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मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशक फ्रेंडली विजन को राष्ट्रीय मंच पर करेंगे साझा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य होंगे सम्मिलित

दिल्ली में होने वाले ‘उद्योग संगम’ में मध्यप्रदेश पेश करेगा अपनी इनोवेशन उपलब्धियां भोपाल  केंद्र सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा नई दिल्ली में 11 नवम्बर को ‘उद्योग संगम’ (Conference of Industries & Commerce Ministers) का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सहभागिता करेंगे। इस कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल मुख्य अतिथि रहेंगे। इस सम्मेलन में Business Reform Action Plan (BRAP 2024) के परिणाम जारी किए जाएंगे और Ease of Doing Business के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के अनुरूप राज्य में निवेशकों के लिए व्यवसायिक सुगमता, पारदर्शिता और दक्षता को नई दिशा दी गई है। 434 सुधारों (Reforms) का प्रभावी क्रियान्वयन मध्यप्रदेश द्वारा किया गया है। इन सुधारों में प्रोसेस इंजीनियरिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और निवेश प्रोत्साहन से जुड़े कई उल्लेखनीय कदम शामिल हैं, जिनसे राज्य की औद्योगिक छवि सशक्त हुई है। मध्यप्रदेश के उद्योग विभाग द्वारा ‘उद्योग संगम’ में Invest MP Portal के माध्यम से स्थापित Single Window System, National Single Window System (NSWS) के साथ Integration, औद्योगिक भूमि बैंक (Industrial Land Bank) की सुविधा, Gati Shakti से जुड़ी लॉजिस्टिक सुधार पहल, ऑनलाइन क्लियरेंस प्रणाली, और Startup Ecosystem को प्रोत्साहित करने वाले नवाचार प्रमुख रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे। इन सुधारों से राज्य में उद्योग स्थापना और संचालन प्रक्रियाएँ न केवल सरल हुई हैं, बल्कि निवेशकों का विश्वास भी अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। Ease of Doing Business में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन देश के अग्रणी राज्यों में गिना जा रहा है और ‘उद्योग संगम’ में राज्य की पहलें अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत की जाएंगी। कार्यक्रम के दौरान DPIIT सचिव द्वारा स्वागत उद्बोधन के बाद औद्योगिक पार्क, स्टार्टअप्स, गतिशक्ति, लॉजिस्टिक्स, और Ease of Doing Business पर विभिन्न विषयगत प्रस्तुतियाँ होंगी। सत्र के समापन पर BRAP 2024 Video Release और राज्यों के Felicitation समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय मंत्री  पीयूष गोयल द्वारा राज्यों को सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार इस दिशा में कार्य कर रहा है, जहाँ उद्योग स्थापना और निवेश प्रक्रियाएँ सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनें। ‘उद्योग संगम’ में राज्य की प्रस्तुति इसी विजन का प्रतीक होगी।  

ड्राइवर के बेटे की मेहनत रंग लाई, महिला IAS की मदद से बना डिप्टी कलेक्टर

खंडवा   यह कहानी है मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के रहने वाले ऋतिक सोलंकी (Hrithik Solanki) की. उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से मिसाल कायम की है. ऋतिक सोलंकी के पिता रूपसिंह सोलंकी आईएएस अफसर सृष्टि जयंत देशमुख के ड्राइवर हैं. आपने बड़े अधिकारियों के बच्चों को सफलता का शिखर छूते हुए तो अक्सर देखा होगा, लेकिन ऋतिक की सफलता ने साबित कर दिया कि लगन और दृढ़ संकल्प से गरीबी की रेखा को पार किया जा सकता है. ऋतिक सोलंकी की उपलब्धि सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जिनके पास सीमित संसाधन हैं. ऋतिक सोलंकी ने हाल ही में घोषित मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) परीक्षा के नतीजों में सफलता हासिल की है. यह सफलता उन्हें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि उनके पिता की ईमानदार मेहनत और मां के सहयोग से मिली है. अपने पिता को आईएएस सृष्टि देशमुख के यहां काम करते देखकर ऋतिक ने भी सिविल सेवा में जाने का सपना देखा और उसे पूरा किया.  आईएएस सृष्टि देशमुख के ड्राइवर हैं ऋतिक के पिता ऋतिक सोलंकी के पिता रूपसिंह सोलंकी वर्तमान में आईएएस सृष्टि देशमुख के ड्राइवर के पद पर तैनात हैं. आईएएस सृष्टि देशमुख देश की सबसे चर्चित महिला अफसरों की लिस्ट में शामिल है. इंस्टाग्राम पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं. सृष्टि देशमुख ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2018 में ऑल इंडिया रैंक 5 हासिल की थी. उन्होंने महिला वर्ग में टॉप किया था. आईएएस सृष्टि देशमुख वर्तमान में नरसिंहपुर जिले (मध्य प्रदेश) में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (ADM) के पद पर कार्यरत हैं. चर्चा में हैं मध्य प्रदेश के ऋतिक सोलंकी ऋतिक सोलंकी ने MPPSC 2023 की परीक्षा में सफलता हासिल की है. इस परीक्षा के माध्यम से उनका चयन सरकारी अधिकारी के पद पर हुआ है, जिससे उनका सिविल सेवा का सपना पूरा हो गया है. ऋतिक ने सिर्फ मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग 2023 की परीक्षा में ही सफलता हासिल नहीं की है. वह इससे पहले 2022 में हुई एमपीपीएससी परीक्षा में भी सफल हो चुके हैं. तब उन्हें एटीओ यानी ट्रेजरी ऑफिसर के पद पर नियुक्ति मिली थी. फिलहाल वे अलीराजपुर में पोस्टेड हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं ऋतिक सोलंकी ऋतिक सोलंकी के पिता रूपसिंह ने बताया कि उन्होंने बेटे को अफसर बनाने के लिए कई त्याग किए. उन्होंने अपनी और पत्नी की जरूरतों को पीछे रखकर घरखर्च में कटौती की. कई सुविधाओं से भी समझौता किया. बेटे को दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाने और यूपीएससी की कोचिंग जॉइन करवाने के लिए उन्होंने अपनी जीपीएस मशीन बेच दी थी. ऋतिक सोलंकी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं. उनके बड़े भाई राहुल भी मप्र वन सेवा परीक्षा में पास होकर महाराष्ट्र की चंद्रपुर फॉरेस्ट अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं.  

यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी, इंदौर स्टेशन पर QR कोड से ऑटो ड्राइवर की जानकारी उपलब्ध

इंदौर  रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) नई पहल शुरू करने जा रही है, जिसका नाम है 'हमारी सवारी, भरोसे वाली'। पुलिस ने ऐसे ऑटो रिक्शा ड्राइवरों का डिजिटल डेटा बनाया है जो रेलवे स्टेशन से चलते हैं। ऑटो पर क्यूआर कोड भी लगाया जा रहा है, जिसे स्कैन करते ही उसकी संपूर्ण पहचान मोबाइल पर आ जाएगी। पुलिस अधीक्षक (रेल) पद्मविलोचन शुक्ल के अनुसार सवारियों की सुरक्षा और सुविधा में ऑटो ड्राइवरों का अहम रोल है। बाहर से आने वाले यात्री कई बार ड्राइवरों की शिकायत करते हैं पर उनके संबंध में जानकारी नहीं रहती। यह सब देखते हुए पुलिस ने रेलवे स्टेशन परिसर से संचालित होने वाले ऑटो ड्राइवरों का डिजिटल डेटा तैयार करवाया है। पुलिस ने ड्राइवरों का सत्यापन एवं पंजीकरण कर उनके नाम, मोबाइल नंबर, वाहन संख्या, फोटो और परिवार व रिश्तेदारों की जानकारी आदि का डेटाबेस तैयार कर लिया है। पुलिस रिकॉर्ड में पंजीकृत ऑटो रिक्शा पर क्यूआर कोड स्टीकर लगाया जाएगा, जिसे स्कैन करते ही ड्राइवर की पहचान मोबाइल पर मिल जाएगी। एसपी के अनुसार यात्री यह जान सकेगा कि उसका ड्राइवर कौन है और वह किस ऑटो रिक्शा में सफर कर रहा है। उसका सामान छूटने, विवाद होने, तय स्थान पर न छोड़ने पर पुलिस से मदद भी ले सकते हैं। एसपी ने बताया इस अभियान की शुरुआत 14 नवंबर से होगी। इससे चालकों को भी बेवजह के आरोपों से राहत मिलेगी। 'पटरी की पाठशाला' में पढ़ेंगे भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चे जीआरपी पुलिस ने 'पटरी की पाठशाला' की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य रेल सुरक्षा, महिला सुरक्षा, साइबर जागरूकता, नैतिक शिक्षा एवं नशामुक्त जीवन के संदेश को आमजन तक पहुंचाना है। इससे स्थानीय बच्चों में नैतिक शिक्षा, अनुशासन और जिम्मेदारी का भाव विकसित होगा। 'पटरी की पाठशाला' अभियान में बच्चों के लिए रेल सुरक्षा कक्षाएं, कहानी, पोस्टर व खेल के माध्यम से शिक्षा देना, गुड टच-बैड टच की जानकारी देना शामिल किया है। रेलवे स्टेशन और उसके आसपास भिक्षावृत्ति, व्यावसायिक गतिविधियों में लगे व लावारिस घूमने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि वे देश के भविष्य निर्माण में सहभागी बन सकें। महिला एवं साइबर सुरक्षा सत्र में हेल्पलाइन नंबरों (139, 112, 1930) की जानकारी के साथ आत्मरक्षा एवं आत्मविश्वास पर भी चर्चा होगी।

विश्व प्रसिद्ध सांची में जुटेंगे विदेशी बौद्ध अनुयायी, दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव आज से

रायसेन   अपने अनोखे बौद्ध स्तूपों के लिए विश्व प्रसिद्ध सांची में 29 और 30 नवंबर को दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है. इसकी तैयारियां जोरों पर हैं, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मेहमान और कलाकार शिरकत करेंगे. साल में एक बार होने वाले इस धार्मिक उत्सव में श्रीलंका, जापान, थाईलैंड और वियतनाम सहित कई देशों के बौद्ध अनुयायी शामिल होने के लिए आमंत्रित किए गए हैं. इस वर्ष, श्रीलंका के हाई कमिश्नर के साथ ही वहां की विशेष नृत्य मंडली भी सांची में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करेगी. विदेश भक्त अपने साथ पूजा के लिए विशेष सामग्रियां लेकर यहां पहुंचेंगे, जिससे महोत्सव की दिव्यता और बढ़ेगी. भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के अस्थि कलश के दर्शन इस महोत्सव की मुख्य वजह सांची स्तूप के पास स्थित चैत्यगिरि में सुरक्षित रखे भगवान बुद्ध के परम शिष्य सारिपुत्र और महामोदग्लायन के पवित्र अस्थि कलश हैं. बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है, क्योंकि वर्ष में एक बार, दो दिन के लिए, सूर्योदय से सूर्यास्त तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ इन कलशों को रखा जाता है. महोत्सव के आखिरी दिन (रविवार) को इन अस्थि कलशों को मुख्य स्तूप की परिक्रमा के लिए शोभा यात्रा के साथ निकाला जाता है. इन देशों के अनुयायियों को किया गया आमंत्रित महाबोधि सोसाइटी के स्वामी विमल तिस्से थेरो ने बताया, '' जापान, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम सहित कई देशों के मेहमानों को आमंत्रित किया जा चुका है. इस तरह से जब विश्व के कोने-कोने से बौद्ध अनुयाई यहां पर उपस्थित होंगे तो इस कार्यक्रम की भव्यता और बढ़ेगी सब लोग मिलकर इस महोत्सव को मनाएंगे.'' सांची स्तूप का गौरवशाली इतिहास सांची की इस ऐतिहासिक धरोहर का निर्माण सम्राट अशोक महान ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था. यह भारत के सबसे प्राचीन बौद्ध स्मारकों में से एक है. बाद में शुंग और सातवाहन शासकों ने इसका विस्तार किया और पहली शताब्दी ईसा पूर्व में यहां के चार भव्य तोरण द्वार (प्रवेश द्वार) बनाए गए, जिन पर बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं से जुड़ी विस्तृत नक्काशी है. सांची का यह महान स्तूप प्रेम, शांति, विश्वास और साहस का प्रतीक है और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल है. सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम बौद्ध धर्म के इस विशेष महत्व वाले आयोजन के लिए प्रशासन भी कमर कस रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश खरपुसे ने जानकारी देते हुए बताया की पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष पुलिस इंतजाम किए गए हैं, जिसमें महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी शामिल है और आसामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखना शामिल है।जिससे की पर्यटको को आसुविधा न हो

महाकाल लोक जाने का रास्ता होगा आसान, 710 मीटर नया कॉरिडोर तैयार, जून 2027 तक प्रोजेक्ट पूरा

उज्जैन   मध्यप्रदेश सरकार उज्जैन को नया रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब क्षिप्रा नदी के घाटों (Kshipra Ghat) पर होने वाली आरती को बनारस और हरिद्वार की गंगा आरती (Shipra is a tributary of Ganga) की तरह भव्य और आधुनिक रूप में आयोजित किया जाएगा। सरकार चाहती है कि आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ (2028) तक उज्जैन में ऐसी आरती शुरू हो जाए, जिसे देखने वाले श्रद्धालु भावविभोर हो उठें। इस दिशा में राज्य सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इसका उद्देश्य ऐसी पेशेवर एजेंसियों का चयन करना है, जो टेक्निक, म्यूजिक, लाइट और परम्परा को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट को अंजाम दे सकें। तकनीक से बनेगी आरती आकर्षक उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि इस पहल का मकसद क्षिप्रा आरती (Kshipra River) को इतना भव्य और यादगार बनाना है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां का अनुभव जीवनभर याद रखें। महाकाल लोक जाने के लिए 710 मीटर लंबा और 22.18 मीटर चौड़ा नया रास्ता बन रहा है। 63 करोड़ की लागत से बनने वाला यह सुगम रास्ता जून 2027 तक तैयार हो जाएगा। रेलवे से भी सहमति मिल गई है। इससे अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को महाकाल लोक तक पहुंचना आसान होगा। अभी उन्हें पार्किंग से पुल पर चढ़ने के बाद 2100 मीटर लंबी दूरी तय कर महाकाल लोक पहुंचना पड़ रहा है। भीड़ नियंत्रण में रहेगी: इंदौर, देवास से आने वाले यात्री हरिफाटक के पास वाहन पार्क कर सीधे महाकाल लोक पहुंच सकेंगे। महाशिवरात्रि, नागपंचमी, नववर्ष पर भीड़ नियंत्रण में की जा सकेगी। 2. यातायात का दबाव कम होगा: पैदल यात्रियों के लिए अलग मार्ग बनने से हरिफाटक ब्रिज, महाकाल घाटी, नीलगंगा, इंदौर रोड, जयसिंहपुरा में यातायात का दबाव कम होगा। उन्होंने कहा, हमने ऐसी एजेंसियों से प्रस्ताव मांगे हैं, जो तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आरती को और आकर्षक बना सकें। इसका मकसद यह है कि जब श्रद्धालु घाट पर आएं तो उन्हें सिर्फ आरती नहीं, बल्कि भावनात्मक अनुभव हो।  गंगा आरती क्यों है प्रेरणा का स्रोत हरिद्वार और बनारस की महागंगा आरती में हर शाम सैकड़ों पुजारी, घंटों और दीपों के साथ गंगा आरती करते हैं। वाराणसी की दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती अपने आप में खास होती है। यहां दर्जनों पुजारी एक साथ समान वेशभूषा में दीप थाल लेकर मंत्रोच्चार करते हैं। हर पुजारी एक लय में जब आरती करते हैं तो भव्य नजारा होता है। शंखनाद, घंटों की गूंज और वेद मंत्रों की ध्वनि श्रद्धालुओं के मन में गहराई तक उतर जाती है।अब मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव सरकार चाहती है कि उज्जैन की क्षिप्रा आरती (shipra river in ujjain) भी इसी तरह का भव्य अनुभव दे।  तकनीक से सजेगी क्षिप्रा आरती एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट में कहा गया है कि आरती में परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम होना चाहिए। सरकार ने एजेंसियों से ऐसे सुझाव मांगे हैं।जिनमें AI आधारित प्रोजेक्शन मैपिंग, सिंक्न्रोनाइज्ड लाइटिंग, साउंड और विजुअल स्टोरीटेलिंग, होलोग्राम और AR/VR अनुभव और आध्यात्मिक संगीत संयोजन जैसी तकनीकें शामिल होंगी। इन तकनीकों की मदद से घाटों पर आरती का अनुभव केवल धार्मिक न रहकर दिव्य दृश्यात्मक आयोजन बन जाएगा। श्रद्धालु दीपों की रोशनी के साथ मां क्षिप्रा की कथा, उज्जैन के इतिहास और महाकाल की महिमा को लाइट एण्ड साउंड श्खो की मदद से अनुभव कर सकेंगे।  कई घाटों पर एक साथ आरती की तैयारी फिलहाल क्षिप्रा नदी की आरती केवल रामघाट तक सीमित है और ज्यादातर निजी समूहों द्वारा कराई जाती है।अब सरकार की योजना है कि कई घाटों को जोड़ा जाए और एक साथ सामूहिक आरती का आयोजन हो। इसका प्रारूप बनारस के मल्टी-घाट मॉडल जैसा होगा। जहां एक ही समय पर अलग-अलग घाटों पर आरती होती है, लेकिन उनकी ध्वनि और लय एक होती है।

सालभर रुका रहा पश्चिमी रिंग रोड काम, इंदौर में जनवरी से पहले प्रगति नहीं संभव

इंदौर  किसानों का विरोध और मुआवजा बांटने में देरी ने पश्चिमी रिंग रोड प्रोजेक्ट को सालभर पीछे कर दिया है। जनवरी 2025 में शुरू होने वाला काम नवंबर तक अटका हुआ है। अगले दो से तीन महीने तक भी सड़क निर्माण शुरू होने के आसार नहीं हैं, क्योंकि अभी तक महज 55 प्रतिशत किसानों को ही मुआवजे की राशि दी गई है। बावजूद इसके कई किसान नाराज हैं, क्योंकि इन्हें बाजार मूल्य की तुलना में पैसा कम मिला है। इस लेटलतीफी ने प्रोजेक्ट को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। इंदौर वन मंडल की 40 और धार की आठ से 10 हेक्टेयर जमीन शामिल शासन ने सड़क को सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए बनाने की योजना तैयार की थी। 64 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। प्रोजेक्ट के लिए कुल 638 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है, जिसमें से लगभग 50 हेक्टेयर वनभूमि है। इसमें इंदौर वन मंडल की 40 हेक्टेयर और धार की आठ से 10 हेक्टेयर जमीन शामिल है। बाकी 580 हेक्टेयर भूमि में 472 निजी व 98 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। एनएचएआई 64 किमी लंबी पश्चिमी रिंग रोड को दो हिस्सों में बनाएगा। यह महू से हातोद और हातोद से क्षिप्रा के बीच बनाएंगे। डेढ़ साल पहले एजेंसी तय सड़क बनाने के लिए निर्माण एजेंसी डेढ़ साल पहले तय हो चुकी है। अहमदाबाद की कंपनी को ठेका मिला है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से एजेंसी को काम करने में दिक्कतें आ रही हैं। नियमानुसार प्रोजेक्ट में 80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहित कर प्रशासन से क्लियरनेंस मिलने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। वैसे अभी तक एक हजार करोड़ में से 500 से 550 करोड़ का मुआवजा बांटा गया है। शेष किसानों को राशि दिए जाने में दो से तीन महीने लग सकते हैं। इन्हें देना है मुआवजा     इंदौर जिले की तीन तहसील सांवेर, देपालपुर और हातोद के 26 गांवों से यह सड़क निकलेगी। यहां 998 किसानों को कुल 795 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाने हैं।     धार जिले की पीथमपुर तहसील के किसानों को लगभग 200 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा।     सांवेर तहसील के नौ गांवों के 512 किसानों को 473 करोड़ रुपये मिलेंगे।     देपालपुर तहसील के पांच गांवों के 153 किसानों को 140 करोड़ रुपये का भुगतान होगा।     हातोद तहसील के 12 गांवों के 333 किसानों को 182 करोड़ रुपये दिए जाने हैं। बांट रहे मुआवजे की राशि     अगले साल यानी जनवरी से पश्चिमी रिंग रोड का काम शुरू किया जाएगा। इन दिनों किसानों को मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। नवंबर तक 55 फीसद लोगों को राशि बांटी गई है। अगले दो महीनों में प्रोजेक्ट के लिए शेष जमीन भी अधिग्रहित की जाएगी। वहीं वन विभाग की जमीन को लेकर पर्यावरण अनुमति आना बाकी है। – प्रवीण यादव, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

महाकाल मंदिर के फूलों से स्टार्टअप की शुरुआत, छात्रों ने बनाई कमाई की नई राह

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को अर्पित होने वाले फूलों से कमाई का आइडिया मध्य प्रदेश, कर्नाटक और बिहार के युवा छात्र एवं छात्राओं ने एकसाथ मिलकर ढूंढ निकाला. उसे स्टार्टअप के तौर पर शुरू कर छात्र लाखों की कमाई करने लगे हैं. छात्र एवं छात्राएं वेस्टेज फूलों को रीसायकल कर इको फ्रेंडली हार्ड प्रोडक्ट बना रहे हैं और मार्केट में बेच कर मोटी कमाई कर रहे हैं. खास बात यह है छात्रों के इस स्टार्टअप से कई कम्पनियों ने छात्रों को ऑफर देना भी शुरू कर दिए हैं. अभी छात्रों ने वेस्टेज फूलों से कटोरी, प्लेट्स, मोमेंटो सहित 16 तरह के अलग-अलग हार्ड प्रोडक्ट बनाएं हैं. ये सभी छात्र उज्जैन में रहकर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर रहे हैं. आइए इस रिपोर्ट में आपको छात्रों से भी मिलवाते हैं और उनके कामों को भी दिखाते हैं. कौन हैं ये पांच छात्र, जिन्होंने शुरू किया स्टार्टअप सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय पहुंचकर  छात्रों के बारे में पता किया तो स्टार्टअप टीम में खरगोन निवासी मृत्युंजय बड़ोले (उम्र 21 वर्ष) सब्जेक्ट बीएससी ऑनर्स बायो टेक्नोलॉजी तीसरा सेमेस्टर, दूसरी बालाघाट निवासी योजना राहंगडाले (उम्र 20 वर्ष ) जो बीएससी बॉटनी तीसरा सेमेस्टर की छात्रा हैं. तीसरे भभुआ बिहार निवासी यूगांक सिंह (उम्र 22 वर्ष) बीएससी ऑनर्स बायो टेक्नोलॉजी से चौथे सेमेस्टर के छात्र हैं. चौथे उज्जैन के तराना तहसील के निवासी तन्मय जैन (उम्र 27 वर्ष) बायो टेक्नोलॉजी से पीएचडी कर रहे हैं. पांचवी कोलकाता निवासी आहना चक्रवर्ती (उम्र 20 वर्ष) हैं जो बीएससी फोरेंसिक तीसरे सेमेस्टर की छात्रा हैं. फूलों को सुखाकर बनाते हैं खास प्रोडक्ट  छात्र एवं छात्राओं से चर्चा की. जिसमें मृत्युंजय बड़ोले ने बताया, ''हमने अभी तक 16 तरह के प्रोडक्ट बनाये हैं, जिसमें कटोरी, प्लेट्स शील्ड्स (मोमेंटो), लोगो, राखी, टेंपल, कॉस्टर्स, श्री चरण व अन्य आइटम शामिल हैं, जिसकी क्वालिटी अपने आप में बेहद खास है. 13 साल तक की वारंटी हम देते हैं की इनका कुछ नहीं बिगड़ेगा. कोई भी प्रोडक्ट टूटने पर हम वापस ले लेते हैं यानी उसे भी हम रिसायकल कर देते हैं. बस ग्राहक को तय कीमत चुकानी होगी.'' कैसे आया आईडिया? छात्रा योजना राहंगडाले ने कहा, ''हम जब उज्जैन आकर पढ़ाई कर रहे थे तब मंदिरों में दर्शन को भी गए तो वहां बड़ी मात्रा में फूलों को कचरा गाड़ी में जाते देखा, क्षिप्रा नदी दर्शन को गए तो वहां भी नदी में फूलों को डालते हुए व पड़ा हुआ देखा. तो विचार किया कि क्यों न भक्तों के भाव को सहेज कर रखा जाए. बस हम पांचों ने 2021 से रिसर्च करना शुरू कर दिया और आज रिजल्ट आपके सामने हैं.'' स्टार्टअप को नाम दिया 'प्रयास भावनाओं को सहेजने का' छात्रों ने बताया हमने 2021 से रिसर्च किया और 2024 तक काम किया. 2024 में हमने हमारे प्रोडक्ट को एग्जीबिशन में लांच किया. स्टार्टअप को नाम दिया निर्मल निर्माण "प्रयास भावनाओं को सहेजने का", ये पूरा काम हमने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज सर के निर्देशन में किया. 22 दिसंबर को हमने प्रोडक्ट्स को YOUNG ENTREPRENEURSHIP FORUM में लॉन्च किया. पहले दिन से इन्क्वायरी मिलने लगी. ऑटोमोबाइल सेक्टर से गाड़ियों के डैशबोर्ड के लिए ऑफर मिले, फंडिंग देने के लिए व्यपारियों ने हमसे संपर्क किया. गुजरात की एक कम्पनी से हमारा टायअप भी हो गया है. हम साथ में काम कर रहे हैं अब.'' स्टार्टअप के लिए मिल चुके हैं अवार्ड स्टार्टअप के लिए टीम को 22 दिसंबर 2024 को यंग एंटरप्रेन्योरशिप फोरम द्वारा डिस्ट्रिक्ट लेवल पर फर्स्ट प्राइज दिया गया था. जिसमें उन्हें 51000 रुपए का प्राइज मिला था. वहीं 12 जनवरी 2025 में भोपाल में पीपुल्स यूनिवर्सिटी में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ने स्टेट लेवल पर फर्स्ट प्राइज दिया था. इसमें 11000 रुपए की राशि दी गई है. शुरुआत 15 से 20% प्रॉफिट के साथ की छात्राओं ने बताया, ''हमने 2024 से जब प्रोडक्ट बेचना शुरू किए तो अभी शुरुआत में ही साल भर में 2 लाख रेवेन्यू जेनेरेट किया है. 60 रुपए से 2200 रुपए तक के प्रोडक्ट हमने बनाए हैं और अभी 15 से 20% ही फायदा ले रहे हैं. हमारा ध्यान अभी खुद का प्रोडक्शन और प्रोडक्ट को मार्केट में ऑनलाइन बेचने पर है. अभी जो रेवेन्यू हमें मिला ये उज्जैन लोकल से ही मिला है. छात्रों ने बताया रेस्पॉन्स अच्छा मिल रहा है, देश दुनिया के मंदिरों से संपर्क कर आगे बढ़ेंगे.'' कैसे और कहां बना रहे ये प्रोडक्ट जानिए छात्र छात्राओं ने प्रोडक्ट की पूरी प्रोसेस बताई. उन्होंने कहा, ''शुरुआत हमने 1000 स्क्वायर फिट एरिया से की है. जिला प्रशासन के सहयोग से फूल मंदिरों से लेना शुरू किए. अभी सिर्फ महाकाल मंदिर से सप्ताह भर में 100 kg फूल लेते हैं, जिसमें सिर्फ ट्रांसपोर्ट खर्च आ रहा है. फूल लाकर 2 से 3 दिन के लिए सुखने को एक वेंटिलेशन रूम में रखते हैं पंखे या खुली हवा में. उसमें से प्लास्टिक और प्रसाद हटाते हैं, मटेरियल हटा कर फूल को धोते हैं. फिर धूप में सूखने के लिए 3 से 7 दिन तक रखते हैं. उसका पाउडर बनाते हैं, बोरे में कूट कर छानते हैं.'' 100 kg फूल में 5kg पाउडर निकलता है. फिर बाइनडर बनाते हैं (नीम बबूल के गोंद को तय टेम्परेचर में गर्म करके बाइनडर बनाते हैं). पाउडर Mix करके साँचा जो कि सिलिकॉन रबर का होता है उसमें डालते हैं, 12 मिनट में प्रोडक्ट बन जाता है. फिर साबुन के पानी में धुलने के लिए रखते हैं, फिनिशिंग और कलर करके तैयार करते हैं. छात्र छात्राओं का दावा है अभी तो जितने भी लोग इस कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे हैं वो सिर्फ हार्ड मटेरियल को डीग्रेड (जैसे अगरबत्ती बनाना व अन्य) कर रहे हैं और हम हार्ड प्रोडक्ट बनाकर प्रिजर्वेशन करने का काम कर रहे हैं.

MP में 972 ई-बसेस का वितरण, 8 नगर निगमों में जल्द शुरू होगी इलेक्ट्रिक बस सेवा

भोपाल   मध्यप्रदेश के शहरी परिवहन को और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के आठ नगर निगमों को कुल 972 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की मंजूरी प्रदान की है। इन बसों के संचालन से डीजल और पेट्रोल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।  केंद्र से स्वीकृत ई-बसें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, देवास और सतना नगर निगमों को मिलेंगी। इनमें भोपाल को 195, इंदौर को 270, ग्वालियर को 100, जबलपुर को 200, उज्जैन को 100, सागर को 32, देवास को 55 और सतना को 20 बसें आवंटित की गई हैं। राज्य सरकार ने सभी नगर निगमों को बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से संबंधित आवश्यक ढांचा निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक नगर निगम में चार्जिंग पॉइंट और परिचालन सुविधाओं का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्र और राज्य दोनों खर्च वहन करेंगे  ई-बस परियोजना पर होने वाला खर्च केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से वहन करेंगे। बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि प्रदान करेगी। वहीं चार्जिंग पॉइंट्स के निर्माण पर केंद्र सरकार 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता देगी। बसों का संचालन जल्द शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यह सेवा आम नागरिकों को सस्ती, सुरक्षित और ईको फ्रेंडली परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी। 

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया में मनाया जाएगा मध्यप्रदेश दिवस, मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे शामिल

भारत पर्व 2025 में मध्यप्रदेश की संस्कृति, पर्यटन और स्वाद का होगा अद्भुत संगम भोपाल भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर स्टेच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया गुजरात में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक "भारत पर्व" का उत्साहपूर्वक आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशिष्ट आतिथ्य में भारत पर्व 2025 के अंतर्गत मंगलवार, 11 नवंबर को गुजरात के केवड़िया में मध्यप्रदेश दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के ध्येय को दृष्टिगत रखते हुए देश की विविधता में एकता को प्रदर्शित करना है। संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि भारत पर्व के अंतर्गत मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा लगभग 25 वर्गमीटर क्षेत्रफल में एक आकर्षक थीम पेवेलियन तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की पर्यटन, संस्कृति और हस्तशिल्प विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया जा रहा है। पेवेलियन में सांची, खजुराहो, भीमबेटका, मांडू, ओरछा, उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के साथ-साथ बांधवगढ़, कान्हा और पेंच जैसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों की झलक प्रस्तुत की जा रही है। साथ ही, राज्य के स्थानीय हस्तशिल्प और हस्तकला जैसे चंदेरी और महेश्वरी वस्त्र, बाघ प्रिंट, डोकरा कला, मिट्टी के बर्तन और गोंड पेंटिंग को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि भारत पर्व हमारे देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता का सुंदर उत्सव है। मध्यप्रदेश ‘भारत का हृदय’ है, और यहां की हर परंपरा, हर स्वाद, हर कला रूप हमारे देश की आत्मा को दर्शाता है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पर्यटन, हस्तशिल्प, व्यंजनों और संस्कृति की प्रस्तुति के माध्यम से हम देशभर के आगंतुकों को अतुलनीय मध्यप्रदेश की आत्मा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि आगंतुक न केवल मध्यप्रदेश के स्वाद और संगीत का आनंद लें, बल्कि उसकी आत्मिक ऊर्जा और जीवंतता का भी अनुभव करें। स्टूडियो किचन में मध्यप्रदेश का स्वाद मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीएसटीडीसी) द्वारा 11 नवंबर को स्टूडियो किचन की विशेष प्रस्तुति दी जा रही है, जिसमें प्रदेश के पारंपरिक और प्रादेशिक व्यंजन लाइव तैयार कर परोसे जाएंगे। यह प्रस्तुति फ्लेवर्स फ्रॉम द हार्ट ऑफ इंडिया की थीम पर आधारित है। बुंदेलखंड क्षेत्र का खट्टा–तीखा छाछ पर आधारित पेय सन्नाटा, डिंडोरी क्षेत्र का पारंपरिक सूप कंगनी दाल का शोरबा, मालवा का प्रसिद्ध स्नैक भुट्टे की कीस, चना बेसन से बना स्वादिष्ट नमकीन व्यंजन चंबल का थोपा, सीधी क्षेत्र का पारंपरिक नाश्ता बेड़ई धुमना आलू, बघेलखंड क्षेत्र का लोकप्रिय व्यंजन मटर का निमोना और सादी पूरी, शहडोल क्षेत्र की प्रसिद्ध मिठाई कुटकी की खीर आगंतुकों को परोसे जाएंगे। इन व्यंजनों के माध्यम से प्रदेश के विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक स्वादों को प्रदर्शित किया जा रहा है। सांस्कृतिक प्रस्तुति – “अमृतस्य मध्यप्रदेश” संस्कृति विभाग की ओर से प्रसिद्ध नृत्य संयोजिका मैत्रीय पहाड़ी एवं समूह द्वारा “अमृतस्य मध्य प्रदेश” शीर्षक से एक भव्य नृत्य प्रस्तुति दी जाएगी। यह प्रस्तुति दर्शकों को मध्यप्रदेश की प्राचीन सभ्यता, भक्ति, प्रेम और प्रकृति की लय से जोड़ती है। इस नृत्यगाथा की शुरुआत भीमबेटका की गुफाओं से होती है, जहां मानव सभ्यता की प्रथम झलक दिखाई देती है। आगे खजुराहो के मंदिरों की मूर्तिकला, सांची के स्तूपों की शांति, और चित्रकूट की पवित्र भूमि के भावनात्मक दृश्यों को नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। उज्जैन और ओंकारेश्वर के ज्योतिर्लिंगों की दिव्यता, ग्वालियर किले की ऐतिहासिकता, मांडू की प्रेम गाथा और ओरछा के मंदिरों की भव्यता मंच पर जीवंत होती है। प्रकृति के साथ मनुष्य के संबंध को बांधवगढ़, कान्हा और पेंच के वनों तथा जबलपुर की संगमरमर चट्टानों के दृश्यों से दर्शाया गया है। पारंपरिक महेश्वरी, चंदेरी और बाग प्रिंट वस्त्रों में सजे कलाकार मंच पर राज्य की शिल्प विरासत का गौरव गान करते हैं। नर्मदा आरती के दृश्य के साथ यह यात्रा अपने आध्यात्मिक उत्कर्ष पर पहुंचती है।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना एक महत्वाकांक्षी योजना, सतत निगरानी की आवश्यकता : मंत्री कुशवाह

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा भोपाल उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना एक महत्वाकांक्षी योजना है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित किए जा सकते है। मंत्री श्री कुशवाह ने विभाग की 2 वर्षो की उपलब्धियों की समीक्षा के दौरान पीएमएफएमई योजना की सतत निगरानी ने निर्देश अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 तक योजना की शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति की जाए। मंत्री कुशवाह ने कहा कि उद्यानिकी गतिविधियाँ ग्रामीण अंचल से शहरों तक संचालित की जाती है। प्रदेश में उद्यानिकी उत्पादों को लगातार प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिये कि बड़े शहरों के आसपास सब्जी के साथ साथ फूल उत्पादन के क्लस्टर भी विकसित किये जाये। मंत्री कुशवाह कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और मेले भी आयोजित किये जाने चाहिए। उन्होंने एमपी एग्रो तथा उद्यानिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को वितरित किये जाने वाले उपकरण व अन्य सामग्री का भौतिक सत्यापन कराये जाने के निर्देश भी दिये। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अरविन्द दुबे ने बताया कि प्रदेश में गत 2 वर्षो में उद्यानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज कराई है। इन 2 वर्षो में उद्यानिकी फसलों का रकबा में 2 लाख 43 हैक्टेयर तथा उत्पादन में लगभग 36 लाख मैट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है। संरक्षित खेती के तहत 1573 हैक्टेयर क्षेत्र का विस्तार किया गया है। आयुक्त दुबे ने बताया कि प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिये 3 सेक्टर आफ एक्सीलेंस मुरैना में आलू, छिंदवाड़ा में नीबूवार्गीय तथा हरदा में आम एवं सब्जी के विकसित किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि पीएमएफएमई (PMFME) योजना में चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 3 हजार 113 सूक्ष्म उद्यमियों को 108 करोड़ का अनुदान प्रदान किया जा चुका है। योजना की नियमित समीक्षा की जा रही है। एमपी एग्रो ने समीक्षा के दौरान प्रबंध संचालक श्री दुबे ने बताया कि गत तीन वर्षों में एमपी एग्रो का व्यापार 47 करोड़ से बढ़कर 386 करोड़ हो गया है। इसके और बेहतर करने के प्रयास किये जा रहे है। बैठक में विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।