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मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की नवीन नाम पट्टिका का अनावरण किया

विक्रम विश्वविद्यालय को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के रूप में नई पहचान मिली है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की नवीन नाम पट्टिका का अनावरण किया उज्जैन नगरी आदिकाल सें ही सांस्कृतिक, धर्म के साथ शिक्षा का केंद्र रही हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के स्वर्ण जयंती सभागार में शुक्रवार को विश्वविद्यालय के आधारशिला दिवस के अवसर पर “नवीन नाम पट्टिका अनावरण समारोह” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन केवल एक विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन का नहीं, बल्कि उज्जैन और संपूर्ण मध्यप्रदेश के गौरव के पुनर्जागरण का दिन है। ‘विक्रम विश्वविद्यालय’ अब ‘सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय’ के रूप में नई पहचान लेकर, अपने गौरवशाली इतिहास की नई यात्रा शुरू कर रहा है। यह क्षण हम सभी के लिए गर्व और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन सदैव भारत की सांस्कृतिक राजधानी रही है। यह वह धरा है, जहाँ से ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म और संस्कृति का प्रकाश पूरे विश्व में फैला। यह वही नगरी है जहाँ भगवान कृष्ण ने शिक्षा प्राप्त की, जहां। महाकाल का आशीर्वाद हर कण में विद्यमान है और जहां विक्रमादित्य जैसे महान सम्राट ने धर्म, न्याय और ज्ञान की प्रतिष्ठा स्थापित की। उन्होंने आगे कहा मैं स्वयं इस विश्वविद्यालय का विद्यार्थी रहा हूँ। छात्र जीवन की अनेक स्मृतियां आज ताज़ा हो गई हैं। यह संस्था केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि मेरे जीवन की प्रेरणा रही है। इस विश्वविद्यालय ने मुझे सामाजिक सेवा, नेतृत्व और सार्वजनिक जीवन का मार्ग दिखाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तन केवल शब्दों का बदलाव नहीं है बल्कि यह उस पहचान की पुनर्स्थापना भी है जो कभी उज्जैन की धरती की शान हुआ करती थीं। ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का नाम हमारी परंपरा, संस्कृति और राष्ट्र गौरव का प्रतीक है। इस नाम के साथ विश्वविद्यालय नई ऊर्जा, नई सोच और नई दिशा में अग्रसर होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज यह विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। 175 से अधिक महाविद्यालयों से संबद्ध यह संस्थान हजारों विद्यार्थियों को ज्ञान का प्रकाश दे रहा है। यह देखकर गर्व होता है कि इस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी देश-विदेश में अपने कार्य से नाम रोशन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य जैसे व्यक्तित्व सदियों में एक बार जन्म लेते हैं जो वीरता, दान, नीति, और न्याय के प्रतीक होते हैं। विक्रमादित्य न केवल उज्जैन की पहचान थे बल्कि भारत की आत्मा का स्वरूप थे। आज जब यह विश्वविद्यालय उनके नाम से जुड़ रहा है तो यह केवल संस्थान का नहीं बल्कि समूचे प्रदेश का सम्मान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अग्रसर किया है। जिस प्रकार विक्रमादित्य ने अपने युग में न्याय और नीति की परंपरा स्थापित की थी, उसी तरह प्रधानमंत्री मोदी ने आधुनिक भारत में विकास, आत्मविश्वास और वैश्विक पहचान का युग प्रारंभ किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कोविड काल की चुनौतियों का स्मरण करते हुए कहा कि कठिन समय में भी भारत ने साहस और एकता से कार्य किया। हमारे डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और आम नागरिक सबने मिलकर देश को बचाया। यही वह भावना है जो हमें विक्रमादित्य के युग से जोड़ती है कर्तव्य, समर्पण और धैर्य की भावना। उन्होंने कहा आज जब हम ‘सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय’ के रूप में नई पहचान की ओर बढ़ रहे हैं, यह केवल एक संस्था का रूपांतरण नहीं बल्कि उज्जैन के उस स्वर्णिम अध्याय का पुनर्लेखन है जो शिक्षा, संस्कृति और अध्यात्म के त्रिवेणी संगम पर आधारित है। मैं इस विश्वविद्यालय के प्रत्येक छात्र, शिक्षक और कर्मचारी को इस ऐतिहासिक अवसर की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा जैसे करवा चौथ का चाँद सौभाग्य का प्रतीक होता है, वैसे ही का यह दिन इस विश्वविद्यालय के लिए सौभाग्य और नए युग की शुरुआत का प्रतीक बनेगा। यह विश्वविद्यालय महाकाल की नगरी की ऊर्जा से प्रेरित होकर शिक्षा, शोध, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में देश का अग्रणी संस्थान बने यही मेरी कामना है। पूर्व विधायक महंत  राजेंद्र भारती ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय नाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस विश्वविद्यालय को अद्भुत सौगात हैं। उन्होंने अपने छात्र राजनीति की यादें साझा की और बताया कि उनके और मुख्यमंत्री द्वारा किस प्रकार इस विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की जाती थीं। इस अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सम्मान स्मृति चिन्ह एवं फल भेंट कर किया। साथ ही उज्जैन नगर निगम सभापति मती कलावती यादव, नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, एवं सत्येन्द्र कुमार मिश्रा का भी सम्मान किया गया। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि यह दिन विश्वविद्यालय के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने वाला है। विक्रम विश्वविद्यालय से सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय’ बनने का यह क्षण केवल नाम परिवर्तन नही बल्कि हमारी पहचान और गौरव की पुनर्स्थापना है। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और न्याय के प्रतीक हैं। उनके नाम से विश्वविद्यालय का जुड़ना हमारे लिए प्रेरणादायक और गर्व का विषय है। यह कदम उज्जैन की उस प्राचीन ज्ञानधारा को पुनर्जीवित करेगा जिसने भारत को शिक्षा और संस्कृति का केंद्र बनाया। कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं इस विश्वविद्यालय के गौरवशाली पूर्व छात्र रहे हैं। उनका विश्वविद्यालय के प्रति यह भावनात्मक जुड़ाव आज उसे नई पहचान दे रहा है। यह विश्वविद्यालय अब शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति और नवाचार का केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय की नवीन नाम पट्टिका के अनावरण के बाद विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित डॉ. राजेश गुप्ता एवं डी.डी. बेदिया की डिजिटल मार्केटिंग, तिलक राज सिंह सोलंकी की राजा रवि वर्मा: एक भारतीय चित्रकार, रमण सोलंकी की आलेख पुरातन की ओर, गीता नायक की नूतन प्रवाह, मिती शर्मा की ए स्पेक्ट्रम ऑफ इंडिया, तथा डॉ. रवीन्द्र पस्तोर, प्रो. आशीष वर्मा, डॉ. हितेन्द्र त्रिवेदी की Planning for the Largest Human Gathering on … Read more

देश का मान बढ़ाने वाले युवाओं को CM डॉ यादव ने दी बधाई

युवाओं ने हमारे देश का नाम गौरवांवित किया : मुख्यमंत्री डॉ यादव तीन दिवसीय यंग थिंकर्स कॉन्फ्लूएंस का उद्घाटन प्राचीन संस्कृति के अच्छे कामों से युवा लें प्रेरणा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को उज्जैन के अवंतिका विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय यूंथ थिंकर्स कॉन्फ्लूएंस कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज की युवाशक्ति इस राष्ट्र को ऐसे स्थान पर ले जाकर खड़ा करेगी, जिससे भारत विश्वगुरु बनकर रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी आज युवाओं के सबसे बडे प्रेरणा स्त्रोत है। उनसे प्रेरणा लेकर युवा एक नई सोच के साथ आगे बढ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा किसी देश की वह शक्ति होता है जो उसके इतिहास को लिखने के लिए सबसे आगे खड़ा होता है। भारत के इतिहास में अंग्रेजों के काल में खुदीराम बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह ,सुभाषचंद्र बोस जैसे देशभक्त क्रांतिकारियों ने देश में जो हलचल पैदा की उससे देश के इतिहास में स्वर्णिम काल स्थापित हुआ है। हमारे प्राचीन काल में सम्राट विक्रमादित्य चंद्रगुप्त मौर्य, समुद्र गुप्त जैसे अनेक योद्धाओं ने देश के बाहरी आक्रमणों से देश की रक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा जारी की गई र्स्टाटअप पालिसी भी इसी का एक बेहतरीन उदाहरण है। हमारे प्रधानमंत्री भी युवाओं की तरह आज लगातार नवाचार कर रहे है। प्राचीन समय से भारत का इतिहास युवाओं का इतिहास रहा है जिसमें वह अपने पूर्वजों के अनुभवों का लाभ लेकर नई सोच के साथ इतिहास को गढते है और देश को आगे बढ़ाते है साथ ही राष्ट्र गौरव का गौरव भी बढ़ाते है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के अनेक युवाओं ने हमारे देश का नाम गौरवान्वित किया हैं। हमारे युवाओं में दृढ इच्छाशक्ति की कमी नही हैं। प्राचीन संस्कृति में बहुत अच्छे काम हुए हैं। युवाओं को इससे प्रेरणा लेना चाहिए। युवा देश का नाम दुनिया में आगे बढ़ाते रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उदाहरण देते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आइआरएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर देश का नाम गौरांवित किया। उन्होंने आइआरएस जैसी नौकरी को त्यागकर देश की आजादी में बढ़ चढकर हिस्सा लिया था। राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त फिल्म निर्देशक  विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि मालवा अंचल पर भी फिल्म का निर्माण किया जा सकता है। इस बात पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जयिनी के सम्राट राजा विक्रमादित्य, राजा भोज पर फिल्में बनाई जा सकती है।कार्यक्रम के प्रारंभ में  आशुतोष सिंह ठाकुर ने स्वागत भाषण देते हुए कॉन्फ्लूएंस के कार्यक्रम की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने द ब्लड रिपब्लिक आफ बंगाल, फ्रेक्टल मंडला-ए हिस्ट्री आफ एन्शियंट इंडिया, संस्कृति सिन्थेसिस, फ्राम गॉड्स टू द गाड, स्वयंबोधा एंड शत्रुबोधा एवं बच्चे आपके संस्कार किसके? नाम की पुस्तकों का विमोचन किया। उन्होंने नवीन आकृति भवन का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में  दीपक शर्मा, अवंतिका विश्वविद्यालय के कुलगुरु  नितिन राणे आदि उपस्थित थे।  

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जिला जेल में 10 नवीन वीडियो कान्फ्रेसिंग कक्षों का किया शुभारंभ

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जिला जेल में 10 नवीन वीडियो कान्फ्रेसिंग कक्षों का किया शुभारंभ वीडियो कॉन्फ्रेंस से बंदियों की पेशी समय पर होने से प्रकरण निराकरण में लगेगा कम समय  छतरपुर      सर्वाेच्च न्यायालय नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला न्यायालय एवं जेल के मध्य जेल में परिरुद्ध बंदियों की पेशी वीडियो कान्फ्रेंसिग से कराए जाने के लिए जिला जेल छतरपुर में 10 नवीन वीडियो कान्फ्रेसिंग कक्षों का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवीन्दर सिंह के कर कमलों द्वारा किया गया। जेल में नवीन व्ही.सी. कक्षों के प्रारंभ होने से बंदियों की पेशी नियमित एवं समय पर होने से प्रकरण निराकरण कम समय में किया जा सकेगा एवं न्यायालय से बंदियों की पेशी हेतु पुलिस गार्ड पर निर्भरता कम होगी।  जिससे पेशी में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा। इन व्ही.सी कक्षों के प्रारंभ हो जाने से बंदियों के अपने प्रकरण की नियमित सुनवायी में आनलाईन के माध्यम से न्यायालय से जोड़ा जा सकेगा। पेशी नियमित होने में बंदियों के प्रकरण निराकरण में तेजी आएगी एवं जेल में हो रही ओव्हर क्राउंडिंग की समस्या को कम किया जा सकेगा। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा जेल का भ्रमण किया गया। जिसमें साफ-सफाई एवं बंदियों को मिल रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली।  उक्त कार्यक्रम में विशेष न्यायाधीश उपेन्द्र प्रताप सिंह, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय राजेश कुमार देवलिया, रजिस्ट्रार एवं न्यायाधीश अरविंद गुर्जर, न्यायाधीश संघशिखा वंशकार, हिमांशू गुप्ता, आकांक्षा गर्ग, संतोष कुशवाहा, न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण वि.प्र. सोलंकी, जिला विधिक सेवा अधिकारी डॉ. वीरेन्द्र कुमार चढ़ार, प्रभारी जेल अधीक्षक दिलीप सिंह, सहायक जेल अधीक्षक मनीष त्यागी एवं समस्त जेल स्टाफ एवं बंदी गण उपस्थित रहे।

लाड़ली बहनों को दीपावली के पहले मिलेगी राशि : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

हर एक किसान के साथ खड़ी है सरकार, एक-एक खेत का किया जा रहा है सर्वे लाड़ली बहनों को दीपावली के पहले मिलेगी राशि : मुख्यमंत्री डॉ.यादव  133 करोड 80 लाख रुपए के विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की उन्हेल क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ है, आपदा ग्रस्त प्रत्येक किसान को मदद दी जाएगी। विपत्ति में आए हर एक किसान को राहत राशि मिलेगी और एक-एक खेत का सर्वे किया गया है। सोयाबीन उत्पादक किसानों को भावांतर योजना का लाभ भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 133 करोड 80 लाख रुपए की लागत के निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण किया। इनमें 127. 63 करोड रुपए लागत के 23 किलोमीटर से अधिक लंबाई के इंगोरिया से उन्हेल टू लेन मार्ग निर्माण का भूमि-पूजन सम्मिलित है। साथ ही 1.26 करोड़ के नवीन नगर परिषद कार्यालय भवन निर्माण एवं 2.17 करोड़ के चिड़ी से रावदिया मार्ग निर्माण का भूमि पूजन तथा 2.74 करोड रुपए के करनावद विद्युत उपकेंद्र निर्माण का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हेल क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई, जिनमें उन्हेल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन, रामगढ़ बिहारिया मार्ग पर नारायण धाम को जोड़ने के लिए पुल का निर्माण तथा उन्हेल में विश्रामगृह का निर्माण सम्मिलित है। उन्हेल में इमली तथा मावा उद्योग से जुड़े हुए व्यक्तियों एवं उनके व्यापार विकास के लिए भी कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हेल-इंगोरिया टू लेन मार्ग निर्माण के लिए नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हेल क्षेत्र का विकास लगातार किया जा रहा हैं। गंभीर नदी परियोजना का लाभ भी उन्हेल क्षेत्र के नागरिकों तथा किसानों को मिलेगा। राज्य शासन द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के हित में भावांतर योजना लागू की गई है। किसानों को घर बैठे योजना का लाभ दिया जाएगा। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित फसलों के मामले में प्रभावित किसानों को राहत राशि दी जा रही है। जैसे-जैसे जिला कलेक्टरों से रिपोर्ट प्राप्त होती जा रही है, वहां के किसानों को राहत राशि का वितरण किया जा रहा है। किसानों को सम्मान निधि मिल रही है। बहनों को लाडली बहना योजना के तहत सहायता राशि दी जा रही है। यह राशि दीपावली के पूर्व उपलब्ध कराएंगे। गोपालन गौशाला योजना अंतर्गत 25 देसी गायों के पालन पर 40 लाख रुपए के प्रोजेक्ट में अधिकतम 10 लाख रुपए अनुदान शासन देगा। प्रदेश में गोवर्धन पूजा धूमधाम से मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के सराहनीय कार्य लगातार किए जा रहे हैं। प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण पथ का विकास किया जा रहा है। ओरछा में आगामी 15 अक्टूबर को 100 करोड रुपए से ज्यादा लागत के कार्यों की शुरुआत की जा रही है। प्रदेश के चित्रकूट का भी विकास किया जा रहा है। सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने कहा कि प्रदेश में किसान हितैषी मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किसानों के हित में भावांतर योजना लागू की गई है, जिसका लाभ किसानों को मिलेगा। सरकार सदैव किसानों के साथ है। आपदा प्रभावित प्रत्येक किसान को शासन द्वारा मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही बीमा दावा राशि भी दिलाई जाएगी। विधायक श्री सतीश मालवीय ने कहा कि क्षेत्र को लगातार विकास की सौगात मिल रही है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। किसान हितैषी कार्यों के लिए क्षेत्रीय किसानों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को हल भेंट किया गया।  

छठ पर पूजा के लिए गोविंदपुरा में 51 स्थानों पर बनेंगे कुंड: राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर

लोक आस्था का महापर्व बना छठ: राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर छठ पर पूजा के लिए गोविंदपुरा में 51 स्थानों पर बनेंगे कुंड: राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने की छठ की तैयारियों की समीक्षा भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शुक्रवार को लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियों को लेकर बैठक ली। उन्होंने बताया कि गोविंदपुरा क्षेत्र में लगभग 51 स्थानों पर कुंडों का निर्माण कर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। त्यौहार हमारे देश को एकता के सूत्र में बांधते हैं। छठ पर्व में भगवान सूर्य की चार दिवसीय आराधना अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है। यह पूरे देश का लोक आस्था का महापर्व बन गया है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि इस पर्व को मनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि हथाईखेड़ा डेम, सरियो सरोवर डेम और शिवनगर स्थित दुर्गा मंदिर कुंड जैसे प्रमुख स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। ऐसे में कुंडों की मरम्मत, बिजली व्यवस्था, साज-सज्जा, रंग-रोगन, जलभराव, चेंजिंग रूम, लाइटिंग, चलित शौचालय, पेयजल टैंकर, महिला पुलिस बल, बैरिकेडिंग, एम्बुलेंस, पेड़ों की छटाई और घास की कटाई जैसी व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण कर लिए जाएं। बैठक में श्री तीर्थराज मिश्रा, श्री वारेलाल अहिरवार, श्री गणेश राम नागर, श्रीमती मोनिका ठाकुर, श्रीमती शिरोमणी शर्मा, श्रीमती छाया ठाकुर, श्री भीकम सिंह बघेल, श्री जितेंद्र शुक्ला, श्री सुरेंद्र घोटे, श्री वी. शक्ति राव, श्री संजय शिवनानी, श्री मनोज विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।  

दिव्यांगजन विशेष क्षमताओं के धनी हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रेरणादायक संदेश

दिव्यांगजन अपने आप को कम न आंके, परमात्मा ने आपको विशिष्ट शक्तियां प्रदान की है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 146 दिव्यांगजनों को किए सहायक उपकरण वितरण तराना, माकडोन, उन्हेल, नागदा, खाचरौद और बड़नगर को शव वाहन वितरित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को कालिदास अकादमी परिसर में दिव्यांगजनों के लिए आयोजित उपकरण वितरण शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि दिव्यांगजन अपने आप को कम न आंके परमात्मा ने आपको विशिष्ट शक्तियां प्रदान की हैं। महर्षि अष्टावक्र भी दिव्यांग थे लेकिन शास्त्रार्थ में उन्हें कोई भी पराजित नहीं कर सकता था वे अत्यंत विद्वान थे। ईश्वर यदि हमें कोई कमजोरी देता है तो साथ ही विशिष्ट शक्ति भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सेवा सप्ताह के अंतर्गत दिव्यांगजनों को उपकरण वितरित किए जा रहे हैं। यह मानव सेवा भी है और एक प्रकार का आत्मिक सुख भी। सभी उपकरणों का अपने आप में बहुत महत्व होता है। श्रवण यंत्र का उपयोग करने के बाद श्रवण शक्ति का आभास होता है। इससे अत्यंत सुखद अनुभव होता है। हमारा शरीर ब्रह्मांड का स्वरुप है। नर सेवा भी वास्तविक अर्थों में ईश्वर की सेवा है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन विशिष्ट शक्तियों को पहचानें, कठोर परिश्रम करें और जीवन में सफलता प्राप्त करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी दिव्यांगजनों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने दिव्यांगजनों को स्कूटी, स्पेशलाईज्ड ट्राइसिकल, वाकिंग स्टीक्स वितरित की। उन्होंने कहा कि मोटराइज्ड व्हीलचेयर और स्कूटी मिलने से दिव्यांग भाइयों और बहनों को रोजगार में सहायता होगी और उनके दैनिक जीवन में कार्य करने में सरलता आयेगी। इस अवसर पर सांसद  अनिल फिरोजिया ने कहा कि किसानों के हित के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर फसल क्षति पर राहत राशि दी जा रही हैं और कृषकों को फसल का उचित भाव दिलाने के लिए भावांतर योजना की भी शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व.  भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति और सामाजिक शोध संस्थान द्वारा आयोजित सेवा कार्यक्रम में 146 दिव्यांग हितग्राहियों को 1 करोड़ 25 लाख रुपए की राशि से इलेक्ट्रिक स्कूटर, कान की मशीन, वॉकिंग स्टीक, व्हीलचेयर आदि उपकरण वितरण किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मानव सेवा के लिए जिले की 6 नगर परिषदों माकडोन, उन्हेल, नागदा, खाचरौद, तराना और बड़नगर को शव वाहन भी वितरण किये। इलेक्ट्रिक स्कूटर चालकों को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चाबी सौंपी और हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर की। कार्यक्रम का आभार  सुदर्शन ने माना। इस अवसर पर विधायक  सतीश मालवीय, नगर निगम सभापति मती कलावती यादव,  संजय अग्रवाल,  राजेंद्र भारती और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। 

हैकाथॉन में दिखा परंपरा और प्रौद्योगिकी का अभिनव संगम

भोपाल  भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल में उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन-2025 के दो दिन के सत्र में प्रौद्योगिकी, नवाचार और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस अनूठे आयोजन में देशभर के युवाओं को एक मंच पर सिंहस्थ-2028 के लिए स्मार्ट, सुरक्षित और समावेशी समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिला। यह सिंहस्थ-2028 के लिए समाधान विकसित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। देश के 26 राज्यों से पंजीकरण और 11 राज्यों की 36 चयनित टीमों की भागीदारी ने इस हैकाथॉन को भारत की नवाचार विविधता का प्रतीक बनाया। प्रतिभागियों ने सिंहस्थ-2028 के लिये ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-आधारित तकनीकों के माध्यम से भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, गतिशीलता, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत किए। 36 उत्कृष्ट टीम को मिला दो माह का परिशोधन समय हैकाथॉन के अंतिम दिन निर्णायक मंडल ने सभी टीम के उन्नत समाधानों का मूल्यांकन किया। पहले दिन दिए गए सुझावों को शामिल करते हुए प्रतिभागियों ने अपने प्रस्तावों को और बेहतर रूप में प्रस्तुत किया। नवाचार की गहराई और समाधानों की मापनीयता को देखते हुए निर्णायकों ने एक अभूतपूर्व निर्णय लेते हुए सभी 36 टीम को दो माह का अतिरिक्त समय प्रदान किया, जिससे वे अपने विचारों को और परिष्कृत कर सकें। यह कदम राज्य सरकार की दीर्घकालिक नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन श्री संकेत एस. भोंडवे, प्रबंध निदेशक एमपीएसईडीसी श्री आशीष वशिष्ठ और मुख्य महाप्रबंधक एमपीएसईडीसी शिवांगी जोशी सहित गणमान्य व्यक्तियों ने प्रतिभागियों के रचनात्मक, तकनीकी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक समाधानों की सराहना की। सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों के लिये डिजाइन किये गये नवाचारों में जंगोह (इंदौर) ने “सिंहथा यूनिफाइड” प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया जो स्थानीय भाषाओं में एआई-संचालित सहायता, रीयल-टाइम अपडेट्स प्रस्तुत करता है। सेल्फ सर्व बूथ ने एक 6डी वर्चुअल रियलिटी अनुभव प्रस्तुत किया जो कुंभ के वातावरण को वैश्विक दर्शकों के लिए सजीव बनाता है। संचार वॉरियर ने एक रीयल-टाइम भीड़ निगरानी और चेतावनी प्रणाली विकसित की जो आपात स्थिति में मूक रिपोर्टिंग को भी सक्षम बनाती है। सेफ्टी और सिक्योरिटी ट्रेकिंग यूनिट ने लोरा-आधारित सुरक्षित संचार नेटवर्क का प्रस्ताव रखा जो फील्ड टीमों और कमांड सेंटर्स के बीच समन्वय को सुनिश्चित करता है। क्राफ्टआई ने एआई -आधारित तीर्थयात्री निगरानी प्रणाली प्रस्तुत की, जबकि सेफ क्लॉक ने भारतीय भाषाओं में डेटा भंडारण मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया।मेडीवेंड ने रियल-टाइम वॉइस इंटरफेस से युक्त एक चिकित्सा वेंडिंग प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किया। दर्शिनी एआई टीम WAPPGO ने भीड़भाड़ को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा को बढाने के लिए एआई आधारित ट्रैकिंग और निगरानी उपकरणों को एकीकृत करने वाले एक स्मार्ट गतिशीलता और भीड़ प्रबंधन प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव रखा। अमृतशरणम ने एक एकीकृत गतिशीलता और सुरक्षा निगरानी प्रणाली प्रस्तुत की, जो भीड़भाड़ को रोकने और एक एकीकृत कमांड प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से पुलिस, स्वास्थ्य और नगरपालिका विभागों के बीच वास्तविक समय समन्वय को सक्षम करने के लिए पूर्वानुमानित विश्लेषण का लाभ उठाती है। इस बीच, केरल की एल्विक्टो टेक्नोलॉजीज ने एक स्मार्ट पार्किंग प्रबंधन प्रणाली प्रस्तुत की, जिसे सुगम यातायात प्रवाह के लिए कई पार्किंग क्षेत्रों को एक जुड़े हुए नेटवर्क में एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और रोबस्ट रोबोटिक्स ने अग्नि का पता लगाने, जोखिम प्रबंधन और वास्तविक समय प्रतिक्रिया के लिए इसरो नाविक उपग्रह डेटा और ड्रोन इमेजरी को मिलाकर एआई-संचालित सटीक मानचित्रण समाधान से निर्णायक मंडल को प्रभावित किया। इन सभी नवाचारों ने यह स्पष्ट किया कि भारत की युवा तकनीकी शक्ति, सामाजिक चेतना के साथ मिलकर परंपरागत आयोजनों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में सक्षम है। उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन-2025 ने न केवल भविष्य की तकनीकी शासन प्रणाली की झलक दी, बल्कि मध्यप्रदेश के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन विजन को भी मजबूती प्रदान की। चयनित टीमें अगले दो महीनों के परिशोधन अवधि में अपने समाधानों को और विकसित करेंगी, जिससे सिंहस्थ-2028 के लिए एक सशक्त, समावेशी और टिकाऊ तकनीकी आधार तैयार हो सके। 

लाडली बहनों के लिए खुशखबरी! सरकार ने जारी की किस्त की तारीख

भोपाल मध्य प्रदेश की बहुप्रतीक्षित लाड़ली बहना योजना को लेकर एक अहम अपडेट सामने आई है। इस बार जहां लाखों बहनों के लिए खुशखबरी है, वहीं कुछ महिलाओं के लिए निराशा भी हो सकती है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश में कई पात्र महिलाएं अक्टूबर माह की यानी 29वीं किस्त से वंचित रह सकती हैं। कब मिलेगी 29वीं किस्त की राशि लाड़ली बहना योजना की राशि आमतौर पर हर महीने की 15 तारीख तक लाभार्थियों के खातों में जमा की जाती है। सितंबर में पिछली किस्त 12 तारीख को जारी हुई थी। इस बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि दीपावली के बाद भाई-दूज से योजना की राशि ₹1500 प्रतिमाह कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि अक्टूबर की किस्त अभी भी ₹1250 की ही होगी, जबकि नवंबर से महिलाओं को बढ़ी हुई ₹1500 की राशि मिलेगी।   किसे नहीं मिलेगी अक्टूबर की किस्त? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्यभर में ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया के दौरान कई महिलाओं की समग्र आईडी (Samagra ID) डिलीट हो गई है। इससे उनके बैंक खातों में अक्टूबर की राशि नहीं पहुंचेगी। सतना और सिंगरौली जिलों में ऐसे मामलों की संख्या अधिक बताई जा रही है, जहां महिलाओं का डेटा सत्यापन में असफल रहा है। इसके अलावा, योजना के पात्रता मानदंडों के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं स्वतः ही योजना से अपात्र हो जाती हैं। जिन महिलाओं के आधार कार्ड या समग्र पोर्टल पर दर्ज आयु 60 वर्ष से अधिक है, उन्हें इस माह की राशि नहीं मिलेगी। जनवरी 2025 में भी इसी कारण कई महिलाएं योजना (Ladli Behna Yojana) से बाहर की गई थीं।   कैसे मिलेगी अगली किस्त सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन महिलाओं की समग्र आईडी या e-KYC अपडेट नहीं है, वे इसे जल्द सुधार लें। जानकारी अपडेट करने के बाद वे अगली किस्त से योजना का लाभ फिर से प्राप्त कर सकेंगी। दीपावली के बाद नवंबर माह में बढ़ी हुई ₹1500 की किस्त लाखों लाड़ली बहनों के लिए एक बड़ी राहत और खुशी लेकर आने वाली है।

उज्जैन की 200 साल पुरानी तकिया मस्जिद हटाने पर इंदौर हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

उज्जैन  उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल लोक परिसर की तकिया मस्जिद को हटाए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मस्जिद तोड़े जाने के खिलाफ दायर की गई अपील को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की दलील याचिकाकर्ता मोहम्मद तैयब और कुछ अन्य लोगों ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि तकिया मस्जिद लगभग 200 साल पुरानी थी और इसकी जमीन वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उन्होंने कहा कि सरकार को इसे तोड़ने का कोई अधिकार नहीं था। याचिका में मस्जिद का पुनर्निर्माण कराने और इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की गई थी। सरकारी पक्ष का जवाब शासन की ओर से पैरवी कर रहे वकील आनंद सोनी ने कोर्ट को बताया कि जमीन का अधिग्रहण पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन के बदले में संबंधित पक्ष को मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है और अब यह भूमि पूर्ण रूप से सरकार के स्वामित्व में है। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि वक्फ बोर्ड ने इस मामले को लेकर भोपाल स्थित वक्फ ट्रिब्यूनल में पहले से ही एक केस दायर कर रखा है। न्यायालय की टिप्पणी और फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के दावों को अपर्याप्त माना। कोर्ट ने कहा कि अपील करने वालों के पास मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग करने का कोई कानूनी आधार (हक) नहीं है। न्यायालय ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले का उल्लेख करते हुए कहा, "किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार किसी विशेष स्थान से नहीं जुड़ा है। नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है।" इसी आधार पर, कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया। 

श्रीकृष्ण पाथेय योजना से जुड़ेगा उज्जैन का सांस्कृतिक पुनरुत्थान, पांच मंदिरों का होगा संरक्षण और विकास

उज्जैन  आस्था की नगरी उज्जैन में देवस्थानों के विकास का क्रम जारी है। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड (यूसीटीएसएल) ने शहर के पांच ऐतिहासिक मंदिरों को श्रीकृष्ण पाथेय योजना से जोड़ते हुए उनके विकास और सुंदरीकरण का खाका तैयार किया है। उद्देश्य, आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ-2028 से पहले उज्जैन को एक समग्र धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में राष्ट्रीय पहचान दिलाना है। इस योजना में योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली महर्षि सांदीपनि आश्रम, चिंतामन गणेश मंदिर, हरसिद्धि शक्तिपीठ मंदिर, श्रीकाल भैरव मंदिर, भूखी माता मंदिर और नारायणा धाम शामिल हैं। ‘श्रीमहाकाल महालोक’ परियोजना की सफलता और श्रद्धालुओं की बेमिसाल आमद को देखते हुए अब शहर के अन्य मंदिरों का भी विकास उसी माडल पर किए जाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद विस्तृत योजना बन रही है। यूसीटीएसएल का कहना है कि इससे न केवल आस्था के केंद्रों का वैभव बढ़ेगा बल्कि श्रद्धालुओं की यात्रा अवधि में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और टूरिज्म सेक्टर को गति मिलेगी। यह योजना केवल मंदिरों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि उज्जैन की विरासत, आस्था और पर्यटन को एक सूत्र में जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे शहर विश्व पटल पर और उज्जवल चमक बिखेरेगा। आध्यात्मिक विरासत और पर्यटन की नई रेखा सांदीपनि आश्रम और नारायण धाम इस योजना के केंद्र में रहेंगे। धार्मिक मान्यता है कि सांदीपनि आश्रम वही पवित्र स्थल है जहां योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने 16 विद्याओं और 64 कलाओं का ज्ञान अर्जित कर संपूर्ण जगत को धर्म, कर्म, नीति और प्रेम का संदेश दिया था। नारायण धाम में श्रीकृष्ण और सुदामा के वन विहार का प्रसंग जुड़ा है। इस धार्मिक पृष्ठभूमि को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर इन स्थलों को आकर्षक धार्मिक-पर्यटन केंद्रों में बदला जाएगा। सिंहस्थ 2028 से पहले दिखेगा असर सरकार और प्रशासन ने इस योजना को मिशन मोड में लागू करने का रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री द्वारा 30 दिसंबर 2027 तक सभी प्रमुख प्रोजेक्ट पूरे करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। शासन से स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ कर दिए जाएंगे ताकि सिंहस्थ से पहले पांचों मंदिरों का कायाकल्प पूर्ण हो जाए। परियोजना में मंदिर परिसरों का सौंदर्यीकरण, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, पहुंच मार्गों का विस्तार, सूचना एवं व्याख्या केंद्र, गाइड मैप और सांस्कृतिक प्रस्तुति स्थल शामिल किए जाएंगे। इनसे श्रद्धालुओं को सहजता के साथ धार्मिक अनुभूति और उज्जैन की विरासत का गहन परिचय मिल सकेगा।