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श्रीसन फार्मा पर बढ़ी मुश्किलें, प्रोपिलीन ग्लायकॉल की खरीद का कोई बिल नहीं मिला

भोपाल  मध्य प्रदेश के तीन जिलों में 24 बच्चों की जान लेने वाले 'कोल्ड्रिफ' कफ सीरप को बनाने में उद्योगों में उपयोग होने वाला प्रोपेलीन ग्लायकाल मिलाए जाने की जांच की जा रही है। दरअसल, इसी आरोप में श्रीसन फार्मा कंपनी की केमिकल एनालिस्ट के. माहेश्वरी को गिरफ्तार किया गया है। इसी बीच मध्य प्रदेश एसआइटी की जांच में सामने आया है कि कफ सीरप बनाने में उपयोग होने वाले प्रोपेलीन ग्लायकाल का बिल ही कंपनी से गायब है, जबकि एसआईटी की पूरी जांच इसी पर टिकी है कि इस केमिकल के आपूर्तिकर्ता को औषधीय उपयोग वाले प्रोपेलीन ग्लायकाल का आर्डर दिया गया था या औद्योगिक उपयोग वाले का। यदि आपूर्तिकर्ता ने औषधीय की जगह औद्योगिक उपयोग वाला प्रोपेलीन ग्लायकाल दिया होगा, तो उसे भी आरोपित बनाया जा सकता है। एनालिस्ट को तीन दिन के लिए रिमांड पर सौंपा एसआईटी की एक टीम केमिकल एनालिस्ट के. माहेश्वरी को लेकर बुधवार को छिंदवाड़ा जिले के परासिया पहुंची। यहां उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से तीन दिन के लिए रिमांड पर सौंप दिया गया। पुलिस यहां माहेश्वरी से यह जानने की कोशिश करेगी कि कंपनी में गुणवत्ता जांच में क्या लापरवाही हुई। असली जिम्मेदार कौन है। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के नियमों की कहां अनदेखी की गई है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने माहेश्वरी से कोल्ड्रिफ कप सीरप की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन वह रिपोर्ट नहीं दी गई। इस बात पर संदेह है कि सीरप की टेस्टिंग कराई गई थी या नहीं। उल्लेखनीय है कि कफ सीरप में डायथिलीन ग्लायकाल (डीइजी) की मात्रा 48.6 प्रतिशत मिली थी, जिसकी मान्य सीमा 0.1 प्रतिशत है। डीइजी के कारण ही बच्चों की जान चली गई। इस मामले में अब तक कफ सीरप लिखने वाले डॉ. प्रवीण सोनी, कंपनी के मालिक जी. रंगनाथन और के माहेश्वरी सहित पांच आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। केमिकल एनालिस्ट को कोर्ट में गुपचुप प्रस्तुत किया विषाक्त कफ सीरप से मृत 24 बच्चों में से 15 परासिया ब्लाक के थे। इस कारण क्षेत्र के लोगों में श्रीसन फार्मा के अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध बेहद गुस्सा है। सुरक्षा की दृष्टि से एसआईटी ने बुधवार रात में केमिकल एनालिस्ट के. माहेश्वरी को न्यायालय में प्रस्तुत किया। बता दें कि इसके पहले एसआईटी कंपनी के मालिक जी. रंगनाथन को तमिल नाडु से गिरफ्तार कर छिंदवाड़ा लेकर आई थी। कोर्ट में प्रस्तुत करने के दौरान भीड़ उमड़ पड़ी थी, जिसमें पीड़ित परिवारों के लोग भी थे। लोग 'फांसी दो' के नारे भी लगाए थे। यही कारण है माहेश्वरी के मामले में पुलिस कोई जोखिम नहीं उठाना चाह रही थी। श्रीसन फार्मा के विरुद्ध अब तक ये की गईं कार्रवाई     एक अक्टूबर- मप्र के औषधि नियंत्रक ने तमिल नाडु के औषधि नियंत्रक को पत्र लिखकर श्रीसन फार्मा के कांचीपुरम स्थित प्लांट का निरीक्षण करने की मांग की।     दो से तीन अक्टूबर- तमिल नाड़ु औषधि प्रशासन विभाग ने प्लांट का निरीक्षण किया, जिसमें 364 कमियां मिलीं। प्लांट में उत्पादन बंद कराया गया।     पांच अक्टूबर- परासिया थान में कंपनी के संचालक व अन्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई।     आठ अक्टूबर- मध्य प्रदेश पुलिस ने कंपनी के मालिक जी. रंगनाथन को फरार घोषित कर 20 हजार रुपये का ईनाम घोषित किया।     नौ अक्टूबर- एसआईटी ने रंगनाथन को चेन्नई से गिरफ्तार कर लिया।     10 अक्टूबर- रंगनाथन को छिंदवाड़ा के परासिया कोर्ट में प्रस्तुत कर 10 दिन (20 अक्टूबर) पुलिस रिमांड पर लिया गया।     13 अक्टूबर- कंपनी का उत्पादन लाइसेंस स्थायी तौर पर तमिल नाडु औषधि प्रशासन विभाग ने रद कर दिया।  

MP कैडर के IAS अरुण पिथोड़े को सीएक्यूएम में अहम भूमिका, केंद्र सरकार में पहले से कार्यरत

भोपाल  मध्यप्रदेश कैडर के ईमानदार और सरल स्वभाव के आईएएस अधिकारी तरुण पिथोड़े को केंद्र में नई जिम्मेदारी मिली है। उन्हें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) में मेंबर सेक्रेट्री बनाया गया है। पिथोड़े अभी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में अभी मिनिस्ट्री ऑफ एनवायर्नमेंट फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज में जॉइंट सेक्रेटरी हैं। बता दें कि वर्ष 2009 बैच के आईएएस अधिकारी तरुण पिथोड़े की नियुक्ति को एप्वाइंटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट ने अप्रूवल दे दिया। पिथोड़े अगले पांच साल तक इस जिम्मेदारी को निभाएंगे। यह जिम्मेदारी उनकी लीडरशिप केपेसिटी के अनुसार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में गंभीर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए रणनीतियां बनाने के लिए की गई है। इससे पहले वह राजगढ़, सीहोर, बैतूल और भोपाल के कलेक्टर के रूप में भी जिम्मेदारी का निर्वहन कर चुके हैं। कौन हैं तरुण पिथोड़े तरुण कुमार पिथोड़े मध्य प्रदेश कैडर के 2009 बैच के आईएएस हैं। वर्तमान में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। पिथोड़े एमपी के छिंदवाड़ा जिले के छोटे इलाके पसरिया से आते हैं। उनकी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से हुई। इसके बाद भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलेक्ट्रॉनिक एवं संचार इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। सॉफ्टवेयर इंजीनियर से कलेक्टर तक का सफर पिथोड़े ने अपने करियर की शुरूआत जीई इंडिया में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू किया। आईएएस बनने से पहले उन्होंने कुछ समय तक मध्य रेलवे में सहायक सिग्नलिंग और दूरसंचार इंजीनियर के रूप में काम किया। वह बचपन से कलेक्टर बनने का सपना देखा करते थे। इसके लिए उन्होंने 2008 की यूपीएससी की परीक्षा में आल इंडिया लेवल पर सातवीं और महाराष्ट्र में प्रथम रैंक हासिल करने के बाद कलेक्टर बने। एमपी कैडर के अधिकारी का बढ़ता कद गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही प्रीति मैथिल को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किए जाने के आदेश जारी किए गए थे। प्रीति को ट्राइबल को-आपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (ट्राइफेड) में डिप्टी जनरल मैनेजर बनाया गया। 2009 बैच की आईएएस अधिकारी प्रीति मैथिल की ट्राइफेड में प्रतिनियुक्ति पर पांच साल के लिए पदस्थापना की गई है। प्रीति मैथिल मंडला, सागर और रीवा की कलेक्टर रह चुकी हैं। वे मुख्यमंत्री सचिवालय, किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग में भी संचालक और अपर सचिव के पद पर काम कर चुकी हैं। वहीं, 10 दिन पहले 2009 बैच की ही आईएएस अधिकारी सूफिया फारुकी वली को भारतीय खाद्य निगम में एमपी रीजन में जनरल मैनेजर के रूप में पदस्थ किया जा चुका है। यह अफसर भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में हैं मार्च 2025 में प्रियंका दास, पंकज जैन, प्रवीण सिंह अढायच, अगस्त में तन्वी सुंद्रियाल, सितंबर में नीरज कुमार सिंह की पदस्थापना केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर की जा चुकी हैं। एमपी कैडर के 6 अधिकारी केंद्रीय मंत्रियों के यहां विशेष सहायक के रूप में काम कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश की पदस्थापना 2024 में हुई है।  

अस्पताल ने सरोगेसी के नाम पर किया छल, उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना और लौटाई पूरी रकम

भोपाल  मरीज और डॉक्टर के बीच रिश्ता भरोसे का होता है। अगर कोई डॉक्टर या अस्पताल मरीज को धोखा देता है तो वह वित्तीय नुकसान ही नहीं, भरोसे को भी ठेस पहुंचाता है। भोपाल उपभोक्ता आयोग ने ऐसे ही एक मामले में ऐतिहासिक फैसला देते हुए एक अस्पताल को मरीज से ली गई पूरी रकम लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उसे क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया है। अस्पताल ने मरीज को सरोगेसी के नाम पर धोखा दिया था। दरअसल, चूनाभट्ठी निवासी एक दंपती को 15 वर्षों के वैवाहिक जीवन में कोई संतान नहीं थी। बावड़िया कला स्थित पुष्पांजलि सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और डॉ. वर्षा जैन के यहां सरोगेसी से संतानसुख का विज्ञापन देखकर वे वहां पहुंचे। उनका परीक्षण करने के बाद डॉक्टर ने सरोगेसी की सलाह दी। बताया गया कि इस प्रक्रिया पर नौ लाख रुपये का खर्च आएगा। एक बार सफल नहीं हुआ तो यह प्रक्रिया तीन बार की जाएगी। उसके बाद एक अनुबंध कराया गया। दूसरी महिला मिलने पर बताने की बात कही बताया गया कि गर्भधारण के लिए उदयपुर से एक महिला को बुलाकर अस्पताल के पहले तल पर रखा गया है। उस महिला से दंपती को कभी मिलने नहीं दिया गया। बाद में कहा गया कि सरोगेसी के लिए आई महिला का गर्भपात हो गया है। वह कभी मां नहीं बन पाएगी। दंपती से कहा गया कि दूसरी महिला मिलने पर उन्हें बताया जाएगा, लेकिन फिर ऐसा हुआ ही नहीं। कई महीनों बाद भी जब अस्पताल से सूचना नहीं आई तो दंपती ने अपने पैसे वापस मांगे। अस्पताल ने अपना पता बदल दिया। शाहपुरा थाने में शिकायत हुई तो अस्पताल संचालक ने कह दिया कि उसने सरोगेसी का काम छोड़ दिया है। दो साल परेशान होने के बाद 2022 में पीड़ित महिला ने आयोग में याचिका लगाई। चिकित्सकीय उपेक्षा से इन्कार सुनवाई के दौरान अस्पताल संचालक का कहना था कि उनके द्वारा कोई चिकित्सकीय उपेक्षा या लापरवाही नहीं की गई है। उनके द्वारा सभी कार्य बीमित हैं। इस कारण बीमा कंपनी उत्तरदायी होगा। बीमा कंपनी ने कहा कि ये सभी प्रक्रियाएं बीमा के अंतर्गत नहीं आती हैं। 3.75 लाख देने का आदेश सुनवाई के बाद आयोग की अध्यक्ष गिरीबाला सिंह व सदस्य अंजुम फिरोज ने अस्पताल को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार का दोषी माना। उन्होंने अस्पताल को आदेश दिया कि वह दो महीने के भीतर दंपती को तीन लाख 75 हजार रुपये अदा करे। इसमें ढाई लाख रुपये इलाज पर हुआ खर्च और एक लाख 25 हजार रुपया मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए तय हुआ।

फिर एक्टिव हुआ भोपाल प्रशासन, भीख मांगने वालों को SDM-DSP ने क्या समझाया?

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भीख मांगना और देना दोनों अपराध हैं। 3 फरवरी 2025 को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इसके आदेश जारी किए थे। इन आदेशों के बाद एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। पहले तो कुछ दिनों तक प्रशासन खूब मुस्तैद दिखा था, लेकिन बाद में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। अब कुछ महीने बाद फिर जिला प्रशासन भीख मांगने वालों पर कड़ाई करते दिख रहा है। भिक्षा मांगने वालो पर एक्शन लेने के लिए अफसर भोपाल की सड़कों पर उतरे। अफसरों ने व्यापमं चौराहे पर कार्रवाई की। यहां कई लोगों को भिक्षावृत्ति करने से रोका। वहीं, गुटखा-पाउच बेचते हुए महिला को रोका। कलेक्टोरेट में बैठक होने के बाद एमपी नगर एसडीएम एलके खरे और एसीपी मनीष भारद्वाज पुलिस बल के साथ अलग-अलग इलाकों में सख्ती बरतते दिखाई दिए। यह है आदेश आपको बता दें कि कलेक्टर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया था। साथ ही भिखारियों के लिए कोलार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रहने-खाने की व्यवस्था की गई है। भोपाल में एक भिखारी पर 26 जनवरी की रात एफआईआर दर्ज हुई थी। एमपी नगर थाने में यह मामला दर्ज हुआ था। इससे पहले इंदौर में भी ऐसा ही आदेश लागू किया गया था। भीख न देने पर बदतमीजी दरअसल, एक नागरिक ने भीख न देने पर भिखारी द्वारा की गई बदतमीजी की शिकायत की थी। पुलिस ने भिखारी को पकड़ा और पूछताछ की। जमानती धारा होने के कारण उसे नोटिस देकर छोड़ दिया गया। इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए भीख मांगने और देने पर प्रतिबंध लगा दिया है। भिक्षावृत्ति करने वालों के लिए पुनर्वास भिखारियों के पुनर्वास के लिए भी व्यवस्था की गई है। कोलार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भिक्षुक गृह बनाया गया है। यहां भिखारियों के रहने, खाने-पीने की व्यवस्था होगी। उन्हें यहां आश्रय दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे भिखारियों को भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे। यह कदम शहर की सुंदरता और सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है। इससे नागरिकों को भीख मांगने वालों से होने वाली परेशानी से भी निजात मिलेगी।

CM मोहन यादव की बिहार में रैली, कांग्रेस पर साधा निशाना – कहा युवाओं के भविष्य से किया खिलवाड़

भोपाल/पटना  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 16 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रचार किया। उन्होंने पटना की कुम्हरार निर्वाचन क्षेत्र के कदमकुआं और बिक्रम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पार्वती स्कूल स्पोर्ट्स ग्राउंड में विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने विधानसभा कुम्हरार में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी संजय गुप्ता और बिक्रम नर्वाचन क्षेत्र में सिद्धार्थ सौरव के पक्ष में जनता से वोट की अपील की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार एनडीए की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का आर्थिक तंत्र बदल रहा है। सीएम डॉ. यादव की रैलियों में हुजूम उमड़ पड़ा। वे जैसे ही मंच पर आए, लोगों ने एनडीए और बीजेपी के समर्थन में नारे लगाना शुरू कर दिए। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं विक्रमादित्य की नगरी से आता हूं और विक्रम विधानसभा में आने का अलग ही आनंद है। विक्रम नाम से ही सुशासन, दान, वीरता का भाव प्रकट होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार मध्यप्रदेश में विकास के कई काम कर रही है। बिहार में नीतीश कुमार एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री है। उन्होंने सुशासन के सिद्धांतों से बिहार को विकास की नई गति प्रदान की है। बिहार हर काल में अच्छा ही करता है। अवंतिका उज्जैनी और पाटिलपुत्र का 2 हजार साल पुराना रिश्ता है। जब सम्राट अशोक को गद्दी संभालने का अवसर मिला तो वे उज्जैन में थे और वहीं से बिहार लौटे थे। बिहार ने झेला है जंगलराज सीएम डॉ. यादव ने कहा कि बिहार महात्मा गौतम बुद्ध की धरती है। इस चुनाव में हमारे प्रत्याशी सिद्धार्थ ने निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा की है। बिहार की जनता ने कभी जंगलराज भी झेला है। कांग्रेस और विपक्षी दलों की सरकारों में लाइसेंस, कोटा और परमिट राज चलता था। कांग्रेस के राज में देश की हालत दयनीय हो गई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने युवाओं की योग्यता का गला घोंटा और बिहार को बर्बाद किया। उसके बाद हाथ में लालटेन पकड़ा दी। बिहार की ऐसी दुर्दशा तब है, जब देश में सबसे ज्यादा आईएएस यहीं से निकलते हैं। एनडीए में मौजूद है लोकतंत्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने लोकतंत्र की रक्षा की। हमारी पार्टी और एनडीए में एक चाय बेचने वाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है, क्योंकि यहां लोकतंत्र है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी इतिहास यही है। आज लोकतंत्र को बचाने की चुनौती है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, लाल किताब वाले की बुद्धि को अजीरण हो गया। भाषा और भाव कैसा हो, पता ही नहीं। सुप्रीम कोर्ट में बार-बार माफी मांगते हैं, लेकिन सुधरने को तैयार ही नहीं हैं। कांग्रेस परिवारवादी पार्टी है। अयोध्या के बाद अब बारी मथुरा की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के आर्थिक तंत्र में बदलाव आया है। आज गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। दुनिया में भारत की साख बढ़ रही है। कांग्रेसी तो भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने रामजी के लिए फैसला दे दिया है, अब बारी मथुरा की है। जमुना किनारे भी कन्हैया मुस्कुराएंगे। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में लगातार तीसरी बार एनडीए की सरकार बनेगी।  

पिपलानी इलाके में युवती सुकन्या साहू पर बाइक सवार युवकों ने किया एसिड से हमला

भोपाल  भोपाल के पिपलानी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर में सनसनी मचा दी. बीती शाम, बाइक सवार कुछ अज्ञात युवकों ने चलती गाड़ी में एक युवती, सुकन्या साहू, पर एसिड अटैक का प्रयास किया. इस हमले के दौरान एसिड के कुछ छींटे सुकन्या के चेहरे पर पड़ गए, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गई. घटना की सूचना मिलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों ने तुरंत कार्रवाई की और घायल युवती को इलाज के लिए नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों के अनुसार, सुकन्या की हालत गंभीर है, और उनका इलाज जारी है. पिपलानी पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है. प्रारंभिक जांच में पता चला कि हमलावर बाइक पर सवार थे और उन्होंने जानबूझकर सुकन्या को निशाना बनाया. पुलिस ने आरोपियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम गठित की है, जो विभिन्न सुरागों पर काम कर रही है. जांच में यह जानने की कोशिश की जा रही है कि हमले के पीछे का मकसद क्या था और क्या यह किसी पुरानी रंजिश या अन्य कारणों से किया गया. यह घटना पिपलानी क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है. स्थानीय लोगों में इस हमले को लेकर गुस्सा और डर का माहौल है. कई लोग इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि मामले की गहन जांच की जा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं पर जांच की जा रही है, जिसमें हमलावरों की पृष्ठभूमि, उनके मकसद और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं. इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर दबाव है कि वे जल्द से जल्द दोषियों को पकड़कर कड़ी सजा दिलवाएं. पिपलानी पुलिस ने कहा कि वे इस मामले में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और दोषियों को जल्द से जल्द कानून के सामने लाया जाएगा. फिलहाल, सुकन्या के परिवार और स्थानीय लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं.  

धर्मेंद्र भदौरिया के यहां बड़ा छापा, दिवाली के बाद खुलेंगे संदिग्ध लॉकर

 इंदौर  रिटायर्ड जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के ठिकानों पर लोकायुक्त की कार्रवाई  दूसरे दिन भी जारी है। अभी तक की जांच में कुल 20 करोड़ 24 लाख 55 हजार 169 रुपए की चल-अचल संपत्ति पाई गई है। यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। चार बैंक लॉकर दीवाली के बाद खोले जाएंगे। लोकायुक्त की जांच में सिंह और परिवार के बैंक खातों में करीब 1.26 करोड़ रुपए जमा होने की बात सामने आई है। भदौरिया के बेटे सूर्यांश भदौरिया द्वारा विशाल पंवार के शिवा चाइनीज वोक फ्रेंचाइजी में भी पार्टनरशिप मिली है। छानबीन में पता चला है कि अन्नपूर्णा और विजयनगर की शॉप में बेटे की 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। इसके एवज में सूर्यांश ने विशाल को 25 लाख रुपए दिए थे। लोकायुक्त टीम ने बुधवार को भदौरिया के पलासिया (कैलाश कुंज) स्थित निवास के साथ ही ग्वालियर और अन्य करीब आठ ठिकानों पर सर्चिंग की थी। पत्नी के नाम भी लॉकर डीएसपी सुनील तालान के मुताबिक बैंक खातों में करीब 1,26,31,013 रुपए जमा हैं। बीमा और अन्य पॉलिसी भी 21 के लगभग मिली हैं। इनमें 13,90,648 रुपए की किस्त भरी जाना अभी ज्ञात हुआ है। पत्नी के नाम बैंक ऑफ बड़ौदा में लॉकर पाया है। कुल चार लॉकर विभिन्न बैंकों में मिले हैं। खातों और लॉकर को फ्रीज कराया है। अब आरोपी की उपस्थिति में सभी लॉकर खोले जाएंगे। लोकायुक्त को मानपुर में परिवार के किसी सदस्य के नाम पर फार्म हाउस का पता चला तो तस्दीक के लिए टीम भेजी। यह किसी रिश्तेदार के नाम निकला। वहां शराब कंपनी का ऑफिस संचालित होता है। इसकी जांच की जा रही है। बेटा-बेटी द्वारा जितेंद्र चौधरी को करीब पौने तीन करोड़ रुपए उधार देने की बात सामने आई। इसकी भी जांच की जा रही है। निजी टाउनशिप में बेटे के नाम के प्लॉट पर बड़ा बंगला बन रहा था। गाइडलाइन के अनुसार कीमत 3,36,73,000 पाई गई है। जांच पीडब्ल्यूडी से भी कराई जाएगी।

MP पुलिस भर्ती 2025: थर्ड जेंडर के लिए खुलेगी नई राह, ट्रेनिंग प्रक्रिया पर पूरी जानकारी

भोपाल  मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती में अब ट्रांसजेंडर उम्मीदवार भी शामिल हो सकेंगे। ईएसबी ने आरक्षक संवर्ग (कार्यपालिक) की सीधी भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 22 अक्टूबर 2025 तक बढ़ा दी है। इच्छुक अभ्यर्थी एमपी ऑनलाइन www.mponline.gov.in के जरिए आवेदन कर सकते हैं। ट्रांसजेंडर के लिए जरूरी शर्तें अपने जिले के कलेक्टर से लिंग प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य। आवेदन में अब ट्रांसजेंडर के लिए अलग जेंडर ऑप्शन उपलब्ध। कोर्ट केस वाले अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने की अनुमति, लेकिन परिणाम हाईकोर्ट के अंतिम आदेश पर निर्भर।  ट्रेनिंग नियम ट्रांसजेंडर महिला → महिला नवआरक्षकों की दक्षता नियमों का पालन। ट्रांसजेंडर पुरुष → पुरुष नवआरक्षकों के दक्षता नियमों का पालन। यह नियम बेसिक ट्रेनिंग में भी लागू होंगे।  संशोधित आवेदन तिथियां ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ: 16 अक्टूबर 2025 आवेदन की अंतिम तिथि: 22 अक्टूबर 2025 आवेदन पत्र संशोधन की अंतिम तिथि: 23 अक्टूबर 2025 उभयलिंगी अभ्यर्थियों के दस्तावेज अपलोड की अंतिम तिथि: 29 अक्टूबर 2025

मध्य प्रदेश पुलिस के लिए दिवाली पर सौगात, 5 अहम फैसलों से जवानों में उत्साह

भोपाल  मध्य प्रदेश पुलिस कर्मियों के लिए इस दिवाली खुशखबरी लेकर आई है। पीएचक्यू ने राज्य स्तरीय संयुक्त पुलिस परामर्शदात्री समिति और पुलिस कल्याण समिति की बैठक के मिनट्स जारी किए हैं, जिनमें पाँच बड़े और कर्मचारी हितैषी फैसले लिए गए हैं। मुख्य फैसले: परोपकार निधि में बड़ा इजाफा – 10 साल बाद इसे बढ़ाकर 1 लाख से 5 लाख किया गया। वित्तीय पावर में वृद्धि – सभी इकाई प्रमुखों की वित्तीय पावर अब 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर दी गई। शिक्षा और चिकित्सा में राहत –  पुलिसकर्मियों के बच्चों की शिक्षा और परिजनों के उपचार के लिए शिक्षा निधि और चिकित्सा राहत निधि में वृद्धि। सुविधाएँ और खेल – सभी पुलिस इकाइयों के आवासीय परिसर में खेल मैदान बनाए जाएंगे और सब्सिडियरी कैंटीन सॉफ्टवेयर से इंटीग्रेट की जाएंगी। पीएचक्यू ने निर्देश दिए हैं कि सभी निर्णयों का क्रियान्वयन दो सप्ताह में सभी इकाई और शाखाओं द्वारा सूचित किया जाए। इस निर्णय से पुलिसकर्मियों के कल्याण और परिवारों की भलाई को बड़ा सहयोग मिलेगा। दिवाली पर यह तोहफा उनके लिए खास खुशी लेकर आया है।

छत्तीसगढ़ के बाद अब MP में राजनीतिक हलचल, निगम-मंडल नियुक्तियों को लेकर मंत्री का ऐलान

ग्वालियर  छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश में भी निगम मंडल आयोग में नियुक्तियों की चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि “बहुत जल्द मध्य प्रदेश में भी निगम मंडल आयोग के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्तियां होंगी। हमारी पार्टी का संगठन इस पर जल्द निर्णय करेगा। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में निगम मंडल आयोग के अध्यक्षों को कैबिनेट और राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया। इसमें 13 को कैबिनेट मंत्री और 22 को राज्य मंत्री जैसी सुविधाएं मिली हैं। एमपी में लंबे समय से इन नियुक्तियों का इंतजार था और अब प्रदेश की राजनीति में इस खबर ने नया जोश और चर्चा का माहौल बना दिया है।