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मध्य प्रदेश: कुछ दिन राहत भरा रहेगा मौसम, बारिश के सिस्टम हुए निष्क्रिय

भोपाल  अवदाब का क्षेत्र अब राजस्थान की तरफ चला गया है। मानसून द्रोणिका भी ऊपर की तरफ चली गई है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, किसी प्रभावी मौसम प्रणाली के सक्रिय नहीं रहने के कारण अभी दो-तीन दिन तक बारिश बारिश के आसार नहीं हैं। वातावरण में बड़े पैमाने में नमी रहने के कारण कहीं-कहीं बौछारें पड़ सकती हैं। उधर, शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक सिर्फ श्योपुर में दो मिलीमीटर बारिश हुई। मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी अभिजीत चक्रवर्ती ने बताया कि पूर्वी राजस्थान और उससे लगे उत्तर-पश्चिम क्षेत्र पर अवदाब का क्षेत्र बना हुआ है। इसके कमजोर पड़कर गहरे कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित होकर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून द्रोणिका अवदाब के क्षेत्र से होकर फतेहगढ़, मुजफ्फरपुर, बांकुरा, कोंटाई से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है।   पूर्वी और उत्तरी इलाकों में हुई भारी बारिश एक पश्चिमी विक्षोभ वर्तमान में पाकिस्तान और उससे लगे जम्मू के आसपास द्रोणिका के रूप में बना हुआ है। इन मौसम प्रणालियों का प्रभाव मध्य प्रदेश पर अब नहीं है। इस वजह से दो-तीन दिन तक भारी बारिश होने की संभावना नहीं है। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि प्रदेश के पूर्वी एवं उत्तरी क्षेत्र में भारी बारिश हुई है। इस वजह से उस क्षेत्र में काफी नमी बरकरार है। इस कारण तापमान बढ़ने की स्थिति में गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी। उधर, पिछले 24 घंटों के दौरान शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक श्योपुर में 48.2, शिवपुरी में 36, गुना एवं ग्वालियर में 33.2, नौगांव में 28, दतिया में 14.2, पचमढ़ी में 8.2, टीकमगढ़ में छह, जबलपुर में पांच, खजुराहो में चार, सिवनी में 3.2 और मलाजखंड में 2.5 मिलीमीटर बारिश हुई।

फर्जी एनकाउंटर का सच उजागर? CBI ने मारा छापा, निरीक्षक पपोला निलंबित

ग्वालियर नीमच में 16 साल पहले हुए फर्जी एनकाउंटर मामले में फरार चल रहे ग्वालियर में पदस्थ निरीक्षक मंगल सिंह पपोला की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। उन्हें निलंबित कर दिया गया है, वहीं सीबीआई की टीम उनकी तलाश में ग्वालियर के ठिकानों पर दबिश दे रही है। सूत्रों के अनुसार, ग्वालियर पुलिस के कुछ अधिकारी पर्दे के पीछे से निरीक्षक मंगल सिंह पपोला की मदद कर रहे हैं। वर्ष 2009 में नीमच पुलिस ने बंशी गुर्जर का एनकाउंटर करने का दावा किया था, लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि बंशी गुर्जर जीवित है। इसके बाद यह मामला फर्जी एनकाउंटर साबित हुआ। घटना के समय जो पुलिसकर्मी और अधिकारी एनकाउंटर टीम में शामिल थे, उन पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। इसी टीम में मंगल सिंह पपोला भी शामिल थे, जो उस समय प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ थे। जब सीबीआई ने इस मामले में गिरफ्तारी शुरू की तो मंगल सिंह फरार हो गए। वे जांच के दौरान सिक डालकर निकल गए थे। पंद्रह दिन बाद उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए बुलाया गया, लेकिन वे पेश नहीं हुए। पुलिस अधिकारियों ने भी इस लापरवाही को नजरअंदाज कर दिया। अब जब सीबीआई ने सख्ती बढ़ाई तो पपोला को निलंबित कर दिया गया। जानकारी है कि सीबीआई को ग्वालियर के एक वाहन शोरूम पर उनकी मौजूदगी का सुराग मिला था, जिसके बाद टीम लगातार सक्रिय बनी हुई है। एनकाउंटर के बाद मिला था प्रमोशन फर्जी एनकाउंटर टीम में शामिल मंगल सिंह पपोला उस समय प्रधान आरक्षक थे और तत्कालीन टीआई पीएस परमार व मुख्तार कुरैशी के साथ ऑपरेशन में शामिल थे। एनकाउंटर के बाद पपोला को प्रमोशन भी मिला था। 

चार जंगली हाथियों की वापसी से बुढ़ार में हड़कंप, कई घर तबाह

शहडोल शहडोल जिले के वन परिक्षेत्र बुढार में जंगली हाथियों की पुनः वापसी ने इलाके के ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गया है। हाल ही में चार हाथियों ने अनूपपुर के अहिरगवा से लौटकर बुढार के आसपास के गांवों में दस्तक दी और एक दर्जन से अधिक घरों में तोड़फोड़ की है। बुढार रेंजर सलीम खान के अनुसार, इन हाथियों की निगरानी के लिए 50 से अधिक वन कर्मचारी तैनात किए गए हैं, ताकि इनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। हाथियों के इस आतंक ने दो दिनों में बुढार वन परिक्षेत्र के कई गांवों में हलचल मचा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हाथियों के हमलों के चलते उनमें भय का माहौल उत्पन्न हो गया है। रेंजर सलीम खान ने बताया कि हाथियों ने बुढार से अनूपपुर की ओर रुख किया था, लेकिन अब ये दोबारा बुढार वन परिक्षेत्र में लौट आए हैं। हमारी टीमें लोगों को सतर्क करने के लिए मुनादी करवा रही हैं और नुकसान का पंचनामा तैयार कर राजस्व टीम को सूचित किया जा रहा है। नुकसान की भरपाई की आवश्यकता जनपद सदस्य जगन्नाथ शर्मा ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा, हाथियों ने हमारे क्षेत्र में कई घरों को नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन को शीघ्र इन लोगों की मदद करनी चाहिए। हमें मुआवजे की राशि दिलवाई जानी चाहिए ताकि वे लोग जो बेघर हो गए हैं, उन्हें राहत मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि भारी बारिश के बीच हाथियों ने कई कच्चे घर तोड़ दिया है, जिससे ग्रामीणों की स्थिति और भी खराब हो गई है। रेंजर के अनुसार, हाथियों ने सिलपरी, कठई, कोल्हारू टोला, कोदवार कला समेत कई स्थानों पर घुसकर घरों को तोड़कर सामान को तहस-नहस कर दिया है। इससे पहले भी वन विभाग ने हाथियों को खदेड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। चार रेंजरों के साथ वन विभाग की टीम हाथियो की निगरानी कर रही है।

बीमा राशि के लिए 18 साल तक भटका पिता, डीईओ की लापरवाही पर कोर्ट ने सुनाया फैसला

भोपाल बैतूल जिले के सरकारी स्कूल की एक छात्रा की दुर्घटना में मृत्यु के बाद भी उसके परिवार को विद्यार्थी सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत बीमा राशि नहीं दी गई। 18 साल बाद राज्य उपभोक्ता आयोग ने छात्रा के पिता को न्याय देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को दोषी मानते हुए 35 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश सुनाया। मामला बैतूल जिले के उड़दन ग्राम का है, जहां के निवासी कुंजीलाल कुमरे ने डीईओ और द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ आयोग में अपील लगाई थी। आयोग के सदस्य डॉ. श्रीकांत पांडेय और डॉ. मोनिका मलिक की बेंच ने यह स्पष्ट किया कि छात्रा बीमा की हकदार थी और उसकी मृत्यु के 15 दिन के भीतर बीमा राशि का भुगतान किया जाना चाहिए था। बता दें कि इससे पहले जिला उपभोक्ता आयोग ने छात्रा के पिता के खिलाफ में निर्णय सुनाया था, जिसके बाद राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की गई थी।   बीमा न मिलने का कारण डीईओ की लापरवाही बीमा कंपनी ने दलील दी कि डीईओ ने निर्धारित समय पर प्रीमियम राशि जमा नहीं की थी, इस कारण पालिसी प्रभाव में नहीं रही। कंपनी ने यह भी कहा कि पालिसी की अवधि एक अगस्त 2006 से 31 जुलाई 2007 तक थी, जबकि छात्रा की मृत्यु 19 अगस्त 2007 को हुई। वहीं, अपीलकर्ता के वकील ने तर्क रखा कि योजना का नवीनीकरण हर वर्ष होता है और एक अगस्त 2007 से 31 जुलाई 2008 तक नई पालिसी प्रभावी थी। इसके अलावा योजना के तहत डीईओ को स्थानीय निधि से प्रीमियम राशि जमा करने की सुविधा भी थी। आयोग का निष्कर्ष आयोग ने पाया कि पूरी कक्षा के लिए लगभग 2.65 लाख रुपये की प्रीमियम राशि डीईओ को जमा करनी थी, लेकिन उन्होंने लापरवाही बरती। इस कारण बीमा कंपनी की बजाय डीईओ को दोषी मानते हुए हर्जाने का आदेश दिया गया।

यात्रियों को राहत: भोपाल-सागर मार्ग पर रफ्तार और सुविधा दोनों मिलेगी

भोपाल/सागर  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सागर का सफर जल्द ही आसान और आरामदायक होगा। भोपाल-सागर के बीच हाईवे निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। कुल 6 टुकड़ों में बन रहे इस हाईवे का मोरीकोड़ी से विदिशा तक बन रहे खंड का काम लगभग 85 फीसदी पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि इस पर से नए साल के पहले महीने से आवागमन भी शुरू हो जाएगा। बाकी बचे तीन खंडों में भी जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। एनएचएआइ व तीन नई ठेका कंपनियों के बीच निर्माण कार्य को लेकर अनुबंध कर लिया गया है। 6 टुकड़ों में बन रहा भोपाल-सागर हाईवे भोपाल-सागर हाईवे के निर्माण कार्य को छह खंडों में विभाजित कर पूर्ण करने की योजना बनाई गई है। वर्तमान में दो खंडों में कार्य चल रहा है। विदिशा जिले के तीन खंडों में कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया था। निविदा सहित अन्य प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद अब जल्द ही कार्य शुरू होगा। चौथा खंड सागर जिले में है। वहां के लिए भी प्रक्रिया शुरू है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएचएआइ) के परियोजना निदेशक सिद्धांत सिंघई के अनुसार विदिशा जिले में विदिशा से ग्यारसपुर, ग्यारसपुर से राहतगढ़ और राहतगढ़ से बेरखेड़ी का कार्य अधिकतम एक अक्टूबर से शुरू कर दिया जाएगा। बाकी चौथे खंड बेरखेड़ी से सागर तक का कार्य भी जल्द ही शुरू होगा। जबकि बेरखेड़ी से सागर तक लिंक रोड का निर्माण कार्य भी पूरा होने वाला है। मोरीकोड़ी-विदिशा बायपास तक काम पूरा रायसेन जिले के मोरीकोड़ी से विदिशा तक 20.5 किलोमीटर के खंड में फोरलेन सड़क का निर्माण 85 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। जबकि मोरीकोड़ी से विदिशा बायपास तक 95 प्रतिशत से अधिक कार्य कर लिया गया है। ज्यादातर कार्य विदिशा बायपास से मिर्जापुर तक बाकी है। इस हिस्से में अभी पांच से छह महीने का वक्त लगेगा। जबकि मोरीकोड़ी से विदिशा बायपास तक के हिस्से में अधिकतम तीन से चार महीने में आवागमन शुरू हो जाएगा। करीब 320 करोड़ से स्वीकृत इस कार्य के पूर्ण होने पर न केवल विदिशा से रायसेन की बल्कि भोपाल की दूरी भी सांची व सलामतपुर से होकर जाने की तुलना में 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी।

पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा जनहित में सशक्त भूमिका निभा रही

भोपाल  पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा जनहित में सशक्त भूमिका निभा रही है। आपातकाल में उन्नत चिकित्सा सेवा मुहैया कराने में बहुमूल्य समय की बचत कर जीवन संरक्षण किया जा रहा है। सिंगरौली जिले के श्री लाल कृष्ण वैश्य (31 वर्ष) को गंभीर अवस्था में जबलपुर से इंदौर स्थित आयुष्मान भारत से सम्बद्ध अस्पताल में एयर एम्बुलेंस सेवा से सफलतापूर्वक एयर लिफ्ट किया गया। श्री लाल कृष्ण सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए थे, जिससे उनके पूरे शरीर का पक्षाघात (पैरालिसिस) हो गया। मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण सड़क या रेल मार्ग से परिवहन जोखिमपूर्ण था। इस स्थिति में एयर एम्बुलेंस सेवा ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प था, जिसने समय रहते उन्हें उन्नत उपचार के लिए इंदौर पहुँचाया और उनकी जान बचाई जा सकी। पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, औद्योगिक हादसों एवं प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित मरीजों को त्वरित एवं सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। यह सेवा राज्य के नागरिकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और जीवन रक्षक सुविधा बन चुकी है। सेवा के अंतर्गत आयुष्मान कार्ड धारकों को निःशुल्क वायु परिवहन की सुविधा दी जाती है, अन्य नागरिकों के लिए भी निर्धारित परिस्थितियों में सुलभ दरों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। एयर एम्बुलेंस सेवा: पात्रता एवं स्वीकृति प्रक्रिया आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को राज्य के भीतर या बाहर शासकीय एवं आयुष्मान सम्बद्ध अस्पतालों में निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध है। गैर-आयुष्मान कार्डधारकों को राज्य में निःशुल्क तथा राज्य के बाहर अनुबंधित दरों पर सशुल्क परिवहन सुविधा दी जाती है। सड़क, औद्योगिक दुर्घटनाओं या प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित सभी नागरिकों को राज्य के भीतर या बाहर निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सेवा मिलती है। यह सेवा राज्य के सभी जिलों से जिला अस्पतालों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। नागरिकों को उनके जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या मेडिकल कॉलेज अधिष्ठाता की अनुशंसा पर जिला कलेक्टर द्वारा राज्य के भीतर निःशुल्क परिवहन की अनुमति दी जाती है। राज्य के बाहर के लिए संचालक चिकित्सा शिक्षा, भोपाल, तथा सशुल्क मामलों में संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल स्वीकृति प्रदान करते हैं।  

यात्रियों को बड़ी राहत: भोपाल से सागर तक बिना रुकावट चलेगा सफर

विदिशा मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सागर का सफर जल्द ही आसान और आरामदायक होगा। भोपाल-सागर के बीच हाईवे निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। कुल 6 टुकड़ों में बन रहे इस हाईवे का मोरीकोड़ी से विदिशा तक बन रहे खंड का काम लगभग 85 फीसदी पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि इस पर से नए साल के पहले महीने से आवागमन भी शुरू हो जाएगा। बाकी बचे तीन खंडों में भी जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। एनएचएआइ व तीन नई ठेका कंपनियों के बीच निर्माण कार्य को लेकर अनुबंध कर लिया गया है। 6 टुकड़ों में बन रहा भोपाल-सागर हाईवे भोपाल-सागर हाईवे के निर्माण कार्य को छह खंडों में विभाजित कर पूर्ण करने की योजना बनाई गई है। वर्तमान में दो खंडों में कार्य चल रहा है। विदिशा जिले के तीन खंडों में कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया था। निविदा सहित अन्य प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद अब जल्द ही कार्य शुरू होगा। चौथा खंड सागर जिले में है। वहां के लिए भी प्रक्रिया शुरू है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएचएआइ) के परियोजना निदेशक सिद्धांत सिंघई के अनुसार विदिशा जिले में विदिशा से ग्यारसपुर, ग्यारसपुर से राहतगढ़ और राहतगढ़ से बेरखेड़ी का कार्य अधिकतम एक अक्टूबर से शुरू कर दिया जाएगा। बाकी चौथे खंड बेरखेड़ी से सागर तक का कार्य भी जल्द ही शुरू होगा। जबकि बेरखेड़ी से सागर तक लिंक रोड का निर्माण कार्य भी पूरा होने वाला है।

उज्जैन: नागचंद्रेश्वर मंदिर में इस बार विशेष दर्शन व्यवस्था, जारी हुई समयसारिणी

उज्जैन उज्जैन में श्रावण मास (shravan month) के पावन अवसर पर आगामी मंगलवार 29 जुलाई को नागपंचमी पर्व के उपलक्ष्य में श्री महाकालेश्वर मंदिर (mahakal mandir) के मुख्य शिखर में विराजमान नागचंद्रेश्वर मंदिर (nagchandreshwar mandir darshan) के पट खुलेंगे। दर्शन का सिलसिला 28 जुलाई की रात 12 बजे शुरु होकर अगले दिन 29 जुलाई की रात 12 बजे खत्म होगा। इस विशेष दिन पर लाखों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्ष में केवल एक दिन के लिए दर्शनार्थ खुलने वाले भगवान श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन का सौभाग्य सभी प्राप्त हो, इसके लिए अधिकारियों ने बैठक बुलाई। ये है मंदिर खुलने और बंद होने का समय जिला और मंदिर प्रशासन के अनुसार 28 जुलाई की रात 12 बजे से 29 जुलाई की रात 12 बजे तक मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। नागचंद्रेश्वर दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन आने की संभावना जताई जा रही है। पर्व की तैयारियों को लेकर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसपी प्रदीप शर्मा, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक, महंत विनीत गिरि, नगर निगम, स्वास्थ्य, पीएचई, लोक निर्माण विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं के लिए होंगी ये व्यवस्थाएं     एयरो ब्रिज का तकनीकी परीक्षण कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए बनाए गए एयरो ब्रिज की तकनीकी क्षमता और मजबूती की जांच कर प्रमाण-पत्र लिया जाए।     साफ-सफाई एवं पेयजल व्यवस्था मंदिर परिसर और उसके आसपास नगर निगम द्वारा सफाई सुनिश्चित की जाएगी।     साथ ही पेयजल पाइंट, टैंकर, और मोबाइल लॉकर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।     दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हील चेयर, जूता स्टैंड और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जाएगी।     यातायात, पार्किंग एवं सुरक्षा पार्किंग के लिए कर्कराज पार्किंग, बड़ा गणेश, और अन्य स्थानों पर समुचित व्यवस्था की जाएगी। दर्शन मार्ग पर बैरिकेडिंग, पुलिस बल, और फायर स्टेशन, खोया-पाया केन्द्र भी तैनात किए जाएंगे। दर्शन मार्ग निर्धारित     श्रद्धालु कर्कराज पार्किंग में वाहन पार्क कर, भील समाज धर्मशाला में जूते उतारेंगे।     वहां से गंगा गार्डन, चारधाम पार्किंग, हरसिद्धि चौराहा, रुद्रसागर की दीवार, विकम टीला, बड़ा गणेश मंदिर होते हुए द्वार कमांक- 4 से प्रवेश करेंगे।     दर्शन के उपरांत विश्रामधाम, एयरो ब्रिज, मार्बल गलियारा से होते हुए हरसिद्धि चौराहा की ओर निकलेंगे।

बालाघाट देश में अटल पेंशन योजना में पहले स्थान पर, 10 जिले टॉप पर

भोपाल  देश में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को 60 वर्ष की आयु के बाद एक निश्चित पेंशन राशि प्रदान करने के लिए अटल पेंशन योजना चलाई जा रही है। योजना में अधिक से अधिक असंगठित क्षेत्र के लोगों को जोड़ने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा इस वर्ष 1 मई से 15 जुलाई 2025 तक पूरे देश में विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में नए लोगों को जोड़ने और उनका पंजीयन कराने में मध्यप्रदेश के 10 जिलों ने देश के टॉप टेन जिलों में स्थान बनाया है। इसमें बालाघाट जिले ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि राज्य के साथ ही बालाघाट के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। इस अभियान का फाइनल स्कोर पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण के द्वारा 18 जुलाई को जारी किया गया। इस अभियान में बालाघाट जिले ने 2992 लक्ष्य के विरूद्ध 12 हजार 507 लोगों को अटल पेंशन योजना से जोड़कर 418 प्रतिशत उपलब्धि हासिल किया है। श्योपुर जिले ने 836 के विरूद्ध 2538 लोगों को जोड़कर 304 प्रतिशत उपलब्धि के साथ दूसरे, अलीराजपुर जिले ने 880 के विरूद्ध 1705 लोगों को जोड़कर 194 प्रतिशत उपलब्धि के साथ तीसरे, उज्जैन जिले ने 5676 के विरूद्ध 10813 लोगों को जोड़कर 191 प्रतिशत उपलब्धि के साथ चौथे, अनूपपुर जिले ने 1342 के विरूद्ध 2542 लोगों को जोड़कर 189 प्रतिशत उपलब्धि के साथ पांचवे, उमरिया जिले ने 990 के विरूद्ध 1819 लोगों को जोड़कर 184 प्रतिशत उपलब्धि के साथ छटवें, छिंदवाड़ा जिले ने 4994 के विरूद्ध 9148 लोगों को जोड़कर 183 प्रतिशत उपलब्धि के साथ सातवें, डिंडोरी जिले ने 946 के विरूद्ध 1720 लोगों को जोड़कर 182 प्रतिशत उपलब्धि के साथ आठवें, शहडोल जिले ने 1936 के विरूद्ध 3445 लोगों को जोड़कर 178 प्रतिशत उपलब्धि के साथ नौवें और दमोह जिले ने 1870 के विरूद्ध 3314 लोगों को जोड़कर 177 प्रतिशत उपलब्धि के साथ देश में दसवां स्थान हासिल किया है। अभियान के अंतर्गत अटल पेंशन योजना में अधिक से अधिक लोगों के नाम जोड़ने मे देश में प्रथम 10 स्थान पर रहे इन जिलों को अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया जाएगा। बालाघाट जिले में कलेक्टर मृणाल मीणा के नेतृत्व एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ के साथ समन्वय कर इस योजना में लोगों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अग्रणी बैंक प्रबंधक संजीव कुमार ने इस संबंध में बताया कि सम्पूर्ण देश में अटल पेंशन योजना में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। बालाघाट जिले में अभियान के बाद भी जिले में पात्र लोगों को इस योजना से जोड़ने का काम निरंतर जारी रहेगा और 50 हजार के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। अटल पेंशन योजना भारत सरकार की एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जो मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए तैयार की गई है। यह योजना उन लोगों को पेंशन प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जो रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रहना चाहते हैं। इसके लिए 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक, जो असंगठित क्षेत्र के कामगार जैसे दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारी, घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, आदि पात्र हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का किसी बैंक या डाकघर में बचत खाता होना चाहिए, जो आधार से लिंक हो। इस योजना का लाभ उन लोगों को दिया जाता है जो आयकर दाता नहीं हैं। इसी के साथ आवेदक को किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना जैसे एनपीएस, ईपीएस का लाभार्थी नहीं होना चाहिए। यह योजना 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की मासिक पेंशन प्रदान करती है, जो 60 वर्ष की आयु के बाद मिलती है।  

दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा पेंच टाइगर रिजर्व में आकार ले रही, हजारों किलो कबाड़ का उपयोग

सिवनी  दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा पेंच टाइगर रिजर्व में आकार ले रही है, जिसे सिवनी जिले के स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार किया जा रहा है।हजारों किलो कबाड़ (स्क्रैप) से तैयार हो रही बाघ की आकृति का दीदार पेंच पहुंचने वाले पर्यटक व आम नागरिक 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस से कर सकेंगे। पेंच प्रबंधन का दावा है कि खवासा में अनपयोगी कबाड़ से तैयार हो रही बाघ की प्रतिमा दुनिया में अब तक बनी बाघ प्रतिमाओं में सबसे बड़ी होगी।पेंच टाईगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार स्क्रैप से बनाई जा रही बाघ प्रतिमा की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मिशन लाइफ से ली गई है। पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक रजनीश सिंह ने बताया कि मिशन लाइफ के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के तीन आर (3R) सूत्रों में रिड्यूस (Reduce), रियूस (Ruse) एवं रिसाईकल (Recycle) भावना के अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व में लोहे के स्क्रैप मटेरियल से एक विशालकाय बाघ प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। जनवरी माह में लोहे के अनुपयोगी सामग्रियों जैसे पुरानी साईकिल, पाइप, जंग लगी लोहे की चादरें आदि विविधतापूर्ण सामग्रियों से प्रतिमा का निर्माण प्रारंभ किया गया था, जो अब वह लगभग अपनी पूर्णता पर है। जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने मेक इन इंडिया का प्रतीक चिन्ह एक सिंह को बनाया था और वह सिंह भी अनुपयोगी लोहे की सामग्री से बना डिजाइन था उसी से प्रेरणा लेकर लोहे के स्‍क्रैप मटेरियल के इस बाघ कलाकृति की संकल्पना की गई है। यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि इंटरनेट में उपलब्ध वल्र्ड रिकार्ड एकेदमी के अनुसार दुनिया में सबसे बड़ी बाघ की मूर्ति अमेरिका के जार्जिया राज्य में है जो 8 फिट ऊंची और 14 फिट लंबी है। जबकि पेंच टाइगर रिजर्व में बन रही लोहे के स्क्रैप मटेरियल की यह बाघ कलाकृति पूर्ण होने के बाद 16 फिट से अधिक उंची व 36 फिट से भी अधिक लंबी होगी। उल्लेखनीय है कि मठ मंदिर में कबाड़ से महादेव की आकर्षक प्रतिमा तैयार करने वाले कलाकार विक्की और उनके साथियों द्वारा इस विशालकाय प्रतिमा को तैयार किया जा रहा है।