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देशभर के जंगलों की होगी समीक्षा, मध्यप्रदेश में टाइगर स्टेट की राह पर All India Tiger Estimation

भोपाल  भारत में बाघों की असली तस्वीर जानने की सबसे बड़ी कवायद एक बार फिर शुरू होने जा रही है। देशभर में अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2026 (All India Tiger Estimation 2026) की प्रक्रिया शुरू होने को है। इसमें टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश की भूमिका बेहद अहम रही है, क्योंकि एक बार 1991 में और उसके बाद 2019 और 2022 में ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन में मध्यप्रदेश लगातार दो साल टाइगर स्टेट का तमगा हासिल करने में कामयाब रहा है। इस बार फिर वन विभाग की बड़ी तैयारी है, उम्मीद की जा रही है कि एमपी एक बार फिर टाइगर स्टेट बन सकता है। 15 नवंबर से प्रदेशभर के फॉरेस्ट एरिया में बाघ एस्टिमेशन का काम शुरू हो जाएगा। कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे, इसके अलावा एविडेंस में मल, पगमार्क, खरोंच के निशान, शिकार के अवशेष जैसे साक्ष्य भी शामिल किए जाते हैं। चार चरणों में पूरी होने वाली एस्टिमेशन की ये प्रक्रिया फरवरी 2026 तक पूरी होगी। इसके बाद डेटा कलेक्ट करके फाइनल रिपोर्ट अप्रेल 2026 तक तैयार हो जाएगी। जो जुलाई 2026 तक जारी होगी। टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश की स्थिति कैसी? पिछले बाघ अनुमान 2022 (Tiger Estimation 2022) में मध्य प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे। जो देश के अन्य राज्यों से भी ज्यादा हैं। यानी हर पांच में से एक बाघ एमपी के जंगलों में मौजूद है। इसी के चलते राज्य को लगातार दूसरी बार 2019 और 2022 में टाइगर स्टेट का दर्जा मिला। इस बार फिर सबकी नजर इसी पर है कि क्या एमपी अपनी टॉप पॉजीशन बनाए रखेगा या किसी अन्य राज्य से मुकाबला होगा? दूसरी बार पेपरलेस यानी M-STRIPES ऐप से किया जा रहा है एस्टिमेशन पिछले ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन में एमपी समेत देशभर के जंगलों में M-STRIPES ऐप के माध्यम से पेपरलेस कार्य किया गया था। इस बार भी वही प्रक्रिया फॉलो की जाएगी। जिम्मेदारों का कहना है कि इस बार ऐप को और अपडेट किया गया है। यूजरफ्रेंडली ऐप से कई परेशानियां हल हुई हैं और मुश्किलें आसान। जानें क्या है टाइगर एस्टिमेशन अब तक हम जिसे बाघों की गणना कहते आए हैं, असल में आधुनिक भारत में ये टाइगर काउंटिंग नहीं बल्कि, टाइगर एस्टिमेशन है। टाइगर एस्टिमेशन की प्रक्रिया अब पारंपरिक गिनती से कहीं आगे बढ़ चुकी है। यह सिर्फ कैमरे में दिखे बाघों की संख्या नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश समेत देश के पूरे वन क्षेत्र में मौजूद संभावित आबादी का वैज्ञानिक मूल्यांकन है। इसे ऐसे समझें- एमपी में 9 टाइगर रिजर्व और कॉरिडोर, टेरिटरीज पर नजर राज्य के 9 टाइगर रिजर्व कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, संजय, पन्ना, ओरछा, माधव, भीमगढ़, नौरादेही सभी में गहन निगरानी चलेगी। हर रिजर्व के कोर और बफर जोन में 24 घंटे कैमरे एक्टिव होंगे। पिछली बार की तरह इस बार भी AI बेस्ड कैमरा ट्रैप और जीपीएस डेटा लिंक तकनीक वाले ऐप M-STRIPES से मॉनिटरिंग पहले से कहीं ज्यादा सटीक होगी। वन विभाग के मुताबिक जंगलों से निकल सड़कों पर नजर आ रहे बाघ जहां चुनौती साबित हो सकते हैं, वहीं ये उम्मीद भी दे रहे हैं, कि बाघों की संख्या बढ़ने की संभावना है, एमपी फिर से टाइगर स्टेट बन सकता है। संरक्षण की चुनौती- बढ़ती संख्या, घटता आवास एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाघों की संख्या बढ़ना जितना सुखद है, उतना ही आवास घटने का खतरा भी बढ़ा है। बाघ कॉरिडोर और गांवों की सीमा तक आने लगे हैं। पीसीसीएफ एल. कृष्णमूर्ति कहते हैं कि, 'इससे निपटने के लिए वन विभाग इस बार सह अस्तित्व मॉडल पर जोर दे रहा है। ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। स्थानीय समुदायों को निगरानी, रिपोर्टिंग और इको टूरिज्म से जोड़ा जा रहा है।' अखिल भारतीय टाइगर एस्टिमेशन (AITE) में एमपी की प्राथमिकता क्या? -बाघों की सटिक पहचान और वितरण का नक्शा तैयार करना। -रिजर्व से बाहर बाघों की उपस्थिति को वैज्ञानिक रूप से दर्ज करना। -कोरिडोर नेटवर्क को मजबूत करना ताकि, बाघ सुरक्षित क्षेत्रों में आवागमन कर सकें। -वन विभाग के मुताबिक ये अनुमान प्रक्रिया सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समझने की कोशिश है कि बाघ कहां हैं। कहां जा रहे हैं और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए हमें अब आगे और क्या बदलाव करने की आवश्यकता है। क्या हम सही सही मायनों में जंगलों की सुरक्षा कर पा रहे हैं? इस तकनीक से क्या फायदा हुआ -कागज की गिनती और मानवीय गलती खत्म हुई, अब सब डिजिटल रिकॉर्ड होता है। -हर टीम की गश्त मॉनिटर की जा सकती है, कौन कहां गया, कितना एरिया कवर हुआ, कितना बाकी है? -डेटा की पारदर्शिता और सटीकता बढ़ी है। -बाघों के संरक्षण और सुरक्षा की योजना बनाना आसान हुआ है। क्योंकि अब ठोस वैज्ञानिक डाटा उपलब्ध है। मध्य प्रदेश जो टाइगर स्टेट है, ने इस सिस्टम को सबसे जल्दी अपनाया। राज्य के 9 टाइगर रिजर्व और दो अन्य अभयारण्य के रेंजर्स, कर्मचारियों और अधिकारियों को M-STRiPES पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। अब हर बाघ गिनती और पेट्रोलिंग इसी एप के जरिए की जा रही है। ये नया प्रयोग पिछले टाइगर एस्टिमेशन के लिए शुरू किया गया था। कैसे काम करता है M-STRIPES सिस्टम अब बाघ गिनने का तरीका पूरी तरह से डिजिटल हो गया है। फील्ड में जब वनकर्मी या अधिकारी जाते हैं, तो उनके मोबाइल में M-STRIPES ऐप ऑन रहता है। ये एप जीपीएस की मदद से उनका पूरा रास्ता रिकॉर्ड करता है। यानी कौन सी टीम कहां गई, कितना इलाका कवर किया सब कुछ ट्रैक होता है। जंगल में अगर कहीं बाघ के पगमार्क, मल, शिकार के अवशेष मिलते हैं तो कर्मचारी तुरंत उसी जगह का फोटो लेकर ऐप में अपलोड कर देते हैं, फोटो के साथ उस जगह का लोकेशन और समय अपने आप एप में सेव हो जाता है। दिन के अंत में पूरा डेटा ऑनलाइन सर्वर पर चला जाता है, जहां विशेषज्ञ उसे जांचते हैं, कहां ज्यादा मूवमेंट मिली, किस इलाके में बाघों की मौजूदगी मजबूत है और कहां निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। इस तरह अब कागज, फॉर्म या मैनुअल गिनती की जगह पूरा सिस्टम मोबाइल और जीपीएस पर चलेगा। जिससे न केवल आंकड़े सटिक होंगे, बल्कि मानवीय गलती की गुंजाइश भी लगभग खत्म हो जाएगी।    

महाकाल नगरी उज्जैन चमकेगी: सिंहस्थ 2028 से पहले 5 बड़े प्रोजेक्ट में होंगे हजारों करोड़ खर्च

उज्जैन  सिंहस्थ 2028 से पूर्व मध्यप्रदेश के उज्जैन की सूरत पूरी तरह बदलने जा रही है. मध्यप्रदेश सरकार का श्रद्धालुओं की सुविधाओ के लिए 5 बड़े कामों पर फोकस है, जिनकी लागत हजारों करोड़ है. सबसे पहला काम मोक्षदायिनी क्षिप्रा शुद्धिकरण (कान्हा डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना) है, जिससे क्षिप्रा पर कई जगह पुल, पुलिया व सड़क निर्माण के माध्यम से यातायात सुगम बनाया जाएगा. इसके बाद व्यापक स्तर पर सीवरेज पाइप लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट, पेयजल परियोजना, अस्पताल, विश्राम भवन आदि पर फोकस होगा. 5 विकास कार्यों पर होगा सबसे ज्यादा फोकस सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ ऐतिहासिक स्थलों को मजबूती देना व सरकार की प्राथमिकता है. इन प्रमुख पांच विकास कार्यों को कैसे किया जाएगा, इसके लिए कितने बजट की जरूरत होगी और इसकी क्या टाइम लाइन होगी इसे लेकर एक बार फिर प्रशासनिक बैठक का आयोजन किया गया. 20 हजार करोड़ से चमकेगी उज्जयनी नगरी सिंहस्थ महाकुंभ उज्जैन नगरी में वर्ष 2028 में लगने जा रहा है, जिसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है. सरकार का अनुमान है कि उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे और इसी के हिसाब से पूरा रेडमैप तैयार किया गया है. जनसंपर्क विभाग के अनुसार सिंहस्थ महापर्व 2028 के पहले जिले में लगभग 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि से अलग-अलग प्रकार के विकास कार्य किए जा रहे हैं. 914 करोड़ कान्हा क्लोज डायवर्जन परियोजना पर लगभग 919.94 करोड़ रुपए की लागत से कान्‍हा डायवर्जन क्‍लोज डक्‍ट परियोजना का कार्य क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए किया जाएगा. इसमें कान्हा नदी के पानी को 18.5 किमी कट/कवर व 12 किमी टनल का निर्माण कर उज्‍जैन शहर की सीमा से बाहर कर गंभीर नदी के डाउन स्‍ट्रीम में प्रवाहि‍त किया जाएगा. यह परियोजना आगामी सितंबर 2027 तक पूर्ण हो जाएगी. निर्माण एजेंसी द्वारा 15 वर्षों का संचालन व रख-रखाव का प्रावधान किया गया है. इसकी कुल लंबाई 30.15 किमी रहेगी. इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद पूरे वर्ष क्षिप्रा नदी में स्‍वच्‍छ जल का प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा. 440 करोड़ की लागत से पुलि-पुलियों का निर्माण सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के लिए 19 नवीन पुलों व आरओबी का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 14 पुल नदी पर व 5 रोड ओवर ब्रिज शामिल हैं. इनकी अनुमानित लागत 440.13 करोड़ रुपए है. पुल निर्माण कार्यों की श्रृंखला में शहर के बहुप्रतीक्षित फ्रीगंज का ब्रिज भी शामिल किया गया है. शहर का सबसे महत्‍वपूर्ण हरिफाटक ब्रिज का चौड़ीकरण काम म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा 371.11 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है. साथ ही सड़कों का चौड़ीकरण, नवीन मार्गों का निर्माण भी इसमें शामिल है. सीवरेज पर 476 करोड़, पेयजल पर 1113 करोड़ सिंहस्थ मेला क्षेत्र में सीवरेज पाइप लाइन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्‍लान्ट का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जो शहर के अधोसंरचना विकास की दृष्‍टि‍ से अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण रहेगी और इसकी लागत 476.06 क‍रोड़ रुपए रहेगी. शहर की पेयजल परियोजना भी 1113 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही है. इस परियोजना में 150 एमएलडी का वॉटर ट्रीटमेंट प्‍लान्‍ट, 700 किमी से अधिक पाइप लाइन का नेटवर्क और 17 नए जल टैंक बनाए जाएंगे. ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और मंदिर जीर्णोद्धार के लिए 500 करोड़ से ज्यादा ऐति‍हासिक स्थलों का संरक्षण करना जैसे शहर का कोठी पैलेस भवन उसे कुंभ एक्सपीरियंस सेंटर व वीर भारत संग्रहालय बनाना, वीर दुर्गादास सिंह राठौड़ की छत्री पर 52.69 करोड़ की लागत से विकास कार्य, मंदिर के जीर्णोद्धार कर परमार, मराठा शैली का वैभव लौटाना भी इसमें शामिल है. इसपर 500 करोड़ से ज्यादा खर्ज होंगे. अन्य कई परियोजनाओं पर खर्च होंगे हजारों करोड़ सिहंस्‍थ में करोड़ों श्रध्‍दालुओं के आने पर उनके स्वास्थ्य का ध्‍यान रखते हुए 550 बिस्‍तरीय चिकित्‍सालय भवन, 150 सीट्स का चिकित्‍सा महाविद्यालय भवन व छात्रावास निर्माण होगा. इंदौर से उज्‍जैन के बीच 48 किमी एक नई ग्रीन फिल्‍ड सड़क का निर्माण कार्य लागत लगभग 2935 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे

MP में मखाना उत्पादन को बढ़ावा: 150 हेक्टेयर क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट लागू

भोपाल बिहार की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी मखाना की खेती होगी। प्रदेश के चार जिलों में पायलट प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा। 150 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को 75 हजार प्रति हेक्टेयर या लागत का 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इस योजना के तहत एमपी के 99 कृषकों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि मध्यप्रदेश में भी बिहार की तर्ज पर मखाना की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदेश के 4 जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में मखाना खेती क्षेत्र विस्तार को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। अब मध्य प्रदेश में भी बिहार की तर्ज पर मखाना की खेती की जाएगी। राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से चार जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में मखाना उत्पादन को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत प्रदेश में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना खेती विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मध्य प्रदेश के 4 जिलों से शुरुआत  मध्य प्रदेश के चार जिलों से मखाने की खेती की शुरुआत होने वाली है, उद्यानिकी विभाग ने मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी जिले में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरु करने की योजना बनाई है. उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं, मंत्री का कहना है कि मखाना खेती से किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और प्रदेश में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा, इसलिए इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है.  कृषकों को सरकार की ओर से 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर या लागत का 40% तक अनुदान मिलेगा। फिलहाल इस योजना के अंतर्गत 99 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि मध्यप्रदेश की जलवायु मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त है। बिहार में जिस तरह से मखाना खेती ने किसानों की आमदनी बढ़ाई है, उसी मॉडल को अब मध्यप्रदेश में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मखाना उत्पादन छोटे तालाबों और जलाशयों में सिंघाड़े की तरह किया जा सकता है, जिससे जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग होगा। मंत्री कुशवाह ने किसानों से इस योजना से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मखाना बोर्ड का गठन भी किया गया है। मध्यप्रदेश इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अरविंद दुबे ने बताया कि परियोजना पर लगभग 45 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ बीज, प्रशिक्षण और प्रसंस्करण सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। मखाने की देश और विदेश (अरब देशों व यूरोप) में उच्च मांग को देखते हुए यह योजना प्रदेश के किसानों के लिए नए अवसर लेकर आ सकती है। किसानों को अनुदान भी मिलेगा मखाना खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर या कुल लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान भी सरकार की तरफ से दिया जाएगा. इससे किसानों को नई फसल को अपनाने में मदद मिलेगी, बता दें कि मखाने का उत्पादन सिंघाड़े की तरह छोटे-छोटे तालाबों में किया जाता है, इसी को ध्यान में रखते हुए चारों जिलों में लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना उत्पादन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. इस परियोजना पर करीब 45 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. जिसके लिए सरकार की तरफ से उद्यानिकी विभाग को बजट भी मिलेगा.  किसानों से लिए जा रहे आवेदन  योजना की शुरुआत के बाद प्रदेश के 99 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, विभाग का कहना है कि सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि मखाना खेती प्रदेश के किसानों के लिए एक नई आजीविका का स्रोत बनेगी और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.  

Agniveer Recruitment 2025: अभ्यर्थियों का इंतजार जल्द खत्म, इस तारीख तक जारी होगा रिजल्ट

ग्वालियर प्रदेश के 10 जिलों के उन युवाओं के लिए खुशखबरी है, जिन्होंने भारतीय सेना में अग्निवीर बनने के लिए अगस्त माह में शारीरिक परीक्षा दी थी। अब परीक्षा परिणाम आने वाला है। 15 नवंबर तक परीक्षा परिणाम आ सकता है। एक माह ट्रेनिंग आगे बढ़ने के चलते ही परीक्षा परिणाम विलंब से आ रहा है। परीक्षा परिणाम आने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग पर भेजा जाएगा। लिखित परीक्षा में चयनित हुए 10500 अभ्यर्थी देशभर के आठ ट्रेनिंग सेंटरों के लिए चयनित अभ्यर्थियों को भेजा जाएगा। दिसंबर के पहले सप्ताह या दूसरे सप्ताह से इनकी रवानगी शुरू हो जाएगी। प्रदेश के ग्वालियर, शिवपुरी, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, टीकमगढ़, पन्ना, दमोह, सागर के करीब 33 हजार अभ्यर्थियों ने अग्निवीर बनने के लिए लिखित परीक्षा दी थी। लिखित परीक्षा में 10500 अभ्यर्थी चयनित हुए। इनकी शारीरिक परीक्षा अगस्त माह में शिवपुरी में हुई। शारीरिक परीक्षा में अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। इसके बाद कुल प्राप्तांकों के आधार पर मेरिट लिस्ट जारी होगी।   दौड़ को लेकर हुआ है बदलाव इस बार नया बदलाव हुआ था। पहले 5.30 मिनट से 5.45 मिनट में 1600 मीटर की दौड़ पूरी करनी होती थी। जो इस समयावधि में दौड़ पूर्ण कर लेता था, उसे ही उत्तीर्ण माना जाता था। लेकिन इस बार 1600 मीटर दौड़ के लिए 5.30 मिनट से 6.10 मिनट तक का समय दिया गया। अलग-अलग अवधि में दौड़ पूर्ण करने वालों को नंबर दिए जाएंगे। इसके आधार पर ही मेरिट लिस्ट जारी होगी। चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग सेंटर के लिए रवाना किया जाएगा लिखित और शारीरिक परीक्षा में प्राप्तांकों के आधार पर ही मेरिट लिस्ट जारी होगी। फिर दस्तावेजों का परीक्षण सेना भर्ती कार्यालय पर शुरू होगा। 15 दिन में चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज परीक्षण होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग सेंटर के लिए रवाना किया जाएगा। अग्निवीर भर्ती परीक्षा का परिणाम 15 नवंबर तक आ सकता है। इसके बाद दस्तावेज परीक्षण होगा, फिर ट्रेनिंग सेंटर पर भेजा जाएगा। कर्नल पंकज कुमारनिदेशक, सेना भर्ती कार्यालय।

पदोन्नति में आरक्षण मामला: अजाक्स की दलील नहीं मानी गई, हाई कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी

जबलपुर मध्य प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण मामले पर दायर याचिकाओं पर बुधवार को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। अनुसूचित जाति, जनजाति अधिकारी, कर्मचारी संघ (अजाक्स) की ओर से इस संबंध में आरबी राय मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने का संदर्भ देकर हाई कोर्ट में सुनवाई किए जाने पर आपत्ति जताई गई। कहा गया कि हाई कोर्ट में सुनवाई नहीं होनी चाहिए। इस पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की। कहा कि यह मामला अलग है, सुनवाई क्यों नहीं होनी चाहिए? आपत्ति अस्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने के लिए गुरुवार (13 नवंबर) की तिथि निश्चित की है। भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती दी गई है। दलील दी गई कि वर्ष 2002 के नियमों को हाई कोर्ट के द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है।   इसके विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मध्य प्रदेश शासन ने महज नाम मात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर जस के तस नियम बना दिए। वहीं, मामले में अजाक्स सहित आरक्षित वर्ग की ओर से अनेक अधिकारियों व कर्मचारियों ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिकाएं दायर की हैं। बुधवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव ने कुछ देर नियम की असंवैधानिकता के पक्ष में तर्क रखे। समयाभाव के चलते सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

मंत्री कुशवाह ने कहा- दिव्यांगजन की मोट्रेट साइकल रिपेयरिंग व्यवस्था जिलास्तर पर करें

भोपाल  दिव्यांगजन हितग्राहियों को, दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत प्रदान की गई, मोट्रेट साइकल के रिपेयरिंग के लिये जिलास्तर पर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस आशय के निर्देश सामाजिक न्याय दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने विभागीय अधिकारियों को दिए है। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में केन्द्र सरकार की संस्था एलिम्को के माध्यम से 11 हजार 200 से अधिक दिव्यांगजन को 5 करोड़ 60 लाख रूपये के उपकरण प्रदान किए गये है। इनमें जिन हितग्राहियों को मोट्रेट साइकल प्रदान की गई है, उनकी रिपेयरिंग की व्यवस्था जिलास्तर पर दिव्यांगजन पुनर्वास केन्द्रों पर की जाना चाहिए। इसके लिए केन्द्र सरकार की संस्था एलिम्को से सम्पर्क किया जाये। वर्तमान में एलिम्को द्वारा ग्वालियर और जबलपुर में यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने यह व्यवस्था समय-सीमा में बहाल करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता होने पर सामाजिक न्याय विभाग राज्य शासन के बजट से आवश्यक पार्टस उपलब्ध करायेगा।  

आखिर मिला हक: अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी, भावनाओं से भर उठे परिजन

इंदौर नगर निगम के सामान्य प्रशासन विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार कर रहे आवेदकों को राहत देते हुए अनुकंपा नियुक्ति पत्र जारी कर दिए। सामान्य प्रशासन प्रभारी नंदकिशोर पहाड़िया ने इन आवेदकों को अनुकम्पा नियुक्ति आदेश वितरित किए। इस मौके पर नंदकिशोर पहाडिया ने कहा कि निगम प्रशासन कर्मचारियों और उनके स्वजनों के हितों के प्रति सदैव संवेदनशील है। कर्मचारी के असामयिक निधन की स्थिति में उनके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करना निगम का मानवीय कर्तव्य है ताकि परिवार की आजीविका निरंतर बनी रहे।   नव नियुक्त कर्मचारियों को शुभकामना देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने कार्य के प्रति पूर्ण निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ निगम की सेवा करें तथा अपने दिवंगत स्वजन के कार्यों और मूल्यों को आगे बढ़ाएं। गौरतलब है कि वर्तमान निगम परिषद में अब तक तीन दर्जन से ज्यादा दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति दी जा चुकी है। सामान्य प्रशासन प्रभारी ने बताया कि अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों का भी जल्दी ही निराकरण किया जाकर नियुक्ति पत्र जारी किए जाएंगे।

फर्जी ऐप से नकली ट्रांज़ैक्शन कर ठगी: रील ने सिखाया तरीका, पुलिस ने पकड़ा जोड़ा

देवास सोशल मीडिया जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे ही अपराध करने के नए तरीके भी निकाले जा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण देवास शहर में देखने को मिला। यहां एक बंटी-बबली की जोड़ी ने मोबाइल पर रील देखकर फर्जी पेमेंट एप के बारे में सीखा और शहर के दो दुकानदारों को चूना लगा दिया। दोनों वारदातें सीसीटीवी में कैद हो गईं, जिसके चलते आखिरकार आरोपित जोड़ी को पकड़ लिया गया। मामले का खुलासा पुलिस कप्तान पुनीत गेहलोद ने बुधवार को पत्रकार वार्ता के दौरान किया। एसपी गेहलोद ने बताया कि 4 नवंबर को कोतवाली क्षेत्र में दिलीप सोनी की नावेल्टी चौराहा स्थित रत्नराज ज्वैलरी दुकान से शाम करीब 6 बजे युवक-युवती ने चांदी की पायल और अंगूठियां खरीदीं। कुल 6700 रुपये का भुगतान संबंधित व्यक्ति ने फोनपे क्यूआर के माध्यम से अपने मोबाइल से करते हुए स्क्रीन शाट दिखाया।   इधर दुकानदार को वह भुगतान नहीं मिला, तो संबंधित ने अपना मोबाइल नंबर दिया और कहा कि भुगतान नहीं मिले तो फोन लगा देना। इसके बाद मोटरसाइकिल से युवती-युवती वहां से रवाना हो गए। सोनी ने जब जांच की तो पता चला कि उसके साथ धोखाधड़ी हो गई है। अगले दिन सोनी ने कोतवाली थाने पर मामले की शिकायत की। इस प्रकार की ठगी दोनों युवक-युवती द्वारा नावेल्टी चौराहा स्थित इलेक्ट्रानिक दुकान पर भी कर गए। वहां से 18500 रुपये कीमत का एलईडी टीवी इसी प्रकार का फर्जी पेमेंट कर ले गए। कोतवाली टीआई श्यामचंद्र शर्मा ने बताया कि दोनों मामलों में जांच करने पर पता चला कि यह ठग जोड़ी दुकानदारों को फर्जी पेमेंट एप के माध्यम से धोखा देकर फरार हो गई है। इसके बाद पुलिस की टीमों को दुकानों व आसपास के सीसीटीवी कैमरों के साथ मुखबिरों को सक्रिय कर आरोपितों को पकड़ने के काम में लगाया गया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान दीपक वर्मा निवासी ग्राम गदईशा पिपलिया जिला देवास और बबली के रूप में हुई। पुलिस ने लगातार आरोपितों की तलाश के बाद आखिरकार राजगढ़ से उन्हें पकड़ने में सफलता हासिल की। दोनों के कब्जे से टीवी और आभूषण जब्त किए गए हैं। पूछताछ में पता चला कि युवती ने सोशल मीडिया पर रील देखकर फर्जी पेमेंट एप के बारे में जानकारी ली। इसके बाद मोबाइल के प्ले स्टोर से नकली पेमेंट दिखाने वाली एप अपने मोबाइल में डाउनलोड कर लोगों को ठगने लगे। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि इन दोनों ने और कहां-कहां इस प्रकार की ठगी की है। फिलहाल दोनों आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

भावांतर योजना में आज बढ़कर 4077 रुपए मॉडल रेट जारी

भोपाल भावांतर योजना 2025 अंतर्गत  सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए बुधवार 12 नवंबर को 4077 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी रही। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए तथा 11 नवंबर को 4056 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी हुआ।

पीएम केयर्स और सीएम कोविड बाल सेवा योजना के बच्चों संग मंत्री सुश्री भूरिया ने किया भोजन, भेंट किए उपहार

भोपाल  स्नेहिल और भावनात्मक माहौल में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बुधवार को अपने निवास पर पी.एम. केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना एवं सी.एम. कोविड-19 बाल सेवा योजना से लाभान्वित बच्चों के साथ एक विशेष “प्रेरणा एवं संवाद कार्यक्रम” का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों से आत्मीय वार्तालाप करते हुए उनकी समस्याएँ सुनीं, उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित कर हर बच्चे को स्नेहपूर्वक उपहार भेंट किए। मंत्री सुश्री भूरिया ने बच्चों को अपने घर पर स्वयं भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर भोजन किया, जिससे माहौल परिवार जैसा स्नेहिल बन गया। उपस्थित सभी बच्चों ने प्रसन्नता और आत्मविश्वास से भरे पलों का आनंद लिया। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि बच्चे हमारे अपने परिवार का हिस्सा हैं। कोविड ने भले ही इनके माता-पिता को छीन लिया हो, पर अब पूरा समाज, सरकार और मैं स्वयं इनकी अभिभावक हूँ। इनका भविष्य सुरक्षित करना मेरा कर्तव्य और मेरा सौभाग्य है। बच्चों की मुस्कान ही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है। उन्होंने कहा की इन बच्चों की आँखों में चमक और उनके चेहरे की मुस्कान ही मेरी असली उपलब्धि है। सरकार का काम सिर्फ योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि इन बच्चों के भविष्य को संवारना भी है। संवेदनशील पहल — स्वेच्छानुदान से की मदद बच्चों के प्रति मातृत्व स्नेह और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने एक संवेदनशील पहल की और एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। सुश्री भूरिया ने इन बच्चों के लिए 5 लाख रुपये की विशेष सहायता राशि अपने स्वेच्छानुदान से प्रदान की है, जिन्हें अब तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। पिछले वर्ष भी उन्होंने लगभग 13 लाख रुपये की सहायता राशि व्यक्तिगत रूप से इन बच्चों के हित में दी थी। प्रेरणा और संवाद कार्यक्रम — बच्चों में आत्मविश्वास का संचार मंत्री सुश्री भूरिया ने बच्चों से सामान्य बातचीत के माध्यम से उनकी शिक्षा, सपनों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। बालिका आरती, जिसका आज जन्मदिन था। सभी बच्चों और अधिकारियों के साथ मिलकर मनाया गया, जिससे वातावरण उल्लासपूर्ण और भावनात्मक बन गया। कार्यक्रम में उप सचिव श्रीमती माधवी नागेंद्र और जिला कार्यालय के अधिकारी भी उपस्थित रहे। योजनाएँ जो बन रही हैं आशा की किरण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पी.एम. केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना वर्ष 2021 में आरंभ की गई थी, जो कोविड-19 में अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है। भोपाल जिले में 22 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हैं। इन्हें 18 वर्ष की आयु तक मासिक आर्थिक सहायता, ₹10 लाख का कोष, निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य बीमा (आयुष्मान कार्ड) जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं। इसी तरह प्रदेश में मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना शुरू की गई थी, जिसके अंतर्गत बच्चों को 5 हजार रुपये मासिक सहायता, निःशुल्क शिक्षा और राशन की सुविधा दी जाती है।