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एमपी में शीतलहर का तांडव, पारा गिरा 4 डिग्री तक, 10 से 12 दिसंबर तक इन जिलों में भारी ठंड

भोपाल  मध्य प्रदेश में इन दिनों बर्फीली हवाओं का भारी असर दिखाई देने लगा है। हालात ये हैं कि, यहां कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे लुढ़क चुका है, जबकि ज्यादातर इलाकों में तापमान 10 डिग्री से भी नीचे है। बीती रात शहडोल का कल्याणपुर इलाका सबसे सर्द गुजरा। जबकि, पड़ रही ठंड ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। उज्जैन में अबतक के सीजन की सबसे सर्द रात गुजरी। वहीं, मौसम विभाग ने प्रदेश में आगामी 3 दिन के लिए शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। एमपी में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। प्रदेश के कई जिलों में अगले तीन दिनों तक शीतलहर की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, विदिशा, सीहोर, सिवनी, शहडोल, शाजापुर और राजगढ़ में कोल्ड वेव चलने की संभावना है। जबकि नरसिंहपुर में कोल्ड डे का भी अलर्ट है। कल्याणपुर में कड़ाके की ठंड प्रदेश में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे पहुंच गया है। शहडोल के कल्याणपुर में सबसे कम 4.2 डिग्री सेल्सियस टेम्प्रेचर रिकॉर्ड किया गया है। जबकि, ज्यादातर शहरों में पारा 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़क चुका है। यहां 10 डिर्गी से नीचे तापमान वहीं, सूबे के नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी में 5.2 डिग्री, उमरिया में 5.6 डिग्री दर्ज हुआ। जबकि, रात का पारा 5.7 डिग्री दर्ज हुआ, राजगढ़ में 6 डिग्री और भोपाल में न्यूनतम तापमान 7.2 डिग्री रहा। वहीं, उज्जैन में सीजन की सबसे सर्द रात रही। जबलपुर में पारा 8.3 डिग्री और ग्वालियर में 8.9 डिग्री दर्ज किया गया।

एसआईआर की बड़ी उपलब्धि: सभी आठ विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता गणना पत्रकों का शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन कार्य पूरा

एसआईआर :-जिले ने तीन दिन पहले हासिल की बड़ी उपलब्धि सभी आठ विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के गणना पत्रकों के शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण. जबलपुर   मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम के अंतर्गत जबलपुर जिले के नाम बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। विधानसभा क्षेत्र जबलपुर केंट के मतदाताओं के गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के साथ ही आज सोमवार को जिले की सभी आठ विधानसभा क्षेत्र में तीन दिन शेष रहते शत-प्रतिशत गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन पूर्ण कर लिया गया है। जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों पाटन, बरगी, सिहोरा, पनागर, जबलपुर उत्‍तर, जबलपुर पश्चिम एवं जबलपुर पूर्व में यह काम पहले ही पूरा कर लिया गया था।  जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्‍टर राघवेन्‍द्र सिंह ने जिले की आठों विधानसभा क्षेत्र में शत-प्रतिशत मतदाताओं के गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा होने पर सभी बीएलओ एवं बीएलओ के सहायकों, बीएलओ सुपरवाईजर, सेक्‍टर अधिकारियों तथा निर्वाचक रजिस्ट्रिकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रिकरण अधिकारी को बधाई दी है। श्री सिंह ने एसआईआर के अंतर्गत मतदाताओं के घर-घर सत्‍यापन, गणना पत्रकों का वितरण और गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के कार्य के प्रति इन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लगन और निष्‍ठा की सराहना भी की है।  जिला निवार्चन कार्यालय से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम जिले के 19 लाख 25 हजार 472 मतदाताओं में से 2 लाख 62 हजार 722 मतदाताओं के गणना प्रपत्र प्राप्‍त नहीं हुए हैं। इन मतदाताओं में 50 हजार 992 मृत, 77 हजार 450 अनुपस्थित, 1 लाख 18 हजार 898 स्‍थाई तौर पर स्‍थानांतरित मतदाता भी शामिल है। गणना प्रपत्र प्राप्‍त नहीं होने पर ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाये जा सकते हैं।   जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार जिन मतदाताओं के गणना प्रपत्र नहीं भरे हैं, वे अभी भी 9, 10 और 11 दिसम्‍बर को अपने बीएलओ से संपर्क कर अपने गणना प्रपत्र भरकर सौंप सकते हैं, अन्‍यथा उनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सकेगा। ऐसे मतदाताओं जिनके गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुये हैं उनके नाम 16 दिसम्‍बर को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में मतदान केन्‍द्रों पर रखे जायेंगे तथा इन पर दावे-आपत्तियां प्रस्‍तुत की प्रक्रिया की जा सकेंगी।  जिला निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक ऐसे मतदाता जिनके गणना प्रपत्र डिजिटाइज्ड किये जा चुके हैं उनमें 1 लाख 15 हजार 490 ऐसे मतदाता भी हैं जिनका 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हो सकी हैं, उन्‍हें नोटिस जारी किये जायेंगे। ऐसे मतदाताओं को 16 दिसम्‍बर को प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद दावे-आपत्ति प्राप्‍त करने की प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दस्‍तावेजों में से आवश्‍यक दस्‍तावेज प्रस्‍तुत करने होंगे।  जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार एएसडीआर (अनुपस्थित, स्‍थानांतरित, मृत और रिपिटेड) श्रेणी के ऐसे मतदाता जिनके गणना प्रपत्र प्राप्‍त नहीं हुए हैं, उनमें विधानसभा क्षेत्र पाटन के 21 हजार 608, बरगी में 24 हजार 308, जबलपुर पूर्व में 51 हजार 015, जबलपुर उत्‍तर में 27 हजार 176, जबलपुर केंट में 41 हजार 801, जबलपुर पश्चिम 47 हजार 139, पनागर 31 हजार 123 एवं सिहोरा विधानसभा क्षेत्र के 18 हजार 552 मतदाता शामिल हैं। एएसडीआर श्रेणी के ये मतदाता जिले के कुल मतदाताओं का 13.64 प्रतिशत हैं।

भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 21 दिसंबर को, CM मोहन यादव ने खजुराहो में किया ऐलान, PM के आने पर संशय

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। झीलों की नगरी भोपाल के लिए दिसंबर का महीना ऐतिहासिक होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने खजुराहो कन्वेंशन सेंटर से यह बड़ा ऐलान किया है कि 21 दिसंबर को भोपाल मेट्रो ट्रेन की शुरुआत होगी। सीएमआरएस (CMRS) से हरी झंडी मिलने के बाद अब शहरवासियों का बरसों पुराना इंतजार खत्म होने जा रहा है। क्या कहा सीएम ने मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने पिछले दो साल के कार्यों की समीक्षा की है और अगले तीन साल के लक्ष्यों को भी तय कर लिया है। उन्होंने कहा कि 21 दिसंबर को मेट्रो के साथ विकास की कई अन्य सौगातें भी राजधानी को मिलेंगी। इसके साथ ही 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर राज्य में दो लाख करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश की आधारशिला भी रखी जाएगी।सीएम ने कहा- तकनीकी लिहाज से भोपाल मेट्रो अब पूरी तरह तैयार है। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) नीलाभ्र सेनगुप्ता की टीम ने नवंबर में तीन दिनों तक ट्रैक, डिपो और ट्रेन के नट-बोल्ट तक का गहन निरीक्षण किया था। अधिकारियों के मुताबिक, ऑरेंज लाइन का 6.22 किलोमीटर लंबा प्रायोरिटी कॉरिडोर कमर्शियल रन के लिए तैयार है। इसमें सुभाष नगर से एम्स (AIIMS) तक कुल 8 स्टेशन बनाए गए हैं। क्या है पूरा मामला? मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को पहली मेट्रो रेल की सौगात मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने सोमवार को खजुराहो के कन्वेंशन सेंटर में प्रेस से चर्चा करते हुए यह बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि भोपाल मेट्रो की शुरुआत 21 दिसंबर को होगी। ​मुख्यमंत्री ने कहा, "21 तारीख को भोपाल में मेट्रो ट्रेन समेत विकास की कुछ और सौगातें जनता को दिलाई जाएंगी।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसके अलावा, 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी के समापन के अवसर पर दो लाख करोड़ रुपये के उद्योगों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया जाएगा। ​बता दें कि मेट्रो रेल सेफ्टी कमिश्नर (CMRS) भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर के लिए पहले ही 'ग्रीन सिग्नल' दे चुके हैं। कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता के नेतृत्व में CMRS टीम ने 12 से 15 नवंबर के बीच तीन दिनों तक डिपो, ट्रैक और ट्रेन का गहन निरीक्षण किया था, जिसमें मेट्रो के नट-बोल्ट तक की जांच की गई थी। हालांकि, भोपाल मेट्रो के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मध्य प्रदेश आना अभी तय नहीं हुआ है। गौरतलब है कि बीते कई महीनों से भोपालवासियों को इस पल का इंतजार था। अब जब इसकी तारीख की घोषणा हो गई है, तो शहरवासी खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। खुद सीएम मोहन यादव की घोषणा के बाद जनता को यकीन है कि तय समय पर मेट्रो शुरू हो जाएगी। कौन-कौन से स्टेशन में होगा स्टॉपेज अधिकारियों ने बताया कि सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स शामिल हैं। हालांकि स्टेशनों पर फिनिशिंग का कुछ काम शेष है, लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि इससे मेट्रो के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भोपाल अब उस क्लब में शामिल होने जा रहा है जहां आधुनिक यातायात प्रणाली न केवल समय बचाएगी, बल्कि शहर के प्रदूषण और जाम की समस्या से भी निजात दिलाएगी। कितना होगा किराया मेट्रो का किराया पहले से ही तय कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो संचालन के पहले 7 दिन तक लोग मेट्रो में फ्री सफर कर सकेंगे। उसके बाद लोग अगले तीन महीने तक कम छूट पर मेट्रो का सपर कर सकते हैं। अफसर बोले- काम बचा लेकिन कमर्शियल रन पर असर नहीं भोपाल मेट्रो से जुड़े अफसरों का कहना है कि ऑरेंज लाइन के कमर्शियल रन के लिए वे सभी काम पूरे हो चुके हैं, जो जरूरी हैं। स्टेशनों का कुछ काम जरूर बचा है, लेकिन उससे कमर्शियल रन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किलोमीटर लंबा है। इसमें कुल 8 स्टेशन- सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स शामिल हैं। किराया तय, 7 दिन फ्री सफर मेट्रो में सफर के लिए किराया भी लगभग तय किया जा चुका है। एमपी नगर स्टेशन पर तो किराया सूची भी चस्पा कर दी गई है। हालांकि, मेट्रो कॉर्पोरेशन ने आधिकारिक रूप से किराए का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इंदौर जैसा मॉडल ही अपनाए जाने की बात कही जा रही है। अफसरों की मानें तो 7 दिन तक लोग मेट्रो में फ्री सफर कर सकेंगे। वहीं, 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। छूट खत्म होने के बाद सिर्फ 20 रुपए में मेट्रो का सफर किया जा सकेगा। अधिकतम किराया 80 रुपए होगा। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। अधिकतम 80 रुपए किराया तब होगा, जब ऑरेंज लाइन के रूट का काम पूरा हो जाएगा। 30 से 80 किमी प्रति घंटा रहेगी मेट्रो की स्पीड भोपाल के सुभाष नगर से एम्स तक मेट्रो कोच को ट्रैक पर दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। बीच-बीच में 100 से 120 किमी की रफ्तार से भी मेट्रो दौड़ाई जा रही है। ट्रेन की तर्ज पर मेट्रो में भी मैनुअल टिकट लेनी पड़ेगी मेट्रो का टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होकर मैनुअल ही रहेगा। जैसे आप ट्रेन में टिकट लेकर सफर करते हैं, वैसे ही मेट्रो में भी कर सकेंगे। इंदौर में अभी यही सिस्टम है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ से काम छिनने और नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्थिति बनेगी। बता दें कि असिस गार्ड का मामला पिछले 4 महीने से सुर्खियों में था। आखिरकार अगस्त में असिस गार्ड का टेंडर कैंसिल कर दिया गया। नई कंपनी के लिए टेंडर भी कॉल किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है। मैनुअल टिकट ही एकमात्र ऑप्शन अफसरों ने बताया कि असिस … Read more

फूड पॉइजनिंग से 4 कर्मचारियों की मौत, 5 को ग्वालियर अस्पताल रेफर, छतरपुर में मची अफरातफरी

छतरपुर   मध्य प्रदेश के खजुराहो में एक बड़ा हादसा हुआ है। एक रिसॉर्ट में खाना खाने के बाद नौ कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद इलाज के लिए कर्मचारियों को ग्वालियर और झांसी भेजा गया है। वहीं, पांच कर्मचारियों को इलाज के लिए ग्वालियर भेजा गया है। बताया जा रहा है कि फूड पॉइजनिंग की वजह से यह हादसा हुआ है। हादसा तब हुआ है, जब पूरी सरकार खजुराहो में ही मौजूद है। गौतम रिसॉर्ट का है मामला छतरपुर के खजुराहो में स्थित गौतम रिसॉर्ट में सोमवार शाम को खाना खाने के बाद 9 कर्मचारियों की हालत गंभीर हो गई। सभी को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। दुखद बात यह है कि इलाज के दौरान 4 कर्मचारियों की जान चली गई। बाकी 5 कर्मचारियों को बेहतर इलाज के लिए छतरपुर से ग्वालियर के अस्पताल में रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। आलू-गोभी की सब्जी खाने के बाद बीमार हुए जानकारी के अनुसार, गौतम रिसॉर्ट में कर्मचारियों ने सोमवार शाम करीब 5 बजे रोज की तरह भोजन किया था, जिसमें आलू-गोभी की सब्जी शामिल थी। भोजन के कुछ ही मिनट बाद सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टी, चक्कर और घबराहट जैसे लक्षण महसूस हुए। इन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। खाने के बाद उल्टी और चक्कर आने लगे यह घटना सोमवार शाम करीब 5 बजे हुई। रिसॉर्ट के कर्मचारी रोज की तरह ही खाना खा रहे थे। उनके भोजन में आलू-गोभी की सब्जी भी शामिल थी। खाना खाने के कुछ ही देर बाद कर्मचारियों को उल्टी, चक्कर और घबराहट जैसे लक्षण महसूस होने लगे। उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। जिन कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ी, उनमें हार्दिक सोनी (20), प्रागीलाल कुशवाहा (54), गोलू अग्निहोत्री (25), बिहारी लाल पटेल (60), रामस्वरूप कुशवाहा (47), रवि कौदर (19), दयाराम कुशवाहा (65), रोशनी रजक (30) और गिरजा रजक (35) शामिल हैं। ये सभी खजुराहो और आसपास के गांवों के रहने वाले थे। सभी कर्मचारियों को गंभीर हालत में छतरपुर जिला अस्पताल लाया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टर रोशन द्विवेदी ने बताया कि सभी मरीज फूड पॉइजनिंग के लक्षणों के साथ आए थे। उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया। लेकिन देर रात उनकी हालत और बिगड़ने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, जिला अस्पताल प्रशासन ने सभी 9 कर्मचारियों को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर करने का फैसला किया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें झांसी भेजा। खाने के सैंपल जब्त किए घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमा हरकत में आ गया। पुलिस की टीम रिसॉर्ट पहुंची। उन्होंने रिसॉर्ट से खाने के नमूने जब्त किए। साथ ही, रिसॉर्ट के स्टाफ से पूछताछ भी शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने भी इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। उन्होंने भोजन, पानी और किचन की साफ-सफाई से जुड़े सभी सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी का असली कारण पता चल पाएगा। प्रशासन ने रिसॉर्ट प्रबंधन को किचन की स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता को लेकर सख्त हिदायत दी है। पूरी सरकार है खजुराहो में मौजूद वहीं, यह हादसा ऐसे समय में हुआ है, जब पूरी मोहन सरकार खजुराहो में मौजूद है। सोमवार की सीएम मोहन यादव ने विभागों की समीक्षा बैठक की थी। मंगलवार को वहां कैबिनेट की बैठक है। इस बीच ऐसा हादसा हुआ है। गौरतलब है कि कलेक्टर ने इस मामले में तुरंत मृतक के परिवारों के लिए 20-20 हजार रुपए के मुआवजा की घोषणा की है।

मार्च 2026 तक सभी पैक्स को ई-पैक्स में परिवर्तित करेंगे- मंत्री विश्वास कैलाश सारंग

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025: नाबार्ड, म.प्र. क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा सहकारिता सम्मेलन का आयोजन मार्च 2026 तक सभी पैक्स को ई-पैक्स में परिवर्तित करेंगे- मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग के मुख्य आतिथ्य में सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में नाबार्ड, मध्यप्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा सहकारिता पर एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। मंत्री श्री सारंग ने सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को सम्मानित किया। सम्मेलन में सहकारिता आयुक्त श्री मनोज पुष्प, नाबार्ड मध्यप्रदेश की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती सी. सरस्वती, एमडी अपेक्स बैंक श्री मनोज गुप्ता, उप सचिव सहकारिता श्री मनोज सिन्हा सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिला सहकारी बैंक, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक एवं पैक्स समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है सहकारिता मंत्री श्री सारंग ने कहा कि सहकारिता भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार स्तंभ है और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिये यह सबसे प्रभावी माध्यम साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल संस्थागत व्यवस्था नहीं, बल्कि यह सामूहिक प्रगति और साझी जिम्मेदारी की भावना पर आधारित एक व्यापक आर्थिक मॉडल है। राज्य सरकार सहकारिता तंत्र को अधिक मजबूत, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के लिये निरंतर कार्य कर रही है। पैक्स अब बनेंगी बहुउद्देशीय संस्थाएँ मंत्री श्री सारंग ने कहा कि बदलते कृषि परिवेश में पैक्स का दायरा तेजी से बढ़ा है। अब पैक्स केवल ऋण वितरण, खाद-बीज उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि वे बहुउद्देशीय सेवाएँ उपलब्ध कराने वाली ग्रामीण संस्थाएँ बन रही हैं। हमारा लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक राज्य की सभी पैक्स को आधुनिक ‘ई-पैक्स’ के रूप में परिवर्तित कर डिजिटल संचालन से जोड़ें। सीपीपीपी मॉडल से आएंगे दूरगामी परिणाम मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने सहकारिता ढाँचे में सुधार के लिये सीपीपीपी (Cooperative–Private–Public Partnership) मॉडल की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि “यह मॉडल सहकारिता संस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाते हुए उन्हें आधुनिक तकनीक, प्रबंधन कौशल और पूँजी निवेश से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा। आने वाले वर्षों में इसके दूरगामी और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। कोऑपरेटिव और कॉर्पोरेट:विकास के दो मजबूत पहिये मंत्री श्री सारंग ने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति के लिये कॉर्पोरेट और कोऑपरेटिव दोनों ही आवश्यक हैं। दोनों मॉडल एक-दूसरे के पूरक हैं और राष्ट्र के विकास रथ के दो पहिये हैं। सरकार ऐसी नीतियों पर काम कर रही है जिससे सहकारिता संस्थाएँ आत्मनिर्भर, उत्पादक और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें। उन्होंने बताया कि कमजोर जिला सहकारी बैंकों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिये राज्य सरकार ने 2027 तक का विशेष लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत पूँजी वृद्धि, प्रबंधन सुधार, कार्यप्रणाली का आधुनिकीकरण और ग्राहक सेवाओं में पारदर्शिता जैसे सभी आयामों पर कार्य किया जा रहा है। किसानों को समृद्ध बनाने के लिये पशुपालन व दुग्ध उत्पादन पर जोर मंत्री श्री सारंग ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिये कृषि के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन गतिविधियों को जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। सहकारिता के माध्यम से हम किसानों को मूल्यवर्धन, प्रोसेसिंग, मार्केट लिंक और बेहतर आय के अवसर उपलब्ध कराएँगे। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेगा।  

राजस्व अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का कार्य शीघ्रता से करें पूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भूमि संबधी लंबित प्रकरणों के लिए पुनः चलाया जाये राजस्व अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजस्व अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का कार्य शीघ्रता से करें पूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजस्व न्यायालय का कार्य प्रशंसनीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजस्व विभाग की समीक्षा कर दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों और आम नागरिकों के भूमि-संबंधी लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए राजस्व महाभियान पुनः चलाया जाए। इससे नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अभिलेखों में सुधार जैसे प्रकरणों का तेजी से और पारदर्शी तरीके से निराकरण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को महाराजा कन्वेंशन सेंटर खजुराहो में राजस्व विभाग की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि 6 माह से अधिक लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण करें। इसके लिए प्राथमिकता से पीठासीन अधिकारियों से संपर्क करें। राजस्व अभिलेखों का डिजिटाइजेशन का कार्य शीघ्रता से पूर्ण किया जाए। नागरिकों को उनकी भूमि का त्वरित नक्शा और विवरणों की उपलब्धता आसान बनाए। इसके लिए वेबसाइट पर सुविधा उपलब्ध करायें। यह सुविधा अगले दो वर्ष में पूर्ण करें। वेबसाइट से प्राप्त दस्तावेजों को प्रामाणिक बनाए जिससे दस्तावेजों की डुप्लीकेसी रुकेगी। नवीन आवश्यक आबादी भूमि का चिन्हांकन करें। प्रदेश के नक्शाविहीन ग्रामों का नक्शा बनाएं। भू-अर्जन प्रकरणों के एंड-टू-एंड निराकरण को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया बनाए। राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा ने बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों और नवाचारों की जानकारी दी। साथ ही आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना बताई। मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव राजस्व  विवेक पोरवाल सहित सम्बंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। राजस्व विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियां     राजस्व विभाग ने प्रकरणों के त्वरित समाधान के लिए वर्ष 2024–25 में तीन चरणों में राजस्व महाअभियान संचालित किया गया, जिसको एक करोड़ से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया।     मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसने 24 जिलों में राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित और नियमित न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित की।     RCMS के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 41.68 लाख प्रकरणों में से 94% से अधिक प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण किया गया।     मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसने जियो-फेंस तकनीक का उपयोग कर त्रुटिहीन फसल गिरदावरी सुनिश्चित की और 3.80 करोड़ सर्वे नंबरों में फसल विवरण को फोटो सहित दर्ज किया।     स्वामित्व योजना अंतर्गत प्रदेश में 94% कार्य संपन्न कर आबादी ग्रामों में 39.63 लाख अधिकार अभिलेख वितरित किए गए।     प्रकरणों की सतत निगरानी के लिए 07 अप्रैल 2025 को 7-सीटर कॉल सेंटर स्थापित किया गया, जिससे 6 माह से लंबित प्रकरणों की संख्या 8963 से घटकर केवल 150 रह गई।     भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए RCMS पोर्टल पर LAMS मॉड्यूल विकसित किया गया।     राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए 1974 करोड़ की लागत से 438 कार्यालय भवनों की स्वीकृति दी गई, जिनमें से 324 का निर्माण पूर्ण हो चुका है।     प्राकृतिक आपदाओं से निपटने एवं प्रभावितों को राहत उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2024–25 में 871 करोड़ 37 लाख का व्यय किया गया तथा 2025–26 में अब तक 2 हजार 68 करोड़ 99 लाख रुपये की राशि व्यय की गई।     मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के तहत 5281 पटवारी तथा 136 नायब तहसीलदारों की नियुक्ति की गई और 34,069 (100%) अधिकारियों-कर्मचारियों ने IGOT कर्मयोगी पोर्टल पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।     राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024–25 में 1048 करोड़ रुपये से अधिक का संग्रह किया गया। वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य से अधिक का संग्रहण किया जाएगा।         अभिनव प्रयोग एवं नवाचार     साइबर तहसील लागू होने से नामांतरण प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस, फेसलेस और क्षेत्राधिकार-मुक्त हो गई और औसत निपटान अवधि 50 दिनों से घटकर 22 दिन हो गई है। साइबर तहसील को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार, नेशनल डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अवार्ड 2025, DILRMP के घटकों को प्रदेश में लागू करने के लिए भूमि सम्मान, LAMS को Skoch Gold जैसे राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए।     भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का बड़ा अभियान प्रारम्भ किया गया है, जिसके अंतर्गत 15 करोड़ पुराने अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जा रहा है। यह कार्य सितंबर 2025 से 12 जिलों में शुरू हुआ है। अब तक 1.25 करोड़ पेज स्कैन हो चुके हैं। इससे कृषक स्वयं अपनी भूमि की सर्च रिपोर्ट ज्ञात कर सकेंगे।     प्रदेश में भू-अभिलेख पोर्टल का नया वर्जन 2.0 दिनांक 1 अगस्त 2025 से शुरू हो गया है। नागरिक अपने मोबाइल पर अपनी भूमि का पूरा रिकॉर्ड देख सकते हैं। मोबाइल ऐप द्वारा भू-अभिलेखों की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त की जा सकती है।         आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना     डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम DPDP Act के अनुरूप विभागीय पोर्टल का आधुनिकीकरण किया जाएगा।     नक्शाविहीन ग्रामों के नक्शे बनाने तथा भू-अर्जन प्रक्रियाओं को एंड-टू-एंड ऑनलाइन किया जाएगा।     नवीन आवश्यक आबादी भूमियों का चिन्हांकन किया जाएगा।     विश्वास आधारित डायवर्ज़न प्रक्रिया लागू करने की योजना है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के बीड़ी श्रमिकों को मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ने का किया आह्वान

मध्यप्रदेश के बीड़ी श्रमिकों को मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ा जाय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने की औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के बीड़ी श्रमिकों को रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए वन विभाग से समन्वय कर समुचित समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के तेंदूपत्ता से पश्चिम बंगाल में बीड़ी उद्योग फल-फूल रहा है और स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। राज्य के तेंदूपत्ता संग्राहकों और बीड़ी बनाकर आजीविका चलाने वाले हजारों परिवारों को रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तेंदूपत्ता मध्यप्रदेश की संपत्ति है। इससे मिलने वाला रोजगार यहीं के लोगों को मिलना चाहिए। बीड़ी श्रमिकों को फिर से रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को खजुराहो में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीड़ी बनाने वाले परिवारों को लगातार और बेहतर काम उपलब्ध कराया जाएगा। महिलाओं के रोजगार और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं में सुधार किया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि तेंदूपत्ता आधारित बीड़ी उद्योग से जुड़ा हर परिवार सम्मानजनक और स्थायी आय प्राप्त करे। राज्य की वन उपज का लाभ अब सीधे हमारे ही श्रमिकों को मिले। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह पहल उन सभी परिवारों के जीवन में फिर से उजाला लाने की दिशा में एक ठोस कदम होगा, जो वर्षों से तेंदूपत्ता और बीड़ी निर्माण से जुड़े रहकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान देते आए हैं। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की उपलब्धियाँ     निवेश आकर्षण में सफलता, जीआईएस और आरआईसी के माध्यम से 12.70 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव।     पिछले दो वर्षों में 327 एमएसएमई और बृहद इकाइयों में उत्पादन प्रारम्भ, 40,516 रोजगार सृजित।     उद्योगों को 4,977 करोड़ रुपये की सहायता और सुविधाएँ वितरित।     BRAP 2024 में चार श्रेणियों में सम्मान, ईज ऑफ डूईंग बिजनेस में शीर्ष प्रदर्शन।     108 अपराध मुक्त अनुपालनों से न्यायालय का भार कम, 2700 से अधिक अनुपालन सरल या कम किए गए। निवेश उपलब्धियाँ     2.48 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को भूमि आवंटन, 2.85 लाख रोजगार संभावित।     229 इकाइयों में निर्माण प्रारम्भ, 81,206 रोजगार संभावित।     साधिकार समिति द्वारा 105 प्रकरणों का त्वरित समाधान।     18,685 करोड़ रुपये के 43 प्रोजेक्ट्स को कस्टमाइज्ड पैकेज स्वीकृत, 21,835 रोजगार संभावित। औद्योगिक अधोसंरचना विकास     26 नए औद्योगिक पार्क और क्लस्टर (4000 हेक्टेयर) स्वीकृत।     पीएम मित्रा पार्क के लिए 873 हेक्टेयर स्वीकृत।     Mohasa Babai RE Park: प्रथम चरण 884 एकड़ और द्वितीय चरण 750 एकड़।     33 औद्योगिक क्षेत्रों में उन्नयन के लिए 536 करोड़ रुपये स्वीकृत।     4 वर्किंग वुमन हॉस्टल, 5772 बेड क्षमता स्वीकृत। निवेश प्रोत्साहन एवं राज्य छवि निर्माण     जीआईएस 2025 का सफल आयोजन, प्रदेश का सबसे बड़ा निवेश शिखर सम्मेलन।     72 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेश कार्यक्रम आयोजित।     8 क्षेत्रीय और 15 राष्ट्रीय संवाद-सत्र आयोजित नीति एवं आईटी आधारित सुधार     उद्योग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात की 3 नई नीतियाँ लागू।     इंवेस्ट पोर्टल के माध्यम से इंवेस्टर लाइफ साइकल सर्पोट।     Faceless No Query Incentive प्रणाली लागू।     GIS आधारित ऑनलाइन भूमि आवंटन और Know Your Approvals सुविधा। संस्थागत उपलब्धियाँ     5 नए क्षेत्रीय कार्यालय और कोयंबटूर (तमिलनाडु) में व्यापार विस्तार कार्यालय।     हर जिला कलेक्टर कार्यालय में निवेश केंद्र स्थापित।     महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट में कार्य की अनुमति। औद्योगिक एवं निर्यात संवर्धन की दिशा में व्यापक कार्ययोजना     प्रमुख सचिव  राघवेंद्र सिंह ने बताया कि राज्य को वैश्विक निवेश गंतव्य बनाने के लक्ष्य के साथ औद्योगिक एवं निर्यात संवर्धन की दिशा में व्यापक कार्ययोजना लागू की जा रही है।     वर्ष 2028-29 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 25.3 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने और निर्यात को एक लाख करोड़ रुपये तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।     व्यापार सुगमता के लिए आधुनिक, कम लागत एवं सुदृढ़ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।     प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी भाग में इनलैंड कंटेनर डिपो विकसित किए जा रहे हैं, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।     लॉजिस्टिक्स अधोसंरचना विकास में निजी डेवलपर्स को प्रोत्साहन दिया जा रहा है और राज्य लॉजिस्टिक्स प्लान तैयार किया जा रहा है।     अमेरिका, जापान और यूके जैसे लक्षित बाजारों से एफडीआई आकर्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश को औद्योगिक और निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त हो।  

स्व. वाजपेयी की शताब्दी पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में करेंगे दो लाख करोड़ के विकास कार्यों का उद्घाटन

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की जन्म शताब्दी पर प्रदेश में दो लाख करोड़ के कार्यों का करेंगे भूमि-पूजन और लोकार्पण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्ष 2026 कृषि आधारित क्षेत्रों के उत्थान के लिए समर्पित भोपाल को मिलेगी मेट्रो की सौगात भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बुन्देलखंड में केन-बेतवा नदी जोड़ो अभियान के माध्यम से बुन्देलखंड में सिंचाई, उद्योग, पेयजल के लिए जो जल की कमी थी उसे पूरा किया जाएगा। नदी जोड़ो अभियान के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 90 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। नदी जोड़ो अभियान के माध्यम से सिंचाई, उद्योग के लिए पर्याप्त जलराशि का प्रबंध किया जाएगा। नदी जोड़ो अभियान की प्रगति में मध्यप्रदेश सबसे अग्रणी राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को खजुराहो के कन्वेंशन सेंटर में विभागीय समीक्षा बैठक के बाद प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बुन्देलखंड समेत समूचे मध्यप्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। छतरपुर में ओबेरॉय होटल का शुभारंभ इसी की एक कड़ी है। उन्होंने कहा कि बुन्देलखंड में पर्यटन के साथ-साथ खनन एवं मेडिकल के क्षेत्र में विकास के लिये अनेक कार्य किये जा रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार के माध्यम से बुन्देलखंड का विकास एवं उत्थान के लिये कार्ययोजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बुन्देलखंड कैसे आगे बढ़े इस पर लगातार सरकार द्वारा कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बुन्देलखंड में उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि बुन्देलखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों के विकास एवं उत्थान के लिए सरकार कटिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुन्देलखंड शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सागर में रानी अवंतिबाई महाविद्यालय का निर्माण, छत्रसाल विश्वविद्यालय के लिए धनराशि का आवंटन, पीएम एक्सीलेंस कॉलेजों की स्थापना की गई है। इसी के साथ बुन्देलखंड अंचल में मेडिकल कॉलेज की भी स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से दक्ष प्रत्येक विद्यार्थी को रोजगार मिले, इस दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार और जनता के बीच दूरी कम करने के लिए अब अलग-अलग क्षेत्रों के विकास के लिए उन्हीं क्षेत्रों में कैबिनेट मीटिंग आयोजित की जाएगी। खजुराहो में आयोजित कैबिनेट बैठक इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभागीय समीक्षा में विगत दो वर्षों के कार्यों की समीक्षा और आने वाले तीन साल के लक्ष्य तय करने का निर्णय किया गया है। उन्होंने कहा कि इसी माह की 21 तारीख को भोपाल नगर को मेट्रो की सौगात दी जाएगी। भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के अवसर पर सरकार द्वारा लगभग दो लाख करोड़ के अलग-अलग कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 कृषि के संबंधित विभिन्न क्षेत्रों के विकास एवं उनके उत्थान के लिए समर्पित होगा। कृषि से आय के साधन बढ़ानेकृषि आधारित उद्योगों की स्थापना, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना समेत सभी कृषिगत औद्योगिक गतिविधियों से कृषि क्षेत्र के विकास के लिए सतत कार्य वर्षभर किये जाएंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय विकास कार्यों में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दी दिशा

नगरीय विकास के प्रत्येक कार्य को उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नगरीय विकास एवं आवास विभाग की समीक्षा दो वर्ष की उपलब्धियों और नवाचारों पर हुआ प्रेजेंटेशन आगामी कार्य योजना संबंधी दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा की नगरीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वे अधोसंरचना विकास के प्रत्येक कार्य को उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करें। केवल काम की संख्या नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और स्थायित्व से अपनी पहचान बनायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय विकास और ग्रामीण विकास विभाग को आपसी समन्वय से “अर्बन–रूरल क्लस्टर” की अवधारणा पर काम करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव  खजुराहो स्थित कन्वेंशन सेंटर में नगरीय विकास एवं आवास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। दो वर्षों की प्रमुख उपलब्धियाँ     प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में 9.46 लाख आवास स्वीकृत, 8.77 लाख पूर्ण, दो वर्षों में 1.64 लाख पक्के घर तैयार, 2.65 लाख हितग्राहियों को ₹1,749.17 करोड़ DBT, 96,903 गृहप्रवेश और PMAY 2.0 में 50,143 नए आवास स्वीकृत हुए।     अमृत मिशन 1.0 में 32 शहरों में ₹4,921 करोड़ से 204 जल-सीवर परियोजनाएँ पूर्ण, 5.06 लाख सीवरेज और 6.87 लाख नल कनेक्शन दिए गए। अमृत 2.0 में 413 शहरों में 321 कार्य पूर्ण, 732 जारी और सभी की रियल-टाइम मॉनिटरिंग ‘अमृत रेखा’ ऐप से हो रही है।     स्वच्छ भारत मिशन में 110 में से 54 नगरीय निकायों में 21.50 लाख टन लीगेसी वेस्ट का निपटान, 14 निकायों को राष्ट्रीय सम्मान, इंदौर प्रथम और जबलपुर द्वितीय रहे, 202 स्टार रेटिंग, 24 Water Plus, 338 ODF++ और 64,000 सफाई मित्रों को योजनाओं का लाभ प्राप्त हुआ।     SASCI 2025–26 में मध्यप्रदेश ने ₹1306 करोड़ का देश का सबसे बड़ा दावा प्रस्तुत किया।     राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन में राज्य को PRAISE और SPARK Award में प्रथम स्थान, दीनदयाल रसोई में 2.66 करोड़ भोजन वितरण, 117 आश्रय स्थलों में 2.44 लाख लोगों को आसरा, 4,111 हितग्राहियों को ₹54.8 करोड़ ऋण, 10,128 SHG निर्माण, 2.90 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को ₹1122.11 करोड़ ऋण और 5.55 लाख वेंडर्स को ₹32.35 करोड़ कैशबैक मिला।     NCAP में इंदौर व जबलपुर क्रमशः प्रथम और द्वितीय, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में 71.84 लाख पौधारोपण, CITIIS 2.0 में उज्जैन और जबलपुर चयनित तथा ₹31.35 करोड़ प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ।     ई-गवर्नेंस में ‘गरुड़ पोर्टल’ से 413 निकायों के GIS बेस मैप, 305 में संपत्ति सर्वे पूरा होकर 147% राजस्व वृद्धि, ALPASS में 12,896 प्रकरण निपटान, ABPAS में 24,209 प्रकरण स्वीकृत, ऑनलाइन सेवाओं से ₹482 करोड़ राजस्व और CM हेल्पलाइन में 6.24 लाख में से 5.85 लाख शिकायतें (93.66%) निराकृत हुईं।     मिशन कर्मयोगी में 63,195 कर्मचारी पंजीकृत, 1.24 लाख ऑनलाइन कोर्स पूरे, 371 जनप्रतिनिधि व 4,236 अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त, AeBAS में 1.50 लाख कर्मचारी जोड़े गए तथा ‘गीता भवन योजना’ हेतु ₹100 करोड़ प्रावधान हुआ।     गृह निर्माण मंडल ने 1954 भवन, 1296 भूखंड विकसित किए, 170.80 एकड़ भूमि आवंटित हुई, 6 रीडेंसिफिकेशन परियोजनाएँ पूर्ण हुईं, DigiLocker पर दस्तावेज उपलब्ध कराए गए और MPOnline से ₹531.10 करोड़ की संपत्तियाँ बेची गईं।     विभागीय नवाचार     आत्मनिर्भर निकाय कार्यक्रम में उच्च-दाब कनेक्शनों में डिमांड कम कर ₹6.4 करोड़ वार्षिक बचत, पावर फैक्टर सुधार से पेनल्टी बचाव, 275 अनावश्यक कनेक्शन हटाकर ₹60 लाख प्रतिमाह बचत और आगे ₹29 करोड़ अतिरिक्त बचत का लक्ष्य; फ्लीट मैनेजमेंट पोर्टल से वाहनों की ईंधन मॉनिटरिंग शुरू।     अधोसंरचना सुधारों में 18 मीटर मास्टर प्लान सड़कों पर यूटिलिटी डक्ट अनिवार्य, 30% से अधिक रोड रेस्टोरेशन पर 5% अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी, ‘अर्बन क्वालिटी कंट्रोल सेल’ और मोबाइल टेस्टिंग लैब स्थापित, फ्लेक्सिबल ज़ोनिंग और डिजिटल लैंड यूज परिवर्तन लागू, 50 वर्ष आयु वाली सड़कों के निर्माण का प्रारंभ और BRSR को सभी कार्यों में लागू करने की तैयारी।     तीन वर्षों की कार्ययोजना     PMAY 2.0 में 6 लाख नए आवास स्वीकृति का लक्ष्य, ARH–AHP मॉडल को बढ़ावा और बड़े नगर निगमों में भूमि उपयोग हेतु विशेष रणनीति लागू होगी।     अमृत 2.0 में 2025–27 के दौरान ₹1440 करोड़ की जल परियोजनाएँ, 9.99 लाख नल कनेक्शन, 7.90 लाख सीवर कनेक्शन, 420 जल संरचना जीर्णोद्धार, 389 पार्क विकास और SCADA से जल आपूर्ति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी।     पीएम स्वनिधि में 6,71,332 नए ऋण प्रकरण, 289 नए दीनदयाल रसोई केंद्र और 128 आश्रय स्थलों के संचालन-संधारण का प्रावधान होगा।     स्वच्छ भारत मिशन 2.0 में 8 बायो-CNG संयंत्र, 36 लाख मीट्रिक टन लीगेसी वेस्ट निपटान, 44 सेनेटरी लैंडफिल, 339 MRF/कम्पोस्ट यूनिट, 3 C&D प्लांट और 353 छोटे शहरों में 386 STP बनाए जाएंगे।     मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना योजना के चरण-4 में ₹1586 करोड़ के कार्य पूरे होंगे, चरण-5 में ₹5000 करोड़ से मास्टर प्लान सड़कों का विकास, मार्च 2026 तक 472 ई-बसें संचालन में आएँगी, बस डिपो-चार्जिंग सुविधा विकसित होगी, नमामि गंगे के नए STP और शहरों में फ्लाईओवर-पार्किंग विस्तार होंगे।     संस्थागत सुधारों में एकीकृत नगरपालिका अधिनियम एक वर्ष में अधिसूचित होगा, सभी संवर्गों का पुनर्गठन अप्रैल 2026 तक, धारा 86 में नगरीय राजस्व सेवा गठित होगी, आत्मनिर्भर निकाय प्रोत्साहन हेतु ₹100 करोड़ और MPUDC में EV, IT, एसेट मैनेजमेंट व ग्रीन विभाग स्थापित होंगे।     MPUDC बिरसिंहपुर में ₹1750 करोड़ लागत वाला 250 MW फ्लोटिंग सोलर प्लांट PPP मॉडल से स्थापित करेगा।     इंदौर मेट्रो का 6 किमी कॉरिडोर मई 2025 से और भोपाल मेट्रो का 7 किमी कॉरिडोर दिसंबर 2025 से चलेगा; पूरे रूट क्रमशः 2028 तक पूर्ण होंगे और LAP/TOD/VCF से दोनों शहरों में बड़ी राजस्व संभावनाएँ बनेंगी।     T&CP विभाग 38 शहरों के GIS मास्टर प्लान तैयार करेगा, महानगर क्षेत्र कानून लागू करेगा, TDR पोर्टल विस्तार, TOD नीति लागू होगी और सिंहस्थ 2028 के लिए एकीकृत मास्टर प्लान आधारित विकास होगा।

प्रशिक्षण के साथ प्लेसमेंट भी सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

इंडस्ट्री के मांग की अनुसार आधुनिक ट्रेड्स में युवाओं को दिया जाए प्रशिक्षण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रशिक्षण के साथ प्लेसमेंट भी सुनिश्चित करें प्रदेश का हर युवा कुशल बने, ग्रामीण युवाओं को बनाये आत्मनिर्भर मुख्यमंत्री ने खजुराहो में की तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को उद्योग की आवश्यकता से सीधे जोड़कर युवाओं को रोजगार के अधिकतम अवसर उपलब्ध करायें। उन्होंने निर्देश दिए कि युवाओं को उन्हीं ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया जाए, जिनकी इंडस्ट्री में मांग है और प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाला मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में पारदर्शी तरीके से पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसी संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाए जो युवाओं को प्रशिक्षण के साथ ही प्लेसमेंट भी सुनिश्चित कराए। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खजुराहो में तकनीकी शिक्षा ,कौशल विकास और रोजगार विभाग की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों की मांग के अनुरूप समीपस्थ आईटीआई में आवश्यक ट्रेड्स प्रारंभ हों जिससे युवा अपने ही क्षेत्र में कुशल बनकर रोजगार प्राप्त कर सकें। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के ट्रेड्स जैसे कृषि यंत्र मरम्मत, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी तथा मत्स्य पालन को भी आईटीआई में प्राथमिकता से प्रारंभ कर ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया जाए। पीएम सूर्य घर योजना के तहत अधिक से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए। साथ ही सोलर सिस्टम के मैनेजमेंट के लिए भी प्रशिक्षण दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश का हर युवा कुशल बने, रोजगार पाए और मध्यप्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़े। सरकार इसके लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। उपलब्धियों की जानकारी तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार प्रमुख  मनीष सिंह ने दो वर्षों की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईटीआई में अब तक का सर्वाधिक प्रवेश दर्ज हुआ है। शासकीय आईटीआई में 94.55% (49,402) और प्राइवेट आईटीआई में 74.65% (45,559) युवाओं ने प्रवेश लिया है। प्रदेश के 10 प्रशिक्षणार्थी राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रधानमंत्री द्वारा सम्मानित हुए। विश्व कौशल प्रतियोगिता 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर 1 गोल्ड, 2 सिल्वर, 4 ब्रॉन्ज और 11 मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर (फ्रांस) पर 1 मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त हुआ। तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला। साथ ही 113 प्रशिक्षणार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। राष्ट्रीय ग्रेडिंग में प्रदेश 5वें स्थान पर रहा और 47 आईटीआई को 9+ स्कोर मिला। कौशल आधारित प्रशिक्षणों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। फ्यूचर स्किल कोर्स में 87.23% प्रवेश (2233 प्रशिक्षणार्थी), 8वीं आधारित ट्रेड्स में 87% प्रवेश और दिव्यांगजन प्रवेश 490 रहा। "संकल्प" के अंतर्गत 2340 प्रशिक्षु प्रशिक्षित हुए, 5G टेक्नोलॉजी में 400 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। IIT जोधपुर द्वारा 612 विद्यार्थियों को साइबर सिक्योरिटी प्रशिक्षण, "यू.एन वीमेन" के सहयोग से 2127 बालिकाओं को एसटीईएम एवं सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण और 220 बालिकाओं को प्लेसमेंट मिला। UNFPA द्वारा “जीवन तरंग” में प्रति वर्ष 18,000 युवाओं को जीवन कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। CSR सहयोग के अंतर्गत उद्योगों द्वारा आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है। मारुति सुजुकी द्वारा भोपाल व जबलपुर में 5 करोड़ रूपये की लैब, 9 आईटीआई में एआई डेटा लैब, एनटीपीसी द्वारा आईटीआई बड़वाह, सीमेन्स द्वारा उज्जैन में 60 लाख रूपये की मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी लैब और जेकर फाउंडेशन व – ट्रस्ट द्वारा विभिन्न आईटीआई में लैब स्थापित की गई हैं। मुख्यमंत्री सीखो–कमाओ योजना में 27,257 अभ्यर्थी संलग्न, 17,783 प्रशिक्षण पूर्ण और 5314 महिलाएँ लाभान्वित हुईं। NAPS में 55,311 अभ्यर्थी संलग्न, 29,866 प्रशिक्षण पूर्ण हुआ। पीएम विश्वकर्मा में 4,577 प्रशिक्षित हुए। पीएमकेवीवाय 4.0 के अंतर्गत 40 आईटीआई में जनवरी 2026 से प्रशिक्षण प्रारंभ करने की तैयारी है। युवा संगम के माध्यम से प्रत्येक जिले में रोजगार और स्वरोजगार अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। PM SETU के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 10 हब + 40 स्पोक आईटीआई के लिए 240 करोड़ रूपये स्वीकृत हुए। मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत 3282 कर्मचारियों द्वारा 42,030 कोर्स पूर्ण हुए। ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल में 2 हजार से अधिक प्रशिक्षित और 29 युवाओं को अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियाँ मिली हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि डिप्लोमा पाठ्यक्रम को 12वीं के समकक्ष मान्यता मिलने से प्रवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 21.38% प्रवेश वृद्धि दर्ज की गई। आरजीपीवी भोपाल में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय परिसर की स्थापना जारी है। मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना में सत्र 2024–25 में 78,218 से अधिक विद्यार्थियों को 750 करोड़ रूपये वितरित किए गए। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 में 5500 युवाओं को प्रशिक्षण और 70% प्लेसमेंट सफलता रही। एमएसएमई की आरएएमपी स्कीम में 9 इनक्यूबेशन सेंटर चयनित हुए और “SRIJAN” में 34 प्रोजेक्ट स्टार्टअप के रूप में विकसित हुए। आगामी कार्ययोजना शिक्षण गुणवत्ता सुधार के अंतर्गत एआईसीटीई मानकों के अनुरूप अधोसंरचना विकास, विशेषज्ञ व्याख्यान, उद्योग–संवाद कार्यक्रम तथा रोजगार क्षमता प्रशिक्षण को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। आने वाले तीन वर्षों में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में रिक्त पदों की प्राथमिकता से पूर्ति, नए टेक आधारित कार्यक्रम, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और 40% कार्यक्रमों को NBA मान्यता दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है।