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Toll Tax से छूट जैसा अनुभव: NHAI ने लॉन्च की स्मार्ट पास सर्विस, सफर होगा आसान

ग्वालियर  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने देशभर के वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है। अब हाइवे पर बार-बार टोल देने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। एनएचएआइ ने ‘वार्षिक फास्टैग सर्विस’ शुरू की है, जिसके तहत महज 3000 रुपए में सालभर में 200 बार टोल क्रॉस करने की सुविधा मिलेगी। इस नई स्कीम से ग्वालियर और आसपास के चार प्रमुख टोल प्लाजा – मेहरा, पनिहार, बरेठा और छौंदा – जुड़ गए हैं। यह सुविधा विशेष रूप से गैर-वाणिज्यिक वाहनों के लिए है। इस ‘वार्षिक फास्टैग पास’ का लाभ उठाने के लिए वाहन मालिकों को एनएचएआइ की ‘राजमार्ग यात्रा’ ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस प्रकार, अब किसी भी सरकारी दफ्तर या एजेंसी के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सारा काम मोबाइल से ही संभव है। एनएचएआइ ने यह स्कीम देशभर के सभी 1150 टोल प्लाजा पर 15 अगस्त 2025 से लागू कर दी है। ग्वालियर के ये टोल प्लाजा हुए शामिल छौंदा टोल प्लाजा (ग्वालियर-मुरैना मार्ग): एकल यात्रा शुल्क 100 रुपए। सामान्य स्थिति में 30 बार टोल क्रॉस करने पर 3000 रुपए खर्च होते हैं। बरेठा टोल प्लाजा (ग्वालियर-भिंड मार्ग): एकल यात्रा शुल्क 75 रुपए। सामान्य स्थिति में 40 बार टोल क्रॉस करने पर 3000 रुपए खर्च होते हैं। मेहरा टोल प्लाजा (ग्वालियर-आगरा/झांसी मार्ग): एकल यात्रा शुल्क 100 रुपए। सामान्य स्थिति में 30 बार टोल क्रॉस करने पर 3000 रुपए खर्च।   पनिहार टोल प्लाजा (ग्वालियर-शिवपुरी मार्ग): एकल यात्रा शुल्क 120 रुपए। सामान्य स्थिति में 25 बार टोल क्रॉस करने पर 3000 रुपए खर्च। कैसे करें एक्टिवेट ‘राजमार्ग यात्रा’ ऐप डाउनलोड करें, वाहन नंबर और फास्टैग को ऐप में रजिस्टर करें, Annual FASTag Pass विकल्प चुनें और 3000 रुपए का भुगतान करें। इसके बाद एक्टिवेशन हो जाएगा। एनएचएआइ के मैनेजर प्रशांत मीणा ने बताया, वार्षिक फास्टैग योजना ग्वालियर के चारों प्रमुख टोल प्लाजा से जुड़ चुकी है। वाहन मालिकों को अब कोई पेपरवर्क नहीं करना होगा, सब कुछ ऑनलाइन रहेगा। इससे हाईवे ट्रैफिक में तेजी आएगी और लोगों का समय व पैसा दोनों बचेंगे।

सूबेदार व SI पदों के लिए आवेदन का अंतिम दिन: जल्दी करें फॉर्म सबमिट

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में नौकरी की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है। विभाग में सब-इंस्पेक्टर (SI) और सूबेदार के कुल 500 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवारों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि कल, 10 नवंबर 2025 निर्धारित की गई है। जो उम्मीदवार अब तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, वे तुरंत मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर या डायरेक्ट लिंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए ग्रेजुएट (स्नातक) अभ्यर्थी पात्र हैं। उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से ग्रेजुएशन पूरा होना आवश्यक है। आयु सीमा: सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु 33 वर्ष और आरक्षित वर्ग के लिए 38 वर्ष निर्धारित है। आयु की गणना 10 नवंबर 2025 को आधार मानकर की जाएगी। आरक्षित वर्ग को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया 1. उम्मीदवार esb.mp.gov.in वेबसाइट पर जाएं। 2. होम पेज पर हिंदी या अंग्रेजी भाषा का चयन करें। 3. “Online Form – Subedar & Sub-Inspector Recruitment Test For Police H.Q., Home (Police) – 2025 Start From” लिंक पर क्लिक करें। 4. मांगी गई जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन करें। 5. लॉग इन कर शेष डिटेल भरें और आवेदन फॉर्म को पूरा करें। 6. निर्धारित फीस जमा करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर दें। फीस का विवरण जनरल वर्ग एवं अन्य राज्यों के उम्मीदवार: ₹500 OBC, SC, ST उम्मीदवार: ₹250 इसके अलावा ₹60 पोर्टल शुल्क अतिरिक्त देना होगा। (ध्यान रखें, बिना फीस जमा किए आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।) महत्वपूर्ण सलाह अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले ऑफिशियल नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ें और अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए आज ही आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

निवेशक-हितैषी नीतियों से मध्यप्रदेश में ऊर्जा सेक्टर को नई उड़ान: मंत्री शुक्ला

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है। मध्यप्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश के लिए वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन और वर्ष 2070 तक ‘नेट ज़ीरो कार्बन फुटप्रिंट’ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है। मंत्री श्री शुक्ला ने बताया कि प्रदेश ने बीते 12 वर्षों में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 19 गुना वृद्धि की है। मध्यप्रदेश की कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता में आज 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हरित ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त हो रहा है। यह अभूतपूर्व उपलब्धि राज्य की ऊर्जा नीति, तकनीकी नवाचारों और निवेशक-हितैषी दृष्टिकोण का परिणाम है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक प्रगति राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण देश के अग्रणी ऊर्जा सरप्लस राज्यों में शामिल है। राज्य की नीति प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘स्वच्छ ऊर्जा – आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार कर रही है। अभूतपूर्व निवेश और रोजगार सृजन जीआईएस–भोपाल के दौरान प्रदेश की ‘टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक’ रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी ने देश-विदेश के निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। इस नीति के कारण अब तक ₹5.72 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है, जिससे 1.46 लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित होंगे। अवाडा एनर्जी, एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर, एनएसएल रिन्यूएबल पॉवर, टोरेंट पॉवर और जिंदल इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी जैसी प्रतिष्ठित कंपनियां प्रदेश में व्यापक निवेश करने जा रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जीआईएस-भोपाल का शुभारंभ करते हुए कहा था कि देश के ऊर्जा क्षेत्र में पिछले दशक में जबरदस्त प्रगति हुई है। उन्होंने इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश की भूमिका की सराहना करते हुए कहा था कि राज्य की कुल 31 हजार मेगावाट विद्युत क्षमता में लगभग 30 प्रतिशत हरित ऊर्जा का योगदान है। हरित ऊर्जा के नए केंद्र है रीवा और ओंकारेश्वर रीवा सोलर पार्क ने देश में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में नये मानदंड स्थापित किये हैं। यह देश के सबसे बड़े सौर ऊर्जा पार्कों में से एक है और यहाँ से दिल्ली मेट्रो को भी बिजली आपूर्ति की जा रही है। इसी क्रम में ओंकारेश्वर में देश का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट (278 मेगावाट) स्थापित किया गया है। इससे जलाशयों के उपयोग से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा मिली है। मंत्री श्री शुक्ला ने बताया कि हाल ही में मुरैना में स्थापित ‘सोलर प्लस बैटरी स्टोरेज’ परियोजना ने एक नया इतिहास रचा है। यहाँ केवल ₹2.70 प्रति यूनिट की दर से 24 घंटे हरित ऊर्जा उपलब्ध होगी। यह परियोजना भारत में ‘राउंड-द-क्लॉक ग्रीन पॉवर सप्लाई’ की दिशा में पहला बड़ा कदम है, जो कोयला आधारित संयंत्रों के समतुल्य ‘पीक-ऑवर्स’ में बिजली आपूर्ति करने में सक्षम है। सांची बना प्रदेश का पहला सौर शहर राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सांची को मध्यप्रदेश का पहला सौर शहर घोषित किया गया है। यह परियोजना ‘नेट ज़ीरो कार्बन सिद्धांत’ पर आधारित होगी, अर्थात जितनी ऊर्जा का उपभोग होगा, उतनी ही हरित ऊर्जा का उत्पादन भी किया जाएगा। यह पहल प्रदेश के साथ पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगी। नर्मदापुरम में ऊर्जा उपकरण निर्माण का केंद्र नर्मदापुरम जिले में नवकरणीय ऊर्जा उपकरणों और पॉवर उपकरणों के लिए समर्पित निर्माण क्षेत्र डेडिकेटेड मैन्यूफैक्चरिगं जोन) विकसित किया जा रहा है। इससे राज्य में औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और हजारों नए रोजगार सृजित होंगे। वर्ष 2030 तक 20 गीगावाट हरित ऊर्जा का लक्ष्य वर्तमान में मध्यप्रदेश में 5 प्रमुख सौर परियोजनाएँ कार्यरत हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2.75 गीगावाट (2,750 मेगावाट) है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 20 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य तय किया है। नीतिगत सुधार और तकनीकी नवाचार मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने ‘टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक’ रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू की है। इसमें सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों को आकर्षक और अनुकूल अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। कुसुम-सी योजना के अंतर्गत लगभग 18,000 मेगावाट क्षमता के लिए निविदाएँ प्राप्त हुई हैं, जिनमें किसानों, एमएसएमई और निजी डेवलपर्स ने व्यापक भागीदारी की है। इस योजना में किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये 100% फीडर सोलरीकरण का प्रावधान किया गया है। पंप हाइड्रो और बायोफ्यूल परियोजनाओं को बढ़ावा मध्यप्रदेश में पंप हाइड्रो परियोजनाओं और बायोफ्यूल परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अब तक 14 हजार 850 मेगावाट क्षमता की पंप हाइड्रो परियोजनाओं के लिए आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 8 हजार 450 मेगावाट परियोजनाओं का पंजीयन हो चुका है। इसी प्रकार, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) और बायोमास पैलेट परियोजनाओं के लिए प्रतिदिन 6 हजार 500 टन से अधिक क्षमता की परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं।  

शहरों को मिलेगी स्वच्छ हवा: सरकार ने मंज़ूर की 972 नई इलेक्ट्रिक बसें

केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने दी मंजूरी भोपाल  प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में डीजल ईंधन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिये सार्वजनिक परिवहन सेवा में इलेक्ट्रिक बसों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस सेवा को मंजूरी दी है। यह बसें शीघ्र संचालित हों, इसके लिये नगरीय निकायों द्वारा बस डिपो और चार्जिंग से जुड़े सभी अधोसंरचना कार्य तेजी से किये जा रहे हैं। प्रदेश में बस डिपो अधोसंरचना निर्माण के लिये संबंधित नगरीय निकायों को केन्द्र सरकार द्वारा 60 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा 40 प्रतिशत राशि प्रदाय की जा रही है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में चार्जिंग पाइंट अधोसंरचना निर्माण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत राशि प्रदाय की जा रही है। नगरीय निकायों में स्वीकृत पीएम ई-बसें केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने जिन नगर निगमों में ई-बसों की मंजूरी दी है, इनमें भोपाल में 195, इंदौर में 270, ग्वालियर में 100, जबलपुर में 200, उज्जैन में 100, सागर में 32, देवास में 55 और सतना में 20 ई-बसें शामिल हैं। नगरीय निकायों में ई-बस सेवा का संचालन जल्द शुरू हो, इसके लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने संबंधित निकायों को बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से जुड़े अधोसंरचना के सभी कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिये गये हैं।  

हवाई सफर हुआ और आसान: विन्ध्य क्षेत्र को मिली एटीआर 72 उड़ान की सौगात

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी जब कहते थे कि वह दिन भी अब दूर नहीं जब हमारे देश के 'हवाई चप्पल वाले लोग भी हवाई जहाज में उड़ान भरेंगे' तब विरोधी इसे महज जुमला कहकर बात हवा में उड़ा देते थे। ऐसे लोगों को आज रीवा आकर देखना चाहिए कि सपना किस तरह यथार्थ के धरातल पर उतरकर चरितार्थ होता है। आज का दिन कई पीढ़ियों की परिकल्पना और सपने को यथार्थ में परिवर्तित होने का दिन है जब एटीआर 72 वायुयान दिल्ली के लिए उड़ान भरेगा। उड्डयन विभाग के हमारे केन्द्रीय मंत्री, माननीय मुख्यमंत्री, विन्ध्य के सांसद, विधायक गण व नागरिक विन्ध्य के विकास के इस मंगलाचरण के साक्षी होंगे। हम यहीं रुकने वाले नहीं है शीघ्र ही इंदौर से वायुमार्ग से जुड़ने वाले हैं। अगले चरण में मुंबई, पुने, बेंगलुरु जैसे शहरों से सभी इसी एयरपोर्ट से उड़ान भरेंगे। हमसे मीडिया के लोग पूछते हैं कि इसके आगे और क्या? मेरा जवाब है एयरबस, सिर्फ 500 मीटर का रनवे और बढ़ा देंगे। प्रधानमंत्री जी ने रीवा में हवाई सेवा के विस्तार के लिए जिस तरह से अपनी रुचि प्रदर्शित की है उसके लिए हम विन्ध्यवासी उनके प्रति चिर ऋणी रहेंगे। 9 सितंबर 2024 को डीजीसीए ने रीवा एयरपोर्ट से 72 सीटर विमान के लिए लायसेंस जारी किया था। 20 अक्टूबर 2024 को माननीय प्रधानमंत्री जी ने रीवा एयर पोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन किया इसके साथ ही रीव- दिल्ली और रीवा -इंदौर के लिए हवाई उड़ान का पथ प्रशस्त हुआ। इस के लिये इंडिगो और एलायंस एयर को प्रस्ताव भेजा गया। आज का दिन इसी प्रयत्न का प्रतिफल है। हमारे तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह जी चौहान रीवा में 15 फरवरी 2023 को हवाई अड्डे की आधारशिला रखी थी। इसके साथ ही रीवा भविष्य में उत्तरमध्य भारत का सबसे महत्वपूर्ण एयर ट्रैफिक डेस्टिनेशन बनकर उभरेगा की यात्रा पर चल पड़ा। दो वर्ष पूर्व इंदौर में आयोजित ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट में विश्वभर के उद्यमियों के बीच तत्कालीन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने सगर्व यह घोषणा की थी कि हम मध्यप्रदेश का छठवे हवाईअड्डे को निर्मित और विकसित करने जा रहे हैं। उनकी इस घोषणा ने दुनियाभर के उन उद्योगपतियों के ध्यान को आकृष्ट किया जो यहाँ पावर व माइनिंग सेक्टर, वाइल्ड लाइफ टूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग इन्डस्ट्रीज की संभावनाओं को देखते हैं। शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश करने वालों के लिए यह अवसरों का दरवाजा खोलने वाला है। मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि रीवा का हवाईअड्डा चरणबद्ध तरीके से विकसित होने की प्रक्रिया में है। पाँच साल के भीतर ही रीवा का हवाईअड्डा बोइंग की लैंडिंग और अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए बनकर तैय्यार रहेगा। देश में श्री मोदी जी और प्रदेश में श्री मोहन यादव जी के कुशल और फलदायी नेतृत्व के अनुभव को देखते हुए मैं यह विश्वास पूर्वक कह सकता हूँ कि अगले पाँच वर्षों के भीतर यह सब पूर्णरूपेण यथार्थ के धरातल पर उतर जाएगा। विन्ध्य की आशाओं के केन्द्र रीवा के विकास का श्रेष्ठ व उन्नत दौर है जो स्वतंत्रता के अमृतकाल में प्रारंभ हो रहा है। मैं जब कहता हूँ कि अब रीवा मध्यप्रदेश के ही नहीं देश के समुन्नत और श्रेष्ठ महानगरों की श्रेणी में कदमताल मिलाकर चल पड़ा है तो इसके पीछे ठोस आधार है। 1956 तक रीवा विन्ध्य प्रदेश की राजधानी रहा है और तब इसकी हैसियत भोपाल, लखनऊ, पटना और भुवनेश्वर जैसे शहरों के समकक्ष थी। कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक द्वेषवश रीवा से एक प्रदेश की राजधानी का गौरव छीन लिया। 1956 से 2004 तक यह उपेक्षित और अभिशप्त पड़ा रहा। विन्ध्य में आज जो प्राकृतिक संसाधन हैं वो कल भी थे। आम नागरिकों में विकास की ललक और अपेक्षाएं कल भी वैसी ही थीं। केन्द्र में अटलजी और उसके बाद मोदीजी की नेतृत्व की व प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने आहत और उपेक्षित विन्ध्यवासियों की पीड़ा और भावनाओं को समझा। आज यह क्षेत्र कई मामलों देश में अग्रगण्य है। जब मैं कहता हूँ कि रीवा एयरपोर्ट उत्तरमध्य भारत का सबसे महत्वपूर्ण एयरपोर्ट होगा तो मेरी दृष्टि के सामने सिंगरौली का पावर काम्प्लेक्स उभरकर सामने आता है। सिंगरौली में थर्मल प्लांटस में 20,000 मेगावाट से ज्यादा विद्युत उत्पादन होता है। देश का यह सबसे बड़ा पावर काम्प्लेक्स है। रीवा से सिंगरौली तक विश्वस्तरीय सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित होकर पूर्णता के करीब है। जो यात्री पाँच घंटे में बनारस पहुँचते थे वे दो घंटे में रीवा एयरपोर्ट के लाउंज में होंगे। विन्ध्य की 29 बड़ी औद्योगिक इकाईयां 225 किमी की परिधि में फैली हैं और प्रायः सभी नेशनल हाइवेज से जुड़ी हैं। अपने रीवा का हाइवेज जंक्शन पहले ही विकसित हो चुका है। इन औद्योगिक इकाइयों के अधिकारियों के लिए रीवा एयरपोर्ट कितनी बड़ी सहूलियत बनने जा रहा है यह अब उनसे ही पूछ सकते हैं। विन्ध्य की वाइल्डलाइफ टूरिज्म का विश्व में स्थान है। यहाँ का सफेद बाघ दुनियाभर के चिड़ियाघरों में दहाड़ रहा है। टीवी में दिखने वाला हर दूसरा बाघ या तो बांधवगढ़ का है या कि पन्ना का। पर्यटकों के लिए यह कितना आसान हो जाएगा। रीवा में 750 मेगावाट का सोलर पावर काम्प्लेक्स एशिया के बड़े पावर प्रोडक्शन यूनिट में शामिल है। रीवा में खूबसूरत जल प्रपातों की श्रृंखला है। भगवान राम का तपोवन चित्रकूट और माँ शारदा के धाम मैहर कौन नहीं आना चाहेगा। बाणसागर का वृस्तित जल प्रक्षेत्र और उसके द्वीप विकसित होने पर हनुवंतिया के आकर्षण से आगे का प्राकृतिक सौंदर्य प्रस्तुत करेंगे। अपना विन्ध्य पावर हब की तरह सीमेंट का भी प्रोडक्शन काम्प्लेक्स है। 

प्रकृति संरक्षण के संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

अपनी रसोई को आयुर्वेद से जुड़ी सामग्रियों से पुनः समृद्ध करने की आवश्यकता मंत्री परमार ने "कर्तव्यवीर सम्मान एवं स्थापना दिवस समारोह" में विभिन्न प्रतिभाओं को सम्मानित किया भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में मध्यप्रदेश, रोजगारपरक, गुणवत्तापूर्ण एवं भारत केंद्रित शिक्षा की ओर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम् ही भारत का मूल दृष्टिकोण है। हमारा भाव है कि विश्व एक परिवार है, विश्व कभी बाजार नहीं हो सकता है। इसी भाव से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोविड के भीषण संकटकाल में, विभिन्न देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई थी। यह बात मंत्री श्री परमार ने रविवार को भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित गांधी भवन में, मीणा समाज शक्ति संगठन द्वारा आयोजित सामाजिक "कर्तव्यवीर सम्मान एवं स्थापना दिवस समारोह" में सहभागिता कर कही। मंत्री श्री परमार ने कहा कि मीणा समाज, प्रकृति के सर्वाधिक निकट प्रकृति पूजक समाज है। उन्होंने संगठन के 17वें स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी और मीणा समाज की विभिन्न प्रतिभाओं को सम्मानित किया। मंत्री श्री परमार ने कहा कि कृतज्ञता, भारत की परम्परा, सभ्यता एवं विरासत है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति एवं प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों जल, सूर्य एवं वृक्ष आदि के संरक्षण के लिए कृतज्ञता के भाव से श्रद्धा रूप में परम्परा एवं मान्यता स्थापित की थीं। श्री परमार ने कहा कि यह पूर्वजों द्वारा स्थापित पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित ज्ञान है। हमें प्रकृति के संरक्षण के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। मंत्री श्री परमार ने सभी से युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में स्वस्थ रहने की दृष्टि से प्लास्टिक मुक्त सामाजिक परिवेश के संकल्प में सहभागी बनने की अपील की। श्री परमार ने कृषि एवं दुग्ध उत्पादन में रासायनिक उत्पादों के कम से कम उपयोग करते हुए, जैविक खेती एवं शुद्धता की ओर बढ़ने के लिए भी आह्वान किया। मंत्री श्री परमार ने कहा कि भारत की गृहणियों की रसोई में कोई तराजू नहीं होता है, गृहिणियों को भोजन निर्माण के लिए किसी संस्थान में अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं होती है। भारतीय गृहिणियों में रसोई प्रबंधन का उत्कृष्ट कौशल, नैसर्गिक एवं पारम्परिक रूप से विद्यमान है। भारत की रसोई, विश्वमंच पर प्रबंधन का उत्कृष्ट आदर्श एवं श्रेष्ठ उदाहरण है। श्री परमार ने कहा कि भारतीय रसोई, आयुर्वेद का केंद्र हुआ करती थी, पुनः हमें अपनी रसोई को आयुर्वेद से जुड़ी सामग्रियों से समृद्ध करने की आवश्यकता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि हम सभी की सहभागिता से, अपने पूर्वजों के ज्ञान के आधार पर पुनः विश्वमंच पर सिरमौर राष्ट्र का पुनर्निर्माण होगा। इसके लिए स्वाभिमान के साथ हर क्षेत्र में अपने परिश्रम और तप से आगे बढ़कर, विश्वमंच पर अपनी मातृभूमि का परचम लहराना होगा। अपनी गौरवशाली सभ्यता, भाषा, इतिहास, ज्ञान और विज्ञान के आधार पर, हम सभी की सहभागिता से भारत पुनः "विश्वगुरु" बनेगा। भारत अपने पुरुषार्थ से, वर्ष 2047 तक ऊर्जा एवं खाद्यान्न के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर होगा और विश्व के अन्य देशों की पूर्ति में सामर्थ्यवान देश बनेगा। इस अवसर पर सबलगढ़ विधायक श्रीमति सरला बिजेंद्र रावत, राजस्थान से पधारी समाज सेविका एवं मिस इंडिया (2019) सुश्री जया मीणा, सहायक पुलिस आयुक्त जहांगीराबाद (भोपाल) सुश्री सुरभि मीणा, सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर श्री नीरज मीणा एवं संगठन के प्रदेशाध्यक्ष श्री राम घुनावत सहित समाज के वरिष्ठजन, संगठन के विभिन्न पदाधिकारीगण एवं सामाजिक बंधु-भगिनी एवं युवा उपस्थित थे। 

योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग की मुहिम, हर विवाह का होगा पंजीयन

सामूहिक विवाह में कार्यक्रम स्थल पर ही प्रमाण-पत्र देने का सुझाव भोपाल देव उठनी एकादशी के साथ ही विवाहों का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। विवाहों के शत-प्रतिशत पंजीयन के लिये प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किये गये हैं। यह योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग की एक सराहनीय पहल है। इससे विवाहों का शत-प्रतिशत पंजीयन हो सकेगा, जिससे भविष्य में दंपत्ति को कानूनी अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश विवाह रजिस्ट्रेशन नियम 2008 के अनुसार राज्य के भीतर भारत के नागरिकों के बीच किसी भी विधि या रुढि़ के अधीन सत्यापित किये गये विवाह का पंजीयन किया जाता है। विवाहों का पंजीयन नहीं होने पर विशेष तौर पर महिलाओं को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पति की मृत्यु के बाद उनको मिलने वाले स्वत्वों के भुगतान आदि में परेशानी होती है। आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी श्री विकास मिश्रा ने बताया है कि विवाह पंजीयन के लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त करने हेतु प्रदेश के समस्त कलेक्टरों का ध्यान आकृष्ट किया गया है। जिलों में आयोजित होने वाले मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री निकाह योजना एवं अन्य सामूहिक विवाहों में कार्यक्रम स्थल पर ही विवाह प्रमाण पत्र प्रदान किये जाने का सुझाव दिया गया है। आयुक्त श्री मिश्रा ने सामूहिक विवाह कराने वाली सभी संस्थाओं से जागरूकता बढ़ाने मुहिम में बढ़-चढकर हिस्सा लेने की अपील की है। स्थानीय निकायों, सार्वजनिक स्थलों, शादी हॉल और मैरिज गार्डन में अनिवार्य रूप से विवाह पंजीयन करवाने संबंधी होर्डिंग लगाने के निर्देश जारी किये गये हैं।  

मां को बनाया ‘कैदी’: बुजुर्ग महिला को कमरे में बंद करके रख रहे थे बेटे-बेटी, पुलिस ने दबिश देकर छुड़ाया

भोपाल भोपाल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने इंसानियत को झकझोर दिया है। पिपलानी थाना क्षेत्र के कल्पना नगर में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग मां को उसके ही बेटे और बेटी ने पिछले ढाई साल से घर के एक कमरे में बंद कर रखा था। जब पुलिस ने दरवाजा खुलवाया तो जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी का दिल दहला दिया। पुलिस मौके पर पहुंची तो सच सामने आया कमरे में गंदगी और अंधेरा पसरा था और जमीन पर पड़ी वह मां बेहद कमजोर और असहाय हालत में मिलीं। कई महीनों से उन्हें किसी ने देखा नहीं था। पड़ोसियों को जब यह बात खटकने लगी, तो उन्होंने साहस दिखाकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो सच सामने आया।   दोनों बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हैं महिला के पति का कई साल पहले निधन हो चुका है। वे अपने बेटे अजय सैनी और बेटी सोनाक्षी सैनी के साथ रहती थीं। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हैं। इसी कारण उन्होंने मां को कमरे में बंद कर दिया और उनकी सही देखभाल भी नहीं कर पा रहे थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, महिला को तुरंत अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। फिलहाल पुलिस कानूनी कार्रवाई से पहले स्थिति का मूल्यांकन कर रही है और महिला की आगे की देखभाल के लिए सामाजिक संस्थाओं से संपर्क किया जा रहा है। फिलहाल किसी पर कार्रवाई नहीं पुलिस का कहना है कि बुजुर्ग महिला के बेटे-बेटी की मानसिक स्थिति को देखते हुए फिलहाल किसी पर कार्रवाई नहीं की गई है। बुजुर्ग महिला की देखभाल और इलाज के लिए पुलिस द्वारा सामाजिक संस्थाओं से संपर्क किया जा रहा है, जिससे कि उन्हें उचित सहायता मिल सके। 

रफ्तार बनी कहर: स्कॉर्पियो ने बाइक को रौंदा, चार लोगों की मौत, रीवा पुलिस ने शुरू की तलाश

रीवा जिला मुख्यालय तकरीबन 60 किलोमीटर दूर स्थित जिले के गढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत तेंदुआ मोड़ के समीप एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने बाइक को ठोकर मार दी। ठोकर इतनी तेज थी की बाइक सवार चार लोग 200 मीटर दूर जा गिरे। मौके पर ही चारों की मौत हो गई। जब तक स्कॉर्पियो चालक मौके से फरार हो पाता स्थानीय लोगों ने उसे रोक लिया। हालांकि, भीड़ का फायदा उठाकर वाहन चालक मौके से फरार होने में सफल रहा। चालक की तलाश शुरू पुलिस ने चारों मृतकों का पंचनामा दर्ज कर शव पीएम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैंग भेज दिया है। उक्त वाहन मालिक के विरुद्ध पुलिस ने मामला दर्ज कर चालक की तलाश शुरू कर दी है। मामले की जानकारी देते हुए मांगना एसडीओपी प्रतिभा शर्मा में जानकारी देते हुए बताया कि रविवार की शान तकरीबन 4:30 बजे तेंदुआ मोड़ के समीप स्कॉर्पियो तेज रफ्तार से सामने की ओर से आ रही बाइक को ठोकर मार दी।   चारों मृतक उत्तर प्रदेश के है गुप्त दुर्घटना में जहां चार लोगों की मौत हो गई है वही मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिला अंतर्गत 12 तहसील के हर्रा गांव के रूप में की गई है। मृतकों का नाम रामनरेश साकेत, रुचि साकेत, रंजना साकेत और कमलेश सिंह है। सभी निवासी हारा के रूप में पहचाने गए हैं। उक्त दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो गई है। स्कॉर्पियो मलिक के विरुद्ध मामला पंजीबद कर चालक की तलाश की जा रही है। – शैलेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक रीवा

जनजातीय अंचल में शिक्षा और सम्मान बढ़ाने के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मंत्री विजयवर्गीय

धार जिले के बाग में कर्त्तव्यबोध कार्यक्रम भोपाल  नगरीय प्रशासन एवं आवास एवं धार जिले के प्रभारी मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि राज्य सरकार ने जनजातीय अंचल के क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिये ठोस प्रयास किये हैं। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति, गणवेश, साइकिल, पाठ्य पुस्तकें और मध्यान्ह भोजन जैसी योजनाओं ने विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने में अहम भूमिका अदा की है। इन सब प्रयासों से अब जनजातीय क्षेत्रों की प्रतिभाएँ उभर कर सामने आ रही हैं। मंत्री श्री विजयवर्गीय रविवार को धार जिले के में कर्त्तव्यबोध कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय समाज के नायकों को सम्मान प्रदान किया है, जो पहले कभी नहीं मिला। टंट्या मामा, बिरसा मुण्डा और भीमा नायक जैसे महापुरुषों के योगदान और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि आदिवासी समाज अपनी परम्पराओं, संस्कृति और सरल स्वभाव को बनाये रखते हुए अपने महानायकों के पदचिन्हों पर आगे बढ़े और गर्व से कहे कि वे इन महापुरुषों के वंशज है। कार्यक्रम को सांसद श्री सुमेर सिंह सोलंकी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सरदार सिंह मेढ़ा एवं स्थानीय जन-प्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बाल पोथी का विमोचन किया। उन्होंने भारतीय सेना में सेवा दे चुके सैनिकों का सम्मान भी किया। कार्यक्रम में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले नागरिकों का सम्मान किया गया, जो अब उच्च पदों पर सेवाएँ दे रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों का सम्मान भी किया गया। नवीन विद्युत उप केन्द्र का लोकार्पण प्रभारी मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कुक्षी तहसील के ग्राम अखाड़ा में रविवार को 33/11 के.व्ही. विद्युत केन्द्र का लोकार्पण किया। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति को सतत बनाये रखने के लिये आरडीएसएस योजना में राशि उपलब्ध करायी है। योजना के कारण देश का कोई घर या खेत अब विद्युत आपूर्ति से वंचित नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस क्षेत्र में 2 और विद्युत उप केन्द्र शीघ्र निर्मित किये जायेंगे। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि वर्ष 2004 में प्रदेश में विद्युत उत्पादन 4000 मेगावॉट हुआ करता था, जो अब बढ़कर 24 हजार मेगावॉट तक पहुँच गया है। धार जिले में 126 करोड़ रुपये की आरडीएसएस योजना के अंतर्गत 33/11 के.व्ही. विद्युत उप केन्द्र की लगातार स्थापना की जा रही है।