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वेदांत केवल भारत के लिए नहीं बल्कि समस्त मानवता के लिए : पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी

ब्राज़ील के पद्म जोनास मसेट्टी आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आयोजित प्रेरणा संवाद में हुए शामिल वेदांत केवल भारत के लिए नहीं बल्कि समस्त मानवता के लिए : पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी भारतीय संस्कृति जीवंत संस्कृति है : जोनास मसेट्टी अद्वैत के ज्ञान से ही भविष्य की दिशा बदली जा सकती है : स्वामी शुद्धिदानंद अद्वैत दर्शन मानवता के कल्याण का दर्शन है : स्वामी शुद्धिदानंद आईआईटी इंदौर में ‘भावी विश्व का दर्शन ’ विषय पर हुआ संवाद ब्राजील के जोनास ने जैसे ही. .. जय जय हे महिषासुरमर्दिनि… गाया तो तालियों से गूँज उठा सभागार भोपाल आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा उपनिषदों में निहित अद्वैत सिद्धांत को जन-जन तक पहुँचाने के लिये शंकर व्याख्यानमाला, एकात्म संवाद एवं प्रेरणा संवाद जैसे विविध प्रेरक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाता है। इसी श्रृंखला में बुधवार को भारतीय प्रोधौगिकी संस्थान (IIT) इंदौर में प्रेरणा संवाद हुआ। इसमें ‘भावी विश्व का दर्शन’ विषय पर ब्राज़ील के पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी और स्वामी शुद्धिदानंद (अध्यक्ष, अद्वैत आश्रम मायावती) ने संवाद किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक, प्रोफेसर, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। वेदांत और संस्कृति के माध्यम से विश्व को पुनः जोड़ना आवश्यक : जोनास आचार्य जोनास ने युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज की दुनिया में, विशेषकर पाश्चात्य समाज में, लोग धन और सुख की खोज में लगे हैं, पर आत्मिक मूल्य भूल गए हैं। हमारा उद्देश्य वेदांत के ज्ञान को पुनर्जीवित करना और उसे धर्म नहीं, बल्कि मानवता का सार्वभौमिक दर्शन बनाकर प्रस्तुत करना है, जो एक बेहतर व्यक्ति और एक बेहतर समाज का निर्माण करे। भारत अपने उत्सवों, कहानियों, संगीत और कला के माध्यम से संस्कार और अध्यात्म को जन-जन तक पहुँचा सकता है। कल्पना कीजिए, अगर बच्चे उपदेशों से नहीं, बल्कि एनिमेटेड कथाओं और नैतिक कहानियों से मूल्य सीखें, तो यह शिक्षा हृदय में बस जाएगी। वेदांत अलगाव नहीं, एकत्व का दर्शन है। कोई भी अन्य परंपरा इतनी स्पष्टता से यह नहीं कहती कि 'मानवता एक है', जैसा हमारे उपनिषद कहते हैं: “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव।” यह भारत की आत्मा है, और यह केवल भारत के लिए नहीं ,समस्त मानवता के लिए है। हमें विश्व की सभी संस्कृतियों को इस दृष्टि से जोड़ना है। भारतीय संस्कृति एक जीवंत संस्कृति है। यह ज्ञान (साधना), करुणा और समझ की संस्कृति है। अद्वैत का विचार मानवता के लिए सौगात : स्वामी शुद्धिदानंद स्वामी शुद्धिदानंद ने कहा कि अद्वैत का विचार मानवता के लिए सौगात है। 1200 साल पहले जब लोग स्वार्थ की आंधी में लिप्त हो गए थे और मानव मानवता से विमुख हो गया था उस समय आचार्य शंकर का जन्म होता है और उन्होंने संस्कृति में पहले से मौजूद एकात्म के दर्शन से इस समस्या का समाधान किया। पिछले 200 वर्षों में मानवता विभिन्न विचारधाराओं के साथ प्रयोग कर रही है। उन सभी विचारधाराओं के केंद्र में अर्थ का अर्जन है, और जिन देशों में विचार का केंद्र है, वहां पर मनोवैज्ञानिक समस्या सर्वाधिक है। इस विश्वव्यापी समस्या के समाधान के रूप में भारत का अद्वैत दर्शन सामने आता है। एकात्म धाम प्रकल्प प्रेरक है संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए कोई दर्शन यदि खोजा जाए तो वो अद्वैत दर्शन है। वर्तमान का हिंदू धर्म प्राचीन काल का वैदिक धर्म है। वेद मनुष्य के बाहरी और आंतरिक कल्याण का उपदेश देते है। वेद का संदेश है कि हर आत्म में दिव्यता है और इस दिव्यता का अनुभव करके शक्ति, स्वतंत्रता और निर्भयता को मनुष्य ग्रहण कर सकता है। आत्म संयम के अभ्यास से हम मनुष्य में मौजूद दिव्यता का अनुभव कर सकते है। स्वामी विवेकानंद ने इस दर्शन को विश्व पटल पर प्रस्तुत किया। मध्यप्रदेश शासन के एकात्म धाम प्रकल्प से अन्य प्रदेश सरकारों को प्रेरणा लेनी चाहिए। हमें अपने स्वरूप का ज्ञान पाकर विश्व के कल्याण की कामना करनी चाहिए।इस अद्वैत के ज्ञान से ही भविष्य की दिशा बदली जा सकती है और मानवता के उद्धार के लिए कदम बढ़ाए जा सकते है सुप्रसिद्ध गायक राहुल आर. वेल्लाल आचार्य शंकर विरचित स्तोत्रों का किया गायन कार्यक्रम में कर्नाटक के सुप्रसिद्ध गायक राहुल आर. वेल्लाल आचार्य शंकर विरचित स्तोत्रों एवं भक्ति पदों का सुमधुर गायन किया। उन्होंने गणेश पँचरत्नम,शिव पंचाक्षर स्तोत्र, शिवाष्टकम्, भवानी अष्टक भज गोविन्दम,काल भैरवाष्टक का गान किया। राहुल के गायन से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता राहुल आर. वेल्लाल कर्नाटक संगीत के विश्वप्रसिद्ध कलाकार हैं। उन्होंने मात्र चार वर्ष की आयु में संगीत की यात्रा प्रारंभ की। उन्होंने भारत और दस अन्य देशों में प्रस्तुति दी है। हाल ही में अमेरिका के 10 शहरों में उनके संगीत कार्यक्रमों को अभूतपूर्व सराहना मिली। पद्म जोनास मसेट्टी ने भी ब्राजील के लोकगीत के साथ शिव शम्भू -शिव शम्भू का गान किया। आचार्य जोनास मसेट्टी ब्राज़ील में वेदांत का कर रहे प्रचार पद्म आचार्य जोनास लोपेस मसेट्टी वेदांत के प्रतिष्ठित अध्येता एवं शिक्षक हैं। वे स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्य हैं और भारत के कोयंबटूर स्थित आर्ष विद्या गुरुकुलम् में उन्होंने वर्षों तक वेदांत का अध्ययन किया। अध्ययन के पश्चात उन्होंने ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो स्थित पेट्रोपोलिस में विश्व विद्या गुरुकुलम् की स्थापना की, जहाँ से अब तक 2,50,000 से अधिक विद्यार्थियों को वेदांत का अध्ययन कराया जा चुका है। उन्होंने एक सफल मैकेनिकल इंजीनियर का पेशेवर जीवन त्यागकर स्वयं को वेदांत के प्रचार-प्रसार के लिये समर्पित किया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और वेदांत के सेतु-समान प्रवक्ता हैं। उनके योगदान की सराहना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में करते हुए उन्हें “अमेरिका में वैदिक संस्कृति के राजदूत” के रूप में संबोधित किया।  

नेशनल लोक अदालत 13 दिसंबर को—बिजली चोरी के मामलों के निपटारे का सुनहरा मौका

भोपाल  नेशनल लोक अदालत 13 दिसंबर 2025 (शनिवार) को आयोजित होगी। लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अन्‍य अनियमितताओं के प्रकरण को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के लंबित प्रकरणों एवं विशेष न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की गई है कि वे अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें। विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के बनाए गए लंबित प्रकरण एवं अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।  लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि नेशनल लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी जो आंकलित सिविल दायित्‍व राशि 10 लाख रूपये तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘ 13 दिसंबर 2025 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले — भारत की ऋषि परंपरा हमारा गौरव, दद्दा जी से मिलना सौभाग्य की बात

भारत में प्राचीन काल से है ऋषि परंपरा, दद्दा जी से मिलना मेरा सौभाग्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री कटनी में दद्दा जी धाम में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत में प्राचीन ऋषि परंपरा रही है। दद्दा जी ने करोड़ों शिवलिंग निर्माण करवाए। उन्होंने कहा ‍कि दद्दा जी से मिलना मेरे जीवन का सौभाग्य रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सत्संग और भक्ति के माध्यम से समाज को संस्कार दिए। संस्कारों से लोगों के विकार दूर होते हैं और जीवन धन्य हो जाता है। शिव निराकार ब्रह्म हैं। महाकाल की कृपा हम सभी पर है। राज्य सरकार ने भगवान राम और कृष्ण से जुड़े सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी जिले के झिंझरी स्थित दद्दा जी धाम में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण महारुद्राभिषेक में ये बातें कहीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गृहस्थ संत पूज्य पंडित देवप्रभाकर शास्त्री दददा जी के समाधि स्थल पहुंच कर पुष्पांजलि अर्पित कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर कटनी जिला एवं प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं जन-कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पवित्र गीता के विविध पक्षों से विश्व को परिचित कराने के लिए राज्य सरकार लाखों विद्यार्थियों के लिए गीता-ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित करवा रही है। उज्जैन में सिंहस्थ : 2028 के भव्य आयोजन के लिए तैयारियां की जा रही हैं। दद्दाजी का आशीर्वाद हम सभी के साथ है। कटनी के दद्दाजी धाम की प्रतिष्ठा दुनिया में पहुंचेगी। दुनिया सनातन संस्कृति और हमारी तरफ देख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिरडी सहित अन्य तीर्थ स्थलों की तरह ही कटनी का दददा जी धाम भी भविष्य में देव स्थान के रूप में विख्यात होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान महाकाल और दद्दा जी के आर्शीवाद से हम उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ को भव्यता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति का पवित्र अनुष्ठान चल रहा है। राज्य सरकार भी इस दिशा मे अनेक कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस पवित्र कार्य के लिए संत समाज से मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। इसके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंचासीन धर्माचार्यो और साधु-संतों का सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विजयराघवगढ़ विधायक  संजय सत्येन्द्र पाठक नें संबोधित करते हुए दददा जी के व्यक्तिव, कृतित्व व जीवन वृतांत पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महोत्सव धर्म, अध्यात्म और भक्ति का अद्भुत संगम है। यहाँ विश्वकल्याण के लिये असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण, महारुद्राभिषेक एवं अमृतमयी कथा का आयोजन हो रहा है। प्रातःकाल शिव आराधना और संध्याकाल हरिकथा एवं भजन संध्या के माध्यम से दद्दा जी धाम में दिव्यता का आलोक व्याप्त है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रदेश के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री और कटनी जिले के प्रभारी मंत्री  उदय प्रताप सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता सरंक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत, खजुराहो सांसद  विष्णुदत्त शर्मा, विधायक विजयराघवगढ़  संजय सत्येन्द्र पाठक, फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा सहित धर्माचार्य और सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित मोहित मराल गोस्वामी, कथा वाचक पंडित इन्द्रेश उपाध्याय, पंडित अनिरूद्धाचार्य  महाराज सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  

राज्यपाल पटेल ने एन.जी.ओ. से की अपील — जनजातीय सशक्तिकरण में बढ़ाएँ भागीदारी

जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण प्रयासों में सहभागी बनें एन.जी.ओ. : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट को किया संबोधित भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट का आयोजन जनजातीय विकास और उत्थान प्रयासों की दिशा में सराहनीय पहल है। देशभर के सभी एन.जी.ओ. जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण प्रयासों में सहभागी बनें। राज्यपाल पटेल मंगलवार को भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं जनजातीय गौरव वर्ष के उपलक्ष्य में कुशाभाऊ सभागार में आयोजित ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जनजातीय समुदाय के प्रति विशेष संवेदनशील है। उनके उत्थान के लिए संकल्पित और सक्रिय हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पीएम जनमन योजना अति पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास का अभूतपूर्व प्रयास है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान ग्रामीणों की मैदानी स्तर पर ही समस्याओं के समाधान का अभिनव कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि सभी एन.जी.ओ. जनजातीय कल्याण की योजनाओं को दूरस्थ अंचलो तक पहुँचाने में सक्रिय सहयोग करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आप जब ग्रामीण अंचलों में जांए जो जनजातीय समुदाय के साथ आत्मीय और विनम्र रहें। उनकी समस्याओं को धैर्य के साथ सुनें और त्वरित निवारण करने का प्रयास करें। चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान पर चिंतन करें राज्यपाल पटेल ने देशभर के एन.जी.ओ. का आह्वान किया कि ऑल इंडिया मीट के विचार-विमर्श और सुझावों पर गंभीर चिंतन करें। चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान खोजे। जनजातीय सशक्तिकरण के लिए आवश्यक शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, ट्राईबल गवर्नेंस आदि विभिन्न आयामों को जनजातीय क्षेत्रों की भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने के नवाचार करें। उन्होंने कहा कि सभी एन.जी.ओ. जनजातीय समुदाय को शिक्षा का महत्व जरूर बताएं। उन्हें सिकल सेल एनिमिया सहित अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों के प्रति जागरूक करें। राज्यपाल पटेल ने जनजाति समाज के सर्वांगीण विकास के चिंतन पर आधारित ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट के आयोजन के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय समाज में भारत की संस्कृति, पर्यावरण और मानवीय मूल्यों की जड़ें गहराई तक बसी हैं। उनका जीवन दर्शन हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य, आत्मनिर्भरता और सहयोग ही समावेशी विकास का आधार हैं। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट का आयोजन अत्यंत प्रासंगिक और समयानुकूल है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में देश जब आगे बढ़ रहा है, ऐसे में जरूरी है कि जनजातीय समाज की भागीदारी इस यात्रा का अभिन्न हिस्सा बने। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय विकास के लिए शिक्षा का स्वरूप ऐसा हो जो केवल साक्षरता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उसमें जीवन कौशल, स्थानीय ज्ञान और संस्कृति संरक्षण का भी समावेश हो। उन्होंने कहा कि अशासकीय संस्थाएँ, स्थानीय भाषा में पाठ्य सामग्री तैयार करें। डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देकर बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्य शिक्षा, मातृ-शिशु पोषण, टी.बी., सिकल सेल रोग जागरूकता और स्वास्थ्य शिक्षा को व्यापकता प्रदान करना भी जरूरी है। नीति निर्माण में समर्पित संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका, राज्य सरकार देगी पूरा सहयोग जनजाति कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजाति बहुल क्षेत्रों में काम कर रहे समर्पित अशासकीय संस्थाओं को राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी। उनकी विशेषज्ञता का लाभ लेते हुए जनजातीय कल्याण की कार्ययोजनाएं और रणनीतियां बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि जनजातीय विकास की योजनाएं बनाने में जमीनी स्तर के सुझावों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। समर्पित स्वैच्छिक संगठन गहन रूप से सामाजिक आर्थिक संदर्भों में समस्याओं का परीक्षण करते हैं। जनजातीय समुदाय के आचार-व्यवहार को भी करीब से जानते हैं। उन्होंने जनजातीय समुदाय के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे छोटी घटनाओं से सबक लेकर व्यापक जनहितैषी नीतियां बन जाती हैं। डॉ. शाह ने कहा कि सरकार, समुदाय और समर्पित सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर काम करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। उदघाटन सत्र के बाद विशेषज्ञ संस्थाओं के समूहों ने जनजातीय समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वन अधिकार, शासन, प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर सुझाव दिए। ट्राइफेड की डीजीएम सु प्रीति मैथिल ने आजीविका पर अपने समूह का प्रस्तुतिकरण करते हुए बताया कि वित्तीय समावेश, आजीविका स्कूल, संसाधनों का एटलस, उद्यमिता विकास करने संबंधी सुझाव दिए और राज्य के लिए अपने विचार रखे। जनजातीय समुदाय की शिक्षा और सशक्तिकरण में अशासकीय संगठनों की भूमिका, चुनौतियां एवं मुद्दे, वर्तमान में शिक्षा का स्तर, समग्र शिक्षा में संगठनों की भूमिका पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। रामकृष्ण मिशन मेघालय के स्वामी अनुरागनंदा ने सत्र की अध्यक्षता की। स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट कर्नाटक के प्रवीन कुमार सैयापराजु ने विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि ड्रॉप आउट की चुनौती को नियमित संपर्कों से दूर किया जा सकता है। जनजातीय समुदाय की महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियां, टीकाकरण एवं अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ाने, टेली मेडिसिन, एमहेल्थ जैसे आधुनिक हस्तक्षेप से स्वास्थ्य सेवा बढ़ाने में अशासकीय संगठनों की भूमिका पर विचार हुआ। विवेकानंद मेडिकल मिशन वायनाड केरल के सुरेश ने सत्र की अध्यक्षता की। डॉ. सलोनी सिडाना एमडी नेशनल हेल्ड मिशन ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय संबंधी कठिनाइयों की चर्चा करते हुए बताया कि भाषा और भौगोलिक दूरी बड़ी समस्या है। ट्राइफेड की डीजीएम सु मैथिल ने जनजाति अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं, और आजीविका बढ़ाने, जनजातीय युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने, आजीविका के नए अवसर, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर स्वैच्छिक संगठनों ने अपने विचार रखे। राजस्थान बाल कल्याण समिति उदयपुर के मुकेश गौर ने सत्र की अध्यक्षता की। मती मीनाक्षी सिंह ट्राइबल सेल राजभवन ने जनजातीय विकास एवं शासन प्रशासन से जुड़े विषयों, राज्य की भूमिका, पंचायत राज संस्थाओं, ग्राम सभा पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं जनजाति विकास एजेंसियों की भूमिकाओं पर चर्चा की। शिव गंगा झाबुआ के पद्म महेश शर्मा ने सत्र की अध्यक्षता की। राज्यपाल पटेल ने भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह स्वरूप गोंडी पेंटिंग भेंट कर अभिनंदन किया। मंत्री डॉं. कुंवर विजय शाह ने कहा कि राज्य सरकार, एन.जी.ओ. मीट में प्राप्त … Read more

अब एक ही योजना से लाभ — आयुष्मान वाले नहीं ले सकेंगे मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान सहायता

भोपाल आयुष्मान भारत योजना के लिए पात्र हितग्राहियों को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान का लाभ नहीं मिलेगा। आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का उपचार होने के बाद ही आवेदन पर विचार होगा। इसका उद्देश्य स्वेच्छानुदान से अधिकाधिक लोगों को लाभ दिलाना है। इसके लिए आधार नंबर से आयुष्मान की पात्रता और अस्पताल की संबद्धता पता की जा रही है। विशेष परिस्थिति में बीमारी यदि आयुष्मान का पैकेज कवर नहीं है तभी स्वेच्छानुदान से राशि मिल सकेगी। दरअसल, मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के लिए बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन आते थे, जिसमें हितग्राही आयुष्मान योजना के तहत भी उपचार के लिए पात्र हैं।   उन्हें बीमारी की गंभीरता और आर्थिक स्थिति देखते हुए राशि स्वीकृत कर दी जाती थी। ऐसे में शासन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। शासन ने अब तय किया है आयुष्मान योजना से उपचार की सुविधा निजी और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है तो स्वेच्छानुदान से राशि देने का औचित्य नहीं है। मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी ने बताया कि आयुष्मान हितग्राहियों को विशेष परिस्थिति में ही स्वेच्छानुदान दिया जा रहा है, जैसे रोगी को ऐसी बीमारी हो जो आयुष्मान योजना के पैकेज में शामिल नहीं हो या फिर जिस अस्पताल में मरीज भर्ती है वह आयुष्मान योजना में है या नहीं। नहीं होने की स्थिति में स्वेच्छानुदान पर विचार किया जाता है।

पर्यटन में नया आकर्षण: महेश्वर और कुक्षी में बनेंगे हैंडलूम-क्राफ्ट टूरिज्म विलेज, पर्यटक जान सकेंगे पारंपरिक कला

भोपाल मध्यप्रदेश पर्यटन द्वारा चंदेरी के प्राणपुर की तर्ज पर महेश्वर के पास एक गांव को हैंडलूम टूरिज्म विलेज और कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। खरगोन जिले में स्थित महेश्वर का गांव केरिया खेड़ी महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि धार जिले में स्थित कुक्षी बाग प्रिंट के लिए जाना जाता है। चंदेरी साड़ी की बुनाई पर केंद्रित हैंडलूम टूरिज्म विलेज प्राणपुर की तरह ये दोनों नई परियोजनाएं पारंपरिक वस्त्र कला को बढ़ावा देंगी, पर्यटकों को आकर्षित करेंगी तथा बुनकरों और कारीगरों को खरीदारों से सीधे जुड़ने का एक मंच प्रदान करेंगी। निफ्ट, एनआईडी और अन्य संस्थानों के छात्र और शोधकर्ता बुनाई और रंगाई प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन देख सकेंगे। दोनों परियोजनाओं को लेकर कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। महेश्वर में कार्य जल्द शुरू होने वाला है। इसके बाद कुक्षी में परियोजना की शुरुआत होगी। साड़ी बनते हुए देख सकेंगे पर्यटक महेश्वर से लगभग चार किमी दूर छोटे से गांव केरिया खेड़ी में लगभग सौ परिवार माहेश्वरी साड़ियां, सलवार-सूट और अन्य वस्त्र बुनते हैं। यह गांव महेश्वर से ओंकारेश्वर जाने वाली सड़क से लगभग तीन किमी दूर स्थित है। गांव में एक कैफेटेरिया और एक अनुभव और विक्रय केंद्र बनाया जाएगा। गांव के नागरिक बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया जाएगा। परियोजना का क्रियान्वयन कर रहे अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा स्वीकृत और 5.11 करोड़ रुपये की लागत वाली महेश्वर परियोजना पर काम जल्द ही शुरू होगा और अगले साल जून तक पूरा होने की उम्मीद है। केरिया खेड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से महेश्वर पर पर्यटकों का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। मंदिर में दर्शन और नर्मदा नदी में डुबकी लगाने के लिए महेश्वर जाने वाले पर्यटकों का एक वर्ग हथकरघा गांव की ओर जा सकता है, क्योंकि गांव से लगभग दो किमी दूर नर्मदा नदी पर एक घाट है।वस्त्रों की रंगाई का प्रदर्शन होगा धार जिले के तहसील मुख्यालय कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा। कुक्षी में लगभग 1500 बाग कारीगर रहते हैं। यहां भी कस्बे का कायाकल्प किया जाएगा और इसे एक ऐसे स्थान के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटक सीधे कारीगरों से बाग प्रिंट के वस्त्र खरीद सकेंगे। इस परियोजना का बजट 20.60 करोड़ रुपये है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। गांव डाई हाउस के अतिरिक्त कैफेटेरिया, विक्रय और अनुभव केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बोर्ड ने पहली बार चंदेरी के प्राणपुर में इस अवधारण को आकार दिया और प्राणपुर को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम का पुरस्कार केंद्र सरकार की ओर से मिला। इसी से प्रोत्साहन पाकर महेश्वर और कुक्षी में पर्यटन ग्राम विकसित किए जा रहा हैं। दोनों जगहों के लिए टेंडर हो गए हैं, जल्द ही कार्य शुरू होगा। – डॉ अभय अरविंद बेडेकर, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन बोर्ड

असम से कान्हा पहुंचेंगे जंगली भैंसे, टाइगर के गढ़ में नया वन्यजीव संतुलन बनाने की तैयारी

मंडला   टाइगर्स के लिए विश्वप्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में नए मेहमान आने वाले हैं. लेकिन इन मेहमानों को हल्के में न लें, ये हैं भारी भरकम आसामी जंगली भैैंसे. जल्द ही असम से मध्य प्रदेश के इस टाइगर रिजर्व में जंगली भैसों की एंट्री होने वाली है, जिसके बाद जंगल का रोमांच और बढ़ने जा रहा है. दुनिया भर के पर्यटक यहां प्रकृति की सुंदरता और बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के दीदार के लिए पहुचते हैं, वहीं अब भैसों की तादाद भी यहां बढ़ाई जा रही है. कान्हा में अचानक घटी जंगली भैसों की तादाद कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी के अनुसार, '' यहां पहले जंगली भैंसों की उपस्थिति थी, लेकिन समय के साथ उनकी संख्या बहुत कम हो गई. किसी भी प्रजाति की अचानक कमी जंगल पर प्रतिकूल असर डालती है. यही कारण है कि अब असम के राष्ट्रीय उद्यानों से जंगली भैंसों को कान्हा में बसाने की योजना बनाई जा रही है.'' असम से जंगली भैंसे लाने की रूपरेखा तैयार वन विभाग के मुताबिक सुपखार क्षेत्र को जंगली भैंसों के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है. असम से जंगली भैसों को 5 चरणों में कान्हा लाने की तैयारी चल रही है. उच्चाधिकारियों के साथ लगातार परामर्श जारी है और जल्द ही इस दिशा में कदम उठाए जाने की उम्मीद है. इस पहल से न सिर्फ वन्यजीवन को मजबूती मिलेगी बल्कि पर्यटकों के लिए भी कान्हा नेशनल पार्क का अनुभव और समृद्ध होगा. पांच चरणों में होगा ट्रांसलोकेशन योजना के अनुसार, जंगली भैंसों को असम से लाने का काम पांच चरणों में पूरा किया जाएगा. पार्क के सुपखार क्षेत्र को इनके लिए सबसे उपयुक्त चिन्हित किया गया हैृ. इस महत्वपूर्ण परियोजना पर उच्च स्तर पर चर्चा जारी है और जल्द ही इसे अमली जामा पहनाने की उम्मीद है. इस पहल से न सिर्फ पार्क के वन्यजीवन को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटकों को भी एक नए और दुर्लभ वन्यजीव को देखने का अवसर मिल सकेगा. कान्हा में बसेंगे आसामी भैंसे कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया, '' कान्हा में कभी जंगली भैंसों की अपनी आबादी हुआ करती थी और कान्हा नेशनल पार्क से इन्हें बाहर भी भेजा गया था लेकिन समय के साथ ये प्रजाति लगभग विलुप्त हो गई. किसी भी प्रजाति की अनुपस्थिति पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालती है. इसी कमी को दूर करने और जैव विविधता को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.

ट्रैक पार करते समय हादसे पर रेलवे प्रशासन को जवाबदेह ठहराया, हाई कोर्ट ने रेलवे का दावा खारिज किया

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है "यदि रेलवे ने पटरियों तक अनधिकृत पहुंच को रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए तो क्रॉसिंग करते समय हुई मौत के लिए भी मुआवजा भी देना पड़ेगा." इस प्रकार जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने रेलवे दावा अधिकरण भोपाल के फैसले को निरस्त कर दिया. रेलवे दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती एकलपीठ ने अपने आदेश कहा "बच्चे सहित दो महिलाओं की मौत एक अप्रिय घटना के कारण हुई थी और रेलवे प्रशासन पटरियों तक अनधिकृत पहुंच रोकने तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने वैधानिक कर्तव्य में विफल रहा. लापरवाही या अनधिकृत प्रवेश से रेलवे प्रशासन स्वतः ही दायित्व से मुक्त नहीं हो जाता है." मामले के अनुसार सिंगरौली निवासी राम अवतार सहित दो अन्य की तरफ से दायर अपील में रेलवे दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी. रेलवे ट्रैक पर 3 लोगों की मौत का मामला याचिका में कहा गया "रेलवे ही हादसे के लिए जिम्मेदार है." रेलवे दावा अधिकरण ने माना था "रेलवे मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि मृतक ट्रेन में नहीं चढ़े थे. ट्रेन की पटरी में आने के कारण उनकी मौत हुई थी." राम अवतार अपने बेटे राजेश (उम्र 3 साल) का मुंडन कराने 16 अप्रैल 2011 में मैहर ले गए थे. इस दौरान 8-10 लोगों का समूह मैहर गया था. लौटते समय रेलवे स्टेशन में बालक राजेश रेलवे की पटरियों पर आ गया था और उसे बचाने के लिए दो महिलाएं भी पटरी पर आ गईं और तीनों ट्रेन की चपेट में आ गई थीं. रेलवे दावा प्राधिकरण को मुआवजा के निर्देश प्राधिकरण ने सुनवाई के दौरान पाया था "समूह के लोग ट्रेन संख्या 51672 सतना-इटारसी पैसेंजर में नहीं चढे़ थे. लोली बाई, इंद्रमती और राजेश (बालक) की दूसरी पटरी से गुजरती हुई गुजरती ट्रेन की चपेट में आने से हुई." रेलवे ने लिखित बयान के माध्यम से दुर्घटना से इनकार किया और कहा "मृतक रेलवे लाइन पार कर रहे थे, तभी गुजरती ट्रेन की चपेट में आ गये." एकलपीठ ने रेलवे दावा अधिकरण को निर्धारित मुआवआ देने के निर्देश जारी किये हैं. जबलपुर में घोड़ों की मौत के मामले में सुनवाई एक अन्य मामले में हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की मौत के मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में हुई. याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया "पिछले माह में कुछ और घोड़ों की मौत हुई, जिसे छुपाया जा रहा है." हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने आरोप को गंभीरता से लेते हुए केयरटेकर सचिन तिवारी को शपथ पत्र पर यह बताने कहा है "वर्तमान में कितने घोड़े बचे हैं और उनका मानसिक व शारीरिक स्टेटस क्या है." युगलपीठ ने यह भी बताने कहा है "घोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं." युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को नियत की है. जबलपुर निवासी पशु प्रेमी सिमरन इस्सर की ओर से याचिका दायर की गई थी. 

16 नवंबर को जबलपुर में सूर्या मैराथन, आर्मी के आयोजन में शामिल हो सकते हैं आम नागरिक भी

जबलपुर   भारतीय सेना जबलपुर में हर साल सूर्या मैराथन का आयोजन करती है. इस साल भी 16 नवंबर को यह मैराथन आयोजित की जा रही है. इसमें लगभग 7500 लोग अब तक रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. इस आयोजन में थल सेनाध्यक्ष अध्यक्ष के पहुंचने की भी उम्मीद है. मुख्यमंत्री मोहन यादव मैराथन में दौड़ने वाले धावकों को हरी झंडी दिखाएंगे. कुल मिलाकर 15 लाख रुपए के इनाम दौड़ने वालों को दिए जाएंगे. जबलपुर में तीसरी साल सूर्या मैराथन जबलपुर में लगातार तीसरी साल सूर्या मैराथन का आयोजन किया जा रहा है. इस आयोजन में पिछले साल 10,000 लोगों ने हिस्सा लिया था. इस साल अभी तक 7500 लोग रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. यह आयोजन भारतीय सेना का मध्य भारत कमान करवाता है. सेना के अधिकारी मेजर जनरल संजय गौतम ने बताया "रजिस्ट्रेशन के आखिरी वक्त तक पिछले साल से भी ज्यादा लोग इस मैराथन में हिस्सा लेंगे. इस मैराथन में जीतने वाले धावकों को कुल मिलाकर 15 लाख रुपए की राशि इनाम के तौर पर दी जा रही है." सबसे बड़ी रेस 21 किमी की, इनाम एक लाख मैराथन में सबसे बड़ा पुरस्कार 21 किलोमीटर की रेस जीतने वाले खिलाड़ी को दिया जाएगा. इसमें एक पुरस्कार स्त्री को और एक पुरुष को दिया जाएगा. मैराथन में अलग-अलग कैटेगरी हैं. सबसे छोटी मैराथन मात्र 3 किलोमीटर की है, जिसमें कभी-कभार दौड़ने वाले लोग भी शामिल हो सकेंगे. अलग-अलग कैटेगरी में कुल मिलाकर 90 लोगों को सम्मानित किया जाएगा. यह रेस कोबरा मैदान से शुरू होगी और यहीं पर खत्म होगी, लेकिन इस बीच में खिलाड़ी जबलपुर शहर के भीतर भी दौड़ेंगे. इसलिए इस आयोजन में सेना ने जबलपुर पुलिस और जिला प्रशासन की मदद भी ली है. देश के किसी भी कोने का व्यक्ति दौड़ सकता है मेजर जनरल संजय गौतम ने बताया "इस रेस को इंडिया रनिंग कैलेंडर में शामिल किया गया है और पूरे देश फिट इंडिया मूवमेंट के जरिए अलग-अलग रेस की जाती हैं. उनकी जानकारी धावकों को होती है इसलिए इस आयोजन में जबलपुर के साथ ही देश के दूसरे इलाकों से भी धावक पहुंच रहे हैं. इस आयोजन में शामिल होने वाले हर खिलाड़ी को ड्रेस दी जाएगी." "ड्रेस का कुछ पैसा भी लिया जा रहा है. इस ड्रेस में एक चिप होगी, जो एक सेंसर से जुड़ी होगी ताकि ओपनिंग पॉइंट और एंड पॉइंट पर इस बात का मेजरमेंट किया जा सके की धावक में कब रेस शुरू की और कब खत्म की." ऑपरेशन सिंदूर को समर्पित मैराथन एक साथ 7500 लोग दौड़ेंगे तो सब की ओपनिंग और एंडिंग टाइम अलग-अलग होंगे. यह आयोजन जबलपुर में 16 नवंबर को सुबह 5:30 बजे शुरू हो जाएगा. मेजर जनरल संजय गौतम ने बताया "इस बार की रेस का उद्देश्य फ्यूल योर स्पिरिट एंड ऑनर देयर करेज रखा गया है. इस बार की रेस ऑपरेशन सिंदूर में वीरता से लड़ने वाले सैनिकों को समर्पित है." 

डॉ. अभिमन्यु यादव और डॉ. इशिता यादव 30 नवंबर को लेंगे सात फेरे, साथ ही 20 जोड़ों की होगी सामूहिक शादी

उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करने का फैसला लिया है। समारोह 30 नवंबर को उज्जैन के होटल अथर्व में होगा। इसमें 20 जोड़ों की शादी होगी। यहीं डॉ. अभिमन्यु और डॉ. इशिता यादव सात फेरे लगेंगे। मुख्यमंत्री पुत्र अभिमन्यु की सगाई खरगोन के किसान दिनेश यादव की बेटी डॉ. इशिता से 5 माह पहले ही हो चुकी है। सामुदायिक समारोह बनेगा आयोजन सामूहिक विवाह समारोह के बेटे की शादी कर सीएम सामाजिक समरसता और सादगी का संदेश देना चाहते हैं। शादी में दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य के मंत्री, वरिष्ठ अफसर व भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम में पारंपरिक रस्मों के साथ सामाजिक कार्यों के लिए भी पहल की योजना है, जिससे यह सिर्फ एक शादी नहीं, सामुदायिक समारोह बन जाएगा। शादी मुख्यमंत्री आवास में नहीं होगी सीएम मोहन यादव ने खुद ट्वीट करके बताया कि शादी मुख्यमंत्री आवास में नहीं, बल्कि उज्जैन के होटल अथर्व में होगी. इसमें सिर्फ सीमित मेहमानों को बुलाया जाएगा. दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य के मंत्री, बड़े अधिकारी और भाजपा के प्रमुख नेता शामिल होंगे. यह आयोजन सिर्फ एक शादी नहीं होगा. इसमें पारंपरिक रस्मों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों की भी पहल होगी. जैसे गरीब कन्याओं की मदद या अन्य समाजसेवा के काम. इससे सामाजिक समरसता का संदेश जाएगा. सीएम यादव सादगी के लिए पहले से मशहूर हैं. उन्होंने अपने बड़े बेटे की शादी भी राजस्थान में बहुत साधारण तरीके से की थी. अब छोटे बेटे की शादी भी उसी तरह सादगी भरी रखी है. इस फैसले से सीएम ने दिखाया कि बड़े पद पर होने के बावजूद वे आम लोगों की तरह जीवन जीते हैं. वे चाहते हैं कि समाज में फिजूलखर्ची कम हो और शादियाँ सादगी से हों. उनकी इस पहल की हर तरफ तारीफ हो रही है. परिवार और पृष्ठभूमि ● डॉ. अभिमन्यु यादव, सीएम के छोटे बेटे। सर्जरी में मास्टर्स कर रहे हैं। ● डॉ. इशिता यादव, खरगोन के किसान दिनेश यादव की बेटी, एमबीबीएस कर चुकी हैं। पीजी कर रही हैं। इशिता, सीएम की बड़ी बेटी डॉ. आकांक्षा की ननद भी हैं।