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मंत्री राजपूत ने लॉन्च किए तीन हाई-टेक ऐप, पारदर्शिता की बड़ी पहल

पारदर्शिता की बड़ी पहल, गोदामों के निरीक्षण और स्टॉक की डिजिटल ट्रैकिंग भोपाल मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को ग्वालियर से अनाज गोदामों की निगरानी को आधुनिक, सटीक और पूर्णतः पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए तीन महत्वपूर्ण मोबाइल ऐप- निरीक्षण ऐप, नमी मापक ऐप और फ्यूमिगेशन ऐप लॉन्च किये। इन ऐप्स के माध्यम से खाद्यान्न भंडारण प्रणाली में तकनीक आधारित मॉनिटरिंग लागू होगी। इससे गड़बड़ियों पर स्वतः अंकुश लगेगा और नागरिकों को बेहतर गुणवत्ता का अनाज उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। मंत्री श्री राजपूत ने कहा है कि पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य है, खाद्यान्न की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गोदाम प्रबंधन में शत-प्रतिशत पारदर्शिता लाई जाए। अब निरीक्षण से नमी मापन और फ्यूमिगेशन तक की डिजिटल ट्रैकिंग होगी। इससे गड़बड़ी पर रोक लगेगी और जनता को बेहतर गुणवत्ता का खाद्यान्न उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित होगा। इन ऐप्स से होगी मॉनिटरिंग निरीक्षण ऐप: मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि इस ऐप से रियल-टाइम निगरानी होगी। यह ऐप गोदामों के भौतिक निरीक्षण को पूरी तरह रियल-टाइम और लोकेशन-बेस्ड बना देगा। निरीक्षण का रोस्टर भोपाल मुख्यालय से तैयार होगा। इसके अलावा एक ब्रांच के गोदाम का निरीक्षण दूसरी ब्रांच के प्रबंधक द्वारा किया जाएगा, जिससे क्रॉस वेरिफिकेशन सुनिश्चित होगा। अधिकारी को गोदाम पर फिजिकली मौजूद रहने पर ही निरीक्षण भरने और फोटो अपलोड करने की अनुमति होगी। यदि निरीक्षक 100 मीटर से अधिक दूरी पर है, तो ऐप निरीक्षण स्वीकार ही नहीं करेगा। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि सभी जानकारी रियल-टाइम पोर्टल पर दर्ज होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। नमी मापक ऐप: खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि डिजिटल मॉइस्चर मीटर से हर माह सटीक रिपोर्टिंग होगी। अब तक नमी मापन की प्रक्रिया मैनुअल थी, लेकिन नए ऐप से यह पूर्णतः डिजिटल और सटीक हो जाएगी। डिजिटल मॉइस्चर मीटर से स्टैक की ऊपरी, मध्य और निचली परत की नमी मापी जाएगी। मापन के बाद ऐप से निकली डिजिटल पर्ची का फोटो अपलोड करना अनिवार्य होगा। हर गोदाम की नमी रिपोर्ट प्रतिमाह रियल-टाइम उपलब्ध होगी। मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि जिला प्रबंधक अब सीधे भारतीय खाद्य निगम को नमी के डेटा भेज सकेंगे। यह सुधार भंडारित अनाज की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। फ्यूमिगेशन ऐप: मंत्रीश्री राजपूत ने बताया कि दवा छिड़काव की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल रिकॉर्ड में रहेगी। फ्यूमिगेशन प्रक्रिया अब कागज रहित होकर डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होगी। दवाओं का छिड़काव ब्रांच मैनेजर द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी में होगा। उन्होंने बताया कि खाद्यान्न को कवर करने और कवर हटाने तक की पूरी फोटो प्रक्रिया ऐप में अपलोड करनी होगी। दवाओं का छिड़काव सफल रहा या नहीं, यह जानकारी भी ऐप में दर्ज करनी होगी। जब तक फ्यूमिगेशन सफल न हो जाए, तब तक स्टॉक इश्यू नहीं हो सकेगा। यह कदम अनाज की सुरक्षा, गुणवत्ता और उपभोक्ता स्वास्थ्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने संबंधी ली बैठक

कृषि क्षेत्र में गरीब वर्ग और किसानों को लाभ पहुंचाने, युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के अवसर उपलब्ध कराने की पर्याप्त संभावना नई पीढ़ी के कृषि आधारित रोजगार जैसे ड्रोन सर्विस, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, हाइड्रोपोनिक्स आदि के अवसरों का सृजन किया जाए भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि का क्षेत्र गरीब वर्ग और किसानों को लाभ पहुंचाने वाला मुख्य क्षेत्र है। कृषि से संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के भी कई अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसी उद्देश्य से प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में नवाचार की पर्याप्त संभावना है। प्रदेश की विविधता से परिपूर्ण भौगोलिक स्थिति को देखते हुए खेती से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को गति दी जाए। धान की खेती को प्राथमिकता देने के साथ गेहूं, चना, दलहन, तिलहन, हॉर्टीकल्चर आदि के क्षेत्र में भी अन्य राज्यों के साथ ही अन्य देशों में हो रहे नवाचारों से अवगत कराने के लिए कृषकों को विविध देशों का भ्रमण कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश शुक्रवार को वर्ष 2026 के कृषि वर्ष मनाने के संबंध में विधानसभा के समिति के कक्ष में आयोजित बैठक में दिए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 को समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की टैगलाइन के साथ कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस रहेगा। किसानों की आय दोगुनी करने से आगे बढ़कर कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक प्रेरित, रोजगार सृजन मॉडल में परिवर्तित करना कृषि वर्ष का मूल उद्देश्य है। अत: आत्मनिर्भर किसान, उन्नत कृषि और कृषकों के हित में बाजार से संबंधों के आधार पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के माध्यम से समृद्ध प्रदेश के निर्माण के विजन से गतिविधियां संचालित की जाएं। कृषि उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य एवं वानिकी सहित सभी संबद्ध क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला आधारित क्लस्टर विकास के लिए गतिविधियां संचालित की जाएं। उच्च उत्पादकता, प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाओं, प्रसंस्करण एवं निर्यात उन्मुख कृषि के माध्यम से किसान की शुद्ध आय में वृद्धि के लिए प्रयास हों और ग्रामीण युवाओं के लिए नई पीढ़ी के कृषि आधारित रोजगार जैसे ड्रोन सर्विस, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, हाइड्रोपोनिक्स आदि के अवसरों का सृजन किया जाए। किसानों की शुद्ध आय में तेजी और स्थायी वृद्धि करने, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध करने, किसानों के लिए उनके उत्पादों की बाजार में पहुंच सुनिश्चित करने और उनकी खाद्य प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में कृषि वर्ष का मासिक कैलेंडर तैयार किया गया, जिसमें किसानों को साथ लेकर राज्य से जिला स्तर तक महोत्सव, मेले आदि की रूपरेखा बनी। गैर सरकारी और उन्नत किसानों को भी इन प्रयासों से जोड़ा जाएगा।  बैठक में बताया गया कि कृषि वर्ष 2026 में प्राकृतिक खेती को हर गांव तक पहुंचाने, आर्गेनिक तथा अन्य कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार मूल्य उपलब्ध कराने, कृषि और कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण, बेहतर मृदा संरक्षण, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण पशुपालन और डेयरी तथा मछली पालन में नवाचार पर विशेष फोकस रहेगा। वर्ष 2026 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में की जाने वाली गतिविधियों और वातावरण निर्माण और किसानों की जागरूकता के लिए चलाए जाने वाले अभियानों की माहवार जानकारी दी गई। कृषि वर्ष में होने वाली गतिविधियों के अंतर्गत राज्य स्तरीय एग्रो विजन कार्यक्रम और प्रत्येक जिला और विकासखंड स्तर पर मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, आधुनिक कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती और उर्वरकों के संतुलित उपयोग के संबंध में गतिविधियां संचालित की जाएंगी। कृषक हितैषी योजनाओं की जानकारी के लिए भी जिला मुख्यालय पर गतिविधियां होंगी। साथ ही मोटे अनाज, गोपालन और दुग्ध उत्पादन, मखाना, मशरूम, मधुमक्खी पालन, धान, आम, सोयाबीन, कृषि उपज निर्यात, कपास, मिर्च, मत्स्य पालन, कृषक उत्पादक संगठनों, फसल अवशेष (पराली) प्रबंधन, उद्यानिकी फसलों आदि पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रमुख बिंदु     समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की टैगलाइन के साथ कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा।     कृषि से संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के भी कई अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।     कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस रहेगा।     प्रदेश की विविधता से परिपूर्ण भौगोलिक स्थिति को देखते हुए खेती से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को गति दी जाए।      नवाचारों से अवगत कराने के लिए कृषकों को विविध देशों का भ्रमण कराया जाए।      किसानों की आय दोगुनी करने से आगे बढ़कर कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक      प्रेरित , रोजगार सृजन मॉडल में परिवर्तित करना कृषि वर्ष का मूल उद्देश्य है।     कृषि वर्ष का मासिक कैलेंडर तैयार किया गया, जिसमें किसानों को साथ लेकर राज्य से जिला     स्तर तक महोत्सव, मेले आदि की रूपरेखा बनी।      कृषि वर्ष 2026 में प्राकृतिक खेती को हर गांव तक पहुंचाने के होंगे प्रयास।  

द्वितीय अनूपूरक बजट में 13,476.94 करोड़ के प्रावधान से विभिन्न वर्गों का होगा कल्याण

द्वितीय अनूपूरक बजट में 13476.94 करोड़ के प्रावधान से विभिन्न वर्गों का होगा कल्याण प्रधानमंत्री  मोदी के विकसित भारत के स्वप्न को करेंगे साकार मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सत्र समाप्ति पर दिए संबोधन में पक्ष और विपक्ष के सदस्यों को दिया धन्यवाद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि यशस्वी  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के स्वप्न को विकसित मध्य प्रदेश बनाकर साकार करेंगे। हमारे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे। विकसित भारत बनाना केवल एक मिशन नहीं हमारा धर्म भी है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव शुक्रवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के सत्र के समापन अवसर पर सदन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि विधानसभा प्रजातंत्र का मंदिर है।अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर जी ने कुशलता के साथ सदन का संचालन किया है, जो अभिनंदन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष प्रजातंत्र की धुरी  है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने नेता प्रतिपक्ष को भी धन्यवाद दिया कि उनके नेतृत्व में विपक्ष ने पूरे सत्र में सकारात्मक चर्चा की और अपने प्रश्नों एवं उद्बोधनों से लाभान्वित किया। द्वितीय अनुपूरक के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि 13,476.94 करोड़ का प्रावधान किया गया है जिसमें अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित होगी। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए 4000 करोड़, उपार्जन संस्थाओं को ऋण देने के लिए 2000 करोड़, लाडली बहना  योजना के लिए 1794 करोड़, पंचायत विभाग के अंतर्गत 15वें वित्त आयोग के दिए 1,633 करोड़ और उद्योग ,कृषि और अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए सदन ने राशि स्वीकृत की है। अनूपूरक बजट की विशेषताएं ·         द्वितीय अनुपूरक अनुमान में कुल ₹ 13476.94 करोड़ का प्रावधान ·         विकास के लिए बजट की कोई कमी नहीं ·         जरूरतमंद को आवास देना प्रदेश सरकार की पहली प्राथमिकता ·         प्रधानमंत्री आवास योजना में 4000 करोड़ का प्रावधान. आगे और भी करने का प्लान ·         बहनों को आर्थिक रूप से और ज्यादा सक्षम बनाने के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 1794 करोड़ का प्रावधान ·         मध्य प्रदेश का परफॉर्मेंस देखते हुए 15वें वित्त आयोग का विशेष सहयोग ·         मूलभूत जन सुविधाओं के लिये स्थानीय निकायों को 1633 करोड़ का प्रावधान ·         मध्यप्रदेश पूंजीगत व्यय में सदैव अग्रणी ·         अधोसंरचना विकास के लिए बजट में कोई कमी नही ·         पूंजीगत मद में ₹ 5028.37 करोड़ का प्रावधान ·         मुख्य बजट 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपये का बजट था. यह अब तक का सबसे बड़ा बजट. ·         गरीब, महिला, किसान और युवा सभी वर्गों की बेहतरी के लिए सरकार आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि इन स्वीकृतियों से मध्य प्रदेश विकास के पथ पर तेज गति से अग्रसर होगा। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण विधेयक मध्य प्रदेश नगर पालिका संशोधन विधायक 2025 प्रस्तुत हुआ, जिसमें नगर पालिकाओं और नगर पंचायत में अध्यक्ष का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से करने का प्रावधान किया गया है। निश्चित रूप से इससे वर्तमान में निकायों में कार्य करने में आ रही समस्याओं में काफी कमी आएगी और ये  निकाय स्वतंत्र रूप से ओर भी तेज गति से कार्य कर सकेंगे। पक्ष और विपक्ष दोनों का आभार माना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  मुख्यमंत्री डॉ यादव ने पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों को धन्यवाद दिया जिसके कारण यह सत्र गरिमामय  ढंग से संचालित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा का स्वर्णिम इतिहास रहा है। इस सत्र से इसमें एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं के प्रति सदन में हम उपस्थित हैं और केवल निवेश की बात नहीं कर रहे ,मध्य प्रदेश के भाग्य और भविष्य की नींव रख रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चरैवेति चरैवेति के मंत्र के अनुसार राज्य सरकार द्वारा जनकल्याण के लिए निरंतर कार्य करने के संकल्प को व्यक्त किया।

संभागायुक्त सिंह का आदेश: सभी जिलों में 15 दिन में सभी वाहनों का पीयूसी सर्टिफिकेशन करवाएं

संभाग के सभी जिलों में 15 दिवस में सभी वाहनों का पीयूसी सर्टिफिकेशन करवाएं – संभागायुक्त  सिंह संभागायुक्त  सिंह ने भोपाल शहर वायु गुणवत्ता सुधार के लिए समीक्षा बैठक ली  भोपाल         संभागायुक्त  संजीव सिंह ने कमिश्नर कार्यालय के सभाकक्ष में शहर वायु गुणवत्ता सुधार के लिए आयोजित बैठक में ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भोपाल शहर में वायु प्रदूषण रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाए जाने के निर्देश दिए। श्री सिंह ने आरटीओ एवं ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिए कि बिना पीयूसी वाले वाहनों को 15 दिवस का समय निर्धारित किया गया है। सभी वाहनों का 15 दिवस के अंदर पीयूसी प्रमाण पत्र बनवाएं, 15 दिवस के बाद ट्रैफिक पुलिस वृहद अभियान चलाकर चलानी कार्यवाही करें। शहर के सभी भारी वाहन, स्कूल बस, मध्यम लोडिंग वाहन एवं कार चालक अनिवार्य रूप से दो सप्ताह में पीयूसी सर्टिफाईड कराएं।        संभागायुक्त श्री सिंह ने संभाग के सभी जिलों के आरटीओ एवं ट्रैफिक पुलिस भोपाल को निर्देशित किया कि परिवहन पोर्टल के माध्यम से सभी वाहन मालिकों को पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सूचना दी जाए। उन्होंने कहा कि मॉडरेड श्रेणी के हॉट स्पॉट की मॉनीटरिंग के लिए विस्तृत रणनीति तैयार कर कारण एवं निवाकरण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। त्रैमासिक स्तर पर निरंतर तुलनात्मक गणना की जाए। उन्होंने मध्यप्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी को पीयूसी मशीनों के केलिब्रेशन मॉनीटरिंग को ऑनलाइन कर व्यापक स्तर पर जांच करें।              बैठक में उपायुक्त राजस्व श्रीमती किरण गुप्ता, संभाग के सभी जिलों के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, ट्रैफिक पुलिस पीयूसी सर्टिफिकेशन करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।   

EOW ने शिक्षक के घर पर मारा छापा, 6 टीमों ने दबिश दी, दस्तावेजों की जांच हो रही

सीधी  मध्य प्रदेश के सीधी जिले से बड़ी खबर सामने आई है। जहां एक शिक्षक के घर पर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने छापा मारा हैं। बताया जा रहा है कि ईओडब्ल्यू की छह टीमें सुबह 5 बजे दबिश दी। आय से अधिक संपत्ति को लेकर यह कार्रवाई की गई है। फिलहाल टीम दस्तावेजों की पड़ताल में जुटी हुई है। जांच के बाद खुलासा होगा। सीधी जिले के शिक्षक अभिमन्यु सिंह के ठिकानों पर EOW ने रेड मारी है। ईओडब्ल्यू की छह टीमें सुबह 5 बजे शहर में स्थित पटेल पुल और मड़वास के ठिकानों पर दबिश दी। बताया जा रहा है कि राजधानी भोपाल में आय से अधिक संपत्ति की शिकायत की गई थी। जिसके बाद यह छापेमार कार्रवाई की गई है। ईओडब्ल्यू की टीमें सभी दस्तावेज और कागज को खंगाल रहे है। जांच पड़ताल के बाद बड़ा खुलासा होने की संभावना है। आपको बता दें कि शिक्षक अभिमन्यु, सीधी के कुसमी विकासखंड के शासकीय हाईस्कूल खोखरा में पदस्थ है।

एक ही मामले में बार-बार याचिका लगाने पर कोर्ट ने जयस को एक लाख रुपये का जुर्माना किया”

खरगोन खरगोन में एक आरक्षक और इंस्पेक्टर के बीच हुए विवाद को लेकर बार-बार लगाई गई याचिका जयस को लगाना भारी पड़ी। कोर्ट ने इस केस में न केवल नाराजगी जताई, बल्कि जय आदिवासी संगठन (जयस) पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने कहा कि एक ही मामले में बार-बार याचिका लगाई जा रही है। कोर्ट को क्या तमाशा समझ रखा है। दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जयस ने जनहित याचिका लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने उसे निजी उद्देश्य से प्रेरित माना। खरगोन के जयस के जिला अध्यक्ष सचिन सिसोदिया की तरफ लगाई गई याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया। शासन की तरफ से इस याचिका पर एडिशनल एडवोकेट जनरल अरनंद सोनी ने तर्क प्रस्तुत किए थे। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पहले भी याचिकाएं लगी थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित याचिका तभी स्वीकार की जा सकती है,जब उसमें वास्तविक सार्वजनिक हित व जनप्रभाव हो। जनहित याचिका का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह था मामला खरगोन में रिजर्व इंस्पेक्टर सौरभ सिंह कुशवाह व आरक्षक राहुल चौहान के बीच 23 अगस्त को विवाद हो गया था। इस मामले को जयस ने उठाया और धरना प्रदर्शन भी किए। इंस्पेक्टर व उनकी पत्नी पर एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज करने की मांग भी की गई। बाद में कोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई। कोर्ट ने कहा कि पीडि़त भी सरकारी कर्मचारी है और शिक्षित भी। वह खुद अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए सक्षम है। इसके बाद याचिका वापस ले ली गई। बाद में सचिन चौहान ने याचिका लगाई, लेकिन बाद में कोर्ट में मौजूद होकर कहा कि वह याचिका वापस लेना चाहता है। बाद में जयस के जिलाध्यक्ष ने याचिका लगाई थी।  

46 लाख रुपये के घोटाले में दमोह छात्रावास के दो अधिकारी निलंबित, डिप्टी कलेक्टर भी शामिल

दमोह  दमोह जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग में एससी वर्ग के छात्रावासों के लिए करीब 46 लाख रुपये की खरीदी में उजागर हुई। अनियमितताओं के मामले में सागर संभागायुक्त अनिल सुचारी ने बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने दमोह कलेक्टर के प्रतिवेदन पर डिप्टी कलेक्टर बृजेंद्र सिंह, आदिम जाति कल्याण विभाग की तत्कालीन जिला संयोजक रिया जैन और विभाग के लेखापाल महेंद्र अहिरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों ने असली सामग्री के नाम पर राशि खर्च कर दी और हॉस्टलों में नकली और घटिया सामग्री की खरीदी कराकर भिजवा दी। यह गड़बड़ी एडीएम की जांच में प्रक्रिया के दौरान गंभीर गड़बड़ी, नियम-विरुद्ध भुगतान और रिकॉर्ड में हेराफेरी स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई थी। फिलहाल इस मामले में क्रय समिति में शामिल जिला पंचायत सीईओ, अतिरिक्त महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी राष्ट्रीय सूचना केंद्र और जिला कोषालय अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि खरीदी के लिए इसी समिति ने स्वीकृति दी थी। दरअसल मामला वर्ष 2024-25 में एससी छात्रावासों के लिए की गई सामग्री खरीदी से जुड़ा है। विभाग ने जेम पोर्टल के माध्यम से घटिया क्वालिटी के किट, स्टेशनरी, बर्तन, गर्म कपड़े और दैनिक उपयोग की सामग्री खरीदी थी। जांच में सामने आया कि खरीदी में शामिल अधिकारियों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को दरकिनार कर सामान की वास्तविक मात्रा और गुणवत्ता का सत्यापन किए बिना भुगतान जारी कर दिया। जिन वस्तुओं के बिल विभाग को प्रस्तुत किए गए, उनमें कई वस्तुओं की आपूर्ति वास्तविकता में छात्रावासों तक पहुंची ही नहीं। इसमें खरीदी करने की अनुमति से लेकर सप्लाई करने वालों के बीच में कमीशन का खेल चला। कलेक्टर ने इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए एडीएम मीना मसराम के नेतृत्व में विस्तृत जांच कराई। जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि खरीदी की पूरी प्रक्रिया डिप्टी कलेक्टर की निगरानी में संचालित हुई, जबकि जिला संयोजक स्तर पर सत्यापन और प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी थी, जिसे निभाया नहीं गया। लेखापाल महेंद्र अहिरवार ने भुगतान किया था। रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने सागर संभागायुक्त को प्रतिवेदन भेजते हुए कहा कि तीनों अधिकारियों की भूमिका घोटाले में सीधे तौर पर जिम्मेदार पाई गई है और उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके बाद कमिश्नर ने सभी तीनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए आगे विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। कलेक्टर सुधीर कोचर ने बताया कि मामले के प्रस्ताव अलग अलग भेजे गए थे। जिनके आधार पर यह कार्रवाई हुई है। इस मामले में अभी और कार्रवाई भी होगी।  

मध्यप्रदेश में दिसंबर में स्कूलों की छुट्टियों की तारीखें घोषित, देखें पूरी लिस्ट

भोपाल  दिसंबर की शुरुआत के साथ ही छात्रों में छुट्टियों का रोमांच बढ़ जाता है। इस महीने में जहां क्रिसमस का निर्धारित अवकाश रहता है, वहीं सबसे ज़्यादा इंतजार होता है शीतकालीन छुट्टियों का। मध्य प्रदेश के शैक्षणिक कैलेंडर के आधार पर दिसंबर 2025 की संभावित छुट्टियों का अनुमान लगा लिया गया है। दिसंबर 2025 में संभावित छुट्टियां — पूरी डिटेल शीतकालीन अवकाश  मध्य प्रदेश में सर्दियों की छुट्टियां हर साल लगभग 10–12 दिनों की होती हैं। इस बार संभावित रूप से स्कूल 23 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक बंद रहेंगे। कुछ जिलों में यह अवकाश जनवरी के पहले सप्ताह तक भी बढ़ सकता है। यह आदेश प्रदेशभर के सरकारी और प्राइवेट दोनों ही स्कूलों में लागू होता है। 10वीं-12वीं के लिए स्कूल रहेंगे खुले दिसंबर में बोर्ड परीक्षा की तैयारी का अहम समय होता है। बोर्ड परीक्षा से पहले स्कूल में होने वाली परीक्षाएं 15 दिसंबर से 29 दिसंबर 2025 के बीच चलेंगी। जिन छात्रों की परीक्षाएं होंगी, उनके लिए स्कूल निर्धारित तिथियों पर खुले रहेंगे, ताकि तैयारी और परीक्षा दोनों सुचारू रूप से चल सकें।  क्रिसमस डे — अनिवार्य अवकाश 25 दिसंबर, क्रिसमस के दिन सभी स्कूलों में निश्चित सार्वजनिक अवकाश रहेगा। यह तारीख हर साल फिक्स होती है। सर्दियों की छुट्टियां क्यों होती हैं जरूरी? कड़ाके की ठंड को देखते हुए छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर राज्य सरकार हर साल ये अवकाश घोषित करती है। यह समय बच्चों के लिए आराम, त्योहारों की खुशियां और नए साल की तैयारियों का होता है। दिसंबर 2025 में एमपी के स्कूलों में— 23 से 31 दिसंबर तक संभावित विंटर वेकेशन 25 दिसंबर को क्रिसमस की अनिवार्य छुट्टी  10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए स्कूल खुले यह महीना छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए त्योहारों और छुट्टियों से भरा होगा।

अदालत ने आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के बयान पर पुलिस से रिपोर्ट मांगी, 20 जनवरी तक सबमिट करने के निर्देश

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक आईएएस अधिकारी के कथित विवादित बयान को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इंदौर की एक स्थानीय अदालत ने गुरुवार को इस मामले में दाखिल शिकायत पर संज्ञान लेते हुए तुकोगंज पुलिस थाने के टीआई को 20 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई भी 20 जनवरी को होगी। शिकायत एक स्थानीय वकील की ओर से दर्ज कराई गई है, जिसमें ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता शैलेन्द्र द्विवेदी ने अदालत को बताया कि हाल ही में मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJAKS) के अध्यक्ष बने आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा ने पिछले महीने भोपाल में हुए एक कार्यक्रम के दौरान ब्राह्मण समुदाय की बेटियों को लेकर अशोभनीय, अभद्र और समाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली टिप्पणी की थी। अदालत ने प्रगति रिपोर्ट मांगी शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि इस बयान से दो समुदायों के बीच तनाव और वैमनस्य फैलाने की स्थिति पैदा हुई। वकील के अनुसार उन्होंने तुकोगंज थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न किए जाने के कारण उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस से पूरे घटनाक्रम की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। वहीं, राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने भी 26 नवंबर को आईएएस अधिकारी को शो-कॉज नोटिस जारी किया था, जिसमें पूछा गया कि उनके विवादित बयान पर विभागीय कार्रवाई क्यों न की जाए।  गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया बयान- IAS संतोष वर्मा विवाद बढ़ने के बाद संतोष वर्मा ने मीडिया से कहा कि उनके लंबे भाषण के एक छोटे हिस्से को तोड़ा-मरोड़ा गया और गलत संदर्भ में प्रसारित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत करने का उद्देश्य नहीं था। वर्मा ने कहा अगर मेरे किसी कथन को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और किसी समाज को ठेस पहुंची है, तो मुझे खेद है। गौरतलब है कि इस बयान का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वे कह रहे हैं कि एक परिवार में  व्यक्ति को आरक्षण मिलना चाहिए, जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं कर दे या उससे संबंध नहीं बना ले, यदि आरक्षण आर्थिक आधार पर देना है तो । उन्होंने आगे कहा कि तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।  

मध्य प्रदेश पराली जलाने में देश में पहले स्थान पर, किसानों की जागरूकता प्रयास विफल

ग्वालियर  पराली जलाने के मामले में मध्य प्रदेश लगातार दूसरी बार पहले नंबर पर रहा है। यही स्थिति अंचल के श्योपुर जिले की है, यह जिला भी लगातार दूसरी बार देश में अव्वल रहा है। लेकिन इस बार अधिक पराली जलाने वाले जिलों की टॉप टेन सूची में प्रदेश के आठ जिले हैं। जबकि पिछले साल चार ही जिले थे और 2023 में दो जिले व 2022 में एक भी जिला नहीं था। यानि पिछले तीन साल से प्रदेश में रोक के बाद भी किसान अधिक पराली जला रहे हैं। ग्वालियर जहां टॉप टेन सूची में कभी नहीं आता था और पूरी देश की सूची में काफी नीचे रहता था। तीसरे स्थान पर आया है। बता दें कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की संस्था कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोकोसिस्टम मॉनीटरिंग 15 सितंबर से 30 नवंबर तक पराली जलाने की घटनाओं की सैटेलाइट से निगरानी करता है। इस बार प्रदेशों की बात करें तो मध्य प्रदेश 17067 घटनाओं के साथ पहले नंबर, 7290 घटनाओं के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे, 5114 घटनाओं के साथ पंजाब तीसरे नंबर पर व 2890 घटनाओं के साथ राजस्थान चौथे नंबर पर रहा। जबकि इस साल जिलों में 2643 घटनाओं के साथ श्योपुर पहले, 1973 घटनाओं के साथ जबलपुर दूसरे, 1930 घटनाओं के साथ ग्वालियर तीसरे, 1797 घटनाओं के साथ दतिया चौथे, 1580 घटनाओं के साथ होशंगाबाद पांचवें, 1142 घटनाओं के साथ सिवनी छठे, 1054 घटनाओं के साथ सतना आठवें व 719 घटनाओं के साथ रायसेन 10वें नंबर पर रहे।