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खराब सड़क निर्माण पर सख्त हाईकोर्ट: NHAI को नोटिस, सड़क सुधारने के निर्देश

  इंदौर  मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट की इदौर खंडपीठ ने NHAI (National Highways Authority of India भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के बनाए गए 8.5 किलोमीटर के हाईवे (सड़क) को लेकर लगी याचिका मामले में 15 दिसंबर तक जवाब मांगा है। गड्ढों के कारण हो रहे हादसे याचिकाकर्ता के एडवोकेट के मुताबिक 106 करोड रुपए की लागत से बनी सड़क 6 महीने में उखड़कर गड्ढे में तब्दील हो गई है। मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने NHAI से 15 दिसंबर तक जवाब मांगा है। याचिका में बताया गया है कि सड़क पर हुए गड्ढों के कारण हादसे हो रहे हैं। इंदौर सेंधवा हाईवे का मामला इंदौर हाईकोर्ट ने NHAI को सड़क ठीक करने के निर्देश दिए हैं। साल 2009 से 2024 के बीच 3000 से ज्याद एक्सीडेंट में 450 से ज्यादा मौतें हो चुकी है। घाट को कम करने के लिए 8.5 किलोमीटर का रोड का निर्माण किया था। जनहित याचिका लगने के बाद ही इंदौर सेंधवा हाईवे का यह रोड बनाया गया था।

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर सिंघार का BJP पर वार—आदिवासी वोट बैंक की राजनीति कर रही पार्टी

भोपाल  नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शनिवार को महान क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “भगवान बिरसा मुंडा जी ने देश की आजादी और आदिवासी धर्म-संस्कृति की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनकी 150वीं जयंती पर हम सभी को उनके बलिदान को याद करना चाहिए।” सिंघार ने भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “भाजपा देश में आदिवासी वोट बैंक की राजनीति कर रही है। बिरसा मुंडा जी की जयंती पर पखवाड़ा मना तो रही है, लेकिन 150वीं जयंती के अवसर पर आदिवासियों के लिए प्रधानमंत्री द्वारा कोई भी घोषणा नहीं की गई।”   आदिवासी युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा, “मैं सभी से आह्वान करता हूं कि बिरसा मुंडा जी की जयंती पर हम शपथ लें कि उनके विचारों को जीवित रखेंगे और अपने धर्म व संस्कृति का संरक्षण करेंगे।”  बता दें, 15 नवंबर को देशभर में बिरसा मुंडा की जयंती ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाई जा रही है।

TR-4 बस में धुआँ फैलते ही मची अफरा-तफरी, समय रहते चालक-परिचालक सुरक्षित बाहर निकले

 भोपाल राजधानी भोपाल की सड़कों पर उस समय अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला, जब बीसीएलएल की लो फ्लोर रेड बस में आग लगने की घटना होते-होते बच गई। पूरा मामला भोपाल के लिंक रोड नंबर एक का है, जहां बोर्ड ऑफिस चौराहे से न्यू मार्केट की ओर जा रही लो फ्लोर बस से अचानक धुआं निकलने लगा। बस लगातार सड़क पर दौड़ रही थी, लेकिन समय रहते चालक और यात्रियों की सतर्कता से धुएं को काबू कर लिया गया। घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। यह बस टीआर-4 रूट पर बैरागढ़ से एम्स तक संचालित होती है। गौरतलब है कि बीसीएलएल की बसों की खराब हालत को लेकर इलाके में लगातार सवाल उठते रहे हैं। अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

मध्यप्रदेश के सहकारी बैंकों में डिजिटल पेमेंट की बड़ी छलांग, NEFT-RTGS हुआ शुरू

भोपाल अपेक्स बैंक के प्रशासक एवं मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव, सहकारिता श्री डी.पी.आहूजा ने आज अपेक्स बैंक मुख्यालय में 72 वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह की शुरूआत पर मध्यप्रदेश के 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की पैक्स कम्प्यूटराईजेशन योजना पर राज्य स्तरीय क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण समिति की बैठक को संबोधित करते हुए यह निर्देश दिये कि सभी पैक्स को सॉफ्टवेयर कार्यप्रणाली पर लाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही मध्यप्रदेश के सभी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अपेक्स बैंक के सदस्य बनकर सीधे एन.ई.एफ.टी.(नेफ्ट) एवं आर.टी.जी.एस. की सुविधा आरंभ करेंगे।  उन्होंने कहा कि व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के दौर में यदि आधुनिक तकनीकी का सहकारी बैंकें उपयोग करेंगी तो निश्चित रूप से इसका भरपूर लाभ बैंक के व्यवसाय संवर्द्धन को मिलेगा और बैंक के काम में पारदर्शिता व गति भी आयेगी ।  उन्होंने कहा कि आज से 72 वां अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह आरंभ हो रहा है एवं सरकार की मंशानुरूप अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के दौरान हमें ''सहकार से समृद्धि'' की दिशा में अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन पूर्ण ईमानदारी, समर्पण एवं निष्ठाभाव से सम्पादित करने का भी आज संकल्प लेना होगा ।  बैठक में अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने अपेक्षा की कि आज के चुनौतीपूर्ण दौर में व्यवसाय का विविधीकरण बहुत जरूरी हो गया है, अतः हमें पारम्परिक कार्यप्रणाली के बजाय नवीन संसाधनों का उपयोग आई.बी.पी.एस. के माध्यम से चयनित नवीन अधिकारियों/कर्मचारियों से कराने की शुरूआत करना चाहिए ।  इसके लिये हम अपेक्स बैंक स्तर पर एवं जिला स्तर पर भी प्रशिक्षण समय-समय पर प्रदान कर रहे हैं, फिर भी यदि आपको किसी भी प्रकार की कोई समस्या आती है तो हमें बताईये, हरसंभव उसका निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जायेगा । उन्होंने यह भी कहा कि आज देश में मध्यप्रदेश का अपेक्स बैंक एकमात्र बैंक है, जिसने देश की बैंकिंग क्षेत्र में  भर्ती करने वाली सबसे बड़ी संस्था आई.बी.पी.एस. के माध्यम से पूरे प्रदेश में अधिकारियों/कर्मचारियों की भर्ती की है, जिसका अनुसरण देश के अन्य राज्यों द्वारा भी करने के प्रयास शुरू हो गये हैं और हमारी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी हुई है । बैठक में श्री अरूण मिश्र, वि.क.अ., श्री के.टी.सज्जन, उप महाप्रबंधक एवं श्री अरविंद बौद्ध, वि.क.अ. ने बैंकिंग, कृषि अकृषि ऋण वितरण, वसूली, उपार्जन, पैक्स कम्प्यूटराईजेशन सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किये ।   बैठक में आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक श्री मनोज पुष्प, नाबार्ड मध्यप्रदेश की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती सी.सरस्वती, अपेक्स बैंक की विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी श्रीमती अरूणा दुबे, उप महाप्रबंधक नाबार्ड श्री नन्दू के.नायक के साथ बैंक के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण तथा 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारीगण भी उपस्थित हुए ।

मालती राय का अचानक दौरा: रैन बसेरा की खामियाँ देख अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के आदेश

भोपाल राजधानी भोपाल में कड़ाके की ठंड के बीच महापौर मालती राय ने देर रात शाहजहानी पार्क स्थित रैन बसेरे का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त करने के सख्त निर्देश दिए। महापौर मालती राय ने बताया, यह भोपाल का सबसे बड़ा रैन बसेरा है। सर्दी तेज होने के कारण मैंने स्वयं जाकर देखा कि यहां रुकने वाले लोगों को गर्म कंबल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। पिछले साल हमने निर्णय लिया था कि सभी रैन बसेरों में सर्दियों में हीटर लगाए जाएं। आज उसकी व्यवस्था की भी जांच की गई है। उन्होंने आगे कहा कि केयरटेकर को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि शराब या किसी मादक पदार्थ का सेवन करके आने वाले व्यक्तियों को रैन बसेरे में प्रवेश न दिया जाए, क्योंकि इससे अन्य जरूरतमंदों को परेशानी होती है। निरीक्षण के बाद महापौर ने नगर निगम अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के आदेश दिए। शहर के सभी रैन बसेरों में हीटर, गर्म कंबल, स्वच्छ बिस्तर और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

कोर्ट में चूक या साज़िश? बिना अनुमति जारी वारंट से हड़कंप, पीड़ित पूरी रात हिरासत में

 इंदौर  जिला अदालत में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। घरेलू हिंसा के एक केस में कोर्ट के आदेश के बिना ही पति के खिलाफ वसूली वारंट निकल गया। बिना आदेश के जारी इस फर्जी वारंट को लेकर एसपी से लेकर थाने के टीआई तक पूरी पुलिस टीम तामिली में लग गई और विकलांग शासकीय शिक्षक पति को पकड़कर रातभर लॉकअप में रख दिया। जब पीड़ित को अगले दिन कोर्ट में ले जाया गया तो न्यायालय भी दंग रह गया कि ऐसा वारंट तो कभी जारी हुआ ही नहीं। कोर्ट ने तत्काल पति को रिहा करने का आदेश दिया और वारंट जारी करने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संबंधित न्यायालयीन अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा। घटना ने जिला न्यायालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी वसूली का पूरा खेल जानकारी के मुताबिक पत्नी ने घरेलू हिंसा के मामले में 8,500 रुपये अंतरिम भरण-पोषण का आदेश प्राप्त किया था। पति ने इसे वरिष्ठ न्यायालय में चुनौती दी और वरिष्ठ न्यायालय ने यह आदेश रद्द कर दिया। आदेश रद्द होने के बाद भी पत्नी ने चालाकी से उसी अस्तित्वहीन आदेश पर वसूली का केस एक अन्य कोर्ट में लगा दिया। कोर्ट ने सिर्फ नोटिस जारी किए थे, किसी भी तरह के वारंट का आदेश जारी नहीं किया था। इसके बावजूद पत्नी ने प्रोसेस राइटर को गुमराह करते हुए बिना आदेश के वसूली वारंट निकलवा लिया, जिसमें तामिली के लिए एसपी इंदौर का नाम भी फर्जी रूप से दर्ज करवा दिया गया। वारंट के कागज पर “कोर्ट आदेश” देखकर पुलिस भी भ्रमित हो गई और हातोद थाना टीआई सहित पूरी टीम पति को पकड़ लाने में लग गई। रातभर लॉकअप, समाज में अपमान विकलांग शासकीय शिक्षक पति को रातभर लॉकअप में रहना पड़ा। अपमान का दर्द अलग।अगले दिन कोर्ट को जब यह बताया गया कि आदेश पत्रिका में वारंट का कोई आदेश है ही नहीं, तो कोर्ट हतप्रद रह गया और तुरंत पति को रिहा करने के निर्देश दिए।कोर्ट ने इस मामले में लापरवाही पर गंभीर रुख अपनाया और संबंधित अधिकारी से जवाब तलब किया। पत्नी, कोर्ट स्टाफ और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की मांग पीड़ित पति ने इस पूरे मामले में आरोप लगाते हुए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस, प्रशासनिक न्यायमूर्ति इंदौर और जिला जज इंदौर को याचिका देकर स्वतः संज्ञान लेने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।पीड़ित का आरोप है कि पत्नी ने प्रोसेस राइटर सहित अज्ञात लोगों से मिलीभगत कर फर्जी वारंट निकलवाया, जो धारा 245, 246, 247 BNS के तहत गंभीर अपराध है, जिसकी सजा दो साल तक हो सकती है। बिना आदेश वारंट दंडनीय अपराध हाईकोर्ट एडवोकेट कृष्ण कुमार कुन्हारे ने बताया कि यह मामला न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाला है। पत्नी ने कपटपूर्वक झूठी वसूली का केस लगाया और बिना आदेश वारंट जारी हुआ, जो सीधे-सीधे दंडनीय अपराध है। उन्होंने बताया कि पीड़ित ने हाई कोर्ट में ज्ञापन देकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है।एडवोकेट डॉ. रूपाली राठौर ने कहा कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और ऐसे मामलों में माननीय न्यायालय स्वयं भी संज्ञान ले सकता है।

72 वें सहकारी सप्ताह पर अपेक्स बैंक अधिकारियों/कर्मचारियों ने ली ईमानदारी एवं शुचिता की शपथ: मनोज गुप्ता, प्रबंध संचालक

भोपाल अपेक्स बैंक, मुख्यालय, भोपाल के टी.टी.नगर स्थित प्रांगण में 72 वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह के आयोजन की शुरूआत हर्षोंल्लास के साथ हुई।  बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने ’’सहकारी ध्वज’’ फहराया एवं बैंक के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ईमानदारी एवं समर्पण भाव से शुचिता के साथ अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निवर्हन करने की शपथ दिलाई एवं सहकारिता अमर रहे के नारे भी लगवाए।   इस अवसर पर बैंक के विषेष कर्तव्यस्थ अधिकारी श्रीमती अरूणा दुबे, श्री अरूण मिश्र, श्री संजय मोहन भटनागर, श्री अरविंद बौद्ध, उप महाप्रबंधक श्री के.टी.सज्जन के साथ अपेक्स बैंक के वरिष्ठ अधिकारी, जिला सहकारी बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित हुए ।

MP News: रक्षा उत्पाद में निवेश से लेकर निर्यात तक में मदद करेगी सरकार

भोपाल/जबलपुर. मध्य प्रदेश में रक्षा उत्पाद बनाए जाने के प्रयास फिर तेज हो गए हैं। निवेशकों को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। निवेश पर प्रोत्साहन से लेकर रक्षा उत्पादों के निर्यात में भी राज्य सरकार सहायता करेगी। स्टार्टअप और रक्षा उत्पाद की कोई बेहतर तकनीक है तो उसे प्रोत्साहित किया जाएगा। निर्यात के लिए उत्पाद के परीक्षण को सरल किया गया है और इसकी फीस भी घटाई गई है। किसी व्यक्ति के पास किसी नए रक्षा उत्पाद का आइडिया है तो चयन होने पर 25 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रोत्साहन बतौर दी जाएगी। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशी रक्षा उत्पाद तैयार किए जाने से विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम होगी। भारत में इस वर्ष डेढ़ लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हुआ और 23 हजार करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। आगामी तीन वर्ष में इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। भारत सरकार की योजना के तहत रक्षा उत्पाद बनाने के लिए तीन से पांच साल अनुभव की अनिवार्यता नहीं होगी। नवाचार या तकनीक अच्छी है तो उसे विशेष मामला मानकर प्रोत्साहित किया जाएगा। मध्य प्रदेश में रक्षा उत्पादन के लिए अदाणी डिफेंस, हिंदुस्तान शिपयार्ड, बीईएल और जेबीएम जैसे समूहों ने रुचि दिखाई है। रक्षा क्षेत्र के लिए 2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक सागर, कटनी, रतलाम, सतना और मुरैना सहित आठ जिलों में रक्षा क्षेत्र के लिए 2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक उपलब्ध है। भौगोलिक स्थिति और सहयोगी इको सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश रक्षा उत्पादन के लिए देश में सबसे उपयुक्त स्थान है। धार के पीएम मित्रा पार्क में रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए प्रस्ताव बुलाए गए हैं। सरकार की निवेश नीतियों के तहत डीपीआर बनाकर निवेश करने वालों को इकाई लगाने तुरंत जमीन दी जाएगी। इको सिस्टम पहले से मौजूद जबलपुर में पहले से रक्षा इको सिस्टम मौजूद है, जैसे व्हीकल फैक्ट्री और गन कैरिज फैक्ट्री। व्हीकल फैक्ट्री में भारतीय सेना के टैंकों की रिपेयरिंग की क्षमता बढ़ाई जाएगी। जबलपुर में भारतीय सेना के टी-90 और टी-72 जैसे मुख्य युद्धक टैंकों का ओवरहालिंग शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश में जबलपुर, इटारसी में आर्डनेंस फैक्टरी है। ग्वालियर के पास और इंदौर के नजदीक महू में फायरिंग रेंज है। राज्य के चारों ओर रक्षा क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। कटनी-जबलपुर में डिफेंस कॉरिडोर की संभावनाएं कटनी, जबलपुर, इटारसी और सागर के बीच भी डिफेंस कारिडोर की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर रक्षा क्षेत्र में हर साल 400 करोड़ रुपये तक की स्थानीय आपूर्ति कर सकता है। महाकोशल क्षेत्र में मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) हब इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

MP News: इंदौर में अवैध मकानों को हटाने के दौरान लोगों ने किया हंगामा

इंदौर. शुक्रवार सुबह अन्नपूर्णा मंदिर से लगी ट्रस्ट की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाने की कार्रवाई के दौरान एक परिवार के सदस्यों ने हंगामा किया। जिला प्रशासन निगम के रिमूवल अमले के माध्यम से सुबह 9.30 बजे इस क्षेत्र में बने अवैध मकान तोड़ने पहुंचा और खाली पड़े चार मकानों को तोड़ा गया। इस दौरान नेहा नाम की युवती ने घर में लगा विद्युत मीटर दीवार से उखाड़ा और सामान इधर-उधर फेंकने लगी। खुद पर केरोसिन भी छिड़का। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने युवती पर पानी डाला। युवती घर के टीनशेड पर गई फिर पेड़ पर चढ़कर और हंगामा करने लगी। युवती के हाथ में ब्लेड थी और वह उससे हाथ की नस काटकर आत्महत्या की धमकी दे रही थी। पुलिस को उसे वहां से उतारने के लिए काफी मशक्क्त करनी पड़ी। बिजली सप्लाई बंद करवाई और युवक को थाने ले गए इसी दौरान राजू नाम का युवक भी विरोध कर रहा था। पहले पुलिस ने उसे अपने वाहन में बैठाया लेकिन वह भागकर अतिक्रमण हटाए जाने वाली जगह पर पहुंचा। युवक वहां पर एक दीवार पर चढ़ा और बिजली सप्लाई के तार को पकड़ लिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तत्काल उस क्षेत्र की विद्युत सप्लाई बंद करवाई और युवक को पकड़कर थाने ले गए। युवती को पेड़ से उतारने के प्रयास में एक पुलिसकर्मी भी गिर गया और उसे चोट आई। चार परिवारों के 13 लोगों के खिलाफ छह नवंबर को जारी हुआ था बेदखली आदेश राऊ की तहसीलदार याचना दीक्षित के मुताबिक अन्नपूर्णा मंदिर से लगी ट्रस्ट की जमीन पर आठ मकानों का पिछले आठ-दस वर्ष से कब्जा था। यहां पर चार परिवारों के 13 लोगों के लिए छह नवंबर को बेदखली का आदेश जारी हुआ था। चार परिवारों में से दो परिवार तो सुदामा नगर में रह रहे थे और उन्होंने अपने कच्चे मकान किराए पर अन्य लोगों को दे रखे थे और उसमें ठेले वालों का सामान रखा था। इसके अलावा शेष दो परिवारों को नगर निगम के माध्यम से सिंदौड़ा के ताप्ती परिसर में प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैट भी दिलवा रहे थे। ट्रस्ट की जमीन पर अतिक्रमण कर रहने वाला एक परिवार शिफ्ट होने के लिए तैयार भी हो गया था और उसने सामान भी घर से बाहर निकाल लिया था। दूसरे परिवार के सदस्य हंगामा करने लगे तो उन्होंने भी शिफ्ट होने से मना किया। 10 दिन में करनी होगी अपील: तहसीलदार दीक्षित के मुताबिक कार्रवाई और हंगामे के बीच दोपहर 1.30 बजे हाई कोर्ट का स्टे आया तो रिमूवल कार्रवाई बीच में रोकी गई। हाई कोर्ट ने कहा 10 दिन के भीतर तहसीलदार के आदेश के विरोध में संबंधित परिवार एसडीएम कोर्ट में अपील करें।

एमपी बोर्ड परीक्षा फरवरी में, लेकिन सैंपल पेपर व जिलेवार परीक्षा केंद्र तय नहीं; शिक्षक चुनाव ड्यूटी में व्यस्त

भोपाल मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की ओर से 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं सात फरवरी से शुरू होने वाली है।परीक्षा शुरू होने में करीब ढाई माह का समय शेष है।ऐसे में अब तक मंडल ने ना तो सैंपल पेपर अपलोड किया है और ना ही जिलेवार केंद्रों का निर्धारण हो पाया है, जबकि इस बार हर साल की अपेक्षा एक माह पहले परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण अब दिसंबर में ही हो सकेगा। अब तक माशिमं की ओर से कोई तैयारी नहीं की गई है।दरअसल, शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई है।इस कारण भी परीक्षा केंद्र का निर्धारण नहीं हो सका है।हर साल पौने चार हजार परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं और सितंबर तक केंद्रों की सूची तैयार कर ली जाती है,ताकि वहां पर व्यश्वस्थाओं का परीक्षण किया जा सके।   मंडल ने सभी जिले के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि अपने जिले के सरकारी व निजी स्कूलों में बनाए जाने वाले केंद्रों के नाम तय कर सूची जल्द भेजें।इस बार 10वीं व 12वीं परीक्षा में नकल पर नकेल कसने के लिए इस बार 200 केंद्रों पर सीसीटीवी कैमेरे लगाए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे शुरू किया जा रहा है। अगली बार से सभी केंद्रों पर कैमरे लगाए जाने की तैयारी है। इसके लिए पहले केंद्रों का निर्धारण होना आवश्यक है। बता दें कि, परीक्षा की तैयारी में इसलिए भी देरी हो रही है, क्योंकि मंडल के सचिव का पद करीब साढ़े तीन माह से खाली है। जुलाई में तात्कालीन सचिव केडी त्रिपाठी के सेवानिवृत होने के बाद शासन की ओर से किसी की पदस्थापना नहीं हो सकी है। अब अगर महत्वपूर्ण समय में सचिव का पद खाली रहेगा तो परीक्षा की तैयारी पर तो असर पड़ना लाजिमी है। रैंडेमाइज से सीएस व एसीएस का होगा नाम तय मंडल की ओर से केंद्राध्यक्ष(सीएस)व सहायक केंद्राध्यक्ष(एसीएस) की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।रैंडेमाइज तरीके से इनके नामों का चयन होगा।माशिमं के पौने चार हजार परीक्षा केंद्रों पर जिला स्तर पर केंद्राध्यक्षों की नियुक्ति होगी। सैंपल पेपर तैयार नहीं मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं के करीब 18 लाख विद्यार्थियों को सैंपल पेपर नहीं दे पाया है।ये पेपर परीक्षा शुरू होने के तीन माह पहले विद्यार्थियों को मिल जाना चाहिए थे।पूर्व में माशिमं द्वारा वार्षिक परीक्षा शुरू होने के छह महीने पहले सैंपल पेपर जारी कर दिए जाते थे,जिससे विद्यार्थी छमाही और वार्षिक परीक्षा की तैयारी कर लेते थे। मंडल के ढीले रवैये के चलते परीक्षा के तीन माह पहले भी सैंपल पेपर जारी नहीं कर सके हैं।सैंपल पेपर जारी नहीं होने से अंक योजना के आधार पर भी विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।