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एक बगिया मां के नाम’: पर्यावरण सुधार और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की पहल

पर्यावरण और महिलाओं का विकास साथ-साथ, 'एक बगिया मां के नाम' योजना का असर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक बगिया माँ के नाम परियोजना मध्यप्रदेश में पर्यावरण सुधार के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बन रही है। राज्य शासन ने महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में 'एक बगिया मां के नाम' परियोजना प्रारंभ की है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अपनी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। माँ की बगिया विकसित करने के प्रति समूह की महिलाओं में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। अब तक 10 हजार 162 महिलाओं को 'माँ की बगिया' स्वीकृति की चुकी है। परियोजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार द्वारा 1000 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है। इसके अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को पौधों की सुरक्षा से लेकर कटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्‌ढे खोदने के साथ ही सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि भी उपलब्ध कराई जा रही है। फलोद्यान की बगिया विकसित करने में वर्तमान में सिंगरौली जिला सबसे आगे है। खंडवा जिला प्रदेश में दूसरे नंबर है। 40 हजार से अधिक पंजीयन योनजा का लाभ लेने के लिए स्व-सहायता समूह की महिलाओं का चयन एक बगिया मां के नाम ऐप से किया जाता है। ऐप का निर्माण मनरेगा परिषद द्वारा कराया गया है। परियोजना के अंतर्गत प्रदेश समूह की 31 हजार 300 महिलाओं को लाभांवित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐप पर 40 हजार 406 महिलाओं ने 'एक बगिया मां के नाम' पर पंजीयन कराया है, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। 9 हजार 662 ग्राम पंचायतें हैं शामिल एक बगिया मां के नाम परियोजना में प्रदेश के सभी जिलों के अंतर्गत आने वाले 313 ब्लॉक की 9 हजार 662 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 10 हजार 162 गांवों में सर्वे कर 40 हजार 406 महिलाओं का पंजीयन किया गया है। परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक से न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन किया गया है। वर्ष में दो बार महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।  ड्रोन से निगरानी एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत किए जा रहे पौधरोपण कार्य की मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक डेव्हलेपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा ड्रोन के माध्यम से मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे चयनित जमीन, गड्‌ढे सहित पौधों की यथास्थिति के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त हो सकेगी। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग प्रदेश में पहली बार पौधरोपण के लिए सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से पौधरोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति से किया गया है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहाँ पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। 30 लाख फलदार पौधे लगाए जाएंगे “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना अंतर्गत प्रदेश की 31 हजार 300 स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का आधार बनेंगे। डैशबोर्ड से पर्यवेक्षण पौधरोपण का कार्य सही ढंग से हो रहा है या नहीं, इसके पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड बनाया गया है। इसके माध्यम से प्रतिदिन जिलों में हो रहे कार्यों की निगरानी की जा रही है। प्रदर्शन के आधार पर प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत व 25 ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत किया जाएगा। न्यूनतम 0.5, अधिकतम 1 एकड़ जमीन होना अनिवार्य एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। 

क्रांतिकारी तकनीक! IIT इंदौर ने बनाया ऐसा उपकरण जो बिना सूरज और बैटरी के बनाएगा बिजली

 इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी (आईआईटी) अपनी तकनीकी क्षमता और नई खोजों के चलते देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में प्रसिद्ध और चर्चित रहता है। इंदौर आईआईटी की चर्चा एक बार फिर हुई है। इस बार जो खोज यहां की गई है, वो आने वाले समय में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है। यहां के प्रोफेसरों की निगरानी में छात्रों ने ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो सूरज की रोशनी के बिना, किसी भी प्रकार की बैटरी या किसी अन्य मशीन के बिना ही बिजली उत्पादन करने में सक्षम है। बिजली उत्पादन के लिए इस उपकरण को सिर्फ पानी और हवा की आवश्यक्ता होगी। यानी ये सिर्फ इन दो चीजों की सहायता से बिजली पैदा करता है। आईआईटी इंदौर की सस्टेनेबल एनर्जी एंड एन्वायरन्मेंटल मटेरियल्स लैब में तैयार इस उपकरण को खास तरह के मेम्ब्रेन से बनाया गया है। इसमें ग्रैफीन ऑक्साइड और ज़िंक-इमिडाज़ोल नामक पदार्थ का इस्तेमाल हुआ है। जब इस मेम्ब्रेन को पानी में आंशिक रूप से डुबो दिया जाता है तो पानी धीरे-धीरे ऊपर की ओर चढ़ने लगता है और वाष्पित होता है। इसी प्रक्रिया के दौरान मेम्ब्रेन के दोनों सिरों पर पॉजिटिव और नेगेटिव आयन अलग हो जाते हैं और वहां से स्थिर बिजली पैदा होने लगती है। खारे या गंदे पानी से भी बिजली बना देगा इतना ही नहीं, यह उपकरण साफ पानी के साथ-साथ खारे या गंदे पानी में भी लंबे समय तक काम करता रहता है। परीक्षण के दौरान पाया गया कि सिर्फ तीन गुणा दो सेंटीमीटर के एक छोटे से मेम्ब्रेन से 0.75 वोल्ट तक बिजली पैदा की जा सकती है। अगर ऐसे कई मेम्ब्रेन को जोड़ा जाए तो बिजली की मात्रा और बढ़ाई जा सकती है। यही वजह है कि इसे उन जगहों पर बेहद उपयोगी माना जा रहा है, जहां बिजली आसानी से उपलब्ध नहीं होती। जंगलों और खेतों में लगे सेंसर हों, ब्लैकआउट के समय रोशनी की जरूरत हो या फिर दूर-दराज़ के क्लीनिकों में छोटे मेडिकल उपकरणों को चलाना हो, यह तकनीक हर स्थिति में मददगार साबित हो सकती है। जानें इसकी खूबियां इसकी सबसे बड़ी खूबी तो ये है कि, ये हल्का है, आसानी से कहीं भी ले जाने में बेहद आसान है। घर के अंदर या बाहर, दिन और रात हर समय काम करने में भी सक्षम है। आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी के अनुसार, जल वाष्पीकरण जैसी सामान्य प्रक्रिया को ऊर्जा उत्पादन का साधन बनाना समाज के लिए बड़ा योगदान है। उनका मानना है कि यह तकनीक ग्रामीण और वंचित इलाकों में जीवन को आसान बना सकती है और स्वच्छ ऊर्जा का नया रास्ता दिखाती है। शांत तरीके से बिजली बनाएगा उपकरण वहीं इस शोध का नेतृत्व कर रहे प्रोफेसर धीरेंद्र राय का कहना है कि ये ऐसा सेल्फ-चार्जिंग स्रोत है, जो पानी और हवा से चलता है। जब तक वाष्पीकरण जारी रहेगा, ये उपकरण लगातार शांत तरीके से बिजली बनाता रहेगा। उनकी टीम अब इसे और सस्ता और बड़े पैमाने पर बनाने की दिशा में काम करने जा रही है, ताकि इस तकनीक को जल्द से जल्द देश के उन गांवों तक पहुंचाया जा सके जहां अबतक मौजूदा बिजली पहुंचा पाना संभव नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि, भविष्य में इस उपकरण का इस्तेमाल और भी रोचक तरीकों से किया जा सकेगा। भारतीय वैज्ञानिकों का दम शोधकर्ताओं की मानें तो आने वाले समय में ये तकनीक ऊर्जा बनाने वाले स्मार्ट कपड़ों या खुद से चलने वाली दीवारों जैसी नई संभावनाओं के रूप में भी सामने आ सकती है। ये खोज साफ दिखाती है कि, भारतीय वैज्ञानिक अब ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोगों की जिंदगियों में बदलाव लाने का कारण है।

लाड़ली बहना योजना अपडेट: 28वीं किस्त का भुगतान, इस बार कितना मिलेगा और कब?

भोपाल  लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है. इसके तहत हर महीने लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रुपए ट्रांसफर किए जाते हैं. पिछले महीने रक्षाबंधन के अवसर पर तो यह राशि बढ़ाकर 1500 रुपए ट्रांसफर की गई थी. वहीं, अब लाड़ली बहनों को सितंबर में मिलने वाली किस्त का इंतजार है. आइए जानते हैं कब आ सकती है लाड़ली बहना की सितंबर वाली किस्त और अब कब मिलेंगे 1500 रुपए… कब से मिलेंगे 1500 रुपए दरअसल, लाड़ली बहनों को मिलने वाली 1250 रुपए की राशि बहुत जल्द 1500 रुपए होने वाली है. इस बात का ऐलान खुद सीएम मोहन यादव ने किया है. उन्होंने कहा कि दिवाली के दौरान पड़ने वाले भाई दूज से उनकी राशि बढ़ा दी जाएगी. इसके बाद से उनके खाते में हर महीने 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे. सीएम मोहन ने दी जानकारी मध्यप्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो शेयर हुआ है. जिसमें सीएम मोहन ने इस बात की जानकारी दी है कि इस बार दीपावली 18 अक्टूबर को है यानी की एक महीने बाद लाड़ली बहना योजना की किस्त में 250 रूपये की बढ़ोत्तरी कर दी जाएगी. वहीं, कल बुंदलेखंड में एक कार्यक्रम के दौरान भी सीएम मोहन ने कहा था कि भाई दूज पर उन्हें 1500 रुपए दिए जाएंगे. कब आएगी सितंबर वाली किस्त लाड़ली बहनों के खाते में अक्टूबर से तो बढ़कर पैसे आएंगे ही, लेकिन इससे पहले उन्हें सितंबर में आने वाली किस्त का बेसब्री से इंतजार है. अब तक इस योजना की 27 किस्त जारी की जा चुकी है. वहीं, 28वीं किस्त आने वाली है. पिछने महीने  27वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले 7 अगस्त को जारी की गई थी. हालांकि, आमतौर पर हर महीने लाड़ली बहना की किस्त 10 से 15 तारीख के बीच आती है. ऐसे में संभावना है कि इस बार भी लाड़ली बहनों की किस्त इसी टाइम पर जारी हो सकती है. हालांकि अभी इसकी तारीखों को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं है. हम यहां आपको संभावित तिथि के बारे में बताएं हैं.  दिवाली बाद बहनों को मिलेंगे हर माह 1500 रुपए मोहन सरकार ने ऐलान किया है कि दिवाली के बाद भाई दूज से योजना की राशि में 250 रु का इजाफा किया जाएगा । इसके बाद बहनों को हर माह 1250 की जगह 1500 रुपए मिलेंगे। इसके अलावा अगले तीन साल में 2028 तक 3000 रुपए बहनों के खाते में भेजने का लक्ष्य है। वर्तमान में योजना के तहत 1250 रूपये प्रति माह की राशि लाड़ली बहनों को दी जा रही है। अबतक 27 किस्तें बहनों के खाते में भेजी जा चुकी है और अब 28वीं किस्त का इंतजार है। आमतौर पर हर महीने की 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी की जाती है, ऐसे में संभावना है कि इस बार भी इसी टाइम पर पैसे जारी हो सकती है। हालांकि अभी फाइनल तारीख को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है। वर्तमान में लाड़ली बहना योजना में मिलते है हर माह 1250 रू     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से अगस्त 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 27 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 41 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष,     संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

शिक्षकों को मिलेगा सम्मान, राज्यपाल और CM डॉ. यादव करेंगे पुरस्कार वितरण

श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों के लिए खास अवसर, राज्यपाल और CM डॉ. यादव करेंगे सम्मानित प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में होगा गरिमापूर्ण आयोजन भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर भोपाल में होने वाले राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करेंगे। साथ ही कक्षा एक से कक्षा 8 तक के 55 लाख विद्यार्थियों के बैंक खातों में शाला गणवेश की 330 करोड़ रूपये की राशि का अंतरण सिंगल क्लिक के माध्यम से किया जायेगा। समारोह शुक्रवार को प्रात: 10:30 बजे भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार, आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित होगा। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन मंत्री कुवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण श्रीमती कृष्णा गौर भी उपस्थित रहेंगी। स्कूल शिक्षा मंत्री ने दी बधाई स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिये चयनित शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा है कि जिन शिक्षकों का उनके श्रेष्ठ कार्यों की वजह से सम्मान हो रहा है, उनसे प्रदेश के अन्य शिक्षकों को भी प्रेरणा मिलेगी। सम्मानित होने वाले शिक्षक शिक्षक दिवस पर सम्मानित शिक्षकों में प्राथमिक, माध्यमिक श्रेणी के 8 और उच्चतर माध्यमिक श्रेणी के 6 शिक्षक शामिल हैं। गत वर्ष 2024 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को भी सम्मानित किया जायेगा। पुरस्कृत शिक्षकों को 25 हजार रुपये की सम्मान निधि, शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया जायेगा। जिन प्राथमिक शिक्षकों को सम्मानित किया जायेगा, उनमें शासकीय प्राथमिक शाला बिसोनिया, गुना के जितेन्द्र शर्मा, शासकीय उ.मा.वि. क्रमांक-2, शाजापुर के दिलीप जायसवाल, ई.पी.ई.एस., भाटीवाड़ा, सिवनी के दिलीप कटरे, शासकीय प्राथमिक विद्यालय, बसिया, दमोह के श्रीकांत कुर्मी, शासकीय उ.मा.वि., रुस्तमपुर, खण्डवा की माध्यमिक शिक्षक श्रीमती श्रद्धा गुप्ता, शासकीय माध्यमिक विद्यालय, सतौआ, दमोह के मोहन सिंह गौंड, शासकीय माध्यमिक शाला, चंदेसरा, उज्जैन के अपूर्व शर्मा और शासकीय माध्यमिक शाला, उबालाद, अलीराजपुर के उच्च श्रेणी शिक्षक धनराज वाणी शामिल हैं। ये चयनित शिक्षक कक्षा-1 से 8 की कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। कक्षा-9 से 12 में चयनित शिक्षक राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिये कक्षा-9 से 12 में पढ़ाने वाले चयनित शिक्षकों में माध्यमिक शिक्षक शासकीय उत्कृष्ट उ.मा.वि., बाग, जिला धार की श्रीमती राधा शर्मा, शासकीय उ.मा.वि., मेडिकल कॉलेज, जबलपुर के डॉ. नरेन्द्र कुमार उरमलिया, शासकीय उ.मा. संभागीय ज्ञानोदय विद्यालय, तिलीवार्ड, सागर के महेन्द्र कुमार लोधी, शासकीय उ.मा.वि., जावरा, रतलाम की उच्च माध्यमिक शिक्षक श्रीमती विनीता ओझा और माध्यमिक शिक्षक शासकीय हाई स्कूल, पांदा, जिला राजगढ़ डॉ. सरिता शर्मा को सम्मानित किया जायेगा। वर्ष 2024 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक वर्ष 2024 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को राज्य स्तरीय समारोह में शॉल-श्रीफल, स्मृति चिन्ह और 5 हजार रुपये सम्मान निधि भेंट कर सम्मानित किया जायेगा। इनमें शासकीय माध्यमिक शाला लिधौरा, ब्लॉक बटियागढ़, दमोह के माधव प्रसाद पटेल और शासकीय हाई स्कूल, मंदसौर की शिक्षक श्रीमती सुनीता गोधा शामिल हैं। जिला स्तर पर भी होगा शिक्षक सम्मान समारोह प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित होगा। समारोह में जिले में श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान किया जायेगा। समारोह में गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहेंगे। पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन पर शिक्षक दिवस पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितम्बर को देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षक दिवस उन समर्पित शिक्षकों का सम्मान और सराहना करने का दिन है, जिनका व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शिक्षक मार्गदर्शक और प्रेरक की भूमिका निभाते हैं।  

भाजपा नेता की गिरफ्तारी: मैहर में शराब तस्करी का पर्दाफाश, कार और शराब बरामद

मैहर सतना जिला के कोठी मंडल के भाजपा युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष अभिनव गौतम को बुधवार की रात मैहर जिला के रामनगर थाना क्षेत्र में आठ पेटी अवैध शराब व कफ सिरप के साथ पकड़ गया है। यह पूरी कार्रवाई रामनगर थाना पुलिस द्वारा कि गई है। दरअसल रामनगर थाना पुलिस ने शराब तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें भाजपा युवा मोर्चा कोठी मंडल अध्यक्ष अभिनव गौतम भी शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक कार और आठ पेटी अवैध शराब जब्‍त की है। सभी आरोपितों को न्यायालय में पेश कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी को बचाने के लिए एक बड़े भाजपा नेता ने पुलिस पर भारी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन रामनगर पुलिस ने दबाव को नजरअंदाज करते हुए कार्रवाई पूरी की। भाजपा नेत्री का बेटा व स्वयं भी युवा मोर्चा का पदाधिकारी पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भाजपा नेत्री मधु गौतम का बेटा अभिनव गौतम भी है, जो वर्तमान में युवा मोर्चा कोठी मंडल अध्यक्ष के पद पर है। उसके साथ तीन अन्य साथी भी पकड़े गए हैं। इनमें राजेश गुप्ता नाम का व्यक्ति भी शामिल है, जिसके खिलाफ पूर्व में धारा 34/2 के तहत मामला दर्ज हुआ था, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों के तीखे आरोप वहीं, इस पूरे मामले पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भाजपा के बड़े नेताओं के संरक्षण में अपराध फल-फूल रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि गिरफ्तारी के बावजूद भाजपा संगठन ने अब तक अपने युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष पर कोई कार्यवाही नहीं की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार क्षेत्र में लगातार फल-फूल रहा है और इसमें कई प्रभावशाली लोग सीधे या परोक्ष रूप से शामिल हैं। पुलिस की कार्रवाई को लोगों ने सराहा है, लेकिन यह भी अपेक्षा जताई कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। 

अब सीधे विश्वविद्यालयों को मिलेगी विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति

आयुक्त श्री सुमन की अध्यक्षता में हुई पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक भोपाल  विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रवृत्ति की राशि अब सीधे उस विश्वविद्यालय या संस्थान के खाते में डाली जाएगी, जिसमें छात्र अध्ययनरत है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त श्री सौरभ कुमार सुमन ने बताया कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को उनकी छात्रवृत्ति का लाभ समय पर मिल सकेगा। छात्रों के हित में ये फैसला पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त श्री सौरभ कुमार सुमन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में लिया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई बैठक में योजनाओं की प्रगति और लंबित मामलों की समीक्षा की गई। आयुक्त श्री सुमन ने छात्रवृत्ति से संबंधित लंबित प्रकरणों पर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चयनित नर्सिंग कॉलेजों में अध्ययनरत पात्र छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति मिले, इसके लिए विशेष ध्यान दिया जाए। आयुक्त श्री सुमन ने सी.एम. हेल्पलाइन के प्रकरणों के निराकरण में विभाग की बेहतर स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने उच्च न्यायालय में लंबित अवमानना प्रकरणों में शीघ्र जवाब दावा प्रस्तुत कर विभाग का पक्ष मजबूती से रखने के निर्देश भी दिए। बैठक में संयुक्त संचालक श्री भूपेन्द्र कुमार गोयल, उप संचालक (वित्त) श्रीमती जयश्री राठौर और जिलों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।  

शिक्षक सिर्फ ज्ञान ही नहीं, राष्ट्र का भविष्य भी गढ़ते हैं – किशन सूर्यवंशी

भोपाल  शिक्षक सम्मान समारोह में नगर निगम अध्यक्ष माननीय श्री किशन सूर्यवंशी जी ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु ही वह शक्ति हैं जो केवल छात्र के भविष्य का ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के निर्माण का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि “शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान बताया गया है। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण जैसे अवतारों ने भी आश्रमों में शिक्षा ग्रहण की। इससे सिद्ध होता है कि चाहे सामान्य विद्यार्थी हों या ईश्वर के अवतार, सबके जीवन में गुरु की भूमिका अनिवार्य है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 2047 तक विकसित भारत का जो सपना देखा गया है, उसमें शिक्षकों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्त और जिम्मेदार नागरिक गढ़ने वाला होता है।” श्री सूर्यवंशी जी ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा ने सदैव दुनिया को मार्गदर्शन दिया है। नालंदा विश्वविद्यालय जैसे ज्ञान-केंद्रों को नष्ट इसलिए किया गया क्योंकि दुनिया को भय था कि भारत ज्ञान के बल पर विश्व नेतृत्व करेगा। आज भारत पुनः ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गणेश उत्सव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गणेश जी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर यह संदेश दिया कि माता-पिता ही संपूर्ण संसार हैं। यह शिक्षा आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। अपने उद्बोधन के अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षक का सम्मान करना सूर्य को दीप दिखाने के समान है। शिक्षक के भीतर उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम जैसे गुण होते हैं और यही गुण राष्ट्र निर्माण का आधार बनते हैं। इस अवसर पर कार्यक्रम में चांसलर आदरणीय श्री वी.एस. यादव जी, सम्माननीय शिक्षकगण और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने एनआईआरएफ- 2025 में उल्लेखनीय रैंकिंग मिलने पर, आईईएचई संस्थान परिवार को बधाई दीं

आईईएचई, भोपाल ने स्थिर रखी एनआईआरएफ में अपनी रैंकिंग भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने भोपाल स्थित उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान को, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ)-2025 में "महाविद्यालय श्रेणी" में गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी 201 से 300 बैंड में रैंक प्राप्त करने पर, उच्च शिक्षा विभाग एवं संस्थान परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मंत्री श्री परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार, विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक उच्च शिक्षा प्रदान करने की दिशा में प्रतिबद्धता से सतत् कार्य कर रही है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवीन आयाम स्थापित हो रहे हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं प्रगति के साथ, शैक्षणिक एवं अकादमिक स्तर पर उत्तरोत्तर गुणवत्ता वृद्धि हो रही है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान के निदेशक डॉ प्रज्ञेश अग्रवाल के नेतृत्व में संस्थान परिवार अपने पुरुषार्थ से सतत् नए आयाम स्थापित कर रहा है और अन्य संस्थानों के लिए अभिप्रेरणा का केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। संस्थान का उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क के निर्धारित मानकों पर खरा उतरकर, उक्त उपलब्धि अर्जित करना प्रशंसनीय एवं सराहनीय है। श्री परमार ने कहा कि संस्थान, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क के निर्धारित मानकों पर और अधिक बेहतर प्रदर्शन कर, अग्रणी श्रेणी में उत्कृष्ट स्थान अर्जित करने का प्रयास करें। मंत्री श्री परमार ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य समस्त उच्च शिक्षण संस्थान भी, एनआईआरएफ के मानकों पर खरा उतरने के लिए प्रयास करें और राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क की श्रेणी में उत्कृष्ट स्थान अर्जित करें। "कॉलेज कैटेगरी" में इस वर्ष भी 201 से 300 बैंड में मिली रैंक उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल की उपलब्धियों में एक अध्याय और जुड़ चुका है। 4 सितम्बर को शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी इंडिया रैंकिंग (NIRF, 2025) में उच्च शैक्षिक संस्थानों की रैंकिंग में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (IEHE), भोपाल को गत वर्ष की भांति कॉलेज कैटेगरी में इस वर्ष भी 201 से 300 बैंड में रैंक प्राप्त हुई है। ज्ञातव्य है कि यह प्रदेश का एकमात्र संस्थान है, जिसे वर्ष 2024 में भी कॉलेज कैटेगरी में एनआईआरएफ रैंकिंग प्राप्त हुई थी, इस वर्ष भी संस्थान अपनी रैकिंग स्थिर रखने में सफल हुआ है। संस्थान की एनआईआरएफ समिति द्वारा निदेशक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल के कुशल मार्गदर्शन में, डॉ. अनुज हुंडैत एवं डॉ. ए. एस. सलूजा के द्वारा रिपोर्ट तैयार कर एनआईआरएफ पोर्टल पर अपलोड की गई थी, जिसके परिणामस्वरुप यह उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार अन्तर्गत संरचना है। यह संरचना, देश भर के संस्थानों को रैंकिंग देने की एक पद्धति की रूपरेखा प्रस्तुत करती है। यह पद्धति, विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों की रैंकिंग के लिए व्यापक मानदंडों की पहचान के लिए तैयार की गई समग्र सिफारिशों और व्यापक समझ पर आधारित है। इन मानदंडों में व्यापक रूप से "शिक्षण, अधिगम और संसाधन", "अनुसंधान और व्यावसायिक अभ्यास", "स्नातक परिणाम", "आउटरीच और समावेशिता" और "धारणा" सम्मिलित हैं। 

एक बगिया माँ के नाम के तहत पौध-रोपण की जीवित्ता के लिये अधिकारी करेंगे मॉनीटरिंग

विभाग ने 41 अधिकारियों की लगाई ड्यूटी, सितम्बर में दो बार भ्रमण कर मनरेगा आयुक्त को देंगे रिपोर्ट भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्व सहायता समूह की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ ही मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों को संवारने, नदियों के उद्गम स्थलों को संरक्षित करने के लिए एक बगिया मां के नाम परियोजना, मां नर्मदा परिक्रमा पथ और गंगोत्री हरित योजना चला रही है। परियोजना का जिले स्तर पर बेहतर ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिये जमीनी स्तर पर निरीक्षण करने राज्य स्तरीय अधिकारी जिलों में पहुंचेंगे। भ्रमण के बाद क्रियान्वित कार्यों की वस्तुस्थिति के बारे में मनरेगा आयुक्त को जानकारी देंगे। अधिकारियों द्वारा यह जानकारी मनरेगा परिषद द्वारा उपलब्ध कराए गए मोबाइल ऐप के माध्यम से दी जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश भी जारी किए गए हैं। अधिकारियों की लगाई गई ड्यूटी 'एक बगिया मां के नाम' मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों की भूमि पर किए जा रहे पौधरोपण और गंगोत्री हरित योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की गतिविधि को देखने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 41 अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। ये सभी अधिकारी सितम्बर माह में प्रदेश के सभी जिलों में जाकर तीनों योजनाओं का जमीनी स्तर पर कार्य देखेंगे। इसमें मुख्य अभियंता, संयुक्त अभियंता, अधीक्षण यंत्री, उपायुक्त, उपसंचालक, कार्यपालन यंत्री, एससीएफ, सहायक यंत्री और परियोजना अधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल है। सभी अधिकारी सितंबर माह में दो बार आवंटित जिलों का भ्रमण करेंगे। अनियमितता की अलग से देंगे रिपोर्ट अधिकारियों द्वारा भम्रण के दौरान तीनों योजनाओं के क्रियांन्वयन में कोई गंभीर अनियमितता पाये जाने पर संबंधित अधिकारियों को उसकी अलग से रिपोर्ट बनाकर मनरेगा आयुक्त को दी जाएगी।  

उत्कृष्ट कार्य करने वाली आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य अमले को किया सम्मानित

किलकारी और मोबाइल अकादमी से सही समय पर सही जानकारी और प्रशिक्षित आशा कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा को किया है सशक्त : उप मुख्यमंत्री शुक्ल राज्य स्तरीय मोबाइल अकादमी एवं किलकारी कार्यक्रम की कार्यशाला सम्पन्न भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि किलकारी और मोबाइल अकादमी ने यह सिद्ध किया है कि सही समय पर सही जानकारी और प्रशिक्षित आशा कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को नई दिशा दे सकती हैं। यह पहल मध्यप्रदेश को स्वस्थ, सशक्त और सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर कर रही है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल की अध्यक्षता में होटल एमपीटी पलाश भोपाल में राज्य स्तरीय मोबाइल अकादमी एवं किलकारी कार्यक्रम की कार्यशाला आयोजित हुई। अपर मिशन संचालक श्री मनोज सरियाम और आशा कार्यक्रम के संयुक्त संचालक डॉ. राकेश बोहरे विशेष रूप से उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) एवं मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में सुधार के लिए सशक्त प्रयास कर रहा है। ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि मातृ मृत्यु दर को 80 प्रतिशत तथा शिशु मृत्यु दर को 20 प्रतिशत तक लाया जाये। इस दिशा में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें निरंतर प्रशिक्षण, अद्यतन जानकारी तथा तकनीकी साधनों से सशक्त करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटलीकरण की दिशा में नई ऊर्जा और दृष्टि प्रदान की है। इसी परिप्रेक्ष्य में 15 जनवरी 2016 को तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा द्वारा मोबाइल अकादमी एवं किलकारी कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया था। विगत दस वर्षों की सफल यात्रा में इन कार्यक्रमों ने देशव्यापी स्तर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और प्रभावशीलता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से मध्यप्रदेश का लक्ष्य शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) को 20 तथा मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को 80 तक लाना है। इसके लिये आवश्यक है कि सभी आशा कार्यकर्ता, जिला स्वास्थ्य अधिकारी एवं प्रशासनिक इकाइयाँ पूर्ण निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। उन्होंने शिक्षण एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से अपेक्षा की कि वे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और सेवा प्रदायगी के माध्यम से प्रदेश को स्वास्थ्य संकेतकों में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाएँ। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया। अपर मिशन संचालक श्री मनोज सरियाम ने बताया कि मध्यप्रदेश ने इन कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन में देशव्यापी स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाई है। अब तक 50 हजार से अधिक आशा कार्यकर्ताओं ने मोबाइल अकादमी का प्रमाणन कोर्स पूरा किया है। प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में 100 प्रतिशत आशाओं ने प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन 200 से अधिक आशाएँ कोर्स पूर्ण कर रही हैं। किलकारी कार्यक्रम के माध्यम से लाखों गर्भवती महिलाएँ एवं माताएँ लाभान्वित हो रही हैं। किलकारी कार्यक्रम गर्भवती महिलाओं तथा नवजात शिशुओं की माताओं को समय पर आवश्यक जानकारी प्रदान करने के लिये विकसित किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत लाभार्थियों को उनकी गर्भावस्था एवं शिशु की आयु के अनुसार 72 पूर्व निर्धारित ऑडियो संदेश प्राप्त होते हैं। सरल भाषा में प्रस्तुत ये संदेश लाभार्थियों में सहज विश्वास और आत्मीयता का भाव उत्पन्न करते हैं। यह सेवा पूर्णतः निःशुल्क है और मोबाइल फोन पर आसानी से उपलब्ध है। मोबाइल अकादमी आशा कार्यकर्ताओं के लिए एक दूरस्थ प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें 240 मिनट का ऑडियो कोर्स, 11 अध्याय और 44 पाठ सम्मिलित हैं। यह कार्यक्रम आशा कार्यकर्ताओं के ज्ञान, संचार कौशल एवं आत्मविश्वास को सुदृढ़ करता है। यह सेवा 14424 नंबर के माध्यम से कहीं भी, कभी भी सुलभ है।