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33 करोड़ 30 लाख मूल राशि हुई जमा, 28 करोड़ 01 लाख का सरचार्ज हुआ माफ

भोपाल  विगत 3 नवंबर से शुरू हुई समाधान योजना 2025-26 का लाभ हजारों बकायादार उपभोक्‍ता उठा रहे हैं। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुरैना वृत्‍त में अब तक कुल 7,795 उपभोक्‍ताओं ने अपना पंजीयन कराया है। कंपनी के खाते में 33 करोड़ 30 लाख रूपए मूल राशि जमा हुई है तथा 28 करोड़ 01 लाख रूपए सरचार्ज माफ किया गया है। इस तरह से अभी तक मुरैना वृत्‍त समाधान योजना में कंपनी कार्यक्षेत्र सहित मध्‍यप्रदेश में भी सर्वाधिक राशि जमा करवाने में अव्‍वल रहा है। मुरैना वृत्‍त के महाप्रबंधक श्री सुरेश कुमार ने बताया कि हाल ही में समाधान योजना का लाभ उठाते हुए गैर घरेलू उपभोक्‍ता श्रीमती सवीना बेगम पर कुल बकाया राशि 10,57,401 रुपए थी। जिसमें से 5,12,379 रूपये की सरचार्ज में छूट मिली। उन्‍हें केवल 5,45,022 रुपए जमा करने पड़े और उनका बिल निराकृत हो गया। इसी तरह घरेलू उपभोक्‍ता श्री बलराम शर्मा पर कुल बकाया राशि 9,80,077 रुपए में से 7,52,284 रूपये की सरचार्ज में छूट मिली। उन्‍हें केवल 2,27,793 रुपए जमा करने पड़े। कृषि पंप उपभोक्‍ता श्री जय सिंह पर कुल बकाया राशि 1,14,655 रुपए थी जिसमें से उन्‍हें 55,590 रूपये की सरचार्ज में छूट मिली और उन्‍हें केवल 59,065 रुपए ही जमा करने पड़े। मुरैना वृत्‍त के महाप्रबंधक श्री सुरेश कुमार ने अन्य सभी बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाते हुए अपने बकाया बिल को जमा करायें, साथ ही उन्होंने अपने सभी अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे तीन माह से अधिक के बकायदार उपभोक्ताओं को इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें। मध्य प्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025- 26 के लागू होने से ऐसे अनेक उपभोक्‍ता हैं जो बकाया बिल जमा कर रहे हैं और एकमुश्‍त बकाया जमा राशि जमा करने पर अधिकतम छूट का लाभ ले रहे हैं। कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने कंपनी के बकायादार उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि वे प्रथम चरण में ही एकमुश्‍त भुगतान कर इस योजना में शामिल होकर सरचार्ज में अधिकतम छूट का लाभ उठाएं। उन्‍होंने कहा कि यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना के प्रथम चरण में सरचार्ज में 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्‍त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है। समाधान योजना 2025-26 : एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्‍त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। इस योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्‍त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा। यह योजना दो चरणों में प्रारंभ होकर प्रथम चरण की शुरुआत 3 नवंबर से 31 दिसंबर 2025 तक रहेगी जिसमें 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। इसी तरह द्वितीय और अंतिम चरण में जो कि एक जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी, इसमें 50 से 90 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। प्रथम चरण में एकमुश्‍त राशि जमा कराने पर अधिकतम लाभ होगा। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल हेतु portal.mpcz.in पर पंजीयन कराना होगा। कंपनी के उपाय ऐप पर भी पंजीयन की सुविधा उपलब्‍ध है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं। 

वीडियो कॉल पर खुली ठगों की पोल—पुलिस दिखते ही मिनटों में काटा फोन

जबलपुर स्कूल से सेवानिवृत्त प्राचार्य सायबर ठगी का शिकार होने से बच गई। ठगों ने सेवानिवृत्त प्राचार्य और उनके बुजुर्ग पति को तीन दिन तक डिजिटल अरेंस्ट में रखा। आरोपितों ने पुलवामा में हुए आतंकी हमले से नाम जोड़कर दंपत्ति को डराया। ठग एटीएस अफसर बनकर मोबाइल पर वीडियो काॅल पर बात कर रहे थे। उनका आरोप था कि दंपत्ति के खाते में पुलवामा हमले के लिए हुई फंडिंग के 70 लाख रुपये आए हैं। फर्जी अफसरों ने दंपंति को एकाउंट को सेनेटाइज करने और पूरी रकम आरबीआई के एकाउंट में ट्रांसफर करने को कहा।   महिला मंगलवार को रकम ट्रांसफर करने घर से निकली, लेकिन अ​धिवक्ता के पास पहुंच गई। अधिवक्ता उन्हें पुलिस के पास लेकर पहुंचे। फिर पुलिस के साथ घर लौटे, तो देखा कि आरोपित वीडियो काॅल पर थे। जैसे ही असल पुलिस अफसर ने बात की, तो आरोपितों ने फोन कट कर दिया। यह घटना बाई का बगीचा इलाके मे हुई। पुलिस एकाउंट नम्बर और फोन नंबर के आधार पर आरोपितों की जानकारी जुटाने में लगी है।   वीडियो काॅल में बताया एटीएस के अफसर     बाई का बगीचा निवासी अमिता ग्रेब्रियल (63) स्कूल से सेवानिवृत्त प्राचार्य है। वे अपने पति एंथोनी ग्रेब्रियल (65) के साथ रहती है। उनके बच्चे विदेश में है।     छह दिसम्बर की सुबह उनके फोन पर वीडियो काॅल आया। अमिता ने काल उठाया । बात करने वाले ने खुद को एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड) का अफसर बताया।     धमकाया कि पुलवामा आतंकी हमले में 70 करोड़ रुपए की रा​शि का लेनदेन करने की बात कही। इसमें से 10 प्रतिशत याने 70 लाख उनके एकांउंट में आए थे। अमिता घबरा गई।     इसके बाद आरोपियों ने घर के ​खिड़की दरवाजे बंद कराए। पर्दे लगवाए और कहा कि वे डिलीटल अरेस्ट हो गए है। कहीं भी आने-जाने और किसी से भी बातचीत पर रोक लगा दी।     आरोपियों ने गिरफ्तारी वारंट समेत अन्य फर्जी दस्तावेज अमिता को भेजा। उन्हें सिग्नल नाम के एक ऐप में जोड़ा, जिसमें फर्जी एटीएस अफसर जुड़े थे। एकाउंट नम्बर दिया, घर से निकलीं, कागज में लिखकर बताया आरोपियों ने अमिता को सोमवार को एक एकाउंट नम्बर दिया। कहा कि वह आरबीआई का एकाउंट है। पूरे 70 लाख रुपए उसमें ट्रांसफर करें। वरना जेल जाना पड़ सकता है। अमिता घबराई हुई घर से निकलीं। पति वीडियोकॉल पर ही थे। अमिता सीधे अ​धिवक्ता अनिल मिश्रा के पास पहुंची। उनका फोन चालू था। तब अमिता ने कागज में लिखकर अ​धिवक्ता को आपबीती बताई।   अ​धिवक्ता अमिता को लेकर एसपी आफिस में एएसपी क्राइम ब्रांच जितेन्द्र सिंह के पास पहुंचे। महिला घबराई हुई थी। पूरी बात बताई। इसके बाद वे महिला के साथ उनके घर पहुंचे। जहां पति वीडियोकॉल पर ही थे। एएसपी ने पहले रिश्तेदार बनकर बातचीत की। आरोपी रुपए मांगते रहे, तब उन्होने बताया कि वे एएसी बोल रहे हैं, तो कॉल डिस्कनेक्ट हो गया और दंप​त्ति ठगी का ​शिकार होने से बच गए।

प्रदेश ने रचा विद्युत आपूर्ति का नया इतिहासः ऊर्जा मंत्री तोमर

विद्युत कंपनियों ने सफलतापूर्वक हेंडल किया आज तक की सर्वाधिक मांग 18971 मेगावॉट भोपाल मध्यप्रदेश ने विद्युत आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि 9 दिसम्बर 2025 को सुबह 10:50 बजे प्रदेश में अब तक की सर्वाधिक 18,971 मेगावॉट विद्युत मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इससे पूर्व यह रिकॉर्ड 20 दिसम्बर 2024 को 18,913 मेगावॉट का था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने प्रदेश की समस्त विद्युत कंपनियों एवं विद्युत कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि यह रिकॉर्ड कर्मचारियों की सतत मेहनत, तकनीकी दक्षता और निष्ठा का प्रतिफल है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अधिकतम मांग के दौरान प्रदेश के पॉवर हाउसों, ट्रांसमिशन लाइनों और सब स्टेशनों के माध्यम से निर्वाध, सुरक्षित एवं सुचारु विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई, जिससे कहीं भी व्यवधान की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। यह उपलब्धि प्रदेश के विद्युत तंत्र की मजबूती, बेहतर नियोजन और सक्षम प्रणाली का सशक्त प्रमाण है। एम.पी. ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री प्रदीप सचान ने बताया कि अधिकतम मांग के समय मध्य क्षेत्र में 5925 मेगावॉट, पूर्व क्षेत्र में 5057 मेगावॉट, पश्चिम क्षेत्र में 7560 मेगावॉट तथा अन्य श्रेणियों (रेलवे, सेज आदि) में 429 मेगावॉट की विद्युत आपूर्ति की गई। कैसे हुई आपूर्ति ताप विद्युत -3872 मेगावाट। जल विद्युत-387मेगावाट। नव करणीय -1792 मेगावाट। अन्य स्रोत(एन टी पी सी सहित) -12920 मेगावाट। 

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने मप्र के भरेवा शिल्पकार बलदेव वाघमारे को किया सम्मानित

भोपाल  मध्यप्रदेश की पारंपरिक जनजातीय भरेवा शिल्प कला की विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को नई दिल्ली में मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के भरेवा शिल्पकार श्री बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि हाल में भरेवा धातु शिल्प को जीआई टैग भी मिला है। केन्द्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह इस अवसर पर उपस्थित थे। क्या है भरेवा स्थानीय बोली में अरेवा का मतलब है भरने वाले। भरेवा कलाकार गोंड जनजाति की एक उप-जाति से संबंधित हैं, जो पूरे भारत में, खासकर मध्य भारत में फैली हुई है। धातु ढलाई का कौशल एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होता रहता है। भरेवा धातु शिल्प की परंपरा गोंड आदिवासी समुदाय के रीति-रिवार्जा और परंपराओं के समानांतर चलती है। यह परंपरा और रीति-रिवाज का मिश्रण है। भरेवा कारीगर देवताओं की प्रतीकात्मक छवियों को जानते हैं। वे गहने भी बनाते हैं जैसे अंगूठियां और कटार, जो गोंड परिवारों में शादी की रस्मों के लिए जरूरी है। कुछ गहने विशेष रूप से आध्यात्मिक प्रमुखों या तांत्रिकों के लिए बनाए जाते हैं जैसे कलाईबंद और बाजूबंद। कंगन की विशेष कारीगरी देखते ही बनती है। इसके अलावा, सजावटी कलाकृतियों और उपयोग की वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला जैसे बैलगाड़ियां, मोर के आकार के दीपक, घंटियां और घुंघरु, दर्पण के फ्रेम कुछ कलाकृतियों ने अंतरराष्ट्रीय शिल्प बाजार में पहचान बनाई है। भरेवा लोगों की आबादी मुख्य रूप से बैतूल जिले के कुछ इलाकों में केंद्रित है। जो राजधानी भोपाल से लगभग 180 किमी दूर है। श्री बलदेव ने भरेवा कारीगरों की घटती संख्या में बढ़ोतरी की है। उन्होंने अपनी लगन से बैतूल के टिगरिया गांव को शिल्प ग्राम बना दिया है। अब भरेवा परिवार इस अनोखी शिल्प कला का अभ्यास करते हैं। भरेवा लोगों को गोंड समुदाय के धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं का गहरा जान है। वे जिन देवताओं की मूर्तियां बनाते हैं, उनमें मुख्य रूप से हिंदू धर्म के सर्वोच्च भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती हैं। दूसरे हैं ठाकुर देव जो चमत्कारी घोड़े पर सवार होकर गांव की रक्षा करते हैं और माना जाता है कि वे इसे आपदाओं से बचाते हैं। शांति, समृ‌द्धि, खुशी और स्वास्थ्य के दूसरे देवता भी हैं। इस छोटे से टिगरिया गांव में बलदेव भरेवा ने इस परंपरा को जिंदा रखा है। उन्होंने यह कला अपने पिता से सीखी। उन्होंने एक मास्टर कारीगर के तौर पर नाम कमाया। बलदेव का परिवार अपनी पारंपरिक समझ, कलात्मक नजर और कड़ी मेहनत से हासिल किए गए हुनर पर गुजारा करता है।  

प्रथम अन्तरराष्ट्रीय मैक्समूलर अलंकरण संतोष चौबे को

भोपाल वरिष्ठ कवि–कथाकार, निदेशक, विश्व रंग एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे को साझा संसार, नीदरलैंड्स के 'प्रथम अन्तरराष्ट्रीय मैक्समूलर अलंकरण–2025' से सम्मानित किया गया है। श्री संतोष चौबे को वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं कला के उन्नयन हेतु सर्वोत्तम योगदान के लिए यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। चयन समिति में लुडविका शम्बरो (इटली), मेरियन रिडर्स, मेटा स्ट्रेफलांड (अमेरिका), रने होफ (नीदरलैंड्स) एवं पेट्रा फूरन (स्विट्जरलैंड) शामिल थे। इसके अलावा रामा तक्षक (नीदरलैंड्स), हर्षिता वाजपेयी (अमेरिका), मनीष पांडे (बेल्जियम) राजेंद्र शर्मा (भारत), शिवांगी शुक्ला (नीदरलैंड्स), विनीता तिवारी (भारत) एवं लीलाधर मंडलोई (भारत) भी चयन प्रक्रिया में शामिल रहे।   यह अंतरराष्ट्रीय अलंकरण राजस्थान के जाट बहरोड़ गाँव में आयोजित भव्य 'राठ रंग महोत्सव' में साझा संसार फाउंडेशन, नीदरलैंड्स के अध्यक्ष श्री रामा तक्षक तथा श्री बलवीर सिंह छिल्लर अध्यक्ष राठ क्षेत्र द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर मंच पर इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए की कार्यकारी संपादक डॉ. विनीता चौबे, वरिष्ठ कवि श्री लीलाधर मंडलोई विशेष रूप से उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि कवि–कथाकार, उपन्यासकार, संपादक और अनुवादक श्री संतोष चौबे अपने अभिनव रचनात्मक प्रकल्पों और नवाचारों के लिए वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान रखते हैं। उन्होंने हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रसार के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय 'विश्वरंग' महोत्सव की वर्ष 2019 में भोपाल से शुरुआत की जिसके आज 65 से अधिक सदस्य देश हैं। विश्व रंग 'मॉरीशस' के बाद हाल ही में उन्होंने श्रीलंका, मुंबई और भोपाल में विश्व रंग का सातवाँ भव्य आयोजन कर हिंदी के वैश्विक विस्तार की जमीन तैयार की है। श्री संतोष चौबे को सिंगापुर में 'विश्व हिंदी शिखर सम्मान– 2024' और फ्रांस में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय 'भारत गौरव सम्मान–2024', लंदन में "वातायन यू.के. अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान 2023" और अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा 'लाईफ टाईम एचीवमेंट अवार्ड–2023 से सम्मानित किया गया है। श्री संतोष चौबे को कविता (कहीं और सच होंगे सपने) के लिए मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् का दुष्यंत कुमार पुरस्कार, आलोचना (कला की संगत) के लिए स्पंदन आलोचना सम्मान, अनुवाद (मास्को डायरी) के लिए मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति का पुरस्कार एवं उपन्यास (जलतरंग) के लिए शैलेश मटियानी तथा अन्तरराष्ट्रीय वैली ऑफ वर्ड्स पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। समग्र साहित्यिक अवदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय दुष्यंत अलंकरण, शिवमंगल सिंह सुमन सम्मान' एवं अखिल भारतीय ब्रह्मदत्त तिवारी स्‍मृति सम्मान–2024' से अलंकृत किया गया है। इस अवसर पर प्रथम मैक्समूलर अंतरराष्ट्रीय अलंकरण–2025' के लिए श्री संतोष चौबे को 'विश्व रंग' फाउंडेशन, टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र, प्रवासी भारतीय साहित्य एवं संस्कृति शोध केंद्र, टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, डॉ. सी.वी. रामन विश्वविद्यालय, बिलासपुर, खंडवा, वैशाली, आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग, आईसेक्ट पब्लिकेशन, वनमाली सृजन पीठ, समस्त वनमाली सृजन केंद्रों तथा साहित्य, कला संस्कृति की सहयोगी संस्थाओं द्वारा शुभकामनाएं दी गई।

MP हाईकोर्ट का अहम फैसला: पत्नी की बेवफाई का सबूत बनी तस्वीरें, इंडियन एविडेंस एक्ट पर महत्वपूर्ण टिप्पणी

जबलपुर  जबलपुर हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि विवाहेतर यौन संबंध के आधार पर तलाक की डिक्री जारी करने में 65-बी सर्टिफिकेट के बिना तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा सकता है। जस्टिस विशाल धगट और जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने यह स्पष्ट किया कि शादी के मामलों में इंडियन एविडेंस एक्ट पूरी तरह से लागू नहीं होता है। कोर्ट ने इस आधार पर दायर एक अपील को खारिज कर दिया। महिला ने दी थी तलाक को चुनौती यह मामला बालाघाट की एक महिला से जुड़ा है, जिसने कुटुंब न्यायालय द्वारा तलाक की डिक्री जारी करने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। महिला का कहना था कि उसके पति ने एक अन्य व्यक्ति के साथ उसकी आपत्तिजनक तस्वीरों का इस्तेमाल करके तलाक के लिए आवेदन किया था। महिला की ओर से यह भी दलील दी गई थी कि इन तस्वीरों के साथ इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत 65-बी सर्टिफिकेट पेश नहीं किया गया था, जो कि जरूरी है। महिला ने सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि 65-बी सर्टिफिकेट के बिना तलाक का आदेश रद्द किया जाना चाहिए। उसने यह भी बताया कि तस्वीरें गलती से उसके मोबाइल से पति के मोबाइल में ट्रांसफर हो गई थीं और बाद में पति ने उसका फोन तोड़ दिया था। शादी के मामलों में पूरी तरह लागू नहीं होता एक्ट लेकिन, युगलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि इंडियन एविडेंस एक्ट शादी के मामलों में पूरी तरह से लागू नहीं होता है। फैमिली कोर्ट्स एक्ट के सेक्शन 14 के अनुसार, कुटुंब न्यायालय को सच्चाई का पता लगाने के लिए किसी भी तरह की रिपोर्ट, बयान या डॉक्यूमेंट्स को सबूत के तौर पर स्वीकार करने का अधिकार है। कोर्ट ने माना कि कुटुंब न्यायालय ने इन तस्वीरों पर भरोसा करके कोई गलती नहीं की। महिला की अपील को किया खारिज कोर्ट ने यह भी पाया कि महिला ने इस बात से इनकार नहीं किया कि वह तस्वीरों में है। उसने केवल यह कहा कि तस्वीरें किसी ट्रिक से बनाई गई हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि किसने और कैसे बनाईं। महिला ने अपने बयान में स्वीकार किया था कि तस्वीरें उसके मोबाइल से पति के मोबाइल में ट्रांसफर हुई थीं और फिर पति ने उसका फोन तोड़ दिया। कोर्ट ने कहा कि पति के पास पत्नी के विवाहेतर संबंध के सबूत थे, और गुस्से में फोन तोड़ना स्वाभाविक था ताकि पत्नी का अपने पार्टनर से संपर्क टूट जाए। कोर्ट ने उस फोटोग्राफर से भी पूछताछ की जिसने तस्वीरें खींची थीं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, युगलपीठ ने अपील को खारिज कर दिया।  

लाडली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी, जानें कैसे चेक करें स्टेटस और ₹1500 का हुआ ट्रांसफर

 छतरपुर प्रदेश की लाडली बहनों के लिए 9 दिसंबर 2025 का दिन बेहद खास रहा। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने छतरपुर जिले के राजनगर से रिमोट का बटन दबाकर लाडली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी की। इसके साथ ही प्रदेश की 1.26 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 1500-1500 रुपये की राशि पहुंच गई। 1857 करोड़ रुपये महिलाओं के खाते में ट्रांसफ सरकार ने हाल ही में योजना की मासिक किस्त को 1250 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया था। इस बार राज्य सरकार ने कुल 1857 करोड़ रुपये महिलाओं के खाते में ट्रांसफर किए हैं। योजना के नियमों के अनुसार, इसका लाभ केवल विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को मिलता है। अविवाहित महिलाएं फिलहाल इसके लिए पात्र नहीं हैं। लाखों महिलाओं को था इंतजार     लाडली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी हो गई है.     नए रजिस्ट्रेशन पर इस बार भी कोई घोषणा नहीं हुई.     लाखों महिलाएं फॉर्म शुरू होने का इंतजार कर रही हैं.     मौजूदा लाभार्थियों को बढ़ी हुई राशि मिल रही है.     नए आवेदनों पर सरकार ने अभी चुप्पी साधी है.     रजिस्ट्रेशन शुरू होने में और इंतजार करना पड़ सकता है.     योजना पर आगे की अपडेट जल्दी मिल सकती है. क्यों खाते में नहीं आए पैसे     लाडली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी हो गई है.     कुछ लाभार्थियों के खातों में राशि नहीं पहुंची है.     वजह हो सकती है-आईडी पर ई-केवाईसी पूरा न होना.     पहले अपनी समग्र आईडी ई-केवाईसी स्थिति चेक करें.     तय करें कि बैंक खाता आधार नंबर से लिंक है.     सभी अपडेट सही होने पर किस्त मिलने की संभावना बढ़ती है. कैसे चेक करें स्टेट्स     लाडली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी हो चुकी है.     मोबाइल पर मैसेज न आए तो चिंता न करें.     आप ऑनलाइन पेमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं.     ऑफिशियल पोर्टल: cmladlibahna.mp.gov.in.     "अप्लाई व पेमेंट की स्थिति" सेक्शन पर जाएं.     रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी दर्ज करें.     मोबाइल पर आए ओटीपी से सत्यापन करें.     स्क्रीन पर आपकी किस्त की पूरी स्थिति दिख जाएगी. लाडली बहना योजना के रजिस्ट्रेशन पर कोई अपडेट नहीं लाडली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी हो गई है। लेकिन इस बार भी नए रजिस्ट्रेशन को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया है। राज्य की लाखों महिलाओं को लाडली बहना योजना के फॉर्म भरे जाने का इंतजार है। मौजूदा लाभार्थियों को तो बढ़ा हुआ पैसा मिलने लगा है, लेकिन नए रजिस्ट्रेशन के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है। क्या खाते में नहीं आया लाडली बहना योजना का पैसा? मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी कर दी गई है। अगर आपके खाते में पैसा नहीं आया है तो हो सकता है कि आपने समग्र आईडी पर ईकेवाईसी न किया हो। अगर ये काम पूरा हो चुका है तो एक बार यह चेक करें कि आपका बैंक खाता आधार नंबर से जुड़ा है या नहीं। लाडली बहना योजना की 31वीं क‍िस्‍त जारी, ऐसे चेक करें स्‍टेटस लाडली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी कर दी गई है। अगर आपके मोबाइल पर मैसेज नहीं आया है तो आप ऑनलाइन स्टेटस चेक कर सकते हैं। ऑफिशियल पोर्टल cmladlibahna.mp.gov.in पर जाकर आवेदन एवं भुगतान की स्थिति में जाकर अपने रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी और मोबाइल पर आए ओटीपी के जरिए स्टेटस चेक कर सकते हैं।  

‘ब्राह्मण बहू चाहिए’ का विवाद दिल्ली पहुंचा, IAS संतोष वर्मा की नौकरी और प्रमोशन पर सवालिया निशान

भोपाल  मध्य प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी में इन दिनों 'शब्दों के बारूद' ने आग लगा रखी है। आईएएस अधिकारी और अजाक्स अध्यक्ष संतोष कुमार वर्मा द्वारा ब्राह्मणों की बेटियों को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान ने अब एक ऐसे सियासी और कानूनी चक्रव्यूह का रूप ले लिया है, जिससे निकलना उनके लिए नामुमकिन लग रहा है। आलम यह है कि इस विवाद की गूंज भोपाल की फाइलों से निकलकर दिल्ली के गलियारों और बिहार विधानसभा तक पहुंच चुकी है। क्या चली जाएगी नौकरी? वहीं, ऐसे में कुछ लोगों को लग रहा है कि आईएएस संतोष वर्मा की नौकरी तो गई? लेकिन क्या ऐसा होने जा रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों 'शब्दों की मर्यादा' और 'नियमों की धज्जियां' उड़ती दिख रही हैं। आईएएस संतोष वर्मा के 'ब्राह्मण बेटियों' वाले विवादित बयान ने जहां दिल्ली तक हड़कंप मचा रखा है, वहीं अब सांसद जनार्दन मिश्रा की चिट्ठी ने उनकी पदोन्नति के 'फर्जीवाड़े' के आरोपों से हड़कंप मचा दिया है। पहले भी आईएएस करते रहे हैं बखेड़ा पहले भी कई आईएएस अलग-अलग तरह के बयान देकर राजनीतिक और सामाजिक बखेड़ा खड़े करते रहे हैं। पूर्व आईएएस शैलबाला मार्टिन ने मंदिरों के लाउडस्पीकर पर ट्वीट करके एक नया धार्मिक और सियासी बवंडर खड़ा कर दिया था। दूसरी तरफ, आईएएस लोकेश जांगिड़ ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए 9 तबादलों का जो 'दर्द' बयां किया था, उन्होंने तो सरकार की कार्यशैली पर ही सवाल दाग दिए थे। पूर्व आईएएस नियाज खान भी ब्राह्मण और मुस्लिमों लेकर सोशल मीडिया में काफी मुखर दिखते थे। भ्रष्टाचार की बात करें तो अरविन्द जोशी और टीनू जोशी जैसे नामों ने पहले ही प्रशासनिक साख को दागदार किया है। हालांकि यह सब बयान इस तरह खराब नहीं कहे जा सकते, जितना घृणित बयान संतोष वर्मा का माना जा रहा है। सीएम के पाले में है गेंद संतोष वर्मा पर कार्रवाई कब होगी, यह गेंद अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के पाले में है। क्या वे इन 'विवादित रत्नों' पर कड़ी कार्रवाई कर प्रशासन की गिरती साख को बचा पाएंगे, या फाइलों के 'परीक्षण' का यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा? यह जंग अब केवल अनुशासन की नहीं, बल्कि सत्ता के इकबाल की है।  

UPSC CSE 2024 कैडर आवंटन: MP को मिले 5 नए IAS अफसर, शक्ति दुबे बनीं AIR 1, जानें पूरी लिस्ट

भोपाल  कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए आवंटन लिस्ट (UPSC CSE IAS Allocation List 2024) जारी कर दी है। 90 से अधिक आईएएस अफसर को अलग-अलग राज्यों के कैडर आवंटित किए गए हैं। 20 को उनके होम स्टेट का कैडर मिला है।  यूपीएससी सीएसई परीक्षा 2024 में प्रथम स्थान लाने वाली शक्ति दुबे को उत्तर प्रदेश कैडर अलॉट किया गया है, दूसरा  दूसरी रैंक लाने वाली हर्षिता गोयल को गुजरात कैडर दिया गया है, जिनका होम स्टेट हरियाणा है। लिस्ट में आईएएस अधिकारियों की कैटेगरी, होम स्टेट और अलॉट किए गए कैडर की जानकारी दी गई है। बता दें यूपीएससी सीएसई फाइनल रिजल्ट 22 अप्रैल 2024 को जारी किया गया था। तीसरा स्थान डोंगरे अर्चित पराग को कर्नाटक और चौथा स्थान प्राप्त करने वाले मार्गी चिराग गुजरात कैडर दिया गया है। वही पांचवा स्थान प्राप्त करने वाले आकाश गर्ग को AGMUT कैडर मिला है। मध्यप्रदेश में हुई इन आईएएस अफसरों को नियुक्ति  6वां रैंक प्राप्त करने वाली आयुषी बंसल को भी मध्य प्रदेश कैडर दिया गया है। रैंक 18 लाने वाली सौम्या मिश्रा को एमपी  कैडर में भेजा गया है। इसके अलावा श्लोक वैकर और माधव अग्रवाल को भी इसी राज्य का कैडर दिया गया है। यूपी को मिले 20 नए आईएएस अफसर उत्तर प्रदेश को कल 20 नए आईएएस अफसर मिले हैं। सूची में को रैंक 6 प्राप्त करने वाली कोमल पूनिया भी शामिल हैं। इसके अलावा आदित्य विक्रम अग्रवाल, मयंक त्रिपाठी, हेमंत, संस्कृति त्रिवेदी, रिया सायनी, शिवांश सुभाष जगड़े, शिवम सिंह सलोनी, गौतम सिद्धार्थ सिंह, श्वेता और रेखा सियाक का नाम भी शामिल है। पश्चिम बंगाल में 8 आईएएस अलॉट किए गए पश्चिम बंगाल में 8 नए आईएएस अफसर अलॉट किए गए हैं। मुदिता बंसल जिनका होम स्टेट पंजाब है, उन्हें पश्चिम बंगाल  कैडर दिया गया है। वहीं रावुला जयसिंह रेड्डी को बंगाल कैडर दिया गया है, जिनका होम स्टेट तेलंगाना है। रितिका रथ, चौगुले अदिति संजय, अभिषेक चौधरी, मेघना  चक्रवर्ती और सक्षम भाटिया को भी यही कैडर मिला है।

सागर से दमोह 76 किलोमीटर फोरलेन मार्ग निर्माण के लिए 2059 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में केबिनेट की बैठक में बुंदेलखंड के विकास पर विशेष फोकस बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए सागर जिले के मसवासी ग्रट की स्थापना के प्रस्ताव के तहत उद्योगों को अनेक सुविधाओं को स्वीकृति सागर से दमोह 76 किलोमीटर फोरलेन मार्ग निर्माण के लिए 2059 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दमोह, छतरपुर और बुधनी मेडिकल कॉलेज के लिए 990 नियमित और 615 आउटसोर्स पदों की स्वीकृति वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व नौरादेही को चीतों के रहवास के लिए विकसित करने की सैद्धांतिक स्वीकृति दमोह के तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ से अधिक की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना को स्वीकृति प्रदेश के 11 जिलों में 12 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन और 348 पदों की स्वीकृति प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 397.54 करोड़ रुपये की स्वीकृति पिछड़ा वर्ग के 600 युवाओं को 2वर्ष में रोजगार के लिए जापान और जर्मनी भेजने का निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की खजुराहो में हुई बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को खजुराहो के महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास और रोजगार संपन्न बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, सड़कों के निर्माण सहित नौरादेही अभ्यारण्य में चीता के रहवास के लिए विकास कार्यों को स्वीकृति जैसे अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंत्रि-परिषद के सदस्यों ने बुंदेलखंड के विकास पर केंद्रित विकास के महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने पर करतल ध्वनि से स्वागत किया गया। बैठक में छतरपुर और दमोह के मेडिकल कालेजों में पदों की स्वीकृति सहित शासकीय चिकित्सालयों के उन्नयन और नवीन पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी गई। मंत्रि-परिषद ने बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से सागर के औद्योगिक क्षेत्र 'मसवासी ग्रंट' के लिए एक विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी। स्वीकृति अनुसार भूमि प्रब्याजी और वार्षिक भू-भाटक की दर केवल एक रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित की है। इसके अतिरिक्त, विकास शुल्क चुकाने के लिए 20 समान वार्षिक किश्तों की सुविधा दी गई है और संधारण शुल्क 8 रुपये प्रति वर्गमीटर वार्षिक तय किया गया है। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए स्टाम्प और पंजीयन शुल्क में 100% प्रतिपूर्ति की स्वीकृति दी गई है। साथ ही, इकाइयों को वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की तारीख से पांच वर्षों तक विद्युत शुल्क में छूट दी गई है। वित्तीय सहायता पैकेज के तहत वृहद श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों पर उद्योग संवर्धन नीति 2025 और निवेश प्रोत्साहन योजना 2025 के नियम लागू होंगे, जबकि एमएसएमई (MSME) इकाइयों के लिए एमएसएमई विकास नीति-2025 और एमएसएमई प्रोत्साहन योजना-2025 के प्रावधान प्रभावी होंगे। सीमेंट निर्माण इकाइयों को इस विशेष वित्तीय सहायता पैकेज का लाभ नहीं मिलेगा। यह विशेष पैकेज आगामी पांच वर्षों के लिए प्रभावशील रहेगा। सागर से दमोह 76 किलोमीटर फोरलेन मार्ग निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा सागर-दमोह मार्ग, लंबाई 76.680 किमी 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के अंतर्गत उन्नयन एवं निर्माण के लिए परियोजना वित्तीय लागत  2,059 करोड़ 85 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई। स्वीकृति अनुसार लागत का 40% हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के अंतर्गत मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा राज्य राजमार्ग निधि से जीएसटी सहित वहन किया जाएगा। शेष 60% राशि का प्रावधान संचालन अवधि में 15 वर्षों तक 6 माही एन्युटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जाएगा। इसके अतिरिक्त भू अर्जन एवं अन्य कार्यों के लिए 323 करोड़ 41 लाख रूपये का भुगतान भी राज्य बजट से किया जाएगा। परियोजना अंतर्गत 13 अंडरपास, 3 वृहद पुल, 9 मध्यम पुल, एक आरओबी, 13 वृहद जंक्शन और 42 मध्यम जंक्शन का निर्माण किया जायेगा।  दमोह, छतरपुर और बुधनी मेडिकल कॉलेज के लिए नियमित और आउटसोर्स पदों की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दमोह, छतरपुर और बुधनी के संचालन के लिए 990 नियमित और 615 आउटसोर्स पदों की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार प्रत्येक चिकित्सा महाविद्यालय में 330 नियमित पद सृजन और 205 व्यक्तियों को आउटसोर्स पर नियोजित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व नौरादेही को चीतों के रहवास के लिए विकसित करने की सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा सागर में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व नौरादेही को चीतों के तीसरे रहवास के रूप में विकसित करने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। उल्लखेनीय है कि सितंबर 2022 में कुनो राष्ट्रीय उद्यान श्योपुर में पहला और अप्रैल 2025 में गांधी सागर अभयारण्य मंदसौर में दूसरा चीता रहवास प्रारंभ किया गया है। मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल 31 चीते हैं। कुनो राष्ट्रीय उद्यान श्योपुर में 28 और गांधी सागर अभयारण्य मंदसौर 02 चीतों का रहवास है। इसके अतिरिक्त जनवरी 2026 में बोत्सवाना से 8 चीते कुनो में पहुंचना संभावित है। दमोह के तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ से अधिक की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना को स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा दमोह जिले की तेंदूखेड़ा तहसील की झापननाला मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 165 करोड़ 6 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना के तहत तेंदूखेड़ा तहसील के 17 ग्रामों का कुल 3600 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा। 11 जिलों में 12 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन और 348 पदों की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने 11 जिलों की 12 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। निर्णय अनुसार नीमच जिले के भादवामाता उप स्वास्थ्य केंद्र को 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन किया जाएगा। शाजापुर के मक्सी स्थित 6 बिस्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में किया जाएगा। इसी प्रकार, उज्जैन के जीवाजीगंज और खंडवा के ओंकारेश्वर स्थित 20 बिस्तरीय सिविल अस्पतालों का विस्तार कर उन्हें 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त पन्ना के अजयगढ़, खरगौन के महेश्वर, सिंगरौली के देवसर और रीवा के हनुमना स्थित 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 50 बिस्तरीय सिविल अस्पतालों में अपग्रेड किया जाएगा। बड़े उन्नयन कार्यों में बैतूल के भीमपुर, सिंगरौली के चितरंगी और अनूपपुर के कोतमा स्थित 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 100 बिस्तरीय सिविल अस्पतालों में बदलना शामिल है। साथ ही, सागर जिले के बीना स्थित 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल का उन्नयन कर उसे 100 बिस्तरीय किया जाएगा। इन संस्थाओं के संचालन के लिए मंत्रि-परिषद ने 345 … Read more