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बिना इजाजत लगेगा स्मार्ट मीटर! MP सरकार के जवाब से बढ़ा विवाद

भोपाल प्रदेशभर में स्मार्ट मीटरों को लेकर उठ रहे सवालों और शंकाओं को लेकर सरकार ने विधानसभा में जवाब दिया कि स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ता की सहमति लिया जाना आवश्यक नहीं है। बिजली कंपनियों द्वारा चेक मीटरों को लगाया जा रहा है, अभी तक बिजली वितरण कंपनियों ने 31335 चेक मीटर लगाए हैं। स्मार्ट मीटरों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक कैलाश कुशवाह, राजन मंडलोई, दिलीप परिहार द्वारा लगाए गए प्रश्नों के उत्तर में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह जानकारी दी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि भविष्य में स्मार्ट मीटरों की स्थापना के लिए जारी होने वाली निविदाओं में पांच प्रतिशत चेक मीटर लगाए जाने का प्रविधान रखा जाना है।   स्मार्ट मीटरों के संबंध में भी शिकायत प्राप्त होने पर चेक मीटर लगाकर उपभोक्ता की शिकायत का संतुष्टिपूर्वक निराकरण किया जा रहा है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने से विद्युत उपभोक्ताओं को विभिन्न लाभ यथा विद्युत खपत एवं जिलों में पारदर्शिता, रियल टाइम खपत की निगरानी, शासन की सब्सिडी योजनाओं का लाभ पात्र उपभोक्ताओं को प्राप्त होगा। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक 20 प्रतिशत की छूट निम्न दाब उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर स्थापित कराए जाने पर दिन के समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। उक्त स्मार्ट मीटरों में नेट मीटरिंग की उपलब्धता होने के दृष्टिगत सोलर का विकल्प लेने वाले उपभोक्ताओं को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इसका लाभ प्राप्त हो रहा है। वर्तमान में बिजली कंपनियों को निजी हाथों में बेचने संबंधी कोई भी कार्रवाई प्रचलन में नहीं है। ऊर्जा विभाग अंतर्गत कार्यरत तीनों बिजली वितरण कंपनियों में से पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा ही दो निविदाओं के माध्यम से स्मार्ट मीटर क्रय किए गए है। स्मार्ट मीटरों की स्थापना का कार्य डिजायन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन आपरेट ट्रांसफर माडल पर किया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री ने बताया-पांच नहीं शत प्रतिशत मीटरों की हो रही जांच     ऊर्जा मंत्री ने जानकारी में बताया कि प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में पांच प्रतिशत मीटर नहीं शत प्रतिशत लगाए जा रहे मीटरों की जांच लैबोरेटरी में कराई जा रही है।     शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना व मध्यप्रदेश विद्युत प्रदाय संहिता-2021 के अध्याय-8 "विद्युत मापन तथा बिलिंग" के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आरडीएसएस योजना के अंतर्गत पारदर्शी बिलिंग, मीटर रीडिंग प्रणाली में सुधार और सटीक ऊर्जा लेखाकंन के लिए लगाए जा रहे हैं। 

नेताओं की फिजूलखर्ची पर उमा भारती का हमला: बोले—‘काला धन शादियों में किया जाता है खर्च’

टीकमगढ़ नेता अक्सर दो नंबर का पैसा खपाने के लिए शादियों में फिजूलखर्ची करते हैं। आजकल अधिकांश शादियां मैरिज गार्डन में हो रही हैं और इनमें अत्यधिक खर्च किया जा रहा है। बड़े-बड़े उद्योगपति शादियों में करोड़ों रुपये देकर मंच सजाकर डांसर बुलाते हैं। इतने रुपयों में हजारों गरीब बेटियों के विवाह कराए जा सकते हैं। अगर हम सीमित साधनों में काम चलाना शुरू कर दें तो यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक क्रांति होगी। पहले 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' कहा था, अब 'भ्रष्टाचारी भारत में रहो, लेकिन सुधर जाओ' कहना होगा।' यह बात पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने टीकमगढ़ में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अगले दस वर्षों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पद पर रहना आवश्यक है। गौरतलब है कि मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी मां के नाम यात्रा निकालने के बाद मीडिया से चर्चा की। जहां पर उन्होंने जनप्रतिनिधियों और उद्योगपतियों की शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची को लेकर बयान दिया। उन्होंने नेताओं से बार-बार आग्रह किया कि वे दिखावा न करें, क्योंकि उनकी इज्जत पहले से ही है।   बच्चे हीन भावना से ग्रस्त हो रहे हैं चर्चा के दौरान उमा भारती ने कहा कि उन्होंने उद्योगपतियों की शादियों में जाना बंद कर दिया है और अपने गार्ड को ऐसे निमंत्रण पत्र स्वीकार न करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि देश में यह प्रतिस्पर्धा आ गई है कि किसके पास ज्यादा सुविधाएं हैं। इससे बच्चे हीन भावना से ग्रस्त हो रहे हैं कि वह कमजोर हैं। यह देखकर माता-पिता प्रतिस्पर्धा करते हैं और बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए भ्रष्टाचार करना शुरू कर देते हैं, जबकि सीमित साधनों में भी काम चलाया जा सकता है। पूर्व सीएम ने ऐसे में नेताओं से शादियों में फिजूलखर्ची बंद करने की सलाह दी है।

जहरीला कफ सिरप! मध्यप्रदेश में बच्चों द्वारा पी गई दवा में 42 फीसदी डीईजी मिला

भोपाल मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सीरप के तीन और सैंपल अमानक पाए गए हैं। इनमें डायथिलीन ग्लाइकाल (डीईजी) की मात्रा 42 प्रतिशत पाई गई है। जबकि निर्धारित मानक के अनुसार, किसी भी कफ सीरप में डीईजी की मात्रा 0.1 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। ये तीनों उन बाटल के सैंपल हैं, जो बच्चों द्वारा पीने के बाद बच गए थे। इनके सैंपल की जांच मध्य प्रदेश में विषाक्त कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने राज्य औषधि लैब से कराई है। इससे साफ है कि बच्चों की मौत अधिक डीईजी मिश्रित कोल्ड्रिफ कप सीरप पीने से ही हुई।   दरअसल, अधिक मात्रा में डीईजी का सेवन किडनी फेल कर देता है। बता दें कि इसके पहले तमिलनाडु औषधि प्रशासन की जांच में कोल्ड्रिफ सीरप में डीईजी की मात्रा 48.6 प्रतिशत और मध्य प्रदेश औषधि प्रशासन विभाग की जांच में 46.2 प्रतिशत मिली थी। उल्लेखनीय है कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप बैच नंबर एसआर-13 के अतिरिक्त, खांसी का ही सीरप रिलाइफ बैच नंबर एलएसएल 25160 और रेस्पीफ्रेस टीआर-आर 01जीएल 2523 भी अमानक मिला था। इनमें डीईजी की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक थी।   चार दवाएं भी अमानक मिलीं वहीं, मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया है कि कफ सीरप से बच्चों की मौत के बाद प्रदेश भर में कफ सीरप के जितने सैंपल लिए गए थे, उनमें इनमें 109 मानक के अनुरूप और तीन अमानक मिले हैं। इसके अतिरिक्त बच्चों के उपयोग में आने वाली चार दवाएं अमानक मिली हैं, जिनमें पेट के उपचार के लिए उपयोग होने वाला हेप्साडिन सीरप, चिटेम-एमडी, फेरस एस्कार्बेट टैबलेट, पेट में कीड़े मारने की अलबेंडाजोल टैबलेट शामिल है। उप मुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा में दिए निर्देश

किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच करें सुनिश्चित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लखपति दीदी के समान लखपति बीघा का लक्ष्य रखते हुए एक बीघा से एक लाख रूपए की कमाई करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया जाए। किसानों को बिचौलियों से बचाने और उन्हें बाजार में अपनी उपज का सीधे लाभ दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था हो। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने और अद्यतन तकनीक का इस्तेमाल कर बेहतर उपज लेने के लिए ग्राम स्तर पर सघन गतिविधियां संचालित की जाएं। हर संभाग की नर्सरियों को आदर्श रूप में विकसित किया जाए। नरवाई प्रबंधन के लिए तीन वर्ष की कार्ययोजना विकसित की जाए। साथ ही किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन तकनीक का उपयोग करते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान ये निर्देश दिए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों तथा नवाचारों का प्रस्तुतिकरण किया गया और आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि –     प्रदेश दालो, तिलहन और मक्का उत्पादन में देश में प्रथम तथा खाद्यान्न, अनाज एवं गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है।     उर्वरक वितरण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 38.10 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 21.41 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. वितरित किया गया। वर्ष 2025-26 में 29.77 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 30 नवम्बर तक 19.42 मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. का वितरण हुआ।     प्रधानमंत्री फसल बीमा में वर्ष 2023-24 में 1 करोड़ 77 लाख बीमित कृषकों को 961.68 करोड़ रूपए और वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ 79 लाख बीमित कृषकों को 1275.86 करोड़ रूपए के दावे का भुगतान किया गया।     मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 4,687 करोड़ रूपए, वर्ष 2024-25 में 4,849 करोड़ रूपए और वर्ष 2025-26 में 3,374 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई।     प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना लागू हो चुकी है। इस उपलब्धि के लिए स्कॉच गोल्ड अवार्ड भी प्राप्त हुआ।     मंडी बोर्ड द्वारा एमपी फार्म गेट ऐप से किसान अपने दाम पर, अपने घर, अपने खलिहान और गोदामा से अपनी कृषि उपज बेचने में सक्षम हुआ। इस नवाचार को स्कॉच सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ।     पराली प्रबंधन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 1312, वर्ष 2024-25 में 1757 और वर्ष 2025-26 में 2479 नरवाई कृषि यंत्र वितरित किए गए।     कृषि यंत्रीकरण के अंतर्गत भोपाल और इंदौर में ड्रोन पायलट स्कूल आरंभ हुए।     ई-विकास पोर्टल से उर्वरक वितरण का पायलट प्रोजेक्ट विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में क्रियान्वित किया गया। इसे सम्पूर्ण प्रदेश में लागू करने की योजना है। आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना     प्रदेश के सभी 363 नगरपालिका, नगर पंचायतों में साप्ताहिक जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार लगाए जाएंगे।     पर ड्रॉप मोर क्रॉप – दबाव सिंचाई प्रणाली के तहत वर्ष 2025-26 में 25 हजार, वर्ष 2026-27 में एक लाख और वर्ष 2027-28 में दो लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है।     नरवाई (पराली) प्रबंधन के अंतर्गत पराली जलाने की घटनाओं में वर्ष 2027-28 तक 80 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य रखा है।     आगामी दो वर्षों में सभी मंडियों का हाईटेक बनाया जाएगा।     तिलहन, दलहन फसलों में आत्मनिर्भरता के लिए क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।     कृषि में अनुसंधान कार्ययोजनाओं को प्रोत्साहन देते हुए प्रयोगशाला से खेत की दूरी को कम किया जाएगा। बैठक में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की समीक्षा के दौरान हाईटेक नर्सरी, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कृषकों और उद्यमियों की क्षमता संवर्धन के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के संबंध में जानकारी दी गई।  

किसानों की मजबूरी: बाजार में कीमत धड़ाम, खेत में गाएं खा रही केले की फसल

बड़वानी क्षेत्र में केला उत्पादक किसानों को इन दिनों फसल के दाम नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। केले के कम दाम मिलने से गुस्साए किसान फसल को काटकर मवेशियों को केले खिला रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे अपनी फसल को खेत से उखाड़कर फेंकने को मजबूर हैं। दरअसल, नर्मदा पट्टी क्षेत्र में केला उत्पादन बेहतर होता है। यहां पर उत्पादित केला कई राज्यों को भेजा जाता है। इसमें राजस्थान, गुजरात, हरियाणा व दिल्ली शामिल है। वहीं इस बार कम दाम व खराब हालात के कारण किसानों को अपनी फसल नष्ट करनी पड़ रही है। किसानों के अनुसार यदि केले के दाम नहीं मिलेंगे तो कैसे चलेगा।   दाम तो दूर मजदूरी की लागत भी नहीं निकल पा रही है। ग्राम बगूद के किसान अनिल जाट का कहना है कि केले का भाव थोक में दो रुपये प्रति किलो मिल रहा है जबकि उत्पादन लागत 5 से 6 रुपये प्रति किलो आ रही है। ऐसे में किसानों के सामने फसल को नष्ट करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। किसानों ने उचित दाम दिए जाने की मांग की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रदान किए नियुक्ति-पत्र

ऑनलाइन भर्ती की यह पहल करने वाला पहला राज्य बना मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश की पूर्ण ऑनलाइन पारदर्शी चयन प्रणाली बनी राष्ट्रीय मॉडल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं से कहा कि आपकी जिम्मेदारी यशोदा मैया की तरह है, जिस प्रकार उन्होंने गोपाल कृष्ण का पालन-पोषण कर उन्हें संस्कार प्रदान किए, उसी तरह आप भी आंगनवाड़ी में आने वाले हर बच्चे की देखभाल श्रीकृष्ण की तरह करें। नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र के रूप में बच्चों की मुस्कुराहट, पोषण और माताओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने का वचन पत्र सौंपा जा रहा है। हमें विश्वास है कि हमारी बहनें अपना दायित्व पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता से निभाएंगी और प्रदेश को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में विजय दिलवाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया से नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को विधानसभा के समिति कक्ष में हुए कार्यक्रम में नियुक्ति-पत्र प्रदान कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। कार्यक्रम में महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, विधायक तथा पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई और विभाग की सचिव सुश्री जी.वी. रश्मि विशेष रूप से उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतीक स्वरूप तीन नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विधायक श्रीमती अर्चना चिटनीस ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को अपने कार्य दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करने, विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हर संभव योगदान देने और सुपोषित मध्यप्रदेश के निर्माण में अपने दायित्व का पूर्णत: पालन करने की शपथ दिलाई। नवनियुक्त आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने विधानसभा संचालन की प्रक्रिया भी देखी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज भी गांवों में आंगनवाड़ी वाली दीदी को जो सम्मान मिलता है, उतना किसी और को नहीं मिलता। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका परिवार की सदस्य बन जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि न्यू इंडिया की मजबूत नींव मातृ शक्ति से ही बनती है। हमारी आंगनवाड़ी की बहनें इसे सार्थक कर रही हैं। यह बहनें केवल कार्यकर्ता नहीं अपितु गांव की पहली गुरू और पहली पोषण दूत हैं। इनकी वजह से लाखों बच्चों में कुपोषण कम हो रहा है और गर्भवती माताओं में जागरूकता बढ़ रही है। स्कूलों में ड्रापआऊट रेट में भी कमी आयी है। राज्य सरकार बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। नगरीयनिकायों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा में वृद्धि की गई है। साथ ही बहनों के रोजगार के लिए उद्योग समूहों को भी राशि उपलब्ध कराई जा रही है। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां पहली बार आंगनवाड़ी स्तर पर भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई। प्रदेश में अब तक 1091 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 10 हजार 984 सहायिकाओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए हैं। शेष पद भरने के लिए भी तेजी से प्रक्रिया जारी है। उल्लेखनीय है कि ऑनलाइन पोर्टल पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 2077 पदों के विरुद्ध 81 हजार 704 आवेदन आए और सहायिकाओं के 17 हजार 477 पदों के लिए 31 हजार 7627 आवेदन प्राप्त हुए। कार्यक्रम में प्रतीक स्वरूप 50 नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आभार स्वरूप धन्यवाद पत्र सौंपा गया। प्रमुख बिन्दु     आंगनवाड़ी में आने वाले हर बच्चे की देखभाल श्रीकृष्ण की तरह करें।     नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र के रूप में बच्चों की मुस्कुराहट, पोषण और माताओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने का वचन पत्र सौंपा जा रहा है।     हमारी बहनें अपना दायित्व पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता से निभाएंगी और प्रदेश को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में विजय दिलवाएंगी।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतीक स्वरूप तीन नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए।     विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हर संभव योगदान देने और सुपोषित मध्यप्रदेश के निर्माण में अपने दायित्व का पूर्णत: पालन करने की शपथ दिलाई।     नवनियुक्त आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने विधानसभा संचालन की प्रक्रिया भी देखी।     आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिक परिवार की सदस्य बन जाती हैं।     न्यू इंडिया की मजबूत नींव मातृ शक्ति से ही बनती है।     बहनें केवल कार्यकर्ता नहीं अपितु गांव की पहली गुरू और पहली पोषण दूत हैं।     लाखों बच्चों में कुपोषण कम हो रहा है और गर्भवती माताओं में जागरूकता बढ़ रही है।     स्कूलों में ड्राप-आऊट रेट में भी कमी आयी है।     नगरीयनिकायों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा में वृद्धि की गई है।     बहनों के रोजगार के लिए उद्योग समूहों को।     राशि उपलब्ध कराई जा रही है।     मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां पहली बार आंगनवाड़ी स्तर पर भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई।     प्रदेश में अब तक 1091 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 10 हजार 984 सहायिकाओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए।  

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय एवं पंचायत उपनिर्वाचन कार्यक्रम घोषित

मतदान 29 दिसम्बर 2025 को भोपाल  राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के उप निर्वाचन का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। मतदान 29 दिसम्बर 2025 को होगा। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह ने जानकारी दी है कि उप निर्वाचन के लिए निर्वाचन की सूचना का प्रकाशन और नाम निर्देशन पत्र प्राप्त करने का कार्य 8 दिसम्बर 2025 से शुरू होगा। नाम निर्देशन पत्र 15 दिसम्बर तक लिये जायेंगे, नाम निर्देशन पत्रों की जांच 16 दिसम्बर को होगी। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 18 दिसम्बर है। इसी दिन निर्वाचन प्रतीकों का आबंटन होगा। नगरीय निकायों में मतदान 29 दिसम्बर को सुबह 7.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक होगा। मतगणना और निर्वाचन परिणामों की घोषणा 31 दिसम्बर को सुबह 9.00 बजे से होगी। पंचायतों में मतदान 29 दिसम्बर को सुबह 7.00 बजे से अपरान्ह 3.00 बजे तक होगा। पंच पद के लिये मतगणना मतदान के तुरंत बाद मतदान केन्द्र पर ही होगी। सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य की विकास खण्ड मुख्यालय पर ई.व्ही.एम. से की जाने वाली मतगणना 2 जनवरी को सुबह 8.00 बजे से होगी। इसी दिन सरपंच एवं जनपद पंचायत सदस्य के निर्वाचन परिणामों की घोषणा की जायेगी। जिला पंचायत सदस्यों एवं पंच पद के लिए परिणामों की घोषणा 5 जनवरी 2026 को प्रात: 10.30 बजे से की जायेगी। 1 अध्यक्ष और 8 पार्षदों का होगा उप निर्वाचन जिला सीधी के नगरपरिषद मझौली के अध्यक्ष और विभिन्न नगरीय निकायों में 8 पार्षदों के लिये उप निर्वाचन होगा। नगरपालिक निगम सिंगरौली के वार्ड 34, नगर पालिका परिषद मण्डला के वार्ड 8, नगर पालिका परिषद लहार के वार्ड 5 और नगर परिषद मौ के वार्ड 4, मेहगांव के वार्ड 5, आलमपुर के वार्ड 13, सतवास के वार्ड 9 और पानसेमल के वार्ड 2 में पार्षद पद के लिये उप निर्वाचन होगा। जिला पंचायत के 4, जनपद पंचायत के 14 और सरपंच के 67 पदों के लिये होगा निर्वाचन पंचायत उप निर्वाचन के तहत जिला पंचायत सदस्य के 4, जनपद पंचायत सदस्य के 14, सरपंच के 67 और 3872 पंच पद के लिये निर्वाचन होगा।  

फ्लाई एश का शत-प्रतिशत उपयोग करने में मिली मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को बड़ी सफलता

श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना में हाइडेलबर्ग इंडिया लगाएगी सीमेंट प्लांट भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुरूप उत्सर्जित फ्लाई एश (पावर हाउस से निकलने वाली राख) के 100 प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह खंडवा में विश्व की अग्रणी सीमेंट कंपनी हाइडेलबर्ग के साथ गत दिवस भूमि उपयोग अनुमति अनुबंध (LUPA) हस्ताक्षरित किया। अनुबंध 25 वर्ष की अवधि के लिए भूमि उपयोग अनुमति के लिए किया गया है। अनुबंध के अंतर्गत हाइडेलबर्ग सीमेंट इंडिया लिमिटेड श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना परिसर में एक सीमेंट क्लिंकर ग्राइडिंग यूनिट की स्थापना करेगी। इस यूनिट की लागत 325 करोड़ रूपए है। यह यूनिट श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना से निकलने वाली फ्लाई एश का उपयोग करके सीमेंट बनाने का काम करेगी। इस यूनिट के स्थापित होने पर क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी और मध्यप्रदेश के अधोसंरचना क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान होगा। मध्यप्रदेश पावर जनेरटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक श्री मनजीत सिंह, डायरेक्टरद्वय श्री सुबोध निगम व श्री मिलिन्द भान्दक्कर, मुख्य अभियंता संचारण-संधारण:उत्पादन श्री अभिषेक जैन के मागदर्शन में यह अनुबंध श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना के मुख्य अभियंता जेसी जुनवाल की उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ। अनुबंध पर पावर जनरेटिंग कंपनी की ओर से अतिरिक्त मुख्य अभियंता एमके कोरी और हीडलबर्ग सीमेंट इंडिया लिमिटेड की ओर से सुमित बिसारिया ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर मध्य्रपदेश पावर जनेरटिंग कंपनी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री एससी गुप्ता श्री अनुराग जडिया, श्री विशाल कुमार दहाटे, श्री यूएस तमोली, श्री मोहित शर्मा एवं हाइडेलबर्ग सीमेंट इंडिया लिमिटेड के श्री सुनील कुमार, श्री बलबीर सिंह रावत व श्री पंकज उपरेती उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महर्षि अरबिंदो घोष की पुण्यतिथि पर किया नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान योगी एवं दार्शनिक, महर्षि अरबिंदो घोष की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कवि और राष्ट्रवादी, अरबिंदो जी ने नव्य वेदांत दर्शन को प्रतिपादित किया। उन्होंने क्रांतिकारी रणनीति पर केन्द्रित देश भक्ति पत्रिका ‘वन्दे मातरम’ की शुरुआत की। उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।  

मुख्य सचिव जैन की अध्यक्षता में हुई पी.एम सेतु संचालन समिति की बैठक

हब चयन में सभी संभागीय मुख्यालयों को शामिल करने के निर्देश भोपाल  सभी संभागीय मुख्यालयों को शामिल करते हुए प्रदेश की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं को आधुनिक, उद्योग उन्मुख और परिणाम आधारित संस्थानों के रूप में परिवर्तित करने के लिए 10 हब चिंहित कर प्रस्ताव तैयार किया जाए। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने शुक्रवार को मंत्रालय में पी.एम सेतु के तहत गठित राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में यह निर्देश दिए हैं। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग द्वारा औद्योगिक नीति एवं निवेश और वित्त विभाग से समन्वय कर हब चिंहित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आई.टी.आई (पी.एम सेतु) के तहत बैठक में प्रदेश की समस्त औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं के आधुनिकीकरण प्रस्ताव पर चर्चा हुई। तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनीष सिंह द्वारा केंद्र सरकार के मापदंड अनुसार प्रदेश के लिए हब क्लस्टर और आई.टी.आई स्पोक माडॅल पर प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव पर समिति के सदस्यों के बीच विचार-विमर्श हुआ। मुख्य सचिव श्री जैन ने प्रदेश के आई.टी.आई संस्थानों के विशेषज्ञों को भी समिति में शामिल करने के लिए कहा है। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि हब का प्रस्ताव तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि कोई भी आकांक्षी क्षेत्र नहीं छूटे। बैठक में संस्थान के ढांचे, प्रत्येक आई.टी.आई में निवेश तथा क्लस्टर, योजना-कार्यान्वयन एजेंसी के क्रियाकलापों और राज्य स्तरीय समिति के दायित्यों पर भी चर्चा हुई। बैठक में वित्त, उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, जनजातीय कार्य, अनुसूचित जाति कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय विकास एवं आवास एवं श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही क्षेत्रीय निदेशक, क्षेत्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता निदेशालय, भोपाल शामिल हुए।