samacharsecretary.com

कमिश्नर-कलेक्टर कांफ्रेंस के लिए तैयारियां पूर्ण, दिशानिर्देश किए गए जारी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 7 एवं 8 अक्टूबर 2025 को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में होने वाली कमिश्नर-कलेक्टर कॉन्फ्रेंस संबंधी दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। विषय संयोजक को प्रस्तुति के लिए अधिकतम 20 मिनट मिलेंगे और प्रत्येक क्षेत्र में राज्य सरकार की प्राथमिकताएं बतायी जायेंगी। राज्य सरकार के विजन के अनुरूप केन्द्र और राज्य सरकार की क्षेत्रीय प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों में सर्वश्रेष्ठ 5 और कमजोर 5 जिलों की समीक्षा की जायेगी। कांन्फ्रेंस में कलेक्टरों के सुझावों पर ध्यान केन्द्रित कर आने वाली विशिष्ट समस्याएं और मुद्दे तथा जिला स्तर पर उस क्षेत्र के साथ अन्य किसी क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए नवाचार पर चर्चा की जायेगी। मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय और योजना विभाग चुनिंदा कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे। स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और नवाचार तथा जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर सार्वजनिक संवाद (जन संवाद) वीसी के माध्यम से इच्छित परिणाम प्राप्ति पर चर्चा होगी। जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर रोजगार सृजन, लोगों के लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक आसान पहुंच और पहलों के बारे में जागरूकता पर चर्चा होगी। सभी 8 सेक्टरों के लिए 75 मिनट का सत्र समय रखा गया है। कांफ्रेंस का उदघाटन सत्र 7 अक्टूबर की सुबह 10 बजे से 10:30 बजे तक सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा परिचय, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव  अनुराग जैन के संबोधन से होगा। सत्र में संयोजक कृषि उत्पादन आयुक्त, सदस्य कृषि/बागवानी/पशु चिकित्सा/सहकारी द्वारा कलेक्टर्स के बीच कृषि एवं संबद्ध विषयों पर चर्चा की जायेगी। दूसरे सत्र में प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य सदस्य सचिव डब्ल्यूपीसी, निदेशक एनएचएम कलेक्टर्स के बीच स्वास्थ्य एवं पोषण पर चर्चा केन्द्रित होगी। तीसरे सत्र में प्रमुख सचिव उद्योग, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, वित्त विभाग द्वारा कलेक्टर्स के बीच रोजगार, उद्योग और निवेश चर्चा पर रहेगा। चौथे सत्र में संयोजक अपर मुख्य सचिव-शहरी द्वारा शहरी विषयों पर चर्चा होगी और पांचवे सत्र के दौरान संयोजक अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन, अपर मुख्य सचिव वित्त/ प्रमुख सचिव राजस्व/विधि द्वारा सुशासन पर चर्चा होगी। कॉन्फ्रेंस में 8 अक्टूबर की गतिविधियों के अंतर्गत सुबह 9:30 से 10:15 बजे तक मुख्य सचिव अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, आयुक्त जनसंपर्क द्वारा अपेक्षाओं के साथ विविध चर्चाएँ की जायेंगी। कॉन्फ्रेंस के छठवें सत्र में संयोजक प्रमुख सचिव-स्कूल शिक्षा, प्रमुख सचिव जनजाति कार्य चर्चा करेंगे। सातवें सत्र में प्रमुख सचिव पीएचई/प्रमुख सचिव जनजाति कलेक्टर्स के बीच रिसर्च और विकास एवं जनजातीय गतिविधियों पर चर्चा करेंगे। आठवें सत्र में नियम और कानून पर चर्चा होगी।  

हिंदुस्तान पावर का सामाजिक उत्तरदायित्व: गाँवों की तरक्की की ओर बढ़ता कदम

अनूपपुर  हिंदुस्तान पावर की सीएसआर पहल – ग्रामीण विकास की दिशा में ठोस कदम :हिंदुस्तान पावर के सीएसआर विभाग द्वारा वर्ष 2024–25 में जैतहरी क्षेत्र एवं इसके आसपास के ग्रामों में कई महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना एवं सामाजिक विकास कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। इन पहलों के माध्यम से न केवल स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, स्वच्छता जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा किया गया, बल्कि ग्रामीण समुदाय के जीवनस्तर में भी स्पष्ट सुधार देखने को मिला है। यह प्रयास क्षेत्रीय विकास की दिशा में कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। मुख्य कार्य एवं उनका सामाजिक प्रभाव: स्वच्छ पेयजल की सुविधा और जल संचयन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल:  हिंदुस्तान पॉवर के अधीनस्थ सीएसआर विभाग द्वारा 15 सार्वजनिक स्थानों पर हैंडपंप स्थापित किए गए, जिनमें ग्राम धुरवासिन में 2, अमगवां में 2, गुवांरी में 2, लहरपुर में 1, मुर्रा टोला में 3, टकहुली में 01, महुदा में 01 और चांदपुर में 03 बोरवेल मय हैंडपम्प लगवाए गये! विभाग की इस पहल से ग्रामीणचल के सैकड़ों परिवारों को सीधे स्वच्छ जल की सुविधा मिल सकी हैं।  सार्वजनिक स्थानों पर शीतल पेयजल हेतु 15 वाटर कूलर की स्थापना: हिंदुस्तान पावर के सीएसआर विभाग द्वारा स्वच्छ एवं शीतल पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु 15 सार्वजनिक स्थानों पर वाटर कूलर स्थापित किए गए हैं। यह पहल विशेष रूप से आम नागरिकों, विद्यार्थियों और स्थानीय जनसमुदाय की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है। सार्वजनिक स्थानों में तहसील परिसर, जैतहरी, मुख्य चौक, मिनी चौपाटी, वार्ड क्र 07, प्राथमिक पाठशाला, अमगँवा, मॉडल स्कूल जैतहरी, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विधालय, अमंगवा, कन्या शासकीय उच्चतर माध्यमिक विधालय, जैतहरी, शासकीय कन्या हाई स्कूल, चांदपुर, शासकीय कन्या हाई स्कूल, क्योटर, शासकीय कन्या परिसर, जैतहरी, शासकीय कन्या हाई स्कूल, धनगवा पूर्व, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विधालय, चोलना, माध्यमिक विधालय, टकहौली और ग्राम मुर्रा इत्यादि ग्रामो में वाटर कूलर स्थापित किये गये! इस पहल से इन क्षेत्रों में दैनिक आवागमन करने वाले नागरिकों और विद्यार्थियों को शुद्ध व शीतल पेयजल की सुगमता से उपलब्धता सुनिश्चित हो सकी है, जिससे आमजन को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ है। जलसंचयन की दिशा में विभाग द्वारा तालाब गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य भी कराया गया : विभाग द्वारा हाल ही में ग्राम पंचायत लहरपुर के मुर्रा टोला ग्राम के जुनवानी तालाब का गहरीकरण का कार्य किया गया एवं जैतहरी स्थित रानी तालाब का सौंदर्यीकरण कराया गया, इन दोनों परियोजनाओं से हज़ारो स्थानीयजनों का निस्तार संभव हो सका और सामुदायिक स्थल का लाभ मिला। प्रकाश व्यवस्था में सुधार : सार्वजनिक स्थानों पर लगाई गई 40 हाई मास्ट लाइट : विभाग द्वारा हाल ही में कंपनी से लगे स्थानीय क्षेत्रों में लोक स्थानों में 40 हाई मास्ट लाइट लगाई गईं हैं, जिससे रात्रिकालीन ग्रामीणजन को सुरक्षित और सुविधाजनक प्रकाश का लाभ मिला। इन चिन्हित स्थानों में ग्राम लहरपुर में 06 सार्वजनिक स्थलों पर लाइटों की व्यवस्था की गयी तो ग्राम अमंगवा में 05, ग्राम धुर्वासिन में 04, ग्राम जैतहरी, महुदा, चांदपुर 03-03, पढोर एवं धनगँवा में 02-02, ग्राम छुलाहा, नगदा, खिरना टोला, बेलिया, चोलना, पचौहा, कुकुरगोड़ा, शिवनी, पड़रिया, बलबहरा, टकहौली में 01-01 लाइट लगाई गयीं! राठौर चौक, जैतहरी से ग्राम मुर्रा टोला, लहरपुर तक सुगम आवागमन हेतु लगाई गई 40 स्ट्रीट लाइट : हिंदुस्तान पावर के सीएसआर विभाग द्वारा स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए राठौर चौक, जैतहरी से ग्राम मुर्रा तक के मार्ग पर कुल 40 स्ट्रीट लाइट्स स्थापित की गई हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य रात्रिकालीन आवागमन को सुरक्षित और सुगम बनाना है। पहले जहाँ इस मार्ग पर अंधेरा होने के कारण दुर्घटना और असुरक्षा की संभावनाएँ बनी रहती थीं, अब वहां उजाले के साथ एक सुरक्षित वातावरण निर्मित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में 2.5 किमी सड़क निर्माण से सुगम आवागमन : हिंदुस्तान पावर के सीएसआर विभाग द्वारा ग्रामीण बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विभाग के माध्यम से कुल 2.5 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण एवं मरम्मत कार्य संपन्न कराया गया, जिनमें ग्राम टकहौली से गुंवारी (1.5 किमी)  और जैतहरी राठौर चौक से मुर्रा टोला, लहरपुर (01 किमी) का सड़क निर्माण कार्य कराया गया! इन परियोनाओ से हज़ारो ग्रामीणजन का शुलभ आवागमन सुनिश्चित हो सका! स्थानीय विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण : 10 शासकीय विद्यालयों का जीर्णोद्धार : कंपनी के सी एस आर विभाग द्वारा 10 शासकीय विद्यालयों का आवश्यकता अनुसार जीर्णोद्धार कराया गया, जिनमें शासकीय प्राथमिक विधालय, मुर्रा टोला, लहरपुर, शासकीय और माध्यमिक विधालय, लहरपुर, शासकीय मॉडल स्कूल, लहरपुर, शासकीय प्राथमिक विधालय, गुढ़ान टोला, लहरपुर, शासकीय माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विधालय, अमगँवा, शासकीय प्राथमिक विधालय, गुवांरी, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विधालय, चांदपुर, शासकीय प्राथमिक विधालय, क्योटार, शासकीय माध्यमिक विधालय, मोहरी, शासकीय प्राथमिक माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विधालय धुर्वासिन शामिल हैं. स्वच्छता की दिशा में प्रभावी कदम – विद्यालयों में शौचालय निर्माण: कंपनी द्वारा स्थानीय विद्यालयों में शौचालयों का निर्माण कराया गया, इन विद्यालयों में शासकीय विद्यालय अमंगवा, चांदपुर, क्योटर शामिल हैं। इस प्रयास से बच्चों को स्वच्छ एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिला। सांस्कृतिक और सामाजिक स्थल : हिंदुस्तान पावर के सीएसआर विभाग द्वारा परियोजना से सटे ग्रामीण अंचलों में सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों के प्रोत्साहन हेतु 5 नए रंगमंचों (स्टेज) का निर्माण कराया गया है। जिनमें, महुदा में 01, चांदपुर में 02, गुवांरी में 01, लहरपुर में 01 शामिल हैं! इन स्थलों पर अब स्थानीय निवासी सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक आयोजनों का आयोजन सुचारु रूप से कर सकेंगे। इस पहल से इन ग्रामों में सामुदायिक सहभागिता, स्थानीय परंपराओं के संरक्षण, तथा सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा मिला है। यह कार्य न केवल एक बुनियादी सुविधा प्रदान करता है, बल्कि ग्रामीण समाज में सामूहिकता और सामाजिक संवाद को भी सशक्त करता है। हिंदुस्तान पावर के अधीनस्थ सीएसआर विभाग द्वारा समय-समय पर जनकल्याण एवं सामुदायिक विकास को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बुनियादी संरचनाओं का निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया जाता रहा है। चाहे वह स्वच्छ जल की उपलब्धता हो, शिक्षा संस्थानों का उन्नयन, सुरक्षित सड़क और प्रकाश व्यवस्था या सांस्कृतिक मंचों का निर्माण – कंपनी का दृष्टिकोण सदैव समग्र और दूरदर्शी रहा है। इन सभी प्रयासों को लेकर ग्राम सरपंचों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों द्वारा निरंतर प्रशंसा की जाती रही है। यह सहभागिता न केवल कार्यों की प्रामाणिकता को दर्शाती … Read more

मध्यप्रदेश: पूर्वोत्तर निवेशकों के लिए नई संभावनाओं की भूमि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संकल्पबद्धता मध्यप्रदेश को देश के हर राज्य के निवेशक के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और अनंत अवसरों का केंद्र बना रही है। मध्यप्रदेश में निवेशकों को अब व्यापार के अवसर के साथ ही स्थायी विकास, रोजगार सृजन और तकनीकी उन्नति का भी भरोसा मिलता है। मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा और बाजार तक आसान पहुंच इसे निवेशकों के लिए एक अनूठा केंद्र बनाती है। मध्यप्रदेश ने उद्योग-अनुकूल नीतियां और क्लस्टर आधारित विकास मॉडल तैयार किए हैं, जिससे निवेशक अपनी नए उद्योग की योजना को तेजी से क्रियान्वित कर सकते हैं। राज्य के एग्रो और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेशकों को कृषि उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमताओं का लाभ मिलता है। टेक्सटाइल्स और अपैरल सेक्टर राज्य की परंपरागत और आधुनिक क्षमता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिससे निर्यात और रोजगार दोनों में वृद्धि संभव होती है। फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में मध्यप्रदेश की ताकत निवेशकों को कच्चे माल, अनुसंधान एवं विकास और उत्पादन के अवसर प्रदान करती है। सीमेंट, मिनरल्स और इंजीनियरिंग, पेट्रोकेमिकल्स और केमिकल्स, टूरिज्म और वेलनेस, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी इक्विपमेंट तथा प्लास्टिक्स और पॉलिमर्स जैसे सेक्टर राज्य को निवेश के लिए बहुआयामी विकल्प प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से इन सेक्टरों में निवेश केवल व्यवसाय का निर्णय नहीं बल्कि आर्थिक विकास और स्थायी अवसरों का रास्ता बन रहा है। मध्यप्रदेश पूर्वोत्तर के उद्योगपतियों के लिए निवेश का आदर्श स्थल है। असम और अन्य राज्यों में फैले फार्मा हब, सीमेंट यूनिट्स, टी-रिसर्च और प्लांटेशन, लॉजिस्टिक केंद्र और पेट्रोकेमिकल्स जैसी सुविधाओं के साथ मध्यप्रदेश निवेशकों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक और भरोसेमंद वातावरण प्रदान करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दृष्टिकोण भी है कि राज्य में निवेश करना न केवल लाभकारी हो साथ ही यह औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई पर ले जाए। राज्य बड़े उद्योगों के साथ-साथ एमएसएमई सेक्टर को भी समान अवसर देता है। वन-स्टॉप निवेश सुविधा, क्लस्टर आधारित विकास और उद्योग-अनुकूल नीतियां सुनिश्चित करती हैं कि निवेशक यहां तेजी से अपने व्यवसाय को बढ़ा सकें और नए साझेदारी के अवसर हासिल कर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 5 अक्टूबर को असम में निवेशकों से करेंगे वन टू वन चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव 5 अक्टूबर को असम के गुवाहटी में पूर्वोत्तर राज्यों के निवेशकों सहित भूटान के प्रतिनिधियों से वन टू वन चर्चा करेंगे। सेशन को Royal Bhutanese Consulate के कांसुल जनरल  Jigme Thinlye Namgyal भी सेशन को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य के निवेश के प्रमुख सेक्टर और उद्योग-अनुकूल नीतियों की जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संकल्पबद्धता और राज्य की मजबूत नीतियां निवेशकों को भरोसा देती हैं कि उनके व्यवसाय के लिए प्रदेश में हर तरह के संसाधन और अवसर उपलब्ध हैं। यह अवसर पूर्वोत्तर और मध्यप्रदेश के उद्योगों के लिए साझी संभावनाओं का नया मार्ग खोलेगा।  

वाहन बिक्री में इंदौर नंबर वन, नवरात्रि के दौरान 9,344 गाड़ियों की हुई रिकॉर्डतोड़ खरीदारी

 इंदौर  नवरात्र के नौ दिनों में वाहन बाजार ने नई गति पकड़ी। प्रदेश भर में जहां कुल 67,507 वाहन बिके, वहीं अकेले इंदौर में 9,344 वाहनों की बिक्री दर्ज हुई। यह आंकड़ा प्रदेश की कुल बिक्री का करीब 14 प्रतिशत है, जो बताता है कि इंदौर वाहन खरीददारों का सबसे बड़ा केंद्र रहा। प्रदेश में बिके वाहनों का हर सातवां वाहन इंदौर में बिका। नौ दिनों में इंदौर में बिक गए 9344 वाहन नवरात्र के पहले दिन ही जीएसटी दरों में कटौती ने खरीददारों को बड़ी बचत दी। इसलिए नवरात्र में वाहनों की बिक्री खूब हुई। वाहन बिक्री में दोपहिया का दबदबा सबसे ज्यादा रहा। प्रदेश में 50,894 दोपहिया वाहन बिके, जिनमें से 6,025 इंदौर में खरीदे गए। इसी तरह प्रदेश में 12,097 कारों की बिक्री हुई, जिनमें से 2,562 कारें इंदौरवासियों ने खरीदीं। नवरात्र में ईवी वाहनों का क्रेज भी इस बार साफ दिखाई दिया। नवरात्र के दौरान पूरे प्रदेश में 6,806 इलेक्ट्रिक वाहन बिके, जबकि अकेले इंदौर में 1,023 ईवी की बिक्री हुई। इंदौर में ऑटोमोबाइल सेक्टर में उल्लास छाया रहा वाहन विक्रेताओं का कहना है कि नवरात्र के पहले दिन यानी 21 सितंबर से जीएसटी दरों में मिली छूट ने ग्राहकों की खरीदारी को और बढ़ावा दिया। शो रूम पर सुबह से रात तक ग्राहकों की भीड़ लगी रही और बुकिंग में रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिला। दशहरा पर 700 कार बिकने का अनुमान नवरात्र के बाद दशहरा पर इंदौर में ऑटोमोबाइल सेक्टर में उल्लास छाया रहा। सुबह से लेकर देर रात तक शुभ मुहूर्त वाहनों की खरीदी होती रही। अनुमान के अनुसार दशहरे पर 700 कार और तीन हजार करीब दो पहिया वाहन बिकने का अनुमान है।

आपका राशन-आपका अधिकार’ योजना का सख्ती से क्रियान्वयन हो: खाद्य मंत्री राजपूत

मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम आपका राशन-आपका अधिकार का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें : खाद्य मंत्री  राजपूत भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित पात्र हितग्राहियों की सुविधा, राशन सामग्री के प्रति जागरूक करने तथा राशन वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम "आपका राशन-आपका अधिकार" प्रारंभ किया गया है। उन्होंने योजना का बेहतर तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्य 5.28 करोड़ पात्र हितग्राहियों को उनकी राशन सामग्री की मासिक हकदारी के प्रति जागरूक करना है। अन्त्योदय परिवार को 35 किलो प्रति परिवार एवं प्राथमिकता श्रेणी के परिवार को 5 किलो प्रति सदस्य खाद्यान्न निःशुल्क के साथ 1 किलोग्राम नमक 1 रूपये प्रति किलो की दर से और अन्त्योदय परिवारों को 1 किलोग्राम शक्कर 20 रूपये प्रति किलो की दर से वितरण किया जा रहा है। कार्यक्रम का क्रियान्वयन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित 130 लाख परिवारों के एक सदस्य का मोबाईल नंबर डाटाबेस में दर्ज है। इन परिवारों को प्रतिमाह विकासखण्ड स्तरीय 308 प्रदाय केंद्र से मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत 100 वाहनों से उचित मूल्य दुकानों को खाद्यान्न डिस्पेच होगा, उसी समय संबंधित उचित मूल्य दुकानों से पंजीबद्ध उपभोक्ताओं को राशन निकलने का सिस्टम जनरेटेड मेसेज रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर जाएगा। विकासखण्ड स्तरीय प्रदाय केंद्र से उचित मूल्य दुकान पर जैसे ही खाद्यान्न प्राप्त होगा एवं उचित मूल्य दुकान के विक्रेता द्वारा पीओएस मशीन में राशन प्राप्ति की प्रविष्टि की जाएगी, उसी समय पंजीबद्ध पात्र परिवारों को उचित मूल्य दुकान पर राशन पहुंचने का सिस्टम जनरेटेड मेसेज मोबाइल नंबर पर जाएगा। उचित मूल्य दुकान पर लगाई गई पीओएस मशीन में पात्र परिवारों को बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद राशन का वितरण किया जाता है। पात्र परिवार द्वारा पीओएस से राशन प्राप्त होते ही उपभोक्ता को दिए गए राशन की मात्रा संबंधी सिस्टम जनरेटेड संदेश उपभोक्ताओं के मोबाइल नम्बर पर जाएगा। प्रत्येक उचित मूल्य दुकान से वर्ष भर में वितरित किये गये खाद्यान्न की जानकारी जनसमुदाय को देने के लिए वर्ष में दो बार 26 जनवरी एवं 02 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में विस्तृत विवरण पढ़ा जाएगा। उपभोक्ताओं में "आपका राशन-आपका अधिकार" संबंधी जागरुकता लाने के लिये समय-समय पर चरणबद्ध रूप से उपभोक्ता जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जायेगा। कार्यक्रम से लाभ राशन सामग्री प्रदाय केन्द्र से उचित मूल्य दुकान तक पहुंचने पर उपभोक्ताओं द्वारा निगरानी रखी जा सकेगी, जिससे परिवहन के दौरान सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। उपभोक्ताओं को उचित मूल्य दुकान पर सामग्री प्राप्त होने की सूचना मिलने से समय पर राशन सामग्री का वितरण किया जा सकेगा। उपभोक्ताओं को प्राप्त सामग्री की जानकारी सिस्टम से प्राप्त होने पर विक्रेता द्वारा दी गई सामग्री से मिलान किया जा सकेगा। इससे निर्धारित मात्रा से कम सामग्री देने पर रोक लगेगी। गाँव में पात्र परिवारों की सूची का वाचन करने से मृत तथा स्थाई रूप से प्रवासी हितग्राहियों को विलोपन किया जा सकेगा। इससे पात्र प्रतीक्षारत हितग्राहियों को जोड़ा जा सकेगा। ग्राम सभा में पात्र परिवारों को राशन वितरण की जानकारी देने से वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जनभागीदारी बढ़ेगी। मॉनीटरिंग ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय स्तर पर इसका क्रियान्वयन ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय एवं उचित मूल्य दुकान विक्रेता के द्वारा किया जाएगा। जनपद स्तर पर निगरानी SDM एवं ASO/JSO द्वारा की जाएगी। जिला स्तर पर निगरानी कलेक्टर एवं DSC/DSO द्वारा की जाएगी। राज्य स्तर पर संचालनालय खाद्य के कन्ट्रोल रूम से निगरानी की जाएगी।  

गुवाहाटी में निवेश बढ़ाने की तैयारी, सीएम मोहन यादव उद्योगपतियों से करेंगे मुलाकात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेश बढ़ाने के लिए अब उत्तर–पूर्व भारत की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। वे 5 अक्टूबर को गुवाहाटी में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज में उत्तर–पूर्व के उद्योगपतियों और निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे। इस सत्र में फार्मास्यूटिकल, चाय, सीमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी और खाद्य प्रसंस्करण सहित कई क्षेत्रों के उद्योगपति भाग लेंगे। गुवाहाटी फार्मा उद्योग का प्रमुख केंद्र है, जहां सन फार्मा, अल्केम और अजंता जैसी कंपनियां सक्रिय हैं। इसके अलावा सीमेंट, पेट्रोकेमिकल्स, चाय उद्योग, पर्यटन, वेलनेस, रिन्यूएबल एनर्जी और कृषि–प्रसंस्करण के क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। डिब्रूगढ़ में ऑयल इंडिया का मुख्यालय और बीपीसीएल के बड़े प्रोजेक्ट हैं, तिनसुकिया चाय बागानों और लॉजिस्टिक्स का केंद्र है, जोरहाट चाय अनुसंधान का हब है, जबकि शिवसागर और नाज़िरा में ONGC की संपत्तियां हैं। नामरूप में असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड भी सक्रिय है। मध्य प्रदेश देगा बेहतर निवेश माहौल मध्यप्रदेश की निवेशक हितैषी नीतियां, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर कनेक्टिविटी इन क्षेत्रों के उद्योगपतियों को आकर्षित करने में सहायक होंगी। राज्य सरकार का मानना है कि यह साझेदारी निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलेगी। गुवाहाटी के अलावा डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, जोरहाट, शिवसागर और नामरूप से प्रतिनिधि इस सत्र में शामिल होंगे। साथ ही शिलांग, अगरतला, आइजोल, इंफाल, कोहिमा और दीमापुर जैसे राज्यों से भी उद्योगपति भाग लेंगे। नई संभावनाओं की राह इस संवाद के जरिए मध्यप्रदेश और उत्तर–पूर्व दोनों क्षेत्रों के बीच भरोसे और साझेदारी की नई नींव रखी जाएगी। फार्मा, सीमेंट, पेट्रोकेमिकल्स, पर्यटन और कृषि–प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग से नई संभावनाएं और रोजगार के अवसर सामने आएंगे। गुवाहाटी का यह इंटरैक्टिव सेशन 5 अक्टूबर को रेडिसन ब्लू होटल में होगा, जिसमें विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के प्रमुख निर्णयकर्ता और निवेशक मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री की यह पहल मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निवेश का भरोसेमंद और प्रगतिशील गंतव्य बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी। 

भोपाल में स्मार्ट मीटर विरोध तेज, 200 यूनिट मुफ्त बिजली समेत कई मांगों को लेकर होगा प्रदर्शन

भोपाल स्मार्ट मीटर के विरोध में 6 अक्टूबर को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन होगा। मध्यप्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन (एमईसीए) के बैनरतले प्रदेशभर से उपभोक्ता डॉ. अंबेडकर पार्क में जुटेंगे। वे 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने, बिजली के रेट कम करने जैसी 11 मांग भी सरकार के सामने रखेंगे। स्मार्ट मीटर के लगातार विरोध के बीच मध्य प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर को अनिवार्यता का नियम तीन साल आगे बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक के लिए बढ़ा दिया है। इस एक फैसले ने स्मार्ट मीटर अभियान की रफ्तार को फिलहाल के लिए रोक दिया है। दरअसल पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्काम्स) ने आयोग से स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता की अवधि बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। कंपनियों का तर्क था कि स्मार्ट मीटर मात्र बिजली खपत मापने का एक यंत्र नहीं है, बल्कि एक वृहद विद्युत प्रणाली है। एसोसिएशन की प्रदेश संयोजक रचना अग्रवाल और लोकेश शर्मा ने बताया, मध्यप्रदेश सहित देशभर में बिजली उपभोक्ताओं द्वारा बिजली के प्री-पेड स्मार्ट मीटर का विरोध किया जा रहा है। ये विरोध कोई औपचारिकता या कोई निहित स्वार्थ पर आधारित राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि हमारी दैनिक आय और जीवन मरण के प्रश्न से जुड़ा है। हाल ही में इसके दुष्परिणाम भी सामने आए हैं। बैठक में मुदित भटनागर, सतीश ओझा, आरती शर्मा आदि पदाधिकारी भी मौजूद थे। पदाधिकारी बोले-प्रदेश में स्मार्ट मीटर की स्थिति ठीक नहीं स्मार्ट मीटर से अत्यधिक बढ़े हुए बिजली बिलों की समस्या मध्यप्रदेश के सभी जिलों में है। भोपाल में ही उपभोक्ताओं ने बताया कि उनका बिल हर महीने भरने के बावजूद एक उपभोक्ता का 10 हजार, दूसरे का 20 हजार, तीसरे का 29 हजार रुपए आया है। ग्वालियर में उपभोक्ता जिसका एक कमरे का घर है, के बिल 5 हजार रुपए तक आ रहे हैं। ग्वालियर के 3 उपभोक्ताओं ने बताया कि महीने में दो बार बिल आ गया है। दोनों 6-6 हजार का है। गुना, सीहोर, विदिशा, सतना, इंदौर, देवास, दमोह, जबलपुर आदि जिलों में भी आम उपभोक्ता जिसके बिजली बिल 700-800 आते थे, वे हजारों में आ रहे हैं। गुना में एक किसान को 2 लाख से ज्यादा का बिजली बिल दिया गया। जहां-जहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, उन सभी जिलों में उपभोक्ता बिजली बिलों से पीड़ित है। लोग अपने गहने और बर्तन बेचकर बिल भर रहे हैं। इसमें मीटर के साथ नेटवर्किंग, मीटर डेटा मैनेजमेंट, बिलिंग, सर्वर आदि का एकीकरण आवश्यक है। इसके लिए उनके के पास प्रशिक्षित कर्मियों की कमी है। इधर, स्मार्ट मीटर से अनाप-शनाप बिल की वजह से उपभोक्ताओं का विरोध लगातार बना हुआ था। कंपनियों ने आयोग के सामने तो स्वीकार नहीं किया, लेकिन इस याचिका में उन्होंने स्वीकार कर लिया कि सर्वर का एकीकरण नहीं होने और अप्रशिक्षित कर्मियों की वजह से स्मार्ट मीटर की रीडिंग में गलतियां हो रही हैं। अब तीनों कंपनियां पहले तकनीकी कमी दूर करेंगी। इस बीच नए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भर्ती होगी। उसके बाद ही स्मार्ट मीटर लगाने के अभियान में तेजी लाई जाएगी। कंपनी ने दिए हैं ये तर्क     फिलहाल पूरे देश में स्मार्ट मीटर की कमी बनी हुई है।     आरडीएसएस योजना के तहत मीटरिंग प्रोजेक्ट में कई समस्याएं हैं।     टेंडर प्रक्रिया में देरी हो रही है।     अलग-अलग डिस्काम्स की अपनी-अपनी समस्याएं हैं। उपभोक्ताओं को मिलेंगी ये राहत     बिजली कंपनियां शहरी क्षेत्र में नए कनेक्शन के तहत स्मार्ट मीटर न होने पर सामान्य मीटर भी लगा सकेंगी।     ग्रामीण क्षेत्र में नान-स्मार्ट मीटर लगाए जा सकते हैं।     पुराने खराब, जले, रुके हुए मीटर भी अब 31 मार्च 2028 तक बदले जा सकेंगे। फैक्ट फाइल     1.37 करोड़ स्मार्ट मीटर मप्र में लगाए जाने हैं।     38.47 लाख पहले चरण में स्वीकृत।     99.22 लाख दूसरे चरण में स्वीकृत।     12.56 लाख मीटर तीनों डिस्काम ने अब तक लगाए। इसलिए विरोध     स्मार्ट मीटर मोबाइल रीचार्ज की तरह प्री-पेड क्षमता वाले डिवाइस के साथ है। जिसे कंपनी मोबाइल फोन की तरह कभी भी प्री-पेड कर सकती है।     इसकी मानीटरिंग व कमांड भी सेंट्रल सिस्टम के तहत है। इसमें कंपनी के लिए उपभोक्ता की यूनिट्स को भी बदलना असंभव नहीं है।     मीटर टाइम आफ डे (TOD) का आकलन करने की क्षमता रखता है। दिन-रात का अलग-अलग रेट है।     मीटर में कोई खराबी आ जाने की स्थिति में मीटर को बदलने पर फिर से यह रकम चुकानी होगी। यह जबरदस्त बोझ है, जो कि आम उपभोक्ता के ऊपर डाला जा रहा है।     स्मार्ट मीटर का बिल नहीं चुका पाने की स्थिति में बिजली तुरंत काट दी जा रही है। जुड़वाने के नाम पर 350 रुपए उपभोक्ता से लिए जा रहे हैं, जबकि हमारी सिक्योरिटी राशि बिजली विभाग के पास पहले से ही जमा है।     बिजली बिल की हार्ड कॉपी नहीं दी जा रही है। जिससे अशिक्षित और तकनीकी रूप से अक्षम उपभोक्ताओं के लिए समस्या पैदा हो गई है।     हर उपभोक्ता के पास स्मार्ट फोन नहीं है। बिजली का बिल भरने के लिए ही लोगों को फिर मोबाइल खरीदना होगा।     बिजली कंपनी से हमारा अनुबंध पोस्टपेड मीटर के लिए है, न कि प्री-पेड मीटर के लिए। फिर इस प्रीपेड क्षमता वाले मीटर को क्यों लगाया गया है?

दिल्ली से हरी झंडी नहीं, MP में नियुक्ति प्रक्रिया ठप, बिहार चुनाव का असर

भोपाल  मध्य प्रदेश BJP की राज्य कार्यसमिति, 40 स्वतंत्र बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्तियां अब बिहार विधानसभा चुनावों के बाद ही होंगी। पार्टी सूत्रों ने बुधवार को बताया कि संगठन का पूरा ध्यान अब बिहार के महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले पर है। इस कारण सभी नियुक्तियों को टाल दिया गया है। पार्टी के कई बड़े नेता, जैसे शहरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व प्रदेश BJP अध्यक्ष VD शर्मा, BJP के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया और युवा मामलों के मंत्री विश्वास सारंग, बिहार में चुनाव ड्यूटी पर हैं। वे अभी वहीं तैनात हैं। 28 जिला कार्यसमितियों का ऐलान अभी बाकी एक वरिष्ठ प्रदेश BJP पदाधिकारी ने हमारे सहयोगी अखबार टीओआई को बताया, 'अब तक पार्टी ने 35 जिला कार्यसमितियों के सदस्यों के नाम घोषित किए हैं। 28 और जिला कार्यसमितियों की घोषणा बाकी है। बाकी जिला कार्यसमितियों की घोषणा हो सकती है, लेकिन बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों की घोषणा (बिहार चुनावों के बाद तक) होने की संभावना नहीं है।' उन्होंने आगे कहा, 'राज्य कार्यसमिति के सदस्यों को भी इंतजार करना होगा।' वरिष्ठों की आपत्ति फिर पितृपक्ष से टली नियुक्ति अगस्त के आखिरी हफ्ते से बड़ी राजनीतिक हलचल शुरू हुई थी। तब BJP के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री BL संतोष ने दो दिन के लिए राज्य की राजधानी का दौरा किया था। उसी दौरान स्वतंत्र राज्य निगमों और बोर्डों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के पदों के लिए उम्मीदवारों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, सभी वरिष्ठ नेता नामों के चयन से खुश नहीं थे। इस कारण घोषणा को तब तक के लिए टाल दिया गया जब तक आम सहमति नहीं बन जाती। इस बीच, हिंदू श्राद्ध के 15 दिन शुरू होने से भी सूची की घोषणा में और देरी हुई। मंत्रिमंडल विस्तार पर भी ब्रेक वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली गए थे। उन्होंने पार्टी आलाकमान को राज्य मंत्रिमंडल विस्तार की जरूरत के बारे में बताया था। लेकिन, सूत्रों का दावा है कि उसे भी इंतजार करना होगा। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को भी बिहार चुनाव खत्म होने तक टाल दिया है। प्रदेश BJP प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि BJP एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का पालन करती है। राज्य कार्यसमिति के सदस्यों और निगमों के अध्यक्षों की घोषणा से पहले सभी वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में लिया जाएगा। हमारे कई शीर्ष नेता बिहार चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हैं। सभी नेताओं के साथ चर्चा के बाद नए पदाधिकारियों के नामों की औपचारिक घोषणा की जाएगी। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कड़ी मेहनत करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

सन्नाटा छा गया खंडवा में, 11 बच्चों की अर्थी उठी; PM और राहुल गांधी ने व्यक्त किया दुख

भोपाल मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के पंधाना में हुए दर्दनाक हादसे के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने भी दुख जाहिर किया है। उन्होंनें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतक के परिजनों को दो लाख और घायल कों 50 हजार देने की घोषणा की हैं। वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी शोक व्यक्त किया हैं। PMO की ओर से जारी की गई पोस्ट में लिखा है कि ‘मध्य प्रदेश के खंडवा में हुए एक हादसे में हुई जान-माल की हानि से अत्यंत दुःखी हूं। इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएं प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के साथ हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे। राहुल गांधी ने भी जताया दुख वहीं राहुल गांधी ने भी दिख जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है कि मध्यप्रदेश में प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई दुर्घटनाओं में कई लोगों की मृत्यु, जिनमें अधिकतर बच्चे हैं, अत्यंत हृदयविदारक है। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों और बच्चों के अभिभावकों के साथ हैं। हादसों में घायल लोगों की कुशलता और जल्द से जल्द स्वस्थ होने की आशा करता हूं। CM ने भी किया मुआवजे का ऐलान वहीं आपको बता दें कि सीएम मोहन यादव ने भी शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा भी की हैं। खंडवा में दर्दनाक हादसे ने नम करदीं सभी की आंखें मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में गुरुवार की खुशियों और उत्साह से भरी शोभायात्रा अब पाडलफाटा गांव के लिए असहनीय दर्द में बदल गई है। कल तक जहां गांव के बच्चे और युवा डीजे पर थिरक रहे थे, आज वही गली रोते-बिलखते परिजनों की चीखों से गूंज रही हैं। शुक्रवार सुबह प्रशासन ने 11 मृतकों के शवों को पंधाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक-एक कर एम्बुलेंस में गांव लाया। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पुलिस का भारी बल गांव में तैनात किया गया है। एडिशनल एसपी महेंद्र तारणेकर और डीएसपी हेडक्वार्टर अनिल सिंह चौहान भी मौके पर मौजूद हैं। सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली कहानी है 8 साल की चंदा की। उसका शव सबसे आखिरी पानी से निकाला गया। उसकी दो छोटी बहनें उसी के पास खेल रही थीं, और उन्हें अभी तक पता नहीं कि उनकी बड़ी बहन अब इस दुनिया में नहीं रही। 

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का असर: MP के किसान क्लस्टर मॉडल से कर रहे तरक्की

प्रदेश में वाटरशेड मिशन का नवाचार मध्यप्रदेश में कलस्टर आधारित सब्जी उत्पादन से संवर रही किसानों की तकदीर 14 जिलों के 3000 किसान उठा रहे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ भोपाल परंपरागत खेती से आय में बढ़ोतरी की राह तलाश रहे किसानों के लिए वाटरशेड विकास घटक के तहत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 14 जिलों के 3000 किसान अब कलस्टर आधारित सब्जी उत्पादन से जुड़कर ₹40 से 50 हजार तक की आय अर्जित कर रहे हैं। यह पहल न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति सशक्त बना रही है, बल्कि गांवों में ग्रामीण आजीविका को भी नई दिशा दे रही है। रतलाम जिले के नौगांवाकला निवासी तेजपाल जैसे किसान जो पहले सिर्फ खाने लायक सब्जी उगाते थे, अब आधा एकड़ में टमाटर और मिर्च की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। यह बदलाव संभव हुआ है वाटरशेड विकास घटक की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के नवाचार से जिसने पहली बार जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ा है। 100 से 150 किसानों का चयन किया गया योजना के तहत प्रत्येक परियोजना में सिंचाई की सुविधा वाले 100 से 150 किसानों का चयन किया गया। इन्हें तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए 835 लीड वेजिटेबल फार्मर चिन्हित किए गए और उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाकर गांवों में सब्जी उत्पादन की वैज्ञानिक पद्धति सिखाई गई। 30 हजार रुपये प्रति किसान दिया जा रहा अनुदान सरकार किसानों को प्रति किसान ₹30 हजार तक का अनुदान भी दे रही है, जिससे वे खाद, दवाइयों और अन्य संसाधनों की खरीद कर सकें। इतना ही नहीं 50 से 60 किसानों के बीच गांव में ही शेड नेट नर्सरी तैयार की जा रही है, जिससे उन्नत किस्म की पौध समय पर उपलब्ध हो सके। इन नर्सरियों के लिए ₹1.30 लाख तक की सहायता भी दी जा रही है। आगामी सीजन में 9000 और किसान होंगे लाभान्वित इस योजना की सफलता को देखते हुए रबी सीजन में 36 जिलों की 85 परियोजनाओं में विस्तार किया जा रहा है, जिससे लगभग 9000 और किसान लाभान्वित होंगे। वर्तमान में धार, रतलाम, खरगोन, बड़वानी, सागर, गुना, इंदौर, श्योपुर सहित 14 जिलों में इसका सफल संचालन हो रहा है। तकनीक और योजना पर आधारित खेती से समृद्धि की ओर बढ़ रहे किसान संचालक वाटरशेड  अवि प्रसाद के अनुसार यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार की इस पहल से साफ है कि अब किसान सिर्फ मौसम पर नहीं बल्कि तकनीक और योजना पर आधारित खेती से समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं।