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सामान्य वर्ग के छात्रों को राहत, विदेश में पढ़ाई के लिए सरकार देगी 35 लाख की स्कॉलरशिप

भोपाल मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने अनारक्षित वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना-2025 की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के लिए सरकार वित्तीय मदद उपलब्ध कराएगी। यह मदद 40 हजार अमेरिकी डालर वार्षिक की होगी। मौजूदा दर से यह रकम लगभग 35 लाख रुपये होती है। इस छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 19 सितंबर है। योजना के अनुसार, यह छात्रावृत्ति केवल स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर की पढ़ाई के लिए मिलेगी। उम्मीदवार का मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना और न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक होना अनिवार्य है। यह छात्रवृत्ति 20 विद्यार्थियों को दी जानी है। चयनित विद्यार्थियों को वास्तविक व्यय या अधिकतम वार्षिक 38 हजार अमेरिकी डालर के साथ दो हजार अमेरिकी डॉलर (किताबें, आवश्यक उपकरण, टंकण, शोध प्रबंध की बाइंडिंग एवं अन्य कार्य के लिए) कुल 40 हजार अमेरिकी डालर दिए जाते हैं। यह योजना 2018-19 से लागू है। अभी तक 24 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। इन शर्तों का पूरा होना जरूरी     आवेदनकर्ता की सभी स्रोत से वार्षिक आय आठ लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।     स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश के लिए आवेदनकर्ता की उम्र अधिकतम 25 वर्ष तथा शोध उपाधि के लिए अधिकतम उम्र 35 वर्ष होना चाहिए।     संबंधित विदेशी विश्वविद्यालय से अध्ययन का प्रस्ताव होना चाहिए।     किसी परिवार से एक ही व्यक्ति को एक ही बार इस छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा। दो बार मिलता है मौका इस छात्रवृत्ति के लिए चयन का प्रतिवर्ष दो बार मौका दिया जाता है। जनवरी से जून सत्र के लिए 10 छात्रवृत्ति और जुलाई से दिसंबर सत्र के लिए 10 छात्रवृत्ति मंजूर होती हैं। चयनित विद्यार्थी को दो वर्ष की अवधि के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी।  

गणपति विसर्जन मार्ग पर मेट्रो का असर, ट्रैफिक पुलिस ने उठाया मुद्दा

भोपाल राजधानी में इस बार गणपति विसर्जन के उत्सव में मेट्रो परियोजना की बैरिकेडिंग ने समस्या खड़ी कर दी है। हर साल की तरह इस बार भी शहर भर के गणेश भक्त अपने-अपने गली-मोहल्लों में सजी झांकियों से गणपति की मूर्तियों को प्रेमपुरा घाट तक विसर्जन के लिए लेकर जाएंगे। लेकिन इस बार मेट्रो परियोजना के कारण डिपो चौराहे से भदभदा चौराहे तक लगभग 1.8 किलोमीटर लंबी सड़क पर बैरिकेडिंग लगने से रास्ता अत्यधिक संकरा हो गया है, जिससे विसर्जन के दौरान परेशानी खड़ी हो सकती है। 1.8 किमी लंबा है रास्ता मेट्रो की बैरिकेडिंग के कारण करीब 80 फीट चौड़ा रास्ता महज 30 फीट रह गया है। समस्या को भांपकर ट्रैफिक पुलिस ने मेट्रो परियोजना के एमडी को पत्र लिख बैरिकेडेिंग के क्षेेत्र को कम करने का आवेदन दिया है ताकि रास्ता चौड़ा हो सके। हालांकि अब तक मेट्रो एमडी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। प्रेमपुरा घाट जाने के लिए डिपो चौराहे से भदभदा चौराहे तक करीब 1.8 किमी के रास्ते पर मेट्रो बैरिकेडिंग हुई है। सड़क की चौड़ाई करीब 80 फीट है, लेकिन मेट्रो की वजह से दोनों ओर का रास्ता कुछ स्थानों पर सिमटकर 15 फीट तक रह गया है, जिससे न केवल सामान्य यातायात में रुकावट आ रही है, बल्कि गणेश मूर्तियों के विसर्जन के समय होने वाले जुलूस में शामिल झांकियों और डीजे के वाहनों को निकलने में भी दिक्कत होगी। प्रेमपुरा घाट पर होगा 650 से अधिक मूर्तियों का विसर्जन गणेश विसर्जन के दौरान भारी संख्या में लोग एक साथ सड़क पर होते हैं और इस संकीर्ण मार्ग पर भीड़ और वाहनों के दबाव को संभालना पुलिस के लिए चुनौती बन सकता है। बता दें भोपाल में इस बार एक हजार से ज्यादा गणेश पंडाल सजे हैं, जिनमें सबसे विशाल करीब 150 मूर्तियों का चल समारोह निकाला जाएगा, जिनका विसर्जन छोटे तालाब के रानीकमलापति घाट पर होगा। वहीं हथाईखेड़ा डैम और बैरागढ़ के विसर्जन कुंड में आसपास के क्षेत्रों की 200 से अधिक मूर्तियां विसर्जित की जाती हैं। इसके अलावा शहर का सबसे बड़ा विसर्जन स्थल प्रेमपुरा घाट है, जहां 650 से गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा। प्रेमपुरा घाट पर विसर्जन के लिए पुराने शहर से जुलूस निकलेगा जो कि रेतघाट, पालीटेक्निक चौराहे से डिपो चौराहे तक पहुंचेगा। वहां से भदभदा चौराहे तक के करीब 1.8 किमी के रास्ते में बैरिकेडिंग है , जो समस्या बनी है। दो महीने की अनुमति लेकर छह महीने पहले लगी थी मेट्रो की बैरिकेडिंग एसीपी ट्रैफिक अजय वाजपेयी ने बताया कि मेट्रो रेल कार्पोरेशन की ओर से करीब छह महीने पहले मेट्रो निर्माण से पहले मिट्टी की जांच के लिए दो महीने की अनुमति ली गई थी। इसके बाद अवधि समाप्त होने के बाद दो बार और अनुमति दी गई है। एस. कृष्णा चैतन्य, एमडी मप्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने बताया विसर्जन का मार्ग मेट्रो बैरिकेडिंग के कारण काफी संकरा हो गया है। जुलूस में बड़ी मूर्तियां भी शामिल होती हैं, ऐसे में जिन स्थानों पर रास्ता बेहद संकीर्ण हो गया है वहां मूर्तियां फंसने की आशंका है। इसको लेकर मेट्रो एमडी को पत्र लिखकर मांग की है कि रास्ते से या तो बेरिकेड्स हटाए जाएं या फिर उन्हें समेटें, जिससे मार्ग पर रास्ता मिल सके। अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अंतरविभागीय मामला है, अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान निकालेंगे। 

वाहन रजिस्ट्रेशन के डेटाबेस में वाहन स्वामी सारथी पोर्टल पर जाकर स्वयं कर सकते हैं अपडेट

भोपाल  परिवहन विभाग द्वारा मोबाइल नम्बर अपडेट करने के लिये इन दिनों विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। वाहन स्वामी अथवा डीलर नेशनल इन्फार्मेशन सेंटर (एनआईसी) के वाहन सारथी पोर्टल पर जाकर स्वयं ही आसानी से मोबाइल नम्बर अपडेट कर सकते हैं। प्रदेश में वाहन के पंजीयन और ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करते वक्त आवेदक को अपना मोबाइल नम्बर दर्ज करना अनिवार्य होता है। कई बार वाहन स्वामी की जगह डीलर अपना मोबाइल नम्बर दर्ज करा देते हैं। वाहन स्वामी और डीलर द्वारा सही मोबाइल नम्बर दर्ज कराने के बाद संबंधित व्यक्ति द्वारा मोबाइल नम्बर कुछ वर्षों बाद परिवर्तित कर देने के कारण डेटाबेस में संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं रह पाता है। परिवहन विभाग ने जानकारी दी है कि वाहन सारथी पोर्टल पर आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से मोबाइल नम्बर अपडेट करने की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है। आधार में दर्ज आवेदक और उसके अभिभावक के नाम का वाहन पंजीयन और ड्रायविंग लायसेंस के डेटाबेस में दर्ज नाम से शत-प्रतिशत मिलान होने पर डेटाबेस में मोबाइल नम्बर तत्काल अपडेट हो जाता है। आधार पंजीयन और ड्राइविंग लायसेंस के डेटाबेस में दर्ज नाम में भिन्नता पाई जाती है, तो आवेदक को पोर्टल पर अपना कोई दूसरा परिचय पत्र जैसे आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र और पासपोर्ट अपलोड करना पड़ता है। आरटीओ कार्यालय द्वारा दर्ज दस्तावेज और आधार से आवेदक और उसके अभिभावक के नाम का पंजीयन और ड्राइविंग लायसेंस में दर्ज नाम का सत्यापन किया जाता है। अप्रूवल के बाद मोबाइल नंबर डेटाबेस में अपडेट हो जाता है। अपडेड प्रक्रिया को विस्तृत रूप से स्क्रीन शॉट के माध्यम से समझाने के लिए मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के पोर्टल के होमपेज पर लिंक उपलब्ध कराई गई है। वर्तमान में वाहन रजिस्ट्रेशन एवं ड्राइविंग लायसेंस संबंधी समस्त सेवाओं के लिये ऑनलाइन आवेदन लिये जा रहे है। डेटाबेस रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त कर आवेदक को अपना सत्यापन कराना होता है। मोबाइल नंबर डेटाबेस पर उपलब्ध न होने पर कई बार आवेदक इन सेवाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं। संबंधित वाहन के विरूद्ध अन्य प्रणालियों से चालान जारी होने पर डेटाबेस पर सही नंबर न होने के कारण कई बार वाहन स्वामियों को चालान के संबंध में जानकारी प्राप्त नहीं हो पाती है। चालान का भुगतान लंबित होने पर ऐसे व्यक्तियों को परिवहन विभाग की सेवाओं से वंचित रहना पड़ सकता है। न्यायालयीन कार्रवाई की जाने पर उन्हें कोर्ट से समन भी आ सकते हैं। इन कारणों से मोबाइल नंबर अपडेट होना आवश्यक है। मोबाइल अपडेशन की विस्तृत प्रक्रिया मध्यप्रदेश परिवहन पोर्टल के यूआरएल transport.mp.gov.in पर उपलब्ध है।  

चप्पे-चप्पे पर नजर, रेलवे ने अगले तीन हफ्तों के लिए भीड़ प्रबंधन योजना बनाई

जबलपुर महाकुंभ के दौरान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन में भगदड़ की घटना के बाद रेलवे ने भीड़ प्रबंधन की सतत अग्रिम योजना पर काम शुरू कर दिया है। अब मंडल स्तर पर प्रत्येक तीन माह में कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके लिए रेल मंडल अगले तीन सप्ताह तक त्योहार, मेला और वीकेंड पर नजर रख रहे है। उन्हें ध्यान में रखकर स्टेशन एवं ट्रेन में भीड़ का अनुमान लगाया जा रहा है। यात्रियों की अतिरिक्त संख्या की आवाजाही को सुगम और सुरक्षित बनाने के उपाय तय किए जा रहे है। इस अचानक उमड़ने वाली भीड़ नियंत्रण की रिपोर्ट को प्रत्येक रेल मंडल के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। जिसे रेलवे बोर्ड को भी प्रेषित करना होगा। ताकि यात्री दबाव बढ़ने से स्टेशन पर अराजकता की स्थिति निर्मित होने से रोका जा सकें। अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विशेष ट्रेन, यात्री विश्राम स्थल के विस्तार सहित अन्य वैकल्पिक सुविधाओं को पहले ही सुनिश्चित कर लिया जाए। आवश्यकता होने पर बोर्ड की ओर से अतिरिक्त ट्रेन कोच, रैक एवं मानव श्रम उपलब्ध कराया जाएगा।   स्थानीय मेला, आयोजन का मांगा ब्योरा रेलवे बोर्ड की ओर से अभी तक कुंभ जैसे बड़े आयोजन और दीपावली को लेकर अलग से तैयारी की जाती थी। जिसका दायरा बढ़ाते हुए अब स्थानीय स्तर पर होने वाले मेला और आयोजन में यात्री सुविधाओं को बोर्ड ने अपने अंतर्गत ले लिया है। प्रत्येक मंडल से भीड़ नियंत्रण को लेकर तीन सप्ताह की अग्रिम योजना प्रेषित करने का निर्देश दिया है। जिसमें मंडल को अपने क्षेत्र के अंतर्गत पर्यटक स्थल के साथ ही तीज, त्योहार, मेला, प्रस्तावित धार्मिक व अन्य आयोजन एवं वीकेंड पर बढ़ने यात्री दबाव का अनुमान बताना है। भीड़ की संभावना पर स्टेशन की व्यवस्था और ट्रेनों के सुगम परिचालन की कार्ययोजना प्रेषित करना है। कुंभ के दौरान अपनाए गए प्रबंधन को अपेक्षाकृत छोटे स्तर पर लागू करना है। यात्री दबाव पर करने है यह उपाय व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना, सेंट्रल वॉर रूम बनाना। भीड़ रोकने स्टेशन के बाहर अस्थाई यात्री विश्राम स्थल का निर्माण। ट्रेन आने के आधा घंटा पूर्व कन्फर्म टिकट पर यात्री को प्लेटफॉर्म में प्रवेश। प्रवेश-निर्गम के अलग-अलग मार्ग। प्लेटफॉर्म टिकट विक्रय पर रोक। वीकेंड, त्योहार पर प्रतीक्षा सूची लंबी होने पर ट्रेन में अतिरिक्त कोच जोड़ना। आवश्यकतानुसार स्थानीय स्तर पर मेला, त्योहार स्पेशल ट्रेन चलाना। स्टेशन के बाहर ट्रेनों के आने-जाने का समय बताने वाले बड़े डिस्प्ले बोर्ड। फुट ओवर ब्रिज, रैंप पर यात्रियों को रुकने न देना, भीड़ को चलायमान रखना। प्रमुख जंक्शन और स्टेशन चिह्नित पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत प्रदेश में अधिक यात्री दबाव वाले 12 प्रमुख स्टेशन है। जिस पर त्योहार एवं किसी विशेष अवसर पर भीड़ बढ़ती है। जबलपुर और भोपाल रेल मंडल आने वाले संबंधित स्टेशनों में इटारसी, कटनी, बीना और सतना प्रमुख रेल जंक्शन है। जबलपुर जंक्शन, भोपाल जंक्शन, रानी कमलापति स्टेशन, मैहर और सागर को भी अवसर विशेष पर संबंधित रेल मंडल के भीड़ वाले स्टेशनों की सूची में शामिल किया है।  नवरात्र पर शारदा देवी दर्शन के लिए मैहर, हरे माधव परार्मा सत्संग समिति की ओर से माधव शाह बाबा के बर्शी मेले के दौरान कटनी और तब्लीग इज्तिमा के समय भोपाल रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। पश्चिम मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षित श्रीवास्तव के अनुसार विशेष अवसरों पर भीड़ के लिए अग्रिम कार्य योजना बनाई जा रही है। ताकि यात्रियों असुविधा न हो।

किसानों के लिए खुशखबरी! MP में तीन जगह बनेंगे Oil Seed Hub, बढ़ेगी पैदावार

ग्वालियर प्रदेश में खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब प्रदेश के तीन जिले ऑयल सीड हब बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध प्रदेश के तीन कृषि विज्ञान केन्द्रों में यह सीड हब स्थापित किए जाएंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने इसके लिए साढ़े सात करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। ये हब अलीराजपुर, शिवपुरी और ग्वालियर में शुरू किए जाएंगे। फसलों के बीज तैयार किए जाएंगे सीड हब के जरिए किसानों को तिलहन फसलों के उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। यहां मूंगफली, सरसों, तिल और सोयाबीन जैसी प्रमुख तिलहन फसलों के बीज तैयार किए जाएंगे। यह कदम किसानों को बेहतर पैदावार के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई का भी जरिया बनेगा। मूंगफली का बढ़ रहा रकबा पिछले कुछ वर्षों में मालवा क्षेत्र के अलावा चंबल के शिवपुरी इलाके में भी किसानों ने मूंगफली की खेती शुरू कर दी है। यहां मूंगफली का रकबा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मांग के अनुरूप बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहे। किसानों को मिलेगा फायदा ऐसे में नई किस्मों की मूंगफली बीज उत्पादन की दिशा में यह सीड हब किसानों की बड़ी जरूरत पूरी करेगा। अलीराजपुर में तिल सीड हब और ग्वालियर में सोयाबीन, सरसों, तिल और मूंगफली सीड हब बनेगा। सीड हब से किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज मिलेंगे। इससे उनकी उपज बढ़ेगी और आय में भी इजाफा होगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल न केवल प्रदेश को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने आयल सीड हब बनाने के लिए राशि मंजूरी कर दी है। यह हब किसानों के लिए फायदेमंद साबित होंगे। उन्हें बाजार से बीज नहीं खरीदना पड़ेगा इससे उनकी लागत कम होगी।   

गरीब बच्चों की शिक्षा खतरे में, ग्वालियर के प्राइवेट स्कूलों को दो साल से नहीं मिला फंड

ग्वालियर आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिया जाता है। इन छात्रों की फीस शासन की ओर से स्कूलों को दी जाती है। जिले के प्राइवेट स्कूलों को आरटीई की फीस प्रतिपूर्ति दो साल से नहीं मिली है। प्राइवेट स्कूलों का शासन के पास करीब 20 करोड़ की राशि अटकी हुई है। ऐसे में आगामी समय में आरटीई के तहत स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों पर असर पड़ सकता है। आरटीई के तहत हर प्राइवेट स्कूल को अपने स्कूल की पहली कक्षा में 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब व वंचित वर्ग के छात्रों काे प्रवेश देना होता है। इन छात्रों की फीस शासन स्तर से सीधे स्कूलों को दी जाती है। सत्र 2023-24 की प्रक्रिया पूरी, खातों में नहीं पहुंची राशि जिला शिक्षा केंद्र से सत्र 2023-24 की आरटीई फीस की प्रतिपूर्ति के लिए 796 प्रपोजल बनाए गए और भुगतान के लिए राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल भेजे गए हैं। इन प्रपोजल की राशि करीब 11 करोड़ है। लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र से इस सत्र की फीस प्रतिपूर्ति स्कूलों के खातों में नहीं पहुंची है। सत्र 2024-25 के भुगतान के लिए प्रकिया धीमी आरटीई के तहत 2024.25 के लिए फीस की प्रतिपूर्ति के लिए प्रक्रिया तो चल रही है, लेकिन अभी तक प्रपोजल सत्यापित नहीं हो पाए हैं। इस साल के लिए भी करीब 10 करोड़ की राशि प्राइवेट स्कूलों को मिलना है। प्रस्तावों का सत्यापन करने के लिए नोडल अफसरों की नियुक्ति न होने की वजह से प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है। जबकि अब सत्र 2025-26 भी शुरू हो चुका है।   किस तरह होती है प्रक्रिया? राज्य सरकार निजी स्कूलों को उस बच्चे की फीस का भुगतान करती है जो आरटीई के तहत प्रवेश लेता है। यह राशि या तो स्कूल द्वारा ली जाने वाली वास्तविक फीस होती है या सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे होने वाला खर्च होता है, जो भी कम हो, वही स्कूल को दिया जाता है। इसके लिए स्कूलों को अपने यहां पढ़ने वाले बच्चाें की फीस प्राप्त करने के लिए प्रपोजल बनाकर जिला शिक्षा कार्यालय देना होता है। प्रपोजल आने के बाद नोडल अधिकारी या दूसरे शब्दों में क्षेत्र के बीआरसी इन प्रपोजलों का सत्यापन करते हैं। सत्यापन होने के बाद ही प्रपोजल राज्य शिक्षा केंद्र भेजे जाते हैं। लेकिन वर्तमान में स्कूलों के प्रपोजलों का सत्यापन ही नहीं हो पा रहा है। क्या कहते हैं स्कूल संचालक? प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकरन सिंह भदौरिया का कहना है कि सरकार निजी स्कूलों से मान्यता या अन्य किसी चीज के लिए फीस जमा कराना हो तो करा लेती है और उसके लिए समय भी नहीं देती है। लेकिन जब स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति आदि देने की बात आती है तो ध्यान नहीं देती है। समय पर फीस प्रतिपूर्ति न होने से स्कूलों को आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसका असर छात्रों की पढ़ाई की व्यवस्था पर भी पड़ता है। पंकज पाठक, एपीसी, जिला शिक्षा केंद्र, ग्वालियर ने बताया सत्र 2023-24 की प्रतिपूर्ति के लिए 796 प्रपोजल राज्य शिक्षा केंद्र को भेजे गए हैं। भुगतान राज्य शिक्षा केंद्र से ही स्कूलों के खातों में होना है। सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति के लिए प्रक्रिया चल रही है। 

एमपी के 3 जिलों में बनेंगे ऑयल सीड हब, उत्पादन और रोजगार को मिलेगी रफ्तार

ग्वालियर प्रदेश के तीन जिलों- अलीराजपुर, शिवपुरी और ग्वालियर में आयल सीड हब स्थापित किए जाएंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने इसके लिए साढ़े सात करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। सीड हब के जरिये किसानों को तिलहनी फसलों के उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। यहां मूंगफली, सरसों, तिल और सोयाबीन जैसी प्रमुख तिलहन फसलों के बीज तैयार किए जाएंगे। यह कदम किसानों को बेहतर पैदावार के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई का भी जरिया बनेगा। तीनों कृषि विज्ञान केंद्र राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। मूंगफली का बढ़ रहा रकबा पिछले कुछ वर्षों में मालवा क्षेत्र के अलावा चंबल के शिवपुरी इलाके में किसानों ने मूंगफली की खेती शुरू कर दी है। यहां मूंगफली का रकबा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मांग के अनुरूप बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहे। ऐसे में नई किस्मों की मूंगफली बीज उत्पादन की दिशा में यह सीड हब किसानों की बड़ी जरूरत पूरी करेगा।   अलीराजपुर में तिल सीड हब और ग्वालियर में सोयाबीन, सरसों, तिल और मूंगफली सीड हब बनेगा। किसानों को ऐसे मिलेगा फायदा-सीड हब से किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज मिलेंगे। इससे उनकी उपज बढ़ेगी और आय में भी इजाफा होगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल न केवल प्रदेश को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे वैदिक घड़ी ऐप का उद्घाटन, सीएम हाउस में नई पहल

भोपाल  एमपी के सीएम हाउस में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी लगाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार यानि 1 सितंबर को इसका लोकार्पण करेंगे। इसी के साथ भारतीय काल गणना पद्धति और वैज्ञानिक परम्परा को नई पहचान मिलेगी। सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के साथ ही इसके मोबाइल एप का लोकार्पण भी किया जाएगा। इस मौके पर शौर्य स्मारक से मुख्यमंत्री निवास तक :भारत का समय – पृथ्वी का समय: नाम से युवाओं का मार्च होगा। मुख्यमंत्री युवाओं से संवाद भी करेंगे। वैदिक घड़ी भारतीय पंचांग और कालगणना को आधुनिक तकनीक से जोड़ती है। इसे 189 से अधिक भाषाओं में देखा जा सकेगा। इस अद्वितीय घड़ी के माध्यम से समय के साथ-साथ पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, वार, मास, व्रत और त्यौहारों की जानकारी भी मिल सकेगी। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली घड़ी है। भारतीय काल गणना सर्वाधिक विश्वसनीय पद्धति का पुनर्स्थापन विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के रूप में उज्जैन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 फरवरी 2024 को किया गया था, जिसे देश और दुनिया में अच्छा प्रतिसाद मिला।   विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के मोबाइल ऐप में 3179 विक्रम पूर्व यानि श्रीकृष्ण के जन्म, महाभारतकाल से लेकर 7000 से अधिक वर्षों के पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मास, व्रत एवं त्यौहारों की दुर्लभ जानकारियां शामिल की गई हैं। धार्मिक कार्यों, व्रत और साधना के लिए 30 अलग-अलग शुभाशुभ मुहूर्तों की जानकारी एवं अलार्म की सुविधा भी है। प्रचलित समय में वैदिक समय (30 घंटे), वर्तमान मुहूर्त स्थान, GMT और IST समय, तापमान, हवा की गति, आर्द्रता एवं मौसम संबंधी सूचनाएं भी लोगों को मिलेगी। ऐप पर 189 से अधिक भाषाओं में सूचनाएं उपलब्ध हैं।   भारत का समय – पृथ्वी का समय" मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने बताया कि 1 सितम्बर को सुबह 9 बजे शौर्य स्मारक पर कॉलेज, विश्वविद्यालयों के युवा और विद्यार्थी एकत्रित होंगे। यहां से बाइक, बस रैली "भारत का समय – पृथ्वी का समय" आरंभ होगी, जो श्यामला हिल्स थाने तक जायेगी। श्यामला हिल्स थाने में बाइक पार्क कर रैली पैदल मार्च में बदलकर मुख्यमंत्री निवास के मुख्य द्वार तक पहुंचेगी। इस मौके पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी: भारत के समय की पुनर्स्थापना की पहल विषय युवा संवाद कार्यक्रम भी होगा, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं से चर्चा करेंगे।

राज्यमंत्री गौर ने कहा- स्वदेशी ही समृद्धि का आधार है

स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान के समापन कार्यक्रम में शामिल हुई भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि स्वदेशी से स्वावलंबन और स्वावलंबन से सशक्त भारत बनता है। यह बात रविवार को भोपाल स्थित राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षण प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में आयोजित दो दिवसीय स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान के अखिल भारतीय महिला प्रशिक्षण के समापन कार्यक्रम में कहीं। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत को गढ़ने में महिलाओं की सहभागिता देश के उज्जवल भविष्य का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक महिलाओं ने हमेशा निर्णायक भूमिका निभाई है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने देश के विभिन्न राज्यों से आयी 124 प्रतिभागी महिलाओं को संबोधित करते हुए स्वदेशी विचारधारा, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प और महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि स्वदेशी मूल्यों पर आधारित यह अभियान न केवल महिला शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में हमारी सक्रिय भूमिका को भी सुदृढ़ करता है। हर घर में स्वदेशी का आहवान आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस अवसर पर राष्ट्रीय संगठक स्वदेशी जागरण मंच श्री कश्मीरी लाल जी, अखिल भारतीय महिला प्रमुख स्वदेशी जागरण मंच श्रीमती अर्चना मीना, निदेशक एन. आई. टी. टी. आर, भोपाल प्रो. चंद्र चारु त्रिपाठी, डॉ. प्रतिभा चतुर्वेदी, डॉ. रश्मि विजय सहित कई पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री ने ग्राम राजौधा में किया सांदीपनि विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण

नये महाविद्यालय भवन का भूमिपूजन भी किया महाराजा मानसिंह तोमर के नाम से जाना जाएगा महाविद्यालय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी अन्नदाताओं (किसानों) को सम्मान और सुविधा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द 20 लाख से अधिक किसानों को सोलर पावर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उन्हें बिजली बिल की समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मुरैना जिले के ग्राम राजौधा में आयोजित लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहा कि प्रदेश के किसानों को केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से 6-6 हजार रुपए, इस प्रकार कुल 12 हजार रुपए सम्मान निधि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार प्रदेश की सभी लाड़ली बहनों को दीपावली के बाद भाईदूज से हर माह 1500 की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के बेटे-बेटियां खूब पढ़ें-लिखें, इसके लिए सरकार सभी इंतजाम कर रही है। बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप, होनहार विद्यार्थियों को स्कूटी, साथ ही साइकिल और गणवेश भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश का सर्वांगीण विकास ही हमारा लक्ष्य है। प्रदेश का कोई भी अंचल विकास से वंचित नहीं रहने दिया जायेगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 52 करोड़ 59 लाख्र रुपए से अधिक लागत के विकास कार्यों को लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इसमें 37.67 करोड़ की लागत से नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालय भवन का लोकार्पण और 14.92 करोड़ की लागत के नये शासकीय महाविद्यालय भवन का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि यह नया महाविद्यालय भवन महाराजा मानसिंह तोमर के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस महाविद्यालय में सभी जरूरी पाठ्यक्रम एवं संकाय प्रारंभ किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज राधाष्टमी है। इस शुभ प्रसंग के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के गुरु सांदीपनि के नाम से विद्यालय भवन का लोकार्पण सरकार के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि हाल ही में समीपवर्ती श्योपुर जिले को मेडिकल कॉलेज की सौगात दी गई है और मुरैना भी विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। मुरैना की धरती से श्री नरेंद्र सिंह तोमर जैसे बड़े राजनेता निकले हैं। प्रदेश के कई जिले आगे बढ़ गए, लेकिन चंबल के जिले पिछड़ गए। कांग्रेस की सरकारों ने डाकुओं को बढ़ावा दिया और युवाओं का भविष्य खराब कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाया जा रहा है। शहर-शहर में सांदीपनि विद्यालय खोले जा रहे हैं। ऐसे ही सांदीपनि आश्रम में श्रीकृ्ष्ण ने वेद, शास्त्रों और विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया था। भगवान श्रीकृष्ण ने कंस को मारकर संदेश दिया कि सत्ता अत्याचार के लिए नहीं, बल्कि जनकल्याण का माध्यम होती है। विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की विकास के प्रति ललक, समाज के हर वर्ग के लिए संवेदनशीलता और संकल्प से विकास की गंगा गांव-गांव तक पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ही इस गांव में महाविद्यालय खोलने की घोषणा की थी। फिलहाल इस महाविद्यालय का संचालन गांव के स्कूल भवन से हो रहा है। महाविद्यालय में वर्तमान में बीए संकाय में 240 से अधिक बालिकाएं अध्ययनरत हैं। नए भवन में बीएससी और बीकॉम संकाय भी प्रारंभ होंगे, जिससे क्षेत्र की महाविद्यालय में पढ़ने की आकांक्षी 500 से अधिक छात्राओं को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सांदीपनि विद्यालय 27 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ है। बड़े से बड़े विद्यालयों में भी सांदीपनि जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी। पहले किसी गांव में विद्यालय बनता था तो कक्ष कम और विद्यार्थी अधिक होते थे। तब जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया जाता था कि एक कक्ष और बन जाए, इसकी घोषणा हो जाए। राज्य सरकार ने सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से किसान और गरीबों के बच्चों को सौगात दी है। राजौधा में महाविद्यालय भवन का भी शिलान्यास हो रहा है। यहां महाविद्यालय की शुरुआत होने से विद्यार्थियों में बेहद हर्ष व्याप्त है। पोरासा में अस्पताल खुलने से नागरिकों को चिकित्सा सुविधाएं भी मिली हैं। सांसद श्री शिवमंगल सिंह तोमर ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में विकसित विद्यालयों की श्रृंखला से चंबल अंचल के विद्यार्थियों को श्रेष्ठ शिक्षा का अवसर मिल रहा है। यह विद्यालय निश्चित रूप से क्षेत्र और प्रदेश का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेगा। उन्होंने कहा कि चंबल की धरती पर महाराज श्री लोचनदास, महाराज श्री रामदास, श्री बालकदास, श्री माखनदासजी और ऋषिजी का जन्म हुआ। सांसद श्री सिंह ने मुरैना जिले को ढेरों सौगातें देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार जताया। कार्यक्रम में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, छात्र-छात्राएँ एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे। ग्राम ओरेठी में आसमानी माता मंदिर में किया पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुरैना प्रवास के दौरान तहसील पोरसा के ग्राम ओरेठी स्थित प्रसिद्ध आसमानी माता मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की।