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अब आवेदक घर बैठे देख सकेंगे फाइल का हर मूवमेंट, बाबुओं की नोटिंग पर नजर

जयपुर  गुलाबी नगरी के जयपुर विकास प्राधिकरण में अब फाइलों को दबाने और मेज के नीचे का खेल खत्म होने वाला है। जेडीए ने भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर 'डिजिटल स्ट्राइक' करते हुए एक क्रांतिकारी व्यवस्था लागू की है। अब जेडीए के बाबू और अधिकारी फाइलों पर जो भी 'नोटिंग' करेंगे, उसे आवेदक घर बैठे अपनी SSO ID के जरिए ऑनलाइन देख सकेगा। अब कोई अधिकारी यह कहकर आपको नहीं टरका पाएगा कि 'फाइल अभी प्रोसेस में है।' अब बताना होगा क्यों अटकी फाइल? अब तक जेडीए की कार्यप्रणाली में सबसे बड़ी बाधा 'अस्पष्ट नोटिंग' होती थी। अधिकारी अक्सर फाइलों पर ऐसी तकनीकी टिप्पणियां लिख देते थे जो आम आदमी की समझ से बाहर होती थीं। लेकिन जेडीए सचिव के नए आदेश के अनुसार, अब नोटिंग की भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए। इतना ही नहीं, अगर कोई अधिकारी किसी फाइल को रोकता है या कोई आपत्ति लगाता है, तो उसे पोर्टल पर यह स्पष्ट करना होगा कि किस नियम के तहत यह टिप्पणी की गई है। अनावश्यक आपत्ति लगाकर फाइल अटकाने वाले कर्मचारियों की अब खैर नहीं होगी। इन 6 सेवाओं के लिए अब नहीं काटने होंगे चक्कर शुरुआती चरण में सबसे ज्यादा काम आने वाली छह सेवाओं को जेडीए ने पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। यदि आप निम्नलिखित कामों के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो आपकी फाइल का हर मूवमेंट डैशबोर्ड पर दिखेगा।     ई-पट्टा (फ्री होल्ड या लीज डीड)     नाम ट्रांसफर (नाम हस्तांतरण)     सब-डिविजन (उपविभाजन)     रिकॉन्स्टीट्यूशन (पुनर्गठन)     वन टाइम लीज सर्टिफिकेट (OTLC)     अन्य संबंधित भूमि सेवाएं खत्म होगी ऑफलाइन फाइलों की 'दोहरी दुनिया' जेडीए में अब तक सबसे बड़ा झोल यह था कि फाइलें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में चलती थीं। इससे अधिकारियों को फाइल दबाने का मौका मिल जाता था। अब सचिव के आदेशानुसार, हर फाइल का मूवमेंट जेडीए सर्विस पोर्टल के डैशबोर्ड पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। आवेदक को यह पता रहेगा कि उसकी फाइल किस टेबल पर, किस तारीख से और क्यों रुकी हुई है। आमजन को क्या होगा फायदा? इस नई व्यवस्था से बिचौलियों का रोल पूरी तरह खत्म हो जाएगा। आवेदक को अपनी फाइल की कमी जानने के लिए जेडीए के गलियारों में भटकने या किसी बाबू की खुशामद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आवेदन में कोई कमी है, तो वह डैशबोर्ड पर स्पष्ट दिखेगी, जिसे आवेदक तुरंत ठीक कर सकेगा। जेडीए का यह कदम राजस्थान सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब देखना यह है कि फाइलों के डिजिटल होने से गुलाबी नगरी की जनता को गुलाबी राहत कब तक मिलती है।  

बिजली सुधार: राजस्थान डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार, घाटा कम हुआ

जयपुर राजस्थान की बिजली वितरण कंपनियों (Rajasthan Discom) की आर्थिक सेहत में बड़ा सुधार देखने को मिला है. सालों से घाटे और कर्ज से जूझ रही इन कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपनी देनदारियों में 1352 करोड़ रुपये की कटौती की है. सरकार की सख्त निगरानी और बिजली बिलों की रिकॉर्ड वसूली ने इस मुश्किल लक्ष्य को आसान बना दिया. कैसे घटा कर्ज का भारी भरकम बोझ? सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की तीनों डिस्कॉम पर साल 2024-25 में कुल 97,970 करोड़ रुपये का संयुक्त कर्ज था. बेहतर मैनेजमेंट के चलते अब यह घटकर 96,618 करोड़ रुपये रह गया है. ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के निर्देशन में विभाग ने न केवल खर्चों पर लगाम लगाई, बल्कि पुराने बकाये की वसूली पर भी जोर दिया. अजमेर और जयपुर डिस्कॉम ने किया टॉप कर्ज घटाने की इस दौड़ में अजमेर डिस्कॉम सबसे आगे रहा, जिसने अपनी देनदारियों में 935 करोड़ रुपये की कमी की. वहीं, जयपुर डिस्कॉम ने भी 644 करोड़ रुपये का कर्ज कम किया. हालांकि, जोधपुर डिस्कॉम के लिए चुनौतियां बरकरार हैं, जहां कर्ज 36,792 करोड़ से मामूली बढ़कर 37,019 करोड़ रुपये हो गया है. सस्ती ब्याज दरों का मिला सहारा राज्य सरकार ने डिस्कॉम को कर्ज के जाल से निकालने के लिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) से हाथ मिलाया. यहां से डिस्कॉम को महज 8.75 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर लोन मिला. ब्याज दरों में हुई 0.90% से 1.40% तक की इस कटौती ने महंगे पुराने कर्जों को खत्म करने में संजीवनी का काम किया. इतिहास में पहली बार 100% से ज्यादा वसूली इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धि राजस्व वसूली रही. राजस्थान के इतिहास में पहली बार तीनों डिस्कॉम ने 100 प्रतिशत से अधिक राजस्व संग्रह किया है:-     जयपुर डिस्कॉम: 102% वसूली     अजमेर डिस्कॉम: 100.23% वसूली     जोधपुर डिस्कॉम: 100.96% वसूली खराब मीटरों का समाधान और बचत जयपुर डिस्कॉम ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए अपने सभी सर्किलों में खराब पड़े बिजली मीटरों को बदल दिया है. इसका सीधा फायदा यह हुआ कि औसत बिलिंग (Average Billing) के मामलों में कमी आई और विभाग को करीब 1.9 करोड़ रुपये की सीधी बचत हुई.

पीएम मोदी की अपील के बाद राजस्थान में ईंधन बचत पर सख्ती

जयपुर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पीएम मोदी की अपील के बाद बड़ा फैसला लिया है. सीएम भजनलाल ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम से कम रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही सुरक्षा के नाम पर अनावश्यक वाहनों के इस्तेमाल से बचने को कहा गया है. मुख्यमंत्री का यह फैसला पीएम मोदी की उस अपील के बाद आया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने और पेट्रोल डीजल की बचत करने की अपील की थी. पेट्रोल-डीजल बचाने की पीएम मोदी ने की अपील प्रधानमंत्री मोदी ने पहले हैदराबाद में एक जनसभा के दौरान इस तरह की अपील की. इसके बाद फिर 24 घंटे के बाद अंदर गुजरात के वड़ोदरा से दोबारा वही अपील की. प्रधानमंत्री मोदी की इस अपील के बाद अब राजस्थान के मुख्यमंत्री ने भी ईंधन के बचत की दिशा में आवश्यक कदम उठाया है. खुद के काफिले में वाहन कम करने के निर्देश मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने सरकारी मितव्ययता और ईंधन बचत को लेकर बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या न्यूनतम रखने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव सहित सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने काफिलों में कम से कम वाहनों का उपयोग करें. इसके साथ ही सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बचत को प्राथमिकता देते हुए अनावश्यक वाहन प्रयोग नहीं करने की अपील की है. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि प्रशासनिक और जनप्रतिनिधि स्तर पर भी मितव्ययता अपनाई जाए, ताकि सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके.

2 भाइयों से शुरू हुआ NEET लीक कांड! डॉक्टर से 30 लाख में खरीदा पेपर, जांच में चौंकाने वाला खुलासा

 जयपुर राजस्थान के सीकर से जुड़े NEET 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को लगातार बड़े खुलासे मिल रहे हैं. जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड तक फैला हुआ था और परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लाखों रुपये में बेचे जा रहे थे. मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां पेपर लीक के पूरे सिंडिकेट को खंगालने में जुटी हैं।  सूत्रों के मुताबिक जांच में पता चला है कि गुरुग्राम के एक डॉक्टर से जमवारामगढ़ निवासी दो भाई मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल ने 26 और 27 अप्रैल को करीब 30 लाख रुपये में कथित तौर पर NEET का पेपर खरीदा था. इसके बाद दिनेश बिवाल ने यह पेपर अपने बेटे को दिया, जो सीकर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था. जांच एजेंसियों का दावा है कि इसके बाद 29 अप्रैल को यही पेपर कई अन्य छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचाया गया।  बिवाल के 4 बच्चों का पिछले साल नीट में हुआ था चयन जांच में यह भी सामने आया है कि दिनेश बिवाल के परिवार के चार बच्चों का पिछले साल NEET में चयन हुआ था. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें करीब एक महीने पहले ही जानकारी मिल गई थी कि परीक्षा का पेपर लीक होकर उपलब्ध कराया जाएगा. इसी भरोसे पर उन्होंने पहले से तैयारी कर रखी थी।  मामले में एक और बड़ा खुलासा देहरादून से गिरफ्तार आरोपी राकेश कुमार मंडवारिया को लेकर हुआ है. जांच एजेंसियों के अनुसार राकेश ने करीब 700 छात्रों तक पेपर पहुंचाने का काम किया था. बताया जा रहा है कि पेपर पहले डिजिटल माध्यम से भेजा गया और बाद में उसका प्रिंट निकालकर भी बेचा गया. जांच एजेंसियां अब उन छात्रों और अभिभावकों की पहचान करने में जुटी हैं जिन्होंने कथित तौर पर पैसे देकर पेपर हासिल किया था।  सीकर, जो देशभर में मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है, अब जांच एजेंसियों के रडार पर है. जांच में सामने आया है कि यहां कुछ छात्रों और कोचिंग संचालकों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप बना रखे थे, जिनके जरिए प्रश्नपत्र और उत्तर साझा किए गए. एजेंसियां अब इन ग्रुप्स के एडमिन और सदस्यों की डिजिटल डिटेल खंगाल रही हैं।  पेपर लीक से छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा इस मामले में हरियाणा से यश यादव नाम के आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि उसने भी छात्रों को पेपर बेचने का काम किया था. पुलिस और जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर आखिर मूल स्रोत से कैसे बाहर आया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।  पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है. कई छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. वहीं जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए लगातार छापेमारी और पूछताछ की जा रही है। 

पेपर लीक के बाद RPSC का बड़ा फैसला, SI परीक्षा दोबारा होगी

 अजमेर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए साल 2021 की उप निरीक्षक (SI) और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है. 12 मई 2026 को जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह निर्णय परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के आरोपों की जांच के बाद लिया गया है. आयोग ने अब इस परीक्षा के पुन: आयोजन के लिए 20 सितंबर 2026 (रविवार) की तिथि निर्धारित की है. केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही मिलेगा प्रवेश इस पुन: परीक्षा में सभी पुराने आवेदक शामिल नहीं हो सकेंगे. आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल वे 3,83,097 अभ्यर्थी ही इस परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे, जिन्होंने सितंबर 2021 में आयोजित हुई मूल लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. जिन्होंने पूर्व में परीक्षा छोड़ दी थी, वे इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाएंगे. आवेदन फॉर्म में 30 मई तक सुधार कर सकेंगे अभ्यर्थियों को अपने पुराने आवेदन पत्र में आवश्यक सुधार के लिए 16 मई से 30 मई 2026 तक का समय दिया गया है. इस दौरान उम्मीदवार अपने मोबाइल नंबर, ईमेल और पते जैसी जानकारियों को अपडेट कर सकेंगे. हालांकि, आयु सीमा और शैक्षणिक योग्यता का आधार साल 2021 के मूल नोटिफिकेशन के अनुसार ही रहेगा. आयोग ने कड़े निर्देश दिए हैं कि जिन अभ्यर्थियों को अपने फॉर्म में कोई बदलाव नहीं करना है, उन्हें भी पोर्टल पर जाकर 'संशोधन की आवश्यकता नहीं' की घोषणा करनी होगी और बायोमेट्रिक सहमति देनी होगी. इस प्रक्रिया को पूरा न करने पर अभ्यर्थी का आवेदन निरस्त माना जाएगा. विवादों के बाद सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख बताते चलें कि 859 पदों के लिए शुरू हुई यह भर्ती प्रक्रिया लंबे समय तक कानूनी विवादों और एसओजी (SOG) की जांच के घेरे में रही. डमी कैंडिडेट्स और नकल गिरोह की संलिप्तता के कारण कई ट्रेनी सब-इंस्पेक्टरों की गिरफ्तारियां भी हुई थीं. हाल ही में 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस भर्ती को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी परीक्षा को नए सिरे से कराने का निर्णय लिया है. कैसे मिलेगा एडमिट कार्ड? परीक्षार्थी नवीनतम अपडेट और सुधार प्रक्रिया के लिए RPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग-इन कर सकते हैं. अभ्यर्थियों को अपनी एसएसओ (SSO) आईडी के माध्यम से OTR (One Time Registration) की केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा, ताकि वे आगामी परीक्षा के लिए अपना एडमिट कार्ड प्राप्त कर सकें.

SOG की बड़ी कार्रवाई, 10 से ज्यादा गिरफ्तार, नौकरी तक पहुंचा फर्जीवाड़ा

चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री मामले की जांच में नए तथ्यों के खुलासे हुए हैं. राजस्थान सरकार ने अवैध पीएचडी डिग्रियों की लिस्ट तैयार करना शुरू कर दिया है. 425 अवैध पीएचडी डिग्रियों की जांच के बाद यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है. एसओजी पूरे फर्जी डिग्री रैकेट और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है. एसओजी को संदेह है कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी के साथ-साथ कई अन्य विश्वविद्यालयों की  भी फर्जी डिग्री उपलब्ध करवाई गई है. 10 से ज्यादा लोग गिरफ्तार आरपीएससी की प्राध्यापक भर्ती-2022 में लगाई गई फर्जी डिग्री के सत्यापन के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ. बताया जा रहा है कि कमला कुमारी नामक महिला अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत डिग्री जांच में फर्जी पाई गई थी. इसके बाद एसओजी ने कार्रवाई तेज करते हुए अब तक 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डीन और पूर्व प्रेसिडेंट भी शामिल हैं. सरकारी नौकरी में जमकर हुआ फर्जी डिग्री का इस्तेमाल पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यूनिवर्सिटी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से सैकड़ों डिग्रियां बेची गईं. आरोपियों ने फर्जी पीएचडी, एमए और अन्य डिग्रियां तैयार कर उसे स्टूडेंट्स को बेचा. आशंका है कि इन डिग्रियों के जरिए कई अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी भी हासिल कर ली. मामले में मास्टरमाइंड आरोपी वीरेंद्र सिंह पवार से पूछताछ में अब यह खंगाला जा रहा है कि कितने फर्जी डिग्री होल्डर है और कितने लोग नौकरियां प्राप्त कर चुके हैं. इन सभी पहलुओं पर जांच जारी है. साथ ही ऐसी कितनी प्रिंटिंग प्रेस है, जहां पर फर्जी डिग्री छपवाई गई उसकी भी लिस्ट तैयार की जा रही है.   सीएम से शिकायत करने की बात कह चुके हैं किरोड़ीलाल मीणा पहली बार नहीं है, जब किरोड़ीलाल मीणा खफा नजर आ रहे हैं. पिछले साल, वो खुद अपनी टीम के साथ गए थे और जो 200 से अधिक अभ्यर्थियों की कॉपियां सीज करके ले गए. किरोड़ी लाल मीणा ने SOG की जांच पर सवाल खड़ा करते हुए कहा था कि एसओजी तमाशा कर रही है और यह अब तमाशा नहीं चलेगा. इसकी शिकायत सीएम से की जाएगी.

थाने पर पथराव केस में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 4 और आरोपी गिरफ्तार

अलवर अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी बाइक में मॉडिफाइड साइलेंसर लगवाकर सड़कों पर रौब झाड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन अलवर के गोविंदगढ़ में यही शौक अब कई परिवारों के लिए मुसीबत बन गया है. पिछले बुधवार को एक बाइक जप्त होने से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते थाने पर पथराव और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट तक पहुंच गया. इस घटना के बाद पुलिस ने जो एक्शन लिया उसने कोर्ट का सख्त रुख इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. ताजा अपडेट के मुताबिक, पुलिस ने सनी सिंह, दीपक सिंह, दलजीत सिंह और गुरदीप सिंह नाम के चार और आरोपियों को धर दबोचा है. इन चारों को जब अनुसूचित जाति-जनजाति विशेष न्यायालय (SC/ST Court) में पेश किया गया, तो कोर्ट ने उन्हें सीधा न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया. सरकारी वकील योगेंद्र खटाना ने कोर्ट को बताया कि इन लोगों ने न केवल सरकारी काम में बाधा डाली, बल्कि वर्दी का सम्मान न करते हुए पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला भी किया. जेल की सलाखों के पीछे अब तक 12 चेहरे गोविंदगढ़ थाने पर हुए इस हमले में शामिल चेहरों की पहचान पुलिस वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर कर रही है. अब तक की कार्रवाई में कुल 12 बालिग आरोपी जेल की हवा खा रहे हैं, जबकि इस उपद्रव में शामिल एक नाबालिग को भी कानून के दायरे में लेते हुए किशोर न्यायालय बोर्ड के सामने पेश किया गया है. पुलिस का यह कड़ा रवैया उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो भीड़ का हिस्सा बनकर कानून तोड़ने की हिम्मत करते हैं. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शांति भंग करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा. एक छोटी सी गलती कैसे बन गई बड़ी आफत यह पूरा मामला महज एक मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइक को जप्त करने से शुरू हुआ था. उस वक्त भीड़ के आवेश में आकर थाने पर पत्थर फेंकना और पुलिसकर्मियों से उलझना इन युवकों के भविष्य पर भारी पड़ गया है. लोक अभियोजक योगेंद्र खटाना के अनुसार, पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों को भी कोर्ट ने जमानत न देकर सीधे जेल भेज दिया था.

फरीदकोट जेल से चल रहा था अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी रैकेट, मास्टरमाइंड सोनू निकला

  बीकानेर बीकानेर के खाजूवाला बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियों ने हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड पंजाब की फरीदकोट जेल में बंद कुख्यात तस्कर सुखविंदर सिंह उर्फ सोनू निकला है. सोनू ने जेल के अंदर से ही पाकिस्तानी तस्करों के साथ संपर्क साधा और ड्रोन के जरिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार हथियार मंगवाने का पूरा नेटवर्क तैयार किया था. आरोपी मूल रूप से श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र का रहने वाला है. तकनीकी खराबी ने फेल की पाकिस्तानी साजिश यह मामला इसी साल फरवरी का है, जब खाजूवाला के 24 KND इलाके के एक सरसों के खेत में पाकिस्तानी ड्रोन गिरा मिला था. जांच में सामने आया कि तस्करों ने हथियारों की डिलीवरी के लिए नहर के पटड़े का रूट तय किया था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण ड्रोन खेत में जा गिरा. ड्रोन के साथ सुरक्षा एजेंसियों ने 5 चाइनीज पिस्टल और 325 कारतूस बरामद किए थे. ड्रोन गिरने के कारण तस्करों की प्लानिंग फेल हो गई और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा. स्थानीय कनेक्शन की तलाश कर रही पुलिस सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की संयुक्त जांच में बॉर्डर पार से चलने वाले इस बड़े स्मगलिंग नेटवर्क की परतें अब खुल रही हैं. सुखविंदर सिंह उर्फ सोनू से पूछताछ के आधार पर उन लोगों को नामजद किया गया है, जो बॉर्डर पर ड्रोन की डिलीवरी लेने पहुंचने वाले थे. पुलिस अब उन स्थानीय मददगारों की तलाश में जुटी है, जो इस नेटवर्क को जमीनी स्तर पर सपोर्ट कर रहे थे. एजेंसियों का मानना है कि इस खुलासे से सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय अन्य तस्करों पर भी शिकंजा कसेगा.

राजस्थान में दिल दहला देने वाली घटना, कुएं में गिरने के बावजूद नवजात को नहीं आई खरोंच

तिजारा कहते हैं कि जिसकी रक्षा खुद ईश्वर करे, उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता. राजस्थान के खैरथल तिजारा  जिले के तिजारा कस्बे में मंगलवार सुबह कुछ ऐसा ही कुछ देखने को मिला. यहां एक कलयुगी मां ने अपनी ही चंद घंटों की मासूम बच्ची को पालपुर रोड स्थित एक 60 फीट गहरे कुएं में मरने के लिए फेंक दिया. लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद मासूम बच्ची को एक खरोंच तक नहीं आई. रस्सी के सहारे नीचे उतरकर युवक ने किया रेस्क्यू सुबह जब कुएं के पास से गुजर रहे ग्रामीणों ने अंदर से किसी के रोने की आवाज सुनी, तो वे ठिठक गए. जब कुएं में झांका गया तो नीचे एक नवजात बच्ची सुरक्षित नजर आई. किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि इतने गहरे और अंधेरे कुएं में गिरने के बाद भी बच्ची सही-सलामत है. ग्रामीणों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और गांव का एक जांबाज युवक रस्सी के सहारे नीचे उतरा. उसने बच्ची को अपनी गोद में लिया और सुरक्षित बाहर निकाल लाया. बाहर आते ही जब बच्ची का शरीर देखा गया, तो वह पूरी तरह सुरक्षित थी. डॉक्टर भी हैरान, अब अलवर में हो रही देखभाल बच्ची को तुरंत तिजारा के उप जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की. बीसीएमओ डॉ. मनोज यादव ने बताया कि बच्ची का जन्म करीब 24 घंटे पहले हुआ लग रहा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि प्राथमिक जांच में बच्ची के शरीर पर कोई बाहरी चोट या खरोंच के निशान नहीं मिले. हालांकि, एहतियात के तौर पर और बेहतर निगरानी के लिए उसे अलवर के जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है. पुलिस कर रही 'कलयुगी मां' की तलाश इस घटना ने जहां एक तरफ लोगों को हैरान कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ लोगों में इस कृत्य को लेकर भारी गुस्सा है. तिजारा डीएसपी शिवराज सिंह ने बताया कि अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस की टीमें इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं और स्वास्थ्य केंद्रों से हाल ही में हुए प्रसव का डेटा जुटाया जा रहा है ताकि इस मासूम को मौत के मुंह में धकेलने वालों तक पहुंचा जा सके.

NEET पेपर लीक विवाद पर गरमाई सियासत, सीकर में जांच जारी, विपक्ष ने CBI जांच की मांग की

जयपुर NEET परीक्षा की गड़बडी को लेकर खबर सुर्खियों में है. NEET परीक्षा में गेस पेपर से हूबहू सवाल मिलने का मुद्दा गरमाया हुआ है. मामले में पुलिस जांच में जुटी है. सीकर जिले में NEET पेपर को लेकर धांधली की खबर के बाद विपक्ष ने इसकी जांच CBI से कराने की मांग कर रहा है. लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बयान भी सामने आया है. उन्होंने दावा किया है कि  भाजपा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है. परीक्षा प्रणाली पर भरोसा दोबारा स्थापित सीएम भजनलाल ने कहा कि उनकी सरकार युवाओं के सपनों को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है और पिछली सरकार के समय जिस तरह से परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हुआ था उसे दोबारा स्थापित किया गया है. जयपुर में बिरला सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौर में राजस्थान का माहौल अलग था लेकिन वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने चार लाख सरकारी और छह लाख निजी क्षेत्र में रोजगार देने का वादा किया था और अब तक हजारों युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं. उन्होंने अजमेर जिले के कड़ैल गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि हाल के समय में वहां 13 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है और RAS भर्ती परीक्षा का टॉपर भी इसी गांव से निकला है. मुख्यमंत्री ने इसे युवाओं की मेहनत और सरकार की पारदर्शी भर्ती व्यवस्था का परिणाम बताया. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का फोकस युवाओं को रोजगार, कौशल और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर है ताकि राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विश्वास का माहौल मजबूत हो सके.