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वन विहार में वाहनों की एंट्री बंद, टूरिस्ट के लिए शुरू हुई ई-गोल्फ कार्ट सुविधा

भोपाल  मध्यप्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण और सह-अस्तित्व के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2025 तक "राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह" का आयोजन वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में वृहद स्तर पर किया जा रहा है। इस वर्ष आयोजन की थीम मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व रखी गई है। वन्यजीव सप्ताह 2025 का शुभारंभ मुख्यमंत्री मोहन यादव और वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर वन विहार की गोल्फ ई-कार्ट का फ्लैग ऑफ किया जाएगा। इसके साथ ही वन विहार को नो-व्हीकल ज़ोन घोषित कर दिया जाएगा, जिसमें अब निजी वाहनों की आवाजाही पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। पर्यटकों को पार्क में घूमने के लिए गोल्फ कार्ट्स और साइकिल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 1 अक्टूबर को होंगे विशेष आयोजन प्रथम दिवस 1 अक्टूबर को चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन प्रातः 10:30 बजे से किया जाएगा, जिसमें विद्यालयीन, महाविद्यालयीन और दिव्यांग विद्यार्थी भाग लेंगे। इसके पश्चात 10:50 बजे से “भारत के वन्यजीव, उनका रहवास और आपसी संचार” विषय पर केंद्रित फोटो प्रदर्शनी और प्रतियोगिता का आयोजन भी होगा। 7 दिवसीय कार्यक्रम में होंगी अनेक गतिविधियां  रन फॉर वाइल्डलाइफ ,बर्ड वॉचिंग,बटरफ्लाई वॉचिंग, वाद-विवाद प्रतियोगिता,युवा संसद,ट्रेजर हंट,फेस पेंटिंग,रंगोली और सृजनात्मक कार्यशालाएं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में प्रेरित करना और उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।  

प्रसाद लेने का दबाव, इंकार पर श्रद्धालुओं से मारपीट; देवास टेकरी में हंगामा, प्रशासन सख्त

देवास  मध्य प्रदेश के देवास जिले की टेकरी पर स्थित विश्व प्रसिद्ध मां चामुंडा के दर्शन को पहुंचे उत्तर प्रदेश के श्रद्धालुओं के साथ अवैध पार्किंग और प्रसादी को लेकर दुकानदारों द्वारा मारपीट का मामला सामने आया है। श्रद्धालुओं के साथ मारपीट व दुर्व्यवहार की यह घटना स्टेशन रोड क्षेत्र में स्थित अवैध पार्किंग और प्रसादी की दुकानों पर हुई। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आरोपी पुरुषों के साथ-साथ उनके साथ आई महिलाओं पर भी हाथ उठाते हुए नजर आ रहे हैं। श्रद्धालुओं के साथ हुई इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने टेकरी क्षेत्र से गुंडा प्रवृत्ति के लोगों को हटाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग कर दी। मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और 5 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करते हुए उनमें से 3 को गिरफ्तार भी कर लिया। उधर नगर निगम ने भी सख्ती दिखाते हुए मारपीट में शामिल दुकानदारों की दुकानों को हटा दिया। बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई। मामले को लेकर पीड़ित श्रद्धालुओं ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ितों ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के रहने वाले हैं और दो अलग-अलग वाहनों से महिलाओं और बच्चों सहित कुल 14 सदस्य आए थे। उन्होंने कहा, 'स्टेशन रोड पर अचानक एक युवक उनकी कार के सामने आ गया, इस दौरान उसे मामूली खरोंच आई, लेकिन इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद जब हमने उन लोगों को समझाने की कोशिश की तो भीड़ ने हम पर हमला कर दिया। इस दौरान मेरी मां सड़क पर पीठ के बल गिर गईं। आगे उन्होंने कहा, मौके पर पहुंची पुलिस ने हमें बचाया। इसके बाद हम सीधे कोतवाली थाने पहुंचे और शिकायत की।' प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आस्था स्थल पर किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी और अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद श्रद्धालुओं और आम जनता ने राहत की सांस ली और उम्मीद जताई कि आगे से ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी। श्रद्धालुओं ने शिकायत में यह बताया एक श्रद्धालु ने शिकायत में कहा कि उनसे पार्किंग के नाम पर 100 रुपए और प्रसादी के लिए अलग से पैसे मांगे गए। उन्होंने ऐसे व्यवहार को देवास की छवि के लिए शर्मनाक बताया। एक अन्य श्रद्धालु बृजेश दुबे ने बताया कि टेकरी गेट पर एक महिला ने उन्हें वाहन पार्क करने के लिए कहा। उन्होंने वहां पार्किंग की और पैसे देकर प्रसादी ली। दर्शन करने के बाद लौटते समय स्थानीय लोगों ने उनसे बदसलूकी और धक्का-मुक्की की। टेकरी क्षेत्र में अवैध वसूली हो रही है, जिस पर प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। कोतवाली थाना प्रभारी श्याम चंद्र शर्मा ने बताया कि स्टेशन रोड स्थित इंडियन बैंक के सामने अवैध पार्किंग और प्रसादी के नाम पर हुए विवाद में यूपी से आए श्रद्धालुओं से कुछ लोगों ने मारपीट की। जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं की कोई गलती नहीं थी। 2 महिलाओं समेत 5 लोगों पर शांतिभंग की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। सीसीटीवी फुटेज के जरिए अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। वीडियो के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान भी की जा रही है। वहीं नगर निगम ने सख्ती दिखाते हुए मारपीट में शामिल दुकानदारों की दुकानें हटवा दी है।

अब MP के नगर निगम में चेक होगा हर कर्मचारी का समय, फेस अटेंडेंस व्यवस्था जल्द लागू

भोपाल इंदौर की तर्ज पर मध्य प्रदेश के सभी नगर निगमों में फेस अटेंडेंस (चेहरे से उपस्थिति) व्यवस्था लागू की जाएगी। इसको लेकर अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग नगर निगमों को पत्र लिखेगा। दरअसल, निगमों में कर्मचारियों की सेवाओं को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि रिकॉर्ड में कर्मचारी सेवारत है लेकिन वे ड्यूटी पर कभी-कभार ही आते हैं। प्रत्येक कर्मचारी की फेस अटेंडेंस व्यवस्था कई कर्मचारी तो निगम के रिकार्ड में होकर मंत्री और अधिकारियों के बंगलों पर सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग यह अनिवार्यता करने जा रहा है कि निगम के अधिकारियों से लेकर प्रत्येक कर्मचारी की फेस अटेंडेंस व्यवस्था की जाए। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल की चोरी रोकने के लिए भी व्यवस्था का डिजिटलाइजेशन किया जाएगा।   नगरीय निकायों में भी लागू कराया बिजली, ईंधन और स्थापना व्यय की बचत के लिए भी कार्ययोजना बनाई जा रही है। बता दें कि नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय में भी फेस अटेंडेंस व्यवस्था लागू है। नगर निगम के बाद नगरीय निकायों में भी इसे लागू कराया जा रहा है। अधिकांश नगर निगमों में फेस अटेंडेंस व्यवस्था लागू की गई है। अब तक 70 हजार कर्मचारी इसके दायरे में लाए जा चुके हैं। इसके अलावा कर्मचारी जहां है उसे अपने मोबाइल से आन ड्यूटी उपस्थित दर्ज करना अनिवार्य है। इंदौर में यह प्रयोग सफल रहा है। इससे फर्जी लोग कम हो जाएंगे और समय पर वेतन मिलेगा। – संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास  

मध्यप्रदेश सरकार का स्पष्टीकरण: ओबीसी आरक्षण पर दाखिल हलफनामे की स्थिति स्पष्ट

भोपाल     राज्य शासन के संज्ञान में यह आया है कि कतिपय शरारती तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर यह कहते हुए कुछ टिप्पणियां/सामग्री वायरल की जा रही है कि वह टिप्पणियां माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत मध्यप्रदेश शासन के ओबीसी आरक्षण से संबंधित प्रकरण के हलफनामे का भाग है।     शासन द्वारा उक्त शरारती सामग्री का गंभीरता से परीक्षण कराया गया है I माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष पिछड़ा वर्ग आरक्षण के प्रचलित प्रकरण में अभिलेख के प्रारंभिक परीक्षण से यह तथ्य सामने आया है कि उल्लेखित सोशल मीडिया की टिप्पणियां एवं कथन पूर्णतः असत्य, मिथ्या एवं भ्रामक है एवं दुष्प्रचार की भावना से किए गए हैं।     यह स्पष्ट किया जाता है कि वायरल की जा रही सामग्री मध्यप्रदेश शासन के हलफनामे में उल्लेखित नहीं है एवं ना ही राज्य की किसी घोषित या स्वीकृत नीति अथवा निर्णय का भाग हैं ।     प्रथम दृष्टया यह ज्ञात हुआ है कि वस्तुतः उल्लेखित सामग्री मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, अध्यक्ष श्री रामजी महाजन द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन (भाग-1) का हिस्सा हैं। उक्त आयोग का गठन दिनांक 17-11-1980 को किया गया था। आयोग द्वारा दिनांक 22-12-1983 को अपना अंतिम प्रतिवेदन तत्कालीन राज्य शासन को प्रेषित किया था।     राज्य शासन ने माननीय उच्चतम न्यायालय में ओबीसी आरक्षण संबंधित प्रकरण में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के विभिन्न प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किए हैं, जो शासन के अभिलेखों में सुरक्षित हैं। इन प्रतिवेदनों में महाजन आयोग की रिपोर्ट के साथ-साथ 1994 से 2011 तक के वार्षिक प्रतिवेदन तथा वर्ष 2022 का राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का प्रतिवेदन भी सम्मिलित है।     महाजन आयोग का उक्त प्रतिवेदन माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष भी अभिलेख का भाग रहा है। अतः माननीय उच्चतम न्यायालय में भी उक्त प्रतिवेदन स्वतः ही न्यायिक अभिलेख का हिस्सा है।     मध्यप्रदेश सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ एवं सामाजिक सद्भावना के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। शासन स्पष्ट करता है कि वायरल की जा रही सामग्री शासन के हलफनामे में उल्लेखित नहीं है एवं ना ही राज्य शासन के किसी स्वीकृत या आधिकारिक नीति या निर्णय का हिस्सा है। यह उल्लेखनीय है कि महाजन रिपोर्ट में 35% आरक्षण की अनुशंसा की गई थी, जबकि राज्य शासन ने 27% आरक्षण लागू किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य शासन का निर्णय महाजन रिपोर्ट पर आधारित नहीं है।     भारतवर्ष में आरक्षण को लेकर विभिन्न विशेषज्ञ समितियों के प्रतिवेदन, समय-समय पर गठित आयोग के रिपोर्ट एवं वार्षिक प्रतिवेदन तथा अन्य आधिकारिक सामग्री जो पूर्व से ही शासकीय अभिलेखों का भाग है एवं विभिन्न प्रकरणों में अभिलेखों का भी भाग है, माननीय न्यायालय के समक्ष हमेशा से प्रस्तुत की जाती रही हैं I     ऐसे एकेडमिक विश्लेषण एवं समय-समय पर गठित विभिन्न विशेषज्ञ समितियों के अत्यंत विस्तृत प्रतिवेदनों एवं रिपोर्ट के किसी एक भाग को, बिना किसी संदर्भ के स्पष्ट किए सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार के रूप में प्रस्तुत किया जाना एक निंदनीय प्रयास है I इसके संबंध में राज्य शासन द्वारा गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।    

अवकाश में भी खुले रहेंगे बिजली बिल भुगतान केन्द्र, जानें समय और जगह

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत 07 अक्टूबर (महर्षि वाल्मीकी जयंती), 21 अक्टूबर (गोवर्धन पूजा), समस्त शनिवार (04, 11, 18 एवं 25 अक्टूबर) तथा समस्त रविवार (05, 12, 19 एवं 26 अक्टूबर)को बिल भुगतान केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की तरह कार्य करते रहेंगे। भोपाल शहर वृत्त के अंतर्गत चारों शहर संभाग यथा पश्चिम, पूर्व, दक्षिण तथा उत्तर संभाग के अंतर्गत सभी जोनल कार्यालय और दानिश नगर, मिसरोद, मण्डीदीप में बिल भुगतान केन्द्र उक्त अवकाश के दिन भी सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे। बिजली उपभोक्ताओं से अपील है कि वे राजधानी के जोनल आफिस में पीओएस (pos) मशीन से कैश के जरिए बिल भुगतान तथा ऑनलाइन भी बिल भुगतान कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कंपनी कार्य क्षेत्र के सभी 16 जिलों में बिजली वितरण केन्द्र/बिल भुगतान केन्द्र अवकाश के दिनों में खुले रहेंगे। इसके लिए सभी मैदानी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया गया है। ऑनलाइन भुगतान करें और पाएं छूट मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्न दाब घरेलू उपभोक्ताओं को ऑनलाइन भुगतान करने पर उनके कुल बकाया बिल पर 0.50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है साथ ही अधिकतम छूट के लिए कोई सीमा बंधन नहीं है। इसी प्रकार उच्च दाब उपभोक्ताओं को प्रति बिल कैशलेस भुगतान पर 100 रूपये से 1000 रुपये तक की छूट दी जा रही है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं से बिजली का बिल ऑनलाइन भुगतान करने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ताओं को एम.पी.ऑनलाईन, कॉमन सर्विस सेन्टर, कंपनी पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल ऐप से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।  

क्षेत्र की समृद्धि में बड़ा योगदान, मोहनपुरा-कुंडालिया सिंचाई परियोजना पर CM का बयान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की समृद्धि के लिए हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए प्रदेश के राजगढ़ जिले की 'मोहनपुरा-कुंडालिया सिंचाई परियोजना' क्षेत्र की समृद्घि और किसानों की खुशहाली का आधार बन रही है। इस अनूठी परियोजना से जहां हर खेत में पानी पहुंच रहा है, वहीं उद्योगों को पानी मिलने और पेयजल की उपलब्धता ने नए निवेश के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। इससे आम-जीवन सुखमय हो रहा है। "प्रेशराइज्ड पाइप नेटवर्क" पर आधारित विश्व की अनूठी परियोजना यह परियोजना "प्रेशराइज्ड पाइप नेटवर्क" प्रणाली पर आधारित विश्व की अनूठी सिंचाई परियोजना है, जो मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की 'पर ड्रॉप, मोर क्रॉप' की अवधारणा को पूरा कर रही है। न केवल भारत के विभिन्न राज्यों से अपितु विदेशों के प्रतिनिधि दल भी आकर इसका अध्ययन कर रहे हैं। परियोजना को जल-संसाधन प्रबंधन के लिए भारत सरकार का प्रतिष्ठित 'सीबीआईपी' पुरस्कार भी मिल चुका है। प्रधानमंत्री की 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' की अवधारणा हुई फलीभूत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 'पर ड्रॉप, मोर क्रॉप' की अवधारणा दी. उनकी इस अवधारणा पर कार्य करते हुए हमारे इंजीनियर्स ने सिंचाई की अति आधुनिक तकनीकी "प्रेशराइज्ड पाइप नेटवर्क" पर काम करना प्रारंभ किया और उसका सुपरिणाम है 'मोहनपुरा कुंडलिया सिंचाई परियोजना'। इस सिंचाई परियोजना के माध्यम से न केवल 80% पानी बांध से किसानों के खेतों तक पहुंचता है, अपितु ऊंचे खेतों पर भी पानी आसानी से पहुंच जाता है. इसमें लगा 'स्काडा' (SCADA) आधारित ऑटोमेशन यह तय करता है कि फसलों की आवश्यकता के अनुसार किस क्षेत्र में कितना पानी पहुंचाना है। यह विश्व की अपनी तरह की अनूठी परियोजना है और आधुनिक युग की आवश्यकता भी, जब पानी की एक-एक बूंद का उपयोग आवश्यक है। नेवज नदी पर मोहनपुरा बांध और कालीसिंध नदी पर कुंडालिया बांध बनाकर शुरू की गई इस परियोजना से भूमिगत पाइप से सीधे खेत तक दबाव के साथ पहुंचाती है और ऊंचाई वाले खेत में भी पानी आसानी से पहुंचता है। इसके सेंसर और ऑटोमेशन से पानी का वितरण नियंत्रित होता है। यह क्रांतिकारी सोच थी, जिसने सूखाग्रस्त राजगढ़ जिले की किस्मत बदल दी। परियोजना के अंतर्गत 26 हजार किमी लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई है, इतनी लंबी प्रेशराइज्ड पाइप लाइन भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में एक मिसाल है। इसे जोड़ने के लिए 20 बड़े पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जो पानी को दबाव के साथ पाइप लाइन में भेजते हैं और पानी ऊंचे-नीचे खेतों तक आसानी से पहुंचता है। हर आउटलैट से लगभग एक से सवा हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है। 'स्काडा' आधारित ऑटोमेशन सिस्टम द्वारा पूरी प्रणाली को कंप्यूटर और सेंसर्स से जोड़ा गया है, जिससे कंट्रोल रूम से तय किया जा सकता है कि किस क्षेत्र को कितना पानी पहुंचाना है। केन्द्रीकृत पंपिंग प्रणाली से हर साल लगभग 69 मिलियन यूनिट बिजली की बचत होती है। इसकी एक और विशेषता यह है कि इसमें 'ला-रा' नैटवर्क का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें लगभग 1.5 लाख सेंसर्स और कंट्रोलर एक साथ जोड़े गए हैं, जो सौर ऊर्जा से चलते हैं। पंपिंग स्टेशर्न में लगे 'वैरिएबल फ्रीकवैन्सी ड्राइव्ज' फसलों की जरूरत और मौसम के अनुसार पानी का दबाव और मात्रा तय करते हैं। यह अत्यधिक आधुनिक सिंचाई प्रणाली आज पूरे विश्व के लिए पानी के इष्टतम उपयोग का अनूठा उदाहरण बन गई है।  

भिंड सहित कई जिलों में कलेक्टरों की छुट्टी: मध्यप्रदेश सरकार ने 24 IAS अफसर किए स्थानांतरित

भोपाल  मध्यप्रदेश में मंगलवार शाम को बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई है। सरकार ने 24 आईएएस (IAS) अफसरों के तबादले करते हुए 14 जिलों के कलेक्टर बदल दिए हैं। जिन जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं उनमें भिंड, पन्ना, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, डिंडौरी, रतलाम, मुरैना, निवाड़ी, सिंगरौली, अलीराजपुर, पांढुर्णा और सिवनी शामिल हैं। अपर कलेक्टर इंदौर और अपर कलेक्टर जबलपुर का भी ट्रांसफर कर दिया गया है। इस बड़े फेरबदल में सिंगरौली, छिंदवाड़ा, रतलाम, मुरैना और डिंडोरी के कलेक्टर हटा दिए गए हैं. सबसे अधिक चर्चा में भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का तबादला रहा, जिन्हें भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा से हुए सार्वजनिक विवाद के बाद हटाया गया है. महत्वपूर्ण नियुक्तियों में, भोपाल नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण को छिंदवाड़ा का नया कलेक्टर बनाया गया है, जबकि श्रम आयुक्त रजनी सिंह अब नरसिंहपुर की कलेक्टर होंगी. गौरव बेनल को सिंगरौली कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह तबादला आगामी प्रशासनिक और राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है. पूरी लिस्ट देखें.. क्र. अधिकारी का नाम, बैच तथा वर्तमान पदस्थापना नवीन पदस्थापना 1. श्री सुरेश कुमार (2010), कलेक्टर, जिला पन्ना वि.क.अ.-सह-आयुक्त, चम्बल संभाग, मुरैना 2. श्री शीलेन्द्र सिंह (2010), कलेक्टर, जिला छिंदवाड़ा अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, नगरीय विकास एवं आवास विभाग 3. श्रीमती नेहा मारव्या सिंह (2011), कलेक्टर, जिला डिण्डोरी संचालक, विमुक्त घुमन्तु एवं अर्धघुमन्तु जनजाति, भोपाल 4. श्री संजीव श्रीवास्तव (2011), कलेक्टर, जिला भिण्ड अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक निर्माण विभाग 5. श्रीमती ऊषा परमार (2011), अपर आयुक्त (राजस्व), भोपाल संभाग, भोपाल कलेक्टर, जिला पन्ना 6. श्री शिवराज सिंह वर्मा (2011), अपर सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग अपर आयुक्त (राजस्व), भोपाल संभाग, भोपाल 7. श्री राजेश बाथम (2012), कलेक्टर, जिला रतलाम अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग 8. श्रीमती रजनी सिंह (2013), वि.क.अ.-सह-श्रम आयुक्त, मध्यप्रदेश, इंदौर कलेक्टर, जिला नरसिंहपुर 9. श्री नीरज कुमार वशिष्ठ (2013), संचालक, विमुक्त घुमन्तु एवं अर्धघुमन्तु जनजाति, भोपाल कलेक्टर, जिला पांढुर्णा 10. श्रीमती शीतला पटले (2014), कलेक्टर, जिला नरसिंहपुर कलेक्टर, जिला सिवनी 11. श्री अंकित अस्थाना (2014), कलेक्टर, जिला मुरैना उप सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग तथा अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश स्टेट इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 12. श्री लोकेश कुमार रामचन्द्र जांगिड (2014), कलेक्टर, निवाड़ी कलेक्टर, जिला मुरैना 13. श्री चन्द्रशेखर शुक्ला (2014), कलेक्टर, जिला सिंगरौली उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग 14. डॉ. अभय अरविन्द बेडेकर (2014), कलेक्टर, जिला आलीराजपुर अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल 15. श्री अजय देव शर्मा (2014), कलेक्टर, जिला पांढुर्णा उप सचिव, राजस्व विभाग तथा अतिरिक्त आयुक्त, भू-संसाधन प्रबंधन, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 16. श्रीमती नीतू माथुर (2014), अपर आयुक्त (राजस्व), रीवा संभाग, रीवा कलेक्टर, जिला आलीराजपुर 17. श्रीमती अंजू पवन भदौरिया (2014), मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला रायसेन कलेक्टर, जिला डिण्डोरी 18. श्रीमती जमुना भिडे (2014), सचिव, जनजातीय प्रकोष्ठ, राजभवन, भोपाल कलेक्टर, जिला निवाड़ी 19. श्रीमती संस्कृति जैन (2015), कलेक्टर, जिला सिवनी आयुक्त, नगर पालिक निगम, भोपाल तथा अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 20. श्रीमती बिदिशा मुखर्जी (2015), अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग 21. श्री किरोड़ी लाल मीना (2016), अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल कलेक्टर, जिला भिण्ड 22. श्री गौरव बैनल (2016), अपर कलेक्टर, जिला इंदौर कलेक्टर, जिला सिंगरौली 23. श्री हरेन्द्र नारायण (2016), आयुक्त, नगर पालिक निगम, भोपाल कलेक्टर, जिला छिंदवाड़ा 24. सुश्री मिशा सिंह (2016), अपर कलेक्टर, जिला जबलपुर कलेक्टर, जिला रतलाम

अब ये करना होगा अनिवार्य! आज से लागू होंगे नए टिकट बुकिंग नियम

भोपाल आम रेल यात्रियों को आरक्षित टिकट आसानी से उपलब्ध कराने और दलालों द्वारा हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। अब 1 अक्टूबर से सामान्य आरक्षण खुलने के पहले 15 मिनट के दौरान केवल आधार-प्रमाणित उपयोगकर्ता ही IRCTC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से आरक्षित टिकट बुक कर पाएंगे। इस व्यवस्था से आम जनता को शुरुआती समय में कन्फर्म टिकट मिलने की सुविधा सुनिश्चित होगी। एजेंटों पर रोक बरकरार रेलवे ने स्पष्ट किया है कि कम्प्यूटरीकृत पीआरएस काउंटरों पर टिकट बुकिंग की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही सामान्य आरक्षण खुलने के पहले 10 मिनट तक अधिकृत एजेंटों पर पहले से लागू रोक भी जारी रहेगी। यानी एजेंट पहले दिन टिकट बुकिंग की प्रक्रिया में शुरुआती समय में शामिल नहीं हो पाएंगे।   आम उपयोगकर्ताओं के हित में यह पहल भोपाल मंडल के पीआरओ नवल अग्रवाल ने बताया कि रेलवे की यह पहल आम उपयोगकर्ताओं के हित में है। इससे टिकट खरीदने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और बिचौलियों या बेईमान पर रोक लगेगी। यात्रियों भी IRCTC आईडी को आधार से प्रमाणित कर लें, ताकि उन्हें इस सुविधा का लाभ आसानी से मिल सके।

मुख्यमंत्री 7-8 अक्टूबर को करेंगे कॉन्फ्रेंस, कलेक्टर-कमिश्नर सहित सभी विभागों के अफसर होंगे शामिल

भोपाल   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 7 और 8 अक्टबूर को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर भोपाल में कलेक्टर-कमिश्नर, एसपी, आईजी-डीआईजी के साथ पहली कॉन्फ्रेंस करेंगे। इस कांफ्रेंस के आठ मुख्य बिंदु तय किए गए हैं। जिसके बार में मंत्रालय के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी जानकारी देंगे। दो दिन की बैठक में तैयार होगा रोडमैप जानकारी के मुताबिक, सीएम डॉ मोहन यादव इस कांफ्रेंस में अपनी प्राथमिकताएं देंगे। जिसमें साल भर का रोडमैप तैयार किया जाएगा और पैमाने पर परफॉर्मेंस मॉनिटर की जाएगी। इस कॉफ्रेंस में नगरीय निकायों के कमिश्नर और जिला पंचायत सीईओ को बुलाया जाएगा। बैठक में सभी के साथ ग्रुप डिस्कशन होगा। वहीं, आईएएस अफसरा और पुलिस विभाग के आला-अफसरों का भी एक सत्र होगा। किस मुद्दे पर कौन से विभाग का अफसर बोलेगा नगरीय प्रशासन विभाग की पीएम आवास योजना, अमृत योजना और स्वच्छ भारत मिशन पर संजय दुबे जानकारी देंगे। गुड गवर्नेंस के राजस्व मामलों का निपटारा और डिजिटलाइजेशन, भूमि अधिग्रहण समेत कई अन्य मुद्दों पर संजय कुमार शुक्ला जानकारी देंगे। क्राउड मैनेजमेंट, रोड सेफ्टी, क्रिमिनल लॉ और एयर एंबुलेंस के मुद्दे पर शिवशेखर शुक्ला जानकारी देंगे। सिकल सेल, पोषण, अस्पताल के जुड़े मुद्दों पर संदीप यादव जानकारी देंगे। वहीं, स्किल डेवलपमेंट, एमएसएमई लोन स्कीम, उद्योगों को जमीन का आवंटन, पीएम गतिशक्ति, स्टार्टअप सहित दूसरे मामलों की जानकारी राघवेंद्र कुमार सिंह देंगे। खाद-बीज, नरवाई प्रबंध, प्राकृतिक खेती, सिंचाई की प्लानिंग, दूध उत्पादन सहित दूसरे मामलों की जानकारी अशोक वर्णवाल देंगे। एडमिशन और ड्रॉप आउट रेट, शिक्षा की गुणवत्ता समेत दूसरे मामलों की जानकारी देने का जिम्मा संजय गोयल पर है। पीएम जनमन, दजगुआ, पीएम आवास व स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), मनरेगा, आजीविका मिशन, पंचायती राज, ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, इको सेंसेटिव जोन समेत कई दूसरे मामलों की जानकारी दीपाली रस्तोगी देंगी। 

हाथियों से होने वाले नुकसान पर लगेगा ब्रेक, गज रक्षक ऐप से होगा रियल टाइम ट्रैकिंग

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों का गढ़ तो है ही, लेकिन पिछले कुछ सालों से ये हाथियों का भी गढ़ बन चुका है. हाथियों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है. हाथियों ने बांधवगढ़ को अपना स्थाई अड्डा बना लिया है. लगभग पूरे शहडोल संभाग में हाथियों की मूवमेंट देखने को मिलती है. साल भर वे धमाचौकड़ी मचाते नजर आते हैं. शहडोल, अनूपपुर, उमरिया सभी जिले हाथियों से प्रभावित हैं. हाथियों के मूवमेंट के दौरान अक्सर ही हाथी-मानव द्वंद की स्थिति बनती है. ऐसे में हाथियों के हर एक मूवमेंट के बारे में जानकारी के लिए अब इनकी निगरानी भी हाईटेक होने जा रही है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इसकी तैयारी भी शुरू हो चुकी है, गज रक्षक अब हाथियों से करेगा रक्षा. इस पहल से हाथी-मानव संघर्ष को रोकने में मदद मिलेगी. क्या है गज रक्षक ऐप? गज रक्षक ऐप, जैसा नाम वैसा काम. हाथियों से रक्षा के लिए ये ऐप तैयार किया गया है. वैसे तो इस ऐप की लॉन्चिंग विश्व बाघ दिवस 29 अगस्त को भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा की गई थी. इस मोबाइल एप्लिकेशन को वन विभाग मध्य प्रदेश, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट और कल्पवैग कंपनी के सहयोग से तैयार किया गया है. बांधवगढ़ में 26 से 29 सितंबर तक इस ऐप की ट्रेनिंग वनकर्मियों को दी जा चुकी है. गज रक्षक ऐप के फायदे गज रक्षक ऐप के फायदों के बारे में बताते हुए बांधवगढ़ के डायरेक्टर अनुपम सहाय ने कहा, "इस ऐप के माध्यम से हाथियों की रियल टाइम लोकेशन की जानकारी लगेगी. उनके मूवमेंट और व्यवहार की जानकारी भी ये ऐप उपलब्ध कराएगा. गांव के नजदीक हाथियों के आते ही इसके माध्यम से समय रहते अलर्ट मिल जाएगा, जिससे हाथी मानव द्वंद को रोकने में सहायता मिलेगी. इससे हाथियों की मॉनिटरिंग आसान होगी." मूवमेंट ट्रैक किया जा सकेगा खेतों में लगी फसल की जानकारी से लेकर हाथी जिन जगहों पर लगातार मूवमेंट करते हैं. उनके रोजमर्रा के स्थलों और विद्युत लाइन की जानकारी इकट्ठा करके रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी. जिससे हाथी-मानव द्वंद को कम किया जा सकेगा. इसके अलावा हाथियों की करेंट लोकेशन मिलते ही स्थानीय जनसमुदाय को व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना देकर उन्हें सतर्क किया जा सकेगा. हाथियों के लिए हाईटेक ऐप गज रक्षक एक हाईटेक ऐप है, जिससे हाथियों की निगरानी डिजिटल तरीके से की जा सकेगी. इसमें एसएमएस अलर्ट, वॉइस कॉल, पुश नोटिफिकेशन, सायरन, और ऑफलाइन मोड जैसी सुविधाएं भी दी गई है, जो हाथियों की निगरानी में बहुत कारगर साबित हो सकती हैं. ऐप से हाथियों पर निगरानी रखने वाला व्यक्ति उनकी यथास्थिति के बारे में जानकारी साझा करेगा. साथ ही हाथियों की फोटो खींचकर और करंट लोकेशन ऐप पर अपलोड करेगा. साथ ही बताएगा कि हाथी अकेला विचरण कर रहा है या फिर झुंड में है. यह जानकारी हाथियों की करंट लोकेशन से 10 किलोमीटर के दायरे में ऐप यूजर्स को मिल जाएगी. इससे हाथी-मानव द्वंद को कम करने और हाथियों के संरक्षण में सहयोग मिलेगा. बांधवगढ़ सहित अन्य जिलों के वन स्टाफ को ट्रेनिंग गज रक्षक ऐप को लेकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ट्रेनिंग जारी है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास के कई जिलों के कर्मियों को ट्रेंड किया जा रहा है. खासकर उन इलाके के वनकर्मियों को जहां हाथियों का मूवमेंट अधिक रहता है. जैसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, संजय दुबरी टाइगर रिजर्व, नॉर्थ शहडोल, साउथ शहडोल, अनुपपुर, सीधी, सिंगरौली, सतना, उमरिया, डिंडोरी के वन कर्मचारियों को इस ऐप की ट्रेनिंग दी जाएगी. बांधवगढ़ में कितने हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वर्तमान में काफी संख्या में हाथी है. वैसे तो यहां पहले भी हाथी आते थे, लेकिन अब हाथियों ने इसे अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है. साल 2018 में 40 हाथियों का एक झुंड आया था फिर वो वापस नहीं गया. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में स्थायी रूप से रहने लगा है. इन हाथियों की संख्या अब लगभग 60 से 65 तक पहुंच गई है, जो लगातार बढ़ती ही जा रही है. फसलों के समय में ये हाथी ग्रामीण इलाकों में भी कभी-कभी मूव करते हैं. हाथियों को बांधवगढ़ क्यों पसंद आया एक्सपर्ट बताते हैं "हाथी या फिर कोई भी वन्य प्राणी हो, वह वहीं रुकेगा जहां उसे पीने के लिए पर्याप्त पानी, खाने को भोजन मिले और रहने को सुरक्षित आवास मिले. जहां ये सुविधाएं मौजूद होती है, जंगली जानवर अपना बसेरा बना लेते हैं. हाथियों के लिए ये तीनों ही चीजें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आसानी से मिल रही है. इसलिए हाथियों के लिए यह जगह फेवरेट हो गई है. इसके अलावा वे वहां सुरक्षित भी महसूस करते हैं. " हाथियों का गढ़ बना शहडोल शहडोल संभाग जो आदिवासी बाहुल्य है. इसमें शहडोल, अनूपपुर, उमरिया सहित तीन जिले आते हैं. यहां जंगल बहुत घना है और प्राकृतिक संपदा से भरपूर है. यही वजह है कि इस इलाके में तरह-तरह के वन्य प्राणी और दुर्लभ पक्षी रहते हैं. फिलहाल ये तीनों जिले हाथियों के गढ़ बन चुके हैं. यहां साल भर हाथियों का मूवमेंट रहता है. ये जिले छत्तीसगढ़ राज्य से सटे हुए हैं. इस कारण वहां से भी हाथियों की मूवमेंट होती रहती है.