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भोपाल का ऐतिहासिक होटल अब 7-स्टार में विकसित, टेंडर प्रक्रिया शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम का प्रतिष्ठित होटल लेक व्यू अशोका(Lake View Ashoka Hotel Bhopal) अब शहर के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। श्यामला हिल्स स्थित यह होटल, जो फिलहाल 3-स्टार श्रेणी में आता है। इसे अब 7-स्टार होटल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर क्रियान्वित किया जाएगा, जिसके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। इस पहल का उद्देश्य भोपाल में लग्जरी पर्यटन को बढ़ावा देना और निगम के लिए राजस्व का एक स्थायी स्रोत सुनिश्चित करना है। निजी पार्टनर की तलाश एक साल से जारी होटल के इस महत्वाकांक्षी कायाकल्प के लिए पर्यटन निगम ने एक साल से प्राइवेट पार्टनर की तलाश कर रहा है। योजना के अनुसार पीपीपी मॉडल के तहत पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा, जिसमें पार्टनर होटल का विकास और संचालन करेगा, जबकि इसका मालिकाना हक पर्यटन निगम के पास ही रहेगा। 150 से अधिक होंगे रूम वर्तमान में 7.16 एकड़ में फैले इस होटल में 4 सुइट्स, 39 डीलक्स रुम, एक स्वीमिंग पूल और एक रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं हैं। 7-स्टार बनने के बाद इसमें 150 से अधिक रूम होंगे और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां से बड़े तालाब का खूबसूरत नजारा दिखता है, जो इसे और भी खास बनाता है। स्पेशल पर्पज व्हीकल के निगरानी में होगा डेवलपमेंट यह निर्णय सात साल पहले ही किया गया था, जब होटल अशोक के शेयर निगम को ट्रांसफर किए गए थे। लेक व्यू अशोक के संचालन के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) कंपनी बनाई गई थी। इसी कंपनी के जरिए होटल के डेवलपमेंट की पूरी याजना को अंजाम दिया जाएगा। इसे लेकर निगम ने पूरा खाका तैयार कर लिया है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। इस प्रोजेक्ट को लेकर गुरुवार (5 सितंबर) को मंत्रालय में बैठक भी हुई। जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पेश किया जाएगा। अभी 3 स्टार कैटेगरी में शामिल है होटल श्यामला हिल्स स्थित यह होटल फिलहाल 3 स्टार की कैटेगरी में शामिल है। यह 7.16 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें 4 सुइट, 39 डीलक्स रूम, स्वीमिंग पूल और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। होटल के कैंपस में एक बड़ा बैंक्वेट हॉल है, जिसमें 180 लोग एक साथ आ सकते हैं। साथ ही, होटल में 8135 मीटर बिल्ट अप का एरिया लेक व्यू रेसिडेंसी कैम्पस में मौजूद है। इसमें 82 लोग बैठ सकते हैं। बड़े तालाब के पास मौजूद होने के कारण यहां से बहुत ही शानदार नजारा देखने को मिलता है। वहीं इस नई योजना के बाद होटल लेक व्यू का भविष्य सुनहरा नजर आ रहा है। 40 साल पुराना है होटल अशोक होटल की शुरुआत 40 साल पहले लगभग 1985-86 के आसपास हुई थी। तब इसके लिए जमीन को 30 साल की लीज पर दिया गया था। होटल की शुरुआत के समय इसमें 51 प्रतिशत साझेदारी केंद्र सरकार की और 49 प्रतिशत शेयर मध्य प्रदेश सरकार के थे। बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से होटल की सारी इक्विटी खरीद ली थी। अब इसमें केंद्र सरकार की कोई साझेदारी नहीं है। होटल का लीज 2016 में समाप्त होने के बाद इसकी लीज की फाइल पेंडिंग चल रही थी। पांच साल पहले सरकार 350 करोड़ के बाजार मूल्य के साथ अशोक होटल को निजी हाथों में सौंपना चाहती थी लेकिन किसी प्राइवेट कंपनी ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।  पहले भी हुई थी कोशिश यह पहला मौका नहीं है जब इस होटल को निजी हाथों में में सौंपने की कोशिश की गई हो। करीब 6 साल पहले भी इसे निजी कंपनियों को देने का प्रयास किया गया था। तब इसकी कीमत लगभग 350 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन उस समय कोई भी निजी कंपनी इसे लेने के लिए तैयार नहीं हुई थी। होटल लेक ब्यू अशोका वर्तमान में पूरी तरह से निगम के नियंत्रण में है। हाल ही में इस प्रोजेक्ट पर समीक्षा बैठक भी हुई थी।– डॉ. इलैया राजा टी. एमडी एमपी टूरिज्म

AIIMS भोपाल में शुरू हुई अत्याधुनिक छाती कैंसर इलाज सुविधा, मरीजों को अब लंबा सफर नहीं

भोपाल  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के सर्जिकल आंकोलाजी विभाग में अब विशेष रूप से छाती के कैंसर (फेफड़ों और भोजन नली) के इलाज के लिए एक 'समर्पित थोरासिक आंकोलाजी सुविधा' शुरू की गई। अब मध्य भारत के कैंसर रोगियों के लिए यह सुविधा मिलती रहेगी, अब इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इस नई सुविधा की शुरुआत के साथ ही एक बेहद जटिल आपरेशन को अंजाम दिया गया है। डॉक्टरों ने एक मरीज की भोजन नली (इसोफेगस) के कैंसरग्रस्त हिस्से को निकाला। इसके बाद पेट के एक हिस्से से एक नई नली बनाकर उसे गले तक जोड़ा गया। यह पूरी सर्जरी दूरबीन और कैमरे वाली अत्याधुनिक थोरोस्कोपिक और लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की गई। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मरीज को बड़े चीरे नहीं लगाए जाते, जिससे दर्द कम होता है और वह जल्दी ठीक हो पाता है। एम्स भोपाल का सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग पहले से ही मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों के लगभग 20 हजार कैंसर मरीजों का हर साल इलाज करता है। अब तक छाती से जुड़े जटिल कैंसर के ऑपरेशन के लिए मरीजों को दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था, जो काफी खर्चीला और मुश्किल होता था। अब यह विश्वस्तरीय सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से हजारों मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। विशेषज्ञ नेतृत्व और मजबूत टीम इस महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व प्रो. डॉ. माधवानंद कर रहे हैं, जो न केवल एक बेहतरीन सर्जन हैं, बल्कि एक कुशल शिक्षक भी हैं। उन्होंने देश के कई एम्स संस्थानों का मार्गदर्शन किया है और लगातार युवा डाक्टरों को प्रशिक्षित करते रहते हैं। उनके नेतृत्व में डॉ. विनय कुमार (विभागाध्यक्ष, सर्जिकल आंकोलाजी), डॉ. अंकित, डॉ. वैशाली, डॉ. जैनब और डॉ. शिखा सहित एक विशेषज्ञ टीम ने पहली जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।

प्लास्टिक से डीजल! मध्य प्रदेश में शुरू होगी खास तकनीक, कचरा नहीं जलेगा बल्कि पिघलकर बनेगा ईंधन

शिवपुरी  कचरे में मौजूद प्लास्टिक से पायरोलिसिस प्रक्रिया को अपनाकर डीजल बनाने का प्लांट शहर में लगाया जाएगा। यह मध्यप्रदेश का पहला ऐसा प्लांट होगा, जहां प्लास्टिक से डीजल बनेगा। यह प्लांट शिवपुरी में लगाया जाएगा जिसके लिए टेंडर रविवार को खुलेंगे। सबकुछ सही रहा तो 3-4 माह में प्लांट शुरू हो जाएगा। अभी तक देश में इस तरह के 3-4 प्लांट हैं। ऐसा ही प्लांट उत्तरप्रदेश के मथुरा में है। शिवपुरी का प्लांट पीपीई मोड पर होगा। नगर पालिका के बड़ौदी स्थित ट्रेंचिंग गाउंड में फर्म को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी को कम से कम 15 साल के लिए प्लांट चलाने की शर्त होगी। प्लांट लगाने में 3-4 करोड़ खर्च होंगे। कंपनी अपना लाभ निकालने के साथ ही नगर पालिका को भी तय रकम हर माह या सालाना देगी। इस डीजल का प्रयोग वाहनों में कम, बल्कि जनरेटर और हैवी मशीनरी को चलाने में ज्यादा किया जाता है। इस तरह तैयार होगा डीजल प्लास्टिक कचरे को रियक्टर में 350 से 450 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाता है। इसमें हाइड्रो कार्बन बनते हैं। इससे पेट्रोल, डीजल व कार्बन गैस का उत्पादन होता है। एक टन प्लास्टिक कचरे से 150 से 200 लीटर डीजल बन सकता है। यह हैं तकनीक के अविष्कारक मेट्रो अटलांटा के 21 वर्षीय अश्वेत आविष्कारक जूलियन ब्राउन ने प्लास्टोलाइन नामक तकनीक विकसित की है, जो माइक्रोवेव पायरोलिसिस का उपयोग कर सौर ऊर्जा से चलने वाला रिएक्टर है। यह प्लास्टिक कचरे को गैसोलीन, डीजल व जेट ईंधन जैसे ईंधन में परिवर्तित करता है। नगर पालिका स्वास्थ्य अधिकारी योगेश शर्मा ने कहा कि प्लास्टिक से पायरोलिसिस प्रक्रिया के तहत डीजल बनाने का प्लांट जल्द लगेगा। इसमें दो-तीन फर्म ने रुचि दिखाई है। केले के छिलके और प्लास्टिक के कचरे से बनेंगे डीजल वैज्ञानिकों ने कमाल का काम किया है। जिस केले के छिलके और प्लास्टिक के कचरे को कम फेक देते थे, उनसे यहां के वैज्ञानिकों ने डीजल बनाने का तरीका खोज निकाला है। यह डीजल सस्ता होगा। साथ ही पर्यावरण के लिए भी अच्छा होगा। इसके लिए वैज्ञानिकों ने को-पैरोलीसिस तकनीक का इस्तेमाल किया है। इससे बायोडीजल तैयार होगा। डीजल वाहनों में अच्छे से काम करेगा वैज्ञानिकों का दावा है कि यह बायो-डीजल, डीजल वाहनों में भी अच्छे से काम करेगा। यह खोज कचरे को उपयोगी बनाने के लिए की गई है। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन को इससे आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ने की खोज यह रिसर्च आइसर भोपाल के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शंकर चाकमा के नेतृत्व में हुई। उनके साथ बबलू अलावा और अमन कुमार ने भी इस रिसर्च में भाग लिया। वैज्ञानिकों ने केले के छिलके और प्लास्टिक कचरे को 25:75 के अनुपात में मिलाया। फिर उन्होंने इसे एक खास तापमान पर गर्म करके पायरो-ऑयल (तरल ईंधन) प्राप्त किया। ऐसे होगा इस्तेमाल रिसर्च में पता चला कि इस ईंधन को डीजल के साथ 20 प्रतिशत तक मिलाकर गाड़ी में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस रिसर्च को जर्नल ऑफ द एनर्जी इंस्टीट्यूट और एनर्जी नेक्सस में भी छापा गया है। रिसर्च करने वालों के अनुसार, एक किलोग्राम केले के छिलके और प्लास्टिक कचरे से लगभग 850 ग्राम तरल पदार्थ, 140 ग्राम गैस और 10 ग्राम चारकोल मिलता है। गैस का इस्तेमाल खाना बनाने में किया जा सकता है, जबकि चारकोल का इस्तेमाल पानी को साफ करने के लिए किया जा सकता है। तरल ईंधन को डीजल के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है। क्या होता है पायरो आयल वहीं, यह जो पायरो-आयल है, उसमें कई तरह के हाइड्रोकार्बन होते हैं। जैसे कि ओलेफिन, पैराफिन, एरोमैटिक्स, एस्टर और अल्कोहल। इसमें लगभग 12 प्रतिशत ऑक्सीजन वाले यौगिक और लंबी श्रृंखला वाले एस्टर भी पाए जाते हैं। इससे इसकी ऊष्मा (हीट) देने की क्षमता लगभग 55 मेगाजूल प्रति किलोग्राम तक बढ़ जाती है। यह सामान्य डीजल से कहीं ज्यादा गर्मी देता है।इसके अलावा, यह ईंधन ठंडे मौसम में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि इसका पोर पाइंट -25 डिग्री सेल्सियस तक है. साथ ही, इसका फ्लैश पाइंट भी 4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा पाया गया है, जिससे यह ज्यादा सुरक्षित भी है। ईंधन की खपत कम हुई इस वैकल्पिक ईंधन को डीजल इंजनों में भी टेस्ट किया गया। टेस्ट में पाया गया कि इससे ईंधन की खपत कम हुई और बीटीई (ब्रेक थर्मल एफिशिएंसी) में भी काफी सुधार हुआ। इससे यह साबित होता है कि यह ईंधन डीजल से न केवल सस्ता है, बल्कि प्रदर्शन के मामले में भी बेहतर है।

बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर: CM यादव ने तुरंत भेजे 20 करोड़ रुपए

भोपाल मध्यप्रदेश की सरकार हर संकट में किसानों के साथ खड़ी है। इस स्पष्ट संदेश के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 6 सितंबर को अतिवृष्टि-बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों के लिए राहत राशि का वितरण किया। उन्होंने एक क्लिक के माध्यम से किसानों को 20 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। मध्यप्रदेश सरकार साल 2025-26 तक 188 करोड़ 52 लाख रुपये आपदा प्रभावित लोगों को ट्रांसफर कर चुकी है। प्रदेश सरकार का कहना है कि इन दिनों मौसम असंतुलित हो गया है। इसलिए सरकार किसानों की हर संभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार का मानना है कि किसानों की मुस्कान ही राज्य की ताकत है। गौरतलब है कि सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से कई जिलों के किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात की। उन्होंने किसानों से उनका हालचाल जाना और सरकार का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि किसानों के जीवन में मौसम की मार से परेशानी आई है। इस परेशानी का सरकार ने समाधान कर दिया है। खेतों में किसान और सीमा पर जवान दोनों आंधी-तूफान और कष्टों के बीच अपनी मौजूदगी से, मेहनत से, जान की बाजी लगाकर देश के लोगों की सेवा करते हैं। प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत ज्यादा बारिश हुई और कहीं-कहीं कम बारिश भी हुई। इस असंतुलन की कीमत हमें थोड़ी-थोड़ी चुकानी पड़ रही है। सरकार हर परेशानी में किसान के साथ है। हमारी सरकार बाढ़ के दौरान भी जनता के बीच गई। सरकार किसानों के हर संकट में साथ खड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को सरकार पर पूरा भरोसा सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज 11 जिलों के 12 हजार हेक्टेयर से ज्यादा बड़े क्षेत्र में 17500 भाई-बहनों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 20 करोड़ रुपये की राशि दे रहे हैं। किसान हमारी सरकार पर पूरा भरोसा करता है। किसानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है। उनके नेतृत्व में हमारी सरकार लगातार जनकल्याण के काम कर रही है। इससे पहले हमने 30 करोड़ की राहत राशि ट्रांसफर की थी। 2025-26 में अभी तक 188 करोड़ 52 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। मिलकर आपदा से मुकाबला करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं हर किसान को आश्वासन देना चाहता हूं कि संकट की घड़ी में हमारी सरकार सदैव आपके साथ खड़ी है। किसानों की मुस्कान ही मध्यप्रदेश की ताकत है। किसान अपनी मेहनत से एक फिर जीवन के मैदान में उतरेंगे। हमें आशा है कि अगली फसल इस नुकसान की भरपाई कर देगी। हम सब मिलकर इस आपदा से मुकाबला करेंगे। किसान कभी हार नहीं मानता, वह जीवटता के साथ आने वाले कल की तैयारी करता है। आइए हम सब मिलकर एक बार फिर कामना करें कि एक बार फिर धरती माता हमारे अन्न के भंडार भरेगी।

वन विहार में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध दिवस, हुए जागरूकता कार्यक्रम

गिद्ध संरक्षण पर हुई एक दिवसीय कार्यशाला भोपाल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इण्डिया, बीएनएचएस के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के अवसर पर विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन शनिवार को वन विहार स्थित विहार वीथिका में किया गया। इसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों की महत्त्वपूर्ण भूमिका और उनके संरक्षण की तात्कालिक आवश्यकता के बारे में आमजन को जागरूक करना था। अंर्तराष्ट्रीय गिद्ध दिवस प्रतिवर्ष माह सितम्बर के प्रथम शनिवार को मनाया जाता है। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में स्थित विहार वीथिका में अंर्तराष्ट्रीय 'गिद्ध दिवस' के अवसर पर 'गिद्ध संरक्षण एवं संर्वधन' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई, जिसमें 30 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। इसमें गिद्ध संरक्षण एवं संर्वधन विषय पर जानकारी के साथ गायों के उपचार में डायक्लोफेनिक दवा का उपयोग न करने एवं अन्य विषयों पर विषय-विशेषज्ञों द्वारा जानकारी उपलब्ध कराई गई। सहायक संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल डॉ. रूही हक द्वारा कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया। भोपाल बर्ड्स के मो. खालिक, डॉ. संगीता राजगीर तथा सहायक वन्‍यप्राणी चिकित्‍सक वन विहार डॉ. हमजा नदीम फारूकी ने प्रस्तुतिकरण के माध्‍यम से गिद्ध प्रजाति एवं उनके महत्व और पारिस्थितिकीय तंत्र में गिद्धों की महत्‍वपूर्ण भूमिका तथा गायों के उपचार में डायक्लोफेनिक दवा का उपयोग से होने वाली हानियों की जानकारी दी गई। सहायक संचालक द्वारा गिद्धों के संरक्षण के लिये प्रतिभागियों से चर्चा की। 'पन्नी से पक्षी' विषय पर होगी राज्य स्तरीय कला प्रतियोगिता कार्यक्रम में संरक्षण को सतत विकास से जोड़ने और गिद्धों के स्वास्थ्य के लिए प्लास्टिक प्रदूषण से खतरे पर प्रकाश डाला गया। वन विभाग द्वारा राज्य-स्तरीय कला प्रतियोगिता “पन्नी से पक्षी” की भी घोषणा की। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों और कलाकारों को प्लास्टिक कचरे से गिद्धों के मॉडल बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिन्हें वन्यप्राणी सप्ताह-2025 के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता कार्यशाला में विभिन्न महाविद्यालयों के स्नातक विद्यार्थियों के लिए पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसका विषय “गिद्धों की पारिस्थितिक सेवाएँ” था। “वल्चर्स ऑफ मध्यप्रदेश” शीर्षक से एक उपयोगी फील्ड गाइड का लोकार्पण भी किया गया, जो राज्यभर में कार्यरत वन अमले को गिद्ध प्रजातियों की पहचान और निगरानी में सहायता करेगी। वल्चर थीम पर ड्राइंग प्रतियोगिता इसी कड़ी में बीएनएचएस संस्‍था द्वारा वल्चर थीम पर स्कूली बच्चों के लिए ड्राइंग कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के विजेताओं (प्रथम, द्वितीय व तृतीय) को पुरूस्कृत किया गया। श्री सेमसंग, प्रबंधक, गिद्ध संवर्धन केन्द्र केरवा, भोपाल एवं श्री संकल्‍प किसनानी, भोपाल द्वारा वन विहार में भ्रमण करने आए पर्यटकों के साथ वल्‍चर थीम पर एक "ऑन द स्पॉट क्विज" का भी आयोजन किया गया जिसमें पर्यटकों से गिद्धों के सम्‍बन्‍ध प्रश्‍न पूछे गए जिन पर्यटकों ने सही उत्‍तर दिया उन्‍हें पुरूस्‍कृत भी किया गया। कार्यशाला में गिद्धों के संरक्षण एवं बचाव के बारे जानकारी देकर जागरूक किया। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री शुभरंजन सेन, मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक श्री आर. श्रीनिवास मूर्ति, पूर्व संचालक श्रीमती संगीता सक्‍सेना, डॉ. स्‍वाति मोघे, संचालक, डब्‍ल्‍यू.डब्‍ल्‍यू.एफ., भोपाल और सहायक संचालक वन विहार डॉ. रूही हक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मऊगंज को देंगे 241.33 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

मऊगंज में संयुक्त जिला कार्यालय भवन का करेंगे भूमिपूजन देवतालाब में होगा मुख्य कार्यक्रम, हितग्राही होंगे लाभान्वित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 सितम्बर को मऊगंज को 241.33 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे। इसमें प्रमुख रूप से मऊगंज के संयुक्त जिला कार्यालय भवन का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 37 करोड़ 50 लाख रूपये के 16 विकास कार्यों का लोकार्पण और 203 करोड़ 83 लाख रूपये के 6 विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मऊगंज प्रवास के दौरान बहुती प्रपात का अवलोकन करेंगे और देवतालाब में स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे। देवतालाब स्टेडियम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं में हितलाभ वितरण भी करेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, सांसद श्री जनार्दन मिश्र और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक श्री गिरीश गौतम भी संबोधित करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फिल्म अभिनेता विंदु दारा सिंह ने की सौजन्य भेंट

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शनिवार को समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में फिल्म अभिनेता श्री विंदु दारा सिंह ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री विंदु दारा सिंह का शाल ओढ़ाकर अभिनन्दन किया और प्रदेश की फिल्म निर्माण नीति की जानकारी दी। श्री विंदु दारा सिंह इन दिनों मध्यप्रदेश के प्रवास पर हैं। उन्होंने जय वीर हनुमान (1995), विष्णु पुराण (2000) और अयोध्या की रामलीला (2020)  में हनुमान जी की भूमिका निभाई है। इसके अलावा अनेक फिल्मों में अभिनय भी किया है।

परीक्षा देने पहुंची छात्रा ने किया खुदकुशी प्रयास, भोपाल में कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में हड़कंप

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र स्थित कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब 6वीं कक्षा की छात्रा ने अचानक फर्स्ट फ्लोर से छलांग लगा दी। यह घटना सुबह 7:30 बजे की बताई जा रही है। छात्रा उस समय स्कूल आई थी क्योंकि आज उसका 6th क्लास का एग्जाम था।  अचानक बच्चों के बीच हुई इस घटना से पूरे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। छलांग लगाने के बाद छात्रा के हाथ और पैर में फ्रैक्चर हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है।  स्कूल परिसर में लगे CCTV फुटेज में साफ दिख रहा है कि छात्रा ने खुद ही छलांग लगाई। घटना के बाद पुलिस को भी सूचना दी गई, फिलहाल गोविंदपुरा थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है और इस कदम के पीछे की वजहों की पड़ताल में जुटी है  स्कूल की पहली मंजिल से गिरी छात्रा, हालत गंभीर जानकारी के मुताबिक, घटना के वक़्त छात्रा बहुत सारे बच्चों के साथ थी. हालांकि वो अचानक पहली मंजिल से गिरते हुई नजर आई. पुलिस ने मामले को संदिग्ध बताया, जबकि पिता बोले- 'मैं नहीं कह सकता कैसे ये हादसा हुआ?' निजी अस्पताल में कराया गया भर्ती  बच्ची के पिता ने बातचीत में कहा कि बच्ची का अस्पताल में इलाज जारी. उन्होंने बताया कि स्कूल से बच्ची की गिरने की सूचना मिली थी, जिसके बाद मैं स्कूल पहुंचा था. अभी तक स्कूल प्रबंधन से बात नहीं हुई है.  उन्होंने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने सीसीटीवी दिखाया था, जिसमें बच्ची गिरते हुए नजर अजर आ रही थी.   छात्रा की कराई जा रही सीटी स्कैन जांच घायल छात्रा को पिपलानी स्थित बालाजी अस्पताल में भर्ती कराया है। उसकी सीटी स्कैन आदि जांच भी कराई जा रही हैं। फिलहाल उसकी मौसी ही वहां मौजूद हैं। छात्रा को कितनी चोट आई हैं, इसकी पूरी जानकारी शाम तक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पांच बहनों में सबसे छोटी है छात्रा छात्रा की मौसी पिंकी के अनुसार, पिता गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल क्षेत्र में एक फैक्ट्री में काम करते हैं। वहीं उसकी मां फिलहाल चेन्नई गई हुई हैं। घायल छात्रा पांच बहनों में सबसे छोटी है। उसकी अन्य चार बहनों में दो बड़ी बहनें एलएलबी कर रही हैं। वहीं, एक बहन 8वीं और दूसरी 11वीं में है। बच्ची के पिता ने क्या बताया? पिता का कहना है कि बच्ची ने छलांग लगाई है या गिर गई है… कुछ कह नहीं सकते. मेरी बच्ची को खेलने कूदने का शौक है. हो सकता है उस कारण ये हादसा हुआ. मामले की हो रही जांच-एडिशनल डीसीपी एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी ने बताया कि बच्ची के गिरने की सूचना मिली है. मामले की जांच की जा रही है. फिलहाल निजी अस्पताल में बच्ची का इलाज जारी है. पूछताछ करने के बाद ही पूरा मामला सामने आ पाएगा. उन्होंने बताया कि बच्ची पहली मंजिल से गिरी है. पूछताछ के बाद ही साफ होगा कि बच्ची गिरी  है या छलांग लगाई है… गौतम सोलंकी ने बताया कि एग्जाम शुरू होने के पहले ये घटना हुई है. 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रभु श्रीहरि विष्णु और श्री गजानन गणेश से मध्यप्रदेश में चहुंओर विकास और खुशहाली का आशीर्वाद देने की प्रार्थना की है।  

मौसम अपडेट: MP के 12 जिलों में भारी बारिश, अगले दिन बरसात की संभावना

भोपाल  मध्य प्रदेश में स्ट्रांग सिस्टम एक्टिव होने की वजह से लगातार बारिश का दौर चल रहा है। शनिवार को भी प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल में सुबह से बारिश हो रही है। शुक्रवार को इंदिरा सागर समेत 5 डैम के गेट खोलने पड़े। मौसम विभाग ने जिन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, उनमें उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, झाबुआ, धार, शाजापुर, राजगढ़, गुना और श्योपुर शामिल हैं। यहां अगले 24 घंटे में ढाई से साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। 20 जिलों में गिरा पानी शुक्रवार को उज्जैन में सवा 2 इंच और इंदौर में डेढ़ मिमी पानी गिर गया जबकि शिवपुरी में 1 इंच बारिश हुई। इसके अलावा भोपाल, दतिया, गुना, ग्वालियर, नर्मदापुरम, रतलाम, सिवनी, टीकमगढ़, बालाघाट, धार, बड़वानी, श्योपुर, दतिया, विदिशा, मुरैना समेत कई जिलों में हल्की बारिश का दौर जारी रहा। इसलिए हो रही तेज बारिश मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि प्रदेश में शुक्रवार को बारिश के तीन स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। इनमें एक मानसून समेत दो ट्रफ, एक लो प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) शामिल हैं। शनिवार को भी सिस्टम की एक्टिविटी देखने को मिल सकती है इसलिए कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। प्रदेश में 40.6 इंच हुई बारिश मौसम विभाग के अनुसार, एमपी में अब तक 40.6 इंच बारिश हो चुकी है, जो सीजन की 110 प्रतिशत है। अब तक 32.4 इंच बारिश होनी थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी। गुना सबसे बेहतर है यहां 63.1 इंच बारिश हो चुकी है। गुना में सामान्य से 30 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। श्योपुर में 55.8 इंच, मंडला में 55.8 इंच और शिवपुरी में 53.3 इंच बारिश हुई है। इंदौर और उज्जैन संभाग के हैं। खरगोन में सबसे कम 25.1 इंच, खंडवा में 25.4 इंच, बुरहानपुर में 25.5 इंच, बड़वानी में 25.6 इंच और शाजापुर में 26.2 इंच बारिश हो चुकी है।