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भव्य हवन में बांटी भस्म, दादा धूनीवाले दरबार में 20 पीपा रसगुल्ले और सोने-चांदी की आहुति

नर्मदापुरम नर्मदापुरम में दादा धूनीवाले दरबार में चल रहे अनुष्ठान में 20 तोला सोने और चांदी की आहुति दी गई। इसके अलावा हवन में 200 साड़ियां, चुनरियां, मगज के 11 हजार लड्डू, 20 पीपा रसगुल्ला, फल और पूजन सामग्री भी डाले गए।  ये अनुष्ठान नर्मदापुरम के हैप्पी मैरिज गार्डन में 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर शुरू हुआ था। समापन आज शुक्रवार शाम होगा। इससे पहले गुरुवार रात को आयोजित महाहवन और महाआरती में 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन परंपरागत 'धूनीमाई' पद्धति से किया गया, जो दादाजी के समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। सेवादार दादा शिवानंद महाराज ने कहा- किसी धार्मिक अनुष्ठान में पहली बार ऐसी हवन सामग्री अर्पित की गई है। यदि कोई ऐसा करता है, तो उसे 7 करोड़ रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इस तरह के आयोजन का प्रमाण वीडियो के रूप में पेश करने पर 51 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। अब तक सवा किलो सोना, एक किलो चांदी की आहुति सेवादार दादा शिवानंद महाराज ने बताया कि 51 दिन से जारी हवन में रोज काजू, किशमिश, बादाम, लड्डू और नारियल की आहुति दी जा रही है। हर गुरुवार को विशेष महाआरती और हवन होता है। 10 जुलाई से 29 अगस्त तक हर गुरुवार को 20 तोला सोना और चांदी के आभूषण की आहुति दी गई। अब तक करीब सवा किलो सोना और एक किलो चांदी की आहुति दी जा चुकी है। इस भस्म को प्रसादी के रूप में बांटा जाता है। दादाजी सेवक साहब सिंह लोधी ने बताया- हवन के बाद धूनीमाई की भस्म को छान लिया जाता है। बड़े अवशेष नर्मदा नदी में विसर्जित कर दिए जाते हैं। बची भस्म को श्रद्धालुओं में बांट दिया जाता है। चंदा या आर्थिक सहयोग नहीं लिया, स्वेच्छा से मिली सामग्री का उपयोग शिवानंद महाराज ने बताया कि पूरे आयोजन में किसी भी श्रद्धालु से चंदा या आर्थिक सहयोग नहीं लिया गया। जो भी सामग्री उपयोग की गई, वह श्रद्धालुओं द्वारा स्वेच्छा से दी गई थी। इसी सामग्री का उपयोग दरबार में भंडारे और हवन के लिए किया गया। 51 दिन तक लगातार सुबह-शाम काशी से आए ब्राह्मणों ने रूद्राभिषेक, हवन और आरती की। दोनों समय भंडारे हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। शिवानंद महाराज ने कहा कि यदि उनका प्रवास नवरात्रि के समय नर्मदापुरम में रहेगा तो ब्राह्मणों द्वारा दुर्गा सप्तशती के अखंड पाठ कराए जाएंगे। अखंड ज्योति भी जलाई जाएगी। 100 से ज्यादा घंटे बांधे, 5100 दीपकों से सजाया अनुष्ठान में पहुंचे छीपानेर निवासी पृथ्वीराज सिंह चौहान ने बताया कि वे परिवार सहित हर दिन 51 हजार नर्मदेश्वर शिवलिंग के अभिषेक में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि दादाजी का दरबार केवल मनोकामना पूर्ति नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी है। आयोजन स्थल पर 100 से अधिक घंटे बांधे गए थे। मंच को 5100 दीपकों से सजाया गया था।

जस्टिस शम्भू सिंह नहीं रहे, इंदौर हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश का आज होगा अंतिम संस्कार

इंदौर राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील के ग्राम ढाबला निवासी और इंदौर हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति शम्भू सिंह (85) का गुरुवार देर रात निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और इंदौर के अरविंदो अस्पताल में भर्ती थे। परिवार के अनुसार जस्टिस शम्भू सिंह का अंतिम संस्कार शुक्रवार दोपहर 1 बजे पैतृक गांव ढाबला में होगा। निधन की खबर फैलते ही गांव और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग गांव पहुंचकर शोकाकुल परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। निष्पक्षता और सादगी के लिए जाने जाते थे जस्टिस शम्भू सिंह अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान निष्पक्ष फैसलों, ईमानदार छवि और सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए पहचाने जाते थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। 2004 में लड़ा था लोकसभा चुनाव वर्ष 2004 में उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में राजगढ़ लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन क्षेत्र में उनकी पहचान न्यायप्रिय और सरल स्वभाव वाले नेता के रूप में बनी रही। न्यायिक और राजनीतिक जगत में शोक उनके निधन से न्यायिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र को गहरा आघात पहुंचा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।  

मोटापा इलाज के लिए MP में खुल रहा पहला सरकारी ओबेसिटी क्लीनिक

इंदौर एमवाय अस्पताल में ओबेसिटी क्लीनिक की स्थापना की जा रही है। यह प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल होगा, जहां मोटापे से पीड़ित लोगों को आधुनिक चिकित्सा और परामर्श की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। यह क्लीनिक एक माह के अंदर ओपीडी बिल्डिंग की तल मंजिल पर प्रारंभ होगा। इसके लिए सभी आवश्यक योजनाएं तैयार कर ली गई हैं। ओबेसिटी क्लीनिक में पेट रोग विशेषज्ञ, गैस्ट्रो सर्जन, एंडोक्रेनोलाजिस्ट, एमडी मेडिसिन जैसे विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे। वर्तमान में मरीजों को बैरिएट्रिक सर्जरी के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है, जहां लाखों रुपये का खर्च आता है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध होगी।   मरीजों को किया जाएगा जागरूक इलाज के साथ ही मरीजों को मोटापे से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। डाइटीशियन और फिजियोथेरेपिस्ट भी इस टीम का हिस्सा होंगे। मरीजों को डाइट चार्ट, व्यायाम की विधियां और जीवनशैली सुधार के बारे में नियमित जानकारी दी जाएगी। प्रति सोमवार ओपीडी अधिकारियों ने बताया कि ओबेसिटी क्लीनिक में प्रति सोमवार को ओपीडी लगाई जाएगी। अन्य विभागों से मोटापे से ग्रस्त मरीजों को भी यहां भेजा जाएगा। मरीजों का बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) जांचा जाएगा। साथ ही बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच के बाद उचित इलाज किया जाएगा। बच्चे और युवा भी हो रहे प्रभावित विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा केवल दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जैसे मधुमेह, रक्तचाप, हृदय रोग, हड्डियों की कमजोरी, स्लीप एपनिया और कैंसर। प्रदेश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी किसी न किसी स्तर पर मोटापे से प्रभावित है, जिसमें बच्चों और युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। तेजी से बढ़ रही मोटापे की समस्या को देखते हुए एमवाय अस्पताल की ओपीडी बिल्डिंग में ओबेसिटी क्लीनिक की स्थापना की जा रही है। मरीजों को यहां जांच से लेकर सर्जरी की सुविधा फ्री मिलेगी। – डा. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज।

रायसेन : लापता निकिता का पंजाब में पता चला, हार्वेस्टर चलाने वाले प्रेमी संग ब्याह

रायसेन  मध्य प्रदेश इन दिनों युवतियों के रहस्यमयी ढंग से गायब होने की घटनाओं से हलाकान है. कटनी की अर्चना तिवारी के नेपाल बॉर्डर से मिलने के बाद अब रायसेन जिले की निकिता लोधी संगरूर (पंजाब) से बरामद हुई है. पुलिस ने निकिता को पंजाब से दस्तयाब किया है. वह हार्वेस्टर चलाने वाले युवक के साथ भागकर शादी कर चुकी थी. रायसेन के गैरतगंज के टेकापार निवासी निकिता लोधी 18 अगस्त से लापता थी. परिजनों ने बहुत ढूंढने के बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. निकिता 8 दिन से लापता थी और परिजन उसे तलाश रहे थे.  वह 18 अगस्त को कॉलेज की फीस जमा करने कंप्यूटर शॉप गई थी, लेकिन घर नहीं लौटी. परिजनों ने रिश्तेदारों सहित हर जगह तलाश की, फिर गैरतगंज थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने 19 अगस्त को गुमशुदगी का मामला दर्ज कर तलाश शुरू की. 8 दिन बीतने पर परिजन परेशान थे. उन्होंने भोपाल, रायसेन और आसपास तलाश की. परिजनों ने डीजीपी और सीएम मोहन यादव से गुहार लगाई ताकि पुलिस अर्चना तिवारी की तरह निकिता को भी गंभीरता से ढूंढे. पुलिस ने CCTV फुटेज और CDR खंगालना शुरू किया.  परिजनों के अनुसार, पुलिस ने निकिता की लोकेशन कभी पंजाब, कभी तेलंगाना के हैदराबाद में बताई, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई. मध्य प्रदेश के बाहर उनका कोई संपर्क नहीं था. पुलिस को पंजाब के संगरूर में निकिता की लोकेशन मिली और गुरुवार शाम उसे वहां से बरामद किया गया.  रायसेन एसपी पंकज पांडे ने बताया, निकिता हारवेस्टर चलाने वाले युवक के साथ भागी थी. दोनों ने पंजाब में मंदिर में शादी कर ली थी. दोनों ने पंजाब पुलिस से प्रोटेक्शन के लिए आवेदन दिया था. रायसेन पुलिस निकिता को लेकर रायसेन लौट रही है.

चंबल के स्वाद का अनुभव: ग्वालियर कॉन्क्लेव में बिना प्याज-लहसुन के खास व्यंजन

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के साथ-साथ ग्वालियर चंबल अंचल पर्यटन निवेश को बढ़ावा और नये आयाम देने के लिए 29 और 30 अगस्त को ग्वालियर में रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित होने जा रहा है। ये कॉन्क्लेव राजमाता विजय राजीव कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित होगा। इस कॉन्क्लेव में 30 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे। इस कॉन्क्लेव में पर्यटन की संभावनाओं को लेकर कई राज्यों की टूर एंड ट्रेवल्स ऑपरेटर होटल एम्यूजमेंट इंडस्ट्रीज के लोग शामिल होंगे। इसमें निवेश, सांस्कृतिक धरोहर और अनुभवात्मक पर्यटन पर खास फोकस रहेगा। कार्यक्रम में सीएम के अलावा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सहित प्रदेश और देशभर से उद्योगपति मौजूद रहेंगे। सबसे खास बात यह है कि इस कॉन्क्लेव में शामिल होने आ रहे मेहमानों के लिए चंबल की मशहूर व्यंजन ऑन से स्वागत किया जाएगा, जैसे चंबल की मशहूर गजक, बेड़ई, समोसा और रबड़ी जैसे जायकों से अतिथियों का स्वागत किया जाएगा। इस कॉन्क्लेव में मिठाई से भी मेहमानों को ग्वालियर चंबल का स्वाद मिलेगा। पहले दिन रसखीर, लंबा हलवा, गुजिया परोसी जाएगी। दूसरे दिन 30 अगस्त को गजक, रबड़ी संग जलेबी, खजूर, मूंग हलवा दिए जाएंगे। खास बात यह है कि मेहमानों हेतु अरबी मखाना और भरवां करेला जैसी सब्जियां बिना प्याज लहसुन पकेगी।    

विश्वास सारंग का ऐलान, मध्यप्रदेश की हर पैक्स बनेगी WDRA की सदस्य

मध्यप्रदेश की सभी पैक्स डब्ल्यू.डी.आर.ए. की सदस्य बनेंगी – विश्वास सारंग सहकारी संस्थाओं के व्यवसाय विविधीकरण पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न भोपाल अपेक्स बैंक के समन्वय भवन में भांडागारण विकास और विनियामक प्राधिकरण (डब्ल्यू.डी. आर.ए.) के माध्यम से सहकारी संस्थाओं के व्यवसाय विविधीकरण पर अपेक्स बैंक, सहकारिता विभाग एवं विनियामक प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए मध्य प्रदेश के सहकारिता तथा खेलकूद एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था से गांव व किसान को जोड़ने की दिशा में माननीय प्रधानमंत्री जी ने जो जन-धन योजना भारत में लागू किया था, उसका मुख्य उद्देश्य गाॅंव व किसान को देश की अर्थव्यवस्था से जोड़ना था, जिसके सकारात्मक परिणाम आज सामने आ रहे हैं और हमारा देश माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एवं केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में निरन्तर ’’सहकार से समृद्धि’’ के मूल-मंत्र को साकार करने की दिशा में अग्रसर है ।  इसका अनुसरण करते हुये मध्यप्रदेश में हम स्वर्णिम मध्यप्रदेश के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी के नेतृत्व में भी नवाचार के विभिन्न माध्यमों का प्रयोग करते हुये प्रदेश की प्रगति के लिये काम कर रहे हैं ।  श्री सारंग ने कहा कि मेरा मानना है कि जब तक अर्थव्यवस्था आम आदमी के दरवाजे से नहीं निकलेगी, तब तक मजबूत नहीं होगी ।  इसलिये यदि हम किसानों को सुदृढ़ करना चाहते हैं तो पहले हमें पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों) को समृद्ध बनाने की दिशा में प्रयास करना होंगे और आज की यह कार्यशाला निश्चित रूप से ’’मील का पत्थर’’ साबित होगी ।  मैं आज अत्यन्त आभारी हॅूं डब्ल्यू.आर.डी.ए. के सदस्य श्री अनूप श्रीवास्तव का, आयुक्त सहकारिता श्री मनोज पुष्प का, स्टेट वेयर हाउसिंग के प्रबंध संचालक श्री अनुराग वर्मा का और सेंट्रल वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री राम कुमार का, जिनके अथक प्रयासों से आज सहकारिता के शीर्ष सभागार में मध्यप्रदेश के सहकारी आन्दोलन से जुड़ा प्रत्येक अधिकारी व सदस्य लाभान्वित हुआ है।   श्री सारंग ने कहा कि मैं उपस्थित जिला बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से अपेक्षा करता हॅूं कि वे मध्यप्रदेश की प्रत्येक पैक्स को डब्ल्यू.आर.डी.ए. (भांडागारण विकास और विनियामक प्राधिकरण) का सदस्य बनाने के प्रयास आज से ही प्रयास आरंभ कर दें, जिससे कि आगे चलकर प्रदेश के किसानों को दूरदराज अंचलों में परेशान न होना पड़े व अपने नजदीकी डब्ल्यू.आर.डी.ए. के सदस्य वेयर हाउस में अपनी उत्पाद को सुरक्षित रख लाभान्वित हों, क्योंकि जब तक भण्डारण व्यवस्थित नहीं होगी, तब तक किसानों को उसका फायदा नहीं मिल सकेगा ।  कार्यशाला में श्री सारंग ने अपेक्स बैंक द्वारा प्रकाशित मानक परिचालन प्रक्रिया वेयर हाउसिंग डेव्हलेपमेंट एण्ड रेग्यूलेटरी अथाॅरिटी की योजनान्तर्गत वेयर हाउस पंजीकरण की पुस्तक का विमोचन भी किया तथा प्रदेश में गोदाम बनाने की योजना पर कार्य करने हेतु स्टेट वेयर हाउसिंग प्रबंध संचालक श्री अनुराग वर्मा, म.प्र.राज्य सहकारी संघ के प्रबंध संचालक श्री रितुराज रंजन तथा सहकारिता विभाग के नवाचार प्रकोष्ठ के संयुक्त आयुक्त श्री महेन्द्र दीक्षित को अधिकृत किया। आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक श्री मनोज पुष्प ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के दौरान हम किसानों को प्रशिक्षित करें कि वे अपने उत्पाद को कैसे बेहतर ढंग से रख सकते हैं और डिजीटली किस प्रकार बेच सकते हैं, आज की यह कार्यशाला एग्रो प्रोसेसिंग व मार्केंटिंग की दिशा में अत्यन्त उपयोगी है । उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो इस प्रकार की कार्यशाला हम संभाग व जिला स्तर पर भी आयोजित करेंगे । कार्यशाला में श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, सदस्य, डब्ल्यू.डी. आर.ए. ने कहा कि 2051 तक हमारे देश की जनसंख्या 170 करोड़ हो जायेगी व मध्यप्रदेश की लगभग 12 करोड़, जो देश का लगभग 6.3 होगी ।  म.प्र. का खाद्यान्न उत्पादन लगभग 338 लाख मी.टन है, जो भारत के खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 12.10 प्रतिषत है ।  भारत 2051 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा ।  मैं अनुरोध करना चाहता हॅूं कि इस मान से प्रदेश में वेयर हाउस के गोदामों के लिये एक सुनियोजित योजना बनाने की दिशा में प्रयास किये जायें । श्री रामकुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, सी.डब्ल्यू.सी. ने बताया कि यदि केन्द्रीय वेयर हाउसिंग में डब्ल्यू.डी.आर.ए. के अन्तर्गत देश के 50 हजार गोदाम यदि रजिस्टर्ड हो जायें तो किसान आपके द्वार तक आ जायेंगे । इससे आपकी साख भी बढ़ेगी और किसान के साथ आप भी हमारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे, क्योंकि हमारा उद्देश्य वेयर हाउस केन्द्रों को लाभ का केन्द्र बनाना है ।  इससे किसानों के उत्पाद सुरक्षित होंगे और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से भी बचा जा सकता है । कार्यशाला में श्री विनीत गुप्ता, नेषनल ई-रिपोजिटरी लिमिटेड, श्री जसवीर गोदारा, एवीपी सीसीआरएल, श्री संजय अग्रवाल, अपना गोदाम ने अपनी डिजीटल व्यवसाय प्रणाली पर विचार व्यक्त किये ।  कार्यशाला का संचालन अपेक्स बैंक के प्राचार्य श्री पी.एस.तिवारी एवं श्री महेन्द्र दीक्षित, संयुक्त आयुक्त ने किया एवं आभार प्रदर्शन अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने किया ।  कार्यशाला मध्यप्रदेश के सहकारिता विभाग के संयुक्त/उप/सहायक आयुक्तगण, जिला बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारीगण, वेयर हाउस व एफपीओ के प्रतिनिधिगण के साथ विभिन्न सहकारी संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित हुए

रसोई में बरतें सावधानी! कीटनाशक स्प्रे और सिलेंडर पर पानी डालना पड़ सकता है भारी

संत हिरदाराम नगर खाना बनाते समय सतर्क रहना चाहिए। रसोई गैस का उपयोग सुरक्षा मापदंड के अनुरूप ही करना चाहिए। कीटनाशक स्प्रे के प्रयोग से भी आग लग सकती है।  संत हिरदाराम कॉलेज में आयोजित फायर ड्रिल एवं इवैक्यूएशन कार्यशाला को संबोधित करते हुए अग्निशमन विशेषज्ञ साजिद खान ने यह बात कही। खान ने छात्राओं को आग लगने की विभिन्न परिस्थितियों विशेष रूप से एलपीजी गैस और पेट्रोल से उत्पन्न अग्निकांड से निपटने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि रसोई में खाना बनाते समय या कीटनाशक स्प्रे के प्रयोग से भी आग लग सकती है, और ऐसे हालात में क्या सावधानियां अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एलपीजी से लगी आग को पानी से नहीं बुझाना चाहिए। आग बुझाने के लिए अग्निशामक यंत्र का ही प्रयोग करना चाहिए। आग बुझाते समय घबराएं नहीं खान ने कहा कि आग बुझाते समय घबराएं नहीं। उन्होंने लेक्ट्रिक शाक से बचाव के उपायों, अग्निशामक यंत्रों के विभिन्न प्रकारों तथा उनके उपयोग की जानकारी भी व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से दी। उन्होंने नागरिकों से सुरक्षा के प्रति सजग रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान भी किया। प्राचार्य डालिमा पारवानी ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए कहा कि हमें जागरूक नागरिक बनने की प्रेरणा मिली है। इस मौके पर एनसीसी इकाई की प्रभारी शांति शर्मा सहित अनेक लोग मौजूद थे।  

अनुराग जैन एक साल के लिए और मुख्य सचिव बने रहेंगे, सरकार के द्वारा एक्सटेंशन दिया

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिल गया है. यानी उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने उन्हें बधाई दी . मुख्य सचिव इसी महीने की आखिरी तारीख यानी 31 अगस्त को रिटायर होने वाले थे, लेकिन अब वह एक साल और इस पद पर बने रहेंगे. अनुराग जैन ने सितंबर 2024 में ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव में पदभार संभाा था. सीएम डॉ मोहन यादव ने दी बधाई सीएम ने लिखा, मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव अनुराग जैन आपको कार्यकाल के एक वर्ष बढ़ाए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. आपके दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, नवाचारों और सतत् प्रयासों से प्रदेश की विकास यात्रा निरंतर नए प्रतिमान स्थापित करे, मेरी मंगलकामनाएं. सीएम डॉ मोहन यादव ने बुलाई थी आज सर्वदलीय बैठक मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें सभी दलों ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने पर सहमति जताई है. ओबीसी को 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है. बैठक बुलाने के बाद सीएम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित पिछड़ा वर्ग के लिए 27% आरक्षण के मामले को लेकर भोपाल निवास पर सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया गया कि इस मामले में सभी दल एकजुट होकर एक फोरम पर आएंगे. इस मामले में विभिन्न पक्षों के अधिवक्तागण भी 10 सितंबर तक एक साथ बैठकर बात करेंगे. यह भी तय किया गया कि चयन प्रक्रिया में विभिन्न न्यायिक आदेशों के चलते नियुक्ति आदेश जारी किए जाने से वंचित शेष 13% अभ्यर्थियों को उनके नियुक्ति पत्र जारी किए जाने हेतु एकजुट होकर सभी फोरम, जिसमें विधायिका, न्यायपालिका एवं कार्यपालिका सम्मिलित हैं, पर इसे क्रियान्वित करने के लिए मिलकर प्रयास करेंगे. इकबाल सिंह को दो बार मिला था एक्सटेंशन पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में इकबाल सिंह बैंस को केंद्र सरकार ने दो बार एक्सटेंशन दिया था। उन्हें 6-6 महीने का एक्सटेंशन दिया गया था। जिससे वह 2022 में रिटायर होने के बाद नवम्बर 2023 तक सेवा में रहे। इसके बाद वीरा राणा तो मुख्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्हें भी 6 महीने का एक्सटेंशन दिया गया था। जिसके बाद वह 30 सितम्बर 2024 को रिटायर हुई थीं। सीएम मोहन यादव ने दी बधाई सीएम डॉ मोहन यादव ने एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा कि मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन जी, आपको कार्यकाल के एक वर्ष बढ़ाए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपके दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, नवाचारों और सतत् प्रयासों से प्रदेश की विकास यात्रा निरंतर नए प्रतिमान स्थापित करे, मेरी मंगलकामनाएं। सीएम मोहन यादव को आवंटित हुआ सरकारी बंगला गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को दिल्ली में अशोक रोड पर सरकारी बंगला आवंटित हुआ है। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ पहुंचकर गृह प्रवेश किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आवास में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात की। अनुराग का आना अहम दरअसल, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जबलपुर के कार्यक्रम के बाद दिल्ली रवाना हुए। उनके साथ ही सीएम डॉ. मोहन यादव भी पहुंचे। इस बीच सीएस अनुराग जैन(Chief Secretary Anurag Jain) अलग से दिल्ली पहुंचे। अभी तक सीएस को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन सीएम डॉ. मोहन इस मामले में शीर्ष नेतृत्व से चर्चा कर चुके हैं। अनुराग को 1 अक्टूबर 2024 को सीएस बनाया गया था। सिंहस्थ-28 पर भी मंथन दिल्ली में गृह मंत्री शाह, नड्डा, सीएम समेत अन्य केंद्रीय नेतृत्व के साथ प्रदेश के विकास पर मंथन हुआ। इसमें अहम विषय सिंहस्थ का रोडमैप था। इस पर कई पहलुओं पर चर्चा हुई। बताते हैं, सरकार ने सिंहस्थ से जुड़े काम की रिपोर्ट दी। नए काम की योजना बताई। इसमें भीड़ प्रबंधन, लोक परिवहन पर जोर दिया गया। सुरक्षा से जुड़े मसले पर बातचीत हुई। मोदी की पसंद के अफसर हैं अनुराग जैन आपको बता दें कि अनुराग जैन पीएम मोदी की टीम में काम कर चुके हैं। वह पीएम की पसंद के अधिकारी हैं। दूसरी ओर यह चर्चा है कि अगर मुख्य सचिव जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है तो उन्हें केंद्र में या प्रदेश में नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। अगर जैन को विस्तार नहीं मिला तो अपर मुख्य सचिव डॉ राजेश राजौरा सीएम के लिए सबसे प्रबल दावेदार हैं।

मध्यप्रदेश के खेलों की 70 वर्षों की यात्रा: विरासत से आधुनिक उपलब्धियों तक

खेल दिवस 29 अगस्त पर विशेष भोपाल  स्वतंत्रता से लेकर आज तक मध्यप्रदेश ने खेलों के क्षेत्र में एक लंबी और प्रेरणादायक यात्रा तय की है। शुरुआती दशकों में जहाँ खेल केवल एक सीमित दायरे में थे, वहीं धीरे-धीरे यह प्रदेश खेल प्रतिभा का गढ़ बन गया। खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और जज्बे के दम पर प्रदेश और देश का नाम रौशन किया। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे शहर धीरे-धीरे खेल प्रतिभा के गढ़ बनते गए और आज स्थिति यह है कि मध्यप्रदेश, भारत के खेल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान बना चुका है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन जैसे शहरों ने क्रिकेट, हॉकी और मल्लखम्ब जैसे खेलों को पहचान दिलाई। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी मैदानों तक खेलों ने युवाओं के बीच ऊर्जा और आत्मविश्वास पैदा किया। वर्ष 1950 से 1980 का दौर क्रिकेट और पारंपरिक खेलों का रहा। होलकर क्रिकेट टीम ने रणजी ट्रॉफी में लगातार जीत हासिल कर मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई, वहीं ग्वालियर और उज्जैन ने मल्लखम्ब को एक नई पहचान दी। वर्ष 1980 से 2000 के बीच कराटे और बैडमिंटन जैसे खेलों का विस्तार हुआ और मध्यप्रदेश ने पहली बार ओलंपिक स्पर्धाओं में प्रतियोगी खेलों की तरफ गंभीर कदम बढ़ाए। इसके बाद 21वीं सदी ने खेलों को पूरी तरह बदल दिया। हॉकी की नर्सरी जब भी हॉकी की बात आती है तो भोपाल का विशेष उल्लेख आता है। भोपाल को लंबे समय से “हॉकी की नर्सरी” कहा जाता है। यहाँ से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले हैं। वर्ष 1950 और 60 के दशक से ही यहाँ हॉकी की परंपरा मजबूत रही और यही वजह है कि ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले कई नामचीन खिलाड़ी भोपाल से जुड़े रहे। अशोक कुमार (हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के बेटे) और ज़फर इक़बाल जैसे खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश का नाम ऊँचा किया। वर्ष 1975 के विश्व कप में स्वर्ण पदक विजेता और वर्ष 1976 के ओलिंपिक टीम के सदस्य असलम शेरखान, वर्ष 1968 मैक्सिको ओलिंपिक के कास्य पदक विजेता इवाम-उर-रहमान, नई सदी में सिडनी 2000 ओलिंपिक के फॉरवर्ड प्लेयर श्री समीर दाद भोपाल की परंपरा के जीवित साक्ष्य है। शहर का आइकॉनिक ऐशबाग स्टेडियम और स्थानीय क्लब कल्चर इस नर्सरी की धड़कन रहे हैं। भोपाल में कई हॉकी टर्फ और प्रशिक्षण केंद्र हैं, जिन्होंने इस खेल को पीढ़ी दर पीढ़ी पोषित किया। राज्य की अकादमी व्यवस्था ने इस विरासत को संस्थागत रूप दिया। महिला हॉकी अकादमी ग्वालियर की स्थापना वर्ष 2006 से हुई, जहां से भारतीय हॉकी टीम की दिग्गज महिला हॉकी खिलाड़ी सुशीला चानू, मोनिका और रीना खोखर जैसे खिलाड़ी निकले। भोपाल के पुरूष हॉकी अकादमी का शुभारंभ जनवरी 2007 में हुआ। मध्यप्रदेश की हॉकी अकादमी से इटारसी के प्रतिभाशाली 17 वर्षीय विवेक सागर भारतीय टीम में पदार्पण कर भारत के सबसे युवा खिलाड़ियों में से एक बने। विवेक सागर ने टोक्यो-2020 और पेरिस ओलिंपिक-2024 में भारतीय हॉकी टीम को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि भारतीय हॉकी इतिहास में भोपाल का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। खेल अधोसंरचना विकास राज्य सरकार ने खेलों के लिए अवसंरचना विकसित कर खेल संस्कृति को नया आयाम दिया। भोपाल और इंदौर अब खेल अकादमी, हॉकी टर्फ और एथलेटिक ट्रैक के लिए पहचाने जाते हैं। वर्ष 2013 में मल्लखम्ब को राज्य खेल घोषित करना केवल एक परंपरा का सम्मान नहीं इस बात का भी प्रतीक था कि राज्य अपने पारंपरिक खेलों को भी आधुनिक मंच पर लाना चाहता है। इसी क्रम में “विक्रम अवॉर्ड” जैसी परंपराएँ शुरू हुईं, जिनके जरिए खिलाड़ियों को न केवल सम्मान मिला बल्कि सरकारी नौकरियों और प्रोत्साहन राशियों से उनके भविष्य को भी मजबूत किया गया। भोपाल की मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी ऑफ एक्सलेंस को विशेष रूप से रेखांकित किया जा सकता है। जनवरी 2007 में स्थापित इस परिसर में 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर राइफल/पिस्टल रेंज के साथ ट्रैप स्कीट के समर्पित शॉटगन रेंज भी है। फाइनल शूटिंग रेंज अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है तथा दर्शकों के बैठने की भी सुव्यवस्था है। यह अकादमी अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर गढ़ी गई है और राज्य के शूटरों की लगातार कामयाबी का प्रमुख आधार बनी है। वॉटर स्पोर्टस वॉटर स्पोर्टस में भी भोपाल ने एक अलग पहचान गढ़ी है। बड़े तालाब में वॉटर स्पोर्टस अकादमी ऑफ एक्सलेंस की स्थापना की गई, जिसमें कयाकिंग-केनोइंग, रोइंग और सेलिंग की अत्याधुनिक सुविधाएं खिलाड़ियों को दी जा रही हैं। इसी तरह भोपाल स्थित छोटे तालाब का ईको सिस्टम पैरा-कयाकिंग/केनोइंग में देश का अग्रणी केन्द्र बना, जहां प्राची यादव जैसी खिलाड़ी एशियन पैरा गेम्स में इतिहास रचती दिखी। पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 में प्रदेश शीर्ष पांच राज्यों में रहा। शूटर ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर गौरव बढ़ाया। आज स्थिति यह है कि प्रदेश में 18 उत्कृष्टता अकादमियाँ, 22 हॉकी टर्फ और 15 से अधिक एथलेटिक ट्रैक सक्रिय हैं। खेल प्रदर्शन के अद्यतन सूचकांक भी इस दावे को पुष्ट करते हैं। खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 (बिहार) में मध्यप्रदेश ने 32 पदक लेकर शीर्ष दस में स्थिति दर्ज कराई।   स्पोर्ट्स साइंस सेंटर आधुनिक तकनीक के दौर में खेल विज्ञान (Sports Science) की भूमिका भी अहम होती जा रही है। मध्यप्रदेश ने इस दिशा में भी अग्रसर होकर स्पोर्ट्स साइंस सेंटर और अत्याधुनिक हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग अकादमी की स्थापना की है। यहाँ खिलाड़ियों को फिजियोथेरेपी, बायो-मैकेनिक्स, स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन और साइकोलॉजिकल कॉउंसलिंग जैसी सेवाएँ दी जाती हैं। उन्नत जिम्नेशियम, रिकवरी पूल, एंटी-ग्रैविटी रनिंग मशीन और वीडियो एनालिटिक्स लैब खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करने के लिए तैयार कर रही हैं। इन तकनीकी सुविधाओं का असर अब साफ दिखने लगा है। खिलाड़ी केवल खेल कौशल ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और मानसिक मजबूती के आधार पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। थ्रॉबॉल, एथलेटिक्स और पैरा-खेलों में हालिया सफलता इस आधुनिक दृष्टिकोण की ही देन है। आने वाले वर्षों में स्पोर्ट्स साइंस से जुड़ी ये अकादमियाँ न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे भारत के लिए प्रतिभा निर्माण का केंद्र बन सकती हैं। नवीनतम परिणाम जैसे कि वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाले खिलाड़ी एशियाई चैंपियनशिप स्वर्ण विजेता शूटर, खेलो … Read more

अगले साल तक उपलब्ध होंगी गेहूं की 14 और जौ की 4 नई किस्में

ग्वालियर देश में अगले वर्ष तक किसानों को 18 नई किस्में उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें 14 किस्में गेहूं की और चार किस्में जौ की शामिल हैं। इन किस्मों की खास बात यह है कि ये न केवल उच्च उत्पादन क्षमता वाली हैं, बल्कि पोषण की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध हैं। हाल ही में देश में कृषि विज्ञानियों द्वारा अनुसंधान से विकसित की गईं इन किस्मों में जिंक और आयरन की मात्रा 45 पीपीएम और प्रोटीन की मात्रा 13.5 प्रतिशत तक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन किस्मों के अनाज से खासकर कुपोषण से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वालों में पोषण संबंधी कमी को दूर किया जा सकेगा। सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी को भेजेंगे जौ की चारों किस्में भी उत्पादन और पोषण के लिहाज से अहम हैं। इनमें डीडब्ल्यूआरबी-223 एक विशेष किस्म है, जो छिलका रहित है। इसे गेहूं में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है, जिससे पोषण में और भी वृद्धि होगी। ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय 64वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी के समापन अवसर बुधवार को इन नई किस्मों को अंतिम परीक्षण और मंजूरी के लिए सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी को भेजने की सहमति दी गई। समापन समारोह की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. एसके प्रधान ने की, जबकि सह-अध्यक्षता भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने की। डॉ. तिवारी ने जौ की छिलका रहित किस्म को किसानों के लिए उपयोगी बताया। गोष्ठी के समापन सत्र में फसल सुधार, फसल सुरक्षा, गुणवत्ता, मूलभूत और सामाजिक विज्ञान, एवं जौ नेटवर्क की प्रमुख अनुशंसाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। दलहन-तिलहन को मिलेगा बढ़ावा गोष्ठी में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन राज्यों में गेहूं का उत्पादन सीमित है, वहां के किसानों को दलहन और तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे न केवल पोषण सुरक्षा में वृद्धि होगी बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी। जल्द ही किसानों को उपलब्ध होंगी ये किस्में गेहूं की किस्में     एनआइएडब्ल्यू – 4114 (निफाड)     डब्ल्यूएच – 1306 (हिसार)     केबी – 2031 (कानपुर)     यूपीबी – 1106 (पंतनगर)     एचडी – 3428 (नई दिल्ली)     डीबीडब्ल्यू – 386, डीबीडब्ल्यू – 443 (करनाल)     पीबीडब्ल्यू – 891 (लुधियाना)     लोक – 79 (सनोसरा)     एनडब्ल्यूएस – 2222 (नुजिवीडु)     एकेएडब्ल्यू – 5100 (अकोला)     जीडब्ल्यू – 543 (विजापुर) जौ की किस्में     डीडब्ल्यूआरबी – 219     डीडब्ल्यूआरबी – 223 (करनाल) इन राज्यों को मिलेगा सीधा लाभ महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल, पूर्वी व पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड के किसानों को इन नई किस्मों से पोषण और उत्पादन दोनों के स्तर पर लाभ मिलेगा।