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मध्यप्रदेश पुलिस के डायल-112 की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया

मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 की संवेदनशील एवं त्वरित कार्यवाही तीन अलग-अलग घटनाओं के दौरान आत्महत्या का प्रयास कर रहे व्यक्तियों को समय रहते बचाया भोपाल  मध्यप्रदेश में डायल-112 की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली लगातार आम जन की सुरक्षा और जीवन रक्षा में प्रभावी भूमिका निभा रही है। बीते दिनों रायसेन, देवास और छिंदवाड़ा जिलों में तीन अलग-अलग घटनाओं के दौरान आत्महत्या का प्रयास कर रहे व्यक्तियों को समय रहते बचाने में डायल-112 के पुलिसकर्मियों ने तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीयता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। रायसेन जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र में मखनी गाँव में एक 35 वर्षीय व्यक्ति द्वारा स्वयं को कमरे में बंद कर आत्महत्या के उद्देश्‍य से फाँसी लगाने का प्रयास कर रहा था। जिसकी सूचना राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम, डायल-112 भोपाल में प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही डायल-112 वाहन घटना स्थल के लिए रवाना हुआ। आरक्षक संजय श्रीवास्तव एवं पायलेट रोहित कुमार ने मौके पर पहुँचकर स्थानीय लोगों की मदद से गेट तोड़ कर पीड़ित व्यक्ति को तत्काल फंदे से उतारा। डायल 112 जवानों ने पीड़ित व्यक्ति को एफआरव्ही वाहन से लेकर तत्काल जिला शासकीय चिकित्सालय रायसेन में भर्ती करवाया। दूसरी घटना देवास जिले के थाना भौंरासा क्षेत्र की है, जहाँ एक 21 वर्षीय महिला ने पारिवारिक विवाद के चलते आत्महत्या का प्रयास किया। यह सूचना प्राप्त होते ही आरक्षक अरुण रावत और पायलट अनुराग चौधरी मौके पर पहुँचे। उन्होंने समझाइश, संवाद और संवेदनशील व्यवहार के माध्यम से महिला को आत्मघाती कदम उठाने से रोका और उसे सुरक्षित थाना भौंरासा लाया गया। तीसरी घटना छिंदवाड़ा जिले के थाना अमरवाड़ा क्षेत्र में हुई, जहाँ 24 वर्षीय युवक ने अज्ञात कारणों से जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। सूचना प्राप्त होते ही सैनिक गेंदालाल यादव एवं पायलट उमेश पुरी गोस्वामी ने युवक को तुरंत सिविल अस्पताल अमरवाड़ा पहुँचाकर उपचार शुरू कराया। युवक का इलाज जारी है। डायल-112 की इन लगातार त्वरित और प्रभावी कार्रवाइयों ने यह सिद्ध किया है कि मध्यप्रदेश पुलिस की यह सेवा आपात पुलिस सहायता के साधन के साथ मानव जीवन की रक्षा करने वाली ‘जीवन-रेखा’ बनती जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस सभी नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव, अवसाद या संकट की स्थिति में स्वयं को नुकसान पहुँचाने के बजाय सहायता के लिए पुलिस या अपने निकटवर्ती लोगों से संपर्क करें।  

मध्यप्रदेश में 6 दिसंबर को मनाया जाएगा होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा स्थापना दिवस

मध्यप्रदेश में 6 दिसंबर को ‍होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा स्थापना दिवस का आयोजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होंगे मुख्य अतिथि आपदा में वीरता दिखाने वाले जवानों को मिलेगा पहली बार प्रारंभ “मुख्यमंत्री अदम्य साहस पुरस्कार” भोपाल  मध्यप्रदेश में होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा संगठन का स्थापना दिवस 6 दिसंबर 2025 को पूरे उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम का आयोजन जहांगीराबाद, भोपाल स्थित होमगार्ड्स परेड ग्राउंड में प्रातः 10 बजे से किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स, आपदा मित्र तथा बड़ी संख्या में होमगार्ड अधिकारी-सैनिक उपस्थित रहेंगे। ,होमगार्ड संगठन प्रतिवर्ष 6 दिसंबर को स्थापना दिवस मनाता है। यह कार्यक्रम राजधानी सहित प्रदेश के सभी जिलों में भी आयोजित किया जाता है। संगठन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ बाढ़, दुर्घटनाओं, आगजनी, प्राकृतिक आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में प्रशासन का महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है। संकट की घड़ी में फँसे लोगों की सहायता करने में होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस ने सदैव अद्वितीय साहस और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। पहली बार मिलेगा मुख्‍यमंत्री अदम्‍य साहस पुरस्‍कार इस वर्ष राज्य शासन द्वारा पहली बार “मुख्यमंत्री अदम्य साहस पुरस्कार” प्रारंभ किया गया है। यह पुरस्कार उन होमगार्ड सैनिकों, एसडीईआरएफ सदस्यों और सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने आपदा के समय स्वयं की परवाह किए बिना नागरिकों की जान बचाई। मुख्यमंत्री चयनित बहादुर जवानों को राज्यस्तरीय समारोह में सम्मानित करेंगे। विभिन्न जिलों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर इंदौर, सिवनी, गुना, रतलाम, मंडला, नरसिंहपुर, रीवा, छतरपुर, टीकमगढ़ और उज्जैन की कुल 10 टीमों को 51-51 हजार रूपए की राशि वितरित की जाएगी। मुख्‍यमंत्री को परेड की सलामी दी जाएगी कार्यक्रम के दौरान परेड द्वारा मुख्‍यमंत्री को सलामी दी जाएगी। इसके बाद परेड का निरीक्षण, मार्च-पास्ट एवं मुख्य अतिथि का उद्बोधन होगा। एसडीईआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमों द्वारा आपदा के दौरान किए जाने वाले रेस्क्यू कार्यों का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया जाएगा। स्थापना दिवस पर होमगार्ड की सशस्त्र प्लाटून और सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की टुकड़ी भी मुख्यमंत्री को सलामी देगी। मेधावी छात्र-छात्राओं का होगा सम्‍मान स्थापना दिवस समारोह में होमगार्ड सैनिकों के मेधावी छात्र-छात्राओं को भी प्रशस्ति पत्र एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी में 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से लेकर डिप्लोमा, स्नातक, तकनीकी शिक्षा और स्नातकोत्तर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 10 मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन राशि 5 हजार रूपए से 30 हजार रुपए तक प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम में होमगार्ड नागरिक सुरक्षा के अधिकारी सैनिकों और उनके परिजनों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यकम, खेल गतिविधि और महिलाओं संबंधी इवेंट भी आयोजित किए जाएंगे।  

10 साल में एमपी के 32,000 से अधिक स्कूल हुए बंद, शिक्षकों व छात्रों की संख्या घटी; CBI जांच की मांग तेज

भोपाल  प्रदेश में वर्ष 2013-14 की तुलना में 2025-26 तक शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 2013-14 में सरकारी स्कूलों की संख्या 1,14,972 थी, जो घटकर 82,128 रह गई। यानी 32,844 विद्यालय कम हुए। इसी अवधि में शिक्षकों की संख्या 2,91,992 से घटकर 2,33,817 रह गई, जो कुल 61,175 की कमी है। क्या कहा मंत्री ने मंत्री ने बताया कि 2025-26 में 21,193 शासकीय माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें 20 से कम विद्यार्थी हैं। वहीं 29,486 स्कूलों में छात्रों की संख्या 40 से कम है। प्रदेश के 8,533 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जबकि 28,716 स्कूलों में सिर्फ दो शिक्षक हैं। बढ़ा बजट वर्ष 2010-11 में स्कूल शिक्षा विभाग का बजट 6,374.25 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 36,581.64 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं शासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक विद्यार्थियों की संख्या 2010-11 में 133.66 लाख थी, जो घटकर 2025-26 में 79.39 लाख रह गई। यानी कुल 54.27 लाख विद्यार्थियों की कमी हुई है। मंत्री ने बजट बढ़ने के कारण के रूप में सातवें वेतनमान और महंगाई भत्ते को वजह बताया। जबकि विद्यालय और शिक्षक संख्या में कमी के पीछे शालाओं के मर्ज होने और शिक्षकों की सेवानिवृत्ति को कारण बताया गया। हालांकि, विद्यार्थियों की संख्या में भारी कमी को लेकर कोई कारण नहीं बताया गया। वहीं मीडिया से बातचीत में विधायक प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि वर्ष 2014-15 में 82 लाख विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति दी गई थी, जो 2025-26 में घटकर 58 लाख रह गई। वर्ष 2013-14 में 93.7 लाख बच्चों को निश्शुल्क पाठ्यपुस्तकें और गणवेश वितरित किए गए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 56.82 लाख रह गई। मध्यान्ह भोजन के लाभार्थी 75.75 लाख से घटकर 37.23 लाख और निश्शुल्क साइकिल योजना के लाभार्थी 3.29 लाख से घटकर 1.63 लाख रह गए। सीबीआई जांच की मांग ग्रेवाल ने सवाल उठाया कि स्कूल, शिक्षक, छात्र और सभी योजनाओं के लाभार्थी कम हो रहे हैं, फिर भी बजट कई गुना कैसे बढ़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों को बंद कर निजी स्कूलों को संरक्षण दे रही है और शिक्षा व्यवस्था शिक्षा माफिया के हाथों में जाती दिख रही है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

इंदौर में तीन दिवसीय जैविक महोत्सव 12 दिसंबर से, ग्रामीण हाट बाजार में होगा आयोजन

इंदौर  स्वस्थ तन, समृद्ध किसान और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए इंदौर एक बार फिर तैयार है। शहर में 12, 13 और 14 दिसंबर को एक भव्य जैविक महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। यह तीन दिवसीय मेला इंदौर के ढक्कनवाला कुआं स्थित ग्रामीण हाट बाजार में लगेगा। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में होने वाले इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। चार विशेष भागों में बंटा होगा मेला आगंतुकों की सुविधा के लिए मेले को चार आकर्षक भागों में विभाजित किया गया है। पहला भाग: श्री अन्न प्रदर्शनी मेले का पहला हिस्सा मिलेट्स यानी श्री अन्न पर आधारित होगा। यहां कोदो, कुटकी, कंगनी, रागी और सामा जैसे पारंपरिक और पोषक तत्वों से भरपूर अनाज प्रदर्शित किए जाएंगे। लोग न केवल इनके फायदे जान सकेंगे, बल्कि इन्हें खरीद भी सकेंगे। दूसरा भाग: तिलहन और शुद्ध तेल दूसरे हिस्से में सरसों, तिल्ली, मूंगफली, अलसी और सूरजमुखी जैसे तिलहनों की प्रदर्शनी लगेगी। खास बात यह है कि यहां घानी से निकाला गया शुद्ध तेल उपलब्ध रहेगा, जिससे लोगों को स्वदेशी तेलों की शुद्धता और लाभों का पता चलेगा। तीसरा भाग: ज्ञान सत्र किसानों और जिज्ञासु लोगों के लिए विशेष ज्ञान सत्र आयोजित होंगे। इसमें विशेषज्ञ स्वदेशी तेलों के लाभ, तिलहन खेती, मिलेट्स के नए प्रयोग और प्राकृतिक खेती की तकनीकों पर मार्गदर्शन देंगे। चौथा भाग: स्वाद और सेहत मेले का सबसे आकर्षक हिस्सा इसका फूड जोन होगा। यहां जैविक उत्पादों से बने पारंपरिक व्यंजन जैसे दाल-पानिया, मिलेट्स की खिचड़ी, मिलेट्स के पोहे और गिर गाय के दूध से बनी जलेबी का आनंद लिया जा सकेगा। इस आयोजन का मकसद नागरिकों को जैविक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। आयोजन के मुख्य सहयोगी यह मेला आत्मा परियोजना, किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, मां रेणुका फूड्स, आनंदम ऑर्गेनिक और शगुन नैचुरल के संयुक्त प्रयासों से आयोजित किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि इंदौर स्वच्छता के साथ-साथ अब स्वस्थता के क्षेत्र में भी देश में अपनी अलग पहचान बनाए। 

MP में 329 पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज, विधानसभा में खुलासा, जनता के रखवाले भी कटघरे में

भोपाल  मध्यप्रदेश की विधानसभा में आज एक अहम और बड़ी जानकारी निकलकर सामने आई है। जनता के रखवाले खाकी वर्दी वालों पर भी मामले दर्ज हैं। कानून तोडऩे में पुलिस वाले भी पीछे नहीं हैं। विधानसभा में एक सवाल में सरकार ने जो जानकारी दी है वो खाकी पर सवाल खड़े करने वाली है। दरअसल पिछले दो साल में विभिन्न थानों में 329 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कई धाराओं में प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पुलिसवालों के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले भोपाल शहर में है, जहां 48 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं। वहीं फिर ग्वालियर जिला आता है। विधानसभा में विधायक बाला बच्चन के सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने यह जानकारी साझा की है। जानकारी में बताया गया है कि  पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज 61 प्रकरणों में अभी विवेचना चल रही है, जबकि 259 मामलों में चालान पेश किया जा चुका है। ज्यादा प्रकरण भोपाल शहर, ग्वालियर, इंदौर, गुना, सिवनी, बालाघाट में दर्ज किए गए हैं । विभिन्न  मामलो की बात करें तो भोपाल शहर में 48, ग्वालियर में 27, गुना में 17, बालाघाट में 13 तो सिवनी में 18 और इंदौर शहर और देहात में17-17 मामले पुलिस वालों पर दर्ज है। गौर करने वाली बात है कि  इंदौर और भोपाल में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद भी लूट, चोरी जैसे अपराधों में बढ़ोतरी हुई है जो सोचने वाली बात है।

दिसंबर से दौड़ेंगी कई स्पेशल ट्रेनें, रेलवे ने जारी किया रूट और शेड्यूल, भारत गौरव ट्रेन को लेकर भी नई जानकारी

भोपाल   रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है। भारतीय रेलवे ने दिसंबर में छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार और यूपी के रास्ते स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इसके अलावा रांची-अजमेर साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन के परिचालन की अवधि बढ़ा दी गई है। गाड़ी संख्या 09619 अजमेर-रांची स्पेशल पांच दिसंबर से 26 दिसंबर तक संचालित की जाएगी। गाड़ी संख्या 09620 रांची- अजमेर स्पेशल का सात दिसंबर से 28 दिसंबर तक परिचालन किया जाएगा। दिसंबर में चलेगी 14 स्पेशल ट्रेन     गाड़ी संख्या 09633 रेवाड़ी-रींगस स्पेशल 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28, 29, 30 और 31 दिसंबर को रेवाड़ी से सुबह 10:50 बजे रवाना होकर दोपहर 1:35 बजे रींगस पहुंचेगी। वापसी में रींगस-रेवाड़ी स्पेशल 5, 7, 8, 14, 15, 16, 21, 22, 26, 28, 29, 30, 31 दिसंबर और 1 जनवरी 2026 को दोपहर 2:20 बजे रींगस से रवाना होकर शाम 5:20 बजे रेवाड़ी पहुंचेगी। मार्ग में अटेली, नारनौल, डाबला, नीम का थाना, कावंट व श्रीमाधोपुर स्टेशनों पर ठहराव होगा।     गाड़ी संख्या 09634 रेवाड़ी-रींगस स्पेशल 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28 और 31 दिसंबर को रेवाड़ी से 11:45 बजे रवाना होकर 2:45 बजे रींगस पहुंचेगी। वापसी में उन्हीं तिथियों पर दोपहर 3:05 बजे रींगस से रवाना होकर शाम 6:20 बजे रेवाड़ी पहुंचेगी।     गाड़ी संख्या 08243 बिलासपुर-वलसाड शीतकालीन स्पेशल ट्रेन बिलासपुर से 18 दिसम्बर 2025 से 08 जनवरी 2026 तक प्रत्येक गुरुवार को तथा गाड़ी संख्या 08244 वलसाड-बिलासपुर शीतकालीन स्पेशल ट्रेन वलसाड से 19 दिसम्बर 2025 से 09 जनवरी 2026 तक प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी।     गाड़ी संख्या 06007 एम.जी. रामचंद्रन (चेन्नई सेन्ट्रल)-बनारस विशेष 06 दिसम्बर 2025 को एम.जी.रामचंद्रन सेंट्रल (चेन्नई सेन्ट्रल) से 04.15 बजे प्रस्थान कर, दूसरे दिन नागपुर, इटारसी, जबलपुर, कटनी, सतना, प्रयागराज छिवकी और बनारस 23.15 बजे पहुंचेगी। 06008 बनारस से 11 दिसम्बर को 23.00 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन प्रयागराज छिवकी , सतना ,कटनी जं. जबलपुर जं., इटारसी, आमला, नागपुर, तीसरे दिन विजयवाड़ा से होते हुए एम.जी.रामचंद्रन (चेन्नई सेन्ट्रल) 23.30 बजे पहुंचेगी।     गाड़ी संख्या 06181 कोयम्बटूर-जयपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस स्पेशल 18 से 25 दिसंबर तक (02 ट्रिप) कोयम्बटूर से प्रत्येक गुरुवार को 2.30 बजे रवाना होकर शनिवार को 13.25 बजे जयपुर पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 06182, जयपुर-कोयम्बटूर साप्ताहिक एक्सप्रेस स्पेशल 21 से 28 दिसंबर तक (02 ट्रिप) जयपुर से प्रत्येक रविवार को 22.05 बजे रवाना होकर बुधवार को 8.30 बजे कोयम्बटूर पहुंचेगी।     गाड़ी नंबर 07117 सिरपुर कागजनगर से कोल्लम जंक्शन 13 दिसंबर शनिवार और 07119 चेर्लापल्ली से कोल्लम जंक्शन से 17 और 31 दिसंबर को चलेगी।     गाड़ी नंबर 07121 चेर्लापल्ली से कोल्लम जंक्शन से 20 दिसंबर को और 07123 एचएस नांदेड़ से कोल्लम जंक्शन से 24 दिसंबर को चलेगी।     गाड़ी नंबर 07118 कोल्लम जंक्शन से चेर्लापल्ली से 15 दिसंबर और 07120 कोल्लम जंक्शन से चेर्लापल्ली19 दिसंबर और 2 जनवरी को चलेगी.     गाड़ी नंबर 07122 कोल्लम जंक्शन से चेर्लापल्ली 22 दिसंबर और 07124 कोल्लम जंक्शन से एचएस नांदेड़ 26 दिसंबर को चलेगी। दिसंबर से फरवरी तक रद्द रहेगी ये ट्रेन     गाड़ी संख्या 15620 कामाख्या-गया एक्सप्रेस 8, 15 , 22 , 29 दिसंबर, 5, 12 , 19 , 26 जनवरी, 2 , 9 , 16 और 23 फरवरी को रद्द     गाड़ी संख्या 15619 गया-कामाख्या एक्सप्रेस दिसंबर से 24 फरवरी तक शनिवार को रद्द ।     गाड़ी संख्या 68728 रायपुर-बिलासपुर मेमू पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर  रद्द।     गाड़ी संख्या 68734 बिलासपुर-गेवरा रोड मेमू पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर रद्द।     गाड़ी संख्या 68733 गेवरा रोड -बिलासपुर- मेमू पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर रद्द     गाड़ी संख्या 68719 बिलासपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर रद्द     गाड़ी संख्या 58203 कोरबा-रायपुर पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर रद्द     गाड़ी संख्या 58204 रायपुर- कोरबा- पैसेंजर 07 और 08 दिसम्बर 2025 रद्द     गाड़ी संख्या 58205 रायपुर- नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) पैसेंजर 6 व 7 दिसम्बर रद्द ।     गाड़ी संख्या 58206 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-रायपुर पैसेंजर 07 और 08 दिसम्बर रद्द     गाड़ी संख्या 68746 रायपुर-गेवरा रोड मेमू पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर को रद्द     गाड़ी संख्या 68745 गेवरा रोड -रायपुर मेमू पैसेंजर 07 एवं 08 दिसम्बर को रद्द     गाड़ी संख्या 22198 वीरांगना लक्ष्मीबाई (झांसी)-कोलकाता एक्सप्रेस- 05.12.25 से 27.02.206 तक     गाड़ी संख्या 22197 कोलकाता-वीरांगना लक्ष्मीबाई (झांसी) एक्सप्रेस- 07.12.25 से 01.03.26 तक     गाड़ी संख्या 14003 मालदा टाउन-नई दिल्ली एक्सप्रेस- 06.12.25 से 28.02.26 तक जनवरी में भारत गौरव पर्यटन ट्रेन,  कराएगी दक्षिण भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों का दर्शन      इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) ”भारत गौरव पर्यटक ट्रेन 18 जनवरी 2026 को बिहार के बेतिया से चलेगी।     पर्यटन ट्रेन का रूट बेतिया से शुरू होकर रक्सौल, सीतामढ़ी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, पाटलिपुत्र, पटना जंक्शन, बख्तियारपुर, किऊल और जसीडीह सहित बिहार के प्रमुख शहरों से लोग सवार हो सकते हैं और वापसी में उतर भी सकते हैं।     यात्रा में श्रद्धालुओं को तिरुपति बालाजी, पद्मावती मंदिर, रामेश्वरम स्थित रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग, मदुरै का मीनाक्षी अम्मन मंदिर, कन्याकुमारी मंदिर और विवेकानंद रॉक मेमोरियल, तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभस्वामी मंदिर, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ धाम का दर्शन कराया जायेगा।     यात्रियों को कुल 14 रात और 15 दिन का पैकेज मिलेगा।इकानमी क्लास का किराया 27,535/ रुपये है, जिसमें स्लीपर ट्रेन यात्रा, नान-एसी होटल, शाकाहारी भोजन और नान-एसी परिवहन शामिल है।स्टैंडर्ड क्लास का किराया 37,500 रुपये है, जिसमें 3 एसी ट्रेन यात्रा, एसी होटल, शाकाहारी भोजन और नान-एसी वाहन से भ्रमण की सुविधा मिलेगी। कम्फर्ट क्लास का किराया 51,405 रुपये है, जिसमें 2 एसी ट्रेन यात्रा, एसी होटल, शाकाहारी भोजन और एसी वाहन से दर्शन शामिल है।    

कॉलेज में नई भाषा सीखने का अवसर, परिवार और दोस्तों को भी मिलेगा शामिल होने का मौका, माइक्रो-प्रमाणपत्र होगा प्रदान

ग्वालियर  देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एक रोचक पहल शुरू की जा रही है। भारतीय भाषा समिति ने 'एक और भारतीय भाषा सीखें' पहल के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें सभी छात्र अब कम से कम तीन भाषाओं का ज्ञान लेंगे। यानि छात्रों को अपनी मातृभाषा के अलावा कम से कम एक स्थानीय और एक अतिरिक्त भारतीय भाषा सिखाना है। यह आदेश यूजीसी के द्वारा जारी किया गया है, इसमें खास बात यह है कि इसमें सिर्फ छात्र के लिए नहीं बल्कि उनके मित्र और स्वजन भी शामिल हो सकेंगे। इसके लिए शिक्षार्थियों को नामांकन करवाना होगा। पढ़ाई माध्यम ऑनलाइन भी होगा, साथ ही इसमें प्रवेश और निकास दोनों ही सुलभ होंगे। बता दें कि कोर्स पूरा करने वालों को माइक्रो प्रमाणपत्र और डिजिटल बैज भी दिया जाएगा। पाठ्यक्रम में खास     उच्च शिक्षण संस्थान कम से कम तीन भारतीय भाषाओं (एक स्थानीय भाषा और दो अन्य 22 अनुसूचित भाषाओं में से) में योग्यता संवर्धन पाठ्यक्रम (एईसी), क्रेडिट पाठ्यक्रम, या ऑडिट पाठ्यक्रम प्रदान करेंगे।     पाठ्यक्रम को बेसिक, इंटरमीडिएट और एडवांस जैसे तीन स्तरों में विभाजित किया जाएगा, जिसमें आसान प्रवेश और निकास की सुविधा होगी। आप अपनी सुविधानुसार किसी भी स्तर पर प्रवेश कर सकते हैं और बाहर निकल सकते हैं।     इन स्तरों को नए क्रेडिट ढांचे के तहत तीन माइनर के रूप में पेश किया जा सकता है, जिससे आपकी प्रतिलिपि (ट्रांस्क्रिप्ट) पर ये क्रेडिट दर्ज होंगे और क्रेडिट पोर्टेबिलिटी की अनुमति मिलेगी।     इन पाठ्यक्रमों का मुख्य फोकस बोलने, पढ़ने और लिखने में प्रभावी संचार कौशल विकसित करना होगा। दोस्त, परिवार, रिश्तेदार भी होंगे शामिल इस प्रक्रिया में सभी स्नातक, स्नातकोत्तर और डाक्टरेट छात्र इस पहल के मुख्य लाभार्थी होंगे। इसके अलावा छात्रों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे अपने मित्रों, अभिभावकों और रिश्तेदारों को भी इन भाषा पाठ्यक्रमों में शामिल होने के लिए आमंत्रित करें। स्थानीय समुदाय के इच्छुक व्यक्ति भी इन पाठ्यक्रमों में नामांकन करा सकते हैं। बता दें कि यदि पाठ्यक्रम ऑनलाइन पेश किए जाते हैं, तो ये दुनियाभर के शिक्षार्थियों के लिए खुले होंगे। माइक्रो प्रमाण-पत्र मिलेंगे इस प्रक्रिया में पाठ्यक्रम पूरा करने वाले शिक्षार्थियों (छात्र और उनके स्वजन व मित्र) को माइक्रो-प्रमाणपत्र मिलेंगे। जो लोग नई भारतीय भाषाएं सीखते हैं, उन्हें भाषा बंधु, भाषा मित्र, लिपि गौरव, भाषादूत जैसी मानद उपाधियां प्रदान की जा सकती हैं। नई भाषा सीखने वालों को उस राज्य की सांस्कृतिक और शैक्षिक 'सम्मान यात्रा' कराई जाएगी, जहां वह भाषा बोली जाती है। इसके अलावा अतिरिक्त भाषा सीखने वाले छात्रों को अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय दौरों में प्राथमिकता दी जाएगी। बता दें कि हर साल 11 दिसंबर को ऐसे योग्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भारतीय भाषा उत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा छात्रों को 'प्रमाणित भाषा दूत-2025' जैसे डिजिटल बैज जारी किए जाएंगे, जिन्हें वे अपने डिजिटल प्रोफाइल और सोशल मीडिया पर प्रदर्शित कर सकते हैं।

MP के दतिया में कलेक्टर ने लगाया प्रतिबंध, प्रतिमाओं के सामने पोस्टर और विज्ञापन लगाने पर सख्त एक्शन होगा

दतिया  देश के विभिन्न प्रदेशों की तरह ही मध्य प्रदेश में भी चौराहों, तिराहों पर महापुरुषों, संतों आदि की मूर्तियाँ स्थापित हैं, इनकी स्थापना के समय बहुत ही सम्मान के साथ इनका यशगान किया जाता हैं लेकिन कुछ समय बाद ही इन प्रतिमाओं को विज्ञापनों, बैनरों, पोस्टरों आदि से पाट दिया जाता है लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा, दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने उनके जिले में ये प्रतिबंधित कर दिया है। दतिया कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट स्वप्निल वानखड़े ने शहर की सुंदरता और महापुरुषों के सम्मान को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी किया है। अब जिले में संतों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के सामने किसी भी प्रकार के होर्डिंग, फ्लैक्स या बैनर लगाने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह सार्वजनिक मर्यादा और प्रशासनिक आदर्शों के विपरीत” आदेश में कलेक्टर ने लिखा, जिला प्रशासन के संज्ञान में आया था कि शहर और जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थापित प्रतिमाओं के आगे निजी और संस्थागत प्रचार सामग्री लगा दी जाती है। इससे न केवल प्रतिमाएं स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं, बल्कि यह सार्वजनिक मर्यादा और प्रशासनिक आदर्शों के भी विपरीत है। कलेक्टर ने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं प्रेरणा और सम्मान का प्रतीक हैं, इसलिए उनके सामने अनधिकृत विज्ञापन लगाना अनुचित है। आदेश में दतिया शहर के प्रमुख 15 स्थानों का जिक्र   आदेश में दतिया शहर की 15 प्रमुख जगहों और प्रतिमाओं का विशेष उल्लेख किया गया है, जहाँ अक्सर यह समस्या देखी जाती है। जिनमें स्वामी विवेकानंद पटवा तिराहा, महात्मा गांधी गांधी पार्क किला चौक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, किला चौक, महाराज भवानी सिंह किला चौक भवानी पार्क, महाराज गोविन्द सिंह किला चौक गोविन्द पार्क, मैथिलीशरण गुप्त राजगढ़ चौराहा पीताम्बरा मंदिर के पास, महाराज अग्रसेन बम-बम महादेव बस स्टैण्ड़ के पास, रामचेरे प्रजापति समाज बस स्टैण्ड के पास, अवंतिका बाई लोधी, भाण्ड़ेर रोड़ देहात थाना के पास, देवी अहिल्या बाई पुलिस कंट्रोल रूम के पास सिविल लाईन, सरदार वल्लभ भाई पटेल मेडीकल कॉलेज के पास एनएच-44, बाल्मीकि समाज पार्क गहोई वाटिका के सामने, संत गाडगे बाबा गहोई वाटिका के सामने, डॉ. भीम राव अम्बेडकर अम्बेडकर पार्क एनएच-44 के नाम शामिल है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर एक्शन के निर्देश  कलेक्टर ने स्थानीय निकाय, पुलिस प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वर्तमान में प्रतिमाओं के सामने लगी किसी भी प्रकार की प्रचार सामग्री को तत्काल हटाया जाए। साथ ही भविष्य में प्रतिमाओं के समक्ष होर्डिंग/बैनर लगाने की अनुमति न दी जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए। यह आदेश दतिया शहर सहित सम्पूर्ण जिले की राजस्व सीमा में स्थापित सभी प्रतिमाओं पर लागू होगा।

जनवरी से शुरू होगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का काम, किसानों को पैसा मिलते ही तेज़ होगी प्रक्रिया—ग्वालियर से आगरा डेढ़ घंटे में

मुरैना  ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे का काम जनवरी से शुरू करने का गणित बनाया जा रहा है। अभी तक अधिग्रहित जमीन का पैसा 65 फीसदी किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा चुका है। चूंकि निर्माण एजेंसी 90 फीसदी जमीन यानि 475 हेक्टेयर जमीन मिलने के बाद काम शुरू कराएगी, इसलिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण शेष भूमि से जुड़े किसानों से जमीन लेने के प्रयास कर रहा है। एनएचएआई की मानें तो प्रोजेक्ट वर्क शुरू होने के ढाई साल की समयावधि में अनुबंधित निर्माण एजेंसी को आगरा से ग्वालियर के बीच सिक्सलेन-वे बनाकर तैयार करना होगा। नया रूट मिलने के बाद ग्वालियर के लोग आगरा की 88.4 किमी की दूरी डेढ़ घंटे में तय सकेंगे। ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे बनाने पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 4612 करोड़ रुपये खर्च करेगा। एनएचएआई को मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश में 550 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें किसानों की निजी भूमि से लेकर सरकारी व वन भूमि शामिल है। इसमें से अभी तक 65 फीसदी जमीन एनएचएआई को राजस्व विभाग उपलब्ध करा चुका है। जमीन इस प्रोजेक्ट में देने को तैयार नहीं नियम के मुताबिक, निर्माण एजेंसी को इस प्रोजेक्ट के लिए 550 हेक्टेयर भूमि का 90 फीसदी हिस्सा चाहिए इसलिए अभी 25 प्रतिशत निजी भूमि और उपलब्ध होने के बाद जीआर इंफ्रा प्रालि सिक्सलेन-वे बनाने का काम शुरू करा सकेगी। ऐसा माना जा रहा है कि जनवरी में इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य का श्रीगणेश करा दिया जाएगा। अभी एक तिहाई किसान जमीन अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजा देने की मांग को लेकर अपनी बेशकीमती जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए देने में ना-नुकुर कर रहे हैं। कलेक्टर रेट से दोगुना मुआवजा होने से दिक्कत किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद दिए जाने वाले मुआवजे के लिए उत्तर प्रदेश व राजस्थान सरकार का गुणांक दो होने से वहां जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को कलेक्टर रेट से चार गुना मुआवजा देने का प्राविधान है। मप्र में कलेक्टर रेट से दोगुना राशि का मुआवजा मिलता है। उप्र-राजस्थान की मुआवजा दरों की जानकारी मुरैना जिले के किसानों को अच्छे से है, ऐसे में किसान राज्य सरकार से गुणांक बदलकर दो करने व मुआवजा की राशि चार गुना देने की जिद पर अड़े हैं। इसलिए ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे के लिए अभी बड़ी संख्या में किसान अपनी खेती की जमीन देने से मुंह मोड़े हुए हैं। यहां बता दें कि कलेक्टर ने भी ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे प्रभावित क्षेत्र की जमीनों की गाइडलाइन दो साल से नहीं बढ़ाई है, जबकि पूरे जिले की प्रमुख साइटों के रेट दो बार 20-20 प्रतिशत बढ़ा दिए गए। एक नजर प्रोजेक्ट पर     आगरा से ग्वालियर के बीच सिक्सलेन-वे की लंबाई की 88.4 किलोमीटर होगी।     ग्वालियर से आगरा के बीच सफर में लगने वाला समय एक घंटा 30 मिनट होगा।     ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे के बीच बड़े पुल की संख्या 08 और छोटे पुल की संख्या 23 रहेगी।     फ्लाईओवर की संख्या छह, आरओबी की संख्या एक और वायोडक्ट की संख्या पांच रहेगी।  

उम्मीद पोर्टल की सुस्त रफ्तार से वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रुका, समय सीमा बढ़ाने की अपील

 खंडवा देशभर में इस समय वक्त संपत्तियों को लेकर मुस्लिम समाज परेशान दिख रहा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्देशों के बाद केंद्र सरकार के द्वारा सभी वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने के लिए एक केंद्रीय कृत वेब पोर्टल बनाया गया है, जिसका नाम उम्मीद पोर्टल है। हालांकि यही उम्मीद पोर्टल मुस्लिम समाज जन को न उम्मीद करता दिख रहा है और बीते कुछ दिनों से लगातार इस पोर्टल का सर्वर स्लो चलने के चलते वक्फ संपत्तियां इस पर दर्ज नहीं हो पा रही हैं । वहीं] मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां 15 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियां मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दर्ज हैं, जबकि इनमें से लगभग 6 हजार वक्फ संपत्ति ही इस समय तक केंद्रीयकृत वेब पोर्टल उम्मीद पर दर्ज हो पाई हैं और इसकी अंतिम समय सीमा 5 दिसंबर तय की गई हैं, ऐसे में बची हुई संपत्तियां दर्ज हो पाना नामुमकिन है। वहीं इसको लेकर मध्य प्रदेश के खंडवा सहित प्रदेश और देश भर में वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने की समय सीमा बढ़ाये जाने को लेकर आवाज उठाई जा रही है। इसी बीच खंडवा के मुस्लिम समाज ने भी गुरुवार शाम जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंप कर तारीख आगे बढ़ाई जाने की मांग की है। यही नहीं खंडवा शहर काजी और मुस्लिम जनप्रतिनिधि एवं समाज के वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं ने उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को दर्ज किए जाने की समस्या के चलते राष्ट्रपति और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरण रिजजू से गुहार लगाई है कि वे इस समस्या को देखते हुए अंतिम समय सीमा को लगभग 6 माह तक आगे बढ़ाएं, जिससे कि सभी वक्फ संपत्तियां दर्ज की जा सकें। इस दौरान ज्ञापन देने पहुंचे शहर काजी सैयद निसार अली ने बताया कि वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने वाला उम्मीद पोर्टल या तो चल ही नहीं रहा है या फिर इतना स्लो चल रहा है कि एक-एक संपत्ति को दर्ज करने में पूरा-पूरा दिन ही निकल जा रहा है। हालात यह हैं कि अब तक मात्र 30 प्रतिशत वक्फ संपत्तियां ही इस पोर्टल पर दर्ज हो पाई हैं, ऐसे में अल्पसंख्यक और खासकर मुस्लिम समाज के अधिकारों और उनकी वक्फ संपत्तियों की रक्षा करने हेतु अंतिम समय सीमा बढ़ाई जाना चाहिए, और इसको लेकर ही उन्होंने राष्ट्रपति के साथ ही देश के पीएम नरेंद्र मोदी से भी इस समय सीमा को बढ़ाये जाने की गुहार लगाई है।