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51 कलश सिर पर लेकर चलीं महिलाएं, जमकर थिरकें श्रद्धालु

भोपाल  संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का राजधानी के हिनोतिया क्षेत्र में आज शुभारंभ हो गया। कथा से पूर्व कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें महिला श्रद्धालु51 कलश सिर पर लेकर चलीं। वहीं यात्रा में डीजे की धुन पर श्रद्धालु जमकर थिरके। इस दौरान मंत्री विश्वास सारंग भी यात्रा में शामिल हुए। इस सात दिवसीय आयोजन में व्यास पं. देवेंद्र चतुर्वेदी शास्त्री प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक कथा का वाचन करेंगे। आज शुक्रवार को शुकदेव जन्मकुंती एवं भीष्म स्तुति का प्रसंग कथा व्यास सुनाएंगे।

मोबाइल विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी की अपील नामंजूर, तलाक पर लगी मुहर

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में अपने एक फैसले में एक आदमी को उसकी पत्नी से दी गई तलाक को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता का मोबाइल तोड़ना स्वाभाविक प्रतीत होता है। कोई भी आदमी अपनी पत्नी को व्यभिचार जारी रखते देखना पसंद नहीं करेगा। इसलिए पति ने गुस्से में आकर पत्नी का प्रेमी से संपर्क तोड़ने के लिए उसका मोबाइल तोड़ दिया।   बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कथित व्यभिचार को दर्शाने वाली मोबाइल फोन की तस्वीरों के आधार पर दी गई तलाक को बरकरार रखा। कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत प्रमाण पत्र पर जोर नहीं दिया। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को सबूत के रूप में स्वीकार्यता से संबंधित है। किसी इलेक्ट्रानिक उपकरण से प्राप्त साक्ष्य को वैध माने जाने के लिए धारा 65बी का प्रमाण पत्र पेश करना जरूरी है। हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल धागत और जस्टिस बीपी शर्मा की पीठ ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम वैवाहिक मामलों पर सख्ती से लागू नहीं होता है क्योंकि फैमिली कोर्ट को किसी भी प्रकार का साक्ष्य स्वीकार करने की अनुमति है। हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 14 के अनुसार, फैमिली कोर्ट किसी भी रिपोर्ट, बयान, दस्तावेज, सूचना या मामले को साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर सकता है, जो उसके विचार से किसी विवाद से प्रभावी ढंग से निपटने में सहायक हो। चाहे वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत प्रासंगिक या स्वीकार्य हो या न हो। भारतीय साक्ष्य अधिनियम वैवाहिक मामलों में सख्ती से लागू नहीं होता है और कोर्ट को सत्य का पता लगाने के लिए किसी भी रिपोर्ट, बयान, दस्तावेज को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने का अधिकार दिया गया है। अतः कोर्ट को उक्त तस्वीरों पर भरोसा करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में कोई गलती नहीं दिखती है। तलाक के फैसले के खिलाफ अपील करने वाली पत्नी ने तर्क दिया था कि कथित तस्वीरें किसी दूसरे मोबाइल से ली गई थीं क्योंकि पति ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया था। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि पत्नी ने तस्वीरों में अपनी मौजूदगी से इनकार नहीं किया था, बल्कि सिर्फ इतना कहा था कि तस्वीरें फर्जी हैं। कोर्ट ने कहा कि केवल इतना कहा गया है कि ये तस्वीरें किसी चालबाजी का उपयोग करके बनाई गई हैं। इन फर्जी तस्वीरों को किसने और कैसे बनाया है, इसका जिक्र नहीं किया गया है। इन तस्वीरों को लेकर टकराव से बचने के लिए केवल एक सामान्य बयान दिया गया है। पत्नी की इस दलील पर कि प्राथमिक उपकरण (पहला मोबाइल) उपलब्ध नहीं था, कोर्ट ने कहा कि पति ने तस्वीरों को अपने फोन में ट्रांसफर करने के बाद गुस्से में आकर उसे तोड़ दिया था। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता ने अपने बयान में कहा था कि तस्वीरें उसके मोबाइल से पति के मोबाइल में ट्रांसफर की गई थीं, जिसके बाद पति ने उसका मोबाइल तोड़ दिया। कोर्ट ने कहा कि पति का मोबाइल तोड़ना स्वाभाविक प्रतीत होता है। पति के मोबाइल फोन में पत्नी के व्यभिचार के सबूत थे। उसने वे तस्वीरें अपने मोबाइल में ट्रांसफर कर लीं। कोई भी आदमी अपनी पत्नी को व्यभिचार जारी रखते देखना पसंद नहीं करेगा। इसलिए पति ने गुस्से में आकर और पत्नी का प्रेमी से संपर्क तोड़ने के लिए उसका मोबाइल तोड़ दिया। रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों, पत्नी की स्वीकारोक्ति और तस्वीरें तैयार करने वाले व्यक्ति के साक्ष्यों पर विचार करते हुए कोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ पत्नी की अपील में कोई दम नहीं है। कोर्ट ने पत्नी द्वारा दायर अपील खारिज कर दी।  

ट्रांसको प्रीमियर क्रिकेट लीग 26 दिसम्बर से

ट्रांसको प्रीमियर क्रिकेट लीग 26 दिसम्बर से  जबलपुर  एम.पी. ट्रांसको (मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी) मुख्यालय, जबलपुर में अंतरविभागीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के अंतर्गत “ट्रांसको प्रीमियर क्रिकेट लीग–2025-26” का आयोजन 26 दिसम्बर 2025 से किया जा रहा है।प्रतियोगिता के संयोजक कार्यपालन अभियंता श्री इकबाल खान ने बताया कि टेनिस बॉल से खेली जाने वाली इस प्रतियोगिता के सभी लीग एवं फाइनल मुकाबले रामपुर स्थित पांडुताल खेल प्रांगण में आयोजित किए जाएंगे। इस क्रिकेट लीग में एम.पी. ट्रांसको की तीन महिला टीमें, वेंडर्स एवं आउटसोर्स की एक-एक टीम सहित कुल सात पुरुष टीमें भाग लेंगी। इसके अतिरिक्त, 40 वर्ष से अधिक आयु के वर्तमान कार्मिकों की सीनियर इलेवन, सेवानिवृत्त कार्मिकों की इलेवन तथा ट्रांसको परिवार की घरेलू महिला इलेवन की भी विशेष सहभागिता रहेगी। प्रतियोगिता का उद्घाटन एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी एवं मध्यप्रदेश विद्युत महिला मंडल की अध्यक्ष डॉ. अंजना तिवारी द्वारा दोपहर 12 बजे किया जाएगा। आज का पहला मुकाबला महिला टीम पावर स्मैसर्स विरुद्ध पावर एंजिल्स रहेगा.

मुख्यमंत्री पोषण मार्ट से आम जनता को सुविधा, किराना और जनरल स्टोर की तरह मिलेगा हर सामान: मंत्री राजपूत

भोपाल  मध्य प्रदेश में राशन की दुकानों पर किराना और जनरल स्टोर की तरह जरूरत की हर सामग्री मिलेगी। मप्र के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश में पहली बार राशन दुकानों को ‘मुख्यमंत्री पोषण मार्ट’ के रूप में विकसित करने की तैयारी।  अभी तक प्रदेश की राशन दुकानों में केवल गेहूं, चावल, शक्कर जैसी सीमित सामग्री ही उपलब्ध रहती है, लेकिन सरकार का उद्देश्य इस व्यवस्था को और व्यापक व उपयोगी बनाना है। राशन दुकान पर जरूरत का हर सामान मिले मंत्री ने बताया कि सरकार का विचार है कि राशन दुकानों पर किराने और जनरल स्टोर से जुड़ी आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जाएं, ठीक उसी तरह जैसे विकसित देशों में कम्युनिटी स्टोर या सोशल स्टोर की व्यवस्था होती है। इससे हितग्राहियों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान एक ही स्थान पर मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक लाभ होगा। गांव-गांव में रहने वाले नागरिकों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए अलग-अलग दुकानों या दूर के बाजारों तक नहीं जाना पड़ेगा। राशन के साथ-साथ अन्य जरूरी वस्तुएं भी एक ही जगह मिलने से समय, पैसा और श्रम तीनों की बचत होगी। मंत्री के अनुसार, इस योजना से न केवल हितग्राहियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राशन दुकानदारों की आय भी बढ़ेगी, जिससे पूरी सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सकेगी। सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी कर रही है। भोपाल के होटल पलाश में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की उपलब्धियां बताईं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की उपलब्धि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि बीते दो सालों में प्रदेश में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत बड़े पैमाने पर नि:शुल्क राशन का वितरण किया गया। इस अवधि में सरकार ने 22 हजार 800 करोड़ रुपए मूल्य का अनाज गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया। मंत्री के अनुसार, योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र परिवार खाद्यान्न से वंचित न रहे। योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लिए तकनीक का सहारा लिया गया है, जिससे वितरण व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुचारु हुई है। मुख्यमंत्री अन्न जागरूकता सेवा अभियान राशन दुकानों में गड़बड़ियों को खत्म करने के उद्देश्य से सरकार ने मुख्यमंत्री अन्न जागरूकता सेवा अभियान शुरू किया है। मंत्री ने बताया कि इसके तहत एक विशेष मोबाइल एप तैयार किया गया है। इस एप के जरिए जैसे ही राशन की गाड़ी दुकान पर पहुंचेगी, उसकी सूचना एसएमएस के माध्यम से सीधे हितग्राहियों को मिल जाएगी। इससे हितग्राही समय पर दुकान पहुंचकर राशन ले सकेंगे। इस व्यवस्था में राशन वाहन की स्थिति हितग्राही, दुकानदार और वाहन सेवा प्रदाता तीनों को दिखाई देगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी। साल में दो साल ग्राम सभाओं में पढ़ी जाएगी राशन लेने वालों की लिस्ट मंत्री ने बताया कि विभाग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ग्राम सभा स्तर पर राशन वितरण का सार्वजनिक वाचन शुरू किया है। इसमें यह जानकारी दी जाएगी कि गांव में कितने लोगों को राशन मिल रहा है, कितने लोग वंचित हैं और कितने पात्र लोगों के पास अभी पात्रता पर्ची नहीं है। इससे मौके पर ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी और शिकायतों का तुरंत समाधान संभव होगा। मंत्री ने इसे सामाजिक ऑडिट जैसा मॉडल बताया, जिससे ग्रामीण स्तर पर जवाबदेही तय होगी। ई-केवाईसी और फेस ऑथेंटिकेशन प्रदेश में राशन वितरण को व्यवस्थित करने के लिए बड़े स्तर पर ई-केवाईसी अभियान चलाया गया है। मंत्री के अनुसार अब तक 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हितग्राहियों की ई-केवाईसी पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही ‘मेरा ई-केवाईसी ऐप’ के माध्यम से चेहरे के सत्यापन (फेस ऑथेंटिकेशन) की सुविधा दी गई है। 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों को ई-केवाईसी से छूट दी गई है, ताकि वे तकनीकी कारणों से राशन से वंचित न हों। बुजुर्गों और दिव्यांगों को राशन लेने नॉमिनी की व्यवस्था कई बार अंगूठे का निशान काम न करने के कारण बुजुर्ग और दिव्यांग हितग्राही राशन नहीं ले पाते थे। इसे देखते हुए सरकार ने नॉमिनी व्यवस्था लागू की है। मंत्री ने बताया कि अब कोई भी वृद्ध या दिव्यांग व्यक्ति किसी एक व्यक्ति को नॉमिनी बना सकता है और उसी के माध्यम से उसे राशन मिलेगा। इस व्यवस्था का मकसद यह है कि कोई भी पात्र व्यक्ति तकनीकी कारणों से राशन से वंचित न रहे। 14 लाख नई राशन पात्रता पर्चियां मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि सरकार ने अब तक 14 लाख नई राशन पात्रता पर्चियां जारी की हैं और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। जो पात्र व्यक्ति अब तक योजना से छूट गए थे, वे अपनी केवाईसी पूरी कराकर राशन दुकान से पात्रता पर्ची प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि सभी पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा के दायरे में लाया जाए। वन नेशन-वन राशन कार्ड से प्रवासियों को राहत मंत्री ने कहा कि वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना प्रदेश और देश दोनों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हुई है। पहले मध्यप्रदेश के मजदूर जब बाहर काम करने जाते थे, तो उन्हें वहां राशन नहीं मिलता था और दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिक यहां राशन से वंचित रहते थे। अब स्थिति बदल गई है। मंत्री के अनुसार, हर महीने करीब 39 हजार परिवार दूसरे राज्यों से आकर मध्यप्रदेश में राशन ले रहे हैं, जबकि लगभग 5 हजार परिवार मध्यप्रदेश के होकर अन्य राज्यों में रहकर नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। लाड़ली बहना योजना में गैस अनुदान मंत्री ने बताया कि लाड़ली बहना और उज्ज्वला योजना के तहत बीते दो सालों में 6 करोड़ 70 लाख गैस सिलेंडर रिफिल कराए गए हैं। इसके लिए 911 करोड़ रुपए का अनुदान राज्य सरकार ने दिया है। सरकार का वादा है कि लाड़ली बहनों को 450 रुपए में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा और शेष राशि सरकार अनुदान के रूप में वहन कर रही है। शहरी क्षेत्रों में पाइपलाइन गैस योजना प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मंत्री ने स्वीकार किया … Read more

ग्रीन कैंपस की ओर कदम: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में IIT मॉडल पर शुरू हुए ई-रिक्शे

भोपाल  बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) परिसर को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रीन कैंपस अभियान के तहत विश्वविद्यालय को 5 ई-रिक्शे मिले हैं, जिनसे अब कैंपस के भीतर आवाजाही आसान, सस्ती और प्रदूषण मुक्त होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य बीयू परिसर को आईआईटी की तर्ज पर विकसित करना है, जहां हरित परिवहन को प्राथमिकता दी जाए। अब तक छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को परिसर के भीतर लंबी दूरी तय करने के लिए निजी वाहनों या ऑटो पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे न सिर्फ ईंधन की खपत बढ़ती थी, बल्कि प्रदूषण भी। ई-रिक्शा संचालन शुरू होने से कार्बन उत्सर्जन घटेगा और कैंपस में सुरक्षित व सुविधाजनक परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा। एसबीआई का सहयोग, सीएसआर से मिली सौगात कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बीयू को 5 ई-रिक्शे उपलब्ध कराए।  एसबीआई के महाप्रबंधक कुंदन ज्योति ने कुलगुरु प्रोफेसर एस.के. जैन को ई-रिक्शों की चाबियां सौंपीं। इस मौके पर कुल सचिव डॉ. अनिल शर्मा, डीजीएम साई कृष्णश्रीधर, फाइनेंस कंट्रोलर सगीरा सिद्दीकी और एसबीआई शाखा प्रबंधक पूजा गोयल भी मौजूद रहीं। साइकिल संस्कृति को भी मिलेगा बढ़ावा यह भी घोषणा की गई कि परिसर को और हरित बनाने के लिए विश्वविद्यालय को 15 साइकिलें दी जाएंगी। कुलगुरु प्रोफेसर एस.के. जैन ने बताया कि आने वाले समय में अलग–अलग विभागों में साइकिल उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि छात्र और कर्मचारी छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग कर सकें। ग्रीन कैंपस की ओर मजबूत कदम ई-रिक्शा और साइकिल के जरिए बीयू प्रशासन न केवल परिवहन व्यवस्था सुधार रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा दे रहा है। यह पहल विश्वविद्यालय को आईआईटी जैसे आधुनिक, स्वच्छ और हरित शैक्षणिक परिसरों की कतार में खड़ा करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।  

मासूम के लिए वरदान बनी एयर एंबुलेंस: रीवा से भोपाल AIIMS तक मिनटों में पहुंचाई बच्ची

रीवा   विंध्य क्षेत्र में शुरू की गई एयर एंबुलेंस सेवा लगातार जिंदगियां बचाने में अहम अपनी भूमिका निभा रही है. हाली ही में रीवा से एक बार फिर एयर एंबुलेंस ने समय रहते एक मासूम की जान बचाने का काम किया है. मऊगंज निवासी 6 साल की बच्ची गंभीर लीवर फेल्योर की समस्या से पीड़ित थी और उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी. बच्ची को तत्काल उच्च स्तरीय इलाज की आवश्यकता थी, जिसके बाद स्थानीय डॉक्टरों ने उसे भोपाल एम्स रेफर कर दिया. इसके बाद बच्चे के लिए पीएम श्री एयर एंबुलेंस बुधवार को रीवा पहुंची और उसे तत्काल एयर लिफ्ट कर भोपाल एम्स मे भर्ती कराया गया. बिना समय गंवाए मंगाई गई एयर एंबुलेंस मऊगंज निवासी रोहित दुबे की 6 वर्षीय बच्ची अनवी दुबे को बीते दिनों संजय गांधी अस्पताल में एडमिट कराया गया था. डॉक्टर्स ने पाया कि बच्ची का लिवर फेल होने की स्थिति में आ गया है और बिना समय गंवाए उसे भोपाल एम्स भेजना होगा. रीवा के डॉक्टर्स ने परिवार की सहमति ली, जिसके बाद बिना समय गंवाए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई. मेडिकल टीम की निगरानी में बच्ची को सुरक्षित रूप से रीवा हॉस्पिटल से डॉ. अभिनव अवस्थी और 108 एम्बुलेंस चालक आजाद शाह सावधानी के साथ रीवा एयरपोर्ट ले गए. यहां एयर एम्बुलेंस पहुंचते ही बच्ची को एयर लिफ्ट कर भोपाल के एम्स हॉस्पिटल ले जाया गया. संजय गांधी हॉस्पिटल के अधीक्षक राहुल मिश्रा ने बताया, " मऊगंज निवासी 6 वर्षीय अनवी दुबे को लिवर फेलियर हुआ था. दो दिनों तक उसका इलाज संजय गांधी हॉस्पिटल में हुआ, जिसके बाद गंभीर अवस्था होने पर बच्ची उसे स्पेशल ट्रीटमेंट देने की जरूरत थी. इसके लिए डिप्टी सीएम के निर्देश से कलेक्टर प्रतिभा पाल और मेडिकल कॉलेज के डीन सुनील अग्रवाल की सहमति के बाद एयर एम्बुलेंस बुलवाई गई और बच्ची को एयर लिफ्ट करके भोपाल एम्स हॉस्पिटल मे इलाज के लिए रेफर किया.'' बच्ची के परिजनों ने शासन और प्रशासन का जताया आभार डॉक्टर्स के मुताबिक भोपाल के एम्स हॉस्पिटल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा बच्ची का इलाज शुरू कर दिया गया है.चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे गंभीर मामलों में समय पर एयर एंबुलेंस की सुविधा मिलना जीवन रक्षक साबित होता है. वहीं, परिजनों ने इस त्वरित और संवेदनशील व्यवस्था के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के साथ ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त किया है.

एबी रोड की पहचान बदल गई: इंदौर के महापौर ने रोड का नाम अटल बिहारी वाजपेयी रोड रखा

इंदौर  इंदौर से होकर गुजरने वाले आगरा-बॉम्बे रोड की सालों पुरानी पहचान यानी एबी रोड अब बदल दी गई है। इसका नाम बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कर दिया गया है। इस बात की जानकारी शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने गुरुवार को सोशल मीडिया के जरिए दी। उन्होंने बताया कि MIC (निगम परिषद) की हुई बैठक में एबी रोड का नामकरण भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर अटल बिहारी मार्ग किए जाने का निर्णय लिया गया। बता दें कि देश आज पूर्व पीएम की जयंती मना रहा है और ऐसे में एमआईसी ने उन्हें याद करते हुए यह फैसला लिया। भार्गव ने आगे कहा कि अटल जी की जयंती के अवसर पर लिया गया यह निर्णय उनके राष्ट्रसेवा, विचारों एवं योगदान के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अटलजी ने राजनीति को गरिमा दी थी, इसी वजह से इंदौर की एक प्रमुख पहचान का नाम अब उनके नाम पर रखने का फैसला लिया गया है। भार्गव ने बताया कि यह निर्णय उनके विचारों और राष्ट्रसेवा को सच्ची श्रद्धांजलि है। हालांकि एक रोचक बात यह है कि भले ही आगरा-बॉम्बे रोड का नाम बदल दिया गया हो, लेकिन उसका प्रचलित नाम अब भी एबी रोड रह सकता है, क्योंकि अटल बिहारी का शॉर्ट नाम भी एबी रोड होगा, ऐसे में लोग अपनी आदतानुसार अटल बिहारी रोड को भी एबी रोड कह सकेंगे। एबी रोड की पहचान अटलजी के नाम पर करने की वजह बताते हुए MIC की तरफ से कहा गया कि अटलजी ने प्रधानमंत्री रहते हुए देशभर के मार्गों को मुख्य मार्गों से जोड़ने का जो ऐतिहासिक कार्य किया था, वह अतुलनीय है और उनके इसी योगदान को देखते हुए उनके जन्मदिन पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए यह फैसला किया गया है। बता दें कि देशभर के गांवों में पक्की सड़क का निर्माण करने वाली प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना अटलजी के कार्यकाल में ही आई थी, जिसके बाद ना केवल गांव में रहने वाले लोगों का शहर तक आना-जाना आसान हो गया, बल्कि देश की आर्थिक गति को भी नए पंख लग गए। क्या लिखा है आदेश में? इस बारे में महापौर व निगम परिषद अध्यक्ष की तरफ से जारी आदेश में लिखा गया, 'आगरा-बॉम्बे रोड का नामकरण 'अटल बिहारी मार्ग' किए जाने के संबंध में महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव का पत्र दिनांक 24.12.2025 एवं आयुक्त का पत्र क्रमांक 532 दिनांक 24.12.2025 पर विचार किया गया। चर्चा की गई। विचारोपरान्त महापौर के पत्र दिनांक 24.12.2025 एवं आयुक्त के पत्र के संलग्न संक्षेपिका में दर्शाई स्थिति एवं चर्चा के प्रकाश में वर्तमान में आगरा-बॉम्बे रोड़ जो कि, ए.बी. रोड़ के नाम से प्रचलन में है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के द्वारा देश भर में मार्गो को मुख्य मार्गों से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य अपने कार्यकाल में किया गया जो कि अतुलनीय है। इस योगदान को दृष्टिगत रखते हुए उनके जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि ज्ञापित करते हुए ए.बी. रोड़ का नामकरण "अटल बिहारी मार्ग" किए जाने की स्वीकृति निगम परिषद स्वीकृति की प्रत्याशा में सर्वसम्मति से दी जाती है। पुष्टि हेतु प्रकरण निगम परिषद के समक्ष रखा जाए। आयुक्त नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करें।'

गृह मंत्रालय ने दी मंजूरी: 4 राज्य पुलिस सेवा अफसर बने IPS

भोपाल  मध्यप्रदेश के लिए 24 दिसंबर प्रशासनिक दृष्टि से एक अहम दिन साबित हुआ है। राज्य पुलिस सेवा (SPS) के चार वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर का अवॉर्ड दिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा बुधवार को इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। राज्य पुलिस सेवा के जिन अधिकारियों को IPS कैडर से नवाजा गया है, उनमें आशीष खरे, विक्रांत मुरब, सुरेंद्र कुमार जैन और राजेश रघुवंशी शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों को वर्ष 2024 की डीपीसी (Departmental Promotion Committee) के तहत पदोन्नति दी गई है। चारों अधिकारी एक वर्ष की परिवीक्षा अवधि में रहेंगे। जानकारी के अनुसार, IPS कैडर अवॉर्ड के लिए 21 नवंबर 2024 को डीपीसी की बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें कुल 15 अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया था। बैठक के बाद अंतिम सूची केंद्र सरकार को भेजी गई थी, जिस पर गृह मंत्रालय ने मुहर लगाई। बैच विवरण की बात करें तो आशीष खरे, सुरेंद्र कुमार जैन और राजेश रघुवंशी 1998 बैच के राज्य पुलिस सेवा अधिकारी हैं, जबकि विक्रांत मुरब 1997 बैच से हैं। हालांकि, वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर रहे दो अधिकारियों को IPS अवॉर्ड नहीं मिल सका। अमृत मीणा का प्रमोशन उनके जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति के कारण अटक गया, वहीं सीताराम ससत्या के मामले में विभागीय जांच प्रमोशन में बाधा बनी। चार अधिकारियों को IPS कैडर मिलने से न सिर्फ मध्यप्रदेश पुलिस बल को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक अनुभव और नेतृत्व क्षमता का लाभ भी प्रदेश को मिलेगा। यह निर्णय राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है।

दतिया में कलेक्टर का कड़ा रुख: पटवारी संघ के शक्ति प्रदर्शन पर IAS ने कहा, दबाव में मत आएं

 दतिया  दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. सस्पेंड किए गए एक पटवारी के समर्थन में कलेक्ट्रेट पहुंचे पटवारियों के हुजूम को देखकर कलेक्टर का पारा चढ़ गया. उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया कि भीड़ लाकर उन पर राजनैतिक दबाव बनाने की कोशिश न की जाए. दरअसल, बीते बुधवार दतिया कलेक्टर वानखड़े ने शिकायत मिलने पर बसई के पटवारी शैलेंद्र शर्मा को सस्पेंड कर दिया था. इसी को लेकर पटवारी संघ के नेता सस्पेंड सहकर्मी का समर्थन और कुछ समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे. पटवारियों का शोरगुल सुनकर कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े मीटिंग छोड़ कर बाहर निकल आए. आम तौर पर शांत रहने वाले कलेक्टर ने काफी संख्या में पटवारियों को देख कर नाराजगी जताई. कलेक्टर ने मौके पर मौजूद पटवारियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए कई बड़ी बातें कहीं. कहा, "अगर कोई समस्या है तो 2-3 लोग भी आकर बात कर सकते थे. 60-70 की संख्या में यहां आने का क्या मतलब है? इतनी बड़ी संख्या में दफ्तर छोड़कर आने से जनता के काम प्रभावित होते हैं. दो-तीन नेताओं के चक्कर में आप 60-70 लोग आओगे और मुझ पर दबाव बनाओगे, तो मैं नहीं सुनूंगा. हम जनता के लिए काम करते हैं." पटवारी को फटकार लगाने का वीडियो वायरल होने के मुद्दे पर कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन ने कोई वीडियो वायरल नहीं किया, वह पत्रकारों ने किया था. कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि इस तरह झुंड में आना राजनैतिक दबाव बनाने का प्रयास है, जो सफल नहीं होगा. उन्होंने आगे कहा, "गलती किसी से भी हो सकती है. मुझसे, एडीएम से या आपसे. अगर आपको लगता है कि किसी के साथ गलत हुआ है, तो नियमपूर्वक अपनी बात रखें."

शादी में डांस का धमाल: दीपक जोशी और नई दुल्हन के ठुमके, सोशल मीडिया पर छाया वीडियो

देवास.  मध्यप्रदेश की राजनीति में अलग पहचान रखने वाले पूर्व मंत्री दीपक जोशी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि निजी जीवन से जुड़े वीडियो हैं, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. वायरल हो रहे इन वीडियो में दीपक जोशी एक महिला के साथ शादी के बाद डांस करते हुए नजर आ रहे हैं।.बताया जा रहा है कि यह वीडियो उनके निजी कार्यक्रम का है, लेकिन इसके सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. बताया जा रहा है कि दीपक जोशी के निजी जीवन को लेकर पहले से ही न्यायालय में मामला विचाराधीन है. ऐसे में इन वीडियो के सामने आने के बाद सवाल खड़े किए जा रहे हैं. मीडिया द्वारा जब इस पूरे मामले पर दीपक जोशी से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि यह मेरा निजी जीवन है और मामला न्यायालय में चल रहा है. ऐसे में इस विषय पर बोलना मैं उचित नहीं समझता. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा रखते हैं और उसी के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं. फिलहाल सोशल मीडिया पर ये वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं जो चर्चा का विषय बने हुए है. कांग्रेस नेत्री पल्लवी राज सक्सेना से 4 दिसंबर को शादी करने के बाद पूर्व मंत्री दीपक जोशी चर्चा में हैं। पल्लवी के अलावा दो और महिलाओं की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि दीपक जोशी उनके साथ भी शादी कर चुके हैं। क्या है मामला? शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके दीपक जोशी (63) इस समय सुर्खियों में हैं. दरअसल इसी महीने हुई उनकी शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. उन्होंने महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश सचिव पल्लवी राज सक्सेना से शादी की है. बताया गया कि यह विवाह 4 दिसंबर को आर्य समाज मंदिर में संपन्न हुआ. सामने आई तस्वीरों में पल्लवी राज की मांग में सिंदूर भरा हुआ दिखाई दे रहा है. कौन हैं दीपक जोशी? दीपक जोशी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी के बेटे हैं. उन्होंने 2013 में हाटपिपल्या विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी और वह स्कूल शिक्षा मंत्री बने थे. 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2023 में उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया. दोनों में 20 साल का एज गैप पल्लवी राज सक्सेना मध्य प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं. वे महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश सचिव रह चुकी हैं. वर्तमान में उनके पास कोई औपचारिक पद नहीं है, लेकिन वे पार्टी गतिविधियों से जुड़ी रही हैं. दीपक जोशी और पल्लवी राज के बीच करीब 20 साल का उम्र का अंतर है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. हालांकि दोनों की ओर से इसे निजी फैसला बताया गया है. पल्लवी ने अपने फेसबुक पर जो वीडियो शेयर किए हैं, उनमें से एक वीडियो में दीपक जोशी उनके साथ डांस करते दिख रहे हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी नजर आ रहे हैं। मेहंदी लगवाते वीडियो शेयर किया पल्लवी ने एक और वीडियो फेसबुक पर शेयर किया, जिसमें दीपक जोशी हाथों में मेहंदी लगवाते दिख रहे हैं। आठ सेकंड के इस वीडियो में पल्लवी दीपक से पूछती हैं कि दीपक जी कितने सालों बाद आपको मेहंदी लग रही है? हालांकि दीपक कोई जवाब नहीं देते। हाटपिपल्या विधायक बोले- प्रशासन स्वत: संज्ञान ले पूर्व मंत्री दीपक जोशी की तीन महिलाओं के साथ शादी करने का मामला सामने आने के बाद हाटपिपल्या से बीजेपी विधायक मनोज चौधरी ने देवास में स्थानीय पत्रकारों से कहा- जिन ऑडियो की मैंने शिकायत की थी, उस समय उनकी मास्टरमाइंड एक महिला निकली थी। लेकिन मात्र वो महिला नहीं थी उसके पीछे राजनीति का एक बड़ा षड्यंत्र था, जो अब सामने आ गया है।