरैना होकर राजस्थान के कोटा तक सीधा 4 लेन मार्ग बनाया जाएगा। इससे कोटा तक की 11 घंटे की यात्रा महज 6 घंटे में पूरी हो सकेगी। यानि यात्रा के समय में पूरे 5 घंटे बच सकेंगे। अटल प्रोग्रेस-वे के लिए भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई लेकिन तीनों जिलों के किसानों ने खेतों से होकर रोड निर्माण के प्रस्ताव का विरोध किया। इसपर मार्च 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने खेतों की बजाए बीहड़ों से होकर दोबारा एलाइनमेंट कराने की घोषणा की। हालांकि इसके बाद से प्रोग्रेस वे की प्रक्रिया ठप पड़ी है।