samacharsecretary.com

आध्यात्मिक सुरों से गूँजा विश्वरंग 2025, अनिरुद्ध जोशी व मनोज पाटीदार की मनमोहक प्रस्तुति

भोपाल  रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विश्वरंग 2025 के तीसरे और अंतिम दिन की शुरुआत एक आध्यात्मिक, सौम्य और मन को शांत करने वाली संगीत साधना के साथ हुई। प्रातः आयोजित मंगलाचरण में मध्यप्रदेश के युवा और लोकप्रिय सितार वादक अनिरुद्ध जोशी ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके सितार से निकलती स्वरलहरियों ने न केवल वातावरण को पवित्र बनाया, बल्कि प्रतिभागियों और दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराइयों से जोड़ दिया। उनका साथ दे रहे प्रसिद्ध तबला वादक मनोज पाटीदार ने अपनी ताल और लय की अद्भुत संगति से इस प्रस्तुति को और ऊँचे सौंदर्य तक पहुँचाया, जिससे विश्वरंग के अंतिम दिन का प्रारंभ एक सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया और आगे के सत्रों के प्रति उत्साह और अपेक्षाएँ और अधिक बढ़ गईं। प्रज्ञान ब्रह्म की सोच को सौरभ द्विवेदी ने किया रेखांकित संगीत की इस सुगंधित शुरुआत के बाद पहले वैचारिक सत्र में इंडिया टुडे मैगज़ीन और लल्लनटॉप के संपादक तथा सुविख्यात वक्ता सौरभ द्विवेदी ने अपनी बात एक गहरे सवाल से शुरू की—क्या हम वही बनकर रह जाते हैं, जहाँ से आते हैं, या हम स्वयं को निरंतर नए साँचों में ढाल सकते हैं? उन्होंने कहा कि मनुष्य तब तक आगे बढ़ता है, जब तक वह सीखता रहता है; सीखना रुकते ही ठहराव शुरू हो जाता है। इस संदर्भ में उन्होंने श्वेतकेतु के सूत्र ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ का उल्लेख किया और समझाया कि जो भीतर है, वही बाहर प्रकट होता है; और सरल बनना ही मनुष्य का सबसे कठिन लक्ष्य है। उन्होंने वेदांत के महावाक्य ‘तत्वमसि’ के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि मनुष्य का आंतरिक अस्तित्व उसी परम चेतना से अभिन्न है, जिससे सृष्टि संचालित है। सौरभ ने विद्यार्थियों को समझाया कि सीखने के लिए सुनना उतना ही जरूरी है जितना बोलना या पढ़ना, और इसी संदर्भ में आर्यभट्ट और आइंस्टीन के उदाहरण दिए। उन्होंने डिंडोरी के उस व्यक्ति की मार्मिक घटना भी साझा की जिसे मानव तस्करी के कारण बीस वर्षों तक तेलंगाना में बंधक बनाकर रखा गया था, और बताया कि दुनिया में कई लोग ऐसे कष्टों से गुजरते हैं जिनकी कल्पना भी कठिन है। उन्होंने कहा कि छात्र का मन एक रीते घड़े जैसा होता है, जिसकी क्षमता ब्लैक होल से भी अधिक विस्तृत है—जितना ज्ञान उसमें भरा जाए, वह और अधिक ग्रहण करने को तैयार रहता है। उन्होंने यह सवाल रखा कि अच्छा इंसान होना इतना मुश्किल क्यों है और साथ ही भारतीय संस्कृति के संरक्षणवादी स्वभाव पर प्रकाश डाला। विचारों की विविधता, मित्रता, संगीत, सिनेमा और पुस्तक-पठन को उन्होंने युवाओं के सीखने और संवर्धन के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि भारत को वैज्ञानिक चेतना विकसित करने की अत्यंत आवश्यकता है, ताकि समाज बाहरी दिखावे से अधिक मानवीय गुणों को महत्व दे सके। अंत में उन्होंने सलाह दी कि मनुष्य को जीवन के अंत में खालीपन नहीं, बल्कि ‘मुदित भावना’ के साथ विदा होना चाहिए। उनका पूरा संबोधन ज्ञान, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण रहा। सान्या ने दिए कैरेक्टर को बेहतर बनाने के टिप्स दोपहर के सत्र में फ़िल्म अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा के साथ हुआ संवाद छात्र-युवाओं और कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना। रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की प्रो–चांसलर एवं विश्वरंग की सह-निदेशक डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स और विकास अवस्थी ने सान्या से उनकी फ़िल्मी यात्रा, कलात्मक अनुशासन और अभिनय की तैयारी पर गहन बातचीत की। सान्या ने कहा कि अभिनय उनके लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि एक सतत साधना है, जिसमें पात्र के मनोवैज्ञानिक आयामों का अध्ययन सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि किसी भी भूमिका को भीतर तक महसूस करने के लिए वे पटकथा को बार-बार लिखती हैं और पात्र से जुड़ी जगहों और लोगों से संवाद स्थापित करती हैं, ताकि किरदार की वास्तविकता भीतर उतर सके। उन्होंने कहा कि अभ्यास ही कलाकार को परिपक्वता देता है, और यही कारण है कि वे लगातार वर्कशॉप करती रहती हैं। अपनी तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी फिल्मों पर उन्होंने कहा कि कोई भी सम्मान पहले से सुनिश्चित नहीं होता, लेकिन जब ईमानदारी और मेहनत से किए गए काम की सराहना होती है, तो वह कलाकार के लिए सबसे बड़ा प्रोत्साहन बन जाता है। उन्होंने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि ऑडिशन और अस्वीकृति कलाकार को मजबूत बनाते हैं। युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि अभिनय में करियर बनाने से पहले शिक्षा पूरी करना जरूरी है, क्योंकि पढ़ाई व्यक्ति को आत्मविश्वास और गहरी दृष्टि प्रदान करती है, जो कलाकार को जीवन और किरदार—दोनों को समझने में मदद करती है। माइथोलॉजी को शंकाओं के साथ पढ़े, तभी भीतर का ज्ञान समझ पाएंगे : देवदत्त पटनायक  मैं जब भी पौराणिक कथाओं पर बात करता हूं, टी9 एक शब्द का इस्तेमाल करता हूं मायथोलॉजी, और लोग मुझसे गुस्सा हो जाते हैं। लेकिन, क्या आपको पता है, जब तक आप उत्तेजित नहीं होंगे तो सरस्वती नहीं आएंगी। बहुत से लोग मानते हैं कि मायथोलॉजी शब्द मिथ्या से बना है, जो गलत है। संस्कृति में मिथ्या का मतलब incomplete truth। जगत मिथ्या, ब्रह्म सत्य…। मिथ्या असल में सच और झूठ से बिल्कुल अलग अधूरा सच है। आज हर आदमी के पास अपनी दुनिया का ज्ञान तो है, मगर संपूर्ण ज्ञान नहीं है। संपूर्ण ज्ञानी सिर्फ ईश्वर है। जबकि, मायथोलॉजी शब्द आया है ग्रीक के माइथोज से , यानि आख्यान।  दुनिया की हर संस्कृति  सभ्यता का अपना अलग आख्यान है  चीन, जापान, वियतनाम की अपनी अपनी माइथोलॉजी है। सब अपने संस्कृति के दृष्टिकोण को बताने के लिए आख्यानों का इस्तेमाल करते हैं। असल में, दुनिया को समझने का एक माध्यम है आख्यान, यानि माइथोलॉजी। जो विवाद करते हैं, वो जिज्ञासु नहीं होते, योद्धा होते हैं, उनके पास ज्ञान नहीं होता। पहले के जमाने में शास्त्रार्थ होते थे, जिसका मतलब होता था शास्त्रों का अर्थ निकलना। जबकि, टीवी पर और हमारे सीरियल्स में शास्त्रार्थ को सिर्फ बहस और अहंकार की लड़ाई की तरह दिखाते हैं। मगर, जहां सर्द बहस होती है, वहां से सरस्वती चली जाती है। याद रखिए, श्रद्धा ज्ञान का द्वार नहीं खोलती, जिज्ञासा ज्ञान का द्वार खोलती है। गुरु जो कहता है वो ही सही है, यदि आप मान लें तो यही आपकी श्रद्धा की शुरुआत हो जाएगी और फिर … Read more

गीता जयंती पर मध्यप्रदेश में 3 लाख गीता पाठी एक साथ करेंगे श्रीमद्भगवद्‌गीता का पाठ

इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में श्रीमद्भगवद्‌गीता ज्ञान प्रतियोगिता के विजेताओं नामों की घोषणा भोपाल माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गीता जयंती 1 दिसंबर 2025 को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के 313 विकासखंड, 55 जिला मुख्यालय तथा 10 संभागों में श्रीकृष्ण परंपरा के आचार्यों की सन्निधि में 3 लाख से अधिक गीताभक्तों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा प्रदत्त श्रीमद्भगवद्‌गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक सस्वर पाठ किया जायेगा। इस मौके पर विशेष आयोजन उज्जैन, भोपाल एवं इंदौर में आयोजित किये गये है। जिसमें इंदौर के राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर में मध्यप्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी एवं माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थित में होगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश में 16 से 28 नवंबर 2025 तक आयोजित हुई श्रीमद्भगवद्‌गीता ज्ञान प्रतियोगिता के विजेताओं के नामों की घोषणा भी की जायेगी। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव को लेकर माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि गीता जयंती 1 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव भव्य स्तर पर मनाया जा रहा है यह महोत्सव न केवल आध्यात्मिक उत्कर्ष के प्रतीक हैं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का भी व्यापक साधन होगा। उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती है। माननीय मुख्यमंत्रीजी के आह्वान पर गीता का संदेश प्रदेश के हर नागरिक तक पहुँचे ऐसे प्रयास किये जा रहे हैं। यह महोत्सव समाज में ज्ञान, कर्तव्य, अनुशासन और सकारात्मकता का वातावरण बनाने का माध्यम बनेगा। उज्जैन में तीन दिवसीय भव्य आयोजन, पहले दिन अभिनेता पुनीत इस्सर की प्रस्तुति संस्कृति सलाहकार ने बताया कि उज्जैन के दशहरा मैदान पर 1 से 3 दिसंबर सांस्कृतिक आयोजन किये जा रहे है। जिसमें पहले दिन अभिनेता पुनीत इस्सर द्वारा निर्देशित नृत्य नाटिका जय श्रीकृष्णा का मंचन होगा। दूसरे दिन नई दिल्ली की वैष्णवी शर्मा का काव्यपाठ विराटजयी तथा मुंबई के मोहित शेवानी एवं दल द्वारा कृष्णायन की सांगीतिक प्रस्तुति होगी। अंतिम दिन उमेश तरकसवार द्वारा निर्देशित विश्ववंदनीय एवं बैंगलोर के डॉ. सलाउद्दीन पाशा द्वारा निर्देशित गीता ऑन व्हील्स की प्रस्तुति होगी। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर लघु चित्र शैली में माधव दर्शनम् प्रदर्शनी को प्रदर्शित किया जा रहा है। भोपाल के रवीन्द्र भवन में दिव्यांग कलाकारों द्वारा गीता ऑन व्हील्स का मंचन भोपाल के रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार मोहित शेवानी के निर्देशन में कृष्णायन की प्रस्तुति होगी। यह प्रस्तुति भगवान श्रीकृष्ण और मध्यप्रदेश की कहानी पर केंद्रित है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए इस प्रस्तुति को आकर्षक एवं रोचक बनाने का प्रयास किया गया है। इसके पूर्व बैंगलोर के डॉ. सलाउद्दीन पाशा के निर्देशन में गीता ऑन व्हील्स जिसमें दिव्यांग कलाकार गीता के प्रसंगों को मंचित करेंगे तथा विश्व गीता प्रतिष्ठानम् की ओर से श्रीमद्भगवद्‌गीता नृत्य नाटिका की प्रस्तुति होगी। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्रीजी डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में दोपहर 1 बजे श्रीमद्भगवद्‌गीता के 15वें अध्याय का सस्वर पाठ एवं प्रदर्शनी का लोकार्पण होगा। प्रस्तुतियाँ शाम 6 बजे शुरू होंगी। इंदौर के गोपाल मंदिर में होंगे आयोजन संस्कृति सलाहकार ने जानकारी देते हुए कहा कि गीता जयंती पर माननीय मुख्यमंत्रीजी डॉ. मोहन यादव एवं हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इंदौर के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे। माननीय मुख्यमंत्रीजी के आतिथ्य में मध्यप्रदेश के पहले गीता भवन-गोपाल मंदिर का लोकार्पण किया जायेगा तथा मध्यप्रदेश में 16 से 28 नवंबर 2025 तक आयोजित हुई श्रीमद्भगवद्‌गीता ज्ञान प्रतियोगिता के विजेताओं के नामों की घोषणा की जायेगी। पुरस्कारों का वितरण गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के मौके पर होगा। इस अवसर पर संजीव मालवीय निर्देशित नृत्य नाटिका कृष्णायन की प्रस्तुति होगी। इसके पूर्व माननीय मुख्यमंत्रीजी श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे।

विश्वरंग की सुर–संध्या में सोना महापात्रा का जलवा, दर्शकों ने जमकर सराहा

भोपाल विश्वरंग – टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव 2025 के समापन दिवस पर सांस्कृतिक सत्र में देश की चर्चित गायिका *सोना महापात्रा* की शानदार गायकी ने दर्शकों को भाव–विभोर कर दिया। रवीन्द्र भवन के मुक्ताकाश में आयोजित इस विशेष सिंगिंग परफॉर्मेंस में उन्होंने लोक, सूफी और कंटेंपररी बॉलीवुड म्यूजिक की रंगीन छटा बिखेरते हुए लगातार एक के बाद एक यादगार प्रस्तुतियाँ दीं। सोना महापात्रा ने अपने लोकप्रिय गीत *“बेदर्दी राजा”* से कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसे सुनते ही युवा दर्शक उत्साह में झूम उठे। इसके बाद उन्होंने शक्ति, भक्ति और शास्त्रीय रंग से सराबोर *“आई गिरी नंदिनी”* की सशक्त प्रस्तुति दी, जिसने सभागार में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया। सूफी परंपरा की अमर रचना *“छाप तिलक सब छीनी…”* में उनकी भावपूर्ण गायकी ने प्रेम और समर्पण की अनुभूति को गहराई से उकेरा। श्रोताओं ने इस प्रस्तुति को पूरे मन से सराहा। इसके बाद रोमांटिक और संवेदनशील स्वरों में उन्होंने *“जिया लागे ना…”* गाकर माहौल को भावुकता से भर दिया। भक्तिरस से ओत–प्रोत *“नारायण राम रमणा…”* की प्रस्तुति ने दर्शकों को भक्ति के संगीत–सागर में डुबो दिया। कार्यक्रम का उत्साहपूर्ण शिखर तब आया जब सोना महापात्रा ने सुपरहिट गीत *“अम्बर सरिया…”* प्रस्तुत किया। इस गीत पर सभागार में मौजूद श्रोता स्वतः ही तालियों और झूमते कदमों के साथ सुर में सुर मिलाते नजर आए।

संस्कारों की मिसाल: डॉ. अभिमन्यु-डॉ. इशिता ने रचाई शादी, उज्जैन में 21 कन्याओं का सामूहिक विवाह

उज्जैन उज्जैन के पावन शिप्रा तट पर रविवार को परोपकार और परंपरा का अद्वितीय संगम देखा गया, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पुत्र डॉ. अभिमन्यु और डॉ. इशिता के साथ 21 कन्याओं का सामूहिक विवाह सम्पन्न कर समाज के सामने मानवीय मूल्यों की मिसाल प्रस्तुत की। विवाह परिसर दिनभर मंगलध्वनियों, उत्साह और आशीर्वादों से सराबोर रहा। सुबह आठ बजे इम्पीरियल चौराहा से बरात रवाना हुई। ढोल–ताशों और लोकनृत्य की रौनक के बीच शोभायात्रा में मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट सहित कई मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि और गणमान्य अतिथि शामिल रहे। विवाह स्थल पहुंचते ही आकर्षक मंच पर सभी नवयुगलों की वरमाला रस्म सम्पन्न कराई गई, जिसके बाद पूरा परिसर तालियों और शुभकामनाओं से गूंज उठा।   आशीर्वाद समारोह में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल तथा योग गुरु बाबा रामदेव की विशेष उपस्थिति रही। राज्यपाल और बाबा रामदेव ने इस आयोजन को सामाजिक उत्तरदायित्व, संस्कार और संवेदनशीलता का प्रेरक उदाहरण बताया। इसके बाद 22 विशेष रूप से निर्मित मंडपों में एक साथ पाणिग्रहण और सप्तपदी की रस्में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुईं। यादव परिवार ने प्रत्येक नवविवाहित दंपती को संपूर्ण गृहस्थी सामग्री और मोटरसाइकिल भेंट कर नया जीवन शुरू करने के लिए सहयोग का भाव व्यक्त किया। बिना उपहार के केवल आशीर्वाद स्वीकार करने का निवेदन आयोजन की सबसे विशेष भावनात्मक पहचान बना। सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था और सटीक प्रबंधन के बीच समारोह सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। शिप्रा तट पर हुआ यह अनोखा आयोजन सामाजिक सद्भाव, संवेदना और साझा उल्लास की अमिट याद छोड़ गया। सब दूल्हा-दुल्हन महाराज समान हैं सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा- 16 संस्कारों से हमारा सनातन संस्कृति से जुड़ाव है। ये प्रधानमंत्री के मूल भाव सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा पर हम काम कर रहे। यहां कोई बड़ा नहीं, कोई छोटा नहीं। सब दूल्हा- दुल्हन महाराज समान है। सब आज लखपति हो गए।   ऐसे कार्य से समरसता आएगी बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा- संपूर्ण भारत में आज नवाचार हुआ। सामाजिक समरसता का संदेश आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ी ही सहजता से दिया है। ये अभूतपूर्व कार्य है। ऐसे कार्य से समरसता आएगी, बेटी के पिता पर ना कर्ज होगा ना विवाह पर ज्यादा खर्च। बाबा रामदेव ने कहा- वेडिंग डेस्टिनेशन का कांसेप्ट सराहनीय है। देश का धन देश में ही खर्च होना चाहिए। मध्य प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र गिरी महाराज, हरीगिरी महाराज, नरोत्तम मिश्र भी समारोह में शामिल हुए।

सुगम परिवहन सेवा लॉन्च: इंदौर में छोटे बच्चों के लिए मुफ्त यात्रा का लाभ

भोपाल मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत सरकार से अनुबंधित निजी बसों का संचालन अप्रैल 2026 से प्रारंभ करने की तैयारी है। इसमें पांच वर्ष तक के बच्चों का किराया नहीं लगेगा। इससे ऊपर 12 वर्ष तक के बच्चों का आधा किराया देना होगा। वरिष्ठ नागरिकों को किराये में छूट देने की योजना अभी नहीं है। बसों में महिलाओं और बुजर्गों के लिए कुछ सीटें भी आरक्षित की जाएंगी, पर इस संबंध में निर्णय बसों का संचालन प्रारंभ होने के बाद लिया जाएगा। इंदौर से शुरू होगा बसों का संचालन इंदौर में आठ शहरी और 24 उपनगरीय मार्गों से बसों का संचालन प्रारंभ किया जाएगा। बसों के मार्ग में आने वाले बस स्टैंडों का निर्माण सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) से किया जाएगा। जैसे-जैसे मार्ग निर्धारित कर बसों का संचालन प्रारंभ होगा, उस रूट में आने वाले बस स्टैंडों का निर्माण भी होगा। निर्माण में यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं जैसे बैठने की व्यवस्था, पीने का पानी, शौचालय, बसों के आने-जाने के संबंध में जानकारी, उद्घोषणा व्यवस्था रहेगी। लोग पार्सल से सामान भी भेज सकेंगे बसों में कार्गों सुविधा भी रहेगी। यानी लोग पार्सल से सामान भी भेज सकेंगे। यात्री किराये से प्राप्त आय के अतिरिक्त यह भी आमदनी का बड़ा माध्यम होगा। साथ ही बसों में विज्ञापन के माध्यम से भी आय अर्जित करने की तैयारी है। यात्री परिवहन से अर्जित आय का 90 प्रतिशत हिस्सा 24 घंटे के भीतर बस संचालक को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि निर्धारित समय सीमा के अनुसार अप्रैल 2027 तक प्रदेश के सभी जिलों में 10 हजार से अधिक बसें चलाने का लक्ष्य सरकार का है। संचालन चरणबद्ध तरीके से होगा। इंदौर के बाद उज्जैन में शहरी और उपनगरीय बस सेवा प्रारंभ की जाएगी।  

पुरानी बसों पर बड़ी कार्रवाई: इंदौर में 73 परमिट निरस्त, 62 की जांच प्रक्रिया में

 इंदौर  प्रदेश में 15 साल पुरानी खटारा बसों को हटाया जाना है। इसकी के तहत इंदौर संभाग में 135 यात्री बसों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए स्टेज कैरिज परमिट निरस्त किए जा रहे है। इसमें से 73 बसों के परमिट निरस्त कर दिए गए, वहीं 62 बसों के परमिट निरस्त करने की प्रक्रिया जारी है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण द्वारा की गई जांच में पाया गया कि ये बसें निर्धारित शर्तों के विपरीत पुराने माडल के साथ विभिन्न मार्गों पर संचालित हो रही थी। 135 बसों के परमिट निरस्त करने के आदेश जारी इंदौर संभाग के क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण एवं संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाडे ने इंदौर संभाग के विभिन्न रूटों पर चलने वाली 135 बसों के परमिट निरस्त करने के आदेश जारी किए। यह सभी बसें 15 साल पुरानी थी और संभाग के अलग-अलग जिलों में संचालित हो रही थी। इन सभी बसों को स्थाई परमिट जारी किए गए थे, जो 2026-27 तक जारी रहने थे। परमिट निरस्त करने से पहले परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को नोटिस जारी कर नए मॉडल की बसें प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी निर्धारित समय में 135 बस ऑपरेटरों ने नई बसों की सूची नहीं सौंपी। गौरतलब है कि परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने प्रदेशभर में स्टेज कैरिज परमिट पर 15 वर्ष से अधिक पुरानी बसे नहीं चलाने के निर्देश जारी किए थे। 156 बसों की मिली थी सूची परिवहन मुख्यालय ने इंदौर संभाग में 15 साल पुरानी 156 बसों की सूची सौंपी थी। इन बसों के पास पांच साल के स्थाई परमिट थे, लेकिन तय समय अवधि से पुरानी होने से इनको नोटिस जारी किए गए। वहीं नई बसों की सूची मांगी गई थी, लेकिन इसमें 21 संचालकों ने ही नई सूची विभाग को सौंपी, अन्य की सूची नहीं आने से सभी के परमिट निरस्त कर दिए गए। 21 साल बाद फिर चलेगी सरकारी बसें प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बसें फिर से सड़क पर उतरने जा रही हैं। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना के तहत नई कंपनी यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बसों का संचालन करेगी। इसकी शुरुआत अप्रैल 2026 में इंदौर से होगी। रूट निर्धारित कर दिए गए हैं। सरकार और निजी ऑपरेटरों के बीच कॉन्ट्रेक्ट मऑडल पर बसें चलाई जाएंगी। नई योजना में सिर्फ अद्यतन मॉडल की बसों को प्राथमिकता मिलेगी ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सेवा उपलब्ध कराई जा सके।  

ई-अटेंडेंस अनिवार्य, वरना वेतन नहीं! ग्वालियर DEO ने किया कड़ा निर्देश, शिक्षकों में तनाव

 ग्वालियर  अब शिक्षकों की मनमानी नहीं चलेगी, ग्वालियर में जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने साफ कर दिया है कि नवंबर महीने का वेतन केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर ही जारी होगा। एक भी दिन ई-अटेंडेंस मिस हुई तो उतने दिन का वेतन कट जाएगा। DEO ने सभी डीपीसी, बीईओ, संकुल प्राचार्यों और स्कूल प्रधानाचार्यों को सख्त आदेश जारी करते हुए कहा है कि नवंबर 2025 का वेतन पूरी तरह ई-अटेंडेंस के आधार पर ही दिया जाएगा। जितने दिन शिक्षक ने पोर्टल पर ई-अटेंडेंस लगाई होगी, उतने दिन का ही वेतन जारी होगा। जिन शिक्षकों ने पूरे महीने ई-अटेंडेंस नहीं लगाई, उनका वेतन आंशिक या पूरी तरह रोक दिया जाएगा। आदेश में स्पष्ट लिखा है कि  कोई भी छुट्टी (CL/EL/ML) हो या ड्यूटी, बिना ई-अटेंडेंस के मान्य नहीं होगी। संकुल प्राचार्य और बीईओ रोजाना मॉनिटरिंग करेंगे। लापरवाही बरतने वाले प्राचार्यों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। शिक्षकों में हड़कंप आदेश जारी होते ही जिले भर के शिक्षक कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। कई शिक्षक जो अब तक मोबाइल ऐप या पोर्टल पर अटेंडेंस लगाना टालते थे, अब परेशान हैं। सोशल मीडिया पर शिक्षक ग्रुप में एक ही बात चर्चा में है, “अब तो रोज सुबह 10 बजे से पहले अटेंडेंस लगानी ही पड़ेगी वरना पगार कट जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षक स्कूल में उपस्थित हों, यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। ई-अटेंडेंस से पारदर्शिता आएगी और अनुपस्थित शिक्षकों पर लगाम लगेगी। कोई ढील नहीं बरती जाएगी।”यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है। अब देखना यह है कि दिसंबर की सैलरी आने तक कितने शिक्षकों की ई-अटेंडेंस 100% हो पाती है!

जबलपुर : SIR के दौरान BLOs की सराहना, जताई गई प्रशंसा और शानदार पुरस्कारों का मज़ा

 रीवा/जबलपुर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में मिसाल पेश करने वाले बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) इन दिनों जिला प्रशासन की अनूठी पुरस्कार योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं. टारगेट को तय समय सीमा से पहले पूरा करने वाले 'सुपर बीएलओ' को टाइगर सफारी, मूवी टिकट और यहां तक कि हेलीकॉप्टर जॉय राइड जैसे शानदार इनाम मिल रहे हैं. मध्य प्रदेश के जबलपुर की स्नेहलता पटेल अपने अधीन सभी बूथों का शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा करने वाली जिले की पहली बीएलओ सुपरवाइजर बनीं. उन्होंने  समय से पहले पनागर विधानसभा क्षेत्र के 7 हजार 706 वोटर्स फॉर्म अपलोड कर सभी को चौंका दिया.  जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार, स्नेहलता पटेल को पुरस्कार स्वरूप पीएम श्री हेली पर्यटन सेवा के माध्यम से विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कान्हा और बांधवगढ़ की हवाई यात्रा (जॉय राइड) कराई गई. ऐसे ही अन्य बीएलओ को नकद पुरस्कार के साथ उनके तनाव को कम करने के लिए मूवी टिकट भी प्रशासन दे रहा है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार बीएलओ एवं सुपरवाइजरों को प्रोत्साहित करने के लिए अनूठी पुरस्कार योजना शुरू की गई है। स्नेहलता पटेल को पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा से जाय राइड इसी पहल का हिस्सा है। उन्होंने इस सम्मान के लिए कलेक्टर का आभार व्यक्त किया और सभी बीएलओ को निष्ठा एवं लगन से कार्य करने का संदेश दिया। स्नेहलता पटेल को पनागर विधानसभा के बूथ क्रमांक 52 से 61 तक कुल 10 बूथों के सत्यापन और डिजिटाइजेशन का दायित्व सौंपा गया था। उनके अधीन 7,706 मतदाताओं के गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन मंगलवार को पूरा कर लिया गया था। 73.34 फीसदी गणना पत्रक हुए डिजिटाइज जिले में मतदाताओं से प्राप्त गणना प्रपत्रों में से 73.34 प्रतिशत गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा कर लिया गया है। जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 19 लाख 25 हजार 472 है। इनमें से अभी तक 14 लाख 12 हजार 151 मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। पाटन विधानसभा में 86 प्रतिशत डिजिटाइजेशन शुक्रवार की रात आठ बजे की रिपोर्ट के अनुसार 86.50 प्रतिशत गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के साथ पाटन विधानसभा जिले की आठो विधानसभा क्षेत्रों में पहले स्थान पर है। मतदाताओं से प्राप्त गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन में विधानसभा क्षेत्र सिहोरा 85.04 फीसदी के साथ दूसरे तथा विधानसभा क्षेत्र बरगी 84.20 फीसदी गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के साथ जिले में तीसरे स्थान पर है। 78.10 फीसदी के साथ पनागर चौथे, 67.41 फीसदी के साथ उत्तर पांचवें एवं 61.81 फीसदी के साथ कैंट छठे स्थान पर है। वहीं पश्चिम में 59.94 और पूर्व में 59.94 फीसदी गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन हुआ है।

हेलीकॉप्टर उड़ानें परेशान, इंदौर-उज्जैन-ओंकारेश्वर रूट पर यात्रियों की संख्या कम, ऑनलाइन बुकिंग भी नहीं मिल रही

इंदौर  इंदौर से उज्जैन और ओंकारेश्वर के बीच पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा के तहत शुरू की गई हेलीकॉप्टर सेवा को पर्याप्त यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं पोर्टल पर नवंबर और दिसंबर की बुकिंग तारीख नहीं दिख रही है। धार्मिक पर्यटन को नई उड़ान देने के लिए शुरू की गई विशेष हेलीकॉप्टर सुविधा को पीएमश्री वायु सेवा की तरह ही यात्रियों का टोटा है। ऐसे में रोजाना उड़ानों का संचालन नहीं हो पा रहा है। इंदौर-उज्जैन के बीच शुरू की गई हेलीकॉप्टर सेवा के शुभारंभ के बाद यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। 29 नवंबर की तारीख की बुकिंग तो हो रही है, लेकिन अन्य तारीख की बुकिंग नहीं दिख रही है। इंदौर से उज्जैन के बीच 50 प्रतिशत छूट के बाद 5000 हजार रुपये किराया देना पड़ रहा है, लेकिन इसमें भी यात्री नहीं मिल रहे हैं। इसलिए बुकिंग आने पर ही उड़ान संचालित की जा रही है। ट्रांसपोर्टेशन भारत एविएशन हेलीकॉप्टर के अंशु कुमार का कहना है कि बुकिंग आने पर ही उड़ान संचालित की जा रही है। गौरतलब है कि एक सप्ताह पहले इंदौर के बिचौली मर्दाना मैदान से हेलीकॉप्टर सेवा का शुभारंभ किया गया था। इसमें इंदौर से उज्जैन और ओंकारेश्वर दोनों शहरों की यात्रा एक दिन में पूरी की जा सकती है। उज्जैन से ओंकारेश्वर के लिए 6500 रुपये किराया देना होगा। वहीं इंदौर से उज्जैन होते हुए ओंकारेश्वर के लिए किराया 11500 रुपये है।  

नक्सलियों में हड़कंप: 15 लाख के इनामी धनुष ने पत्नी सहित चुनी शांति की राह, MP में सरेंडर बढ़े

बालाघाट   मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई जिले, जो कभी लाल आतंक के खौफ से दहल जाते थे, जहां माओवादियों बंदूक की दम पर अपना एकाधिकार स्थापित करना चाहते थे, अब वहां परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी की गई डेडलाइन के बाद नक्सली पूरी तरह बैकफुट पर आ गए है. इसके अलावा हॉक फोर्स द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन ऑपरेशन का भी असर दिखने लगा है. बालाघाट और आसपास नक्सलियों का सरेंडर हाल ही में मध्य प्रदेश के बालाघाट में नक्सली सुनीता ने आत्मसर्पण किया था. अब बालाघाट में सक्रिय रहे धनुष और उसकी पत्नी ने छत्तीसगढ़ में सरेंडर किया है. इस प्रकार नक्सली अब सरेंडर की राह पर चल पड़े हैं. माओवादियों के सेंट्रल कमेटी के मेंबर रामदेर के साथ 15 नक्सली बालाघाट आए थे, जिनकी आधी टीम अब खाली हो चुकी है. इसके बाद इसी टीम में सक्रिय रहे नक्सली कपल ने भी अब समर्पण की राह चुनी है. दोनों ने छत्तीसगढ़ में खैरागढ़ के बकरकट्टा थाने में सरेंडर किया है. नक्सली धनुष पर 14 लाख इनाम घोषित था सरेंडर करने वाले धनुष और उसकी पत्नी रोनी उर्फ तुले दोनों 25 वर्ष के हैं. धनुष पर सरकार ने 14 लाख का इनाम रखा था. ये नक्सली कपल जीआरबी डिवीजन के टांडा मलाजखण्ड दलम के सदस्य थे, जो कई नक्सली गतिविधियों में शामिल थे. विगत 20 मई को बिलालकसा के जंगल में हुई मुठभेड़ मे धनुष भी शामिल था. नक्सली कपल ने सरेंडर करते हुए कहा है "अब वे सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं. दोनों नक्सली सीसी मेंबर रामदेर के साथ बालाघाट आए थे. जो जनवरी 2025 से एमएमसी जोन में सक्रिय थे." फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है नक्सली धनुष सरेंडर करने वाला नक्सली धनुष संगठन में टेक्नीकल काम संभालता था. उसे हिंदी और अंग्रेजी भाषा की अच्छी जानकारी है और वह कंम्प्यूटर सहित अन्य दूसरी चीजों की भी गहरी जानकारी रखता है. नक्सली धनुष न केवल फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है बल्कि जबरदस्त स्पीड के साथ वह टायपिंग भी करता है. धनुष के सरेंडर के बाद बालाघाट में एंटी नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्शकान्त शुक्ला ने बताया "धनुष नक्सल साहित्य, प्रेस नोट, और मैगजीन प्रभात के लिए कंटेट राईटिंग का काम करता था."  सरकार ने तय की है मार्च 2026 तक डेडलाइन धनुष की पत्नी रोनी उर्फ तुले सीसी मेंबर रामदेर के साथ काम कर चुकी है. वहीं, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में नक्सलियों के बड़े नेताओं द्वारा बड़ी संख्या में नक्सलियों के साथ सरेंडर किया जा रहा है. मार्च 2026 नक्सलवाद के पूरी तरह से खात्मे की तारीख पहले ही गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित कर दी गई है. लगता है इस तारीख से पहले ही नक्सलवाद देश से पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. एमएमसी जोन (मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़) में तीनों राज्यों का संयुक्त ऑपरेशन जारी है. ऐसे में नक्सलियों पर काफी दबाव बढ़ गया है. नक्सलियों ने सरेंडर की डेडलाइन बढ़ाने की लगाई गुहार नक्सलियों ने पहले एक प्रेस नोट जारी कर समय मांगते हुए जवानों द्वारा चलाये जा रहे ऑपरेशन को रोकने की मांग की थी, उसके बाद फिर नक्सलियों की तरफ से समय दिये जाने की अपील की गई है. लेकिन सरकार की तरफ से फिलहाल नक्सलियों द्वारा मांगी गई मोहलत पर कोई विचार नहीं किया गया है और न ही किसी तरह का जवाब दिया गया है. मध्य प्रदेश के बालाघाट में सरकार ने एक होनहार हॉक फोर्स निरीक्षक को खोया है. ऐसे में प्रदेश सरकार किसी तरह से नक्सलियों से बातचीत के मूड में फिलहाल नजर नहीं आ रही है.