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किसानों के लिए राहत: ई-टोकन से खाद वितरण शुरू, अब लंबी कतारों में समय नहीं खोएंगे

जबलपुर  किसानों को रसायनिक खाद वितरण में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए कृषि विभाग ने लगातार अनेक उपाय किए पर सफलता नहीं मिली। वितरण केंद्रों में खाद पाने किसानों की कतार लंबी होती गई। स्थाई समाधान की दिशा में कार्य करते हुए शासन ने एक अक्टूबर 2025 से खाद वितरण की नई व्यवस्था ‘ई-टोकन’ का प्रयोग किया। इसके बेहतर परिणाम सामने आए। किसानों से प्राप्त फीडबैक के बाद यह व्यवस्था अब एक जनवरी 2026 से प्रदेशभर में लागू की जा रही है। जबलपुर, विदिशा और शाजापुर जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत ई-टोकन व्यवस्था शुरू की गई थी। योजना का फायदा यह रहा कि खाद लेने के लिए किसानों को न तो कतार में खड़ा होना पड़ा, न ही दस्तावेज लेकर भटकने की जरूरत पड़ी। उन्होंने अपने मोबाइल या कंप्यूटर से ई-टोकन पोर्टल पर वांछित जानकारी दर्ज की, जिसके साथ ही तय मात्रा में खाद बुक हो गई। उसके बाद किसानों ने अपनी सुविधा के मुताबिक वितरण केंद्र से खाद प्राप्त कर ली। विभाग ने खाद को घर तक पहुंचाने की वैकल्पिक सुविधा भी दी है। जबलपुर में तीन माह के भीतर 40 हजार से अधिक किसानों ने ई-टोकन के माध्यम से लगभग 20 हजार 770 टन खाद ली। रबी सीजन में लगभग 59 हजार से ज्यादा किसानों ने खाद लेने के लिए ई-टोकन प्रणाली में पंजीयन कराया है। कतार से राहत, समय की भी बचत ई-टोकन व्यवस्था से किसान तय तारीख और समय पर केंद्र पहुंचकर आसानी से खाद ले सकेंगे। इससे न समय की बचत होगी, बल्कि वितरण केंद्रों पर भीड़ और अव्यवस्था पर नियंत्रण लगेगा। ई-टोकन के साथ-साथ किसानों के घर तक खाद पहुंचाने की सुविधा भी शुरू की गई है, लेकिन यह व्यवस्था किसानों को खास पसंद नहीं आई। जबलपुर जिले में अब तक केवल तीन किसान ही घर-घर खाद वितरण योजना से जुड़े हैं। अधिकांश किसानों का मानना है कि केंद्र से सीधे खाद लेना अधिक सुविधाजनक और भरोसेमंद है। आंकड़ों पर नजर     01 अक्टूबर से जबलपुर सहित तीन जिलों में ई-टोकन की सुविधा शुरू हुई।     18 दिसंबर तक जबलपुर में 40 हजार किसानों ने 20 हजार 770 टन खाद ली-     59 हजार 732 किसानों ने रबी सीजन में ई-टोकन के जरिए खाद लेने पंजीयन कराया।     03 माह के भीतर चार हजार से अधिक किसानों को ई-टोकन से खाद दी गई। ऐसे ले सकते हैं ई पोर्टल से खाद     ई-टोकन पोर्टल पर किसान पंजीयन कराना जरूरी है।     इसके लिए ई-टोकन डट एमपीकृषि डाट ओआरजी ओपन करें।     ट्रस्ट/पट्टा/अन्य कृषक का पंजीयन पर क्लिक करें।     आधार नंबर दर्ज करें और आधार सत्यापन पर क्लिक करें।     ओटीपी प्रविष्ट करें एवं आधार सत्यापित पर क्लिक करें।     आधार सत्यापन के बाद स्वतः प्रदर्शित जानकारी दें।     किसान का नाम, मोबाइल और आधार नंबर व पते की जानकारी दें।     भूमि विवरण जोड़ने की प्रक्रिया में जाकर और कुल रकबा, सिंचित रकबा और खसरा नंबर दें।     स्थान विवरण चयन कर जिला, विकासखंड, ग्राम की जानकारी दें।     इसके बाद भूमि जोड़ें पर क्लिक करें।     अंत में चेक बाक्स में क्लिक कर अनुमोदन को प्रेषित करें। यह डाटा राजस्व विभाग के पास चला जाएगा। डा. एसके निगम, उप संचालक, कृषि ने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत ई-टोकन की व्यवस्था जबलपुर समेत प्रदेश के तीन जिलों में लागू की गई थी। इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। किसानों से फीडबैक लेने के बाद अब इसे प्रदेशभर में एक जनवरी 2026 से लागू किया जा रहा है।

गर्दन में चाकू फंसा, 46 किमी दूर अस्पताल तक पहुंचा नाबालिग; महिदपुर में विवाद में हिंसा

महिदपुर  मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील में बाइक टकराने के मामूली विवाद में समझाइश देने से नाराज 3 लोगों ने एक नाबालिग को घेरकर उस पर चाकू से हमला कर दिया। इस विवाद में चाकू नाबालिग की गर्दन में जा घुसा, जिसके बाद उसे गर्दन में फंसे चाकू के साथ ही इलाज के लिए उज्जैन लाना पड़ा। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें आरोपी नाबालिग पर चाकू से हमला करता दिख रहा है। वहीं एक अन्य वीडियो में उज्जैन के अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने के दौरान भी उसकी गर्दन में फंसा चाकू साफ नजर आ रहा है। यह घटना मंगलवार की बताई जा रही है, जिसका सीसीटीवी आज सामने आया। वीडियो में 3 लोग नाबालिग पर हमला करते नजर आ रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने तीन अज्ञात आरोपियो पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। यह घटना उज्जैन से करीब 45 किमी दूर महिदपुर तहसील के दर्जी बाखल क्षेत्र में उस वक्त हुई, जब दो दोस्त एक किराना दुकान से सामान लेकर लौट रहे थे, इसी दौरान गाड़ी टकराने की बात को लेकर हुए विवाद में एक नाबालिग को चाकू मार दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस दौरान अरशान खान और पीड़ित नाबालिग अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान सामने से बाइक सवार तीन युवक आ रहे थे और उनकी बाइक नाबालिग लड़के से टकरा गई। जिसके बाद नाबालिग ने उन बाइक सवार 3 लोगों से ध्यान से बाइक चलाने की बात कही, जिससे विवाद बढ़ गया। विवाद इतना बढ़ा कि मारपीट की नौबत आ गई। इसी दौरान बाइक सवार युवकों ने नाबालिग पर चाकू से हमला कर दिया और फरार हो गए। हमले के दौरान चाकू नाबालिग की गर्दन में जा घुसा, और वहीं फंसा रह गया। जिसके बाद चाकू लगी हालत में उसे इलाज के लिए पहले महिदपुर के अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे उज्जैन रेफर किया गया। गुरुवार को घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें विवाद के बाद आरोपी नाबालिग पर चाकू से हमला करते हुए और फिर फरार होते हुए नजर आ रहे हैं। साथ ही उज्जैन का भी एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें नाबालिग इलाज के दौरान गर्दन में फंसे चाकू के साथ अस्पताल में खड़ा दिखाई दे रहा है और दर्द से कराहता नजर आ रहा है। पुलिस ने अरशान खान की रिपोर्ट पर तीन अज्ञात युवकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों की तलाश की जा रही है, फिलहाल युवक की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड, पचमढ़ी में पारा 4.2°C, 25 शहरों में 10°C से नीचे; कई जिलों में घना कोहरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में ठंड और कोहरे का असर लगातार बना हुआ है। प्रदेश (MP Weather Update) के हिल स्टेशन पचमढ़ी में शुक्रवार सुबह न्यूनतम तापमान 4.2°C दर्ज हुआ। भोपाल में 7°C, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में 9°C के आसपास तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के कई जिलों में सड़कों पर घना कोहरा छाया रहा, जिससे वाहन चालकों को अलाव और लाइट के सहारे चलना पड़ा। दिल्ली से आने वाली ट्रेनों में भी देरी का असर देखने को मिला। सड़कों पर चलने वाले वाहन दिन में भी हेडलाइट जलाने को मजबूर रहे। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि ठंड से राहत फिलहाल नहीं मिलने वाली। 27 दिसंबर को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसका असर 2 से 3 दिन के भीतर मध्य प्रदेश में दिखाई देगा। इसका मतलब है कि नए साल की शुरुआत कड़ाके की ठंड और सर्द हवाओं के साथ होगी। भोपाल, मंडला, रीवा, सतना, पचमढ़ी, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, खजुराहो, नौगांव, अशोकनगर, झाबुआ, खंडवा, शाजापुर और सीहोर समेत कई जिलों में सुबह घना कोहरा छाया रहा। कोहरे के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ और सड़कों पर विजिबिलिटी कम होने से वाहन चालकों को लाइट जलाकर चलना पड़ा। भोपाल में 7, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में 9 डिग्री मिनिमम टेंपरेचर मौसम विभाग के मुताबिक, गुरुवार-शुक्रवार की रात प्रदेश के करीब 25 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे रहा। पचमढ़ी के अलावा रीवा में 5.5 डिग्री, शिवपुरी और खजुराहो में 6 डिग्री, नौगांव और दतिया में 6.2 डिग्री तथा उमरिया में 6.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 6.8 डिग्री दर्ज हुआ। भोपाल में पारा 7 डिग्री, जबकि इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में 9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सुबह अलाव का सहारा ठंड और कोहरे के चलते आम जनजीवन पर असर दिखने लगा है। कई इलाकों में सुबह लोग अलाव तापते नजर आए। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल ठंड से राहत के आसार कम हैं और आने वाले दिनों में रात का तापमान और गिर सकता है। पचमढ़ी में तापमान 4 डिग्री से नीचे, कई शहरों में छाया घना कोहरा बुधवार-गुरुवार की रात प्रदेश में लगातार दूसरे दिन तापमान 4 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 3.6 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं खजुराहो, नौगांव, मंडला, रीवा, सतना, भोपाल, दतिया, गुना, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, रतलाम और दमोह जैसे शहरों में घना कोहरा देखने को मिला। कोहरे की मार,ट्रेनों की रफ्तार थमी कोहरे का सबसे ज्यादा असर रेल यातायात पर पड़ रहा है। दिल्ली से भोपाल, उज्जैन और इंदौर आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें 5 से 8 घंटे तक देरी से चल रही हैं। मालवा एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और सचखंड एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें भी लेट हैं। शुक्रवार को भी हालात सामान्य होने के आसार कम हैं। 25 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे प्रदेश के 25 से अधिक शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे बना हुआ है। ग्वालियर में पारा 7 डिग्री, इंदौर में 7.5 डिग्री, भोपाल में 8.4 डिग्री और जबलपुर में 10 डिग्री दर्ज किया गया। राजगढ़ (5 डिग्री), रीवा (5.4), शाजापुर (5.5), शिवपुरी (6) और नौगांव (6.4) जैसे इलाके सबसे ज्यादा ठंडे रहे।रात के साथ-साथ दिन के तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। भोपाल में दिन का अधिकतम तापमान 23.7 डिग्री, ग्वालियर में 24.1, जबलपुर में 25.4 और इंदौर में 26 डिग्री रहा।बालाघाट का मलाजखंड दिन में भी सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान सिर्फ 21.2 डिग्री दर्ज किया गया। जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ से बढ़ी ठंड मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार ठंड के पीछे जेट स्ट्रीम की बड़ी भूमिका है। यह हवा जमीन से करीब 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर 260 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही है। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं के साथ मिलकर यह ठंड को और तीखा बना रही है। जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, सर्द हवाओं का असर और तेज हो सकता है। इस साल नवंबर और दिसंबर में ठंड ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भोपाल में नवंबर के महीने में लगातार 15 दिन शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। 17 नवंबर की रात तापमान 5.2 डिग्री तक गिर गया था। इंदौर में भी 25 साल बाद इतनी सर्द रात दर्ज की गई। 

हेलमेट नहीं तो जेब पर भारी मार! MP में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर अर्थदंड बढ़कर 500 रुपये

भोपाल प्रदेश में हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। हेलमेट नहीं लगाने पर अब 300 की जगह 500 रुपये अर्थदंड लगाने का प्रस्ताव है। वाहन चालक हो या पीछे बैठने वाला दोनों के लिए 500-500 रुपये अर्थंदड का प्रविधान किया जाएगा। परिवहन आयुक्त कार्यालय ने इसका प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसे शीघ्र ही स्वीकृति के लिए कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं अधिकारियों के अनुसार जनवरी, 2026 से नए प्रविधान लागू हो सकते हैं। एमपी में भी लगभग तीन वर्ष पहले अर्थदंड बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट में आया था, पर कुछ मंत्रियों ने यह कहते हुए विरोध किया था कि इससे जनता की जेब पर बोझ बढ़ेगा। इस कारण इसे स्वीकृति नहीं मिली थी। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इनमें दोपहिया वाहन सवार जितने लोगों की मौत होती हैं, उनमें 80 प्रतिशत से अधिक बिना हेलमेट वाले होते हैं।   6541 लोग बिना हेलमेट के थे इस कारण अर्थदंड बढ़ाने की तैयारी है। चार पहिया वाहन में सीट बेल्ट नहीं लगाने पर पहले से चालान 500 रुपये है। पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (पीटीआरआई) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2024 में 14 हजार 791 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में जान चली गई, जिनमें 6541 लोग बिना हेलमेट के थे। ये वाहन चालक या पीछे बैठने वाले थे। पड़ोसी राज्यों की तुलना में एमपी में हेलमेट नहीं पहनने पर अर्थदंड बहुत कम है। यूपी और बिहार में एक हजार और छत्तीसगढ़ में 500 रुपये अर्थदंड उत्तर प्रदेश और बिहार में एक हजार और छत्तीसगढ़ में 500 रुपये अर्थदंड लगाया जाता है। सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने भी इस वर्ष दो बार प्रदेश का दौरा किया, जिसमें नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा था। परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 15-20 दिन के भीतर हेलमेट नहीं लगाने पर अर्थदंड बढ़ाने की अधिसूचना जारी हो सकती है।  

नकल पर नकेल: जीवाजी विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला, प्रैक्टिकल परीक्षा की होगी अनिवार्य वीडियोग्राफी

ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की शिकायतें सामने आ रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक अहम निर्णय लिया है। अब विश्वविद्यालय से संबद्ध अंचल के सभी महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षाएं सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में आयोजित की जाएंगी। नए निर्देशों के तहत प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान छात्रों की पूरी परीक्षा प्रक्रिया कैमरे में रिकॉर्ड की जाएगी। इतना ही नहीं, परीक्षकों की उपस्थिति, प्रश्न पूछने की प्रक्रिया और मूल्यांकन से जुड़ी प्रत्येक गतिविधि भी रिकॉर्डिंग के दायरे में रहेगी। विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि इससे परीक्षा के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े और मनमानी पर प्रभावी रोक लग सकेगी।   उडनदस्ता भी करेगा वीडियोग्राफी परीक्षा अवधि में निरीक्षण के लिए जाने वाले उड़नदस्तों को भी अपनी पूरी कार्रवाई आवश्यकतानुसार कैमरे में रिकॉर्ड करनी होगी। उड़नदस्ता जब किसी परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करेगा, उस दौरान की गई जांच, बातचीत और व्यवस्थाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निरीक्षण प्रक्रिया भी निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। रिकार्डिंग नहीं तो अंक नहीं महत्वपूर्ण बात यह है कि अब छात्रों को दिए जाने वाले प्रायोगिक अंकों को भी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग के आधार पर ही मान्यता दी जाएगी। यदि किसी परीक्षा या मूल्यांकन को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो रिकॉर्डिंग को प्रमाण के रूप में उपयोग किया जाएगा। वहीं अगर किसी कालेज से वीडियो प्राप्त नहीं होती है तो उस कालेज के छात्रों के अंक अपड़ेट नहीं किए जाएंगे। जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन इस व्यवस्था को अपने अधीनस्थ अंचल के 350 से अधिक शासकीय और अशासकीय महाविद्यालयों में लागू कर रहा है। कथन: ‘प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर कई बार गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं ऐसे में छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए वीडियो रिकार्डिंग अनिवार्य की जा रही है।’ -राजीव मिश्रा, कुलसचिव, जेयू

मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार कोई बिजली यूनिट लगातार 450 दिन से कर रही उत्पादन

भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (ATPS) की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने बड़ा कमाल दिखाते हुए लगातार 450 दिन बिजली उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। चचाई की यूनिट नंबर 5 प्रदेश के इतिहास में ऐसी प्रथम विद्युत उत्पादन यूनिट है जो लगातार 450 दिनों से संचालित है। यह यूनिट 1 अक्टूबर 2024 से निरंतर रूप से विद्युत उत्पादन कर रही है। यूनिट ने गत माह अक्टूबर की 4 तारीख को लगातार 365 दिन (एक वर्ष) तक निर्बाध विद्युत उत्पादन करने का तमगा हासिल किया था। यूनिट 5 के निर्बाध संचालन से प्रदेश के विद्युत ग्रिड को स्थिरता मिली और घरेलू व औद्योगिक उपभोक्ताओं को सुचारु विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हुई। इस उपलब्धि से न केवल म.प्र. पावर जनरेशन कंपनी की साख मजबूत हुई बल्कि यह प्रदेश की अन्य ताप विद्युत इकाइयों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनी है। ऊर्जा मंत्री ने ऐतिहासिक सफलता पर दी बधाई अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 की इस सफलता व उपलब्ध‍ि पर ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई व MPPGCL के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह हर्ष ने व्यक्त करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्ध‍ि अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के यूनिट नंबर के ऑपरेशन व मेंटेनेंस अभियंताओं व कार्मिकों की लगन, मेहनत व समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण है। उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता दर्शाते आंकड़े निरंतर संचालन की इस असाधारण अवधि के दौरान यूनिट नंबर 5 ने सराहनीय प्रदर्शन करते हुए 98.48% का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF), 94.91% का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) प्राप्त किया है और 9.29% की सहायक विद्युत खपत (APC) बनाए रखी। ये परिचालन सूचकांक स्पष्ट रूप से इस अवधि के दौरान संयंत्र टीम द्वारा उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता को बनाये रखा गया। चचाई के अभियंताओं व कार्मिकों ने दिखाया कमाल पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि सामूहिक प्रयास, अनुशासित कार्यशैली व उच्च तकनीकी दक्षता से अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 जैसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। चुनौतीपूर्ण लक्ष्य लगातार एक वर्ष तक बिना रुकावट संचालन किसी भी ताप विद्युत इकाई के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसके लिए बॉयलर, टरबाइन, जनरेटर एवं सहायक प्रणालियों का सटीक रखरखाव, निरंतर निगरानी व तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान जरूरी होता है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) की समर्पित टीम के निरंतर परिश्रम व तकनीकी विशेषज्ञता का परिणाम है।  

मध्यप्रदेश बना फिल्मियों का पसंदीदा डेस्टिनेशन, तीन साल में 200 से अधिक साउथ फिल्में शूट

 भोपाल  बदलते दौर में सिनेमा में कई बदलाव आए हैं। न केवल फिल्मों की समय अवधि कम हुई है, बल्कि बड़ी स्क्रीन से निकलकर सिनेमा ओटीटी (OTT) के रूप में दर्शकों के पास पहुंच गया है। फिल्मों की करिश्माई दुनिया के बजाय दर्शकों ने असल जिंदगी को चुना और पसंद किया। इन सबके बीच सिनेमा फिर भी एक चीज तलाश करता रहा, वह है वास्तविक सेट। फिल्म निर्माता-निर्देशकों की यह तलाश खत्म हुई मध्य प्रदेश में। यहां के नदी, पहाड़, जंगल, ऐतिहासिक स्थल और खासतौर पर सिनेमा फ्रेंडली लोग, सिनेमा को मध्य प्रदेश खींच लाए। अब छोटे कस्बों में भी फिल्मों की हो रही शूटिंग कुछ दशकों पहले जो फिल्में मध्य प्रदेश के बड़े शहरों जैसे भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर में शूट हुआ करती थीं, वो अब छोटे कस्बों जैसे महेश्वर, चंदेरी, ओरछा से होती हुई सीहोर जिले के महोदिया, बमुलिया और धमनखेड़ा, छिंदवाड़ा जिले के चिमटीपुर जैसे गांवों तक पहुंच गई हैं। नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर मप्र के इन गंतव्यों ने दक्षिण भारत की फिल्मों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया है। इससे शूटिंग के दिन भी बढ़े हैं और सिनेमा पूरे प्रदेश में फैल गया है। तीन सालों में दो सौ से अधिक छोटे-बड़े प्रोजेक्ट शूट हुए शूटिंग हब बन चुके मध्य प्रदेश में पिछले तीन सालों (वर्ष 2023 से 2025) में दो सौ से अधिक छोटे-बड़े प्रोजेक्ट शूट हुए हैं, जिनमें 20 से भी ज्यादा साउथ की बड़े बजट की फिल्में हैं। राज्य ने अपनी विविध भौगोलिक स्थिति, ऐतिहासिक विरासत और फिल्म अनुकूल प्रशासनिक नीतियों के कारण दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग (तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम) को अपनी ओर आकर्षित किया है। सरकार की फिल्म पर्यटन नीति 2020 ने काम आसान किया मप्र सरकार की फिल्म पर्यटन नीति 2020 ने निर्माताओं का काम आसान किया। फरवरी 2025 में अनुमोदित नई फिल्म पर्यटन संवर्धन नीति ने वित्तीय प्रोत्साहनों की सीमा को बढ़ाकर दस करोड़ रुपये तक कर दिया है। इस नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें दक्षिण भारतीय भाषाओं की फिल्मों के लिए दस प्रतिशत अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्रस्तावित किया गया है। फिल्म क्रू के ठहरने पर 40 प्रतिशत की छूट वहीं सिगंल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया है। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि निर्माताओं को 15 कार्य दिवस के भीतर सभी आवश्यक अनमुतियां प्राप्त हो जाएं। इसके अतिरिक्त मप्र पर्यटन के होटल में फिल्म क्रू के ठहरने पर 40 प्रतिशत की सीधी छूट प्रदान की जाती है। यह प्रविधान दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि उनकी निर्माण इकाईयां बहुत बड़ी होती हैं, जिनमें तीन सौ से अधिक सदस्य शामिल होते हैं। पिछले तीन सालों में शूट हुए साउथ के प्रमुख प्रोजक्ट     पेन्नियन सेल्वन (1 और 2)     इंडियन- 2     तमिलरावणन     कन्नप्पा     अखंडा     नरकासुर     कल्लू कंपाउंडर     भार्गवी     गंन्स एंड गैंग     माई हीरो इन फिल्मों की शूटिंग जारी     भैरवी     टारगेट     ललिता     आणु बुलेट रा     मध्य प्रदेश एक प्रो-एक्टिव स्टेट है फिल्म के लिए। यहां आने वाले फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग खुद यह मानते हैं कि हम जो बोलते हैं, वह करके दिखाते भी हैं। मप्र सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी न केवल फिल्म की लागत कम करती है, बल्कि निर्माताओं को राज्य के अनछुए स्थानों पर शूटिंग करने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। इससे राज्य के पर्यटन स्थलों को भी बढ़ावा मिल रहा है।     – डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन बोर्ड।  

Bakri Palan Yojana: MP सरकार ने पेश की योजना, बकरी पालन से मिलेगी अच्छी आमदनी

भोपाल  बकरी पालन योजना: मध्य प्रदेश के गांवों में खेती के साथ-साथ पशुपालन हमेशा से कमाई का मजबूत जरिया रहा है. इनमें भी बकरी पालन सबसे आसान, कम खर्चीला और जल्दी मुनाफा देने वाला काम माना जाता है. यही वजह है कि आज प्रदेश के हजारों परिवार बकरी पालन से अच्छी आमदनी कर रहे हैं. अब राज्य सरकार की बकरी पालन योजना ने इस काम को और आसान बना दिया है. क्या है MP सरकार की बकरी पालन योजना? मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की इस योजना का मकसद छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. योजना के तहत 10 मादा + 1 नर बकरी (10+1 यूनिट) लगाने पर सरकार वित्तीय सहायता देती है. इस यूनिट की कुल लागत करीब ₹77,000 से ₹77,456 तय की गई है. सामान्य वर्ग को 40% तक सब्सिडी SC/ST वर्ग को 60% तक सब्सिडी, बाकी राशि बैंक लोन से पूरी की जाती है. दो तरह की योजनाएं, किसानों को सीधा फायदा पशुपालन विभाग के अतिरिक्त उपसंचालक डॉ. जितेंद्र कुमार गुप्ता के मुताबिक सरकार दो अलग-अलग योजनाएं चला रही है. नर बकरी आपूर्ति योजना इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में बकरी की नस्ल सुधार करना है. इसके तहत जमुनापारी, बारबरी और सिरोही जैसी उन्नत नस्लों के नर बकरे दिए जाते हैं, जिससे दूध और मांस उत्पादन बढ़ता है. बकरी इकाई स्थापना योजना इस योजना में 10 मादा और 1 नर बकरी की यूनिट पर सब्सिडी और बैंक लोन दोनों की सुविधा मिलती है. यह योजना खास तौर पर दूध और मांस उत्पादन बढ़ाने के लिए है. आवेदन कैसे करें? योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक व्यक्ति अपने नजदीकी पशुपालन एवं डेयरी विभाग या पशु चिकित्सा संस्था से संपर्क कर सकते हैं. आवेदन के बाद बैंक से लोन स्वीकृत होता है और सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर की जाती है. ग्राम सभा और जनपद पंचायत की स्वीकृति जरूरी होती है. कई मामलों में विभाग की ओर से ट्रेनिंग भी दी जाती है. क्यों फायदेमंद है बकरी पालन? विशेषज्ञों का मानना है कि बकरी पालन कम पूंजी में शुरू होने वाला ऐसा व्यवसाय है, जो नियमित आमदनी देता है. सरकार की इस योजना से गांव के किसान और युवा अब नौकरी के बजाय स्वरोजगार की राह पर तेजी से बढ़ रहे हैं.

इमिग्रेशन और कस्टम की सुविधा के बावजूद Raja Bhoj Airport पर इंटरनेशनल उड़ानें नहीं, घरेलू उड़ानें सीमित

भोपाल  राजा भोज एयरपोर्ट (Raja Bhoj Airport) पर इमिग्रेशन जांच पोस्ट की स्थापना के एक साल बाद भी किसी भी रूट पर इंटरनेशनल उड़ान (International flights) शुरू नहीं हो सकी है। हमारे एयरपोर्ट को कस्टम एयरपोर्ट का दर्जा भी मिल चुका है पर वर्ष 2025 में किसी भी एयरलाइंस कंपनी ने विदेशी रूट पर स्लॉट लेने में रुचि नहीं दिखाई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी (Airport Authority) को उम्मीद है कि वर्ष 2026 में कम से कम एक इंटरनेशनल उड़ान जरूर शुरू होगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने करीब एक साल पहले ग्रीन एवं रेड चैनल तथा इमिग्रेशन ई-गेट की स्थापना की थी। इसका उपयोग इंटरनेशनल रूट से आने वाले यात्री कर सकते हैं। अभी तक इसका उपयोग हज यात्रा के समय हुआ है। भोपाल में नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ानें आने लगी हैं पिछले कुछ समय से भोपाल में नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ानें आने लगी हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के समय भी विदेशी उड़ानें आई थीं, तब इसका उपयोग हुआ, लेकिन नियमित उड़ान नहीं होने से इसका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है। हाल ही में कस्टम एयरपोर्ट का दर्जा भी मिला है। इससे इंटरनेशनल उड़ानें शुरू होने की बाधाएं दूर हो चुकी हैं। सरकार ने इमिग्रेशन एयरपोर्ट बनाने संबंधी गजट नोटिफिकेशन पहले ही जारी कर दिया था। अब यहां अमला तैनात होना बाकी है। फिलहाल कस्टम अमला उसी समय आता है जब यहां कोई विदेशी उड़ान आती है। इंटरनेशनल विंग तैयार, उपयोग सीमित एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इंटरनेशनल विंग भी विकसित कर लिया गया है। आगमन क्षेत्र में पांच एवं प्रस्थान क्षेत्र में चार काउंटर बनाए गए हैं। इंटरनेशनल मापदंडों के अनुरूप यहां ग्रीन एवं रेड चैनल बनाए गए हैं। कस्टम काउंटर भी बनाए जा चुके हैं। इंटरनेशनल स्तर के एयरपोर्ट के लिए सुरक्षा में तैनात जवानों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। अथॉरिटी इसके लिए जवानों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। इस विंग का उपयोग फिलहाल नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ान के आवागमन के दौरान ही हो रहा है। तीन साल से दुबई उड़ान का इंतजार राजधानी में नया एकीकृत टर्मिनल बनने के बाद से इंटरनेशनल उड़ान की मांग की जा रही है। पिछले तीन साल से अथॉरिटी दुबई उड़ान शुरू करने के प्रयास कर कर रही है। इसके लिए जरूरी सुविधाएं जुटाई जा चुकी हैं। अब नए साल में उड़ान शुरू होने की उम्मीद की जा रही है। समिति की बैठकों में कई बार मुद्दा उठा हवाई अड्डा सलाहकार समिति की बैठक में भी इंटरनेशनल उड़ानें शुरू करने पर जोर दिया गया। समिति की बैठकों में कई बार यह मुद्दा उठा। सांसद आलोक शर्मा ने नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात कर घरेलू उड़ानों के साथ कम से कम एक दुबई-शारजाह उड़ान शुरू करने का आग्रह किया था, लेकिन वर्ष 2025 में भोपाल के हवाई यात्रियों को निराशा ही हाथ लगी। घरेलू ट्रैफिक बढ़ा पर उड़ानें सीमित भोपाल से घरेलू मोर्चे पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यात्री औसत पांच हजार से अधिक हो चुका है पर इस मान से उड़ानें कम हैं। इंदौर की अपेक्षा भोपाल में कम उड़ानें होने के कारण गोवा, पुणे एवं बेंगलुरु जैसे शहरों के लिए वाया इंदौर जाते हैं। पिछले साल से एयरपोर्ट 24 घंटे खुलने लगा है पर लेटनाइट उड़ान केवल एक है। वर्तमान में भोपाल से दिल्ली, मुंबई के अलावा, हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे, गोवा, रायपुर एवं अहमदाबाद के लिए सीधी उड़ान है। चैन्नई, सूरत, शिर्डी, जयपुर, देहरादून जैसे शहरों तक सीधी उड़ान की मांग लंबे से हो रही है पर उड़ानें शुरू नहीं हो पा रही हैं।     वर्ष 2026 में कम से एक इंटरनेशनल उड़ान शुरू हो सकती है। पिछले तीन साल में घरेलू उड़ानों की संख्या बढ़ी है। यात्री संख्या का लगातार नया रिकॉर्ड बन रहा है। नए साल में नए एयरलाइंस ऑपरेटर भी दस्तक देंगे। हमारे प्रयास जारी हैं।     – रामजी अवस्थी, एयरपोर्ट डॉयरेक्टर