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मध्य प्रदेश पुलिस का नया आदेश: हर बड़े क्राइम में होगा सीन रिक्रिएशन, आरोपियों के बचने की राह बंद

भोपाल  मध्य प्रदेश में होने वाले अब हर बड़े अपराध की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस क्राइम सीन का रिक्रिएशन करती दिखाई देगी. अभी तक सिर्फ बड़े शहरों में और किसी बड़े मामले में ही पुलिस इस तरह के रिक्रिएशन करती थी, लेकिन अब हर गंभीर मामले में पुलिस को यह प्रक्रिया अपनानी होगी. मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए सभी जिलों में सीन ऑफ क्राइम यूनिट गठित करने के आदेश दिए हैं. एफएसएल ने इसके लिए एसओपी भी जारी की गई है. क्राइम ऑफ सीन बेहद महत्वपूर्ण एफएसएल के डायरेक्टर शशिकांत शुक्ला ने बताया कि "किसी भी अपराध में सीन ऑफ क्राइम बेहद अहम होता है. यहां अपराध से जुड़े तमाम सबूत होते हैं, इसके मदद से पुलिस को आरोपी तक पहुंचने और उसे कोर्ट से सजा दिलाने तक में काफी मदद मिलती है. खासतौर से पेचीदा मामलों में पुलिस को अपराधी तक पहुंचने में कई बार यहीं से महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगता है. जैसे किसी अपराध में घटनास्थल पर दरवाजे, अन्य किसी सामान या फिर हथियार पर मिलने वाले फिंगर प्रिंट की पहचान करनी होती है. इसी तरह डीएनए के लिए स्वैब के नमूने लेने होते हैं और अन्य सामान को पैकेजिंग करने के अलावा वहां के फोटोग्राफ और वीडियो लेने पड़ते हैं. इसके बाद एक डिटेल रिपोर्ट तैयार होती है. इसलिए करना होता है रिक्रिएशन वे बताते हैं कि कई मामलों में शुरूआती जांच में पुलिस के पास कोई सुराग नहीं होता. ऐसी स्थिति में मौजूदा साक्ष्यों और फोटोग्राफ आदि को देखने के बाद पूरी घटना का रिक्रिएशन किया जाता है. इससे घटना के तह तक पहुंचने में मदद मिलती है. यही वजह है कि अब हर जिले के पुलिस अधिकारियों और एफएसएल अधिकारियों को एसओपी भेजी गई है. इसमें भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत नए आपराधिक कानूनों पर त्वरित कार्रवाई के लिए सीन ऑफ क्राइम यूनिट का गठन का निर्णय लिया गया है. इसके तहत सीन ऑफ क्राइम यूनिट को हर जिले में अलग स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा. इस यूनिट में फोटो यूनिट, फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट, डॉग स्क्वॉड की ज्वाइंट टीम होगी. विशेष तौर से 7 साल और उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में इस यूनिट को अनिवार्य रूप से घटनास्थल की जांच करनी होगी." सबूतों के अभाव में नहीं बचेंगे अपराधी रिटायर्ड डीजी अरुण गुर्टू सभी जिलों में सीन ऑफ क्राइम यूनिट गठित किए जाने के फैसले का स्वागत करते हैं. उनके मुताबिक बड़े अपराधों में यह होना ही चाहिए. इससे पुलिस जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण सबूत हाथ लगते हैं. खासतौर से ब्लाइंड मर्डर जैसे मामलों में पुलिस को घटनास्थल से मिलने वाले सबूत न सिर्फ अपराधी तक पहुंचने बल्कि कोर्ट में अपराधी से अपराध की कड़ी जोड़ने में काफी मदद मिलती है. बड़े मामलों में रिक्रिएशन होने से सजा दिलाने में मदद मिलेगी और सबूतों के अभाव में अपराधी बच नहीं पाएंगे. रिक्रिएशन से चला था पता कहां से आई थी गोली राजधानी भोपाल के कोलार इलाके में अक्टूबर 2025 में गणेश उत्सव के दौरान एक झांकी में खेल रही बच्ची की गोली लगने से मौत हो गई थी. एक्स-रे रिपोर्ट से पता चला कि बच्ची की मौत गोली लगने से हुई. शुरूआती जांच में पुलिस को पता नहीं चल सका कि गोली किस दिशा से आई थी. बाद में पूरे घटनाक्रम का रिक्रिएशन किया गया और बारीकी से एनालिसिस किया गया तो पुलिस आरोपी तक पहुंच गई.

मध्यप्रदेश में बदलाव की आहट: SIR पूरा होते ही कलेक्टरों की सूची बदलेगी, 7 फरवरी को जारी होगी मतदाता सूची

भोपाल प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम चल रहा है। चुनाव आयोग ने कलेक्टर सहित मतदाता सूची के काम से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले पर रोक लगाई है। सरकार को कुछ जिलों में नए कलेक्टर पदस्थ करने हैं। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन सात फरवरी को होगा। इसके बाद ही तबादले किए जाएंगे। वहीं, आयुक्त महिला बाल विकास सहित कुछ अन्य पद रिक्त हैं, जिन पर पदस्थापना जल्द की जाएगी। जिन जिलों में कलेक्टरों को दो वर्ष से अधिक हो चुके हैं, वहां परिवर्तन प्रस्तावित है। शिवपुरी में भी परिवर्तन किया जा सकता है। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागाध्यक्षों के साथ मैदानी स्तर पर अधिकारियों के दायित्व में परिवर्तन की तैयारी की है।   दरअसल, जनवरी में आईएएस अधिकारियों की पदोन्नतियां होंगी। इसके बाद पदस्थापनाएं होंगी लेकिन कलेक्टर सहित अन्य मैदानी अधिकारियों के पदस्थापना में परिवर्तन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य के संपन्न होने के बाद होगा। इसके पहले इसी माह 10 से 12 अधिकारियों को नवीन पदस्थापना दी जाएगी। दरअसल, कुछ पद खाली हैं जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर भरा जाना है। इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार हो चुकी है। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की इस संबंध में बैठक के बाद अंतिम निर्णय हो जाएगा। दिसंबर में होगी डीपीसी उधर, अपर मुख्य सचिव से लेकर समयमान वेतनमान में पदोन्नत होने वाले अधिकारियों के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक दिसंबर में होगी। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। प्रमुख सचिव पद पर एम सेलवेंद्रन तो सचिव पद पर 2010 बैच के अधिकारी पदोन्नत होंगे।

बाघों की गिनती का नया दौर: मध्य प्रदेश में कैमरों का जाल बिछा, 15 नवंबर से डेटा कलेक्शन

सीधी  अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 (Tiger Census 2026) को लेकर संजय टाइगर रिजर्व प्रबंधन तैयारी में जुटा है। इस वर्ष यह गणना पूरी तरह से पेपरलेस होगी। गणना में डाटा कलेक्शन संजय टाइगर रिजर्व के साथ ही सामान्य वन मंडल पश्चिम सीधी, नॉर्थ शहडोल, रीवा, सिंगरौली और वन विकास निगम क्षेत्र से भी किया जाएगा। कर्मचारियों का प्रशिक्षण लगभग पूरा हो चुका है। अब 15 नवंबर से कैमरा ट्रैप लगाने का कार्य प्रारंभ किया जाएगा, जबकि डाटा कलेक्शन का काम 15 नवंबर से होगा। कैमरे एक माह के लिए लगाए जाएंगे ताकि बाघों के साथ अन्य वन्यजीवों के मूवमेंट को कैप्चर किया जा सके। आठ वन परिक्षेत्रों में दो फेज में लगेंगे कैमरा ट्रैप विभागीय अधिकारियों के अनुसार संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कुल आठ वन परिक्षेत्र हैं। पहले फेज में चार परिक्षेत्र (ब्योहारी, दुबरी, वस्तुआ और मड़वास) के 281 ग्रिड में कैमरे लगाए जाएंगे। एक ग्रिड दो वर्ग किलोमीटर का है। हर ग्रिड में दो कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे एक माह तक लगे रहेंगे। इसके बाद दूसरे फेज में बाकी बचे चार परिक्षेत्र (पौड़ी, टमसार, मोहन और भुईमाड़) के 301 ग्रिड में कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरा ट्रैप का पूरा डेटा सीधे वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून जाएगा, जहां एनॉलिसिस की जाएगी। कैमरा ट्रैप लगाने के साथ ही ट्रांजिट लाइन में पैदल चलकर भी बाघों के साथ ही अन्य वन्यजीवों की गणना की जाएगी। यह कार्य दिसंबर माह के पहले सप्ताह में होगा। पहले तीन दिन मांसाहारी वन्य प्राणियों के साक्ष्य एकत्रित होंगे। हर बीट में 15 किलोमीटर के तीन ट्रैक होंगे। वहीं अगले तीन दिन शाकाहारी वन्य प्राणियों का डाटा कलेक्शन होगा। इसके लिए कंपास, रेंज फाउंडर के साथ ही अन्य आवश्यक संसाधन जुटा लिए गए है। ट्रांजिट लाइन में पैदल गणना 1 से 7 दिसंबर के बीच होगी। बाघ की उंचाई के बराबर पेड़ों पर लगाए जाएंगे कैमरे प्रशिक्षित कर्मचारी निर्धारित क्षेत्र में चिह्नित प्वाइंट पर पेड़ों पर कैमरा लगाएंगे। ये कैमरे पेड़ों पर बाघ की ऊंचाई के बराबर लगाए जाएंगे, जिससे कि आसानी से वन्यजीवों को कैप्चर किया जा सके। कैमरा ट्रैप लगने के बाद क्षेत्र में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा, जिससे कि वन्यजीव स्वच्छंद इस क्षेत्र में विचरण कर सकें। बाघ के साथ अन्य वन्य प्राणियों की भी होगी गणना अखिल भारतीय बाघ गणन हर चार वर्ष में होती है। वर्ष 2022 के बाद होने वाली इस गणना में इस बार बाघों के साथ तेंदुआ, जंगली हाथी, भालू और बायसन सहित अन्य वन्य जीव की भी संख्या दर्ज की जाएगी। इस गणना का नाम बाघ एवं अन्य मांसाहारी वन्य प्राणियों का आकलन-2026 दिया गया है। लगभग तैयारी हुई पूरी – एसडीओ बाघ गणना को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं। पहले चरण में टाइगर रिजर्व क्षेत्र के चार वन परिक्षेत्रों में 15 नवंबर से 562 कैमरा टैप लगाने का काम किया जाएगा। इस काम में लगभग 300 कर्मचारी लगेंगे। इस बार गणना पूरी तरह से पेपरलेस है। – सुधीर मिश्रा, एसडीओ संजय दुबरी टाइगर रिजर्व सीधी

MP के पन्ना हीरे को GI Tag, अब विश्व बाज़ार में और चमकेगा ‘पन्ना डायमंड’

पन्ना  सालों के इंतजार के बाद आखिरकार पन्ना को आज बड़ी खुशखबरी मिली है। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की खानों से निकलने वाले हीरे को खास पहचान मिल गई है। इस पहचान का नाम है जीआई टैग। जीआई टैग मिलने से अब पन्ना के हीरे की खास पहचान स्थापित होगी। इस उपलब्धि के कारण मध्य प्रदेश के पन्ना से निकलने वाले हीरे की चमक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगेगी। हीरा व्यवसाय से जुड़े लोगों को होगा बड़ा लाभ पन्ना के हीरे को जीआई टैग मिल गया है। इसकी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। अब पन्ना के हीरों की चमक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ जाएगी। खास बात ये है कि, जिले में हीरा व्यवसाय से जुड़े लोगों को इसका बड़ा लाभ मिल सकेगा। पन्ना में निकलते हैं तीन प्रकार के हीरे सूबे के पन्ना जिले की खदानों से तीन प्रकार के हीरे निकलते हैं। जेम ( व्हाइट कलर ), ऑफ कलर ( मैला रंग ) और इंडस्ट्रियल क्वालिटी (कोका कोला कलर) के हीरे निकलते हैं। उनकी गुणवत्ता की पहचान हीरा कार्यालय के पारखी करते हैं। हीरे की क्वालिटी उसकी चमक के आधार पर तय होती है। इसी आधार पर उसकी कीमत भी सुनिश्चित की जाती है।

जनजातीय गौरव दिवस: स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने नायक को किया नमन

• कैलाश विजयवर्गीय भोपाल 15 नवंबर को पूरा देश जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। मध्यप्रदेश, जहां देश की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है, इस दिवस को और भी गौरवपूर्ण तरीके से मना रहा है। यह सिर्फ उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि उन अनगिनत आदिवासी नायकों के अदम्य साहस, बलिदान और संघर्ष को याद करने का अवसर है, जिन्हें स्वतंत्रता इतिहास में वह स्थान लंबे समय तक नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे। बिरसा मुंडा: जिनका संघर्ष समय से आगे था बिरसा मुंडा एक ऐसे जननायक थे, जिन्होंने भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और गांधी जी से भी बहुत पहले अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष का प्रारंभ किया। भारत में जब संगठित स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत भी नहीं हुई थी, तब झारखंड के दूरस्थ इलाकों और जंगलों में—जहां संचार के साधन नगण्य थे—उन्होंने आदिवासियों को संगठित किया और अंग्रेजी शासन को खुली चुनौती दी। आदिवासी समाज उन्हें ‘धरती आबा’ यानी धरती पिता की उपाधि से सम्मानित करता है। उन्होंने “अबुआ राज एते जाना, महारानी राज टुंडू जाना” का नारा देकर स्वराज की अवधारणा को जंगलों, घाटियों और गांवों तक पहुंचाया। वर्ष 1900 में बिरसा मुंडा के नेतृत्व में आंदोलन के तेज फैलाव से घबराकर, तत्कालीन जिला मैजिस्ट्रेट ने पुलिस और सेना बुलवाई और डोंबिवाड़ी हिल पर हो रही सभा पर गोलीबारी करवा दी, जिसमें लगभग 400 लोग मारे गए। यह घटना 19 साल बाद हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के समान थी, परंतु इस घटना को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया। बिरसा मुंडा को पकड़ने के बाद अंग्रेजों ने निर्णय लिया कि उन्हें बेड़ियों में जकड़कर अदालत ले जाया जाए ताकि आमजन को पता चले कि अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत करने का क्या नतीजा होता है। परंतु यह दांव उल्टा पड़ गया—बिरसा को देखने के लिए रोड के दोनों ओर हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए। उन्हें तीन माह तक सोलिटरी कन्फाइनमेंट में रखा गया और यह भी कहा जाता है कि उन्हें स्लोपॉयज़न दिया गया। अंततः मात्र 25 वर्ष की आयु में वो शहीद हो गए। आदिवासी वीर: जिन्हें इतिहास ने कम याद किया अंग्रेजों ने भारत में अपनी जड़ें मजबूत करते ही यहां की प्राकृतिक संपदा, विशेषकर वन संपदा के दोहन की राह पकड़ी। जो आदिवासियों के साथ संघर्ष का कारण बना। 1857 की क्रांति से लगभग 25 साल पहले,शहीद बुधु भगतने छोटा नागपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के जल, जमीन और वनों पर कब्जे की नीति के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजाया। इसे लकड़ा विद्रोह के नाम से जाना जाता है। वीर बुधु भगत का विद्रोह इतना तीव्र था कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने उनके नाम पर उस समय 1000 रुपये का इनाम रखा था। सिदू और कान्हू मुर्मूने वर्ष 1855–56 में संथाल विद्रोह / हूल आंदोलन का नेतृत्व किया। जून 1855 में भोगनाडीह में 400 गांवों के 50,000 संथालों की सभा हुई, जिसमें संथाल विद्रोह की शुरुआत हुई। इसका नारा था—“करो या मारो… अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो।” अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों का सामना संथालों ने तीर-कमान से किया। कार्ल मार्क्स ने “ नोट्स ऑन इंडियन हिस्ट्री” में संथाल क्रांति को भारत की पहली जनक्रांति कहा। मध्यप्रदेश के निमाड़ का नाम आते ही टांट्या मामा या टांट्या भील का स्मरण होता है। उन्हें निमाड़ का शेर कहा जाता हे वे लगभग पोने 7 फीट ऊंचे, तेजस्वी व्यक्तित्व वाले योद्धा थे। वे अंग्रेजों से लूटा धन और अनाज गरीबों तक पहुंचाते थे। उन्हें ‘भारत का रॉबिन हुड’ कहा जाता था। उनका आतंक अंग्रेजों की छावनियों तक फैला रहता था, जहां अतिरिक्त सुरक्षा इसलिए रहती थी कि “कहीं टांट्या न आ जाए।” अंततः अंग्रेजों ने छल से उन्हें पकड़ा, जबलपुर में फांसी दी और उनका शव पातालपानी क्षेत्र में लाकर रख दिया, ताकि आम लोगों को पता चले कि अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने का क्या नतीजा होता है। उनके पकड़े जाने की खबर अंतर्राष्ट्रीय अखबारों में, विशेषकर अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स समाचार पत्र में नवंबर 1889, में छापी। आप सोच सकते हे कि निमाड़/मालवा के छोटे से क्षेत्र में रहने वाले इस जननायक ने भारत में अंग्रेजों की कितनी नाक में दम कर रखी होगी कि उसके बारे में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया बात कर रहा था। इसी तरह राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह भारत के पहले ऐसे रजवाड़े थे जिन्हें वर्ष 1857 की क्रांति को कुचलने की कड़ी में अंग्रेजों द्वारा तोप के मुंह से बांधकर उड़ाया गया। न्याय आयोग, जिसके सामने उन्हें पेश किया गया था, ने उनके सामने जान बचाने के लिए धर्मांतरण सहित कई विकल्प रखे, दोनों ने उन्हें मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें जबलपुर में “ब्लोइंग फ्रॉम ए गन” की सजा दी गई। बड़वानी क्षेत्र के भीमा नायकभीलों के योद्धा थे, जिन्होंने वर्ष 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था। शहीद भीमा नायक का कार्य क्षेत्र बड़वानी रियासत से महाराष्ट्र के खानदेश तक फैला था। उन्हें आदिवासियों का पहला योद्धा माना जाता है, जिसे अंडमान के ‘काला पानी’ में फांसी दी गई। वर्ष 1857 के संग्राम के समय अंबापावनी युद्ध में भीमा नायक की महत्वपूर्ण भूमिका थी। कहा जाता है कि जब तात्या टोपे निमाड़ आए थे, तो उनकी भेंट भीमा नायक से हुई थी और भीमा नायक ने उन्हें नर्मदा पार करने में सहयोग दिया था। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को लोहे के चने चबवाने वाले पचमढ़ी के आदिवासी राजा भभूत सिंह नर्मदांचल के शिवाजी कहलाते थे। जंगलों में रहकर अंग्रेजों को तीन साल तक परेशान करने वाले राजा भभूत सिंह गोरिल्ला युद्ध के साथ-साथ मधुमक्खी के छत्ते से हमला करने में भी माहिर थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तात्या टोपे की मदद भी की थी। मढ़ई और पचमढ़ी के बीच घने जंगलों में आज भी भभूत सिंह के किले का द्वार और लोहारों की भट्टियां मौजूद हैं, जिससे पता चलता है कि वे न केवल किला बनाकर लड़ रहे थे, बल्कि बड़े पैमाने पर हथियार बनाने की क्षमता भी रखते थे। आदिवासी संघर्ष: स्वतंत्रता की रीढ़ भारतीय इतिहास में आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। चाहे कोल क्रांति हो, उलगुलान हो, संथाल क्रांति हो, महाराणा प्रताप के साथ देने वाले वीर आदिवासी योद्धा हों या सह्याद्री के घने जंगलों में छत्रपति शिवाजी महाराज को ताकत … Read more

मध्य प्रदेश में फ्री राशन घोटाला: 1.41 लाख लखपति उठा रहे गरीबों का हक

बुरहानपुर  मध्य प्रदेश में मुफ्त राशन योजना में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है. मुफ्त राशन योजना के तहत मध्य प्रदेश में 12 लाख ऐसे हितग्राही हैं जो मर चुके हैं. लेकिन विभाग उनको हर महीने पीडीएस का राशन दे रहा है. और जो वाकई में गरीब हैं वह राशन योजना से वंचित हैं. वहीं मध्य प्रदेश में 5 करोड़ से अधिक हितग्राही पीडीएस का राशन ले रहे थे. अब इनकी ई-केवायसी कराई जा रही है. जो बीपीएल कार्ड के लिए पात्र नहीं हैं, उनके नाम काटे जा रहे हैं. 141,000 से ज्यादा अमीर लोग खा रहे गरीबों का हक खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारी जारी सूची के मुताबिक, पूरे मध्य प्रदेश में 1 लाख 41 हजार 249 लखपति लोग फ्री राशन का लाभ उठा रहे थे. अब नोटिस के बाद 37 हजार 484 अपात्र लोगों के नाम हटा दिए हैं. बात की जाए बुरहानपुर जिले की तो यहां केंद्र सरकार ने खाद्य आपूर्ति विभाग को 1297 अमीर हितग्राहियों की सूची भेजी है. साथ ही पोर्टल डेटा से मिली सूचना ने बुरहानपुर जिले में चल रही गरीब कल्याण योजना की असलियत उजागर कर दी है. चौंकाने वाली बात यह है कि 10 से 20 लाख रुपये की संपत्ति रखने वाले लोग भी बीपीएल राशन कार्ड पर मुफ्त अनाज उठा रहे थे. 1297 लोगों को नोटिस जारी किए खाद्य आपूर्ति विभाग ने बुरहानपुर में 1297 लोगों को नोटिस जारी किए थे, उनसे जवाब मांगा गया था, लेकिन 282 बीपीएल कार्ड धारकों ने ही अब तक जवाब पेश किया है. फिलहाल विभाग ने 1015 लोगों के नाम हटा दिए हैं. हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि इनके लोगों के भी नाम हटा दिए जाएंगे. जांच में सामने आया है कि पेटेंट से बंद किए गए 1297 कार्डधारियों के पास लाखों की संपत्ति, पक्के मकान, जमीन-जायदाद और आय के बेहतर स्रोत मौजूद हैं. कंपनी के डायरेक्टर ले रहे गरीबों का राशन इनमें से कई दुकानदार, व्यापारी और कंपनी के डायरेक्टर हैं, जो अच्छी खासी संपत्ति के मालिक हैं, फिर भी ये खुद को गरीब बताकर सरकारी खजाने पर बोझ बने हुए थे. विभाग ने 1015 के बीपीएल परिवारों की सूची से बेदखल कर दिया है. शेष ने नोटिस का जवाब दिया है, लेकिन इन्हें भी बेदखल कर दिया जाएगा, क्योंकि यह भी टेक्स भुगतान करते हैं, बावजूद इसके योजनाओं का लाभ और फ्री राशन के लिए गरीब बनकर लाभ उठा रहे थे. 282 लोगों ने स्वीकार की गलती विभाग की कार्रवाई के बाद 1297 में से केवल 282 लोगों ने अपनी गलती स्वीकार की है. इसके बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने 1015 लोगों की पात्रता पत्री सरेंडर कराई है, बाकी कार्डधारी अभी भी अपने को सही ठहराने की कोशिश में लगे हैं. सूत्रों के अनुसार, इन लोगों ने गलत जानकारी देकर बीपीएल कार्ड बनवा लिए थे, आधार डेटा और सरकारी योजनाओं की लापरवाही का फायदा उठाकर सालों से मुफ्त राशन और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे. बुरहानपुर की खाद्य आपूर्ति अधिकारी अर्चना नागपुरे ने बताया, ''केंद्र सरकार ने ऐसे लोगों की सूची दी है जिनकी आय 6 लाख से ज्यादा होने पर भी उनके द्वारा फ्री राशन का लाभ लिया जा रहा था. शासन ने ऐसे लोगों की जांच करने के निर्देश दिए थे. अधिकतर उनमें अपात्र हैं, जिन्होंने इनकम टैक्स भरा. ऐसे लोगों को 15 दिन का टाइम दिया था. इनमें से 282 लोगों ने ही गलती स्वीकार की है. अभी तक हमने 1015 लोगों को पोस्टल से हटा दिया है.'' खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब ऐसे सभी फर्जी लाभार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. दुकानदारों और कंपनियों के डेटाबेस की भी जांच शुरू कर दी गई है, सरकारी योजनाओं का लाभ अब केवल वास्तविक पात्र लोगों को ही मिलेगा.

CM परिवार का बड़ा आयोजन: सामूहिक विवाह सम्मेलन में बेटे-बहू के फेरे, खास मेहमानों को निमंत्रण

उज्जैन  ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव फिर चर्चा में हैं. वजह है उनके छोटे बेटे की शादी. वे सादगी का संदेश देने के लिए बेटे की शादी को भव्य आयोजन की बजाय सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल कर रहे हैं. शादी 30 नवंबर को उज्जैन में होगी. दूल्हा हैं डॉ. अभिमन्यु यादव, जो सीएम के छोटे बेटे हैं. वे अभी सर्जरी में मास्टर्स कर रहे हैं और सामाजिक कामों में भी सक्रिय रहते हैं. दुल्हन हैं खरगोन के किसान दिनेश यादव की बेटी डॉ. इशिता यादव. इशिता ने एमबीबीएस पूरा कर लिया है और अब पीजी की पढ़ाई कर रही हैं. खास बात यह है कि इशिता, सीएम की बड़ी बेटी डॉ. आकांक्षा की ननद भी हैं. यानी दोनों परिवार पहले से रिश्तेदार हैं. शादी मुख्यमंत्री आवास में नहीं होगी सीएम मोहन यादव ने खुद ट्वीट करके बताया कि शादी मुख्यमंत्री आवास में नहीं, बल्कि उज्जैन के होटल अथर्व में होगी. इसमें सिर्फ सीमित मेहमानों को बुलाया जाएगा. दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य के मंत्री, बड़े अधिकारी और भाजपा के प्रमुख नेता शामिल होंगे.यह आयोजन सिर्फ एक शादी नहीं होगा. इसमें पारंपरिक रस्मों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों की भी पहल होगी. जैसे गरीब कन्याओं की मदद या अन्य समाजसेवा के काम. इससे सामाजिक समरसता का संदेश जाएगा. अभिमन्यु-इशिता की शादी की कुछ रस्में उज्जैन स्थित सीएम हाउस जबकि कुछ अथर्व होटल में होंगी।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की शादी खरगोन की डॉ. इशिता से सामूहिक विवाह समारोह में होगी। करीब 5 दिन तक चलने वाले कार्यक्रम के लिए उज्जैन में दो होटल बुक किए गए हैं। कुछ रस्में उज्जैन स्थित सीएम हाउस में ही होंगे।  अभिमन्यु-इशिता के फेरे 30 नवंबर को अथर्व होटल के पास मैदान में हो रहे सामूहिक सम्मेलन में होंगे। रिसेप्शन अथर्व होटल में होगा।परिवार से जुड़े सूत्रों की मानें तो नवंबर महीने की 30 तारीख को उज्जैन में एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में सीएम यादव के छोटे बेटे डॉक्टर अभिमन्यु यादव खरगोन की रहने वाली डॉक्टर इशिता यादव के साथ शादी के बंधन में बंधेंगे. इस सम्मेलन में करीब 21 जोड़े शादी करेंगे, जिनमें से एक मुख्यमंत्री के बेटे और बहू हो सकते हैं.  शादी समारोह में प्रदेश के कुछ खास लोगों को ही आमंत्रित किया गया है। इसमें दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य के मंत्री, वरिष्ठ अफसर और भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हो सकते हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव के 26 नवंबर को ही उज्जैन पहुंचने की संभावना है। यह पहला मौका होगा, जब किसी मुख्यमंत्री के बेटे के फेरे की रस्में सामूहिक विवाह समारोह में पूरी होंगी। इसमें डॉ. अभिमन्यु और डॉ. इशिता के अलावा 20 अन्य जोड़ों की शादी होगी। दोनों परिवारों की बेटियां एक-दूसरे के घर की बहू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की सगाई करीब 5 महीने पहले खरगोन के किसान दिनेश पटेल की बेटी डॉ. इशिता से हुई है। अभिमन्‍यु भोपाल के एलएनसीटी मेडिकल कॉलेज से मास्‍टर्स इन सर्जरी कर रहे हैं। वे सेकेंड ईयर में हैं। डॉ. इशिता भी एमबीबीएस के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं। सीएम की बेटी डॉ. आकांक्षा यादव, दिनेश यादव की बहू हैं। अब दिनेश यादव की बेटी इशिता डॉ. मोहन यादव के परिवार की बहू बनने जा रही हैं।एक और खास बात ये है कि कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, दिनेश यादव के मामा के बेटे हैं। यानी एमपी के पूर्व डिप्टी सीएम स्वर्गीय सुभाष यादव दिनेश यादव के मामा थे। सीएम ने शेयर की थी सगाई की फोटो सीएम डॉ. मोहन यादव और सीमा यादव के दो बेटे और ए‍क बेटी हैं। बड़े बेटे और बेटी की शादी पहले ही हो चुकी है।सीएम ने बेटे की सगाई की फोटो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर करते हुए लिखा था- बाबा श्री महाकाल और श्री गोपाल कृष्ण की परम कृपा, पूज्य पिता और माताश्री के आशीर्वाद से पुत्र चिरंजीवी डॉ. अभिमन्यु यादव की सगाई, खरगोन के दिनेश यादव जी की सुपुत्री डॉ. इशिता यादव के साथ संपन्न हुई।

प्रदेश में अधिक से अधिक बनें स्वावलंबी गो-शालाएँ : राज्यमंत्री पटेल

गो-शाला का किया निरीक्षण भोपाल  पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में गो-संरक्षण एवं गो-संवर्धन के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में पहली बार निराश्रित गो-वंश के समुचित पालन-पोषण और गो-शालाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए "स्वावलंबी गो-शाला नीति" बनाई गई है, जिसका पूरे प्रदेश में सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। गो-पालन में समुदाय की भागीदारी बहुत आवश्यक है। राज्यमंत्री श्री पटेल ने शुक्रवार को पटिया वाले बाबा स्थान, मुरैना पहुंचकर दर्शन-पूजन किया और वहां संचालित गो-शाला का निरीक्षण किया। राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि गो-शालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने अनूठी पहल की है। प्रदेश में स्वावलंबी गो-शालाओं (गोकुल धाम) की स्थापना की नीति-2025 लागू की गई है, जिसमें न्यूनतम 5000 गो-वंश के व्यवस्थापन के लिए राज्य सरकार द्वारा 130 एकड़ तक भूमि गो-शालाओं को उपयोग के लिए दिए जाने को प्रावधान है। इसमें से 5 एकड़ भूमि व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दी जाएगी। जिले में स्वावलंबी गो-शालाएँ विकसित हों, इसके लिए प्रदेश स्तर से 20 गो-शालाओं की स्वीकृति दी गई है, जिनमें मुरैना भी शामिल है। आने वाले समय में प्रत्येक जिले में स्वावलंबी गो-शाला स्थापित की जाएगी। राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि पटिया वाले बाबा स्थान मुरैना में जनसहयोग से गो-शाला का सुव्यवस्थित संचालन प्रशंसनीय है। यहां नंदी गो-वंश, स्वस्थ गायें, बीमार गायें और बछड़ों को अलग-अलग शेड में रखा गया है। गो-शाला में सैक्स सोर्टेड सीमन तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान किया जा रहा है, यह सराहनीय है। श्री पटेल ने भूसा भंडारण स्थल, दाना मिश्रण व्यवस्था तथा गो-वंश के पोषण के लिए किए गए प्रबंधों का निरीक्षण किया। उन्होंने गो-शाला के लिए एक अतिरिक्त शेड निर्माण की घोषणा भी की। उन्होंने पशुपालन उप संचालक को पशु-औषधालय मुरैना के उन्नयन का प्रस्ताव भोपाल भेजने के निर्देश दिए। श्री पटेल ने बताया कि आने वाले समय में नस्ल सुधार पर ध्यान देते हुए देशी नस्लों के साथ जर्सी जैसी दुग्ध उत्पादक नस्लों को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। गिर गाय श्योपुर जिले से लाई जाती है, इसे ब्राजील और गुजरात में बड़े पैमाने पर पाला जा रहा है, जहाँ यह गाय 60 लीटर तक दूध देती है। राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि गोबर गैस, सीएनजी प्लांट, सोलर प्लांट और नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाए। भविष्य में बछिया (हीफर) रोजगार का प्रभावी साधन बन सकती है। इस अवसर पर गो-शाला संचालक श्री दीनबंधु महाराज, सचिव श्री रवि गुप्ता, उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ. बी.के. शर्मा, श्री रतन दास वैष्णव, श्री कौशल शर्मा आदि उपस्थित रहे। 

श्रम विभाग ने एमपी पावर जनरेटिंग कंपनी के बारह पावर हाउस को दी 5 स्टार श्रम रेटिंग: ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी लिमिटेड (MPPGCL) ने श्रम कानूनों के उत्कृष्ट अनुपालन और श्रमिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। श्रम विभाग द्वारा कम्पनी के चार ताप विद्युत उत्पादन गृहों व आठ जल विद्युत गृह को ‘फाइव स्टार श्रम स्टार रेटिंग’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान कम्पनी की उच्च कार्यसंस्कृति, पारदर्शिता, शत-प्रतिशत नियामकीय अनुपालन व श्रमिक हितों को सर्वोपरि रखने के दृष्टिकोण का सशक्त प्रमाण है। यह उपलब्धि पॉवर जनरेटिंग कम्पनी के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह खंडवा, अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर, गांधी सागर जल विद्युत गृह, टोंस जल विद्युत गृह सिरमौर,राजघाट जल विद्युत गृह, बाणसागर जल विद्युत गृह-दो सिलपरा, बाणसागर जल विद्युत गृह-तीन देवलोंद, बाणसागर जल विद्युत गृह-चार झिन्ना, मरहीखेड़ा जल विद्युत गृह और बिरसिंगपुर जल विद्युत गृह को हासिल हुई है। श्रम विभाग द्वारा श्रम कानूनों के अनुपालन, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रावधानों तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रोत्साहित करने के लिये ”श्रम स्टार रेटिंग” प्रारंभ की गई है। यह सम्मान संस्थान द्वारा श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं के अपनाने तथा श्रम कानूनों के प्रति स्वैच्छिक अनुपालन की प्रतिबद्धता का द्योतक है। गत वर्षों में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में कम्पनी ने विभिन्न महत्वपूर्ण कीर्तिमान बनाएं है जो की न सिर्फ कम्पनी की नियामकीय प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि श्रमिकों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की उसकी नीति को भी सशक्त रूप से उजागर करती है। कम्पनी के प्रबंध संचालक श्री मनजीत सिंह ने इस उपलब्धि पर सभी विद्युत उत्पादन गृहों के मुख्य अभियंताओं, अभियंताओं व कार्मिकों को इस उपलब्धि का श्रेय व बधाई देते हुए कहा-“यह सम्मान हमारी कार्यसंस्कृति, अनुशासन और श्रमिक कल्याण के प्रति हमारी निष्ठा का परिणाम है। हमें गर्व है कि न केवल कम्पनी सभी स्तरों पर श्रमिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंधित विभिन्न नीतियां बना रही है, बल्कि हर मानक पर उत्कृष्टता की नई मिसालें भी स्थापित कर रहे हैं, जिसमें सभी कर्मचारियों का योगदान है।” 

प्रदेश में वाहन चोरी नियंत्रण के प्रयासों को मिली महत्वपूर्ण सफलता

मध्यप्रदेश पुलिस का वाहन चोरियों पर सुदृढ़ प्रहार 12 दिनों में 52 मोटरसाइकिलें, 1 ट्रैक्टर और 1 डंपर बरामद भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा वाहन चोरी के विरुद्ध संचालित विशेष अभियान के अंतर्गत इस माह उल्लेखनीय सफलताएँ दर्ज की गई हैं। सतत निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों से अब तक 31 मोटरसाइकिलें, एक ट्रैक्टर और एक डंपर बरामद किए गए हैं। ये उपलब्धियाँ पुनः सिद्ध करती हैं कि मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए निरंतर और दृढ़तापूर्वक कार्य कर रही है। जिला-स्तरीय हुई प्रमुख कार्रवाई अशोकनगर- में थाना बहादुरपुर पुलिस ने वाहन चोरी में संलिप्त गिरोह के 13 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर 7 मोटरसाइकिलें बरामद कीं। बैतूल के थाना मुलताई क्षेत्र में आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी की मोटरसाइकिल जब्त की गई।  दमोह- में थाना देहात पुलिस ने 6 मोटरसाइकिलें और सोने-चांदी के जेवरात बरामद किए। एक अन्य प्रकरण में लूट व वाहन चोरी में लिप्त गिरोह से 3 मोटरसाइकिलें, 3 मोबाइल फोन और एक चांदी की अंगूठी जब्त की गई।  शिवपुरी- में थाना नरवर चौकी मगरौनी क्षेत्र से चोरी गया महिंद्रा ट्रैक्टर मात्र चार घंटे में बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। इसके अतिरिक्त थाना बैराड़, करैरा और देहात क्षेत्रों में भी चोरी की एक-एक मोटरसाइकिल जब्त कर तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया।  मंदसौर- में थाना कोतवाली पुलिस ने वाहन चोरी में लिप्त व्यक्ति से 3 मोटरसाइकिलें जब्त कीं।  शाजापुर- में तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस टीम ने लगभग 500 CCTV फुटेज खंगाले तथा 2000 किलोमीटर की दूरी तय कर अंतर्राज्यीय चोरों द्वारा चोरी किए गए 62 लाख रुपये मूल्य के डंपर को बरामद किया।  मंडला- में थाना कोतवाली पुलिस ने 3 व्यक्तियों से 7 मोटरसाइकिलें बरामद कीं, जबकि थाना देहात पुलिस ने चोरी की एक और मोटरसाइकिल जब्त की।  ग्वालियर- में थाना कोतवाली पुलिस ने दो व्यक्तियों से चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की।  छतरपुर जिले में अभियान के दौरान तकनीकी विश्लेषण, भौतिक साक्ष्यों और अंतर्राज्यीय मुखबिर तंत्र के आधार पर महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई। जिले में 21 मोटरसाइकिलें (मूल्य 16 लाख रुपये से अधिक) बरामद की गईं, जिन्हें चोरी के बाद गिरवी रखकर अवैध लाभ अर्जित किया जा रहा था। बरामद वाहनों में सागर जिले में दर्ज अपराधों से संबंधित 3 मोटरसाइकिलें भी शामिल हैं। वर्ष 2025 में कोतवाली, सिविल लाइन, खजुराहो और नौगांव क्षेत्रों में कार्रवाई कर 6 बड़े गिरोहों का पर्दाफाश किया गया तथा 115 से अधिक मोटरसाइकिलें बरामद की जा चुकी हैं।  उल्लेखनीय है कि पिछले माह भी मध्यप्रदेश पुलिस की त्वरित कार्रवाइयों से विभिन्न जिलों से लगभग 120 दोपहिया वाहन बरामद किए गए थे। यह निरंतर सफलता दर्शाती है कि वाहन चोरी की रोकथाम हेतु पुलिस की रणनीति, सतत निगरानी और तकनीकी तंत्र प्रदेशभर में प्रभावी रूप से कार्य कर रहा है।  हाई-टेक विश्लेषण, व्यापक CCTV निगरानी, फील्ड इंटेलिजेंस और पुलिस टीमों की सतर्कता के कारण इन कार्रवाइयों में तीव्रता और ठोस परिणाम सुनिश्चित हुए हैं। पुलिस अधीक्षकों के मार्गदर्शन और थाना प्रभारियों के नेतृत्व में की गई ये संयुक्त कार्रवाइयाँ नागरिकों में सुरक्षा और भरोसे की भावना को और मजबूत करती हैं। मध्यप्रदेश पुलिस का यह सतत अभियान राज्य में वाहन चोरी जैसे अपराधों पर व्यापक अंकुश स्थापित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।